ज्वालामुखी योग का निवारण

ज्वालामुखी योग का निवारण (अनुष्ठान ) -

पडवा मूल पाचम् भरणी आठम् कृतिका नम रोहिणी दसम्आश्लेषा सुन रे भैया यह योग ज्वालमुखी कहिया जन्में तो जीवें नहीं
जिवे तो उजर झाड़ (समाप्त) सुहागण पैरो चुड़लो विधवा वो हो जाय। ज्योतिष अनुसार ग्रहों का बल व दशायें देखकर फल दिया जाता है। जन्म
कुण्डली से पहले योग जो कि वार, नक्षत्र व योग द्वारा बनते है ये विशेष कष्ट कारक होते है। इसका निवारण करने के बाद शुभ फल
शुरू होता है।
निवारण:- सबसे पहले गणपति पूजन, पुण्याहवाचन कलश स्थापन व
नवग्रह पूजन करावे ।
इस पूजन में विष्णु की तस्वीर या मूर्ति पूर्व दिशा में रखे उसका सविधि पूजन करें। चार दिशाओं में चौमुखी दिये जलावें। पण्डित पूर्व
दिशा में मुंह करके पुरुष सूक्त का 11 बार पाठ करें। बाद में हवन में यजुर्वेद के 23 वे अध्याय की आहुति घी व अनार
से लगावे अनार न मिले तो सुखे अनार के दाने लेवें । इसके अन्दर विष्णु सहस्त्र नामावली की आहुती देवे। बाकि कर्म
नियमानुसार करें ।
बाद
विशेष :- चारों दिशाओं में दिये पाटियों (बाजोट) पर अष्टदल बनाकर लगावें। बीच में हवन करे। मूला आश्लेशा नक्षत्र शान्ति के
ये हवन करावे। जो कि मूला आश्लेशा में जन्मे हो। जो बच्चा जिस नक्षत्र में हो उसका जाप करीब 25,000 करावे । एक ब्राह्मण हवन के दिन महामृत्युञ्जय की माला फेरे ।

ज्वालामुखी योग - पड़वा मूल, पांचम् भरणी, आठम कृतिका, नवम रोहिणी, दसम आश्लेषा, सुर रे मैया ये योग ज्वालामुखी कहैया। जन्मे तो जीवे नहीं, जीव उजर झाड़ (घर बर्बाद कर देता है)। सुहागण पेरो
चुड़लो विधवा वो हो जाय।

यह तिथि व नक्षत्र हो तो ज्वालामुखी योग बनता है। इसके जिस
जातक का जन्म होता है तो निश्चित मृत्यु या फिर जीवन भर कष्ट ही
भोगता है। एक बात और है यदि जन्म चक्र के ग्रह मजबूत व
केन्द्र-त्रिकोण में हो तो इस योग का फल 50 प्रतिशत कम हो जाता है।
मगर पूर्णतया कष्ट नहीं हो सकता। इसलिए इस योग के नेष्ट फल को
समाप्त करने के लिए इसका उपाय करें। जिससे जीवन के शुभ कार्यों में
उसकी अड़चनें लगभग समाप्त होती है।
निवारण सबसे पहले पूर्व दिशा में विष्णु की तस्वीर को कमल की
आकृति का मण्डला बनावें या विष्णु मण्डल बनावें। फिर सामने पाटिये
(बाजोट) पर रखें। चारों दिशाओं में बाजोट पर अष्टदल बनाकर
कलश स्थापित करें। कलश पर नारियल भी रखें। चारों दिशाओं में
चौमुखी दीपक करें। चार ब्राह्मण को चारों दिशाओं में आसन लगाकर
बैठावें। सभी पीला पिताम्बर पहनें। आसन लाल या कुश का आसन
लेवे। हर आसन अनुभाग में एक-एक पीपल का पत्ता रखें। पीपल के
पत्ते पर त्रिकोण कुंकु या केसर से बनाकर रखें। सबसे पहले यजमान
को पूर्वाभिमुख बैठावें। ब्राह्मण द्वारा गणपति पूजन, पुण्यावाचन,
कलश स्थापना व नवग्रह पूजन नियमानुसा करवावें ।
1. पूर्व में कर्म करने के बाद पूर्व दिशा में जो पंडित है वह 11 बार पुरुष
सूक्त का पाठ श्रीसूक्त के सम्पूट द्वारा करें। 2. पश्चिम - इस दिशा में
ब्राह्मण महामृत्युञ्जय की 21 माला जपें। 3. उत्तर जिस नक्षत्र में
जन्मा हो उस नक्षत्र के मंत्र का जप 11 माला जपें। 4. दक्षिण - यजुर्वेद
के 23वें अध्याय का 11 बार पाठ करें।
यह सब ब्राह्मणों के कर्म के पश्चात् बीच में वेदी बनावें तथा
अग्नि स्थापन कर पहले ग्रह शांति की आहुतियां पुरुष सूक्त की आहुति
पाठ, बाद में दशांश महामृत्युजंय की आहुतियां, जन्म नक्षत्र की आहुति
108 लगावें व यजुर्वेद के 23वें अध्याय की अनार के दाने से आहुतियां
लगावें। इन सबके कार्य के पश्चात् तर्पण व ब्राह्मण भोजन करावें।
नोट: जिस जातक के ज्वालामुखी योग है। जिस नक्षत्र से योग बन रहा
है, उसी नक्षत्र में हवन करावें । तिथि व नक्षत्र का यदि संयोग हो तो सोने
में सुगन्ध जैसी बात है।
1. मूला - ॐ मातेव पुत्र पृथिवी पुरीष्यमणि 8 स्वेयो नावभारुषा। तां
विश्वेदेव ऋतुभि, संवदानः प्रजापतिविश्वकर्मा विमुच्चतु ।
2. भरणी - ॐ यमायत्वाङ्गिरस्यतै पितृमते स्वाह धर्माय स्वाहा धर्मः
तित्रे ।
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3. रोहिणी - ॐ ब्रह्मजज्ञानं प्रथमम्पुरस्ता द्धिसीमतः सुरूचोवेनआवः
सुबे धन्याउपमा अस्य विष्ठाः शतश्चयोनिमश्चविषः ।
3. कृतिका - ॐ अग्निमूर्षादिवः ककुत्पत्तिः पृथिव्या अयम् । अपा 28
रेता १६ सिजिन्वति ॐ अग्नये नभ ।
4. आश्लेषा - ॐ नमोस्तु सार्पेभ्यो ये के च पृथिवी मनुः ये अन्तरिक्ष ये
दिविलेभ्य: सार्पेभ्यो नमः ।
ज्वालामुखी योग में जिस व्यक्ति के जन्म नक्षत्र हो उसका जय
करे व दशांश आहुति लगावें।
मंत्र- ॐ नमो आदेश गुरु को तिथि बांधू, नक्षत्र बांधू, ग्रह की
चाल बांधू, शूल बांधू, चांद बांधू, सूरज बांधू, आकाश बांधू, पाताल
बांधू, दस द्वार बांधू, न बांधू तो मां ज्वालामुखी की आन गुरु शक्ति
मेरी भक्ति ईश्वरो वाचा ।
विधि: ग्रहण, होली तथा दीपावली के दिन 1 माला फेरे तथा लोबान
का धूप करें। या नवरात्रि में नित्य 1 माला फेरे तथा लोबान का धूप
करते रहें। नित्य 11 बार जप कर घर से निकले।
नोट: इसके करने से ज्वालामुखी योग का कुप्रभाव समाप्त हो जायेगा।

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