चालीसा प्रश्न विचार

चालीसा प्रश्न विचार 
ज्योतिर्विद को चाहिए कि वह पृच्छक से अपने इष्ट देव का स्मरण
करने को कहे, तदोपरान्त अपने प्रश्न को मन में विचारते हुए,
तर्जनी अंगुली अंक चक्र में रखवाये, तब अंक को ध्यान से देखकर
याद कर ले और पृच्छक से कहे कि अब अंगुली हटा ले । बाद
में प्रश्न का उत्तर पढ़कर पृच्छक को बतला दे। १ से ४० तक की
अंक संख्या के उत्तर निम्न प्रकार समझिए,
१ - हे पृच्छक ! धीरे-धीरे सन्तोष के साथ प्रयत्न कर, जल्दी न
कर, काम बन जायेगा। थोड़ा विलम्ब जरूर होगा।
२- हे पृच्छक ! कार्य की सफलता में सन्देह है। इस कार्य के
करने में बाधायें अधिक हैं और लाभ कम है। प्रयास करने पर
थोड़ी सफलता अवश्य मिलेगी।
३- हे पृच्छक ! इस कार्य के पीछे हाथ-धोकर न पड़ क्योंकि इसमें
सफलता नहीं मिलेगी। कोई और योजना बनाकर उसमें ध्यान
लगा ।
४ - हे पृच्छक ! चाहकर भी धन लाभ नहीं हो सकेगा। इष्ट
साधना करने पर थोड़ी सफलता अवश्य मिलेगी। हमारी राय है
कि आप प्रतिदिन एक माला 'ॐ नमो विष्णुवे नमः मन्त्र की जपें ।
५- हे पृच्छक ! प्रश्न उत्तम है । प्रयास करते रहो लाभ होगा
और सबके सहयोग से मनोनुकूल कार्य बन जायेगा। पूर्णिमा को
सत्यनारायण की कथा करें, मार्ग की बाधाएं दूर होंगी।
६- हे पृच्छक ! आप अपना समस्त रहस्य मित्र या दूसरों के सम्मुख
प्रकट कर देते हैं, इसीलिए आपका कार्य बन नहीं पाता। आपके
मित्र या परिचित ही आपके दुश्मन बन जाते हैं। 'ॐ श्री हनुमते
नमः' मन्त्र की एक माला प्रतिदिन करें आपका कार्य कुछ महीनों
में बन जायेगा। लेकिन अपनी योजना दूसरों के सम्मुख प्रकट न
७- हे पृच्छक ! सबकी राय लेकर निर्भीकता से अपना कार्य करो ।
( ६८ )
आलस्य अस्थिरता और घबराहट को पास न फटकने दो,अपितु
सुक्त प्रयास करो, निःसन्देह आपका कार्य बन जायेगा।
हे पृच्छक ! कार्य कठिन है तो क्या हुआ। ईश्वर पर विश्वास
-
रखो धन की चिन्ता मत करो। ॐ नमो विष्णुवे नमः' मन्त्र की
एक माला प्रतिदिन जपो और सत्त प्रयास करते रहो। बाधाएँ
दूर होंगी और लाभ अवश्य होगा।
e - हे पृच्छक ! तेरे अनेक शत्रु हैं जो बाधाएँ लाते हैं। शत्रुओं
से सर्तक रहाऔर किसी की बात पर आँख मूंदकर विश्वास मत
करो। स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए प्रयत्न जारी रखो । कार्य सिद्ध
हो जायेगा, थोड़ा विलम्ब होने की संभावना अधिक है।
१० - हे पृच्छक ! मानसिक अस्थिरता और कार्य संबंधी अज्ञान
के कारण ही कार्य बनने की संभावना प्रतीत नहीं होती है। कुसंगति
से बचें और आत्म विश्वास के साथ कार्य करोगे तो निश्चय ही
सफलता मिलेगी।
११- हे पृच्छक ! कठिन कार्य करने का बीड़ा उठाया है तो कदापि
न हिम्मत हारें। ईश्वर पर विश्वास रक्खें और धैर्य, विश्वास व
दृढ़ता के साथ कार्य करें। 'ॐ नमः शिवाय' मन्त्र की एक माला
प्रतिदिन करने से कार्य सरलता के साथ हो जायेगा ।
१२
हे पृच्छक ! जल्दी अच्छे दिन आने वाले हैं। आप इष्ट
साधना करते रहो । दान-पुण्य करते रहो । आलस्य त्याग कर
निज कार्य में पूरा ध्यान लगाओ। कार्य बनेगा और सुख-समृद्धि
आप के चरणों में लोटपोट होने लगेगी।
१३ - हे पृच्छक ! आपके शत्रु अहित करने में तत्पर । अतः
सतर्कता से किसी की बात का विश्वास न करते हुए अपना कार्य
करते रहो। किसी का अहित करने की भावना मन में न लाओ।
ईश्वर आपकी सहायता करेगा और आपको सफलता अवश्य
मिलेगी ।
( ६६ )
१४ - हे पृच्छक ! कार्य की सफलता संदिग्ध है। समय का मूल्य
आपने नही पहचाना और सुअवसर हाथ से निकल गया । अतः
भविष्य में मिलने वाले सुअवसरों को कभी न गवाएँ। सतत और
सम्यक प्रयत्न के साथ-साथ समय का मोल समझें तभी कार्य में
सफलता पा सकेंगे ।
१५ - हे पृच्छक ! चिन्ता चिता से बढ़कर है। चिन्ता न करें कार्य
में मन लगायें। ईश्वर पर विश्वास रक्खें ओर आत्मविश्वास सहित
कार्य जारी रक्खें। सफलता शीघ्र मिलने वाली है।
१६ - हे पृच्छक ! आप सन्देह के कारण भ्रमित हो गए हैं। भ्रम
में न पड़ें और ईश्वर पर विश्वास रक्खें। आपका श्रम सार्थक
होने वाला है।
१७ - हे पृच्छक ! आपका कार्य ईश्वर अनुकम्पा से ही संभव है।
दुर्गासप्तशती का पाठ करो और दान-पुण्य करो, तभी कल्याण
होगा ।
१८ - हे पृच्छक ! चिन्ता कदापि न करो । मित्र-शत्रु की भली-भांति
पहचान करके सलाह लो । चापलूसी और झूठी प्रंशसा करने वाले
तो मित्र नहीं शत्रु हैं, उन पर आंख मूंदकर विश्वास मत करो उद्यम
करते रहो, मनोवांछित फल मिलने वाला है।
-
१६ हे पृच्छक ! यात्रा करने की सोच रहे हो तो अच्छी बात है।
यात्रा से लाभ हो सकता है। अतः शुभ मुहूर्त में यात्रा का श्री गणेश
करो। अभीष्ट गन्तव्य स्थान पर पहुँचकर स्वतः प्राप्त हो जायेगा ।
२० - हे पृच्छक ! आलस्य का त्याग करके अपने इष्ट कार्य को
लगातार करते रहो, लाभ होगा और आगे का समय आनन्द से
बीतेगा ।
२१ - हे पृच्छक ! मन मे व्याप्त सन्देह को दूर कर और मानसिक
अस्थिरता को त्याग दे। ईश्वर पर विश्वास रखकर सतत् प्रयास
जारी रखो मनोनुकूल बात बन जायेगी ।
( ७० )
.२२ - हे पृच्छक ! तेरी चिन्ता व्यर्थ है। तू फल की चिन्ता कदापि
न कर, अपने कार्य पर पूरा ध्यान दे क्योंकि तेरा कार्य मित्र और
बन्धु के सहयोग से शीघ्र होने वाला है।
हे पृच्छक ! कार्य कठिन है तो क्या हुआ। तेरे अपने ही
शत्रु हैं, उनसे सतर्क रहकर कार्य कर और प्रभु सुमिरन कर, अन्यथा
२३
कार्य की सफलता में सन्देह है।
२४- हे पृच्छक ! चिन्ता त्याज्य कर कर्म कर, लाभ होगा। लेकिन
धन को धार्मिक या अच्छे कार्यों को करने पर ही स्थिर रख, वरना
जैसे आया है वैसे चला जायेगा ।
२५ हे पृच्छक ! कार्य की सफलता में सन्देह है। सतत् प्रयास
करने पर आंशिक सफलता मिल सकती है।
२६ - हे पृच्छक ! समय प्रतिकूल है। भाग्य साथ नहीं दे रहा है।
अतः असफलता का मुख देखना पड़े, तो कोई बड़ी बात नहीं
होगी। बुध मन्त्र 'ॐ ब्राँ ब्रीं ब्रौं सः बुधाये नमः' का प्रतिदिन एक
माला जाप करो, बाधायें दूर होंगी।
२७ - हे पृच्छक ! शान्तचित्त होकर सक्रिय रहो हर प्रकार के कार्य
में सफलता मिलेगी। शत्रु मुँह की खायँगे । चिन्ता कदापि मत
करना वरना मानसिक अस्थिरता अहितकर होगी।
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२८ - हे पृच्छक ! उचित ढंग और सम्यक प्रयास से ही सफलता
संभव है। शत्रु हावी होने का प्रयास करेंगे, उनसे सतर्क रहो और
उचित सलाह लेकर कार्य करते रहो. सब ठीक हो जायेगा।
२६ - हे पृच्छक ! लालच बुरी बला है। लालच वश आप जो कार्य
करना चाहते हैं, इसमें लाभ कम, बाधाएँ ज्यादा हैं। धन लम्बे
समय तक फंसा रहेगा। अतः कोई दूसरा कार्य करने की सोच।
३० - हे पृच्छक ! तुम स्वेच्छाचार छोड़ दो, इस प्रकार मनमानी
करते रहने से कार्य बिगड़ जायेगा। सम्यक प्रयत्न, सलाह और
स्वभावानुकूल कार्य करने पर ही सफलता संभव है।
( ७१ )
३१ - हे पृच्छक ! अपना पूरा ध्यान कार्य में लगाओ और
इधर-उधर के भटकाव से बचो। आत्मविश्वास और सत्त प्रयास
से ही लाभ संभव है।
३२ - हे पृच्छक ! समय अनुकूल है। जो सोच रहे हो, उसे कार्य
में परिणित कर दो। विलम्ब न करो, शीघ्र ही प्रचुर लाभ होगा।
३३ - हे पृच्छक ! यदि स्वजन और इष्ट मित्र सहयोग प्रदान कर
दें तो सफलता अवश्य मिलेगी, चाहे कार्य कठिन और
श्रम-साध्य क्यों न हो ।
३४ - हे पृच्छक ! आलस्य त्याज्य कर कर्म करने को तत्पर हो
जाओ। जितनी जल्दी कार्य करोगे उतनी जल्दी सफलता पाओगे।
३५ - हे पृच्छक ! सामर्थ्य के भीतर रहकर कार्य करो, वरना कार्य
की सफलता में सन्देह है। सम्यक प्रयास और उचित सलाह के
बिना कार्य न ही करें तो बेहतर है।
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हे पृच्छक ! कार्य बन जायेगा पर देर से । इसलिए
सधैर्य कर्म करते रहो, उत्साह को मत गिराना ।
इस प्रकार आप सहजता से मन में उठने वाली शंका का
समाधान चुटकियों में कर सकते हैं।

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