संकट मोचक उपाय
संकटमोचक अचूक उपाय
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अपने भोजन में से कुछ भाग पहले निकाले और भोजन के पश्चात् उसे जानवरों को खिलाएं इससे हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहती है।
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प्रातःकाल सायंकाल पूजा के समय अधिकाधिक संख्या में गायत्री मंत्र का
जाप किया जाए तो घर-परिवार में सुख समृद्धि बनी रहेगी।
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प्रतिदिन अपने भोजन में से कुछ अंश चिड़िया, गाय अथवा कौआ इन तीनों
को या किसी एक को खिलाया जाए तो सुख का वास परिवार में सदैव बना रहता है।
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शुद्ध कस्तूरी को चमकदार पीले वस्त्र में लपेटकर अपनी तिजोरी में रखा जाए
तो जीवन भर सुख-समृद्धि बनी रहती है।
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यदि शनिवार के दिन किसी चलती हुई नाव की कील घर के मुख्य द्वार परठोक दी जाए तो घर में सदैव खुशहाली बनी रहेगी।
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किसी शुभ मुहूर्त में एक पंचमुखी रूद्राक्ष तथा स्फटिक के मोतियों कोअभिमंत्रित करें। एक लाल धागे में रूद्राक्ष के दोनों ओर वह मोती पिरोकर पूर्णश्रद्धा भाव से गले में धारण करें तो सदैव सुख समृद्धि बनी रहेगी।
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यदि एक नवविवाहिता किसी बात पर इतना हंसे की उसकी आँखों से आंसूआ जाए तो वह आंसू यदि कोई अपनी जीभ पर चाट ले तो उसकी भाग्योन्नति के द्वार स्वतः ही खुल जाएंगे।
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शुद्ध पारद से बने मंत्रसिद्ध चैतन्यवान एवं प्राण-प्रतिष्ठित पारद शिवलिंग की
प्रतिदिन मनोयोग से पूजा करने से घर में समृद्धि बढती है।
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यदि विधारा की जड़ को चांदी में मढवाकर गले अथवा बाजू में धारण किया
जाए तो सुख समृद्धि के साथ सम्मान भी प्राप्त होता है।
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यदि घर में एक तुलसी का पौधा हो, तो प्रतिदिन शाम के समय वहां दीपक
जलाएं (शुद्ध घी का) इससे सुख समृद्धि बनी रहती है।
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घर में कुछ स्थान कच्चा अवश्य रखें। इससे शुक्र ग्रह को मजबूती मिलती है।
शुक्र के प्रभाव से भौतिक सुख संपदा प्राप्त होती है।
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भंडार कक्ष खाली बना रहता है तो आश्लेषा नक्षत्र में एक बरगद का पत्ता भंडार गृह में लाकर रखें, इससे शीघ्र ही भंडार कक्ष भरने लगेगा।
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प्रतिदिन प्रातःकाल स्नान के पश्चात् यदि घर का प्रत्येक सदस्य अपने माथे
पर चंदन का तिलक लगाए तो सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
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यदि महिने के प्रथम गुरूवार और शनिवार को पीपल के वृक्ष के नीचे जाकर श्री राम जय राम जय जय राम निम्न मंत्र का ग्यारह बार जाप किया जाएतो घर में सुख बढ़ता है।
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एक पीला वस्त्र लेकर उस पर हल्दी की सात साबुत गांठ, सात जनेऊ, सात लग्नमंडप वाली सुपारी, गुड़ की सात डली छोटी तथा सात पीले फूल रखकर, इस पोटली की धूप दीप से पूजा करके, पूजा स्थान या धन स्थान में रख दें।
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यदि आप किसी नयी और मूल्यवान वस्तु को प्रयोग कर रहे हैं तो हल्दी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर उस पर छींटे दें दें, इससे वह वस्तु ज्यादा समय
तक चलेगी।
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रविवार के दिन मिट्टी के पात्र में अग्नि रखकर उस पर कबूतर की बीट डालकर उसका धुँआ सभी कमरों में करें। यह प्रयोग घर में सुख सौभाग्य कीवृद्धि करेगा।
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प्रथम संतान (पुत्र) की नाल को सुखाकर अंगूठी में रखवाकर धारण करने से
अथवा गल्ले या तिजोरी में रखने से धन-समपत्ति बढ़ती है।रवि पुष्य योग में कौए का दाहिना नख (नाखून) किसी ताबीज में रखकर धारण करने से धनाभाव कदापि नहीं रहता।
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जो व्यक्ति सूती श्वेत वस्त्र धारण करके, श्वेत ऊन से निर्मित आसन पर उत्तरदिशा की ओर मुख करके लाल मूंगे की बनी माला से निम्नलिखित मंत्र का जप करेगा वर्ष के बारहों महीने उसे धन का अभाव कभी नहीं रहेगा।
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं क्रौं ॐ घण्टाकर्ण महावीर
लक्ष्मी पूरय पूरय सुखं-सौभाग्य कुरू कुरू स्वाहा।
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भोजन करते समय भी किसी व्यक्ति की बुरी नजर लग जाती है तो इमली को
तीन छोटी डालियों को लेकर आग में जलाकर नजर लगे व्यक्ति के माथे पर
से इक्कीस बार घुमाकर पानी में बुझा देते हैं और उस पानी को रोगी परछिड़कने से नजर दोष दूर होते देखा गया है।
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भूत-प्रेत से बचाने के लिए बच्चों के गले में काले रंग के धागे में चांदी का चंद्रमा, तांबे का सूर्य, शेर का नाखून आदि की माला गले में पहनाते हैं।
मंगलवार के दिन हनुमान मंदिर में जाकर हनुमानजी के कंधे का सिंदूर लाकर
नजर जगे हुए व्यक्ति के माथे पर लगाने से बुरी दृष्टि का प्रभाव दूर होता है।
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पीपल के वृक्ष के नीचे शाम को सात दीपक जलाकर सात बार परिक्रमा करें। उसके पश्चात सात लड्डू काले कुत्ते को खिलाएं। ऐसा करने से मन प्रफुलितरहता है और बनते कार्यों में वृथा विलम्ब भी नही होता।
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पीपल की लकड़ी को स्टील के गिलास में रात को पानी भरकर रखें और सुबह उसे पीपल के वृक्ष के तने में डाले दें। दिमाग तनावहीन रहेगा और चर्म रोग भी समाप्त होंगे।
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ऋण से छुटकारा पाने के लिए सर्वप्रथम पांच लाल गुलाब के पूर्ण खिले हुए,
फूल ले लो। इसके पश्चात डेढ़ मीटर सफेद कपड़ा लेकर अपने सामने बिछा
लो। इन पांचो गुलाब के फूलों को उसमें गायत्री मंत्र पढ़ते हुए बांध दो।
भगवान ने चाहा तो घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली रहेगी। गायत्री मंत्र यह
है-ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यम भर्गोदेवस्यधीमही धियो यो नः प्रचोदयात् ।
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अपने व्यापार व मकान को बुरी नजर टोक और टोटके से बचाने के लिए अज्ञानवश कोई भी लोहे की नाल किसी भी दिन ठोक दी जाती है, जबकि इसका विधान है कि केवल काले घोड़े नाल की ही अधिक उत्तम रहती है। इसके पश्चात नाल को गंगाजल में धो लें। अगर संस्थान या मकान का मुख पूर्व की ओर हो तो रविवार, पश्चिम की ओर हो तो शुक्रवार को ठोकें। इसबात का विशेष ध्यान रखें कि नाल का खुला मुंह नीचे की ओर हो।
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मिर्गी रोग में जायफल की इक्कीस दाने की माला बनाकर रोगी के गले में
पहनाने से रोग धीरे-धीरे समाप्त होने लगता है।
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स्मरणशक्ति बढ़ाने के लिए लाल हकीक (रत्न) धारण करना आश्चर्यजनक
प्रभाव दिखाता है।
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फिटकरी का टुकड़ा बच्चे के सिरहाने रखने से बच्चे के सोते में चौंकने की
बीमारी दूर हो जाती है।
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ओंगा के बीजों को चावल के साथ भैंस के दूध में घी डालकर पकाएं। इस
खीर को खाने से कई दिनों तक भूख नहीं लगती।
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कमल के बीजों को चावल के साथ बकरी के दूध में चावल या हलुआ बनाएं।
इसे खाने से चार-पांच दिन तक भूख नहीं लगती।
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खच्चर का दांत अपने पास रखने वाला व्यक्ति धन-धान्य से सदा परिपूर्ण
रहता है। साथ ही आय के स्त्रोत में भी वृद्धि होती है।
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किसी भी रविवार के दिन प्रातःकाल दुकान खोलते समय दाएं हाथ में थोड़े
साबुत काले उड़द लेकर निम्नलिखित मंत्र टोटके का इक्कीस बार जप करें और उड़द के के दाने दुकान में बिखेर दें। दूसरे दिन उड़द के दानों को बुहारकर और काले कपड़े में एकत्रित करके, काले धागे से उस कपड़े का मुंह बंद करके किसी चौराहे पर खामोशी के साथ डाल आएं। यह क्रिया स्वयं करें,
किसी अन्य व्यक्ति (नौकर आदि) से न कराएं। यह प्रयोग चार रविवार करें।
परिणाम स्वयं ही सामने आ जाएगा। मंत्र टोटका इस प्रकार से है-
भंवर वीर तू चेला मेरा खोल दुकान कहा कर मेरा उठे जो डंडी बिके जो माल भंवर वीर सोखे नहिं जाय।
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भोजपत्र पर लाल चंदन से मोर के पंख द्वारा पनरिया यंत्र लिखवाकर धारण करने से धन का अतुलनीय लाभ होता है। इसे ताबीज के रूप में गले या बाजू में भी धारण किया जाता है।
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पीपल वृक्ष की परिक्रमा करने औररक्त नियमित दीपक जलाने से नपुंसकत्व,
विकार, ज्वर इत्यादि रोग दूर होते हैं। स्त्रियों को इसे चार मास तक करना चाहिए। इससे पुत्र उत्पन्न होता है।
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शाम को आधा किलो गाय का कच्चा दूध ले आएं। स्नान करें, शुद्ध धुले हुए
वस्त्र पहनें, किसी साफ-सुथरे बर्तन में दूध डाल दें। इस में इक्कीस बूंद शुद्ध
मधु भी डालें, भवन के सभी भागों में उसे छिड़क दें। संभव हो तो गायत्री मंत्र
पढ़ते रहे। समस्त बाधाएं दूर
होगी।
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बरगद के पेड़ का पत्ता आश्लेषा नक्षत्र के मध्य लाकर घर में रखें, कभी संकट
नहीं होगा
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शरीर से पसीने के कारण, रक्त विकार के कारण अथवा अन्यत्र किसी कारण
के फलस्वरूप दुर्गंध आती है, तो ऐसे स्त्री या पुरूष को चाहिए कि जिस दिन
पुनर्वसु नक्षत्र हो, उस दिन मेहंदी की मूल और चंदन लाकर अपने पास सदैव
रखें। शरीर से अच्छी सुगंध का अनुभव होगा।
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अगर ऊपरी बाधा है तो उसके सगे-संबंधी यह प्रयोग कर सकते हैं। जिस दिन
हस्त नक्षत्र हो, उस दिन चंपा की जड़ लाकर उसके साथ तुलसी, काली मिर्च
रखकर सोने के तावीज में बांधें और व्यक्ति के गले में पहना दें।
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अगर किसी का तबादला अनचाही जगह हो जाए तो वह प्रतिदिन सूखी लाल मिर्च के अट्ठाईस साबुत बीज प्रातःकाल ॐ घृणि सूर्याय नमः कहते हुए, सूर्य को जल के साथ अर्पण करें तो आश्चर्यजनक रूप से तबादला रूक जाएगा अथवा मनचाहे स्थान पर हो जाएगा।
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शनिवार की संध्या को हाथ में एक साबुत सुपारी व तांबे का एक सिक्का ले जाकर उस वृक्ष को आमंत्रित कर आएं जिस पर चमगादड़ों का वास हो। फिर अगले दिन यानि रविवार को सूर्योदय से पूर्व उस वृक्ष की एक शाखा लाकर उसका एक टुकड़ा व्यापारिक-संस्थान या अपनी दुकान की गद्दी या आसन के नीचे रखें और उस वृक्ष का एक पत्ता सिर पर इस प्रकार धारण करें कि उस पर किसी व्यक्ति की दृष्टि न पड़े तथा उसे देखकर कोई टोके भी नहीं। इस टोटके के प्रभाव से दुकान या व्यवसाय का कार्य बहुत तीव्र हो जाएगा जिस कारण धन का भी बहुत लाभ होगा।
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शुभ मुहूर्त्त अथवा शुभ दिन में पूरब की ओर मुंह करके अनार की कलम और अष्टगंध की स्याही से सफेद कागज पर बीसा यंत्र बनाएं। फिर उसे मिट्टीके किसी पात्र में रखकर उस पर लाल सूती कपड़े का कोरा टुकड़ा व नारियल चढ़ाकर अपनी गद्दी के नीचे की भूमि में गाढ़ दें।
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पुष्य नक्षत्र में विधिवत् प्राप्त की हुई शंखपुष्पी की जड़ चांदी की डिब्बी में
रखकर गुग्गल की धूप देकर तिजोरी में भगवान शिव का ध्यान करते हुए
श्रद्धाभाव से रख दें। टोटके के इस प्रयोग से धन-वृद्धि का लाभ होता है।
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आश्लेषा नक्षत्र में बरगद का पत्ता लाकर तिजोरी में रख देने से धन की वृद्धि
होती है। इस प्रयोग से धन का संकट कभी सामने नहीं आता।
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एक पीपल का पत्ता शनिवार को घर ले आएं। उसे गंगाजल से भली-भांति धो लें। उस पर एक माला गायत्री मंत्र की जप लें। अब इसे अपने पर्स में,
कैश बाक्स में अथवा गद्दी के नीचे रख लें। इस पीपल के पत्ते को हर
शनिवार बदलें। व्यापार में वृद्धि तथा घर में सुख-शांति और बरकत होगी।
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अगर आपके परिवार में कोई रोगी है और लाख चिकित्सा के पश्चात भी सुधार नहीं हो रहा है, तब आप निम्न उपाय करें। एक देशी अखण्डित पान, गुलाब का फूल और कुछ बताशे पान में रखकर रोगी पर से इकत्तीस बार उतारें और अनटोक चौराहे पर रखे दें। रोगी की दशा में अपेक्षित सुधार होगा।
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सोमवार के दिन किसी भी जड़ी बूटी बेचने वाले से शिवलिंगी का एक बीज
और लक्ष्मण बूटी का एक बीज ले आएं। इन पर 21 बार ॐ नमः शिवाय
का श्रद्धापूर्वक पाठ करें। इसके बाद इन बूटियों का सेवन कर रमण करें। मेरा
स्वयं का अनुभव है कि संतान अवश्य होगी।
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तीन बिल्व पत्रों को शिवलिंग पर चढ़ाकर जाएं, कार्यों में सफलता मिलेगी।
बाहर जाने से पूर्व काली सरसों के कुछ दाने घर के बाहर बिखेर दें।
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गुड़ तथा चना किसी फकीर को देने से सौभाग्य की प्राप्ति होगी। अपने ऊपर
से एक रोटी को इकत्तीस बार उतारकर चौराहे पर रख दें।