मघा नक्षत्र सम्पूर्ण विवेचन एवं स्थित गृह फल
मघा नक्षत्र सम्पूर्ण विवेचन एवं स्थित गृह फल
अभिजीत नक्षत्र VEGA : भारतीय चंद्र भवन की गणना मे केवल 27 ही नक्षत्र है। यह 28 वा नक्षत्र केवल मुहूर्तादि मे ही विचार किया जाता है। यह उत्तराषाढ़ा और श्रवण के मध्य 276।40 से 280।53⋅20 तक (मकर राशि 6।40 से 10।53⋅20 यानि उत्तराषाढ़ा चतुर्थ चरण और 1/15 श्रवण यानि 4 घटी) कुल 4 अंश 53 काला 20 विकला का होता है।
मध्याह्न और मध्यरात्रि के पूर्व और पश्चात के 28 मिनट प्रत्येक अहोरात्र मे अभिजीत मुहूर्त माने जाते है। मध्याह्न के अभिजीत मे श्री राम और मध्यरात्रि के अभिजीत मे श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। भारत विभाजन और भारतीय स्वतंत्रता का मुहूर्त भी मध्यरात्रि अभिजीत ही था।
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मघा नक्षत्र
राशि चक्र मे 120।00 से 133।20 अंशादि विस्तार का क्षेत्र मघा नक्षत्र कहलाता है। अरब मंजिल मे यह अल जभह यानि शेर का माथा, ग्रीक मे रेगुलस और चीन सियु मे सिंग कहलाता है। तारो की संख्या के बारे में मतभेद है। खण्डकातक अनुसार छह तारे जबकि अन्य धारणानुसार पांच तारे है। यह मतभेद छह तारो के समूह मे दो तारो की कम रोशनी के कारण उठा है। मघा नक्षत्र के पांच तारे छड़ी या झंडे के आकार मे सीधी कतार मे है। जबकि छह तारो का समूह कम चौड़ाई वाले मकान का अग्र भाग या पालकी जैसा प्रतीत होता है।
देवता पितर, स्वामी ग्रह केतु, राशि सिंह 00।00 से 13।20 अंश। यह भारतीय चंद्र भवन मे 10 वा उग्र संज्ञक गण्ड नक्षत्र है। यह अशुभ तामसिक स्त्री नक्षत्र है। इसकी जाति शूद्र, योनि मूषक, योनि वैर मार्जार, गण राक्षस, नाड़ी अन्त्य है। यह पश्चिम दिशा का स्वामी है। यह एक रहस्यात्मक नक्षत्र है। मघा का अर्थ महान, बड़ा है।
प्रतीकवाद - इसके देवता पितरगण है। पितृ हमारे पूर्वजो की आत्मा है। हिन्दू वंशवाद अनुसार पितरो का तर्पण यानि श्राद्ध ( संस्कृत श्राद्ध = आदर और विश्वास) हेतु एक पुत्र होना आवश्यशक है, इस कारण लोपमुद्रा और अगस्त्य को पुत्र हीनता का प्रायश्चित करना पड़ा था।
भारतीय वायु पुराण, हरिवंश पुराण, मत्स्य पुराण, ब्रम्ह पुराण, पद्म पुराण मे देव और मानव पितरो का वर्णन है। कुछ पितृ देवलोक और कुछ पाताल वासी होते है। मानव पितृ जिनमे देवत्व रहता है वे स्वर्ग के अधिकारी होते है और हजारो वर्ष पश्चात् जन्म लेकर सृष्टि की रचना करते है। देव पितृ सात प्रकार के तीन अमूर्त और चार समूर्त होते है। ये वैराज, अग्निश्वत्ता, बहिर्शादा (तीन अमूर्त) और सोमप, हविश्वमाना, अजयपा, सुकालीन (चार समूर्त) है। इनकी सात मानस पुत्रिया है। इनमे नर्मदा नदी सोमप की पुत्री है, इसे कुवांरी माना जाता है।
मघा नक्षत्र-मघा नक्षत्र भचक्र का दसवां नक्षत्र है जो अश्लेषा से आगे के 13-20’ में एवं सिंह राशि के क्षेत्र में स्थित है। इस नक्षत्र के 5 तारे एक शाला या पालकी जैसी आकृति बनाते हैं। अतः इसे मघा कहते हैं। इस नक्षत्र के देवता पितर माने गए हैं। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। मघा नक्षत्र में उत्पन्न होने वाला पुरुष जातक शूर, साहसी, प्रसिद्ध, पुत्रवान, सुशील किन्तु रजोगुणी होता है। इसका स्वाभाव तीक्ष्ण होता है पर प्रायः पितृभक्त, धनी व तीव्र बुद्धि वाला होता है।
मघा नक्षत्र में उत्पन्न होने वाली स्त्री जातक गुरु एवं ब्राह्माणों की भक्त, राज्य सुख तथा धन वैभव भोगने वाली, पाप से रहित किन्तु अनेक शत्रुओं से युक्त होती है। ऐसा मर्मज्ञों का मत है।
विशेषताएं - मघा जातक की आँखे सिंह के समान होती है, वह परम्परावादी, वंशवादी होता है। जातक पूर्वजो और पालको से मार्गदर्शन प्राप्त करने वाला, शास्त्र प्रणाली का अनुशरण करने वाला, अहंकारी, समाज का नेता होता है। वट वृक्ष इसका पवित्र वृक्ष है।
मघा नक्षत्र : विभूतिया
गुरु परमहंस योगानंद।
महर्षि महेश योगी।
मार्गरेट थेचर (प्रधान मन्त्री, इंग्लैण्ड)
निकता ख्रुश्चैव (सोवियत रुस सुप्रीमो )
मघा फलादेश
मघा अर्थात प्रमुख, प्रभावशाली, मनोरंजक, उदार, कुलीन, उत्तम है। जातक अमीर, पहाड़ो का शौकीन, व्यापारी, स्त्रियो से नफरत करने वाला होता है। यह बहुत नौकर रखने वाला, भोगी, पिता का भक्त, उद्यमी, सेनापति राज्याश्रित या प्रशासक होता है।
पुरुष जातक - इसकी उन्नत नाक, शरीर रोम युक्त, हाथ और कन्धो के नीचे मस्सा, मध्यम कद, भोला-भाला होता है। जातक उद्यमी, बुजुर्गो का सम्मान करने वाला, ईश्वर से डरने वाला, विज्ञानो का ज्ञाता, सुखी जीवन जीने वाला, मृदुभाषी, कोलाहल से दूर रहने वाला, विद्वानो का प्रिय होता है। यह सांस्कृतिक फैलाव मे बहुत समय गुजार देता है और अनेक सांस्कृतिक गतिविधियो मे सलग्न रहता है।
जातक विचारवान, योजनकारियो से सद व्यवहार करने वाला, दूसरो को हानि नही पहुँचाने वाला, किसी का नुकसान होने पर त्वरित ठीक करने वाला, विघ्न सन्तोषियो और अड़चनकारियो से दूर रहने वाला होता है, इसलिए इसके दुश्मन अधिक होते है। जातक गरम मिजाजी, असत्य नही सहने वाला, समाज और समूह के लिए कार्यकारी होने से जनप्रिय होता है। इसे आय हेतु व्यवसाय मे परिवर्तन करना पड़ता है।
इसके वरिष्ठ और कनिष्ठ से मधुर सम्बन्ध रहने के कारण दोनो के मध्य सेतु बन जाता है। दाम्पत्य जीवन सुखद होता है। इसे अनेक जबाबदारिया वहन करना पड़ती है। जातक रतौंदी रोग से ग्रस्त होता है। यदि शनि, मंगल की युति हो या इस पर दृष्टि हो, तो कैंसर होता है।
स्त्री जातक - वैदिक ज्योतिष अनुसार मघा स्त्री ईमानदार, साफ-साफ बात कहने वाली, सच बोलने वाली, महत्वाकांक्षी, निर्भीक, अति सुन्दर होती है। यदि इस नक्षत्र मे शनि चंद्र से दृष्ट हो, तो लम्बे बाल वाली होती है। यह झगड़ालू , दानी, ईश्वर से डरने वाली गृहकार्य और कार्यालयिन कार्य मे दक्ष, निस्वार्थ पर सहायक होती है। गुस्सा इसकी नाक पर रखा होता है। यदि बृहस्पति इस नक्षत्र पर हो, तो उच्च पद पर या महा धनी होती है। यह परिवार मे मनमुटाव मतभेद कराने वाली होती है।
आचार्यो द्वारा नक्षत्र फलादेश
मघा नक्षत्रो के जातको के शरीर मे भराव होता है। अधिकतर मांसल शरीर और ठुड्डी भी मांसल व भारी होती है। पेट के दोनो पार्श्वभाग मे भी थुलथुल पन होता है। जातक सहनशील, कुशल वक्ता, क्रोधी होता है।
देवो और पितरो का पूजन तथा यज्ञादि कर्मो में इनकी रूचि होती है। दान-पुण्य मे इनकी गति रहती है इसलिए तेजश्विता इनके व्यक्तित्व का अंग होती है। - नारद
इनके पास धन-सम्पत्ति अच्छी होती है। नौकरो का सुख प्रभूत रहता है। संसारिक सुखोपभोग के प्रति आकर्षण होता है। इन्हे धर्म-धन-काम तीनो पुरषार्थ की प्राप्ति होने से परिश्रमी होते है।
इनका आर्थिक व सामाजिक स्तर अच्छा होने से बहुत से मित्र और शत्रु होते है। धन, जन का सुख उत्तम होता है। माता के साथ यज्ञादि कर्म और पितृ कार्य संपन्न करता है। पिता का सुख अल्प होता है। जातक उच्च शिक्षा प्राप्तक, पत्नी तुनक मिजाजी, कठोर हृदय वाला होता है। - पाराशर
चन्द्र - चन्द्र इस नक्षत्र मे हो, तो जातक विद्वानो मे मान्य, ईश्वर और पूर्वजो का पूजक, रहस्य मय, उद्यमी, दयालु, क्रोधी, उदार महत्वाकांक्षी, गर्वीला, अभिमानी, मिलनसार, सकरात्मक दृषिकोण वाला होता है।
पुरुष जातक की पत्नी अच्छी, विश्वनीय होती है। स्त्री जातक पति भक्त, धार्मिक, गर्भाशय रोगी, काबू रखने की क्षमता वाली, धनी, चरित्रवान, वफादार होती है।
वराहमिहिर अनुसार चन्द्र प्रभाव सम्पत्ति, विलासता देता है।
सूर्य - सूर्य मघा मे हो, तो नेतृत्व, अधिकारी, मनोरंजन कर्ता, संगीतज्ञ, ध्यान देने योग्य, साहसिक कार्य करने वाला, घमण्डी, राजा के सामान, यात्रा प्रिय, आध्यात्मिक, खानदानी होता है।
लग्न - लग्न मघा मे हो, तो जातक ईश्वर और पूर्वजो का पूजक, मान-सम्मान प्राप्त करने वाला, यौन प्रलोभन मे अाने वाला, जन अप्रिय, नौकर युक्त, गहरी जड़ो वाला होता है।
चरण फल
प्रथम चरण - इसका स्वामी मंगल है। इसमे सूर्य, केतु, मंगल ☉ ☋ ♂ का प्रभाव है। सिंह 120।00 से 123।20 अंश। नवमांश मेष। यह शक्ति, शूरता, नेतृत्व, दया का द्योतक है।
जातक मंदाग्नि से ग्रस्त, साहसी, नाशिक का अग्र लाल भाग, बड़ा सिर, उन्नत मांशल वक्ष, शूरवीर होता है।
यह पाद जातक का बहुत मजबूत स्वभाव दर्शाता है। जातक अत्यंत शक्तिशाली, अहंमानी, उच्च स्थिति प्राप्तक, विख्यात न्यायाधीश या अभिभाषक, अधिकार युक्त होता है। इसे कट्टर दुश्मनी कारक अधिक शक्ति के उपयोग पर नियंत्रण रखना चाहिए।
द्वितीय चरण - इसका स्वामी शुक्र है। इसमे सूर्य, केतु, शुक्र ☉ ☋ ♀ का प्रभाव है। सिंह 123।20 से 126।40 अंश। नवमांश वृषभ। यह चेतना, कर्तव्य, संगठन, अनुग्रह का द्योतक है।
जातक चौड़ा ललाट, चार कोने वाला शरीर, छोटे नेत्र, लम्बी भुजा, उन्नत वक्ष, लम्बी ऊंची नाक वाला, अल्प क्रोधी होता है। यह पाद व्यवहार मे शालीनता और निम्न स्तरीय अहंकार को दर्शाता है। इसके पास अधिकार और शक्ति होते हुए भी कूटनीति से भौतिक लक्ष्य को प्राप्त करता है। इस कारण जातक कुटनीतिज्ञ, राजनीतिज्ञ, प्रबंधक, प्रशासक आदि होता है।
तृतीय चरण - इसका स्वामी बुध है। इसमे सूर्य, केतु, बुध ☉ ☋ ☿ का प्रभाव है। सिंह 126।40 से 130।00 अंश। नवमांश मिथुन। यह विद्ववता, खोज, रचनात्मकता का द्योतक है।
जातक घने रोम वाला, चकोर, ऊंची नाक, लम्बी भुजा, गोल गले वाला, मोह ममता से परे होता है। जातक अत्यंत मेघावी, समय निकाल कर मित्रो मे व्यतीत करने वाला, कार्यालय समय बाद तनाव मुक्ति का ज्ञाता होता है। यह अति उच्च शिक्षा प्राप्त बुद्धि जीवी होता है।
चतुर्थ चरण - इसका स्वामी चन्द्र है। इसमे सूर्य, केतु, चन्द्र ☉ ☋ ☾ का प्रभाव है। सिंह130।00 से 133।20 अंश। नवमांश कर्क। यह संस्कार, पैतृकता, खुशहाली, दान का द्योतक है।
जातक चिकनी तैलीय त्वचा वाला, गौर वर्ण, लम्बे सुन्दर नेत्र, बेसुरी आवाज वाला, कोमल केश, मेढक के सामान पेट, कम खुराक वाला होता है। अधिकार प्राप्त जातक के लिए यह शुभ नही है। महत्वपूर्ण निर्णय के समय यह भावुक होकर अपने लगाव के प्रति झुक जाता है। यह छान-बीन करने वाला पुरातत्ववेत्ता होता है।
आचर्यों ने चरण फल सूत्र रूप मे कहा है परन्तु फलादेश मे बहुत अंतर है।
यवनाचार्य : मघा के पहले चरण मे पुत्रहीन, दूसरे मे पुत्रवान, तीसरे मे रोगी, चौथे मे विद्वान, बुद्धिमान होता है।
मानसागराचार्य : पहले चरण मे राजमान्य, दूसरे मे धनवान, तीसरे मे तीर्थयात्री, चौथे मे पुत्रवान होता है।
मघा नक्षत्र ग्रह चरण फल
सूर्य :
⚉ मघा सूर्य पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक फिजूलखर्ची, शाही शक्तियो का उपभोगी, प्रसिद्ध होता है।
⚉ मघा सूर्य पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक स्त्रियो के सेवा कार्य करेगा, फिजूलखर्ची, मेहनती, क्रूर होगा।
⚉ मघा सूर्य पर गुरु की दृष्टि हो, तो मंदिरो, झीलो, उद्यानो का शिल्पकार होगा। कुटम्बियो के साथ रहेगा।
⚉ मघा सूर्य पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक ईर्ष्यालु प्रवृत्ति, दूसरो के कामो मे रोड़ा अटकाने वाला होता है.
मघा सूर्य चरण फल
प्रथम चरण - जातक मांसल देह, सहनशील किन्तु क्रोधी, भोगो के प्रति आकर्षित, दुःखी, दरिद्र, अपमानित होने वाला, वातरोगी होगा। यह चरण लग्न हो, तो रंतौधी रोग होता है।
द्वितीय चरण - जातक मुखिया, धार्मिक आस्था युक्त, अभिनय प्रेमी, मनोरंजन करने वाला, यात्रा प्रिय होता है।
मतान्तर - जातक यात्राओ से थका हुआ, गरीब और भूखा, प्रभावित, नेत्रो और अंगो मे खराबी वाला होगा। यदि शनि की दृष्टि हो, तो माता-पिता से अनबन होगी और अलग रहेगा।
तृतीय चरण - जातक सुख सुविधा सम्पन्नता युक्त, संगीत या नृत्य-नाटक मे रूचि लेने वाला, साहसिक होता है। यदि शनि और मंगल के साथ सूर्य हो, तो एक माह जियेगा या अल्पायु होगा।
चतुर्थ चरण - जातक कार्य करने मे दक्ष, धन-धर्म-काम तीनो पुरुषार्थ करने वाला, परिश्रमी, जाति प्रमुख या उच्च अधिकारियो का स्नेही होता है।
चन्द्र :
⚉ मघा चन्द्र पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक विपुल धन सम्पन्न, प्रसिद्ध, राजकीय शक्तियो का उपयोग करेगा।
⚉ मघा चन्द्र पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक राजनीति के उच्च स्तर पर होगा, गांव की भलाई के कार्य करेगा। ⚉ मघा चन्द्र पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक धनवान, शराबी, स्त्रियो मे रत रहेगा।
⚉ मघा चन्द्र पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक शासन के निकट या मंत्री होगा।
⚉ मघा चन्द्र पर शुक्र की दृष्टि हो, तो स्त्रियो की संगति मे आनंद लेनेवाला, स्त्रियोचित स्वभाव वाला होगा।
⚉ मघा चन्द्र पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक निर्धन, पत्नी से वियोग, कृषि कुशल, सुरक्षा संस्थान प्रभारी होगा।
मघा चन्द्र चरण फल
प्रथम चरण - जातक मंजरी या नीली आंख वाला, एक समय मे विभिन्न इकाइयो की देखरेख करने वाला, सामाजिक कार्यो मे व्यस्त, नौकरी मे मातहतो द्वारा ईश्वर के सामान पूज्य, दमदार बातो के कारण अधिकारियो मे सम्मानी होता है। स्त्री जातक वफादार, चरित्रवान, गर्भाशय रोगी होती है।
द्वितीय चरण - जातक विद्वानो मे मान्य, ईश्वर और पितर पूजक, गर्वीला, सभ्रान्तवादी, सम्मानीय, धनवान, सम्पदा और वैभव युक्त होगा। जातक की पत्नी विश्वसनीय, वफादार, समाज सेविका होगी।
अन्यत्र - जातक स्त्रियो से घृणा करेगा, 28 वर्ष तक घोर गरीबी मे होगा, बाद मे बदलाव आकर सफलता मिलेगी। यदि शनि से युति हो और मंगल की इन पर दृष्टि हो, तो मिर्गी रोग हो सकता है।
तृतीय चरण - जातक सुन्दर, प्रसन्नचित्त, गरिमायुक्त, अभिमानी किन्तु मिलनसार, उद्यमी, चल-अचल संपत्ति की प्रचुरता वाला, दयालु होता है।
अन्यत्र - आरम्भिक 35 वर्ष की अवस्था तक वैवाहिक जीवन असन्तोष और असामंजस्य पूर्ण होगा, बाद मे पत्नी उसकी खुबिया जानकर व्यवहार में बदलाव करेगी जिससे वैवाहिक जीवन सुखद होगा। यदि यह चरण लग्न हो, तो कैंसर होता है।
चतुर्थ चरण - जातक सौम्य, विनम्र, पूर्वजो का पूजक, मातृ-पितृ भक्त, वंश वृद्धि करने वाला, परम्परावादी, रहस्यमय होता है। उसकी कीर्ति चन्द्रमा के सामान घटने-बढ़ने वाली होती है।
⇴ अन्यत्र - यदि जातक 35 वर्ष तक जीवित रहता है, तो वह राजनीति के उच्चतम पद पर होगा। उसके प्रधान मंत्री या राष्ट्रपति या समकक्ष पद के योग होते है। वह शत्रुओ का दमनकारी होता है।
मंगल :
⚉ मघा मंगल पर सूर्य की दृष्टि हो, तो शत्रु नाशक, सामाजिक कार्य करने वाला, जंगल और पहाड़ पर्यटक होगा।
⚉ मघा मंगल पर चंद्र की दृष्टि हो, तो जातक स्थूल, क्रूर, माता का भक्त होता है।
⚉ मघा मंगल पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक शास्त्रज्ञ, बुद्धिमान, ललित कलाओ मे प्रवीण, मृदुभाषी होगा।
⚉ मघा मंगल पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक शक्तिशाली, प्रभावी लोगो से सम्बंधित, आकांक्षी होता है।
⚉ मघा मंगल पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक आकर्षक व्यक्तित्व पर घमण्डी, मैथुन मे रत होता है।
⚉ मघा मंगल पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक निर्धन और परिवार से दूर रहने वाला होता है।
मघा मंगल चरण फल
प्रथम चरण - जातक क्रोधी और व्याकुल मन वाला, सरकारी नौकर, यथोचित जीवन व्यापन करने वाला फिर भी वैवाहिक जीवन सुखी नही होता है। यदि मंगल पाप प्रभाव मे (शनि से युत या दृष्ट) हो या यह चरण लग्न हो, तो कैंसर होता है।
द्वितीय चरण - जातक थुल-थुल शरीर वाला, मांसल देह, रतिक्रीड़ा प्रेमी, भोगो का लालची होता है। यदि गुरु से युत हो तो बाल्यावस्था से बुद्धिमान, विलक्षण प्रतिभावान, शिक्षण समस्या को सुलझाने मे माहिर, उन्नतिशील होगा। उसके पेट के पास बड़ा काला पहचान चिन्ह होगा।
✪ इस चरण का मंगल विवाह मे मंगल दोष (मांगलिक) का परिहार माना जाता है।
तृतीय चरण - जातक दान-पुण्य करने वाला, धार्मिक कार्यो मे रुचिवान, विद्वानो का आदर करने वाला, ललना प्रिय, उदार, केवल शाबासी के लिए सभी जिम्मेदारी उठाने वाला तथा क्षमता के बहार जिम्मेदारी उठाने के लिए "ना" नही कहने वाला होता है।
चतुर्थ चरण - जातक शांत, सुखी, सुन्दर, संतोषी प्रकृति वाला, स्थिर चित्त होता है। पिता का अल्प सुख होता है। कमोबोश तृतीय चरण जैसे ही फल होते है।
बुध :
⚉ मघा बुध पर चंद्र की दृष्टि हो, तो जातक आकर्षक, संगीत और ललित कलाओ में रुचिवान होगा।
⚉ मघा बुध पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक रतिक्रिया में लिप्त, शरीर पर शस्त्र से घाव का निशान होगा।
⚉ मघा बुध पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक सुन्दर, स्वच्छ चित्त, परिवार मे सम्मानित होगा।
⚉ मघा बुध पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक क्रूर, अधिक पसीना आने से पसीने की बदबू से परेशान होगा।
मघा बुध चरण फल
प्रथम चरण - जातक वाचाल, निरर्थक बात कहने वाला, विद्वेष पूर्ण, मित्रो का अहित करने वाला, शत्रुओ से आहत होता है।
अन्यत्र - यदि बुध, सूर्य व गुरु से युत हो, तो जातक किसी फैक्ट्री मे सामान पद वालो से शीघ्र उन्नति करेगा परन्तु कुंडली मे कही पर भी शनि और मंगल की युति या परस्पर दृष्टि होने पर नौकरी छोड़ देगा और कुण्ठित होकर इधर-उधर भटकेगा।
द्वितीय चरण - जातक सुन्दर, मनभावन, मित्रो और विद्वानो का आदर-सत्कार करने वाला, कुशल वक्ता, दिमागी असंतुलन तथा उत्तजेना से अभिभूत, शांतिपूर्ण जीवन वाला होगा। यदि गुरु की दृष्टि हो, तो शिक्षक होगा।
तृतीय चरण - जातक सौम्य, ऐश्वर्यशाली, माता-पिता का लाडला, वंश परम्परा का निर्वाहक, सबका हित चाहने वाला होता है। यदि मंगल की युति हो, तो दुष्ट या पापी का साथी, अल्प धनी, स्वर्णाभूषण बनाने मे कुशल, बड़ी आयु की स्त्रियो का साथी होगा।
चतुर्थ चरण - जातक स्वस्थ, धवल रंग रूप वाला, आकर्षक, साधारण जीवन वाला होगा। वह शब्जियो, फल, फूल, कपड़ा, तेल आदि बेचने की फेरी लगायेगा। नेत्ररोग, अस्थमा, मिर्गी आदि का रोगी होगा।
गुरु :
⚉ मघा गुरु पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक प्रसिद्ध, प्रभावी, नेक होगा।
⚉ मघा गुरु पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक आकर्षक, पत्नी के द्वारा धन प्राप्तक, ख़राब आदत वाला होता है।
⚉ मघा गुरु पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक समुदाय के लिए कार्यकारी, सिविल इंजीनियर होगा।
⚉ मघा गुरु पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक शास्त्र और आधुनिक विज्ञान का ज्ञाता, मृदुभाषी, वक्ता होता है।
⚉ मघा गुरु पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक स्त्रियो का प्यारा, सरकार से धन प्राप्तक होगा।
⚉ मघा गुरु पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक वाकपटु, भावपूर्ण वक्ता, बड़े परिवार के कारण सुखी नही होगा।
मघा गुरु चरण फल
प्रथम चरण - जातक स्थूल देह वाला, सामान्य सूरत वाला, सहनशील परन्तु गुस्सैल, व्यसन प्रिय, संसारिक सुखो के प्रति रुचिवान और लिप्त, भयातुर होता है।
द्वितीय चरण - जातक अति योग्य, न मोटा-न दुबला, विदेशो में शिक्षा प्राप्त करने वाला, शासकीय सेवक, पितरो का श्राद्ध करने वाला, विषयी होता है। श्रवण नक्षत्र मे चन्द्रमा हो, तो व्यवसाय उपयुक्त होता है।
तृतीय चरण - जातक सुन्दर, दयालु, पितरो का श्राद्ध करने वाला, साहसी, ताकतवर, धनवान, शत्रुहंता होता है।
चतुर्थ चरण - जातक मार्गदर्शन करने की जन्मजात योग्यता वाला, सामाजिक कार्यो से प्रसिद्ध, बाल्यावस्था से ही नेता, बिना प्रायसो के सफल, सामान्य सम्पत्ति वाला होता है।
✪ ज्योतिष जन मघा नक्षत्र मे गुरु को दूषित मानते है।
शुक्र :
⚉ मघा शुक्र पर चंद्र की दृष्टि हो, तो जातक धनी लेकिन दुश्चरित्र औरतो की संगति मे सब नष्ट कर देगा।
⚉ मघा शुक्र पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक विख्यात, भाग्यशाली, दूसरी औरतो पर आसक्त होगा।
⚉ मघा शुक्र पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक धन-सम्पत्ति युक्त, सेवको सहित होगा।
⚉ मघा शुक्र पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक वैभव युक्त, विधवा और तलाक शुदा औरतो से सम्बन्ध रखेगा।
मघा शुक्र चरण फल
प्रथम चरण - जातक कठोर हृदय, शीघ्र भावुक नही होने वाला, क्रोधी होता है। इनकी पत्नी तुनक मिजाजी होती है। यदि शुक्र मंगल से दृष्ट या युत हो, तो मैथुन सम्बन्धी विकृति, वैवाहिक जीवन क्लेशमय होता है।
❃ यदि मंगल शुक्र की युति हो, तो प्रबल कामवासना होगी और वह अपने साथी (स्त्री या पुरुष) की अनैतिकता का शिकार होगा। पत्नी अथवा पति के विवाहोत्तर यौन सम्बन्ध होगे। कुछ मामलो मे विवाह के बाद अलगाव, तलाक, मृत्यु भी हो सकती है।
द्वितीय चरण - जातक सुन्दर, पुरुषत्व की कमी या नपुंसक, पूर्वजो की परिपाटी का निर्वाह करने वाला, धन वैभव से युक्त, ऐश्वर्यशाली, प्रसन्नता मे भ्रामकता से नाकारा व दयनीय होता है।
तृतीय चरण - जातक लुभावना, जिद्दी, उत्कृष्ट विद्वान, गणितज्ञ, पितरो का तर्पण करने वाला, पर्यटन प्रेमी, तीर्थस्थलो का निर्माण कराने वाला, धनवान, माता के स्वास्थ की चिंता करने वाला होता है।
चतुर्थ चरण - जातक धन-धर्म-काम तीनो पुरषार्थ करने वाला, मेहनती, कर्मकांड मे विश्वास करने वाला, कई सम्पदाओ सहित होता है। कुछ मामलो मे पत्नी से असामंजस्य के कारण वैवाहिक जीवन दु:खी होता है।
शनि :
⚉ मघा शनि पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक गरीब, शराबी, झूठा होता है।
⚉ मघा शनि पर चंद्र की दृष्टि हो, तो जातक प्रचुर धनी, सुंदरियों मे आनंद मनाने वाला, भाग्यशाली होता है।
⚉ मघा शनि पर मंगल की दृष्टि हो, तो अनेक यात्राये करने वाला, एकान्तवासी, पत्नी-संतान से वंचित होगा।
⚉ मघा शनि पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक दयनीय, आलसी, निर्धन होगा।
⚉ मघा शनि पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक विश्वासपात्र, समाज या ग्राम मुखिया, धनवान, संपन्न होगा।
⚉ मघा शनि पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक को मध्यमावस्था के बाद पैतृक संपत्ति मिलेगी।
मघा शनि चरण फल
प्रथम चरण - जातक मध्यम कद-काठी, पर निन्दा करनेवाला, जिद्दी, पितरो के प्रभाव पर अविश्वासी, प्रतिकारी मातहत वाला, आलसी, अश्लील भाषी, मित्र सुख से वंचित होता है।
✪ केवल मघा नक्षत्र मे शनि के इस चरण मे जातक पितरो के अस्तित्व का अविश्वासी होता है।
द्वितीय चरण - जातक सुन्दर, विद्वान, नौकर चाकरो से प्रभूत, पितृ कर्म करने वाला, परिश्रमी, परम्पराओ के साथ नई परम्परा डालने वाला, दो औरतो का पति (एक अवैध यानि बिन व्याही) पारवारिक समस्या से ग्रस्त होता है।
तृतीय चरण - जातक दान-पुण्य करने के कारण तेजश्वी, धार्मिक अनुष्ठान करने मे निष्ठावान, रति सुख से वंचित, पत्नी से अपमानित, कामगारो का नियंत्रक किन्तु अस्तित्व विहीन होगा। चन्द्रमा से युति हो तो अधिक उम्र की स्त्रियो से सम्बन्ध होगे।
चतुर्थ चरण - जातक मध्यम कद, गेंहुआ रंग, विज्ञान के क्षेत्र मे अनुसन्धान करने वाला, संत स्वभाव का होता है। जातक की पत्नी सुन्दर होती है।
मघा राहु चरण फल
प्रथम चरण - जातक ऊंची जाति मे उत्पन्न, धनी, सुख-सुविधा सम्पन्न होता है। लग्न पूर्वा भाद्रपद मे हो, तो जातक की दो पत्निया होगी।
द्वितीय चरण - जातक अवैध तरीके से धनार्जित करेगा। मंगल से युति हो तो पत्नी संतान रहित होता है।
तृतीय चरण - मंगल या बुध से युत या दृष्ट होने पर संघातिक रोग, चर्म व यौन रोग, कैंसर होता है।
तृतीय चरण - जातक धन-संपत्ति, संतान, पत्नी संपन्न, शिक्षण या शोध संस्थान का अध्यक्ष, भुलक्क़ड होगा।
मघा केतु चरण फल
प्रथम चरण - जातक अनेक प्रकार की हानि उठानेवाला, जुआरी, समाज द्वारा प्रतिबंधित कार्यो मे मग्न, रेस का शौकीन होता है।
द्वितीय चरण - जातक एकांतवासी, खुशियो से हीन, घर मे ही सुखी, मध्यमावस्था तक सन्यासी रहकर पुनः गृहस्थ होगा। स्त्री जातक मे अकेला केतु पति की मृत्यु कारक होता है।
तृतीय चरण - कार्यक्षेत्र मे अनावश्यक चिंताए होगी। यदि लग्न शतभिषा में हो, तो विधुर या विधवा होगी।
चतुर्थ चरण - यह चरण लग्न हो और गुरु श्रविष्ठा मे हो, तो सेना में उच्च पद पर, धनी, सुखी दाम्पत्य होगा।
जातक = वह प्राणी जिसका ज्योतिषीय विचार किया जा रहा हो।
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