काल सर्प दोष क्या है? उपाय सहित व्याख्या
काल सर्प दोष क्या है?
कुंडली में सात गृह सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि जब राहू और केतु के बीच स्थित होते है तो कुंडली में कालसर्प दोष का निर्माण होता है! मान लो यदि कुंडली के पहले घर में राहू स्थित है और सातवे घर में केतु तो बाकी के सभी गृह पहले से सातवे अथवा सातवे से पहले घर के बिच होने चाहिए! यहाँ पर ध्यान देने योग्य बात यह है की सभी ग्रहों की डिग्री राहू और केतु की डिग्री के बीच स्थित होनी चाहिए, यदि कोई गृह की डिग्री राहू और केतु की डिग्री से बाहर आती है तो पूर्ण कालसर्प योग स्थापित नहीं होगा, इस स्थिति को आंशिक कालसर्प कहेंगे ! कुंडली में बनने वाला कालसर्प कितना दोष पूर्ण है यह राहू और केतु की अशुभता पर निर्भर करेगा !
मानव जीवन पर कालसर्प दोष का प्रभाव
सामान्यता कालसर्प योग जातक के जीवन में संघर्ष ले कर आता है ! इस योग के कुंडली में स्थित होने से जातक जीवन भर अनेक प्रकार की कठिनाइयों से जूझता रहता है ! और उसे सफलता उसके अंतिम जीवन में प्राप्त हो पाती है, जातक को जीवन भर घर, बहार, काम काज, स्वास्थ्य, परिवार, विवाह, कामयाबी, नोकरी, व्यवसाय आदि की परेशानियों से सामना करना पड़ता है ! बैठे बिठाये बिना किसी मतलब की मुसीबते जातक को जीवन भर परेशान करती है ! कुंडली में बारह प्रकार के काल सर्प पाए जाते है, यह बारह प्रकार राहू और केतु की कुंडली के बारह घरों की अलग अलग स्थिति पर आधारित होती है !
कालसर्प दोष के प्रकार
अनंत कालसर्प दोष - Anant Kalsarp dosh
परिचय
जब कुंडली के पहले घर में राहू , सातवे घर केतु और बाकि के सात गृह राहू और केतु के मध्य स्थित हो तो वह अनंत कालसर्प दोष कहलाता है ! अनंत कालसर्प दोष जातक की शादीशुदा जिन्दगी पर बहुत बुरा असर डालता है ! बितते वक्त के साथ जातक और जातक के जीवन साथी के बीच तनाव बढता जाता है ! जातक के नाजायज़ सम्बन्ध बाहर हो सकते है ! इसी कारण बात तलाक तक पहुच सकती है! जातक के अपने जीवन साथी के साथ संबंधों में मधुरता नहीं होती ! अनंत कालसर्प दोष के कारण जातक जीवन भर संघर्ष करता है और पूर्णतया फल प्राप्त नहीं करता ! संधि व्यापार में सफलता नहीं मिलती और भागिदार दोखा कर जाते है !
अनंत कालसर्प दोष का प्रभाव
अगर कुण्डली में अनंत कालसर्प दोष है तो व्यक्ति निडर और स्वतंत्र विचारों वाला होता है. वह हमेशा जोखिम लेने के लिए तैयार रहता है. अपने दु:साहसी व्यवहार के कारण उसे दुर्घटनाओं का सामना करना होता है. सिर पर चोट लगने की संभावना रहती है. इस दोष के प्रभाव के कारण व्यक्ति को स्वास्थ्य के प्रति अधिक सजग रहने की जरूरत होती है. सेहत के प्रति लापरवाही से जल्दी ही यह रोगग्रस्त हो सकते हैं. सरकारी मामलों में लापरवाही इनके लिए नुकसानदेय हो सकता है. किसी विवाद में इन्हें अदालत के भी चक्कर लगाने पड़ते हैं.
इन्हें अपने मान-सम्मान को ध्यान में रखते हुए कार्य करना चाहिए क्योंकि मान-सम्मान पर आंच आने की संभावना रहती है. मेहनत के अनुसार सफलता नहीं मिलने के कारण मानसिक तनाव और निराशात्मक विचारों का इन पर दबाव बना रहता है. दाम्पत्य जीवन में भी यह योग बाधक बनता है. व्यक्ति अगर सूझ-बूझ एवं शांति से काम नहीं ले तो गृहस्थी में जीवनसाथी से अनबन बनी रहती है.
अनंत कालसर्प दोष का उपाय
इस दोष की शांति के लिए व्यक्ति को नियमित शिव पंचाक्षरी मंत्र "ओम नम: शिवाय" अथवा महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए. मनसा देवी को नागों की देवी माना जाता है. इनकी पूजा करने से भी इस दोष के अशुभ प्रभाव में कमी आती है.
कुलिक कालसर्प दोष - Kulik Kalsarp Dosh
परिचय
जब कुंडली के दुसरे घर में राहू और आठवें घर में केतु और बाकी के सातों गृह राहू और केतु के मध्य स्थित हो तो यह कुलीक कालसर्प दोष कहलाता है ! जिस जातक की कुडली में कुलीक कालसर्प दोष होता है, वह जातक खाने और शराब पिने की गलत आदतों को अपना लेता है ! तम्बाकू , सिगरेट आदि का भी सेवन करता है, जातक को यह आदते बचपन से ही लग जाती है इस कारण जातक का पढाई से ध्यान हट कर अन्य गलत कार्यों में लग जाता है ! ऐसे जातकों को मुह और गले के रोग अधिक होते है, इन जातको का वाणी पर नियंत्रण नहीं होता इसलिए समाज में बदनामी भी होती है ! कुलीक कालसर्प से ग्रस्त जातकों की शराब पीकर वाहन चलाने से भयंकर दुर्घटना हो सकती है !
कुलिक कालसर्प दोष का प्रभाव
कुण्डली में कुलिक कालसर्प दोष होने पर व्यक्ति को अपनी वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए. बोलते समय उसे इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उसकी बातें सामने वाले व्यक्ति के मन को चोट नहीं पहुंचाये. जो लोग इन बातों का ध्यान नहीं रखते हैं उनका लोगों से बैर होता है. वाणी में कटुता के कारण सामाज में एवं घर में कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है. लोगों से अपमान मिलता है. जीवनसाथी से तनाव के कारण गृहस्थी प्रभावित होती है तथा मन अशांत और बेचैन रहता है.
आर्थिक उन्नति में भी कुलिक कालसर्प दोष ( Kulik Kalsarp Dosh) बाधक बनता है. व्यक्ति को जीवन में सफलता पाने के लिए अधिक संघर्ष करना पड़ता है. इन्हें दोस्तों एवं रिश्तेदारों से सावधान रहने की जरूरत होती है क्योंकि, उनसे धोखा मिलने की आशंका रहती है. इस दोष में गले की बीमारी एवं वाणी में दोष आने की संभावना रहती है.
कुलिक कालसर्प दोष के उपाय
कुलिक कालसर्प दोष की शांति हेतु राहु मंत्र 'ओम रं राहवे नमः' का जप करना चाहिए. नाग-नागिन के 108 अथवा 43 जोड़े बनवकर उसकी पूजा करनी चाहिए उसके पश्चात उसे जल में प्रवाहित कर देना चाहिए, ऐसा करने से कुलिक कालसर्प दोष के कष्टकारी प्रभाव में कमी आती है. भगवान शिव की पूजा एवं उपासना से भी इस दोष के कष्टकारी प्रभाव से राहत मिलती है.
वासुकी कालसर्प दोष - Vasuki Kaal sarp dosh
परिचय
जब कुंडली में राहू तीसरे घर में, केतु नौवें घर में और बाकी के सभी गृह इन दोनों के मध्य में स्थित हो तो वासुकी काल्सर्प् दोष का निर्माण होता है ! जिन जातकों की कुंडली में वासुकी कालसर्प दोष होता है उन्हें जीवन के सभी क्षेत्र में बुरी किस्मत की मार खानी पड़ती है, कड़ी मेहनत और इमानदारी के बाउजूद असफलता हाथ आती है ! जातक के छोटे भाई और बहनों पर बुरा असर पड़ता है ! जातक को लम्बी यात्राओं से कष्ट उठाना पड़ता है और धर्म कर्म के कामों में विशवास नहीं रहता ! वासुकी कालसर्प दोष के कारण जातक की कमाई भी बहुत कम हो सकती है इस कारण से जातक गरीबी और लाचारी का जीवन व्यतीत करता है !
वासुकि कालसर्प दोष का फल
वासुकी कालसर्प दोष (Vasuki Kalsarp Dosh) में राहु केतु की स्थिति क्रमश: तृतीय एवं नवम में होती है. इसलिए इस दोष में इन दोनों घरों के शुभ फल विशेष रूप से पभावित होते हैं. व्यक्ति को भाग्य का सहयोग नहीं मिलने के कारण जीवन में बार-बार बाधाओं का सामना करना होता है. व्यापार अथवा नौकरी जिससे भी व्यक्ति की आजीविका चलती है उसमें परेशानियों से गुजरना पड़ता है. व्यक्ति यदि कोई काम साझेदारी में करता है तो उसमें नुकसान की संभावना प्रबल रहती है. इस दोष के अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को अपने जीवन में हर क्षेत्र में संघर्ष के बाद ही सफलता मिलती है. मानसिक उलझनों के कारण व्यक्ति ऐसा कार्य कर बैठता है जिससे मुश्किलें कम होने की बजाय बढ़ जाती हैं.
आर्थिक कठिनाईयां भी समय-समय पर व्यक्ति तकलीफदेय बन जाती हैं. इस दोष की वजह से भाई-बहनों एवं सगे-सम्बन्धियों के कारण कष्ट उठाना पड़ता है. इनसे सहयोग में कमी आती है. मित्रों के प्रति अधिक विश्वास कभी-कभी नुकसादेय हो जाता है. मित्र इनके विश्वास का फायदा उठाकर धोखा देने की कोशिश करते हैं. राहु केतु की दशा के समय यात्रा के दौरान नुकसान भी संभावित रहता है.
वासुकि कालसर्प योग से मुक्ति के उपाय
इस दोष से मुक्ति के लिए नागपंचमी के दिन व्रत रखकर नाग देवता की पूजा करनी चाहिए. भगवान श्री कृष्ण की पूजा से भी इस दोष के अशुभ प्रभाव में कमी आती है. वासुकि कालसर्प दोष निवारण (Vasuki Kalsarp Dosh Nivaran) हेतु घर में शांति पूजा भी करवा सकते हैं. राहु मंत्र का जप करते हुए पक्षियों को ज्वार-बाजरा डालने से भी दोष के प्रभाव में कमी आती है.
शंखपाल कालसर्प - Shankpal Kalsarp Dosh
परिचय
कुंडली में राहू चौथे घर में, केतु दसवें घर में और बाकी सभी गृह राहू और केतु के मध्य स्थित हो तो शंखफल कालसर्प दोष का निर्माण होता है ! जिन जातकों की कुंडली में शंख फल कालसर्प दोष होता है वें जातक बचपन से ही गलत कार्यों में पड़कर बिगड़ जाते है, जैसे पिता की जेब से पैसे चुराना, विद्यालय से भाग जाना, गलत संगत में रहना और चोरी चाकरी और जुआ आदि खेलना ! यदि माता पिता द्वारा समय रहते उपाय किये जाए तो बच्चों को बिगड़ने से बचाया जा सकता है ! शंख फल कालसर्प से गृह्सित जातक की माता को जीवन बहुत परेशानिया झेलनी पड़ती है, यह परेशिनिया मानसिक और शारीरिक दोनों हो सकती है ! जातक को विवाह का सुख भी अधिक नहीं मिलता, पति या पत्नी से हमेशा दूरियां और अनबन बनी रहती है !
शंखफल कालसर्प का फल
यह दोष जिस व्यक्ति की कुण्डली में होता है वह हमेशा एक अनजाने भय से भयभीत रहता है. शिक्षा में बाधाएं आने की गुंजाइश रहती है. यह दोष व्यक्ति को माता से मिलने वाले स्नेह एवं सुख को कम करता है. किसी बात को लेकर माता से विवाद एवं मतभेद की भी आशंका रहती है. बहनों से सम्बन्ध में खटास होने के कारण उनसे मिलने वाले सहयोग में कमी आती है.
इस दोष के कारण व्यक्ति मानसिक उलझनों में घिरा रहता है. मकान एवं भूमि के मामलों में उन्हें नुकसान होने की संभावना रहती है. इन सुखों को पाना इनके लिए कुछ कठिन भी होता है. अगर यह अपना घर खरीद लें अथवा बनवायें फिर भी उसमें रहते हुए इन्हें आत्म संतोष की कमी महसूस होती है.
नौकरी एवं व्यवसाय में इन्हें काफी संघर्ष करना होता है. आजीविका में उतार-चढ़ाव के कारण आर्थिक परेशानियां भी व्यक्ति को महसूस होती है. वाहन सुख के मामले में भी यह दोष बाधक माना जाता है. अधीनस्थों से पूरा सहयोग नहीं मिल पाता है इनके कारण व्यक्ति को कार्य में कठिनाईयों को सामना करना होता है. मित्रों एवं परिजनों के विश्वासघात की भी संभावना बनी रहती है.
शंखफल दोष के उपाय
भगवान शिव अपने गले में नागों की माला धारण करते हैं. नाग जाति भगवान शिव को अपना आराध्य मानते हैं तथा भगवान शिव भी उनके प्रति कृपालु रहते हैं अत: किसी भी प्रकार का सर्प दोष होने पर शिव की शरण में जाना कल्याणकारी होता है. ज्योतिषशास्त्र में शंखपाल कालसर्प (Shankpal Kalsarp Dosh) के उपाय के तौर पर यह कहा गया है कि, जिनकी जन्मपत्री में शंखपाल कालसर्प दोष (Shankpal Kaalsarp Dosh) है उन्हें इस दोष के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए शिवलिंग पर चांदी के सर्प चढ़ाने चाहिए. मां सरस्वती एवं गणपति जी की पूजा से भी शंखपाल कालसर्प दोष का अशुभ प्रभाव कम होता है.
भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति को मोर पंख से सजाकर उनकी पूजा करने से शंखपाल कालसर्प दोष (Shankpal Kalsarp Dosh) के कष्ट से मुक्ति मिलती है. शंखपाल कालसर्प दोष (Shankpal Kalsarp Dosh) की शांति हेतु उड़द के आटे का सर्प बनाकर वर्ष भर नियमित उसकी पूजा करने के बाद जल में प्रवाहित कर देना चाहिए.
पद्म कालसर्प दोष - Padam Kaalsarp Dosh
परिचय
कुंडली में जब राहू पांचवे घर में , केतु ग्यारहवें घर में और बाकि के सभी गृह इन दोनों के मध्य स्थित होते है तो पदम् कालसर्प दोष का निमाण होता है ! कुंडली में पदम् कालसर्प स्थित होने से जातक को जीवन में कई कठनाइयों का सामना करना पड़ता है ! शुरवाती जीवन में जातक की पढाई में किसी कारण से बाधा उत्पन्न होती है, यदि शिक्षा पूरी न हो तो नौकरी मिलने में परेशनिया उत्पन्न होती है ! विवाह के उपरान्त बच्चो के जन्म में कठनाई और बच्चों का बीमार रहना जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है ! पदम् कालसर्प के बुरे प्रभाव से प्रेम में धोखा मिल सकता है, इस दोष का विद्यार्थियों के जीवन पर बहुत बुरा असर पड़ता है, उन्हें इस काल सर्प का उपाय अवश्य करना चाहिए क्योकि हमारा पूरा जीवन अच्छी शिक्षा पर आधारित होता है !
पदम् कालसर्प दोष का फल
पद्म कालसर्प दोष के कारण व्यक्ति को उच्च शिक्षा के दौरान कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है. शिक्षा में रूकावट आने की भी गुंजाइश रहती है. मन में किसी अनहोनी घटना का भय बना रहता है. इस दोष से प्रभावित व्यक्ति यदि जुए अथवा सट्टे के माध्यम से धन कमाने की कोशिश करता है तो नुकसान की संभावना अधिक रहती है. कालसर्प दोष (Padam Kaalsarp Dosh) का यह प्रकार संतान सुख में बाधक होता है. संतान सुख की प्राप्ति देरी से होती है. संतान के स्वास्थ्य एवं अन्य विषयो को लेकर व्यक्ति को चिंताएं घेरी रहती हैं. माना यह जाता है कि पद्म कालसर्प दोष (Padam Kaalsarp Dosh)जिसकी कुण्डली में होता है उसे गुप्त रोग हो सकता है. पेट सम्बन्धी रोग के कारण व्यक्ति की सेहत में उतार-चढ़ाव बना रहता है.
पंचम भाव में राहु एवं ग्यारहवें भाव में केतु व्यक्ति के मन को अध्यात्म की ओर आकर्षित करता है. इसके कारण पद्म कालसर्प दोष से प्रभावित व्यक्ति वृद्धावस्था में सन्यास ग्रहण करने की सोच सकता है. मित्रों से धोखा तथा अपयश की भी अशांका बनी रहती है.
पदम् कालसर्प दोष के उपाय
यह दोष जिस व्यक्ति की जन्मपत्री में हो उसे अपने घर में मोर पंख रखना चाहिए. शुभ मुहूर्त में धातु से निर्मित नाग-नागिन को घर के मुख्य दरवाजे के दोनों तरफ लगाना चाहिए. इस दोष से प्रभावित व्यक्ति को संतान सुख के लिए घर के चौखट के नीचे चांदी का पत्तर रखना लाभदायक होता है. राहु ग्रह से सम्बन्धित वस्तुएं जैसे शीशा, कंबल, तिल, ज्वर, बाजरा दान करना चाहिए. जो लोग यह सब नहीं कर सकते वह रात को सोते समय पांच मुलयां सिरहाने रखकर सोयें, सुबह इन मुलियों को मंदिर में रख आएं अथवा मंदिर के पुजारी को दे दें. घर में चांदी से बना ठोस हाथी रखना चाहिए.
महापद्म कालसर्प दोष - Mahapadam Kaalsarp Dosh
परिचय
कुंडली में महापदम् कालसर्प का निर्माण तब होता है जब राहू छठे घर में , केतु बारहवें घर में और बाकि के सभी गृह इन दोनों के मध्य स्थित हो ! महापदम् कालसर्प दोष जातक के जीवन में नौकरी , पेशा, बीमारी, खर्चा, जेल यात्रा जैसी गंभीर समस्याओं को जन्म देता है ! जातक जीवन भर नौकरी पेशा बदलता रहता है क्योकि उसके सम्बन्ध अपने सहकर्मियों से हमेशा ख़राब रहते है ! हमेशा किसी न किसी सरकारी और अदालती कायवाही में फसकर जेल यात्रा तक करनी पढ़ सकती है ! तरह तरह की बिमारियों के कारण जातक को आये दिन अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते है ! इस प्रकार महापदम् काल सर्प दोष जातक का जीना दुश्वार कर देता है !
महापद्म कालसर्प का प्रभाव
महापद्म कालसर्प (Mahapadam Kaalsarp Dosh) में राहु उस घर में होता है जिससे शत्रु, रोग, प्रतियोगिता एवं मातृ पक्ष का विचार किया जाता है तथा केतु उस भाव में होता है जिससे जिन्दग़ी की आखिरी मंजिल, व्यय तथा यात्रा का विचार किया जाता है. इन दोनों ग्रहों की इस स्थिति के कारण व्यक्ति को स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक रहने की जरूरत होती है क्योंकि, स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव बना रहता है. दवाईयों एवं चिकित्सा मद में धन खर्च करना पड़ता है. इस दोष के प्रभाव से अचानक धन व्यय की संभावना रहती है. कुछ ऐसी परिस्थिति बन सकती है जिसके कारण व्यक्ति अदालती मामलों में उलझ सकता है. इस वजह से उसे काफी धन भी खर्च करना पड़ता है.
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दोष से प्रभावित व्यक्ति का काफी समय यात्रा में व्यतीत होता है जिससे उसकी घरेलू जिन्दगी पर असर पड़ता है. व्यक्ति को सुख की कमी महसूस होती है तथा मानसिक अशांति एवं निराशाओं में घिरा होता है. मामा की तरफ से सहयोग में कमी आती है तथा राहु की दशा एवं अन्तर्दशा के समय इनके मामा को कष्ट उठाना पड़ता है. वृद्धावस्था में इन्हें तकलीफ होती है.
महापद्म कालसर्प दोष के उपाय
इस दोष की शांति के लिए श्रावण मास में 30 दिन तक दूध एवं जल से शिव जी का अभिषेक करना चाहिए. इस मास में कालसर्प दोष शांति करवाना भी लाभप्रद होता है. पितरों के नाम से दिया गया दान कालसर्प दोष की पीड़ा को कम करने के लिए अच्छा उपाय माना गया है. चांदी से निर्मित सर्पकार अंगूठी अथवा गोमेद रत्न पहनने से महापद्म कालसर्प दोष (Mahapadam Kaalsarp Dosh) में राहत मिलती है. महापद्म कालसर्प दोष की शांति के लिए श्रावण मास में किसी योग्य पंण्डित से पूजा एवं हवन कर सकते हैं.
तक्षक कालसर्प दोष – Takshak Kaal Sarp Dosh
परिचय
कुंडली के सातवे घर में राहू , पहले घर में केतु और बाकि गृह इन दोनों के मध्य आ जाने से तक्षक कालसर्प दोष का निर्माण होता है ! सबसे पहले तो तक्षक काल सर्प का बुरा प्रभाव उसकी सेहत पर पड़ता है ! जातक के शरीर में रोगों से लड़ने की शक्ति बहुत कम होती है और इसलिए वह बार-बार बीमार पड़ता रहता है ! दूसरा बुरा प्रभाव जातक के वैवाहिक जीवन पर पड़ता है, या तो जातक के विवाह में विलम्ब होता है और यदि हो भी जाये तो विवाह के कुछ सालों के पश्चात् पति पत्नी में इतनी दूरियाँ आ जाती है की एक घर में रहने के पश्चात् वे दोनों अजनबियों जैसा जीवन व्यतीत करते है! जातक को अपने व्यवसाय में सहकर्मियों द्वारा धोखा मिलता है और को भरी आर्थिक नुक्सान उठाना पड़ता है!
तक्षक कालसर्प दोष का प्रभाव
इस दोष में विवाह स्थान में बैठा राहु वैवाहिक जीवन के सुखों को कम करता है. जिस व्यक्तियों की कुण्डली (Kundli) में यह दोष बन रहा है उन्हें सबसे पहले अपने दाम्पत्य जीवन की खुशियों पर ध्यान देना चाहिए. छोटी-छोटी बातों को लेकर जीवनसाथी से विवाद नहीं करना चाहिए. अगर किसी वजह से आपस में तनाव बढ़ जाए तो मुद्दों को बात-चीत से सुलझाने की कोशिश करें न कि एक दूसरे से रूठकर या झगड़कर मुद्दे को और गंभीर बनालें. इन बातों का ध्यान रखेंगे तो तक्षक कालसर्प दोष (Takshak Kaal Sarp Dosh) के अशुभ प्रभाव को कुछ कम करने में कामयाब हो सकते हैं.
जन्मपत्री में यह दोष होने पर साझेदारी के कार्य में व्यक्ति को नुकसान होने की आशंका रहती है. इस स्थिति से बचने हेतु व्यक्ति को स्वतंत्र व्यवसाय करना चाहिए. यदि साझेदारी में व्यवसाय करना ही पड़े तो साझेदारों पर विश्वास करके बैठना नहीं चाहिए बल्कि सभी व्यवसायिक मुद्दों पर अपनी दृष्टि रखनी चाहिए अन्यथा साझेदार धोखा दे सकते हैं. मित्र भी विश्वासघात कर सकते हैं इसलिए, आँख बंद करके इन पर विश्वास नहीं करना चाहिए.
तक्षक कालसर्प (Takshak Kal Sarp Dosh) से प्रभावित व्यक्ति के जीवन में छोटी-मोटी उलझनें लगी रहती हैं जिससे व्यक्ति मानसिक रूप से परेशान रहता है. स्वास्थ्य भी व्यक्ति का ठीक नहीं रहता है, गुप्त रोग होने की भी आशंका रहती है.
तक्षक कालसर्प दोष शांति उपाय
तक्षक कालसर्प दोष (Takshak Kal Sarp Dosh) के कष्टकारी प्रभाव को कम करने के लिए व्यक्ति चाहे तो तक्षक कालसर्प दोष शांति उपाय करवा सकता है. नागपंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करके उन्हें धान का लावा चढ़ाना चाहिए. इस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए. तक्षक कालसर्प दोष वाले व्यक्ति के लिए नागपंचमी का इसलिए भी महत्व है कि, तक्षक नाग ने नाग जाति की रक्षा के लिए आस्तिक मुनि तथा जनमेय से कहा था कि, नागपंचमी के दिन जो भी व्यक्ति आस्तिक मुनि एवं जनमेय का जयकार करेगा उसके घर से सर्प की बाधा दूर हो जाएगी.
तक्षक कालसर्प दोष की शांति के लिए घर में नाग देवता की मूर्ति स्थापित करके नियमित धूप,दीप सहित उनकी पूजा करना भी लाभप्रद होता है. इस दोष से प्रभावित व्यक्ति यदि नियमित महामृत्युंजय मंत्र (Mahamritunjay Mantra) का जप करे तो मन से भय दूर होता है तथ कालसर्प दोष की बाधा से मुक्ति मिलती है.
कर्कोटक कालसर्प दोष – Karkotak Kaalsarp Dosh
परिचय
कुंडली में जब राहू आठवें घर में , केतु दुसरे घर में और बाकि सभी गृह इन दोनों के मध्य फसे हो तो कर्कोटक कालसर्प दोष का निर्माण होता है ! कर्कोटक कालसर्प दोष के प्रभाव से जातक के जीवन पर बहुत बुरा असर पड़ता है, जातक हमेशा सभी के साथ कटु वाणी का प्रयोग करता है, जिस वजह से उसके सम्बन्ध अपने परिवार से बिगड़ जाते है और वह उनसे दूर हो जाता है ! कई मामलों में पुश्तैनी जायजाद से भी हाथ धोना पड़ता है! जातक खाने पिने की गलत आदतों की वजह से अपनी सेहत बिगाड़ लेता है, कई बार ज़हर खाने की वजह से मौत भी हो सकती है ! पारिवारिक सुख न होने की वजह से कई बार विवाह न होने, विवाह देरी जैसे फल मिलते है, लेकिन इस दोष की वजह से जातक को शारीरिक संबंधो की हमेशा कमी रहती है और वह विवाह का पूर्ण आनंद नहीं प्राप्त करता !
कर्कोटक कालसर्प दोष का प्रभाव
कर्कोटक कालसर्प दोष (Karkotak Kaalsarp Dosha) होने पर पारिवारिक सम्बन्धों में काफी असर पड़ता है. इस दोष से प्रभावित व्यक्ति का अपने कुटुम्बों एवं सगे-सम्बन्धियों से मतभेद रहता है. इनमें आपसी सामंजस्य की कमी रहती है. इन कारणों से जरूरत के वक्त परिवार के सदस्य सहयोग के लिए आगे नहीं आते हैं. इस तरह की परेशानी से बचने के लिए व्यक्ति को संयम और धैर्य से काम लेने की जरूरत होती है. क्रोध पर काबू रखना भी आवश्यक होता है.
व्यय के रास्ते अचानक ही बनते रहते हैं जिससे बचत में कमी आती है. पैतृक सम्पत्ति के सुख से व्यक्ति वंचित रह सकता है अथवा पैतृक सम्पत्ति मिलने पर भी उसे सुख की अनुभूति नही होती है. व्यक्ति की आजीविका में समय-समय पर मुश्किलें आती हैं जिनके कारण नुकसान सहना पड़ता है. आठवें घर में बैठा राहु व्यक्ति को स्वास्थ्य सम्बन्धी चिंताएं देता है. दुर्घटना की संभावना भी बनी रहती है. अगर व्यक्ति सजग एवं सावधान नहीं रहे तो अपने आस-पास में हो रहे साजिश के कारण उसे कठिन हालातों से भी गुजरना पड़ता है.
कर्कोटक कालसर्प दोष उपाय
कर्कोटक नाग के विषय में उल्लेख मिलता है कि यह भगवान शिव के बड़े भक्त हैं. शिव जी तपस्या करते हुए इन्हेंनों शिव की अनुकम्पा प्राप्त की है. उज्जैन में एक शिव मंदिर है जो कर्कोटेश्वर के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि इसी मंदिर में कर्कोटक को शिव की कृपा मिली थी. इस मंदिर में शिव जी पूजा अर्चना करने से कर्कोटेश्वर कालसर्प का दोष दूर होता है. पंचमी, चतुर्दशी एवं रविवार के दिन यहां दर्शन पूजा करना अति उत्तम माना जाता है. इस दिन यहां पूजा करने से सभी प्रकार की सर्प पीड़ा से मुक्ति मिलती है.
जो लोग यहां दर्शन के लिए नहीं जा सकते हैं वह पंचाक्षरी मंत्र से शिव की पूजा करें और दूध व जल से उनका अभिषेक करें तो कर्कोटक कालसर्प दोष (Karkotak Kaalsarp Dosh) के अशुभ फल से बचाव होता है. इस दोष की शांति के लिए नागपंचमी एवं शिवरात्रि के दिन शिव की पूजा अधिक फलदायी होती है. पंचमी तिथि में सवा किलो जौ बहते जल में प्रवाहित करने से भी कर्कोटक कालसर्प दोष शांत होता है.
शंखचूड़ कालसर्प दोष Shankachood Kaalsarp Dosh
परिचय
राहू कुंडली के नौवें घर में, केतु तीसरे घर में और बाकि गृह इन दोनों के मध्य फसे हो तो इसे शंखनाद कालसर्प कहते है ! शंखनाद कालसर्प दोष का जातक के जीवन पर बहुत बुरा असर पड़ता है, जातक को जीवन के किसी भी क्षेत्र में किस्मत या भाग्य का साथ नहीं मिलता, बने बनाये काम बिना किसी कारण के बिगड़ जाते है! जातक को जीवन चर्या के लिए अधिक महनत करनी पड़ती है! जातक के बचपन में उसके पिता पर इस दोष का बुरा असर पड़ता है और लोग कहते है की इस बच्चे के आने के बाद घर में समस्याए आ गयी ! यह कालसर्प एक तरह का पितृ दोष का निर्माण भी करता है, जिसके प्रभाव से जातक नाकामयाबी और आर्थिक संकट जैसी परेशानियों से जूझना पड़ता है !
शंखनाद कालसर्प दोष का प्रभाव
ज्योतिषशास्त्रियों का मानना है कि कालसर्प दोष (Shankachood Kaalsarp Dosh) जिस व्यक्ति की जन्मपत्री में होता है उसके भाग्य में अड़चनें आती हैं. इसके कारण से जीवन में धूप-छांव की स्थिति बनी रहती है. व्यक्ति की आजीविका नौकरी अथवा व्यसाय जिससे भी चलती हो उसमें स्थायित्व की कमी रहती है. इससे आर्थिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है.
यह दोष पिता के साथ सम्बन्धों में दूरियां लाने की कोशिश करता है अत: जिस व्यक्ति की जन्मपत्री में यह योग हो उसे पिता के साथ अच्छे सम्बन्ध बनाये रखने का प्रयास करना चाहिए. यदि किसी बात को लेकर पिता क्रोधित हों तो विवाद करने की बजाय ग़लती मानकर मुद्दे को सुलझा लेने में ही भलाई होती है. ऐसा करने से व्यक्ति पिता के मन में जगह बना पाता है. इससे भाग्य में आने वाली बाधाएं भी कम होती हैं.
शंखनाद कालसर्प शांति उपाय
शंखचूड़ कालसर्प दोष (Shankachood Kaalsarp Dosh) की शांति के लिए भगवान श्री कृष्ण की पूजा करना लाभकारी होता है. इस दोष के अशुभ फल को कम करके भाग्य को मजबूत बनाने हेतु व्यक्ति को चांदी की अंगूठी में गोमेद रत्न धारण करना चाहिए. पितृ पक्ष में व्यक्ति यदि पितरों के निमित्त पिण्ड दान करता है तथा अपने सामर्थ्य के अनुसार ब्रह्मणों को भोजन करवाकर दान देता है तो इससे पितृ गण प्रसन्न होते हैं फलत: कालसर्प दोष के अशुभ प्रभाव से व्यक्ति का बचा रहता है.
घातक कालसर्प दोष – Ghatak Kaalsarp Dosh
परिचय
कुंडली में जब राहू दसवें घर में और केतु चौथे घर में और बाकि सभी गृह इन दोनों के मध्य फसे हो तो घटक कालसर्प दोष का निर्माण होता है ! घटक कालसर्प जातक के जीवन पर बहुत बुरा प्रभाव डालता है, जातक हमेशा व्यवसाय और नौकरी की परेशानियों से जूझता रहता है, यदि वह नौकरी करता है तो उसके सम्बन्ध उच्च अधिकारीयों से ठीक नहीं बनते, तरक्की नहीं होती, कई कई वर्षों तक एक ही पद पर कार्यरत रहना पड़ता है ! और इसीलिए किसी भी काम से शंतुष्टि नहीं होती, और बार बार व्यवसाय या नौकरी बदलनी पड़ती है ! इस कालसर्प का माता पिता की सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है और किसी कारण से जातक को उनसे पृथक होकर रहना पड़ता है !
घटक कालसर्प दोष का प्रभाव
यह योग (Ghatak Kalsarp) जिस व्यक्ति की जन्मपत्री में होता है उसे सबसे ज्यादा परेशानी आजीविका में उठानी पड़ती है. चुंकि, घटक कालसर्प दोष (Ghatak Kalsarp) में अशुभ फलदायी ग्रह का निवास दशम भाव में होता है अत: व्यक्ति नौकरी में हो अथवा व्यवसाय करता हो उसके कार्यों में स्थायित्व की कमी रहती है यानी नौकरी करने वाले व्यक्ति को बार-बार नौकरी बदलनी पड़ती है तथा व्यवसाय करने वाला अपने व्यवसाय में बार-बार परिवर्तन करता रहता है. मान-प्रतिष्ठा में कमी की संभावना बनी रहती है इसलिए इस दोष से प्रभावित व्यक्ति को शांति एवं समझदारी से काम लेना चाहिए.
सुख स्थान में बैठा केतु व्यक्ति के जीवन में सुख की कमी करता है. परिवार के सदस्य से सही ताल-मेल नहीं होने के कारण घर में अशांति बनी रहती है. माता से व्यक्ति का मनमुटाव हो सकता है. वैवाहिक जीवन में जीवनसाथी की नाराजगी एवं उनसे सहयोग की कमी के कारण व्यक्ति खुद को अकेला महसूस करता है. इन स्थितियों में व्यक्ति का मन वैराग्य की ओर प्रेरित होता है.
घटक कालसर्प दोष के उपाय
घटक कालसर्प दोष (Ghatak Kalsarp) जन्मपत्री में है तो व्यक्ति को इससे घबराना नहीं चाहिए. ज्योतिशास्त्र कहता है कि जन्मपत्री में किसी भी तरह का अशुभ प्रभाव है तो उसे दूर करने के उपाय भी ज्योतिषशास्त्र में मौजूद है. ज्योतिषशास्त्र में घटक कालसर्प दोष की शांति के लिए जो उपाय बताए गए हैं उनमें एक उपाय यह है कि व्यक्ति को नियमित शिव जी पूजा करनी चाहिए तथा जितना संभव हो ओम नम: शिवाय मंत्र का जप करना चाहिए. राहु ग्रह की शांति के लिए राहु मंत्र "ओम रां राहवे नम:" मंत्र का जप करना चाहिए. जप के पश्चात राहु के नाम से हवन करके राहु की वस्तुएं जैसे गोमेद, सीसा, तिल, नीले, वस्त्र, सूप, कंबल का दान करना चाहिए.
विषधर कालसर्प दोष – Vishdhar Kaalsarp Dosh
परिचय
राहू ग्यारहवे स्थान पर, केतु पाचवें स्थान पर और बाकी सभी गृह इन दोनों के मध्य फसे होने से कुंडली में विषधर कालसर्प दोष का निर्माण होता है ! विषधर कालसर्प दोष जातक के जीवन बहुत बुरा प्रभाव डालते है ! इस दोष के कारण जातक को आँख और हृदय रोग होते है, बड़े भाई बहनों से सम्बन्ध अच्छे नहीं चलते ! जातक की याददाश्त कमज़ोर होती है, `इसीलिए वह पढाई ठीक से नहीं कर पाते! जातक को हमेशा व्यवसाय में उचित लाभ नहीं मिलता , जातक अधिक पैसा लगाकर कम मुनाफा कमाता है ! इस योग के चलते जातक आर्थिक परेशानियाँ बनी रहती है ! प्रेम सम्बन्ध में धोखा मिलता है और विवाह के उपरान्त बच्चों के जन्म में समस्याएं आती है, जन्म के बाद बच्चों की सेहत भी खराब रहती है !
विषधर कालसर्प का प्रभाव
विषधर कालसर्प दोष (Vishdhar Kalsarp Dosha) से जिनकी कुण्डली प्रभावित होती है उनकी शिक्षा में बाधा आने की गुंजाईश रहती है. खासतौर, पर उच्च शिक्षा में यह दोष बाधक बनता है. इस दोष में राहु आय स्थान में होता है अत: धनार्जन हेतु काफी मेहनत करनी होती है. आय में उतार-चढ़ाव बना रहता है. इस दोष के प्रभाव से व्यक्ति कभी-कभी ऐसे कार्य कर बैठता है जिसके कारण मान-सम्मान एवं प्रतिष्ठा की हानि होती है. संतान सुख के लिए यह दोष कष्टकारी माना जाता है. संतान से अच्छे सम्बन्ध नहीं रहते अथवा संतान की प्राप्ति देर से होती है. बड़े भाई-बहनों से अनबन भी इस दोष का फल माना जाता है. इस दोष से प्रभावित स्त्री-पुरूष को नेत्र रोग, हृदय रोग, अनिद्रा एवं स्मरण शक्ति की कमी हो सकती है.
विषधर कालसर्प शांति उपाय
विषधर कालसर्प दोष (Vishdhar Kalsarp Dosha) की शांति के लिए कालसर्प यंत्र घर में स्थापित करके नियमित उसकी पूजा करनी चाहिए. भगवान भोले नाथ अपने कण्ठ में विष एवं गले में नाग की माला धारण करते हैं. जो व्यक्ति उनकी नियमित पूजा करता है उनके सभी प्रकार के सर्प दोष निष्प्रभावी हो जाते हैं. सावन मास को शिव भक्ति का मास कहा गया है. इस समय भगवान विष्णु शेषनाग की शैय्या पर शयन करते हैं. इसलिए सृष्टि की देख-रेख का जिम्मा भोलेनाथ पर होता है. इस मास में शिव की पूजा अधिक फलदायी मानी जाती है. सावन मास में शिव का अभिषेक करके कालसर्प शांति यज्ञ कराने से विषधर कालसर्प दोष के कष्ट से मुक्ति मिलती है. राहु मंत्र ओम 'रां राहवे नमः' मंत्र का जप करके पंक्षियों को जौ एवं बाजरे के दाने खिलाने चाहिए, इससे भी कालसर्प दोष का अशुभ प्रभाव कम होता है.
शेषनाग कालसर्प दोष - Sheshnag Kaalsarp Dosh
परिचय
कुंडली के बारहवें घर में राहू, छठे घर में केतु और बाकी सभी गृह इन दोनों के मध्य फसे होने से शेषनाग कालसर्प दोष का निर्माण होता है ! शेषनाग कालसर्प दोष जातक के जीवन में कई समस्याएं उत्पन्न करता है ! जातक हमेशा गुप्त दुश्मनों डर में रहता है, उसके गुप्त दुश्मन अधिक होते है जो उसे समय समय पर नुक्सान पहुचाते रहते है! जातक हमेशा कोई न कोई स्वास्थ्य समस्या से घिरा रहता है इसलिए उसके इलाज पर अधिक खर्चा होता है! इस दोष के कारण जातक जन्म स्थान से दूर रहना पड़ता है, गलत कार्यों में भाग लेने से जेल यात्रा भी संभव है !
शेषनाग कालसर्प दोष का प्रभाव
जिस व्यक्ति की कुण्डली में शेषनाग कालसर्प दोष (Sheshnag Kaalsarp Dosh) होता है उनका मन अशांत रहता है. व्यक्ति अपने अंदर एक बेचैनी एवं उद्धिग्नता महसूस करता है. जो लोग सतर्क नहीं रहते हैं वह गुप्त शत्रुओं द्वारा किसी षड्यंत्र में फंसाये जा सकते हैं. जिससे कठिनाईयों का सामना करना पड़ सकता है. मुश्किल समय में धैर्य एवं संयम से काम नहीं लेना वाला व्यक्ति लड़ाई-झगड़ों में फंस सकता है. इन स्थितियों में उसे अदालत के भी चक्कर लगाने पड़ते हैं.
शेषनाग कालसर्प दोष (Sheshnag Kaalsarp Dosh) से प्रभावित व्यक्ति को बदनामी भी सहनी होती है. व्यक्ति मेहनत करके कमाता है और खर्च पहले से ही अपना मुंह खेलकर बैठा रहता है जिससे आर्थिक चुनौतियां का सामना करना पड़ता है. परिवारिक सुख-शांति को लेकर भी व्यक्ति की चिंताएं बनी रहती हैं. इस दोष से प्रभावित व्यक्ति को नेत्र रोग होने की संभावना अधिक रहती है. ज्योतिषशास्त्रियों का मानना है कि शेषनाग कालसर्प दोष से प्रभावित व्यक्ति को अपने जीवनकाल में भले ही कष्ट और अपमान उठाना पड़े लेकिन, मृत्यु पश्चात उसकी ख्याति फैलती.
शेषनाग कालसर्प दोष शांति उपाय
शेषनाग कालसर्प दोष (Sheshnag Kaalsarp Dosh) की शांति के लिए भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए तथा उनसे इस दोष की शांति के लिए प्रार्थना करनी चाहिए. सोमवार के दिन रूद्राभिषेक करने से भी इस दोष का अशुभ प्रभाव दूर होता है. सावन महीने में सोमवार के दिन यह कार्य करने पर सर्वाधिक शुभ फल प्राप्त होता है. कालसर्प दोष के कष्ट को कम करने हेतु गोमद धारण कर सकते हैं. चांदी की नाग की आकृति वाली अंगूठी धारण करने से भी अनुकूल परिणाम प्राप्त होता है.
ज्योतिष में कालसर्प योग विवेचन भाग 2
कालसर्प को योग-दोष बनाने वाले तथ्य
जब राहु के साथ चंद्रमा लग्न में हो और जातक को बात-बात में भ्रम की बीमारी सताती रहती हो, या उसे हमेशा लगता है कि कोई उसे नुकसान पहुँचा सकता है या वह व्यक्ति मानसिक तौर पर पीड़ित रहता है।
जब लग्न में मेष, वृश्चिक, कर्क या धनु राशि हो और उसमें बृहस्पति व मंगल स्थित हों, राहु की स्थिति पंचम भाव में हो तथा वह मंगल या बुध से युक्त या दृष्ट हो, अथवा राहु पंचम भाव में स्थित हो तो संबंधित जातक की संतान पर कभी न कभी भारी मुसीबत आती ही है, अथवा जातक किसी बड़े संकट या आपराधिक मामले में फंस जाता है।
जब कालसर्प योग में राहु के साथ शुक्र की युति हो तो जातक को संतान संबंधी ग्रह बाधा होती है।
जब लग्न व लग्नेश पीड़ित हो, तब भी जातक शारीरिक व मानसिक रूप से परेशान रहता है। चंद्रमा से द्वितीय व द्वादश भाव में कोई ग्रह न हो। यानी केंद्रुम योग हो और चंद्रमा या लग्न से केंद्र में कोई ग्रह न हो तो जातक को मुख्य रूप से आर्थिक परेशानी होती है।
जब राहु के साथ बृहस्पति की युति हो तब जातक को तरह-तरह के अनिष्टों का सामना करना पड़ता है।
जब राहु की मंगल से युति यानी अंगारक योग हो तब संबंधित जातक को भारी कष्ट का सामना करना पड़ता है।
जब राहु के साथ सूर्य या चंद्रमा की युति हो तब भी जातक पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, शारीरिक व आर्थिक परेशानियाँ बढ़ती हैं।
जब राहु के साथ शनि की युति यानी नंद योग हो तब भी जातक के स्वास्थ्य व संतान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, उसकी कारोबारी परेशानियाँ बढ़ती हैं।
जब अष्टम भाव में राहु पर मंगल, शनि या सूर्य की दृष्टि हो तब जातक के विवाह में विघ्न, या देरी होती है। यदि जन्म कुंडली में शनि चतुर्थ भाव में और राहु बारहवें भाव में स्थित हो तो संबंधित जातक बहुत बड़ा धूर्त व कपटी होता है। इसकी वजह से उसे बहुत बड़ी विपत्ति में भी फंसना पड़ जाता है।
जब लग्न में राहु-चंद्र हों तथा पंचम, नवम या द्वादश भाव में मंगल या शनि अवस्थित हों तब जातक की दिमागी हालत ठीक नहीं रहती। उसे प्रेत-पिशाच बाधा से भी पीड़ित होना पड़ सकता है।
जब दशम भाव का नवांशेश मंगल/राहु या शनि से युति करे तब संबंधित जातक को हमेशा अग्नि से भय रहता है और अग्नि से सावधान भी रहना चाहिए।
जब दशम भाव का नवांश स्वामी राहु या केतु से युक्त हो तब संबंधित जातक मरणांतक कष्ट पाने की प्रबल आशंका बनी रहती है।
जब दशम भाव का नवांश स्वामी राहु या केतु से युक्त हो तब संबंधित जातक मरणांतक कष्ट पाने की प्रबल आशंका बनी रहती है।
जब राहु व मंगल के बीच षडाष्टक संबंध हो तब संबंधित जातक को बहुत कष्ट होता है। वैसी स्थिति में तो कष्ट और भी बढ़ जाते हैं जब राहु मंगल से दृष्ट हो।
जब लग्न मेष, वृष या कर्क हो तथा राहु की स्थिति 1ले 3रे 4थे 5वें 6ठे 7वें 8वें 11वें या 12वें भाव में हो। तब उस स्थिति में जातक स्त्री, पुत्र, धन-धान्य व अच्छे स्वास्थ्य का सुख प्राप्त करता है।
जब राहु छठे भाव में अवस्थित हो तथा बृहस्पति केंद्र में हो तब जातक का जीवन खुशहाल व्यतीत होता है।
जब राहु व चंद्रमा की युति केंद्र (1ले 4थे 7वें 10वें भाव) या त्रिकोण में हो तब जातक के जीवन में सुख-समृद्धि की सारी सुविधाएं उपलब्ध हो जाती हैं।
जब शुक्र दूसरे या 12वें भाव में अवस्थित हो तब जातक को अनुकूल फल प्राप्त होते हैं। जब बुधादित्य योग हो और बुध अस्त न हो तब जातक को अनुकूल फल प्राप्त होते हैं।
जब लग्न व लग्नेश सूर्य व चंद्र कुंडली में बलवान हों साथ ही किसी शुभ भाव में अवस्थित हों और शुभ ग्रहों द्वारा देखे जा रहे हों। तब कालसर्प योग की प्रतिकूलता कम हो जाती है।
जब दशम भाव में मंगल बली हो तथा किसी अशुभ भाव से युक्त या दृष्ट न हो। तब संबंधित जातक पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।
जब शुक्र से मालव्य योग बनता हो, यानी शुक्र अपनी राशि में या उच्च राशि में केंद्र में अवस्थित हो और किसी अशुभ ग्रह से युक्त अथवा दृष्ट न हो रहा हो। तब कालसर्प योग का विपरत असर काफी कम हो जाता है।
जब शनि अपनी राशि या अपनी उच्च राशि में केंद्र में अवस्थित हो तथा किसी अशुभ ग्रह से युक्त या दृष्ट न हों। तब काल सर्प योग का असर काफी कम हो जाता है।
जब मंगल की युति चंद्रमा से केंद्र में अपनी राशि या उच्च राशि में हो, अथवा अशुभ ग्रहों से युक्त या दृष्ट न हों। तब कालसर्प योग की सारी परेशानियां कम हो जाती हैं।
जब राहु अदृश्य भावों में स्थित हो तथा दूसरे ग्रह दृश्य भावों में स्थित हों तब संबंधित जातक का कालसर्प योग समृध्दिदायक होता है। जब राहु छठे भाव में तथा बृहस्पति केंद्र या दशम भाव में अवस्थित हो तब जातक के जीवन में धन-धान्य की जरा भी कमी महसूस नहीं होती।
काल सर्प दोष के लक्षण
बाल्यकाल में किसी भी प्रकार की बाधा का उत्पन्न होना। अर्थात घटना-दुर्घटना, चोट लगना, बीमारी आदि का होना।
विद्या अध्ययन में रुकावट होना या पढ़ाई बीच में ही छूट जाना। पढ़ाई में मन नहीं लगना या फिर ऐसी कोई आर्थिक अथवा शारीरिक बाधा जिससे अध्ययन में व्यवधान उत्पन्न हो जाए।
विवाह में विलंब भी कालसर्प दोष का ही एक लक्षण है। यदि ऐसी स्थिति दिखाई दे तो निश्चित ही किसी विद्वान ज्योतिषी से संपर्क करना चाहिए। इसके साथ ही इस दोष के चलते वैवाहिक जीवन में तनाव और विवाह के बाद तलाक की स्थिति भी पैदा हो जाती है।
एक अन्य लक्षण कालसर्प दोष है संतान का न होना और यदि संतान हो भी जाए तो उसकी प्रगति में बाधा उत्पन्न होती है।
परिजन तथा सहयोगी से धोखा खाना, खासकर ऐसे व्यक्ति जिनका आपने कभी भला किया हो।
घर में कोई सदस्य यदि लंबे समय से बीमार हो और वह स्वस्थ नहीं हो पा रहा हो साथ ही बीमारी का कारण पता नहीं चल रहा है।
आए दिन घटना-दुर्घटनाएं होते रहना।
रोजगार में दिक्कत या फिर रोजगार हो तो बरकत न होना।
इस दोष के चलते घर की महिलाओं को कुछ न कुछ समस्याएं उत्पन्न होती रहती हैं।
रोज घर में कलह का होना। पारिवारिक एकता खत्म हो जाना।
घर-परिवार मांगलिक कार्यों के दौरान बाधा उत्पन्न होना।
यदि परिवार में किसी का गर्भपात या अकाल मृत्यु हुई है तो यह भी कालसर्प दोष का लक्षण है।
घर के किसी सदस्य पर प्रेतबाधा का प्रकोप रहना या पूरे दिन दिमाग में चिड़चिड़ापन रहना।
कालसर्प योग में ग्रहों की स्थिति
यह योग सभी लोगों को एक समान रूप से प्रभावित नहीं करता। कुंडली में ग्रहों की दिशा, दशा, चाल, भाव, भावों की शक्ति आदि सभी बातें कालसर्प योग के प्रभाव के बढ़ने तथा घटने को प्रभावित करती हैं। इसलिए यह जानकर डरने की कोई जरूरत नहीं कि आपकी कुंडली में कालसर्प योग है। जरूरी नहीं कि यह आप के ऊपर बुरा प्रभाव ही डाले। लेकिन हां यह बहुत जरूरी है कि किसी अच्छे ज्योतिषी की मदद से अपनी कुंडली की पूरी जांच करा लें ताकि समय रहते सही उपाय किए जा सकें।
कालसर्प योग का स्वास्थ्य और दिमाग पर प्रभाव
यह दोष व्यक्ति के स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करता है और उसे मानसिक रूप से भी परेशानी देता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति गंभीर बीमारियों का शिकार हो सकता है। इस दोष के कारण व्यक्ति की मानसिक शांति भंग हो सकती है, भूलने की बीमारी हो सकती है। तनाव, चिंता, आत्मविश्वास की कमी हो सकती है। यह व्यक्ति को भावनात्मक रूप से भी कमजोर बनाता है। यह भी हो सकता है कि इसके कारण व्यक्ति या उसके परिवार के किसी सदस्य को कोई गंभीर बीमारी हो जाए।
कालसर्प योग का शिक्षा और करियर पर प्रभाव
हो सकता है कि इस दोष के कारण किसी को लगातार परीक्षाओं में असफलता हाथ लगे या मनचाहे परिणाम प्राप्त न हों। यह व्यक्ति को आगे बढ़ने से रोकता है तथा जीवन में आगे बढ़ने के प्रति चाह को कम कर देता है। हो सकता है कि इससे प्रभावित व्यक्ति की नौकरी छूट जाए या फिर उसे व्यवसाय में घाटा पड़ जाए। दूसरे शब्दों में कहें तो कालसर्प योग दोष के कारण व्यक्ति की शिक्षा के साथ-साथ उसके करियर पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।
कालसर्प योग दोष का प्रेम तथा शादी पर प्रभाव
इस दोष के कारण प्रभावित व्यक्ति को प्यार में चोट मिल सकती है, किसी खास दोस्त द्वारा उसकी भावनाओं को ठेस पहुंचाई जा सकती है या हो सकता है कि रिश्तों में खटास आ जाए। इसी तरह यह भी संभव है कि उसकी शादी में अड़चनें आएं या फिर शादी के बाद का जीवन सुखी न रहे। संतान प्राप्ति में भी अड़चनें आ सकती हैं। यहां तक कि पति-पत्नी में तनाव के कारण तलाक की नौबत भी आ सकती है।
कालसर्प योग दोष का धन-संपत्ति पर प्रभाव
यह दोष व्यक्ति को आर्थिक मामलों में भी परेशानी दे सकता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति की धन-संपत्ति में कमी आ सकती है, उसके व्यवसाय में परेशानी हो सकती है या फिर पैतृक संपत्ति को लेकर भी विवाद खड़ा हो सकता है।
कालसर्प योग दोष की जानकारी और इसका विश्लेषण
जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प योग दोष होता है उन लोगों को अपने जीवन में कड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बचपन ले लेकर बुढ़ापे तक, जीवन के हर पहलू में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। अगर आपको भी अपने काम, परिवार, शिक्षा आदि में परिशानियों का सामना करना पड़ रहा है तो हो सकता है आपकी कुंडली में भी यह योग बन रहा हो। वेदों में कहा गया है कि इस दोष से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव और नाग देवता की पूजा करनी चाहिए तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।
कालसर्प उपाय
यह एक बहुत ही कष्टदायक योग है। इस योग की यह विशेषता होती है कि यहव्यक्ति को मध्यम स्थिति में नहीं रखता है। यह व्यक्ति को अत्यधिक ऊँचाई प्रदान करताहै अथवा एक निम्न स्तर का कर देता है। मेरा अनुभव में यह व्यक्ति को संघर्ष तो देताही है, इसके प्रभाव से संतानहीनता, विवाह में बाधा अथवा संघर्षमय जीवन भी देता है।पं. नेहरू की पत्रिका में भी यह योग था। इस योग का पूर्ण निवारण तो शान्ति से हीहोता है लेकिन फिर भी यदि इसके उपाय किये जायें तो इसके विष में कमी आती है,व्यक्ति बहुत उन्नति करता है। यह योग इस प्रकार से बनता है कि जब जन्मपत्रिका मेंराहू व केतू के मध्य सारे सात ग्रह आ जायें तो पूर्ण योग होता है और यदि एक-दो ग्रहराहू-केतू की पकड़ से बाहर हों तो कालसर्प योग की छाया कहा जाता है। यहां परमैं आपको कुछ सामान्य उपाय बता रहा हूँ जिनके करने से इस योग के विषय में कुछकमी अवश्य आती है। मेरी आपको यही सलाह है कि आप इस योग की शान्ति अवश्यकरवा लें:-
(1) 108 નાरિयल पर चंदન से તિलक पૂजન कर "ॐ ्रा श्री ्र સःराहवे નમः"का 108 बार जाप कर पीड़ित व्यक्ति के ऊपर से उसार कर बुधवार कोनदी या बहते जल में प्रवाहित करना चाहिये।
(2) प्रथम बुधवार से नीले कपड़े में काली उड़द बांध कर वट वृक्ष की 108परिक्रमा आरम्भ करें। परिक्रमा के बाद उस उड़द दाल किसी को दान करदेनी चाहिये। ऐसा लगातार 72 बुधवार करना चाहिये।
(3) अभिमंत्रित कालसर्प योग यंत्र पर राहू की होरा में चंदन का इत्र लगानाचाहिये।
(4) नागपंचमी को सपेरे से अपने धन से नाग-नागिन के जोड़े को पूजन के बादमुक्त करवा देना चाहिये।
(5) प्रथम बुधवार से आरम्भ कर लगातार आठ बुधवार को क्रमशः स्वर्ण, चांदी,तांबा, पीतल, कांसा, लोहा, रांगे व सप्तधातु के नाग-नागिन के जोड़े कोपूजन के बाद दूध के दोने में रख कर बहते जल में प्रवाहित करना चाहिये।(6) ग्रहणकाल में निम्न मंत्र के जाप से पूजन कर सप्तधातु के नाग-नागिन बनवाकर जल में प्रवाहित करना चाहिये। मंत्र- "ॐ नमोस्तु सर्पेभ्यो ये के चपृथ्वीमनु। ये अंतरिक्षे ये दिवितेभ्यःसर्पेभ्यो नमः" ।
(7) ग्रहणकाल में किसी ऐसे शिव मन्दिर की पिण्डी पर पंचमुखी नाग की तांबे
की मूर्ति लगवानी चाहिये जिस पर पहले से नागदेव न हाँ तथा पीले फूलसे पूजन कर शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिये। इसमें यह अवश्य ध्यानरखना चाहिये कि आपको यह पूजन करते कोई देखे नहीं।
(8) प्रत्येक शिवरात्रि,श्रावण मास तथा ग्रहण काल में शिव अभिषेक अवश्यकरना चाहिये।
(9) मोर अथवा गरूड़ का चित्र बना कर उस पर विषहरण मंत्र लिख कर उसमंत्र के दस हजार जाप कर दशांश हवन के साथ ब्राह्मणों को खीर काभोजन करवाना चाहिये।
(10) नियमित रूप से श्री हनुमान जी उपासना के साथ शनिवार को सुन्दरकाण्डका पाठ के साथ एक माला "ॐ ह हनुमंते रूद्रात्मकाये हुं फट्" का जापकरने से भी लाभ प्राप्त होता है।
(11) एक वर्ष आटे अथवा उड़द के नाग बना कर उसके पूजन के बाद नदी मेंप्रवाहित करने के एक वर्ष बाद नागबलि करवायें ।
(12) मार्ग में यदि कभी मरा हुआ सर्प मिल जाये तो उसका विधि-विधान से शुद्धघी से अन्तिम संस्कार करना चाहिये। तीन दिन तक सूतक पालें औरसर्पबलि करवायें ।
(13) नाग मन्दिर का निर्माण करवायें।
(14) कार्तिक अथवा चैत्र मास में सर्पबलि करवानी चाहिये।
(15) नागपंचमी को सर्पाकार की सब्जी अपने वजन के बराबर लेकर गाय कोखिलायें।