दीपावली पर किये जाने वाले उपाय

दीपावली पर किये जाने वाले उपाय

अब मैं आपको कुछ ऐसे उपाय बता रहा हूँ जो केवल दीपावली पर किये जाते
हैं। यह ऐसे उपाय है जिन्हें करके आप अपनी आर्थिक विपन्नता दूर कर सकते हैं:-

यदि आप इस दीपावली पर यह चाहते हैं कि माँ लक्ष्मी का आपके घर में स्थाई वास हो तो आप दीपावली पूजन के समय एक चाँदी की डिब्बी के साथ थोड़ी सी नागकेशर व शहद अथवा कचनार के पत्तों का भी पूजन करें। अगले दिन चाँदी की डिब्बी में नागकेशर के साथ शहद अथवा कचनार के पत्तों में से जिनका भी आपने पूजन किया है, उनको डिब्बी में रखकर लाल वस्त्र में बांध कर अपने धन रखने के स्थान पर
रख दें।

* आप दीपावली की रात्रि में पूजन के समय 21 हकीक के पत्थरों का भी पूजन
करें। पूजन के बाद उन्हें अपने निवास में कहीं भी गाढ़ दें तो आपके निवास में वर्ष भर
माँ लक्ष्मी का स्थाई वास रहेगा।

* आप धनतेरस पर श्री कुबेर यंत्र का विधि-विधान से पूजन करें। दीपावली
की रात्रि में उस यंत्र पर 108 कमलगट्टे के बीज माँ लक्ष्मी का एकाक्षरी मंत्र "श्रीं"का
जाप करते हुए अर्पित करें। अगले दिन यंत्र के साथ उन बीजों को भी किसी लाल
कपड़े में बांधकर अपने धन रखने के स्थान पर रखें और वर्ष भर आर्थिक रूप से निश्चिंत
रहें।
* आप दीपावली के पूजन के समय माँ लक्ष्मी की पुरानी तस्वीर पर अपनी पत्नी
के हाथ से पूर्ण सुहाग सामग्री अर्पित करें। अगले दिन आपकी पत्नी स्नान कर पूजा
करके उस सामग्री को माँ लक्ष्मी का प्रसाद मानकर उठाकर स्वयं प्रयोग कर माँ लक्ष्मी
से अपने घर में स्थाई वास करने का निवेदन करे तो वर्ष भर माँ लक्ष्मी की कृपा से
आर्थिक सम्पन्नता रहती है।
* यदि आप वर्ष भर माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद चाहते हैं तो दीपावली की रात्रि में
ठीक 12 बजे 11 घी के दीपक जलाकर अपने निवास के मध्य भाग में आकर एक चक्र बनाकर उसके मध्य रोली से "श्रीं" लिखें व 108 बार ही उच्चारण कर माँ लक्ष्मी से अपने घर में वर्षभर वास करने का निवेदन करें ।

* दीपावली के पूजन के समय लाल कपड़े में काली हल्दी के साथ सिन्दूर व
कुछ सिक्के अथवा रुपयों का भी पूजन करें। अगले दिन उनको उसी लाल कपड़े में
बांधकर अपने धन रखने के स्थान पर रखें। फिर इस प्रयोग का चमत्कार देखें।
* दीपावली के सांध्यकाल में किसी भी देवी के मन्दिर में दो अलग-अलग स्थान
पर सवा सौ ग्राम रोली, इतना ही सिन्दूर, सवा मीटर लाल कपड़ा, नारियल व 21 रुपये
रखकर पूजन करें। पूजन के बाद एक स्थान की सामग्री मन्दिर में ही अर्पित करें और
दूसरे स्थान की सामग्री स्वयं लाकर लाल कपड़े में बांध कर अपने धन रखने के स्थान
पर रखें। 21 दिन लगातार धूप-दीप अर्पित करें फिर माँ लक्ष्मी की कृपा
देखें।

* दीपावली के पूजन के समय आप 501 ग्राम सूखे छुआरों का भी पूजन करें।
अगले दिन उन छुआरों को लाल कपड़े में बांधकर अपने धन रखने के स्थान पर रखें।
51 दिन तक लगातार एक रुपया किसी भी मन्दिर में माँ लक्ष्मी के नाम से अर्पित करें
और माँ लक्ष्मी से अपनी सम्पन्नता का निवेदन करें।
* दीपावली के पूजन से पहले आप किसी भी गरीब सुहागिन स्त्री को अपनी
पत्नी के द्वारा सुहाग सामग्री अवश्य दिलवायें। इससे माँ लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। सामग्री में कोई सा भी इत्र अवश्य होना चाहिये।

* आप दीपावली का पूजन करने से पहले एक नारियल व खीर लेकर अपने पूरे
घर में घूमें। इसमें यह ध्यान रखें कि आप जिस स्थान से एक बार निकल चुके हैं, तो
दुबारा वहां न जायें अर्थात् ऊपर से चलना आरम्भ कर नीचे होते हुए मुख्य द्वार पर
आकर नारियल को फोड़ दें व खीर वहीं छोड़ दें।

* यदि आपके घर में कोई बार-बार बीमार होता है अथवा नजर लगती है तो आप दीपावली पूजन से पहले एक आटे का चार मुख का दीपक बना कर उसमें कपूर
भर दें। 125 ग्राम फिटकरी के साथ पीड़ित व्यक्ति के पूरे शरीर से 21 बार उल्टा उसारा
करें और किसी चौराहे पर आकर उस दीपक के कपूर को जला दें तथा फिटकरी
दक्षिण दिशा की ओर फेंक दें और वापिस आ जायें। इसमें यह ध्यान रखें कि आप
मुड़कर वापिस न देखें। घर में प्रवेश से पहले हाथ-पैर अवश्य धोयें। अगले दिन किसी
मेहतर को 11 रुपये अवश्य दान करें। यदि संभव हो तो पीड़ित का कोई पुराना वस्त्र
भी दान कर दें।

* जैसा मैंने आपको यंत्र के अध्याय में बताया कि जिस स्थान पर विधि-विधान
से यंत्रराज "श्री श्रीयंत्र" की स्थापना होती है तथा यंत्र के सामने माँ लक्ष्मी का कोई भी
पाठ नियमित अथवा प्रत्येक शुक्रवार को होता है तो उस घर में माँ लक्ष्मी को अवश्य ही स्थाई वास करना पड़ता है। यह बात माँ लक्ष्मी ने स्वयं अपने श्रीमुख से कही है। इस
यंत्र के बारे में आपको कुछ ऐसे प्रयोग बताने का प्रयास कर रहा हूँ जिनको यदि आपने
पूर्ण विश्वास से किया तो आप पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष अवश्य ही माँ का अधिक
आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। आप दीपावली की रात्रि में "श्री श्रीयंत्र" को पंच तत्व से स्नान
करवा कर किसी लाल कपड़े पर स्थान देकर माँ का कोई भी पाठ करें अथवा श्रीसूक्त 
व बीज युक्त लक्ष्मी सूक्त का पाठ आरम्भ करें। फिर प्रत्येक शुक्रवार को यह पाठ करें
तो आप स्वयं ही मात्र सात शुक्रवार को यंत्र का साक्षात चमत्कार देखेंगे। अपनी सामर्थ्य
के अनुसार ही यंत्र का चयन करें। अधिकांशतः तांबे का मंत्र ही पर्याप्त माना जाता है। वैसे यंत्र चांदी अथवा सोने को भी हो सकते हैं लेकिन वह आपके बजट से बाहर हो सकते हैं, इसलिये तांबे का यंत्र श्रेष्ठ है।
* अब मैं आपको "श्री श्रीयंत्र" का एक उपाय और बता रहा हूँ। दीपावली की
रात्रि में आप सर्वप्रथम यंत्र को उपरोक्त विधि से शुद्ध करें तथा यंत्र को माँ लक्ष्मी की
तस्वीर के सामने किसी लाल कपड़े पर रखें। इसमें आप यह ध्यान दें कि लाल कपड़ा
सवा मीटर ही होना चाहिये। अब आप यंत्र व तस्वीर के चारों ओर एक घीं का फिर
एक सरसों के तेल का दीपक रखें। इस प्रकार घी के ग्यारह व सरसों के तेल के दस
दीपक से एक चक्र सा बनायें। लाल आसन पर बैठ कर "ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमलवासिन्यै
नमः" के मंत्र के साथ यंत्र पर एक कमलगट्टा अर्पित करते जायें। इस प्रकार 108 बार
मंत्र जाप कर इतने ही कमलगट्टे अर्पित करें। माँ लक्ष्मी से उनका स्थाई आशीर्वाद प्राप्ति
का निवेदन कर उठ कर आरती करें तथा अगले दिन प्रातः स्नान कर उसी आसन पर
बैठ कर यंत्र व कमलगट्टे को एक पोटली का रूप देकर पुनः इसी मंत्र का 108 बार
जाप करें। प्रत्येक मंत्र के बाद पोटली को माँ लक्ष्मी के चरणों से स्पर्श करवा कर अपने
धन रखने के स्थान पर रख दें। आप कुछ ही दिनों में फर्क महसूस करेंगे।

* अब मैं आपको एक ऐसा उपाय बता रहा हूँ जिसके करने से आप कभी भी
आर्थिक समस्या में नहीं आयेंगे। इसके लिये आपको एक स्फंटिक की माला की
आवश्यकता होगी। दीपावली से तीन दिन पहले अर्थात् धनतेरस वाले दिन आप माला
खरीद लें। ध्यान रखें कि माला शुद्ध हो। सांध्यकाल में स्नान कर लाल वस्त्र धारण कर माँ लक्ष्मी को तिलक-बिन्दी कर धूप-अगरबत्ती के साथ शुद्ध घी का दीपक अर्पित करें। 108 बताशे, 108 कमलगट्टे के बीज के साथ केशर का भोग भी अर्पित करें। माँ से निवेदन करें कि 'हे माँ मैं अपनी आर्थिक सम्पन्नता के लिये यह प्रयोग कर रहा हूँ।
कृपया मुझे अपना आशीर्वाद प्रदान करें। फिर लाल आसन पर बैठ कर माला के सुमेरू पर रोली से तिलक कर पुनः उपरोक्त निवेदन करें। फिर "ॐ लक्ष्मीभ्यों नमः" के मंत्र की एक माला का जाप करें। जाप के पश्चात माला को माँ लक्ष्मी की तस्वीर के सामने रख कर हाथ जोड़ कर उठ जायें। सिर्फ एक बताशा उठा कर प्रसाद के रूप लेकर किसी चाँदी के बर्तन में जल भरकर उसमें डाल दें। यदि चाँदी का बर्तन नहीं हो तो आप किसी भी धातु के गिलास में जल भरकर उसमें बताशे के साथ कोई भी चाँदी की वस्तु डाल दें। अँगूठी भी डाल सकते हैं। उस गिलास को वहीं रखा रहने दें। अगले दिन प्रातः स्नान कर उस जल का सेवन करें। इसके बाद सांध्यकाल में पुनः यही क्रिया करनी है। इस प्रकार से आप दीपावली की रात्रि तक यह प्रयोग करें। दीपावली की रात्रि के प्रयोग में मंत्र जाप के बाद आप एक माला निम्न लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें:-

त्रैलोक्यपूजिते देवि कमले विष्णुवल्लभे
यथा त्वमचलाकृष्णे तथा भव मयि स्थिरा।।
ईश्वरी कमला लक्ष्मीश्चला भूतिर्हरिश्रया।
पदमा पदमालया संपदुच्चैः श्रीः पदमधारिणी॥द्वादशैतानि नामानि लक्ष्मी संपूज्य यः पठेत् ।स्थिरा लक्ष्मीः भवेतस्य पुत्रदारादिभिः सह।।

अब इस स्तोत्र की एक माला के बाद पुनः उसी मंत्र की एक माला का जाप करें।
जाप के बाद माला को माँ के चरणों से स्पर्श करवा कर धारण कर लें। केशर व
कमलगट्टे के बीज किसी लाल कपड़े में बांध कर धन रखने के स्थान पर रख दें। इस
प्रयोग के बाद आप कभी भी आर्थिक समस्या में नहीं आयेंगे।

अब मैं आपको बहुत ही सामान्य उपाय बता रहा हूँ। यह उपाय आपको धनतेरस
से आरम्भ करना है। इसके लिये आप धनतेरस के सांध्यकाल में स्नान कर लाल वस्त्र धारण करें। एक नारियल पर कलावा लपेट कर माँ लक्ष्मी तथा धन देवता कुबेर का
स्मरण कर अपनी आर्थिक सम्पन्नता के लिये निवेदन करें। सवा मीटर लाल नये वस्त्र
पर रख कर उस नारियल पर रोली से तिलक करें। श्री लक्ष्मी एकाक्षरी मंत्र 'श्री' भी रोली
से लिखें। धूप-दीप अर्पित करें। एक लाल गुलाब माँ के चरणों से स्पर्श करवा कर
नारियल के साथ रखें। एक माला "श्रीं" का जाप करें व हाथ जोड़ कर पूजा स्थल से
बाहर आ जायें। अगले दिन सांध्यकाल में ही किसी भी माँ शक्ति के मन्दिर में अथवा
लक्ष्मी नारायण के मन्दिर में जाकर पूजा अर्चना कर पुजारी से निवेदन कर एक लाल
गुलाब का पुष्प लेकर आयें। उस पुष्प को भी नारियल के साथ रख कर पुनः एकाक्षरी
मंत्र की एक माला का जाप करें। इस प्रकार यह क्रिया आप दीपावली तक करें।
दीपावली की रात्रि में पूजा के बाद पुनः ग्यारह माला "ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं ह्रीं श्रीं कमले
कमलालये, प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नमः ॐ" का जाप कर निवेदन कर नारियल व पुष्पों को उसी लाल कपड़े में लपेट कर अपने धन रखने के स्थान पर
रख दें।

* अब मैं आपको एक और सामान्य तथा शक्तिशाली प्रयोग बता रहा हूँ। यह
प्रयोग आप यदि अपनी पत्नी के साथ करें तो अधिक फल प्राप्त होगा। इसके लिये आप
किसी भी युवा सुहागिन स्त्री को (यदि कोई ब्राह्मण वर्ग की हो तो बहुत ही अच्छा है)
निवेदन करें कि वह दीपावली के सांध्यकाल में उनके घर भोजन करे। दीपावली की
शाम को उनके आने पर उनके चरण धोकर सम्मान करें। आपकी पत्नी उनके तिलक
करे। भोजन के बाद आपकी पत्नी उन्हें अपनी श्रद्धा के अनुसार पूर्ण सुहाग सामग्री भी है। सामग्री के साथ दक्षिणा भी रखें। जो दक्षिणा रखें उसके अतिरिक्त 101 रुपये भी
रखें। जब वह उस सामग्री को स्वीकार कर ले तो पुनः निवेदन कर कुछ दक्षिणा देकर
उन रुपयों को वापिस उनका हाथ लगवा कर ले लें, जो आपने अतिरिक्त रखें हैं। पुनः
सम्मान करें। इस प्रयोग में यह ध्यान रखें कि आप उन्हें अपनी ओर से जाने को न करें।
जब भी वह जाना चाहे तो उन्हें दरवाजे तक छोड़ने न जायें। यदि संभव हो तो आप उन्हें
अपने निवास के पिछले द्वार से जाने दें। इसके बाद आपने जो अतिरिक्त रुपये लिये है,उनको खर्च न करें। किसी लाल वस्त्र में बांध कर अपने धन रखने के स्थान पर रख दें। के अब मैं आपको दीपावली की रात्रि का एक और उपाय बता रहा हूँ। यह
उपाय आपको कुछ कठिन अवश्य लगेगा परन्तु जब आप इस उपाय को करेंगे, तब आप महसूस करेंगे कि यह काफी सरल तथा आसान है। इस उपाय के लिये आपको श्रीसूक्त की आवश्यकता होगी। "श्री श्रीसूक्त" में पन्द्रह ऋचा होती हैं तथा प्रत्येक ऋचा बहुत ही अधिक शक्तिशाली है। इसलिये दीपावली के पूजन के बाद जब सभी लोग सो जायें तो आप सिंह लग्न में लाल वस्त्र धारण कर लाल आसन पर बैठकर माँ लक्ष्मी की तस्वीर के सामने एक शुद्ध घी का इतना बड़ा दीपक अर्पित करें जो लगभग तीन घण्टे जलता रहे। इसके बाद सर्वप्रथम "श्री श्रीसूक्त" का 11 अथवा 21 बार पाठ करें। जब पाठ हो जाये तो आप सर्वप्रथम सामान्य रूप से माँ लक्ष्मी का आह्वान करें। यहां पर मैं किसी भी प्रकार के मंत्रों के माध्यम से आह्वान करने की चर्चा नहीं कर रहा हूँ। ऐसा नहीं है कि जिन लोगों को मंत्र अथवा श्लोक का ज्ञान नहीं होता, तो ईश्वर उनकी सुनता नहीं है। यदि आप सच्चे मन से व पूर्ण भक्ति के साथ विश्वास से आह्वान करेंगे तो माँ लक्ष्मी अवश्य ही आपकी पुकार सुनेगी। इसके बाद आप अग्निदेव का स्मरण कर हवन कुण्ड में अग्नि प्रज्ज्वलित करें और "श्री श्रीसूक्त" की प्रत्येक ऋचा के साथ आहुति दें। जब पन्द्रह आहुतियां पूर्ण हो जायें तो आप ग्यारह माला का जाप 'श्रीं' के मंत्र से करें। जाप के बाद थोड़ा सा जल आसन के नीचे छोड़ें। उस जल को अपने माथे से लगायें। बड़े दीपक को दोनों हाथों में लेकर आप अपने निवास के ऐसे स्थान पर आ जायें जहां से खुला आसमान दिखाई दे। दीपक को दोनों हथेलियों को ऐसे मिला कर उन पर रखें जैसे कुछ मांगते समय स्थिति होती है। पुनः माँ लक्ष्मी से सम्पन्नता के लिये अपने घर में वास करने का निवेदन करें। फिर उस दीपक को लेकर अपने पूरे घर में घूम जायें और दीपक को अपने पूजा स्थल में रख दें। बस आपका प्रयोग पूर्ण हुआ। इसके बाद आप इस प्रयोग के चमत्कार देखें।

* इस दीपावली पर यदि आप दक्षिणावर्ती शंख लें। यह एक अलग प्रकार का
शंख होता है। इसकी उत्पत्ति समुन्द्रमन्थन के समय मानी गई है। अन्य शंख बजने वाले
होते हैं तथा उनका पेट बायीं ओर खुलता है। यह शंख बजाने के काम में नहीं आता है।
इसका पेट दायीं ओर खुलता है। इस शंख को अपने पूजा स्थल में स्थान दे सकें तो माँ
लक्ष्मी का आपके निवास में स्थाई वास होगा। इसके दो कारण हैं। प्रथम, यह शंख श्रीहरि (श्री विष्णु) को अत्यधिक प्रिय है। वह इसको सदैव अपने साथ रखते हैं। हिन्दू धर्म में कहा गया है कि जिस स्थान पर यह शंख होता है, वहां श्री हरि का भी वास होता
है। जिस स्थान पर श्री हरि का वास होगा, वहां माँ लक्ष्मी का भी वास होगा। दूसरी बात,
जिस प्रकार समुन्द्र मन्थन के समय माँ लक्ष्मी का समुन्द्र से आगमन हुआ था, उसी प्रकार
से इस शंख का भी आगमन उसी समय समुद्र से हुआ था। इसलिये माँ लक्ष्मी इसको
अपना छोटा भाई मानती हैं। इस शंख को घर में स्थान देने से आर्थिक लाभ तो प्राप्त
होता ही है, उसके साथ ही वह घर वास्तुदोष तथा ऊपरी हवाओं से भी हमेशा मुक्त रहता
है। शंख कम से कम इतना बड़ा अवश्य लें जिसमें 400 मि.ली. जल भर जाये। दीपावली की रात्रि में पूजा से पहले श्वेत वस्त्र धारण कर इस शंख को सामान्य जल से स्नान करायें। फिर दूध से स्नान करवा कर जिस विधि (पंचोपचार, दशोपचार अथवा
षोडशोपचार) से आप पूजा कर सकते हैं, शंख का पूजन करें। फिर लाल वस्त्र पर चांदी की प्लेट रखकर उसमें चावल भर दें। शंख को इस प्रकार से चावलों पर रख दें कि
खुला पेट आकाश की ओर, शिरो भाग (जिस स्थान से सामान्य शंख बजाया जाता है)
आपकी ओर व पुच्छभाग दीवार की ओर रहे। इसके अतिरिक्त दूसरे प्रकार से आप इस प्रकार रख सकते हैं कि शंख आड़े में ऐसे रखा जाये कि खुला पेट आपकी ओर रहे। इसके बाद आप शंख को केशर से तिलक करें। उसमें जल भर कर उसमें भी केशर डालें। एक चाँदी का सिक्का भी डाल दें, फिर प्रसाद आदि अर्पित कर हाथ में जल व चावल लेकर संकल्प करें- "ॐ अद्य अमुक वर्षे, अमुक मासे, अमुक पक्षे, अमुक तिथौ
मम मनोवांछित कार्यसिद्धये रिद्धी-सिद्धि प्राप्त्यर्थं महं दक्षिणावर्तशंखस्य पूजनं
करिष्यामि। (यहां पर आप अमुक के स्थान पर क्रमशः वर्ष, मास, पक्ष व तिथि का
उच्चारण करें। मम के स्थान पर अपना नाम बोलें)। तत्पश्चात् निम्न मंत्र से शंख का पुनः
पूजन करें- 'ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं श्रीधरकस्थाय पयोनिधिजाताय श्री दक्षिणावर्तशंखाय ह्रीं श्रीं क्लीं श्रीकराय पूज्याय नमः”
इसके बाद आपने शंख में जो जल भरा है उसमें अष्टगंध, गुलाबजल व गुलाब का
इत्र अर्पित करें। फिर निम्न मंत्र से ध्यान करें- "ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं श्रीधरकस्थाय
पयोनिधिजाताय लक्ष्मीसहोदराय चिंतितार्थ संपादकाय श्रीदक्षिणावर्तशंखाय श्रीकराय
पूज्याय क्लीं श्रीं ह्रीं ॐ नमः सर्वाभरणभूषिताय प्रशस्यांगोपांगसंयुताय कल्पवृक्षाय स्थिताय
कामधेनुचितामणि नवनिधिरूपाय चतुर्दशरत्न परिवृताय अष्टादशमहासिद्धिसहिताय
श्रीलक्ष्मीदेवता श्रीकृष्णदेवकरतललालिताय श्रीशंखमहानिधये नमः" शंख के ध्यान के बाद आप निम्न मंत्र का अपनी शक्ति अनुसार जाप करें:- "ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ब्लूं दक्षिणमुखाय समुन्द्रप्रभवाय शंखाय नमः" ।
इसके बाद आप हाथ जोड़ कर माँ लक्ष्मी का स्मरण कर पूजास्थल से बाहर आ जाये। बस, यही आपका दीपावली का दक्षिणावर्ती शंख की स्थापना का प्रयोग है। इसके बाद आप जब भी आराधना करें, तब आप अपनी श्रद्धानुसार उपरोक्त मंत्र का जाप करें। इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि आप जितने मंत्र का जाप प्रथम दिन करें उतने ही मंत्र का जाप नित्य करें।
* अब मैं आपको एक प्रयोग मोती शख का बता रहा हूँ। यह शंख भी सामान्य
जैसा ही होता है परन्तु इसमें चमक मोती जैसी होती है, इसीलिये इसको मोती शंख कहा जाता है। दीपावली के साथ ही इस शंख व एक चाँदी के सिक्के का भी पूजन करें जब दीपावली के पूजन के बाद सभी लोग पूजा स्थल से हट जायें तो आप मोती शंख को उठाकर माँ लक्ष्मी से अपनी सम्पन्नता का निवेदन करते हुए शंख को अपने माथे से लगाकर उसमें चाँदी का सिक्का रख दें व ऊपर लिखित "श्री लक्ष्मी स्तोत्र" का 11 बार पाठ करें। फिर निम्न मंत्र "ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये, प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्री महालक्ष्मयै नमः ॐ" का 108 बार जाप करें। प्रत्येक मंत्र के साथ शंख में एक चावल का दाना डालते जायें। इसमें यह ध्यान रखें कि चावल का दाना साबुत हो, खण्डित न हो। जब पूर्ण मंत्र जाप हो जाये तो शंख को लाल वस्त्र में लपेट कर
पूजास्थल में ही रख दें। अगले दिन. सांध्यकाल में फिर माँ लक्ष्मी का पूजन कर यही प्रक्रिया अपनायें। यह प्रक्रिया तब तक चलेगी जब तक शंख चावलों से भर न जाये।
जिस दिन शंख चावलों से भर जाये तो उसे उसी लाल वस्त्र में लपेट कर पुनः “श्री
लक्ष्मी स्तोत्र" का 11 बार पाठ कर अपने धन रखने के स्थान पर रख दें। फिर 21 दिन
तक अगरबत्ती अवश्य दिखायें। इस प्रयोग से आपको माँ लक्ष्मी की कृपा तो अवश्य प्राप्त
होगी साथ ही आपका निवास वास्तुदोष से भी मुक्त रहेगा।

* अब मैं आपको एक ऐसा प्रयोग बता रहा हूँ जिसे जितनी अधिक श्रद्धा व
विश्वास से करेंगे, उतना ही शीघ्र लाभ देगा। इस प्रयोग में आपको 108 अशोक के पत्तों
की आवश्यकता आयेगी। इसलिये आप इनकी व्यवस्था पहले से ही कर लें। दीपावलीपूजन के समय प्रत्येक पत्ते पर "ॐ श्रीं ह्रीं महालक्ष्मयै नमः" का जाप करते हुए रोली से "श्री" लिखें। पूजन के बाद इन पत्तों की वन्दनवार बनाकर अपने निवास के मुख्यद्वार पर लगा दें। अगले दिन प्रातः धूप-अगरबत्ती के साथ दीप अर्पित कर वन्दनवार को उतार कर नये लाल वस्त्र में बांधकर उस पर सिन्दूर में चमेली का तेल मिलाकर "श्रीं"
लिखकर अपने धन रखने के स्थान पर रख दें। फिर 21 दिन लगातार "श्री" के
उच्चारण के साथ 11 अगरबत्ती अर्पित करें। यह प्रयोग बहुत ही प्रभावी है।

* यह एक बहुत ही प्रभावी व सामान्य प्रयोग है। इस प्रयोग से आपको माँ लक्ष्मी
कृपा से आर्थिक सम्पन्नता तो प्राप्त होगी ही, साथ ही आपको कर्जों से भी मुक्ति
मिलेगी। इस प्रयोग में आप दीपावली की रात्रि में सवा मीटर सफेद वस्त्र पर रोली से
108 बार "श्रीं" लिखें और सव्रामीटर पीले वस्त्र पर हल्दी से "श्री हरि" लिखें। पुनः लाल
 वस्त्र पर सिन्दूर से 11 बार श्री लक्ष्मी गायत्री मंत्र लिख कर 108 लाल गुलाब और यदि
आप उपलब्ध हो सकें तो 11 कमलपुष्प रखे। कमलपुष्प न मिलने पर 108 कमलगट्टे भी रख सकते हैं। पूजन के साथ ही इन सबका भी पूजन करें। दीपावली के अगले दिन सर्वप्रथम "श्री लक्ष्मी गायत्री” वाला वस्त्र, उसके ऊपर पीला वस्त्र तथा उसके ऊपर लाल वस्त्र रखकर इन सबके ऊपर गुलाब के पुष्प के साथ कमलपुष्प अथवा कमलगट्टे के बीज, जो भी आपने पूजन में रखा था, सबको मिलाकर रख दें। एक पोटली सी बना कर पुनः धूप-दीप अर्पित कर 108 बार "श्रीं" का उच्चारण कर पोटली को अपने धन रखने के स्थान पर रख कर 21 दिन तक अगरबत्ती अर्पित करें। इस प्रयोग का शुभ फल आपको बहुत ही शीघ्र दिखाई देगा।

* अब मैं आपको एक और बहुत ही सरल उपाय बता रहा हूँ। इसमें आपको 21
गोमती चक्र की आवश्यकता होगी। यह गोमती चक्र आपको आसानी से उपलब्ध हो
जायेंगे तथा यह बहुत ही सस्ते हैं। इनका मूल्य तब अधिक हो जाता है, जब यह
अभिमंत्रित होते हैं। इसलिये यह आप पर निर्भर है कि प्रयोग में आप किस प्रकार के
गोमती चक्रों का प्रयोग कर रहे हैं। दीपावली की रात्रि में आप पूजन के बाद एक लाल
वस्त्र पर चावल से षटकोण बनायें। उसके मध्य गोमती चक्र स्थापित करें। एक ओर
शुद्ध घी का तथा दूसरी ओर सरसों के तेल का दीपक जलायें तथा कमलगट्टे की माला
से 21 माला "श्री" का जाप करें। जाप के बाद हाथ जोड़ कर अपनी दरिद्रता दूर करने
का निवेदन करें। अगले दिन लाल वस्त्र की सारी सामग्री को एक पोटली का रूप देकर
किसी भी पीपल के पेड़ के नीचे दबा आयें। दबाने के लिये बनाया गया गड्ढा इतना
गहरा हो कि कोई जानवर उसे निकाल न पाये। हाथ जोड़कर वापिस आ जायें। आते
समय पीछे मुड़कर न देखें। घर में प्रवेश से पहले हाथ-मुंह धो लें। इसके बाद आपकी
सारी दरिद्रता दूर हो जायेगी।

* अब मैं आपको “श्री कनकधारा यंत्र" का प्रयोग बता रहा हूँ। आर्थिक समृद्धि
के लिये यह यंत्र बहुत ही अधिक शक्तिशाली है। इसकी स्थापना का तरीका भी मैं बहुत
ही सामान्य रूप में बता रहा हूँ। दीपावली की रात्रि में आप पूजन के समय "श्रीकनकधारां यंत्र" को पंच तत्व से स्नान करवा कर उसका भी पूजन करें। फिर लाल वस्त्र पर चावल की ढेरी पर स्थान देकर रोली से तिलक कर दीप-धूप के साथ अगरबत्ती अर्पित करें। 21 आँवले अर्पित करें। आँवले सूखे अथवा हरे कैसे भी हो सकते हैं। आँवले अर्पित करने के बाद आप निम्न मंत्र का रूद्राक्ष अथवा कमलगट्टे की माला से "ॐ ह्रीं श्रीं कनकधाराय श्रीं ह्रीं नमः"11 माला जाप करें। फिर आप चमत्कार देखें।

इस यंत्र की एक विशेषता होती है कि इस यंत्र पर जितने अधिक लोगों की दृष्टि पड़ती
है, यह उतना ही अधिक प्रभावी फल देता है।
* अब मैं आपको ऐसा प्रयोग बता रहा हूँ जो आपके व्यापार के लिये लाभदायक 

है। यदि आपके व्यापार अथवा निवास पर किसी की नजर लगने के कारण आर्थिक वृद्धि रुक गई है तो इस प्रयोग से आप अपने पुराने अच्छे दिनों को फिर से वापिस ला सकते हैं। इस प्रयोग के लिये आप धन त्रयोदशी पर 9 गुणित 9 का चाँदी के पतरे पर स्वास्तिक कटवायें। उसी दिन से रोली मिश्रित दूध में डाल दें। दीपावली की रात्रि में
स्वास्तिक को पुनः पंचतत्व से स्नान करवा कर शुद्ध कर लें। फिर एक चिपकाने वाली
वस्तु लें। आप "श्रीं" के उच्चारण के साथ स्वास्तिक पर "नागकेशर" चिपकाते जायें।
जब "नागकेशर" से पूरा स्वास्तिक छिप जाये तो पुनः धूप-दीप अर्पित कर 11 माला "ऍ
ह्रीं श्रीं क्लीं" का जाप करें और दीपावली के अगले दिन अपने व्यवसाय में अथवा निवास
के पूजास्थल में स्वास्तिक को स्थान दे दें। कुछ ही दिन में आप परिवर्तन महसूस करेंगे
कि आपके व्यवसाय अथवा घर में लगी नजर समाप्त होकर आर्थिक सम्पन्नता पुनः
आरम्भ हो गई है।

* अब मैं आपको एक ऐसा प्रयोग बता रहा हूँ जिसमें आप अपनी सम्पन्नता में
वृद्धि कर सकते हैं। इसके लिये आप दीपावली की रात्रि को अपनी पत्नी के साथ किसी भी मन्दिर में दर्शन करने जायें। वहां से पाँच पुष्प पुजारी से मांग लायें पुष्प यदि गुलाब के मिलें तो बहुत अच्छा है। उन पुष्पों को लाकर अपने पूजास्थल के पास ही रख लें। दीपावली के पूजन में आप सवा मीटर लाल कपड़े पर एक नारियल पर कलावा लपेट कर रोली से तिलक करें। हल्दी से रंगे चावल, थोड़ी चने की दाल व थोड़ी तुअर की
दाल की ढेरी पर "श्री श्रीयंत्र" को पंच तत्व से स्नान करवा कर रख दें। फिर कमलगट्टे
की माला से 21 माला "ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्मयै नमः" का जाप करें। जाप के बाद
आप मन्दिर से लाये पुष्प भी अर्पित कर दें। अगले दिन आप स्नान कर पुनः 11 माला
जाप कर "श्री श्रीयंत्र को मन्दिर में स्थान दे दें तथा अन्य सामग्री को पूरे घर में घुमाकर
किसी भी मन्दिर में इस प्रार्थना के साथ रख आयें कि 'हे माँ मेरे घर में जो आर्थिक
रुकावट अभी तक आई हुई थी, तेरी कृपा से आज वह दूर हो गई। अब मुझ पर व मेरे
परिवार पर यही कृपा दृष्टि बनाये रखना। शाम को पुनः मन्दिर में जायें। यदि आपको
वह पोटली दिखाई दे तो आप निःसंकोच उठाकर अपने घर ले आयें और अपनी रसोई
में रख दें। यदि पोटली दिखाई भी न दे तो भी कोई चिंता का विषय नहीं है। इस प्रयोग
से कई लाभ हैं। माँ लक्ष्मी के आशीर्वाद के साथ लगी नजर दूर होती है और माँ अन्नपूर्णा
की कृपा भी प्राप्त होती है।

* अब मैं आपको आर्थिक सम्पन्नता के साथ माँ अन्नपूर्णा की कृपा प्रयोग बता रहा हूँ। इस प्रयोग में आप तीन इतनी छोटी मटकियां लें जिनमें लगभग एक काली किलो दाल आदि आ जाये। दीपावली के पूजन के समय क्रमशः 800 ग्राम साबुत उड़द, 300 ग्राम चने की दाल व 900 ग्राम लाल मसूर की दाल का भी पूजन करें। एक अन्य मटकी में पाँच अलग प्रकार के अनाज भरकर पूजन करें। एक अन्य सवा मीटर काले कपड़े में आठ सौ ग्राम काली साबुत उड़द व इतने ही काले तिल व सवा किलो नमक के साथ एक नारियल रखें ध्यान रखें कि यह सामग्री पूजास्थल से अलग रखनी है। फिर जब आपकी पूजा पूर्ण हो जाये तो तीन मटकी को आप अपने रसोईघर में स्थान दे दें। नारियल के अतिरिक्त बाकी सारी सामग्री काले कपड़े में लपेट कर एक पोटली का रूप दे दें। किसी चौराहे पर वह पोटली रख दें तथा नारियल वही फोड़ दें। फिर घर वापिस आ जायें। वापिस आते समय आपको पीछे कुछ भी सुनाई दे, परन्तु नहीं देखना है। घर में हाथ-पैर धोकर ही प्रवेश करें। इस प्रयोग में आप अपने मुड़करनिवास तथा घर के प्रत्येक सदस्य पर लगी नजर से मुक्ति पा जायेंगे। नजर लगने के कारण धनागमन में जो रुकावट आती है वह दूर हो जायेगी तथा माँ अन्नपूर्णा की कृपा भी प्राप्त होगी। सबसे बड़ा लाभ यह है कि यदि आप राहू अथवा शनिकृत पीड़ा भोग रहे हैं तो उससे भी आपक: मुक्ति मिल जायेगी।

* दीपावली के दिन आप पीपल के पाँच साबुत पत्तों की व्यवस्था कर लें।
दीपावली पूजन से पहले प्रत्येक पत्ते पर एक पनीर का टुकड़ा व कोई भी छेने की मिठाई
रख कर आटे का दीपक बना कर उसके साथ जल में दूध, शहद व शक्कर मिलाकर
पीपल के वृक्ष के नीचे पत्ते अर्पित कर दें। अगरबत्ती, दीपक व दूध भी अर्पित कर दें और हाथ जोड़कर वापिस आ जायें। आते समय पीछे मुड़कर न देखें। इसके बाद अगले
शनिवार व मंगलवार को भी यही क्रिया करनी है। बस, इसमें आपको पत्तों का प्रयोग
नहीं करना है। एक पनीर के टुकड़े के साथ जल व अगरबत्ती, दीपक अर्पित करने हैं।
चमत्कार आप देखेंगे।

* यदि आपका व्यापार अधिक नहीं चल रहा है तथा उसमें बाधायें बहुत आ रही
हैं तो आप दीपावली अथवा किसी अन्य शुभ समय में रात्रि में अभिमंत्रित "व्यापार वृद्धि
यंत्र" को पंच तत्व से शुद्ध कर नागकेशर अर्पित करें व मूँगें की माला से निम्न मंत्र का
11 माला जाप करें। इस उपाय से आपके व्यवसाय में जो गति आयेगी उसे आप स्वयं
महसूस करेंगे।
मंत्र है- "ॐ श्रीं सर्वविघ्न हरस्तस्मै गणाधिपतयै नमः"।।
    व्यवसाय में सफलतादायकदीपावली पर किए जाने वाले उपाय
    अब मैं आपको कुछ ऐसे उपाय बता रहा हू जो केवल दीपावली पर किएजाते हैं। यह ऐसे उपाय हैं जिन्हें करके आप अपनी आर्थिक विपन्नता दूरकर सकते हैं :-
    यदि इस दीपावली पर यह चाहते हैं कि मां लक्ष्मी का आपके घर मेंस्थाई वास हो तो आप दीपावली पूजन के समय एक चांदी की डिब्बीके साथ थोड़ी-सी नागकेसर व शहद अथवा कचनार के पत्तों का भीपूजन करें। अगले दिन चांदी की डिब्बी में नागकेसर के साथ शहदअथवा कचनार के पत्तों में से जिनका भी आपने पूजन किया है, उनकोडिब्बी में रखकर लाल वस्त्र में बांधकर अपने धन रखने के स्थान पररख दें।
    आप दीपावली की रात्रि में पूजन के समय 21 हकीक के पत्थरों का भीपूजन करें। पूजन के बाद उन्हें अपने निवास में कहीं भी गड़ दें तोआपके निवास में वर्ष भर मां लक्ष्मी का स्थाई वास रहेगा।
    आप धनतेरस पर श्री कुबेर यंत्र का विधि-विधान से पूजन करें।दीपावली की रात्रि में उस यंत्र पर 108 कमलगट्टे के बीज मां लक्षमीका एकाक्षरी मंत्र ‘श्री’ का जाप करते हुए अर्पित करें। अगले दिन यंत्रके साथ उन बीजों को भी किसी लाल कपड़े में बांधकर अपने धनरखने के स्थान पर रखें और वर्ष भर आर्थिक रूप से निश्चत रहें।आप दीपावली के पूजन के समय मां लक्ष्मी की पुरानी तस्वीर परअपनी पत्नी के हाथ से पूर्ण सुहहाग सामश्री अर्पित करें। अगले दिन
    आपकी पली स्वान कर पूजा करके उस सामध्री को मां लक्ष्मी काप्साब मानकर उठाकर स्वये प्रयोग कर मां लक्ष्मी से अपने घर मेंस्थाई वास करने का निवेवन करे तो वर्ष भर मां लक्ष्मी की कृपा सेआर्थिक सम्पन्नता रहती है।
    यदि आप वर्ष भर मां लक्ष्मी का आशीर्वाव चाहते हैं तो दीपावली की रात्रिमें ठीक 12 बजे 11 घी के दीपक जलाकर अपने निवास के मध्यभाग में आकर एक चक्र बनाकर उसके मध्य रोली से ‘श्री’ लिखें व108 बार ही उच्चारण कर मां लक्ष्मी से अपने घर में वर्षभर वासकरने का निवेदन करें।
    दीपावली के पूजन के समय लाल कपड़े में काली हल्दी के साथ सिंदूरव कुछ सिक्के अथवा रुपयों का भी पूजन करें। अगले दिन उनको उसीलाल कपड़े में बांधकर अपने धन रखने के स्थान पर रखें। फिर इसप्रयोग का चमत्कार देखें।
    दीपावली के संध्याकाल में किसी भी देवी के मंदिर में दो अलग-अलगस्थानपर सवा सौ आ्राम रोली, इतना ही सिंदूर, सवा मीटर लाल कपड़ा,नारियल व 21 रुपए रखकर पूजन करें। पूजन के बाद एक स्थान कीसामश्री मंदिर में ही अर्पित करें और दूसरे स्थान की सामग्री स्वयंलाकर लाल कपड़े में बांधकर अपने धन रखने के स्थान पर रखें। 21दिन लगातार धूप-दीप अर्पित करें फिर मां लक्ष्मी की कृपा देखें।दीपावली के पूजन के समय आप 501 ग्राम सूखे छुआरों का भी पूजनकरें। अगले दिन उन छुआरों को लाल कपड़े में बांधकर अपने धनरखने के स्थान पर रखें। 51 दिंन तक लगातार एक रुपया किसी भीमंदिर में मां लक्ष्मी के नाम से अर्पित करें और मां लक्ष्मी से अपनीसम्पन्नता का निवेदन करें।
    दीपावली के पूजन से पहले आप किसी भी गरीब सुहागिन स्त्री कोअपनी पत्नी के द्वारा सुहाग सामग्री अवश्य दिलवाएं। इससे मां लक्ष्मीप्रसन्न होती हैं। सामश्री में कोई-सा भी इत्र अवश्य होनाचाहिए।
    आप दीपावली का पूजन करने से पहले एक नारियल व खीर लेकरअपने पूरे घर में घूमै। इसमें यह ध्यान रखें कि आप जिस स्थान सेएक बार निकल चुके हैं, तो दुबारा वहां न जाएं अर्थातू ऊपर से चलनाआरम्भ कर नीचे होते हुए मुख्य द्वार पर आकर नारियल को फोड़ देंव खीर वहीं छोड़ दैं।
    यदि आपके घर में कोई बार-बार बीमार होता है अथवा नजर लगतीहै तो आप दीपावली पूजन से पहले एक आटे का चार मुख का दीपकबनाकर उसमें कपूर भर दें। 125 ग्राम फिटकरी के साथ पीड़ित व्यक्तके पूरे शरीर से 21 बार उल्टा उसारा करें और किसी चौराहे परआकर उस दीपक के कपूर को जला दें तथा फिटकरी को दक्षिण दिशाकी ओर फेंक दें और वापस आ जाएं। इसमें यह ध्यान रखें कि आपमुड़कर वापस न देखें। घर में प्रवेश से पहले हाथ-पैर अवश्य धोएं।अगले दिन किसी मेहतर को 11 रुपए अवश्य दान करें। यदि सम्भवहो तो पीड़ित का कोई पुराना वस्त्र भी दान कर दें।
    जैसा मैंने आपको यंत्र के अध्याय में बताया कि जिस स्थान परविधि-विधान से यंत्रराज ‘श्री श्रीयंत्र’ की स्थापना होती है तथा यंत्र केसामने मां लक्ष्मी का कोई भी पाठ नियमित अथवा प्रत्येक शुक्रवार कोहोता है तो उस घर में मां लक्ष्मी को अवश्य ही स्थाई वास करनापड़ता है। यह बात मां लक्ष्मी ने स्वयं अपने श्रीमुख से कही है। इसयंत्र के बारे में आपको कुछ ऐसे प्रयोग बताने का प्रयास कर रहा हूँजिनको यदि आपने पूर्ण विश्वास से किया तो आप पिछले वर्ष की अपेक्षाइस वर्ष अवश्य ही मां का अधिक आशीर्वाद प्रप्त करेंगे। आप दीपावलीकी रात्रि में ‘श्री श्रीयंत्र' को पंच तत्त्व से स्नान करवाकर किसी लालकपड़े पर स्थान देकर मां का कोई भी पाठ करें अथवा श्रीसूक्त व बीजयुक्त लक्ष्मी सूक्त का पाठ आरम्भ करें। फिर प्रत्येक शुक्रवार को यहपाठ करें तो आप स्वयं ही मात्र सात शुक्रवार को यंत्र का साक्षातचमत्कार देखेंगे। अपनी सामर्थ्य के अनुसार ही यंत्र का चयन करें।अधिकांशतः तांबे का मंत्र ही पर्याप्त माना जाता है। वैसे यंत्र चांदी     अथवा सोने के भी हो सकते हैं लेकिन वह आपके बजट से बाहर होसकते हैं, इसलिए तांबे का यंत्र श्रेष्ठ है।
    अब मैं आपको 'श्री श्रीयंत्र' का एक उपाय और बता रहा हूँ। दीपावलीकी रात्रि में आप सर्वप्रथम यंत्र को उपरोक्त विधि से शुद्ध करें तथायंत्र को मां लक्ष्मी की तस्वीर के सामने किसी लाल कपड़े पर रखें।इसमें आप यह ध्यान दें कि लाल कपड़ा सवा मीटर ही होना चाहिए।अब आप यंत्र व तस्वीर के चारों ओर एक घी का फिर एक सरसों केतेल का दीपक रखें। इस प्रकार घी के ग्यारह व सरसों के तेल के दसदीपक से एक चक्र-सा बनाएं। लाल आसन पर बैठकर 'ॐ श्रीं हींश्रीं कमलवासिन्यै नमः' के मंत्र के साथ यंत्र पर एक कमलगट्टाअर्पित करते जाएं। इस प्रकार 108 बार मंत्र जाप कर इतने हीकमलगट्टे अर्पित करें। मां लक्ष्मी से उनका स्थाई आशीर्वाद प्राप्ति कानिवेदन कर उठकर आरती करें तथा अगले दिन प्रातः स्नान कर उसीआसन पर बैठकर यंत्र व कमलगट्टे को एक पोटली का रूप देकरपुनः इसी मंत्र का 108 बार जाप करें। प्रत्येक मंत्र के बाद पोटली कोमां लक्ष्मी के चरणों से स्पर्श करवाकर अपने धन रखने के स्थान पररख दें। आप कुछ ही दिनों में फर्क महसूस करेंगे।
    अब मैं आपको एक और सामान्य तथा शक्तिशाली प्रयोग बता रहा हूँ।यह प्रयोग आप यदि अपनी पत्नी के साथ करें तो अधिक फल प्राप्तहोगा। इसके लिए आप किसी भी युवा सुहागिन स्त्री को (यदि कोईब्राह्मण वर्ग की हो तो बहुत ही अच्छा है) निवेदन करें कि वह दीपावलीके संध्याकाल में उनके घर भोजन करे। दीपावली की शाम को उनकेआने पर उनके चरण धोकर सम्मान करें। आपकी पत्नी उनके तिलककरे। भोजन के बाद आपकी पत्नी उन्हें अपनी श्रद्धा के अनुसार पूर्णसुहाग सामग्री भी दें। सामग्री के साथ दक्षिणा भी रखें। जो दक्षिणा रखेंउसके अतिरिक्त 101 रुपए भी रखें। जब वह उस सामग्री कोस्वीकार कर ले तो पुनः निवेदन कर कुछ दक्षिणा देकर उन रुपयों कोवापस उनका हाथ लगवाकर ले लें, जो आपने अतिरिक्त रखे हैं। पुनः    सम्मान करें। इस प्रयोग में यह ध्यान रखें कि आप उन्हें अपनी ओरसे जाने को न कहें। जब भी वह जाना चाहें तो उन्हें दरवाजे तक छोड़नेन जाएं। यदि सम्भव हो तो आप उन्हें अपने निवास के पिछले द्वारसे जाने दें। इसके बाद आपने जो अतिरिक्त रुपए लिए हैं, उनकोखर्च न करें। किसी लाल वस्त्र मं बांधकर अपने धन रखने के स्थानपर रख दें।
    अब मैं आपको एक प्रयोग मोती शंख का बता रहा हूं। यह शंख भीसामान्य प्रयोग जैसा ही होता है परंतु इसमें चमक मोती जैसी होती है,इसीलिए इसको मोती शंख कहा जाता है। दीपावली के साथ ही इस शंखव एक चांदी के सिक्के का भी पूजन करें। जब दीपावली के पूजन केबाद सभी लोग पूजा स्थल से हट जाएं तो आप मोती शंख को उटाकरमां लक्ष्मी से अपनी सम्पन्नता का निवेदन करते हुए शंख को अपनेमाथे से लगाकर उसमें चांदी का सिक्का रख दें व ऊपर लिखित ‘श्रीलक्ष्मी स्तोत्र’ का 11 बार पाठ करें। फिर निम्न मंत्र ‘ॐ श्रीं हीं श्रीहीं श्रीं कमले कमलालये, प्रसीद प्रसीद श्रीं हीं श्रीं महालक्ष्मयै नमःॐ' का 108 बार जाप करें। प्रत्येक मंत्र के साथ शंख में एक चावलका दाना डालते जाएं। इसमें यह ध्यान रखें कि चावल का दाना साबुतहो, खंडित न हो। जब पूर्ण मंत्र जाप हो जाए तो शंख को लाल वस्त्रमें लपेटकर पूजास्थल में ही रख दें। अगले दिन संध्याकाल में फिर मांलक्ष्मी का पूजन कर यही प्रक्रिया अपनाएं। यह प्रक्रिया तब तक चलेगीजब तक शंख चावलों से भर न जाए। जिस दिन शंख चावलों से भरजाए तो उसे उसी लाल वस्त्र में लपेटकर पुनः ‘श्री लक्ष्मी स्तोत्र' का11 बार पाठ कर अपने धन रखने के स्थान पर रख दें। फिर 21दिन तक अगरबत्ती अवश्य दिखाएं। इस प्रयोग से आपको मां लक्ष्मीकी कृपा तो अवश्य प्राप्त होगी साथ ही आपका निवास वास्तुदोष से भीमुक्त रहेगा।अब मैं आपको एक ऐसा प्रयोग बता रहा हू जिसे जितनी अधिक श्रद्धा
    व विश्वास से करेंगे, उतना ही शीघ्र लाभ देगा। इस प्रयोग में आपको    108 अशोक के पत्तों की आवश्यकता आएगी। इसलिए आप इनकीव्यवस्था पहले से ही कर लें। दीपावली के पूजन के समय प्रत्येक पत्तेपर ‘ॐ श्रीं हीं महालक्ष्मयै नमः' का जाप करते हुए रोली से ‘श्रीलिखें। पूजन के बाद इन पत्तों की वंदनवार बनाकर अपने निवास केमुख्यद्वार पर लगा दें। अगले दिन प्रातः धूप-अगरबत्ती के साथ दीपअर्पित कर वंदनवार को उतारकर नए लाल वस्त्र में बांधकर उस परसिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर ‘श्री' लिखकर अपने थन रखने केस्थान पर रख दें। फिर 21 दिन लगातार ‘श्रीं' के उच्चारण के साथ।। अगरबत्ती अर्पित करें। यह प्रयोग बहुत ही प्रभावी है।यह एक बहुत ही प्रभावी व सामान्य प्रयोग है। इस प्रयोग से आपकोमां लक्ष्मी की कृपा से आर्थिक सम्पन्नता तो प्राप्त होगी ही, साथ हीआपको कर्जों से भी मुक्ति मिलेगी। इस प्रयोग में आप दीपावली कीरात्रि में सवा मीटर सफेद वस्त्र पर रोली से 108 बार ‘श्री लिखेंऔर सवामीटर पीले वस्त्र पर हल्दी से ‘श्री हरि' लिखें। पुनः लालवस्त्र पर सिंदूर से 11 बार श्री लक्ष्मी गायत्री मंत्र लिखकर 108 लालगुलाब और यदि उपलब्ध हो सके तो 11 कमलपुष्य रखें। कमलपुष्प नमिलने पर 108 कमलगट्टे भी रख सकते हैं। पूजन के साथ ही इनसबका भी पूजन करें। दीपावली के अगले दिन सर्वप्रथम ‘श्री लक्ष्मीगायत्री' वाला वस्त्र, उसके ऊपर पीला वस्त्र तथा उसके ऊपर लाल
    वस्त्र रखकर इन सबके ऊपर गुलाब के पुष्प के साथ कमलपुष्प
    अथवा कमलगट्टे के बीज, जो भी आपने पूजन में रखा था, सबको
    मिलाकर रख दें। एक पोटली-सी बनाकर पुनः धूप-दीप अर्पित कर
    108 बार ‘श्री’ का उच्चारण कर पोटली को अपने धन रखने के स्थान
    पर रखकर 21 दिन तक अगरबत्ती अर्पित करें। इस प्रयोग का शुभ
    फल आपको बहुत ही शीघ्र दिखाई देगा।
    अब मैं आपको एक और बहुत ही सरल उपाय बता रहा हू। इसमें
    आपको 21 गोमती चक्र की आवश्यकता होगी। यह गोमती चक्र आपको
    आसानी से उपलब्ध हो जाएंगे तथा यह बहुत ही सस्ते हैं। इनका मूल्य    तब अधिक हो जाता है, जब यह अभिमंत्रित होते हैं। इसलिए यहआप पर निर्भर है कि प्रयोग में आप किस प्रकार के गोमती चक्रों काप्रयोग कर रहे हैं। दीपावली की रात्रि में आप पूजन के बाद एक लालवस्त्र पर चावल से षटकोण बनाएं। उसके मध्य गोमती चक्र स्थापितकरें। एक ओर शुद्ध घी का तथा दूसरी ओर सरसों के तेल का दीपकजलाएं तथा कमलगट्टे की माला से 21 माला ‘श्री' का जाप करें। जापके बाद हाथ जोड़कर अपनी दरिद्रता दूर करने का निवेदन करें। अगलेदिन लाल वस्त्र की सारी सामग्री को एक पोटली का रूप देकर किसीभी पीपल के पेड़ के नीचे दबा आएं। दबाने के लिए बनाया गया गड्ढाइतना गहरा हो कि कोई जानवर उसे निकाल न पाए। हाथ जोड़करवापस आ जाएं। आते. समय पीछे मुड़कर न देखें। घर में प्रवेशसे पहले हाथ-मुंह धो लें। इसके बाद आपकी सारी दरिद्रता दूर होजाएगी।
    अब मैं आपको ‘श्री कनकधारा यंत्र’ का प्रयोग बता रहा हूं। आर्थिकसमृद्धि के लिए यह यंत्र बहुत ही अधिक शक्तिशाली है। इसकी स्थापनाका तरीका भी मैं बहुत ही सामान्य रूप में बता रहा हूं। दीपावली कीरात्रि में आप पूजन के समय ‘श्री कनकधारा यंत्र’ को पंच तत्त्व सेस्नान करवा कर उसका भी पूजन करें। फिर लाल वस्त्र पर चावलकी ढेरी पर स्थान देकर रोली से तिलक कर दीप-धूप के साथअगरबत्ती अर्पित करें। 21 आंवले अर्पित करें। आंवले सूखे अथवा हरेकैसे भी हो सकते हैं। आंवले अर्पित करने के बाद आप निम्न मंत्र कारद्राक्ष अथवा कमलगट्टे की माला से ‘ॐ हीं श्रीं कनकधारायै श्री हींनमः' 11 माला जाप करें। फिर आप चमत्कार देखें। इस यंत्र की एकविशेषता होती है कि इस यंत्र पर जितने अधिक लोगों की दृष्टि पड़तीहै, यह उतना ही अधिक प्रभावी फल देता है।अब मैं आपको ऐसा प्रयोग बता रहा हू जो आपके व्यापार के लिएलाभदायक है। यदि आपके व्यापार अथवा निवास पर किसी की नजरलगने के कारण आर्थिक वृद्धि रक गई है तो इस प्रयोग से आप अपने 
    पुराने अच्छे दिनों को फिर से वापस ला सकते हैं। इस प्रयोग के लिएआप धन त्रयोदशी पर 9 गुणित 9 का चांदी के पतरे पर स्वस्तिककटवाएं। उसी दिन से रोली मिश्चित दूध में डाल दें। दीपावली की रात्रिमें स्वस्तिक को पुनः पंचत्त्व से स्नान करवाकर शुद्ध कर लें। फिरएक चिपकाते जाएँ। जब ‘नागकेशर’ से पूरा स्वस्तिक छिप जाए तो पुनःधूप-दीप अर्पित कर 11 माला ‘ऐ हीं श्री क्लीं का जाप करें औरदीपावली के अगले दिन अपने व्यवसाय में अथवा निवास के पूजास्थलमें स्वस्तिक को स्थान दे दें। कुछ ही दिन में आप परिवर्तन महसूसकरेंगे कि आपके व्यवसाय अथवा घर में लगी नजर समाप्त होकरआर्थिक सम्पन्नता पुनः आरम्भ हो गई है।
    अब मैं आपको आर्थिक सम्पन्नता के साथ मां अन्नपूर्ण की कृपा काएक और प्रयोग बता रहा हूं। इस प्रयोग में आप तीन इतनी छोटीमटकियां लें जिनमें लगभग एक किलो दाल आदि आ जाए। दीपावलीके पूजन के समय क्रमशः 800 ग्राम साबुत काली उड़द, 300 ग्राम चनेकी दाल व 900 ग्राम लाल मसूर की दाल का भी पूजन करें। एक अन्यमटकी में पांच अलग प्रकार के अनाज भरकर पूजन करें। एक अन्यसवा मीटर काले वस्त्र कपड़े में आठ सौ ग्राम काली साबुत उड़द वइतने ही काले तिल व सवा किलो नमक के साथ एक नारियल रखें।ध्यान रखें कि यह सामग्री पूजास्थल से अलग रखनी है। फिर जबआपकी पूजा पूर्ण हो जाए तो तीन मटकी को आप अपने रसोईघर मेंस्थान दे दैं। नारियल के अतिरिक्त बाकी सारी सामग्री काले कपड़े मेंलपेटकर एक पोटली का रूप दे दें। किसी चौराहे पर वह पोटली रखदें तथा नारियल वहीं फोड़ दें। फिर घर वापस आ जाएं। वापस आतेसमय आपको पीछे कुछ भी सुनाई दे, परंतु मुड़कर नहीं देखना है। घरमें हाथ-पैर धोकर ही प्रवेश करें। इस प्रयोग में आप अपने निवासतथा घर के प्रत्येक सदस्य पर लगी नजर से मुक्ति पा जाएंगे। नजरलगने के कारण धनागमन में जो रुकावट आती है वह दूर हो जाएगीतथा मां अन्नपूर्णा की कृपा भी प्राप्त होगी। सबसे बड़ा लाभ यह है कि     यदि आप राहु अथवा शनिकृत पीड़ा भोग रहे हैं तो उससे भी आएकोमुक्ति मिल जाएगी।
    दापावली के दिन आप पीपल के पांच साबुत पत्तों की व्यवस्था कर हे।दीपावली पूजन से पहले प्रत्येक पत्ते पर एक पनीर का टुकड़ा व कोईभी छेने की मिठाई रखकर आटे का दीपक बनाकर उसके साथ जलमें दूध, शहद व शक्कर मिलाकर पीपल के वृक्ष के नीचे पत्ते अर्पित करदें। अगरबत्ती, दीपक व दूध भी अर्पित कर दें और हाथ जोड़करवापस आ जाएं। आते समय पीछे मुड़कर न देखें। इसके बाद अगलेशनिवार व मंगलवार को भी यही क्रिया करनी है। बस, इसमें आपकोपत्तों का प्रयोग नहीं करना है। एक पनीर के टुकड़े के साथ जल वअगरबत्ती, दीपक अर्पित करने हैं। चमत्कार आप देखेंगे।
    यदि आपका व्यापार अधिक नहीं चल रहा है तथा उसमें बाधाएं बहुतआ रही हैं तो आप दीपावली अथवा किसी अन्य शुभ समय में रात्रिमें अभिमंत्रित ‘व्यापार वृद्धि यंत्र’ को पंच तत्व से शुद्ध कर नागकेशरअर्पित करें व मूंगे की माला से निम्न मंत्र का 11 माला जाप करें।इस उपाय से आपके व्यवसाय में जो गति आएगी उसे आप स्वयंमहसूस करेंगे।
    मंत्र है-‘ॐ० श्रीं सर्वविष्न हरस्तस्मै गणाधिपतयै नमः'॥।

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