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पुत्र प्राप्ति ज्योतिष अनुसार गर्भाधान का तरीका

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श्रेष्ठ पुत्र या पुत्री  प्राप्ति के लिए ज्योतिष अनुसार गर्भाधान का तरीका 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼 जानिए अपनी जन्म कुंडली से गर्भाधान काल के योग—– जन्म कुंडली में त्रिकोण भावों को सबसे शक्तिशाली माना जाता है। लग्न व्यक्तित्व व व्यक्ति के स्वास्थ्य का भाव है। पंचम भाव बुद्धि, संतान तथा निर्णय क्षमता से संबंध रखता है। नवम भाव भाग्य का है। यह धर्म व चिंतन का भाव भी है। इन्हीं तीनों भावों को ‘त्रिकोण’ कहा जाता है। तंत्र-साहित्य में ‘त्रिकोण’ निर्माण तथा सृष्टि की उत्पत्ति का प्रतीक है। पंचम भाव संतान का है तथा इसका कारक बृहस्पति है। जातक के जीवन में संतान तथा भाग्य से इस भाव का गहरा संबंध है। बृहस्पति इसका कारक इसलिए है क्योंकि उसकी यहाँ उपस्थिति अपनी स्थिति व दृष्टि से त्रिकोण पर पूर्ण प्रभाव रखती है। फलित-ज्योतिष का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है ‘भावात्‌ भावम्‌’। अर्थात भाव से भाव तक। जिस भाव पर विचार करना है, उसे लग्नवत मानकर विभिन्न भावों पर विचार। पंचम भाव से पंचम अर्थात नवम भाव भी संतान विचार में महत्वपूर्ण है। यों तो संतान योग जातक की जन्मकुंडली में जैसा भी विद्यमान हो उ...