संदेश

मेषलग्न का स्वरूप लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मेषलग्न का स्वरूप

चित्र
मेषलग्न की चारित्रिक विशेषताएं मेषलग्न का स्वरूप रक्तवर्णो बृहद्गात्रश्चतुष्पाद्रदत्रिविक्रमी ॥४॥ पूर्ववासी नृपज्ञाति: शैलचारी रजोगुणी। पृष्ठोदयी पावकी च, मेषराशि कुजाधिषः 108 -बृहत्पाराशरहोराशास्त्रे/ 4/श्लो. 16 रक्तवर्ण, लम्बाकद, चतुष्पद, रात्रिवली, पूर्ववासी, क्षत्रिय, पर्वतचारी, रजोगुणी, पृष्ठोदय • अग्नितत्त्व, इस प्रकार मेष है, इसका स्वामी मंगल है। वृत्ताताप्रदृगुष्णशाक कामी लघुभुक् दुर्बलजानुरस्थिरधनः क्षिप्रप्रसादोऽटनः, शूरोऽगनावल्लभः। सेवाज्ञः कुनखी व्रणांकिताशिरा मानी सहोत्याग्रजः, शक्त्या पाणितलेऽङिकतोऽतिचपलस्तोये च भीरुः क्रिये॥ ॥ बृहज्जातकम् अ. 16/श्लो. 1 यदि जन्म समय में मेषलग्न हो तो जातक कुछ गोलाई लिए हुए तथा कुछ लालिमा या विशेष चमक लिए नेत्रों वाला, गर्म खाने वाला, शाक-भाजी तथा कम खाने वाला, जल्दी ही प्रसन्न हो जाने वाला, भ्रमणशील, कामुक, कमजोर घुटनों वाला, चंचल धन वाला, शूरवीर, स्त्रियों का प्रिय, सेवाकार्य को जानने वाला, नाखूनों में विकास युक्त, सिर में घाव का निशान पाने वाला, स्वाभिमा...