होरामुहूर्त की समझ

 

होरामुहूर्त की समझ:

अनेक बार परिस्थितिवश किसर कार्य को उसी दिन अथवा रात में शीघ्र ही सम्पन्न करना पड़ता है। इसके लिये होरा मुहूर्त का विधान है।होरा की अवधि ढाई घड़ी अर्थात् 1 घण्टाकी है। इस प्रकार दिन और रातकी कुल 24 होरा होती हैं, इनमें दिन की 12 और रातकी 12 होती है। प्रत्येक वार की प्रथम होरा सूर्योदय के साथ प्रारम्भ होती है और उसके बाद में दूसरी होरा उस वार से पांचवें वार की और आगे उसी क्रम से होती है, रोचक तथ्य तो ये है की हमारे सप्ताह में दिन के नाम जैसे रवि सोम ..इत्यादि के नाम

होरा से ही आते है होरा शब्द की उत्पत्ति

अहोरात्र शब्द से और त्रहटाने के बाद होरा शब्द बनता है।

कर्मफललाभहेतुं चतुरा: संवर्णयन्त्यन्ये, होरेति शास्त्रसंज्ञा लगनस्य तथार्धराशेश्च ॥

विद्वान लोग होरा शास्त्र को शुभ और अशुभ कर्म फल की प्राप्ति के लिये उपयोग करते हैं। लग्न और राशि के आधे भाग (१५ अंश) की होरा संज्ञा होती है।

उदाहरण: अगर शुक्र वार है तो यानि रात को 0.00 am से 0.59, 1 बजे तक शुक्र की होरा होगी फिर, सुबह सूर्योदय को यानि 6:00 am से 7 am उदय काल में शुक्र की होरा होगी तो उस वार को शुक्रवार कहेंगे

(तालिकासे यह स्पष्ट है ) फलित ज्योतिष के आचार्या ने होराको महत्वपूर्ण माना है।वार - दोष होने की दशा में शुभवार कोहोरा

को महत्व दिया गया है। विशेष रुप से यात्रा प्रकरण में जब वार के अनुसार दिकशूल की अवस्था में भी उसी दिशा में यात्रा करनी अनिवार्य होतो दिकशूलहीन वार की होरा में

होरा के लिए आप ये एप्लीकेशन प्रयोग करे

यात्रा के लिये

प्रस्थान किया जा सकता है। उदाहरण के लिये रविवार को पश्चिम दिशाकी यात्रा के लिये चन्द्रहोरा( अर्थात् सोमवार की काल होरा ) में प्रस्थान कियाजासकताहै।

अलग-बलग होराओं में करणीय कार्य :

सूर्य होरा : नौकरी, राज्यकार्य, टेण्डर देना, पद का कार्यभार ग्रहण करना, दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करना, राजनेताओं उच्च अधिकारियों और सम्मानित सज्जनों से मिलना।शल्यक्रिया(चिकित्सा ) और औषध-सेवन का प्ररम्भ करने के लिये सूर्यहोरा श्रेष्ठ है ।

चन्द्र होराः सभी कार्यों के लिये यह होरा शुभ फलप्रद है परन्तुकृष्ण पक्ष मेंचन्द्र होरा को त्यागना कह गया है।

मंगल होरा : युद्ध कार्य, सेना पुलिस अथवा फैक्ट्री में सेवा कार्य प्रारम्भ करना। मंगलवार को मंगल की होरा अधिक लाभदायक रहती है। इसमें कर्ज देना,वाद-विवाद में भाग लेना, मुकदमे के लिये नोटिस आदि जारी करना शुभ हैं।

बुध होरा : विद्या पठन-पाठन का कार्य, लेख्सस का कार्य, ज्योतिष विद्या का अध्ययन प्रारम्भ करना,विवाह-सम्बन्ध के प्रकरण, मामा से जुड़े प्रकरण, मुद्रण, प्रकाशन, लेखन, नवीन व्यापार, विशेष रूप से कागज, स्टेशनरी आदि का व्यापार इस होरा में शुभ हैं।

गुरुहोराः सभी कार्यों के लिये

शुभ है। नयी वस्तुओं की खरीद, मुद्रा से जुड़े कार्य, कृषि कार्य, सन्तान से जुड़े कार्य, उच्चाधिकारियों से मिलना, पूजास्थलों का निर्माण, बैंक खाते खोलना, विद्या अध्ययन प्रारम्भ करना,

कॉलेज अथवा विद्यालय भवनों का निर्माण प्रारम्भ करना।

शुक्र होराः सभी कार्यों के लिये शुभ। यात्रा का प्रारम्भ, आभूषण बनवाना, खरीदना अथवा पहनना, वस्त्र धारण, सगाई - सम्बन्ध

करना, वाहनखरीदना, आयुर्वेदिक औषधि सेवन प्रारम्भ करना, महालक्ष्मी का पूजन प्रारम्भ करना, सिनेमाघर, संगीतशालाएँ आदि प्रारम्भ करना शुभहै।

शनिहोराः भूमि, लोह-लक्कड़

आदिके कार्य, योगसाधन के लिये श्रेष्ठहोरा खानों अथवाखदानों सम्बन्ध कार्य एवं पत्र-व्यवहार करना, पैट्रोल पैटोलियम पदार्थ, चमड़ा व इनसे जुडे कार्य करने में सबको श्रेष्ठ होरा है ।






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