त्रीग्रह योग फल उपाय
उपाय - आटे में बेसन मिलाकर रोटी बनावें उसमें गुड़ रखकररवि, शुक्र एवं गुरूवार को सांड को देवें।11) सूर्य, गुरू, शनि:
जन्म काल में सूर्य, गुरू, शनि एक ही राशि में हो तब जातक केबहुत मित्र होते है, समाज में खर्च करने वाला, परोपकारी होता है। तीनोंमें यदि कोई नीच हो या 6, 8, 12 वें हो मित्र बन्धुओं से दूर रहने वाला,दण्ड पाने वाला, मन में भय रहता है।
उपाय - दीपावली के दिन सरसों, राई एवं सूरजमुखी पुष्य पीलेकपड़़े में बांधकर तिजोरी में रखें।
12) सुर्य, गुरू, राहु :
यह तीनों ग्रह किसी भी स्थान में हो विद्या में अड़चन, नौकरी मेंबाधा। यदि सप्तम् भाव में हो स्त्री से विवाद होता है। 6, 8, 12 में होनेसे दुर्घटना होती है।
उपाय - रविवार के दिन ताम्र वर्ण कपड़े में तीन मुट्ठी चने बबूलकी टहनी पर बाँध देवें।
13) सूर्य, शुक्र, शनी :
इन तीनों ग्रह की युति से मान्-प्रतिष्ठा रहेगी, अच्छे चरित्र में कुछ कमी रहेगी। दाद व खुजली का योग बनता है, शत्रु का भय सतायेगा।
उपाय -रविवार के दिन दुर्गा शप्तश्ती के चतुर्थ अध्याय का पाठ करें। जब शारीरिक पीड़़ा हो तो खस, ईलाइची, सौंफ को गंगाजलपीसकर रविवार के दिन स्नान करें।
14) सूर्य , शुक्र, राहु:
इन तीनों ग्रह का एक राशी में होने से जातक पराक्रमी होता है।परन्तु बुद्धि का उपयोग कम करता है, यश प्राप्ति में कमी होती है। पैरों में विशेष पीड़ा रहती है।60 वर्ष के बाद यादास्त में कमी आती है।उपाय-रविवार के दिन कुत्ते को फीका दूध पिलायें।
1)चन्द्र, मंगल, बुध:
चन्द्र, मंगल, बुध एक ही राशि में होने से जातक बन्धुओं सेविपरित होता है। मन में हर कार्य विपरित करने की इच्छा रखाता है।मित्रों का आचरण अच्छा नहीं होता है।
उपाय -1. किसी मंदिर या सामाजिक स्थान पर आम और पीपलको पेड़ लगाये और नित्य जल से सींचे। 2. पंचमुखी बेलपत्र का नित्यपूजन करें जिससे सब बाधायें दूर होगी या बेलपत्र में शिवरात्री के दिनभांग पिलावे।
2)चन्द्र, मंगल, गुरू:
तीनों ग्रहों की युति से जातक क्रोधी, कामी, नाक नक्श सुन्दरहोता है। चोरी करने में मन रहता है, भूमि योग बनता है।
यदि इनमें से कोई ग्रह नीच हो तब विपरित फल करते है। जैसे -नाक नक्श विशेष अच्छा नहीं होता, अति कामी और बन्धु-बान्धवों सेकलह करता है।
उपाय -जातक जहाँ सोता है उस कमरे की दिवारों का रंग हरा,लाल या श्वेत होना चाहिये। किसी एक दिवार पर वृक्ष एवं उस परपक्षियों की पेंटिंग लगावें।
3)चन्द्र, मंगल, शुक्र:
चन्द्र, मंगल, शुक्र एक ही राशि में होने से जातक को सर्दी अधिकलगती है तथा जीवनसाथी का स्वभाव अच्छा नहीं होता है।
उपाय-1. स्वयं के घर में संध्या समय नित्य लोबान और गूगलका धूप करें। 2. चाँदी के दीये में चमेली के तेल से हनुमानजीं की दीयाकरें।
4)चन्द्र, मंगल, शनि:
चन्द्रमा मंगल शनि एक ही राशि में होने से जातक को माता कासुख कम होता है। खराब संगत वाले से दूर रहता है। यदि सातवें स्थानमें हो तब जातक के द्वी भार्या योग होता है। यदि लड़की की कुण्डली मेंयह योग होने से सगाई देर से होती है अथवा एक सगाई टूटने का योगहोता है।
उपाय-1. हनुमान जयन्ती के दिन सवामणी करें। 2. मंगलबार केदिन हनुमानजी के कनेर की माला चढ़ावें। (लाल कनेर की माला मेंसफेद कनेर का पुष्प अश्वय लगावें।)
5)चन्द्र, मंगल, राहु :
यह तीनों ग्रह कुण्डली में एक ही भाव में होने से जातक के माताको पीड़ा, नेत्र विकार, कभी-कभी शरीर में रक्त विकार तथा जीव मेंबैचेनी रहती है, भाई या मित्र से विवाद होता है।
उपाय - मंगलवार के दिन शिवलिंग पर गुलाब की माला चढ़ावेंतथा चंदन के इत्र से लेप करें।
1)चन्द्र, बुध, गुरू :
यह तीनों ग्रह यदि एक ही राशि में हो तो जातक बुद्धिमान, विद्वानहोता है। पत्नी, पुत्र एवं मित्न अच्छे होते है। वाक्-पटुता उचित होती है।यदि चन्द्र, बुध, गुरू में से यदि कोई नीच हो अथवा 6, 8, 12वें होभाई-बन्धुओं से विरोध, वाणी में यश प्राप्त नहीं होता। मित्रों से झगड़ा,मामा और माता से तकलीफ होती है।
उपाय-1. सोमवार को चाँदी के बर्तन में केसर, बादाम युक्त दूध
किसी ब्राह्मण या अपने भांजे का पिलावें। 2. निर्जला एकादशी कोचाँदी कें गिलास में केसर बादाम युक्त दूध ब्राह्मण को दान करें।
2) चन्द्रमा, बुध, शुक्रः
चन्द्र, बुध, शुक्र की युति से जातक कई विधाओं में निपुण, विदेशसे धन कमाने वाला, स्त्री पक्ष से दुःखी अथवा ईष्या करने वाला होताहै।
उपाय-चन्द्र उदय के दिन कासी के पात्र में घी एवं चाँदी कासिक्का डालकर दान करें।
3)चन्द्र, बुध, शनि:
चन्द्र, बुध, शनि एक ही राशि में हो तब जातक कई कलाओं मेंनिपुण, पुष्ट शरीर वाला, गाँव या नगर में वर्चस्व रखने वाला, मंत्रीयोंसे मुकाकात रखने वाला किन्तु परिवार से दूर रहने वाला होता है।
यदि 6, 8, 12वें हो अथवा इन तीनों में कोई नीच हो तब विद्याका फल प्राप्त नहीं होता, बदनामी का योग बनता है, स्वयं के मित्रबन्धुओं से त्रस्त रहता हैं
उपाय - कासी के बर्तन में पाँच रूपये का सिक्का, कपूर एवंकाले तिल शनि भगवान के चरणों में चढ़ावें।
4) चन्द्र, बुध, राहु:
चन्द्र, बुध, राहु एक ही राशि में हो तब जातक स्त्री से परेशान,पिता को पीड़ा, भ्रमण में रूचि, वस्तु का खो जाना, वर्ष 24 से वर्ष 26के बीच दण्ड या कठिनाई का योग बनता है।
उपाय - सोमवार को श्वेत वस्त्र दान करें। चन्द्र-दर्शन के दिनचन्द्रमा को खीर का भोग लगा स्वयं प्रसाद ग्रहण करें।
1) चन्द्र, गुरू, शुक्र:
कुण्डली में चन्द्र, गुरू, शुक्र एक ही राशि में हो तो जातकभाग्यशाली परोपकारी, सज्जन, तीव्र बुद्धि वाला, स्त्री चरित्रवान होतीहै। अधिकता नौकरी करने वाला तथा धन संचय नहीं होता।
यदि अशुभ ग्रह साथ हो या कोई नीचस्थ हो तो कलह करनेवाला, नौकरी में अधिकारी गणों विचारों में भिन्नता, पेट सम्बन्धीबीमारी, कभी-कभी कन्धे व एड़ी में तकलीफ होती है।
उपाय -कार्तिक सुदी एकादशी के दिन तुलसी विवाह करावें।
2) चन्द्र, गुरू,शनि:
चन्द्र, गुरू, शनि एक भाव में होने से मनुष्य बलवान होता है।सुन्दर स्त्री, पुत्र एवं मित्र अच्छे होते है, धर्म में झुकाव रहता है। भोजनकराने में आनन्द प्राप्त करता है।
यदि तीनों ग्रह कमजोर हो तो नकारात्मक सोचवाला, नास्तिकतथा मित्र के आचरण अच्छे नहीं होते।
उपाय - लोहे के बर्तन में काले चने, सिंघोड़े और जामुन शनिभगवान को चढ़ावें।
3) चन्द्र, गुरू, राहु:
चन्द्र, गुरू, राहु जिस स्थान में उसकी हानि करता है। माता केशरीर में पीड़ा करता है, पुत्र से विचारों में अन्तर रखता है।
उपाय - 1. नित्य चिड़ियों को बाजरी चुगावें। 2. सोम एवं बुधवारको फूल मखाना तल कर स्वयं भी खाये एवं मित्रों को भी खिलाये।
1)चन्द्र, शुक्र, शनि:
चन्द्र, शुक्र, शनि एक ही राशि में हो जातक लेखन क्षेत्र में प्रवीण,ब्राह्मण वंश में जन्म लेनेवाला, शास्त्र में रूचि लेने वाला तथा पाठन-पठन करने वाला होता है।यदि नीच ग्रह से सम्पर्क करें अथवा स्वयं नीचस्थ हो तो विद्वान होते भी विद्ववता का परिचय देने में असमर्थ, स्वयं को गुप्त रोग, हाथऔर हृदय में पीड़़ा होती है।
उपाय - शनिवार के दिन सवा-किलो दही से शिवलिंग पर रूद्राभिषेक करें।
2) चन्द्र, शुक्र, राहु:
चन्द्र, शुक्र, राहु तीनों साथ हो मनस्थिति परिवर्तन होती है।मित्रता में दरार, रक्त विकार होता है।
उपाय -नवग्रह मंदिर में चन्द्र पर चावल, शुक्र पर मटर, बुध पर बाजरा अर्पित करें। संध्या के समय बुधवार को निवास स्थान पर लोबान कर धूप करें।
1) चन्द्र, शनि, राहु:
साथ होने से कचहरी विवाद, भाई-बन्धुओं में विवाद, पैरों में या पेट में पीड़़ा, कभी-कभी असाध्य रोग का योग बनता हैं।
उपाय - वट यक्षणी का पूजन करें। आँवला नवमीं के दिनआँवला-वृक्ष की पूजा करें। (स्त्री की कुण्डली में यदि यह योग हो तो त्रिफला चूर्ण के साथ सालम मिश्री का सेवन करें)
1) मंगल, बुध, गुरू :
मंगल, बुध, गुरू एक भाव में हो तो जातक साहित्य पढ़ने वाला,चतुर, औरतों में रूचि रखने वाला, कार्य करने में उत्साहित, शरीर में वर्ण का निशान और समाजसेवी भी होता है।
यदि इन तीनों में यदि अंशों में कमजोर हो अथवा नीचस्थ होविद्या का लाभ नहीं मिलता, मकान बनते समय अड़चन पैदा होती है,आलस्य से कार्य करने पर बाधा उत्पन्न होती हैं।
भेंट करें।उपाय - मकर संक्रान्ति के दिन 11 विद्वानों को धर्म की पुस्तके जातक के कमरे की दिवारों का रंग दक्षिण भाग लाल या गुलाबी,उत्तर भाग हरा, उत्तर पूर्व पीला तथा पश्चिम भाग सफेद रखने से हरप्रकार की शान्ति और प्रगति होती है या हनुमानजी को केसर से कागजपर 108 बार राम राम लिख माला बनाकर पहनावे।
2) मंगल, बुध, शुक्र:
मंगल, बुध, शुक्र एक ही राशि में होने से जातक हर कार्य में स्वयंको आगे रखने वाला, प्रकृति चंचल होती है। किसी अंग में विशेष पीड़़ारहती है।
उपाय-1. मंगलवार के दिन गणपतिजी के एक गुड का लड्डुतथा एक शक्कर का लड्डड भोग लगावें।2. बुधवार के दिन गणपतिजीखजूर चढावें।
3) मंगल, बुध, शनि :
जातक की कुण्डली में यदि मंगल, बुध, शनि एक ही राशी में होनेसे वन प्रेमी, दाँतों या मुख में रोग होता है। नेत्रों में विकार विद्या अर्चनके पश्चात् उच्च कार्य या पद प्राप्त नहीं होता हैं। विदेश योग होता हैं,स्वयं के हाथों से अपराध होता हैं।
उपाय -मंगल या शनिवार के दिन गणपति पूजन कर सुन्दरकाण्डका पाठ करें।
4) मंगल, बुध, राहु:
मंगल, बुध, राहु एक ही भाव में होने से जातक हर कार्य में निपुण,
घूमने वाला हड्डी में पीड़ा, सप्तम् स्थान में हो तो स्त्री पक्ष कमजोर,अपने से बड़ी स्त्री से अपमानित होता या विवाद होता हैं।
उपाय- मंगलवार के दिन गणपतिजी को गुड़ के मालपुऐं चढ़ायें।
एक लाल कपड़़े में हरिया (साबित मूँग), गुड़़ की ठली, पाँचरूपये का सिक्का पोटली में बाँधकर, बुधवार के दिन गजानन्दजी कोअर्पित करें।
1) मंगल, गुरू, शुक्रः
कुण्डली में मंगल, गुरू, शुक्र की युति होने से जातक यश प्राप्तकरने वाला, पुष्ट शरीर वाला, स्त्री सुशील होती है, राज्य में मंत्रीयों सेसम्पर्क रखने वाला होता है।
यदि अंशों में कमजोर हो कोई एक ग्रह नीचस्थ हो अथवा पर्णफरमें हो तो जातक मित्रों से झगड़ा, शारीरिक पीड़़ा, झूठ बोलने वालातथा स्त्री और पुत्र से मानसिक पीड़ा पाने वाला होता है।
उपाय - 1. तीन भाग चाँदी, दो भाग ताँबा एवं एक भाग स्वर्णमिश्रीत कर गोल अंगुठी अनामिका या तर्जनी में धारण करें। 2. संतराएवं लीची दान करें।
2) मंगल, गुरू, शनि:
मंगल, गुरू, शनि एक ही भाव में होने से मित्रों से धोखाधड़ी करनेवाला, हृदय में दया नहीं होती है, शरीर में गहरी चोट आती है, धनज्यादा खर्च होता हैं।
उपाय-शनि अमावस्या के दिन पीपल के नीचे बैठकर शनि मंत्रका जाप करें। पीपल के मध्य शनि भगवान का चित्र बनाकर पूजन करेंएवं तिल चढ़ावे तथा तिल को पीपल की जड़ में डाल दें।
3) मंगल, गुरू, राहु :
मंगल, गुरू, राहु एक ही राशि में होने से जातक का मन अशांतरहता है, पिता के शरीर में पीड़ा, मित्न व भाईयों से आदर प्राप्त नहींहोता, स्वयं कपट द्वारा पैसा कमाने की इच्छा रखता है, शरीर में वर्ण केनिशान होते हैं।
उपाय - मंगल या गुरूवार के दिन गणपतिजी को पाँचआलु-पुखारे, एक बेसन (बुन्दी) का लड्डु चढ़ावें।
1) मंगल, शुक्र, शनि:
मंगल, शुक्र, शनि का योग एक ही राशि में हो तब जातक स्वभावबिना किसी कारण विवाद करने वाला, व्यर्थ बोलने वाला, स्त्री सेस्वभाव में अन्तर, अपने शहर में दूर रहने वाला तथा सुख में कमीमहसूस करता है।
उपाय -1. मंगलवार के दिन हनुमाष्टक एवं हनुमान बाहुख कापाठ करें। 2. शनिवार के दिन काणे व्यक्ति को मावा व गुलाब जामुनखिलावें।
2) मंगल, शुक्र, राहु :
मंगल, शुक्र, राहु एक ही भाव में होने जातक को बचपन एवं वृद्धाअवस्था में शरीर में रोग होता हैं, वाहन या पशु द्वारा चोट पहुँचती है।स्त्री-पुत्र से विचारों में अन्तर, गर्दन या कन्धे में पीड़ा रहती हैं।
उपाय-1. बुधवार के दिन अन्नानास को लाल डोरी (मोली) मेंपिरोरकर घर के बीच में लटका दें। 2. शिवरात्रि के दिन शिव भगवानको तीन धतुरे चढ़ावें।
3) मंगल, शनि, राहु :
मंगल, शनि, राहु एक राशि में होने से जातक को मानसिक वेदना,कार्य में रूकावट, 4, 10 स्थान में हो तो माता पिता से विरोध वेंस्थान पत्नी से 2वें स्थान में कुटम्ब से हानि होती है।
उपाय -जंगल या वीराने में स्थित हनुमान मंदिर में पूजन करइमरती अर्पित करें। हनुमान की बनी लाल पत्थर की मूर्ति मंदिर में दानकरें।
1)बुध, गुरू, शुक्रः
बुध, गुरू, शुक्र की युति से जातक शत्रु पर विजय पाने वाला,स्पष्ट वक्ता, भाग्य से प्रगति पाने वाला, मंत्रियों का सलाहकार एवंसुन्दर नाक-नक्श वाला होता है।
यदि इन तीनों में कोई ग्रह नीच राशी का हो अथवा अशुभ स्थानमें हो उस पर शत्रु हावी रहते हैं। चर्म रोग या मौसम से सरदर्द, असत्यबोलने वाला होता हैं।
उपाय - निर्जला एकादशी के दिन आम और खरबूजे दान करें।किसी मंदिर में चंदन की अगरबत्ती एवं कपूर दान करें।
2) बुध, गुरू, शनि:
एक ही राशि में होने जातक भाग्यवान, धैर्यवान, पैसों से युक्त,वाणी से सभी को प्रभावित करने वाला, लम्बी यात्रा करने वाला होताहै। यदि इन तीनों में कोई दोषयुक्त हो तो जातक को धैर्य नहीं होता,क्षणिक गुस्से वाला, धन की कमी महसूस करने वाला, मित्रों की निन्दाकरने वाला होता हैं।
उपाय- बुधवार के दिन काले जामुन एवं बुन्दी के लड्डु गणेशभगवान को अर्पित करें।
3) बुध, गुरू, राहु:
एक ही भाव में होने से ननिहाल पक्ष में द्रेप रखने वाला फिर भीननिहाल से फायदा होता है। विषैले जानवर से भय रहता है। पुत्र सेचिन्ता रहती है।
उपाय-1. सवा-पाब साबुत मूँग पीले कपडे में बाँधकर जंगल मेंजहां सर्प हो अथवा चूहे अधिक हो ऐसे स्थान में गाड देवें। 2. बुधवारके दिन कासी के पात्र में घी भरकर दान करें।
1) बुध, शुक्र, शनि :
बुध, शुक्र, शनि एक राशि में होने से मित्रता अच्छे व्यक्ति से नहींहोती, मन में धूर्तता होती है। अन्य स्त्री में मन रखने वाला, जन्म स्थानसे बाहर भाग्य्र उदय होते है, स्वयं के देश से प्रेम करने वाला तथा कईकलाओं को जानने वाला होता हैं।
उपाय -बुध एवं शुक्रवार को खेजड़ी की पूजा कर परिक्रमा करतेहुए तीन बार मोली बांधे। शनिबार को अमल ताश के वृक्ष में जलचढावें।
2) बुध, शुक्र, राहु:
बुध, शुक्र, राहु की युति से जातंक सट्टा या शेयर करने वाला,शरीर में कमजोरी महसूस करने वाला, व्यर्थ घूमने वाला, तर्क करनेवाला, अविश्वासी होता है।
उपाय - बुधवार गणपति के दिन पाँच आम पत्तों पर पाँच पेड़े(दूध के) अर्पित करें एवं उसमें से दो पेड़े का प्रसाद स्वयं और परिवारको लिखाए।
3) बुध, शनि, राहु
बुध, शनि, राहु एक ही भाव में होने से अपने पराक्रम तथा कपटसे जीतने वाला, कुछ खोकर भी प्रसन्न रहने वाला, मिश्रीत स्वभावका होता हैं। पैरों में चोट आती है, वृद्धावस्था में यादाश्यता में कमीआती है।
उपाय - शनिवार के दिन शनि देव के चरणों में तेल चढ़ाकरकमल गट्टे की माला पहनाएं।
1) गुरू, शुक्र, शनि:
गुरू, शुक्र, शनि कुण्डली में एक ही भाव में होने से जातकसाधारण कुल में जन्म होकर भी उच्च अधिकारी व मंत्री तक पहुँचजाता है। सुशील, सज्जन यश प्राप्त करता है।
यदि यह अशुभ स्थान में अथवा कोई ग्रह अस्त हो तब जातककुल का नाम बदनाम करने वाला, दण्ड भोगने वाला, अपयश प्राप्तकरने वाला, झगड़ालु होता है।
उपाय - 1. ब्राह्मण को अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में कालीगाय दान करें। 2. शुक्र के चोघड़ियें में जलेबी या इमरती हनुमानजी कोचढायें।
2) गुरू, शुक्र, राहु:
गुरू, शुक्र, राहु एक ही राशि में होने से संतान से तकलीफ पानेवाला, निर्णय लेने में असक्षय कलाओं को जानते हुए भी लाभ प्राप्तनहीं होता।
करावें।उपाय -अमावस्या के दिन खीर में केसर डालकर ब्राह्मण भोजन