गृह और जड़ी


यदि मनुष्य परिस्थितिवश अमूल्य रत्न धारण न कर सकें तो ग्रहों से संबंधित जड़ी धारण करना भी फलकारक होता है। विधि-‍विधान से धारण की गई जड़ी भी रत्न के समान ही फलकारक होती है। 
प्रत्येक ग्रह की जड़ी को रविवार को पुष्य नक्षत्र में धारण करना चाहिए। जड़ी एक दिन पूर्व शनिवार को सायंकाल स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण कर उस वृक्ष का विधिवत पूजन करके कार्य सिद्धि के लिए उससे प्रार्थना करें व दूसरे दिन शुभ समय पर उसकी जड़ ले आए। 

    यदि आप संस्कृत का पाठ कर सकते हैं तो निम्न मंत्र का जाप करें-

    "ॐ वेतालाश्च पिशाचाश्च राक्षसाश्च सरासृपा। अपसर्पन्तु ते सवे वृक्षादिस्माच्छिशिवाज्ञया"।

    आप मंत्र जाप नहीं कर सकते हैं तो हिन्दी में कहें कि "वृक्ष पर रहने वाले सभीअशुभ शक्ति, भूत, पिशाच, सरीसृप आदि आप सभी भगवान शिव की आज्ञा से वृक्ष सेदूर हो जाये। फिर आप वृक्ष को रोली से तिलक व चावल, धूप-दीप, अगरबत्ती अर्पितकर कुछ दक्षिण रख कर हाथ जोड़ कर निवेदन करें कि "हे वृक्षराज, मैं आपकोनिमन्त्रण देने आया हूँ कि आपकी जड़ी मेरे सारे कार्य सिद्ध करे तथा मुझे बल, आयुतथा सर्वसिद्धि दें। मैं आपको कल लेने आऊंगा।" यह कह कर दूध व प्रसाद अर्पित करदें। साथ ही यदि आप निम्न मंत्र जाप कर सकते हो तो करें-

    "ॐ नमस्ते अमृत सम्भूते बल वीर्य विवर्ष्दिनी। बलमायुश्च मे देहि फापन्मे त्राहि
दूरतः"
    इसके बाद प्रणाम कर आ जायें। अगले दिन प्रातः स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारणकर चांदी की अथवा शुद्ध की गई सामान्य छुरी लेकर जायें और पुनः धूप-दीप अर्पितकर जड़ पर तिलक कर कलावा बांध कर धीरे-धीरे काटें। रास्ते में मंत्र जाप करतेआरों -

    "ॐ नमो भैरवाय महासिद्धि प्रदायकाय आपदुत्तरणाय हुँ फट्"।

जड़ी को ग्रह के रंग के धागे में पिरोकर पुरुषों को दाहिनी भुजा में व स्त्रियों को बांयी भुजा में पहनना चाहिए। 

ग्रह जड़ी
1. सूर्य विल्वमूल 
2. चंद्र खिरनी मूल 
3. मंगल अनंतमूल 
4. बुध विधारा की जड़ 
5. शुक्र सिंहपुछ सरपौंखा की जड़ 
6. शनि बिच्छोल की जड़ 
7. राहु श्वेत चंदन की जड़ 
8. केतु अश्वगंध की जड़ 
9. गुरु भारंगी/केले की जड़ 

विशेष : वृक्ष या पौधा न मिलने पर पंसारी से जड़ खरीदकर पूजा आदि के बाद आस्था व विश्वास के साथ धारण करनी चाहिए। इष्ट देव व ग्रह स्वामी का ध्यान करके व ग्रह के मंत्र का जाप करके जड़ी धारण करने से कार्यसिद्धि अवश्य होती है
पौधोंमें भी ग्रह का वास होता है। यानी, अगर ग्रह दोष से मुक्ति के पौधे लगाएंगे तो हरियाली की हरियाली और चिंता से मुक्त होने की आस भी बढ़ेगी। कलंदर दरगाह के नजदीक ज्ञान धर्म सत्संग मंदिर में धर्मपाल महाराज ने नवग्रह पार्क बनाया है। इसमें 9 ग्रहों का वास माने जाने वाले पौधे लगाए गए हैं। इन पौधों का सांझा पूजन कर नवग्रह शांति के लिए कामना की जाती है। अलग-अलग ग्रह की शांति के लिए भी संबंधित ग्रह का स्वरूप माने जाने वाले उसी पेड़ की पूजा भी की जाती है। 

मंदिर में रोजाना हवन होता है। कोई भी भक्त अपनी कुंडली में अशांत रहने वाले ग्रह को शांत करने के लिए यहां पहुंच सकते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से वह ग्रह शांत होता है। ज्यादातर लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें इनके बारे में पता नहीं है। ऐसे लोगों को बताने के लिए ही यह पार्क बनाया गया है। 

पानीपत. पार्कमें आक की पूजा करते हुए। 

ग्रह केतु, कुशा पेड़ 

केतुको प्रसन्न करने के लिए कुशा के पेड़ की पूजा की जाती है। कुशा के पेड़ की पूजा करने से मुख्य रूप से राजनीति में लोग सफल हो जाते हैं। 

ग्रह बृहस्पति, पीपल पेड़ 

बृहस्पतिका प्रतीक पीपल में माना गया है। बृहस्पति कष्ट दूर करते हैं और पीपल भी अच्छी औषधी हैं। पीपल की पूजा करने से देव प्रसन्न होते हैं। 

ग्रह बुध, चिरचिता पौधा 

बुधका वास चिरचिता अर्थात अपमार्ग पौधा में माना गया है। बुध ग्रह बुद्धि देने वाला होता है। बुद्धि प्राप्ति के लिए इस पौधे की पूजा की जाती है। 

ग्रह मंगल, खैर पेड़ 

मंगलका वास खैर पौधे में माना गया है। खैर की लकड़ी में अग्नि का वास होता है। खैर को पराक्रम का भी प्रतीक माना गया है। मंगल भी पराक्रमी है। 

ग्रह राहू, दुर्वा पेड़ 

राहूका अंश दुर्वा पेड़ में माना गया है। दुर्वा की लकड़ी अर्पित करने पेड़ की पूजा करने से राहू की कृपा बरसती है। इससे साधक को वैभव प्राप्त होता है। 

ग्रह चंद्र, पलाश पौधा 

चंद्रमाका प्रतीक पलाश में देखते हैं। शांति का प्रतीक है, इसी कारण ढाक के पत्तों से बनी पत्तलों में प्रसाद भोजन ग्रहण किया जाता है। 

ग्रह शुक्र, गूलर पेड़ 

शुक्रका वास गूलर के पेड़ में होता है। गूलर का पेड़ भोग, विलासिता एवं वैभव प्रधान माना जाता है। शुक्र देव को मनाने के लिए गूलर की पूजा की जाती है। कहते हैं कि इस पौधे की पूजा और रोपने पर घर में संपन्नता बढ़ती है। आर्थिक चिंता से मुक्ति मिलती है। 

ग्रह शनि, शीशम पेड़ 

शनिअंश शीशम के पेड़ में माना गया है। यह पेड़ मूल्यवान भी होता है। शीशम की लकड़ी को शनि देव पर अर्पित करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं। 

ग्रह सूर्य, आक पौधा 

सूर्यका अंश मंदार अर्थात आक का पेड़ में माना गया है। इसकी पूजा करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं। रविवार को इस पौधे की पूजा करनी चाहिए। 

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