ग्रहों के दोषशान्ति के लिए औषधियाँ -
ग्रहों के दोषशान्ति के लिए औषधियाँ -
जातक की कौनसी दशा चल रही है, कौनसी दशा में रोगग्रस्त
हुआ, जिस वार या जिस नक्षत्र में रोग हुआ हो उस नक्षत्र के अनुसार
कौनसी दशा थी। इस सभी का अध्ययन कर उनकी औषधियों से स्नान
करने से ग्रहों का दोष समाप्त होता है।
जैसे शनि की दशा में शनि का अन्तर है शनि की जो औषधियाँ
प्रकाशित है उसे जल में मिलाकर स्नान करें पश्चात् ऐलोपैथिक,
आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक किसी दवा को ग्रहण कर सकते है। जिससे
पूर्ण लाभ होगा।
यदि जातक मंगलवार को रोग ग्रस्त हो तब पहले मंगल की
औषधी से स्नान करें फिर जो दशा चल रही है उस दशा की औषधी से
स्नान कर दवा ग्रहण करनी चाहिए ।
नक्षत्र द्वारा यदि कोई कृतिका नक्षत्र में रोग हो तो कृतिका का
मालिक सूर्य है तब पहले सूर्य की औषधी का सममिश्रण कर स्नान करें
पश्चात् जो दशा चल रही उसके अनुसार स्नान करके दवा लेने पर
निश्चित रोग शान्त होता है ।
नोट: कई औषधी अप्राप्त है उसके स्थान पर गंगाजल अथवा पंचगव्य
का उपयोग करें।
ग्रह दोष और औषधीया
सूर्य के दोष शमनार्थ औषधिये-
मन शिल, बड़ी इलाइची, देवदारु, कुंकुम, खश, वीरणजठा, मुलठी, लाल कमल, रक्त पुष्प, कटबीर इत्यादि से स्नान करने से सूर्य
के दोष की शांति होती है।
चन्द्रमा के दोष शमनार्थ औषधियें -
पंचगव्य, हस्तिदन्त, शंख, सीप, श्वेत कमल, श्वेतमणि, इन उक्त वस्तुओं को जल में मिलाकर स्नान करने से चन्द्रमा के दोष का
निवारण होता है।
भौम के दोष शमनार्थ औषधियें -
बिल्व फलादि, रक्त चन्दन, बालछड़, लालपुष्प, हींग, सिगरण, माल कंगुनी, मोलसिरी इत्यादि से स्नान करें तो मंगल के दोष कापरिहार करता है।
बुध के दोष शमनार्थ औषधियें -
बुध के दोष परिहार के लिये गोबर, अक्षत, फल, गोराचन, शहद, सीप, नवमूल, सुवर्ण इत्यादि से स्नान करें।
गुरू के दोष शमनार्थ औषधियें -
गुरू की शांति के लिये मालती के फूल, सफेद सरसों, मल्लिका के पत्र और शहद मिश्रित करके जल से स्नान करें।
शुक्र के दोष शमनार्थ औषधियें -
शुक्र के परिहार के लिए, इलायची, मनशिल, समस्तफल बीज,पुरादि, वृक्षों के मूल तथा केसर से मिश्रित जल से स्नान करें।
शनि के दोष शमनार्थ औषधियें -
शनि के दोष परिहार के लिये तिल, सुरमा, लोध, काली धम्मणी,
सौंफ, मुस्ता, लज्जावंती से युक्त जल से स्नान करें।
राहु के दोष शमनार्थ औषधियें -
राहु के दोष परिहार के लिये कुशा, तिल, पत्रज, मुस्ता, हस्तिदन्त,
कस्तूरी इत्यादि के मिश्रित जल से स्नान करें। केतु के लिए बकरे का मूत्र मिलाकर स्नान करें।
ग्रह शांति की विशेष औषधियाँ -
निम्न औषधियाँ, जिस जातक के ग्रह बिगड़े हो तो तांबे अथवा चाँदी के मादलिये (केप्सूल) में बंद करवाकर धारण करने से बिगड़े ग्रहों का असर कम हो जाता है।
यह प्रयोगात्मक अनुभव है :-
सूर्य बिल्वपत्र की जड़
चन्द्रमा खीरनी की जड़
मंगल अनन्तमूल/नाग जिव्हा की जड़
बुध. विधारा (वृद्धमूल) की जड़
वृहस्पति भारंगी की जड़
शुक्र मजीठ की जड़/सर्पोखे की जड़
शनि अमल बेत की जड़/,बिच्छू जड़
राहु सफेद चन्दन की जड़
केतु असगन्ध की जड़
सर्षप (सरसों) बोध, दोनो हल्दी, मुस्ता, धनियाँ, लज्जावंती, मालकंगुणी, वच, जटामांसी, इन उक्त औषधियों को गंगाजलादि में मिलाकर ग्रहों के विशेषशांति के लिए स्नान करें तो सब ग्रह प्रसन्न होते
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