विभिन्न समस्या सामान्य उपाय

सामान्य उपाय
सामान्य उपाय बता रहा हूँ यदि आपने
अपने व्यस्त जीवन में से कुछ समय निकाल कर कोई उपाय किया तो आप अवश्य ही
लाभन्वित होंगे:-
* पीपल के नीचे जाकर ।। बार "श्री राम जय राम जय जय राम" जाप करने
से आप हर प्रकार की समस्या से मुक्ति पा सकते हैं। यह आप कम से कम गुरुवार व
शनिवार को तो अवश्य ही करें।
* किसी भी परिवार की महिलाओं में यदि अधिक क्लेश रहता हो अथवा आपस
में शत्रुता
हो तो आप रविवार को किसी मिट्टी के पात्र में आग रख कर उस पर कबूतर
की सूखी बीट को रख कर उसका धुआँ सारे कमरों में कर दें।
* प्रातः स्नान आदि कर घर के प्रत्येक सदस्य के माथे पर चंदन का तिलक
लगायें और लगा ही रहने दें। इससे आप रोग से दूर रहेंगे।
* घर के अन्दर 12 अँगुल की पलाश की लकड़ी को यदि अभिमंत्रित कर घर
में गाड़ दिया जाये तो घर में किसी प्रकार की अशुभ शक्ति का प्रवेश नहीं होता है।
* निवास के मुख्यद्वार पर बाहर की ओर श्वेतार्क लगाने से शत्रु, रोग व चोर
आदि से घर सुरक्षित रहेगा।
* आप घर के भण्डार कक्ष में यदि आश्लेषा नक्षत्र में बरगद का पत्ता लाकर रखें
तो भण्डार कक्ष भरा रहेगा अथवा भरणी नक्षत्र में पीपल का बांदा लाकर रखने से भी
भण्डार भरा रहता है।
में
* घर के मध्य में तुलसी का पौधा होने से घर में प्रेम के साथ सुख-समृद्धि की
वृद्धि होती है।
* घर में कुछ स्थान कच्चा अवश्य रखना चाहिये। इससे शुक्र ग्रह को बल प्राप्त
होता है जिसके प्रभाव से भौतिक सम्पदा में वृद्धि होती है।
* किसी शुभ समय में यदि आप किसी पीले वस्त्र में सात-सात की संख्या में
हल्दी की साबुत गांठ, जनेऊ, लग्नमण्डप सुपारी, छोटी गुड़ की डली व इतने ही पीले
फूल को धूप-दीप से पूजा कर अपने पूजा स्थल अथवा धन रखने के स्थान में रखें तो
आर्थिक समस्या नहीं आती है।
* जिस स्थान पर आप धन अथवा अन्य मूल्यवान वस्तु रखते हैं वहां प्रथम
शुक्रवार को लाल वस्त्र में 11 सूखे छुआरे रखने से आर्थिक लाभ प्राप्त होते हैं।
* किसी भी नई मूल्यवान वस्तु का आरम्भ करने से पहले उस पर हल्दी को
गंगाजल में मिला कर उस पर छींटे देने से वह अधिक समय तक चलती है।
* यदि आपके घर में अचानक अधिक हानि होने लगी है अथवा मूल्यवान वस्तुयें
बार-बार खराब हो रही हैं तो आप 11 अभिमंत्रित गोमती चक्र मुख्यद्वार पर रख कर
जब भोजन बनने के बाद अग्नि अर्थात् गैस बन्द करने का समय आये तो आप उस पर
एक कण्डा जला कर उसकी राख बना लें और अगले दिन उस राख को पानी में मिला
कर सारे घर में पौछा लगा दें व गोमती चक्र दक्षिण दिशा में फेंक दें। आपकी सारी
हानि होना बन्द हो जायेगा।
* यदि आप किसी व्यक्ति के पास समझोते के उद्देश्य से जा रहे हैं तो उस दिन
आप नहा कर एक माला जाप "सर्वबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि । एवमेव त्वया
कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्" करके जायें। यह उपाय आप अपने शत्रु नाश के लिये भी कर
सकते हैं। इस मंत्र का जाप किसी शुभ समय में "श्री नवदुर्गे यंत्र" के समक्ष रूद्राक्ष की
माला से करें।
* यदि आपको किसी मार्ग में कहीं नाचता हुआ मोर दिखाई दे जाये तो आप उस
स्थान की थोड़ी सी मिट्टी उठा कर अपने पर्स में रख लें। यदि उस स्थान पर मोर का
कोई टूटा पंख भी मिल जाये तो यह आपका और अधिक सौभाग्य है। उस पंख को
लाकर लाल रेशमी वस्त्र में लपेट कर अपने धन रखने के स्थान पर रख दें। इससे आप
आर्थिक संकट में नहीं आयेंगे।
* आप जब घर से निकल रहे हों और आपका मार्ग नेवला काट जाये तो आप
उस स्थान की मिट्टी उठा कर घर आ जायें। मिट्टी को सामने रख कर पाँच अगरबत्ती
जला कर "ॐ नमो नारायणा'" का जाप अगरबत्ती समाप्त होने तक करें और मिट्टी को
शुद्ध स्थान पर रख दें।
* कहीं जाते समय यदि आपको कोई ऐसी गाय मिले जो बछड़े को दूध पिला
रही हो तो आप उसे कोई फल अथवा अन्य वस्तु अवश्य खिलायें। यह बहुत शुभ संकेत
है, जिसका आपको सुफल प्राप्त होगा।
* यदि कोई नवविवाहिता आई है और किसी बात पर वह इतना अधिक हसे कि
उसके आँसू आ जाये तो आप उसके आँसू को अपनी तर्जनी पर लेकर चाट लें। यह
आपके भाग्य के द्वार खोल कर समृद्धि देगा।
* यदि कोई नवविवाहिता अपने हाथ से कोई फल अथवा खाने की कोई भी वस्तु
किसी ऐसी स्त्री को दे जिसके संतान अथवा पुत्र नहीं होता है तो वह मना न करें अपितु

फल लेकर उसके चरण स्पर्श करें। एक वर्ष के अन्दर उसके संतान हो जायेगी। यह सब
अचानक ही होना चाहिये। वह फल अपने मन से ही दे। यह एक संकेत है।
* आपके मार्ग में यदि कोई सफाई कर्मचारी सफाई करता दिखाई दे जाये तो
आप उसे कुछ दक्षिणा अवश्य दें। यदि वह महिला हो तो और भी अधिक शुभ है।
* यदि आपको कहीं से असली व अभिमंत्रित निम्न सामग्री में से कुछ भी मिले
तो आप अवश्य लें, इससे आप कभी आर्थिक संकट में नहीं आयेंगे और उत्तरोत्तर उन्नति
करेंगे- दक्षिणावर्ती शंख, मोती शंख, गोमती चक्र, सियारसिंगी, हत्थाजोड़ी, एकाक्षी
नारियल, पारद का कोई भी विग्रह, श्वेतार्क गणपति, काली हल्दी, श्रीयंत्र, कनकधारा
यंत्र, महालक्ष्मी यंत्र, कुबेर यंत्र, धनदा यंत्र, काम्या सिन्दूर, सिद्ध बीसा यंत्र, कस्तूरी
आदि।
* आपके साथ कोई मजबूरी आ रही है जैसे आप कोई कार्य नहीं करना चाह
रहे हैं परन्तु किसी के दबाव में आपको वह कार्य करना पड़ रहा है तो आप किसी शुभ
समय अथवा प्रथम गुरुवार को पूर्वाभिमुखी होकर अपने सामने श्वेत वस्त्र पर फूलदार
लौंग का जोड़ा व कपूर रख कर श्री गायत्री मंत्र की एक माला से अभिमंत्रित कर जला
दें। जलाते समय मंत्र का मानसिक जाप करें। उस भभूत को दिन में तीन बार चाटें।
आपकी समस्या का समाधान हो जायेगा।
* यदि आपको कोई शक्तिशाली व्यक्ति अथवा आपका कोई उच्चाधिकारी
परेशान कर रहा है तो आप किसी शनिवार को उठते ही पाँच बार उसका नाम लेकर
अपशब्द कहें जैसे अमुक कमीना, अमुक, दुष्ट, अमुक पापी, अमुक नीच, अमुक राक्षस
आदि, फिर कपूर जलाकर उसकी राख में बासा जल मिलाकर काली स्याई का रूप
देकर भोजपत्र पर उसका नाम लिख कर शमशान के पीपल के नीचे जितना अधिक
गहरा गड्ढा खोदकर दबा सकें दबा दें। इसके बाद वह आपको परेशान करना छोड़ देगा।
* यदि कोई नौकरी सम्बन्धी फाइल चल रही है और आपको शक है कि फैसला
आपके विरुद्ध जा सकता है तो आप प्रथम मंगलवार को पान के पत्ते पर लाल चंदन से
लॉंग की मदद से उस अधिकारी का नाम लिखें जो फैसला करने वाला है। उस पान को
बरगद की छाँव में सुखा लें। जब वह सूख जाये तो उस पान को उसी लौंग सहित खा
लें। वह फैसला आपके पक्ष में करेगा।
* यदि आपके उच्चाधिकारी आपसे नाराज रहते हैं तो आप सदैव रक्तगुँजा की
जड़ अपनी जेब में रखें। इसके प्रभाव से वह आपसे सम्मोहित रहेंगे।
* किसी पिण्ड खजूर में जुड़ी गुठली निकल आती है, मंगलवार को उस गुठली
को लाल धागे में बांधने से भी सभी सम्मोहित होते हैं।
* आप यदि सदैव आर्थिक संकट अथवा अन्य प्रकार के संकट से मुक्त रहना

चाहते है तो प्रत्येक गुरुवार को अपने स्नान के पानी में एक चम्मच हल्दी अवश्य डालें।
गुरुवार को सामान्य जल व शुद्ध घी का दीपक, शनिवार को मीठा जल व सरसों के तेल
का दीपक पीपल पर अर्पित करें। मंगलवार को किसी दक्षिणमुखी श्री हनुमान मन्दिर में
108 परिक्रमा के साथ 11 बार चालीसा पाठ व एक-एक बार बजरंगबाण व श्री
हनुमाष्टक का पाठ करने से आप सदैव संकट मुक्त रहेंगे।
यदि आप पर कभी बहुत बड़ा संकट आता है तो आप अपनी आयु के वर्ष के
बराबर पक्षियों का मूल्य चुका कर उन्हें आजाद कर दें। आपका संकट कहाँ गया.
आपको पता भी नहीं चलेगा।
* यदि आप किसी ऐसे स्थान पर कार्य करते हैं अथवा स्वयं का कोई ऐसा कार्य
करते हैं जिसमें आपसे सभी का प्रसन्न रहना आवश्यक हो तो आप किसी शुभ समय
में एक पांचमुखी रुद्राक्ष व दो स्फटिक के मोती को अभिमंत्रित करें। स्वयं न कर सकें
तो कहीं से व्यवस्था करें। फिर रूद्राक्ष के दोनों और उन मोती को लाल धागे में करके
गले में धारण करने से आपसे सदैव सभी प्रसन्न रहेंगे।
आप यदि अपने उच्चाधिकारी का अथवा अपने मालिक का नाम लेकर प्रत्येक
रविवार को एक फूलदार लौंग लेकर अग्नि में डालते रहेंगे तो उसके मन में आपके प्रति
कभी दुर्भावना नहीं आयेगी।
* यदि आप कोई ऐसा कार्य करते हैं जिसमें आपके विरोधी अधिक हैं तो आप
प्रथम मंगलवार से यह उपाय आरम्भ करें। इसमें आप 11 पत्ते पीपल के लेकर उन पर
लाल चंदन से "श्रीराम' लिख कर प्रभु को अर्पित करें। आपके विरोधी कभी आपका
अहित नहीं कर सकते हैं। यह उपाय आप किसी अन्य कार्य सिद्धि के लिये भी कर
सकते हैं।
* उन्नति के लिये आप प्रथम गुरुवार को (यदि आप नौकरी करते हैं तो बैठने के
स्थान पर और व्यवसाय करते हैं तो व्यवसाय स्थल पर) कच्चे सूत को केशर से रंग कर
बांध दें। फिर चमत्कार देखें।
* कोई भी पत्राचार करने से पहले अथवा टैण्डर डालने पर लिफाफे पर हल्दी
के साथ केशर मिलाकर गंगाजल से भिगो कर छींटे मारने से आपके हित में कार्य होगा।
* किसी पद में अथवा चुनाव में विजय पाने के लिये जब आप नामांकन के लिये
जा रहे हों तो स्वच्छ सफेद वस्त्र पर अपना नाम लिख कर अलसी के तेल के दीपक में
कपड़े को बत्ती के रूप में जला कर कनकधारा स्तोत्र का पाठ किसी बाह्मण से करवा
दें। जब तक मतगणना हो अर्थात् नामाकंन से विजयी घोषणा तक अखण्ड दीपक व
स्तोत्र का पाठ चलता रहे। नित्य पाठ के बाद हवन में खीर मिश्रित सामग्री से आहुति
दी जाये तो विजयी होने की पूर्ण संभावना होती है।
आप जब भी बैंक में कुछ रुपये जमा करने जायें तो प्रयास करें कि आप पश्चिममुखी होकर ही कार्य करें तथा मानसिक रूप से माँ लक्ष्मी के किसी भी मंत्र का जाप करते रहें और यदि कोई मंत्र याद न हो तो "श्रीं श्रीं श्रीं" ही करते रहें।
* आपको जब भी दान का मौका मिले तो सफेद वस्तु का ही दान करें। यदि कर
को सकें तो किसी सुहागिन को गुरुवार  अथवा शुक्रवार सामग्री दान करें। आप
यदि किसी हिजड़े को बुधवार को हरे वस्त्रों के साथ सुहाग सामग्री दान कर सकें तो
यह आपके लिये बहुत ही शुभ होगा।

   कुछ और  विभिन्न सामान्य उपाय

    * व्यापारिक सफलता के लिये- यदि आपका व्यवसाय दक्षिणमुखी अथवाकिसी शत्रु के अभिचार कर्म के कारण गति नहीं पकड़ पा रहा है तो आप किसी शुभसमय अथवा शुक्लपक्ष के प्रथम मंगलवार को अभिमंत्रित "श्री हनुमान यंत्र" लेकर किसीसिद्ध हनुमान मन्दिर में जायें और प्रभु के हाथों का थोड़ा सा सिन्दूर लेकर यंत्र परलगायें। थोड़ा सा अपने माथे, बांहों और छाती पर लगायें। श्रीहनुमान चालीसा व एकबार बजरंगबाण का पाठ कर निम्न मंत्र का एक जाप करें-

    "ॐ श्री हनुमते नमः ॐ नमो हरि संकट मर्कटाय स्वाहा, ॐ नमो भगवतेआंजनेमाय स्वाहा, महबलाय स्वाहा, हूं पवननन्दाय स्वाहा, श्रीहनुमानजी की जय। ॐहुं हनुमते रुद्रात्मकाय हुम फट्। हनुमते रक्षा सर्वदा ॐ श्री हनुमते नमः। ॐ अंजनीसुतायविद्महे वायुपुत्राय धीमहि तन्नो मारूति प्रचोदयात् ।

    फिर प्रभु को अपनी समस्या के निवारण का निवेदत कर अपने व्यवसाय स्थल परआकर मुख्यद्वार पर अथवा दक्षिणमुखी स्थान पर उस यंत्र को स्थान दे दें। गुड़-चनेका भोग लगा कर वही सारे पाठ जो आपने मन्दिर में किये थे, करें। मंत्र का जाप कमसे कम 11 बार करें। अधिक कर सकते हों तो अधिक करें। बस, आपकी समस्या केसमाधान की कार्यवाही प्रभु की कृपा से आरम्भ हो गई। अब आप.जब आये तो पहलेयंत्र के दर्शन करें। यदि एक बार मंत्र जाप कर सकें तो बहुत ही अच्छा है।

    * शत्रु नाश हेतु-- यदि आपके शत्रु अधिक हैं और उनके कारण आपको अधिकसमस्या आती हैं तो आप इस उपाय से सभी शत्रुओं से मुक्ति पा सकते हैं। किसी शुभसभय में अथवा शुक्लपक्ष के प्रथम मंगलवार को बाजार से एक अधिक पेज की कॉपीलेकर आयें। किसी हनुमान मन्दिर में जाकर 11 बार श्री हनुमान चालीसा का पाठ औरइतनी ही बार अपने बगल में प्रभु को आसन देकर बजरंग बाण का पाठ करें। प्रभु सेअपने शत्रु से मुक्ति दिलवाने का निवेदन कर संकल्प लें तथा घर आकर उस कॉपी परकम से कम समय में "श्रीराम" का सवा लाख बार नाम लिखें। यह प्रयास करें कि नामकी समाप्ति मंगलवार को ही हो। जिस मंगल को सवा लाख नाम पूर्ण हो जायें, उस दिनउसी मन्दिर में आकर 21 शुद्ध घी के तथा 11 चमेली के तेल के दीपक प्रभु को अर्पितकर गुम्गुल की धूप व चंदन की अगरबत्ती के साथ सवा किलो शुद्ध घी के लङ का तुलसीदल के साथ भोग लगाकर 11 बार पुनः श्री हनुमान चालीसा का और इतनी ही.बारबजरंग बाण का पाठ करें। उस कॉपी को प्रभु को ही अर्पित करें। कुछ ही समय में आपकेसारे शत्रु आपसे मित्रता के इच्छुक होंगे।

    * आकर्षण हेतु- कोई व्यक्ति ऐसा है जो आपकी सुनता नहीं है अथवा उसकेबिना आपका कोई कार्य रुकता है तो आप इस उपाय को अवश्य करें। यह उपाय एकप्रकार से दश्य कार्य के लिये है परन्तु आप इसमें यह अवश्य ध्यान रखें कि आपके कार्यसे किसी को कोई हानि न हो। किसी शुभ समय में अथवा प्रथम मंगलवार को आपस्नान कर लॉल वस्त्र धारण कर प्रभु की पंचमुखी तस्वीर के सामने अथवा किसी मन्दिरमें इस उपायं को करें। प्रभु को गुड़ चने को भोग लगा कर गुम्गुल की धूप व चंदन कीअगरबत्ती के साथ शुद्ध धी का दीपक अर्पित करें और प्रभु से उस व्यक्ति के वश्य कीप्रार्थना करें। उस व्यक्ति की कोई तस्वीर लेकर उसे अपने आसन के नीचे रखें तथा मूंगेकी माला से निम्न मंत्र का 51 हजार जाप करें:- "ॐ हरिमर्कट मर्कटाय डं डं डं डंडं आकर्षण संकलसम्पत्कराय पंचमुखी वीर हनुमते फट् स्वाहा"।

    जिस दिन आपके मंत्र पूर्ण हो जायें, उस दिन आप प्रभु को चूरमे का भोग अर्पितकरें। उसकी तस्वीर को उठा कर रख दें। कुछ ही समय में आप चमत्कार देखेंगे।

    * कार्य सिद्ध नहीं होने पर- उपरोक्त प्रकार का एक अन्य उपाय है। आपकायदि कोई कार्य सिद्ध नहीं हो रहा है तो आप किसी शुभ समय अथवा प्रथम मंगलवारको प्रभु का विधि-विधान से पूजन करने के बाद किसी सुनसान पीपल के पास जायें।प्रभु से अपने कार्य का निवेदन करने के बाद पीपल का धूप-दीप से पूजन करें औरपीपल की 108 परिक्रमा दें। प्रत्येक परिक्रमा में एक बार श्री हनुमान चालीसा का पाठकरें। जब 108 प्रदक्षिणा पूर्ण हो जायें तो प्रभु को धन्यवाद देकर अपने घर की ओर चलदें, परन्तु पीछे मुड़ कर न देखें। कुछ ही समय में आप देखेंगे कि आपका कार्य सिद्ध होगया है।

    * जटिल समस्या समाधान- यदि आपकी कोई ऐसी समस्या है जो पूरी होनेका नाम नहीं ले रही है और उससे आपके सारे कार्य बाधित हो रहे हैं तो आप इसउपाय को अवश्य करें। प्रभु की कृपा से आपकी समस्या का शीघ्र समाधान हो जायेगा।इस उपाय में आप शनिवार को बरगद के वृक्ष का साबुत पत्ता तोड़ कर लायें। उस पत्तेपर अपनी समस्या को अष्टगंध से अनार की कलम से लिख दें। लाल रंग के धागे सेअपने अँगूठे से सिर तक अर्थात् अपनी पूर्ण लम्बाई के बराबर का धागा उस पत्ते परलपेट कर जल में प्रवाहित कर दें। ऐसा आप लगातार सात शनिवार करें। उपाय कीसमाप्ति तक आपका कार्य अवश्य सिद्ध होकर आपकी समस्या समाप्त हो जायेगी।

    * बंच्चा अधिक रोने पर- आपका बच्चा यदि लगातार रोता ही रहता है तो आपइस उपाय को करें। एक साबुत नींबू लेकर बच्चे के सिर पर 21 बार उसारें। उसारतेसंमय नींबू से निवेदन करें कि "अमुक की हर बला तेरे सिर" । इसके बाद उस नींबू कोआड़ा काट कर किसी चौराहे पर फेंक दें और बिना मुड़े वापिस आ जायें। घर में प्रवेशहाथ-पैर धोकर ही करें।
    * पिता से विरोध- यदि आपका अपने पिता से मानसिक अथवा किसी प्रकारसे विरोध है तो आप प्रथम रविवार को सवा किलो गुड़ लेकर किसी शुद्ध जल मेंप्रवाहित करें। इसमें आप यह अवश्य ध्यान रखें कि जल की धारा आपकी ओर न हो अर्थात् आपसे विपरीत दिशा में जा रही हो।

    * माता से विरोध- यदि आपका अपनी माता से किसी प्रकार का विरोध है तोआप लगातार सात सोमवार 250 ग्राम कच्चे दूध से शिवलिंग को स्नान कराये। उपायहोने तक माता से संबध अच्छे हो जायेंगे।

    * बच्चे पर नजरदोष- आपके बच्चे को यदि नजर लगती है तो इसके आपकोचार उपाय बता रहा हूँ:-

    (1) रूई की बत्ती बनाकर उसे सरसों के तेल में भिगो कर बच्चे के सिर सेविपरीत दिशा में (घड़ी की विपरीत दिशा) सात बार उसार कर कमरे केकोने में चिपका कर जला दें। नजर तुरन्त उतर जायेगी।

    (2) नजर यदि अधिक हो तो आप सात लाल मिर्च, एक चम्मच राई को लेकरबच्चे के सिर से विपरीत दिशा में सात बार उसार कर अग्नि में डाल दें।इससे बड़ी से बड़ी नजर तुरन्त उतर जाती है।

    (3) किसी बच्चे को नजर लगने पर उसे अपने मकान की देहरी पर बैठा करकाली उड़द, नमक व मिट्टी को बराबर मात्रा में लेकर सात बार उसार करदक्षिण दिशा में फेंक दें।

    (4) यह आप बच्चों के साथ बड़े व्यक्ति पर भी कर सकते हैं। इसमें राई.नमक, प्याज के छिलके व सूखी लाल मिर्च को अंगारों पर रख दें। अंगारेपीड़ित के सिर से सात बार उसार कर बाहर फेंक दें। इसमें यह ध्यान रखेंकि अंगारें आप बुझायें नहीं।

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