संवत्सर_कालात्मा_विषुवान्
संवत्सर_कालात्मा_विषुवान् १- द्वादशमास बाँटने का मूल, "विषुव बिन्दु"... बुद्धिमान लोगों में यह प्रश्न उठना स्वभाविक है कि इस ऋषि दीर्घतमा द्वारा दृष्ट सूर्य की परिक्रमा करती हुई पृथ्वी द्वारा निर्मित इस दीर्घ वृत्ताकार कालचक्र के ३६०° अंशों के ३०°-३०° अंश के बारह मासात्मक बारह विभाग इस चक्र के किस बिन्दु से करेंगे। श्रुति स्वयं इस तथ्य को स्पष्ट करती है। " तदाहुर्य्यद् द्वादशमासाः संवत्सरस्य । अथैतदहरत्येति यत् वैषुवतम् । अवरेषामेता ३ त् परेषा ३ मिति । अवरेषाञ्चैव परेषाञ्चेति ह ब्रूयात्। आत्मा वै संवत्सरस्य विषुवान् अङ्गानि मासाः । यत्र वा आत्मा तदङ्गानि । यत्रो अङ्गानि तदात्मा । न व आत्मा अङ्गानि अतिरिच्यते। न आत्मानम् अङ्गानि अतिरिच्यन्ते । एवमुहैतद् अवरेषाञ्चैव परेषाञ्च भवति ।"(शतपथ १२/२/३/६) हिंदी शब्दार्थ तद्- उस संवत्सर कालचक्र को आहुः- कहते हैं। यद्- जो संवत्सरस्य- संवत्सर के द्वादश्समासा:- बारह महीने हैं। अथ उनके विभाजन में मंगलमय एतद्- यह विषुवान् अहः- रात और दिन के समान विभाग वाला विषुव दिवस, सम्पूर्ण पृथ्वी पर अपनी इस समान मानता के कारण अति...