वृश्चिक (8) राशि का स्वभाव व्यक्तित्व जीवन शैली का विवेचन विश्लेषण विवरण

 वृश्चिक (8) राशि का स्वभाव व्यक्तित्व जीवन शैली का विवेचन विश्लेषण विवरण 


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12 राशियों में यह आठवीं राशि है। इसका निर्देशांक 8 है। विशाखा नक्षत्र का चौथा चरण, अनुराधा नक्षत्र के चार चरण एवं ज्येष्ठा नक्षत्र के चार चरण मिलकर वृश्चिक राशि बनती है। चंद्र के अंश नक्षत्र चरण नामाक्षर राशि नक्षत्र योनि नाड़ी | गण अंशकला से स्वामी स्वामी अंशकला 100.00 से 20.00 विशाखा 4 तो मंगल बृहस्पति व्याघ्र अन्त्य | मध्य आद्य राक्षस 03.20 से 16.40 अनुराधा 1 से 4 ना नी नू ने मंगल शनि मृग देव 16.40 से 30.00 ज्येष्ठा । सेब नै या यी यू मंगल बुध मृग इस राशि की आकृति बिच्छू जैसी है। यह राशि प्रेम और आसक्ति की प्रतीक है। विषुवत रेखा से 12 से 20 अंशों तक इस राशि का प्रभाव माना गया है।

विशेषताएं

इसे अंग्रेजी में स्कॉर्पियो (Scorpio) कहते हैं। बृहत्काय, स्त्री राशि, तीक्ष्ण डंक के बिच्छू के आकार की, डंक मारनेवाली, गुप्त जहर से युक्त, जड़संज्ञक, उत्तर दिशा में रहनेवाली, पाषाण, जहर, कृमि के छिद्रों में निवास करनेवाली सौम्यधर्मी, शांत लक्षणी, सुनहरे रंग की, तमोगुणी, जलतत्त्व की, दिवाबली, ब्राह्मण जाति की, शीर्षोदयी, सम राशि है। प्राकृतिक गुण दंभ, दृढ़ता, स्पष्टवादिता एवं स्वच्छता है। इस राशि का निवास स्थान मलय प्रदेश, स्वामी मंगल, दिन मंगलवार एवं अंक 9 है। शरीर में मूत्राशय, गुप्तांग, गुप्तेंद्रिय के नजदीक की हड्डी पर इस राशि का प्रभुत्व रहता है। लोहा, गन्ना, शक्कर, अल्कोहल, शराब, दवा, तेल, सुपारी, रूई, सरसों, विषैले एवं नशीले पदार्थ इस राशि के प्रभाव में रहते हैं। मेदिनीय ज्योतिषशास्त्र में नार्वे, मोरक्को, वाशिंगटन, ट्रॉन्सवाल, वरपूल, सिंधु एवं गंगा के उष्णकटीय प्रदेश का प्रतिनिधित्व यह राशि करती है। वृश्चिक राशि जन्मकुंडली में चन्द्रमा वृश्चिक राशि में हो, यानी भचक्र के आठवें खण्ड (210-2406) में उस समय हो जब जातक का जन्म हुआ था तो जातक की जन्मराशि वृश्चिक होती है। वृश्चिक राशि का राशीश मंगल है। पाश्चात्य ज्योतिष के अनुसार 24 अक्टूबर से 22 नवंबर के बीच उत्पन्न हुए जातक वृश्चिक राशि के वृश्चिक राशि के जातक रहस्यमयी स्वभाव के होते हैं। कोमलता और कठोरता, उदारता और संकीर्णता दोनों ही इनमें हो सकती हैं। ऊपर से प्रभावशाली दीखने वाले ये लोग भीतर से निम्न प्रवृत्ति के भी हो सकते हैं और सजन भी हो सकते हैं। शुभ ग्रहों का प्रभाव लग्न या राशि पर हो तो उच्च कोटि के आध्यात्मिक या विद्वान हो सकते हैं। अशुभ ग्रहों के प्रभाव में अधम और नीच भी हो सकते हैं। दोनों ही स्थितियों में ये अपने अपमान को भूलने वाले नहीं होते और उचित अवसर मिलते ही प्रतिशोध ले लेने वाले होते हैं। जताने की आदत भी होती है। ये सभ काम मन लगाकर करते है और अच्छा भी करते है किन्तु बोलकर उसपर पानी फेर देते है। अपनी सफलता का उत्सव भी मानते है। और पैसा खर्चकर प्रसिद्धि या अपनी प्रभुता प्रदर्शित करते है। liquidity का असर इनपर बोहोत होता है क्यूकी ये चन्द्र से जुड़ी है और यहा चन्द्र नीच का है तो ये तंगी मे दुखी और नाराज़ अनमने से और क्रोध मे होते है और जब पैसा आता है तो खुला खर्चा करते है।

बिच्छू की तरह प्रथम मिलन मे ये आपको डंक या चोट या व्यंग या मुक़ाबला करके या आज़माकर या बोली का झटका देकर स्वयं का introduction करवाते है, बातों के मैनीपुलटोर होते है तिल का ताड़ और राई का पहाड़ बनाने मे expert और उसमे स्वयं का तड़का देकर प्रस्तुत करना इनको चालक खिलाड़ी बनाता है, शतरंज, कुश्ती, बॉक्सिंग का खेल इनका सबसे प्रिय होता है, ऐसा कोई खेल जिसमे प्रतिस्पर्धा हो और हारजीत का मानसिक शारीरिक  द्वंध हो वो इनको परम प्रिय होगा, वृश्चिक राशि के जातक अपने आप में एक जिद्दी किस्म के बच्चे होते हैं। ये गुस्सैल और हठी होते हैं। इस राशि में जन्मे लोग भावुक और मुखर भी होते हैं। स्पस्टवादी बोली और कहरी खरी सुनाने की आदत होती है। वृष्चिक राशि के दृढ़ निश्चयी होते हैं। वृश्चिक राशि के जातक अधिकतर सच्चाई जानने के लिए खोजी हो जाते हैं। इस राशि चक्र समूह के लोग वास्तव में स्वतंत्र होते है। वे कई बार अपने काम के लिए दूसरे लोगों से मार्गदर्शन प्राप्त करना पसंद नहीं करते है। वे अपने निर्णय खुद लेते है। चाहे वह पढाई से सम्बंधित निर्णय हो या फिर अपने लिए जीवन साथी चुनना हो, वे अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय लेने में किसी भी तरह का हस्तछेप नहीं चाहते है। ये लोग वास्तव में बहुत उत्सुक होते है और जिस चीज़ को पसंद करते है उसे किसी भी कीमत पर हासिल करना चाहते है। कोई भी काम कितना कठिन क्यों न हो, अगर वृश्चिक राशि के लोगो ने इसे करने के बारे में तय किया है तो वे निश्चित रूप से इसे कर के ही रहेंगे। वास्तव में, वे अपने व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन दोनों के लिए बहुत भावुक होते है। ये चतुर व्यंग वाणी और अड़ियल लड़ाकू प्रतिस्पर्धा वाले दिमाग के लोग होते हैं। वृश्चिक राशि के लोग कुशल राजनीतिज्ञ होते हैं।वृश्चिक कभी शांत और हो सकते हैं। साथ ही रहस्यमयी दिखावटी व्यवहार भी इनकी खूबी है। हालांकि वृश्चिक राशि के जातक बड़बोले और स्पष्टवादी भी होते हैं।

वृश्चिक राशि में जन्मे लोग अपनी समझ के कारण बड़ी उम्र के दिखते हैं। वृश्चिक को बेईमानी बिल्कुल नहीं पचती है। ये बहुत ईर्ष्यालु प्रवत्ति के भी हो सकते हैं। हालांकि वृश्चिक राशि के लोग हिम्मती होते हैं ये किसी से नहीं डरते।चन्द्र कल्पना देता है किन्तु नीच का आधार हीन  और कृतिम स्वयं की सूझ बुझ से या समझ से या सुनीसुनायी से प्रेरित कल्पना को जन्म देता है, जो बातों को बढ़ा चढ़ाकर जनता के मन को घुमादे और अपना कृतिम प्रभाव बनाते है, जो इनको अच्छा sales manager या marketer बनाता है, ये बातों को लेकर बैठे रहते है, और प्रतिशोध की प्रतीक्षा करते है, दूध का व्यवसाय करने पर दुख दरिद्र और शोक प्राप्त करते है, ईर्ष्यालु प्रतिस्पर्धात्मकता सबसे बड़ा गुण है जो इनको इनके जीवन मे सफल बनाती है, मन बुद्धि और आत्मा की उचलकृतता तीव्रता और भावनात्मक संकीर्न्ता ही इनकी परिभाषा है, जिसको “ओछा” व्यक्तित्व कह सकते है, ये अत्यधिक परिश्रम युक्त बाधा युक्त और ऊर्जा नाशक तंत्र से कार्य का  प्रतिपादन करते है, अच्छे शोधकरता और छिद्रान्वेषी होते है, ये जो बात को एकबार मानते है उसको ही सत्य मानलेते है, पुरानी बातों को repeat telecast करते रहते है, एक प्रकार के Nostalgic नेचर वाले और भूत काल के अनुभव और वृद्ध लोगो के सान्निध्य से मिली बातों और मृत लोगो याद करते रहते है, ये उन सभी बातो को उसी ऊर्जा और काल्पनिक संवाद के साथ प्रस्तुत करते है, इस विशेष गुण के कारण अच्छे अभिनेता, कहानीकार, नाट्यलेखक  बनकर प्रसिद्ध होते है । इनको  विश्वाश किसी पर नहीं होता, और कोई मुझे ठग न ले का सवाल हमेशा से इनके शैली का एक हिस्सा होता है। और नवीन सत्य का अन्वेषन करने के बाद भी पूरा भरोसा नहीं दिखाते। ये बारीकी के काम मे घुससेंगे कुछ देर बाद गुटन महसूस करेंगे, धुनके पाके होंगे, कर्मक्षेत्र के महारथी होते है और उधयम और कर्म से जगत को जीतते है।  जलभय होता है या safocation का असर इनपर सबसे ज्यादा होता है। ये Asymetric या असंम्यतिक और hapahazard, अनियमित, ऊटपटाँग तरीके से कार्य को करते है। इनका हर क्षेत्र मे अनिर्णयात्मक अतिवाद रेहता है कभी तो बोहोत अच्छे और कभी बोहोत बुरे बनकर निकलते है। वृश्चिक राशि वाले बेहद भावुक के साथ कामुक भी होते हैं। इनको अप्राकृतिक मैथुन या पाशविक मैथुन करना पसंद होता है। love मे नहीं lust मे विश्वश रखते है।  इस राशि के लोग बुद्धिमान और ईमानदार जीवनसाथी चाहते हैं। प्यार होने पर वृश्चिक वफादार पार्टनर होते हैं। हालांकि, वे बहुत सतर्क होकर चुनते हैं क्योंकि इनके लिए किसी पर विश्वास करना मुश्किल होता है।

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ये खुद स्वयं को नीचा नहीं बताते, मन की व्याकुलता के कारण इनको इनको मनोरोग के लक्षण होते है, किन्तु मंगल की ऊर्जा इनको विपरीत परिस्थिति मे  सबसे बड़ा योद्धा दुसाहसी और निडर बनाती है, अच्छे कवि किन्तु निर्गुण और इशके हक़ीक़ी या वैराग्य भाव दैन्यभाव या वीरभाव को प्रस्तुत करते है, प्रेम भाव की कमी होती है,  ये प्यार मोहोबत की गाथा नहीं गा सकते किन्तु फूहड़ अश्लील नग्नता और मादकता के शौकीन होते है। भूक सहन नहीं होती, है स्वयं को ही श्रेष्ठ मानते है और सही मानते है और चालाकी से ये लोग सामान्यतः अड़ियल, हठी और प्रबल अहंवादी होते हैं। वृश्चिक एक जल राशि है। वृश्चिक राशि के जातक अपनी भावनाओं को काबू में रखते हैं। ये किसी ओर माध्यम से अपनी भावनाएं जताएंगे साथ ही कितनी ही कोशिश करने पर ये मन की बात नहीं देते हैं। ये हमेशा अपनी बातों को रहस्य बनाकर रहते हैं वृश्चिक राशि में मित्र बनाने की कला होती है। वृश्चिक राशि में जन्मे हमेशा काम के समय काम आते हैं। ये तर्कशील और बुद्धिमान होते हैं। वृश्चिक राशि वालों को मजाकिया संगति अच्छी लगती है। ये संगीत प्रेमी भी होते है। वृश्चिक राशि वाले परिवार के लिए जी जान से तैयार रहते हैं। पर कुछ लोगों से अनबन के कारण ये ईर्ष्या जता सकते हैं।ये हमेशा किसी भी गुट मे अपना अलग राग बजाते है, बुद्धि से नहीं मन से काम करते है,  कारण की चुकी चन्द्रमाँ इस राशि मे नीच का हो जाता है, चंद्रमा को मन का प्रतिनीधी कहा गया है, जो नीच होकर क्षीण और बल हीं होजता है, इस कारण भावनात्मक अभाव और स्नेह प्रेम भाव इमोशन की कमी होती है ये प्रेम नहीं समझते, इनके हिसाब से प्रेम देने वाला या करने वाला इनको ठगने आया है(स्थिति विशेष मे तो सही यानि व्यावसायिक क्षेत्र मे तो ये सफल और घरेलू स्थिति मे ये सबके तकलीफ का कारण बंजाति है) व्यक्तिगत मोह का इनको शौक होता है शायद यही चन्द्र का उच्च वृषभ(प्रेम) और नीच वृश्चिक(मोह, अर्थहीन भावुकता, ईर्ष्या, ड़ाह, द्वेष, उलहाना,), ये स्वभाव इनको लालची, लौलुप, लमपट, द्वेषी संकीर्ण बनाता है, चन्द्र जल प्रधान है और वृश्चिक राशि भी किन्तु इस राशि का स्वामी मंगल एक गरम गृह है और अंगार है, मंगल चुकी बुद्ध का शत्रु है तो यहा बुद्ध मंगल की गिरफ्त मे होता है, इस प्रकार  नीच बल हीं और तत्व हीन मन (चंद्र)(peace & Harmony) बुद्धि(brain-speechबुद्ध-वाणी) पर मंगल का प्रभुत्व दुसाहसी और Arrogant लड़ाकू बनाता है, और बुद्धि की की कमी या स्वतंत्रत नहीं होने से ये किसी भी कार्य को युक्ति पूर्ण नहीं करते बल्कि उसके छोटे छोटे अवयव और एक बोहोत परिश्रम पूर्ण और अनावश्यक अतिवाद के साथ कई और काम को भी खोल देते है जो इनसे संभालता नहीं, फिर किसी बुद्धि जीवी या बुद्ध प्रधान व्यक्ति जो युक्ति बुद्धि से कार्य करलेता है उससे घृणा और ईर्ष्या के साथ प्रतिस्पर्धा भी करते है,  इनका मन हमेशा पतीले मे चढ़े उबलते पानी की तरह होता है जो भाप बनकर उड़ता है और कम होता रेहता है, (जो इनके चेहरे के रूखे अभिव्यक्ति या परेशान, झुंझारू और गरविले अनुशाशनपूर्ण को व्यक्त करेंगे)।  जबतक उसमे वापस ठंडा पानी न डाला जाए तापमान बढ़ता जाएगा, इस क्रम को अमावस-पूनम से मेल कीजिये तो समझ आयेगा की ये लोग 15-15 दिन के ज्वार भाटे की तरह स्वभाव मे बदलाव को प्रदर्शित करेंगे, पूर्णिमा के दिन भावुक और तीव्रता के साथ ऊटपटाँग भावनात्मक भोलापन और अजीब अजीब से कृत्य और तर्क, किन्तु अमावस के दिन अंधेरे कमरे मे पलंग पर सो कर दुनिया से मुफेरकर किसी भी बात का सीधा सरल और कर्कश व्यंग्यात्मक उत्तर देना इनका स्वभाव है, आप स्वयं देखे हैरान होंगे, ये किसी के द्वारा लिखे बोले अक्षर को पकड़ते है और उसकी मौलिकता भावरस को नहीं समझते, इस कारण इनके संबंध इनके आस पास के लोगो से नरम गरम होते रहते है, ये अर्थहीन और अनैतिक भावनात्मकता का संतुलन नहीं रख पाते और कभी तो खुल के बरसेंगे और दिल लूटा कर निर्गुण निर्मोही बनकर त्याग का महिमा मंडन करेंगे और संकीर्न्ता पर उतरेंगे तो ये आपसे खिलाये पिलयाए एक एक घुट घुट निवाले का हिसाब मांगेंगे, भाव-तोल गणित(commercial mathematics) के विषय के जानकार और पारंगत होते है, वर्तमान मे आदरणीय नरेंद्र मोदी जी जो की हमारे देश के  प्रधान मंत्री है उनकी भी राशि वृश्चिक है, शाहरुख खान, बिल्ल्गटेस इत्यादि । ये अच्छे Auditor होते है और तारीफ नहीं करते आलोचनात्मक टिपन्नी और त्रुटिया गलतिया निकालना इंनका स्वभाव होता है, इनको तारीफ करना नहीं आता ये इसको अपने अहंकार से तोलते है। जिस व्यक्ति की तारीफ करनी होती है उसे प्रवचन और ज्ञान बाटते है, जिसका अगले आदमी को पूर्ण ज्ञान होता है, इस तरह ये इस प्रक्रिया मे भी अपनी ही महिमा को प्रस्तुत करने मे रहते है, और ये बताते है की हम किसी से कम नहीं, वृश्चिक राशि के लोग बहुत साहसी होते हैं और वे चुनौतियों से आसानी से नहीं डरते है। अगर आप कभी वृश्चिक राशि के व्यक्ति से मिले है तो आपको यह अवश्य पता होगा कि वे अपने कार्यों के प्रति कितने आश्वस्त होते है। आप इस राशि के लोगों को किसी व्यक्ति या किसी स्थिति से बहुत कम डरता हुआ देखेंगे। इन लोगो को अन्य राशि के लोगो की तुलना में बहुत साहसी माना जाता है और इन्हे अपने कठिन समय में भी किसी अन्य व्यक्ति की जरुरत बहुत कम होती है। ये अच्छे motivator होते है और सफल मार्गदर्शन करसकते है।  इस राशि की स्तरीय  वित्तीय विभाग, लेखाशाखा, कोशाध्यक्ष और मुनीम अक्सर ऐसे लोग सफल और प्रसिद्ध होते है। भावहीन और  शारीरिक शक्ति व साहस भी प्रचुर होता है। अत: किसी प्रकार का जोखिम उठाने से हिचकिचाते नहीं। आवश्यकता हो तो हिंसक भी हो जाते हैं। इनके इसी स्वभाव के कारण लोग इनसे भयग्रस्त रहते हैं। वृश्चिक राशि के जातक बुद्धि के कारण गणित में खास कामयाबी पाते हैं। ये राजनीति और कुशल कामों पर फोकस रहते हैं। वृश्चिक राशि के जातक वैज्ञानिक, चिकित्सक, शोधकर्ता, नाविक, जासूस, पुलिस, में करियर बनाते हैं। वृश्चिक राशि के जातक सम्मान के बदले सम्मान की उम्मीद रखता है। वृश्चिक राशि के जातक पैसों के मामले में थोड़े सतर्क रहते हैं। ये पैसों को फिजूल खर्च में नहीं उड़ाते हैं। पैसा इनकी जमापूंजी होता है ये निवेश करने से पहले काफी सोच समझकर फैसला लेते हैं।ये लोग लेखन (पत्र-लेखन विशेषकर) रुचि रखते हैं। इनका लेख भी प्रायः अच्छा होता है। किन्तु इनमें जन्मजात आक्रोश या आत्मघात की प्रवृत्ति भी होती है। अत: बावजूद संघर्षशील होने के ये सफलता के करीब आकर निरुत्साहित होकर पीछे लौटने वाले होते हैं। आत्महत्या भी कर सकते हैं। आत्महत्या के विषय में न सोचें तो अपनी मौत के विषय में अवश्य अक्सर सोचते रहते हैं। इनमें रक्तदान का शौक हो सकता है। मंगल अशुभ या नीच हो तो ये क्रूर भी हो सकते हैं। अपने भाइयों से प्रायः इनके सम्बन्ध मधुर नहीं रहते। ये लोग घोर ईर्ष्यालू होते हैं। इनके खाने के दांत और तथा दिखाने के दांत और होते हैं। वृश्चिक राशि के लोग स्वभाव से जिज्ञासु होते है। वे अपने विचारों में उलझना नहीं चाहते हैं इसलिए अज्ञात बातो को जानने के लिए अलग अलग तरीकों का उपयोग करते है। ये लोग सभी भ्रम और सवालों का जवाब तलाशने के बारे में हमेशा उत्सुक रहते है। वे किसी भी बात पर बहुत गौर से ध्यान देते है और अपने जीवन में नई चीज़ों को ढूंढने के नए तरीके तलाशते रहते है। किन्तु इनसे इनकी इच्छा के विरुद्ध जबरन या दबाव में कुछ नहीं कराया जा सकता। इनका जीवन संघर्षपूर्ण होता है। काफी मेहनत के बाद ही ये सफल हो पाते हैं। हृदय रोग, स्नायु दुर्बलता, सिरदर्द, पेट के रोग, मांसपेशियों के दर्द, अंडकोष व गुदा के रोग तथा डिप्रेशन इन्हें पूर्ण सम्भव होता है। वृश्चिक राशि व चंद्र पर राहू या शनि का प्रभाव हो तो इनको मनोरोग/भूतबाधा आदि की भी सम्भावना होती है। जातकों का भविष्य वृश्चिक राशि के स्त्री-पुरुषों को सरकारी यंत्रणा से कष्ट प्राप्त होते हैं और कोर्ट-कचहरी एवं मुकदमे में फंस जाते हैं। जुआ-सट्टा, लॉटरी में लाभ न होकर हानि होती है। नानाविध व्यवसाय करने पड़ते हैं। सच्चे एवं अच्छे मित्र नहीं मिलते। कलह-उपद्रव वृश्चिक राशि जातकों के स्थायी भाव हैं। ये बचपन में हमेशा बीमार रहते हैं। छाती एवं आंखें बड़ी रहती हैं। पिता एवं गुरु से पूर्ण सुख प्राप्त नहीं होता। हथेली पर पद्मरेखा रहती है। वाद-विवाद में अग्रणी रहते हैं। ये लोग जीवन में जल्दी से आगे बढ़ सकते है और आवश्यकता पड़ने पर खुद को बदल भी सकते है। वे स्थिर होने के पुराने और आलसी विचारों के साथ जुड़े नहीं रहते है और आवश्यकता होने पर खुद को किसी भी स्थिति में बदल लेते है। इनका अपने जीवन में कुछ करने के लिए एक लचीला और अनुकूल दृष्टिकोण होता है और यह विशेषता उन्हें सबसे दिलचस्प इंसान बनाती है। यह गुण उन्हें जीवन के विभिन्न पहलुओं में विकसित करने में भी मदद करता है और यही उनकी सफलता की मुख्य कुंजी है।

बहुमुखी - वे सिर्फ किसी एक चीज़ से जुड़े नहीं रहते है बल्कि एक ही समय में विभिन्न चीजों को करने की कोशिश करते हैं। इस राशि के लोग ऑफिस के कार्यो की व्यस्तता के बावजूद बाहर घूमने जाने की योजना बना सकते है। वे अपने संतुलन कौशल के साथ बहुत ही बढ़िया होते है, जो उनको एक बहुमुखी व्यक्ति बनने में मदद करता है। आयु के 5, 8, 18, 22, 23,42,51,56 वर्षों में ऊंचाई से गिरने से कष्ट होता है। शारीरिक अवस्था भी ठीक नहीं रहती। जलभय भी रहता है। समाज प्रिय, गीत-नृत्यादि एवं संगीत में रुचि रखते हैं। मित्रों एवं परिचितों की संख्या काफी रहती है। छलकपट या षडयंत्र रचकर पैसा कमाने की वृत्ति ऐसे जातकों में पाई जाती है। संगति दोष के कारण भी अनेक दुर्गुणों का प्रादुर्भाव इनमें होता है। विचारों में अस्थिरता तथा निर्णय शक्ति के अभाव के कारण जीवन में काफी संघर्ष करना पड़ता है। वृश्चिक राशि की महिलाएं सुनयना एवं आकर्षक मुखड़े की तथा लंबी होती हैं। खर्चीले स्वभाव की, अर्द्ध-शिक्षित रहती हैं। धर्म में बहुत ही कम श्रद्धा रखती हैं। पति सुख मध्यम रहता है। सामाजिक कार्यों में रुचि रखती हैं। जातकाभरण के अनुसार अधिकांश वृश्चिक स्त्री-पुरुष क्रोधी, दूसरों को कष्ट पहुंचानेवाले, द्वेषभावना रखनेवाले, अविश्वसनीय, लड़ाई-झगड़े में आगे रहते हैं। मित्रद्रोही भी होते हैं। स्वभाव से उदार हृदय के किंतु असंतुष्ट एवं असावधान होते हैं। दो पत्नियों का सुख पाते हैं। जन्म से तीसरे एवं आठवें वर्ष में ज्वर ताप, अग्निभय रहता है। पांचवें वर्ष में ऊंचाई से गिरने के कारण दिमाग में हलकापन आता है। 15वें वर्ष में मियादी बुखार का कष्ट एवं 25वें वर्ष अन्य कष्ट सहन करने पड़ते हैं। आयु के 4,6,14, 16, 24, 26वें वर्ष भी शारीरिक कष्टदायक होते हैं। बौद्धिक विकास में भी रुकावटें आती हैं। वृश्चिक राशि के स्त्री-पुरुषों के मन की थाह पाना कठिन होता है। अग्निभय, जननेन्द्रिय संबंधी रोग, वाणी दोष, रक्तचाप, मधुमेह, हृदय विकार जैसी व्याधियों से पीड़ा रहती है। जीवनीशक्ति कम होती है। ससुराल पक्ष से नहीं बनने के कारण काफी नुकसान उठाना पड़ता है। अनुभवसिद्ध फलित श्रद्धालु, ईश्वर भक्त, रक्त विकार के कारण त्वचा रोग से त्रस्त, परिवार में लड़ाई-झगड़े-विग्रह-पैतृक संपत्ति का भोग न मिलना, माता-पिता के सुख से 46 वचित होना, माता-पिता के लिए मन में कुविचार होना आदि बातें ऐसे जातकों में देखने को मिलती हैं। शिक्षा कम होती है, फिर जीवन में शिक्षा का अभाव इन्हें नहीं खटकता। छोटे-बड़े प्रवास अधिक होते हैं। भोग-विलास को पबल शक्ति के कारण विपरीत व्यक्तियों से संबंध जुड़ते हैं। एकांतप्रिय, खचीलापन, अनेक स्त्रियों से संबंध आदि ऐसे जातकों में देखने को मिलता है। उन्नति के शिखर से नीचे आने के कई प्रसंग जीवन में आते हैं। लेखक, प्रकाशक, वक्ता, ज्योतिषी, डॉक्टर, छापाखाने का संचालक, शराब की दुकान, रेडियो के दुकानदार, कीर्तनकार, हार्डवेयर एवं पेट्रोल पंप, बीमा व्यवसाय, अध्यापन आदि क्षेत्रों में वृश्चिक राशि के जातक सफल होते पाए जाते हैं। प्रतिकूलता • किसी भी साल का मई मास। • किसी भी महीने की 1,5,15, 25 तारीखें। • शुक्रवार। • नीला रंग, नीले रंग के कपड़े एवं अन्य चीजें। • मिथुन, तुला एवं कुंभ राशि के व्यक्ति। जीवन की महत्त्वपूर्ण घटनाएं 15 वर्ष की आयु तक शारीरिक कष्ट सहने होते हैं। 16 से 22 या 26 से 32 वर्ष की आयु में विवाह योग बनता है। इस कालावधि में 2 या 3 स्त्रियों से संबंध होना संभव है। संतान की संख्या 3 या 4 होती है। आयु के 28 से 44 वर्ष के मध्य महत्त्वपूर्ण घटनाएं घटेंगी। 45 से 61 वर्ष में भली-बुरी घटनाएं घटेंगी। कार्यसिद्ध होगा। आमदनी अच्छी रहेगी। अन्य कारणों से दुखी रहेंगे। 62 से 71 वर्ष के मध्य शल्यक्रिया एवं शारीरिक कष्ट होंगे। 74 साल की आयु में एक गंडातर आएगा। यह टल जाए तो जीवनकाल 90 वर्ष होगा। विशेष उपासना भ्रम, ज्वर, प्रलाप एवं अन्य व्याधियों से ग्रसित होने के कारण इस राशि के व्यक्ति हमेशा अस्वस्थ एवं व्यग्र रहते हैं। जीवन निर्वाह के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है। श्री गणेशजी एवं देवी उपासना के साथ निम्नलिखित मंत्र का  प्रतिदिन कम-से-कम 108 बार जाप करें। ॐ नारायणाय सुरसिंहासनाय नमः।3मुखी रुद्रक्श धारन करे

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