चोरी हुई वस्तु को ढूंढे मिलेगी या नहीं जानिए ज्योतिष के माध्यम से
खोयी या चोरी हुई वस्तु मिलेगी या नहीं, जानें प्रश्न कुण्डली से
चोरी के प्रश्न में चोर के स्वरुप तथा अन्य बातों का पता चल जाता है यदि कुण्डली का विश्लेषण भली-भाँति किया जाए. इसके लिए लग्न, चन्द्रमा तथा अन्य संबंधित भाव का बारीकी से अध्ययन करना चाहिए. आइए इस कडी़ में सबसे पहले आपको चोर के स्वरुप के बारे में आंकलन करना बताएँ.
चोरज्ञान-प्रश्नलग्न स्थिर राशि हो या स्थिर राशि के नवमांश में प्रश्नलग्न हो अथवाअपने वर्गोत्तम नवमांश की प्रश्नलग्न राशि हो तो बन्धु, स्वजातीय, उच्चजातीय व्यक्ति यादास को चोर समझना चाहिए।
प्रश्नलग्न प्रथम द्ेष्काण में हो तो चोरी गयी चीज घर के द्वार के पास; द्वितीय ट्रेककाणमें हो तो घर के मध्य में और तृतीय द्रेष्काण में हो तो घर के पीछे के भाग में होती है।
लग्न में पूर्ण चन्द्र हो और उसके ऊपर गुरु की दृष्टि हो तथा शीर्षोदय रशि३।५।६।७।८1११ लग्न में हों तथा लग्न में बलवान् और शुभग्रह स्थित हों और लग्नेश,सप्तमेश, दशमेश, लाभेश, बलवान् चन्द्रमा परस्पर मित्र हों या इत्थशाल आदि शुम योगकरते हों तो चोरी गयी वस्तु की पुनः प्राप्ति हो जाती है।
बली या पूर्ण चन्द्र लग्न में, शुभग्रह शीर्षोदय या एकादश में हों तथा शुभग्रह से युतया दृष्ट हों तो नष्टधन-चोरी गया धन मिल जाता है। पूर्ण चन्द्र लग्न में हो, गुरु या शुक्की उस पर दृष्ट अथवा शुभग्रह ११वें भाव में हों तो भी चोरी गया धन मिल जाता है।
प्रश्नकाल में जो ग्रह केन्द्र में हो उसकी दिशा में चोरी की वस्तु को कहना चाहिए।यदि केन्द्र में दो या बहुत से ग्रह हों तो उनमें से जो बली हो, उस ग्रह की दिशा में नष्टधनकहना चाहिए। यदि केन्द्र में ग्रह नहीं हो तो लग्न राशि की दिशा में चोरी गयी वस्तुबतलानी चाहिए। सप्तम स्थान में शुभग्रह हो या लग्नेश सप्तम स्थान में बैठा हो अथवाक्षीण चन्द्रमा सप्तम भवन में हो तो चोरी गयी या भूली हुई वस्तु मिलती नहीं है। सप्तमेशव चन्द्रमा सूर्य के साथ स्थित हों तो चोरी गयी वस्तु मिलती नहीं। ३।५।७।११वें स्थान मेंशुभग्रह हों तो प्रश्नकर्ता का. धन मिल जाता है।
लग्न पर सूर्य, चन्द्रमा की दृष्टि हो तो आत्मीय चोर होता है; लग्नेश और सप्तमेशलग्न में हो तो कुटुम्ब का व्यक्ति चोर होता है। सप्तमेश २।१२वें स्थान में, हो तो नौकरचोर होता है। मेष प्रश्न लग्न हो तो ब्राह्मण चोर, वृष हो तो क्षत्रिय चोर, मिथुन लग्न होतो वैश्य चोर, कर्क लग्न हो तो शूद्र चोर, सिंह लग्न हो ती अन्त्यज चोर, कन्या लग्न होतो स्त्री चोर, तुला लग्न हो तो पुत्र, भाई या मित्र चोर, वृश्चिक हो तो नौकर, धनु होतो स्त्री या भाई चोर, मकर हो. तो वैश्य, कुम्भ हो तो मनुष्येतर प्राणी चूहा आदि औरमीन हो तो ऐसे ही भूली हुई समझना चाहिए।
चर प्रश्न लग्न हो तो दो अक्षर के नामवाला चोर, स्थिर हो तो चार अक्षर केनामवाला चोर और द्विस्वभाव लग्न हो 'तो तीन अक्षर के नामवाला चोर होता है।
ज्योतिष में एक सिद्धान्त यह भी बताया गया है कि प्रश्नलग्न चर हो तो चोर केनाम का पहला अक्षर संयुक्त होता है, जैसे द्वारिका, ब्रजरल आदि। स्थिर लग्न हो तोकृदन्त-पदसंजक वर्ण चोर के नाम का प्रथम अक्षर होता है, जैसे मंगलसेन, भवानी शंकरइत्यादि। द्विस्वभाव लग्न हो तो स्वरवर्ण चोर के नाम का प्रथम -अक्षर होता है, जैसेईश्वरीप्रसाद, उजागरसिंह, उग्रसेन इत्यादि। चोर का विशेष स्वरूप लग्न के ट्रेष्काण' केअनुसार जानना चाहिए।
* प्रश्न कुण्डली के लग्न में स्थिर राशि(2,5,8 या 11 राशि) हो, स्थिर राशि का नवाँश हो या वर्गोत्तम नवाँश हो तो चोरी किसी संबंधी द्वारा की जाती है.
* प्रश्न कुण्डली के लग्न में चर राशि(1,4,7 या10 राशि) हो तो किसी बाहर के व्यक्ति ने चोरी की है.
* प्रश्न कुण्डली के लग्न में द्वि-स्वभाव राशि(3,6,9 या 12 राशि) हो तो चोरी पडो़सी ने की है.
इसके अतिरिक्त यदि यह देखना चाहिए कि चोरी का सामान कहाँ गया है. इसे देखने के लिए कई योग मौजूद होते हैं.
* प्रश्न कुण्डली में लग्न में स्थिर राशि हो तो चोरी हुआ सामान उसी स्थान पर है जिस स्थान पर चोरी हुई है. यदि घर से सामान गुम हुआ है तो सामान घर में ही होता है.
* प्रश्न कुण्डली के लग्न में चर राशि है तो सामान घर के बाहर निकल चुका है.
* प्रश्न कुण्डली के लग्न में द्वि-स्वभाव राशि है तो चोरी का सामान घर के बाहर जमीन में गाडा़ जा चुका है.
विभिन्न लग्नों के आधार पर चोर का ज्ञान प्राप्त करना |Various Lagnas to Find Out Facts About the Thief
प्रश्न के समय बारह राशियों में से कोई एक राशि लग्न में उदय होती है. इन राशियों के आधार पर चोर के बारे में जाना जा सकता है कि वह किस जाति का है. आइए विभिन्न लग्नों के आधार पर चोर की जाति के विषय में जानकारी हासिल करें.
* प्रश्न कुण्डली के लग्न में मेष राशि है तो चोर की ब्राह्मण जाति है.
* प्रश्न कुण्डली के लग्न में वृष राशि हो तो चोर क्षत्रिय जाति का होगा.
* प्रश्न लग्न मिथुन राशि का हो तो चोर वैश्य जाति का होगा.
* प्रश्न कुण्डली के लग्न में कर्क राशि हो तो चोर शूद्र जाति का होगा.
* प्रश्न लग्न में सिंह राशि हो तो चोर अन्त्यज(चांडाल) जाति का होगा.
* प्रश्न लग्न में कन्या राशि हो तो स्त्री चोर होती है.
* प्रश्न लग्न में तुला राशि हो तो मित्र अथवा पुत्र चोर होता है.
* प्रश्न लग्न में वृश्चिक राशि हो तो नौकर चोर होता है.
* प्रश्न लग्न में धनु राशि हो तो भाई चोर होता है.
* प्रश्न लग्न में मकर राशि हो तो चोर दासी होती है.
* प्रश्न कुण्डली में कुम्भ लग्न हो तो सामान चूहा ले जाता है.
* प्रश्न कुण्डली में मीन लग्न हो तो व्यक्ति स्वयं चोर होता है.
चोर की पहचान के अन्य योग | Other Yogas to Identity the Thief
* प्रश्न कुण्डली के लग्न पर सूर्य और चन्द्रमा की मित्र दृष्टि हो तो प्रश्न कर्त्ता का अपन अकोई जान-पहचान वाला व्यक्ति चोर होता है.
* यदि सूर्य और चन्द्रमा की शत्रु दृष्टि लग्न पर हो तो किसी शत्रु की साजिश द्वारा चोरी कराई गई है.
* यदि प्रश्न कुण्डली के लग्न में ही लग्नेश तथ सप्तमेश का इत्थशाल हो तो व्यक्ति स्वयं चोर होता है.
* प्रश्न कुण्डली में चतुर्थ भाव में सप्तमेश उच्च राशि में स्थित हो तो माता, मौसी, मामी, चाची या ताई में से कोई चोर होता है.
* प्रश्न कुण्डली में सप्तमेश उच्च राशि में लग्न या तृतीय स्थान में बैठा हो तो चोर उच्च तथा प्रसिद्ध घराने का होता है.
* प्रश्न कुण्डली में स्त्री ग्रह सप्तमेश होकर सप्तम भाव में हो तो भाई, भतीजे या पुत्रवधु चोर होती है.
* प्रश्न कुण्डली में पुरुष ग्रह सप्तम भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव में हो तो परिवार का कोई सदस्य चोर होता है.
अब मान लिया कोई इंसान जिसके घर में कीमती और बहुमूल्य वस्तुओं की चोरी हो गयी है, वह यदि प्रश्नकर्ता की हैसियत से प्रश्न ज्योतिष विशेषज्ञ के पास आता है और सविनय अनुरोध करता है कि उसके घर में हुई चोरी की घटना में उसकी सहायता करने की कृपा करें तो ऐसे में प्रश्न ज्योतिर्विद उसके प्रश्न पूछने के वक्त को नोट कर उसके आधार पर प्रश्न कुण्डली का निर्माण कर लेता है।
इसके पश्चात वह लग्नादि ग्रहों की विवेचना करते हुए चोरी गयी वस्तु और उस घटना से संबंधित सभी विवरणों की समीक्षा करता है तत्पश्चात वह अपना निष्कर्ष सामने रखता है।
प्रश्न ज्योतिर्विद प्रश्न कुण्डली के लग्न से प्रश्नकर्ता का, चंद्र से चोरी हुई वस्तु का, चतुर्थ भाव से चोरी हुई वस्तु और उसकी पुनः प्राप्ति का, सप्तम भाव से चोर का, अष्टम भाव से चोर द्वारा जमा धन का तथा दशम भाव से पुलिस या सरकार का विचार करता है। चोरी हुई वस्तु के मिलने के योग तब बनते हैं जबकि लग्नेश सप्तम में और सप्तमेश लग्न में हो। लग्नेश और सप्तमेश का सप्तम स्थान में इत्थशाल हो। लग्नेश और दशमेश का इत्थशाल हो। तृतीयेश या नवमेश का सप्तमेश से इत्थशाल हो। चंद्र जिस राशि में स्थित हो उसका स्वामी चंद्रमा को पूर्ण मित्र दृष्टि से देख रहा हो। या फिर सूर्य और चंद्र दोनों लग्न को देखते हों। शुभ ग्रहों का चंद्र से इत्थशाल हो और चंद्र, लग्न या धन स्थान में हो। अष्टमेश अष्टम या सप्तम स्थान में हो। सप्तमेश और सूर्य चंद्र के साथ अस्त हों।
तृतीय स्थान में पापग्रह और पंचम स्थान में शुभ ग्रह हों तो चोर स्वयं धन वापस कर देता है। तुला, वृष या कुंभ लग्न में चोरी का सामान निश्चित रूप से मिल जाता है।
किंतु यदि लग्नेश और द्वितीयेश में इत्थशाल न हो तो ऐसे में चोरी हुई वस्तु की सूचना मिल जाने के बावजूद वह वस्तु वापस पाने की संभावना क्षीण होती है।
ज्योतिष से कैसे पता करें किसने की है आपके घर में चोरी और कहां रखा है सामान , इन तरीको से आप चोरी हुए सामान का पता कर सकते हैं।
कभी-कभी घरों में छोटी मोटी चोरी की घटना घट जाती है। तब एक छटपटाहट सी रहती है, चोर कौन हो सकता है। ज्योतिष द्वारा इसका सटीक पता प्रश्न कुंडली से लगाया जाता है। जब भी चोरी का पता लगता है, उस समय को नोट कर लीजिये, प्रश्न कुंडली बनायें।
मेष या वृषभ लग्न- पूर्व दिशा
मिथुन लग्न- अग्नि कोण
कर्क लग्न- दक्षिण
सिंह लग्न- नैरित्य कोण
कन्या लग्न- उत्तर दिशा
तुला और वृश्चिक लग्न- पश्चिम दिशा
धनु लग्न- वायव्य कोण
मकर और कुम्भ लग्न- उत्तर दिशा
मीन लग्न- इशान कोण
उपरोक्त लग्नों में खोयी वस्तु, उसके दिखाए गए लग्नो के सामने की दिशा में गयी है। चोरी करने वाला कौन हो सकता है ? नीचे लिखे लग्नों के आधार पर पता लगाया जा सकता है।
मेष लग्न- ब्राह्मण या सम्मानीय भद्र पुरुष
वृषभ लग्न- क्षत्रिय
मिथुन लग्न- वेश्य
कर्क लग्न- शुद्र या सेवक वर्ग
सिंह लग्न- स्वजन या आत्मीय व्यक्ति
कन्या लग्न- कुलीन स्त्री ,घर की बहू -बेटी या बहन
तुला लग्न- पुत्र ,भाई या जमाता
वृश्चिक लग्न- इतर जाति का व्यक्ति
धनु लग्न- स्त्री
मकर लग्न- वेश्य या व्यापारी
कुम्भ लग्न- चूहा
मीन लग्न- खोयी घर में ही पड़ी है कहीं
चोरी हुई वस्तु कहां छिपाई गयी?
-लग्नेश और सप्तमेश का आपस में परिवर्तन या दोनों एक ही भाव में हो तो वस्तु घर में ही कहीं छुपी या छुपाई गयी है।
-चंद्रमा अगर लग्न में हो तो वस्तु पूर्व दिशा में होगी और अगर सप्तम में हो तो वस्तु पश्चिम में मिलेगी। चंद्रमा अगर दशम ने हो तो दक्षिण और चतुर्थ में हो तो वस्तु उत्तर दिशा में मिलेगी।
-अगर लग्न में अग्नितत्व राशि ( मेष, सिंह, धनु ) हो तो वस्तु घर के पूर्व, अग्नि -स्थान, रसोई घर में ही मिल जाती है।
-लग्न में अगर पृथ्वी -तत्व राशि ( वृषभ, कन्या, मकर ) हो तो वस्तु दक्षिण दिशा में भूमि में दबी मिलेगी।
-अगर लग्न में वायु -तत्व राशि ( मिथुन, तुला, कुम्भ ) हो तो वस्तु पश्चिम दिशा में हवा में लटकाई गयी है।
-लग्न में जल-तत्व राशि ( कर्क, वृश्चिक, कुम्भ ) हो तो वस्तु जलाशय के पास या उसके आस-पास उत्तर दिशा में मिलेगी।
चोरी गई वस्तु का पता भी बताता है ज्योतिष शास्त्र
ज्योतिष के अनुसार अलग-अलग नक्षत्रों में चोरी गई वस्तुओं के मिलने या न मिलने का अलग-अलग परिणाम होता है। जिस समय हमें अपनी चोरी गई वस्तु का पता लगे उस समय के नक्षत्र या अंतिम बार आपने फलां वस्तु को किस वक्त देखा था, उस समय के नक्षत्र के अनुसार चोरी गई वस्तु का विचार किया जाता है।
आइये जानते हैं किस नक्षत्र का क्या परिणाम होता है:
1. रोहिणी, पुष्य, उत्तरा फाल्गुनी, विशाखा, पूर्वाषाढ़ा, धनिष्ठा और रेवती को ज्योतिष में अंध नक्षत्र माना गया है। इन नक्षत्रों में चोरी होने वाली वस्तु पूर्व दिशा में जाती है और जल्दी मिल जाती है। इन नक्षत्रों में यदि कोई वस्तु चोरी हुई है तो वह अधिक दूर नहीं जाती है उसे आसपास ही तलाशना चाहिए।
2. मृगशिरा, अश्लेषा, हस्त, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, शतभिषा, अश्विनी ये मंद नक्षत्र कहे गए हैं। इन नक्षत्रों में यदि कोई वस्तु चोरी होती है तो वह तीन दिन में मिलने की संभावना रहती है। इन नक्षत्रों में गई वस्तु दक्षिण दिशा में प्राप्त होती है। साथ ही वह वस्तु रसोई, अग्नि या जल के स्थान पर छुपाई होती है।
3. आर्द्रा, मघा, चित्रा, ज्येष्ठा, अभिजीत, पूर्वाभाद्रपद, भरणी ये मध्य लोचन नक्षत्र होते हैं। इन नक्षत्रों में चोरी गई वस्तुएं पश्चिम दिशा में मिल जाती हैं। वस्तु के संबंध में जानकारी 64 दिनों के भीतर मिलने की संभावना रहती है। यदि 64 दिनों में न मिले तो फिर कभी नहीं मिलती। इस स्थिति में वस्तु के अत्यधिक दूर होने की जानकारी भी मिल जाती है, लेकिन मिलने में संशय रहता है।
4. पुनर्वसु, पूर्वाफाल्गुनी, स्वाति, मूल, श्रवण, उत्तराभाद्रपद, कृतिका को सुलोचन नक्षत्र कहा गया है। इनमें गई वस्तु कभी दोबारा नहीं मिलती। वस्तु उत्तर दिशा में जाती है, लेकिन पता नहीं लगा पाता कि कहां रखी गई है या आप कहां रखकर भूल गए हैं।
भद्रा, व्यतिपात और अमावस्या में गया धन प्राप्त नहीं होता।
प्रश्न: लग्न के अनुसार भी चोरी गई वस्तु के संबंध में विचार किया जाता है। यदि कोई व्यक्ति चोरी गई वस्तु के संबंध में जानने के लिए आए और प्रश्न करे तो जिस समय वह प्रश्न करे उस समय की लग्न कुंडली बना लेना चाहिए। या जिस समय वस्तु चोरी हुई है उस समय गोचर में जो लग्न चल रहा था उसके अनुसार फल कथन किया जाता है।
चोर ब्राह्मण वर्ग का व्यक्ति होता है
1. मेष लग्न मेष वस्तु चोरी हुई हो प्रश्नकाल में मेष लग्न हो तो चोरी गई वस्तु पूर्व दिशा में होती है। चोर ब्राह्मण वर्ग का व्यक्ति होता है और उसका नाम स अक्षर से प्रारंभ होता है। नाम में दो या तीन अक्षर होते हैं।
2. वृषभ लग्न में वस्तु चोरी हुई हो तो वस्तु पूर्व दिशा में होती है और चोर क्षत्रिय वर्ण का होता है। उसके नाम में आदि अक्षर म रहता है तथा नाम चार अक्षरों वाला होता है।
3. मिथुन लग्न में चोरी गई वस्तु आग्नेय कोण में होती है। चोरी करने वाला व्यक्ति वैश्य वर्ण का होता है और उसका नाम क ककार से प्रारंभ होता है। नाम में तीन अक्षर होते हैं।
4. कर्क लग्न में वस्तु चोरी होने पर दक्षिण दिशा में मिलती है और चोरी करने वाला शूद्र होता है। उसका नाम त अक्षर से प्रारंभ होता है और नाम में तीन वर्ण होते हैं।
वस्तु नैऋत्य कोण में होती है
5. सिंह लग्न में चोरी हो तो वस्तु नैऋत्य कोण में होती है। चोरी करने वाला नौकर, सेवक होता है। चोर का नाम न से प्रारंभ होता है और नाम तीन या चार अक्षरों का होता है।
6. प्रश्नकाल या चोरी के समय कन्या लग्न हो तो चोरी गई वस्तु पश्चिम दिशा में होती है। चोरी करने वाली कोई स्त्री होती है और उसका नाम म से प्रारंभ होता है। नाम में कई वर्ण हो सकते हैं।
7. चोरी के समय तुला लग्न हो तो वस्तु पश्चिम दिशा में जानना चाहिए। चोरी करने वाला पुत्र, मित्र, भाई या अन्य कोई संबंधी होता है। इसका नाम म से प्रारंभ होता है और नाम में तीन वर्ण होते हैं। तुला लग्न में गई वस्तु बड़ी कठिनाई से प्राप्त होती है।वस्तु नैऋत्य कोण में होती है
8. वृश्चिक लग्न में चोरी गई वस्तु पश्चिम दिशा में होती है। चोर घर का नौकर ही होता है और उसका नाम स अक्षर से प्रारंभ होता है। नाम चार अक्षरों वाला होता है। चोरी करने वाला उत्तम वर्ण का होता है।
9. प्रश्नकाल या चोरी के समय धनु लग्न हो तो चोरी गई वस्तु वायव्य कोण में होती है। चोरी करने वाली कोई स्त्री होती है और उसका नाम स अक्षर से प्रारंभ होता है। नाम में चार वर्ण पाए जाते हैं।
10. चोरी के समय मकर लग्न हो तो चोरी गई वस्तु उत्तर दिशा में समझनी चाहिए। चोरी करने वाला वैश्य जाति का होता है। नाम चार अक्षरों का होता है और वह स से प्रारंभ होता है।
11. प्रश्नकाल या चोरी के समय कुंभ लग्न हो तो चोरी गई वस्तु उत्तर या उत्तर-पश्चिम दिशा में होती है। इस प्रश्न लग्न के अनुसार चोरी करने वाला व्यक्ति कोई मनुष्य नहीं होता बल्कि चूहों या अन्य जानवरों के द्वारा इधर-उधर कर दी जाती है।
12. मीन लग्न में वस्तु चोरी हुई हो तो वस्तु ईशान कोण में होती है। चोरी करने वाला निम्न जाति का व्यक्ति होता है। वह व्यक्ति चोरी करके वस्तु को जमीन में छुपा देता है। ऐसे चोर का नाम व अक्षर से प्रारंभ होता है और उसके नाम में तीन अक्षर रहते हैं। चोर कोई परिचित महिला या नौकरानी भी हो सकती है।
चोरी के प्रश्न में चोर के स्वरुप तथा अन्य बातों का पता चल जाता है यदि कुण्डली का विश्लेषण भली-भाँति किया जाए. इसके लिए लग्न, चन्द्रमा तथा अन्य संबंधित भाव का बारीकी से अध्ययन करना चाहिए. आइए इस कडी़ में सबसे पहले आपको चोर के स्वरुप के बारे में आंकलन करना बताएँ.
* प्रश्न कुण्डली के लग्न में स्थिर राशि(2,5,8 या 11 राशि) हो, स्थिर राशि का नवाँश हो या वर्गोत्तम नवाँश हो तो चोरी किसी संबंधी द्वारा की जाती है.
* प्रश्न कुण्डली के लग्न में चर राशि(1,4,7 या10 राशि) हो तो किसी बाहर के व्यक्ति ने चोरी की है.
* प्रश्न कुण्डली के लग्न में द्वि-स्वभाव राशि(3,6,9 या 12 राशि) हो तो चोरी पडो़सी ने की है.
इसके अतिरिक्त यदि यह देखना चाहिए कि चोरी का सामान कहाँ गया है. इसे देखने के लिए कई योग मौजूद होते हैं.
* प्रश्न कुण्डली में लग्न में स्थिर राशि हो तो चोरी हुआ सामान उसी स्थान पर है जिस स्थान पर चोरी हुई है. यदि घर से सामान गुम हुआ है तो सामान घर में ही होता है.
* प्रश्न कुण्डली के लग्न में चर राशि है तो सामान घर के बाहर निकल चुका है.
* प्रश्न कुण्डली के लग्न में द्वि-स्वभाव राशि है तो चोरी का सामान घर के बाहर जमीन में गाडा़ जा चुका है.
विभिन्न लग्नों के आधार पर चोर का ज्ञान प्राप्त करना |
प्रश्न के समय बारह राशियों में से कोई एक राशि लग्न में उदय होती है. इन राशियों के आधार पर चोर के बारे में जाना जा सकता है कि वह किस जाति का है. आइए विभिन्न लग्नों के आधार पर चोर की जाति के विषय में जानकारी हासिल करें.
* प्रश्न कुण्डली के लग्न में मेष राशि है तो चोर की ब्राह्मण जाति है.
* प्रश्न कुण्डली के लग्न में वृष राशि हो तो चोर क्षत्रिय जाति का होगा.
* प्रश्न लग्न मिथुन राशि का हो तो चोर वैश्य जाति का होगा.
* प्रश्न कुण्डली के लग्न में कर्क राशि हो तो चोर शूद्र जाति का होगा.
* प्रश्न लग्न में सिंह राशि हो तो चोर अन्त्यज(चांडाल) जाति का होगा.
* प्रश्न लग्न में कन्या राशि हो तो स्त्री चोर होती है.
* प्रश्न लग्न में तुला राशि हो तो मित्र अथवा पुत्र चोर होता है.
* प्रश्न लग्न में वृश्चिक राशि हो तो नौकर चोर होता है.
* प्रश्न लग्न में धनु राशि हो तो भाई चोर होता है.
* प्रश्न लग्न में मकर राशि हो तो चोर दासी होती है.
* प्रश्न कुण्डली में कुम्भ लग्न हो तो सामान चूहा ले जाता है.
* प्रश्न कुण्डली में मीन लग्न हो तो व्यक्ति स्वयं चोर होता है.
चोर की पहचान के अन्य योग |
* प्रश्न कुण्डली के लग्न पर सूर्य और चन्द्रमा की मित्र दृष्टि हो तो प्रश्न कर्त्ता का अपन अकोई जान-पहचान वाला व्यक्ति चोर होता है.
* यदि सूर्य और चन्द्रमा की शत्रु दृष्टि लग्न पर हो तो किसी शत्रु की साजिश द्वारा चोरी कराई गई है.
* यदि प्रश्न कुण्डली के लग्न में ही लग्नेश तथ सप्तमेश का इत्थशाल हो तो व्यक्ति स्वयं चोर होता है.
* प्रश्न कुण्डली में चतुर्थ भाव में सप्तमेश उच्च राशि में स्थित हो तो माता, मौसी, मामी, चाची या ताई में से कोई चोर होता है.
* प्रश्न कुण्डली में सप्तमेश उच्च राशि में लग्न या तृतीय स्थान में बैठा हो तो चोर उच्च तथा प्रसिद्ध घराने का होता है.
* प्रश्न कुण्डली में स्त्री ग्रह सप्तमेश होकर सप्तम भाव में हो तो भाई, भतीजे या पुत्रवधु चोर होती है.
* प्रश्न कुण्डली में पुरुष ग्रह सप्तम भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव में हो तो परिवार का कोई सदस्य चोर होता है.
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चोरी हुई वस्तु मिलेगी या नहीं :-
चोरी हुई वस्तु मिलेगी या नहीं जानिए ज्योतिष के माध्यम से :-
जिस दिन चोरी या सामान गुम हुआ हो उस दिन के नक्षत्र के आधार पर खोई वस्तु के विषय में जानकारी प्राप्त की जा सकती है .खोये सामान की जानकारी मिलेगी अथवा नहीं मिलेगी? इस बात का पता भी नक्षत्रों के अनुसार चल जाता है. सभी 28 नक्षत्रों को चार बराबर भागों में बाँट दिया गया है. एक भाग में सात नक्षत्र आते हैं. उन्हें अंध, मंद, मध्य तथा सुलोचन नाम दिया गया है. इन नक्षत्रों के अनुसार चोरी की वस्तु का दिशा ज्ञान तथा फल ज्ञान के विषय में जो जानकारी प्राप्त होती है वह एकदम सटीक होती है.
नक्षत्रों का लोचन ज्ञान :-
अंध लोचन में आने वाले नक्षत्र:- रेवती, रोहिणी, पुष्य, उत्तराफाल्गुनी, विशाखा, पूर्वाषाढा़, धनिष्ठा.
मंद लोचन में आने वाले नक्षत्र :-अश्विनी, मृगशिरा, आश्लेषा, हस्त, अनुराधा, उत्तराषाढा़, शतभिषा.
मध्य लोचन में आने वाले नक्षत्र :-भरणी, आर्द्रा, मघा, चित्रा, ज्येष्ठा, अभिजित, पूर्वाभाद्रपद.
सुलोचन नक्षत्र में आने वाले नक्षत्र :-कृतिका, पुनर्वसु, पूर्वाफाल्गुनी, स्वाति, मूल, श्रवण, उत्तराभाद्रपद.
नक्षत्रों के द्वारा जानिए :-
यदि वस्तु अंध लोचन में खोई है तो वह पूर्व दिशा में शीघ्र मिल जाती है.
यदि वस्तु मंद लोचन में गुम हुई है तो वह दक्षिण दिशा में होती है और गुम होने के 3-4 दिन बाद कष्ट से मिलती है. यदि वस्तु मध्य लोचन में खोई है तो वह पश्चिम दिशा की ओर होती है और एक गुम होने के एक माह बाद उस वस्तु की जानकारी मिलती है. ढा़ई माह बाद उस वस्तु के मिलने की संभावना बनती है. यदि वस्तु सुलोचन नक्षत्र में गुम हुई है तो वह उत्तर दिशा की ओर होती है. वस्तु की ना तो खबर ही मिलती है और ना ही वस्तु ही मिलती है.
चोरी हुई वस्तु मिलेगी या नहीं जानिए ज्योतिष के माध्यम से :-
जिस दिन चोरी या सामान गुम हुआ हो उस दिन के नक्षत्र के आधार पर खोई वस्तु के विषय में जानकारी प्राप्त की जा सकती है .खोये सामान की जानकारी मिलेगी अथवा नहीं मिलेगी? इस बात का पता भी नक्षत्रों के अनुसार चल जाता है. सभी 28 नक्षत्रों को चार बराबर भागों में बाँट दिया गया है. एक भाग में सात नक्षत्र आते हैं. उन्हें अंध, मंद, मध्य तथा सुलोचन नाम दिया गया है. इन नक्षत्रों के अनुसार चोरी की वस्तु का दिशा ज्ञान तथा फल ज्ञान के विषय में जो जानकारी प्राप्त होती है वह एकदम सटीक होती है.
नक्षत्रों का लोचन ज्ञान :-
अंध लोचन में आने वाले नक्षत्र:- रेवती, रोहिणी, पुष्य, उत्तराफाल्गुनी, विशाखा, पूर्वाषाढा़, धनिष्ठा.
मंद लोचन में आने वाले नक्षत्र :-अश्विनी, मृगशिरा, आश्लेषा, हस्त, अनुराधा, उत्तराषाढा़, शतभिषा.
मध्य लोचन में आने वाले नक्षत्र :-भरणी, आर्द्रा, मघा, चित्रा, ज्येष्ठा, अभिजित, पूर्वाभाद्रपद.
सुलोचन नक्षत्र में आने वाले नक्षत्र :-कृतिका, पुनर्वसु, पूर्वाफाल्गुनी, स्वाति, मूल, श्रवण, उत्तराभाद्रपद.
नक्षत्रों के द्वारा जानिए :-
यदि वस्तु अंध लोचन में खोई है तो वह पूर्व दिशा में शीघ्र मिल जाती है.
यदि वस्तु मंद लोचन में गुम हुई है तो वह दक्षिण दिशा में होती है और गुम होने के 3-4 दिन बाद कष्ट से मिलती है.
यदि वस्तु मध्य लोचन में खोई है तो वह पश्चिम दिशा की ओर होती है और एक गुम होने के एक माह बाद उस वस्तु की जानकारी मिलती है. ढा़ई माह बाद उस वस्तु के मिलने की संभावना बनती है.
यदि वस्तु सुलोचन नक्षत्र में गुम हुई है तो वह उत्तर दिशा की ओर होती है. वस्तु की ना तो खबर ही मिलती है और ना ही वस्तु ही मिलती है.
प्रश्न कुंडली के द्वारा जाने :-
यदि लग्न को लग्नेश और चंद्र दोनों ही देखते हों तो कार्य पूर्ण रूप से सिद्ध होता है।
यदि उदित प्रश्न लग्न के भाव 1, 4, 5, 7, 9 या 10 में शुभ ग्रह स्थित हो और कोई अशुभ ग्रह नहीं हो तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है।
प्रश्न कुंडली से कार्य के पूर्ण होने में लगने वाले समय का विचार
प्रश्न लग्न और चंद्र के बीच में जितने राशि के अंक आते हैं, उतने दिन कार्य को पूरा करने में लगते हैं।
प्रश्न लग्न के नवांश लग्न का अंक अर्थात् राशि तथा नवांश लग्नेश की राशि का अंक देखते ही जो अंक, राशि के होंगे, उनके स्वामी होंगे, वे ही दिन-माह बताएंगे। ग्रहों के अनुसार समय निर्धारण सूर्य – अयन ( 6 माह) चंद्र – मिनट मंगल – दिन बुध – एक ऋतु गुरु – माह शुक्र – पक्ष (15 दिन) शनि – वर्ण कार्य की सफलता का प्रतिशत यदि प्रश्न कुंडली के लग्न पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो कार्य में 25 प्रतिशत सफलता मिलती है। यदि प्रश्न लग्न पर लग्नेश की दृष्टि हो अर्थात् प्रश्न लग्न अपने स्वामी से दृष्ट हो तो 50 प्रतिशत सफलता मिलती है। यदि प्रश्न लग्न अपने स्वामी तथा किसी एक शुभ ग्रह से दृष्ट हो तो 75 प्रतिशत सफलता मिलती है। यदि प्रश्न लग्न अपने स्वामी और किन्हीं दो शुभ ग्रहों से दृष्ट हो तो 85 प्रतिशत सफलता मिलती है। यदि प्रश्न लग्न अपने स्वामी के अतिरिक्त गुरु, शुक्र, बुध तथा चंद्र अर्थात् सभी शुभ ग्रहों से दृष्ट हों तो 100 प्रतिशत सफलता मिलती है।
चोरी और गायब सामान का प्रश्न हल करने की विधि ;-
लग्न से प्रश्नकर्ता का, चंद्र से खोए हुए सामान का, चतुर्थ भाव से खोए सामान और उसकी पुनः प्राप्ति का, सप्तम भाव से चोर का, अष्टम भाव से चोर द्वारा जमा धन का तथा दशम भाव से पुलिस या सरकार का विचार किया जाता है।
सिद्धि/कार्य नाश: प्रश्न फल कथन की अंकों वाली यह विधि भी ठीक है जिसमें पृच्छक से 1 से 108 तक के अंकों के मध्य की कोई भी संख्या पूछी जाती है और वह जो संख्या बतलाता है उसमें 12 का भागकर बची हुई संख्या अर्थात शेष के आधार पर इस प्रकार फलकथन किया जाता है। 0, 2, 6 या 11 शेष बचे तो कार्य सिद्ध होगा। 4, 5, 8 या 10 शेष बचे तो कार्य सिद्ध नहीं होता। 1, 7 या 9 शेष बचे तो कार्य विलंब से सिद्ध होता