करण का फल

 

पंचांग में करण और फलादेश

जिस प्रकार से चीन मे जीवो के अनुसार मनुष्य के बारे मे कहा गया है वह करण के नाम से हमारे भारत मे बहुत पहले से ही मान्य है,व्यक्ति जिस करण मे पैदा होता है उसी प्रकार के जीव से उसकी मानसिकता को मान लिया जाता है इसका विस्तृत ब्यौरा इस प्रकार से है :-

करण क्या है?

 


तिथि का आधा भाग करण कहलाता है। चन्द्रमा जब 6 अंश पूर्ण कर लेता है तब एक करण पूर्ण होता है। एक तिथि में दो करण होते हैं- एक पूर्वार्ध में तथा एक उत्तरार्ध में। कुल 11 करण होते हैं- बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि, शकुनि, चतुष्पाद, नाग और किस्तुघ्न। कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी (14) के उत्तरार्ध में शकुनि, अमावस्या के पूर्वार्ध में चतुष्पाद, अमावस्या के उत्तरार्ध में नाग और शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के पूर्वार्ध में किस्तुघ्न करण होता है। विष्टि करण को भद्रा कहते हैं। भद्रा में शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं।

 

किस्तुघ्न, चतुष्पद, शकुनि तथा नाग ये चार करण हर माह में आते हैं और इन्हें स्थिर करण कहा जाता है। अन्य सात करण चर करण कहलाते हैं। ये एक स्थिर गति में एक दूसरे के पीछे आते हैं। इनके नाम हैं: बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज और विष्टि जिसे भद्रा भी कहा जाता है।

बव शेर चलायमान जातक स्वस्थ होता है अपने काम को करने के बाद ही सन्तुष्टि को प्राप्त करता है एक क्षेत्र के प्रति अधिकार रखता है अपनी पहिचान बनाता है अपने जीवन साथी और बच्चो की सुरक्षा को रखता है बुद्धि से काम लेता है शत्रु को परास्त करने के लिये जीजान से लगता है जीवन का बचपन और बुढापा कष्टकारी होता है जंगल पहाड आदि प्रिय स्थान होते है

बालव चीता चलायमान जातक अपनी सुरक्षा के प्रति आस्वस्त होता है भाग दौड वाले काम मे सफ़ल होता है लोग जल्दी से आदत को पहिचान नही पाते है,ऊंचे स्थानो मे रहना पसंद करता है अपने आसपास के माहौल पर अधिक ध्यान रखता है,आक्रमक होता है गजब की फ़ुर्ती होती है,दिन की बजाय रात को किये काम अधिक सफ़ल होते है पैसाइसी जासूस होता है अक्सर जीवन साथी सम्बन्धित मामले अधिक परेशान करने वाले होते है

 

कौलव सूअर चलायमान जातक का परिवार बडा होता है अपने परिवार की सुरक्षा के लिये ही धन को खर्च करना होता है निडरता होती है आवाज तेज होती है,अपनी पहिचान बनाने के लिये कई प्रकार के उपक्रम करता है नीच जाति से संरक्षण प्राप्त होता है,लोगो के अन्दर आदर का पात्र होता है गले की बीमारिया परेशान करने वाली होती है एक से अधिक रिस्ते और समाज की मान्यतातो से दूर रहना भी अच्छा लगता है विजातीय शादी और विजातीय सभ्यता की तरफ़ अधिक आकर्षित होना होता है

 

तैतिल गधा चलायमान एक स्थान पर पडे रहना भोजन और आराम की तरफ़ अधिक ध्यान देना आलसी होना चुगली करना लोगो की खबरो को प्रसारित करना कामोत्तेजना के समय मे अधिक चंचल हो जाना कहे अनुसार ही काम करना अभाव मे स्वस्थ रहना और सम्पन्नता मे बीमारियों का लगना गर्म प्रदेश अच्छे लगना आदि बाते देखी जाती है

 

गर हाथी चलायमान राज्य की चाहत रखना काम मे कम और आराम मे अधिक विस्वास करना भले रहने पर सभी के साथ चलना बिगडने पर किसी का नही होना या खूनी हो जाना रोजम्र्रा के कामो के अन्दर आलसी होना समय से सोना जागना सभी कुछ नही होना,अधिक भोजन करना बल वाले काम करने के अन्दर आगे रहना आदि

 

वणिज सांड चलायमान जल्दी से क्रोध आजाना आवारापन पर विस्वास करना किसी का कहना नही मानना पुरुष महिलाओ की तरफ़ और महिला पुरुषो की तरफ़ अधिक आकर्षित होना रहने वाले स्थान को बार बार बदलते रहना दूसरे की सम्पत्ति को प्राप्त करने के लिये जी जान लगा देना,विरोधी का डट कर मौत से भी जूझ कर सामना करना या तो परास्त होकर मर जाना या मार देना आदि बाते देखी जाती है

 

विष्टि उल्लू चलायमान पाप के कामो मे आगे रहना चोरी डकैती बलवान को भी परास्त करने की आशा रखना सभी से विरोध वाले काम करना गुप्त कामो मे लगे रहना गुप्त निवास रखना रात को अधिक सक्रिय हो जाना घर के सदस्यो के साथ उनके बालिग होने तक ही साथ देना हिंसा पर अधिक ध्यान देना शराब कबाब तामसी भोजन की रुचि बनी रहना किसी भी प्रकार के खतरे को जल्दी भांप लेने की आदत होना और खतरा आने के पहले ही पलायन कर जाना पुराने हवेली या महल जैसे स्थान मे रहना पसंद करना इतिहास की अधिक जानकारी रखना आदि

 

शकुनि चिडिया स्थिर अपनी सुरक्षा अपने आप करना अपने ही कुल के लोगो से विश्वासघात होना पति पत्नी के साथ ही जीवन मे रहना अन्य के साथ रहने मे दिक्कत का होना सामूहिक परिवार मे केवल भोजन और सुरक्षा के समय मे ही रहना लडाई झगडे अधिकतर सम्बन्धो के मामले मे ही होना आदि बाते देखी जाती है

 

चतुष्पद कुत्ता स्थिर गरीब होना लेकिन विलासी भी होना अपने पास जो है उससे अधिक दिखावा करना अपने ही कुल के लोगो से लडाई झगडा करते रहना पुरुष की वजाय स्त्रियों का अधिक क्रियाशील होना एक ही स्थान पर बने रहने की आदत होना जो मिल जाये उसी पर संतोष कर लेना सम्बन्धो के मामले मे शरीर कष्ट होना सर्व भक्षी होना आदि बाते देखी जाती है

 

नाग सर्प स्थिर स्वाभिमान को हमेशा कायम रखना अपनी कही बात को पूरा करना एक से अधिक जीविका के साधन बनाकर रखना गुप्त रूप से कार्य करना कुछ करना और कुछ साबित करना बोलने मे कडक होना जिससे एक बार मिल लिया जाये उसे आजीवन याद रखने के लिये कारण बना देना,हर छ: महिने मे रूप का बदल लेना स्वभाव मे बदलाव आजाना आदि बाते देखी जाती है

 

किस्तुघ्न कीडे मकौडे स्थिर जातक अपने कुल की रक्षा करने वाला होता है एक साथ रहना पसंद करता है किसी भी शत्रु पर मिलकर हमला करना और एक साथ दबोच लेना माना जाता है अपने से बलवान को भी परास्त कर देने की कला होती है,अलगाव मे समाप्त हो जाना अधिक गर्मी या अधिक सर्दी सहन नही कर पाना पानी वाले स्थानो मे भीड के साथ रहना आदि माना जाता है

 

विभिन्न करण में जन्मफल

करण तिथि (Karan Tithi) का आधा भाग होता है. तिथि के पूर्वार्द्ध (Purvardha) अर्थात पहले आधे भाग में एक करण।

 

उत्तरार्द्ध (Uttarardha) यानी दूसरे भाग का एक करण। इस प्रकार एक तिथि में 2 करण होते है। सूर्य और चन्द्रमा के बीच का अन्तर होने से एक करण होता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार करण की कुल संख्या 11 होती है।

 

चर करण् (Char Karan)

1) बव (Bav) 2) बालव (Balab) 3) कौलव (Koulab) 4) तैतिल (Taitil) 5) गर (Gar) 6) वणिज (Vanij) 7) विष्टि (Visti)

 

स्थिर करण (Fixed Karan)

8) शकुनि (Shakuni) 9) चतुष्पद (Chatushpada) 10) नाग (Naga) 11) किस्तुध्न (Kimsthughna)

ज्योतिष सिद्धान्त के अनुसार एक योग दो करण से मिलकर बनता है (As per the rule of astrology a yoga made from the combination of two karna)। एक करण आधे योग से बनता है। करण की संख्या मूल रूप से 11है।

 

1.बव करण(Bav karana):

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार बव करण में जन्म लेने वाला व्यक्ति धार्मिक स्वभाव का होता है(According to the Astrology, person who are born in Bav karna, they are religious)। इस करण का व्यक्ति शुभ कार्यों में मन लगाते हैं और अपने कार्य में निरन्तर स्थायी रूप से लगे रहना पसंद करते हैं। अनैतिक और धर्म विरूद्ध कार्यों से ये दूर ही रहते हैं। इनकी बुद्धि तीक्ष्ण होती है जिससे ये भ्रम में नहीं उलझते हैं। अपने कार्य एवं व्यवहार से समाज में काफी मान सम्मान प्राप्त करते हैं।

 

2.बालव(Balav):

बालव करण, व्यक्ति को धार्मिक स्वभाव प्रदान करता है। इस कारण में जन्म लेने वाला व्यक्ति धर्म कर्म में अटूट विश्वास रखता है तथा धर्मयात्रा एवं तीर्थयात्रा के द्वारा अपने जीवन को सफल बनाने का प्रयास करता है। इस करण के जातक अच्छी शिक्षा प्राप्त करते हैं(Person who are take birth on balav tithi, they get good education)। ये जीवन में काफी धन अर्जित करते हैं और धन धान्य से पूर्ण, सुखी जीवन व्यतीत करते हैं।

 

3.कौलव(Kaulav):

कौलव करण में जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव मिलनसार होता है(Person who are take birth in Kaulav karna, they are sociable)। इस करण मे जन्म लेने वाले व्यक्ति सबसे प्रेमपूर्ण और स्नेहयुक्त व्यवहार रखते हैं। इनके मित्रों की संख्या बहुत अधिक होती है और मित्रों से इन्हें समय समय पर अनुकूल सहयोग और लाभ भी प्राप्त होता है। इस करण के जातक बहुत ही स्वाभिमानी होते हैं और किसी भी हाल में अपने स्वाभिमान पर आंच नहीं आने देते हैं।

 

4.तैतिल(Taitil Karna):

ज्योतिषशास्त्री मानते हैं कि तैतिल करण में जन्म लेने वाला व्यक्ति बहुत ही सौभाग्यशाली होता है(Person who are born in Taitl karna, they are fortunate)। इस करण के जातक के पास काफी मात्रा में धन होता है। इनके जीवन में प्रेम का विशेष महत्व होता है, ये सभी को स्नेह की दृष्टि से देखते हैं। ये उत्तम मकान व सम्पत्ति के स्वामी होते हैं।

 

5.गर(Gar):

ज्योतिष सिद्धांत के अनुसार गर करण में जन्म लेने वाला व्यक्ति काफी परिश्रमी होता है(As per the Astrology, native of Gar karan are laborious and hard working)। यह भाग्य से अधिक कर्म पर विश्वास रखता है तथा जिन वस्तुओं की कामना करता है उसे अपनी मेहनत से प्राप्त कर लेता है। कृषि से सम्बन्धित कार्यों एवं घर के कार्यों में तत्पर रहता है।

 

6.वणिज(Vanij):

वणिज करण में जन्म लेने वाला व्यक्ति तेज बुद्धि का स्वामी होता है (person who are born in Vanij karan, they are intelligent)। इस करण में जन्म लेने वाला व्यक्ति व्यापार में निपुण होने के कारण वाणिज्य कर्म से आजीविका कमाने वाला होता है। ये यात्रा के भी काफी शौकीन होते हैं, व्यापार के उद्देश्य से ये काफी यात्रा करते हैं और लाभ प्राप्त करते हैं। इसके जातक पूर्णत: व्यावसायिक बुद्धि के होते हैं।

 

7.विष्टि(Vishti):

ज्योतिषशास्त्र में विष्टि करण शुभ नहीं माना जाता है(Vishti karna is not auspicious in astrology)। इस करण में जन्म लेने वाले व्यक्ति पर विष्टि करण का अशुभ प्रभाव रहता है जिसके कारण इसके जातक का आचरण संदिग्ध रहता है। इनका मन अनुचित कार्यों में लगता है। ये परायी स्त्री के प्रति मोहित रहते हैं। इस करण के जातक का एक विशिष्ट स्वभाव यह है कि अगर ये शत्रु से बदला लेने की सोचें तो किसी भी हद तक जा सकते हैं।

 

8.शकुनी(Shakuni):

शकुनी करण में जन्म लेने वाला व्यक्ति न्याय करने वाला होता है(That person who take birth in shakuni karana they are follower of law & justice)। ये विवाद को सुलझाने में तत्पर रहते हैं अर्थात अगर इनके आस पास कहीं विवाद उत्पन्न हो तो उसे अपनी बुद्धि से शांत कर देते हैं। ये दवाईयों के भी अच्छे जानकार होते हैं तथा इनसे सम्बन्धित कार्यों में लाभ प्राप्त करते हैं।

 

9.चतुष्पद(Chatushpad):

चतुष्पद करण में जन्म लेने वाला व्यक्ति शुभ संस्कारों से युक्त ब्राह्मणों का सम्मान करने वाला धर्म-कर्म में विश्वास रखने वाला तथा गायों की सेवा करने वाला होता है(Native of Chatushpad karna are devotee of cow and they love animal)। ये पशुओं से विशेष प्रेम रखते हैं। इन्हें पशुओं की चिकित्सा का भी ज्ञान होता है और ये पशुचिकित्सक भी बन सकते हैं।

 

10.नाग(Nag):

नाग करण को ज्योतिषशास्त्र में अशुभ माना गया है(Nag karna is not auspicious in astrology)। इस नक्षत्र में जिनका जन्म होता है उन्हें दुर्भाग्यशाली माना जाता है। इनका जीवन संघर्षमय होता है तथा इन्हें भाग्य की अपेक्षा कर्म का फल प्राप्त होता है। इनके नेत्र चंचल होते हैं अत: किसी भी कार्य में स्थिरचित्त नहीं रह पाते हैं, इससे इन्हें जीवन में सफलता मिलना इनके लिए कठिन होता है।

 

11.किंस्तुघ्न(kinstughan):

किंस्तुघ्न करण में जन्म लेने वाला व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है(Person who take birth in kinstughan karna are very Fortunate) । ये सदैव शुभ कार्यों में संलग्न रहते हैं, इन्हें सभी प्रकार के सांसारिक सुख प्राप्त होते हैं। ये उत्तम शिक्षा एवं धन से परिपूर्ण होकर सभी प्रकार से आनन्दपूर्ण जीवन व्यतीत करते हैं।

 

कारण फल

बव करण- यह बाल अवस्था का, समभाव का है। इसका वाहन सिंह, उपवाहन हाथी, श्वेत वस्त्र धारण करने वाला, आयुध में बंदूक धारण करने वाला, अन्न का भक्षण करने वाला, कस्तूरी का आलेपन करने वाला, देवता जाति का, पुन्नाग पुष्प की रुचि वाला, सुवर्ण का नूपुर पहनने वाला और गंगा स्नान का आनंद लेने वाला है।

 

बालव करण- यह कुमार अवस्था का करण है। यह बैठी हुई स्थिति में है। मध्यम फल वाला है। मुख्य वाहन ब्याघ्र है, उपवाहन अश्व है। फल भयकारी है। वस्त्र पीला, उपवस्त्र लाल है। आयुध गदा, भक्ष्य पदार्थ पायस, लेपन कुंकुम, जाति भूत का, जाती नामक पुष्प को धारण करने वाला, चांदी का ककण भी है व यमुना स्नान का इच्छुक है।

 

कौलव करण- यह उर्ध्व स्थिति को प्राप्त करने वाला, श्रेष्ठ फल, वराह वाहन, उपवाहन वृषभ, फल पीड़ादायक, हरित मुख्य वस्त्र, उपवस्त्र चित्रित, खड्ग हथियार, अन्न का भक्षण करने वाला, मोती धारण करने वाला, अधिक उम्र वाला और सरस्वती स्नान का इच्छुक है।

 

तैतिल करण- सुप्त अवस्था में रहने वाला, पाप फल वाला, मुख्य वाहन गर्दभ, उपवाहन भेड़ा, तात्कालिक फल उत्तम, पीला वस्त्र वाला, उपवस्त्र भी पीला, हाथ में दण्ड धारण करने वाला, पक्वान्न भक्षण करने वाला, मिट्टी का लेपन, पक्षी जाति का, केतकी पुष्प, कांस्य पात्र वाला, प्रवाल आभूषण, युवा अवस्था का तथा गंगा स्नान का इच्छुक है।

 

गर करण- प्रौढ़ावस्था का एवं बैठी हुई स्थिति में रहने वाला, मध्यम फल वाला, मुख्य वाहन हाथी, उपवाहन गदर्भ, लक्ष्मी है वाहन का फल, मुख्य वस्त्र लाल, उपवस्त्र नीला, धनुष धारण करने वाला, दुग्ध का भक्षण करने वाला, सुगन्धित वस्तु का आलेपन करने वाला, पशु जाति का, विल्वपत्र से प्रसन्न रहने वाला, लौह व मुकुट पहनने वाला, नर्मदा स्नान का इच्छुक है।

 

वणिज करण- बैठी अवस्था का, मध्यम फल वाला, मुख्य वाहन महिष, उपवाहन ऊंट, वाहन फल क्लेश कारक, दही भक्षण करने वाला, महावर का आलेपन, मृग जाति का, मंदार पुष्प को ग्रहण करने वाला, मणि धारण करने वाला, पूर्ण उम्र वाला, कृष्णा नदी में स्नान का इच्छुक है।

 

विष्टि करण- यह बैठी हुई अवस्था का है। फल मध्यम, मुख्य वाहन अश्व, उपवाहन सिंह, वाहन फल स्थिरता, मुख्य वस्त्र कृष्ण, उपवस्त्र पीला अंगोछा, कुन्त नाम का आयुध धारण करने वाला, चितान्न भक्षण करने वाला, ब्राह्मण जाति का, दूर्वा से प्रसन्न रहने वाला, गुन्जा पहनने वाला, वृद्ध अवस्था का तथा गोदावरी स्नान का इच्छुक है।

 

शकुनि करण- उर्ध्व अवस्था का, फल सामान्य, कुत्ता मुख्य वाहन, उपवाहन शेर, वाहन फल श्रेष्ठ, चितकबरा मुख्य वस्त्र, मृगचर्म उपवस्त्र, पास नाम का हथियार धारण करने वाला, गुड़ का सेवन करने वाला, हरिद्रा का आलेपन, क्षत्रिय जाति का, कमल पुष्प से प्रसन्न रहने वाला, वंध्या अवस्था का व गंगा में स्नान का इच्छुक है।

 

चतुष्पद करण- सुप्त अवस्था का, सामान्य फल, मेष मुख्य वाहन, उपवाहन महिष, वाहन फल क्लेश, कंबल मुख्य वस्त्र, लाल वस्त्र उपवस्त्र, अंकुश हथियार, मधु का सेवन करने वाला, कज्जल का आलेपन व वैश्य जाति का, वेला पुष्प लो प्रसन्न व नीलम आभूषण, वंध्या अवस्था का तथा तुंगभद्रा नदी में स्नान का इच्छुक।

 

नाग करण- सुप्त अवस्था का, सामान्य फल, मुख्य वाहन वृषभ, उपवाहन ब्या,घ्र, वाहन फल स्थिरता, बिना वस्त्र वाला, छाल मुख्य उपवस्त्र, तलवार धारण करने वाला, घृत भक्षण करने वाला, अगर का लेपन करने वाला, शूद्र जाति का, पाटली पुष्प पहनने वाला, भूमि पर सदा रहने वाला, बज्र हथियार धारण करने वाला, पुत्र- पौत्र से संपन्न व कावेरी स्नान का इच्छुक।

 

किंस्तुघ्न करण- उर्ध्व अवस्था का, फल सामान्य, मुख्य वाहन मुर्गा, उपवाहन बानर, वाहन फल मृत्यु, धानी रंग का वस्त्र मुख्य वस्त्र, हल्का लाल उपवस्त्र, हथियार बाण, शर्करा का भक्षण करने वाला, कपूर का आलेपन, वर्णशंकर जाति का, जौ का पुष्प धारण करने वाला, सुवर्ण का आभूषण, पूर्ण तेजस्वी अवस्था में रहने वाला व कृष्णा नदी में स्नान का इच्छुक है।

विशेष- सुप्त अवस्था का तथा बैठी हुई करण वाली स्थितियां उत्तम नहीं होतीं। उर्ध्व अवस्था के करण का उत्तम फल होता है।चन्द्र और सूर्य के भोगांश के अन्तर को 6 से भाग देने पर प्राप्त संख्या करण कहलाती है. दूसरे शब्दों में चन्द्र और सूर्य में 6 अंश के अन्तर के समय को एक करण कहते है.

 

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