घडी / काल पुरुष द्वारा फलादेश
घड़ी / काल पुरुष द्वारा फलादेश
काल पुरुष अर्थात् समय, पूरे ब्रह्माण्ड का भगवान है। पूरी
सृष्टि समय के आधिन है। समय प्रत्येक प्रश्न का उत्तर है। समय
सदैव गतिशील है। इस संसार में ऐसा कोई नहीं जो इसका स्थान
ले पाये। जिस प्रकार समय के अनुसार ग्रहों का गोचर फलादेश
हेतु उपयोग करते हैं ठीक उसी प्रकार स्वयं समय अर्थात् काल
पुरुष अर्थात् घड़ी (समय सूचक यंत्र) आपके पूछे गये प्रश्नों के
उत्तर दे पाने में सक्ष्म है। घड़ी का उपयोग समय ज्ञात करने के
अलावा प्रश्नों के उत्तर हेतु भी उपर्युक्त है। इस विधा से आप
निश्चय ही पूछे गये प्रश्नों का सही-सही एवं सटीक उत्तर दे
पायेंगे। नीचे दिये गये नियम, विधि तथा संयोग संख्या का अध्ययन
करें -
नियम
प्रश्नकर्त्ता अपने पूछे गये प्रश्नों के उत्तर हेतु संवेदनशील
होना चाहिए।
•निराधार या वेमन से पूछे गये प्रश्नों के उत्तर देना व्यर्थ
है।
एक समय में एक से ज्यादा या एक के बाद एक प्रश्नों
के उत्तर देने हेतु विशेष 'S' का उपयोग करें।
कार्य के करने या पूर्ण होने के पूर्व पूछे गये प्रश्नों के
उत्तर देना चाहिए।
प्रश्नकर्त्ता के संभावित प्रश्न
परीक्षा प्रतियोगिता में सफलता प्राप्त होगी अथवा नहीं?
साक्षात्कार में सफल होऊँगा या नहीं?
मेरा कार्य सिद्ध होगा या नहीं?
मुकदमें में हार होगी या जीत?
बीमारी ठीक होगी या नहीं?
यात्रा में सफलता मिलेगी या नहीं?
वर्तमान समय में कार्य आरंभ करना/यात्रा करना ठीक
होगा या नहीं?
समय पर कार्य हो पायेगा या नहीं?
निवेश से लाभ होगा या नहीं?
आज व्यापार / व्यवसाय कैसा रहेगा?
शेयर-सट्टा से लाभ या हानि? इत्यादि
●
काल पुरुष फलादेश पद्धति
घड़ी अर्थात् समय सूचक यंत्र - आज तक आपके लिए एक
साधारण-सी वस्तु थी परंतु इसके द्वारा फलादेश विधि ज्ञात होने के
पश्चात् विशेष लगने लगेगी।
बनावट - 1 से 12 अंक एवं प्रत्येक अंकों के मध्य को पाँच
समान भागों में विभक्त किया गया है। प्रत्येक भाग 30° अर्थात्
110 / सर्वतोभद्र चक्र फलादेश
12 x 30° = 360" । ठीक वैसे ही जैसा हमारे जन्म कुण्डली के 12
भाग। तीन सूईयाँ घण्टा, मिनट तथा सेकण्ड। प्रत्येक सूई की
• गतिमान अवधि भिन्न 2 होती है। घण्टे की सई एक अंक से दूसरे
अंक पर जाए तो एक घण्टा, मिनट की जाए तो 5 मिनट तथा
सेकण्ड की जाए तो 5 सेकण्ड। सरल है - आपको पहले से
ज्ञात
।
-
फलादेश विधि
कोई भी यंत्र तभी कार्य सफलता से कर पाते हैं जब उसके
सभी पुर्जे (parts) नियम के अनुसार अपना-अपना कार्य करें। इसी
क्रम में घड़ी से फलादेश करने हेतु घड़ी की सूईयों का आपसी
संयोग तथा प्राप्त संख्या का उपयोग करते हैं। नीचे संयोग तथा
संख्या निर्धारण की विधि विस्तार से दी जा रही है -
मान
घण्टे की सूई/मान 'H' है। अतः घण्टे की सूई का संबोधन H
से करेंगे। इसी क्रम में मिनट के लिए 'M' तथा सेकण्ड के लिए 'S'का उपयोग करें।
H को प्रश्नकर्त्ता का प्रश्न मानेंगे एवं M तथा S को प्रश्नकत्तां के उत्तर के लिये उपयोग में लेंगे।
प्रश्नकर्त्ता के प्रश्नों के उत्तर हेतु H से M तथा H से S तक
के संयोग संख्या का उपयोग करेंगे।
विशेष
प्रश्न का उत्तर 'हा' या 'ना' के अतिरिक्त बाधा युक्त विलंब या सहयोग आदि से देते हैं। ध्यान रखेंगे 'M' से अधिक 'S' प्रभावशाली होता है। अर्थात् S के द्वारा दर्शाया गया। फल अंतिम होगा।
जिस समय आपकी दृष्टि घड़ी पर जाए चाहे घड़ी बंद ही क्यों न हो या घड़ी वास्तविक समय से आगे-पीछे ही क्यों न हो, चाहे
S की सूई ना हो, फलादेश कर दें।
मान लें - यदि किसी प्रश्न का उत्तर M की गणना से 'हाँ' में हो और S की गणना से 'ना' में हो तो अंततः उत्तर ना होगा। इसी क्रम में यदि प्रश्नकर्त्ता के उत्तर में M द्वारा 'ना' हो जाए तथा S द्वारा 'हाँ' हो तो उत्तर अंततः 'हाँ' होगा । संयोग संख्या निर्धारण विधि-1
प्रश्नकर्त्ता जब प्रश्न पूछे उस समय यदि
H की सूई यदि 12 एवं 1 के मध्य में हो तो प्राप्त संयोग संख्या 1 मानें।
H की सूई यदि 1 एवं 2 के मध्य में हो तो प्राप्त संयोग संख्या 2 है।
H की सूई यदि 2 से 3 के मध्य में हो तो प्राप्त संयोग संख्या 3 मानें ।
H की सूई यदि 3 से 4 के मध्य में हो तो प्राप्त संयोग संख्या 4 मानें ।
H की सूई यदि 4 से 5 के मध्य में हो तो प्राप्त संयोग संख्या 5 मानें।
H की सूई यदि 5 से 6 के मध्य में हो तो प्राप्त संयोग संख्या 6 मानें।
H की सूई यदि 6 से 7 के मध्य में हो तो प्राप्त संयोग संख्या 7 मानें।
H की सूई यदि 7 से 8 के मध्य में हो तो प्राप्त संयोग संख्या 8 मानें।
3 H की सूई यदि 8 से 9 के मध्य में हो तो प्राप्त संयोग संख्या 9 मानें।
H की सूई यदि 9 से 10 के मध्य में हो तो प्राप्त संयोग संख्या 10 मानें।
H की सूई यदि 10 से 11 के मध्य में हो तो प्राप्त संयोग संख्या 11 मानें।
H की सूई यदि 11 से 12 के मध्य में हो तो प्राप्त संयोग संख्या 12 मानें l
अभी तक आपने पढ़ा सूई से संयोग संख्या कैसे निर्धारित
करते हैं। इसके पश्चात् सीखेंगे H से प्राप्त संयोग संख्या तथा M
से प्राप्त संयोग संख्या आपस में मिलकर दूसरी संयोग संख्या का
निर्माण करते हैं जो फलादेश की कुंजी है।
संयोग संख्या निर्धारण विधि-2
यदि H की सूई 12-1 के मध्य हो तो प्राप्त संयोग संख्या 1 होगी तथा M की सूई 1-2 के मध्य हो तो प्राप्त संयोग संख्या 2 होगी ।
अब H से अर्थात् 1 से M तक अर्थात् 2 तक गिनें - प्राप्तसंख्या ( संख्या नं. 1 = 1 तथा संख्या नं. 2=1 अर्थात् 1+1=2) 2
है।
पुनः M से अर्थात् 2 से H तक अर्थात् 1 तक गिनें.
2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 1+1+1 +1 +1 +1 +1 +1 +1 +1 +1 +1 +1 = 12
प्राप्त संयोग संख्या 12 अब आपके पास फलादेश हेतु संयोगसंख्या प्राप्त है - 2/12
यदि H की सूई 12-1 के मध्य हो तो प्राप्त संयोग संख्या 1 होगी तथा M की सूई 2-3 के मध्य हो तो प्राप्त संयोग संख्या 3 होगी ।
अर्थात् फलादेश हेतु प्राप्त संयोग संख्या (1 से 3 तक गिनें तथा3 से 1 तक गिने) प्राप्त संयोग संख्या 3/11
यदि H की सूई 12-1 पर तथा M की सूई 3-4 के मध्य हो तो 1 से 4 तक गिने तथा पुनः 4 से 1 तक गिने । प्राप्त फलादेश संयोग संख्या 4/10
यदि H की सूई 12-1 पर तथा M की सूई 4-5 के मध्य हो तो 1 से 5 तक गिने तथा पुनः 5 से 1 तकगिने । प्राप्त फलादेश संयोग संख्या 5/9
यदि H की सूई 12-1 के मध्य पर तथा M की सूई 5-6 के मध्य हो तो प्राप्त फलादेश संयोग संख्या 6/8
यदि H की सूई 12-1 के मध्य पर तथा M की सूई 6-7 के मध्य हो तो प्राप्त फलादेश संयोग संख्या 7/7
यदि H की सूई 12-1 के मध्य पर तथा M की सूई 7-8 के मध्य हो तो प्राप्त फलादेश संयोग संख्या 8/6
यदि H की सूई 12-1 के मध्य पर तथा M की सूई8-9 के मध्य हो तो प्राप्त फलादेश संयोग संख्या 9/5
यदि H की सूई 12-1 के मध्य पर तथा M की सूई9-10 के मध्य हो तो प्राप्त फलादेश संयोग संख्या10/4
यदि H की सूई 12-1 के मध्य पर तथा M की सूई10-11 के मध्य हो तो प्राप्त फलादेश संयोग संख्या11/3
यदि H की सूई 12-1 के मध्य पर तथा M की सूई 11-12 के मध्य अर्थात् H से प्राप्त संयोग संख्या1
तथा तथा M से प्राप्त संयोग संख्या 12 अर्थात् फलादेश 12/2
संयोग निर्धारिण विधि-3
यदि H की सूई 12-1 के मध्य हो तो प्राप्त संयोग संख्या 1 होगी तथा S की सूई 1-2 के मध्य हो तो प्राप्त संयोग संख्या 2 होगी।
अब H से अर्थात् 1 से S तक अर्थात् 2 तक गिनें - प्राप्त संख्या (संख्या नं.1=1 तथा संख्या नं. 2=1 अर्थात् 1+1=2) 2 है।
पुनः S से अर्थात् 2 से H तक अर्थात् 1 तक गिनें प्राप्त संयोग संख्या 12 अब आपके पास फलादेश हेतु संयोग संख्या प्राप्त है - 2/12
यदि H की सूई 12-1 के मध्य हो तो प्राप्त संयोग संख्या 1 होगी तथा S की सूई 2-3 के मध्य हो तो
प्राप्त संयोग संख्या 3 होगी।
अर्थात् फलादेश हेतु प्राप्त संयोग संख्या (1 से 3 तक गिनें तथा उसे 1 तक गिने) प्राप्त संयोग संख्या 3/11
यदि H की सूई 12-1 पर तथा S की सूई 3-4 के मध्य हो तो 1 से 4 तक गिने तथा पुनः 4 से 1 तकगिने । प्राप्त फलादेश संयोग संख्या 4/10
यदि H की सूई 12-1 पर तथा S की सूई 4-5 केमध्य हो तो 1 से 5 तक गिने तथा पुनः 5 से 1 तकगिने। प्राप्त फलादेश संयोग संख्या 5/9
यदि H की सूई 12-1 के मध्य पर तथा S की सूई5-6 के मध्य हो तो प्राप्त फलादेश संयोग संख्या 6/8
यदि H की सूई 12-1 के मध्य पर तथा S की सूई6-7 के मध्य हो तो प्राप्त फलादेश संयोग संख्या 7/7
यदि H की सूई 12-1 के मध्य पर तथा S की सूई7-8 के मध्य हो तो प्राप्त फलादेश संयोग संख्या8/6
यदि H की सूई 12-1 के मध्य पर तथा S की सूई8-9 के मध्य हो तो प्राप्त फलादेश संयोग संख्या 9/5
यदि H की सूई 12-1 के मध्य पर तथा S की सूई 9-10 के मध्य हो तो प्राप्त फलादेश संयोग संख्या 10/4
यदि H की सूई 12-1 के मध्य पर तथा S की सूई10-11 के मध्य हो तो प्राप्त फलादेश संयोग संख्या11/3
यदि H की सूई 12-1 के मध्य पर तथा S की सूई 11-12 के मध्य अर्थात् H से प्राप्त संयोग संख्या 1तथा S से प्राप्त संयोग संख्या 12 अर्थात् फलादेशसंयोग संख्या 12/2
संयोग संख्या से फलादेश
संयोग-फल
1/1-उत्तम सफलता
3/11-सफलता, अनुकूल, अच्छा
5/9-अच्छे परिणाम, शुभ, अनुकूल
6/8-पूर्ण असफलता
2/12-बाधा तथा विलंब के पश्चात् भी असफलता
7/7-अत्यधिक परेशानी तथा कलह युक्त फल विचाराधीन
संयोग फल
H/M
1/1-सर्वश्रेष्ठ निर्विघ्न तथा अनुकूल फल प्राप्त होंगेऐसे समय किये गये प्रश्नों के उत्तर 'हाँ' में होंगेअर्थात् कार्य सिद्धि तथा सफलता मिलेगी।
3/11यह संयोग अच्छे हैं। ऐसे समय-संयोग में प्रश्नकर्त्ताका उत्तर सफलता तथा अनुकूल होगा। उत्तर 'हाँ' मेंअर्थात् कार्यों में सफलता मिलेगी।
5/9 संयोग बलवान है यह संयोग भी अच्छे हैं। उत्तर 'हाँ' में दें। कार्यों में(क्रम से) 5/9, सफलता प्राप्त होगी।
6/8संयोग बुरे है। उत्तर सीधे-सीधे 'ना' में दें अर्थात्प्रश्नकर्त्ता का कार्य पूरा नहीं होगा। असफलतातथा विघ्न के कारण कार्य अपूर्ण ही रह जायेगा।
2/12यह एक प्रतिकूल संयोग है। प्रश्नकर्त्ता कार्यबाधित एवं विलम्ब के कारण अपूर्ण रह जायेगा।
4/10बुरे संयोग है। परिश्रम के पश्चात् भी कार्य होने मेंसंदेह रहेगा - अर्थात् कार्य नहीं होगा।
7/7प्रतिकूल संयोग है। ऐसे कार्यों के पूरे करने मेंप्रश्नकर्त्ता को काफी परेशानी तथा तनाव का सामना करना पड़ेगा। फल विचाराधीन रहेगा।
संयोग बल उत्तरोत्तर घटा हुआ मानें - 6/8, 2/12, 4/10, 7/7
4/10
संयोग
H/M- S
1/1-1यह संयोग बढ़िया है। ऐसे समय में पूछे गये प्रश्नोंके फल श्रेष्ठतम रूप से प्राप्त होंगे।
1/1 - 2यहाँ ध्यान से समझें & H तथा M के संयोग तोअच्छे हैं पर H/S के संयोग 2/12 हो तो ऐसे कार्यफलित होते-होते रह जायेगा अथवा विलंब तथाअधूरे रूप से फलित होगा ।
1/1 - 3उत्तम संयोग है। H/M - 1/1 तथा H/S - 3/11दर्शा रहे हैं। फल सफलतापूर्वक प्राप्त होगा।
1/1 - 4 प्रतिकूल संयोग है। H/M के संयोग उत्तम है परंतुH/S के संयोग 4/10 - Hard luck अर्थात् दुर्भाग्यदर्शा रहा है। प्रश्नकर्त्ता के कठिन परिश्रम के पश्चात्
भी कार्य सिद्ध होने में संदेह है।
1/1 - 5
अच्छे संयोग है। H/M के 1/1 तथा H/S - 5/9कार्यों में सफलता । प्रश्नकर्त्ता को सफलता मिलेगी,कार्य सिद्ध होगा।
1/1-6 प्रतिकूल संयोग है। H/S के संयोग 6/8 है। अतःकार्यों में आशा के विपरीत असफलता प्राप्त होगी।
1/1 - 7यह संयोग H/M द्वारा 7/7 है तथा H/S द्वारा 7/7ऐसे समय में किया गया प्रश्न बहुत तनाव तथापरेशानियों के साथ संभावित है।
1/1- 8यह संयोग पुनः प्रतिकूल तथा असफलता देने वालाहै। प्रश्नर्त्ता का कार्य सिद्ध नहीं होगा।
नोट : 6/8 या 8/16, 2/12 तथा 12/2, 4/10 या 10/4,5/9 या 9/5 इन सभी संयोगों का फल एक जैसा होगा।
2/12 - 12;4/10 - 10;6/8-8;7/7-7
ऐसे सभी संयोग जिनमें H/M या
H/S दोनों अच्छे संयोग संख्या
दर्शाये - फल उत्तम तथा अनुकूल होंगे।
1/1 - 1;3/11-3 या 115/9 - 5 या 9
ऐसे सभी संयोग संख्या जो H/M के
साथ-साथ H/S में भी हो जो प्रतिकूलहै। प्रश्नकर्त्ता के प्रश्न का फल सीधे-सीधे प्रतिकूल कहें यहाँ प्रश्नकर्ता अपने कार्य में असफल रहेगा।
यदिH/M - अनुकूल परंतु H/S - प्रतिकूल
फल बाधित रहेंगे। विलंब तथा अधूरे
ही रह जायेंग
यदि H/M प्रतिकूल तथा H/S अनुकूल
थोड़ी परेशानी, बाधा तथाकठिनाइयों
से कार्यसिद्ध होगा। प्रश्नकर्त्ता को
सार्थक प्रयास करना पड़ेगा।
घड़ी की ही भाँति जन्म कुण्डली में भी 12 भाव होते हैं। प्रत्येक दिन मेष से मीन राशि लगभग 2-2 घण्टों के लिए लग्न में
उदय होती है । चंद्रमा प्रत्येक राशियों में सवा दो दिनों तक गोचर करते हैं।फलादेश करते समय हम लग्न से चंद्र राशि का विचार करते हैं। इसी क्रम में लग्न नवांश तथा चंद्र नवांश का भी विचार फलादेश में सूक्ष्मता के लिए करते हैं।आप फलादेश हेतु नीचे दिये गये समीकरण समझें -
लग्न = घण्टे की सूई ।
चंद्रमा =मिनट की सूई
नवांश= सेकण्ड की सूई ।
जहाँ लग्न से चंद्रमा एवं चंद्रमा की नवांश राशि 6, 8, 12, 2/12, 4/10 हो तो फल बाधित प्रतिकूल, अशुभ होता है वैसे ही
घण्टे की सूई से मिनट एवं सेकण्ड की सूई यदि
शुभ/अनुकूल/सफलता
अच्छे परिणाम
1/1
3/11
5/9
और
अशुभ/प्रतिकूल/विफलता
बुरे परिणाम
2/12
7/7
6/8
4/10
हो तो पूछे गये प्रश्न का उत्तर/परिणाम प्राप्त संयोग जैसाहोता है। यहाँ सदैव ध्यान रखें कि प्रश्नकर्त्ता वास्तव में प्रश्नों केप्रति संवेदनशील है। बेमन या जाँचने के ख्याल से किये गये प्रश्नों का उत्तर देना व्यर्थ होगा।
नियम
यदि H की सूई 1-2 के मध्य हो तो 2 से गिनना आरंभ करना है। यदि 2-3 के मध्य हो तो 3 से, 3-4 के मध्य हो तो 4 से, 4-5
के मध्य हो तो 5 से, 5-6 के मध्य हो तो 6 से, 6-7 के मध्य हो तो 7 से, 7-8 के मध्य हो तो 8 से, 8-9 के मध्य हो तो 9 से, 9-10
के मध्य हो तो 10 से, 10-11 के मध्य हो तो 11 से तथा 11-12 के मध्य हो तो 12 से गिनना आरंभ करें। इसी प्रकार M तथा S की गणना करें।
सेकेण्ड की सूई का महत्त्व तथा निर्णय सर्वाधिक महत्वपूर्ण
है। तात्पर्य यह है कि यदि -
H तथा M के गणना से यदि 1/1, 3/11 या 5/9 आ रहा हो
तथा H तथा S की गणना से 2/12, 4/10, 6/8 तथा 7/7 दिखाये
तो फलों में स्वतः बाधा, विलंब, असफलता तथा तनाव रहेगा।
H तथा M की गणना से यदि 2/12, 4/10, 6/8 अथवा 7/7
आये परंतु H तथा S की गणना से 1/1, 3/11 तथा 5/9 दिखाए
तो कार्य सिद्धि में बाधा तथा विलंब के पश्चात् अंततः सफलता
अवश्य प्राप्त होगी। यहाँ आवश्यकता होगी सार्थक प्रयास करने
की।
यदि H तथा M की गणना के साथ-साथ S की गणना में
HMS
2 12 12
HMS
7/7/7
HMS
688
HMS
4 10 10
दिखाये तो पूछे गये या किये गये कार्यों में असफलता 100 %प्रतिशत रहेगा। यहाँ कार्य सिद्धि असंभव होगा।
यदि H तथा M की सूई सभी अच्छे परिणाम दिखाये, जैसे -
1/1, 3/11, 5/9
S की सूई भी H की सूई से मिलकर1/1
3/11 तथा5/9दिखाये तो कार्यों मेंसफलता निःसंदेह प्राप्त होगी।
पूछे गये प्रश्न या प्रश्नकर्ता का प्रश्न महत्त्वपूर्ण होना चाहिए।अनायास या कोमल या जाँचने के लिए पूछे गये प्रश्नों के उत्तर सटीक नहीं होंगे। अतः ऐसे प्रश्नों के उत्तर ना दें।
कार्यों की सफलता हेतु समय का चयन
जब घड़ी H | M | S द्वारा
1/1, 3/11 या 5/9 दिखाये उसी समय यात्रा, कार्य, वार्तालाप
लेन-देन, मुहूर्त्त आरंभ करें।
जब घड़ी H | M | S द्वारा
2/12, 4/10, 6/8 या 7/7 दिखाये तो सभी संवेदनशील,
महत्त्वपूर्ण कार्य, बहस, निवेश, शुभ कार्य, यात्रा, वाद-विवाद वर्जित
रखें।
अच्छे/ अनुकूल समय सारिणी में व्यापार, व्यवसाय करना,निवेश तथा वायदा बाजार में सौदा करना, आयात-निर्यात करना,
फार्म भरना या आवेदन करना, या घर से बाहर जाना, किसी के कार्यालय में पर्दापण करना इत्यादि अच्छे परिणाम दिलाएगी।