रोहिणी नक्षत्र का सम्पूर्ण विवेचन और ग्रह स्थित राशि फल

 रोहिणी नक्षत्र का सम्पूर्ण विवेचन और ग्रह स्थित राशि फल


राशिचक्र मे 4000 से 5320 अंश विस्तार वाला क्षेत्र रोहिणी नक्षत्र है। रथ के आकार मे 5 तारे रोहिणी के प्रतीक है। ग्रीक मे इसे अल्डेबरन Aldebaran, अरब मंजिल मे इसे अल डबरन Al Dabaran, चीनी इसे पई Pi कहते है। रोहिणी "बलराम" की माता का नाम है। रोहिणी का शाब्दिक अर्थ लाल गाय, चन्द्रमा की पत्नी, ऋषि कश्यप और सुरभि की पुत्री, रक्तवाहिनी, विद्युत आदि है। दक्षिण भारतीय मान्यता अनुसार यह वट वृक्ष के आकार वाला 42 तारो का समूह है।

देवता ब्रम्हा, स्वामी चन्द्र, राशि वृषभ 10 अंश से लेकर 2320 तक, राशि स्वामी शुक्र। नक्षत्रो मे सबसे लाडला नक्षत्र है। सर्वसत्ताधारी मुक्तिदाता कृष्ण का जन्म इसी नक्षत्र मे हुआ था। यह नक्षत्रो मे चौथा ध्रुव संज्ञक नक्षत्र है। इसके 5 तारे है। शब्द रोहिणी का मूल शब्द रोहण है, जिसका अर्थ उदय, विध्यमान है। रोहिणी का दूसरा नान सुरभि अर्थात स्वर्गीय गाय यानि "कामधेनु " है।

रोहिणी नक्षत्र के 5 तारे है। इनकी आकृति शकट या गाड़ी अथवा रथ के सामान दिखती है। इसलिए रोहणी भेदन के समय संहिता ग्रंथो मे रोहिणी शकट भेदन के नाम से कहा गया है।

ब्रम्हा

प्रतीकवाद - इसके देवता सृष्टि रचियता ब्रम्हा है, मतान्तर से प्रजापति है। इनकी उत्पत्ति विष्णु के नाभि कमल से मानी जाती है। इनकी रचना सरस्वती इनकी पत्नी है। इनके निवास को मनोवती कहते है। ब्रम्ह पुराण अनुसार मनु इनके पुत्र है जिनसे मानव प्राकट्य हुऐ। इन्होने सृष्टि हेतु 11 प्रजापति की रचना की थी।

ब्रम्हा का भ्रम वेदान्त दर्शन के ब्राह्मण या ब्राम्हण वर्ण से निर्मूल है।

पौराणिकता अनुसार रोहिणी दक्ष प्रजापति और प्रसूति की पुत्री थी। दक्ष की 27 कन्याओ के साथ इसका विवाह चद्रमा से हुआ था। रोहिणी चन्द्रमा की प्रमुख प्रिय पत्नी थी। रोहिणी जातक के नेत्र विशेष आकर्षक, प्रभावी होते है।

विशेषताएँ - चन्द्रमा की अत्यधिक प्यारी रोहिणी को सुंदर वस्त्र, सौन्दर्य प्रसाधन, श्रृंगार, अलंकरण विशेष प्रिय है। वैदिक मतानुसार रोहिणी जातक महा भाग्यशाली, प्रचुर लाभी होता है इस कारण लोग इससे ईर्ष्या करते है। यह नक्षत्र औरतो के लिए अति उत्तम है। संसार की अनेक सुन्दरियो का जन्म इस नक्षत्र मे हुआ है, इनका चेहरा गोल, कोमल अंग, मादक नयन, वासनायुक्त प्रियतमा होती है।

रोहिणी नक्षत्र मे जन्मी विभूतिया :

योगिराज श्रीकृष्ण,

ओशो रजनीश,

महारानी विक्टोरिया प्रथम।

रोहिणी शुभ, सिद्धि दायक, राजसिक, स्त्री नक्षत्र है। इसकी जाति शूद्र, योनि सर्प, योनि वैर नकुल, गण मनुष्य अंत नाड़ी है। यह दक्षिण दिशा का स्वामी है। सर्व सत्ताधारी श्रीकृष्ण के जन्म नक्षत्र के जातक की आंखे विशेष आकर्षक होती है। जातक ललितकला प्रेमी, सुन्दर, चुंबकीय, सुवक्ता, कवि, आंशिक ईर्ष्यालु, ईश्वर भक्त, तत्व मीमांसक, होता है। ये स्थिर चित्त, प्रेम प्रसंग मे रुचिवान, सम्मानीय, आनंद लेनेवाले होते है।

व्यवहार अभिलक्षण - रोहिणी उर्वरता, कृषि, सभ्यता का अग्रदूत है। यह एक उत्पाक नक्षत्र है, विकास के लिए नीव का पत्थर है। उच्च चेतना पर प्रकृतिगत उत्पाद और निम्न चेतना पर कृत्रिम तथा मानव निर्मित उत्पादो का कारक है। रोहिणी विचार, सुझाव का सहायक, रचनात्मक, रोहिणी नक्षत्र-यह चौथा नक्षत्र पुराणों के अनुसार चन्द्रमा को सर्वाधिक प्रिय है (पौराणिक संदर्भो में चन्द्रमा की 27 पत्नियां हैं जिनमें रोहिणी चन्द्र को सर्वाधिक प्रिय है। वास्तव में ये 27 नक्षत्र ही हैं जो चन्द्रमा की पत्नी कहे गए हैं)। कृतिका नक्षत्र से अगले 13-20’ के क्षेत्र में वृष राशि के क्षेत्र के अन्तर्गत रोहिणी नक्षत्र स्थित है। इस नक्षत्र के 5 तारे हैं जो मिलजुलकर शकट/गाड़ी के समान आकृति बनाते हैं। इस नक्षत्र के देवता प्रजापति हैं।

            रोहिणी नक्षत्र में उत्पन्न पुरुष जातक धनी, मानी, दानी, धर्मात्मा तथा राजा से मान पाने वाला होता है। वार्ता में कुशल, सुन्दर शरीर व अच्छे स्वभाव का तथा सुखी जीवन व्यतीत करने वाला होता है।

            रोहिणी नक्षत्र में उत्पन्न स्त्री जातक सुन्दर रूप एवं सुन्दर शरीर वाली, पति से मान पाने वाली, माता-पिता की भक्त, सन्तान एवं धन से युक्त, कन्या-पुत्र वाली तथा स्वच्छ प्रवृत्ति की (सफाई पसंद) होती है।कला का संरक्षक, आत्म अभिव्यक्ति, मजबूत परिवार, रूढ़िवाद, अवसरवाद, नये प्रभाव का करक है।

पुरुष जातक - जातक नाजुक, दुबला-पतला अथवा अन्य ग्रहो के प्रभाववश ठिगना और मोटा, लुभावना, मांसल शरीर वाला, विशाल कंधे वाला तथा प्रभावी आकर्षक नेत्र वाला होता है।

जातक चीड़-चिड़ा, नाराज हो जाने पर शीघ्र शांत नही होने वाला, निर्णय का पक्का, अपनी राय या योजना पर हठीला, भुलक्क़ड, दूसरो के दोष निकालने वाला, जिससे नफरत करता है उन्हें निसंकोच कष्ट देने वाला, सत्यवादी, आज पर विश्वास करने वाला होता है।

जातक गंभीर और ईमानदार, धैर्य और क्षमा के अभाव वाला, मन की स्वतंत्रता के कारण पतित होता है। उम्र के 18 से 36 वर्ष परीक्षा के होते है, इसमे आर्थिक, सामाजिक, स्वास्थ्य की समस्याएं प्रमुख होती है। यह अक्सर देखा जाता है कि इनका जीवन 38, 50, 55, 65 वे वर्ष मे सुखद आनंददायक रहता है। जातक दीर्घायु, मौत से भयभीत, स्वास्थ के प्रति सतर्क होता है। जातक को दूसरो पर विश्वास नही करना चहिये। यह जरुरत पर सामाजिक नियमो को तोड़ देता है इस कारण वैवाहिक जीवन कष्ट पूर्ण होता है।

स्त्री जातक - रोहिणी स्त्री रूपवती, अत्यंत आकर्षक नेत्र वाली, मध्यम कद, गौरवर्णी होती है। यह राज सम्मानी, ईश्वर और विद्वान् भक्त, इहलोक-परलोक विज्ञानी, अविचलित, चतुर, प्रेम संबंधो के प्रति लालायित, भरपूर आनंद लेने वाली, कमजोर दिल वाली, चीड़-चिड़ी, मुसीबतो को आमंत्रित करने वाली, गुप्त, व्यवहारिक, उकसाने पर हिंसक होती है।

इसकी शिक्षा मध्यम, कार्य मे निहित योग्यता वाली होती है। इसे सुखी वैवाहिक जीवन के लिए अपनी जिद छोड़नी चहिये। इसे पति पर शक करना छोड़ना चाहिए अन्यथा तलाक होता है। सामान्यतया स्वस्थ रहती है। यह अपने पति और संतान को सुख देना चाहती है।

रोहिणी फलादेश आचार्यो के मतानुसार

रोहिणी जातक शुद्ध, पवित्र, सुंदर, ईमानदार, शक्तिशाली वक्ता, स्थिरचित होता है। - वराहमिहिर

रोहिणी नक्षत्रोपन्न जातक सुरूप, सत्यवादी, काम-क्रोध-मद पर नियंत्रण रखने वाला, शास्त्रोक्त आचरण करने वाला, दानी, पशु धन युक्त, धैर्यशाली, अल्प शब्दो मे अधिक बात कहने वाला, स्थिर विचारी, तेजस्वी सम्भोग मे विशेष रुचिवान होता है। - नारद

उपरोक्त गुणो के अलावा ये लोग के शब्दो के खिलाडी, वाकपटु होते है। बातों-बातों मे दूसरे के मन की तह खोल लेते है। जातक मस्ताने बैल की तरह चाल वाला, अल्प भाषी, स्थिरचित्त, चरित्रवान होता है। - पराशर

इन्हे खेती-बड़ी मे लगाव होता है। धर्म-कर्म मे कुशल होते है। यदि नक्षत्र निर्बल हो, तो ये फल अल्प होते है। सुन्दर और आकर्षक वक्तित्व इनकी विशेषता होती है। धन अच्छा कमा लेते है। - जातक भरण

चन्द्र :

चन्द्र रोहिणी मे हो, तो जातक लुभावना, स्थिर दिमाग, संगीत मे प्रतिभाशाली, नृत्य-नाट्य प्रिय, जन प्रभावी, राजनीति मे सफल, प्रसन्न, स्वस्थ, मांसल शरीर वाला होता है। रोहिणी में चन्द्र होने के कारण जातक वासना युक्त, कामातुर, ललित, आकर्षक, उदार होता है। ये शिशु प्रेमी, कला, संगीत, विलास प्रेमी किन्तु दम्भपूर्ण, असभ्य के समान, भौतिकवादी होते है।

सूर्य :

सूर्य रोहिणी में हो जातक सुन्दर, कामुक, आकर्षक, कलात्मक, मजबूत भावना वाला, संगीत मे पुरष्कार पाने वाला, बहु मित्र वाला, पसंद किया जाने वाला होता है।

लग्न :

लग्न रोहिणी मे हो, तो जातक खूबसूरत, आकर्षक, चुंबकीय नेत्र, अमीर, करिश्माई, लोकप्रिय, मर्द, राजनीतिज्ञ, रोमांटिक, कलात्मक, यौन की लत होती है।

चरण फल

प्रथम चरण - इसका स्वामी मंगल है। इसमे शुक्र, चंद्र, मंगल ♀ ♂का प्रभाव है। राशि वृषभ 4000 से 4320 तक। नवमांश मेष। यह शरीरिक सुख, आध्यात्म, भोग का द्योतक है।

जातक छोटा उदर वाला, मेढे के सामान नेत्र, पिंगल वर्ण, क्रोधी, दूसरो के धन को हड़पने वाला होता है।  जातक वासना युक्त, लालची, कटुभाषी, देखने में सुन्दर तीखे नाक-नक़्शे वाला होता है।

द्वितीय चरण - इसका स्वामी शुक्र है। इसमे शुक्र, चंद्र, शुक्र ♀ ♀का प्रभाव है। राशि वृषभ 4320 से 4640 तक। नवमांश वृषभ। यह विषम स्थति, भौतिकवाद, क्रांति का द्योतक है।

जातक बड़ी आँखोवाला, भैसा जैसा मुंह वाला, ऊँची नाक, घने केश, वृहद कंधे व भुजा तथा कमर, गौरवर्णी, भद्र आदतो वाला, सुवक्ता, रोगी जैसा किन्तु जितेन्द्रिय होता है।

तृतीय चरण - इसका स्वामी बुध है। इसमे शुक्र, चंद्र, बुध ♀ का प्रभाव है। राशि वृषभ 4640 से 5000 तक। नवमांश मिथुन। यह वाणिज्य, रचना, लचीलापन, नम्यता, कर्कशता, सम्पत्ति का द्योतक है।

जातक स्थिर, सुन्दर नेत्र, कोमल शरीर, मोहक वाणी, माधुर्य और हास्य रस मे रत, निपुण, बातूनी होता है।

जातक ठोस भक्त, प्रशंसा के योग्य, दानी, अंकगणित निपुण, धार्मिक और प्रसन्न होता है।

चतुर्थ चरण - इसका स्वामी चन्द्र है। इसमे शुक्र, चंद्र, चन्द्र ♀ का प्रभाव है। राशि वृषभ 5000 से 5320 तक। नवमांश कर्क। यह भौतिक सुरक्षा, मातृपक्ष, स्वामित्व का द्योतक है।

जातक मृत पुत्र वाला, युवतियो मे रत, लम्बी नाक, विशाल नेत्र, बड़े अंग, बड़े पैर, स्वजनो का द्वेषी होता है।

जातक धनवान, दूसरो का मन समझने मे सशक्त, भविष्यवक्ता, बुद्धिमान, सन्तुलित जीवन वाला होता है।

आचर्यों ने चरण फल सूत्ररूप में कहा है लेकिन उसमे बहुत अंतर है।

यवनाचार्य : पहले चरण मे सौभाग्य, दूसरे चरण मे पीड़ा, तीसरे मे डरपोकपन, चौथे मे सत्यवादी होता है।

मानसागराचार्य : प्रथम चरण मे शुभ लक्षणवाला, द्वितीय मे विद्वान, तृतीय मे सौभाग्यशाली, चतुर्थ मे कुलभूषण होता है।

नक्षत्र चरण मे गृह फल

भारतीय मत से सूर्य, बुध, शुक्र की एक दूसरे पर पूर्ण या पाद दृष्टि नही होती क्योकि सूर्य से बुध 28 और शुक्र 48 अंश से अधिक दूर नहीं हो सकते है।

सूर्य :

सूर्य पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक स्त्री वर्ग की सेवा तथा उनकी जरुरत पूर्ति व्यवसाय, जहाजरानी, जलीय उद्योग से कमायेगा।

सूर्य पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक युद्ध कला मे प्रवीण, धनी, यशस्वी होगा।

सूर्य पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक सामाजिक नेता, राजनैतिक गठबंधन से लाभ कमाने वाला, सम्मानीय, प्रतिष्ठित होता है।

सूर्य पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक अस्वस्थ, आर्थिक लाभ का अभाव होने से जीवन पर्यन्त निर्धन, और सदैव पत्नी का विरोधी होता है।

रोहिणी सूर्य चरण फल

प्रथम चरण - जातक अच्छा सईस, फैशन करने वाला, चोपयो की प्रतियोगिता आयोजक या क्रय-विक्रय करने वाला नौकर होता है। जातक को मस्तिष्क या नाडी तंत्र के रोग अथवा संसर्गजनित रोग होते है।

द्वितीय चरण - जातक सदैव प्रसन्नचित्त, प्रभावी, रहेगा। तरल पदार्थो से आजीविका करेगा। बार-बार मूर्छा, मेनिन्जाइटिस, पित्त विकार, सिरदर्द से पीड़ित रहेगा। यह गहरे पानी या नदी मे तैरने से भयभीत रहता है। यदि इस चरण मे सूर्य मंगल से युत हो, तो सेना या कानून प्रवर्तन मे उच्च पद पर होता है।

तृतीय चरण - जातक जन साधारण के परोपकारी कार्य से लाभी होता है। इसे हिक्का / हिचकी रोग हो सकता है। स्त्रियो मे मासिकधर्म के रोग होते है। यह जल से भयभीत और इसे डूबने का खतरा होता है।

चतुर्थ चरण - जातक शासकीय नौकर होता है जिसे अनिच्छा से यात्राएं करनी पड़ती है। यह पत्नी का आज्ञाकारी होता है लेकिन स्त्री को पुरुष से निम्न स्तरीय मानता है।

चन्द्र :

सूर्य से दृष्ट होने पर जातक भूमि संपत्ति वाहनो का मालिक होगा और कृषि, मंत्र-तंत्र, रहस्य विद्या (जादू - टोना, इंद्रजाल, तिलिस्म, भूमिगत धन) आदि से आजीविका करेगा।

मंगल से दृष्ट होने पर जातक स्त्री जातक को आकर्षित करने वाला, परिवार मे प्रतिष्ठित, सभ्य तरीके से जीने वाला होता है।

बुध से दृष्ट होने पर जातक बहुत बुद्धिमान, हरफनमौला, सफलता प्राप्त करने की क्षमता वाला होता है।

गुरु से दृष्ट होने पर जातक माता-पिता का आज्ञाकारी, कर्तव्यनिष्ट, धर्म परायण होता है।

शुक्र से दृष्ट होने पर जातक सभी भौतिक सुख जैसे वाहन, भवन, मवेशी, वस्त्राभूषण इत्यादि का आनंद लेगा। शनि से दृष्ट होने पर माता की अल्पायु में मृत्यु , पिता से कोई आलम्बन नही मिलेगा।

रोहिणी चन्द्र चरण फल

प्रथम चरण - जातक आनंदित, मिष्टभाषी, संतुष्ट, संतान का स्नेही, खाद्यान्न, दूध डेरी या अन्य तरल वस्तुओ से आजीविका करेगा। कान मे दोष व कई भाई-बहन होगे।

द्वितीय चरण - जातक की शिक्षा अधूरी रहती है। ललित कलाविद होता है। परस्थितिवश निवास बदलता रहता है। स्त्री जातक चरित्रहीन, आचारहीन, अनैतिक होती है जिसकी ख़मियाज़ उसे भुगतनी पड़ती है।

तृतीय चरण - जातक प्रसन्नचित्त, सुखी, तीव्र स्मरणशक्ति वाला, विश्वनीय, विलक्षण प्रतिभा का धनी होता है। स्त्रियो से संबंधित वस्तुओ का व्यापार और तरल वस्तुओ से आजीविका होती है।

चतुर्थ चरण - रत्न-आभूषण का व्यापार, यात्रा से संबंधित नौकरी, परचूनी, डेरी उद्योग से आजीविका करता है। स्त्री जातक के पास ललित वस्त्र, प्रचुर मात्रा मे आभूषण, सेवक, विलासित वाहन होते है। इसे अनियमित मासिक धर्म और पैरो मे दर्द होता है।

मंगल :

सूर्य से दृष्ट होने पर जातक पहाड़ो या वन मे निवास करेगा और पत्नी तथा परिवार को ख़ुशी नही दे पायेगा।

चन्द्र से दृष्ट होने पर जातक माता की इच्छा के विपरीत कार्य करेगा तथा निम्न स्तर की स्त्रियो के सानिध्य मे रहेगा।

बुध से दृष्ट होने पर जातक धार्मिक, विद्वान्, प्रभावशाली लेकिन ख़राब स्वभाव वाला होता है।

गुरु से दृष्ट होने पर जातक परिजनों के साथ रहेगा और आवश्यकता पर मदद करेगा।

शुक्र से दृष्ट होने पर जातक प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ होगा।

शनि से दृष्ट होने पर जातक विद्वान, पवित्र हृदयी, जनसेवक होगा।

रोहिणी मंगल चरण फल

प्रथम चरण - जातक वाध्ययंत्र प्रेमी, संगीत मे रुचिवान होता है। वाद्य वादक, संगीतकार, गिल्टियो के रोग से पीड़ित होता है।

द्वितीय चरण - यदि मंगल सूर्य की युति हो, तो जातक सैनिक या सैन्य अधिकारी होता है। यह कभी-कभी गलत निर्णय (बुध राहु की युति दुर्बुध्दि कारक होती है।) ले लेता है।

तृतीय चरण - जातक शांत स्वभाव, चंचलता रहित, सम्भ्रान्तो द्वारा प्रशंसित और सम्मानित, शिक्षित, सन्तान या वंशज की मृत्यु से दुःखी, स्त्री द्वारा बहुत अधिक कष्ट पाने वाला होता है।

चतुर्थ चरण - जातक संपन्न व्यक्ति से अस्थिर होकर शराब और स्त्रियो में धन का अपव्यय करता है। यदि शासकीय अधिकारी होता है तो अनैतिक तरीको (रिश्वतखोरी) से धन कमाता है। यह तस्कर होता है और औषधियो की तस्करी करता है।

बुध :

चन्द्र से दृष्ट होने पर जातक परिश्रमी, धनवान होगा। सरकार से आमदनी होगी।

मंगल से दृष्ट होने पर जातक धनाढ्य वर्ग से लाभ प्राप्त करेगा लेकिन शनि की दशा, अन्तर्दशा मे विपरीत फल पायेगा।

गुरु से दृष्ट होने पर जातक नगर नेता, बुद्धिमान तथा समृद्ध होगा।

शनि से दृष्ट होने पर मनोवैज्ञानिक समस्याग्रस्त होने से परिवार और दूसरे उसका निरादर करगे।

रोहिणी बुध चरण फल

प्रथम चरण - जातक होशियार, मेघावी, मृदु भाषी, लेखन और परोपकारिता से आजीविका करता है। पत्नी विनम्र, बुद्धिमान होती है। जातक बोलते वक्त उत्तेजित होने से हकलाने लगता है।

द्वितीय चरण - जातक वैदिक साहित्य का टीकाकार या व्याख्याकार, राजनीति मे महत्वपूर्ण, भाई-बहन से असंतुष्ट होता है। इसे प्रजनन अंगो की कमजोरी होती है।

तृतीय चरण - जातक तीव्र इच्छा शक्ति वाला, नरम आदत वाला, धनाढ्य, भौतिकवादी, सम्भोग का आनंद चाहता है इस कारण चरित्रहीन और विवादस्पद होता है।

चतुर्थ चरण - जातक को दूर के रिश्तेदार से फायदा, शत्रु से हानि, बहनो से मुसीबत होती है। यदि बुध शनि से दृष्ट हो, तो रोगी, कुरूप, दांत गिरे हुए, अशांत, हृदयाघात होता है।

गुरु :

सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक सेना मे उच्च पद पर होता है। युद्ध मे धायल हो सकता है।

चन्द्र की दृष्टि हो, तो सत्यभाषी, भाग्यशाली, सम्मानित, जरुरतमंदो की सहायता करने वाला होता है।

मंगल की दृष्टि हो, तो जातक की संतान उद्यमी और गुणी, पत्नी सुंदर होती है।

बुध की दृष्टि हो, तो राजनीतिज्ञ, आकर्षक, आनन्द दायक, कला और शिक्षा की उन्नति मे रुचिवान होता है। शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक भाग्यशाली, दान देने मे अग्रणी, धनवान होता है।

शनि की दृष्टि हो, तो धन-संपत्ति यश प्राप्त करेगा तथा मंत्री या संस्था अथवा संगठन का प्रमुख होगा।

रोहिणी गुरु चरण फल

प्रथम चरण - जातक दर्शन और पौराणिक अनुशासन मे रुचिवान, सत्यवादी, धनाढ्य, स्त्रियो मे रुचिवान, नैसर्गिक नेता, संततिवान होता है। इसे श्वशन संस्थान या रक्त रोग हो सकते है।

द्वितीय चरण - जातक धार्मिक पिता का आज्ञाकारी, वफादार होने से आदरणीय, व्यवहार से सद्चरित्रवान, हलाकि वह खुद को अपने तरीके से नियोजित करता है फिर भी बहु पत्नी वाला होता है।

तृतीय चरण - जातक चतुर, अनैतिक, समाज और परिवार से बचने वाला, भौतिकवादी, पैसे के लिए सब कुछ करने वाला होता है। संसर्ग जनित रोग के कारण 50 - 55 वर्ष से अधिक नही जीवित् रहता है।

चतुर्थ चरण - जातक विदेश यात्रा से आजीविका करता है। 32 वर्ष तक परेशान रहता है बाद मे उदार प्रीतिमान से धनाढ्य होकर जीवन आनंद लेता है। 40 वर्ष तक परेशानिया होती रहती है।

शुक्र :

चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक रत्नाभूषण के व्यापार से आजीविका करेगा। वह भौतिक, कामुक, आनंद पर केंद्रित होते हुऐ भी परिवार का उद्धारक होगा।

मंगल की दृष्टि हो, तो जातक क्रूर, अनैतिक तरीको से धन कमाने वाला, सुख हीन होता है।

गुरु की दृष्टि हो, तो सुखी वैवाहिक जीवन, प्रतिभावान संतान, वाहन सम्पत्ति आदि से भरपूर जीवन होता है।

शनि की दृष्टि हो, तो जातक निर्धन, स्वास्थ्य की समस्या, आत्म सम्मान नष्ट होता है।

रोहिणी शुक्र चरण फल

प्रथम चरण - जातक मोहक, मनोरंजक, सम्पत्तिवान, माता से सुविधा युक्त, पारिवारिक स्थिति 35 वर्ष की उम्र तक दयनीय होती है, बाद मे पत्नी से तलाक होने से जीवन सामान्य होता है।

द्वितीय चरण - जातक पटकथा लेखक, संगीतकार, ललित कला प्रेमी, सुखी वैवाहिक जीवन, पुत्र-पुत्री युक्त होता है। स्त्री जातक को गर्भपात या संतति की हानि होती है।

तृतीय चरण - जातक भौतिक सुख का इच्छुक होता है। इसे चरित्रहीन या निम्न स्तरीय औरत से सम्भन्ध होने के कारण दुःख भोगना पड़ता है। कपट विद्या चलाने के कारण तुच्छ प्रतिष्ठा और आर्थिक हानि होती है। यदि ऐसा व्यक्ति 30-35 तक चरित्र को नही सुधारता है तो इसे भयानक संसर्गजनित रोग होते है।

चतुर्थ चरण - जातक ठिगना, कुछ कुबड़ा होता है। इसे गलसुआ या कण्ठमाल रोग होते है। इसका विवाह बेहद सुंदरी से होता है जिससे संपत्ति और सौभाग्य प्राप्त होता है। स्त्री जातक का विवाह पूर्ण निपुण पुरुष से होता है।

शनि :

सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक गरीब और दूसरो पर आश्रित होता है।

चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक स्वस्थ, व्यवसाय मे वरिष्ठ से दूसरे नंबर पर रह कर व्यापार करेगा।

मंगल की दृष्टि हो, तो जातक वाचाल और मुस्कराने वाला होगा।

बुध की दृष्टि हो, तो जातक खराब स्वभाव वाला, दुष्टो की संगति करने वाला होता है।

गुरु की दृष्टि हो, तो जातक दयालु, स्वास्थ्य और सामान्य सेवाओ मे दानी, उच्च पदासीन होता है।

शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक सोने-जवराहत का कारोबारी, कामुक, शराबी होता है।

रोहिणी शनि चरण फल

प्रथम चरण - जातक धार्मिक लेकिन जुआरी, युवावस्था मे धन बर्बाद करनेवाला परन्तु 45 वर्ष पश्चात् स्थिर, शांत, अल्प अपव्ययी होता है। इसे क्षय रोग होता है। दांत गिर जाते है।

द्वितीय चरण - जातक शिक्षित, मोहक, मृदुभाषी, गंजा होता है। उदर की शल्य चिकित्सा हो सकती है। मवेशियो से आमदनी होती है।

तृतीय चरण - जातक बचपन से विद्यार्थी के सामान, उच्चकोटि का साहित्यविद और भाषाविद, सम्पत्तिवान, अन्वेषण के कारण पूज्यनीय, सुवक्ता, दन्त रोगी होता है।

चतुर्थ चरण - जातक फैशनेबल ड्रेसर, चोपयो से धन कमाने वाला, दृढ आर्थिक स्थति के कारण राजनीति मे उच्च पद प्राप्त करता है, 50 की उम्र मे मंत्री बन जाता है। जीवन का अंतिम भाग रोगो के कारण दुःखद होता है।

रोहिणी राहु चरण फल

प्रथम चरण - जातक वीर, अधिक खाने के बावजूद दुबला-पतला होता है। इसे दीर्घकाल का अपचन का रोग तथा आंखे कमजोर होती है, फिर भी दीर्घायु होता है। यदि लग्न भी इस चरण मे हो, तो राहु जीवन मे प्रत्येक क्षण रक्षा करता है।

द्वितीय चरण - जातक दृढ़ इच्छा शक्ति वाला, व्यापार मे सफल और प्रसिद्ध, सहनशील और आत्मविश्वास पूर्ण होता है। इसे अधिक खाने से अमाशय और आंत के रोग होते है तथा आंखे कमजोर होती है।

तृतीय चरण - जातक मंदबुद्धि और दूसरो पर निर्भर होता है। यह 65 साल तक जिन्दा रहकर दुर्घटना या रक्तविकार या मधुमेह के कारण मर जाता है।

चतुर्थ चरण - जातक साहित्य प्रेमी और लेखक होता है। उच्च शिक्षित न होते हुए भी बौद्धिक अनुशरण से जीविका करता है और श्रेष्ठ विद्वान् हो जाता है। इसके परिश्रम का फल जीवन के उत्तरार्द्ध में मिलता है।

रोहिणी केतु चरण फल

प्रथम चरण - जातक जन्म स्थान से दूर जीविकापार्जन करता है। अधिकांश समय दूसरो के भोजन पर निर्भर रहता है। यह अधिकतम 65 साल तक जीता है। कोई-कोई जातक गूंगा और दृष्टि हीन होता है।

द्वितीय चरण - जातक का जीवन अल्प काल का होता है। यदि मीन के गुरु या चन्द्र की दृष्टि हो, तो 20-25 साल जीता है। शरीर कमजोर और दृष्टिदोष बचपन से ही होता है। कोई-कोई जातक अपंग या कुष्ठ रोगी होता है।

तृतीय चरण - जातक प्राध्यापक या पादरी या पुरोहित या सन्यासी होता है। जातक परिवार का बड़ा होता है, जीवन 30 वर्ष तक आनंदमय होता है, इसके बाद संधर्ष प्रारम्भ होता है। विवाह मे अड़चन आती है और असाध्य रोग होता है।

चतुर्थ चरण - जातक विज्ञान का दार्शनिक, वेद, शास्त्रो का पंडित, मन्त्र शास्त्र आदि रहश्य विज्ञान मे रुचिवान, आयुर्वेद या परम्परागत चिकित्सा मे पारंगत होता है। यह हकलाना या मुकपन या अंधपन से पीड़ित होता है।

जातक = वह प्राणी जिसका ज्योतिषीय विचार किया जा रहा हो।

✡✡✡

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

नवरात्री में देवी के दिव्य पाठ एवं 7 शक्तिशाली रक्षक पाठ

समपूर्ण नरसिंह आराधना जयंती विशेष

सम्पूर्ण गणेश उपासना स्तोत्र मन्त्र सहित