लग्न और राशि के उपाय -
लग्न और राशि के उपाय -
1) जन्म पत्रिका में लग्न प्रधान हैं। जातक के जन्म पत्रिका में पहलेलग्न विचार करना चाहिये कि लग्न कितने अंशों का है। यदि लग्न 28,29 अंश का हो या 0 या 2 अंश हो तो जातक के जन्म चक्र का प्रभावअर्थ यह है कि लग्न कमजोर होने पर कुण्डली का फल कमजोर होता हैऔर लग्न से स्वभाव, व्यक्तित्व, जातक जहां जाता है। वहां उसकीप्रतिष्ठा में कमी आती है। लग्न को मजबूत करने के लिए हम इसपुस्तक में शास्त्रोक्त उपाय प्रस्तुत कर रहे हैं।
2) जन्म पत्रिका में चन्द्रमा जिस राशी का हो वह जातक के जन्मराशि कहलाती है, जन्म राशि उच्च होने पर अंशों में कमजोर हो अथवानीच राशि हो तो निम्न उपाय करें -
(1) मेष लग्न -
1. जातक को अपने जन्म दिवस के दिन अपने वजन के बराबरअनाज तोलकर गरीबों अथवा पक्षीयों को डालें।
2. ग्रहण के दिन स्वर्ण दान करें।
3. गरीबों को कम्बल बाँटे।
मेष राशि -
1. जातक अपने घर में मेष राशि (भेड़) का चिन्ह रखें।
2. मार्गशीष मास के सोमवार को गेहूं से बनी मिठाई एवं व्यंजनोंकी थाली शिव मंदिर में अर्पित करें।
3. अनन्त मूल की जड़ चाँदी के ताबीज में धारण करें।
2) वृषभलग्न -
1. शुक्रवार के दिन जौ से बनी वस्तु बैल को खिलायें।
2. शुक्रवार के दिन लाल पुष्प पद्मावती माँ को चढ़ावें।
3. कन्यादान में चाँदी के गहने दान करें।वृषभ राशि -
1. इलाइची दान करें।
2. वस्त्रों का दान करें।
3. निर्जला एकादशी के दिन शरबत एवं आम ब्राह्मण को देवें।
3) मिथुन लग्न-
1. शरद ऋतु में बुधवार के दिनरूई से भरी हुई रजाई दान करें।
2. विवाह में ब्राह्मणों को चावल का दान करें।
3. अपने शयन कक्ष में स्त्री-पुरुष जोड़े का चित्र रखें।मिथुन राशि -
1. बुधवार के दिन गणपतिजी को लड्डु चढ़ावें।
2. हर बुधवार को गोबर से हाथ धोवें।
3. बुधवार के दिन दूध में शहद डालकर पीयें।
4) कर्क-लग्न-
1.नित्य केले के वृक्ष को जल से सींचे।
2. अमावस्या के दिन बच्चों को दूध पिलावें।
3. घर के दक्षिण भाग में केकड़ा का चित्र बनाकर लगायें।कर्क-राशि:
1. मकर सक्रांति के दिन मूली का दान करें।
2.सोमवार के दिन, आलु, चुकन्दर, प्याज, अदरक का सेवन करें।
3. सोमवार के दिन शिवलिंग पर दही से अभिषेक करें।
5)सिंहलग्न -
1. गन्ने के रस से शिवलिंग पर अभिषेक करें।
2. सोमवार के दिन शिवलिंग पर पाँच नीम्बू चढ़ावें।
3. रविवार के दिन सूर्य मन्दिर में पूजन कर कमल का पुष्य चढ़ावें।सिंह-राशि:
1. चाँदी का शेर के पीठ पर श्रीयंत्र स्थापित कर नित्य पूजन करें।
2. शिवलिंग पर सोमवार पाँच बादाम चढावें।
3. चने से बनी मिठाई दान करें।
6) कन्या लग्न-
1. अपने घर के आँगन में मरूआ या आँवला का वृक्ष लगाकर नित्यजल से सींचे।
2. नवरात्रि में नौ वर्ष की नौ कन्याओं को भोजन करवाने से लग्नमजबूत होता है।
3. चमेली के जड़़ पास में रखने से समय अनुकूल बनता है खेलती हुईकन्या का चित्र घर में लगायें।
कन्या राशि :
1.चिड़़ीयों को नित्य बाजरी चुगावें।
2. गेहूं का दान करें।
3. कासी के बर्तन में कुल्त की दाल डालकर दान करें।
7) तुला लग्न-
1. उड़द से बनी मिठाई (इमरती) गरीबों को दान करें।
2. लोहे की बनी तुला (तराजू) बांट सहित जिस मंदिर में भोजन बनताहो वहाँ दान करें।
3. भोजन शाला में तुला का चित्र रखें।
तुला राशि:
1. बच्चों को खरबूजा खिलावें।
2. चाँदी दान करें।
3. शनि मंदिर में कनेर का पौधा लगावें।
8) वृश्चिक लग्न -
1. बिच्छु की तस्वीर संदूक में रखें।
2. ऊन के वस्त्र दान करें।
3. किसी मंदिर में स्टील के बर्तन दान करें।वृश्चिक राशि:
1. हनुमानजी को गुलाब का पुष्प चढ़ावें। (बांये पैर पर)
2. गरीबों में सेव बाटे।
3. ताम्बे का घड़ा शक्कर भरकर दान करें।
9) धनु लग्न -
1. ब्राह्मण भोजन अथवा कुम्भ मेले में नमक दान करें।
2. देवी के मंदिर में तलवार का पूजन कर देवी के समक्ष रखें।
3. घोड़े का दान करें अथवा धन लग्न का चित्र बाहर जाते खिड़कीतरफ रखें।
धनु राशि:
1. गरीबों को वस्त्र दान करें।
2. मकर सक्रांति के दिन तिल से बनी मिठाई दान करें।
3. संतरा दान करें।
10) मकर लग्न -
1. लोहे की वस्तु दान करें।
2. काले जामुन बच्चों को खिलायें।
3. शनि मंदिर में कनेर का पौधा लगाये।मकर राशि:
1. उड़द की बनी इमरती शनदेव को चढ़ावें।
2.शनिवार के दिन गुंदगिरी लड्डु बच्चों को खिलावे।
3. काली मिर्च का दान करें।
11) कुम्भ लग्न-
1.मिट्टी या लोह घड़ा जल से भरकर दान करें।
2.शनि मंदिर में नित्य पुष्पमाला अर्पण करें।
3. घर में कुम्भ लिए हुए आदमी का चित्र जल स्थान या फ्रिज के ऊपरलगावें।
कुम्भ राशि:
1. उड़द से बनी मिठाईयाँ दान करें।
2. घर में नित्य गूगल का धूप करें।
3. गर्मी में मेहमान को शरबत पिलावें।
12) मीન लग्न -
1. घर में मछली घर (फिश एक्वेरियम) रखें।
2. गुरूवार के दिन मछलियों को चावल या आटे की गोलियाँ चुगावें।
3. बेसन से बनी मिठाई गुरूजनों को खिलायें।मीन राशि:
1. किसी कन्या के विवाह में घी दान करें।
2. गुरू पूर्णिमा के दिन गुरू को श्वेत चंदन का टीका लगाकर बादामका हलवा खिलावे तथा हर गुरूवार को सेवा करें।
3. नवग्रह मंदिर में गुरु की मूर्ति अथवा विष्णु मंदिर में गेंदे का फूल चढ़ावे