ज्योतिषीय लग्न अनुसार सिद्धइष्ट-जप-रत्न-जड़ी-रुद्राक्ष-यंत्र- मन्त्र शोध
ज्योतिषीय लग्न अनुसार सिद्ध
इष्ट-जप-रत्न-जड़ी-रुद्राक्ष-यंत्र- मन्त्र शोध
========================
इष्ट का महत्व है। हर व्यक्ति को अपने इष्ट और मन्त्र की जानकारी महत्वपूर्ण है।लग्न पंचम का नवम और नवम का नवम भाव उत्पन्न होने से पंचम भाव उत्पन्न होता है। इसी के अध्यन के ऊपर 12 लग्नो के इष्ट मंत्र, अपने इष्टमंत्रोको देखे और मंत्रो की जानकारी देखें।
1.मेष लग्न के इष्ट - मंत्र-
मेष राशि लग्न : इस राशि के जातक रक्त हरिद्रा गणेश सूर्य हनुमान भैरव नारायण भगवती तारा, नील-सरस्वती या माता शैलपुत्री की साधना करें।
मेष राशि लग्न के जातक इस मंत्र का जप 108 बार रोज करें ।
ॐ लं लम्बोदराय नमः
ॐघृणि सूर्य आदित्य श्रीं
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
ॐऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चै
ॐ हौं जूं सः
मेष लग्न राशि बीज मंत्र
ॐ ग्लौंलंरंवंदंहौंभ्रंऎंक्लींसौः |
और साथ ही ये मंत्र भी शुभकारी है
ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीनारायण नम:
भौम मंत्र- 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:'।
भौम एकाक्षरी मंत्र- ॐ ॐ अंगारकाय नम:।
सूर्य तांत्रिक मंत्र- ॐ ह्रां ह्रीं हौं स: सूर्याय नम:।
एकाक्षरी बीज मंत्र- ॐ घृणि: सूर्याय नम:
गुरु मंत्र- 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:'।
गुरु का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ ब्रं बृहस्पतये नम:'।
शनि मंत्र- 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनये नम:'।
शनि का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ शं शनैश्चराय नम:'
मेष- लग्न के लिए सूर्य, चन्द्र मंगल, गुरु,रूद्र, अरुण, वरुण शनि योग कारक ग्रह हैं। अतः इनके लिए माणिक्य, मोती, मूंगा, पुखराज, सफ़ेद पुखराज, नीलम,ओपल, फ़िरोज़ा, टाइगर, धारण कर सकते हैं और 1,2,3,5,6,7मुखी रुद्राक्ष स्वास्थवर्धक हो सकता है।
Astromechanics-7073520724
https://ecardvisit.com/card/astromechanic
===========================
2. वृषभ नम के इष्ट- मंत्र-
वृषभ राशि लग्न: इस राशि के जातक हरे हरिद्रा रक्त गणेश शिवशक्ति हरिहर दुर्गा भगवती षोडशी-श्री विद्या की साधना करें या माता ब्रह्मचारिणी की।
ॐ वं विघ्नेश्वराय नमः
ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवायै च नमः शिवाय
ॐ ऐंश्रींश्रींयै नमः
ॐ दं वैष्णवे नमः
वृषभ राशि लग्न के जातक इस मंत्र का जप 108 बार रोज करें ।
ॐ गंहौंदंदूंक्रींभ्रंऐंह्रींक्लींश्रींमहामात्रे नमः|
ॐ गौपालायै उत्तर ध्वजाय नम:
षोडशी श्री विद्या मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौ: ॐ ह्रीं श्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं सौ: ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं नम:।'
शुक्र मंत्र- 'ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:'।
शुक्र का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ शुं शुक्राय नम:'।
बुध मंत्र- 'ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:'।
बुध का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ बुं बुधाय नम:'।
शनि मंत्र- 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनम:'।
शनि का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ शं शनैश्चराय नम:'
भौम मंत्र- 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:'।
भौम एकाक्षरी मंत्र- ॐ ॐ अंगारकाय नम:।
वृषभ राशि लग्न के जातक इस मंत्र का जप
वृष लग्न के लिए शनि, शुक्र, बुध, मंगल , रूद्र, अरुण योग कारक हैं इसलिए फिरोज़ा, नीलम, हीरा, पन्ना, मूंगा, सफ़ेद मूंगा, माणक, पहनना आपके लिए शुभ है। 1,3,4,5,6,7 मुखी रूद्राक्ष धारण करें।
Astromechanics-7073520724
https://ecardvisit.com/card/astromechanic
===========================
3. मिथुन लग्न की इष्ट - मंत्र-
मिथुन राशि : इन्हें हरे श्वेत हरिद्रा गणेश विष्णु लक्ष्मी दुर्गा भैरव माता भुवनेश्वरी की या माता चन्द्रघंटा की उपासना करनी चाहिए।ॐ गौरीपुत्राय नम:।ॐ नमो भगवते गजाननाय
ॐ हंदं यंवैष्णवे नम
ॐ ह्रींश्रींक्लींदुं दुर्गाय नमः
ॐ अर्धनारीश्वराय नमः
मिथुन राशि लग्न के जातक इस मंत्र का जप 108 बार रोज करें ।
ॐ गंदंश्रींक्लींऎंसौः क्लीं कृष्णायै नम:
इसके साथ आपके शुभ ग्रहो ले मन्त्र
बुध मंत्र- 'ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:'।
बुध का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ बुं बुधाय नम:'
गुरु मंत्र- 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:'।
गुरु का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ ब्रं बृहस्पतये नम:'।
शनि मंत्र- 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनये नम:'।
शनि का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ शं शनैश्चराय नम:'
शुक्र मंत्र- 'ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:'।
शुक्र का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ शुं शुक्राय नम:'।
भौम मंत्र- 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:'।
भौम एकाक्षरी मंत्र- ॐ ॐ अंगारकाय नम:।
मिथुन लग्न के लिए बुध, शुक्र, शनि, गुरु, मंगल, अरुण योग कारक हैं इसलिए आप पन्ना, हीरा, नीलम, फ़िरोज़ा, पुखराज, सफ़ेद मूंगा, मोती धारण कर सकते हैं l 2,3,4,5,6,7,15,17मुखी रुद्राक्ष भी साथ में धारण करेंगे तो पूर्ण फल प्राप्त होता है।
Astromechanics-7073520724
https://ecardvisit.com/card/astromechanic
===========================
4. कर्क लग्न के इष्ट- मंत्र-
कर्क राशि : कर्क राशि लग्न जातकों के श्वेत हरिद्रा रक्त गणपति हनुमानजी भैरव जी कृष्ण माता कमला अथवा माता सिद्धिदात्री की उपासना करनी चाहिए।
ॐ ग्लौंगं गणपतायै नमः
ॐ हं हनुमंताय रुद्रात्मकाय नमः नमः
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं हं सौः जगत्प्रसूत्यै नमः
ॐ भ्रं भैरवाय नमः
"ॐ गंहौं हंफ्रौं दूंभ्रं ऎंह्रींश्रींक्लीं हंसौः जगत्प्रसूत्यै नमः"
इसके अलावा और कोई मन्त्र में ये भी आपके लिए अनुकूल है
ॐ हरिहरब्रम्हायैसदाशिवायैहिरण्यगर्भायै अव्यक्त रूपिणे नम:
इसके अलावा ये गृह आपके अनुकूल रहेंगे तो इनका जाप करते रहे
साथ में यह गृह बीज मंत्र
चंद्र तांत्रिक मंत्र- 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:'।चंद्र एकाक्षरी मंत्र- ॐ सों सोमाय नम:।
भौम मंत्र- 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:'।
भौम एकाक्षरी मंत्र- ॐ ॐ अंगारकाय नम:।
गुरु मंत्र- 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:'।
गुरु का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ ब्रं बृहस्पतये नम:'।
शुक्र मंत्र- 'ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:'।
शुक्र का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ शुं शुक्राय नम:'।
शनि मंत्र- 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनये नम:'।
शनि का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ शं शनैश्चराय नम:'
कर्क लग्न के लिए चन्द्र, सूर्य, मंगल, गुरु, शनि, वरुण, रूद्र, योग कारक हैं इसलिए माणक, मोती, मूंगा, पुखराज, नीलम, लाजवर्त, ओपल फ़िरोज़ा, टाइगर धारण करना शुभ रहेगा l 1,2,3,5,6,7,8,9 रुद्राक्ष भी धारण करना चाहिए।
Astromechanics-7073520724
https://ecardvisit.com/card/astromechanic
===========================
5. सिंह लग्न के ईष्ट - मंत्र-
सिंह राशि : इन्हें हरिद्रा गणेश सूर्य दुर्गा नारायण विष्णु हनुमान जी माता पीताम्बरा या माता कालरात्रि की उपासना करनी चाहिए।
ॐ लं लम्बोदराय नमः
ॐघृणि सूर्य आदित्य श्रीं
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
ॐऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चै
ॐ हौं जूं सः
सिंह राशि लग्न के जातक इस मंत्र का जप 108 बार रोज करें ।
ॐ ग्लौंरंक्ष्रौंदंह्लींभ्रंहंफ़्रॉंह्रींश्रींक्लींसौः नमः
इसके साथ नीचे दिए मन्त्र भी लाभकारी
ॐक्लीं ब्रह्मणे जगदाधारायै नम:
साथ ही साथ इन मंत्रो का भी पाठ श्रेष्ठ रहेगा
सूर्य तांत्रिक मंत्र- ॐ ह्रां ह्रीं हौं स: सूर्याय नम:।
एकाक्षरी बीज मंत्र- ॐ घृणि: सूर्याय नम:
गुरु मंत्र- 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:'।
गुरु का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ ब्रं बृहस्पतये नम:'।
भौम मंत्र- 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:'।
भौम एकाक्षरी मंत्र- ॐ ॐ अंगारकाय नम:।
बुध मंत्र- 'ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:'।
बुध का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ बुं बुधाय नम:'।
सिंह लग्न के लिए सूर्य,मंगल, गुरु, बुध, अरुण, योग कारक हैं। अतः इनके लिए माणिक्य, मूंगा, पुखराज, सुनहला,पन्ना, फ़िरोज़ा, धारण करें। 1,3,4,5,6,7 मुखी रुद्राक्ष धारण करना शुभ रहेगा।
Astromechanics-7073520724
https://ecardvisit.com/card/astromechanic
===========================
6. कन्या लग्न ईष्ट- मंत्र-
कन्या राशि : इन्हें हरे या श्वेत गणपति देवी दुर्गा भैरव शिव शक्ति माता भुवनेश्वरी या माता चन्द्रघंटा की उपासना करनी चाहिए।
ॐ वं विघ्नेश्वराय नमः
ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवायै च नमः शिवाय
ॐ ऐंश्रींश्रींयै नमः
ॐ दं वैष्णवे नमः
कन्या राशि लग्न के जातक इस मंत्र का जप 108 बार रोज करें l इसमें आपकी कुंडली के अनुसार सारी पूजा समाहित हो जाएगी
ॐ गंहौंभ्रंदंह्रींक्लींश्रींऎंसौः भुवनेश्वरयै|
और कोई मन्त्र में ये
ॐ नमो प्रीं पीताम्बरायै नम:
इसके अलावा ये गृह आपके अनुकूल रहेंगे तो इनका जाप करते रहे
साथ में यह गृह बीज मंत्र
बुध मंत्र- 'ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:'।
बुध का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ बुं बुधाय नम:'।
गुरु मंत्र- 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:'।
गुरु का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ ब्रं बृहस्पतये नम:'।
शुक्र मंत्र- 'ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:'।
शुक्र का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ शुं शुक्राय नम:'।
शनि मंत्र- 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनये नम:'।
शनि का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ शं शनैश्चराय नम:'
चंद्र मंत्र 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:'।चंद्र एकाक्षरी मंत्र- ॐ सों सोमाय नम:।
कन्या लग्न के लिए बुध, शुक्र, शनि, गुरु , चंद्र, योग कारक हैं इसलिए पन्ना, हीरा, नीलम, पुखराज, मोती, धारण करना शुभ रहेगा l 2,3,4,5,6,7,मुखी रुद्राक्ष भी धारण करे।
https://ecardvisit.com/card/astromechanic
Astromechanics-7073520724
===========================
7. तुला लग्न के इष्ट - मंत्र-
तुला राशि : इन्हें श्वेत हरे गणेश और विष्णु देव और दुर्गा भैरव श्री विद्या में माता षोडशी या माता ब्रह्मचारिणी की उपासना करनी चाहिए।
ॐ गौरीपुत्राय नम:।ॐ नमो भगवते गजाननाय
ॐ दं यंवैष्णवे नम
ॐ ह्रींश्रींक्लींदुं दुर्गाय नमः
ॐ अर्धनारीश्वराय नमः ऊँ रुद्राय नम:
तुला राशि लग्न के जातक इस मंत्र का जप 108 बार रोज करें ।
ॐगंह्रींग्रींह्रींश्रींदंलंवंयंभ्रंह्रींक्लींश्रींऎंसौःनमः ॐ तत्व निरंजनाय तारक रामायै नम:
इसके अलावा
शुक्र मंत्र- 'ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:'।
शुक्र का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ शुं शुक्राय नम:'।
शनि मंत्र- 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनये नम:'।
शनि का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ शं शनैश्चराय नम:'
बुध मंत्र- 'ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:'।
बुध का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ बुं बुधाय नम:'।
सूर्य तांत्रिक मंत्र- 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: सूर्याय नमः
चन्द्रमसे नम:'।चंद्र एकाक्षरी मंत्र- ॐ सों सोमाय नम:।
तुला लग्न के लिए शुक्र, शनि, बुध, मंगल चंद्र, योग कारक हैं इसलिए हीरा, नीलम,पन्ना, मूंगा, मोती धारण करें।
1,2,3,4,6,7,मुखी रुद्राक्ष भी धारण
https://ecardvisit.com/card/astromechanic
Astromechanics-7073520724
===========================
8. वृश्चिक लग्न के इष्ट- मंत्र-
वृश्चिक राशि : इन्हें रक्त हरिद्रा श्वेत गणपति तत्व देवता नारायण हनुमान और भगवती तारा या माता शैलपुत्री की उपासना करनी चाहिए।
ॐ ग्लौंगं गणपतायै नमः
ॐ हं हनुमंताय रुद्रात्मकाय नमः नमः
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं हं सौः जगत्प्रसूत्यै नमः
ॐ भ्रं भैरवाय नमः
वृश्चिक राशि लग्न के जातक इस मंत्र का जप 108 बार रोज करें ।
ॐग्लौंबृंगंलंरंटंहंफ्रौंभ्रंऎंक्लींह्रींस्त्रींहुंफट शिवायै नमः
ॐ नारायणाय सुरसिंहायै नम:
सूर्यएकाक्षरी बीज मंत्र- 'ॐ घृणि: सूर्याय नम:'।तांत्रिक मंत्र- 'ॐ हृां हृीं हृौं स: सूर्याय नम:'।
भौम मंत्र- 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:'।भौम एकाक्षरी मंत्र- ॐ ॐ अंगारकाय नम:।
गुरु मंत्र- 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:'।
गुरु का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ ब्रं बृहस्पतये नम:'।ॐ ऎं क्लीं श्रीं |ॐ हिरण्यगर्भायै अव्यक्त रूपिणे नम:
चंद्र तांत्रिक मंत्र- 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:'।चंद्र एकाक्षरी मंत्र- ॐ सों सोमाय नम:।
वृश्चिक लग्न के लिए सूर्य, चन्द्र, मंगल,रूद्र , गुरु योग कारक हैं इसलिए इनके रत्न माणिक, मोती, मूंगा, पुखराज,टाइगर, धारण करें। 1,2,3,4,5,7मुखी रुद्राक्ष धारण करें।
https://ecardvisit.com/card/astromechanic
Astromechanics-7073520724
===========================
9 धनु लग्न के इष्ट- मंत्र-
धनु राशि : इन्हें रक्त हरिद्रा गणेश देवी दुर्गा नारायण हनुमान माता कमला या माता सिद्धिदात्री की उपासना करनी चाहिए।
ॐ लं लम्बोदराय नमः
ॐघृणि सूर्य आदित्य श्रीं
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
ॐऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चै
ॐ हौं जूं सः
धनु लग्नराशि के जातक इस मंत्र का जप 108 बार रोज करें ।
ॐग्लौंबृंरंदंखंहौंदूंभ्रंहंफ़्रौं
ऎंह्रींश्रींक्लीं हंसौः जगत्प्रसूत्यै नमः"
इसके अलावा यदि और साधना चाहते है तो निम्न मंत्रो का पाठ करे
ॐ श्रीं देवकीकृष्णाय ऊर्ध्वषंतायै नम:
गुरु मंत्र- 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:'।
गुरु का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ ब्रं बृहस्पतये नम:'।
सूर्य तांत्रिक मंत्र- ॐ ह्रां ह्रीं हौं स: सूर्याय नम:।
एकाक्षरी बीज मंत्र- ॐ घृणि: सूर्याय नम:
बुध मंत्र- 'ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:'।
बुध का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ बुं बुधाय नम:'।
धनु लग्न के लिए गुरु, सूर्य, मंगल, बुध, वरुण, योग कारक हैं। अतः पुखराज, माणिक्य, मूंगा, पन्ना, फ़िरोज़ा, टाइगर धारण करें। 1,3,4,5,6,7 मुखी रुद्राक्ष पहनना भी आवश्यक है।
https://ecardvisit.com/card/astromechanic
Astromechanics-7073520724
===========================
10. मकर लग्न के इष्ट मन्त्र
मकर राशि : इन्हें रक्त हरे गणपति शिवशक्ति भैरव हनुमान जी माता काली या माता सिद्धिदात्री की उपासना करनी चाहिए।
ॐ वं विघ्नेश्वराय नमः
ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवायै च नमः शिवाय
ॐ ऐंश्रींश्रींयै नमः
ॐ दं वैष्णवे नमः
मकर राशि के जातक इस मंत्र का जप 108 बार रोज करें ।
ॐगंह्रौंभ्रंक्रीं ऎंह्रींश्रींक्लींहंसौः जगत प्रसूत्यै नमः |
शिव, गौरी, लक्ष्मी , काली, भैरव, शरभ, दुर्गा, कृष्ण आदि भगवन अतीव शुभ इष्ट
इसके अलावा ये ग्रहो के बीज भी फल कारक है
ॐ श्रीं वत्सलायै नम:
शनि मंत्र- 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनये नम:'।
शनि का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ शं शनैश्चराय नम:'
शुक्र मंत्र- 'ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:'।
शुक्र का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ शुं शुक्राय नम:'।
बुध मंत्र- 'ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:'।
बुध का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ बुं बुधाय नम:'।
सूर्य तांत्रिक मंत्र- ॐ ह्रां ह्रीं हौं स: सूर्याय नम:।
एकाक्षरी बीज मंत्र- ॐ घृणि: सूर्याय नम:
भौम मंत्र- 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:'।
भौम एकाक्षरी मंत्र- ॐ ॐ अंगारकाय नम:।
मकर लग्न के लिए शनि, शुक्र, बुध, सूर्य राहु, केतु योग कारक हैं अतः नीलम, हीरा, पन्ना, माणक, सुलेमानी हकीक मूंगा धारण करना चाहिए। 1,2,3,4,6,7 मुखी रुद्राक्ष धारण करें।
https://ecardvisit.com/card/astromechanic
Astromechanics-7073520724
===========================
11. कुम्भन के इष्टमन्त्र
कुंभ राशि : इन्हें हरे गणेश,विष्णुदेव शरभ हनुमान शिव् माता काली या माता सिद्धिदात्री की उपासना करनी चाहिएl
ॐ गौरीपुत्राय नम:।ॐ नमो भगवते गजाननाय
ॐ दं यंवैष्णवे नम
ॐ ह्रींश्रींक्लींदुं दुर्गाय नमः
ॐ अर्धनारीश्वराय नमः ऊँ रुद्राय नम:
कुंभ राशि लग्न के जातक इस मंत्र का जप 108 बार रोज करें ।
ॐग्लौंदंहंफ्रौंह्रींग्रींह्रींऎंक्लींश्रींक्रीं कालिकायै नमः
उपेन्द्रायै अच्युताय नम:
माता काली कामाख्या तारा या माता सिद्धिदात्री की उपासना करनी चाहिए।
शनि मंत्र- 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनये नम:'।
शनि का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ शं शनैश्चराय नम:'
शुक्र मंत्र- 'ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:'।
शुक्र का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ शुं शुक्राय नम:'।
गुरु मंत्र- 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:'।
गुरु का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ ब्रं बृहस्पतये नम:'।
भौम मंत्र- 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:'।
भौम एकाक्षरी मंत्र- ॐ ॐ अंगारकाय नम:।
बुध मंत्र- 'ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:'।
बुध का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ बुं बुधाय नम:'।
कुम्भ लग्न के लिए अरुण, मंगल गुरु शनि, शुक्र व बुध योग कारक हैं अतः कटेला फ़िरोज़ा, मूंगा, नीलम, पुखराज,सुनहला, हीरा पन्ना धारण करें। शनि द्वादषेष भी है और बुध भी अष्टमश का दोष होने से ग्रसित है इसलिए रत्नों के साथ 1,3,4,5,6,7 मुखी रुद्राक्ष धारण करें।
https://ecardvisit.com/card/astromechanic
Astromechanics-7073520724
===========================
12. मीन लग्न के इष्ट - मंत्र
मीन राशि : इन्हें श्वेत रक्त या हरिद्रा गणेश माता हनुमान कमला या माता सिद्धिदात्री भैरव कृष्ण की उपासना करनी चाहिए।
ॐ ग्लौंगं गणपतायै नमः
ॐ हं हनुमंताय रुद्रात्मकाय नमः नमः
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं हं सौः जगत्प्रसूत्यै नमः
ॐ भ्रं भैरवाय नमः
मीन राशि लग्न के जातक इस मंत्र का जप 108 बार रोज करें ।
ॐ ग्लौंगंबृंटंलंदंह्रौंहंफ़्रौंक्रींभ्रं
ऐंह्रींश्रींक्लींहंसौःजगत प्रसूत्यै नमः |
गणेश हरिहरब्रम्ह, दत्तात्रये, विष्णु नारायण, देवी पार्वती, शारदा , छिन्मस्ता, बगलामुखी, दुर्गा , वरुण देव शुभ
ॐ क्लीं उद्धृताय उद्धारिणे नम:
गुरु मंत्र- 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:'।
गुरु का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ ब्रं बृहस्पतये नम:'।
ॐ ऎं क्लीं श्रीं |ॐ हिरण्यगर्भायै अव्यक्त रूपिणे नम:सूर्य तांत्रिक मंत्र- 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:'।चंद्र एकाक्षरी मंत्र- ॐ सों सोमाय नम:।
भौम मंत्र- 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:'।
भौम एकाक्षरी मंत्र- ॐ ॐ अंगारकाय नम:।
बुध मंत्र- 'ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:'।
बुध का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ बुं बुद्धाय नमः
मीन लग्न के लिए गुरु चंद्र मंगल, बुद्ध, रूद्र, वरुण, केतु शुभ है, इनके लिए मोती, मूंगा,सफेदपुखराज, पन्ना, फ़िरोज़ा,लाजवर्त, टाइगर धारण करें। 2,3,4,5,6,7मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
https://ecardvisit.com/card/astromechanic
Astromechanics-7073520724
===========================
"एस्ट्रोलाइफ पेन्डेन्ट-रुद्राक्ष पेन्डेन्ट और ब्रेसलेट-रिंग "
"Astrolife gem-rudraksh pendent & Bracelet & ring "
(अपना luck धारण कर के चलो)
अपने कुंडली profile के अनुहार ही रत्न धारण करे लाइफ पेन्डेन्ट के रूप में
जीवन रथ न तो केवल भाग्य के पहिये से चलता न हीं केवल कर्म के पहिये से, वह सही से चलता है तो दोनों के सापेक्ष और सामजस्य के साथ सामान आवृतन और गति एवं एक दशा और दिशा से चलने पर निश्चित, ऐच्छिक विजयश्री प्राप्त करते है, ज्योतिष कर्म से विमुख होने का शास्त्र ही नहीं, जो लोग,
इसे नहीं समझते वे इसे मिथ्या मानते है जबकि ये एक कार्मिक शास्त्र है, ज्योतिष आपको सही कर्म करने को प्रेरित करता है और दशा दिशा का निर्देशन करता है, आप कर्म करिये और भाग्य साथ न दे तो भी कुछ न मिलेगा, और भाग्य चमकाए और कर्म ही न करे तो भी कुछ हासिल न होगा , इस लिए कर्म कीजिये किन्तु ज्ञान और भाग्य को धारण करके इसी भाग्य रुपी प्रकाश रश्मियों से त्वरित लाभ के लिए प्रकृति देवी ने रत्न बनाये है उन्हें जन्म कुंडली के सही निर्धारण, और सही गणना से एकसाथ धारण करने पर लाभ की मात्रा और सफलता की सम्भावना अत्यधिक बढ़ जाती है l
मित्रो, Astro Mechanics, ke astro gems आपके लिए लाया है उचित मूल्यों में गुणकारी लाभकारी और अच्छे रत्नो का एक शक्ति शाली, पुस्टिवर्धक पेन्डेन्ट जिसमे आपकी कुंडली के सभी ग्रहो को देख कर उनकी स्थिति अनुसार रत्न कैलकुलेशन की जाती है और त्रिधातु में निर्माण कर scientific charging करके आप को धारण करवाया जाता हैl अपने स्वजनों, रिश्तेदारों, संबधी, प्रियजनो ईस्ट मित्रो के शुभ और संपन्न हेतु किसी विशेष अवसर पर भेट स्वरुप या उपहार स्वरुप भी दे सकते है l
इस पेन्डेन्ट में astro-gemology का प्रयोग होता है इनमे 5 रत्न होंगे जो चारो पुरुषार्थ धर्म अर्थ काम मोक्ष के दाता होंगे और पांचवा रक्षा हेतु होगा
इसको धारण करने के पश्चात कोई रत्न धारण की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी, आधुनिक काल में उपाय हो न हो, व्यस्तता होने पर और काम काज में फसे होने के कारण उपाय की अपेक्षा, ऊर्जा राशिमियो से सिंचित, रत्न मणि, कवच की तरह रक्षण, और जीवन अमृत उर्जाओ का पोषण करती है, जीवन बीमा की तरह पूरे जीवन के समग्र विकास हेतु आपको ग्रहो की ऊर्जा से चार्ज और ताकत देने हेतु, कवच की तरह, प्रस्तुत है
"लाइफ पेन्डेन्ट"
life pendent
ये पूर्ण वैज्ञानिक है कोई अन्धविश्वास नहीं, इन्ही में राशि, सूर्य, चंद्र लग्न, नवमांश, एवं चलित कुंडली, षड्वर्ग, अष्टक वर्ग षड्बल गृह मैत्री इत्यादि की गणना कर व्यक्ति के जन्म कुंडली विश्लेषण में ग्रहों की कमजोर और बलवान दशा की गणना करने के बाद उचित रत्न अनुकूल रत्न पहनाये जाते है l
रत्नो से भाग्य नहीं बदलते आप बदलते है, विज्ञानं की दृस्टि से प्रकाश की ये रंग BVIBGYORB पैटर्न और उसके 3,62,880 Combination के पत्थरो और पदार्थो से हमारे 7 चक्रो पर असर पड़ता है फिर कोई ये 9 रंग के 9 ग्रहो के पत्थर से कैसे है उपचार कर सकता है, क्युकी कही युक्ति के गृह छबदम गृह कही बलि गृह, संधिगृह इत्यादि अनेको स्थिति उत्पन्न होती है कुंडली में गृह किस स्थान पर है राशि पर है कौन उसे देख रहा है षड्बल प्रभावी कुंडली आरूढ़ लग्न और वर्गोत्तम, षड्वर्ग अवलोकन निरिक्षण इत्यादि कई मापदंडो से रत्न धारण होते है आँख मीच कर नहीं
भ्रान्ति और दोष जो गलत है :
1) राशि रत्न ही श्रेष्ठ
2) लग्न भाव , पंचम भाव और नवम
3) बिना सलाह के नीलम मूंगा न पेहने
4) समग्र दृस्टि का अभाव
5) रत्नो से भाग्य बदलेगा
6) hit & trial सभी पहन के देख ले तुक्का तो लगेगा ही
7) अधकचरा ज्ञान और बिना रत्नो की कलर कॉम्बिनेशन जाने पहना
8) नकली गृह निर्माण के ज्ञान का आभाव
आयुर्ज्योतिषीय रत्न के कर्म संबंधी लाभों का अनुभव करें
लग्न के अनुसार रत्न रुद्राक्ष का धारण कैसे करें
रत्न और रुद्राक्ष पर ग्रहों के साथ देवताओं का वास माना जाता है। लग्न अर्थात जीवन, आयुष्य, आरोग्य, बल, बुद्धि, विद्या, प्रसिद्धि, अतः लग्न के अनुसार कुंडली के भाव के स्वामी ग्रह कभी अशुभ फल नहीं देते, अशुभ स्थान पर रहने पर भी मदद ही करते हैं।
लग्न के लिए कुछ ग्रह ऐसा होता है जो योग कारक होने के कारण शुभ फलदाई होता है। यदि ऐसा ग्रह कुंडली में बलवान अर्थात् उच्चराशिस्थ, स्वराशिस्थ् का या वर्गोत्तमी होकर केन्द्र या त्रिकोण भाव में शुभ ग्रह के प्रभाव में स्थित हो व इस पर किसी भी पाप ग्रह का प्रभाव न हो तो यह अकेला ही जातक को उन्नति देने में सक्षम होता है,अतः इसका रत्न रुद्राक्ष धारण करना विशेष शुभ फलदाई तथा चमत्कारी प्रभाव देने वाला होगा,परन्तु यदि यह अशुभ भाव में अशुभ ग्रहों के प्रभाव से ग्रस्त हो तो जातक इस योगकारक ग्रह के चमत्कारी प्रभाव से वंचित रह जाता है। ऐसी स्थिति में इसकी अशुभ भाव जनित अशुभता को नष्ट करने हेतु इसके लिये साथ में रुद्राक्ष को धारण किया जाना चाहिए।
आयुर्ज्योतिषीय रत्न रुद्राक्ष के कर्म संबंधी लाभों का अनुभव करें
रत्नों में से प्रत्येक एक विशेष ग्रह के साथ रंग ऊर्जा तरंग मेल खाता है। प्रत्येक ग्रह हमारे जीवन में एक निश्चित प्रभाव डालता है। रत्न का इतिहास कई हजारों साल पीछे चला जाता है, फिर भी हमने इस बात पर शोध किया है कि मानव शरीर पर रत्नों का सकारात्मक प्रभाव क्यों और कैसे पड़ता है।
रत्न रुद्राक्र पहनने के फायदे
ज्योतिषीय रत्न रुद्राक्ष पत्थर के गहने, चाहे वह बहु-मणि चूड़ी , अंगूठी , कंगन, पेंडेंट या हार के रूप में हो , जब सही ढंग से बनाया और पहना जाता है, तो व्यक्ति की मनोवैज्ञानिक प्रवृत्ति, शारीरिक स्वास्थ्य, व्यावसायिक मामलों और रिश्तों को लाभ पहुंचा सकता है, नकारात्मक परिस्थितियों और विपरीत स्थितियों को कम से कम करने में मदद करता है।
परमहंस योगानंद ने अपनी पुस्तक " द डिवाइन रोमांस " में लिखा है:
"इस युग में, मनुष्य विज्ञान के विद्युत या प्रकाशीय विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र में महान बढ़त बनाएगा।
हमारा ज्योतिष शास्त्र और रत्न विश्लेषण एक महान विज्ञान है
आयुर्ज्योतिषीय रत्न, विशेष रूप से जब लाइफ पेन्डेन्ट के 5-रत्न पेन्डेन्ट में संयुक्त होते हैं, तो शरीर के पाचो तत्वों को पुस्ट करते है और ऊर्जा केन्द्रो और चक्रो को शोधित स्वच्छ करते है और अधिक क्रियाशील बनाते है जो सौर एवं चंद्र प्रकाश से अपनी अपनी रंग की ब्रम्हांडीय ऊर्जा किरणों रश्मियों को अवशोशित करती है जिससे हमारे आत्म करक ग्रहो की ऊर्जा को ज्यादा को बल मिलता है और पिछले नकारात्मक कर्मों के अप्रिय प्रभावों को कम और कम करते है,रत्नो का सही चयन रत्न अपनी अपनी किरण ऊर्जा का एक विशिष्ट शक्तिशाली किरणों ऊर्जा मिश्रित कवच निर्मित करते है।
लाइफ पेन्डेन्ट या कैसे काम करता है?
यह एक वैदिक ज्ञान आधारित एक शोधन है जो एक ऐसे पेन्डेन्ट या ताबीज़ का निर्माण करता है जो इन सौम्य ग्रह विकिरणों को बढ़ाएगा और पूरक करेगा जो बदले में किसी के कर्म पैटर्न को बढ़ा सकते हैं।यह भौतिक विज्ञान के प्रकाश अवशोषण और परावर्तन के सिद्धांत पर कार्य करता है, प्रकाश पुंज सूर्य की और चंद्र की प्रकाश रश्मियों में 12 रंग कही गई है, जिस वस्तु पर ये प्रकाश पड़ता है वो या तो उसको अवशोषित करेगी या परावर्तित करेगी, जो अवशोषित होगयी वो नहीं दिखेगी, और जो अवशोषित न हो उसे वो रत्न परावर्तित करता है इस प्रकार सही गणना से रत्न के रूप में हम उन अमृत रश्मियो को धारण करते है
और अदृश्य आवृत्तियों की प्रकाश तरंगो को एक क्रिस्टल, रत्न, अधिक तरंगो को अवशोषित करता है , प्रकाश तरंगों को प्राप्त करने में इतना सामंजस्यपूर्ण रूप से सक्षम होता है कि उसे इन सौर प्रकाश के 12 रंगो की रश्मि तरंग आवृत्तियों को प्राप्त करने के लिए बैटरी की आवश्यकता नहीं होती है।
हमारी 5-रत्न लाइफ पेन्डेन्ट आपके विद्युतीय प्रकाश के शरीर में पुस्टि बिजली और अमृत प्रकाश और आवृत्ति को शामिल करते हैं, आवृत्ति तरंगों के आयतन और ग्रहणशीलता को बढ़ाते है l
आयुर्ज्योतिषीय रत्नों का विज्ञान उन प्रकाश तरंगो पर आधारित है जो हमें घेरने वाली सर्वश्रेष्ठ और सबसे सौम्य विकिरणों को स्थानांतरित करने की क्षमता पर आधारित हैं। प्राचीन प्रबुद्ध ऋषियों ने सोचा कि कैसे व्यक्तियों को हानिकारक विकिरणों से बचा सके।
" एक क्रिस्टल रेडियो रिसीवर,
पिछले 13 वर्षों से हम उच्च गुणवत्ता के क्रिस्टल- और शुद्ध धातु-आधारित गहनों पर शोध कर रहे हैं, जो हमें घेरने वाले आवश्यक ब्रह्मांडीय आवृत्तियों को पूरक और आकर्षित करते हैं। यह एक वैज्ञानिक तथ्य है कि जहाँ भी बिजली होती है वहाँ आवृत्ति होती है। लेकिन जब हमारे चुंबकीय आवृत्ति पैटर्न कर्म कारणों से कमजोर या असंतुलित होते हैं, तो व्यापक समस्याएं कई मायनों में विकसित होती हैं। एक विस्तृत सतह के तरीके से त्वचा को छूने वाले सही सात्विक रत्न नाटकीय रूप से हमारे इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक फ़्रीक्वेंसी-आधारित दिमाग और शरीर को इस तरह से बढ़ावा देते हैं कि हमारे जीवन में तामस परेी और ऋणात्मकता को गायब करते हैं। अंधेरा कमरे में नहीं रह सकता जब प्रकाश प्रवेश करता है। और जब हमारे व्यक्तिगत चुंबकत्व को बढ़ाया जाता है, तो कई क्रियात्मकता, एकाग्रता और कौशल से कर्म को योग की स्थिति परिवर्तित करता है जिससे श्रेष्ठ फल प्राप्ति और मनोनुकूल स्थिति के प्राप्ति के अवसर में अपार वृद्धि
होती है
रत्न और रुद्राक्ष धारण करने के लिए हमेशा कुंडली का सही निरीक्षण बेहद जरूरी है। यदि कुंडली के सही विश्लेषण के बिना ही रत्न धारण किया जाये तो यह जातक के लिए नुक़सानदेह हो सकता है। इसकी लागत मूल्य, कुंडली आंकलन, अवलोकन निरिक्षण, शोधन, गृह निरूपण से निर्माण और निर्माण से लेकर आप तक पोहोचने का सेवा शुल्क,
5000₹(केवल रत्न पेन्डेन्ट) और ,7500₹(रत्न और रुद्राक्ष सहित )
रखा गया हैl
अपनी जन्म कुंडली से जाने आपके, वर्ष का वर्षफल, ज्योतिष्य रत्न परामर्श, ग्रह दोष और उपाय, लग्न की संपूर्ण जानकारी, लाल किताब कुंडली के उपाय, और अन्य जानकारी, अपनी जन्म कुंडली बनाने के लिए 7073520724 कॉल या वात्सप्प टेलीग्राम करें।
नोट1: पेन्डेन्ट में रत्न की श्रेणी स्टैण्डर्ड होंगे l किन्तु अधिक असरकारक ताकतवर रत्न अमूल्य बहुमूल्य और कीमती होते है क्योकि उनकी कीमत उनकी गुवत्ता या क्वालिटी, सफाई और रंग वजन आकर इत्यादि से होती है सो एक बार सामान्य पेन्डेन्ट धारण करके लाभ ले, फिर भविष्य में उच्च श्रेणी के अत्यधिक एवं अतिशीघ्र प्रभावी रत्न का लाभ भी हमारी तरफ से उपलब्ध है, जिनका लागत मूल्य मापदण्डानुसार प्रतिस्पर्धात्मक दरों पर उपलब्ध होगा l
नोट2:
कोई अगर पेन्डेन्ट नहीं पहना चाहता तो उसके लिए ब्रेसलेट भी बनाते है, और अंगूठी भी है, ये पेंडंट, रक्षक, पोषक, वर्धक, सुखदायक, धन अन्न लक्ष्मी काली सरस्वती देव पितृ की कृपा बरसायेगा और आपको संतुलित कर समाज निर्माण का सहयोग करेगा साथ ही ये रक्षा कवच, भाग्य वृद्धि और जीवन के एक साथ उदित होते हुवे आरोग्य भाग्य कर्म यश धन सुख काम और मोक्ष इत्यादि के एक ही साथ संतुलित और गतिशील समग्र विकास के लिए सर्व श्रेष्ठ, इसको धारण करने के बाद जीवन में कोई रत्न की आवश्यकता नहीं क्युकी जितने भी काम के रत्न है उनका एक समूह ही आपके वक्ष स्थल पे है और वक्ष पे किसी वास्तु को धारण करना उसको लग्न में पोहोचना होता है l दूसरा ये पेन्डेन्ट सिर्फ आपकी कुंडली के हिसाब से बनेगा तो ये प्राइवेट और पर्सनल होगा निर्माण में 5-7 दिन का समय लगेगा
आर्डर स्वीकृति हेतु
अपना नाम, पता, जन्मदिन, जन्मदिनांक, जन्मस्थान, जन्मसमय
+91-7073520724 पर वाट्सएप्पआर्डर, मैसेज या फ़ोन करने हेतु बुक करवावे, बुकिंग के लिए 100% एडवांस आवश्यक है, इस हेतु
शुल्क दक्षिणा जमा हेतु निम्न विवरण
नाम से : Pankaj Bissa
द्वारा
पेटीम No: 7073520724
अथवा
गूगल पे : 7073520724
अथवा
बैंक खाते में
नाम से : पंकज बिस्सा
A/c no.: 661010100017325
IFSC Code: BKID0006610
MICR Code: 342013002
https://ecardvisit.com/card/astromechanic

