शीघ्र शादी-विवाह के लिए भी उपाय

शीघ्र शादी-विवाह के लिए भी इसमें उपाय दिए गए हैं जो इस प्रकार हैं- :-


ज्योतिष शास्त्र में मनुष्य की हर एक समस्या का समाधान निहित है। जातकों के शीघ्र विवाह के उपाय के तौर पर जातकों को शरीर पर पीले वस्त्र धारण करना चाहिए

       यह टोटका शुक्रवार की रात्रि में करें। जिस लड़की के विवाह मेंरुकावट, बाधाएं आ रही हों वे एक खुला ताला और 100 ग्रामछुहारे सात बार अपने शरीर से उसार कर चौराहे पर रख आएं।पोछे मुड़कर न देखें। यह उपाय करने से विवाह शीघ्र हो जाएगा।सोमवार के दिन प्रातःकाल स्नान से पवित्र होकर, लाल साड़ी,

    तंत्र विज्ञान जहां माता-पिता के हित और कल्याण की बात करताहै, वहां पुत्र-पुत्री के लिए भी कल्याणकारी उपाय प्रस्तुत करता है।आप स्वयं देखें-आज माता-पिता अपने पुत्र-पुत्री के विवाह के लिएकितने आतुर रहते हैं। तंत्र इसका एक सरल ढपाय प्रस्तुत करता है।इस क्रिया को शुक्ल पक्ष के शुक्रवार को ही करना होता है।माता-पिता पहले से ही वस्तुओं को एकन्र कर लेते हैं। वह वस्तुत:निम्न प्रकार हैं-


    1. 70 ग्राम सफेद चावल (यह सेला चावल न हो)।


    2.70 सेमी. सफेद कपड़ा। वस्त्र एकदम सफेद हो।


    3.7 मिश्री की छोटी डलियां।


    4.7 फूल सफेद रंग के (यह आप उसी दिन लाएं)।


    5. 7 छोटी इलायची (हरी न हों)।


    6. 7 सफेद सिक्के।


    7.7 सफेद चंदन की टुकड़ियां (इसे गोपी चंदन भी कहते हैं)।


    8.7 जनेऊ के जोड़े (यह आप छोटे आकार के लें)।


    इन सभी चीजों को सफेद कपड़़े में बांधकर विवाहेच्छु व्यक्ति घरके किसी सुरक्षित स्थान में शुक्रवार प्रात: स्नान करके इष्टदेव का ध्यानकरें, मनौती मानें और चीजों को उठाकर रख दें। ऐसे स्थान पररखें जहां किसी की दृष्टि न पड़े। पूछा-पाछी, टोका-टाकी न हो।90 दिन तक रखी रहने दें। आशा है कि 90 दिन में काम हो जाएगा।अगर कोई कमी रह गई हो तो दोबारा इसी तरह से तंत्र करना चाहिए।उन्हीं चीजों में कुछ को बदलकर अथवा उलट-फेर कर फिर रख देनाचाहिए।

    यह प्रयोग कन्या के विवाह हेतु है। यह प्रयोग इस प्रकार सेहै


    1.70 ग्राम चने की दाल।


    2.70 सेमी. चमकीला पीला वस्त्र।


    3.7 पीले सिक्के।


    4.7 पूजा वाली सुपारी (वह सुपारी जिससे गणेश बनाए जाते हैं)।


    5.7 गुड़ की डलियां (गुड़ पुराना अथवा केमिकलयुक्त न हो)।


    6.7 पीले फूल (ताजे ही हों)।


    7.7 साबुत हल्दी की गांठें (ध्यान रहे कीड़ों की खाई न हों)।


    8. 7 जनेऊ के जोड़े (इन्हें पीला रंग लें) यह भी छोटे आकार वालेलें।


    इन चीजों को पीले रंग के कपड़े में बांधकर कन्या स्वयं रख ले।इन सब वस्तुओं को ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जहां किसी अन्य कीदृष्टि न पड़े। उपरोक्त प्रयोग शुक्ल पक्ष के बृहस्पतिवार को ही करनाहै।


    ब्लाऊज, पेटी कोट (साया), शृंगार की सामग्री तथा पांच लड्डूशिव मंदिर में ले जाकर माता पार्वती के चरणों में चढ़ाएं और मनपसंद वर प्राप्ति हेतु उनसे मन ही मन प्रार्थना करें और प्रणाम करघर वापस आ जाएं।

    ‘सिद्ध गौरी यंत्र’ गले में धारण करें तो विवाह तीन महीने के अंदरअवश्य हो जाता है।

    लड़़की हो या लड़़का 43 दिन लगातार गाय को मीठी रोटी खिलाएंतो विवाह बाधाएं दूर होकर शीघ्र ही परिणय सूत्र में बंध जाता है।विवाह के अभिलाषी जातक या जातिका को तब तक पीला वस्त्रधारण करना चाहिए, जब तक कहीं विवाह तय न हो। एक पीलारेशमी रूमाल भी सदैव पास में रखना चाहिए। इससे शीघ्र विवाहकी सम्भावनाएं बनती हैं।


    यदि किसी के विवाह में विलम्ब हो रहा हो, तो उसे तुलसीकृतरामायण के नीचे लिखित दोहे को 41 दिन तक प्रात:काल स्नानसे पवित्र होकर जरूर पढ़ना चाहिए।


    जब जनक पाई वशिष्ठ, आययु ब्याह साज संवारिके।मांडवी श्रुत-कीरति उरमिला, कुवरि लाई हंकारि के॥शुक्ल पक्ष के शुभ मुहूर्त शुक्रवार को यह प्रयोग आरम्भ करनाचाहिए।


    बृहस्पतिवार को विष्णु-लक्ष्मी जी के मंदिर में जाकर विष्णु जी कीकलगी (जो सेहरे के ऊपर लगी होती है) चढ़ाएं, विवाह शीघ्रसम्पन्न होगा।


    सोलह सोमवार स्नान से पवित्र होकर जल में कच्चा दूध मिलाकर‘ॐ सोमेश्वराय नमः' मंत्र जपते हुए वह जल ‘शिवलिंग' परचढ़ाएं। इससे विवाह शीघ्र हो जाता है।


 विवाह के अभिलाषी जातक या जातिका को तब तक पीला वस्त्र धारणकरना चाहिए, जब तक कहीं विवाह तय न हो। एक पीला रेशमी रूमालभी साथ में सदा रखना चाहिए। इस प्रयोग से विवाह की संभावनाएं शीघबनने लगती हैं।


    समय पर विवाह होने हेतु शुक्ल पक्ष के किसी बृहस्पतिवार को, प्रातःकालउठ कर, सिर से स्नान करें। पीले वस्त्र धारण कर ले। देशी घी में बेसनसेककर बूरा मिलाकर उसके 108 लड्डू बनाएं। पीले रंग की प्लास्टिककी टोकरी में पीले रंग का कपड़ा बिछाकर उस पर लड्डुओं को रख दें।इच्छानुसार कुछ दक्षिणा रख दें। यह समस्त सामग्री शिव मंदिर में जाकर,गणेश, पार्वती और शिवजी का पूजन कर, मनोवांछित वर की प्राप्ति कीकामना कर किसी ब्राह्मण को दान दें। इस प्रयोग से शीघ्र विवाह कीसंभावना बनेगी।

 प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती से अर्गलास्तोत्रम् का पाठ करने से अविवाहित जातकों का शीघ्र विवाह होता है

 वास्तु यंत्र की पूजा करें

 यदि कोई वर किसी कन्या को शादी के लिए देखने जा रहा है तो उनको गुड़ खाकर जाना चाहिए। इससे शीघ्र विवाह के योग बनते हैं

 

 जल्दी शादी के उपाय के तौर पर गणेश जी की आराधना करनी चाहिए और उन्हें लड्डुओं का भोग लगाएँ। ऐसा करने से अविवाहित पुरुषों की शादी में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं जबकि कन्याओं को गणपति महाराज को मालपुए का भोग लगाना चाहिए

विवाह योग्य लोगों को प्रत्येक गुरुवार को नहाने वाले पानी में एकचुटकी हल्दी डालकर स्नान करना चाहिए। केसर का भी उपयोगकरना चाहिए।


    भूलकर भी वृद्धों का असम्मान न करें। वृद्ध व्यक्तियों का यथासामर्थ्य सम्मान एवं मदद करें।


    गुरुवार की शाम को पांच प्रकार की मिठाई के साथ हरी इलायचीका जोड़ा तथा शुद्ध घी के दीपक के साथ जल अर्पित करनाचाहिए। यह लगातार तीन गुरुवार करना चाहिए।


    गुरुवार को केले के वृक्ष के समक्ष गुरु के 108 नामों के उच्चारणके साथ शुद्ध घी का दीपक तथा जल अर्पित करना चाहिए।मंगलवार को प्रात: सूर्योदय काल में एक सूखा नारियल लें। 300 ग्रामबूरा अर्थात पिसी शक्कर तथा 11 रुपए का पंचमेवा मिला लें।नारियल में एक इतना बड़ा छेद करें, जिसमें आपकी उंगली जा सके।उसमें पिसी शक्कर व पंचमेवा मिलाकर भर दें और किसी पीपल केनीचे थोड़ा गड्ढा कर दबा दें। जो शक्कर बचे उसे गड्ढे के ऊपरही डालकर एक पत्थर रख दें जिससे कोई जानवर उसे न निकालपाए। ऐसा आप लगातार 7 मंगलवार को करें। किसी भी कन्या के लिए लगातार सात मंगल नहीं हो सकते परंतु इसमें उनके अस्वस्थदिनों की कोई समस्या नहीं है। इसलिए जब यह समस्या आए तोउपाय रोक दें और शुद्ध होने पर पुनः आरम्भ कर दें। इस प्रयोग मेंयह सावधानी रखनी है कि सोमवार की रात्रि से मंगलवार, प्रयोग होनेतक जल नहीं पीना है और न किसी से भी बात करनी है। सात मंगलहोने के बाद आप स्वयं ही चमत्कार देखेंगे।


    यदि किसी कन्या की पत्रिका में मंगली योग होने के कारणविवाह में बाधा आ रही हो तो वह कन्या मंगल चंडिका स्तोत्र कामंगलवार तथा शनिवार को सुंदरकांड का पाठ करें। इससे भी विवाहबाधा दूर होती है।


    शुक्रवार की रात्रि में आठ सूखे छुआरे जल में उबालकर जल के साथही अपने सोने वाले स्थान पर सिरहाने रखकर सोएं तथा शनिवार कोप्रातः स्तान करने के बाद किसी भी बहते जल में प्रवाहित कर दें। यहप्रयोग भी चमत्कारी है। यह प्रयोग स्त्रीवर्ग के लिए है।


    यह प्रयोग भी सिर्फ कन्या वर्ग के लिए है। इस प्रयोग के लिएकिसी भी शुक्लपक्ष की प्रथम तिथि को प्रातःकाल में स्नान सेनिवृत्त होने के बाद श्रीराम व सीता के संयुक्त चित्र का षोडशोपचारपूजन के पश्चात चित्र के सामने बैठ जाएं। फिर निम्न मंत्र का पाठकरें। कन्या को उनके अस्वस्थ दिनों की छूट होती है, इसलिएजब तक पुनः शुद्ध न हो जाएं तब तक इस प्रयोग को रोक देनाचाहिए। शुद्ध होने पर पुनः आरम्भ करें। अशुद्ध होने से पहले तथाशुद्ध होने के बाद के दिनों को मिलाकर ही दिनों की गिनती होगी।प्रभु की कृपा से 40 दिनों में ही रिश्ता हो जाता है।सुनु सिय सत्य असीस हमारी। पुजहि मनकामना तुम्हारी॥जिस कन्या की शादी सम्बंध के बाद टूट जाती हो अथवा किसीकन्या को नापसंद किया जाता है, उनके लिए यह प्रयोग बहुत हीप्रभावशाली है। यह प्रयोग मुसलमानी है। इस उपाय में कोई नियमनहीं है। जिस कन्या का विवाह होना है, उसी को यह प्रयोग व मंत्र     जाप करना है। इस मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला के अतिरिक्तकिसी भी माला से किया जा सकता है। इस प्रयोग के आरम्भ सेपहले आप किसी भी दिन का चयन करें। उस दिन किसी भी सूतीपरंतु कुचालक आसन पर पश्चिम दिशा की ओर मुख करके बैठजाए। गुलाब की 11 अगरबत्ती तथा कंडे अर्थात उपले पर अग्निप्रज्वलित कर उस पर थोड़ा लोबान डालकर मंत्र जाप आरम्थ करें।एक ही बैठक में इस मंत्र का 1000 बार जाप करना है। यह प्रयोगलगातार 13 दिन तक करना है। दिनों का चयन आप इस प्रकार सेकर सकते हैं कि आपको कोई भी समस्या न आए। यह बहुत हीप्रभावशाली प्रयोग है। मंत्र निम्न है-


    मखनो हाशी जर्द अम्बारी। उस पर बैठी कमाल खां कीसवारी। बैठे चबूतरे पढ़े कुरान। हजार काम दुनिया का करे।एक काम मेरा कर। ना करे तो तीन लाख तैंतीस हजारपैगम्बरों की दुहाई।


    शीघ्र विवाह के लिए सोमवार 1200 ग्राम चने की दाल व सवालीटर कच्चा दूध दान करें। जब तक विवाह न हो, तब तक यहप्रयोग करते रहना है। इस प्रयोग में आपका विवाह योग होनाआवश्यक है।


    अब मैं आपको एक ऐसा प्रयोग बता रहा हूं जो कभी भी व्यर्थ नहींजाता है। जिस कन्या के लिए यह प्रयोग किया जाता है, उसकाविवाह शीघ्र ही हो जाता है परंतु उस कन्या की आयु विवाह योग्यहोनी चाहिए। किसी भी पूर्णिमा को रात्रि में एक कलश में जलभरकर उसमें एक कमल का पुष्प व एक कमलगट्टा डाल दें।फिर पांच सुहागिनों से उस कलश को एक चौकी पर लाल वस्त्रके ऊपर रखवाएं। उस कलश को किसी भी विद्वान व कर्मकांडीब्राह्मण से ‘श्रीसूक्त' से अभिमंत्रित करवाकर सुहागिन स्त्रियों सेही अभिषेक करवाकर 'ॐ गंग गणपत्यै नमः' मंत्र की बीस माला का जाप उसी ब्राह्मण से करवाएं।अगले दिन किसी मंदिर 


    में उस कलश को रखवा दें। इस प्रयोग से कुछ ही समय में उसकन्या का विवाह अवश्य हो जाएगा।


    यह उपाय भी कन्या को करना है। इस उपाय में किसी भीशुक्लपक्ष के प्रथम सोमवार से भगवान शिव के नाम से सात व्रतका संकल्प लेकर व्रत आरम्भ करें। कन्या श्वेतार्क के वृक्ष के पासजाकर ध्ूप-दीप अर्पित कर जल आचमन कर आठ पत्ते तोड़करलाए। सात पत्तों की तो पत्तल बनाए तथा आठवें पत्ते पर कन्याअपना नाम लिखकर भगवान शिव को अर्पित करे। व्रत का भोजनसात पत्तों की पत्तल पर ही करें तथा व्रत पूर्ण होने के बाद श्वेतार्कके पुष्प भगवान आशुतोष को अर्पित करें। विवाह के बाद कन्याअपने पति के साथ जाकर 108 श्वेतार्क के पुष्प की मालाबनाकर भगवान शिव को अवश्य अर्पित करे।


    कन्या जब किसी कन्या के विवाह में जाए और यदि वहां परकन्या को मेहंदी लग रही हो तो अविवाहित कन्या कुछ मेहंदी उसकन्या के हाथ से लगवा लें तो विवाह का मार्ग प्रशस्त होता है।


    कन्या सफेद खरगोश को पाले तथा अपने हाथ से ही उसे भोजनके रूप में कुछ दे। यदि विवाह में बुध रुकावट दे रहा हो तो कन्याखरगोश को हरी घास खिलाए।


    कन्या के विवाह की चर्चा करने उसके घर के लोग जब भीकिसी के यहां जाएं तो कन्या खुले बालों से, लाल वस्त्र धारण करहंसते हुए उन्हें कोई मिष्ठान खिलाकर विदा करे। विवाह की चर्चासफल होगी।


    किसी भी शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार सात केले, सात सौ ग्राम गुड़व एक नारियल लेकर किसी नदी के पास जाएं। कन्या को किसीनदी में पहने वस्त्र सहित जल में डुबकी लगवाकर उसके ऊपर सेएक जटा वाले नारियल को उसार कर उसी नदी में प्रवाहित करदें। इसमें यह अवश्य ध्यान रखें कि जो नारियल आप प्रवाहित कररहे हैं वह कन्या की ओर नहीं आना चाहिए। अर्थात कन्या से दूर     की ओर जाने वाली धारा में करना चाहिए। इसके बाद भीगे वस्त्रोंमें ही थोड़ा सा गुड़ व एक केला चंद्रदेव के नाम पर और इतनीही सामग्री सूर्यदेव के नाम पर नदी के किनारे रखकर प्रणाम करें।थोड़े से गुड़ को प्रसाद के रूप में कन्या खाए तथा बचे पांच केलेव बचा गुड़ किसी गाय को खिला दे। कुछ समय में लाभ प्राप्त होगाअर्थात कन्या के विवाह का मार्ग प्रशस्त होगा।


    अब मैं आपको एक ऐसा प्रयोग बता रहा हूं जो कभी भी विफलनहीं होता है। योग व आयु होने पर 40 दिन में ही प्रभाव दिखाताहै। यदि कोई बहुत ही बड़़ी बंदिश हो तो उपाय करने से 6 माहसे एक वर्ष के मध्य तो अवश्य ही प्रभाव दिखाता है। इस प्रयोगको करने का सबसे उचित समय किसी भी नवरात्रि का गुरुवार है।इसमें लगने वाली सामग्री सात की संख्या में ही होगी। सात पीलीसाबुत हल्दी के रंग से रंगी सुपारी, इसी प्रकार के सात पीले सिक्के,सात केले, सात हल्दी की गांठें, सात पीले कोई भी फूल, सत्तरसेंटीमीटर पीला कपड़ा, सात गुणित सात अंगुल अथवा सात इंचभोजपत्र का टुकड़ा तथा सात ही अंगुल लम्बी अनार की लकड़ीकी कलम। इनमें से कोई वस्तु यदि पीली न मिले तो उसे हल्दी सेरंगा जा सकता है। अब नवरात्रि के गुरुवार को जिस कन्या को यहप्रयोग करना है, वह प्रात: चार बजे उठकर स्नान आदि कर पीलेरंग के स्वच्छ वस्त्र पहने, फिर शुद्ध व स्वच्छ स्थान पर बैठकर अपनेसामने एक पट्टा रखकर उस पट्टे पर पीला वस्त्र बिछा ले। इसके

    बाद भोजपत्र पर निम्न यंत्र को पिसी हल्दी, गंगाजल में घोलकरअनार की लकड़ी से निर्मित कलम से उपरोक्त यंत्र का निर्माण करें।अब लिखे हुए यंत्र को पट्टे पर बिछे पीले वस्त्र पर रख दें। उपरोक्तलिखी सातों वस्तुएं अर्थात सुपारी, जनेऊ, हल्दी की गांठें, गुड़,केले, पीले फूल तथा सिक्के आदि को भी पीले वस्त्र पर रख देंऔर फिर धूप-दीप से इनकी पूजा करें। तत्पश्चात मां गौरा पार्वतीका ध्यान कर अपने विवाह के लिए शीघ्र, अतिशीघ्र तथा गुणवान,धनवान व स्वयं के अनुरूप योग्य वर प्राप्ति हेतु निवेदन करें। फिरयंत्र सहित उस पीले वस्त्र को बांधकर एक पोटली का रूप देकरघर में किसी शुद्ध स्थान पर रख दें। यह ध्यान रखें कि पोटली परकिसी अन्य का हाथ न लगे। मां गौरा पार्वती की कृपा से आपकाविवाह सम्बंध 40 दिन के अंदर ही हो जाएगा। इस प्रयोग की यहभी विशेषता है कि यदि उपाय करते समय आपसे कोई गलती होतो आपको कोई हानि नहीं होती है परंतु गलती होने पर प्रथम बार


    विवाह नहीं होता। इसके लिए आपको अगली नवरात्रि में फिर


    उपाय करना पड़ेगा। पुन: उपाय करने पर तो विफलता की कहीं


    भी सम्भावना नहीं होती है।यदि कन्या के मंगली होने के कारण विवाह में बाधा आती है तो


    कन्या को प्रत्येक मंगलवार ‘श्री मंगल चण्डिका स्तोत्र' का पाठकरना चाहिए


    करना चाहिए तथा लाल मूंगे की माला से निम्न मंत्र का जाप


    ‘ॐ हीं श्री क्लीं सर्वपूज्चे देवि मंगल चण्डिके हूं फट् स्वाहा।


    इसके साथ सुंदरकांड का भी पाठ करना चाहिए।


    जिस कन्या का विवाह आयु होने के बाद भी नहीं हो रहा हो तो


    उसे पांच रत्ती का पुखराज अथवा १ रत्ती का सुनहला नाम काउपरल त्रिधातु (62 प्रतिशत चांदी, 26 प्रतिशत तांबा व 12 प्रतिशत सोना) में जड़वाकर गुरुवार को बाएं हाथ की तर्जनी अंगुली मेंप्रातःकाल सूर्योदय से प्रथम घंटे में ईंशान कोण अर्थात पूर्व व उत्तर     दिशा की ओर मुख करवाकर धारण करवा दें। धारण करने सेपहले दूध, शहद व गंगाजल में अंगूठी को शुद्ध अवश्य करनाचाहिए। धारण करते समय कन्या को मानसिक रूप से 'ॐ बंबृहस्पत्यै नमः' का जाप करना चाहिए। धारण करने के बाद गायको भोग अवश्य देना चाहिए। उपाय को और अधिक प्रभावी बनानेके लिए 7 रत्ती का फिरोजा नाम का रत्न चांदी में जड़वाकरशुक्रवार को कनिष्ठिका में दक्षिण की ओर मुख करवाकर धारणकरवा दें।


    कन्या के विवाह में विलम्ब हो रहा हो तो किसी भी शुक्ल पक्ष केप्रथम गुरुवार से कन्या यह उपाय आरम्भ करे। उस गुरुवार कोकन्या पौले वस्त्र तथा अगले दिन शुक्रवार को सफेद वस्त्र धारणकरे। यह उपाय पांच गुरुवार व इतने ही शुक्रवार करना है। इसमेंयह ध्यान रखना है कि किसी भी वस्त्र को एक बार पहनने केबाद कन्या पुन: न पहने।


    पूर्णिमा को वटवृक्ष की 108 परिक्रमा देने से भी विवाह बाधा दूरहोती है। गुरुवार को वट, पीपल, केले के वृक्ष पर जल अर्पित करनेसे विवाह बाधा दूर होकर शीघ्र विवाह का योग बनता है।


    आयु होने के बाद भी यदि किसी कन्या का विवाह नहीं हो रहाहै तो वह कन्या यदि किसी ऐसी कन्या के विवाह के वस्त्र धारणकर ले जिसका विवाह हो रहा है तो उसके विवाह का योग भीशीघ्र ही निर्मित होता है।


    यदि किसी कन्या का बहुत प्रयास के बाद भी विवाह न हो रहाहो तो वह किसी भी शुक्लपक्ष के प्रथम गुरुवार को अभिमत्रित श्रीगुरु यंत्र को केले के वृक्ष में स्थान देकर सात गुरुवार के मीठे व्रतका संकल्प लेकर व्रत आरम्भ करना चाहिए। श्री गुरु स्तोत्र केसाथ गुरु के 108 नामों का उच्चारण करना चाहिए। साथ हीहरिद्धा माला से गुरु के किसी भी मंत्र का जाप करें। गाय को भोगअवश्य दें। साथ ही संध्याकाल में दीप अर्पित करें। कुछ ही समयमें विवाह की चर्चा चलने का योग निर्मित होगा।

    शीघ्र पति प्राप्ति विधान यज्ञ साधना 

    यदि कन्या के विवाह में अधिक विलम्ब हो रहा हो अथवाअधिक कुयोग के कारण योग्य पति मिलने में विलम्ब हो तथा कन्याविवाह के योग्य हो गई हो, तो उस समय निम्नलिखित विनियोग एवरमंत्र जप एक हजार तथा 108 मंत्रों से हवन, गुम्गुल, दूध, घी तथा शहदमिलाकर करने से शीघ्र विवाह होता है।


    विनियोग-ॐ अस्य अथर्ववेदस्य द्वितीयकाण्डस्य पट्व्िशतसूक्तस्य पतिवेदनः ऋषिः। अग्नि सोमः अर्यमा धाता अग्निषोमीइन्द्रः सूर्यः धनपतिः भगादि देवताः। त्रिष्टुप् भूरिक् अनुष्टुपनिचृत्पुर अष्णिक् छन्दोसि। शीघ्रपति प्राप्तये विनियोगः।मंत्र-

    आ नो अग्ने सुमतिं सं भलो गमेदिमां कुमारीं सहनो भगेन।जुष्टा वरेषु समनेषु वल्गुरोषं पत्या सौभगमस्त्वस्यै॥सोमजुष्टब्रह्मजुष्टमर्यम्णासंभृतंभगम्।धातुरदैवस्यसत्येनकृणोमिपतिवेदनम्॥इयमग्ने नारीपति विदेष्ट सोमो हि राजा सुभगां कृणोति।सुवाना पुत्रान् महिषी भवाति गत्वा पतिं सुभगा विराजतु॥यथा खरो मंधवं चारुरेष प्रियो मृगाणां सुषदा बभूव।

    ऐवा भगस्य जष्टेयमस्तु नारीसप्रियापत्या विराधयन्ती 

भगस्य नावमा रोहपूर्णामनु पदस्वतीम्।तयोप प्रतारय योवरःप्रतिकाम्यः आक्रन्दय धनपते वरमा मनसं कृणु सर्व प्रदक्षिणं कृणु यो वरः प्रतिकाम्यः।।इदं हिरण्यं गुल्गुलव यमौक्षो अथोभगः।एते पतिभ्यस्तवामदुः प्रतिकामाय वेत्तवे आते नयतु सविता नयतु पतिर्यः प्रति काम्यः। त्वमस्य धेहयोषधे॥




एक दूसरा विधान भी है। यदि वर मिलने में कठिनाइयां आ रही हों उस समय कन्या का पिता या अभिभावक उषाकाल में कौओं के बोलने से पूर्व हवन करे। हवन के बाद दशों दिशाओं में बलिदान (पूजन की छवि आदि) बिखेर दे।


    विनियोग-ॐ अस्य सूक्तस्य अथर्वा ऋषिः। अर्यमा देवता।अनुष्टुप छन्दः पतिलाभार्थे जपे हवने विनियोगः।


    मंत्र


    ॐअयमायात्यर्यमापुरस्ताद्विषितस्तु य:


अस्याइच्छन्नग्रुवैपतिमुतजायामजानये॥अश्रमदियमर्यमन्नन्यासांसमनंयती।अङ्गोउन्वर्यमन्नसाअन्याःसमनमायति


धाता दाधार पृथिवी धाता द्यामुत सूर्यम्।


धातास्या अग्रुवै पतिं दधातु प्रतिकाम्यम्।


    वस्तुतः मंत्र-साहित्य एक अम्बुधिके समान है। उपर्युक्त विवेचन में इसका संक्षिष्त निदर्शन संभव हुआ है। वस्तुतः मंत्र ऐसा सूक्ष्म परंतु महत्त्वपूर्ण त्त्व है जो स्थूल को अनुशासित करता है। यह विराट में लघु के लय का अनुष्ठान है। पिण्ड में ब्रह्मांड दर्शन की सतर्क सामर्थ्य है इस बहुमूल्य  इस बहुमूल्य परंपरित रिक्थ से आस्था का अवलम्ब लेकर आशातीत परिणाम अर्जित किया जा सकता है।

        विवाह में बाधा निवारक दस मंत्र


    जिन लड़के या लड़कियों की पर्याप्त आयु हो जाने के बावजूद किसीकारणवश शादी तो क्या सगाई तक नहीं हो रही हो, वे इनमें से किसी भीएक मंत्र का, एक माला जप अवश्य करें। दिन में भी मन-ही-मन मंत्र कोदोहराते रहें, किसी भी मंत्र को जितना अधिक जपा जाता है, वह उतनाही शीघ्र अपना प्रभाव दिखाता है।

ॐ० लग्नाय नमो नमः

ॐ० मुहुर्ताय नमो नमः

ॐ० कुंडली नमो नमः

ॐ० शुभ लग्न मुहूर्त नमो नमः

ॐ० शुभाय नमः

ॐ लग्नाय नमः

ॐं० कुंडली नमः

ॐं० ग्रह नमो नमः

ॐ० मुहूर्ताय नमः

ॐ शुभ नमो नमः


शीघ्र सगाई हेतु तावीज    

जिन लड़कियों को लड़के वाले देखने के बाद भी आगे बात नहीं बढ़ातेया कहीं बात चलते-चलते बीच में ही टूट जाती है, तब समझ लें कि विवाहमें कोई अदृश्य बाधा आ रही है। लड़के-लड़कियों के रिश्तों में आने वालीबाधाओं का निवारण करने के लिए नीचे प्रदर्शित तीनों यंत्र समान रूपसे शक्तिशाली हैं, अतः आप किसी भी एक यंत्र का तावीज बनाकर गलेमें धारण करें। अन्य यंत्रों के समान ही इन्हें भी भोजपत्र पर अष्टगंध सेअथवा कागज पर केसर अथवा स्याही से लिखकर तैयार करें। पूजा औरप्राण-प्रतिष्ठा करने के बाद तीन दिन तक पूजा के आले में रखें और चौथेदिन तांबे अथवा चांदी के तावीज में रखकर गले में बांध लें।

    शीघ्र और अच्छे विवाह हेतु तावीज

    उपरोक्त यंत्र तो शीघ्र और अच्छा रिश्ता करने हेतु धारण किए जातेहैं। सगाई हो जाने के बाद उपरोक्त तावीज को किसी पवित्र नदी अथवासरोवर में विसर्जित कर दें। नीचे प्रदर्शित दो यंत्रों में से किसी एक का
    यदि किसी कारण से लड़की, लड़कों का विवाह सम्पन्न नहीं हो रहाहो अथवा सगाई या विवाह में बाधाएं आ रही हों अथवा किसी-न-किसीप्रकार की अड़चन आ रही हो तो होली की रात्रि को लड़की या लड़कास्वयं अथवा उसके माता-पिता इस प्रयोग को सम्पन्न करें। इससे विवाहबाधा का योग दूर हो जाता है और जल्दी ही जातक का विवाह सम्पन्नहोता है।

    होली के दिन ही एक मिट्टी का बर्तन अथवा हंडिया या कुल्हड़ लेकरआ जाएं और रात्रि को उसमें एक बिल्ली नाल, सात लाल मिर्च तथा सातनमक की डलियां रख दें और इसका मुंह लाल कपड़े से बांध दें। उसकेबाद इस कुल्हड़ पर सात कुंकुम की बिंदियां लगाएं तथा नीचे लिखे हुएमंत्र का जप एक घंटे तक करें। इसमें किसी माला, आसन या पूजन आदिकी आवश्यकता नहीं होती।

    मंत्र-ॐं गौरी आवे शिवजी ब्यावै अमुक को विवाह तुरंत सिद्ध करे,देर न करे, जो देर होय तो शिव त्रिशूल पड़े।

    यह मंत्र जप एक घंटे तक करना चाहिए, उसके बाद इस मिट्टी केपात्र को या कुल्हड़ को चुपचाप सड़क पर ले जाकर रख देना चाहिए औररखकर साधक या व्यक्ति वापस घर लौटकर आ जाएं। ऐसा करने परविवाह से संबंधित जो बाधाएं होती हैं या अड़चनें आ रही हैं, वे दूर हो     जाती हैं तथा जल्दी ही विवाह की संभावनाएं बन जाती हैं।

    श्रेष्ठ पति मिलने की साधना

    सामग्री-स्फटिक माला, लघु नारियल, मौली (कलावा), जलपात्र,घी का दीपक।

    माला-रुद्राक्ष की माला।

    समयदिनयारात का कोईभीसमय।

    आसन-सफेद रंग या सूती आसन।

    दिशा-पूर्व दिशा।

    जप संख्या-सवा लाख।

    अवधि-जो भी संभव हो।

    मंत्र-ॐ गौरीपति महादेवाय मन इच्छित वर शीघ्रातिशीघ्र प्रप्त्यर्थगौये नमः।

    किसी पात्र में स्फटिक से निर्मित शिवलिंग स्थापित कर सोमवार सेपूजा प्रारंभ करें और पास में लघु नारियल पर कलावा चढ़ाकर उसे गौरीमानकर स्फटिक से निर्मित शिवलिंग के बाईं तरफ स्थापित कर दें, फिरउसकी विधि-विधान के साथ पूजा करें। सामने शुद्ध घृत का दीपक जलालें, फिर मंत्र जप प्रारंभ कर दें।

    इस प्रकार नित्य मंत्र जप करें और जब मंत्र पूरा हो जाए तो ग्यारहकन्याओं को भोजन करा दें तथा उस शिवलिंग तथा गौरी को पूजा-स्थानमें स्थापित कर दें। शीघ्र ही उसे श्रेष्ठ पति की प्राप्ति हो जाती है और भविष्यमें भी वह अखंड सौभाग्यवती बनी रहती है।

    कन्या के शीघ्र विवाह हेतु यंत्र

    यदि किन्हीं अद्ृश्य कारणों से किसी कन्या के विवाह का संयोग नहींबन पा रहा हो अथवा जब भी विवाह की बात चलाई जाए, तो कोई-न-कोईबाधा सामने आ जाती हो। आर्थिक संकट के कारण या अशुभ ग्रहों केकारण भी विवाह-संबंध में विष्न आ जाता हो तो यह यंत्र वैवाहिकसमस्याओं के समाधान के लिए बहुत ही प्रभावशाली सिद्ध होता है।
    ॐं० शंकराय सकल जन्मार्जित पापविध्वंसनाय पुरुषार्थ।चतुष्टयलाभाय च पतिं में देहि देहि कुरु कुरु स्वाहा।।

    यंत्र रचना संक्रांति के दिन, दोपहर में, अनार की कलम और हल्दीकी स्याही से भोजपत्र पर करें।

    यंत्र-लेखन तथा पूजन के समय बिना सिला हुआ वस्त्र पहननाआवश्यक है।

    यंत्र लिखने के बाद प्रारंभ के दिन से सातवें रविवार तक प्रतिदिन प्रायः7 बजे से यंत्र की पूजा आरंभ करके 1008 बार अर्थात 10 माला प्रतिदिनउपर्युक्त मंत्र का जेप करना चाहिए। पूजा-स्थान शुद्ध व एकांत में होनाचाहिए।

    जप पूर्ण हो जाने पर यंत्र को चांदी के तावीज में बंद करके कन्या कीबाई भुजा में बांध दें। शीघ्र ही वह वैवाहिक संबंध में बंध जाएगी।
    वर वशीकरण यंत्र व तावीज

    प्रेमिका द्वारा प्रेमी से शादी करने के लिए तो इस तावीज का प्रयोग कियाही जाता है, विवाह योग्य कन्या को अच्छा घर-वर दिलाने में भी बहुतअधिक सहायता प्रदान करता है। किसी विशिष्ट मंत्र का जप अथवा कौईविशेष पूजा इस यंत्र को लिखते अथवा तावीज बनाते समय करना भीअनिवार्य नहीं है।

    उपर्युक्त यंत्र को हल्दी के रस से भोजपत्र पर अनार की कलम सेलिखकर और चांदी के तावीज में बंद करके कुंवारी कन्या के हाथ में बांधदें। इस तावीज का प्रभाव यह होगा कि कन्या का संबंध तय करने अथवाकन्या को देखने जो भी व्यक्ति आएगा, कन्या उसे पसंद आएगी तथासंबंध तय हो जाएगा।

    कामना पूर्ति यंत्र

    इस यंत्र को गंगा या यमुना के किनारे बैठकर सरसों के तेल से लिखकरपहनने से मन की इच्छा पूर्ण होगी।

शीघ्र विवाह के लिए पूजा स्थल पर नवग्रह यंत्र स्थापित कर पूजा करें


    विवाह में विछन दूर करने हेतु उपाय

    कन्या के विवाह के लिए किसी भी कारण से योग्य वर नहीं मिलपा रहा है तो कन्या किसी भी गुरुवार के दिन प्रातःकालनहा-धोकर बेसन के लड्डू स्वयं बनाए। उनकी गिनती 109 होनीचाहिए। फिर प्लास्टिक की पीले रंग की टोकरी में, पीले रंग काकपड़ा बिछाकर उन लड्डुओं को उसमें रख दे तथा अपनीश्रद्धानुसार कुछ दक्षिणा रख दे। पास के किसी शिव मंदिर में जाकरविवाह हेतु प्रार्थना कर घर आ जाए।

    अनेक बार प्रयास करने पर भी कन्या का विवाह नहीं हो रहा होतो चंद्र ग्रहणकाल में एक थाली में रक्त चंदन से 'ॐ' बनाकरउस पर पीले फूल और बिल्वपत्र बिछा दें। अब शिव पंचाक्षरी यंत्रस्थापित कर लें और धूप-दीप, गुलाब की अगरबत्ती जला लें।आसन ऊनी हो तो अति उत्तम है। अब आसन पर बैठकरएकाग्रतापूर्वक माता पार्वती और शिव से शीघ्र विवाह और उपयुक्तवर की प्रार्थना करें। कार्य शीघ्र बनेगा। कार्य बनने में अधिक सेअधिक चार माह लग सकते हैं।


    निम्न मंत्र को नियमित रूप से जपने से मनोवांछित वर या वधू कीप्राप्ति होती है। इस मंत्र के लिए किसी भी प्रकार के नियम या हवनकी आवश्यकता नहीं होती। मंत्र इस प्रकार है-


    मखनो हाथी जर्द अम्बारी उस पर बैठी कमालखां की सबारी,कमालखां मुगल पठान, बैठे चबूतरे पढे कुरान, हजार काम दुनियाका करे, एक काम मेरा कर, न करे तो तीन लाख तैंतीस हजार पैगंबरोकी दुहाई।

    कन्या के विवाह में गुरु ग्रह की निर्बलता के कारण विलम्ब होताहै। अगर लड़की की कुंडली में गुरु मकर राशि का हो अथवा शनिके साथ हो या पापग्रहों की दृष्टि हो तो गुरु निर्बल कहे जाएंगे।ऐसी स्थिति में बड़े कष्टों के साथ समय बीतने पर विवाह संपन्नहोता है। अत: लड़की के पिता को चाहिए कि लड़की को 5 रत्तीका पुखराज या 9 रत्ती का सुनहरा त्रिधातु (चांदी 62 प्रतिशत, तांबा26 प्रतिशत और सोना 12 प्रतिशत) में जड़वाकर बाएं हाथ कीप्रथम उंगली में गुरुवार को उत्तर की ओर मुख करके पहना दें।साथ ही 7 रत्ती का फिरोजा चांदी में मढवाकर शुक्रवार को लड़कीके बाएं हाथ की कनिष्ठिका उंगली में दक्षिण की तरफ मुख करकेपहना दें। विवाह बिना कष्ट के संपन्न हो जाएगा। अगर कन्या कासप्तमेश निर्बल हो तो उस ग्रह की अंगूठी कन्या को तुरंत पहनादेनी चाहिए।

    अगर बिना कुंडली मिलान के विवाह हो रहा हो, वह प्रेम विवाहहो, या कोई अन्य प्रकार की विवशता हो, तब आप निम्न उपायकरें-


    कन्या को फेरों से पहले पीले रंग का डोरा पांच गांठें (पांच सौगंधमानकर) लगाकर हाथ में बांध दें। यह डोरा चूड़़े (कंगना) को स्पर्शकरता रहे। विदा के समय गंगाजल में थोड़़ी शुद्ध हल्दी डालकर कन्याके सिर से उतारकर उसके आगे फेंक दें और पीला डोरा खोल दें। यहडोरा माता पार्वती के चरणों में रख दें। जीवन सदैव सुखी रहेगा।अगर कन्या बड़ी हो गई हो और उसका विवाह नहीं हो रहा होअथवा लड़के का विवाह नहीं हो पा रहा हो तो इस प्रयोग सेसम्बंध निश्चित हो जाता है। यह प्रयोग इच्छा के अनुरूप विवाहकार्य संपन्न होने की दृष्टि से भी स्वयं में महत्त्वपूर्ण है। विवाह केपश्चात प्रेम बना रहे, पति अनुकूल रहे, प्रेमिका चाहे कि उसके प्रेमीका मन नहीं बदले तो यह प्रयोग महत्त्वपूर्ण है। वास्तव में ही वेदुर्भाग्यशाली कहे जा सकते हैं, जिनके सामने ऐसी सुविधाउपलब्ध हो और वह लाभ न उठा सकें या अपनी इच्छा केअनुरूप कार्य संपन्न न कर सकें। इसे दुर्भाग्य के अलावा और क्याकहा जा सकता है? यह प्रयोग वैवाहिक जीवन को पूर्ण रूप सेमधुर बनाए रखने में विशेष रूप से सहायक है।शुक्ल पक्ष के गुरुवार के दिन आप हल्दी की तीन पुड़िया बना लें।इनमें से एक प्रवाहित कर दें, दूसरी माता दुर्गा अथवा पार्वती मां केचरणों में रख दें, तीसरी सदैव अपने पास रखें जब तक कार्य पूर्ण नहो।

    अनेक बार बिना किसी कारण पुरुषों के विवाह में विध्न हो हीजाता है या देखा गया है। इसके लिए शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवारसे शुरू करें। पांच रुपए की देशी घी की जलेबी, 21 मंगलवारको, हनुमान मंदिर में हनुमान जी के सम्मुख चढ़ाएं और प्रार्थना करें।विवाह के योग शीघ्र बनने लगेंगे।

 प्रत्येक गुरुवार को पानी में एक चुटकी हल्दी डालकर स्नान करें। इससे विवाह के शीघ्र होने के योग बनते हैं

     पीपल पर लगातार 43 दिन लड़की या लड़का जल चढ़ाए तो शादी


    की सभी रुकावटें स्वयं दूर हो जाएंगी। रविवार को अथवा मासिकधर्म आने पर पीपल को जल नहीं चढ़ाना है।


    यह उपाय पुष्य नक्षत्र में शुरू करें प्रातःकाल तथा सायं तुलसी के


    पास शुद्ध घी का दीपक जलाकर एक-एक माला नित्य जर्पे। प्रायः


    41 दिनों में सफलता प्राप्त होगी।


    कन्या के विवाह में देरी होने पर राम-सीता के चित्र केसामने तुलसी की माला से रामचरितमानस की एक चौपाई कानियमित जाप शीघ्र विवाह के लिए उचित होगा। लाभ प्राप्तहोगा।


    सुनसिय सत्य असीस हमारी।


    पूजहिं मन कामना तुम्हारी।


    यदि कन्या की सगाई तय होने के बाद रिश्ता टूट जाता है तोमाता-पिता को यह प्रयास करना चाहिए कि जिस कक्ष में बैठकरसगाई अथवा विवाह की वार्ता की जाए, उसमें अपने जूते-चप्पलउतारकर प्रवेश करें।


    यदि कन्या को कोई भी विवाह प्रस्ताव न आ रहे हों तो माता-पिताको चाहिए कि कन्या को बृहस्पतिवार को चमकीले पीले वस्त्रतथा शुक्रवार को सफेद वस्त्र पहनाएं। ये वस्त्र नए हों तो फल शीघ्रही प्राप्त होगा। यह प्रयोग चार सप्ताह तक करना है।विवाह में विलम्ब होने पर उसको दूर करने के लिए पिता कोचाहिए कि वार्तालाप के समय कन्या को नए वस्त्र अवश्य पहनाएं।जब कन्या के माता-पिता विवाह वार्ता के लिए जाएं तो उस कन्याके बाल खोले रखें तथा उनके लौटकर आ जाने के समय तककन्या बालों को खुला रखे। कन्या को चाहिए कि जब उसकेमाता-पिता विवाह वार्ता के लिए जाने लगें तो उन्हें मिष्ठान खिलाकरविदा करे। इसके साथ ही माता पार्वती से अच्छी सूचना आने कीप्रार्थना करे।

    विवाह योग्य लड़के, लड़कियों को जब भी किसी विवाह उत्सव मेंभाग लेने का अवसर मिले तो लड़के या लड़़की को लगाई जाने वालीमेहंदी में से कुछ मेहंदी लेकर अपने हाथों पर लगानी चाहिए।


    शीघ्र विवाह के लिए कन्या को 16 सोमवार के व्रत करने चाहिएतथा शिव मंदिर में जाकर जलाभिषेक कर मां पार्वती का शृंगारकरना चाहिए। शिव-पार्वती के मध्य गठजोड़ बांधे तथा शीघ्रविवाह के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। विवाह के प्रस्ताव आने शुरूहो जाएंगे।


    वर की मनोकामना पूर्ति हेतु कन्या को निम्न मंत्र से शिव-गौरीपूजनकरएकमालाकाज करना चाहिए-


    ॐ नमः मनोभिलाशितं वरं देहि ॐ गौरा पार्वती देव्यै नमः।अगर विवाह में बाधा आ रही हो तो गुरुवार के दिन विष्णु-लक्ष्मीके सेहरे के ऊपर जो कलगी लगी रहती है उसको चढ़ाएं। इसकेसाथ ही बेसन के 5 लड्डू चढ़ाएं और भगवान से शीघ्र विवाह केलिए प्रार्थना करें। सफलता अवश्य मिलेगी।


    लड़का या लड़की शुक्रवार के दिन भगवान शंकर पर जलाभिषेककरें तथा शिवलिंग पर ॐ नमो शिवाय बोलते हुए 108 पुष्पचढ़ाएं, शीघ्र विवाह की प्रार्थना करें। साथ ही शंकर भगवान पर31 बेलपत्र चढ़ाएं। ऐसा कम से कम 7 शुक्रवार अवश्य करें। शीघ्रविवाह होगा।

    शीघ्र विवाह हेतु टोटके

    विवाह योग्य लड़के या लड़की को पीला वस्त्र धारण करनाचाहिए, जब तक कि उनका रिश्ता न हो जाए। एक पीला रेशमीरुमाल भी साथ में सदैव रखना चाहिए। इस प्रयोग से विवाह कीसम्भावनाएं शीघ्र बनने लगेंगी।

    कुंआरे व्यक्ति के शयनकक्ष में सोने की स्थिति पर भी अवश्यध्यान देना चाहिए। शयनकक्ष के   दरवाजे के सामने सिर या पांव नहीं होना चाहिए तथा अच्छे वर या कन्या को आकर्षित करने के लिएसिर के सामने सुंदर क्रिस्टल बॉल और आकर्षक झूमर अवश्यलगा होना चाहिए। इससे विवाह शीघ्र होने की सम्भावनाएं, बननेलगती हैं।

    पुराना खुला ताला, सात बार पूरे शरीर को घड़ी की उलटी दिशामें घुमाकर अंधेरे में चुपचाप चौराहे पर रख आएं। पीछे मुड़कर नदेखें। यह उपाय शुक्ल पक्ष के बृहस्पतिवार को करें। कन्या काविवाह शीघ्र होगा।

    यदि विवाह के अच्छे प्रस्ताव नहीं आ रहे हों तो वर के कक्ष में पूर्वदिशा में पानी का फव्वारा रखें। वार्ता के लिए घर आने वालेमेहमानों को ड्राइंगरूम में इस प्रकार बैठाना चाहिए कि उनका मुंहघर के भीतर की ओर रहे, उन्हें द्वार दिखाई न दे।

    विवाह योग्य कन्या को सोमवार मंदिर में जाकर मां पार्वती काश्ृंगार करना चाहिए तथा शिव-पार्वती के मध्य कलावे से गठजोड़बांधना चाहिए। ऐसा सोलह सोमवार तक करना चाहिए। शुक्ल पक्षके प्रथम सोमवार से यह टोटका प्रारंभ करें। कोई रोक-टोक नहींहो यह अवश्य ध्यान रखें।

    समय पर विवाह होने के लिए शुक्ल पक्ष के किसी गुरुवार कोप्रातःकाल उठकर सिर से स्नान करें। पीले वस्त्र पहन लें। देशी घीमें बेसन सेंककर बूरा मिलाकर उसके 108 लड्डू बनाएं। पीले रंगकी प्लास्टिक की टोकरी में पीले रंग का कपड़ा बिछाकर उस परउन लड्डुओं को रख दें। इच्छानुसार कुछ दक्षिणा रख दें। यह सारासामान शिव मंदिर में जाकर गणेश-पार्वती और शिवजी का पूजनकर मनोवांछित वर की प्राप्ति की कामना कर किसी ब्राह्मण कोदान दें। इस प्रयोग से शीघ्र विवाह की सम्भावना बढ़ेगी।

    गुरुवार को विष्णु-लक्ष्मी जी के मंदिर में जाकर विष्णु जी कोकलगी चढ़ाएं (जो सेहरे के ऊपर लगी होती है) साथ में बेसनके 5 लड्डू चढ़ाएं। शादी शीघ्र हो जाएगी।

    अगर घर में लड़के या लड़की का विवाह नहीं हो रहा तो घर केमुखिया को सफेद खरगोश पालकर उसे विवाह योग्य लड़के यालड़़की से खाना दिलवाना चाहिए।

    विवाह योग्य युवक युवती को जब भी किसी अन्य व्यक्ति केविवाह में जाने का अवसर मिले तो वर या कन्या को लगाई जानेवाली मेंहदी में से कुछ मेंहदी लेकर अपने हाथों पर लगानी चाहिए।

 भोजन में केसर का सेवन करना चाहिए ऐसा करने से जल्दी शादी होने की संभावनाएँ होती हैं

 अपने से बड़े लोगों का हमेशा सम्मान करें। ऐसा करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है

 ओपल धारण करें

 गुरुवार को केले के वृ्क्ष के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएँ और गुरु (बृहस्पति) के 108 नामों का उच्चारण करें और ऐसा करने से जातकों का विवाह शीघ्र होता है

 

 जल में बड़ी इलायची डालकर उसे उबालें। फिर इस जल को स्नान के पानी में मिलाएँ। इसके बाद इस पानी से स्नान करें। इस उपाय से शुक्र के दोषों का निवारण होता है

 

 गौरी शंकर रुद्राक्ष धारण करें

 गुरुवार के दिन आटे के दो पेडों पर थोडी-सी हल्दी लगाकर, थोड़ा गुड़ और चने की दाल गाय को खिलाएं। इससे विवाह का योग शीघ्र बनता है

 विवाह योग्य कन्या गुरुवार के दिन तकिए के नीचे हल्दी की गांठ को पीले वस्त्र में लपेट कर रखें। ऐसा करने से शीघ्र हाथ पीले होने के शुभ योग बनते हैं

 विवाह योग्य लड़कों को विभिन्न रंगों से स्त्रियों का चित्र एवं कन्याओं को लाल रंग से पुरुषों की तस्वीर सफ़ेद कागज़ पर रोज़ाना तीन महीने तक बनानी चाहिए

 यदि लड़के के विवाह में देरी हो रही हो तो मिट्टी के कुल्हड़ में मशरूम भर कर किसी भी मंदिर में दान करें। इससे लड़के का विवाह शीघ्र होगा

 शुक्रवार के दिन सूर्यास्त से पूर्व विवाह शीघ्र होने की ईश्वर से प्रार्थना करें और फिर रसोई घर में बैठकर भोजन ग्रहण करें

 विवाह के योग्य जातक अपने पलंग (बेड) के नीचे लोहे की वस्तुएँ एवं कबाड़ आदि न रखें

 पूर्णिमा के दिन वट वृक्ष की 108 बार परिक्रमा करने से अविवाहित जातकों की विवाह की इच्छा पूरी होती है। यह शीघ्र विवाह का अच्छा उपाय माना जाता है।

 यदि अविवाहित कन्या किसी अन्य कन्या की शादी में जाए और वहाँ दुल्हन के हाथों से मेहंदी लगवा ले तो इससे उसकी शीघ्र शादी की संभावनाएँ बनती है

 

 कहते हैं कि शिव-पार्वती जी का पूजन करने से विवाह की मनोकामना पूरी हो जाती है इसलिए अविवाहित जातकों को शिवलिंग का कच्चे दूध से अभिषेक करना चाहिए एवं बेल पत्र, अक्षत, कुमकुम आदि से विधिवत पूजा करनी चाहिए

 

 सोमवार के दिन चने की दाल एवं कच्चे दूध का दान करें और यह प्रयोग तब तक करते रहना चाहिए जब तक कि जातक का विवाह न हो जाए


शीघ्र विवाह हेतु मंत्र

                 

 पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणिम्। तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम।।

                 

  यह मंत्र दुर्गा सप्तशती से उद्घृत है। शादी की कामना करने वाले पुरुष जातकों को स्नान के बाद 11 बार इस मंत्र का जाप करना चाहिए। इससे उनकी कामना पूर्ण होगी। यह शीघ्र विवाह का अचूक उपाय है।

                 

  “ॐ गं गणपतै नमः”

                 

  इस मंत्र को जपने से पहले बुधवार के दिन पीतल से बनी गणेश जी की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान करवाकर पंचोपचार विधि से पूजन करें। उसके बाद 21 बार इस मंत्र का जाप करें और जाप के बाद पंचामृत को पीपल के पेड़ में चढ़ाएँ। यह जल्दी शादी होने का अहम उपाय है।

                 

  “ॐ सृष्टिकर्ता मम विवाह कुरु कुरु स्वाहा”

                 

  मंगलवार के दिन लक्ष्मी-नारायण की प्रतिमा को घर में स्थापित करें उसके बाद पंचोपचार विधि से पूजन के उपरांत इस मंत्र का 21 बार जाप करें।

                 

  “ॐ श्रीं वर प्रदाय श्री नामः”

                 

  सोमवार को शिव मंदिर में पाँच नारियल चढ़ाएँ और इस मंत्र की 5 बार माला फेरें। ध्यान रखें, यह मंत्र विशेष रूप से कन्याओं के लिए है।

                 

  “क्लीं कृष्णाय गोविंदाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा”

                 

  उक्त मंत्र का 108 बार जाप करने से अविवाहित कन्या अथवा वर का शीघ्र विवाह संपन्न हो जाता है। इस मंत्र का जाप करने से भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

                 

  “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रों स: गुरूवे नम:”

                 

  प्रत्येक गुरुवार के दिन इस मंत्र को उच्चारित करते हुए पाँच बार माला फेरें। इससे अविवाहित जातकों का विवाह शीघ्र होता है।


बृहस्पतिवार व्रत: शीघ्र विवाह के उपाय के तौर पर बृहस्पतिवार (गुरुवार) के दिन व्रत रखने से बृहस्पति देव प्रसन्न होते हैं। विशेषकर स्त्रियों के लिए यह व्रत शुभ फलदायी माना गया है। इस व्रत को धारण करने से मन की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। इस व्रत को विवाह योग्य वर अथवा कन्या अपने शीघ्र विवाह के लिए रखते हैं।

 

 सोलह सोमवार व्रत:सोमवार का व्रत भगवान शिव को समर्पित है और यह जल्दी शादी होने का अचूक उपाय माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि सोलह सोमवार का व्रत पूरे विधि विधान के साथ करने से सारी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। अतः विवाह योग्य जातक इस व्रत का पालन कर अपनी विवाह की इच्छा पूर्ण कर सकते हैं।

 

 वैभव लक्ष्मी व्रत:शीघ्र विवाह के उपाय के तहत वैभव लक्ष्मी व्रत सोमवार को रखा जाता है। इस व्रत को स्त्री-पुरुष दोनों ही धारण कर सकते हैं। इससे घर में माँ लक्ष्मी जी का वास होता है और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। अविवाहित कन्या अथवा वर इस व्रत का पालन कर माँ लक्ष्मी से अपने लिए जीवनसाथी का वरदान मांग सकते हैं।

 

 कभी-कभी खूबसूरती, एज्यूकेशन और अच्छी जॉब के बाद भी कई लोग शादी में परेशानी का सामना करते हैं. यहां तक कि उनकी कुंडली में भी इस तरह का कोई दोष नहीं होता, बावजूद इसके शादी में अड़चन आ जाती है.


इतने लड़के या लड़कियां देखकर भी बात नहीं बनती. बात बनती भी है तो किसी छोटी-मोटी बात पर सगाई टूट जाती है.


यदि आप सभी उपाय करके थक चुके हैं और चाहते हैं कि इस साल आपकी शादी पक्की हो जाए तो आपको बताते हैं इसके अचूक टोटके.

    जिन लोगों को शीघ्र विवाह की कामना हों, उन्हें हर गुरुवार गाय को दो आटे के पेड़े पर थोड़ी सी हल्दी लगाकर खिलाना चाहिए. साथ ही, थोड़ा सा गुड़ और चने की दाल गाय को खिलाएं.

    अगर लड़की की शादी में कोई रूकावट आ रही है तो 5 नारियल ले लें और शिवलिंग के आगे रख कर ऊँ श्रीं वर प्रदाय श्री नामः, मंत्र का पांच माला जाप करें. जाप के बाद पांचों नारियल शिवलिंग पर चढ़ा दें.


 रोज शिव-पार्वती की एक साथ पूजा करने से भी विवाह से संबंधित इच्छाएं पूरी हो सकती हैं. शिवलिंग पर कच्चा दूध, बिल्व पत्र, अक्षत, कुमकुम आदि चढ़ाकर पूजा करनी चाहिए.


यदि विवाह के पूर्व लड़का-लड़की मिलना चाहें तो वह इस प्रकार बैठे कि उनका मुख दक्षिण दिशा की ओर न हो।


7. कन्या सफेद खरगोश को पाले तथा अपने हाथ से उसे भोजन के रूप में कुछ दे|


8. कन्या के विवाह की चर्चा करने उसके घर के लोग जब भी किसी के यहाँ जायें तो कन्या खुले बालों से,लाल वस्त्र धारण कर हँसते हुए उन्हें कोई मिष्ठान खिला कर विदा करे| विवाह की चर्चा सफल होगी|


9. पूर्णिमा को वट वृक्ष की 108 परिक्रमा देने से भी विवाह बाधा दूर होती है|


10. गुरूवार को वट वृक्ष, पीपल, केले के वृक्ष पर जल अर्पित करने से विवाह बाधा दूर होती है|


गौरी आवे ,शिव जो ब्यावे.अमुक का विवाह तुरंत सिद्ध करेँ,

देर ना करेँ, जो देर होए , तो शिव को त्रिशूल पड़े,

गुरु गोरखनाथ की दुहाई फिरै ।।


अमुक के स्थान पर जिस लड़की का विवाह न हो रहा हो उसका नाम लिख सकते है !


11. जिन व्यक्तियों को शीघ्र विवाह की कामना हों उन्हें गुरुवार को गाय को दो आटे के पेडे पर थोड़ा हल्दी लगाकर खिलाना चाहिए. तथा इसके साथ ही थोड़ा सा गुड व चने की पीली दाल का भोग गाय को लगाना शुभ होता है|


12. किसी भी शुभ दिवस पर मिटटी का एक नया कुल्हड़ लाएँ तथा उसमे एक लाल वस्त्र,सात काली मिर्च एवं सात ही नमक की साबुत कंकड़ी रख दें, हांडी का मुख लाल कपडे से बंद कर दें एवँ कुल्हड़ के बाहर कुमकुम की सात बिंदियाँ लगा दे फिर उसे सामने रख कर निम्न मंत्र की ५ माला जप करेँ । मन्त्र जप के पश्चात हांडी को चौराहे पर रखवा देँ| यह बहुत ही असरदायक प्रयोग है । ।


13. यदि कन्या की शादी में कोई रूकावट आ रही हो तो पूजा वाले 5 नारियल लें ! भगवान शिव की मूर्ती या फोटो के आगे रख कर “ऊं श्रीं वर प्रदाय श्री नामः” मंत्र का पांच माला जाप करें फिर वो पांचों नारियल शिव जी के मंदिर में चढा दें ! विवाह की बाधायें अपने आप दूर होती जांयगी !


14. प्रत्येक सोमवार को कन्या सुबह नहा-धोकर शिवलिंग पर “ऊं सोमेश्वराय नमः” का जाप करते हुए दूध मिले जल को चढाये और वहीं मंदिर में बैठ कर रूद्राक्ष की माला से इसी मंत्र का एक माला जप करे ! विवाह की सम्भावना शीघ्र बनती नज़र आ


शिव-पार्वती का पूजन करने स भी विवाह की मनोकामना पूर्ण हो जाती हैं। इसके लिए प्रतिदिन शिवलिंग पर कच्चा दूध, बिल्व पत्र, अक्षत, कुमकुम आदि चढ़ाकर विधिवत पूजन करें।


16. विवाह योग्य लोगों को शीघ्र विवाह के लिये प्रत्येक गुरुवार को नहाने वाले पानी में एक चुटकी हल्दी डालकर स्नान करना चाहिए. भोजन में केसर का सेवन करने से विवाह शीघ्र होने की संभावनाएं बनती है|


17. विवाह योग्य व्यक्ति को सदैव शरीर पर कोई भी एक पीला वस्त्र धारण करके रखना चाहिए|


18. गुरुवार की शाम को पांच प्रकार की मिठाई, हरी ईलायची का जोडा तथा शुद्ध घी के दीपक के साथ जल अर्पित करना चाहिये | यह प्रयोग लगातार तीन गुरुवार को करना चाहिए,इससे शीघ्र विवाह के योग निस्संदेह बनते है ।


19. गुरुवार को केले के वृ्क्ष पर जल अर्पित करके शुद्ध घी का दीपक जलाकर गुरु के 108 नामों का उच्चारण करने से जल्दी ही जीवनसाथी की तलाश पूर्ण हो जाती है ।


गुरुवार को बृहस्पति देव को प्रसन्न करने के लिए पीले रंग की वस्तुएं चढ़ानी चाहिए। पीले रंग की वस्तुएं जैसे हल्दी, पीला फल, पीले रंग का वस्त्र, पीले फूल, केला, चने की दाल आदि इसी तरह की वस्तुएं गुरु ग्रह को चढ़ानी चाहिए। साथ ही शीघ्र विवाह की इच्छा रखने वाले युवाओं को गुरुवार के दिन व्रत रखना चाहिए।


इस व्रत में खाने में पीले रंग का खाना ही खाएं, जैसे चने की दाल, पीले फल, केले खाने चाहिए। इस दिन व्रत करने वाले को पीले रंग के वस्त्र ही पहनने चाहिए।


ॐ ग्रां ग्रीं ग्रों स: गुरूवे नम: ॥ मंत्र का पांच माला प्रति गुरुवार जप करें।


22. अगर किसी का विवाह कुण्डली के मांगलिक योग के कारण नहीं हो पा रहा है, तो ऎसे व्यक्ति को मंगल वार के दिन चण्डिका स्तोत्र का पाठ तथा शनिवार के दिन सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए. इससे भी विवाह के मार्ग की बाधाओं में कमी होती है.


23. शिव-पार्वती का पूजन करने से भी विवाह की मनोकामना पूर्ण हो जाती हैं। इसके लिए प्रतिदिन शिवलिंग पर कच्चा दूध, बिल्व पत्र, अक्षत, कुमकुम आदि चढ़ाकर विधिवत पूजन करें।


जिन व्यक्तियों की विवाह की आयु हो चुकी है. परन्तु विवाह संपन्न होने में बाधा आ रही है उन व्यक्तियों को यह उपाय करना चाहिए. इस उपाय में शुक्रवार की रात्रि में आठ छुआरे जल में उबाल कर जल के साथ ही अपने सोने वाले स्थान पर सिरहाने रख कर सोयें तथा शनिवार को प्रात: स्नान करने के बाद किसी भी बहते जल में इन्हें प्रवाहित कर दें|


25. यदि आपको प्रेम विवाह में अडचने आ रही हैं तो :—- शुक्ल पक्ष के गुरूवार से शुरू करके विष्णु और लक्ष्मी मां की मूर्ती या फोटो के आगे “ऊं लक्ष्मी नारायणाय नमः” मंत्र का रोज़ तीन माला जाप स्फटिक माला पर करें ! इसे शुक्ल पक्ष के गुरूवार से ही शुरू करें ! तीन महीने तक हर गुरूवार को मंदिर में प्रशाद चढांए और विवाह की सफलता के लिए प्रार्थना करें !


26. शुक्ल पक्ष के पहले गुरुवार को सात केले, सात गौ ग्राम गुड़ और एक नारियल लेकर किसी नदी या सरोवर पर जाएं। अब कन्या को वस्त्र सहित नदी के जल में स्नान कराकर उसके ऊपर से जटा वाला नारियल ऊसारकर नदी में प्रवाहित कर दें। इसके बाद थोड़ा गुड़ व एक केला चंद्रदेव के नाम पर व इतनी ही सामग्री सूर्यदेव के नाम पर नदी के किनारे रखकर उन्हें प्रणाम कर लें। थोड़े से गुड़ को प्रसाद के रूप में कन्या स्वयं खाएं और शेष सामग्री को गाय को खिला दें। इस टोटके से कन्या का विवाह शीघ्र ही हो जाएगा।


27. शादी वाले दिन से एक दिन पहले एक ईंट के ऊपर कोयले से “बाधायें” लिखकर ईंट को उल्टा करके किसी सुरक्षित स्थान पर रख दीजिये,और शादी के बाद उस ईंट को उठाकर किसी पानी वाले स्थान पर डाल कर ऊपर से कुछ खाने का सामान डाल दीजिये, विवाह के समय और विवाह के बाद में वर/वधु के दाम्पत्य जीवन में बाधायें नहीं आयेंगी, यह काम वर – वधु या उनके घर का कोई भी सदस्य कर सकता है लेकिन यह काम बिल्कुल चुपचाप करना चाहिए ।


 बृहस्पति, शुक्र, बुद्ध और सोम इन वारों में विवाह करने से कन्या सौभाग्यवती होती है। विवाह में चतुर्दशी, नवमी इन तिथियों को त्याग देना चाहिए।


29. विवाह के पश्चात एक वर्ष तक पिण्डदान,मृक्ति का स्नान, तिलतर्पण, तीर्थयात्रा,मुण्डन,प्रेतानुगमन आदि नहीं करना चाहिये.


30. यदि किसी कन्या का विवाह नहीं हो पा रहा है तो वह कन्या आज विवाह की कामना से भगवान श्रीगणेश को मालपुए का भोग लगाए तो शीघ्र ही उसका विवाह हो जाता है।


31. यदि किसी युवक के विवाह में परेशानियां आ रही हैं तो वह भगवान श्रीगणेश को पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं तो उसका विवाह भी जल्दी हो जाता है।

शीघ्र विवाह कार्य के लिए कुछ श्रेष्ठ मंत्र

    अपने इष्टदेव के चित्र के अभिमुख शुद्ध मन और तन से इस पृथ्वीतत्त्व प्रधान मंत्र का जप करने से अभिलाषानुकूल उत्कृष्ट पति कीप्राप्ति होती है-

    ॐ हीं हीं सूर्याय सहस्त्रकिरणाय।मनोवांछित देहि देहि स्वाहा॥

    पति-सुख प्राप्ति हेतु वर्षों से आचार्यानुमोदित यह मंत्र अपने शीघ्रप्रभाव के लिए अमोघ मंत्र है। इस मंत्र का 48 दिनों तक नित्य 108आवृत्ति में जप करने से फल प्राकट्य होता है। उत्तर दिशा अथवाउत्तर-पूर्व दिशाभिमुख काष्ठासन पर आसीन होकर इसे सम्पन्न करनाचाहिए। मंत्रानुष्ठान के समय कर्ता को पीतवर्ण अथवा लोहितवर्ण केवस्त्र धारण करने चाहिए और ललाट पर तिलक लगाना चाहिए। जपकी सम्पूर्ण अवधि में पीतल अथवा चांदी के पात्र में शुद्ध घी आपूरितदीपक प्रज्वलित करना चाहिए। अर्पित किए जाने वाले पुष्प पीत वर्णके हों, किशमिश का नैवेद्य निवेदित करें। न्यूनतम 108 बार मंत्रोच्चारणके अननंतर अंजलि में जल भरकर एक बार मंत्रोच्चारण करके जलको भूमि पर छोड़ देना चाहिए। मंत्र इस प्रकार है-सिन्धूरपत्रं

    रतिकामदेहं।

    दिव्याम्बर सिन्धुसमीहिता म्॥

    सान्ध्यारुणं धनुः पंकजपुष्पबाणम्।पंचायुधं भुवनमोहनमोक्षणार्थम्॥

    लैं मन्मथाया महाविष्णुस्वरूपाय।महाविष्णुपत्राय।महापुरुषाय।पतिसुखं में शीघ्रं देहि देहि॥

    उपरोक्त इन मंत्रों के अतिरिक्त अनेकानेक मंत्र ऐसे हैंजो श्रद्धानुसार 5, 11 अथवा 21 की संख्या में जप करने परअपना अपेक्षित फल प्रदान करते हैं। उनमें से कुछ अतिविशिष्ट मंत्रनीचे दिए जा रहे हैं

    स देवी नित्यं परितप्यमानः त्वामेवसीतेत्यभिभाषमाणः।दृढ़व्रतो राजसूतो महात्मा, तवेव लाभाय कृत प्रयलः॥महा महा इन्नद्रोय आजसायर्ज्जन्योबृष्टि टमारंडडव।उपयामगृहीतोसिमहेन्नद्रायत्वेषतेयानिर्म्महेन्द्रायत्वा॥अषांगम्भन्त्सीदमात्वासूर्योमिताप्सीन्नभामिवेश्वानरः।अच्छिन्नपन्नाः प्रजा अनुवीक्षस्वानुत्वादिव्यावृष्टिः सचताम्॥इसके अतिरिक्त रुक्मणि सूक्त, कनकधारा स्तोत्र, सौंदर्य लहरी (मंत्रसंख्या 1 से 21 तक), श्रीसूक्त, मनु सूक्त, यजुर्वेद का पायामानानसूक्तभी सम्यक् संख्या में आस्था सहित जप करने पर मनोवाछित फल प्राप्तहोते हैं।

विवाह से 4 दिन पूर्व साबुत हल्दी की 6 गांठ, पीतल के 3 सिक्के,थोड़ा सा केसर, गुड़ तथा चने की दाल को पीले वस्त्र में बांधकरकन्या अपनी ससुराल की दिशा की ओर ठछाल दे। इस टोटके द्वाराकन्या को सदैव पति और ससुराल के अन्य सदस्यों से बहुत प्यारमिलेगा।


    पति से मनमुटाव दूर करने तथा सफल दाम्पत्य जीवन बिताने केलिए 7 गोमती चक्र, 7 लघु नारियल, 7 मोती शंख और पीलावस्त्र ले आएं। फिर सभी सामग्री को पति के ऊपर से उतारकरजलती हुई होलिका में फेंक दें। तत्पश्चात पीछे देखे बिना घर आजाएं। पति से मनमुटाव दूर होकर दांपत्य सुख प्राप्त होगा।


    यदि पत्नी पति से या पति पत्नी से नाराज हो तो खुमी का पुष्प शहदमें मिलाकर खिलाने (एक माशा के बराबर) से पुन: मेल-मिलापहो जाता है।


    फेरे से पहले पीले रंग के डोरे में 5 गांठें (पांच सौगंध मानकर)लगाकर कन्या के हाथ में बांध दें। यह डोरा चूड़़े (कंगना) कोस्पर्श करता रहे। विदाई के समय गंगाजल में थोड़ी शुद्ध हल्दीडालकर कन्या के सिर से 7 बार उतारकर उसके आगे फेंक देंऔर पीला डोरा खोलकर देवी पार्वती के चरणों में रखवा दें। कन्याका दाम्पत्य जीवन सदा सुखी रहेगा।

सुयोग्य पति प्राप्त करने के लिए कन्याएं प्रतिदिन निम्नवत मंत्र काजप एक माला करें तथा प्रात:काल स्नानोपरांत पार्वती देवी कीप्रतिमा के सम्मुख दीप जलाकर लाल पुष्प चढ़ाएं। मंत्र इस प्रकारहै

    गौरी शंकरार्धांगी यथा त्वं शंकरप्रिया तथा मां कुरू कल्याणिकांतकांता सुदुर्लभम्




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