वृषभ लग्न का स्वाभाव सम्पूर्ण विवेचन विश्लेषण वर्णन
वृषभ लग्न के स्वाभाव चरित्र और गुण विवेचन वृषभलग्न का ज्योतिषीय विश्लेषण वृषलग्न की चारित्रिक विशेषताएं वृषलग्न का स्वरूप श्वेतः शुक्राधिपो दीर्घश्चतुष्पाच्छर्वरीवली । याम्येट् ग्राम्यो वणिग्मूमिरजपृष्ठोदयो वृपः ।।8।। -बृहत्पाराशरहोराशास्त्र/अ. 4/श्लो. 8 वृषलग्न श्वेतवर्ण, लम्बा शरीर, चतुष्पद, रात्रिबली, दक्षिण दिशावासी, ग्रामचारी, वैश्य जाति, भूमि तत्त्व, रजोगुणी, पृष्ठोदय है, इसका स्वामी शुक्र है।।8।। कान्तः खेलगतिः पृथूरूवदनः पृष्ठास्यपाश्कवेंऽड्.ि कत स्त्यागी क्लेशसहः प्रभुः ककुदवान् कन्याप्रजः श्लेष्मलः । पूवैर्धन्धुभिरात्मजैर्विरहितः सौभाग्ययुक्तः क्षमी, दीप्ताग्निः प्रमदाप्रियः स्थिरसहन्मध्याल्यसौख्यो गवि ॥ 2 ॥ बृहज्जातकम् अ. 16/श्लो. 2 वृषलग्न राशि में चंद्रमा रहने पर उत्पन्न व्यक्ति सुन्दर व दर्शनीय व्यक्तित्ववाला, विशिष्ट प्रभावोत्पादक गमन वाला, बड़े व भरे हुए मुखमंडल वाला, भारीजांघों वाला, पीठ, मुख एवं पार्श्व (पेट का किनारा) में चिन्ह से युक्त, त्यागशील. ये लोग अड़ियल और गुस्सैल होते है हर बात पे बैस करना ताना देना आदि आधी बातो पे सुनकर तर्क देना...