अंक ज्योतिष सम्पूर्ण सार संग्रह
अंक ज्योतिष सम्पूर्ण सार संग्रह
ज्योतिष केवल भाग्य जानने का एक आसान ज़रिया नहीं है, बल्कि ये एक विज्ञान भी है। ज्योतिष का क्षेत्र तो काफी विस्तृत है परंतु अंक शास्त्र का क्षेत्र ज्योतिष की तुलना में सीमित है। अंकों का हमारे जीवन में बहुत बड़ा योगदान है। अंक विज्ञान ज्योतिष की ही एक शाखा है। कोई वाहन खरीदते समय हम गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर अपने अनुकूल लेना चाहते है। मकान खरीदते समय, व्यवयास शुरू करते समय या परीक्षाओं में रोल नंबर आदि को हम हमेशा ये देखते है कि वो अंक हमारे अनुकूल है या नहीं। हर जगह हम अंकों में अपना भविष्यफल खोजने लगते हैं। आजकल बड़े-बड़े फिल्मी सितारें, बड़ी सफल हस्तियां भी अंक विज्ञान के प्रभाव से अछूती नहीं है।
अंक शास्त्र
अंक शास्त्र भविष्य कथन विज्ञान का एक प्रकार है जिसमें अंको के विश्लेषण द्वारा भविष्य कथन किया जाता है। अंक शास्त्र के अनुसार, लोगों के व्यक्तित्व और भविष्य के बारे में उनसे संबधित संख्या का विश्लेषण कर बहुत कुछ बताया जा सकता है। कई प्रकार के अंक और उनकी गणनाओं की तकनीक ने अंक शास्त्र को एक नए विशाल क्षेत्र तक पहुंचाया है। अंक शास्त्र में कई प्रकार के अंक होते है जैसे जीवन मार्ग अंक, जन्म अंक, व्यक्तित्व अंक, कार्मिक चक्र अंक आदि।
अंक ज्योतिष और ज्योतिष
ज्योतिष में मूल रूप से तीन तत्व हैं- ग्रह, राशि और नक्षत्र। ग्रह 9, राशियां 12 और नक्षत्र 27 होते हैं। अंक 1 से 9 तक होते हैं। नौ अंकों का संबंध 9 ग्रहों 12 राशियों और 27 नक्षत्रों के साथ जोड़कर भविष्यफल बताया जाता है। यदि कम प्रयास से अधिक गणना करनी हो या शुभ और अशुभ समय अर्थात शुभ वार, तिथि, मास, वर्ष, आयु, लग्न आदि जानना हो तो अंक शास्त्र का प्रयोग किया जाता है।
डेस्टिनी नंबर
अंक ज्योतिष में जिस अंक का सबसे अधिक महत्व होता है वह है भाग्यांक जिसे अंग्रेजी में लाइफ पाथ नंबर या डेस्टिनी नंबर भी कहा जाता है। भाग्यांक आपके जन्म की तारीख, महीने और वर्ष को जोड़ कर निकाला जाता है। इसके अनुसार आप अपने जीवन के हर साल के बारे में अनुमान लगाकर अपने कार्यों को उसी अनुरूप ढ़ाल सकते हैं।
अंकज्योतिष अंकों के आधार पर मनुष्य के भविष्य का आंकलन करता है। अंकज्योतिष एक नंबर या एक से अधिक नंबरों पर आधारित संगम घटनाओं के बीच के रहस्यमय संबंधों के बारे में बताता है। यह शब्द, नाम और विचारों के संख्यात्मक मूल्य का अध्ययन है। अंकशास्त्र विद्या में अंकों का विशेष स्थान होता है और हर व्यक्ति का एक अंक मुख्य अंक होता है जिसे अंक स्वामी बोलते हैं और इसी अंक स्वामी के द्वारा आपके भाग्य का आंकलन किया जाता है। आपके कॅरियर, व्यवसाय, नौकरी, प्रेम और आपके जीवन की हर छोटी व बड़ी बात को आपका स्वामी अंक तय करता है। अंकज्योतिष भविष्यफल पूरी तरह से मूलांक पर आधारित है। अंक ज्योतिष के अनुसार व्यक्ति के नाम के एल्फाबेट्स को जोड़कर भाग्यशाली अंक प्राप्त किया जा सकता है।
कीरो के अंक शास्त्र के शब्दांक
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ग्रहो के अंक
सूर्य =1
चंद्र =2
मंगल =9 मंगलवार
बुद्ध=5 बुधवार
बृहस्पति=3 बृहस्पतिवार
शुक्र=6 शुक्रवार
शनि=8 शनिवार
हर्षल, राहु =4 बुधवार, सोमवार, शनिवार
नेप्टून, केतु =7 गुरुवार,मंगल, रविवार
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नामांक के अक्षर के नंबर का विवरण
1= A,I,J,Q, Y
2 = B,K,R
3 = C,G,L,S
4 = D,M,T
5 = E,H,N,X
6 = U,V,W
7 = O,Z
8 = F,P
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मूलांक आपकी जन्म तरीक अगर दो अंक हो तो दोनों को आपस में जोड़े
जैसे 10 का 1+0=1
1, 10,19, 28
2, 11, 20, 29
3, 12, 21, 30
4, 13, 22, 31
5, 14, 23,
6, 15, 24,
7, 16, 25
8, 17, 26
9, 18, 27
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भाग्यांक
जन्म तारीक, महीना, साल को जोड़ कर जो एक अंतिम अंक प्राप्त हो जैसे
9 फ़रवरी 1985 तो 09-02-1985
0+9+0+2+1+9+8+5= 34
3+4=7
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नामांक वो जो नाम के अक्षरों के हिसाब के नंबर जो ऊपर तालिका में दिए है रख कर जोड़े और अंतिम अंक प्राप्त हो वो नामांक, जैसे
P A N K A J
8+1+5+2+1+1= 9
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स्तूपांक बनाने के लिए अंतिम अंक से पहले तक के नम्बरों को गुना करे जैसे पहले से दूसरे को ... और अंतिम को छोड़े जैसे
P A N K A J
8x1x5x2x1x1
8, 5, 1, 2, 1
4, 5, 2, 2
2, 1, 4
2, 4
8= स्तूपांक
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सयुक्तांक (भाग्याअंक)
= मूलांक + भाग्यांक + नामांक+ स्तूपांक
= 9 + 7 + 9 + 8
= 33 => 3+3= 6
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भाग्यशाली वर्ष निकाले
जन्म की तरीक, महीना, साल लिखे और जन्म के साल में जन्म तरीक एकबार ही जोड़े,और दूसरी बार आगे से आगे 9 जोड़े जैसे
09-02-1985
+ 09
_________
1994 भाग्य वर्ष
+ 09
_________
2003 भाग्य वर्ष
+ 09
__________
2012 भाग्य वर्ष
+ 09
__________
2021 भाग्य वर्ष
स्वामी
मूलांक - अंक ज्योतिष के अनुसार जन्म तारीख के कुल योग को मूलांक कहते है। जैसे अगर किसी व्यक्ति का जन्म 03-2-1990 को हुआ है तो उसका मूलांक होगा 0 +3 =3
भाग्यांक - आपके जन्म की तारीख, महीने और साल के कुल योग को भाग्यांक कहते है। जैसे अगर किसी व्यक्ति का जन्म 03-2-1990 को हुआ है तो उसका भाग्यांक होगा 0 +3 +2 +1 +9 + 9 +0 =24 =2 +4 = 6
सौभाग्य अंक - हर व्यक्ति का एक और अंक होता है जिसे सौभाग्य अंक कहते हैं। यह नम्बर परिवर्तनशील है। व्यक्ति के नाम के अक्षरों के कुल योग से बनने वाले अंक को सौभाग्य अंक कहा जाता है,
जैसे कि मान लो किसी व्यक्ति का नाम AMAN है, तो उसका सौभाग्य अंक A=1, M=4, A=1, N=5 = 1+4+1+5 =11 =1+1 = 2 होगा।
यदि किसी व्यक्ति का सौभाग्य अंक उसके अनुकूल नहीं है तो उसके नाम के अंको में घटा जोड़ करके सौभाग्य अंक को परिवर्तित किया जा सकता है जिससे कि सौभाग्य अंक उस व्यक्ति के अनुकूल हो सके। सौभाग्य अंक का सीधा सम्बन्ध मूलांक से होता है। व्यक्ति के जीवन में सबसे अधिक प्रभाव मूलांक का होता है। चूंकि मूलांक स्थिर अंक होता है तो वह व्यक्ति के वास्तविक स्वभाव को दर्शाता है तथा मूलांक का तालमेल ही सौभाग्य अंक से बनाया जाता है।
अंक ज्योतिष के आधार पर किसी व्यक्ति का भविष्य किस तरह ज्ञात किया जा सकता है।
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अंको के स्वाभाव मित्र एवं शत्रु :
अंक 1: इस अंक के जातकों का स्वभाव काफी उत्तेजक होता है। इन्हें गुस्सा भी जल्दी आता है। घूमने फिरने के शौकिन होते हैं। ये हमेशा दूसरों की नजर में पहले नंबर पर बना रहना चाहते हैं।
शुभ रंग- पीला
शुभ तिथि- 10 व 28
मित्र अंक- 2, 3, 6, 7, 9
शत्रु अंक: 4, 5
अंक 2: इन लोगों की तरफ कोई भी आसानी से आकर्षित हो जाता है। इन्हें दूसरों की सेवा करना काफी पसंद आता है। इन्हें सजने संवरने के साथ अच्छे भोजन का भी शौक होता है। लेकिन छोटी-छोटी बातों पर इन्हें बुरा लग जाता है।
शुभ रंग- समुद्री हरा
शुभ तिथि- 20 व 30
मित्र अंक- 1, 2, 4, 6, 7, 9
शत्रु अंक: 5
अंक 3: इस अंक के लोग काफी उत्साही होते हैं। इन्हें हर पल कुछ नया करने की चाह रहती है। ऐसे व्यक्ति अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए सदैव क्रियाशील रहते हैं। काफी परिश्रमी होते हैं।
शुभ रंग- जामुनी
शुभ तिथि- 9 व 27
मित्र अंक- 1, 5, 6, 9
शत्रु अंक: 3, 8
अंक 4: इस अंक के जातक क्रांतिकारी विचारों के होते हैं। इनमें कुछ नया करने की भावना होती है। स्वभाव में कुछ शक्की और वहमी होते हैं। ये मित्र को भी शत्रि बना लेते हैं।
शुभ रंग- पीला
शुभ तिथि- 10 व 19
मित्र अंक- 2, 4, 6, 7, 8, 9
शत्रु अंक: 1
अंक 5: ये लोग स्पष्टवादी और महत्वाकांक्षी होते हैं। ये अपनी वाणी व तर्कों से किसी को भी अपने वश में कर लेते हैं। इनका वैवाहिक जीवन कलहपूर्ण रहता है। सामाजिक कार्यों में इन्हें सफलता हासिल होती है।
शुभ रंग- हरा
शुभ तिथि- 23 व 30
मित्र अंक- 3
शत्रु अंक: 1, 2, 5
अंक 6: इस अंक के जातक काफी मेहनत करते हैं। इन्हें यात्राएं करना, मेल-मिलाप बढ़ाना, अच्छा खाना लेना, और सुंदर कपड़े पहनना काफी अच्छा लगता है। ये न्याय व आदर्श को काफी महत्व देते हैं।
शुभ रंग- गाजरी
शुभ तिथि- 6 व 23
मित्र अंक- 1, 2, 3, 4, 6, 9
शत्रु अंक: 9
अंक 7: इस अंक के जातक विस्फोटक विचारों के होते हैं। ये कल्पनाशील व विचारों के धनी होते हैं। इनका ध्यान धर्म की तरफ अधिक होता है। लेकिन इन्हें एकाकी जीवन जीना ज्यादा पसंद आता है। ये स्वभाव से काफी जिज्ञासु होते हैं।
शुभ रंग- सुनहरा
शुभ तिथि- 3 व 6
मित्र अंक- 1, 7, 9
शत्रु अंक: 2
अंक 8: इस अंक के लोग काफी सहनशील और छल कपट से दूर रहने वाले होते हैं। ये अपने मन की बात किसी से शेयर नहीं करते हैं। ये एकसाथ कई योजनाएं बना सकते हैं।
शुभ रंग- लाल
शुभ तिथि- 4 व 27
मित्र अंक- 4, 6
शत्रु अंक: 3
अंक 9: इस अंक के लोग नए विचारों को मानने वाले होते हैं। स्वभाव से काफी दयावान और हर पल संघर्ष करने वाले होते हैं। ये हर परिस्थिति का सामना बड़ी ही समझदारी से कर लेते हैं। इनका पारिवारिक जीवन सामान्य होता है।
शुभ रंग- संतरी
शुभ तिथि- 5, 9
मित्र अंक- 1, 2, 3, 4, 6, 7, 9
शत्रु अंक: 7, 5
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सनातन ज्योतिष और सनातन अंक शास्त्र:
भारत वो देश है जिसने शून्य और दशमलव दिए उसी क्रम में तिथि और राशियों का भी वर्गीकरण अंक शास्त्र के हिसाब से इस प्रकार है :
एक वर्ष के बारह मासों के नाम ये हैं-
राशि क्रम संख्या
• मेष 1= चैत्र चैत्रया चैत
• वृष 2=वैशाख या बैसाख
• मिथुन 3= ज्येष्ठ या जेठ
• कर्क 4=आषाढ या आसाढ़
• सिंह 5= श्रावण या सावन
• कन्या 6= भाद्रपद या भादों
• तुला 7= आश्विन या क्वार
• वृश्चिक 8= कार्तिक या कातिक
• धनु 9= अग्रहायण या अगहन या मार्गशीर्ष
चूंकि 1 से 9 तक के अंक के बाद के अंक ज्योतिष में पुनरावृत्ति होती है,
अतः हम 9 के बाद के वाले अंक को पुनः उसी क्रम में रखेंगे-
• मकर 10 = 1+0 = 1=पौष या पूस
• कुंभ 11 = 1+1 = 2=माघ
• मीन 12 = 1+2 =3=फाल्गुन या फागुन
इस प्रकार हम राशि के स्वामी का शुभ सहयोगी अर्थात सहानुभूति अंक प्राप्त कर सकते हैं।
राशि क्रम राशियां और उनके स्वामी
• 1, 8 मेष, वृश्चिक - मंगल
• 2, 7 वृष, तुला - शुक्र
• 3, 6 मिथुन, कन्या - बुध
• 4 कर्क - चन्द्र
• 5 सिंह - सूर्य
• 9, 3 धनु, मीन - गुरु
• 1, 2 मकर, कुंभ - शनि
चन्द्र व सूर्य मात्र एक-एक राशि के ही स्वामी हैं अतः इन्हें एकराशि स्वामी भी कहा जाता है। शेष को द्विराशि स्वामी कहा जाता है।
ज्योतिष और स्वामी अंक
• मंगल 9
• शुक्र 6
• बुध 5
नोट = राहु 4 तथा केतु 7 को हम क्रमशः सूर्य व चन्द्र के अंतर्गत रख सकते हैं।
• चन्द्र 2 - केतु 7
• सूर्य 1 - राहु 4
• गुरु 3
• शनि 8
इस प्रकार हम राशि क्रमों के योग से शुभ सहयोगी अंक प्राप्त कर सकते है।
राशियां क्रम सहयोगी अथवा शुभ अंक
• मेष+वृश्चिक 1 + 8 = 9
• वृष +तुला 2 + 7 = 9
• मिथुन+कन्या 3 + 6 = 9
• कर्क 4 = 4
• सिंह 5 = 5
• धनु+ मीन 9+3 = 12= 1+2 =3
• मकर+कुंभ 1+2 = 3
अतः स्पष्ट है कि मेष+वृश्चिक(1+8 = 9 योग) के स्वामी मंगल का अंक 9 है तथा दोनों राशियों के क्रम का योग भी 9 आ रहा है, अतः इस प्रकार दोनों राशि नामों का शुभ अंक 9 हुआ।
शुभ अंक निकालने की विधि-
शुभांक = (मूलांक +भाग्यांक + नामांक + स्तूपांक)
उदाहरणार्थ- यहां हम किसी व्यक्ति जिसका नाम अमन है उसका शुभांक निकालते हैं। मान लीजिए अमन का जन्म 1-2-1930 को हुआ। अतः
अमन का जन्म 1-2-1930 को हुआ था। अतः
मूलांक = 01 = 0 +1 = 1
अतः जन्मतिथि का मूलांक 2 हुआ।
अब भाग्यांक निकालने के लिए जन्मतिथि सहित माह एवं सन् सबको जोड़ लिया जाएगा।
जैसे भाग्यांक = 1-2-1930
0+1+2+1+9+3+0
= 16 = 1+6 = 7
अतः इनका भाग्यांक 7 और मूलांक 2 हैं।
भाग्यशाली अंक, अंकों के रंग और शुभ दिशा-
मूलांक 1 :- यह अंक स्वतंत्र व्यक्तित्व का धनी है। इससे संभावित अंह का बोध, आत्म निर्भरता, प्रतिज्ञा, दृढ़ इच्छा शक्ति एवं विशिष्ट व्यक्तित्व दृष्टि गोचर होता है। इसके स्वामी सूर्य हैं।
मूलांक 2 :- अंक दो का संबंध मन से है। यह मानसिक आकर्षण, हृदय की भावना, सहानुभूति, संदेह, घृणा एवं दुविधा दर्शाता है। इसका प्रतिनिधित्व चन्द्र को मिला है, इस अंक का स्वामी चंद्रमा है 2,11, 20, 29 तारीख अति शुभ हैं। रविवार, सोमवार एवं शुक्रवार श्रेष्ठ दिन हैं। सफेद एवं हल्का हरा इनके शुभ रंग हैं।
मूलांक 3 :- इस अंक के स्वामी देव गुरु बृहस्पति हैं। इससे बढ़ोत्तरी, बुद्धि विकास क्षमता, धन वृद्धि एवं सफलता मिलती है। 3, 12, 21 एवं 30 तारीख इनके लिए विशेष शुभ हैं। मंगलवार, गुरुवार एवं शुक्रवार श्रेष्ठ है। पीला एवं गुलाबी रंग अतिशुभ है। शुभ माह जनवरी एवं जुलाई है। दक्षिण, पश्चिम एवं अग्नि कोण श्रेष्ठ दिशा है।
मूलांक 4 :- इस अंक से मनुष्य की हैसियत, भौतिक सुख संपदा, सम्पत्ति, कब्जा, उपलब्धि एवं श्रेय प्राप्त होता है। इसका प्रतिनिधि हर्षल और राहु हैं। 2, 11, 20 एवं 29 तारीख शुभ है। रविवार, सोमवार एवं शनिवार श्रेष्ठ दिन हैं, जिसमें शनिवार सर्वश्रेष्ठ है। नीला एवं भूरा रंग शुभ है।
मूलांक 5 :- इस अंक का स्वामी बुध है। शुभ तिथि 5, 14 एवं 23 है। सोमवार, बुधवार एवं शुक्रवार श्रेष्ठ है। उसमें शुक्रवार सर्वाधिक शुभ है। सफेद, खाकी एवं हल्का हरा रंग इनके लिए शुभ है। इनके लिए अशुभ अंक 2, 6 और 9 है।
मूलांक 6 :- इस अंक का स्वामी शुक्र है। छह का अंक वैवाहिक जीवन, प्रेम एवं प्रेम-विवाह, आपसी संबंध, सहयोग, सहानुभूति, संगीत, कला, अभिनय एवं नृत्य का परिचायक है। शुभ तिथि माह की 6,15 एवं 24 तारीख है। मंगलवार, गुरुवार एवं शुक्रवार श्रेष्ठ दिन है जिसमें शुक्रवार सर्वश्रेष्ठ है। आसमानी, हल्का एवं गहरा नीला एवं गुलाबी रंग शुभ हैं। लाल एवं काले रंग का प्रयोग वर्जित है।
मूलांक 7 :- इस अंक का स्वामी केतु है। सात का अंक आपसी ताल मेल, साझेदारी, समझौता, अनुबंध, शान्ति, आपसी सामंजस्य एवं कटुता को जन्म देता है। महीना के 7, 16 एवं 25 तारीख सर्वश्रेष्ठ है। 21 जून से 25 जुलाई तक का समय भी श्रेष्ठ है। रविवार, सोमवार एवं बुधवार श्रेष्ठ हैं। जिसमें सोमवार सर्वश्रेष्ठ है। शुभ रंग हरा, सफेद एवं हल्का पीला है।
मूलांक 8 :- इस अंक का स्वामी शनि हैं। 8, 17 एवं 26 तारीख श्रेष्ठ तिथि हैं। शनि का अंक होने से इस अंक से क्षीणता, शारीरिक मानसिक एवं आर्थिक कमजोरी, क्षति, हानि, पूर्ननिर्माण, मृत्यु, दुःख, लुप्त हो जाना या बहिर्गमन हो जाता है, रविवार, सोमवार एवं शनिवार शुभ हैं। जिसमें शनिवार सर्वाधिक शुभ है। भूरा, गहरा नीला, बैगनी, सफेद एवं काला शुभ रंग है। हृदय एवं वायु रोग इनके प्रभाव क्षेत्र हैं। दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम एवं दक्षिण-पूर्व दिशा शुभ हैं।
मूलांक 9 :- अंक नौ का स्वामी मंगल है। इस मूलांक के लोगों पर मंगल ग्रह का प्रभाव सर्वाधिक है। यह अन्तिम ईकाई अंक होने से संघर्ष, युद्ध, क्रोध, ऊर्जा, साहस एवं तीव्रता देता है। इससे विभक्ति, रोष एवं उत्सुकता प्रकट होती है। इसका प्रतिनिधि मंगल ग्रह है जो युद्ध का देवता है 9, 18 एवं 27 श्रेष्ठ तारीख है। मंगलवार, गुरुवार एवं शुक्रवार शुभ दिन है। गहरा लाल एवं गुलाबी शुभ रंग है। पूर्व, उत्तर-पूर्व एवं उत्तर-पश्चिम दिशा अतिशुभ हैं। हनुमान जी की आराधना श्रेष्ठ है।
अंकज्योतिष में नौ ग्रहों सूर्य, चन्द्र, गुरू, यूरेनस, बुध, शुक्र, वरूण, शनि और मंगल की विशेषताओं के आधार पर गणना की जाती है। इन में से प्रत्येक ग्रह के लिए 1 से लेकर 9 तक कोई एक अंक निर्धारित किया गया है, कौन से ग्रह पर किस अंक का असर होता है। ये नौ ग्रह मानव जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं।
आइये जाने किस अंक का कौन स्वामी है :-
जन्म तारीख 1, 10, 19, 28 का मूलांक 1 का स्वामी सूर्य है
2, 11, 20, 29 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक- 2 स्वामी चंद्रमा
3, 12, 21, 30 मूलांक- 3, स्वामी गुरू
4, 13, 22, 31 मूलांक 4 का स्वामी- राहु
5, 14, 23 मूलांक 5 स्वामी बुध
6, 15, 24 मूलांक 6 स्वामी शुक्र
7, 16, 25 मूलांक 7 स्वामी केतु
8, 17, 26 मूलांक 8 स्वामी- शनि-
9, 18, 27 मूलांक 9 स्वामी मंगल
(2)अंकशास्त्र में मुख्य रूप से नामांक (Name Number), मूलांक (Root Number) और भाग्यांक (Destiny Number) इन तीन विशेष अंकों को आधार मानकर फलादेश किया जाता है. विवाह के संदर्भ में भी इन्हीं तीन प्रकार के अंकों के बीच सम्बन्ध को देखा जाता है.
अंक ज्योतिष (Numerology) भविष्य जानने की एक विधा है. अंक ज्योतिष से ज्योतिष की अन्य विधाओं की तरह भविष्य और सभी प्रकार के ज्योंतिषीय प्रश्नों का उत्तर ज्ञात किया जा सकता है. विवाह जैसे महत्वपूर्ण विषय में भी अंक ज्योतिष और उसके उपाय काफी मददगार साबित होते हैं.
अंक ज्योंतिष अपने नाम के अनुसार अंक पर आधारित है. अंक शास्त्र के अनुसार सृष्टि के सभी गोचर और अगोचर तत्वों अपना एक निश्चत अंक होता है. अंकों के बीच जब ताल मेल नहीं होता है तब वे अशुभ या विपरीत परिणाम देते हैं. अंकशास्त्र में मुख्य रूप से नामांक, मूलांक और भाग्यांक इन तीन विशेष अंकों को आधार मानकर फलादेश किया जाता है. विवाह के संदर्भ में भी इन्हीं तीन प्रकार के अंकों के बीच सम्बन्ध को देखा जाता है. अगर वर और वधू के अंक आपस में मेल खाते हैं तो विवाह हो सकता है. अगर अंक मेल नहीं खाते हैं तो इसका उपाय करना होता है ताकि अंकों के मध्य मधुर सम्बन्ध स्थापित हो सके.
वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) एवं उसके समानांतर चलने वाली ज्योतिष विधाओं में वर वधु के वैवाहिक जीवन का आंकलन करने के लिए जिस प्रकार से कुण्डली से गुण मिलाया जाता ठीक उसी प्रकार अंकशास्त्र में अंकों को मिलाकर
(Numerology Marriage compatibility) वर वधू के वैवाहिक जीवन का आंकलन किया जाता है.
अंकशास्त्र से वर वधू का गुण मिलान
(Matching for marriage through Numerology)
काकिनी गणना
हम अक्सर इस असमंजस में रहते है की किस व्यक्ति, देश, राज्य, शहर,गांव वस्तु इत्यादि से लेनिया है या देनिया
है
या
किसी दूसरे शहर में काम करने का सोच रहे है तो कितना फल दायक है या फायदा है
या
अमुख स या व्यक्ति में से कोन कितना फायदे में रहेगा इत्यादि
उसके लिए प्रस्तुत है काकिनी गणना
उसके लिए हम 8 वर्ग बना लेते है जो इस प्रकार है
1.अ आ इ ई उ ऊ ए ऐ ओ औ अं(गरुड़)
२ . क ख ग घ ड़ (मार्जर)
3. च छ ज झ ञ (सिंह)
4. ट ठ ड ढ ण. (स्वान)
5. त थ द ध न (सर्प)
6. प फ ब भ म (मूषक)
7.य र ल व (मृग)
8.श ष स ह त्र ज्ञ(मेढ़ा)
नियम:
हर वर्ग अपने से 5 वे वर्ग का शत्रु है
समझने के लिए उदाहरण
मान लीजिये की पंकज को अहमदाबाद में जाकर रहना है बसना है या रोज़गार बाबत काम करना है वो जगह उसके लिए शुभ सफल और फायदेमंद लाभदायक सिद्ध होगी की नहीं
तो इसकेलिए
Step:1
जाने वाले के नाम का पहला अक्षर
,यहाँ (प)
और जगह शहर जहा जानाै का पहला अक्षर, यहाँ (अ)
Step२ :
अब (प) किस वर्ग संख्या के अंदर आता है देखे , यहाँ (6) को 2 से गुणा करे यानि
6x2 =12 (गुणनफल1)
अब इस गुणनफल में जगह के की वर्ग संख्या को जोड़े , यहाँ (1) को जोड़े
12 +1=13 (जोड़फल1)
अब इस (जोड़फल) में 8 का भाग दे शेष जो बचे वो काकिनी संख्या
13÷8 शेष बचा 5(काकिनी संख्या 1 )
Step3:
अब इसी प्रणाली को प्रयोग करके
जगह शहर का पहला अक्षर और जाने वाले का पहले अक्षर की अदला बदली करे, यहाँ देखे
(अ) वर्गांक (1)
1x2 = 2 (गुणनफल2 )
2+6= 8 (जोड़फल 2)
8÷8 शेष बचा 0(काकिनी संख्या २ )
Step4:
अब दोनों काकिनी संख्याओं को तराजू में टोले यानि
पंकज(काकिनी संख्या)= 8
अहमदाबाद (काकिनी सँख्या)=0
यहा केमिस्ट्री के घनात्मक और ऋणात्मक आदान प्रदान का सिद्धांत लागू होता है, जैसे
पंकज अहमदाबाद
k.no(8) > k.no(0)
ऋणात्मक(-tive). घनात्मक(+tive)
ज्यादा अंकवाला काम अंक वाले को देता है तो पंकज को अहमदाबाद से कोई फायदा (लेनिया) उल्टा (देनिया) है, जबकि अहमदाबाद को पंकज से (लेनिया)फायदा है l
इस प्रकार दो व्यक्ति ,वस्तु, स्थान, इत्यादि के बीच लेनिया और दैनीया gain & loss ज्ञात किया जा सकता है l
अंकशास्त्र में वर एवं वधू के वैवाहिक गुण मिलान के लिए, अंकशास्त्र के प्रमुख तीन अंकों में से नामांक ज्ञात किया जाता है. नामांक ज्ञात करने के लिए दोनों के नामों को अंग्रेजी के अलग अलग लिखा जाता है. नाम लिखने के बाद सभी अक्षरों के अंकों को जोड़ा जाता है जिससे नामांक ज्ञात होता है. ध्यान रखने योग्य तथ्य यह है कि अगर मूलक 9 से अधिक हो तो योग से प्राप्त संख्या को दो भागों में बांटकर पुन: योग किया जाता है. इस प्रकार जो अंक आता है वह नामांक होता है. उदाहरण से योग 32 आने पर 3+2=5. वर का अंक 5 हो और कन्या का अंक 8 तो दोनों के बीच सहयोगात्मक सम्बन्ध रहेगा, अंकशास्त्र का यह नियम है.
वर वधू के नामांक का फल
(Matching by Name Number)
अंकशास्त्र के नियम के अनुसार अगर वर का नामांक 1 है और वधू का नामांक भी एक है तो दोनों में समान भावना एवं प्रतिस्पर्धा रहेगी जिससे पारिवारिक जीवन में कलह की स्थिति होगी. कन्या का नामांक 2 होने पर किसी कारण से दोनों के बीच तनाव की स्थिति बनी रहती है. वर 1 नामांक का हो और कन्या तीन नामांक की तो उत्तम रहता है दोनों के बीच प्रेम और परस्पर सहयोगात्मक सम्बन्ध रहता है. कन्या 4 नामंक की होने पर पति पत्नी के बीच अकारण विवाद होता रहता है और जिससे गृहस्थी में अशांति रहती है. पंचम नामंक की कन्या के साथ गृहस्थ जीवन सुखमय रहता है. सप्तम और नवम नामाक की कन्या भी 1 नामांक के वर के साथ सुखमय वैवाहिक जीवन का आनन्द लेती है जबकि षष्टम और अष्टम नामांक की कन्या और 1 नमांक का वर होने पर वैवाहिक जीवन के सुख में कमी आती है.
वर का नामांक 2 हो और कन्या 1 व 7 नामांक की हो तब वैवाहिक जीवन के सुख में बाधा आती है. 2 नामांक का वर इन दो नामांक की कन्या के अलावा अन्य नामांक वाली कन्या के साथ विवाह करता है तो वैवाहिक जीवन आनन्दमय और सुखमय रहता है. तीन नामांक की कन्या हो और वर 2 नामांक का तो जीवन सुखी होता है परंतु सुख दुख धूप छांव की तरह होता है. वर 3 नामांक का हो और कन्या तीन, चार अथवा पांच नामांक की हो तब अंकशास्त्र के अनुसार वैवाहिक जीवन उत्तम नहीं रहता है. नामांक तीन का वर और 7 की कन्या होने पर वैवाहिक जीवन में सुख दु:ख लगा रहता है. अन्य नामांक की कन्या का विवाह 3 नामांक के पुरूष से होता है तो पति पत्नी सुखी और आनन्दित रहते हैं.
4 अंक का पुरूष हो और कन्या 2, 4, 5 अंक की हो तब गृहस्थ जीवन उत्तम रहता है. चतुर्थ वर और षष्टम या अष्टम कन्या होने पर वैवाहिक जीवन में अधिक परेशानी नहीं आती है. 4 अंक के वर की शादी इन अंकों के अलावा अन्य अंक की कन्या से होने पर गृहस्थ जीवन में परेशानी आती है. 5 नामांक के वर के लिए 1, 2, 5, 6, 8 नामांक की कन्या उत्तम रहती है. चतुर्थ और सप्तम नामांक की कन्या से साथ गृहस्थ जीवन मिला जुला रहता है जबकि अन्य नामांक की कन्या होने पर गृहस्थ सुख में कमी आती है. षष्टम नामांक के वर के लिए 1एवं 6 अंक की कन्या से विवाह उत्तम होता है. 3, 5, 7, 8 एवं 9 नामांक की कन्या के साथ गृहस्थ जीवन सामान्य रहता है और 2 एवं चार नामांक की कन्या के साथ उत्तम वैवाहिक जीवन नहीं रह पाता.
वर का नामांक 7 होने पर कन्या अगर 1, 3, 6, नामांक की होती है तो पति पत्नी के बीच प्रेम और सहयोगात्मक सम्बन्ध होता है. कन्या अगर 5, 8 अथवा 9 नामंक की होती है तब वैवाहिक जीवन में थोड़ी बहुत परेशानियां आती है परंतु सब सामान्य रहता है. अन्य नामांक की कन्या होने पर पति पत्नी के बीच प्रेम और सहयोगात्मक सम्बन्ध नहीं रह पाता है. आठ नामांक का वर 5, 6 अथवा 7 नामांक की कन्या के साथ विवाह करता है तो दोनों सुखी होते हैं. 2 अथवा 3 नामांक की कन्या से विवाह करता है तो वैवाहिक जीवन सामान्य बना रहता है जबकि अन्य नामांक की कन्या से विवाह करता है तो परेशानी आती है. 9 नामांक के वर के लिए 1, 2, 3, 6 एवं 9 नामांक की कन्या उत्तम होती है जबकि 5 एवं 7 नामांक की कन्या सामान्य होती है. 9 नामांक के वर के लिए 4 और 8 नामांक की कन्या से विवाह करना अंकशास्त्र की दृष्टि से शुभ नही होता है.
अंक ज्योतिष (Numerology)
संसार में ज्योतिष की कई शाखाऎं (Branches Of Astrology) हैं, जिनमें से अंक ज्योतिष भी एक है. सामान्यतय ज्योतिष में ग्रहो का प्रभाव कार्य करता है. प्रत्येक ग्रह किसी न किसी नम्बर से जुडा हुआ है या हुम इस प्रकार भी कह सकते हैं कि कोइ एक नम्बर किसी ग्रह विशेष का प्रतिनिधित्व करता है,
जैसे कि 1 नम्बर सूर्य (1 Number of Sun), 2 नम्बर चन्द्र (2 Number of Moon) तथा 9 नम्बर मंगल (9 Number Of Mars) या इत्यादि. नम्बर 1 से 9 तक ही लिए जाते हैं. 0 को इसमें सम्मिलित नही किया गया है. ग्रह भी 9 ही होते हैं, अतः प्रत्येक ग्रह का एक विशेष अंक है. पाश्चात्य अंक ज्योतिष (Numerology) सात ग्रहो के अलावा नैपच्यून व यूरेनस को क्रमशः आठवाँ व नौवा ग्रह मानता है. जबकि भारतीय अंक ज्योतिष राहु-केतु को आठवें एंव नवें ग्रह के रुप में लेता है. भारतीय एंव पाश्चात्य अंक ज्योतिष के फलादेश (Jyotish Phaladesh) कथन में थोडा सा अन्तर रहता है…………अब हम अंक ज्योतिष विज्ञान के कार्य करने के तरीके (Method Of Numerology) की विवेचना करेंगे. वैसे तो अंक ज्योतिष में बहुत सारी परिभाषाएँ सामने आती हैं, परन्तु हम इसमें मुख्य रुप से दो परिभाषाओ मूलांक (Root Number/ Ruling Number) तथा भाग्यांक (Fadic Number) की ही चर्चा करेंगे. किसी भी व्यक्ति की जन्म तारीख उसका मूल्यांक होता है. जैसे कि 2 जुलाई को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 2 होता है तथा 14 सितम्बर वाले का 1+4 = 5. तथा किसी भी व्यक्ति की सम्पूर्ण जन्म तारीख के योग को घटा कर एक अंक की संख्या को उस व्यक्ति विशेष का भाग्यांक( Bhagya Anka) कहते हैं, जैसे कि 2 जुलाई 1966 को जन्मे व्यक्ति का भाग्यांक 2+07+1+9+6+6= 31 = 3+1= 4, होगा. मूलांक तथा भाग्यांक स्थिर होते हैं, इनमें परिवर्तन सम्भव नही. क्योंकि किसी भी तरीके से व्यक्ति की जन्म तारीख बदली नही जा सकती…………
व्यक्ति का एक और अंक होता है जिसे सौभाग्य अंक (Destiny Number/ Lucky Number) कहते हैं. यह नम्बर परिवर्तनशील है. व्यक्ति के नाम के अक्षरो के कुल योग से बनने वाले अंक को सौभाग्य अंक कहा जाता है, जैसे कि मान लो किसी व्यक्ति का नाम RAMAN है, तो उसका सौभाग्य अंक R=2, A=1, M=4, A=1, एंव N=5 = 2+1+4+1+5 =13 =1+3 =4 होगा. यदि किसी व्यक्ति का सौभाग्य अंक उसके अनुकूल नही है तो उसके नाम के अंको में घटा जोड करके सौभाग्य अंक (Saubhagya Anka) को परिवर्तित कर सकते हैं, जिससे कि वह उस व्यक्ति के अनुकूल हो सके. सौभाग्य अंक का सीधा सम्बन्ध मूलांक से होता है. व्यक्ति के जीवन में सबसे अधिक प्रभाव मूलांक का होता है. चूंकि मूलांक स्थिर अंक होता है तो वह व्यक्ति के वास्तविक स्वभाव को दर्शाता है तथा मूलांक का तालमेल ही सौभाग्य अंक से बनाया जाता है.
व्यक्ति के जीवन में उतार-चढाव का कारण सौभाग्य अंक होता है. उदाहरण के लिए मान लो कि हम किसी शहर में जाकर नौकरी/ व्यवसाय करना चाहते हैं, तो हमें उस शहर का शुभांक (Shubha Anka) मालूम करना होगा फिर उस शुभांक को स्वंय के सौभाग्य अंक से तुलना करेंगे. यदि दोनो अंको में बेहतर ताल-मेल है अर्थात दोनो अंक आपस में मित्र ग्रुप के है तो वह शहर आपके अनुकूल होगा, और यदि दोनो अंक एक दूसरे से शत्रुवत व्यवहार रखते हैं तो उस शहर में आपके कार्य की हानि होगी. अब हमारे सामने दो विकल्प हैं, एक तो हम उस शहर विशेष को ही त्याग दें तथा अन्य किसी शहर में चले जायें, यदि एसा करना सम्भव न हो तो दूसरे विकल्प के रुप में हम अपने नाम के अक्षरो में इस प्रकार परिवर्तन करें कि वो उस शहर विशेष से भली भांति तालमेल बैठा लें. यही सबसे सरल तरीका है.
इस प्रकार हम अंक ज्योतिष के माध्यम से अपने जीवन को सुखी एंव समृद्ध बना सकते है एंव दुख व कष्टो को कम कर सकते हैं……………………….
(3).आपका मूलांक और व्यवसाय……………………………………………………………………..
जिनका जन्म 1, 10, 19, 28 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक एक होता है। एक अंक सूर्य का प्रतिनिधित्व करता है। एक अंक से प्रभावित व्यक्ति किसी के नियंत्रण में काम करना पसंद नहीं करते हैं। आजीविका की दृष्टि से आपके लिए दवा, ऊन, धान्य, सोना, मोती आदि का व्यापार अनुकूल रहेगा तथा इन क्षेत्रों में आप विशेष सफल होंगे।
जिनका जन्म 2, 11, 20, 23 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 2 होता है। अंक 2 का स्वामी चंद्रमा है। मूलांक दो वाले कोमल तथा बहुत ही सुंदर होते हैं। ये विनम्र, कल्पनाशील और भावुक होते हैं। आजीविका की दृष्टि से आपके लिए मोती, कृषि, बच्चों के खिलौने, फैंसी स्टोर, रेडीमेड स्टोर आदि का व्यापार विशेष सफलतादायक होगा।
जिनका जन्म 3, 12, 21, 30 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 3 होता है। अंक 3 का प्रतिनिधि ग्रह बृहस्पति है। तीन अंक वाले जातक निश्चित रू प से महत्वाकांक्षी तथा अनुशासनप्रिय होते हैं। अध्यापन वृत्ति तथा स्टेशनरी आदि के व्यापार से आजीविका प्राप्त होती है। 3 मूलांक के व्यक्ति अधिकांशत: सरकारी संस्थाओं में उच्च पदासीन देखे जाते हैं।
जिन व्यक्तियों का जन्म 4, 13, 22, 31 तारीख को होता है उनका मूलांक 4 होता है। भारतीय पद्धति के अनुसार इसका स्वामी ग्रह राहु है। इस अंक वाले व्यक्ति सात्विक ह्वदय एवं उदार प्रवृत्ति के होते हैं। ये स्पष्टवादी होते हैं। जीवन में प्राय: विरोधियों का सामना करना पड़ता है। आजीविका की दृष्टि से आपके लिए रेलवे, वायुयान, खान, तकनीक कार्य, पुरातत्व, ज्योतिष आदि कार्य अनुकूल रहेंगे।
जिनका जन्म 5, 14, 23 तारीख को होता है उनका मूलांक 5 होता है। अंक 5 का अधिष्ठाता बुध ग्रह है। पांच अंक वाले जातक वाक्पटु, व्यापारिक मानसिक वाले, पुष्ट शरीर व ठिगने कद के होते हैं। आजीविका की दृष्टि से आपके लिए लकड़ी का कारखाना, फर्नीचर, ज्योतिष, वैद्यक आदि कार्य सफलतादायक होंगे।
जिनका जन्म 6, 15, 24 तारीख को होता है उनका मूलांक 6 होता है। अंक 6 का स्वामी शुक्र है। इस अंक वाले लोगों में आकर्षण शक्ति विशेष होती है। ये लोकप्रिय होते हैं। आजीविका की दृष्टि से आपके लिए चौपायों के खरीदने-बेचने का कार्य, गुड़, चावल, किराना का व्यापार अथवा फैंसी स्टोर के व्यापार में सफलता प्राप्त होती है।
जिन व्यक्तियों का जन्म 7, 16, 25 तारीख को होता है उनका मूलांक 7 होता है। 7 अंक से प्रभावित जातक उग्र स्वभाव के, मौलिकतावादी, प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनी होते हैं। 7 अंक का अधिष्ठाता नेपच्यून [वरूण] ग्रह है। आजीविका की दृष्टि से आप दवा, घास, स्वर्ण, सेना में कार्य सफलतादायक होगा।
जिन व्यक्तियों का जन्म 8, 17, 26 तारीख को होता है उनका मूलांक 8 होता है। 8 अंक से प्रभावित जातक स्वभाव से हर बात की गहराई में जाने वाले होते हैं। ऎसे व्यक्ति जीवकाल में महžवपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। अंक 8 का स्वामी शनि है। आजीविका की दृष्टि से आप लोहे का व्यापार, तिल, तेल, ऊन आदि के व्यापार में विशेष प्रगति पा सकते हैं।
जिन व्यक्तियों का जन्म 9, 18, 27 तारीख को होता है उनका मूलांक 9 होता है। 9 अंक का स्वामी मंगल है। 9 अंक से प्रभावित जातक तेजस्वी व उग्र स्वभाव के होते हैं। आजीविका की दृष्टि से आप तांबा व पीतल के बर्तनों की दुकान एवं कोयला आदि के व्यापार में, सोना, पुलिस आदि क्षेत्रों में शीघ्र सफलता प्राप्त कर सकते हैं। -………………….
अंक ज्योतिष के अनुसार निन्म उपाय करे
मूलांक १ – श्री गणेश की पूजा करे और महीने में एक रविवार को गेहू दान करे
मूलांक २ – महालक्ष्मी की पूजा करे और महीने में एक सोमवार को चावल का दान करे
मूलांक ३ – श्री गणेश और लक्ष्मी की साथ में पूजा करे और महीने में एक गुरुवार को चने की दाल का दान करे
मूलांक ४ – श्री हनुमानजी का पूजन करे और महीने में एक शनिवार को काले तिल का दान करे
मूलांक ५ – श्री हरी विष्णु का पूजन करे और महीने में एक बुधवार को साबुत मुंग का दान करे
मूलांक ६ – आशुतोष शिव का पूजन करे और महीने में एक बार बुधवार को गाय को हरा चारा डाले
मूलांक ७ – हररोज शिवलिंग पर जलाभिषेक करे और हर मंगलवार को सफ़ेद तिल का दान करे
मूलांक ८ – श्री कृष्ण का पूजन करे और महीने के हर शनिवार को साबुत मुंग का दान करे
मूलांक ९ – श्री भैरव का पूजन करे और महीने में हर मंगलवार को मसूर की दाल का दान
गाड़ी नंबर और रंग
यदि आप अपनी गाड़ी का नंबर और रंग, अंक ज्योतिष के अनुसार रखें तो भविष्यमें होने वाली दुर्घटनाएं टल जाती है। जानिए अंक ज्यातिष के अनुसार कैसाहोना चाहिए आपका गाड़ी नंबर और रंग..
अंक- 1 आपको अपने वाहन के नंबर काकुल योग 1, 2, 4 या 7 रखना चाहिये। पीले, सुनहरे, अथवा हल्के रंग के वाहनखरीदना चाहिए। आप 6 या 8 नंबर वाला वाहन न रखें साथ ही नीले, भूरे, बैंगनीया काले रंग के वाहन न खरीदें।
अंक- 2 आपके लिए वो वाहन अनुकूल है जिनकाकुल योग 1, 2, 4 या 7 हो। 9 नंबर वाले वाहन ना रखें। आप सफेद अथवा हल्केरंग का वाहन खरीदें। लाल अथवा गुलाबी रंग की वाहन न लें।
अंक-3 आपकीगाड़ी नंबर का कुल योग 3,6, या 9 होना चाहिये। 5 या 8 नंबर वाला वाहन आपकेलिए अच्छा नही रहेगा। पीले, बैंगनी, या गुलाबी रंग का वाहन खरीदें। हल्केहरे, सफेद ,भुरे रंग के वाहनों से बचें।
अंक-4 इस अंक वालों की गाड़ीनंबर का कुल योग 1, 2, 4 या 7 होना चाहिये। इनको 9, 6 या 8 नंबर वाले वाहनसे हानि हो सकती है। नीले या भूरे रंग के वाहन खरीदें और गुलाबी या कालेरंग की वाहन न खरीदें।
अंक-5 अगर आपका मूलांक 5 है तो आपको गाड़ी नंबरका कुल योग 5 रखना चाहिये। 3, 9 या 8 नंबर वाला वाहन ना रखें। हल्के हरे, सफेद अथवा भुरे रंग का वाहन खरीदें। पीले, गुलाबी या काले रंग की वाहन सेहानि हो सकती है।
अंक-6 मूलांक 6 वालों को गाड़ी नंबर का कुल योग 3, 6, या 9 रखना चाहिये। 4 या 8 नंबर से बचें। आपको हल्के नीले, गुलाबी, अथवापीले रंग का वाहन खरीदना चाहिए। काले रंग का वाहन क्रय करने से बचें।
अंक -7 आपकी गाड़ी नंबर का कुल योग 1, 2, 4 या 7 होना चाहिए। 9 या 8 नंबर वालावाहन नही होना चाहिए। नीले, या सफेद रंग का वाहन खरीदें।
अंक-8 इस अंकवालों को अपना गाड़ी नंबर का कुल योग 8 रखना चाहिये। 1 या 4 नंबर वाला वाहनना रखें तो बेहतर होगा. आपका अंक शनि का अंक है। इसलिए आप काले, नीले, अथवा बैगनी रंग के वाहन खरीदें।
अंक-9 मूलांक 9 वाले लोग आपनी गाड़ीनंबर का कुल योग 9, 3, या 6 रखे तो उन्हे अच्छा लाभ मिलता है। 5 या 7 नंबरवाले वाहन से नुकसान हो सकता है। बेहतर होगा आप लाल, या गुलाबी रंग का वाहनखरीदें।
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