विवाह बाधा निवारण

शीघ्र विवाह एवं विवाह में रुकावट
दूर करने के उपाय
अब मैं आपको कुछ ऐसे उपाय बता रहा हूं जिनके करने से विवाह में आने वाली
रुकावटें दूर होती हैं। यदि किसी अन्य कारण से विवाह नहीं हो पाता है तो आप इन
उपायों के माध्यम से लाभ उठा सकते हैं। इसमें सबसे पहली बात यह है कि आपकी
पत्रिका में विवाह योग होना आवश्यक है। आप सर्वप्रथम किसी ज्ञानी दैवज्ञ से सूक्ष्मता
से अपनी पत्रिका का अध्ययन करायें। उनसे यह पता करें कि आपकी पत्रिका में
विवाह योग है अथवा नहीं। यदि है तो क्या कारण है कि विवाह नहीं हो पा रहा है ?
यदि आप को यह पता लगे कि विवाह में कोई ग्रह रुकावट डाल रहा है तो सर्वप्रथम
उस ग्रह की शान्ति आवश्यक है। यदि आपकी पत्रिका के अनुसार कोई ग्रह ही समस्या
दे रहा है, विवाह योग भी है और विवाह नहीं हो पा रहा है तो आप आगे दिये जा रहे
उपाय कर लाभान्वित हो सकते हैं। यह उपाय मेरे अनुभवों का निचोड़ है। मैंने स्वयं कई
विवाह इन उपायों के माध्यम से करवायें हैं। मैंने अक्सर देखा है, कई लोग अपनी संतान
के विवाह के लिये काफी समय से भटक रहे होते हैं, तो वे ये उपाय करके देखे :-

* विवाह योग्य लोगों को प्रत्येक गुरुवार को नहाने वाले पानी में एक चुटकी हल्दी डालकर स्नान करना चाहिये। केसर का. भी उपयोग करना चाहिये।

* यदि ऐसे लोग गुरुवार को गाय को भोग अर्थात् दो आटे के पेड़े पर थोड़ी हल्दी लगाकर, थोड़ा गुड़ तथा चने की गीली दाल का भोग देना चहिऐ।

* भूलकर भी वृद्धों का असम्मान न करें। वृद्ध व्यक्तियों का यथा सामर्थ्य सम्मान एवं मदद करें।

* यह प्रयोग शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार से करना चाहिये। गुरुवार की शाम को पाँच प्रकार की मिठाई के साथ हरी इलायची का जोड़ा तथा शुद्ध घी के दीपक के साथ जल अर्पित करना चाहिये। यह लगातार तीन गुरुवार करना चाहिये।

* गुरुवार को केले के वृक्ष के समक्ष गुरु के 108 नामों के उच्चारण के साथ शुद्ध घी का दीपक तथा जल अर्पित करना चाहिये।

* अब मैं आपको ऐसा उपाय बता रहा हूँ जिसका प्रयोग से विवाह में कोई भी रुकावट नहीं आयेगी। जिस समय का योग आपकी पत्रिका में होगा, तो विवाह उसी समय में होगा। इसके लिये मंगलवार को प्रातः सूर्योदय काल में एक सूखा नारियल लें 300 ग्राम चूरा अर्थात् पिसी शक्कर तथा 11 रुपये का पंचमेवा मिला लें। नारियल में एक इतना बड़ा छेद करें, जिसमें आपकी अंगुली जा सके। उसमें पिसी शक्कर व पंचमेवा मिलाकर भर दें और किसी पीपल के नीचे थोड़ा गड्ढा कर दबा दें। जो शक्कर बचे उसे
गड्ढे के ऊपर ही डालकर एक पत्थर रख दें जिससे कोई जानवर उसे न निकाल पाये।
ऐसा आप लगातार 7 मंगलवार को करें। किसी भी कन्या के लिये लगातार सात मंगल
नहीं हो सकते परन्तु इसमें उनके अस्वस्थ दिनों की कोई समस्या नहीं है। इसलिये जब 
यह समस्या आये तो उपाय रोक दें और शुद्ध होने पर पुनः आरम्भ कर दें। इस प्रयोग में यह सावधानी रखनी है कि सोमवार की रात्रि से मंगलवार, प्रयोग होने तक जल नहीं
पीना है और किसी से भी बात नहीं करनी है। सात मंगल होने के बाद आप स्वयं ही
चमत्कार देखेंगे।

* यदि किसी कन्या की पत्रिका में मंगली योग होने के कारण विवाह में बाधा आ रही हो तो वह कन्या मंगल चण्डिका स्तोत्र का मंगलवार तथा शनिवार को
सुन्दरकाण्ड का पाठ करे। इससे भी विवाह बाधा दूर होती है।

* यह प्रयोग स्त्री वर्ग के लिये ही है, विशेषकर आयु होने के बाद भी विवाह होने
में बाधा आने से मुक्ति के लिये है। शुक्रवार की रात्रि में आठ सूखे छुआरे जल में उबाल
कर जल के साथ ही अपने सोने वाले स्थान पर सिरहाने रख कर सोयें तथा शनिवार
को प्रातः स्नान करने के बाद किसी भी बहते जल में प्रवाहित कर दें। यह प्रयोग भी
चमत्कारी है।

* यह प्रयोग भी सिर्फ कन्या वर्ग के लिये है। इस प्रयोग के लिये किसी भी
शुक्लपक्ष की प्रथमा तिथि को प्रातःकाल में स्नान से निवृत होने के बाद श्रीराम व सीता
के संयुक्त चित्र का षोडषोपचार पूजन के पश्चात् चित्र के सामने बैठ जायें। फिर निम्न
चौपाई का 108 बार पाठ करें। यह उपाय लगातार 40 दिन तक करना है। कन्या वर्ग
को उनके अस्वस्थ दिनों की छूट होती है, इसलिये जब तक पुनः शुद्ध न हो जायें तब
तक इस प्रयोग को रोक देना चाहिये। शुद्ध होने पर पुनः आरम्भ करें। अशुद्ध होने से
पहले तथा शुद्ध होने बाद के दिनों को मिलाकर ही दिनों की गिनती होगी। प्रभु की
कृपा से 40 दिनों में ही रिश्ता हो जाता है।
चौपाई- सुनु सिय सत्य असीम हमारी। पुजहि मनकामना तुम्हारी।।

* शीघ्र विवाह के लिये सोमवार को 1200 ग्राम चने की दाल व सवा लीटर कच्चा
दूध दान करें। जब तक विवाह न हो, तब तक यह प्रयोग करते रहना है। इस प्रयोग में
आपका विवाह योग होना आवश्यक है।

* अब मैं आपको एक ऐसा प्रयोग बता रहा हूं जो कभी भी व्यर्थ नहीं जाता है।
जिस कन्या के लिये यह प्रयोग किया जाता है, उसका विवाह शीघ्र ही हो जाता है
परन्तु उस कन्या की आयु विवाह योग्य होनी चाहिये। किसी भी पूर्णिमा को रात्रि में एक
कलश में जल भरकर उसमें एक कमल का पुष्प व एक कमलगट्टा डाल दें। फिर पाँच
सुहागिनों से उस कलश को एक चौकी पर लाल वस्त्र के ऊपर रखवायें। उस कलश
को किसी भी विद्वान व कर्मकाण्डी ब्राह्मण से "श्रीसूक्त" से अभिमंत्रित करवाकर सुहागिन
स्त्रियों से ही अभिषेक करवा कर "ॐ गं गणपत्यै नमः" मंत्र की बीस माला का जाप
उसी ब्राह्मण से करवायें। अगले दिन किसी मन्दिर में उस कलश को रखवा दें। इस
प्रयोग से कुछ ही समय में उस कन्या का विवाह अवश्य हो जायेगा।

* यह उपाय भी कन्या को करना है। इस उपाय में किसी भी
के प्रथम
शुक्लपक्ष सोमवार से भगवान शिव के नाम से सात व्रत का संकल्प लेकर व्रत आरम्भ करें। कन्या श्वेतार्क के वृक्ष पास जाकर धूप-दीप अर्पित कर जल'आचमन कर आठ पत्ते तोड़कर लाये। सात पत्तों की तो पत्तल बनाये तथा आठवें पत्ते पर कन्या अपना नाम लिखकर
भगवान शिव को अर्पित करे। व्रत का भोजन सात पत्तों की पत्तल पर ही करें तथा व्रत
पूर्ण होने के बाद श्वेतार्क के पुष्प भगवान आषुतोष को अर्पित करें। विवाह के बाद कन्या
अपने पति के साथ जाकर 108 श्वेतार्क के पुष्प की माला बनाकर भगवान शिव को अवश्य अर्पित करे।

* कन्या जब किसी कन्या के विवाह में जाये और यदि वहां पर कन्या को मेहन्दीलग रही हो तो अविवाहित कन्या कुछ मेहन्दी उस कन्या के हाथ से लगवा ले तो विवाह
का मार्ग प्रशस्त होता है।

* कन्या सफेद खरगोश को पाले तथा अपने हाथ से ही उसे भोजन के रूप में
कुछ दे। यदि विवाह में बुध रुकावट दे रहा हो तो कन्या खरगोश को हरी घास खिलाये ।

* कन्या के विवाह की चर्चा करने उसके घर के लोग जब भी किसी के यहांजायें तो कन्या खुले बालों से, लाल वस्त्र धारण कर हंसते हुए उन्हें कोई मिष्ठान खिला
कर विदा करे। विवाह की चर्चा सफल होगी।

* किसी भी शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार सात केले, सात सौ ग्राम गुड़ व एक

नारियल लेकर किसी नदी के पास जायें। कन्या को किसी नदी में पहने वस्त्र सहित
जल में डुबकी लगवा कर उसके ऊपर से एक जटा वाले नारियल को उसार कर उसी
नदी में प्रवाहित कर दें। इसमें यह अवश्य ध्यान रखें कि जो नारियल आप प्रवाहित कर रहे हैं वह कन्या की ओर नहीं आना चाहिये अर्थात् कन्या से दूर की ओर जाने वाली धारा में करना चाहिये। इसके बाद भीगे वस्त्रों में ही थोड़ा सा गुड़ व एक केला चन्द्रदेव के नाम पर और इतनी ही सामग्री सूर्यदेव के नाम पर नदी के किनारे रखकर प्रणाम करें। थोड़े से गुड़ को प्रसाद के रूप में कन्या खाये तथा बचे पाँच केले व बचा गुड़ किसी गाय को खिला दें। कुछ समय में लाभ प्राप्त होगा अर्थात् कन्या के विवाह का मार्ग प्रशस्त होगा।
* अब मैं आपको एक ऐसा प्रयोग बता रहा हूँ जो कभी भी विफल नहीं होता है।
योग व आयु होने पर 40 दिन में ही प्रभाव दिखाता है। यदि कोई बहुत ही बड़ी बन्दिश
हो तो उपाय करने से 6 माह से एक वर्ष के मध्य तो अवश्य ही प्रभाव दिखाता है। इस
प्रयोग को करने का सबसे उचित समय किसी भी नवरात्रि का गुरुवार है। इसमें लगने वाली सामग्री सात की संख्या में ही होगी। सात पीली साबुत हल्दी के रंग से रंगी
सुपारी, इसी प्रकार के सात पीले सिक्के, सात केले, सात हल्दी की गांठें, सात पीले कोई भी फूल, सात पीले जनेऊ, सात गुड़ की छोटी-छोटी डेली, सत्तर ग्राम चने की अखण्डित दाल, सत्तर सेंटीमीटर पीला कपड़ा, सात गुणित सात अंगुल अथवा सात इंच भोजपत्र का टुकड़ा तथा सात ही अंगुल लम्बी अनार की लकड़ी की कलम। इनमें से कोई वस्तु यदि पीली न मिले तो उसे हल्दी से रंगा जा सकता है। अब नवरात्रि के गुरुवार को जिस कन्या को यह प्रयोग करना है, वह प्रातः चार बजे उठकर स्नान आदि कर पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र पहने, फिर शुद्ध व स्वच्छ स्थान पर बैठ कर अपने सामने एक पट्टा रख कर उस पट्टे पर पीला वस्त्र बिछा ले। इसके बाद भोजपत्र पर निम्न यंत्र को पिसी हल्दी, गंगाजल में घोलकर अनार की लकड़ी से निर्मित कलम से यंत्र निर्माण करें:-

वस्तुयें अर्थात् सुपारी, जनेऊ, हल्दी की गांठें, गुड़, केले, पीले फूल तथा सिक्के आदि को
भी पीले वस्त्र पर रख दें और फिर धूप-दीप से इनकी पूजा करें। तत्पश्चात् माँ गौरा
पार्वती का ध्यान कर अपने विवाह के लिये शीघ्र, अति शीघ्र तथा गुणवान, धनवान व
स्वयं के अनुरूप योग्य वर प्राप्ति हेतु निवेदन करें। फिर यंत्र सहित उस पीले वस्त्र को
बांध कर एक पोटली का रूप देकर घर में किसी शुद्ध स्थान पर रख दें। यह ध्यान रखें
कि पोटली पर किसी अन्य का हाथ न लगे। माँ गौरा पार्वती की कृपा से आपका विवाह
सम्बन्ध 40 दिन के अन्दर ही हो जायेगा। इस प्रयोग की एक यह भी विशेषता है कि
यदि उपाय करते समय आपसे कोई गलती हो तो आपको कोई हानि नहीं होती है परन्तु
गलती होने पर प्रथम बार विवाह नहीं होता है। इसके लिये आपको अगली नवरात्रि में
फिर उपाय करना पड़ेगा। पुनः उपाय करने पर तो विफलता की कहीं भी संभावना नहीं
होती है।

* यदि कन्या के मंगली होने के कारण विवाह में बाधा आती है तो कन्या को
प्रत्येक मंगलवार श्री मंगल चण्डिका स्तोत्र का पाठ करना चाहिये तथा लाल मूंगे की
माला से निम्न मंत्र का जाप करना चाहिये:-
"ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं सर्वपूज्ये देवि मंगल चण्डिके हूं फट् स्वाहा"।
इसके साथ सुन्दर काण्ड का भी पाठ करना चाहिये।

* जिस कन्या का विवाह आयु होने के बाद भीं नहीं हो रहा हो तो उसे पाँच
रत्ती का पुखराज अथवा 9 रत्ती का सुनहला नाम का उपरत्न त्रिधातु (62 प्रतिशत
चांदी,26प्रतिशत तांबा व 12 प्रतिशत सोना) में जड़वा कर गुरुवार को बायें हाथ की तर्जनी
अंगुली में प्रातःकाल सूर्योदय से प्रथम घण्टे में ईशान कोण अर्थात् पूर्व व उत्तर दिशा की
ओर मुख करवाकर धारण करवा दें। धारण करने से पहले दूध, शहद व गंगाजल में
अंगूठी को शुद्ध अवश्य करना चाहिये। धारण करते समय कन्या को मानसिक रूप से
"ॐ बृं बृहस्पत्यै नमः" का जाप करना चाहिये। धारण करने के बाद गाय को भोग अवश्य देना चाहिये। उपाय को और अधिक प्रभावी बनाने के लिये 7 रत्ती का फिरोजा नाम का रत्न चांदी में जड़वा कर शुक्रवार को कनिष्ठिका में दक्षिण की ओर मुख करवाकर धारण करवा दें

* कन्या के विवाह में विलम्ब हो रहा हो तो किसी भी शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार से कन्या यह उपाय आरम्भ करे। उस गुरुवार को कन्या पीले वस्त्र तथा अगले
दिन शुक्रवार को सफेद वस्त्र धारण करे। यह उपाय पाँच गुरुवार व इतने ही शुक्रवार
करना है। इसमें यह ध्यान रखना है कि किसी भी वस्त्र को एक बार पहनने के बाद
कन्या पुनः न पहने।

* पूर्णिमा को वटवृक्ष की 108 परिक्रमा देने से भी विवाह बाधा दूर होती है।गुरुवार को वट, पीपल, केले के वृक्ष पर जल अर्पित करने से विवाह बाधा दूर होकर शीघ्र विवाह का योग बनता है।

* आयु होने के बाद भी यदि किसी कन्या का विवाह नहीं हो रहा है तो वह
कन्या यदि किसी ऐसी कन्या के विवाह के वस्त्र धारण कर ले जिसका विवाह हो रहा
है तो उसके विवाह का योग भी शीघ्र ही निर्मित होता है।

* यदि किसी कन्या का बहुत प्रयास के बाद भी विवाह न हो रहा हो तो वह
किसी भी शुक्लपक्ष के प्रथम गुरुवार को अभिमंत्रित श्री गुरु यंत्र को केले के वृक्ष में
स्थान देकर सात गुरुवार के मीठे व्रत का सकंल्प लेकर व्रत आरम्भ करना चाहिये। श्री
गुरु स्तोत्र के साथ गुरु के 108 नामों का उच्चारण करना चाहिये (गुरु के नाम प्राप्त होने
में यदि समस्या आये तो आप मुझसे सम्पर्क करें अथवा मेरी अन्य पुस्तक नवग्रह दर्पण
में से संकलित करें)। साथ ही हरिद्रा माला से गुरु के किसी भी मंत्र का जाप करें। गाय
को भोग अवश्य दें। साथ ही सांध्यकाल में दीप अर्पित करें। कुछ ही समय में विवाह की
चर्चा चलने का योग निर्मित होगा।

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