धन सहम

धन सहम
जातक की कुण्डली में एक ऐसा
स्थान जहाँ ग्रहों का गोचर या वेध  पड़े तो जातक धन संबंधित मामलों में लाभ अथवा हानि आदि का फल प्राप्त करता है। कुण्डली के इस स्थान को धन-सहम कहते हैं।

धन-सहम स्थान साधन

जन्म कुण्डली में चंद्रमा एवं राहु के राशि अंशों को जोड़ कर दो से भाग देने पर जो शेष बचे उसे धन-सहम कहते हैं।
उदाहरण
चन्द्र- राशि/अंश/कला/विकला
7/10/10/20
+
राहु-राशि/अंश/कला/विकला
1/20/10/10
=प्राप्त योग (8/30/20/30)
÷2
=4/15/10/15

अर्थात् धन सहम सिंह राशि के 15°-10-15" पर स्थित है।
कुण्डली में यह स्थान ग्रहों के गोचर या वेधन से जातक को प्रभावित करता है तथा धन लाभ या हानि देता है। जैसा ग्रह वैसा
फल ।

राहु और चंद्रमा के इस मध्य अंश पर प्रत्येक ग्रहों का गोचर / वेधनः
ग्रह-वेधन/गोचर
चद्र-एक माह में 2 बार
सूर्य-एक वर्ष में 2 बार
बुध-एक वर्ष में 2 बार
शुक्र-एक वर्ष में 2 बार
मंगल-लगभग दो वर्षों में 4 बार
गुरु-लगभग 12 वर्षों में 4 बार
शनि-लगभग 30 वर्षों में 4 बार
रा/के-लगभग 18 वर्षों में 4 बार

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