पञ्च ग्रह योग फलानि -उपाय

पञ्च ग्रह योग फलानि -
1) सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरू -
एक राशि में होने से जातक मन से दुःखी, प्रपंच करने वाला, स्त्री
से वियोग सप्तम् अष्टम् भाव में हो तो निश्चित स्त्री से पीड़ा मृत्यु होती
उपाय- पंच धातु (ताँबा, चाँदी, स्वर्ण, जस्ता, लोह) का कड़ा
बनाकर पहनें।
2) सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, शुक्र -
एक राशि में होने से हर बात को झूठ से सत्य साबित करने वाला,
स्वयं के घर के काम के अलावा दूसरों का काम करने वाला, उसके
मित्र कुछ नपुसंकता लिए होते हैं ।
उपाय - पंचदेवता (गणेश, दुर्गा, ब्रह्मा, विष्णु शिव) का पूजन
-
करें।
3) सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, शनि -
एक राशि में होने से जातक के शरीर की लम्बाई चौड़ाई अच्छी
होती है। पुत्र दूर रहता है। पुलिस में नौकरी हो तो जेलर होता है।,
कभी-कभी जातक को बन्दन योग बनता है ।
उपाय - नित्य गणपतिजी का पंचामृत से अथर्वशीर्ष अभिषेक करें
जिससे ग्रहों का दुष्प्रभाव समाप्त होगा।
4) सूर्य, चन्द्र, मंगल, गुरू, शुक्र -
एक राशि में होने से जातक न्याय प्रिय दण्डनायक प्रसिद्ध होता हैं।
विपरित परिस्थिति में जातक जाति-पाति न मानने वाला, माता पिता से
विचारों में अन्तर या माता-पिता का सुख समाप्त होता है।
उपाय पंचपल्लव पर श्रीयंत्र (ताम्बा, चाँदी या स्फटिक) स्थापित कर नित्य जप कर चंदन केसर से तिलक करें।
जप मंत्र- ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं नमः
5) सूर्य, चन्द्र, मंगल, गुरू, शानि
एक राशि में होने से दूसरों के धन को खर्चकर आनन्द लेने वाला,
अन्य लोगों को आपस में भिड़ाने वाला, किसी भी युवती से अपना
कार्य सिद्ध करने वाला, मन से दूषित होता है।
उपाय रक्त कनेर, श्वेत, पीला एवं कोयली का पुष्प लेवें। उसे
जल से धोकर श्रावण मास में नित्य शिवलिंग पर चढ़ावें अथवा प्रत्येक
सोमवार को करें ।
6) सूर्य, चन्द्र, मंगल, शुक्र, शनि-
एक राशि में होने से जातक को सुख भोग में कमी उत्पन्न करता
है। अन्य धनवान और पर स्त्री को देखकर जलनशील होता है। अच्छा
आचरण नहीं करता हैं, मौके का फायदा उठाने वाला होता हैं।
उपाय - 1. शिव भगवान के पंच वक्र का पूजन करावें। पंचमुखी
रूद्राक्ष गले में धारण करें अथवा शिवलिंग पर अर्पित करें।
7) सूर्य, चन्द्र, बुध, गुरू, शुक्र-
एक राशि में होने से ऐश्वर्यवान, राजनीतिज्ञ, प्रारब्ध से अच्छे कर्म
करने से इस जन्म में भाग्यशाली होता है, सुन्दर स्त्री से विवाह होता है ।
लेकिन यह ग्रह कुण्डली में केन्द्र या त्रिकोण में होने से लाभ मिलता है
अन्यथा इनका फल कमजोर होता हैं।
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उपाय - आटे के केसर युक्त लड्डु एवं केसरयुक्त खीर बनाकर
किसी साधु या दण्डी स्वामी के भोजन में परोसे।
8) चन्द्र, मंगल, बुध, गुरू, शुक्र -
एक राशि में होने से जातक अच्छे स्वभाव वाला, कुटुम्ब एवं 
समाज से प्रेम, पुत्र निश्चित होता है तथा मित्रों की संख्या अधिक होती
है। यदि कुण्डली में अशुभ स्थान में हो जातक को कुटुम्ब से प्रेम नहीं
मिलता। मित्रों से लाभ नहीं, धन सम्पत्ति से रहित अर्थात् सुख में भारी
कमी रहती है।
उपाय - बुधवार के दिन चाँदी, ताँबे, पीतल का सिक्का गंगा में
बहा दें या चाँदी, ताम्बा, सोने, सीसा का कड़ा बनाकर पहने।
9) चन्द्र, मंगल, बुध, गुरू, शनि
एक राशी में होने से नेत्र विकार, धन अधिक खर्च होना,
भाई-बन्धुओं से विचारों में अन्तर, धन होते हुए भी माँगने का स्वभाव
होता है।
उपाय - इस ग्रहों के योग के लिए श्री दुर्गासप्तशती के इस मंत्र का
नित्य जप करें।
मंत्र - सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ।।
10 ) चन्द्र, मंगल, बुध, शुक्र, शनि -
एक राशी में होने से जातक घमण्डी होता है, दलाली करने वाला,
भाग्य कमजोर होता हैं। तीर्थ यात्रा करने वाला, यह वन प्रेमी होता है।
उपाय - सूखे नारियल में छिद्र कर पंचमेवा, शक्कर एवं तिल
डालकर जहाँ कीडियाँ हो वहाँ गाड़ देवें ।
11 ) चन्द्र, बुध, गुरू, शुक्र, शनि -
एक राशि में होने जातक प्रभावशाली, समाज में प्रतिष्ठा, मित्रों में
पूजनीय, सब स्थानों में उसका कहा माना जाता है।
यदि अशुभ स्थान में अथवा कोई दो ग्रह वक्री हो जातक के मित्रों
का स्वभाव अच्छा नहीं होता, स्त्री-पुत्रों से विचारों में अन्तर कुतर्क करने वाला निन्दनीय होता हैं।
उपाय
जातक को चौसठ योगिनी का पूजन करना चाहिये
अथवा कुलदेवी की नित्य आराधना करें।
12) मंगल, बुध, गुरू, शुक्र, शनि-
एक राशि में होने से जातक समाज तथा राज्य में मान पाने वाला,
सद्गुणी, प्रसन्नचित्त रहने वाला, परन्तु धन से उतार-चढ़ाव रहता हैं।
अशुभ स्थान, कोई दो ग्रह वक्री अथवा अंशों में कमजोर होने से
मनुष्य दण्ड पाने वाला, निर्धन, अपने प्रिय को खोने वाला, व्यर्थ घूमने
वाला होता हैं।
उपाय - मंगलवार के दिन माटी के कुल्लड़ में घी, शक्कर, लाल
मसूर एवं राई डालकर लाल कपड़े में बाँध जंगल में गाड़ देवें या
मंगलवार के दिन शिव पर शहद का अभिषेक करे व स्वेत पुष्प चढ़ावे ।
नोट : किसी जातक के छ: ग्रह एक ही राशि में होने से नवग्रह स्त्रोत का
नित्य पाठ करे । अनामिका अंगुली में नवग्रह की अंगुठी धारण करें।

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