नव अंक प्रश्नोत्तरी
नौ अंक प्रश्नोत्तरी
उपर्युक्त अंक-चक्र में प्रभु सुमिरन व अपने प्रश्न का
चिन्तन करते हुए तर्जनी अंगुली रखिए और अंकानुरूप फल
निम्न प्रकार समझिए -
अंक एक - आपका भाग्योदय होने वाला है। आप सुअवसर
कदापि न गवायें। सक्रियता बनाए रखें। आपको सफलता अपने
परिश्रम, किसी की सहायता या ईश्वर अनुकम्पा से प्राप्त होगी।
अंक दो - आपको विश्वास नहीं है कि आपका कार्य बन जायेगा।
आप चिन्ता मुक्त होकर विवेक समस्त बुद्धि से आत्मविश्वास
सहित कार्य में संलग्न हो जाईए, सफलता आप मिल जायेगी।
संकोच लज्जा और निराशा को पास न फटकने दें ।
अंक तीन- आप जिस कार्य का शुभारम्भ करना चाहते हैं, उसे
शरू कर दें। प्रारम्भिक अड़चनों से न घबरायें। कार्य को पूर्ण
मनोयोग से करते जाएं। आपको स्वतः लगने लगेगा कि सफलता
मिलने लगी है।
अंक चार- आप चित्त की चंचलता, अस्थिरता और आलस्य के
कारण कार्य पर पूरा ध्यान नहीं दे रहे हैं। परामर्श लेने की फिराक
में न रहें। आप अपने साधनों के बल पर कार्य करते जायें, तभी
सफलता के आसार बनेंगे । उतार-चढाव उथल-पुथल से परेशान
कदापि न हों, वरना कार्य में सफलता संभव न हो सकेगी।
अंक पांच- हाथ पर हाथ रख कर न बैठें। आपको शीघ्र ही शुभ
सूचना और शुभ
अवसर मिलने वाला है। यात्रा भी करनी पड़
सकती है। यात्रा से बचे नहीं। यह भाग-दौड़ जीवन में एक नया
परिवर्तन ला देगी और सफलता तो आपकी धरोहर होगी।
अंक छह- बिना सहायता के आपका कार्य नहीं बनेगा । अतः
विपरीत लिंग की सहायता से मत चूकें । तुरन्त सक्रिय होकर अपना
कार्य बना लें।
अंक सात - दूसरों पर भरोसा मत करें। सलाह के चक्कर में मत
भटकें। आपका कार्य अपनी बुद्धि-चातुर्य से ही होगा ! अतः स्वयं
योजना बनाकर कार्य का श्री गणेश कर दें। सफलता अवश्य
मिलेगी ।
अंक आठ -सफलता संदिग्ध है । इस समय अपने भी पराए हो
गए हैं ।अतः इष्ट साधना करो और कर्मयोगी बनकर अपना कार्य
करो,तभी कुछ सफलता मिल पायेगी । वरना तो विफलता ही
हाथ लगेगी।
अंक नौ -सफलता देर से मिलेगी परन्तु अवश्य मिलेगी । अतः
निराश न होकर अपना कार्य करते रहो। बिना श्रम के तो सफलता
संदिग्ध है। बाधाओं से मत घबराओ ।