आधुनिक ज्योतिष में प्लूटो विशेषांक

आधुनिक ज्योतिष में प्लूटो विशेषांक
जिस प्रकार अरुण शनि सरीखा, वरुण भारतवासियों के वरुण देवता सरीखा, तथा राहु केतु का धर्म दैत्य या असुर धर्म का माना है, उसी भांति यम या प्लूटो भीतरी दुनिया (भूमिगत गतिविधि) अथवा पाताल लोक का स्वामी तथा मृत्यु के देवता यम सरीखा है। गुप्त रूप से तोड़ फोड़, आतंकवाद विध्वंस कारी गतिविधियां यम, से प्रभावित हुआ करती हैं। बहुधा सभी कार्यों का अन्तिम परिणाम बताने की सामर्थ्य इस ग्रह में दीख पड़ती है इसी कारण पश्चिमी विद्वान ज्योतिषी इसे अष्टमेश कहते हैं। यम पुरानी व सड़ी गली व्यवस्था को पूर्णतः ध्वस्त कर नयी व्यवस्था के लिए स्थान व अवसरों का सृजन करता है। तीन सबसे बाहरी ग्रहों की खगोलीय खोज – यूरेनस, नेपच्यून और प्लूटो ने हमारे सौर मंडल की सीमाओं का विस्तार किया है। पश्चिमी ज्योतिष, जो भारतीय ज्योतिष से अधिक आधुनिक है, उसने इन ग्रहों को अपनी ज्योतिषीय गणना में शामिल किया। भारतीय ज्योतिष के कुछ वर्ग भी इन तीन बाहरी ग्रहों पर विचार करते हैं। आधुनिक ज्योतिष में यूरेनस, नेप्च्यून और प्लूटो की अहमियत को सहर्ष स्वीकार करते हुए ज्योतिषविद सटीक भविष्यवाणी में इनका उपयोग अब किया करते हैं। हालांकि, पश्चिमी और भारतीय ज्योतिष के तरीके में यूरेनस, नेप्च्यून और प्लूटो की व्याख्या करने के तरीके में कुछ अंतर हैं।प्रस्तुत आलेख में आधुनिक ज्योतिष में  प्लूटो की अहमियत पर प्रकाश डालते हुए यह बताया गया है कि कैसे भारतीय ज्योतिष इस ग्रह की व्याख्या करते हुए मानव भाग्य का आकलन या तरजुमा करता है।
प्लूटो और ज्योतिष:
उसका रंग काला, नारंगी और सफ़ेद का मिश्रण है। कहा जाता है के जितना अंतरप्लूटो के रंगों के बीच का है  इतना सौर मण्डल की बहुत कम वस्तुओं में देखा जाता है, यानि उनपर रंग अधिकतर एक-जैसे ही होते हैं  अंडरवर्ल्ड गतिविधियों का मालिकप्लूटो (Pluto) को 1930 में खोजा गया था। 12 राशि चक्रों में भ्रमण को पूरा करने में इसे 246 साल लगते हैं। बड़े विनाश की घटनाएं प्लूटो के कारण होती है। यह एक बहुत ही दिलचस्प ग्रह है। अंडरवर्ल्ड गतिविधियां, धोखाधड़ी और घोटाले, राजनीतिक समस्याएं, पर्दे के पीछे की गतिविधियों इत्यादि का यह कारक है। प्लूटो यात्रा प्रवास, सफर, कई प्रकार की खोजों और आविष्कारों से भी संबंधित है।
विज्ञान के अध्ययन का प्रोत्साहक
प्लूटो किसी भी क्षेत्र में व्यक्ति को मास्टर बना सकने की काबिलीयत रखता है। प्लूटो प्लेनेट वैज्ञानिक कार्य और अनुसंधान विकास को प्रोत्साहित करता है। प्लूटो अवचेतन बल और सतह के नीचे पड़ी चीजों का प्रतीक है। प्लूटो नवीनीकरण और पुनर्जन्म से भी वास्ता रखता है।
मृत्यु और विनाश का प्रतीक है प्लूटो
नये मूल्य, मान्यताएँ, विचारधारा तथा जीवन शैली का प्रतीक यम ग्रह है। कभी पुराने प्रतीकों को नष्ट किए बिना नए लक्ष्य तक पहुँचना असंभव होता है। अतः गुप्त रूप से तोडफोड़ करने में ये संकोच नहीं करता। भारतीय मनीषियों ने इसे भूमिगत गुप्त संगठनों की विध्वंसकारी आतंकवादी गतिविधियों का स्वामी माना है। ये तो मृत्यु के देवता यम सरीखा है जो पुरानी सड़ी-गली व्यवस्था को पूर्णतः ध्वस्त कर नयी व्यवस्था के लिए स्थान व अवसरों का सृजन करता है। पश्चिमी विद्वानों ने सभी कार्यों का अन्तिम परिणाम बताने में सक्षम यम (प्लूटो) को अष्टमेश कहा है। ये रक्त वर्ण, बहुत क्रूर स्वभाव ग्रह है। देह में पुरानी त्वचा तथा अस्थि-पंजर इसके अंग, मूंगा रत्न तथा मंगल वार को इसका दिन माना गया है। जंग खाया लोहा अथवा धातु का कबाड़ या उत्खनन से प्राप्त धातु की वस्तुओं को यम की धातु माना जाता है, प्राचीन इमारतों के खंडहर, भग्न मूर्तियों के अवशेष, नष्ट प्रायः वस्तुएँ, विस्फोटक पदार्थ, विष, तैलीयद्रव, बाण, भाले या अन्य शस्त्रास्त्र यम के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। पुरानी वस्तुओं को नष्ट करने में संलग्न यम एक राशि पार करने में लगभग 21 वर्ष का समय लेता है। प्लूटो दुनिया में कई विनाशकारी चीजों का शासक भी है। यह वृश्चिक चिह्न को नियंत्रित करता है। यह एक विस्फोटक ग्रह है। प्लूटो भूकंप, ज्वालामुखी से भी जुड़ा है। तो, कुल मिलाकर प्लूटो मृत्यु, विनाश, धन के बारे में बताता है। यह सेक्स, आतंकवाद, गूढ़ता और पुनरुत्थान को दर्शाता है। प्लूटो समस्याओं से निपटने के लिए नई तकनीकों का भी प्रतिनिधित्व करता है। यदि प्लूटो कुंडली के लग्न यानी पहले भाव में स्थित है, तो जातक लंबे समय तक अपनी आदतों को नहीं बदल पाएगा। यह व्यक्ति को बहुत कठोर और जिद्दी बना सकता है।प्लूटो ग्रह का प्रभाव संगठित करने, आपस में एकत्रित करने, सहकारी समिति बनाने, भलाई के काम करने, रेडियो, टेलीविजन, परमाणु शक्ति, रेडियो चलाने वाला काम करने, सामाजिक कार्य कर्ता, चिकित्सा क्षेत्र के अन्दर एक्सरे का काम करने, मशीनों द्वारा शरीर की जांच करने, परमाणु सुरक्षा विशेषज्ञ का काम करने, पाइप फ़िटिंग का काम करने, ग्रह उत्पत्ति का विश्लेषण करने, पुलिस के सिपाही के रूप में काम करने, सेहत सुधारक, टेलीविजन मैकेनिक, रडार मैकेनिक, मशीनो के प्रति खोज करने, जासूसी करने, एक साथ मिलकर काम करने वाला, बड़े समूह को खाना खिलाने और संभालने का काम करने वाला, भ्रमित व्यक्तियों को सही रास्ता देने वाला, जो शक्ति काम करे पर दिखाई न दे, उन रहस्यों को जानने वाला, चुम्बकीय शक्ति को पहिचानने वाला, रेडियो फ़्रीक्वेंसी और कार्बनिक कोइलिंग के बारे में ज्ञान रखने वाला, रेडियो ट्यून करने वाला, बडी परियोजनाओं को सम्भालने का काम करने वाला, उपकरणों को वृहद रूप में तैयार करने और उनका रख रखाव करने वाला जातक प्लूटो के अधिकार क्षेत्र में आता है। वर्तमान में मोबाइल कम्पनियां, सेटेलाइट कम्पनियां, और बडी कम्पनियों के रूप में भारत की ट्राई जैसी कम्पनियां प्लूटो के कारण ही फ़ल फ़ूल रही हैं। प्लूटो का प्रभाव व्यक्तिगत रूप में मस्तिष्क में उन संवेदनाओं को एकत्रित करने और जरूरत पडने पर उनको प्रयोग करने के प्रति मिलता है, जिन्हे कभी भी देखा नहीं गया, लेकिन महसूस किया गया, जिस प्रकार से बिजली के तार में विद्युत ऊर्जा तो प्रवाहित होती है, लेकिन उसे प्रयोग तो किया जा सकता है, लेकिन देखा नहीं जा सकता है, रसायन में पानी को तो देखा जा सकता है, लेकिन पानी के अन्दर छिपी मीठी या नमकीन शक्ति को देखा नहीं जा सकता है, महसूस किया जा सकता है। प्लूटो से शक्तिवान व्यक्ति भौतिकता में उसी प्रकार से होता है, जैसे एक बिजली का ट्रांसफ़ारमर, बडी शक्ति के रूप में वह ग्यारह हजार वोल्ट की विद्युत शक्ति अपने अन्दर समाहित करता है, और जरूरत के मुताबिक आगे भी देता है लेकिन जमा करते वक्त और देते वक्त वह गर्म जरूर होता है, उसी प्रकार से प्लूटो से शक्तिवान व्यक्ति अपनी साधनाओं से अपनी शिक्षाओं से अपने मानसिक और शारीरिक प्रयोगों से अपने योगबल से अपने तपबल से शक्तियों को अपने में एकत्रित करता है और उनका प्रयोग जरूरत के वक्त करता है लेकिन इस जमा करने और देने के वक्त उसके अन्दर जो ताप उत्पन्न होता है, वही व्यक्ति का अहंकार या ईगो कहलाता है। इसी प्रकार से व्यक्ति जब अपने अन्दर उस शक्ति को जमा कर लेता है, जो एक बहुत बड़े समूह को भी जरूरी होती है, जैसे एक अध्यापक का ज्ञान, वैज्ञानिक का शोध आदि। प्लूटो व्यक्ति के अन्दर उन शक्तियों को भी देता है जिनके द्वारा वह आगे की संतति को उत्पन्न करता है, प्लूटो की श्रेष्ठतम महत्ता आत्मीय शक्तियों को प्राप्त कर लेना, सबसे खराब महत्ता ऊंचे विचारों और शक्तियों को नीचे गिराना, जैसे एक साधक अपनी शक्तियों को पहले तो जमा कर लेता है, लेकिन मोह या लोभ के वशीभूत होकर लोगों को गलत राय देकर या पराशक्ति को धन के रूप में तौलने पर उस श्रेष्ठ शक्ति को गिराने की कोशिश करता है, और कुछ ही दिनों के अन्दर कानून या किसी सिरफ़िरे व्यक्ति के द्वारा बदनाम कर दिया जाता है, अर्थात ऊंची फ़्रीक्वेंसी को नीचे गिराने का काम करना, और प्लूटो की महान विचार श्रंखला वाला जातक अन्तराष्ट्रीय पालन पोषण की भावना रखता है।
यम ;प्लूटोद्ध नई विचार धाराए नयी मान्यताएं नयी जीवन शैली का प्रतीक है। ये मनुष्य की इच्छाओं को आदर्शों या लक्ष्य तक ले जाने के लिएए आतंकवाद या गुप्त तोड़ फोड़ का सहारा लेने में हिचकता नहीं।
यम ;प्लूटोद्ध 12ण्1 खगोलवेत्ताओं द्वारा खोजा गया सौरमंडल का अंतिम ग्रह है प्लूटो। इसको क्लायडे-विलियम टौमबॉध ने 1930 सन् में खोजा था। इसका एक ही चंद्र (उपग्रह) ज्ञात है। यह उपग्रह क्योंकि नेप्च्यून की कक्षा को अन्तर्विभाजित करता है। अतः माना जाता है कि यह नेप्च्यून से निकला उपग्रह है जो प्लूटो के गुरुत्वाकर्षण में फंस जाने से प्लूटो की परिक्रमा करता है। सम्भावना है कि प्लूटो का कोई और उपग्रह नहीं है।
      प्लूटो की सूर्य से दूरी 3,670,000,000 मील (39.494) है। जबकि पृथ्वी से यह 28.7294 दूर है। इसका डायामीटर/व्यास 3,000 कि.मी. अथवा 1,800 मील है। अतः यह प्रधान नवग्रहों में सबसे छोटे ग्रह बुध से भी छोटा है। इस ग्रह को सूर्य की परिक्रमा करने में 247.7 वर्ष (पृथ्वी के) लगते हैं। यानी इसका एक वर्ष पृथ्वी के 247 वर्षों से भी अधिक है। जबकि प्लूटो का दिन पृथ्वी के 6 दिन 9 घंटे के बराबर है। प्लूटो का तापमान -230 सेल्सियस है। अतरू यह सौरमंडल का सर्वाधिक ठंडा ग्रह है। जबकि प्रधान नवग्रहों में शनि (-180 सेल्सियस) सर्वाधिक ठंडा माना जाता है। इस ग्रह (प्लूटो) का द्रव्यमान पृथ्वी की तुलना में -0.002 से 0.003 गुना माना जाता है।
      प्लूटो पर सूर्य प्रायः 6) घंटे (पृथ्वी के) चमकता है। प्लूटो पर हवा नहीं है। यह पिंड गैसीय न होकर चट्टानी है। सूर्य इस ग्रह से एक तारे की भांति दिखाई पड़ेगा, ऐसा वैज्ञानिक मानते हैं। प्लूटो के वायुमंडल में मिथेन गैस ही उपलब्ध होती है। यदि ठंड तथा ऑक्सीजन का प्रबन्ध कर लिया जाए तो अंतरिक्ष यात्री प्लूटो पर भी उतर सकते हैं, ऐसा माना जाता है। सूर्य तथा बड़े ग्रहों पर हाइड्रोजन का अस्तित्व है। परन्तु सभी छोटे ग्रह हाइड्रोजन से वंचित हैं। समस्त ग्रहों के वैज्ञानिक विवेचन से यह तथ्य भी उभरकर सामने आता है।
प्लूटो -यह एक राशि में 21 वर्ष लगभग रहता है तथा कुण्डली का एक चक्र 242 वर्षों में पूर्ण करता है। यानी जातक के जीवन में आधा चक्र भी नहीं लगा सकता। चैथाई चक्र से जरा ही अधिक लगा सकता है।
      पाश्चात्य ज्योतिषाचार्यों ने प्लूटो के गुण-स्वभाव को मंगल की भांति माना है। अतः मंगल की राशियां मेष, वृश्चिक (1, 8) ही इसकी स्वराशियां मानी जाती हैं। प्लूटो पुरानी परम्पराओं, विचारों को तोड़ने का कारक है तथा शरीर व आत्मा के सम्बन्ध विच्छेदन का कारक है। दीर्घसूत्री योजनाएं, लम्बे चलने वाले गुप्त कार्य, षड्यन्त्र, विनाशक किन्तु उद्धारक कार्य भी इसी ग्रह के प्रभाव क्षेत्र में माने गए हैं। अंतरात्मा का पुनरुत्थान प्लूटो के ही प्रभाव क्षेत्र में है। गर्भाधान तथा जीवन एवं मृत्यु के गूढ़ सम्बन्धों का कारक भी प्लूटो है।
      प्लूटो शुभ स्थिति में हो तो जातक महान कार्य करने में सक्षम होता है तथा ऐसा जातक इतिहास में दीर्घकाल तक प्रभाव छोड़ जाता है। खानों, भूमिगत, गुफाओं आदि से सम्बन्धित कार्य प्लूटो से जुड़े माने गए हैं। जासूस, अनुसंधानकर्ता, शारीरिक व मानसिक चिकित्सा का कार्य भी प्लूटो के क्षेत्र में माना गया है। प्लूटो अशुभ हो तो जातक उग्रवादी, गुप्त अपराधों में लिप्त, माफिया आदि गिरोह से जुड़ा हो सकता है।
यम मृत्यु का देवता रू पुरानी सड़ी गली व्यवस्था को मिटाकर नई व्यवस्था के लिए स्थान व अवसर बनाने वाला यमए मृत्यु का देवता सरीखा है। गुप्त रूप से तोड़.फोड़ए आतंकवाद तथा अन्डरवर्ल्ड की विध्वंसकारी गतिविधियाँ कदाचित् यम से प्रभावित होती हैं। विद्वानों ने इसे प्रचंडए उग्र तथा सभी कुछ नष्ट कर पुनर्निर्माण व परिवर्तन देने वाला ग्रह माना है। परिवर्तन का अग्रदूत माना है। वर्ष 1930 में जब यम ग्रह की खोज हुईण् वह 12ण्2 परिवर्तन का अग्रदूत रू शोधकर्ताओं ने यम को प्रगति तथा परिवर्तन तथा विभिन्न संस्कृतियों के परस्पर मिलन का समय था। दूरदर्शन तथा आणविक शक्ति की खोज ने सभी परंपरागत समीकरण उलट दिए थे
सामूहिक प्रयासरू लक्ष्य व उद्देश्य प्राप्ति के लिए किए जाने वाले सम्मिलित व समन्वित प्रयास का कारक यम को माना गया है। यम का सम्बन्ध शुभ ग्रहों से होने परए सभी प्रयत्न व प्रयास लोककल्याण के लिए होते हैं। इसके विपरीत पाप ग्रहों का अशुभ प्रभाव यदि यम पर हो तो विभिन्न दलों में फूट पड़ती है। समाज में अनावश्यक तनाव व बिखराव आता है।
विष चिकित्सा रू यम ग्रह बहुधा अवचेतन मन को प्रभावित करता है। विषय वस्तु को ग्रहण करने की मानसिक क्षमताए रासायनिक शोधा क्रियाएँ तथा विष प्रयोग से उपचार आदि कार्य यम से प्रभावित होते हैं।
विनाश व पुनर्निर्माण रू सामूहिक विनाश तथा घनी बस्तियों को मिटाकर नवनिर्माण का कार्य यम का कारकत्व है। समाजवादी प्रजातंत्र के लिए चलने वाले आन्दोलनए सामंतवाद या पूंजीवादी व्यवस्था के प्रति आक्रोश तथा विद्रोह में यम की भूमिका प्रमुख होती है। कभी गुप्तचरी तथा गुप्त रूप से प्रहार कर शत्रु की हानि करना भी यम का स्वभाव है।
तानाशाही प्रवृत्ति रू यदि किसी राजा के लग्न में यम स्थित हो तो वह मिथ्याचारीए कपटी तथा अविश्वसनीय होता है। सत्य को छिपा करए मिथ्या प्रचार द्वाराए जन समर्थन पाने का प्रयास करता है। वह निरंकुशए सत्तालोभी तथा तानाशाह होता है।
जनता का प्रतिनिधि रू विद्वानों ने यम को जनताए जन आंदोलन तथा जनता के समर्थन से चलने वाले नगर निगम इत्यदि संस्थानों का कारक माना है। दूरदर्शनए उपग्रह संचार प्रणालीए मोबाइल फोन तथा जनता द्वारा प्रयुक्त इलैक्ट्रॉनिक उपकरण भी यम से प्रभावित होते हैं।
भीड़ तंत्र विद्वानों ने भीड़ का मनोविज्ञानए दलीय संघर्ष जनमतए आतंकवादी गिरोह तथा जनधन की हानि व तबाही मचाने वाले कार्यो का कारक यम को माना है।
तबाही करने वाले परमाणु अस्त्र अणु ऊर्जाए आणविक बमए भूमि पर बिछाई जाने वाली विस्फोटक सामग्रीए तथा अन्तरिक्ष युद्ध सामग्री का सम्बन्ध यम से माना गया है।
जन कल्याण से जुड़ी संस्थाएँ रू श्रम संगठनए श्रमिकों का बीमाए जन भविष्य निधिए जन हित में बनी योजनाएँए तथा श्रमिक कल्याण कार्यों का सम्बन्ध भी यम से माना जाता है।
वस्तुओं पर यम का प्रभाव रू विद्वानों ने चमड़ा तथा चमड़े से बनी वस्तुओंए टिनए रबड़ए तांबाए जस्ताए स्टाक शेयर तथा इलैक्ट्रॉनिक सामान का कारकत्व यम को दिया है। कुछ विद्वानों का विचार है यम जिस राशि में संचार करता है उस राशि के कारकत्व वाली वस्तुओं को प्रभावित करता
पुरातत्व की धरोहर रू यम ग्रह विनाश का ग्रह है। ऐतिहासिक महत्व की पुरानी इमारतों के खंडहरए खुदाई में प्राप्त बर्तन या औजारों के दुकडेए घर में टूटा.फूटा पुराना सामान यम से प्रभावित होता है। संक्षेप में नष्ट पदार्थ के अवशेष यम के नियंत्रण में आते हैं।
प्राण संघातक शस्त्रास्त्र रू विस्फोटक पदार्थए घात लगाकर आक्रमण करनाए विष बुझे तीरए विषैले पदार्थए विषैली गैस तथा घातक अस्त्र.शस्त्र यम के नियंत्रण में होते हैं। 1
यम का परिचय रू विद्वानों ने यम को रक्त वर्णए क्रूर कर्मीए जंग लगा लोहाए पुरानी खाल या अस्थिपंजर का कारक माना है। इसका प्रभाव मंगल सरीखा मारक होने से मंगलवार को यम का दिन स्वीकारा गया है। पाश्चात्य विद्वान इसे सभी कार्यों का अन्तिम परिणाम बताने में समर्थ होने से अष्टमेश भी कहते हैं। 12ण्15 यम का प्रभाव रू लग्नस्थ यम तोड़ फोड़ की प्रवृत्ति देता है। द्वितीय भाव में यम की स्थिति हत्याए चोरीए प्राचीन मूर्तियों की तस्करी सरीखे अनैतिक साधन से धन देती है। तृतीयस्थ यम पुराने दस्तावेज अथवा उपकरण से सफलता दिलाता है। सुख स्थान का यम पुराने दुर्ग या महल के खंडहर में निवास देता है। पंचमस्थ यम संतान को बेरोजगार बनाता है। जातक स्वयं दूरदृष्टा होता है। षष्ठस्थ यम पैतृक रोग या शत्रुता देता है। कभी प्रतिस्पर्धा
या शत्रु भी दीर्घकालिक संघर्ष में उलझाते हैं। सप्तम भाव का यम क्रूर पत्नी देता है। जो गुप्त रूप से शत्रुता करने वाली तथा झगड़ालू किस्म की होती है। अष्टम भाव का यम जटिल रोग तथा अज्ञात स्थान में पीड़ा युक्त नृत्यु देता है। नवमस्थ यम भूत प्रेत को सिद्ध करने में रुचि देता है। वह प्रेत सिद्धि से लोगों को उत्पीड़ित करता है। दशमस्थ यम जातक को लम्बे युद्ध में उलझाता है। वह योजना बनाकर तबाही मचाने वाले कार्य करता है। लाभस्थ यम कपटी मित्रों से धोखा दिलाता है। जातक पुरानी जायदाद पाता है। व्यय भाव का यम गुप्त शत्रुए पैतृक रोगए देश निकालाए प्राण दंड अथवा दुष्मरण योग देता है। 12ण्16
यम की उच्च.नीच राशियाँ रू यम के लिए विभिन्न राशियों निम्न प्रकार हैंरू.
उच्च राशि रू सिंह स्वराशिः वृश्चिक मूल त्रिकोण रू वृश्चिक
मित्रराशि  मेष सिंह धनु
मित्र ग्रह सूर्य मंगल  राहु अरुण
शत्रु ग्रह शनिए बुधए केतु समग्रह गुरु शुक्र वरुण नीचराशिःk कुम्भ
पहले भाव में प्लूटो
लग्न में यम जातक को उग्र स्वभाव तथा दृढ़ निश्चयी बनाता है। वह महत्वाकांक्षी, अपनी धुन का पक्का, संयमी व अनुशासनप्रिय होता है। वह अपने लक्ष्य को पाने के लिए अनवरत रूप से प्रयत्नशील रहता है। गंभीर स्वभाव व एकान्तप्रिय होने से घनिष्ट मित्र बहुत कम होते है। कभी कोई जातक गुप्त रूप से षड्यंत्र रच कर तोड़-फोड़ या विध्वंसक कार्य भी किया करता है। पहले भाव का प्लूटो व्यक्ति के अन्दर महती इच्छाओं को देता है, बहादुरी देता है, लग्नस्थ यम जातक को उग्र व दृढ़ निश्चयी बनाता है। ऐसा व्यक्ति महत्त्वाकांक्षी, अपनी धुन का पक्का व कठोर होता है। उसमें संयम व अनुशासन की मात्रा बहुत अधिक होती है, जिस कारण उसे लक्ष्य प्राप्ति में सफलता मिलती है। वह स्वभाव से गंभीर व एकान्त प्रिय होता है। इस कारण उसके घनिष्ट मित्र बहुत कम होते हैं। अपने आस पास के वातावरण में अपने को वजनदार बना कर रखता है, और अपने को इच्छा शक्ति के द्वारा संभालकर रखता है, किसी भी गलत भावना का मन में प्रवेश करते ही बिजली के झटके की तरह से छिटक देता है, दूसरों को संभालने का कारण ही जीवन की एक इच्छाशक्ति बन जाती है, अपने द्वारा अनुभव करने के बाद ही दूसरों को अनुभव कराने की क्षमता होती है, विचार से विचार का बनाना और अन्य विचार का संपादन करना, अपने अन्दर एक चुम्बकीय शक्ति का महसूस करना जो अन्य लोगों को अपने आप ही अपने पास सम्मोहित करके बुला लेना, दूसरे लोगों के द्वारा समझने में कठिनाई होना कि आखिर यह बला क्या है, अपने को हर समय अकेला समझना, अपने अन्दर सज्जनता पाना, अपने अन्दर समझने की शक्ति रखना, साथ ही अपने ही अन्दर लगातार उस बात के लिये लडाई करते रहना कि जो है उस पर विश्वास किया जाय या नही, किसी भी स्थिति में जो किया उस काम से वापस नहीं आना, जैसे बिजली को तार से भेज कर वापस नहीं बुलाया जा सकता है। अपने अन्दर एक भयंकर क्रोध को पाना जब किसी अनुचित बात का अनुचित तरीके से प्रयोग किया जाय, जैसे बिजली के गलत प्रयोग के द्वारा या शार्ट सर्किट के द्वारा हाल होता है, या गलत तरीके से प्रयोग करने से सामने वाला कोई भी क्यों न हो या तो समाप्त कर देना या, खुद समाप्त हो जाना, अथवा कमजोर स्थिति की पोजीसन में उसी तरह से फ़्यूज हो जाना जिस प्रकार से एक बम्ब या बिजली का मैन स्विच, परा शक्तियों को परखने की शक्ति रखना, मानसिक रूप से दोनो आंखों के बीच में बिना कुछ सोचे ध्यान रखने पर अजीब से हाई स्पार्किंग जैसे प्रकाश को देखना, पराशक्तियों से सम्बन्ध स्थापित करना, और मन चाही जानकारी लेना, ध्यान समाधि के द्वारा रेडियो फ़्रीक्वेंसी की तरह् से दूर की चीजों का अनुभव करना, क्षमा कर देना और भूल जाना, अधिकता से कारण के ऊपर विचार नहीं करना, चाहे वह वास्विक कारण हो या चित्रित किया गया हो, हर वस्तु को शक्तिवान करने की कोशिश करना चाहे वह मिट्टी का ढेला ही क्यों न हो, समय आने पर जब खुद के द्वारा किसी का मन आहत होता हो तो अपने को हल्का सा लचीला बना लेना, आदि प्लूटो के पहले घर में होने पर प्रभाव देखे जाते है। जातक स्थूल रहता है। उसे गूढ़ ज्ञान में रुचि रहती है। प्लूटो पीड़ित होने पर अपघात की संभावना रहती है। जातक बचपन में माता के लिए अनिष्टकारी रहता है। मंगल या शनि के कुयोग का प्लूटो लग्न में हो तो जातक को ऊंचाई से गिरकर अपघात होने का भय रहता है। सूर्य के अशुभ योग का प्लूटो लग्न में हो तो पिता के लिए अनिष्टकारी सिद्ध होता है।
 
 
 
प्लूटो दूसरे भाव
द्वितीय भाव में स्थित यम जातक को अन्तः प्रेरणा दे कर साधन संपन्न बनाता है। उसकी आर्थिक व व्यापारिक बुद्धि तीक्ष्ण होती है वह बहुत धन संपदा एकत्रित करता है। कभी तो धन संग्रह लोभ व स्वार्थपरता की सीमाएं छूने लगता है। सम्पर्क में आए व्यक्तियों की भावना समझ कर उन्हें प्रभावित करना इसे भली प्रकार आता है। द्वितीय भाव में यम जातक को अन्तर्प्रज्ञा से धनी बनाता है। वह वणिक बुद्धि तथा लेन-देन में कुशल होने से बहुत धन एकत्रित करता है। संपर्क में आने वाले व्यक्तियों पर ये अपनी अमिट छाप छोड़ता है। कोई जातक लोभी व स्वार्थी होने से आर्थिक घोटाले भी करता है। मतान्तर से जातक, तस्करी, फिरौती, लूटपाट, या भाड़े का हत्यारा बनकर, अनैतिक साधनों से धन संपदा बढ़ाता है।में होने पर व्यक्ति धन के मामले में कडुये अनुभव रखता है, वह जो भी मानसिक फ़ैसले करता है, वे पूरी तरह से जोखिम से भरे होते है। जिस प्रकार से एक बिजली का इंजीनियर धन कमाने के लिये बिजली में हाथ तो डालता है, लेकिन उसके पास दो ही मार्ग होते हैं, या तो बिजली के उपकरण या बिजली की लाइन को ठीक करने के बाद मोटी रकम प्राप्त कर लेना या फ़िर जोखिम उठाकर अपने शरीर की क्षति उठा लेना, इस भाव का प्लूटो धैर्य के साथ काम करने की सलाह देता है, अपने अन्दर शक्ति रखने की सलाह देता है, उन शक्तियों के अन्दर ज्ञान की शक्ति, जो पूर्ण शिक्षा की तरफ़ इशारा करती हैं, इस भाव का प्लूटो मानसिक, शारीरिक और भौतिकता में जो बेकार की शक्तियां पनप रही होती है, उनको समाप्त करने की हिम्मत देता है, साथ ही अत्याधिक धनी बनने, अपने को सभ्रांत तरीके से जीने, आधुनिकता की चाह रखने, का मानस भी दूसरे भाव का प्लूटो देता है। व्यक्ति धन के आने और जाने के बेभाव कारण को भी अपने जीवन में देखता है, कितना आया और कितना गया, इस बात की परवाह उसे कभी नहीं रहती, क्योंकि विचारों के उत्पादन में कोई कच्चा माल नहीं लगता है, एक रास्ते के बन्द होने के पहले ही दूसरा रास्ता व्यक्ति के मानस पटल पर तैयार हो जाता है, जिस प्रकार से पुराने जमाने के हरकारे का काम बन्द होने के पहले ही ग्राहम बेल के अन्दर टेलीफ़ोन निर्माण का मानस बन गया था, और तार बाले टेलीफ़ोन के जाने के पहले ही मोबाइल का रास्ता बन गया था, दूसरे भाव का प्लूटो जिसके साथ जुड गया है, सामने वाला ही छोड़ कर चला जाये लेकिन वह नहीं छोडता, जिस प्रकार से बिजली का साकिट मान लीजिये, प्लग भले ही हटा लिया जाये, लेकिन साकिट वहीं रहेगा, दूसरे भाव के प्लूटो वाले व्यक्ति को अपनी समृद्धि को दूसरों के साथ मिल कर प्रयोग करना चाहिये, वरना धीरे धीरे लोग उसे अकेला छोडते चले जाते है, यहां तक कि अपने ही रिस्तेदार उससे दूर होकर कितनी ही तरह की ना समझी जाने वाली बातों को करने लगते है। जिस तरीके से बिजली में अथाह शक्ति तो होती है, लेकिन वह अपने द्वारा अपने को सम्भाल नहीं सकती है, उसे संभालने के लिये दूसरों की ही जरूरत पडती है। द्वितीय स्थान (धन भाव) कुंडली में पीड़ित प्लूटो द्वितीय स्थान में हो तो जातक में नेत्र दोष एवं वाणी दोष रहता है। मकान के कारण संपत्ति का क्षय होता है। विकारयुक्त या पागल व्यक्ति जातक की हर पीढ़ी में रहता है। मकान पिशाच बाधा या दैवी कोप से ग्रस्त रहता है। घराने में हर पांच वर्ष के बाद किसी की अपघाती मौत होती है। शुभ प्लूटो एकदम धन देता है। पत्नी की तरफ से वसीयत में रुपया पैसा प्राप्त होता है।
 
तीसरे प्लूटो
तृतीयस्थ यम जातक में जासूसी करने की योग्यता का विकास करताऐसा व्यक्ति शायद जन्मजात जासूस होता है। किसी भी वस्तु को ध्यान पूर्वक देखना, तथ्यों का विवेक पूर्ण संग्रह व विश्लेषण तथा सभी 312 से बातचीत कर सत्य तक पहुंचना उसकी विशेषता होती है। कभी स्वंय को दूसरों से श्रेष्ठ समझने या पूर्वाग्रह से ग्रसित होने के कारण परिवार में नाहक तनाव पैदा कर लेता है। तृतीय भाव में यम जातक को जासूसी के क्षेत्र में दक्षता देता है ऐसा जातक कदाचित् जन्मजात जासूस होता है। सभी वस्तुओं का सूक्ष्म निरीक्षण, परीक्षण तथा विश्लेषण कर सत्य तक पहुँचना इसका विशेष गुण होता है। कभी स्वयं को दूसरों से श्रेष्ठ समझने की प्रवृत्ति या पूर्वाग्रह परिवार में तनाव पैदा करता है। ऐसा जातक प्राचीन उपकरण व दस्तावेज द्वारा यश व सफलता पाता है। निश्चय ही वह बुद्धिमान, विविध विषयों का ज्ञाता तथा स्थापत्य कला में निपुण होता है।तृतीय स्थान (सहज भाव) कुंडली में तृतीय स्थान में प्लूटो हो तो जातक को कम सुनाई देता है। कान का बड़ा ऑपरेशन हो सकता है। घर से किसी का बाहर निकल जाना या आत्महत्या करना, कोई भाई कहीं निकल जाना और उसका पता न लगना, बहन का प्रसव के समय शल्यक्रिया होकर देहांत होने जैसे अशुभ फल तृतीयस्थ प्लूटो के मिलते हैं सतान हो तो उसकी अकाल मृत्यु होती । किंतु प्लूटो शुभ स्थिति में तृतीय स्थान में हो तो जातक की आध्यात्मिक उन्नति होती है, मान प्रतिष्ठा बढ़ती है। देशाटन के योग बनते हैं। जातक का बड़े-बड़े कारखानों एवं छापाखानों से संबंध होता। है। सहकारिता में भी यश प्राप्त होता है।वाले व्यक्ति का दिमाग अस्थिर, बात को दिल में डालने वाला, हर बात को स्थिर रूप को कहना, या हर बात का भौतिक कारण से सबूत पेश करने के बाद प्रस्तुत करने वाला खा जा सकता है। जो भी लोग और घटनायें व्यक्ति के जीवन में आती है, उनको सही रूप में बखान करना, जो भी कारण और सामने वाले की तस्वीर होती है, उसे गाइड की तरह से बखान करना भी मुख्य माना जा सकता है। व्यक्ति के अन्दर प्रस्तुतीकरण वाले प्रभाव के कारण वह हर आदमी की बात और काम को समझने वाला होता है, जिस प्रकार से एक इन्जीनियर मशीन के बारे में जानने के बाद ही उसका विवेचन करता है, उसी प्रकार से तीसरे प्लूटो वाला जातक कारण को समझ कर ही उसका विवेचन करता है। व्यक्ति की इसी कारण से जिज्ञासा इतनी बढ जाती है कि वह हर क्षेत्र में अपनी आदत के अनुसार जानकारी और विद्या को सीखना चाहता है, और जो भी देखता है या सीखता है, उसे ही हूबहू बखान करने के कोशिश करता है। किसी विषय पर शोध करना, शोध करने के बाद आंकडे बनाना, पहेलियों को सुलझाने के काम करना, दिमाग से जुडे खेलों की तरफ़ बहुत ही आकर्षित होना, व्यक्ति की आदत होती है। जिस काम में जासूसी जैसी बाते होतीं हैं उनको कहने और करने में अक्सर इस प्रकार के लोग अपने को माहिर बना लेते है, और खेल भी जासूसी के खेलते है। इस प्रकार का व्यक्ति कुछ न कुछ इसलिये खोजता रहता है, कि उसके जीवन के लिये कुछ मिले, खोजने से जीवन का मतलब मिल जाय, और उस क्षेत्र को खोजने का भी प्रयास करता है, जिस क्षेत्र में उसकी जिन्दगी दुबारा से शुरु हो सके, या जो सोचा है उसमें कोई नया तत्व शामिल हो सके। झल्लाहट और दिमागी रूप से भनभनाने की आदत तब और उस व्यक्ति के अन्दर पैदा हो जाती है जब जिस बात को खोजने के बाद या खोजते समय अथवा किसी काम को करते वक्त कोई रुकावत उसके सामने आ जाती है। उस व्यक्ति को उस समय यह सब भूल जाना चाहिये, उसे चाहिये कि वह अपने को कुच अच्छा लिखने के लिये प्रयोग करे, कुछ लिखे, जिससे लोग उसकी भाषा और काम को समझ सकें, इस काम को करते ही उसके दिमाग की टेन्सन या झल्लाहट कम हो जायेगी.और जो लिखा जायेगा, वह उस व्यक्ति के विचारों को गन्दगी से निकालकर साफ़ करने के काम आयेगा, और जब कोई कुछ लिखने की कोशिश करता है, तो उस लिखने में कुछ न कुछ नये विचार जरूर सामने आते है, और एक बार अगर पहले से चलने वाले विचार और नजरिया अगर किसी प्रकार से बदल गया, या किसी कारण से छुप गया तो आप उसको हमेशा के लिये खत्म कर देंगे, जैसे उस विचार और कारण को हमेशा के लिये दे दिया गया है, जैसे एक कम्प्यूटर में कोई फ़ाइल छुप जाती है, और खोजने के बाद नहीं मिलती है, तो झल्लाहट के कारण व्यक्ति उसे डिलेट करने के बाद दूसरा प्रोग्राम या फ़ाइल बनाने की बात करता है।
 
चतुर्थ स्थान (सुख भाव) चतुर्थ भाव में स्थित यम प्रकृति के गहन अध्ययन तथा शोध में रुचि देता है। ऐसा जातक पर्यावरण विशेषज्ञ अथवा प्राकृतिक संपदा का संरक्षक बन सकता है। परिवार को भी ये पर्याप्त महत्त्व देता है, किन्तु माता या पिता के पारिवारिक समस्याओं पर, हठ पूर्ण निर्णय इसको कठिनाई में डाल देते हैं। चतुर्थ भाव में यम जातक को प्रकृति व पर्यावरण के गहन अध्ययन व शोध में रुचि देता है। ये प्राकृतिक संपदा के संरक्षण से जुड़ा होता है। परिवार को समुचित महत्व देता है किन्तु पारिवारिक समस्याओं पर हठपूर्ण निर्णय, इसे मानसिक क्लेश देता है। प्राचीन मान्यताओं से वैर-विरोध तथा नए क्रातिकारी विचारों को बढ़ाने की प्रवृत्ति इसमें स्पष्ट दिखती है। कोई जातक प्राचीन भग्न इमारतों या किले के खंडहरों को प्राप्त करने में रुचि लेता है। कुंडली में चतुर्थ स्थान में पीड़ित प्लूटो हो तो घराने को शाप इसी कारण पुत्र संतान नहीं होती। पुत्र संतान हो तो उसकी अका है। परिवार में हर साल कोई-न-कोई आत्महत्या करता है। वास्तपरुष का रहता है। कई बार वास्तु ही दूषित जगह पर होती है। घर में या घर गूलर या बरगद का पेड़ होता है। वास्तु को आग लगाना या वास्तु में आग लगना जैसी घटनाएं होती हैं। इस भाव का प्लूटो अपने को सबके सामने दिखाने के अन्दर एक नम्बर का काम करता है, अपनी छवि को या तस्वीर को बहुत ही उम्दा तरीके से पेश करता है, व्यक्ति के अन्दर अन्तर ज्ञान की बहुत अधिक मात्रा होती है, और वह अपने अन्तर्ग्यान के द्वारा प्रत्येक वस्तु को जानने की हिम्मत रखता है, और इस प्रकार का व्यक्ति हमेशा घरेलू वातावर्ण में निवास करना पसंद करता है, उस व्यक्ति के पास जो शक्ति होती है, उस अन्तर्ग्यान वाली शक्ति के कारण उसे अपने आसपास वाले लोगों से काफ़ी लडाई करनी पडती है, जैसे उस व्यक्ति की इच्छा अपने घर में पतलून पहिनने की होती है, और उस घर में धोती पहिनी जाती है, तो उसकी वह इच्छा उसके लिये अपने ही घर में परेशानी का कारण बन जाती है। जैसे गांव के पुराने विचार के लोगों के घरों में जो पुत्रवधुयें आती है, और वे साडी या ग्रामीण परिवेश का पहिनावा छोडकर जीन्स और पेन्ट पहिनने लगती हैं, तो वह जीन्स और पेन्ट उनके लिये परेशानी का कारण बन कर अन्तर्ग्यान होते हुए भी समाज से दुत्कार की भावना उनके लिये प्रस्तुत कर देती है। व्यक्ति के माता पिता या उसके सास ससुर का दखल या तो उसके लिये बहुत बढिया रहता है, या फ़िर उसकी शारीरिक या मानसिक बीमारी का कारण बन जाता है। इस भाव के प्लूटो का मिलान बिजली के तेल भरे ट्रांसफ़ारमर से किया जा सकता है, अगर समय और मौसम के हिसाब से उसमे तेल भरा हुआ है और जितनी बिजली आ रही और उससे कम मात्रा में उसका प्रयोग किया गया है, तो वह तेल गर्म नहीं होगा, और अगर किसी प्रकार से उस तेल में कोई मिलावट कर दी गयी, या फ़िर जो सप्लाई है उसे कम करके प्रयोग को बढा दिया गया तो वह ट्रांसफ़ारमर गर्म होकर या तो तेल को उबाल कर बाहर कर देगा और गर्म होकर खत्म हो जायेगा, या फ़िर धीरे धीरे अपने को टीबी की बीमारी की तरह से खत्म कर लेगा। पैदा करने वाले माता पिता भी इस कारण को पैदा कर सकते है, और जीवन साथी के माता पिता भी इस प्रकार का व्यवहार कर सकते है, पैदा करने वाले माता पिता तो ट्रांसफ़ारमर में आने वाली बिजली की सप्लाई की तरह से होते है, और ससुराल वाले माता पिता ट्रांसफ़ारमर से ली जाने वाली सप्लाई की तरह से होते हैं। इस घर के प्लूटो वाले जातक हमेशा अपने जन्म स्थान पर लगातार काम करते है, चाहे वह पढाई के रूप में हो या फ़िर बचपन से ही जिम्मेदारियों के काम सिर पर डालदिये जावें.खुद का बनाया हुआ माहौल और अपनी प्रकार का क्षेत्र ही दुबारा से संभलने और पनपने का क्षेत्र हो सकता है।
 
पंचम स्थान (सुत भाव) पंचम भावस्थ यम दिमागी खेल व कठिन संघर्ष पूर्ण कार्यों में रुचि देता है। जातक कदाचित अपने इन प्रयासों से अपनी शक्ति व बुद्धि बल की धाक जमाया करता है। वह बहुत धीर व गम्भीर प्रकृति का होता है तथा शारीरिक गठन व स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखता है। कभी काम पिपासा अनियंत्रित होने से सभी कुछ गड़बड़ा जाता है। पंचम भाव में यम जातक को दिमागी खेल अथवा संघर्षपूर्ण रोमांचक कार्यों में रुचि देता है। वह धीर गंभीर प्रकृति का प्रतिभासंपन्न तथा बुद्धिमान व्यक्ति होता है। बहुधा कठिन व जटिल प्रश्नों के उत्तर देकर वह अपने बुद्धि बल की धाक जमाया करता है। यूं तो वह स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहता है किंतु कभी, काम-पिपासा अनियंत्रित होने से, सभी कुछ गड़बड़ा जाता है। ऐसा जातक भविष्य-दृष्टा तथा दूरगामी परिणामों को जानने वाला होता है। यम का पापत्व बुद्धि विकार, कुसंगति तथा संतान संबंधी चिन्ता देता है। कुंडली में पंचम स्थान में प्लूटो हो तो बालहत्या होती है। संतान दोष रहता। है, दैवी प्रकोप रहता है। स्मृतिनाश, पागलपन या मतिभ्रम जातक में रहता है। पुत्र का या पिता का देहांत होता है। शुभ स्थिति में प्लूटो पंचम स्थान में हो तो जातक मांत्रिक या धर्मप्रचारक, गूढविद्याओं का अभ्यासी होता है। शिक्षण संस्थाओं या प्रयोगशालाओं से जातक जुड़ा रहता है। जातक को अचानक धनलाभ होता है और प्रसिद्धि मिलती है। पांचवें भाव के प्लूटो के द्वारा जातक के अन्दर बिना काम आने वाली आदतें और योग्यतायें होती है, महान कार्यक्षमता और अपने खुद के द्वारा बखानने की आदत अधिक तर इस प्रकार के जातकों में पायी जाती है, बच्चे एक मशीन की भांति बन जाते है, जिस प्रकार से व्यक्ति अपने बच्चे को एक बटन की भांति बना लेता है, उसके कहते ही काम होना चाहिये, उसे बच्चे की मानसिकता से कोई लेना देना नहीं होता है, वह तो केवल उसे प्रयोग करना जानता है। मशीनी विचार रखने वाला जातक अपने बच्चों को नहीं समझ पाता है, और बच्चे जातक को नहीं समझ पाते हैं, उसकी नजर में वही पढाई काम की होती है, जो साक्षात रूप से अपना प्रभाव दिखा सके, लेकिन उसके लिये उन बातों का कोई महत्व नहीं होता है, जो कि खुद उन बातों से घिरा होता है, जो किसी ने उसके प्रति बनाई होती है, जैसे जातक की माता का विचार होता है, वह भी अपने परिवार को मशीन की भांति ही समझती है, और वह भी कीमत को अपने परिवार के प्यार के अलावा भौतिक धन के द्वारा नापने में अपनी होशियारी समझती है। इस भाव के प्लूटो वाले जातक संभोग को अधिक प्रयोग करने के चक्कर में कितने ही कृत्रिम उपायों का प्रयोग करते है, वे अपनी काम शक्ति को बढाने के लिये विभिन्न तरीकों का प्रयोग करते है, जिनके अन्दर कामोत्तेजक द्रश्य, कामोत्तेजक आवाजें, अश्लील फ़िल्में, अश्लील गाने, आधि मुख्य होते हैं, आगे चल कर यही आदतें उनके शरीर को रोगों से लडने में असमर्थ कर देती है, और जातक एक मशीन के अन्दर ही अपनी जीवन लीला को समाप्त कर लेता है।
 
षष्ठ स्थान (शत्रु भाव) षष्ठ भाव में यम की स्थिति जातक को शोध व अनुसंधान के कार्यों में रुचि देती है। ऐसा स्वावलंबी जातक बिना विघ्न बाधा के घंटों एकाग्र चित्त होकर काम करते हुए, काम निपटाने में विश्वास करता है। इसे स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना होगा, क्योंकि अधिक कार्य, भार, शरीर व मन को थका कर चूर चूर कर सकता है। षष्ठ भाव में यम जातक को व्यसनों के प्रति आसक्ति देकर स्वास्थ्य की हानि करता है। वह सत्ता लोलुप तथा अधिकार पाने के लिए अनीतिपूर्ण कार्य करने वाला होता है। कोई जातक अपने दायित्व का निर्वाह नहीं करता तथा दूसरों को व्यर्थ कष्ट पहुंचाता है। कभी वह आतंकवादी या उत्पीड़क होता है। कोई जातक किसी वंशगत रोग या पुरानी (पुश्तैनी) शत्रुता से कष्ट पाता है। वह, कपट व्यवहार व षड्यंत्र द्वारा, अपने विरोधियों को नष्ट करता है। मतान्तर से ऐसा जातक स्वावलंबी, परिश्रमी तथा एकाग्रचित्त होकर शोध या अनुसंधान के कार्य में संलग्न रहता है। इसे अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा अन्यथा कार्य की अधिकता देह व मन को तोड़ सकती है। कुंडली में षष्ठ स्थान में पीड़ित प्लूटो हो तो जातक को दैहिक विकार चालीसवें साल के बाद होता है। कैन्सर, अल्सर, त्वचा रोग, बवासीर संधिवात जैसे रोग उत्पन्न होते हैं। मातुल घराने में कोई पागल या अपंग रहता है। झगड़ा-फसाद एवं अपघात में जातक जख्मी होता है। छठे भाव के प्लूटो वाला व्यक्ति कार्य करने के स्थान और कार्य के अन्दर प्रेषित करने की क्षमता रखता है, इस प्रकार के व्यक्ति के अन्दर एक भावना होती है, कि वह कार्य स्थान की प्रतिष्ठा में हमेशा शामिल रहे, वह जो भी करता है, वह हर किसी की नजर में आये, व्यक्ति के अन्दर एक भावना होती है कि जो भी उसके आधीन रहकर काम करे वह उसी के अनुसार जैसा वह चाहे कार्य करे, चाहे वह कार्य स्थान पर काम करने वालो का संगठन हो या फ़िर अपने ही परिवार का गठित समाज, साथ व्यक्ति के अन्दर भावना होती है, कि वह उनको किसी बात की परेशानी भी न होने दे और उनको अपने अनुसार कार्य भी करवाता रहे। व्यक्ति के अन्दर काफ़ी लम्बे समय तक कार्य करने की भावना होती है, वह बिना किसी रुकावट के साधारण आदमी से अधिक काम कर सकता है, व्यक्ति के अन्दर कठिनाइयों से लडने की प्रबल भावना होती है, और वह उन कामों को करना पसम्द करता है जो कि दूसरे नहीं कर पाते हैं, या फ़िर जो किये जाने वाले को करने में घबडाते है, जासूसी और खोजबीन करने में मजा आता है, साथ जो गहरी कठिनाई में डूबे हुए लोग होते हैं, उनसे बात करने और उस गहरी कठिनाई को दूर करने के उपपय खोजने के लिये लम्बे समय तक काम करने की भावना होती है, उन कठिनाइयों को एक व्यौरा बना कर और तरीके से दूर करने में उनको बहुत आनन्द आता है, समाधि लगाना और मेडीटेसन के प्रति अच्छा लगाव होता है, आत्माओं से सम्पर्क का खुद साधन बन जाते हैं, और जो काम कठिन होते हैं उनको अपने साथ काम करने वालों के सानिध्य् में भी चुप चाप काम करते रहते है, इन्फ़ेक्सन की बीमारियां जल्दी घेर लेती है, अधिक बैठक के कारण पेट के पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है।
 
सप्तम स्थान (पति-पत्नी भाव) - सप्तमस्थ यम सभी प्रकार के संबंध दिया करता है। जातक को एक ऐसे निष्ठावान समझदार साथी की आवश्यकता होती है, जो उसके जीवन में सुख दुख की भागीदारी कर सके। वैसे ये निष्ठावान, दृढ़ निश्चयी, समझदार व्यक्ति होते हैं तथा कानून मनोविज्ञान, समाज सेवा अथवा उत्तरदायित्व व चुनौती भरे कामों में इनकी रुचि होती है। सप्तम भाव में यम जातक को साझेदारी तथा पत्नी के सहयोग से लाभ देता है। वह गृह व्यवस्था, नौकरी तथा सामाजिक कार्यों में कुशल होता कभी कठोर, उग्र स्वभाव तथा सुख लोलुप पत्नी के कारण, दांपत्य सुख नष्ट हो है। ऐसा जातक निष्ठावान, दृढ़ निश्चयी, विधि, मनोविज्ञान तथा समाज सेवा के कार्यों में रुचि लेने वाला होता है। इसे एक निष्ठावान पत्नी की आवश्यकता होती है जो उसके सुख-दुःख बाँटकर प्रसन्नता का अनुभव करे। जाता है तथा घर में शीतयुद्ध की सी स्थिति बनी रहती है। कुंडली में सप्तम स्थान में पीड़ित प्लूटो हो तो जातक अविवाहित रहता है। यदि विवाह हो भी जाए तो पत्नी दीर्घकालीन रोगी रहती है। पत्नी का प्रसव के समय देहांत होता है। जातक का गुप्त प्रेम-संबंध रहता है। मूत्राशय का विकार होता है। सप्तमस्थ प्लूटो शुभ स्थिति में हो तो जातक को। परदेशगमन का मौका मिलता है। परदेश में ही निवास भी होता है। परस्त्री या पत्नी से वसीयत में धन-संपत्ति प्राप्त होती है। सातवें भाव में ट्रोल करना और बल दिखाने के साथ महसूस करने का अधिकार प्राप्त करना, इन चीजों के प्रति अपनी बपौती समझना इस प्रकार के जातकों के अन्दर पायी जाती है, वे अपने जीवन साथी और साझे का काम करने वाले को पूरी तरह से अपने अनुसार काम करने और अपने द्वारा हां में हां मिलाने के लिये मजबूर कर देना चाहते हैं, इनको सहयोग से काम करने की कला का पूरी तरह से ज्ञान नहीं होता है, इनके द्वारा जो जीवन साथी और साझेदार चुना जाता है, वह इनकी राय के अनुसार ही चलना चाहिये, इस कारण से ही इनके जीवन साथी के प्रति कभी बराबर से चलने के प्रति कमी पायी जाती है, प्लूटो बिजली का ग्रह माना जाता है, बिजली को प्रयोग करने के लिये स्विच का प्रयोग किया जाता है, सातवें भाव के प्लूटो वाले जातक अपने जीवन साथी और साझे दार को बिजली का स्विच ही मान कर चलते है, वे जब चाहें उसे आफ़ कर दें और जब चाहे ओन कर दें, जीवन साथी भी अपनी शक्ति को उसी प्रकार से प्रयोग करता है, जिस प्रकार से तार में जब तक बिजली होती है काम लिया जा सकता है, और जैसे ही अलावा भार बिजली पर दिया जाता है, उसका मैन स्विच बन्द हो जाता है, या फ़्यूज उड जाता है। उसी प्रकार से जब सातवें भाव के प्लूटो वाला जातक जब लगातार अपनी ही चलाने के लिये सामने वाले को मजबूर कर देता है, तो जीवन साथी या साझेदार या तो कुछ समय के लिये चुप होकर अपना सब कुछ बन्द करके बैठ जाता है, या फ़िर इस प्रकार के व्यक्ति को अपनी कमजोरी और शक्ति के प्रदर्शन के कारण परेशान कर देता है। इस प्रकार के व्यक्ति के अन्दर दूसरों के अन्दर शक्ति पैदा करने की आदत होती है, वे अचानक दूसरों के अन्दर अच्छी या बुरी शक्ति को पैदा करने की कला को जानते है, इन शक्तियों के पैदा करने के लिये वे सामने वाले को शाबाशी भी दे सकते है और गाली देकर उसे इतनी बुरी तरह से उतसाहित भी कर सकते हैं कि वह मरने मारने के लिये उतारू हो जाये, इसी कारण से वे या तो समाज में काफ़ी मशहूर हो जाते है, या फ़िर बदनाम हो जाते है।
 
अष्टम भाव में स्थित यम जातक को अध्यात्म त गूढ विद्याओं में रुचि देता है। जो भी उसे असा लगता है उसके विषय में जिक्षारस वश, गहन अध्ययन करता है। अच्छा होगा कि यह अपनी जिज्ञासा व उत्सुकता पर नियंत्रण करना सीखें। इसमें सभी कुछ या छ । नहीं, पाने की प्रवृति होती है। अष्टम स्थान (मृत्यु भाव) अष्टम भाव में यम गुप्त कष्ट, विपत्ति, संकट या भारी दुःख दे सकता है। कोई जातक दत्तक पुत्र बनकर, गुप्त कार्य अथवा तंत्र-मंत्र से धन लाभ पाता है। अध्यात्म व गूढ विद्याओं में उसकी सहज रुचि होती है। बहुधा जिज्ञासावश वह अनेक विद्याओं का गहन अध्ययन करता है। व्यर्थ की उत्सुकता व जिज्ञासा पर नियंत्रण कर ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग लाभप्रद सिद्ध होता है। कोई जातक "सभी कुछ या फिर कुछ नहीं पाने" की प्रवृत्ति से पीड़ित होता है। मतान्तर से ऐसा जातक कठिन व जटिल रोग से कष्ट पाता है तो कभी अज्ञात स्थान में शत्रु द्वारा उत्पीड़न से त्रासदायी मृत्यु पाता है। कुंडली में अष्टम स्थान में प्लटो शभ हो तो जातक की आध्यात्मिक उन्नति । होती है। जातक राजयोगी, हठयोगी या सिद्ध पुरुष होता है और उसम वैराग्यवृत्ति रहती है। अचानक धनलाभ या वसीयत प्राप्त होती है। जातक दूरदेशी होता है। अशुभ प्लूटो अष्टम स्थान में हो तो अपघात के कारण शरार में विकार उत्पन्न होता है या अपघाती देहांत होता है।आठवे भाव के प्लूटो वाला व्यक्ति एक बहुत ही व्यवसायिक सुलझा हुआ दिमाग रखता है। दिमाग में विश्लेषण करने की अदभुत ताकत होती है। पराशक्तियों के प्रभाव के कारण इस प्रकार का व्यक्ति राख से सोना निकालने की हिम्मत रखता है, जो भी इस प्रकार के व्यक्ति के सामने होता है, उसके प्रति जरा सी देर में इस तरह का व्यक्ति उसका भूतकाल वर्तमान काल और भविष्य के प्रति कथन करने की हिम्मत रखता है, ज्योतिष, हस्त रेखा, देव साधना, पूजा पाठ आदि के द्वारा लगातार शक्तियों को जागृत करने की अद्भुत क्षमता होती है, व्यक्ति के द्वारा भूत प्रेत और अद्र्शय शक्तियों के प्रति रुझान से आस पास के लोग उसे गलत नजर से देखने लगते है, और जिस प्रकार से बिजली के तार को छूने से लोग डरते है, उसी प्रकार से इस प्रकार के व्यक्ति से लोग डरने लगते है, जीवन साथी और साझेदार के द्वारा भौतिक पदार्थों और घर में या अपने कार्य स्थान में स्वचलित साधनों के प्रति अधिक खर्च करने से परेशानिया पैदा हो जाती है। जमा धनो की कमी और बैंक आदि के द्वारा बचत करने में परेशानी भी इस प्रकार के जातकों के अन्दर देखी जाती है, इस प्रकार के जातक जीवन का मतलब ढूंडते रहते है, और मौत के बाद क्या होता है, उनके कारण और निवारण की क्रिया को समझने में अपना बहुमूल्य समय अधिकतर गंवा ही देते है, जो उनको प्राप्त होता है, उसे वे किसी भी प्रकार से दूसरों को प्रत्यक्ष दिखा नहीं पाते और लोग उनको बेबकूफ़ ही समझते रहते है, उनकी जिज्ञासा होती है कि ब्रहमाण्ड किस प्रकार से व्यक्ति की जिन्दगी को प्रभावित करता है। इस प्रवृत्ति के कारण वे अपने अन्दर के बारे में अधिक जान जाते हैं, अपनी सुरक्षा के प्रै इस प्रकार का जातक काफ़ी संवेदनशील हो जाता है। लोगों को किस प्रकार से धनात्मक प्रभाव दिया जाता है, इस बारे में इस प्रकार के व्यक्ति को पता होता है, इस लिये जो इस प्रकार के व्यक्ति को जानते है, वे उससे फ़ायदा उठा सकते हैं। अधिकतर मामलों में इस प्रकार के जातक अपनी कामेक्षा की अधिकता के कारण कामोत्तेजना के समय कृत्रिम साधनो का प्रयोग करते है, और अपने अन्दर की ताकत को समाप्त कर लेते है, जिससे होने वाली संतान या तो कामयाब नहीं होती या फ़िर अपने लिये ताकत जुटाने और अपने को समाजिक तौर पर ऊंचा दिखाने के लिये गलत साधनों का प्रयोग करना शुरुकर देती है।
 
नवम भाव का यम जातक को आत्मोत्सर्ग या बलिदान की प्रेरणा देता है। उसे दैनिक जीवन की आवश्यकताएं बड़ी तुच्छ व निरर्थक सी जान पड़ती है। वह पूरे उत्साह व दृढ निश्चय के साथ, किसी विशिष्ट कार्य में प्राणपण से जुट जाता है। व्यक्ति व समाज से इसे प्यार होता है तथा मानव जाति का जीवन स्तर सुधारने के लिए ये सदैव प्रयत्नशील रहता है। नवम भाव में यम जातक को आत्मोत्सर्ग या बलिदान की प्रेरणा देता है। उसे दैनिक जीवन की आवश्यकताएँ बहुत तुच्छ व निरर्थक जान पड़ती हैं। वह तो पूरे उत्साह व दृढ़ निश्चय के साथ किसी विशिष्ट कार्य में प्राणपण से जुट जाता है। ऐसा जातक पवित्र हृदय, व्यवहार-कुशल तथा जनकल्याण से जुड़ा धार्मिक संत, न्यायवेत्ता या मार्गदर्शक होता है। मानव मात्र का जीवन स्तर सुधारने के लिए व सदैव प्रयत्नशील रहता है। बहुधा उसे अपने कार्य में किसी विदेशी या अन्तर्राष्ट्रीय संगठन का सहयोग मिलता है। यम पर पाप प्रभाव, जातक को भाग्यहीन बना कर, सभी कार्यों में असफलता देता है। धर्म विरुद्ध आचरण उसे अपयश व कलंक देता है। कोई जातक भूत-प्रेत सिद्ध कर लोगों को पीडित करता है। नवम भाव के प्लूटो वाला जातक पराशक्तियों और तंत्र, मंत्र के प्रति अपनी जिज्ञासा को जागृत रखने की कला को जानता है, समाधि अवस्था में जाने और समाधि के अन्दर ब्रहमाण्ड अथवा इच्छित स्थानों की सैर करना भी इस प्रकार के जातक जानते है, सोने के बाद स्वप्न अवस्था में वे विभिन्न प्रकार स्वप्नों को देखते है, और वे स्वप्न अच्छी तरह से उनको याद भी रहते है, वे किसी भी देवता और शक्ति का प्रभाव तेज प्रकाश के रूप में देखते है, उनकी रुचि इसी कारण से धर्म और धार्मिक क्षेत्र में विशेष रूप से होती है, वे धर्म और धर्म वाले कारणो को संसार में दिखाने के लिये वे वीडियो, आडियो, आदि साधनो का सहारा लेते है, व्यक्ति को हमेशा मानसिक इच्छा होती है कि जो हुआ वह क्यों और कैसे हुआ, हमेशा व्यक्ति के विचार सफ़ल ही हों यह बात कभी नहीं माननी चाहिये, इस प्रकार का व्यक्ति खुद अपने विचारों से भी कभी कभी खतरे में पड जाता है, उसका कारण मुख्य रूप से तब दिखाई देता है जब व्यक्ति अपने को ही भगवान मानना चालू कर देता है, और जो भी आसपास वाले बताते है या सलाह देते हैं तो उनको नकार देना भी एक मुख्य कारण माना जाता है, सत्य को इस प्रकार का व्यक्ति उसी प्रकार से ढूंडता है जिस प्रकार से एक भूखा व्यक्ति भोजन को ढूंडता फ़िरता है, हर बात को जानने की इच्छा के कारण इस प्रकार का व्यक्ति कभी कभी बहुत ही बडी टेंसन को पाल लेता है, परामनोवैज्ञानिक शक्तियों का सहारा लेकर और समाधि आदि के द्वारा अपने अन्दर के विचारों क जागृत रूप में देखने के कारण इस प्रकार का जातक मान लेता है, कि उसको भी भगवान के दर्शन हो गये है, वह परिचितों को बताता है कि फ़लां दिन उसने फ़लां भगवान के दर्शन स्वप्न में किये और वे जो कह गये है, वह पूरा होने जा रहा है, नवम स्थान (भाग्य भाव) कुंडली में नवम स्थान में शुभ प्लूटो हो तो जातक कई बरसों तक विदेश में रहता है। जातक राज, धर्म एवं समाज से जुड़ा हुआ रहता है। अशुभ प्लूटो हो तो जातक नास्तिक बनता है। उसे दीर्घकालीन बीमारी रहती है। स्त्री जातक को भी वैधव्य योग बनता है। जातक की परदेश में या स्वदेश में अपघाती मृत्यु होती है। भौतिक रूप से भी इस प्रकार के लोग आसमानी यात्राओं के प्रति काफ़ी उत्सुक होते है, हवाई यात्राओं में नौकरी और पैरासूटिंग भी उनको बहुत अच्छी लगती है, ऊंचे स्थानों से भौतिक साधनो से कूदना, करतब दिखाना भी इनकी आदत हो जाती है, जब भी इस प्रकार के लोग गहन अध्ययन करते है, तो अक्सर उसमे इतने लीन हो जाते है कि कोई उस समय अगर कोई बात उनसे पूंछने या बात करने की कोशिश करे तो वे एक दम झंझला जाते हैं, इस प्रकार के व्यक्तियों को अपनी एक आदत को तो छोड़ ही देना चाहिये, कि वे चाहते है कि वो जो कह रहे है वह हमेशा सही है।
 
दशम भाव का यम जातक को सत्तालोलुप बनाता है। वह बहुधा जोड़ तोड़ कर, छोटी आयु में ही पद व प्रतिष्ठा पा लेता है। ऐसे जातक को अपनी सत्ता लिप्सा व हुकुम चलाने की प्रवृति से बचना चाहिए अन्यथा समीपी संबंधों में कटुता पैदा हो जाती है। दशम भाव में यम जातक को अधिकारप्रिय व सत्ता लोभी बनाता है। वह जोड़-तोड़ की नीति से छोटी उम्र में ही उच्च पद व प्रतिष्ठा पाने में सफल होता है। यूं तो वह परंपरावादी व प्राचीन मूल्यों का समर्थक होता है किन्तु नए व प्रगतिशील विचारों को अपनाने को सदा तत्पर रहता है। कार्य क्षेत्र में अपने प्रतिस्पर्धियों पर सहज विजय पाता है। कभी पद-प्रतिष्ठा की भूख तथा दूसरों पर शासन करने की आदत समीपी संबंधों में कटुता पैदा करती है। यम पर पाप प्रभाव कार्य क्षेत्र में अपयश व असफलता देता है। कोई जातक सुनियोजित ढंग से तोड़-फोड़ कर छद्म युद्ध की सी स्थिति उत्पन्न कर देता कठिन हुआ करता है। इसकी संहार लीला समझ पाना या रोक पाना बहुत,  दशम भाव का प्लूटो जातक के केरियर को अन्देखी ताकतें प्रभावित करती है, आसामाजिक तत्व सीधे तरीके से काम और व्यक्तित्व को प्रभावित करते है, लोगो के द्वारा जो राजनीति खुद व्यक्ति के प्रति की जातीं हैं, उनसे उसे बचना चाहिये और खुद के विचार और कार्यों को महत्व दिया जाना चाहिये, कुंडली में दशम स्थान में शुभ प्लूटो हो तो जातक उच्चाधिकारी होता है। नई व बड़ी योजनाएं पूर्ण होती हैं। कारखाने, छापखाने खड़े होते हैं। धर्मपीठ पर अधिकार रहता है। सहकारिता से जातक जुड़ा रहता है और उसमें सफल भी होता है। विलक्षण चमत्कारी एवं साहसी कार्य जातक द्वारा संपन्न होता है। विदेश में राजदूत, देश में अस्पताल या कैदखाने का अधिकारी होता है। जातक रसायनशाला या प्रयोगशाला का भी प्रमुख बन सकता है। किंतु यह प्लूटो अशुभ हो तो जातक हेराफेरी करता है। फलस्वरूप उसे सजा मिलती है। बंधन योग एवं बदनामी का भी योग बनता है। जो भी खुद की औकात है उसी पर भरोशा नहीं करने से लोग उसे मनचाहे तरीके से प्रयोग करने की कोशिश करते है। जब भी इस प्रकार का व्यक्ति आगे भढने की कोसिश करता है, लोग बीच में आकर अपनी राय देते हैं, और वह जो करना चाहता है या संसार में अपना नाम या व्यवसाय को आगे बढाने की कोशिश करता है, तो उसे किसी न किसी प्रकार से रोक दिया जाता है। इस प्रकार की घटनाये जब व्यक्ति के जीवन में आती है तो उसे ताकत की जरूरत पडती है यह ताकत उसी प्रकार से उसे चाहिये होती है, जिस प्रकार एक बैटरी को प्रयोग करने के बाद उसे रीचार्ज करने की पडती है, इस ताकत को वह समाज के प्रति ही खर्च करना चाहता है, उसे अपने लिये कुछ भी प्रयोग करने की आवश्यकता नहीं पड़ता है, और जब भी वह अपनी ताकतों को समाज के लिये खर्च करता है तो समाज केवल उसे बुराई ही देता है, और जिस रास्ते से वह अपने को बहुत आगे बढाने की कोशिश करता है वही रास्ता उसे नीचा दिखा देता है, इस प्रकार के व्यक्ति की आदत कुछ करने और कुछ दिखाने की होती है, अक्सर उन्ही कामों के अन्दर उसका मन लगता है, जिसे शुरु से अन्त तक कोई समझ नहीं पाता है, वह जो कर रहा होता है वह सामने नहीं होता है, जो और जो हो रहा होता है वह वास्तव में नहीं होता। जो भी कार्य लोगों के द्वारा किये जाते हैं, उनके प्रति इस प्रकार के व्यक्ति के अन्दर भावना होती है कि वे उस कार्य को क्यों और किस लिये कर रहे है, और कर रहे हैं तो वे केवल निजी फ़ायदा के लिये क्यों कर रहे है।
 
एकादश भाव में स्थित यम जातक को सामाजिक व मानवतावादी बनाता है। ऐसे व्यक्तियों का परिचय अनेक लोगों से होता है किंतु मित्र बहुत कम हुआ करते हैं। बहुधा ये समाज में प्रतिष्ठित व प्रभावशाली व्यक्तियों से सलाह व सहायता प्राप्त कर अपनी योजना पर दृढ़ता से काम कर सफलता पाते हैं। एकादश भाव में यम जातक को मिलनसार तथा मानव मूल्यों का समर्थक बनाता है। वह समाज के प्रतिष्ठित व प्रभावशाली व्यक्तियों की सलाह व सहयोग से यश व सफलता पाता है। कभी परिचित व्यक्तियों का विस्तृत मंडल होने पर भी सच्चे मित्रों का अभाव होता है। ऐसा जातक विद्वान,, संतानसुखी तथा अलौकिक रीति से धन पाने वाला होता है। कोई जातक गुप्त मंडली व गुप्त मैत्री में रुचि लेकर असामाजिक कार्यों से लाभ पाता है। कभी जातक के कपटी मित्र, पुरानी बहुमूल्य संपदा की प्राप्ति में सहायक होते हैं। यम पर पाप प्रभाव धन लाभ में विघ्न-बाधा तथा संतान के संबंध में चिन्ता दिया करता है।एकादश  भाव के प्लूटो वाले व्यक्ति को अपने दोस्तों के भरोसे की बहुत ही आवश्यक्ता होती है, कुछ दोस्त इस भाव के प्लूटो वाले व्यक्ति को अपने आदेश से चलाने की कोशिश करते है, या व्यक्ति अपने आप ही दोस्तों के इशारे पर चलने की कोशिश करता है, वह अपने माता पिता और परिवार को भूल जाता है, और जो भे दोस्त कहते हैं उन्ही पर विश्वास करने के कारण अपने खुद के लोगों से अपना विश्वास हटा लेता है, दोस्ती की भावना इस प्रकार के व्यक्ति के अन्दर काफ़ी सीमा तक भरी होती हैकुंडली में एकादश स्थान में प्लूटो हो तो जातक बड़ी-बड़ी शिक्षण संस्थाओं से जुड़ा रहता है। समाज एवं धार्मिक कार्यों में वह अग्रसर रहता है। लोकप्रिय होकर प्रसिद्धि प्राप्त करता है। अशुभ प्लूटो एकादश स्थान में हो तो जातक नकली कंपनियां बनाकर लोगों को ठगता है, हेराफेरी करता है। गैरकानूनी कार्य में मित्र को फंसाता है। चोरी की चीजों का व्यापार-तस्करी करता है। जुए के अड्डे चलाने में उसका सहयोग रहता है। भौतिक पदार्थों के द्वारा भरे पूरे होने से दोस्त व्यक्ति को करिश्माई समझते है, और जम कर भौतिक पदार्थों का प्रयोग करते है, साथ किसी प्रकार के भौतिक पदार्थ का विनाश होने या बिगड जाने पर इसी प्रकार के व्यक्ति का सहारा लेते है, जिस प्रकार से जीवन में बढावा होता जाता है उसी तरह से कितने ही दोस्त आते है और जीवन से चले जाते है, कोई स्थिर दोस्त नहीं होता है, यह सब इसी भाव के प्लूटो का प्रभाव माना जा सकता है। कौन किस प्रकार से आगे आने पर रुकता है, या लगातार साथ चलने से मना कर देता है, यह सब तभी होता है, जब व्यक्ति की प्रोग्रेस रुकती है या बढती है, विभिन्न प्रकार के लोगो से दोस्ती विभिन्न प्रकार के उद्देश्यों की पूर्ति के लिये होती है, विभिन्न प्रकार के रिस्ते विभिन्न प्रकार के कार्य करने के लिये होते हैं, जो भी सामाजिक या पारिवारिक लोग होते हैं, वे आगे होने वाली उन्नति और अवनति के लिये जिम्मेदार माने जाते है, व्यक्तिगत रूप से किये जाने वाले प्रयासों में जन समुदाय को बहुत ऊंची सीढी पर पहुंचाने का काम भी इस प्रकार का व्यक्ति करता है, व्यक्ति के अन्दर एक सर्वोच्च व्यक्ति बनने की योग्यता होती है, वह समाज या समुदाय का मुखिया भी अपने कार्यों से बन कर अपने जीवन में जरूर सामने आता है। जीवन में लगातार लोगों पर होने वाले अन्याय के प्रति लडाइयां भी मुख्य कामों की गिनती में माना जाता है।
 
द्वादश भाव में स्थित यम जातक को अज्ञात व रहस्य को जानने की प्रवृति देता है। तन्त्र व गूढ रहस्यमय विद्याओं में उसकी रुचि होती है। ऐसा जातक रहस्यमय हुआ करता है। कोई जातक प्राकृतिक या वैकल्पिक स्पर्श चिकित्सा से लोगों की सहायता करता है। वह लोगों से सच्ची सहानुभूति नहीं रखता तथा नाते रिश्तों को बेझिझक तोड़ देता है।औषधिविज्ञान में नई तकनीक विकसित करने में रुचि लेता है। सामान्य जीविका साधन में उसे तनिक भी रुचि नहीं होती। व्यक्ति की विश्लेषण शक्ति अद्भुत होती है। मानसिक रुप से व बहुत सजग व जागरूक होता है। उसे बुद्धि बल से होने वाले कार्य, यथा मंडी का रुझान विश्लेषण तथा उपभोक्ता की रुचियों के पूर्वानुमान सरीखे कार्य अच्छे लगते हैं। द्वादश भाव में यम जातक को अज्ञात व रहस्य को जानने की प्रवृत्ति देता है। तन्त्र व गूढ विद्याओं में उसकी सहज रुचि होती है। वह स्वयं रहस्यमय व्यक्ति जान पड़ता है। कभी कोई जातक, प्राकृतिक या वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति से लोगों का उपचार कर धन व यश पाता है। कोई जातक धन व यश लोभी होता है तथा सच्ची सहानुभूति के अभाव में मैत्री संबंधों को बेझिझक तोड़ देता है। कभी ऐसा जातक स्वयं कष्ट उठाकर भी जनकल्याण के कार्यों को सफलतापूर्वक संपन्न करता है। निरन्तर यात्रा तथा प्रवास का कष्ट, कुटुम्ब की चिन्ता, परोपकार में धन का व्यय तथा जनकल्याण के लिए बंधन या कारावास का क्लेश भी वह प्रसन्नतापूर्वकं झेलता है। मतान्तर से ऐसा जातक गुप्त शत्रुओं से कष्ट पाता है। कभी वंशानुक्रम से जटिल रोग, देश निकाला, आजीवन कारावास या मृत्युदंड पाने की संभावना बढ़ा करती है। दश भाव में प्लूटो वाले व्यक्ति के अन्दर सत्य और सर्वोच्च ताकत को खोजने की प्रवृत्ति होती है द्वादश स्थान (व्यय भाव) कुंडली में द्वादश स्थान में शुभ प्लूटो हो तो जातक 'मौनीबाबा' बनता है। गूढ़ शास्त्रज्ञ होता है एवं बड़ी-बड़ी धार्मिक संस्थाओं का संचालन करता है। परदेश में निवास करता है। इसके विपरीत अशुभ प्लूटो व्यय स्थान में हो तो जातक किसी बड़े अपराध में फंसता है, गिरफ्तारी होती है। चाचा या संतान की अपघाती मृत्यु होती है। घर पर डकैती या चोरी होने से आर्थिक हानि होती है। , इसका कारण केवल जीवन को समझना होता है वह ईश्वर को प्रकट रूप में देखने की आशा रखता है, और जो भी लोग अपनी आदतों या सामाजिक नियमों के द्वारा करते हैं या करवाते हैं, उनको वह प्रकट रूप में देखना चाहता है, किसी तान्त्रिक के द्वारा किसी की मानसिक बीमारी को ठीक करने के प्रति की जाने वाली क्रियाओं को वह देखना चाहता है, कि वह तान्त्रिक वास्तव में कोई शक्ति प्रत्यक्ष दिखा पाता है, या वह कल्पना के द्वारा लोगों पर सम्मोहन ही करता है, जिस प्रकार से एक टीवी चैनल वाला किसी साधू की सत्यता को परखे बिना अपनी राय देने के लिये केवल तभी सामने आता है जब तक उसे लालसा रहती है कि वह अपना नाम लोगो के सामने दिखा सकता है, लेकिन जब उसी साधू के आत्मीय श्राप के कारण उसे अचानक शारीरिक या मानसिक कष्ट का अनुभव होता है, तो वह केवल मन में ही फ़ील करता है, कि उसने वह काम किया था उसी का परिणाम उसके सामने है, और उस बात को वह किसी के सामने कह भी नहीं सकता, कारण अगर कहता है तो खुद उसी की जग हंसाई होती है, एक अहम भरने के कारण वह यह भूल जाता है कि जिस कर्म काण्ड या रीति के अनुसार उसके माता पिता ने बन्ध कर उसे जन्म दिया है, और उसका जो नाम या कार्य करने के लिये जन्म दिया है वह अपने को सुपीरियर मानने के चक्कर में जो कार्य संसार के शुरु होने के समय से चले आये हैं, और उसके जन्म लेने से पहले कितने बुद्धिजीवी इस संसार में आये होंगे, उन सबको झुठलाकर सरे आम द्रश्य या श्रव्य साधनो से उत्पीडन करने वाली बातों को करता है, तो वह समझता है, कि वह जो कर रहा है वह सही है मगर क्षणिक समय के लिये तो ठीक माना जा सकता है, भविष्य के गहरे जाल में जब वे ही आक्षेप उसे प्रताडित करते हैं, तो वह अपने को फ़िर कहीं का नहीं पाता है।
 
 
यम (प्लूटो) का राशि फल

12.1 मेष राशि में यम जातक को पराक्रमी, परिश्रमी तथा सड़ी-गली परंपराओं का प्रबल विरोधी बनाता है। वह पुरानी मान्यताओं को ध्वस्त कर, नए मान-मूल्यों के लिए जगह बनाता है। वह महत्वाकांक्षी तथा नेतृत्व गुणों से संपन्न एक सच्चा समाज सुधारक होता है। यदि वह दूसरों की भावनाओं को उचित महत्व देना सीख ले तो निश्चय ही समाज में सम्मान, यश व प्रतिष्ठा पाता है।
12.2 वृष राशि में यम जातक को वाणिक बुद्धि तथा व्यापार कुशल बनाता है। दूसरों की दखलंदाजी वह सह नहीं पाता, अपने काम में किसी भी तरह का हस्तक्षेप उसे भड़का सकता है। वह थोड़ा कामुक तथा भोगसुख प्रेमी होता है। कभी तो ऐसा जातक अपनी पत्नी को मात्र भोग वस्तु या अपनी निजी संपत्ति मानने की दुष्प्रवृत्ति से पीड़ित हुआ करता है।
12.3 मिथुन राशि में यम जातक को बुद्धिमान, व्यवहार कुशल तथा मौलिक विचारों का धनी बनाता है। उसका चिंतनशील मस्तिष्क, विजय प्राप्ति के लिए, नित नए क्षेत्र खोजा करता है। वह परंपराओं का विरोध कर नयी व्यवस्था लागू करने में रुचि लेता है। मानसिक रूप से वह सदा सक्रिय रहता है तथा एक साथ अनेक काम बड़े सहज ढंग से करने में समर्थ होता है। कभी वह अपनी प्रतिभा तथा ज्ञान का उपयोग दूसरों पर अपनी धाक जमाने के लिए भी किया करता है।
12.4 कर्क राशि में यम जातक को संवेगी तथा भावुक बनाता है। वह परंपराओं का सम्मान करने वाला तथा कुटुम्बीजन के प्रति दायित्व निभाने में सजग होता है। देशभक्ति या राष्ट्रीयता की भावना से प्रेरित होकर वह ऐसे संगठन का सक्रिय सदस्य बनता है जो उसके विचारों का समर्थन करता हो। ऐसा जातक बहुधा पुरातन मूल्य व मान्यताओं के प्रति आदर बुद्धि रखता है तथा उनसे चिपटा रहता है।
12.5 सिंह राशि में यम जातक को सत्ता सुख लोभी तथा सभी पर शासन करने का इच्छुक बनाता है। वह हठी, अभिमानी, दृढ़-निश्चयी तथा लक्ष्य प्राप्तिके प्रति समर्पित होता है। उसको निष्ठावान मित्रों का भरपूर स्नेह व सहयोग मिलता है। उनकी सहायता से वह कार्यक्षेत्र में धन, यश व सफलता पाता है। यम पर पाप प्रभाव, अनियंत्रित काम-संवेग से, अपमान व अपयश दिया करता ।
12.6 कन्या राशि में यम जातक को उत्साही, परिश्रमी तथा जिज्ञासु बनाता है। वह नयी बातों को जानकर उनके व्यावहारिक उपयोग से धन, मान व प्रतिष्ठा पाता है। "सभी के लिए बेहतर, सुखी व समृद्ध जीवन" उसका ध्येय वाक्य होता है। कभी अपनी या अपने साथियों की कटु आलोचना काम काज में बाधक बनती है। वह पर्यावरण प्रेमी तथा वैकल्पिक चिकित्सा प्रणाली का पक्षधर होता है। बहुधा प्रचलित औषधियों तथा त्वरित भोजन को वह हेय दृष्टि से देखता है।
12.7 तुला राशि में यम जातक को लोकोपकार में सहज रुचि देता है। वह नीति, नियम तथा न्याय परक समस्याओं को सुलझाने में रुचि लेता है। हिंसा, शोषण व उत्पीड़न से उसे घृणा होती है। वह कल्याणकारी सामाजिक व्यवस्था के लिए अपनी समूची शक्ति झौंक देता है। कोई जातक मनोरोग चिकित्सक अथवा दूसरों को प्रेरणा व प्रोत्साहन देने वाला कुशल सलाहकार होता है। निराशा, हताशा व अवसाद भरी मनःस्थिति से उबार कर आशा, उत्साह, उल्लास व उमंग जगाने में वह सिद्धहस्त होता है।
12.8 वृश्चिक राशि में यम जातक को दृढ़ निश्चयी, सहनशील तथा सतत प्रयासशील बनाता है। वह जन-कल्याण के कठिन कार्यों को सहज ढंग से पूरा करता है। यम पर पाप प्रभाव जातक को स्वार्थी, कामुक तथा संवेगी बनाता है। ऐसा जातक अपनी प्रतिभा तथा लोगों की श्रद्धा, का दुरुपयोग कर अपना स्वार्थसिद्ध करता है।
12.9 धनु राशि में यम होने पर जातक पुरानी मान्यताओं को ध्वस्त कर नये आदर्श अपनाने वाला होता है। वह नवीनतम जानकारी प्राप्त करने के लिए गहन अध्ययन व चिंतन करता है। कभी तो जनहित के लिए आदर्श कार्य प्रणाली की खोज, उसे अमूर्त अध्यात्म के क्षेत्र में पहुँचा देती है। कोई जातक दूसरों के लिए कठिन पहेली बनकर एकाकी हो जाता है।
12.10 मकर राशि में यम जातक को कर्तव्यनिष्ठ तथा लक्ष्य के प्रति समर्पित बनाता है। सामाजिक दायित्व निभाने की इच्छा व समय का अभाव उसे मित्र व संबंधियों से दूर कर देता है। वह चंचल तथा उद्विग्न मन होकर सदा अपने लाभ व सफलता की चिन्ता करता है। कभी ऐसा जातक दूसरों के दुःख-दर्द से बेखबर तानाशाह सरीखा अमानवीय व्यवहार करता है।
12.11 कुंभ राशि में यम जातक को विज्ञान तथा प्रोद्यौगिकी के क्षेत्र में गहन रुचि देता है। चुनौतिपूर्ण व कठिन काम उसे आकर्षित करते हैं। समाज सुधार के लिए वह मौलिक व अनूठी युक्तियों का प्रयोग करता है। कभी वह व्यक्तिगत संबंधों में कुछ अधिक अपेक्षा रखने वाला (या माँग करने वाला) होता है। मित्रों के स्नेहपूर्ण सहयोग से वह सुख, शान्ति व समृद्धि पाता है।
12.12 मीन राशि में यम जातक को आकर्षक व्यक्तित्व, धन तथा बुद्धिचातुर्य प्रदान करता है। प्रश्न या पहेली सुलझाने की उसमें नैसर्गिक प्रतिभा होती है। कठिन व चुनौतिपूर्ण कार्यों में वह आनन्द पाता है। वह सृजनात्मक प्रतिभा का धनी तथा कला प्रेमी होता है। जीवन में उत्साह व उमंग भरने वाली विद्या में उसकी सहज रुचि होती है। तंत्र-मंत्र या दर्शन शास्त्र उसे सहज आकर्षित करते हैं।

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