बाधक ग्रह- उपाय
बाधक ग्रह-
कभी-कभी पत्रिका देखते है, ग्रहों का स्थान भी अच्छा दिखता
है। अर्थात् शास्त्रों अनुसार उस घर के पति की दशा अच्छी गुजरनी
चाहिए। लेकिन वह दशा कमजोर होती है। सभी प्रकार के कष्ट आते है।
• तब सोचने विचारने की बात हो जाती है। हमारे ज्योतिष शास्त्रों में
बाधकग्रह माने जाते है। हर लग्न के अलग बाधक ग्रह होते है। वे बुरा
फल देते है। इसलिए उनका उपाय लिखते है। जिससे बुरा फल में कभी
आये वह जातक को शान्ति प्रदान हो तथा हर कार्य विपरित होने
रूकावट समाप्त हो ।
1) मेष, कर्क, तुला, मकर (चर लग्न ) - इन लग्न वालों के लिए
एका दशेश अर्थात् ग्यारहवें का पति अच्छा फल नहीं देता। उसकी दशा
कमजोर रहेगी। उस समय लाभ की जगह हानि होगी। बड़े भाई को
पीड़ा सवारी से नुकसान ।
उपाय - 1. शिव भगवान पर सहस्त्र घट करावें ।
2. कनक धारा या वसुंधरा का पाठ करें व मंत्र जाप करें।
3. श्रावण मास में पुरे एक माह तक शिव पर गन्ने रस से अभिषेक
करायें।
मंत्र - ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं नमः का संपुट देवे ।
4. महालक्ष्मी का पूजन करें।
2) वृष, सिह, वृश्चिक व कुम्भ (स्थिर लग्न ) - लग्न वालों के लिए
नवमेश बाधक ग्रह है। बाधक का अर्थ अड़चन। हर कार्य में अड़चन
उत्पन्न करना। नवां स्थान भाग्य स्थान है। यह पत्रिका में त्रिकोण भी
कहलाता है। भाग्य ही जीवन में महत्वपूर्ण होता है। जो जातक
भाग्यशाली होता है। उसे न तो पैसा की जरूरत होती है नहीं विशेष विद्या की। वह जहां खड़ा होता है अपने भाग्य से ही सारा कार्य बन
जाता है।
इन लग्न वालों को नवें का पति बाधक ग्रह है। ये ध्यान रहे कि
चाहे व स्वग्रही हो उच्च हो या केन्द्र त्रिकोण में विराजमान हो वह बाधा
तो देता ही है। बने काम को बिगाड़ देता है।
उपाय
1. जंगल में जहां जानवर पानी पीते है। ऐसे तालाब से मिट्टी लावे तथा
उनके गणपति बनावें । यह कार्य गणेश चतुर्थी को करें तथा बाद में
उनका पंचमोपचार या सोषढसोपचार से पूजन कर एक वर्ष पर्यन्त पूजा
करें। मंत्र - " ॐ गं गणपतये नमः " की नित्य माला या 5 माला जपे।
वापस गणेश चतुर्थी आने पर हवन करें। हवन मोदक या मोतीचूरके
लडुओं से दशांश आहुति लगावें तथा बाह्य भोजन करावें। आपके
निश्चित फर्क पड़ेगा ।
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2. विद्यार्थी है तो उसे द्विजागणपति का पूजन करें।
3. कृष्ण की मूर्ति सप्त धातु की बनाने फिर नित्य पूजन तथा दाख का
भोग लगावें ।
3) मिथुन, कन्या, धनु व मीन (द्विस्वभाव लग्न ) : ये चारों लग्न
द्विस्वभाव लग्न है। इसका बाधक ग्रह सप्तमेश है अर्थात् का पति जैसे
मिथुन लग्न वालों के गुरू, कन्या लग्न वालों के लिए गुरू, धनु लग्न
वालों के लिए बुध बाधक ग्रह होगा।
सप्तमेश बाधक ग्रह से स्त्री को विशेष पीड़ा सप्तमेश की दशा
आयेगी। तब स्त्री बिमार रहेगी। किसी प्रकार का विवाद, दैनिक
आमदानी में कमी तथा जीवन के महत्वपूर्ण कार्य में बाधा उत्पन्न होगी
तथा स्वयं भी परेशानी में रहेगा। सप्तमेश द्वितीय स्थान में पापग्रहों के
साथ हो तो स्त्री की मृत्यु पहले होगी। कुटुम्ब में हानि ।
उपाय : 1. दुर्गा पाठ में कवच व अर्गला नित्य करें।
2. नवरात्री में कन्याओं को भोजन करावें ।
3. तुलसी के पौधे के निचे नित्य घी का दीपक तथा तुलसी विवाह
अवश्य करावें ।
4. गणेश चतुर्थी के दिन जहां ऋद्धि सिद्धि गणपति की मूर्ति हो वहां
गणपति यज्ञ तथा गणपति के सहस्त्र नाम से आहुति लगावें। फिर
ब्राह्मण जोड़े सहित भोजन करावें। फिर उन्हे वस्त्र की दान करें।
5. प्रदोष व्रत 13 वर्ष तक कर फिर उद्यापन करें।