मकर लग्न का स्वभाव एवं चरित्र विवेचन विवरण और व्याख्या
मकर लग्न का स्वभाव एवं चरित्र विवेचन विवरण और व्याख्या
आकश के 270 डिग्री से 300 डिग्री तक के भाग को मकर लग्न के रूप में जाना जाता है. जिस जताक के जन्म के समय यह भाग आसमान के पूर्वी क्षितिज में उदित होता दिखाई देता है, उस जातक का लग्न मकर माना जाता है. मकर लग्न की कुंडली में में मन का स्वामी चंद्रमा सप्तम भाव का स्वामी होता है. यह जातक लक्ष्मी, स्त्री, कामवासना, मॄत्यु मैथुन, चोरी, झगडा अशांति, उपद्रव, जननेंद्रिय, व्यापार, अग्निकांड इत्यादि विषयों का प्रतिनिधि होता है. जातक की जन्मकुंडली या अपने दशाकाल में चंद्रमा के बलवान एवं शुभ प्रभाव में रहने से जातक को उपरोक्त विषयों में शुभ फ़ल प्राप्त होते हैं जबकि कमजोर एवम अशुभ प्रभाव में रहने से अशुभ फ़ल प्राप्त होते हैं.
https://visitecard.com/card/pankajbissa
ज्योतिष में जिस लग्न को सबसे बुरा माना
गया है वो मकर लग्न ही है | ऐसा माना जाता की
पिछले जन्म में किये हुवे पापों के कारण ही जातक का जन्म इस लग्न में होता है | इस लग्न की अशुभता का
अनुमान आप इस बात से लगा सकते है की देव गुरु बिर्हस्पती दो पाप भावों के स्वामी
बनकर खुद पापी बन जाते है | हालाँकि मेरे
कहने का तात्पर्य ये नही है की मकर लग्न वाले सभी जातक का जीवन बहुत बुरा होता है
लेकिन अन्य लग्न के मुकाबले इस लग्न के जातक आपको सबसे ज्यादा संघर्ष जीवन में
करते हुवे मिलेंगे \
इस लग्न में उतरसाढा जिसका स्वामी सूर्य , श्रवन जिसका स्वामी चन्द्र और धनिष्ठा नक्षत्र आते है | यदि जन्म समय सूर्य के
नक्षत्र का उदय हो रहा हो तो जातक का जन्म ज्यादा संघर्ष से भरा हुआ होता है लेकिन
जातक विपरीत प्रिसिथियों में भी हार नही मानता है | यदि जातक का जन्म चन्द्र के नक्षत्र श्रवण में जन्म हो तो
जातक को ज्यादा समस्या आती है क्योंकि जातक मानसिक रूप से कुछ कमजोर रह जाता है और
वो बहुत जल्दी भावुक और दुखी होने लगता है | लेकिन यदि जातक का जन्म मंगल के नक्षत्र में धनिस्ठा के उदय
के समय हो तो जातक जीवन में विशेष तर्रकी कर पाता है क्योंकि मंगल इस मकर राशि में
उंच का भी होता है और ऐसे में जातक जीवन में आने वाली समस्याओं का अपने बाहुबल और
हिम्मत से मुकाबला कर लेता है |
मकर राशि का स्वरूप एक मगरमच्छ होता है जैसा की आपको
पता है की मगरमच्छ बहुत धीमी गति से आगे बढ़ता है और जमीन और पानी दोनों पर निवास
करता है इसी प्रकार इस लग्न के जातक हर प्रकार की प्रिसिथ्ती में अपने आप को ढाल
लेते है | आपने देखा होगा
की जब मगरमच्छ किसी पर हमला करते है तो वो इतने शांत होते है की उसके शिकार को पता
भी नही चल पाता की मगरमच्छ उसके पास है और उसके उपर हमला करने वाला है इसिलिय इस
लग्न के जातक जब किसी से अपना वैर निकालते है तो इनके शत्रु को भी इनका आभाष नही
हो पाता है |
https://visitecard.com/card/pankajbissa
मित्रों मकर लग्न का जातक अन्य किसी लग्न के जातक की
बजाय जिमेदार इंसान होता है और ये जातक अपने किये हुवे वादे को निभाने की पूरी
कोशिश करते है। ऐसा माना जाता है की इस लग्न के जातकों पर बचपन में ही किसी न किसी
कारन से परिवार की जिमेदारी का बोझ आ जाता है और ये अपने जीवन की बहुत सी खुशियाँ
केवल परिवार के लिये बलिदान कर देते है । बोझ न भी आये तो भी ये अपने आपको जिमेदार
बना लेते है और इनकी बचपन से ही बुजुर्ग जैसी सोच होती है। साथ ही इनमे अपनी
जिमेदारी निभाने की इतनी तलब होती है की अपने जीवन का सुनहरा समय दूसरों के लिये
कुर्बान कर देते है यानी माँ बाप भाई बहन आदि के लिये।
इस लग्न का स्वामी शनि देव होते है और शनि लोहे के
कारक होतते है और जैसा की आपको पता है की जल्दी से लोहे को न तो गलाया जा सकता है
और न ही तोडा जा सकता है उसी प्रकार इस लग्न के जातक जीवन में समस्याओं का सामना
करते हुवे जल्दी से हार नही मानते और कोई काम हाथ में लेने पर उसे जल्दी से बिच
में नही छोड़ते।
मित्रों ऐसा माना जाता है की पिछले जन्मों के कर्मों
का प्रभाव मकर लग्न के जातकों पर अन्य के मुकाबले सबसे ज्यादा होता है और इसी कारण
जब इनका जन्म होता है तो परिवार में धन की कमी कोई मिर्त्यु या कोई गंभीर क्लेश की
सिथति होती है और ये प्रभाव इनके अचेतन मन पर हमेशा रहता है और इनको संघर्ष भी
सबसे ज्यादा करना पड़ता है। इनके घनिष्ट मित्रों का दायरा सिमित होता है ये जल्दी
से किसी को मित्र नही बनाते और यदि बना लेते है तो फिर कभी उसका साथ भी नही छोड़ते।
और न ही ये जल्दी से किसी से कोई उपहार लेना पसन्द करते है।https://visitecard.com/card/pankajbissa
आर्थिक मामलों में इनकी सोच ऐसी होती है की पैसा ऐसे
खर्च किया जाए की सभी जरूरतें पूरी हो इसी कारण इनको कुछ लोग कंजूस भी कह देते है ।
इनको जन्म से ही लगता है की इनका जन्म किसी विशेष
प्रयोजन के लिये हुवा है लेकिन आधी से ज्यादा उम्र बीत जाने पर भी ये लक्ष्य के
लिये भटकते रहते है। यदि लग्न में सूर्य चन्द्र मंगल हो तो इन्हें जीवन भर भी अपना
लक्ष्य नही मिलता लेकिन राहु शनि शुक्र हो तो कुछ आस बन जाती है लक्ष्य प्राप्ति
की। इसी लक्ष्य की प्राप्ति में ये बैचैन रहते है। इस लग्न के जातक कुछ अपने अंतिम
समय में समाज सेवा को भी अपना लक्ष्य बना लेते है तो कुछ चाहे उनकी संतान विदेश
में भी वेल स्टेलेड हो फिर भी उनके लिये मकान आदि का यही प्रबंध करने में अपनी
जिंदगी गुजार देते है यानी संतान चाहे वपिश न आये लेकिन उनकर लिये अपनी जीवन की
बची हुई खुशियाँ भी कुर्बान कर देते है।
इस लग्न के जातक दूसरों से सहायता की कोई आशा नही
करते और न ही ये जल्दी से किसी को दोखा देते है।
इस लग्न के सातवें भाव में चन्द्र की कर्क राशि होती
है और इसी कारण इनका वैवाहिक जीवन भी ज्यादा सुखप्रद नही होता यदि लग्न पर थोडा भी
दुस्प्रभाव हो तो वैवाहिक जीवन नर्क बन जाता है लेकिन अपनी समझ के कारण ये जल्दी
से विवाह विछेद नही करते और इनके वैवाहिक जीवन में दुःख का कारण इनके जीवनसाथी की
सोच होती है फिर भी ये उसकी मनोवर्ति को समझते हुवे जीवन यापन करते रहते है।
कुल मिलाकर हम कह सकते है की इस लग्न के जातक धन कमा
लेते है क्योंकि धनेश भी शनि ही है लेकिन उसे पूर्ण भोग नही सकते और इनका धन दूसरों
के ही काम आता है।
धन के अलावा मकर लग्न के व्यक्ति इस जीवन में धन और
अच्छी सिथतियां होते हुवे भी ऐसे जीवन जीता है जैसे कोई व्यक्ति बिना कसूर के ही
दूसरों के जीने की माफ़ी मांग कर जी रहा हो ।
यानी इस लग्न के जातको को काफी संघर्षमय जीवन जीना
पड़ता है।
मकर राशियों में यह दसवीं लग्न है। जन्मकुंडली के प्रथम भाव में मकर लग्न हो तो जातक का लग्न भी मकर कहलाता है। मकर लग्न का राशीश शनि है। अतः मकर लग्न के जातक का लग्नेश भी शनि होता है। मकर लग्न के जातकों का विवेचन करने के लिए शनि के गुण.स्वभाव तथा मकर लग्न के प्रतीक चिह्न श्मगरमच्छश् की\ विशेषताओं को ध्यान में रखना अति आवश्यक है।
इस आधार पर मकर लग्न के जातकों के विषय में स्थूल निष्कर्ष सहज ही निकाले जा सकते हैं कि
मकर लग्न के जातक लम्बे शरीर वाले ;इकहरे या छरहरेद्धए रंग तांबे जैसा ;लाल काला मिला हुआद्धए सिर बड़ाए दांत बड़ेए मुंह ;दहानाद्ध बड़ाए चालाकए प्रदर्शनकारी प्रवृत्ति केध्आडम्बरी तथा कमजोर दिमाग वाले होते हैं। इनके जीवन में परेशानी अधिक रहती है और इनका अपनी जीभ पर नियंत्रण नहीं होता।
मकर लग्न के जातकों में आत्मविश्वास की कमी होती है। ये लोग आलसी व आराम निद्रा प्रिय होते हैं। अपने जीवनसाथी से ये प्रायः खुश नहीं रहते। नर्वस सिस्टस कमजोर होता है। अतः इन्हें प्रायः अकुलाहट ही रहती है।
ये कामुक होते हैं तथा कार्य को टालने की प्रवृत्ति इनमें रहती है। ये लोग भोजन चबाते कम है और निगलते ज्यादा हैंए ऐसा भी देखने में आया है। प्रायः आयु के बढ़ने के साथ. साथ इनका शरीर भर जाता है।
प्रायः इन जातकों की नाक थोड़ी.सी मोटी व कुछ गोल.सी पाई जाती है। इनका मुख लम्बोतरा होता है तथा आंखों में एक विशेष प्रकार की चमक.सी रहती है। अति होने पर ही प्रायरू इन्हें क्रोध आता है किन्तु वे इसे जल्दी ही काबू भी कर लेते हैं।
प्रायः ये निश्चित प्रवृत्ति के होते हैं। अक्सर ये जीवन में एक से अधिक कामों में लिप्त रहते हैंए भावुक होते हैं। नदी आदि के किनारों पर रहने में इनका बहुत मन लगता है।
राजनीति स्वरोजगार व्यापारए कृषिए खनिजए ठेकेदारी आदि के कार्यों में ये प्रायः विशेष सफल होते हैं।
यदि लग्न अशुभ प्रभाव में हो तो ये बेईमानए स्वार्थीए लालची व कंजूस भी हो सकते हैं और इन्हें वायु गठियाए जोड़ों के दर्द पाचन आदि से सम्बन्धित रोग होते हैं।
वृषए कर्क व कन्या लग्न के जातकों से इनकी मित्रता साझेदारी शुभ रहती है।
मकर लग्न में शनि सबल होकर लग्नस्थ हो तो जातक तमोगुणीए राजसी प्रवृत्ति काए सांवलाए क्रोधीए दीर्घ शरीर वालाए दीर्घायु व मंथर गति से चलने वालाहोता है।
ऐसा जातक आलसीए निद्रालु व पेटू होता है। चौथे घर में शनि हो तो माता से विरोध रहता है। आठवें घर में शनि हो तो जातक की आयु काफी लम्बी होती हैए किन्त वह जीर्ण होकर मरता है।
नौवें घर में शनि हो तो धर्म के प्रति अरुचिए दसवें घर में हो तो राज से सम्मान मिलता है। ग्यारहवें घर का शनि नीच लोगों से आय प्राप्त कराता है। ऐसा जातक उद्योगपति हो सकता है।
मकर लग्न के जातकों पर पारिवारिक जिम्मेदारियां भी प्रायरू जल्दी आतीहैं। ऐसे जातक बचपन में ही बहुत से घरेलू व बाजारू कार्य खेल छोड़कर करते
रहते हैं करने पड़ते हैं। ऐसा देखने में आया है। शायद इसीलिए लाल किताब केमर्मज्ञ मकर लग्न को कुर्बानी का बकरा भी कहते हैं। मकर लग्न के जातकों में परिस्थितियों से जूझने की क्षमता काफी अधिक होती है।
इन पर जिम्मेदारियों का बोझ भी काफी रहता है। अनेक अवसरों पर इन्हें अन्य प्रलोभनों को छोड़कर जिम्मेदारियां निभानी भी पड़ती हैं। परन्तु आलस्य व काम टालने की प्रवृत्ति को य काबू कर लें तो सफल भी हो जाते हैं। अन्यथा समय से काम न हो पाने का नुकसान भी इन्हें उठाना पड़ता है। ये लोग कंजूस तो नहीं परन्तु मितव्ययी जरूर होते हैंए क्योंकि बचपन से असुरक्षा भाव से ग्रस्त रहते हैं।मेरे अपने अनुभव के अनुसार
मकर लग्न के जातकों के शरीर व चेहरे पर परिपक्वताध्प्रौढ़ता प्रायः अधिक जल्दी आती है और ये लोग अपना वृद्धावस्था मे भी धनवृद्धि के प्रयासोंध्चिन्ता में हो लिय रहते है। ये लोग दूसरों पर जल्दी विश्वास नहीं करते और स्वयं अपनी क्षमता या सामय प्रातभा प्रायः आश्वमा नहीं होते। इनके मित्र भी गिने.बने होते हैं।
वास्तव में इनका आलस तथा जिम्मेदारिया इन्हें मित्रों के साथ अधिक समय बिताने हो नहीं देता मकर धन अच्छा कमाते हैं। किन्तु इनके धन का बहुत बड़ा भाग इनक रिश्तेदार बाल.बच्चे भोगते हैं। ये सायं कम ही उपभोग कर पाते है
इन लोगों की कामशक्ति सामान्य से अधिक होनी चाहिए जसा कि मगरमच कि खूबी होती है परन्तु मेरे अनुभव में अब तक प्राय मकर लग्न के सभी जातक कामुक मिले हैंए परन्तु कामशक्ति की प्रबलता इनमें सिद्ध नहीं हो पाई है।
शायद आगे शोध किए जाने पर कुछ और नए निष्कर्ष मिल सके। आवरण को मजबूत बनाते हुए ऐसे लोग समाज का अगुवाए धर्मगुरु अथवा धर्मध्वज के रूप में सम्मान पाते हैं।
इनके शरीर में कमर से पैर तक के अंग विभिन्न रोगों से ग्रसित होते हैं। अधिक पैदल चलने से इन्हें कष्ट होता हैए किन्तु विभिन्न परिस्थितियों के परिवेश में इन्हें अक्सर चलना पड़ ही जाता है।भ्रमण करने का अधिक शौक रखते हुए काम.काज की व्यस्तता इनके भ्रमण.कार्य में अवरोधक होती है।
आर्थिक और साम्पत्तिक मामलों में भाग्यशाली होते। से पीड़ित इनका स्वास्थ्य होता है। ;पुनः एक मत यह है कि इस लग्न मकर लग्न के जातक स्नानादि कर्म और शीतलता के प्रेमी होते भी जलाशय और जलमार्गीय यात्रा से डरते हैं।
गायन वादन. लेखन.अभिनव.अभिनय आदि कला में निपुण होते हैं। इनका शरीर रोगी और मन कामातुर रहता है। कुलीन और सम्भ्रान्त परिवार के सदस्य होकर स्वाभिमान और पारिवारिक मर्यादा का संरक्षण भी करते हैं।
ये लोग साहसी और उद्यमी भी होते हैं। मकर लग्न के व्यक्ति सात्त्विक गुणों का महत्त्व स्वीकार करते हुए शारीरिक श्रमए मानसिक चिन्तन तथा आत्मिक लक्ष्य.साधन में प्रवीण होते हैं।
किसी भी विषय में स्वयं के द्वारा किये गये निर्णय पर विश्वास नहीं होता इसलिए अलसाये मन से ही दूसरों की बात अक्सर मान लेते हैं। ;यहाँ एक मतान्तर वाक्य यह है कि इनका व्यक्तित्व सदैव उद्यमी और क्रियाशील होता है।
विनोदी होते हैंए पर सबसे विनोद नहीं करते। लेखन.भाषण.मनन. .चिन्तन.स्वाध्याय आदि विशेषताओं से भरपूर इनकी प्रतिभा होती हैए जिनका लोहा सभी लोग मानते हैंए बशर्ते कि स्वजनों द्वारा इनकी प्रतिभा को बल और प्रोत्साहन मिलता रहेए अन्यथा शिकारी के जबर्दस्त खूटे में बँधे हुए सिंह की भाँति ये लोग भी कुण्ठाग्रस्त और उदास बन जाते हैं।
वृद्धा स्त्रियों के सम्पर्क द्वारा लाभकारी सम्बन्ध प्रायः प्रौढावस्था में इन्हें प्राप्त होता है। धार्मिक मामलों में इनकी कट्टरता विख्यात होती है। धार्मिकता के जातक जब किसी संस्था में प्रविष्ट होते हैं तो केवल सदस्य मात्र बनकर सन्तुष्ट नहीं होतेए प्रत्युत स्वप्रयत्न द्वारा उच्च स्थिति प्राप्त करके ही दम लेते हैं। यही बात इनके कार्यक्षेत्र में भी लागू होती है।
अपने लाभ के प्रति सतत् जागरूक रहते हैं। ये लोग दूसरों के अहसानों व भेंटों को कम ही स्वीकार करते हैं। इनका दहाना ;मुखद्ध व दांत बड़े होते हैं। शरीर पतला व लम्बा होता है जो मध्यायु के बाद भरने लगता है। ये लोग जो दायित्व लेते हैंए उसे निभाते हैं। भरोसे के लायक होते हैं परन्तु इन पर निराधार संदेह किया जाएध्आरोप लगाया जाए तो ये बहुत अधिक आहत होते हैं। इनका धैर्य बहुत अधिक बढ़ा हुआ होता है। सामान्यतः ये क्रोध नहीं करतेए किन्तु क्रोध आ जाए तो मुश्किल से शांत होता है। कई दिनों तक रुष्ट रहते हैं। ये कुछ सनकी स्वभाव के हो सकते हैं तथा अपनी पीड़ा को भी व्यंग्यात्मक शब्दों में अभिव्यक्त करने वाले होते हैं। इनका बचपन प्रायरू कठिनाइयों में बीतता है। ये शनैः शनैः प्रगति करते हैं किन्तु स्थायी रूप से। जीवनसाथी से ये लोग प्रायः सुख नहीं पाते। फिर भी धैर्यवान होने से निभाते रहते हैं। इस प्रकार परिवार या जीवनसाथी के लिए अथवा कुटुम्ब के लिए अपनी खुशियों का बलिदान कर देने वाले होते हैं। अक्सर ये बचपन से ही जिम्मेदार हो जाते हैं। किन्तु इनमें एकाकीपन का भाव सदैव रहता है। सम्बन्ध भी ये जांच. परख कर बनाते हैं। इनका मित्र वर्ग सीमित होता है। अक्सर कोई बड़ाध्महान कार्य करने की लालसा इनमें पाई जाती है। किन्तु ये भावनात्मक रूप से सदैव असुरक्षा महसूस करते हैं और चेहरे से अक्सर उदास दिखाई देते हैं। जोड़ों का दर्दए गठियाए वायु विकारए पाचन तथा नेत्ररोग इनको सम्भावित होते हैं। चन्द्र व सूर्य यदि शनि या राहू द्वारा अशुभ हों तो वृद्धावस्था में इन्हें हृदय रोग या मनोरोग सम्भव होते हैं।यह समदेहीए स्त्री स्वभावीए हिरन के चेहरे जैसीए धातुसंज्ञकए दक्षिण एवं पश्चिम भूभाग पर नदी या समुद्र के पानी में 15 अंश तक एवं उसके बाद के अंशों में वन प्रदेशों में निवास करनेवालीए सौम्य किंतु चंचलए चरए वृद्धए भूरे वर्ण कीए रजोगुणीए भूतत्वप्रधानए रात्रिबलीए जलचरए वात प्रकृति कीए शूद्र जाति कीए पृष्ठोदय सम लग्न है। सफेदए साफ एवं सुंदर वस्त्रों से विभूषितए मधुर एवं कटु व्यवहार में पारंगतए ठिगनीए भ्रमणशील लग्न है। इस लग्न में सूर्य आने पर रात्रि की अपेक्षा दिन बड़ा रहता है। इस लग्न का निवास स्थान पांचाल देशए स्वामी शनि एवं अंक 8 है। शरीर के घुटने एवं हड्डियों के जोड़ों पर इस लग्न का प्रभाव रहता है। सोनाए चांदी लोहाए जस्ताए कांसाए तांबाए कोयला एवं गन्ना इस लग्न के प्रभाव में आते हैं। मेदिनीय ज्योतिषशास्त्र में अबिसिनीयाए भारतए मैक्सिकोए बुल्गारियाए बंगालए पंजाब इत्यादि प्रांत.देशों का प्रतिनिधित्व मकर लग्न करती है।https://visitecard.com/card/pankajbissa
जीवन की महत्त्वपूर्ण घटनाएं आयु के 15 से 21 या 26 से 32 वर्ष की कालावधि में विवाह योग बनता है। संतान विलंब से होती है। जन्म से 16 वर्ष की आयु तक का समय अच्छा गुजरता है। 33 से 49 वर्ष की कालावधि में सभी प्रकार के लाभए यशए आनंदए सुख वैभव मिलता है। इसी अवधि में मां या पिता की मृत्यु होती है। 50 से 51वें वर्ष में असाध्य रोगों से शारीरिक कष्ट झेलने पड़ते हैं। 52 से 57 वर्ष में एक बार फिर श्रीवृद्धिए सुख प्राप्तिए हर्षोल्लास का समय रहता है। 67वें वर्ष में गंडातर योग बनता है। यह टल जाए तो आयु 85 से 90 वर्षों तक रहती है।
विशेष उपासना
प्रिथ्वि तत्व क होने पर इन्हे महादेव शिवए भैरव काली क्रिश्न भग्वान कि पूजा करे मकर लग्न के व्यक्तियों का जीवन शारीरिकए मानसिक एवं आर्थिक दृष्टि से संघर्षों से भरा रहता है। मकर लग्न का स्वामी शनि है। शनि के प्रतिकूल प्रभाव या अनिष्टता के कारण ही प्रभु राम को वनवास जाना पड़ाए रावण को सीता हरण की कुबुद्धि हुईए वशिष्ठ के सौ पुत्रों का नाश हुआए पांडवों का वनवास एवं कौरवों का नाशए सत्याभिमानी राजा विक्रमादित्य की परेशानियां एवं दुख भोगना भी प्रतिकूल शनि के कारण ही हुआ। शनि की अनिष्टता निवारण के लिए हनुमानजी की उपासना अनिवार्य है। वट वृक्ष का नियमित पूजन एवं हनुमान कवच पढ़ने से भी अनिष्टता दूर होती है। ॐ श्रीवत्सलाय वत्सराजाय नमः। इस मंत्र का 108 बार नित्य जाप करें।
श्रवण नक्षत्र में जन्मे जातक
पुरुषः श्रवण नजमें जमे पुरुष गोल चेहरे एवं गोरे रंग के होते हैं। इनको आयुका अंदाज नहीं किया जा सकता। आयु बड्ने पर भी वे युवा लगते हैं। आंखें आकर्षक मध्यम कद गंभोरए सेवाभावीए सर्वगुणसंपन्नए कुछ हद तक स्वार्थी होते हैं। विवाह से पूर्व प्रेम संबंध जुड़ जाते हैं। वैवाहिक जीवन सुखी रहता है। पुत्र सुख कामी लाभ होता है। अर्थिक स्थिति अच्छी रहती है। बुरी आदतों के शिकार शीघ्र बनते हैं। व्यसनी होते हैं। घर.परिवार के विषय में उदासीन रहते हैं।
स्त्रीः श्रवण नक्षत्र में जन्मी महिलाएं प्रतिभासंपन्नए सद्गुणीए कुल परंपरा को मर्यादा संभालनेवाली होती हैं। ललित कलाओं में प्रवीणए लोकप्रियए पतिव्रता एवं पतिप्रिय रहती हैं। सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में प्रसिद्धि पाती हैं। आचरण शुद्ध एवं सदाचारी रहता है।
मकर लग्न की महिलाएँ मकर लग्न ;लग्नद्ध की महिलाएँ बड़े मुख और छोटी नाक वाली होती हैं। कन्या सन्तति अधिक होती है। नेत्र सुन्दर और आकर्षक होते हैं। स्वभाव से अधिक चंचलए किन्तु भयभीत जल्दी होती हैं। साधारण धन का सुख मिलता है। खर्च के मामले में इन्हें कंजूस कहा जा सकता है। वातजनित रोग अथवा पाचन.संस्थान की गड़बड़ी से परेशान होती हैं। गिरने का भय इन्हें अधिक होता है। गिरने से मृत्यु होती है। इन महिलाओं में अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति पाने की भी शक्ति होती हैए
मकर लग्न के व्यक्ति अधिकांश धैर्यपूर्वक कार्य करनेवाले विभिन्न कला एवं विद्याओं के जानकार अर्थात् पण्डित कहे जाते हैं। जीवन में कष्टों का सामना भी इन्हें अधिक करना पड़ता है। श्रीमान् लोगों से सम्मानितए दयावान् और पुत्रवान् होते हैं। सत्य भाषण में इन्हें अधिक आनन्द आता है।
दान के कार्यों में भी अग्रणी रहते हैंए किन्तु कभी. कभी ये आलसी होने का भी परिचय देते इनका श्यामवर्ण होता है एवं कमर अपेक्षाकृत कुछ अधिक चौड़ा होता है। सुन्दर मुखाकृति होती है। जन्म से ५ वर्ष और ७ वे वर्ष की आयु में जलाशय से भय रहता है।।६।। इसी प्रकार अपनी
आयु के १० वें वर्ष में किसी ऊँचे स्थान अथवा किसी वृक्ष पर से गिरने की संभावना बनती है। १२ वर्ष की आयु में किसी तेज धारदार हथियार अथवा अन्य किसी शस्त्र होता है। २५ वर्ष की आयु में शरीर के विभिन्न अंगों में मकर ;लग्न के जातक अतिकालव्यापिनी कष्ट ;बहुकाल तक पीड़ा देने वाली स्थाई व्याधिद्ध से पीड़ित होकर भौतिक दुःख प्राप्त करते समाप्त होने का संकेत है।।६।। पाद टिप्पणी. मकर लग्न के स्त्री.पुरुषों को जल और जलाशय अधिक प्रिय होता हैए किन्तु अधिक ;सर्दीद्ध और ताप इन्हें बरदाश्त भी नहीं होता। कमरए घुटनाए पैर और नाभिशूल से अधिकांश पीड़ित होकर इन्हें शरीर कष्ट भोगना पड़ता है। उपरोक्त प्रमाण के अनुसार जन्म से ५ए ७ए १०ए १२ए १५ए २०ए २५ और ३५ वाँ वर्ष शरीर और आयु को दुष्प्रभाव.ग्रस्त करनेवाला है। ;उससे अधिक ५२ और ६२ वर्ष की आयु के मध्य शारीरिक यातनायें झेलनी पड़ती हैं।द्ध इनकी अधिकतम आयु ६० वर्ष पहुँचती हैए परन्तु ६६ए ६६ए ७३ए ७६ए ८१ए ८५ और ८७ वर्ष की आयु में उत्तरोत्तर बलवान कष्टप्रद योग बनते हैंए उन अरिष्टकारी वर्षों में जीवन शक्ति की रक्षा होने पर ही ६० वर्ष का दीर्घ जीवन इन्हें प्राप्त हो सकता है। और चोट का भय व २० वें वर्ष में ज्वरपीड़ा से कष्ट पाने का लक्षण पीड़ा से विशेष कष्ट का सुयोग बनता है॥७॥ ३५ वर्ष की आयु में शरीर के बायें अंग में जलने का अर्थात् अग्निभय होता है। ;अथवा लकवा ;फाजिलद्ध जैसे संक्रामक रोग के आक्रमण का भय बनता है।द्ध ऐसे जातकों की पूर्णायु ६० वर्ष कही गई है।।८।। आपका व्यावहारिक सिद्धान्त अत्यन्त कठोर ए स्वाभिमानी तथा लोगों के लिए अरुचिकर होगा । स्वाध्याय एवं विद्यार्जन तथा अपने हाथ की कलाओं ज्मबीदपबंस ॅवता में आप विशेष ख्याति प्राप्त करेंगे । स्त्री के स्वास्थ्य में कभी . कभी ढीलापन तथा शारीरिक स्थूलता से कष्ट होगा । आपका जीवन एक महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्व से भरा हुआ है। सारी सफलताएँ आपके हाथ में हैंए मगर कुछ खास कठोर आदतों की वहन से अपने कार्य में पूरी.पूरी सफलता नहीं पायेंगे। शारीरिक स्वास्थ साधारणतः सुन्दर रहेगा। कार्यभार की अधिकता हमेशा स्वस्थ नहीं रहने देगी और चेन से कभी किसी क्षण बैठ नहीं सकेंगे। आलस्य और ज्यादा मेहनत की शक्ति दोनों पूर्ण रहेगी। आप देखेंगे कि वायु.पित्तए पेटए पैरए आँख सम्बन्धी रोग आपको ज्यादा परेशान करेंगे। आप कुछ विवादास्पद विषयों में ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं। आपका दिमाग हमेशा अभीष्ट. सिद्धि में लगा रहेगाए अभी कुछ सोचेंगे.थोड़ी देर बाद कुछ और सोचेंगे। कारोबार या नौकरी के क्षेत्र में एक जगह स्थाई नहीं रह सकेंगे। काली एवं हल्की नीली वस्तु ज्यादा प्रिय होगी। स्वामी शनिए वैश्य वर्णए पृथ्वी तत्वए चर.संज्ञाए शीतल.स्वभावए वायु.प्रकृतिए पारिवारिक मन.मुटावए स्वी की आज्ञा मानने वालेए विद्वान्ए संगीत.गायन.वादन में अभिरुचिए स्वार्थीए लालचीए गुप्त निवास करनेवालेए माता के प्रियए धनवानए पुत्र वा कन्याएँ ज्यादाए धनीए कंजूसए त्यागीए अधिक बोलने वालेए बहुतेरे मित्रों वालेए सुख और धन प्राप्ति का निरन्तर चिन्तन और सोच.विचार करनेवाले एवं अति.शीघ्र नाराज हो जाने वाले व्यक्ति आप होंगे। इन समयों में अण्डवृद्धि ;भ्लकतवबमसमद्ध अतिसार ;क्पंततीवमंद्ध खून की .दर्पण से वर्ष की उम्र तक विवाह के योग पाये जाते हैं अथवा २६ए २१ . स्थाई सम्पत्ति का उपभोग सुन्दर होगाए पारिवारिक वातावरण शान्त और स्नेह.स्निग्ध रहेगा। खर्च करने की स्थिति कृपणता के साथ प्रबल रहेगी। से ३२ वर्ष तक शादी होगी। सन्तान.सुख के सम्बन्ध में प्रायरू निराशा आपमें स्वाभिमान और विद्वत्ता का गर्व भी बना रहेगा। ५० और ५१ वाँ वर्ष महान् शारीरिक असाध्य रोगों से ग्रसित कराने वाला समय है। ही हाथ लगेगीए यदि सन्तान हो भी जाय तो उनसे किसी प्रकार के सुख. स्वार्थ की आशा नहीं रखनी चाहिए। माता.पिता एवं भाई.बन्धुओं की ओर से प्रायः सैद्धान्तिक एवं व्यावहारिक मतभेद बना रहेगा। आप किसी भी बात पर बड़ी गम्भीरतापूर्वक दार्शनिक पद्धति से काफी सोच.विचार कर उचित निर्णय लेने वाले अध्ययन.प्रिय व्यक्ति हैं। कागजए कपड़ाए लेखनए भाषणए पुस्तक प्रकाशन या विक्रय अथवा न्यायिक निर्णय देनेवाले वकील.जज.मजिस्ट्रेट.कमीश्नर या अन्य सरकारी नौकरियों में प्रायः अच्छे पद पर रहने वाले व्यक्ति आप हैं। कृषिए स्वयं हाथ की कलाकारी या फिल्म क्षेत्र में दिलचस्पी भी रख सकते हैं। आप या तो बहुत धनी होंगे अथवा बिल्कुल गरीबी और सादगी के साथ जीवन व्यतीत करनेवाले होंगे। अपने आप उन्नति की चरम सीमा तक पहुँच कर अथवा बहुत बड़ी दौलत प्राप्त करने का शुभ अवसर नष्ट कर देंगे। आपके लिए शनिवार का दिन सर्वश्रेष्ठ है। दक्षिण दिशा की यात्रायें करते रहें तो लाभ होता रहेगा। जुलाई का महीनाए ६ए१२ए२२ए३० तारीखें और मंगलवार का दिन आपके लिए हमेशा घातक है। मन में सोची हुई कामनायें आप बड़ी चालाकी और धीरज से स्वयं पूरा कर लेते हैं। ज्यादातर दूसरों की मदद लेने.देने की आवश्यकता आपको नहीं पड़ेगी। एकान्तवास एवं धन.संग्रह में ज्यादा दिलचस्पी रक्खेंगे। जन्म से १६ वर्ष तक एवं ३३ से ४६ वर्ष तक का समय अत्यधिक आनन्दए सुख.वैभव.सम्पत्ति प्राप्त करने वाला हैए किन्तु इन्हीं अवस्थाओं में माता.पिता के लिए मृत्युकारक योग भी प्राप्त होंगे। कुछ चिन्तित भी रहना पड़ेगा। १७ से २० वर्ष की उम्र तक धन कमाने का अच्छा अवसर मिलेगा। व्यवासाय.नौकरी में भरसक पूरी सफलता मिलेगी। आपके व्यक्तित्वए प्रतिभा और कार्य.प्रणाली में नया चमक आयेगा। सभी लोग वाह.वाही करेंगे। जमीन.जायदाद की वृद्धि तथा देश.विदेश की यात्रायें भी ज्यादा होंगी। आपकी व्यवहार.कुशलता . दुष्ट लोगों को ज्यादा प्रिय रहेगी। बड़े.बड़े लोगों से प्रेम सम्पर्क बनेगा। कमीए ;।दंमउपंद्ध ज्वर ;थ्मअमतद्ध सिरदर्द ;भ्मंकंबीमद्धए तथा शारीरिक सूजन ;ैूमससपदह जीम इवकलद्ध के रोगों से परेशान हो सकते हैं। संभवतः चीर.फाड़ व्चमतंजपवद की भी स्थिति उत्पन्न हो सकती हैए यदि इससे बच गये तो ५२ से ७७ वर्ष तक आनन्दपूर्वक सुखी समय व्यतीत करते हुए ७८ वर्ष ७ मास २६ दिन की अवस्था में मृत्युपद प्राप्त करेंगे। जहाँ तक हो सके. अधिक से अधिक गरीब ब्राह्मणों की मदद किया करें और श्रीशिवजी की सादर आराधना सदैव करते रहें। मकर लग्न वाली स्त्रियाँ बहुत ज्यादा सौभाग्य.शालिनीए पतिव्रताए व्रत.पूजा.तीर्थयात्रा में अनुरक्तए शत्रुओं पर विजय प्राप्त करनेवालीए बहुत तगड़ा खर्च करने में निपुण और पति.सन्तान से प्रेम सम्बन्ध बनाये रखनेवाली होती हैं। तेजस्विनीए मनमोहिनीए बुद्धिमतीए शिल्प.संगीत.नृत्यादि विविध कलाओं में निपुण तथा अपनी सुन्दरता का प्रर्दशन करनेवाली होती हैं। राजनीति में भी अच्छी रुचि होती है। यदि आपकी मकरलग्न है तो आप अपने कर्तव्य के प्रति वफादार रहेंगे। धार्मिक वृत्तिए प्रेमालु अन्तःकरणए भोजनप्रेमीए यात्रा की प्रबल जिज्ञासाए लिखा.पढ़ी और रचनात्मक कार्यों का विशेष शौकए पति. पत्नी का सुखमय दाम्पत्य जीवनए परन्तु सन्तानसुख से हीन होना अथवा रोगी पुत्र.कन्या सन्तान का सुख होनाए अपने शरीर से कृशितए खासतौर से गलत लोगों के दुराचरण पर चिड़चिड़ा मिजाजए वायुरोग से पीड़ितए चंचल मनए दूर के प्रवास में रुचिए स्वार्थसाधना में अग्रगण्यए वनभ्रमण और पर्वतारोहण का शौकए बुद्धि तेजए विद्याध्ययन कमजोर और शिव.दुर्गा की भक्ति मकरलग्न का लक्षण है। आपकी कर्मशक्ति आपत्तिरूपी समुद्र को पार करनेवाली नौका है। भाग्य भरोसे न रहकर धर्म को ही विशेष महत्त्व देना उचित है। सर्वज्ञ ईश्वर की शरणागति का आपके जीवन में विशेष महत्त्व है। अपने तपोबल और आत्मबल को जगतकल्याण के निमित्त उपयोग करेंगे। खेती.खदान.मजदूरी. सेवावृत्ति सरकारी नौकरीए ग्रन्थ.अध्ययनए ग्रन्थनिर्माणादि का योग आपके भाग्य में है। ऊँची श्रेणी के सार्वजनिक कार्यों में निरन्तर विघ्नए विद्याध्ययन में बाधा और स्वार्थभावना की प्रबलता रहेगी। आपके शरीर में घुटने का रोगए हड्डियों के जोड़ में दर्दए पेशाब सम्बन्धी रोगए गर्मी की अधिकताए घावए फोड़ाए फुन्सी आदि से कभी.कभी पीड़ित रहना पड़ेगा। प्रतिवर्ष जुलाई मासए प्रतिमास ६.१२.२२.३० तारीखेंए मंगलवार का दिनए मेष.सिंह.धनुराशिवाले व्यक्तिए सफेद व लाल रंग के वस्त्रादि पदार्थ कुम्भ लग्न के अन्तर्गत धनिष्ठा नक्षत्रान्त का २ चरणए शतभिषा नावन.भविष्य.दर्पण आपके लिए ठीक नहीं हैं। आपके स्वभाव में वेश्यवृत्ति की प्रधानता १२७ पुण्यात्मा है। व्यावसायिक कार्यों में आप बहुत चतुर होंगे। आपकी लग्न का स्वामी शनि ऐसा ग्रह है जो बहुधा प्रसन्नए सुखीए तेजस्वीए विपरीत प्रभाव देखने में आता है तो फिर लक्षाधीश को दरिद्रनारायण विघ्नविच्छेदहेतुर्जयति बटुकनाथरू सिद्धिदः साधकानाम् ।। पाणिस्तरुणतिमिरनीलव्यालयज्ञोपवीती। क्रतुसमयसपर्या नक्षत्र का ४ चरण और पूर्वाभाद्रपदा नक्षत्रारम्भ का ३ चरण आता है। और शत्रुओं पर विजयी बनाने में समर्थ हैए किन्तु जब शनि का बनने में देर नहीं लगती। सभी जानते हैं कि भगवान् राघवेन्द्र को बनवासए लंकेश रावण को सीताहरण की दुर्बुद्धिए महर्षि वशिष्ठ के १०० पुत्रों का नाशए भगवान् श्रीकृष्ण को स्यमन्तक कलंकए सत्याभिमानी राजा विक्रमादित्य को असह्य दण्डए पाण्डवों का वनवासए कौरवों का नाश केवल इसी शनि ने ही किया है। शनि ऋणी तो केवल हनुमानजी का है। हनुमानजी की उपासना से शनिदेव हमेशा शान्त रहते हैं। शनि के प्रसन्नार्थ वट.वृक्ष का नित्य पूजनए सूर्यास्तकाल में तैल.दीप. दानए शनिरत्न नीलम या सर्वोतम उपाय यह है कि अनाहत चक्र. जागृत पंचमुखी हनुमान श्रीकवच निर्माण करके आप निश्चित रूप से धारण कर लें। अपने जन्मदिन या विवाह तिथि पर एक अंजलि नमक प्रातःकाल लेकर निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुए उत्तराभिमुख किसी नदी.ताबाल.कूप या जलाशय में डाल देने से वर्षपर्यन्त आरोग्यता एवं निर्विघ्नता प्राप्त होती है।।
मकर लग्न वाले लोग समझदार होते हैं, देखा गया है इस लग्न वालों की लंबाई प्रायः सामान्य से कुछ ज्यादा ही होती है, बेहतरीन भोजन के बहुत शौकीन होते हैं, इनका कर्म क्षेत्र जिस विषय में होता है, उस विषय को यह बहुत अच्छी तरह से समझ लेते हैं. ये लोग अपने जीवन का ज्यादातर समय ऑफिस में ही गुजार देते हैं. जीवन में अनेक कठिनाइयां आती हैं लेकिन यह उनका डटकर सामना करते हैं और विजयी भी होते हैं. इस लग्न वालों के साथ न भूलने की खास बात होती है, अगर कोई व्यक्ति इनको हानि पहुंचाता है तो उसको ये कभी भूलते नहीं हैं. यह गलतियां दोबारा कम करते हैं. अपने आपको परिस्थिति के अनुसार बदल लेते हैं. धन के मामले में हमेशा गणित लगाते रहते हैं. अपने धन को योजनाबद्ध तरीके से खर्च करते हैं
कर्मठ और आराम पसंद दोनों ही जबरदस्त होते हैं
इस लग्न वाला व्यक्ति कर्मठ तो होता है लेकिन आराम पसंद भी जबरदस्त होता है. जिस प्रकार मगरमच्छ को भोजन करने के बाद आराम के सिवाय और कुछ नहीं सूझता है, ऐसी ही इस लग्न वाले व्यक्ति की भी प्रवृत्ति होती है. मकर वाला व्यक्ति बहुत उत्साही होता है. यह अपने कर्म से कभी पीछे नहीं हटता है. प्रायः देखा गया है कि इनका सीना और सिर बड़ा होता है. जिन जातकों का सिर बड़ा होता है वह बहुत समझदार होते हैं.
मकर लग्न के जातकों में एक विशेष गुण होता है कि यह जब भी किसी वस्तु को पकड़ लेते हैं तो उसे मगरमच्छ की तरह उदरस्थ कर लेते हैं. कहने का आशय है कि मकर वाला व्यक्ति किसी एक विषय पर महारत हासिल कर लेता है. मकर वालों के लिए शनि का बलवान होना बहुत जरूरी होता है, शनि के बलवान होने से जातक समझदार और नौकरी पसंद होता है. यह अपने मालिक की मन लगाकर ईमानदारी से सेवा करते हैं.
एक बात और कि मकर वाले बच्चे को कभी बीच में साइड (संकाय) नहीं बदली चाहिए.मकर वालों को विषय रुचि के हिसाब से न मिले तो उसकी प्रगति नहीं हो पाती है, क्योंकि बीच में साइड चेंज कराना उसके भविष्य के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ होगा. मकर वालों के जीवन में अनेक कठिनाइयां आती हैं लेकिन यह उनका डटकर सामना करते हैं और विजयी भी होते हैं. इस लग्न वालों के साथ न भूलने की खास बात होती है, अगर कोई व्यक्ति इनको हानि पहुंचाता है तो उसको ये कभी भूलते नहीं हैं. यह गलतियां दोबारा कम करते हैं.
यह प्रत्येक कार्य सावधानी के साथ करते हैं. अच्छे कर्मों को करने में रुचि रखते हैं. वह अपने अधीनस्थ लोगों से कार्य लेने में बहुत निपुण होते हैं. मकर वाले अपने काम को बहुत रस लेकर करते हैं. मकर वाले व्यक्ति भक्ति भी एक सीमा तक करते हैं, क्योंकि वह मूलतः भौतिकवादी होते हैं. इन्हें सांसारिक सुख में ज्यादा आनंद प्राप्त होता है. अपना काम निकालने के लिए वह कुछ भी कर सकते हैं. वह बहुत उच्चाभिलाषी होते हैं, साथ ही अपने काम के दम पर समूह में प्रमुख स्थान पर पहुंचते हैं. मकर वालों का वैवाहिक जीवन सामान्य ही रहता है.
मकर लग्न वाले जातक अपने आपको परिस्थिति के अनुसार बदल लेते हैं. धन के मामले में हमेशा गणित लगाते रहते हैं. अपने धन को योजनाबद्ध तरीके से खर्च करते हैं. मकर वालों के लिए शुक्र ग्रह हमेशा फल देने वाला योगकारी होता है, इस लग्न वालों को हीरा रत्न धारण करना चाहिए. बुध भाग्येश होने के कारण मकर वालों के भाग्य का स्वामी होता है और यदि कुंडली में बुध सही स्थिति में हो तो ऐसे जातक बहुत भाग्यशाली होते हैं. इस लग्न वालों को अपने आत्मबल और कर्मठता को बढ़ाने के लिए नीलम रत्न धारण करना चाहिए. इस लग्न वालों को सूर्य को जल भी देना चाहिए.
मन्त्र. ॐ क्षीरोदकसमुद्भुतं लवणं पापनाशनम् । सर्वरससमुद्भूतं मत्तः शान्तिं प्रयच्छ मे ॥१३॥ आप अपने जीवन.कल्याणार्थ प्रतिदिन २१ बार निम्नोक्त गणेश. बटुक ध्यानमन्त्र का पाठ करें.
ॐ सर्वस्थूलतनुं गजेन्द्रवदनं लम्बोदरं सुन्दरंए प्रस्यन्दमन्दगन्धलुब्धमधुपव्यालोलगण्डस्थलम् । दन्ताघातविदारितारिरुधिरैः सिन्दूरशोभाकरए वन्दे शैलसुतासुतं गणपतिं सिद्धिप्रदं कामदम् ॥१४॥ ॐ वं वटुकाय नमः॥ ॐ करकलितकपालः कुण्डलीदण्ड.पाणिहस्तरुणतिमिर्नीलव्याल्यज्ञोपवीती सस क्रतुसमयसपारर्या विघ्न्विच्छेधेतुर्जायती बटुकनाथरू सिद्धि कुरु कुरु स्वहा
12 ग्रहो का मकर लग्न का सामिप्य
सूर्य अष्टम भाव का स्वामी होता है और यह जातक व्याधिए जीवनए आयुए मॄत्यु का कारणए मानसिक चिंताए समुद्र यात्राए नास्तिक विचार धाराए ससुरालए दुर्भाग्यए दरिद्रताए आलस्यए गुह्य स्थानए जेलयात्राए अस्पतालए चीरफ़ाड आपरेशनए भूत प्रेतए जादू टोनाए जीवन के भीषण दारूण दुख इत्यादि विषयों का प्रतिनिधि होता हैण् जातक की जन्मकुंडली या अपने दशाकाल में सूर्य के बलवान एवं शुभ प्रभाव में रहने से जातक को उपरोक्त विषयों में शुभ फ़ल प्राप्त होते हैं जबकि कमजोर एवम अशुभ प्रभाव में रहने से अशुभ फ़ल प्राप्त होते हैंण् आप्को मनिक्य धारन कर्न चाहिये
चंद्र देवता मकर लग्न में सातवें भाव के स्वामी हैं द्य लग्नेश शनि के साथ भी उनकी अति शत्रुता है द्य अष्टम से अष्टम नियम के अनुसार भी वह कुण्डली के अतिमारक ग्रह बन जाते हैं द्य कुण्डली के किसी भी भाव में पड़ें चंद्र देव अपनी दशा.अन्तर्दशा में अपनी क्षमतानुसार जातक को अशुभ फल ही देते हैं द्य चन्द्रमा का रत्न मोती इस लग्न वाले जातकों नही पहनना चाहिए द्यदान करे
मंगल चतुर्थ और एकादश भाव का स्वामी होता हैण् चतुर्ठेश होने के नाते माताए भूमि भवनए वाहनए चतुष्पदए मित्रए साझेदारीए शांतिए जलए जनताए स्थायी संपतिए दयाए परोपकारए कपटए छलए अंतकरण की स्थितिए जलीय पदार्थो का सेवनए संचित धनए झूंठा आरोपए अफ़वाहए प्रेमए प्रेम संबंधए प्रेम विवाह संबंधी विषयों का प्रतिनिधित्व करता है जबकि एकादशेश होने के नाते लोभए लाभए स्वार्थए गुलामीए दासताए संतान हीनताए कन्या संततिए ताऊए चाचाए भुवाए बडे भाई बहिनए भ्रष्टाचारए रिश्वत खोरीए बेईमानी जैसे विषयों का प्रतिनिधि होता हैण् जातक की जन्मकुंडली या अपने दशाकाल में मंगल के बलवान एवं शुभ प्रभाव में रहने से जातक को उपरोक्त विषयों में शुभ फ़ल प्राप्त होते हैं जबकि कमजोर एवम अशुभ प्रभाव में रहने से अशुभ फ़ल प्राप्त होते हैंण् मंगल का दान करे
शुक्र पंचम और दशम भाव का स्वामी होता हैण् पंचमेश होने के कारण यह जातक के बुद्धिए आत्माए स्मरण शक्तिए विद्या ग्रहण करने की शक्तिए नीतिए आत्मविश्वासए प्रबंध व्यवस्थाए देव भक्तिए देश भक्तिए नौकरी का त्यागए धन मिलने के उपायए अनायस धन प्राप्तिए जुआए लाटरीए सट्टाए जठराग्निए पुत्र संतानए मंत्र द्वारा पूजाए व्रत उपवासए हाथ का यशए कुक्षीए स्वाभिमानए अहंकार इत्यादि विषयों का और दशमेश होने के कारण राज्यए मान प्रतिष्ठाए कर्मए पिताए प्रभुताए व्यापारए अधिकारए हवनए अनुष्ठानए ऐश्वर्य भोगए कीर्तिलाभए नेतॄत्वए विदेश यात्राए पैतॄक संपति इत्यादि विषयों का अधिपति होता हैण् जातक की जन्मकुंडली या अपने दशाकाल में शुक्र के बलवान एवं शुभ प्रभाव में रहने से जातक को उपरोक्त विषयों में शुभ फ़ल प्राप्त होते हैं जबकि कमजोर एवम अशुभ प्रभाव में रहने से अशुभ फ़ल प्राप्त होते हैंण् एक केंद्र और त्रिकोण का स्वामित्व मिलने शुक्र मकर लग्न में अति योगकारी होता हैण्आप्को हीरा धारन कर्ना चाहइये
मकर लग्न की कुंडली के अनुसार बुध षष्ठ भाव का स्वामी होकर यह जातक के रोगए ऋणए शत्रुए अपमानए चिंताए शंकाए पीडाए ननिहालए असत्य भाषणए योगाभ्यासए जमींदारी वणिक वॄतिए साहुकारीए वकालतए व्यसनए ज्ञानए कोई भी अच्छा बुरा व्यसन इत्यादि विषयों का प्रतिनिधि होता हैण् जातक की जन्मकुंडली या अपने दशाकाल में बुध के बलवान एवं शुभ प्रभाव में रहने से जातक को उपरोक्त विषयों में शुभ फ़ल प्राप्त होते हैं जबकि कमजोर एवम अशुभ प्रभाव में रहने से अशुभ फ़ल प्राप्त होते हैंण् पन्ना धारन करे
बृहस्पति द्वादश भाव का स्वामी होकर यह जातक के निद्राए यात्राए हानिए दानए व्ययए दंडए मूर्छाए कुत्ताए मछलीए मोक्षए विदेश यात्राए भोग ऐश्वर्यए लम्पटगिरीए परस्त्री गमनए व्यर्थ भ्रमण इत्यादि विषयों का प्रतिनिधि होता हैण् जातक की जन्मकुंडली या अपने दशाकाल में बृहस्पति के बलवान एवं शुभ प्रभाव में रहने से जातक को उपरोक्त विषयों में शुभ फ़ल प्राप्त होते हैं जबकि कमजोर एवम अशुभ प्रभाव में रहने से अशुभ फ़ल प्राप्त होते हैंण् ग्रुरु का दान करे
शनि प्रथम और द्वितीय भाव का स्वामी होता हैण् यह लग्नेश होने के नाते जातक के रूपए चिन्हए जातिए शरीरए आयुए सुख दुखए विवेकए मष्तिष्कए व्यक्ति का स्वभावए आकॄति और संपूर्ण व्यक्तित्व का प्रतिनिधि एवम द्वितीयेश होने के कारण कुलए आंख ;दाहिनीद्धए नाकए गलाए कानए स्वरए हीरे मोतीए रत्न आभूषणए सौंदर्यए गायनए संभाषणए कुटुंब इत्यादि विषयों का प्रतिनिधि होता हैण् जातक की जन्मकुंडली या अपने दशाकाल में शनि के बलवान एवं शुभ प्रभाव में रहने से जातक को उपरोक्त विषयों में शुभ फ़ल प्राप्त होते हैं जबकि कमजोर एवम अशुभ प्रभाव में रहने से अशुभ फ़ल प्राप्त होते हैंण्
मकर लग्न में राहु नवम भाव का अधिपति होकर जातक के धर्मए पुण्यए भाग्यए गुरूए ब्राह्मणए देवताए तीर्थ यात्राए भक्तिए मानसिक वृत्तिए भाग्योदयए शीलए तपए प्रवासए पिता का सुखए तीर्थयात्राए दानए पीपल इत्यादि विषयों का प्रतिनिधि बनकर अति शुभ हो जाता हैण् जातक की जन्मकुंडली या अपने दशाकाल में राहु के बलवान एवं शुभ प्रभाव में रहने से जातक को उपरोक्त विषयों में विशेष शुभ फ़ल प्राप्त होते हैं जबकि कमजोर एवम अशुभ प्रभाव में रहने से अशुभ फ़ल प्राप्त होते हैंण्गोमेद धरन करे
केतु यहां तॄतीयेश होकर जातक के नौकर चाकरए सहोदरए प्राकर्मए अभक्ष्य पदार्थों का सेवनए क्रोधए भ्रम लेखनए कंप्य़ुटरए अकाऊंट्सए मोबाईलए पुरूषार्थए साहसए शौर्यए खांसीए योग्याभ्यासए दासता इत्यादि विषयों का प्रतिनिधि होता हैण् जातक की जन्मकुंडली या अपने दशाकाल में केतु के बलवान एवं शुभ प्रभाव में रहने से जातक को उपरोक्त विषयों में शुभ फ़ल प्राप्त होते हैं जबकि कमजोर एवम अशुभ प्रभाव में रहने से अशुभ फ़ल प्राप्त होते हैंण्दान करे
युरेनुस 2 घर क स्वमि होकर शुभ फल देगा,
नेप्तुन भी लग्न के लिये शुभ है
प्लुटो अशुभ
मकर लग्न
ॐगंह्रौंभ्रंक्रींऎंह्रींश्रींक्लींहंसौः जगत प्रसूत्यै नमः |
सूर्य : अंक 1 अष्टमेश सूर्य हालांकि मृत्यु नहीं देता है, लेकिन मृत्युतुल्य कष्ट अवश्य देगा। मकर लग्न हो और अष्टम में पाप ग्रह हो, तो किसी हथियार से मृत्यु संभावित है।मानक 1 मुखी रुद्राक्ष सांड को आटा लाया खिलावे शिव मंदिर में चाँदी का नंदी भेट करे l बेल की जड़ी पहने lॐ घृणिः सूर्याय नमः
चंद्रमा : अंक 2 मारकेश चंद्रमा अपकारक और अशुभ है।चंद्र अशुभ रहेगा तो दान करे, मोती न पहने चावल दान करे l शिवलिंग पर दूध का अभिषेक कर कुत्तो को पिलावे
मंगल : अंक 9 सुख और लाभ भाव का स्वामी होकर मंगल यदि अंशों में सशक्त हो, तो सामान्य शुभ हो सकता है किन्तु लग्नेश शनि के विपरीत और अतिशत्रु के कारण अशुभ ही फल देता है मूंगा न पहने अग्नि तत्त्व के लिए माणक पहने । प्रायः मंगल की महादशा प्रतिकूल फलों को देती है।मंगल के दान करे
त्रिकोण खाद्य पदार्थ ∆ का दान करे मूंगा न पहने मंगल का दान करे
बृहस्पति : अंक 3 तृतीयेश और द्वादशेश बृहस्पति की दशा में स्थान परिवर्तन संभव है। बृहस्पति में बृहस्पति का अंतर लगभग संकटकारी होता है।
सर्वदा अशुभ कष्टकारी पुखराज न पहने बृहस्पति के दान दे
शनि : अंक 8 लग्नेश और धनेश का स्वामी है, लेकिन अपनी दशा में मृत्यु नहीं देता है। चंद्रमा यदि वृष या तुलागत हो, तो शनि कारक और शुभ होता है।सर्वश्रेष्ठ गृह सर्वशुभ लाभ कारी
सर्वदा शुभ नीलम धारण करे काल भैरव शिव कृष्ण काली जी को पूजे बिच्छू की जड़ पहने 7 मुखी रुद्राक्ष पहने
बुध : अंक 5 षष्ठेश और नवमेश बुध उन्नतिकारक है। इसकी दशा में भाग्यवृद्धि होती है। नीच या शत्रु राशि में बुध होने से रोग और ऋणों में वृद्धि होती है, लेकिन दशा का उत्तरार्ध शुभ होता है।सर्वदा शुभ करक सर्वदा शुभ धन सिद्धि कारी पन्ना पहने, पेरिडॉट पहने, विदारा जड़ी पहने, 4 मुखी रुद्राक्ष पहने
शुक्र : अंक 6 लग्न में शनि की राशि होने से शुक्र हमेशा शुभ फलदायी होता है। पंचमेश और दशमेश होकर शुक्र केंद्र और त्रिकोण का संयुक्त स्वामी है। इसकी दशा में स्वास्थ्य लाभ के साथ भौतिक दृष्टि से उपयोगी नवीन कार्यों का श्रीगणेश होता है।सर्वदा शुभ लाभ कारी सफ़ेद स्फटिक पुखराज पहने हीरा पहने, सर्पोखे की जड़ी पहने, 6 मुखी रुद्राक्ष पहनेl
राहु: अति शुभ करक होने से मकर लग्न वालो को गोमेद पहना चाहिए
केतु: अशुभ फल देगा इसलिए कुत्ते की सेवा करे दूध ब्रेड खिलावे और कान बिन्धावे
10. मकर लग्न के इष्ट मन्त्र
मकर राशि : इन्हें रक्त हरे गणपति शिवशक्ति हनुमान जी माता काली या माता सिद्धिदात्री की उपासना करनी चाहिए।शिव-गौरी, लक्ष्मी , काली, भैरव,कृष्ण, शरभ, दुर्गा, आदि भगवन अतीव शुभ इष्ट
ॐ वं विघ्नेश्वराय नमः
ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवायै च नमः शिवाय
ॐ ऐंश्रींश्रींयै नमः
ॐ दं वैष्णवे नमः
मकर राशि के जातक इस मंत्र का जप 108 बार रोज करें ।
ॐगंह्रौंभ्रंक्रींऎंह्रींश्रींक्लींहंसौः जगत प्रसूत्यै नमः |
ॐ श्रीं वत्सलायै नम:
इसके अलावा ये गृह आपके अनुकूल रहेंगे तो इनका जाप करते रहे दान न करे इनकी दशा में जप करावे
शनि मंत्र- 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनये नम:'।
शनि का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ शं शनैश्चराय नम:'
शुक्र मंत्र- 'ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:'।
शुक्र का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ शुं शुक्राय नम:'।
बुध मंत्र- 'ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:'।
बुध का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ बुं बुधाय नम:'।
सूर्य तांत्रिक मंत्र- ॐ ह्रां ह्रीं हौं स: सूर्याय नम:।
एकाक्षरी बीज मंत्र- ॐ घृणि: सूर्याय नम:
राहु मन्त्र : ॐ रां राहवे नमः
राहु बीज मंत्र - ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः।
मकर लग्न के लिए शनि, शुक्र, बुध, सूर्य राहु, केतु योग कारक हैं अतः गोमेद, नीलम, हीरा, पन्ना, माणक, सफ़ेद मूंगा सुलेमानी हकीक लाल मूंगा धारण करना चाहिए। 1,2,3,4,6,7 मुखी रुद्राक्ष धारण करें।
Astromechanics-7073520724
https://www.facebook.com/profile.php?id=100089296834132&mibextid=ZbWKwL
===========================
सूर्य की दान देने वाली वस्तुओं में
1 अंक सांड,रोटी,अनार, कमल, गुलाबी रंग, चौरस आकर के आसान सोने की 1ग्राम गिंनी, कमल का फूल, आम, चुकुंदर, गाजर, रानी रंग के वस्त्र, अनार, आम, नारंगी, बन्दर के खिलोने, कुमकुम, बिस्कुट, गुलाल, आटा, तांबा, गुड़, गेहूं, मसूर दाल दान की जा सकती है। पीला बल्ब रौशनी की वस्तुवे टोर्च, टेबल लैंप यह दान प्रत्येक रविवार या सूर्य संक्रांति के दिन किया जा सकता है। सूर्य ग्रहण के दिन भी सूरज के दान करे
======================
गुरु के दान की सामग्री अंक 3
3gm सोने की गिन्नी, पित्तल के,5 मुखी रुद्राक्ष, भारंगी की जड़, 11 बर्तन 3अलग ,8अलग धार्मिक, पुखराज, पुस्तकें, केसर, हल्दी, पीताम्बर, चने की दाल, पीले मूंग, पीले पुष्प, पीला वस्त्र, शक्कर, घोड़ा (लकड़ी या खिलौना घोड़ा), चने की दाल, हल्दी, ताजे फल, पके केले नमक, स्वर्णपत्र, कांस्य, पीतल, कपास, पीला गुड़, पीली गेंद, बेसन की सेवे, बेसन के नमकीन, बेसन के बने व्यंजन, मक्की, अध्यन सामग्री, अध्यन के लिए स्टेशनरी का सामान, किताब, कॉपी कलम, कागज़, ग्रन्थ, भगवा वस्त्र,
======================
चंद्र: सफ़ेद रंग की वस्तुवे, सफ़ेद फूल, कैल्शियम, नदी स्नान, केवड़ा सफ़ेदवस्त्र,दूध,पानी मोती, मूंस्टोंन, चाँदी के आइटम , चाँदी का सिक्का,चाँदीपायल , चाँदीकमरबंध,चाँदीबिछिया,चाँदी पेन,चाँदी गायी, चावल, लौकी जल पेठा, खीर, मावा, खील, बताशे,खरबूजा,ककड़ी, अनानास, रसीलेफल, अंगूर, भांग, शलजम, सिंघाड़े, खस, केवड़ा, ठंडाई, बर्फ,गोला, सीताफल, नारियलपानी,पोदीना, शरबत, ओला,शकरगोला, मिश्री, मक्खन,
मैदा, छाछ, नारियल तेल
======================
दान मंगल के 9 का अंक
ताम्बा, गुलाब जामुन, सिकी हुई, माटी, ईट, चूल्हा, अगरबत्ती,लाल शरबत जूस, लाइटर, गैस लैंप, स्टोव, गुलाब शरबत, सेब, मिठाई, गुलाल,लाल रंग के पुष्प, टमाटर, सिन्दूर, मूंगा, त्रिकोण वस्तुवे, आतिश बाज़ी , अग्नि की वस्तुवे, क़ुमकुम, शहद , मसूर दाल , खजूर , मिठाई सिका हुवा मावा रबड़ी बेसन के लड्डू पकोड़े ,समोसे, तिकोण पुरिया बिंगो, पेटीज़, सैंडविच, मालपुवे लाल मसूर की दाल, लाल कपड़े का दान करना चाहिए। इसके अलावा योग्य ब्राह्मण अथवा क्षत्रिय को गेहूं, गुड़, माचिस,लाइटर, गैस, चूल्हा, ताम्बा, स्वर्ण, दुधारू गौ, मसूर की दाल, रक्त चंदन, रक्त पुष्प, मिष्ठान्न एवं द्रव्य तथा भूमि दान करने से मंगल दोष दूर होता है।
Combo उपाय
मीठे+पीले+चावल गायी को खिलावे
मंगल+गुरु+चन्द्रमा
राहु+केतु मंगल+गुरु+चन्द्रमा
जौ+बाजरी+मसूर+रागी+चनादाल+मक्का+चावल @ 9,18,27,54,81,108,kg
गुड़ की पेटी और मुफ़ली तेल का एक कैन गौशाला में देवे हर अमावस्या को दान करे
गणेश मंदिर : बुद्धवार
लड्डू, पान, दूर्वा चढ़ावे और गणेश अष्टक का पाठ करे मॉस की चतुर्थी का व्रत करे मंत्र स्तोत्र कवच का पाठ करे गणेश यंत्र केतु यन्त्र NE
में लगावे वी दुर्गा मंदिर
/लक्ष्मी/सरस्वती/काली दुर्गा की उपासना, सोम, बुध, शुक्रवार की शाम को करे वैभव लक्ष्मी, कीलक,अर्गला, कवच
सिद्धकुंजिका का पाठ करे, बीसा, नवदुर्गा, दशविद्या, श्री यन्त्र स्थापित करे पूजा में, तीज, शुक्लस्ट्मी, शुक्ल नवमी को व्रत रखे
काली मंदिर : शनिवार चढ़ावे :
मोगरा माला मोगरा धुप , मोगरा इत्र कटार,त्रिशूल, कटार, मालपुआ, इमरती, मूंग दाल कचौड़ी, दही बडा,मोगरे इत्र,धुप, बेसन की चकी,मीश्री गूंजा ,सेव, अनार, पान, सरसो के तेल का दिया लगावे 108 बार मंत्र बोले
ॐ क्रीं क्रीं क्रीं कालिकायै नमः कवच स्तोत्र का पाठ काली यंत्र शनि यंत्र पश्चिम में लगाए
भैरव मंदिर : शनिवार, रविवार, कृष्ण पक्षअस्टमी कालाष्टमी का व्रत, कट्टार, त्रिशूल, शनि या रवि वार को मालपुआ इमरती कचौी बड़े, दाल के बड़े, पापड, उड़द की दाल,चूरमा, शसिगरेट पान चढ़ावे और मंत्र है ॐ भ्रं भैरवाय नमः
भैरव यंत्र sw में लगावे राहु यन्त्र लगावे
कृष्ण: मासिक जन्मास्टमी का व्रत रखे, काले रंग की कृष्ण मूर्ति श्रीनाथ जी, वृन्दावन मथुरा गिरिराज जी द्वारिका, नाथद्वारा में दुग्धाभिषेक करावे ॐ क्लीं कृष्णाय नमः का जाप करे, माखन मिश्री का भोग इलाइची लगावे
शिव मंदिर : काले शिवलिंग की पूजा कच्चादूध जल और शक्कर का घोल शिवलिंग पर चढ़ावे
सोमवार, प्रदोष, मासिक शिवरात्रि, पुष्य नक्षत्र, व्रत , रुद्रास्टाध्यायी, अभिषेक लोटा जल, कच्चा दूध, शक्कर, बिल्वपत्र(बुधवार), पान, गन्ने का रास दीप, पान
मंत्र ॐ ह्रीं नमः शिवायै च
ह्रौं नमः शिवाय ,पूर्व उत्तर में केतु गुरु यन्त्र उत्तर में मृत
इमरती का दान करे