दाम्पत्य जीवन में कलह के कुछ मुख्य कारण उपाय समाधान

 दाम्पत्य ग्रहस्त जीवन में कलह के कुछ मुख्य कारण उपाय समाधान 

    
यदि कन्या की कुण्डली में सप्तमेश एवं अष्टमेश का स्थान परिवर्तन योगहो अर्थात सप्तमैश अष्टम भाव में स्थित हो तथा अष्टमेश सप्तम भावमें स्थित हो, इसके अतिरिक्त क्रूर एवं पाप ग्रहों का प्रभाव सप्तम, चतुर्थएवं द्वादश भाव पर हो तो ऐसी कन्या के पति की मृत्यु के कारण दाम्पत्यजीवन नष्ट हो जाता है।

    यदि पत्नी की कुण्डली के सप्तम भाव में पाष प्रह हो तथा नवम भाव मेंशुभ ग्रह हो तो ऐसी स्त्रियां वैवाहिक जीवन को छोड़कर संन्यासिनी बनजाती हैं।

    यदि जन्मकुण्डली में द्वितीयेश एवं सप्तमेश की युति षष्ठेश के नक्षत्रमें हो तो दम्पतियों में मुकदमेबाजी के बाद तलाक अवश्य हो जाताहै।

    यदि कुण्डली में सप्तमेश बुध अपनी नीच राशि में स्थित हो तथा अन्यक्रूर एवं पाप ग्रहों का प्रभाव सप्तमेश, सप्तम भाव एवं पंचम भाव परपड़ रहा हो तो दाम्पत्य जीवन में नित्य हो रहे क्लेश से तंग आकर पत्नीअपने पति एवं संतान की हत्या कर दाम्पत्य जीवन को नष्ट कर सकतीहै।

    यदि कुण्डली में सप्तमेश द्वादश भाव में स्थित हो तथा सप्तम भाव षष्टेशद्वारा दृष्ट पाप ग्रहों से युक्त हो तो दम्पतियों में तलाक की स्थितियां उत्पन्नहोती हैं।

    यदि कन्या की कुण्डली में सप्तम भाव में सूर्य अपनी नीच अथवाशत्रु राशि में स्थित हो तथा सप्तम भाव एवं सप्तमेश से क्रूर एवं पाप ग्रहोंका सम्बंध बन रहा हो तो ऐसी जातिका अपने पति द्वारा त्याग दी जातीहै।

    यदि वर की कुण्डली के सप्तम भाव में पाप ग्रह हो अथवा पाप ग्रहकी राशि स्थित हो अथवा पंचमेश सप्तम भाव में निर्बल एवं दूषितहोकर स्थित हो अथवा सप्तम भाव में दुर्बल एवं पाप ग्रह स्थितहो अथवा अष्टमेश पाप ग्रहों से युत होकर सप्तम भाव में स्थितहो अथवा गुरु सप्तम भाव में अपनी नीच राशि में स्थित हो तोविवाह के उपरान्त पत्नी की मृत्यु के कारण दाम्पत्य जीवन नष्ट हो जाताहै।

    यदि पति की कुण्डली में ष्टेश, नवमेश एवं दशमेश की युति हो तथाअष्टमेश, नवमेश एवं दशमेश की युति हो तो जातक संन्यासी हो जाता है।
    यदि कुण्डली में सप्तम भाव में निर्बल एवं पाप ग्हहें से युक्त अथवा दृष्टशुक् स्थित हो तथा द्वादश भाव में निर्बल चन्द्रमा स्थित हो तथा कुण्डलीका तृतीय, सप्तम एवं एकादश पाप ग्रहों के प्रभाव में अथवा निर्बेल होतो ऐसी स्थिति में पति अपनी पत्नी की हत्या कर दाम्पत्य जीवन नष्टकर सकता है।

    यदि कन्या की कुण्डली में मंगल सप्तम अथवा अष्टम भाव में स्थितअन्य दो अथवा दो से अधिक क्रूर एवं पाप ग्रहों के साथ स्थित हो तथामंगल से सप्तम स्थान पर राहु स्थित हो तो पति की मृत्यु के साथ कन्याका दाम्पत्य जीवन नष्ट हो जाता है।

    यदि पति की कुण्डली में लग्नेश एवं शनि निर्बल, पापकर्तरी योग में होतो जातक संन्यासी हो जाता है।

    यदि कन्या की कुण्डली में अशुभ एवं पाप ग्रहों की युति सप्तम भाव मेंहो तथा सप्तम भाव एव सप्तमेश निर्बल एवं पीड़ित हो तो जातिका कोपूर्ण पति सुख नहीं मिल पाता है अर्थात ऐसी जातिका युवावस्था में हीविधवा हो जाती है।

    यदि पत्नी की कुण्डली में लग्न में सम राशि (वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक,मकर, मीन राशि) हो तथा कुण्डली में मंगल, बुध, गुरु एवं शुक्र बलीस्थिति में हो तो ऐसी स्त्रियां दाम्पत्य जीवन को त्यागकर संन्यास ग्रहणकर लेती हैं।

    यदि कुण्डली में दो पापी एवं क्रूर ग्रह लग्न में स्थित हैं तथा लग्नेश एवंसप्तमेश की युति अष्टम भाव में हो रही हो, साथ ही तृतीय एवं एकादशभाव निर्बल स्थिति में हो तो दाम्पत्य जीवन के क्लेश से तंग आकरपति आत्महत्या करने का प्रयास करता है अथवा पत्नी को तलाक दे देताहै।

    यदि किसी कन्या की जन्मकुण्डली में सप्तमेश एवं अष्टमेश की युतिद्वादश भाव में हो तथा उस पर क्रूर एवं पाप ग्रहों का प्रभाव हो तोऐसी कन्या का दाम्पत्य जीवन पति की मृत्यु बाद तुरंत नष्ट हो जाता है।
    यदि जन्मकुण्डली में शुक् जिस भाव में स्थित हो, उससे चतुर्थ एवं अष्टमभाव में पाप प्रह स्थित हो तथा लग्न से तृतीय, अष्टम एव एकादश भावपीड़ित एवं निर्बल हो तो पारिवारिक कलह के कारण पत्नी द्वाराआत्महत्या कर ली जाती है जिससे दाम्पत्य जीवन नष्ट हो जाताहै।

    यदि पति की जन्मकुण्डली के सप्तम भाव में शुक्र एवं शननि की युति होतथा सप्तम भाव एवं सप्तमेश निर्बल एवं दूषित हो तो पत्नी की मृत्यु केकारण दाम्पत्य जीवन नष्ट हो जाता है।

    यदि पति की कुण्डली में शनि एवं शुक्र की युति लग्न, पष्ठम, अष्टम एवंद्वादश भाव में हो तथा अन्य क्रूर एवं पाप ग्रहों का सम्बंध लग्न षष्ठम,अष्टम एवं द्वादश से बन रहा हो तो ऐसे दम्पतियों का दाम्पत्य जीवनपति की नपुंसकता से नष्ट हो जाता है और अन्त में तलाक तक भी बातपहुंच जाती है।

    यदि पति की जन्मकुण्डली में सूर्य एवं चन्द्रमा परस्पर सप्तमस्थस्थित होकर एक-दूसरे को देखते हों तो ऐसे दम्पतियों में यौन सुखका अभाव रहता है। अतः इनका दाम्पत्य जीवन असफल रहताहै।

    यदि कन्या की कुण्डली में हीनबली अथवा निर्बल पाप ग्रह सप्तम भावमें हो तथा सप्तमेश एवं सप्तम भाव पीड़ित अथवा पापकर्तरी योग में होतो पति द्वारा ऐसी स्त्रियां त्याग दी जाती हैं अर्थात तलाक दे दिया जाताहै।

    यदि पति की कुण्डली में विषम राशियों में चन्द्र, बुध एवं मंगल की युतिहो तथा लग्न, लग्नेश, सप्तम एवं सप्तमेश निर्बल एवं पीड़ित हो तोजातक कामसुख से वंचित रहता है। ये अपने जीवनसाथी को कामसुखनहीं दे पाते हैं। यदि पत्नी की कुण्डली के सप्तम भाव में शनि एवंबुधकी युति हो तो दम्पतियों का यौनसुख के अभाव में दाम्पत्य जीवन असफलहो जाता है।

    यदि पति की कुण्डली में लग्नेश बुध कन्या एवं मिधुन राशि में स्थित हो     तथा षष्ठेश लग्न में स्थित हो तो जातक जीवनसाथी को यौन संतुष्टि नहींदे पाता है। अतः यौन सुख के अभाव में जातक का दाम्पत्य सुंख नष्टहो जाता है।

    यदि कन्या की कुण्डली में सप्तमेश एवं कलहकारक शुक्र यदि षष्ठम भावमें निर्बल एवंदूषित हो तथा उस पर शनि, राहु अथवा सूर्य की दृष्टि होतो जातिका का अपने पति से तलाक हो जाता है।

    यदि पति की कुण्डली में बुध एवं शनि द्विस्वभाव राशियों में स्थितहो अथवा विषम राशियों में शनि एवं सूर्य की युति हो तथा युत्ति परअन्य क्रूर एवं पाप ग्रहों का प्रभाव हो तो जातक में कामशक्ति काअभाव होता है। अतः यौनसुख की दृष्टि से दाम्पत्य जीवन नष्ट हो जाताहै।

    यदि पति की कुण्डली में शनि अष्टम एवं द्वादश भाव में अपनी नीचराशि में स्थित हो तो ऐसे दम्पतियों का कामसुख के अभाव के कारणदाम्पत्य जीवन नष्ट हो जाता है।

    यदि कन्या की कुण्डली में लग्नेश मंगल एवं शनि हो अर्थात कन्याका जन्म मेष, वृश्चिक, मकर अथवा कुम्भ लग्न में हुआ हो तथाचन्द्रमा एवं शुक्र की युति लग्न में हो तथा पंचम भाव में क्रूर एवं पापीग्रह स्थित हो तो संतानोत्पत्ति के अभाव में इनका दाम्पत्य जीवन नष्ट होजाता है।

    यदि पति की कुण्डली में सूर्य, चन्द्रमा या गुरु निर्बल होकर लग्न, दशमया द्वादश भाव में हो तथा उस पर बलवान शनि की दृष्टि हो तो जातकसंन्यास ग्रहण कर लेता है।

    यदि ष्ठेश का सम्बंध सप्तम भाव, सप्तमेश एवंशुक्र से बन रहा है तोऐसे दम्पतियों का आपसी मतभेद एवं वाद-विवाद के बाद तलाक हो जाताहै।

    यदि पति की कुण्डली में सप्तम भाव में पाप ग्रह स्थित हो तथाउनकी युति राहु-केतु से हो तथा सप्तमेश एवं सप्तम भाव निर्बलएवं पीड़ित हो तो जातक की पत्नी किसी अन्य पुरुष के साथ सम्बंध     स्थापित करती है अथवा भाग जाती है जो कि तलाक का कारण बनताहै।

    यदि कुण्डली में सप्तमेश द्वादश भाव में स्थित हो तथा द्वादशेश की युतिशनि, राहु, केतु, सूर्य से सप्तम भाव में हो तो दम्पतियों में आपसीबिखराव के कारण तलाक हो जाता है।

    यदि पति की कुण्डली में लग्न, सप्तम एवं द्वादश भाव में पाप ग्रहों कीस्थिति, युति अथवा दृष्टि हो तो ऐसे दम्पतियों का संतानहीनता के कारणविवाह असफल हो जाता है।

    यदि पति की कुण्डली में चन्द्रमा शनि के द्रेष्काण में हो अथवा शनि यामंगल के नवांश में हो तथा चन्द्रमा केवल शनि से दृष्ट हो तो ऐसा जातकसंन्यास ग्रहण कर लेता है।

    यदि कन्या की कुण्डली में हीनबली अथवा निर्बल पाप ग्रह सप्तम भावमें हो तथा सप्तमेश एवं सप्तम भाव पीड़ित अथवा पापकर्तरी योग में होतो पति द्वारा ऐसी स्त्रियां त्याग दी जाती हैं।

    यदि कन्या का जन्म वृषभ या तुला लग्न में हुआ हो तथा शुक्र एवंचन्द्रमा में से जो भी बलवान हो, वह यदि शनि की त्रिशांश में हो तोऐसी जातिका प्रथम पति को छोड़कर दूसरा विवाह कर लेतीहै।

    यदि विवाह रेखा दो भागों में विभाजित हो और मंगल पर्वत से निकलीकोई रेखा इसे काट रही हो तो जातक की विलासी प्रवृत्ति के कारणवैवाहिक सुख में बाधा उत्पन्न होती है और बात बिगड़कर तलाक तकभी पहुंच सकती है।

    यदि भाग्य रेखा पर द्वीप का चिन्ह बन रहा हो और शुक्र पर्वत से कोईरेखा निकलकर द्वीप चिन्ह तक जाती हो तो जातक किसी अनुचितअथवा गुप्त प्रेम के कारण बदनाम होता है और इस कारण दाम्पत्य बंधनटूट जाता है।

    यदि कोई रेखा शुक्र पर्वत से प्रारम्भ होकर जीवन, मस्तिष्क एवं हृदय रेखाको काटती हुई शनि पर्वत पर जाकर दो भागों में विभाजित हो रही हो     तो ऐसे जातक के प्रेम-सम्बंधों को लेकर दाम्पत्य जीवन नष्ट हो जाताहै।

    यदि शुक्र से निकलने वाली कोई रेखा जीवन रेखा से निकलने वालीकिसी ऊर्ध्वगामी छोटी रेखा को काटती हुई मस्तिष्क रेखा तथा हृदयरेखा को भी काटती हुई आगे निकल जाए तो जातक का विवाहितजीवन कलहपूर्ण रहता है तथा अन्त में बात तलाक तक पहुंच जातीहै।

    यदि मंगल रेखा से कोई रेखा निकलकर भाग्य रेखा अथवा सूर्य रेखाको काट रही हो और सूर्य रेखा पर बिन्दु, चिन्ह, क्रॉस अथवा खड़ीरेखा भी हो तो जातक विलासी होता है तथा यश और भाग्य कीहानि होती है। जातक के विलासी होने के कारण दाम्पत्य जीवन मेंदरारें पैदा होती हैं, जो अन्त में तलाक का कारण भी बन जातीहैं।

    यदि मंगल पर्वत से कोई शाखा रेखा चन्द्र पर्वत पर जाती हो तथा मस्तिष्करेखा निर्बल एवं नक्षत्र चिह्न युक्त हो तो जातक भोग-विलास के कारणरोगी हो जाता है। गम्भीर रोग के कारण मृत्यु सम्भव है, वह अपने जीवनसाथी से बिछुड़ सकता है।

    यदि जीवन रेखा से कोई शाखा रेखा निकलकर द्विशाखा युक्त होकर विवाहरेखा से जा मिले तो गुप्त प्रेम सम्बंधों को लेकर जातक के जीवन मेंबहुत-सी परेशानियां खड़ी हो जाती है। यह विवाद दाम्पत्य जीवन को तोड़भी सकता है।

    यदि शुक्र पर्वत अत्यधिक उन्नत हो तथा उससे कोई रेखानिकलकर जीवन रेखा को काटती हुई हृदय रेखा के समीप जाकर दोभागों में विभाजित हो जाए और दोनों शाखाएं हृदय रेखा को काटकरशनि एवं सूर्य पर्वत पर जाकर समाप्त हो तो जातक अनुचित प्रेमसंबंधों में लिप्त रहता है जिससे जातक का दाम्पत्य जीवन कलहपूर्णहोता है। कभी-कभी विवाह विच्छेद की स्थितियां भी बनतीहैं।

    यदि शुक्र पर्वत से कोई सहायक रेखा निकलकर जीवन रेखा एवं विवाहरेखा को काट दे तो प्रेम संबंधों को लेकर पति-पत्नी में कलह होकर तलाकहो जाता है।

    यदि शुक्र क्षेत्र पर बिन्दु चिह्न हो तथा उससे आरम्म हुई रेखा जीवन

    रेखा एवं जीवन रेखा में से निकली किसी ऊर्ध्वगामी छोटी रेखा को काटती

    हुई आगे निकल जाए तथा गुरु क्षेत्र पर क्रॉस चिह्न भी हो तो ऐसा

    जातक विपरीत लिंगियों पर आसक्त होकर उनसे विवाह कर लेते हैं,

    परन्तु कुछ समय बाद ही उनसे मनमुटाव होकर विवाह बंधन टूट जाताहै।

    यदि मंगल पर्वत से कोई शाखा रेखा चन्द्र पर्वत पर जाती हो तो जातक

    विलासी स्वभाव का होता है। उसका विवाहित जीवन दुःखमय रहता है।वीर्य स्तंभन

    देशी फिटकरी को कमर में बांधकर संभोग करने से अधिक समय तकस्तंभन होता है।

    लंगड़े आम की जड़ कमर में बांधकर संभोग करने से देर तक स्तंभनरहता है।

    लाल अपामार्ग की जड़ मंगलवार को लाकर कमर में बांधकर संभोग करेंतो देर तक स्तंभन रहता है।

    अंत में केवल इतना ही तंत्र ग्रंथों में कहा गया है कि संतान न होने

    अथवा संतान की मृत्यु के लिए मनुष्य के द्वारा किए गए पाप भी कारण बनतेहैं।

    सर्प शाप, गुरुजन का शाप आदि का उल्लेख किया जाता है। इन सबकीशांति के उपाय भी बताए गए हैं। अतएव अधिकांश में इस प्रकार की कमियांदूर की जा सकती हैं। इन बातों को प्रमाणित किया जा सकता है। विस्तार-भयसे विवरण प्रस्तुत नहीं किए जा रहे हैं।

    विवाह और संतान का जीवन भर का साथ है। सुखी वैवाहिक जीवन हीमनुष्य को प्रगति पथ पर बढ़ाता है। सुखी विवाहित दम्पती ही राष्ट्र की नीवहै।
    गृह-कलह का परिणाम सदैव दुखद होता है। गृह-कलह से पीड़ित, पत्नीसे लड़कर आया न्यायाधीश किसी मुकदमे का कैसा निर्णय लिख सकता है।सरकारी अधिकारी कार्यालय में क्या करता है? सब जानते हैं। साहब लड़करआया है बीवी से। साहब बिगड़ेगा कर्मचारी परं, कर्मचारी घर आकर बिगड़ेगाबीवी पर। मनुष्य संवेदनाओं का दास है। मस्तिष्क ही उसकी प्रगति काआधार है। शांत-संतुलित प्रसन्न मस्तिष्क ही मनुष्य को उन्नत बनाता है।गृह-कलह के भयानक परिणाम और उसका फल सर्वविदित है।

सुख-समृद्धि प्राप्ति हेतु सम्पन्न करें ‘शिव गौरी साधना’

    गृहस्थ जीवन का आदर्श स्वरूप भगवान सदाशिव और माता पार्वती हीहै। इसीलिए प्रत्येक गृहस्थ शिव गौरी को अपना आराध्य मानता है। जिसप्रकार भगवान शिव का गृहस्थ जीवन सभी कामनाओं से पूर्ण है। पुत्रके रूप में भगवान गणपति और कार्तिकेय हैं और सदैव साथ में गौरी रूपापार्वती हैं। स्थान भी पूर्ण शांतियुक्त हिमालय है, जहां पूर्ण आनन्द सेविराजित होते हैं। गृहस्थ व्यक्तियों के लिए शिव और गौरी आदर्श स्वरूपहैं क्योंकि शिव को रसेश्वर कहा गया है और गौरी को रसेश्वरी। यह शिवऔर शक्ति का संयुक्त रूप है जो शिवलिंग के रूप में परिलिक्षित होता है।
    जहां जीवन में गृहस्थी है, उसके साथ बाधाएं तो आएंगी ही लेकिन शिवगौरी की साधना कर जीवन को रस से युक्त बनाया जा सकता है।जीवन में नित्य प्रति आनन्द रस की वर्षा होती रहे, ऐसा अनुभव हो किहर सुबह एक नई प्रसन्नता लेकर जीवन में आई है, तो वह जीवनअनूठा ही जीवन होता है। उसमें प्रसन्नता का रस-ही-रस भरा रहताहै।

    साधना का प्रयोजन

    गृह क्लेश निवारण हेतु।

    गृहसथ सुख प्पति त।

    मधुर दाम्पत्य जीवन हेतु।

    घर में शान्ति एवं सम्पन्नता हेतु।

    साधना विधान

    इस साधना हेतु किसी एकान्त स्थान अथवा शान्त कमरे का चुनाब करें,

    जहां कोई आपकी साधना में व्यवधान न डाल पाए।

    प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ हो लें और स्वच्छ पीले वस्त्र

    धारण करें।

    वस्त्रों में सुगंधित चमेली का इत्र भी लगाएं।

    अब उत्तर दिशा की ओर मुख करके, नीले रंग के आसन पर बैठें।

    करें।इस बाजोट पर भगवान शिव और माता पार्वती का संयुक्त चित्र स्थापित

    यदि हो सके तो आप शिव-पार्वती की प्रतिमा भी स्थापित कर सकते हैं।अब अपने सामने बाजोट के नीचे दोनों ओर शुद्ध धी के दो दीपकप्रञ्ज्वलित करें। इन दीपकों का मुख साधक की ओर रहे।अब बाजोट पर एक तांबे की थाली स्थापित करें और उसमें केशर वकुंकुम से स्वस्तिक का चिन्ह बनाएं।अब थाली में हल्दी से रंगे चावल की एक ढेरी बनाएं और उन पर कुंकुमका छींटा मारें।
    शिव-पार्वती के चित्र पर केशर व कुंकुम का तिलक करें। यदि प्रतिमा होतो पंचामृत से स्नान करवाएं।

    इसके बाद चावल की ढेरी पर ‘गौरी-शंकर रुद्राक्ष' स्थापित करें। रुद्राक्ष

    किसी प्रतिष्ठित संस्थान से प्राप्त करें जो कि असली हो।

    अब 21 चावल के दाने रुद्राक्ष पर अर्पित करें। प्रत्येक दाने को अर्पितकरते हुए 'ॐ नमः शिवाय:' मंत्र का जाप करते रहें।

    अब रुद्राक्ष को पंचामृत से स्नान करवाएं और धूप, दीप, पुष्प आदि सेपूजा करें।

    इसके बाद ‘नीली हकीक माला’ गौरी-शंकर रुद्राक्ष पर पहना दें औरनैवेद्य अर्पित करें।

    अब नीली हकीक माला वापस उतार लें और निम्न मंत्र का इस माला

    से 3 माला जाप करें-

    मंत्र-ॐ भवानी गौय्यें पति सुख सौभाग्यं देहि देहि शिव शक्तयैनमः।

    जप समाप्ति पर भगवान शंकर एवं माता पार्वती से हाथ जोड़कर विनतीकरें कि वे आपके परिवार में खुशियां-ही-खुशियां भर दें। आपका दाम्पत्यजीवन मधुर कर दें। आपके घर से गृह क्लेश को हमेशा-हमेशा के लिएसमाप्त कर दें और आपको प्रत्येक पथ पर सफलता प्रदान करें।इसके बाद प्रसाद बांटें और स्वयं भी ग्रहण करें।

    समस्त पूजन सामग्री किसी नदी, तालाब आदि में विसर्जित कर दे। चाहेंतो रुद्राक्ष को अपने पूजाघर में स्थापित कर सकते हैं।

    इस साधना में शुद्धता तथा आचार-विचार, खान-पान का अवश्य ध्यान

    रखें। शुद्ध शाकाहारी भोजन लेना चाहिए तथा स्वस्थ चिंतन करना चाहिए।कार्यसिद्धि, संपन्नता हेतु

    बुधवार को एक कटोरी बासमती चावल दान में दें। ऋण नाश, धनलाभ, व्यापार वृद्धि हेतु चमकीले लाल रंग का कपड़ा लें। उसे बिछा लें।उसमें लाल चंदन का टुकड़ा, लाल गुलाब के पुष्प, रोली तथा 58 पैसेरखें। फिर कपड़े में सारा सामान लपेटकर, कपड़े की पोटली बनाकर     अपने गल्ले अथवा अलमारी या संदूक में रख दें।6 माह पश्चात पुनःनवरात्रि की अष्टमी को इस प्रक्रिया को दोहराएं।

    
    गृहस्थ सुख

    प्रायः ऐसा हो जाता है कि विवाह के कुछ समय बाद या कुछ संतानों केजन्म के ब्रद पति के प्यार में पहले जैसा सुख नहीं रह जाता। वहसंतुष्ट नहीं रह पाता है। पति का जब भी सुख पाना हो तो पति केसिरहने एक चुटकी सिंदूर डाल दें, फिर उसे अपनी मांग में भर लें।पर्त्ति का पूरा सुख मिलेगा। यह टोटका मेरा अनुभूत है। कभी-कभी पतिअपनी पत्नी का पूरा सहयोग नहीं पाते हैं। उनका पूरा सहयोग पानेके लिए प्रयास करने के बाद भी असफल रहते हैं। इस स्थिति को जबभी बदलना चाहें तो उस रात रमण से पूर्व थोड़ा-सा कपूर कमरे में जलादें। उसका धुआं कुछ देर रोककर खिड़कियां, दरवाजे खोल दें। तबआपको उस रात पत्नी का भरपूर प्रेम और सुख मिलेगा।

1- लड़के या लड़की की पत्री में सप्तम भाव में शनि का होना या गोचर करना।

2- किसी पाप ग्रह की सप्तम या अष्टम भाव पर दृष्टि होना या राहु, केतु अथवा सूर्य का वहां बैठना

3- पति-पत्नी की एक सी दशा या शनि की साढ़े साती का चलना भी कलह एवं तलाक का एक कारण होता है।

4- शुक्र की गुरु में दशा का चलना या गुरु में शुक्र की दशा का चलना भी एक कारण है। कलह को दूर करने के कुछ उपायों का वर्णन यहां किया जा रहा है।

5- अगर कलह का कारण शनि ग्रह से संबंधित है तो शनि ग्रह की शांति कर सकते हैं, शनि यंत्र पर जप कर सकते हैं और शनि की वस्तुओं का दान भी कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त सात मुखी रुद्राक्ष भी धारण कर सकते हैं। यह उपाय शनिवार को सायंकाल के समय करना ठीक होता है ।

6- अगर गृह कलह राहु से संबंधित हो तो राहु यंत्र पर राहु के मंत्र का जप करें एवं 8 मुखी रुद्राक्ष धारण करें। यह सभी प्रकार के कलहों व बाधाओं से मुक्त करता है और राहु के दुष्प्रभाव का निवारण करता है। इसके लिए राहु का दान भी कर सकते हैं।

7- अगर गृह क्लेश का कारण केतु ग्रह हो तो उसकी वस्तुओं का दान एवं उसके मंत्र का जप करें। केतु यंत्र पर पूजा करें। गणेश मंत्र का जप करें। 9 मुखी रुद्राक्ष भी धारण कर सकते हैं।

अगर गृहस्थ जीवन में कलह किसी पराई स्त्री की वजह से हो तो ये उपाय करें।

Aquamarine Gem Stone धारण करें। नीलम और हीरा भी धारण कर सकते हैं। वशीकरण यंत्र पर जप करके भी कलह को समाप्त कर सकते हैं। गौरी शंकर रुद्राक्ष भी धारण कर सकते हैं और शीघ्र प्रभाव के लिए मातंगी यंत्र भी अपने घर में पूजा के स्थान पर स्थापित कर सकते हैं।

- कई बार देखने में आता है कि न तो ग्रहों की परेशानी है, न ही पत्री में दशा एवं गोचर की स्थिति खराब है। फिर भी गृह कलह है जिसके कारण बात तलाक तक पहुंच जाती है। ऐसे में यह धारणा होती है कि किसी ने कुछ जादू टोना अर्थात तांत्रिक प्रयोग तो नहीं किया। अगर ऐसा लगे तो ये उपाय करें:

- घर में पूजा स्थान में बाधामुक्ति यंत्र स्थापित करें।

- शुक्ल पक्ष में सोमवार को उत्तर दिशा में मुख करके पति और पत्नी गौरीशंकर रुद्राक्ष धारण करें।

- पत्नी Aquamarine धारण करें और पति नीलम और हीरा धारण करें।

- शयन कक्ष में शुक्र यंत्र की स्थापना करें।

नोट-:पत्रिका के अनुसार ही रत्न धारण करे ज्योतिषी सलाह से

विवाह बाधा के उपाय

- बाधा मुक्ति यंत्र की स्थापना एवं रोज सुबह पूजा करें।

- शनि ग्रह के कारण विवाह में बाधा आ रही हो तो लड़के या लड़की को सातमुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।

- शनि ग्रह की वस्तुएं दान करनी चाहिए।

- शनि यंत्र पर शनिवार से शुरू करके रोज शनि के मंत्र का जप करना चाहिए।

सूर्य के कारण विवाह में बाधा आती हो तो:

- सूर्य यंत्र को अपने घर में स्थापित करके सूर्य मंत्र का जप करें। यह रविवार से शुरू करके रोज करें।

- सूर्य की वस्तुओं का दान करें। तांबे के एक लोटे में गेहूं भरकर रविवार की सुबह 6 से 8 बजे के बीच दान करें।

- रविवार को 1 मुखी रुद्राक्ष धारण करें।

राहु ग्रह के कारण विवाह बाधाः

अगर विवाह में बाधा राहु ग्रह के कारण आ रही हो तो ये उपाय करेंः

- आठमुखी रुद्राक्ष धारण करें।

- राहु यंत्र को अपने पूजा स्थान पर स्थापित करें।

- रविवार को जौ लेकर रविवार के दिन दान करें।

- किसी गरीब को पानमसाला दान करें।

- गुरुद्वारे में या किसी भी धर्मस्थल पर जूते चप्पल की सेवा करें।

अशुभ ग्रहों का उपाय कर लेना अनिवार्य होता है। खास कर पुरुषों को तो केतु के उपाय करने ही चाहिए, क्योंकि विवाह के बाद पुरुष के ग्रहों का संपूर्ण प्रभाव स्त्री पर पड़ता है।

लड़की की शादी में रुकावट आने पर

- गुरुवार को विष्णु-लक्ष्मी जी के मंदिर में जा कर विष्णु जी को कलगी (जो सेहरे के ऊपर लगी होती है) चढ़ाएं। साथ में बेसन के पांच लड्डू चढ़ाएं। शादी जल्दी हो जाएगी।

- किसी भी कारण से, योग्य वर नहीं मिल पा रहा हो, तो कन्या किसी भी गुरुवार को प्रातः नहा-धो कर पीले रंग के वस्त्र पहने। फिर बेसन के लड्डू स्वयं बनाए। लड्डुओं का आकार कुछ भी हो, परंतु उनकी गिनती 108 होनी चाहिए। फिर पीले रंग के प्लास्टिक की टोकरी में, पीले रंग का कपड़ा बिछा कर उन 108 लड्डुओं को उसमें रख दे तथा अपनी श्रद्धानुसार कुछ दक्षिणा रख दे। पास के किसी शिव मंदिर में जा कर, विवाह हेतु गुरु ग्रह की शांति और अनुकूलता के लिए संकल्प करके, सारा सामान किसी ब्राह्मण को दे दे। शिव-पार्वती से प्रार्थना कर अपने घर आ जाए।

सावधानी: बेसन का चूरा, जिससे लड्डू बनाए गए हों, पूरा काम में आ जाए, घर में नहीं रहे और न ही कोई लड्डू घर में काम में लिया जाए। सभी काम अमृत, शुभ के चौघड़िये में, भद्रारहित होने पर करें।

यदि कन्या का विवाह न हो रहा हो और माता-पिता बहुत परेशान हो सारे प्रयास विफल हो रहे हो तो उसे किसी शुभ मुहूर्त में निम्न मंत्रों में से किसी एक का जप करना चाहिए।

कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि।

नंदगोपसुतं देवं पतिं मे कुरु ते नमः।।

ऊँ देवेंद्राणि नमस्तुभ्य देवेंद्रप्रिय भामिनी

विवाह भाग्यमारोग्यं शीघ्रलाभं च देहि मे।।

लड़के की शादी के लिए

गुरुवार को पीले रंग की चुन्नी, पीला गोटा लगा कर, विष्णु-लक्ष्मी जी को चढ़ाएं। साथ में बेसन के पांच लड्डू चढ़ाएं तो शादी में आने वाली रुकावट दूर हो जाएगी।

ग्रहों के उपाय निम्नलिखित हैं

सूर्य के लिए गेहूं और तांबे का बर्तन दान करें।

चंद्र के लिए चावल, दूध एवं चांदी की वस्तु का दान करें।

मंगल के लिए साबुत मसूर या मसूर की दाल दान करें।

बुध के लिए साबुत मूंग का दान करें।

गुरु के लिए चने की दाल एवं सोने की वस्तु दान करें।

शुक्र के लिए दही, घी, कपूर और मोती में से किसी एक वस्तु का दान करें।

शनि के लिए काले साबुत उड़द एवं लोहे की वस्तु का दान करें।

राहु के लिए सरसों एवं नीलम का दान करें।

केतु के लिए तिल का दान करें।

किसी भी स्त्री या पुरुष के विवाह में बाधा आ रही हो, या वैवाहिक जीवन में तनाव हो, तो गणेश जी के मंदिर में हार-फूल चढ़ाए और हल्दी का तिलक लगाए।

ऊँ गणेशाय नमः का मंत्र बोलते हुए गणेश जी पर 108 फूल एक-एक करके चढ़ाए तथा आरती करे। ऐसा 40 दिन तक नियमित करे। गुरुवार का उपवास करे। गुरुवार व्रत कथा गुरुवार को करे। प्रति गुरुवार को हल्दी की गांठ बिस्तर के नीचे ले कर सोए। लड़का या लड़की देखते समय हल्दी का टीका खुद लगाए। गणेश जी को गुड़ का भोग लगाए उसके बाद ही सामने जाए। मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होंगी।

मंगल दोष या किसी अन्य कारण से विवाह में विलंब होने पर:

यदि किसी व्यक्ति के विवाह में अत्यधिक विलंब हो रहा हो तथा प्रयत्न करने पर भी बात नहीं बन पा रही हो, तो निम्न प्रयोग करे। सबसे पहले किसी ऐसे पेड़ का पता करे, जिस पर पर्याप्त मात्रा में चींटियों (मकड़ों) का राज्य हो। फिर मंगलवार को एक थाली में आटा, बूरा (देशी खांड) और देशी घी मिला कर मिश्रण तैयार करे तथा एक गोले को नुकीले सिरे से इस प्रकार काटे कि एक गोल ढक्कन जैसा हिस्सा बाहर आ जाए। आटे-बूरे-घी के मिश्रण को छेद द्वारा गोले में भर ले। जब गोला ऊपर तक भर जाए, तो उस पर ढक्कन लगा दे तथा गोले को पोलिथिन के थैले में रख ले। यदि कुछ मिश्रण बच गया हो, तो उसे भी गोले के साथ थैले में डाल ले। रात को सोते समय इस थैले को सिर की तरफ रख कर सो जाए तथा बुधवार की सुबह उठ कर इसे लेकर चींटियों वाले पेड़ के पास जाए। गोले को निकाल कर पेड़ की किसी शाखा, या खोल में रख दे तथा मिश्रण को गोले के ऊपर डाल दे। थैले को कहीं भी फेंक दे। वापस बिना मुड़े अपने घर आ जाए। विवाह संबंधी स्थिति में सुधार होगा। आवश्यक हो, तो इस प्रयोग को 2-3 बार किया जा सकता है।

सावधानी: बुधवार को उठने के बाद प्रयोग कर के वापस घर आने तक मौन रहना जरूरी है।

कुंडली में विवाह प्रतिबंधक योग, विष कन्या योग आदि हों, तो प्रयोग के साथ वाणेशी मंत्र का जप करें, या कराएं। किसी भी ज्योतिषी से विवाह प्रति¬बंधक व विष कन्या योगों की जानकारी ली जा सकती है।

ससुराल में सुखी रहने के लिएः

साबुत हल्दी की 7 गांठें, पीतल । का एक टुकड़ा, थोड़ा सा गुड़ अगर कन्या अपने हाथ से ससुराल की तरफ फेंक दे, तो वह ससुराल में सुरक्षित और सुखी रहेगी।

सास-बहू के बीच क्लेश दूर करने का सरल उपाय:

यदि परिवार में सास-बहू के मध्य हमेशा झगड़ा होता रहता हो जिसके कारण परिवार में कलह की स्थिति बनी रहती हो तो निम्न मंत्र का 21 दिनों तक प्रति दिन 11 माला जप करने से कलह से मुक्ति मिलती है।

मंत्र: ऊँ शांति

वैवाहिक सुख के लिए: कन्या का जब विवाह हो चुका हो और वह विदा हो रही हो, तो एक लोटे में हल्दी और एक पीला सिक्का डाल कर, लड़की के सिर के ऊपर से 7 बार घुमा कर, उसके आगे फेंक दें। वैवाहिक जीवन सुखी रहेगा।

वर-वधू में प्यार के लिए:

साबुत काले माह में हरी मेहंदी मिला कर, जिस दिशा में वर-वधू का घर हो, उस तरफ फेंकें, तो वर-वधू में प्यार बढ़ेगा और क्लेश समाप्त होगा। यह क्रिया शादी के समय भी कर सकते हैं।

पति की अप्रसन्नता को दूर करने का उपाय:

यदि पति हमेशा अप्रसन्न रहता हो, पत्नी की बातों पर ध्यान न देता हो, हमेशा खोया-खोया सा रहता हो जिसके कारण वैवाहिक जीवन में कलह उत्पन्न हो रही हो तथा सारे प्रयत्न निष्फल हो रहे हांे तो पत्नी पति की अनुकूलता के लिए श्रद्धा विश्वास पूर्वक भगवान शंकर एवं माता पार्वती का ध्यान करके सोमवार से निम्न मंत्र का एक माला जप करे।

मंत्र: ऊँ क्लीं त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पतिवेदनम्।

उर्वारुकमिव बन्धनादितो मुक्षीय मामृतात् क्ली ऊँ

यदि पति-पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर हमेशा झगड़ा होता रहता हो तथा इस कारण से पारिवारिक कलह बनी रहती हो तो निम्न उपाय करने से लाभ होगा।

शुद्ध स्फटिक से बने शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा करवाकर अपने घर में स्थापित करें। 41 दिन तक नित्य शिवलिंग पर गंगा जल एवं बेल पत्र चढ़ाएं। उसके पश्चात् निम्न मंत्र का नित्य 5 माला जप करें।

ऊँ नमः शिवशक्तिस्वरूपाय मम गृहे शांति कुरु कुरु स्वाहा।

पति-पत्नी के बीच लड़ाई- झगड़ा हो तो रात को सोते समय पति अपने सिरहाने सिंदूर तथा पत्नी कपूर रखे। सुबह उठ कर पत्नी कपूर को जला दे तथा पति सिंदूर को घर में कहीं भी गिरा दे, तो घर में लड़ाई-झगड़े खत्म हो जाएंगे तथा सुख-शांति बनी रहेगी।

परिवार में सुख के लिए:

परिवार में सुख-शांति तथा समृद्धि के लिए प्रति दिन प्रथम रोटी के चार बराबर भाग करें। एक गाय को, दूसरा काले कुत्ते को, तीसरा कौए को दें तथा चैथा भाग चैराहे पर रखें।

हर प्रकार की सुख-शांति के लिए:

अशोक वृक्ष के सात पत्ते मंदिर में रख कर पूजा करें। जब वे मुरझाने लगें, तो नए पत्ते रख दें और पुराने को पीपल के नीचे रख आएं। इससे घर में सुख-शांति बनी रहेगी।

गृह शांति के लिए:

एक पतंग पर अपने कष्ट तथा परेशानियां लिखें। उसे हवा में उड़ा कर छोड़ दें। ऐसा 7 दिन लगातार करें। सभी कष्ट तथा परेशानियां दूर हो जाएंगी तथा घर में सुख-शांति आएगी।

घर में अशांति रहने पर:

यदि आपके लाख उपाय करने पर भी अकारण ही अशांति बनी रहती हो, तो गाय के गोबर का एक छोटा दीपक बनाएं। उसमें तेल और रूई की बत्ती डाल कर थोड़ा गुड़ डाल दें तथा उस दीपक को जला कर दरवाजे के बीच रख दें। परेशानियां कम होने लगेंगी। इसे आवश्यकतानुसार 2-3 बार, थोड़े समय के अंतराल से, कर लेना चाहिए। इसके लिए शनिवार विशेष उपयुक्त दिन है तथा तिल का तेल श्रेष्ठ है।

घरेलू झगड़ा होने पर:

घर में प्रायः क्लेश रहता हो, या छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा होना हो तो घर में गेहूं केवल सोमवार या शनिवार को ही पिसवाएं। पिसवाने से पहले उसमें 100 ग्राम काले चने डाल दें। इस प्रकार का आटा खाने से धीरे-धीरे लड़ाई-झगड़े तथा घर में क्लेश खत्म हो जाएंगे।

मानसिक शांति एवं कार्य की सफलता हेतु:

कुंडली में चंद्रमा पाप पीड़ित या अशुभ होने पर पारिवा¬रिक अशांति, धन की कमी तथा कार्य संचालन में परेशानी देता है। इससे बचाव के लिए रविवार की रात को सोते समय, चांदी या स्टील के गिलास में थोड़ा कच्चा दूध डाल कर उसे सिरहाने रख कर सो जाएं। सोमवार की सुबह इस दूध को कीकर (बबूल) के पेड़ पर चढ़ा आएं।

सावधानी: गिलास को किसी बर्तन से न ढकें।

बाहरी बाधा के कारण परेशानी रहने पर: यदि बाहरी बाधा के कारण घर अथवा व्यवसाय में परेशानी महसूस होती हो, तो अपने निवास/व्यवसाय स्थान के पास जो भी वृक्ष हो, उसकी जड़ में शाम को दूध डालकर वहां अगरबत्ती जलाने से लाभ होता है। इसके लिए सामवार उपयुक्त दिन है।

सर्व आपदा दुख निवारण हेतु:

किसी प्रकार की विपत्ति आने का भय हो अथवा आपदाग्रस्त हो, मनोबल कमजोर हो गया हो, जीवन में बार-बार अशुभ घटनाओं के कारण मन दुखी रहता हो तो श्रद्धा विश्वासपूर्वक निम्न मंत्र का मानसिक जप अथवा लाल चंदन की माला से पांच माला नित्य जप करने से शीघ्र लाभ होता है।

करोतु सा नः शुभहेतुरीश्वरी शुभानि भद्राणिभिहन्तु चापदः।

आर्थिक परेशानी निवारण का अचूक उपाय:

यदि आर्थिक समस्या के कारण परिवार में कलह रहती हो, आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई हो कि कुछ भी उपाय न सूझ रहा हो तो कनकधारा यंत्र को अपने घर में अथवा व्यवसाय स्थल पर षोड्शोपचार विधि से पूजन एवं प्राण प्रतिष्ठत करके स्थापित करें। 21 दिन तक नित्य यंत्र के सम्मुख बैठकर श्रद्धा विश्वासपूर्वक कनकधारा स्तोत्र के 11 पाठ करें।

मां लक्ष्मी की कृपा से आर्थिक परेशानी से छुटकारा अवश्य मिलेगा।

मुकदमा, कोर्ट-कचहरी के मामलों के निवारण हेतु उपाय:

यदि कोर्ट-कचहरी संबंधी मामलों के कारण जीवन में संघर्ष तथा तनाव बना रहता हो, कार्य में मन न लगता हो, शत्रुओं के झूठे षड्यंत्र के कारण विपत्ति में फंसे हांे तो भौतिक प्रयासों के साथ-साथ आध्यात्मिक उपाय करने से आई हुई विपत्ति टल जाती है जिससे जीवन में पुनः सुख शांति लौटती है।

शुक्ल पक्ष में किसी शुभ मुहूर्त या मंगलवार को तांबे या सोने से बने बगलामुखी यंत्र को पूर्ण विधि विधान के अनुसार प्राण प्रतिष्ठा करके घर में स्थापित करें। उसके बाद बगलामुखी मंत्र का 36 हजार की संख्या में जप और उसका दशांश हवन करें। साधना काल में पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें। जप के लिए हल्दी की माला, पीले वस्त्र, पीला आसन तथा एक समय का भोजन भी पीले रंग का होना चाहिए। इस प्रकार की विधि से पवित्र अवस्था में जप करने से मां बगलामुखी की कृपादृष्टि शीघ्र प्राप्त होती है। साधना काल में त्रुटि होने पर इसका उलटा प्रभाव भी हो सकता है। इसलिए इस साधना को किसी अनुभवी, सिद्ध गुरु के सान्निध्य में संपन्न करें या किसी सुयोग्य कर्मकांडी ब्राह्मण से अनुष्ठान करा सकते हैं।

ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा

भय नाश के लिए:

मन में हमेशा भय बना रहता हो, हर समय अनिष्ट की आशंका रहती हो, दब्बूपन की आदत बन गई हो, धैर्य एवं साहस में कमी हो जिसके कारण मनोबल कमजोर पड़ गया हो, हमेशा मानसिक परेशानी रहती हो तो भगवती दुर्गा का यंत्र पूजा व प्राण प्रतिष्ठा करके अपने घर में स्थापित कर और यंत्र के सम्मुख बैठ कर नित्य निम्न मंत्र का जप करें।

सर्व स्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्ति-समन्विते।

भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते।।

ज्योतिष शोध ज्ञान दांपत्य विछोह पर नयी खोज

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प्यार और शादी के बाद धोखा देने वाले जातक

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आज के समय में कितनी ही शादियां सिर्फ इसीलिए टूट रही हैं क्योंकि पुरूषों का किसी और महिला के साथ अफेयर होता है। शादी के बाद एक्स्ट्रा मैरेटियल अफेयर होने का मतलब है कि पुरुष अपनी पत्नी से अब पहले जैसा आकर्षण और लगाव नहीं रखता है। ( शुक्र , मंगल , राहु , चन्द्रमा , केतु के प्रभाव के कारण ) लेकिन क्या आप जानते हैं शादी के बाद अफेयर करने के क्या कारण हो सकते हैं।

आईए आज कुंडली के उन्हीं कारणों को जानते हैं:

1. कूछ नया करने की चाह

( चन्द्रमा और शुक्र पर केतु का प्रभाव )

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पुरूष हमेशा कुछ नया करने की कोशिश करते है। पुरूष हमेशा अपनी दैनिक दिनचर्या वाले जीवन में कुछ नया चाहते है और एक रोमांचक चीजों के साथ सम्बंध जोड़ना चाहते है। वह बहुत जल्दी की अपनी रोजाना जिन्दगी से बोर हो जाते हैं। ऐसे में वे शादी के बाद लव अफेयर जैसा कदम उठाते हैं।

2) सेक्सुअल इच्छाओं के कारण

( मंगल और शुक्र पर राहु का प्रभाव और कमज़ोर चन्द्रमा )

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यह बात कई शोधों में भी साबित हो चुकी है कि लगभग 80 फीसदी पुरूष अपनी पत्नियों को सेक्सुअल इच्छाओं के कारण धोखा देते हैं। आमतौर पर सेक्सुअल इच्छा भी कई तरह की होती है। उनके भीतर सेक्सुअल एडिक्शन हो सकता है, जिसके चलते वे अपने मौजूदा रिश्ते से असंतुष्ट होकर नई जगह संबंध बनाने की कोशिश करते हैं।

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3) अहंकार की भावना

( मंगल और राहु का शुक्र पर दुष प्रभाव )

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कुछ पुरूष अपने अहंकार के कारण भी अफेयर करते हैं। कई बार अपने अहंकार को संतुष्ट करने के लिए वे दूसरी महिलाओं के प्रति आकर्षित हो जाते हैं। दरअसल वे अपने पार्टनर को दिखाना चाहते हैं कि वे महिलाओं को कितनी आसानी से अपनी ओर आकर्षित कर सकते हैं।

4) रिश्तों में बढ़ती बोरियत के कारण ( खराब बुध + चन्द्रमा + शुक्र पर राहु का प्रभाव )

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शादी के बाद पुरूषों के एक्स्ट्रा मैरिटयल रिलेशनशिप का एक महत्वपूर्ण कारण है रिश्ते में बोरियत आना। लाइफ उस समय और भी ज्यादा नीरस हो जाती है जब पत्नी घरेलू कामकाज और बच्चों में इतनी व्यस्त हो जाए कि पुरुष के लिए समय ही ना निकाल पाए। ऐसे में कुछ पुरूष इस बोरियत को दूर करने के लिए अलग-अलग महिलाओं से रिश्ता रखते हैं।

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5. आत्मसम्मान की तलाश में

( राहु + सूर्य में खराब शुक्र )

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कुछ महिलाओं की आदत होती है ‌कि वे अपने पतियों में किसी ना किसी बात को लेकर मीन-मेख निकालती रहती हैं या हर बात पर उन्हें टोकती हैं। ऐसे में पति चाहे-अनचाहे अपनी पत्नी से दूर हो जाता है और दूसरी महिलाओं की ओर आकर्षित होने लगता है।

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6) सोसाइटी में आया खुलापन

( मंगल+शुक्र / चन्द्र + शुक्र )

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यह सच है कि आज के समय में विवोहत्तर संबंध बहुत आम बात है। आज वर्कप्लेस पर महिलाएं और पुरूष दोनों कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। ऐसे में पुरूष महिलाओं के साथ उठते-बैठते अपनी भावनाएं शेयर करने लगता है, जिससे वह चाहे-अनचाहे नए रिश्तों में बंधता चला जाता है और अपनी पत्नी को धोखा देने लगता है।

7. काम के दौरान महिलाओं से मिलना

( शुक्र + केतु )

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आज के इस दौर में जहां पुरूष और महिला ऐक साथ काम करते हैं। दिन के नौ-दस घंटे वे एक साथ ऑफिस में गुजारते हैं। ऐसे में एक दूसरे की तरफ आकर्षित होने लगते हैं। एक दूसरे का साथ अच्छा लगने लगता है जिसके कारण यहीं से एक्स्ट्रा मैरेटियल अफेयर की शुरुआत होने लगती है।

8. तांकझांक करने वाली आदत

( नीच शुक्र + राहु )

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पुरूषों में अक्सर तांकझांक करने की आदत होती है। उन्हें दूसरी औरतें ज्यादा आकर्षित करती है, जो महिला उनकी बीबी होती है उसमें उन्हे ज्यादा दिलचस्पी नहीं होती है।

9. दोस्तों का दबाव

( मंगल नीच + शुक्र खराब पर राहु का प्रभाव )

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कई बार दोस्तों के दबाव में आकर पुरूष शादी के बाद अफेयर चला लेता है और अपनी बीबी को धोखा देता है। पुरूष अक्सर अफेयर को मजा समझते है और खुद तो करते ही है और दोस्तों को भी ऐसा करने के लिए कहते है। अगर वो दोस्त ऐसा न करे तो उसे बीबी का गुलाम कहकर उसका मजाक उड़ाते है।

10. बदले की भावना

( मंगल + राहु / बुध+राहु / नीच शुक्र )

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अगर पत्नी अपने पति को लेकर वफादार नहीं है तो पति भी खुन्नस में आकर अफेयर चलाने के बारे में सोचता है, ताकि वो उसके साथ अपने हिसाब को पूरा कर सके।

कुंडली में शुक्र का नीच होना

( छठे / आठवें / बारवें भाव में )

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राहु या केतु की शुक्र संग युति

मंगल+शुक्र पर राहु का प्रभाव

चन्द्र+शुक्र पर केतु का प्रभाव

बुध+मंगल+शुक्र पर राहु का प्रभाव

ऐसी कई जुगलबंधियां ही ये गुल खिलाती है की पुरुष भँवरा बन नई नई कलियों की तलाश में भटकता रहता है और ऐसे ही कई योग हैं जो स्त्री की कुंडली में भी हों तो वो भी तितली की तरह चक्कर काटती पाई जाती हैं।

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उपाय टोटके दांपत्य जीवन के 

पति पत्नि के मध्य किसी भी तरह का मनमुटाव हो तो ऐसे में बुधवार को तीन घंटे का मौन व्रत रखें एवं शुक्रवार को अपने हाथों से बनी साबूदाने की खीर में मिश्री डालकर सभी को खिलाएं। दाम्पत्य जीवन में पुनः प्रेम का संचार होगा।

■ अपने शयन कक्ष में ज्यादा से ज्यादा

गुलाबी रंग प्रयुक्त करें। साथ ही पति

पत्नि अपनी एक मुस्कुराती हुयी

तस्वीर सदैव अपने शयन कक्ष में

लगाकर रखें। शीघ्र ही आपसी संबंधो

■ वैवाहिक जीवन में सुख और प्रेम

बना रहे इसके लिए पति के भोजन

कर लेने के पश्चात् उनके बचे

भोजन से अवश्य ही कुछ ना कुछ

खाएँ। साथ ही अपनी थाली से भी

पति को कुछ-ना-कुछ अवश्य

खिलाएं तो शीघ्र ही दांपत्य जीवन

सरस बन जाता है।

■ विवाहित स्त्री नित्य प्रति माँ दुर्गा

चालीसा का पाठ करे साथ ही माँ

दुर्गा के 108 नामों का जाप करें

वैवाहिक जीवन में सुख

खुशहाली आती चली जाएगी।

■ सुखी दाम्पत्य जीवन में कड़वाहट

का एक प्रमुख कारण नजर बाधा

भी होती है। नजर बाधा का सबसे

ज्यादा प्रभाव पति पर ही अधिक

दिखाई देता है। ऐसी परिस्थित में

आप एक छोटी कटोरी में आटाथोड़े से काले तिल और शुद्ध देशी

घी लें इनमें थोडा-सा पानी

डालकर गूंथ लें। छोटी छोटी

• गोलियां बनाकर किसी कपड़े में

रखकर पति के ऊपर से ग्यारह बार

उसारकर उन गोलियों को पक्षियों

को खिला दें।

विवाहित स्त्रियां सदैव अपने

हाथों में अपनी सार्मथ्यानुसार

सोने की चूड़ियां अवश्य

धारण करें।

 ■ प्रत्येक गुरूवार के दिन गाय को

तीन रोटी व गुड़ खिलाएं। साथ ही

जब भी कोढ़ी आपके सामने आए

और आपसे भीख मांगे तो उसे

खाली हाथ ना लौटाएं ऐसा करने से

आपके दांपत्य जीवन पर किसी की

भी नजर नहीं लगेगी।

■ किसी भी शनिवार के दिन आप

सवा किलो इमरती भिखारी एवं

विकलांगों में वितरित करें। दाम्पत्य

जीवन की मधुरता बनाए रखने में

यह प्रयोग एक महत्वपूर्ण भूमिका

निभाता है।

यदि पति-पत्नी में परस्पर तू-तू, मैं-मैं एवं वाकयुद्ध अक्सर होता रहता हो तो

ऐसे जातक को बुधवार के दिन कुछ समय के लिए मौनव्रत करना चाहिए।

दिन यदि इत्र की शीशी खरीदकर घर में रखें तो पति-पत्नी में सामंजस्य

बढ़ता है।

→प्रत्येक गुरुवार को पति-पत्नी राम-सीता के मन्दिर में जाकर भगवान के

दर्शन करें और प्रसाद का भोग लगाकर मन्दिर में ही बांट दें तो उनके मध्य

सामंजस्य व सहयोग की भावना बढ़ेगी।

→ जीवन साथी का स्वभाग उग्र हो तो ऐसे व्यक्ति को ससुराल से चांदी का

आभूषण उपहार स्वरूप दिलवाना चाहिए तथा व्यक्ति को उसे हर समय

धारण रखना चाहिए।

पति-पत्नी में विवाद हो तो दोनों को कांसे के बर्तन में घी लेकर जिस स्थान

पर अखण्ड ज्योति जलती हो उसमें डालना चाहिए।

सफेद कपड़े में एक मुट्ठी गेंहू, गुड़, नमक और दो चांदी के सिक्के बांधकर

शयनकक्ष में रखें।

रात को पति अपने सिरहाने सिन्दूर और पत्नी कपूर रखे। सुबह कपूर को

जला लें तथा सिन्दूर पीपल के वृक्ष में डाल आएं।

जातक को चाहिए वह अपने जीवन साथी का नाम भोजपत्र पर लाल चंदन से

लिखकर शहद की शीशी में डुबोकर एकांत में रख दे। आपसी प्रेम बना

रहेगा।

सुखमय दाम्पत्य जीवन और पुत्र की चाह रखने वाले व्यक्ति को सफेद

एवं मालती के फूलों को पानी में डालकर स्नान करना चाहिए।

→ दाम्पत्य जीवन में सुख के लिए पति-पत्नी को गौरी शंकर रुद्राक्ष धारण करना

चाहिए। इससे वैवाहिक जीवन सुखमय होगा।

o डबल बेड के पलंग पर हमेशा एक ही बड़ा गद्दा लगाएं। दो अलग-अलग

गद्दों का होना आपके पारिवारिक जीवन में झगड़े को बढ़ावा देता है और

पति-पत्नी के मन में दरारें पैदा करता है।

मंगल दोष की वजह से तनाव है तो मंगलयंत्र की पूजा-अर्चना एवं मंगल

चंडिका स्त्रोत का पाठ करने से लाभ होता है। मंगलवार को बहते पानी में

रेवड़ियां डालें, गुड़ की मीठी रोटी सेककर कुत्तों को खिलाएं।

● दाम्पत्य जीवन में तनाव का कारण पति-पत्नी का शंकालु स्वभाव हो तो

शयनकक्ष में मोर पंख इस प्रकार से लगाएं कि कक्ष में प्रवेश करते समय तथा

सोते समय मोर पंख दिखाई पड़े। इससे काफी हद तक मन की शंका समाप्त

हो जाएगी।

० शुक्रवार के दिन घर की प्रधान स्त्री को सुबह जल्दी उठकर सूर्योदय से पहले

दो-तीन मुट्ठी चावल पकाने चाहिए। चावल के ठण्डा होने पर उसमें चीनी व

घी मिलाकर रात की बनी रोटी पर रखकर घर से बाहर राह चलती गाय को

खिला दें। गाय को प्रणाम करके घर लौट आएं। ऐसा कम से कम पांच

शुक्रवार करने से आप स्वयं परिवर्तन महसूस करेंगे।

→ शनि की वजह से तनाव होने पर लकड़ी के सवा किलो कोयले पानी में

बहाएं। उड़द, सरसों का तेल, लोहे का पात्र एवं काला वस्त्र शनिवार को

डाकोत को दान दें। शिव सहस्त्र नाम का नियमित जाप करें।

→ पीतमणी गुरुवार को गुरु पुष्य नक्षत्र में गौ-मूत्र से धोकर धारण करने से कटु

से कटु दाम्पत्य जीवन में सुधार आकर गृहस्थ में ऋिद्धि-सिद्धि व बरकत

बढ़ती है।

→ प्रत्येक सोमवार को अपनी पत्नी को कोई सफेद रंग की वस्तु का उपहार

अवश्य दें। इस उपाय से वह आपके विरोध में नहीं आएगी और आपस में प्रेम

की वृद्धि होगी।

यदि आपकी ससुराल में आपकी पत्नी से छोटी कोई बहन अथवा भाई है तो

उनके विवाह में अवश्य ही कुछ आर्थिक मदद करें अथवा जितने कार्य कर

सकते हों वह अवश्य करें। यह उपाय आपके जीवन भर काम आएगा।

आपकी पत्नी फिर आप पर कभी शक नहीं करेगी।

यदि आपकी पत्नी आप पर बिना बात पर शक करती है तो प्रत्येक शुक्रवार

को गाय को हरी घास खिलाएं।

→ यदि आपको अपने कार्य के कारण घर आने में विलंब होता है और इस कारण

से आपकी पत्नी आप पर शक करती है तो आप एक विशेष बात का ध्यानरखें। जब भी आपको घर आने में विलंब हो जाए तो घर आते समय कोई

सफेद रंग की मिठाई अवश्य ले आएं। इससे आपकी पत्नी का क्रोध तुरन्तस माप्त हो जाएगा।

आपकी पत्नी यदि आप पर किसी अन्य स्त्री से सम्बन्ध होने का शक करतीहै तो प्रथम गुरुवार को अपने ससुराल में ससुर को पीले वस्त्र उपहार में दें।

अगले दिन शुक्रवार को अपनी पत्नी को वस्त्रों के साथ सुहाग सामग्री उपहारमें दें तथा पत्नी के द्वारा यही सब अपनी सास के लिए भेजें।

यदि आपकी पत्नी के हाथ से व्यर्थ के खर्च अधिक होते हैं तो आप यह उपायकरें। शुक्लपक्ष के प्रथम मंगलवार को अपनी पत्नी के साथ किसी भी

हनुमानजी के मन्दिर में जाएं। मन्दिर में अपनी पत्नी के हाथ से 5 लाल पुष्प

(गुलाब के अतिरिक्त कोई भी) एक जनेऊ का जोड़ा, एक नारियल, लाल

वस्त्र में सवा सौ ग्राम मसूर की दाल, कुछ दक्षिणा तथा कोई भी भोग अर्पित

कराएं तथा प्रभु से अपनी पत्नी को फिजूलखर्च न करने की सद्बुद्धि देने की

प्रार्थना करें। कार्य सिद्ध होने पर प्रभु के नाम से कुछ अवश्य की कार्य करने

का संकल्प लें। इस उपाय के बाद आप देखेंगे कि कितनी त्वरित गति से

उनकी फिजूलखर्ची समाप्त होती है।

० विवाह के बाद सर्वप्रथम आप पत्नी के साथ श्रीकृष्ण मन्दिर में अवश्य जाएं।

इससे आपके जीवन में सदैव प्रेमसरिता का प्रवाह बना रहेगा।

शुक्लपक्ष की अष्टमी को आप अपने हाथ से पत्नी की मांग में सिन्दूर भरें।

यदि आपकी पत्नी का स्वभाव कुछ कठोर है तो इसे मृदु बनाने हेतु आपको

चाहिए कि आप शुक्लपक्ष के प्रथम शुक्रवार को किसी भी माता दुर्गा मन्दिर

में दो जटा वाले नारियल लेकर जाएं। विधिवत पूजा-अर्चना कर कोई वस्त्र

तथा सुहाग सामग्री के साथ एक सिन्दूर की डिब्बी अर्पित करें। सफेद भोग

अर्पित कर एक नारियल माता के चरणों में रखें और दूसरा नारियल माता का

स्मरण कर मन्दिर में फोड़ दें। अब आप सिन्दूर की डिब्बी व सुहाग सामग्री

के साथ नारियल उठा लें। वस्त्र मन्दिर में छोड़ दें और प्रणाम कर वापिस आ

जाएं। अब आप यह सुहाग सामग्री अपनी पत्नी को दे दें तथा उससे कहें कि

वह आपके सामने ही उसका प्रयोग करे। फिर आप सिन्दूर की डिब्बी से

अपने हाथ से पत्नी की मांग भरें तथा नारियल को फोड़कर उसका पानी अपने

हाथ से पत्नी को पिला दें। यह प्रयोग शुक्लपक्ष के प्रथम तीन शुक्रवार को

करना है। इस प्रकार आपका यह उपाय तीन माह में पूर्ण हो जाएगा परन्तु

इसका प्रभाव आपको प्रथम बार से ही मिलने लगेगा। उपाय पूर्ण होने तक

आपकी पत्नी का स्वभाव पूर्णतः परिवर्तित हो जाएगा।

आप अपनी आराधना में भगवान श्रीकृष्ण के युवा रूप की पूजा करें जिसमें

भगवान श्रीकृष्ण बांसुरी बजा रहे हैं और राधा नृत्य कर रही है। इस तस्वीर

को आप किसी भी शुक्लपक्ष के प्रथम शुक्रवार को अपने पूजास्थल में स्थान

दें। प्रथम दिन प्रभु को साबूदाने की खीर का भोग तथा मिश्री अर्पित करें,

• साथ में राधा को कोई कसीदाकारी का वस्त्र अर्पित करें। पूजा करने के बाद

आप सारी सामग्री उठा लें। खीर अपनी पत्नी को अपने

चुनरी भी अपने ही हाथ से औढा दें और मिश्री का सेवन स्वयं कर लें। इस उपाय से आपके परिवार में चमत्कारी परिवर्तन आएगा। इसके बाद आपको

प्रत्येक शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण को केवल खीर का भोग ही अर्पित

करना है।

यदि आप पूर्णिमा को ठीक प्रातः 10 बजे पीपल का पूजन मीठे जल से कर

सकें तो आपको इसका बहुत लाभ प्राप्त होगा। इसके प्रभाव से आपकी

नौकरी के साथ साथ वैवाहिक जीवन भी सुखमय रहेगा। शास्त्रानुसार प्रत्येक

पूर्णिमा पर प्रातः 10 बजे पीपल के वृक्ष पर मां लक्ष्मी का फेरा लगता है।

इसलिए जो किसी भी कारण से परेशान हो तो उनको इस समय अवश्य ही

पीपल के वृक्ष के साथ मां लक्ष्मी की उपासना करनी चाहिए। ऐसा करने से

उन्हें कष्ट से मुक्ति प्राप्त होती है।

→ यदि आप अनुभव करते हैं कि आपको आपकी पत्नी से वह प्रेम नहीं मिल

रहा है जो पहले मिला करता था तो आप सोते समय सिरहाने तांबे के बर्तन में

जल भरें व उसमें थोड़ा शहद के साथ पत्नी की धारण की हुई सोने अथवा

चांदी की अंगूठी रख दें। प्रात: उठकर सबसे पहले उसी पानी को पीयें। कुछ

ही दिन में आप चमत्कार अनुभव करेंगे।

→ अपने दाम्पत्य जीवन को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए शिव परिवार की

तस्वीर प्राप्त करें। इसमें भगवान शिव, माता पार्वती तथा गणेशजी होने

चाहिएं। इस तस्वीर को अपने पूजा स्थल में स्थान दें। प्रात: सायं तस्वीर के

समक्ष धूप-दीप अर्पित करें और मानसिक रूप से यह निवेदन करें कि ऐ

माता मेरे तथा मेरे परिवार पर आने वाले किसी भी प्रकार के संकट से मेरी

रक्षा कर क्योंकि यहां पर आप ही मेरी माता हैं ऐसा करने से माता पार्वती

निश्चित ही आपको संकटों से बचा कर रखेंगी।

यदि आपका अपनी पत्नी से किसी प्रकार का विरोध हो तो आप लगातार सात

सोमवार 250 ग्राम कच्चे दूध से शिवलिंग को स्नान कराएं। उपाय पूर्ण होने

तक पत्नी से आपके सम्बन्ध अच्छे हो जाएंगे और भविष्य में भी अच्छे ही बने

रहेंगे।

के

यह उपाय तब करें जब उपरोक्त तरीके ज्यादा फायदेमंद साबित न हों।

• शुक्लपक्ष के प्रथम गुरुवार को भगवान दत्तात्रेय के दर्शन करें। दत्तात्रेय के मन्दिर में पत्नी के लिए पीले रंग का जोड़ा तथा तीन पीले वस्त्र पुरुष लेकर जाएं। अब आप सर्वप्रथम भगवान दत्तात्रेय को सारे वस्त्र अर्पित करें,साथ ही सवा किलो बेसन के लड्डू और एक केशर की डिब्बी भी अर्पित

कर अपनी समस्या के समाधान का निवेदन करें। पूजन के बाद आप सबसे

पहले सारे लड्डू वृद्ध पुरुषों में बांट दें। तीनों वस्त्र भी सर्वाधिक आयु के पुरुषो को दान दे

पत्नी वाले वस्त्र तथा केशर की डिब्बी घर पर लाकर

अपनी पत्नी को उपहार में दें। किसी भी बहाने से उन्हें नित्य केशर सेवन का

निवेदन करें। अगले गुरुवार को पुनः मन्दिर में जाएं। अब केवल बेसन के

लड्डू ही अर्पित करें। इस प्रकार आपको कम से कम पाच गुरुवार मन्दिर में

• दर्शन करने जाना है परंतु वस्त्रों का दान केवल प्रथम बार ही करना है।

उपाय से आपके परिवार के क्लेश दूर हो जाएंगे।इस यदि आपको लगता है आपके पति आप पर व्यर्थ का शक करते हैं तो आप

प्रत्येक सप्ताह में रविवार को परिवार के सबसे बड़े पुरुष सदस्य को तथा

सोमवार को महिला सदस्य को अपने हाथ से भोजन परोस कर दें।

→ आपके परिवार के किसी सदस्य के कारण आपके पति आप पर व्यर्थ का

शक करते हैं तो आप शुक्लपक्ष की सप्तमी तथा कृष्णपक्ष की अष्टमी को

(शुक्रवार अथवा रविवार न हो) प्रातः 11 बजे पीपल वृक्ष पर जाकर जल में

गुड़ व केशर मिलाकर शुद्ध घी के दीपक से पूजन करें। इस उपाय से आपके

परिवार के उस सदस्य को सद्बुद्धि आएगी जिनके कारण से आपके पति आप पर शक करते हैं।यदि आपके पति किसी भी सदस्य के सामने आपका अपमान करते हैं तो

आप यह उपाय अवश्य करें-शुक्लपक्ष तथा कृष्णपक्ष चतुर्दशी को किसी भी निकट के शिव मंदिर में जाकर दूध से शिवलिंग को स्नान कराएं तथा

साबूदाने की खीर का नैवेद्य अर्पित करें। उपरोक्त उपाय आप अपने पति कीअधिक क्रोध करने की आदत समाप्त करने के लिए भी कर सकती हैं।

यदि आपके पति आपके लाख मना करने पर भी परिवार के किसी अन्य सदस्य की बातों में आकर व्यर्थ का खर्च करते हैं तो आपको चाहिए कि आप

महीने में कम से कम एक बार 9 वर्ष से कम आयु की कन्या को अपने हाथसे भोजन कराएं तथा उसी दिन हो सके तो किसी हिजड़े को नगद राशि का दान भी दें।

यदि आपके पति परिवार के किसी अन्य सदस्य की बातों में आकर आपसेदुर्व्यवहार करते हैं तो आप नियमित रूप से घर की चौखट पर सरसों के तेल

का दीपक रखें तथा दीपक के नीचे कुछ दाने काले तिल के रखें। यह उपाय शनिवार से आरम्भ करें।

पत्नी द्वारा किया जाने वाला एक सशक्त टोटका है जिसको अपनाने से

दाम्पत्य में क्लेश दर होता है। शुक्लपक्ष के प्रथम गुरुवार से आरम्भ करें और

लगातार तीन दिन तक करें। इस उपाय में आपको तीन स्थान पर सुहाग

सामग्री (सिन्दूर, चूड़ियां, मेहंदी, वस्त्र, महावर व नगद दक्षिणा आदि)की

आवश्यकता होगी जो आप अपनी आर्थिक सामर्थ्य के अनुसार प्राप्त कर

सकती हैं। सामग्री में कोई वस्त्र तथा सिन्दूर अवश्य होना चाहिए। अब आप

• गुरुवार को दोपहर 2 बजे के बाद स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें। एक थाली

में सुहाग सामग्री लेकर किसी सुहागिन ब्राह्मण वर्ग की स्त्री को दान कर दें।

• फिर चरणस्पर्श कर कुछ नगद दक्षिणा देकर उनके हाथ से सिन्दूर की डिब्बी

वापस ले लें। डिब्बी को किसी सुरक्षित स्थान पर रख दें। अगले दिन

सायंकाल लगभग 5 बजे स्नान कर हल्के रंग के वस्त्र पहनकर किसी क्षत्रिय

वर्ग की सुहागिन को सुहाग सामग्री दें तथा फिर वही क्रिया करें अर्थात चरण

स्पर्श कर कुछ नगद धन देकर सिन्दूर की डिब्बी वापस ले लें। इस डिब्बी

को भी पहले वाली डिब्बी के साथ रख दें। अब अगले दिन अर्थात शनिवार

को अंधेरा होने के बाद स्नान कर नीले रंग के वस्त्र धारण करें और सुहाग

सामग्री का दान किसी निम्नवर्ग की सुहागिन को करें। फिर वही क्रिया करें।

इस प्रकार से आपके पास तीन सिन्दूर की डिब्बियां हो जाएंगी। अब आप

तीनों डिब्बियों का सिन्दूर एक साथ मिला लें और नियमित रूप से इससे

अपनी मांग भरें। कुछ ही दिन में आप परिवर्तन अनुभव करेंगी क्योंकि आप

पर देवगुरु बृहस्पति, शुक्रदेव तथा शनिदेव की कृपा है। देवगुरु की कृपा से

आपके पति को सद्बुद्धि आएगी, शुक्रदेव की कृपा से आपके दाम्पत्य जीवन

में सुख आएगा। शनिदेव की कृपा से आपके परिवार में गुप्त विरोधी निष्क्रिय

होंगे।

→ यदि आपको सोमवार के दिन कोई सफेद वस्तु किसी स्त्री की ओर से उपहार

में मिली हो तो उस वस्तु को अवश्य ही सम्भाल कर रखें क्योंकि जब तक

आपके पास वह वस्तु रहेगी तब तक आपको सास से प्रेम ही मिलेगा।

→ कई बार परिवार में विभिन्न कारणों से बहू के द्वारा किए जा रहे कार्यों का

विरोध होने लगता है। इस स्थिति से बचने के लिए आप प्रत्येक अमावस्या

को नमक मिले पानी से घर में पोंछा लगाएं।

→ यदि आपकी सास के साथ परिवार का कोई अन्य सदस्य भी आपसे विरोध

रखता है, तो आप शनिवार को कीकर के वृक्ष पर भोजन रखकर पूजन करें

तथा जल अर्पित करें।

यदि आपके साथ दुर्व्यवहार अधिक होता है तो आप रविवार को भैरवदेव के

दर्शन अवश्य करें और काले कुत्ते को इमरती खिलाएं। इसके साथ भैरवजी

से उन लोगों को सद्बुद्धि देने का निवेदन करें जो आपको परेशान करते हैं।

• कुछ समय पश्चात उपाय का प्रभाव दिखाई देने लगेगा।

पूर्णिमा की रात्रि में साबूदाने की खीर बनाएं। इसमें शक्कर के साथ मिश्री भी डालें। चन्द्रोदय होने के बाद मानसिक रूप से चन्द्रदेव का पूजन करें और दूध

से अर्घ्य देकर 11 बार ॐ सो सोमाय नमः का जाप करें। फिर खीर को चांदी

की कटोरी में डालकर रात्रि में किसी ऐसे स्थान पर रख दें जहां पर चन्द्र

किरणें आती रहें। दूसरे दिन प्रातः स्नान कर हल्के रंग के वस्त्र धारण कर

• शिवजी का पूजन करें और कटोरी की खीर अपनी सास को खिला दें। इस

उपाय से आपकी सास के मस्तिष्क में शीतलता आएगी और आपके प्रति

उनके मन में प्रेमवृद्धि होगी। यदि चांदी की कटोरी उपलब्ध नहीं हो तो किसी

भी कटोरी में खीर डालकर उसमें चांदी का कोई आभूषण जैसे अंगूठी आदि।

डाल दें और परोसने से पूर्व निकाल लें।

यदि सास अपनी बहू से बहुत प्रेम करती है परन्तु किन्हीं कारणों से सास-बहू

के सम्बन्धों में विरोध आ रहा है तो प्रत्येक शुक्रवार को माता लक्ष्मी को

साबूदाने की खीर का भोग अर्पित करें और फिर उस भोग को 9 वर्ष से कम

आयु की कन्याओं में बांट दे।

→ अनेक बार सास-बहू में बहुत अधिक प्रेम होते हुए भी किसी कारण से बहू के

व्यवहार में कुछ तीखापन आ जाता है। इस समस्या को सास द्वारा एक आसान

उपाय से दूर किया जा सकता है। इसके लिए सोमवार को किसी कन्या को

नकद दक्षिणा देकर चरण स्पर्श करे।

→ नवरात्रि की पंचमी को तीन कन्याओं का पूजन करें और चरणस्पर्श कर कोई

लाल वस्त्र का उपहार दें।

यदि पूर्णिमा को सोमवार आ रहा हो तो आप उस दिन प्रात: शिवजी का दूध

से अभिषेक करें और 11 नागकेशर अर्पित करें। फिर शाम को चन्द्रोदय होने

के बाद चन्द्रदेव को भी दूध से अर्घ्य दें तथा कोई सफेद भोग अर्पित करें।

अब अर्पित भोग को अपनी बहू को खिलाएं।

यदि आपकी बहू का व्यवहार आपके साथ कुछ कटु है तो आप बुधवार को

श्री गणेशजी का पूजन करने के बाद गाय को घास खिलाएं तथा उपलब्ध होने

पर सफाईकर्मी एवं हिजड़े को कुछ नकद दान करें।

→ यदि आप गाय को नियमित रूप से रोटी पर गुड़ रखकर खिलाती हैं तो बहू

से आपके प्रेम में वृद्धि होगी।

यदि आपको कभी लगे कि आपके वैवाहिक जीवन में कोई संकट आ रहा है।

तो आपको चाहिए कि आप शुक्लपक्ष के प्रथम बुधवार को किसी हिजड़े को

अपनी सामर्थ्य अनुसार सुहाग सामग्री दें जिसमें हरे वस्त्र तथा हरी चूड़िया

अवश्य होनी चाहिए।

आप माह में एक बार अवश्य ही किसी भी शिव मंदिर में शिवलिंग को दूध

से स्नान कराएं अथवा माता दुर्गा के मंदिर में एक लाल चुनरी के साथ सिन्दूर

अर्पित करें। इससे आपको भगवान शिव अथवा मां की कृपा प्राप्त होगी जो

आपके वैवाहिक जीवन को सुनिश्चित करेगी ।

कामकाजी महिलाओं को अनेक संकटों का सामना करना पड़ता है। आपकी

पत्नी को नौकरी में कोई परेशानी है तो आपको अग्रलिखित उपाय करना

चाहिए। इस उपाय को सोमवार से प्रारम्भ करें। इसके लिए 11 अभिमंत्रित

गोमती चक्र लेकर सोमवार को प्रातः किसी भी भगवान शिव के मंदिर में

जाएं। समस्त चक्रों को शिवलिंग के नीचे रखकर भगवान शिव को दूध से

स्नान कराएं। एक जोड़ा नागकेशर के साथ कोई भी सफेद भोग अर्पित करते

हुए भोले भण्डारी और माता पार्वती से अपने परिवार में सदैव प्रेम और पत्नी

का आपके प्रति विश्वास बढ़े तथा उसकी नौकरी में कोई समस्या न आए,

इसका निवेदन करते हुए शुद्ध घी का दीपक और चंदन की अगरबत्ती अर्पित

करें। अब आप उन समस्त गोमती चक्रों में से 6 गोमती चक्र वहीं मन्दिर में

छोड़ दें और बचे पांच चक्रों को सफेद वस्त्र में थोड़ी सी मिश्री के साथ

बांधकर किसी शुद्ध स्थान पर रख दें। जब तक ये चक्र मिश्री के साथ आपके

निवास में रहेंगे, तब तक ऐसी ही मिठास आपके परिवार में बनी रहेगी

→ अपने परिवार में सुख-शान्ति के साथ आपके पति का आप पर पूर्ण विश्वास

बना रहे, इसके लिए यह उपाय अत्यन्त लाभदायक है। इस उपाय के लिए

आपको एक शुक्र यंत्र की आवश्यकता होगी जो अभिमंत्रित होना चाहिए।

शुक्लपक्ष के प्रथम शुक्रवार को संध्या समय स्नान कर नए वस्त्र धारण कर

पूर्ण शृंगार करें।

इत्र का भी प्रयोग अवश्य करें। अब यंत्र को रोली से तिलक करें, फिर इत्र

से तिलक कर शुद्ध घी का दीपक तथा तीव्र खुश्बू की अगरबत्ती अर्पित कर

स्फटिक की माला से एक माला “ॐ ऐं क्लीं शुभगुणाय नमः" मंत्र का जाप

करें। जाप के बाद यंत्र को पूजा स्थान में स्थापित करें। जब भी पूजा करें तब यंत्र

धूप-दीप अवश्य करें। इस यंत्र के प्रभाव से आपके वैवाहिक जीवन में कोई

भी संकट नहीं आएगा।कोज ब भी आप अपने घर में प्रवेश करें तो सभी लाइटें अवश्य जला दें, जिससे

जो उजाला आपने अपने निवास में किया है, वही उजाला आपके जीवन में भी

सदैव रहेगा। लाइटें सायं के समय 10-15 मिनट तक सम्पूर्ण घर में करें फिर

उनमें अनावश्यक लाइटों को ऑफ कर सकते हैं।

जब भी नौकरी को आरम्भ करें तो यह प्रयोग एक बार अवश्य करें। इस

प्रयोग के प्रभाव से मां दुर्गा की असीम अनुकम्पा आप पर बनी रहेगी। उनके आशीर्वाद से आपके वैवाहिक जीवन के साथ आपकी नौकरी भी पूर्णत:

सुरक्षित रहेगी। किसी भी माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी अथवा चतुर्दशी को

मां दुर्गा की तस्वीर के सामने कुछ रुपये तथा अपने कार्य क्षेत्र में काम आने

• वाली प्रमुख वस्तु जैसे कि अध्यापक के लिए पैन बहुत महत्वपूर्ण होता है,

इसी प्रकार आपके लिए जो महत्वपूर्ण वस्तु हो उसको भी रुपये के साथ रख

दें। फिर मां दुर्गा को धूप-दीप अर्पित करने के साथ कुछ प्रसाद भी अर्पित

कर दें। मां दुर्गा का कोई स्तोत्र, चालीसा अथवा कोई भी पाठ करें। पूजा के

बाद मां दुर्गा से अपनी सम्पन्नता का निवेदन करें। रखे हुए रुपये तथा जो भी

वस्तु रखी है उसके लिए प्रार्थना करें कि हे मां! यह धन और यह कलम

अथवा जो भी आपने रखा हो, मैं तेरा प्रसाद मानकर अपने प्रयोग के लिए ले

रही हूं। मुझे विश्वास है कि मेरी प्रार्थना स्वीकार कर मुझे अनुगृहीत करेंगी।

तेरी ही कृपा से मेरे वैवाहिक जीवन में सदैव खुशियां प्रवेश करेंगी तथा मैं

अपने कर्तव्य से भी अडिग नहीं होऊंगी। इसके बाद आप रुपये और वह वस्तु

उठा लें तथा हाथ जोड़कर पूजा स्थान से बाहर आ जाएं। अर्पित प्रसाद को 9

वर्ष से कम आयु की कन्याओं को बांट दें। अब रुपये और वह वस्तु मां दुर्गा

का प्रसाद मानकर अपने प्रयोग में लायें। इस प्रयोग को शास्त्रों में ददाति

प्रतिग्रहणाति कहते हैं। जो इस प्रयोग को करता है तो मां दुर्गा उसकी पूजा को

शीघ्र ही स्वीकार करती हैं। उसके वैवाहिक जीवन तथा कर्मक्षेत्र में कभी

संकट नहीं आता है। जब भी आप किसी संकट में आएं तो सिर्फ वह पाठ

आपने प्रयोग किया था, करके मां से परेशानी से मुक्ति का निवेदन करें। आप

बहुत ही जल्दी उस परेशानी से मुक्त हो जाएंगी।

माहवारी का रक्त

आज भी यह प्रयोग प्राय: कई स्थानों पर करके गृहणियाँ अपना परिवार सुख से चला रही हैं। इस प्रयोग का प्रभाव केवल एक महीने तक रहता है। अतः प्रत्येक मास में इसका नवीनीकरण करना होता है। इस प्रयोग के प्रभाव से पति क्रोध नहीं करता तथा आराम से घर की फिक्र करता रहता है। कुल मिला करके इस प्रयोग के प्रभाव से घर में सुख शान्ति बनी रहती है। 


यह प्रयोगभी बहुत आसान है।

जब माहवारी आ रही हो तब एक गिलास पानी में माहवारी के रक्त की सात बूँदें डाल कर पति को पिला दें। इतना करना काफी है।


माहवारी की सुपारी

यह एक खतरनाक प्रयोग है और इसका प्रभाव जीवन भर रहता है। इस प्रयोग से प्रभावी व्यक्ति को सिवा अपने माशूक के और कुछ भी नहीं सूझता। माना जाता है कि ऐसा व्यक्ति समाज के लिये व्यर्थ हो जाता है क्योंकि उस आशिक के लिये संसार की हर जरूरत उसका महबूब होती है और वह सदा उससे चिपका-चिपका सा रहता है। इसी कारण मैंने इसे खतरनाक प्रयोग कहा है। 

इस प्रयोग को करने की विधि निम्नलिखित है-

जब स्त्री को मासिक स्राव प्रारम्भ हो और वह अपनी योनिपर वस्त्र बाँधने लगे तब एक सुपाड़ी अपने योनि के प्रवेश द्वार के पास भीतर की तरफ रख ले। इसके बाद अपनी नित्य क्रिया करती रहे। जब-जब वह रुधिर वाला वस्त्र बदले तब-तब सुपाड़ी का ध्यान रखे। यह सुपाड़ी बाहर न आये तथा नीचे न गिरे। इसी भाँति की सावधानी रखती रहे। जब मासिक स्राव बन्द हो जाय तो

यह सुपाड़ी निकाल करके रख लें। यही वह सुपाड़ी है, जो जीवन भर के लिये पागलों जैसी दीवानगी पैदा करती है। यदि कोई स्त्री राँझे, महीवाल जैसे प्रेमी को देखना चाहे तो स्वयं को भी  हीर तथा सोहनी की भाँति तैयार करे और यह सुपाड़ी उस व्यक्ति को खिला दे। इसका प्रयोग मजाक के हेतु कभी नहीं करना चाहिये।

    ॐ जिन महिलाओं के पति बहुत अधिक शराब का सेवन करते हैं तथा अपनीआय का अधिक हिस्सा शराब पर ही लुटाते हैं, उनके लिये यह बहुत ही आसान उपायहै। इन उपायों को करते समय विश्वास रखें। अवश्य ही सफलता प्राप्त होगी। जिसदिन आपके पति शराब पीकर घर आयें और जब अपने जूते और उनका एक जूता अपनेआप ही उल्टा हो जाये तो आप उस जूते के वजन के बराबर आटा लेकर उसकी बिनातवे तथा चकले की मदद से रोटी बनाकर कुत्ते को खिला दें। कुछ ही समय में वहशराब से घृणा करने लगेंगे। यदि ऐसा संयोग लगातर कम से कम तीन दिन हो जाये तोवह तुरन्त ही शराब छोड़ देंगे।

    * शराब छुड़ाने का एक उपाय यह भी है कि आप किसी भी रविवार को एकशराब की उस ब्राण्ड की बोतल लायें जो ब्राण्ड आपके पति सेवन करते हैं। रविवार कोउस बोतल को किसी भी भैरव मन्दिर पर अर्पित करें तथा पुनः कुछ रुपये देकर मन्दिरके पुजारी से वह बोतल वापिस घर ले आयें। जब आपके पति सो रहे हों अथवा शराबके नशे में चूर होकर मदहोश हों तो आप उस पूरी बोतल को अपने पति के ऊपर सेउसारते हुए 21 बार “ॐ नमः भैरवाय" का जाप करें। उसारे के बाद उस बोतल कोशाम को किसी भी पीपल के वृक्ष के नीचे छोड़ आयें। कुछ ही दिनों में आप चमत्कारदेखेंगी।

    * आपके पति जब नशे में न हों तब आप अपने पुत्र अथवा पुत्री के द्वारा अपने

    पति के सामने शराब की बोतल में से पीने के लिये शराब निकालते हुए "ॐ पितायैनमः" का मंत्र पढ़वायें तथा पीने का नाटक करें। निश्चयी ही पिता गुस्सा करेंगे परन्तुबच्चा भयभीत न हो। यही कहे कि आप भी तो पीते हैं। इससे पहले आप अपनी संतानको यह अवश्य समझा दें कि यह सिर्फ एक नाटक है, फिर आप इस उपाय काचमत्कार देखें।


    * किसी भी दिन आप किसी घोड़े वाले से कुछ पैसा देकर अपने सामने कुछबूंद घोड़े का पसीना ले लें। घर आकर पसीने की शीशी पर काली धूप लगाते हुएशनिदेव व राहू देव से निवेदन करें कि आपके पति को सदबुद्धि दें कि वह शराब पीनाछोड़ दें। साथ ही कुछ संकल्प भी लें कि जब आपके पति शराब छोड़ देंगे तो उस दिनआप शनिदेव व राहूदेव के नाम पर कुछ करेंगी। फिर अपने पति से यह कहें कि उसदिन आप घर में ही शराब पीयें और अपने हाथ से ही गिलास में शराब डालें साथ हीगुप्त रूप से कुछ बूदं घोड़े की पसीने की भी मिला दें। ध्यान रखें कि यह सब आपकेपति न देख पायें। इस दिन से ही आपके पति शराब छोड़ देंगे।


    कुत्ते का नाखून अथवा बिच्छू का डंक आप किसी भी बहाने से ताबीज में पतिको धारण करायें। इसके प्रभाव से वह अन्य महिला का साथ छोड़ देंगे।


    * आपके पति यदि बहुत अधिक मद्यपान करते हैं तो आप यह उपाय अवश्यकरें। किसी भी शुक्ल पक्ष के प्रथम शनिवार को सवा मीटर काला कपड़ा व इतना हीनीला कपड़ा लेकर इन दोनों को एक-दूसरे के ऊपर रख दें। इसमें आठ सौ ग्राम कच्चेकोयले, इतनी ही काली साबुत उड़द, इतने ही जौ व काले तिल तथा आठ बड़ी कीलेंव आठ कोई भी सिक्के लेकर एक पोटली बना लें। एक जटा नारियल पर पति के नापसे आठ गुना अधिक काला धागा लेकर नारियल पर लपेट दें(पति का नाप आप किसीभी बहाने से ले सकती हैं)। उस नारियल को काजल से तिलक लगाकर धूप-दीप अर्पितकर अपने पति की मद्यपान की आदत को त्यागने का निवेदन करें। फिर इस सारीसामग्री को किसी बहते जल में प्रवाहित करें। हाथ जोड़ कर बहती सामग्री पर नजररखें तथा मानसिक रूप से सोचें कि शनिदेव की कृपा से पति की मद्यपान की आदतआपके पति से दूर जा रही है। जब सामग्री आपकी नजरों से ओझल हो जाये तो वापिसआ जायें। इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि जल धारा आपसे दूर जा रही हो तथा जबआप वापिस आयें तो पीछे मुड़कर न देखें। घर में प्रवेश से पहले हाथ-पैर अवश्य धोलें, तब किसी पीपल के नीचे जाकर तिल के तेल का दीपक अर्पित कर आयें। ऐसा आपआने वाले बुधवार व शनिवार को पुनः करें। आप स्वयं देखेंगी कि आपके पति ने शराबसे घृणा कर ली है। यह उपाय आप गुप्त रूप से करें। किसी से भी चर्चा न करें, तभीआपको सफलता प्राप्त होगी।

    ॐ शराब छुड़वाने का एक यह भी उपाय है कि आप एक शराब की बोतल किसीशनिवार को पति के सो जाने के पश्चात् उन पर से 21 बार उसार लैं। उस बौतल केसाथ किसी अन्य बोतल में आठ सौ ग्राम सरसों का तेल लेकर आपस में मिला दैं औरकिसी बहते जल के किनारे पर इस स्थिति में उल्टा गाढ़ दें जिससे बोतलों के ऊपर सेजल बहता रहे। यह भी बहुत प्रभावशाली उपाय है।


    आपने उपरोक्त उपायों में से किसी उपाय से अपने पति की मद्यपान की आदत सेतो छुटकारा पा लिया परन्तु आपमें से कुछ ऐसी महिलायँ भी हॉगी जिनके पति अपनीपत्नी की सुनते नहीं होंगे। उनका किसी अन्य महिला से सम्बंध हॉगा। उस महिला केकारण आपको अपमान भी सहना पड़ता होगा। मैं अब कुछ ऐसी महिलाओं को ध्यान मेंरख कर उपाय बता रहा हूँ जिससे प्रभु कृपा से आपके पति का सम्बन्ध यदि किसी अन्यमहिला से है तो वह उनसे दूर हो जायेंगे, आपको सम्मान भी देंगे। आपकी बात भीसुनेंगे।


    आपको यदि शक हो कि आपके पति के किसी अन्य महिला से सम्बन्ध हैं तोआप इसके लिये रात में शयन कक्ष में थोड़ा कपूर अवश्य जलाया करें। इससे यदिसम्बन्ध होंगे तो छूट जायेंगे। यदि सम्बन्ध की उम्मीद होगी तो फिर इस उपाय के करनेसे उनका ध्यान उस महिला की ओर जायेगा ही नहीं।


    * रविवार की रात में सोते समय कुछ सिन्दूर बिस्तर पर पति के सोने वालेहिस्से की ओर बिखरा दें तथा प्रात; नहा कर माँ पार्वती का नाम लेकर उससे अपनी मांगभर लें।


    * जिस महिला से आपके पति का सम्पर्क है उसके नाम के अक्षर के बराबरमखाने लेकर प्रत्येक मखाने पर उसके नाम का अक्षर लिख दें। उस औरत से पति काछुटकारा पाने की ईश्वर से प्रार्थना करते हुए उन सारे मखानों को जला दें तथा किसीभी प्रकार से उसकी काली भभूत को पति के पैर के नीचे आने की ज्यवस्था करें।


    * यदि आपके पति के किसी महिला से बहुत ही घनिष्ठ सम्बन्ध हैं तो किसी भीकृष्ण पक्ष में शमशान घाट के किसी कर्मचारी से मिलकर एक मुट्ठी चिता की राख काइन्तजाम करें। काले कपड़े की थैली में उस राख के साथ दो अभिमंत्रित गोमती चक्र मेंएक पर पति का नाम.तथा दूसरे पर उस महिला का नाम लिखकर थैली को बन्द करदें। बस, उसी समय से आपके पति व उस महिला के सम्बन्धों में तनाव आना आरम्भ होजायेगा।


    * यदि किसी भी कारण से आपके पति आपसे प्रेम नहीं करते हैं तो लाल रंगके कपड़े की थैली में पीली सरसों के साथ दो अभिमंत्रित गोमती चक्र लेकर एक परपति का नाम व एक पर अपना नाम लिखकर थैली बन्द कर अपनी अलमारी में रख दें।

अब आपके पति आपको प्रेम करने लगेंगे।

    

* किसी के पति यदि अधिक क्लेश करते हैं तो वह स्त्री सोमवार से यह उपायआरम्भ करे। प्रथम सोमवार को अशोक वृक्ष के पास जाकर धूप-दीप से अर्चना करअपंनी समस्या का निवेदन कर जल अर्पित करें। सात पत्ते तोड़कर अपने घर केपूजास्थल में रखकर उनकी पूजा करें। अगले सोमवार को पुनः यह क्रिया दोहरायँ तथासूखे पत्तों को मन्दिर अथवा बहते जल में प्रवाहित कर दें। चमत्कार सामने होगा।


    * यदि पति-पत्नी का आपस में बिना बात के झगड़ा होता है और झगड़े का कोईकारण भी नहीं है तो अपने शयनकक्ष में पति अपने तकिये के नीचे लाल सिन्दूर रखे वपत्नी अपने तकिये के नीचे कपूर रखे। प्रातः पति आधा सिन्दूर घर में ही कहीं गिरा देऔर आधे से पत्नी की मांग भर दे तथा पत्नी कपूर जला दे।


    पति-पत्नी के क्लेश के लिये पत्नी बुधवार को तीन घण्टे का मौन रखे।शुक्रवार को अपने हाथ से साबूदाने की खीर में मिश्री डाल कर खिलाये तथा इत्र दानकरें व अपने कक्ष में भी रखें। इस प्रयोग से प्रेम में वृद्धि होती है।


    किसी महिला के पति ने किसी महिला पर बन्दिश करवा रखी है अथवाकिसी भी कारण से आपके पति का किसी अन्य महिला से सम्पर्क है तो शुक्लपक्ष केप्रथम शनिवार की शाम को जब दोनों समय मिल रहे हों तो एक काली मिर्च के कच्चेपापड़ को थाली के रूप में लेकर उस पर निम्न सामग्री इस प्रकार से सजायें जैसे थालीमें खाना लगाया जाता है। यह सामग्री है- साबुत काले उड़द, सिन्दूर, दो लोहे की कीलव एक गुड़ की डली। इसके बाद एक आटे का दीपक बनाकर उसमें सरसों का तेलभरें। एक लोटे में दूध, जल, गुड़, शहद, गंगाजल, शक्कर तथा काले तिल डालकर किसीपीपल पर पश्चिम की ओर मुख कर थाली रूपी पापड़ को पीपल पर अर्पित कर दीपकजला दें व जल अर्पित कर अपने पति को सही मार्ग पर चलने की प्रार्थना करें। बायेंहाथ से पीपल की जड़ को पाँच बार स्पर्श कर घर आ जायें। घर में प्रवेश से पहलेहाथ-पैर अवश्य धोये। यह उपाय आप लगातार सात शनिवार करें। इतने समय में हीआपको चमत्कार दिखाई देगा। बीच के पाँच दिन में यदि शनिवार आये तो कोई बातनहीं, शुद्धि के बाद आप अगले शनिवार से पुनः आरम्भ कर सकती हैं।


    * कनेर के पुष्प को पानी में घिसकर अथवा पीसकर उससे पति के माथे परतिलक करें। यह भी अन्य महिला से सम्बन्ध समाप्त करने का अच्छा उपाय है।


    * जब आपको लगे कि आपके पति किसी महिला के पास से आ रहे हैं तो आपँकिसी भी बहाने से अपने पति का आन्तरिक वस्त्र लेकर उसमें आग लगा दें और राखको किसी चौराहे पर फेंक कर अपने पैरों से रगड़ कर वापिस आ जायें। वापिस आतेसमय मुड़़कर न देखें।

    होली जलते समय तीन अभिमंत्रित गोमती चक्र लेकर उस महिला का नामलेकर थोड़ा सिन्दूर लगाकर होली की अग्नि में फैक दें। पति का उस महिला से पीछाछूट जायेगा।


    जिस स्त्री के पति बिना बात के क्रोध करते हैं इसके लिये उपाय है- वहस्त्री किसी भी शुक्लपक्ष के प्रथम रविवार, सोमवार, गुरुवार अथवा शुक्रवार को नयेसफेद कपड़े में एक मुट्ठी गुड़, दो चाँदी व दो तांबे के सिक्के और यदि सिक्के उपलंब्धन हों तो गोलाकार रूप में यह धातु काट कर रखें तथा एक मुट्टी नमक व एक मुट्टी गेहूँबांध कर रखें। कुछ ही समय में पति क्लेश करना बन्द कर देंगे।


    * किसी अन्य महिला के पीछे आपके पति यदि आपका अपमान करते हैं तोकिसी भी गुरुवार को तीन सौ ग्राम बेसन के लडू आटे के दो पेड़े, तीन केले व इतनीही चने की गीली दाल लेकर किसी ऐसी गाय को खिलायें जो अपने बछड़े को दूध पिलारही हो। उसे खिला कर निवेदन करें कि हे माँ, मैंने आपके बच्चे को फल दिया आप मेरेबच्चों को फल देना। बस, कुछ ही दिन में आपके पति रास्ते पर आ जायेंगे।


    गुरुवार को केले पर हल्दी लगाकर गुरु के 108 नामों के उच्चारंण से भी पतिकी मनोवृत्ति बदलती है।


    केले के वृक्ष के साथ यदि पीपल के वृक्ष की भी सेवा कर सकें तो फल औरभी जल्दी प्राप्त होता है।


    यदि किसी महिला को ऐसे स्थान पर जाने में झिझक होती है जहां अधिकभीड़ अथवा अधिक पैसे वाले समृद्ध लोग होते हैं तो इसके लिये वह महिला नित्य प्रातःउठकर सर्वप्रथम द्वादश ज्योतिर्लिंग (श्री महाकालेश्वर, श्री नागेश्वर, श्री काशीविश्वनाथेश्वर, श्री सोमनाथेश्वर, श्री औंकारेश्वर, श्री घुश्मेश्वर, श्री भीमाशंकर, श्रीमल्लिकार्जुन, श्री त्रियम्बकेश्वर, श्री बैद्यनाथेश्वर, श्री ममलेश्वर, श्री तारकेश्वर) के नामलें तथा 11 बार मानसिक विचार करें कि आप ऐसे स्थान पर अवश्य जा सकती हैं।बस, कुछ ही दिन में आपके मन का भय समाप्त हो जायेगा।


    * यदि किसी महिला का अपने घर में किसी भी कारण से अधिक अपमान होताहै अथवा उसे लगता है कि उसको परिवार के सदस्य अधिक महत्व नहीं देते हैं तो वहभी शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार से यह उपाय आरम्भ कर सकती है। इसके लिये आपअपनी लई से सात गुना अधिक हल्दी से रंगा पीला धागा लेकर केले के वृक्ष परट्रेवगुरु श्री बृहस्पति का स्मरण कर धूप तथा गुड़ का भोग अर्पित करें। अपनी समस्याके समाधान के लिये उनसे निवेदन करें। फिर उस धागे को किसी पीपल के वृक्ष परलपेट कर पीपल की धूप-दीप तथा पीले प्रसाद से पूजा करें और वापिस घर आजाये। अगले गुरुवार को पुनः यही प्रक्रिया करें। पिछले गुरुवार को जो धागा आपने पीपल पर लपेटा था, उस धागे को खोल कर जटा नारियल पर लपेट कर किसी बहतेजल में प्रवाहित कर दें। ऐसा आप लगातर चार गुरुवार करें अर्थात् प्रथम गुरुवार सेतीसरे गुरुवार तक तो धागा लपेटें और द्वितीय गुरुवार से चतुर्थ गुरुवार तक प्रवाहितकरें। बस, आपकी समस्या का.समाधान हो जायेगा।


    * यदि किसी विवाहित महिला को लगता है कि उसके पति उसकी बात नहींमानते हैं तो इस समस्या के समाधान के लिये आप किसी भी मध्यरात्रि को उनके सिरके मध्य में से कुछ बाल काट लें। अगले दिन प्रातः उन बालों को दरवाजे पर जला करपैर से रगड़ दें। आपकी समस्या का समाधान हो जायेगा। इसके लिये आप एक उपायऔर कर सकती हैं, किसी भी रविवार को दिन के 12 बजे आप पति की आयु वर्ष केबराबर लाल मिर्च के दाने लेकर किसी तवे पर जला दें। ऐसा आप तीन रविवार करें।इसमें आपको यह ध्यान रखना है कि प्रथम तो आपकी इस क्रिया का पति को पता नचले, द्वितीय उन मिर्च के दानों की धांस आपके पति को अवश्य लगनी चाहिये। यदिधांस जाने पर वह कुछ पूछते भी हैं तो आप कोई भी बहाना बना सकती हैं। कुछ समयमें आप पति में मरिवर्तन देखेंगी।


    * इसी प्रकार का अन्य उपाय यह है कि वह महिला मासिक चक्र के आने सेपहले वाले सोमवार को अभिमंत्रित वशीकरण यंत्र के सामने अपनी समस्या के निवारणका निवेदन करे। धूप-दीप अर्पित करे तथा जब भी मासिक चक्र आरम्भ हो तो उसकेरक्त के साथ सिन्दूर मिलाकर पति के मस्तक पर तिलक करें। इस प्रयोग से पति पूर्णतःवश में होकर आपकी बात सुनने लगेंगे परन्तु यंत्र अभिमंत्रित होना चाहिये ।


    किसी महिला के पति यदि उसकी नहीं सुनते हैं तो वह महिला किसी शुभसमय में शनिवार को 7 इलायची, इतनी ही लौंग व लाल मिर्च लेकर "त्रिलोचनायसमुचितं रति रागासंविधया वम्यन" (पति का नाम) के 108 बार जाप से एकत्रित करेंतत्पश्चात् सारी सामग्री को अपने सामने रखकर पुनः "ॐ महायक्षिणी ममपति वश्यमानय कुरू कुरू स्वाहा" का 1100 बार जाप करें। अगले दिन सारी सामग्री को तवे परभून कर किसी भी रूप में पति को खिला दें। कुछ ही समय में लाभ प्राप्त होगा। यहप्रयोग यंत्र के समक्ष अधिक प्रभावी होता है।


    गृह क्लेश दूर करने के लिये तथा आर्थिक लाभ के लिये गेहूँ शनिवार कोपिसवाना चाहिये । उसमें प्रति दस किलो गेहूँ पर सौ ग्राम काले चने डालने चाहिये।


    : यदि किसी महिला अथवा किसी अन्य कारण से आपको लग रहा हो किआपका परिवार टूट रहा है अथवा तलाक तक की नौबत आ रही है तो ऐसी परिस्थितिसे बचाव के लिसे किसी शिव मन्दिर में श्रावण मास में आप किसी विद्वान ब्राह्मण सेग्यारह दिन तक लगातार 'रूद्राष्टाध्यायी' जिसे महारूद्री यज्ञ भी कहते हैं, से अभिषेककरवायें। यह प्रयोग इतना अधिक प्रभावशाली है कि त्वरित प्रभाव देता है। इससे     आपकी समस्या का तुरन्त समाधान हो जायेगा। यदि आपके साथ समस्या अधिक वसमय कम है अर्थात् श्रावण मास दूर है तो किसी विद्वान से मुहूर्त निकलवा कर कभी भीकरवा सकती हैं। श्रावण मास में शीघ्र प्रभाव आता है।


    अब मैं आपको कुछ ऐसे उपाय बता रहा हूँ जिनके करने से कुछ ऐसी समस्याओंका निदान हो जाता है जिनके कारण स्त्री वर्ग को बहुत समस्या आती है। इसके साथही कुछ शीघ्र व बिना कष्ट प्रसव के उपाय भी बता रहा हूँ:-


    * यदि स्त्री को श्वेत प्रदर, मासिक धर्म में अनियमितता अथवा इसके होने परकमर दर्द हो तो वह पीपल की जटा को गुरुवार की दोपहर में आंमत्रित कर शुक्रवारकी दोपहर में काट कर छाया में सुखा ले। जब जटा अच्छी तरह से सूख जाये तो उसेपीस कर 200 ग्राम दही में 10 ग्राम जटा का चूर्ण का नियमित सात दिन तक सेवन करेतथा रात में सोते समय त्रिफला चूर्ण भी सादा जल से ले। सात दिन में आपको इससमस्या से मुक्ति मिल जायेगी।


    * यदि किसी स्त्री का समय से पहले अर्थात् 42 वर्षायु से पहले ही मासिक रुकजाये तो उस स्त्री को पुनः मासिक धर्म आरम्भ करने के लिये इन्द्रायण की जड़ कायोनि पर धुआँ देने से लाभ प्राप्त होता है।


    * यदि किसी स्त्री अथवा कन्या को मासिक से पहले पेट में बहुत दर्द होता है।तो उसे रात में सोते समय मूँज की रस्सी से पेट बांध कर सोना चाहिये। प्रातः उसरस्सी को किसी चौराहे पर फेंक देने से लाभ प्राप्त होता है।


    यदि किसी स्त्री को मासिक धर्म के समय कमर में दर्द व हाथ-पैरों में टूटनहोती है तो वह मासिक आरम्भ होने से तीन दिन पहले पीपल की जड़ व पीपल कीसूखी शाखा को काले कपड़े में लपेट कर अपने तकिये के नीचे रख ले। इस उपाय सेबहुत जल्दी लाभ प्राप्त होता है।


    * यदि किसी स्त्री अथवा कन्या को मासिक धर्म में मात्रा से अधिक रक्त जाताहै तो इससे मुक्ति के लिये किसी भी शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार को 6 सौ ग्राम सूखासाबुत धनिया लेकर ऐसे पीतल के बर्तन में जिस में कलई हो, 4 किलो पानी में उबालेंऔर तब तक उबाले जब तक पानी आधा न रह जाये। फिर उसमें मिठास अनुसार मिश्रीमिला कर फ्रिज में रख दें। गुरुवार से थोड़ी मात्रा में सेवन आरम्भ कर दें। यह नियमितरूप से 25 दिन तक सेवन करें। इस उपाय से समस्या का समाधान हो जायेगा।


    * यदि किसी कन्या अथवा स्त्री के बाल रूखे हैं अथवा किसी भी उपाय से बढ़ते नहीं हैं अथवा उम्र से पहले ही सफेद हो रहे हैं तो वह काले घोड़े की लीद जलाकर भस्म बना ले और तिल्ली के तेल में मिलाकर सिर की हल्के हाथ से मालिश करे।चार माह में ही आपको बालों की सारी समस्या से मुक्ति मिल जायेगी।

    * यदि किसी महिला को पेट में किसी कारण से अधिक दर्द रहता है तो वहमंगलवार से अपने सिरहाने किसी तांबे के लोटे में जल रखे और प्रातः उठकर खाली पेटउस जल का सेवन करे। इस उपाय से हर प्रकार के पेट दर्द का निवारण हो जायेगा।


    * यदि कोई स्त्री अथवा कन्या अपनी आयु से अधिक मोटी है और किसी भीउपाय से मोटापा कम नहीं होता है तो इसके लिये वह दायें हाथ की मध्यमा अंगुली मेंकाला रेशमी धागा बांध कर उसके ऊपर रांगे की अँगूठी धारण कर ले तो कुछ ही समयमें मोटापा कम होने लगता है। यह उपाय शनिवार को करना चाहिये।


    * प्रसव होने के समय से एक माह पहले से नियमित रूप से यदि गर्म दूध मेंकेशर मिला कर पिलाया जाये तो प्रसव बिना कष्ट के हो जाता है।


    जाता है।* प्रसूता के पेट पर यदि केशर का लेप किया जाये तो भी प्रसव आसानी से हो


    * किसी प्रसूता को यदि प्रसव में समस्या आ रही हो तो सहदेई की जड़ कोतिल के तेल में घिस कर जननेन्द्रीय पर लेप करने से प्रसव आराम से हो जाता हैअथवा जड़ को लाल धागें में बांधकर कमर पर लपेटने से भी प्रसव में आराम होता है।


    प्रसव काल से कुछ ही समय पहले यदि प्रसूता को 100 ग्राम गौमूत्र पिलायाजाये तो प्रसव आसानी से हो जाता है।


    प्रसव से पहले सोमवार को आप गंगाजल से शिव लिंग का अभिषेक करवायेंऔर थोड़ा सा अभिषेक वाला गंगाजल किसी बोतल में रख लें। प्रसव से कुछ समयपहले उस अभिषेक किये गंगाजल को प्रसाद के रूप में पी लें। इससे प्रसव में आनेवाली समस्याओं का समाधान हो जायेगा।


    * प्रसवकाल के पहले महीने से ही यदि महिला अपने कक्ष में श्रीकृष्ण केबाल्यकाल की तस्वीर लगा ले तो बच्चा सुन्दर होने के साथ ज्ञानी भी होता है तथा प्रसवमें समस्या भी नहीं आती है।


    * महिला गर्भधारण करने के साथ ही यदि श्रीरामचरित मानस के बाल्यकाण्डकी किसी भी चौपाई का नित्य जाप करती है तो भी बच्चा सुन्दर होने के साथ प्रसवभी ठीक प्रकार से होता है।


    * यदि कोई विवाहित महिला अपने घर में ऐसा महसूस करती है कि उसकीसंतान का मन पढ़ाई से उचट रहा है तो वह शनिवार रात के ठीक 12 बजे अपनी उससंतान के सिर के ठीक मध्य के 2-4 बाल काट कर अगले दिन मुख्य द्वार की चौखटपर जलाकर पैर से रगड़ दे तो उसकी संतान ठीक प्रकार से पढ़ने लगती है तथा याद्दाश्तभी तेज हो जाती है। ऐसा आठ शनिवार करें। 

* यदि किसी की संतान को जल्दी-जल्दी नजर लगती है तो वह बकरी की     मींगनी लेकर किसी कपड़े में बांधकर बच्चे के सोने के स्थान के सिरहाने रखे तो नजरलगना बन्द हो जायेगा।


    * कभी किसी महिला को दान करने की इच्छा हो तो दान सामग्री में लालसिन्दूर के साथ इत्र की शीशी, चने की दाल तथा केशर अवश्य रखे। इससे सुहाग कीआयु में वृद्धि होती है।


    * दाम्पत्य जीवन में प्रेम बढ़ाने के लिये पति के भोजन के बाद उसके बचे भोजनमें से कुछ अवश्य खायें परन्तु अपने भोजन में से बची सामग्री पति को न खानें दें। यदिआपके पति अधिक इच्छुक हो तो अपने भोजन करने से पहले आप कुछ सामग्री खानेको दे सकती हैं।


    * घर के प्रत्येक सदस्य की कमर पर आप अभिमंत्रित काला धागा अवश्य बांधे।इससे प्रत्येक सदस्य आने वाली बाधाओं से बचा रहेगा। यह धागा आप मुझसे निशुल्कप्राप्त कर सकती हैं।


    * विवाहित महिला को अपने परिवार की सलामती के लिये नित्य ही माँ दुर्गाचालीसा के साथ माँ के 108 नाम अथवा 32 नाम की माला का नित्य जाप करनाचाहिये।


    यदि किसी के पति अधिक गुस्सा करते हैं तो वह महिला पति के गुस्सा करनेके समय "शान्तम् पापम्" का जाप करती रहें। कुछ ही समय में आपको लाभ दिखाईदेगा।


    * यदि किसी भी कारण से किसी सुहागिन के श्वसुर उससे नाराज रहते हों तोवह महिला नित्य ही जल में गुड़ मिला कर सूर्यदेव को अर्ध्य दे तथा अपने श्वसुर केगुस्से को दूर करने का निवेदन करे । यदि सास अधिक गुस्सा करती हो तो पूर्णिमा कीरात्रि में खीर बनाकर चन्द्र की किरणों में खीर रखकर अपने कार्य सिद्धि का निवेदनकरे। उस खीर को अपनी सास को खिला दे और थोड़ी सी खीर स्वयं भी खाये।


    * यदि किसी महिला के पति किसी भी कारण से पूर्ण यौन तृप्ति न दे पाते होंतो वह महिला किसी भी शुक्ल पक्ष के सोमवार से यह उपाय आरम्भ करे- सर्वप्रथमप्रातःकाल-स्नान आदि से निवृत होकर श्री शिव उपासना करे तथा अपनी समस्या सेमुक्ति का निवेदन करे । फिर कुछ खीर अर्पित कर उस खीर को गरीबों में दान करे औरकिसी पीपल के वृक्ष का पूजन करने के बाद उस पर पीला रेशमी धागा बांध दें। फिरबुधवार को हिजड़ों को पूर्ण सुहाग सामग्री दान करे तथा गुरुवार को केले के पूजन मेंचने की दाल, केशर, गुड़, आटे की दो लोई तथा शुद्ध धी का दीपक अर्पित करे। जलदेने के बाद यह सारी सामग्री किसी गाय को खिला दे। शुक्रवार को सांध्यकाल में 9 वर्षसे कम आयु की 5 कन्याओं को खीर व मिश्री का प्रसाद दे तथा किसी युवा स्त्री को     (यदि संभव हो तो ब्राह्मण स्त्री को) सुहाग सामग्री दे तथा प्रयोग करने के लिये इत्र भीदे। अन्तिम दिन अर्थात् शनिवार को एक नारियल पति के ऊपर से सात बार उसार करबहते जल में प्रवाहित कर दे। उसी पीपल पर आकर आटे का दीपक बनाकर सरसौके तेल से जलाकर अर्पित करे। उसमें 11 उड़द के दानें डाले तथा एक लोहे की कीलभी रखे। फिर मीठा जल (जल, दूध, शक्कर, गुड़ व शहद) अर्पित कर उस पीले धागे कोखोल कर अपने पति के दायें हाथ में बांध दे। कुछ ही समय में आपको इस उपाय कास्पष्ट चमत्कार दिखाई देगा। यदि आपको महसूस हो कि प्रभाव पूर्ण नहीं आया है तोएक माह बाद अर्थात् अगले शुक्ल पक्ष को आप यह उपाय फिर कर सकती हैं क्योंकिउपाय भी समस्या के अनुसार ही फल देता है।


    * यदि किसी महिला को नींद में घबराहट होती हो तो वह अपने पलंग के पायोंमें चांदी की चार कील ठुकवा ले। तुरन्त लाभ होगा।


    * महिला वर्ग को अपने सुहाग की सलामती के लिये नित्य केले का पूजन करनाचाहिये। दान करने के साथ ही वृद्धा स्त्री का आशीर्वाद अवश्य लेना चाहिये।


    * घर की रक्षा के लिये यदि महिला नियमित रूप से शनिवार को चमेली कादीप जला कर "श्री सुन्दर काण्ड" का पाठ करती है तो वह घर हर प्रकार की विपदासे बचा रहता हैं।

    * गृहणी को प्रातः उठते ही सर्वप्रथम घर के मुख्यद्वार पर एक लोटा जलछिड़कना चाहिये। इस उपाय से माँ लक्ष्मी के आगमन का मार्ग प्रशस्त होता है तथा घरके पुरुष निरन्तर उन्नति करते हैं।

यदि पति अपनी पत्नी को अधिक समय नहीं दे पाता है अथवा कोई अन्य

कारण हो जिससे वह अपनी पत्नी से कम प्रेम करता हो तो उसके लिये उस महिला

को चाहिये कि सर्वप्रथम केले का पूजन और देव गुरु बृहस्पति की सेवा आराधना

आरम्भ कर दे। उपाय आप शुक्लपक्ष के प्रथम गुरुवार से करें। गुरुवार को प्रातः स्नानकर पीले वस्त्र धारण करें। एक तांबे के पात्र में जल में गुड़ व पिसी हल्दी मिलायें।

एक नारियल, दो आटे के पेड़े. गीली चने की दाल व गुड़ लें। अब आप किसी केले

के वृक्ष पर जाकर वृक्ष पर हल्दी से तिलक करें व शुद्ध घी का दीपक तथा अगरबत्ती

अर्पित करें और देवगुरु से अपनी समस्या निवारण का निवेदन करें। यथासंभव गुरु

की कथा 108 नाम अथवा स्तोत्र आदि का पाठ करें और जल अर्पित कर वापिस आ

जायें। आटे के पेड़े व अन्य सामग्री गाय को खिला दें व नारियल किसी शुद्ध स्थान

पर रख दें। आने वाले बुधवार को किसी शक्ति मन्दिर में नारियल के साथ थोड़ा सा

सिन्दूर व अन्य पूजा सामग्री लेकर जायें। मां को दीप-धूप अर्पित करने के बाद

नारियल व सिन्दूर मां के चरणों में अर्पित कर दें। अपनी समस्या का निवेदन कर मां

का कवच, चालीसा 108 अथवा 32 नाम की माला का पाठ करें। पाठ के बाद नारियल

किसी अन्य बच्चे से फुड़वा दें और सिन्दूर लेकर घर आ जायें। अगले गुरुवार को पुनः

यही क्रिया करें। बुधवार को भी यही क्रिया करनी है। इस प्रकार आपको तीन गुरुवार

व तीन बुधवार यह करना है। अब आपने जो सिन्दूर एकत्रित किया है, उसे मांग भरने

में प्रयोग कर सकती है। कुछ ही समय में आपको चमत्कारिक फल महसूस होंगे।

उपाय जितने विश्वास से करेंगे उतना ही आपको फल तुरन्त मिलेगा।

- किसी भी कृष्णपक्ष की अष्टमी अथवा चतुर्दशी को आप घर के पूजास्थल में ही मां दुर्गा को धूप-दीप अर्पित कर थोड़ा सा सिन्दूर, १२ लाल चूड़ियां और मंगलसूत्र

के रूप में धागा अर्पित करें। अब मां से सिर्फ इतनी प्रार्थना करें कि मां मैं तेरी पुत्री

हूं और यह सामग्री मैं तेरा उपहार स्वरूप स्वीकार कर रही हूं जिससे तेरी कृपा और

आशीर्वाद से मेरा दाम्पत्य जीवन सही सलामत रहे। इतना करने के पश्चात् प्रणाम

कर मंदिर में ही थोड़े से सिन्दूर से मांग भरें तथा मंगलसूत्र का धागा और चूड़ी धारण

कर लें। पुनः प्रणाम कर मंदिर से बाहर आ जाये। बचे सिन्दूर को आप अपने प्रयोग

करने वाले सिन्दूर में मिला लें।

आपके दाम्पत्य जीवन में किसी भी प्रकार की समस्या हो तो आपके लिये

यह उपाय लाभकारी रहेगा। प्रथम गुरुवार को आप किसी चौराहे के पीपल पर जायें।

शुद्ध घी का दीपक व चंदन की अगरबत्ती अर्पित कर एक दोने में तीन प्रकार की मिठाई

अर्पित करें और प्रार्थना करें कि मेरे दाम्पत्य जीवन में अमुक समस्या आ रही है।

देवगुरु बृहस्पति और आपके आशीर्वाद से इस समस्या का निवारण होगा, इसलिये

आपसे निवेदन है कि मेरी समस्या का निवारण करें। इसके लिये मैं साक्ष्य स्वरूप यह कील आपके समक्ष दबा रही हूं। जब आपकी कृपा से मेरी समस्या का समाधान होजायेगा तब मैं यह कील निकाल कर ले जाऊंगी। इतना कह कर एक बड़ी कील लेकर उसमें आप लाल धागा बांध दें और पीपल के समक्ष मिट्टी से दबा दें। जब आपकी समस्या का समाधान हो जाये तो कील निकाल कर एक जटा नारियल के साथ जलमें प्रवाहित कर दें।

दाम्पत्य जीवन में आने वाली समस्याओं के निवारण के लिये आप नियमितरूप से केले और पीपल के वृक्ष की सेवा करें। गुरुवार को केले व पीपल में सामान्यज ल व शुद्ध घी का दीपक और शनिवार को पीपल में सरसों के तेल का दीपक व मीठा जल अर्पित करें। ऐसा करने से कभी भी किसी प्रकार की समस्या आपके दाम्पत्य जीवन में नहीं आयेगी।

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