चतुषग्रह युति फल उपाय

    चतर्गहि योग फलानि-

    1) सू.च.मं. बु.:

    सू.च.मं.बु. की युत्ति से जातक होशियार, वाचाल, लिखाने वबोलने में निपुण। इसके साथ कुछ चुराकर लिखने वाला, कभी-कभीमन में चोरी का भाव आता है।

    इन ग्रहों में दो ग्रह कमजोर हो या सूर्य नीच राशि का हो तब मनुष्यको सफलता देर से मिलती है। हर जगह कपट से कार्य करने का मनरहता है, बदनामी भी होती हैं।

    उपाय - ताँबे में पात्र में कली करवाकर बुधवार के दिन उसमें पाँचलड्डुओं का गणपतिजी को भोग करें।

    2) सू.चं.मं.गु.:

    सू.चं.मं.गु एक ही भाव में होने से जातक स्वर्णसम्बन्धी या दुकानवाला, धैर्यवान, कला जानने वाला, नितीशास्त्र जानने वाला,होशियार, स्वयं को शोक से दूर रखने वाला होता है।

    यदि चारों अशुभ स्थान में हो तो व्यापार में नुकसान, नेत्रों मेंपीड़ा, बात-बात में गुस्सा करने वाला, देह में रोग होता है।

    उपाय -मेष सक्रांति से कन्या सक्रांति अर्थात् हर मासिक सक्रांतिमें सांड को सफेद तिल के लड्डु खिलाए एवं पिछली सक्रांति काल(तुला से मीन) में आटे में बेसन व गुड़डालकर गाय को खिलाए।

    3) सू.चं.मं.शु.:

    सू.चं.मं. शु.एक ही राशि में होने से जातक व्यावाहारिक, बचपनमें गुस्से वाला, किसी भी युक्ति से धन संचय करने वाला, विद्या प्राप्तकरने वाला, स्त्री पुत्र से भी सुख प्राप्त करने वाला होता है।

    यदि कुण्डली में यह चारों ग्रह अशुभ स्थान में हो तो जातक वाणी 
    में कटुता, सुख का अनुभव कम होगा, धन संग्रह करने के बाद भी धनसमाप्त होगा, स्त्री पुत्र से विचार में अन्तर होता है।

    उपाय-सक्रान्ति (हर मास में आती है) के दिन 11 लडड्ड मावे केतथा उस पर एक-एक चाँदी का चन्द्रमा रखकर 11 सुहागिन(शादीशुदा) स्त्रीयों को देवें। (मकर सक्रान्ति पर)

    जातक के जन्म मास में जो सक्रान्ति आवें उस दिन शिवलिंग परदूध का अभिषेक करें। ( स्फटिक हो तो विशेष लाभ)

    4) सू.च.मं.श.:

    सू.चं.मं. शं. एक ही भाव में होने से जातक कद का छोटा, धनसंग्रह नहीं रहता, जड़ता विशेष रहती है, छोटी-मोटी जीविका पानेवाला, विद्या ग्रहण में मन नहीं लगता है।

    उपाय - 1. शनिवार के दिन बड़ वृक्ष में दूध चढ़ावें तथा जड़ मेंदो बादाम, मसूर की दाल (10 ग्राम) अर्पित करें। 2. शनिवार के दिनसरसों का तेल 11 बूँद तथा नारियल गिरी, देसी शक्कर बड़ वृक्ष मेंअर्पित करें।

    5) सूं.चं.मं.रा.:

    सूचं.मं.रा. एक ही भाव में होने से जातक बड़़ों का आदर नहींकरता, वाणी में संयमता नहीं रहती, पिता पुत्र से विचारों में अन्तर रहताहै।

    उपाय-1. शिवलिंग पर नित्य जल चढ़ावें। 2. पुष्य नक्षत्र के दिनशिवलिंग पर पंचामृत से अभिषेक करें। 3. रवि या सोमवार को आइनादान करें।

    6) सू.चं.बु.गु.:

    सूचं.बु.गु एक ही राशि में होने से जातक चित्रकारिता (आज के     युग में फोटोग्राफर) स्वर्ण सम्बन्धी कार्य करने वाला, समाज मेंप्रतिष्ठावान, अच्छे नाक नक्श होते हैं।

    यदि चारों ग्रह अंशों में कमजोर या कोई एक नीचस्थ हो तो

    व्यापार में नुकसान, धैर्य नहीं रखने वाला, नेत्रों में विकार, धन सेदुःखी तथा नौकरी हो तो उसमें अशान्ति रहती है।

    उपाय-1. सोने की अंगुठी में श्रीयंत्र पहने अथवा गे में धारणकरें। 2. पूर्णिमा के दिन किसी गरीब को केले के पत्ते पर भोजन करावेंतथा नारियल से बनी मिठाई एवं केले अवश्य रखें।

    7) सू.चं.बु.शु.:

    सू.चं.बु.शु.एक ही राशि में होने से जातक सामान्य कद वाला,नौकरी में मान पाने वाला, बचपन में नेत्र विकार, भाग्यशाली होता हैं।यदि अशुभ स्थान में हो तो वृद्धावस्था में नेत्र में विशेष पीड़ा, भाग्य मेंउतार-चढ़ाव, शरीर में सूर्य या शुक्र सम्बन्धी रोग रहता हैं।

    उपाय -1. सोमवार के दિन शिवलिंग पर बेल रस से अभिषेककर खरबूजा, बादाम व पिस्ता की मिठाई या साबुत चढ़ावें। 2. बुधवारके दिन गणपतिजी के खजूर एवं दूध से बनी मिठाई भोग करें।

    8) सू.चं.बु.श.:

    सू.चं.बु.श. एक ही राशि में होने से माता-पिता के सुख में कमी,धन की कमी महसूस करने वाला, व्यर्थ घूमने वाला, कई जातक इसमेंभिक्षा पाने वाले देखे गये है। मस्तिष्क में अशान्ति रहती है।

    उपाय -1. रविवार के दिन भिखारी का तरबूज दान दें। 2.अमावस्या के दिन कटहल की सब्जी बनावें तथा ब्राह्मण भोजन करें।

    9) सू.चं.बु.रा.:

    सू.चं.बुरा. एक ही राशि में होने से पिता के सुख में कमी, स्वयं     किसी से आश्रित रहने वाला, माता के शरीर में पीड़़ा रहती है। ननिहालमें मामी से प्रेम रखने वाला होता है।

    उपाय-11 या 5 ताम्बे के सिक्के गंगा में प्रवाहित कर अनार,सिंगोड़े, टमाटर का दान करें। 2. हर सोमवार को शिवलिंग पर बैंगनचढावें।

    10) सू.चं.गु.शु. :

    सूचं.गु.शु. एक ही राशि में होने से जातक नौकरी में उच्च पद प्राप्तकरता है। संस्था और सरकार द्वारा सम्मानित होता है। जमीन जायदादका मालिक होता है, सुख सम्पन्न होता है। यदि अशुभ स्थान में होअथवा इनमें से कोई एक नीचस्थ हो समाज में मित्रों से तिरस्कृत होताहै, जायदाद में विवाद रहता है, सुख में कमी रहती है।

    उपाय -पूर्णिमा के दिन सूर्य देव अर्ध्य देकर लक्ष्मीनारायण मंदिरमें पंच मेवे की खीर केसर सहित भोग लगावें।

    11) सू.चं.गु.श:

    सू.चं.गु.श. एक राशि में होने से जातक अनेक प्रकार से धन कमानेवाला, स्त्री व पुत्र से प्रेम करने वाला, हर किसी को एक दृष्टि से देखनेवाला, प्रतिष्ठित व्यक्ति होता है।

    यदि यह ग्रह अशुभ स्थान में हो अथवा अंशों में कमजोर हो स्त्रीसे विचारों में अन्तर, कई प्रकार युक्तिया लगाता है। परन्तु धन प्राप्तनहीं होता। स्वयं के शरीर में व्याधि रहती है, वर्ष 24 एवं 36 से 38घटनाप्रद होते हैं।

    उपाय - गेहूं के आटे में कुछ हल्दी, तिल और दूध मिलाकर हल्वाबनाए, रविवार के दिन कुछ भाग सांड को, कुछ भाग गाय को, कुछभाग कुत्ते को खिलाएं।

    12) सू.चं.गु.रा.:

    सू.चं.गु.रा. जिस राशि में हो उस स्थान की हानि करते है। अचानकदुर्घटना होती है, पुलिस केस होने के आसार बनते है, माता-पिता केसुख में कमी आती है।

    उपाय -सूर्य मंदिर में आटा एवं शक्कर दान करें।

    13) सूर्य.चं.शु.श.:

    सू.चं.शु.श. एक राशि में होने से जातक स्त्री जैसे स्वभाव का होताहै, शरीर में कमजोरी रहती है, खरगोश के समान डरने वाला होता हैं।

    उपाय-ग्रहण (सूर्य, चन्द्र) के दिन सूतक काल में इन चारों ग्रहोंकी आहुति देवे, मोक्ष काल के पश्चात् पाँच दाले मिश्रीत कर लाल गेहूंके बाटे (रोटी) बनाकर ब्राह्मण भोजन करावें या दाल रोटे बनावे।14) सू.चं.शु.रा.:

    सूचं.शु.रा. एक ही राशि में होने से व्यर्थ घूमने वाला, स्त्री कोपीड़ा देने वाला, अपने स्वभाव से दूसरों को पीड़ा देने वाला, कुण्डलीमें दशा अनुसार पेट में लीवर या आँतों में सूजन आती हैं।

    उपाय -स्वयं के जन्म नक्षत्र के दिन शिवलिंग पर सरसों के तेलका अभिषेक कर एक नीम्बु, पेड़़ा और चाँदी की सिक्का चढ़ावें।15) सू.चं.श.रा.:

    सू. चं. श. रा. एक ही राशि में होने से पैरों में पीड़ा, बार-बार शरीरमें चोट आना, धूप से एलर्जीं, कृष्ण पक्ष कमजोर रहता हैं।

    पूजन कर मोदक का भोग करें।

    उपाय - बुधवार के दिन गणपतिजी का पंचामृत से पंचोपचार से16) सू.मं.बु.गु.:

    सू.मं.बु.गु. एक राशि में होने से जातक कपड़े का व्यवसायी,
    क्रय-विक्रय करने वाला, श्वेत वस्तु में लाभ, अन्य स्त्री से सम्पर्करखने वाला, समाज में मुखिया रहता हैं।

    यदि अशुभ स्थान में हो अथवा जिस राशी में हो स्वयं नीचस्थ हो

    तब व्यापार में उतार-चढ़ाव, शरीर में कुछ रोग, अन्य स्त्री से विवाद,भ्रमण से विशेष लाभ नहीं होता।

    उपाय - गेहूं के आटे में बेसन, उड़द एवं शहद मिलाए, उसे गुंधकर

    बहती नदी में मछलियों को चुगाये।17) सू.मं.बु.शु.:

    सू.म.बु.शु. एक राशि में होने से पशु-पक्षी से प्रेम रखने वाला,स्वयं के बड़ी जमीन जहां तरह-तरह के वृक्ष उगाने वाला, युवा अवस्था

    में प्रसिद्धी प्राप्त करता है। वर्ष 28 के बाद स्वभाव में परिवर्तन होता हैं।

    यदि इन चारों में कोई नीच राशि में हो तो कलंक लगता है, जमीनहेतु विवाद होता है, पशुओं द्वारा चोट का योग बनता हैं।

    उपाय -रविवार के दिन आक में दूध चढ़ाकर टहनी में मोली बांधेतथा गुड़ का भोग करें, सप्ताह बाद उसी आक के जड़ से गणपतिबनाकर नित्य पूजन करें।18) सू.मं.बु.श.:

    सू.मं.बु.श. एक राशि में होने से जातक किसी संस्था कासलाहकार पद युक्त होता है। विद्वान होते हुए भी कभी-कभी नीचआचरण करता है। ऐसे व्यक्ति फौज में देखे गये हैं, राजनीति का शौकहोता है। यदि चारों विपरित फल करते है तो पढ़ाई में रूचि नहीं होती,उच्च पद या मंत्री हो तो पदच्युत होता है। मित्रता में विवाद होता हैं।

    उपाय - लोहे के तवे पर नींबु, सेव, आँवला रखकर शूद्र को दानकरें।
    19) सू.मं.बु.रा. :

    सू.मं.बु.रा. एक राशि में होने से मित्र अच्छे नहीं होते, जिस स्थान मेंहो उसकी हानि करते हैं, धन की हानि होती है, सुख प्राप्ति न्यून रहताहै।

    उपाय - बुधवार के दिन संध्या के समय लोभान एवं गूगल काधूप करें। कठोर बाटीया वृक्ष को सात दिन तक जल से सींचे या पंचरंगीधागे से परिक्रमा कर बांधे।

    20) सू.मं.गु.शु. :

    सू.मं.गु.शु. एक राशि में होने से जातक के अंग में विशेष पीड़ा,धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र का जानकार होता है, पराक्रमी होता हैं। यदिअशुभ स्थान या कोई एक नीचस्थ हो किसी रोग द्वारा अंग में भारीक्षति, इच्छा शक्ति में कमी, कभी-कभी स्वयं से बात करने वाला होताहै।

    उपाय - 1. कल्प वृक्ष का पूजन करें। 2. शहतूत के वृक्ष में सातदिन तक जल सींचे। या साबुत 3 सुपारी पूजन कर गाड देवें।
21) सू.मं.गु.श. :

    सू.मं.गु.श. एक राशि में होने से जातक अपने कार्यों को येन केनप्रकरेण सिद्ध करने वाला, लोग उसे सम्मानित करते है। वर्ष 60 के बादसुनाई देना बन्द होता है। कई-कई जातक मस्तिष्क से विचलित होजाते हैं।

    उपाय-नित्य फलदार वृक्षों को जल से सींचे या उडद दान करें।
22) सू.मं.गु.रा. :

    सू.मं.गु.रा. एक राशि में होने से आदमी को हर समय वहम रहता है,मस्तिष्क में विचारों की उथल पुथल रहती है, नैत्रों और कानों में विकार

    होता है, माता-पिता के सुख में कमी, विद्या में अड़चन, कबाड़ी काकाम करने वाला होता है।

    उपाय -1. शनि या रविवार को केर के वृक्ष में 27 बूँद तेलचढ़ावें। 2. लाल कपड़े में एक सुपारी, कौड़ी एवं हल्दी की गांठ महुए केवृक्ष की जड़़ में गाड़ देवें।

    23) सू.मं.शु.श.:

    सू.मं.शु.श. एक राशि में होने से शत्रु बलवान होते है, अपनेबन्धुओं से विरोध करता है, कभी-कभी बुद्धिहीनता (मूर्खता) कीबात करता है।

    उपाय- रविवार के दिन भैरोनाथ की कपूर से आरती कर स्टीलके बर्तन में तिल की रेवड़ी एवं पताशा अर्पित करें।(बर्तन सहित)

    24) सू.मं.शु.रा. :

    सू. मं. शु.रा. एक राशि में होने से शत्रु को दबाने वाला, स्वयं केनिर्णय पर गलत कार्य करने वाला, निन्दित होता है, शरीर से बलवानपरन्तु बुद्धि से जड़ होता है। (भैरव को राहु का अधिदेवता माना गयाहै)।

    उपाय-कुष्ठ रोगी (कोड़ियो) को आटे से बनी मिठाई खिलानी

    चाहिये या भेरू को उबले हुये गेहूं अर्पित करें।25) सू.बु.गु.शु.:

    सू. बु. गु. एक राशि में होने से जातक विधावान, हर विषय मेंजानकारी रखने वाला, किसी भी युक्ति से अपना स्वार्थ सिद्ध करनेवाला, अन्य स्त्री से आसक्त रहता है।

    यदि यह चारों अशुभ स्थान में हो या कोई एक नीच राशि का,नंवमांश में भी अशुभ हो तब जातक अशान्त चित्त वाला, अत्यन्त
    स्वार्थ प्रिय, झगड़ालु प्रवृत्ति, शरीर में नपुसकता महसूस करने वालाहोता है।

    उपाय - रविवार के दिन सूर्य मंदिर में ठाक के पत्ते पर सफेदसरसों, श्वेत पुष्प एवं इलाइची रखकर सूर्यदेव को अर्पित करें। पुष्यनक्षत्र में ये सभी वस्तुऐं पान के पत्ते पर रखकर शिवलिंग पर चढ़ांवें।

    26) सू.बु.गु.श.:

    सू. बु.गु.श. एक राशि में होने से जातक झगड़ालु प्रवृत्ति वाला,भाई होते हुए भी इच्छा शक्ति में कमी, कभी-कभी अभिमान भी आताहै, किन्नर के समान कुछ प्रवृत्ति होती है।

    उपाय-कृतिका नक्षत्र के दिन गुलर के पत्ते पर चावल और कालेतिल रखकर पूर्व दिशा में खड्ड़ा खोदे उसमें काला कपड़ा रखकरगूलरके पत्ते को रखकर एक और गूलर का पत्ता रखें तथा मिट्टी से ढकदेवें।

    27) सू.बु.गु.रा.:

    सू.बु.गु.रा. एक राशि में होने से मनुष्य अपने से बड़ों का आदर नहींकरता, बात-बात पर तर्क करने वाला होता है तथा विद्या का पूर्ण लाभप्राप्त नहीं होता। समान आचरण नहीं करता है फिर भी सैद्धांतिक होताहै।

    उपाय - जहाँ से हाथी गुजरे उसके दाहिने पैर की मिट्टी लेवें उसमेंगोरोचन, कुमकुंम, कन्नेर की जड़ पीस कर मिश्रण बनावें तथागंगाजल मिलाकर नित्य तिलक कर घर से निकलें अथवा सभी चीजेंजेब या तिजोरी में रखने से ग्रहों का दुष्प्रभाव दूर होता है।28) सू. बु.शु.श. :

    सूबु.शु.श. एक राशि में होने से जातक मोहल्ले, गांव का मुखिया,
    शहर में रहने वाला हो तो उसका विशेष प्रभाव अधिक मित्रों वाला,ब्राह्मण वर्ग में प्रसिद्ध पण्डित, चतुर, वाचाल, प्रतिष्ठित होता है। यदिअशुभ स्थान में हो तो मित्नता में धोखा खाने वाला, बुद्धिमान होते हुएभी असभ्य भाषा का प्रयोग, मन से पवित्र नहीं होता। यदि शनि काप्रभाव अधिक हो तब पुलिस केस होता है।

    करें

    उपाय -बुधवार के दिन शहद के मालपुआ गणपतिजी को अर्पण

    29) सू.बु.शु.रा.:

    सू. बु.शु.रा. एक राशि में होने पर जन्म के बाद नाना या दादा को

    शारीरिक पीडा, व्यर्थ बकवास करने वाला, अपने से बड़ी स्त्री से

    धोखा खाने वाला, वर्ष 58 के बाद स्वयं भी रोग युक्त होता है।

    उपाय - पूर्वा-फाल्गुन नक्षत्र के दिन लाल गेहूं उबालकर उसमें

    तीन बूँद मधु (शहद) मिला एक मालती पुष्प (अथवा सफेद पुष्प)बड़ के पत्ते पर रख भैंरो का भोग लगावें।30) सू.बु.श. रा. :

    सू. बु.श.रा. एक राशि में होने से पिता से विचारों में अन्तर, हाथ

    या पैर में पीड़़ा, यात्रा करने वाला, मामा को कष्ट होता है।

    उपाय - रविवार के दिन काल भैरव (अथवा भैरों मंदिर) के उड़द

    की दाल पर सरसों के तेल की दीया कर उड़द की एक इमरती चढ़ावें।

    31) सू.गु.शु.श.:

    सू. गु. शु. श. एक राशि में होने से मनुष्य अत्यन्त लोभी,भाग्यवान, काव्य में रूचि रखने वाला, किसी संस्था का अध्यक्ष, दुष्टव्यक्ति भी उसकी इज्ज़त करते हैं।

    यदि अंशों में कमजोर हो, चार में दो वक्री हो या एक नीचस्थ हो दुष्ट
    मित्रों से हानि, लोभी प्रवृत्ति में धन हानि, स्त्री से कलह या स्त्री रोगीलीहोती है। ऐसे जातक को ब्याज बट्टे, शेयर बाजार में हानि होती है।

    उपाय - शुक्रवार के दिन आटे का हलवा बनावें उसमें सात बूँदशहद मिलाकर इन्द्राक्षी देवी को भोग लगावे तथा मरवे का पुष्यचढ़ावें।

    32) सू.गु.शु.रा. :

    सू. गु.शु. रा. एक राशि में होने से दादा-दादी को पीड़ा, वर्ष 22 मेंपिता को अशान्ति, अकेले व्यापार में हानि, किसी पर विश्वास करने मेंहानि, नौकरी में वर्ष 38 में परेशानी।

    उपाय - बुधवार के दिन तीन तिल के लड्डु लेवें। एकपर केसरका टीका, दूसरे पर बिलपत्र, तीसरे लड्डु पर हल्दी का टीका लगाकरगणपतिजी को अर्पित करें।

    33) सू.गु.श.रा. :

    सू. गु.श. रा. एक राशि में होने से वर्ष 36 में पत्नी को पीड़ा, स्वयंके हड्डी में तकलीफ, कुतर्क में होशियार, दुःख का अनुभव करनेवाला, कुटम्ब से झगड़ने वाला, बुद्धावस्था में घुटने में विशेष पीड़़ा।

    उपाय - पुनर्वसु नक्षत्र के दिन पंचमेवे, इलाइची, केसर युक्तचावल की खीर विष्णुजी को अर्पित करें।

    34) चं.मं.बु.गु.:

    चं.मं.बुगु. एक भाव में होने से जातक का झुकाव धर्म की ओरविशेष होता है, सरकार द्वारा सम्मानित, तीब्र बुद्धि वाला ननिहाल पक्षसे लाभ, संतान के प्रति विशेष चिन्ता करने वाला होता है।

    यदि कोई एक नीच अथवा 3, 6, 8, 12 वें स्थान हो मित्रों से

    कलह, समाज से दूर रहने वाला, रक्त विकार या हृदय में पीड़ा पाने उपाय- छह मुखी रूद्राक्ष चांदी में पिरोकर पंचरंगे धागे में बुधवार
के दिन प्रातः 10 बजे से पहले धारण करें या चाँदी के गिलास में नित्य
पानी पीयें।
35) चं.मं.बु.शु. :
चं.मं.बु.शु. एक राशि में होने से जातक संतान के प्रति चिन्ता
पालने वाला, स्वयं के परिवार का भला करने के बाद भी शत्रुता रखते
हैं। नौकरी में मैनेजर का पद प्राप्त होता हैं।
उपाय - पूर्णिमा के दिन पीले कपड़े में सरसो, मुलहटी और गुड़
जंगल में षीपल के तने पर बाँधे या पीतल के पत्ते पर पद्रहरीया यंत्र।
36 ) चं.मं.बु.श. :
चं.मं.बु.श. एक राशि में होने से जातक श्रेष्ठ विद्या ग्रहण करने
वाला, स्त्री का सहयोग रहता है, अच्छा पैसा कमाता है। कभी-कभी
ऐसे जातक गोद लिये जाते है।
अशुभ स्थान में हो तो माता-पिता का सुख प्राप्त नहीं होता, लोभ
से जीवन कष्टमय, दुष्ट मित्रों से सम्मान में कमी आती है।
उपाय - हनुमान मंदिर में गदा चढ़ाकर भेंट करें या हनुमानजी के
वागा (सिन्दूर सहित) माली पन्ना चढ़ावे ।

37 ) चं.मं.बु.रा.:

चं.मं.बु.रा. एक राशि में होने से शरीर के किसी अंग में घाव से पीड़ा, घुटने में चोट, जन्म के समय मामा या मामी को पीड़ा, 4वें भाव में हो जातक प्रसिद्ध होता है, माता के रोग भी होता है। यह विद्युत सम्बन्धी कार्य करने वाला अथवा उसमें लाभ होता है।
उपाय - बुधवार के दिन एक सफेद पत्थर पर कोयले से भैरो का चित्र बना उसका पूजन कर बतीसा·धूप देवें तथा जंगल में बड़ या
पीपल पर स्थापित करें।
38 ) चं.मं.गु.शु. :
चं.मं.गु.शु. एक राशि में होने से स्त्री सुन्दर, जातक सहनशील
प्रारब्ध से पुत्रवान एवं भाग्यवान होता है। मित्र अत्यधिक होते है।
यदि कोई एक नीच राशि या अशुभ स्थान में हो तब धन हानि
होती है, मस्तिष्क शून्य हो जाता है, शनि द्वारा दृष्ट हो तो पीड़ा अधिक
होती है, कार्य तथा समाज में प्रगति कम होती है।
उपाय - पुष्य नक्षत्र के दिन किसी मन्दिर में हारसिंगार का पौधा
लगावें या शिव मंदिर में सफेद पुष्प, हल्दी का गाठीया, सफेद मावे की
मिठाई चढ़ावें ।
39 ) चं.मं.गु.श. :
चं.मं.गु.श. एक राशि में होने से कान में पीड़ा, चतुराई से किसी को
ठगने वाला, 4वें भाव में हो जातक पूजनीक, 3 भाव में घमण्डी, 2वें में
धनवान, कई संस्थानों में अच्छे पद पर, जीत हासिल करने वाला, 5वें
स्थान में होने से वेद एवं अन्य विषयों में विद्वान होता है।
यदि अंशों में कमजोर, कोई ग्रह नीच राशि का या वक्री हो तो
चंचल चित्त वाला, कभी-कभी पागलपन करने वाला, बहरा भी हो
सकता है।
उपाय - तीन दिन सागवान के पत्ते पर पाँच जोत (दीये) कुंमकुम
लगाकर गंगा में प्रवाहित करें।
शुक्ल पक्ष गणेश चतुर्थी के दिन काली मिट्टी के गणपति बना
पूजन करें। पूजन कर जप ॐ गं गणपत नमः एक मास करे। चतुर्थी को
सरोवर में विसर्जन करें।
40 ) चं.मं.गु.रा. :
चं.मं.गु.रा. एक राशि में होने से जातक झगड़ा करने वाला, अपने
मित्रों को धोखा देने वाला, पैर या हड्डी में पीड़ा होती है। राहु की दशा
हो तो हैजा या तपेदिक रोग से ग्रसित होता है।
स्वयं के घर छोटे नर्मर्देश्वर शिवलिंग पर नित्य जल
उपाय
चढ़ावें ।
41 ) चं.मं.शु.श. :
चं.मं.शु.श. एक राशि में होने से स्त्री का स्वभाव, स्त्री से हर प्रकार
के कलह ही रहता है, नेत्रों की आकृति अन्य से भिन्न होती है। 5वें भव
में हो धर्म का ज्ञाता, 4वें स्थान में नम्र व्यक्ति होता है।
उपाय सोम या शुक्रवार सागवान के पत्ते पर कुंमकुंम से
स्वास्तिक बना गणपति (सुपारी के) स्थापित कर श्वेत पुष्प चढ़ायें
और आम के पेड़ में उसके जड़ के पास मौली से बाँध देवें ।
42 ) चं.मं.शु.रा. :
चं.मं.शु.रा. एक राशि में होने से जातक स्त्री के चरित्र में कुछ शंका,
माता एवं मित्रों द्वारा दुःखी होता है, ईमानदार होते हुए भी पीड़ा पाता है।
उपाय- मंगलवार के दिन सफेद कपड़े में स्वास्तिक बनाकर उसमें
पांच बादाम, शक्कर, कुछ मूँग बाँधकर घर में ईशान कोण में जहाँ सर्प
की बाँवी हो वहां रख देवे ।
43 ) चं.मं.श. रा. :
चं.मं.श.रा. एक राशि में होने से सोम-मंगलवार कुछ कमजोर जाते
है, भूमि एवं वाहन से नुकसान होता है। नेत्रों व चर्म सम्बन्धी पीड़ा का
योग बनता है।
उपाय - हर शनिवार लोहे (स्टील) के पात्र से धतुरे के जल
चढ़ावें। धतुरे की टहनी में तांबे की कील गाड़ दें।
44 ) चं.बु.गु.शु. :
चं.बु.गु.शु. की युति होने पर ब्राह्मण हो तो पण्डिताई का कार्य करने वाला, भाग्यशाली, तेजस्वी, अपने बन्धुओं से प्रेम रखने वाला,
माता-पिता सुख लम्बे समय नहीं रहता।
यदि अशुभ स्थान में हो अपने ही व्यक्तियों से कलह, माता एवं
मामा को पीड़ा, किसी आत्मिक सम्बन्धी की मृत्यु, कोहनी या कन्धे में
तकलीफ होती हैं।
उपाय - आम की लकड़ी का फ्रेम पूर्व दिशा अथवा मुख्य द्वार के
ऊपर लगाये जब भी घर से निकले उसमें अपनी शक्ल देखें।
45 ) चं.बु.गु.श. :
चं.बु.गु.श. एक राशि में होने से जातक कविता का शौकीन,
धर्मप्रिय, बन्धुप्रिय और यश प्राप्त करने वाला होता है।
यदि अशुभ स्थान में या वक्री हो तो अपने ही बन्धुओं से त्यागा
जाता है, माता से दूर रहता है, नास्तिक-आस्तिक दोनों में विश्वास
करने वाला, शरीर रोगयुक्त होता हैं।
उपाय - सोमवार के दिन शिवलिंग पर आँवले के रस से अभिषेक
कर चंदन, रक्त कनेर पुष्प काले तिल चढ़ावें ।
46) चं.बु.गु.रा. :
चं.बु.गु.रा. एक राशि में होने से राजनीति में सफल परन्तु अन्य
व्यक्तियों द्वारा बुराई से घिरा रहता है। यश में कमी आती है। वाहन से
चोट का योग होते हैं।
उपाय - शतभिषा नक्षत्र के दिन चावल, गुलर के पत्ते, तिल पत्र
और अमलपाश के पत्ते लाल कपड़े में बाँधकर बहते जल प्रवाहित करें।
47 ) चं.बु.शु.श. :
चं.बु.शु.श. एक राशि में होने से मकान बनाकर बेचने वाला, कई
स्त्रियाँ उसे चाहती है, कई संस्थानों द्वारा सम्मानित होता है। आन्तरिक
शत्रु अधिक होते हैं।
उपाय - स्वर्ण दान करें। पाँच पूर्णिमा पॉँच फल ब्राह्मण को दा
करें। माघ मास की पूर्णिमा या सोमवार को।

4৪) चं.गु.शु.श.:

चंगु.शु.श. एक राशि में होने से जातक के स्त्री का स्वभान
विपरित होता, बन्धुगण कलह करने वाले, अन्य स्त्री से गमन करने
वाला, इतना होते हुए भी जातक पैसा खर्च करने वाला, स्वभाव का
हंसमुख होता हैं।

उपाय - आटे की रोटी पर कुंमकुंम से पन्द्ररिया यंत्र बना जंगल में
गाड़ देवें।

49) चं.गुशु.रा. :

चंगु.शु.रा. एक राशि में होने से स्त्री रोगिली अथा द्वेष करने वाली,
मित्र मदद न करने वाले, शरीर में दाद, वर्ष 60 के बाद मूत्र सम्बन्धी
रोग का योग बनता है।

उपाय कुष्ण पक्ष पाँचम् को नाग देवता का पूजन करें। नाग
पंचमी को शिव पूजन कर नागदेव का पूजन करे।

50) मं.बुगु.शु. :

मंबुगुशु. की युति होने से स्त्री से विचारों में अन्तर, धन संचय
करने वाला, शरीर पुष्ट और रोग रहित होता है।

यदि अशुभ स्थान में हो स्वयं का स्वभाव झगड़ालु, देह में रोग,
व्यर्थ धन खर्च, माता- पिता से दूर रहता है।

उपाय शुक्रवार के दिन रूद्राभिषेक कर शिवलिंग पर कमल
गट्टे की माला, कमल पुष्प अर्पण करें।

51) मंबुगु.श. :

मंबुगु.श. एक राशि में होने से जातक लड़ने में कुशल, विद्या
अर्चन करने वाला, अच्छा वक्ता, सत्य बोलने से कठिनाई का सामना
करने वाला, बुद्धिमान भी होता है।

कोई ग्रह अस्त हो नीच राशि का हो घरेल कलह कार्य करने पर
यश प्राप्ति नहीं होती, शारीरिक कष्ट के साथ धन की कमी रहती है।
विद्या का लाभ प्राप्त नहीं होता।

उपाय - गुरूवार के दिन हकीक की माला फकीर को दें । चाँदी की
अंगुठी में हरा हकीक धारण करें।

52) मं.बुगु.रा. :

मंबु.गु.रा. एक राशि में होने से जातक को पुत्र की चिन्ता, एक बार
पीलिया रोग होता है, शरीर में खून में गर्मी, कभी-कभी त्वचा पर लाल
रंग के दाग होते है, विद्वान होते हुए भी प्रशंसा नहीं पाता हैं।

उपाय-अमर बेल जल से सींचे । शिव पर नित्य विल्व जग चढ़ावे।
53) मं.बु.शु.श. :

मं.बु.शु.श. एक राशि में होने से जातक कठिन कार्य करने वाला,
कत्ते पालने में शौक रखने वाला, ननिहाल या अन्य के घर जीवन
व्यापन करने वाला, सेना में प्रशिक्षण देने वाला होता हैं।

अशुभ स्थान में हो तो कुत्तों से डरने वाला, शरीर में अचानक रोग
होना, लड़ाई से डरने वाला, मित्रों से कलह करने वाला होता हैं।
खरगोश को गाजर खिलावें। मोर पंख को कागज में
लपेट कर अपने पास रखें।

उपाय

54) मं.बु.शु.रा. :

मं.बु.शु.रा. एक राशि में होने से अन्य स्त्री के सम्पर्क से प्रतिष्ठा में हानि, शरीर में अचानक दुर्वलता, दैनिक आमदानी में कमी आती है।
राहु की दशा में जमीन सम्बन्धी विवाद होता हैं।

उपाय- रूद्राक्ष की माला तांबे में पिरोकर ब्राह्मण को भेंट करें।
55 ) मं.बु.श. रा. :
मं.बु.श.रा. एक राशि में होने से लोग प्रशंसा करते है, परन्तु धन
प्राप्ति नहीं होती, पैरों में पीड़ा, गुदा में पीड़ा, जन्म समय ननिहाल पक्ष
तकलीफ होती है।
उपाय - पाँच नग सीताफल एक अन्नानास शिव के बाण (योनि)
पर चढ़ावें ।
56 ) मं.गु. शु. श. :
मं.गु.शु.श. एक राशि में होने से हर कार्य में झुंझलाट, स्त्रियों के
प्रति झुकाव, आन्तरिक चालाक एवं कपटी होता है। अपने स्वार्थ सिद्ध
करने के लिये कुछ भी कर सकता हैं।
उपाय - एक आलु को बीच से काट उसमें एक सफेद और एक
लाल चिरमी रखकर कपड़े में बाँध जमीन में गाड़ देवें या गीली चिरमी
पान पर रख चढ़ावे ।
57 ) मं.गु.शु.रा. :
मं.गु.शु.रा. एक राशि में होने से स्त्रियों से ठगा जाता है, विशेष
चालाकी से पोल खुलती है, रक्त में विकार तथा पैरों के जोड़ों में
तकलीफ होती हैं।
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उपाय- भैरो मन्दिर में पूजा कर फूल मण्डली करावें । पाँच
रविवार काले कुत्ते को इमरती खिलावें। पंचरंगी ध्वजा बाबा रामदेव के
मन्दिर में चढ़ावें ।
58) मं. शु.श.रा. :
मं.शु.श.रा. एक राशि में होने से जातक होशियार, हर तरीके से
कार्य करने वाला परन्तु उच्च पद को प्राप्त नहीं होता, अड़चनों से गिरा
रहता है। अपने से बड़े व्यक्ति से विवाद होता हैं।
उपाय - उष्ट्रा देवी का पूजन करें। भैंस दान करें।
59 ) बु.गु. शु.श. :
बु.गु.शु.श. एक राशि में होने से जातक कानून का जानकार, स्मरण
एवं बुद्धि तीव्र होती है। सभी गुण होते हुए कामवासना तीव्र रहती। यदि
कोई ग्रह वक्री या अशुभ हो अपनी बुद्धि काम नहीं लेगा। आलस्य
युक्त होता है, कामवासना कूट-कूट कर भरी होती है, शास्त्र से मुख
मोड़ता है।
उपाय बुधवार के दिन शक्करकंद, लौकी, आम दान करें।
संक्रान्ति के दिन अवश्य दान करें।
60) बु.गु.शु.रा. :
बु.गु.शु.रा. एक राशि में होने से जातक स्मरण शक्ति में कमी आती
है। असत्य बोलने वाला, गर्म वस्तु से जलने वाला या किसी कारण
शरीर में खून की कमी रहती है, विदेश में पीड़ा पाने वाला होता हैं।
उपाय - काले चने भिगोकर सफेद धागे में पिरोकर यह माला
नवग्रह मन्दिर में गुरू की प्रतिमा में चढ़ावें ।
61 ) बु.गु.श.रा. :
बु.गु.श.रा. एक राशि में होने से जातक नौकरी करने वाला, बचपन
में उदण्डी, युवावस्था में कामना से लिप्त, हर किसी में कमी निकालने
वाला होता हैं।
उपाय - बुध एवं शनिवार को चावल पकाकर कौंवे को खिलावें।

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