मंत्र रामायण

    मन्त्र रामायण

    १. प्रभु की कृपा पाने का मन्त्र

    || मन्त्र॥

    "मूक होइ वाचाल,पंगु चढ़ई गिरिवर गहन।जासु कृपा सो दयाल,द्रवहु सकल कलिमल-दहन॥

मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभप्रभु श्री राम की पूजा करके गुरुवार वाले दिन सेकमलगट्टे की माला पर प्रातः और सायंकाल केसमय नित्य प्रति १०८ बार इस मन्त्र को जपते हुए२१ दिन तक निरन्तर जपादि को सुचारु ढंग सेचलाते रहें।

    इस प्रकार मन्त्र का प्रयोग करने पर प्रभु की कृपाप्राप्त होती है और दुर्भाग्य का अन्त हो जाता है।

    २. रामजी की अनुकम्पा पाने का मन्त्र॥

    ‘बन्दउँ नाम राम रघुबर को।हेतु कृसानु भानु हिमकर को॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    रविवार वाले दिन से इस मन्त्र को रुद्राक्ष कीमाला के ऊपर-१०,००० बार प्रतिदिन जपें और लगातार४० दिन तक इस क्रिया को करते रहें।

    इस प्रकार से उपरोक्त मन्त्र का प्रयोग निष्कामभावना वाले करें तो उन्हें प्रभु श्रीराम की विशेषअनुकम्पा प्राप्त होती है

    ३. हनुमान जी की कृपा पाने का मन्त्र

    | मन्त्र ॥

    प्रनवउँ पवन  कुमार 
   खल बन पावक ग्यानधन।
    जासु हृदय आगार बसहिं
    राम सर चाप धर॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    सिन्दूर चढ़ी मारुति की प्रतिमा की पूजा करकेरक्त चन्दन की माला के ऊपर १००० बार प्रतिदिनइस मन्त्र का जप करें। इस जप को २१ दिन तककरते रहें और इसका शुभारम्भ मंगलवार से ही करें।

    इस प्रकार से मन्त्र का प्रयोग करने पर हनुमानजी की विशेष अनुकम्पा प्राप्त होती है। अला-बला,किये-कराये अभिचार का अन्त हो जाता है।

    ४. वशीकरण के लिए मन्त्र

    || मन्त्र॥

    "जो कह रामु लखनु बैदेही।हिंकरि हिंकरि हित हेरहिं तेही॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    सूर्यग्रहण के पर्व काल के उत्तम समय पर पूरेपर्वकाल में ही मन्त्र को जपते रहें तो यह मन्त्र सिद्धहो जायेगा। इसके पश्चात् जब भी आवश्यकता होइस मन्त्र को सात बार पढ़ करके गोरोचन का टीकालगा लें।

    इस प्रकार करने से मन्त्र के प्रयोग से वशीकरणहोता है।

    ५. सफलता पाने का मन्त्र|| मन्त्र|

    "प्रभु प्रसन्न मन सकुचतजि 
      जो जेहि आयसु देव।
    सो सिर धरि धरि करिहि
    सबु मिटिहि अनट अवरेब॥
    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    प्रतिदिन इस मन्त्र के १००८ पाठ करने चाहियें।इस प्रकार से इस मन्त्र के प्रभाव से सभी कार्यों मेंअपूर्व सफलता मिलती है।,

    ६. रामजी की पूजा-अर्चना का मन्त्र|| मन्त्र

    "अब नाथ करि करुनाबिलोकहु देहु जो बर मागऊँ।जेहिं जोनि जन्मौं कर्मबस तहँ रामपद अनुरागऊँ॥"

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    यह मन्त्र प्रतिदिन केवल सात बार पाठ करने मात्रसे ही लाभ प्रस्तुत करता है और इस मन्त्र के प्रयोगसे जन्म-जन्मान्तर में श्रीराम की पूजा-अर्चना काअधिकार प्राप्त हो जाता है।

    ७. मन की शांति के लिये राम मन्त्र

    || मन्त्र॥

    ‘राम राम कहि राम कहि।

    राम राम कहि राम॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    सहजासन अर्थात् जिस आसन में सुगमता सेबैठा जा सके, बैठ जायें और नेत्र बन्द करके प्रभु रामकी तरफ ध्यान केन्द्रित करके इस मन्त्र के यथाशक्तिअधिक-से-अधिक जप करें। इस प्रयोग को २१ दिनतक करते रहें। तत्पश्चात् इस मन्त्र के प्रयोग से मनऔर मस्तिष्क प्रभु राम में लीन हो जाता है। जिससेमन को शांति मिलती है।

    ८. पापों के क्षय के लिए मन्त्र

    || मन्त्र

    ‘मोहि समान को पापनिवासू॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    रुद्राक्ष की माला पर १००० बार इस मन्त्र कोप्रतिदिन जपते हुए ४० दिन पूर्ण करें और अपने नाते-रिश्तेदारों से कुछ सिक्के भिक्षा के रूप में प्राप्त करकेगुरुवार वाले दिन विष्णुजी के मन्दिर में चढ़ा दें।

    इस प्रकार से उपरोक्त मन्त्र के प्रयोग से समस्तपापों का क्षय हो जाता है।
    ९. श्रीराम प्रसन्नता का मन्त्र

    || मन्त्र॥

    "अरथ न धरम न काम रुचिगति ने चहउँ निरबान।

    जनम जनम रति राम पद

    यह वरदान न आन॥'

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    इस मन्त्र को यथाशक्ति अधिक-से-अधिक संख्यामें ४० दिन तक जपते रहें और प्रतिदिन प्रभु श्रीरामकी प्रतिमा के समक्ष भी सात बार जप अवश्य करेंतो इस मन्त्र के प्रयोग से जन्म-जन्मान्तर तक तकश्रीराम जी की पूजा का स्मरण रहता है और प्रभुश्रीराम प्रसन्न होते हैं।
    १०. संकट नाशन मन्त्र

    | मन्त्र॥

    ‘दीन दयाल बिरिदु सम्भारी।

    हरहु नाथ मम संकट भारी॥'

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    रक्त चन्दन की माला पर १०००० बार इस मन्त्रका जप करें और २१ दिन तक निरन्तर इस क्रिया कोकरते रहें। इस प्रकार से अति विकट संकट भीश्रीरामजी की कृपा से टल जाते हैं।

    ११. विष्ननाशक गणेश मन्त्र

    || मन्त्र॥

    "जेही सुमिरत सिधि होई
    गननायक करिबर बदन।
    करउ अनुग्रह  सोई
    बुद्धिरासी सुभ गुन सदन॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ
    सर्वप्रथम गणेशजी को सिन्दूर का चोला चढ़ायेंऔर फिर रक्त चन्दन की माला पर प्रात:काल केसमय १०८ x १०=१०८० बार इस मन्त्र का पाठकरें। यह प्रयोग ४० दिन तक करते रहें तो प्रयोगकर्ता के सभी विष्नों का अन्त होकर गणेशजी काअनुग्रह प्राप्त होता है।

    १२. क्लेशांतक मर्यादा रक्षक मंत्र|| मन्त्र॥

    ‘हरन कठिन कलि कलुष कलेसू।
    महामोह निसि दलन दिनेसू॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    रुद्राक्ष की माला पर १००० बार प्रतिदिन जपकरते हुए ४० दिन में इस क्रिया को करते हुए इसेसिद्ध कर लें। जब भी आवश्यकता हो इस मन्त्र के१०८ पाठ कर लें।

    इस मन्त्र के प्रयोग से समस्त कलेशों का नाश होजाता है और मर्यादा की रक्षा होती है।

    १३. अपनी रक्षा के लिए मन्त्र

    | मन्त्र॥

    "मामभिरक्षय रघुकुल नायक।ध्ृतबरचाप रुचिकर सायक॥मोरे हित हरि सम नहीं कोऊ।ऐहि अवसर सहाय सोइ होऊ॥"

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    राम नवमी से प्रतिदिन १००० बार इस मन्त्र कोरुद्राक्ष की माला के ऊपर जपते हुए ४० दिन पूर्णकरें। इसके बाद जब भी आवश्यकता हो इस मन्त्र कोसात बार जपकर अपने चारों तरफ एक रेखा खींच लेंतो किसी भी अज्ञात शक्ति या अला-बला से रक्षाहोती है।

१४. विपत्ति नाशक सुख प्राप्ति का मन्त्र

    | मन्त्र॥

    ‘राजिव नयन धरें धनुसायक।
भगति बिपति भंजन सुखदायक॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    रुद्राक्ष की माला पर शनिवार से प्रारम्भ करके५०० जप प्रतिदिन करें और ४० दिन तक करते रहें।

    इस मन्त्र के प्रयोग से समस्त विपत्तियों का अन्तहोकर सुख प्राप्त होता है।

    १५. रोग नाशक मन्त्र

    | मन्त्र॥

    "दैहिक दैविक भौतिक तापा।
    राम राज नहिं काहुहिं ब्यापा॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभकिसी ग्रहणकाल में इस मन्त्र को निरंतर जपकर

    अपने अनुकूल कर लें। इसके बाद जब भी आवश्यकताहो एक काँसे की कटोरी में जल भरकर इस मन्त्र कोसात बार पढ़ करके जल में फूँक मारें और रोगी कोपिला दें।

    श्री राम जी की कृपा से इस मन्त्र के प्रयोग सेसभी रोगादि का अन्त हो जाता है।

    १६. भूत भगाने का मन्त्र

    || मन्त्र॥

    "हनुमान अंगद रन गाजे।
     हाँक सुनत रजनीचर भाजे॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    किसी ग्रहण काल में पूरे ग्रहण समय में चौराहेपर बैठकर इस मन्त्र को लगातार जपें और जबआवश्यकता हो तब प्रयोग करें।

    ताँबे की कटोरी में जल भर करके इस मन्त्र से२१ बार अभिमन्त्रित करके रोगी को पिला दें या बाधाग्रस्त गृह के चारों तरफ छिड़क दें तो सर्व सुख होताहै।

    इस मन्त्र के प्रयोग से भूत प्रेतादि पलायन करजाते हैं और देह की पीड़ा भी शान्त हो जाती है।

    १७. शत्रु को स्तम्भित करने का मन्त्र|| मन्त्र॥

    ‘बयरु न कर काहू सन कोई।राम प्रताप विषमता खोई॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    अनुष्ठान शनिवार से प्रतिदिन १००० बार करते हुए११ दिन तक करें।जब अत्यधिक शत्रु बढ़ जायें तब इस मन्त्र का

    इस मन्त्र के प्रयोग से शत्रु तथा शत्रुता का स्तम्भनकिया जाता है।

    १८. विघ्न दूर करने का मन्त्र

    || मन्त्र

    "सकल विघ्न ब्यापहिं नहिं ताही।
    राम सुकृपा बिलोकहिं जाही॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    लाल रंग का वस्त्र दोनों कंधों पर रखकर इसमन्त्र का जप करें। इस कम-से-कम १०८ बार नित्यपढ़ते हुए ४० दिन पूर्ण करें। ४१वें दिन इस वस्त्र कीदो पताकायें बनाकर ब्रह्म वृक्ष की जड़ के पास लगाआयें।

    श्री राम जी की कृपा के फलस्वरूप इस मन्त्र केप्रयोग से सभी विष्न-बाधायें समाप्त हो जाती हैं।

    १९. शोक (दुःख) नाशक मन्त्र

    || मन्त्र॥

    "जब तें रामु ब्याहि घर आए।

   नित नव मंगल मोद बधाए॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    शनिवार की रात्रि को इस मन्त्र के १०,००० पाठकरें तो शोकादि का अन्त हो जाता है।

    २०. महामारी भगाने का मन्त्र|| मन्त्र॥

    जय रघुवंस बनज बन भानु।

गहन दनुज कुल दहन कुसानू॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    शनिवार की संध्या को नदी के किनारे कडुवे तेलका दीप जलाकर बैठे और नौ शनिवारों तक बिनानागा इस मन्त्र को अधिक-से-अधिक बार जपें।

    महामारी के दिनों में नित्य १००० बार इस मन्त्रका जप करें तो लाभ होगा।

    पीली सरसों को इस मन्त्र से १०८ बार अभिमन्त्रितकरके उस क्षेत्र में छिड़क देने से रोगादि स्तम्भित रहतेहैं।

    २१. अकाल मृत्यु नाशक मन्त्र

    || मन्त्र॥

नाम पाहरू दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट।

लोचन निज पद जंत्रिलजाहिं प्रान केहिं बाट॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और, लाभ

    शनिवार को ब्रह्म वृक्ष के नीचे बैठकर इस मन्त्र के१००० जप करके इस अनुष्ठान का शुभारम्भ करें और फिर४० दिन तक नित्य इसी मन्त्र के १००० जप करते रहें। जपकाल के प्रत्येक शनिवार को ब्रह्म वृक्ष को जल चढ़ायें,मंगलवार को बन्दरों को चना व गुड़ प्रदान करें, गुरुवार कोकोढ़ियों को ईख के रस से बनी खीर प्रदान करें।

    इस प्रकार से मन्त्र के प्रभाव द्वारा अकाल मृत्यु काभय जाता रहता है।


२२. नजर (लगी) दूर करने का मन्त्र|| 

          मन्त्र

    ‘‘स्याम गौर सुन्दर दोउ जोरी।

    निरखहिं छबि जननीं तृन तोरी॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    मंगलवार युक्त पुष्य नक्षत्र वाले दिन किसी नीमके वृक्ष के नीचे बैठकर इस मन्त्र के १०००० जपकरके सिद्ध कर लें और जब नजर झोड़नी हो तो नीमके पत्ते लेकर सात बार इस मन्त्र को पढ़ते.हुए झाड़ाकर दें।

२३. स्मरणशक्त बढ़ाने का मन्त्र

    || मन्त्र॥

    गई बहोर गरीब नेवाजू।

सरल सबल साहिब रघुराजु ॥"

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    जब भी आवश्यकता हो इस मन्त्र के १००० जपकमल गट्टे की माला के ऊपर करें। इस प्रकार जपपूरे हो जाने पर भूली हुई बात या भूली हुई वस्तु स्मरणआ जाती है। स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए यह मन्त्रउत्तम है। प्रतिदिन १०१ जप करते रहें तो स्मरणशक्ति तीव्र बनी रहती है।

२४. रोजगार पाने का मत्त्र

    || मन्त्र

"बिस्व भर पोषन कर जोई। 

ताकर नाम भरत अस होई॥

 गई बहोर गरीब नेवाजू।

सरल सबल साहिब रघुराजू ॥"

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    इस मन्त्र को १००० बार प्रतिदिन जपते हुए ४दिन पूर्ण करें। ४०वें दिन राम पञ्चदशी यन्त्र बनाकधारण कर लें।

    इस मन्त्र का प्रयोग रोजी-रोजगार की प्राप्त केलिए किया जाता है।

    २५. दरि्द्रता नाशक मन्त्र

    || मन्त्र॥

    "अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के।

    कामद घन दारिद दवारि के॥"

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    शुक्रवार वाले दिन से स्फटिक की माला पर१००० जप करें और ४० दिन इसी भाँति करता रहे।४१वें दिन रामायण का अखण्ड पाठ करायें तो दारिद्रियका विनाश तथा लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। 

२६. पुत्र प्राप्ति का मन्त्र| 

   मन्त्र॥

 "प्रेम मग्न कौसल्या निसिदिन जात न जान।

    सुत सनेह बस माता बालचरित कर गान॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    पुत्रजीवक के बीजों की माला लेकर सोमवार मेइस मन्त्र को १०००० बार प्रतिदिन जपे और ‘स्वरोदयविज्ञान' में गर्भ सम्बन्धी कही गई बातों के अनुसारपत्नी सेवन करे तो निश्चय ही गर्भ की स्थापना होजाती है।

२७. हनुमानजी से कार्य करवाने का मन्त्र

    || मन्त्र

    "कवन सो काज कठिन जग माहीं।

    जो नहिं होई तात तुम पाहीं॥"

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    मंगलवार के दिन हनुमानजी को सिन्दूर का चोलाचढ़ाकर इस मन्त्र के १०००० जप करें।

    इस प्रकार मन्त्र के प्रयोग द्वारा हनुमान जी कोअपना कार्य कराने के लिए प्रेरित किया जाता है।

२८. विद्या प्राप्ति का मन्त्र| मन्त्र॥

    ‘गुरु गृह गए पढ़न रघुराई।

     अलप काल विद्या सब आई॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    काँसे की कटोरी में केशर की स्याही से इस मन्त्रको लिखकर अपने समक्ष रख लें। रुद्राक्ष की मालापर १०८ बार इस मन्त्र को पढ़े और फिर कटोरी मेंदूध डालकर मीठा मिलायें और विद्यार्थी को पिला दें।इस क्रिया को २१ दिन तक करना चाहिए।।

इस मन्त्र के प्रयोग से विद्या प्राप्ति होती है। 

 २९. अपराध क्षमापन का मन्त्र

    || मन्त्र

    "अनुचित बहुत कहेउँ अग्याता।

       छमहु छमा मंदिर दोउ भ्राता॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    गुरुवार वाले दिन से पीले चन्दन की माला परइस मन्त्र को १००० बार प्रतिदिन पढ़ें और ४० दिनतक पढ़ते रहें। ४१वें दिन रामायण का पाठ करकेअपने पहने हुए वस्त्रों का दान कर दें।

    इस प्रकार से मन्त्र के प्रयोग से अपराध क्षमाकरवाया जाता है।

    ३०. वृष्टि कारक व रोगनाशक मन्त्र|| मन्त्र॥

 ‘‘सोइ जल अनल संघाता।

होइ जलद जग जीवनदाता॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    इस मन्त्र को प्रतिदिन एक सौ आठ बार जपतेहुए ९० दिन पूर्ण करें। जब वर्षा करवानी हो तब जलके मध्य खड़़े होकर १०००० जप करें और आकाशकी तरफ जल के छींटे दें।

    रोग नाश के लिए काँसे की कटोरी में जलभरकर इस मन्त्र से १०८ बार शक्तिकृत करकेअभिमन्त्रित जल रोगी को पिला दें।

    ३१. विष नाशक मन्त्र

    ॥| मन्त्र॥

    "नाम प्रताप जान सिब नीको।

    कालकूट फल दान अभी को॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    शिवरात्रि के दिन से १००० बार प्रतिदिन जपतेहुए अगली शिवरात्रि आने दें। अब जब भी आवश्यकताहो कुश लेकर दंशित स्थान से इस मन्त्र को पढ़ते हुएधरती पर झाड़ दें। इस प्रकार मन्त्र के प्रयोग से विषनाश होता है।

    ३२. सुख समृद्धि पाने का मन्त्र

    || मन्त्र॥

    "जे सकाम नर सुनहिं जे गावहिं।

     सुख सम्पति नानाविध पावहिं॥"

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    शुक्रवार वाले दिन से २१ दिन तक १००० मत्रप्रति दिवस पढ़े और राम दरबार के प्रतिदिन दर्शनकरे। राम नवमी वाले दिन राम बीसा लिखकर यहीमन्त्र पढ़ते हुए धारण कर ले। इस प्रकार से उक्त मन्त्र के प्रयोग से सुख समृद्धबढ़ती है।

३३. शत्रु को मित्र बनाने का मन्त्र||

 मन्त्र

 "गरल सुधा रिपु करहिं मिताई।

गोपद सिन्धु अनल सितलाई ॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    नवरात्रि के पवित्र समय पर इस मन्त्र को १०००बार प्रतिदिन जपें। जब आवश्यकता हो इस मन्त्र सेशक्तिकृत करके गोरोचन का टीका लगा लें। तोकिसी भी कार्य से शत्रु के समक्ष जायें तो वह मित्रवतबन जाता है।

    ३४. प्रेम बढ़ाने का मन्त्र

    || मन्त्र॥

    ‘सब नर करहिं परस्पर प्रीति।चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीति॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    चमेली की जड़ से दाने बनाकर एक माला बनायें।इस माला पर इस मन्त्र के १०००० जप एक ही बारकरें। इसके बाद प्रतिदिन स्नान के बाद थोड़ा जल इसमन्त्र से अभिमन्त्रित करके अपने ऊपर छिड़क लें।इस प्रकार से उक्त मन्त्र के प्रयोग से परस्पर स्नेहबढ़ता है।

    ३५. कार्य सिद्धि का मन्त्र

    | मन्त्र॥

    "स्वयं सिद्ध सब काजनाथ मोहि आदरु दियउ।

    असबिचारि जुवराजतन पुलकित हरषित हियउ॥वह सोभा समाज सुख कहत न बनइ खगेश।बरनहिं सारद सेष श्रुति सो रस जान महेस॥सुनिअ देव सचराचर स्वामी।

    प्रनतपाल उर अन्तरजामी॥

    मोर मनोरथ जानहु नीकें।

    बसहु सदा उर पुर सबही के ॥"

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    रुद्राक्ष की माला पर १००० मन्त्र प्रतिदिन जपें।४०दिन तक जप करके सत्य नारायण की कथा करवायें।इस मन्त्र के प्रयोग से समस्त कार्य सिद्ध हो जाते हैं।

    ३६. यात्रा की सफलता का मन्त्र

    || मन्त्र

    ‘‘प्रबिसि नगर कीजे सब काजा।हृदयँ राखि कौसलपुर राजा॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    सर्वप्रथम इस मन्त्र को १०००० बार जपकरसिद्ध कर लें। इसके बाद जब भी आवश्यकता होथोड़ा सा जल इस मन्त्र से सात बार शक्तिकृत करकेअपने आगे तथा अपने ऊपर छिड़क लें। इस प्रकारसे प्रयोग करके आप जिस उद्देश्य से भी यात्रा केलिए जायेंगे, सफलता मिलेगी।

    ३७. उपद्रव शान्त करने का मन्त्र

    || मन्त्र

    "कहई रीछपति सुनु हनुमाना॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    इस मन्त्र से प्रारम्भ करके आगामी चौपाइयों कापाठ करते हुए सुन्दर काण्ड का पाठ करें। इस प्रयोगको ११ बार एक ही दिन में करे। मंगलवार को कियागया प्रयोग मारुति की प्रसन्नता दिलाता है। शनिवारको किया गया प्रयोग उपद्रव शान्त करता है।

    इस मन्त्र के प्रयोग से मारुति की प्रसन्नता प्राप्तहोती है तथा समस्त उपद्रव शान्त हो जाते हैं।

    ३९. संकट टालने का मन्त्र

    || मन्त्र

    "जो प्रभु दीनदयाल कहावा।आरति हरन बेद जस गावा॥जपहिं नामु जन आरत भारी।मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी॥दीनदयाल बिरद सम्भारी।हरहु नाथ मम संकट भारी॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    प्रभु राम की प्रतिमा के समक्ष लाल कम्बल केआसन पर बैठकर रात भर इस मन्त्र का नियमित जापकिया जाये तो इस मन्त्र के प्रयोग से संकटादि काअन्त हो जाता है। 

४०. उत्सव करवाने का मन्त्र

    | मन्त्र|

    "सिय रघुबीर बिबाह जे  

      सप्रेम गावहिं सुनहिं।

     तिन्ह कहुँ सदा उछाहु

    मंगलायतन राम जसु॥"

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    उत्तराभिमुखी होकर रुद्राक्ष की माला पर १०००मन्त्र प्रतिदिन जपे और इस क्रिया को नित्य करते हुए४० दिन पूर्ण करे। इसके बाद १०८ बार जप करनेसे भी कार्य पूर्ण होगा।

    इस मन्त्र के प्रयोग से घर में उत्सवादि के अवसरप्रस्तुत हो जाते हैं।

 ४१. मोहिनी मन्त्र

    | मन्त्र॥"

करतल बान धनुष अति सोहा।

देखत रूप चराचर मोहा॥

 मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    सीताजी की प्रतिमा के समक्ष शुद्ध सिन्दूर लेकरबैठ जायें और इस मन्त्र के १०००० जप करें। जबआवश्यकता हो तब इस सिन्दूर को सात बार इस मन्त्रसे फूँककर भाल पर टीका लगा लें।

    इस मन्त्र को मोहिनी मन्त्र के रूप में प्रयोग कियाजाता है।

    ४२. धन प्राप्ति का मन्त्र

    | मन्त्र॥

    "जिमि सरिता सागर महुँ जाहीं।जद्यपि ताहि कामना नाहीं॥तिमि सुख सम्पति बिनहिं बोलाएँ।धरमशील पहिं जाहिं सुभाएँ॥"

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    १०८ कमल गट्टे ले लें। बृहस्पतिवार की प्रातःअपने समक्ष एक कमल गट्टा रखकर इस मन्त्र के १०८जप करें। इसके बाद कमलगट्टे को रक्त वस्त्र में छुपा लें।दूसरे दिन दूसरा कमलगट्टा लेकर पुनः उपरोक्त क्रियाकरें और उसी रक्त वस्त्र में दूसरा कमलगट्टा भी छुपा लें।इसी भाँति से १०८ दिन तक करते रहें। इस रक्त वस्त्र मेंजब सभी कमलगट्टे छुपा लें तो इसे थैली सी बनाकरसिल लें। धूप दीप करके श्रीसूक्तम् का पाठ करके यालक्ष्मी सहस्त्रनाम का पाठ करके धन स्थान में इस थैलीको रख दें। इस मन्त्र के प्रभाव से सुख-सुविधा और धनकी प्राप्ति होती है।

    ४३. शत्रु परास्त करने का मन्त्र

    || मन्त्र

 "कर सारंग साजि कटि भाथा।

अरि दल दलन चले रघुनाथा॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    किसी पवित्र स्थान पर प्रभु श्री राम की प्रतिमादेखकर इस अनुष्ठान का शुभारम्भ करें।

    एक कमलगट्टा लेकर प्रतिमा के पास जाये औरउनके पाँव में इसे रखकर इस मन्त्र के १००० पाठकरें। पाठ के पश्चात् कमलगट्टा उठा लायें औरकहीं छुपा लें। दूसरे दिन दूसरा कमलगट्टा लेकरपुनः उपरोक्त क्रिया करें और उसी कमलगट्टे केसाथ इस कमलगट्टे को रखकर छुपा लें। इसी भाँति४० दिन करना होगा।इस अंनुष्ठान की समाप्ति पर आपके पास ४०  कमलगट्टे एकत्र हो जायेंगे। इन्हें एकान्त में पीस लेंऔर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में अपनी कनिष्ठा कारक्त और चमेली की जड़ का अर्क मिलाकर पुनःएक बटिका बनाकर केले के पत्ते की छाया में सुखालें। सुखाने के पहले इसमें आरपार एक छिद्र कर लें।

जब यह बटिका सूख जाए तो काले सूत में डालकर कण्ठ में धारण कर लें। उक्त मन्त्र को जप कर शत्रु के समक्ष जायें। इस प्रकार से शत्रु को परास्त किया जाता है।

    ४४. मन की शुद्धि का मन्त्र

    || मन्त्र॥

    ‘ताके जुग पद कमल मनावउँ।

    जासु कृपा निरमल मति पावउँ॥"

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    इस मन्त्र को १००० बार प्रतिदिन जपते हुए ५१दिन में अनुष्ठान की समाप्ति करें

    इस मन्त्र के प्रयोग से मन की शुद्धि होती है।अर्थात् मन अन्यत्र भटकता हो और इच्छित काम मेंमन न लगता हो तो इस मन्त्र के प्रभाव से मन कीएकाग्रता बनती है।

    ४५. अनुभूति करने कामन्त्र

    || मन्त्र॥

    ‘‘मोरे हित हरि सम नहिं कोऊ।एहि अवसर सहाय सोइ होऊ॥"

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    प्रभु कृपा के लिए एकाग्रता आवश्यक है अतःतन मन को प्रभु राम में जोड़ करके इस मन्त्र केलगातार जप करते रहें। जप काल में जैसी अनुभूतिहो वैसा ही करके लाभ उठायें।

    जब कोई भी उपाय लाभान्वित न कर रहा हो औरप्राण या मान संकट में हो तब इस मन्त्र का प्रयोगकरते हैं।

    ४६. हनुमत-प्रसन्नता का मन्त्र

    | मन्त्र॥

 ‘सुमिरि पवनसुत पावन नामू।

अपने बस करि राखे रामू॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    मंगलवार वाले दिन हनुमानजी को सिन्दूर काचोला चढ़ायें और पूजा प्रदान करें। स्वयं रक्त वस्त्रधारण करके रक्त कम्बल पर बैठकर रक्त चन्दन कीमाला पर १०००० जप करें।

    प्रसन्न किया जाता है।इस मन्त्र के प्रयोग से पवनपुत्र हनुमानजी को

    ४७. मोक्ष प्रदायक मन्त्र

    | मन्त्र॥

  ‘सत्य सिंधु छोड़े सर लच्छा।

  काल सर्प जानु चले सपच्छा॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभश्रावण मास के प्रारम्भ में एक-एक रुद्राक्ष कोप्रतिदिन १०८ बार इस मन्त्र से शक्तिकृत कर लें। इसभाँति १०८ दिनों में माला के सभी दाने शक्तिकृत होजायेंगे। दशहरे वाले दिन इस मन्त्र को जपते हुए उनदानों को लाल सूत में पिरो लें। प्रत्येक दाने के बादढाई गाँठ लगेगी। इस गाँठ को भी इस मन्त्र सेशक्तिकृत करें।

    दीपावली वाले दिन इस माला की पूजा करकेमाला के ऊपर इस मन्त्र के १०००० जप कर लें औरकण्ठ में धारण कर लें।

    यह प्रयोग अकाल मृत्यु निवारक तथा मोक्ष पदका दाता है।

    ४८. श्री जानकी प्रसन्नता का मन्त्र

    || मन्त्र

    "जनक सुता जग जननि जानकी।अतिसय प्रिय करुना निधान की॥"

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    नवरात्रि के शुभारम्भ पर हनुमानजी के माथे सेसिन्दूर लेकर सीताजी के चरणों में लगाये और इसमन्त्र के ५००० जप करें। नवरात्रि के नवों दिन इसमन्त्र के ५००० जप करते रहें।

    इस मन्त्र के प्रयोग से सीता जी की प्रसन्नताप्राप्त की जाती है।

    ४९. शरीर स्वस्थ रखने का मन्त्र

    | मन्त्र

    ‘त्रिविध दोष दुःख दारिद दावन।कलि कुचालि कलि कलुष नसावन॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    सर्वप्रथम शिवरात्रि के अवसर पर इसे एक लाखबार जप लें। इसके बाद जब भी आवश्यकता हो काँसे की कटोरी में जल भर करके इस मन्त्र से १०८ बार फूँक मारकर रोगी को पिला दें।

    इस मन्त्र के प्रयोग से देह को स्वस्थ किया जाता। श्री राम कृपा से सभी प्रकार के देह दोषों पर इसका सफल प्रयोग किया जाता है।

    ५०. ज्वर उतारने का मन्त्र|| मन्त्र

    "सुनु खगपति यह कथा पावनी।

    त्रिविध ताप भव भय दावनी॥'

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभरहेगी।इसकी जप विधि मन्त्र संख्या ४९ की भाँति ही

    इस मन्त्र के प्रयोग से तीन तरह के ज्वर औरतिजारी ज्वर तो विशेष ही ठीक हो जाता है।

    ५१. उपद्रव नाशक (गंगा) मन्त्र

    | मन्त्र॥

    ‘गंग सकल मुद मंगल मूला।

   सब सुख करनि हरनि सब सूला॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    गंगा घाट पर इस मन्त्र के १०००० जप करें। तबगंगा जली में जल भरकर घर ले जायें। १०८ बार इसमन्त्र के जप कर गंगा जल के घर में छींटे सारे घरमें मारें तो सभी उपद्रव शांत हो जाते हैं।

    इस मन्त्र के प्रयोग से गंगा जी को प्रसन्न कियाजाता है।

    ५२. संकट में रक्षा का मन्त्र

    || मन्त्र॥

    "पाहि पाहि रघुबीर गोसाई।

    यह खल खाई काल की नाई॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    रुद्राक्ष की माला पर पूर्वाभिमुखी होकर इस मन्त्रके १००० जप करें।

    इस मन्त्र के प्रयोग से संकट में रक्षा होती है।

    ५३. भक्ति भावना बढ़ाने का मन्त्र

    || मन्त्र॥

    "सीताराम चरन रति मोरे।

    अनुदिन बढ़उ अनुग्रह तोरे॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    इस मन्त्र को प्रतिदिन निद्रा त्यागते ही १०८ बारपढ़ना चाहिए।

    इस मन्त्र के प्रयोग से श्रीराम-जानकी के प्रतिभक्ति भावना सुदढ हो जाती है। 

५४. मनोवांछित फल की प्राप्ति का मन्त्र

    | मन्त्र॥

‘सुनहु देव सचराचर स्वामी।

प्रनतपाल उर अन्तरजामी॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    प्रभु से कुछ भी निवेदन करने. से पहले यह मन्त्र१०८ बार जप लेना चाहिए।

    इस मन्त्र के प्रयोग से मनोवांछित फल की प्राप्तिहोती है।

    ५५. सामाजिक यश (सुख) का मन्त्र

    || मन्त्र

    ‘सुनि समुझहिं जन मुदित,मन मञ्जहिं अति अनुराग।लहहिं चारि फल अछत,

    तनु साधु समाज प्रयाग॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    प्रतिदिन स्फटिक की माला पर १००० मन्त्रों काजाप करें। इस क्रिया को ९० दिन तक करें और ९१वेंदिन कोढ़ियों को खिचड़ी खिलायें।

    इस मन्त्र के प्रयोग से देह का सुख, साधुओं कीकृपा, समाज का सहयोग तथा प्रयाग स्नान का फलप्राप्त होता है।

    ५६. अन्तर्मन जाग्रत करने का मन्त्र

    | मन्त्र॥

    ‘होय विवेक, मोह भ्रम भागा।तब रघुनाथ चरण अनुरागा॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ


    कुश की जड़़ की गाँठ से माला बना करकेप्रतिदिन १००० मन्त्रों का जाप करें।


    इस मन्त्र के प्रयोग से मोह, भ्रमादि का अन्तहोकर अन्तर्मन जाग जाता है।


५७. भाग्य जगाने का मन्त्र


    | मन्त्र|


‘मन्त्र महामुनि विषय ब्याल के।


मेटत कठिन कुअंक भाल के॥"


    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ


    हल्दी की गाँठों की माला बना करके इस मन्त्रके १००० जप नित्यप्रति ६ मास तक करते रहने सेभाग्य अनुकूल हो जाता है।


 इस मन्त्र के प्रयोग से भाग्य की विडम्बनाओं कानाश किया जाता है।

    ५८. रोग मिटाने का ‘राम' मन्तर

    | मन्त्र॥

    ‘राम कृपाँ नासहिं सब रोगा।जौं एहि भाँति बने संजोगा॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    केशर की स्याही से कागज के ऊपर ‘राम शब्दलिखकर उपरोक्त मन्त्र पढ़े। पुनः ‘राम' शब्द लिखेंऔर फिर उपरोक्त मन्त्र पढ़े। यही क्रिया १०००० बारकरें।


    जब आवश्यकता हो कागज के ऊपर ‘राम' शब्दलिखकर उपरोक्त मन्त्र पढ़े। इस भाँति सात बारकरके कागज को जल में घोलकर पानी रोगी कोपिला दें। कितना ही असाध्य और पुराना रोगी भी इसप्रकार से स्वस्थ हो जाता हैl

५९, परिवार प्रेम बढ़ाने का मन्त्र

    || मंत्र |

    "जेहि के जेहि पर सत्य सनेहू।

     सो तेहि मिलइ न कछु सन्देहू ॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    शुक्रवार बाले दिन से स्फटिक की माला पर१००० मन्त्र प्रतिदिन जपते हुए ५१ दिन पूर्ण करें।इसके पश्चात् यदि संभव हो तो इस मन्त्र के १०८जप नित्य प्रति करते रहें।

    इस प्रकार से कुटुम्ब में प्रेम बढ़ता है और स्पप्ट है कि पूरे परिवार में प्रेम व एकता होगी तो संसार काकोई भी कार्य सरलता से होता है।

    ६०. तत्व ज्ञान पाने का मन्त्र

    || मन्त्र॥

    "छिति जल पावक गगन समीरा।पंच रचित अति अधम सरीरा॥"

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

 इस मन्त्र के १००० जप कुश की माली परप्रतिदिन करते हुए २१ दिन व्यतीत करें। २१वें दिनबरगद को जल चढ़ाकर धूप दीप करके एक नारियलजल में प्रवाहित कर दें।

    इस मन्त्र के प्रयोग से पंच तत्त्वों का ज्ञान स्पष्टहो जाता है।

६१. वशीकरण का मन्त्र

    || मन्त्र|

    ‘‘जन मन मंजुल मुकुर मल हरनी।

    कियें तिलक गुन गन बस करनी॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    किसी ग्रहण काल के पूर्ण समय में इस मन्त्र के

   लगातार जप करते रहें और जब आवश्यकता हो तबगोरोचन को घिस करके इस मन्त्र से सात बार शक्तिकृतकरके माथे में टीका लगा लें।

    स्त्री अपने पति को वशीभूत करने के लिए छुहारेकी गुठली को घिसकर यह मन्त्र पढ़ते हुये प्रातःकाल के समय माथे में बिंदी लगाकर सोते हुये पतिको हँसते हुये जगाये। इस प्रकार मन्त्र के प्रयोग सेवशीकरण होता है। 

६२. सकल मनोरथ सिद्धि मन्त्र| मन्त्र॥

    "भव भेषज रघुनाथ जसुसुनहिं जे नर अरु नारि।तिन्ह कर सकल मनोरथसिद्ध करहिं त्रिपुरारि॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    मेरी पुस्तक ‘मन्त्र रहस्य' में माला सम्बन्धी विवरणके अनुसार जैसी अभिलाषा हो वैसी ही माला लेकरके उसके ऊपर इस मन्त्र के ५०० जप नित्य करतेहुए ३१ दिन व्यतीत करें। जब आवश्यकता हो तबपान या इलायची को इस मन्त्र से शक्तिकृत करकेउस व्यक्ति को खिलायें, जिससे कार्य करवाना हो।

    इस मन्त्र के प्रयोग से सकल मनोरथ सिद्ध होते हैंl

    ६३. सभा में सम्मान पाने का मन्त्र

    | मन्त्र॥

    "तेहिं अवसर सुनि सिवधनु भंगा।

    आयउ भृगु कुल कमल पतंगा॥"

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    शनिवार वाले दिन चौराहे में बैठकर इस मन्त्र के१०००० जप करें और जब आवश्यकता हो तब इसमन्त्र को सात बार पढ़कर सभा की तरफ फूँक मारदें।

    इस मन्त्र के प्रयोग से सभा का स्तम्भन कियाजाता है तथा इससे आपके सम्मान में वृद्धि होगी।

 ६४. निन्दा रोकने का मन्त्र

|| मन्त्र॥

 "राम कृपाँ अवरेब सुधारि।

बिबुध धारि भई गुनद गोहारी॥"

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    सफेद चौंटली की माला पर नित्य १०८ बार इसमन्त्र के पाठ करते रहने से निंदा करने वालों की जिह्नासाधक के विपक्ष में शब्दोच्चारण नहीं करती।इस मन्त्र के प्रयोग से निंदा करने वालों कास्तम्भन किया जाता है। 

६५. संशय निवारण का मन्त्र| 

मन्त्र॥

 ‘‘रामकथा सुन्दर करतारी।

संसय बिहग उड़ावनहारी॥

 मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    रामनवमी के दिन रामायण को अपने समक्ष किसीआधार पर स्थापित करके पूजन करें और फिर इसमन्त्र के ५००० जप करें।

    इस मन्त्र के प्रयोग से प्रभु राम की कृपा से मनमें उत्पन्न हुआ संशय समाप्त हो जाता है।

    ६६. सीता जी से कृपा पाने का मन्त्र

    | मन्त्र॥"

नील सरोरुह नील मनि

नील नीरधर स्याम।

लाजहिं तन सोभा निरखि

कोटि कोटि सत काम॥"

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    नवरात्रि के प्रारम्भ में राम पूजन करके सीताजीकी पूजा करें। इसके बाद इस मन्त्र के १००० जपकरें। दूसरे दिन २००० जप करें। इसी भाँति प्रतिदिन१००० जप बढ़ाते हुए नवमी को ९००० जप करें।

    इस मन्त्र के प्रयोग से देवी सीता को प्रसन्न कियाजाता है और उनकी कृपा से आप श्रीराम से कार्यसिद्धि करा लेंगे।

६७ आकर्षित करने का मन्त्र

    || मन्त्र॥"

रंगभूमि जब सिय पगु धारी।

देखि रूप मोहे नर नारी॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    नवरात्रि के नौ दिनों में प्रतिदिन इस मन्त्र के११०० जप करें। जब किसी को आकर्षित करना होतब इस मन्त्र को १०८ बार पढ़कर गोरोचन का टीकालगा लें।इस मन्त्र के प्रयोग से वशीकरण होता है। 

 ६८. प्रभु दर्शन का मन्त्र

    | मन्त्र॥

“भगत बछल प्रभु कृपा निधाना।

बिस्वास प्रगटे भगवाना॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाए

    रामनवमी वाले दिन किसी वट वृक्ष के नीचे बैठकरके इस मन्त्र के १०००० जप करें। इसके बादप्रतिदिन इस मन्त्र के १००० जप तब तक करते रहें।जब तक कि दर्शन सुलभ न हो जायेंl

    इस मन्त्र के प्रयोग से प्रभु दर्शन की प्राप्ति कीजाती है।

६९. श्री पार्वती प्रसन्नता का मन्त्र|

| मन्त्र॥

    “जय जय गिरिबर राज किशोरी।

    जय महेस मुख चंद चकोरी॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    इस मन्त्र को शरद नवरात्रि में पार्वती देवी केसमक्ष अखण्ड दीपदान करके प्रात:काल के समय५००० की संख्या में जपे। इसके बाद प्रतिदिन पूजनकरते हुए १००० मन्त्र जपते रहें। नवमी वाले दिन१०००० जप करके ध्यान मग्न हो जायें।इस मन्त्र के प्रयोग से पार्वती देवी को प्रसन्नकिया जाता है।

    ७०. नवग्रह शांति (दुर्भाग्य नाशक) मन्त्र

    || मन्त्र॥

    "मोहि अनुचर कर केतिक बाता।

     तेहि महँ कुसमउ बाम बिधाता॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाए

    रामनवमी वाले दिन रुद्राक्ष की माला पर ११००जप नित्य करते हुए ४० दिन पूर्ण करें। ४१वें दिनअखण्ड रामायण का पाठ करवायें और गरीबों कोभोजन करवाकर वस्त्र दान करें।

    इस मन्त्र के प्रयोग से दुर्भाग्य को सौभाग्य मेंबदल जाता है, नवग्रह क्षति नहीं पहुँचाते और प्रभुकृपा की प्राप्ति हो जाती है।

    ७१. प्रभुदर्शनपाने कामन्त्र

    || मन्त्र

 "हमहि अगम अति दरसु तुम्हारा।

जस मरुधरनि देवधुनि धारा॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    रामनवमी के दिन प्रभु श्रीराम को पूजा दे आयेंऔर रुद्राक्ष की माला पर इस मन्त्र के २००० जपनित्य करें। इस अनुष्ठान को कम से कम ५१ दिनतक नियमित करते रहें। इस काल में दर्शन हो जायेंतो उचित अन्यथा ५१वें दिन निरन्तर जप तब तककरते रहें जब तक प्रभु राम का अनुग्रह प्राप्त न होजाए।

    जब निश्चय ही प्रभु दर्शन करना हो तब इस मन्रका अनुष्ठान करें। सफलता अवश्य मिलती है।

    ७२. समाज सेवा का मन्त्र

    | मन्त्र॥

    ‘‘नाथ! लोग सब निपट दुखारी॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभअखण्ड रामायण का पाठ हो रहा हो तो मूर्तियोंके समक्ष बैठकर इस मन्त्र का तब तक जप करें जबतक कि पाठ का समापन न हो जाये।

 इसके प्रभावसे वहाँ ठपस्थित जन समुदाय को प्रसन्नता प्राप्त होतीहै।

इस मन्त्र का प्रयोग समाज के हित में किया जाता है।

     ७३. श्रीराम कृपा पाने का मन्त्र

    | मन्त्र॥

    ‘नाथ! सकल सम्पदा तुम्हारी।

    मैं सेवक समेत सुत नारी।

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    यह अत्यधिक सरल प्रयोग है। प्रभु राम का नित्यपूजन करके इस मन्त्र के १०८ जप प्रतिदिन करतेरहें।

    निष्काम भावना वाले पूजन में गृहस्थी साधकोंको यह मन्त्र अधिक लाभदायक प्रमाणित हुआ है।आप जानते हैं कि 'बिन माँगे मोती मिले' अतः इसमन्त्र के प्रयोग से ऐसा क्या है जो प्रभु श्रीराम प्रसादरूप में प्रदान नहीं करते। अर्थात् श्री राम कृपा प्राप्तहुई तो सब कुछ प्राप्त हो जाया करता है। 

७४. भाग्य परिवर्तन करने का मन्त्र

    || मन्त्र

    "मोर अभाग उदधि अवगाहू॥”

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    जब किसी को प्रतीत हो कि उसका भाग्य उसेअवनति के गहरे अंधेरों में विलीन कर देना चाहता है।तो वह इस मन्त्र को ५००० की संख्या में नित्य जपतेहुए ३१ दिन में पूर्ण करें।

    इस मन्त्र के प्रयोग से भाग्य परिवर्तन के विशेषप्रभाव देखने में आते हैं।

७५. कार्य सिद्धि का मन्त्र

    || मन्त्र

    ‘नाथ सपथ पितु चरन दोहाई॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    एक ताम्र पत्र के चारों तरफ ‘राम-राम' खुदवायेऔर मध्य में अपनी कामना उत्कीर्ण करवा दें। इसेप्रभु राम के श्री चरणों में रखकर इस मन्त्र के एकलाख जप करें। जप के पश्चात् हवन करें। इस हवनमें १०००० इसी मन्त्र से आहुतियाँ दें। इस हवन केऊपर से एक ताम्रपत्र को धूपित करके रक्त वस्त्र मेंलपेटकर गुप्त कर लें।

    इस मन्त्र के प्रयोग से न हो पाने वाले कायों कोपूर्ण कर लिया जाता है।

    ७६. शत्रु नाशक मन्त्र

    | मन्त्र

 "सुनहु पवनसुत रहनि हमारी।

जिमि दसनन्हि महँ जीभ बिचारी॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    शनिवार को हनुमान जी को पूजा देकर पीपलवृक्ष को लाल झंडी तथा खड़ाऊँ प्रदान करें। रात्रि कोहनुमान जी की मूर्ति के समक्ष रक्त वस्त्र धारण करकेरक्त चन्दन की माला पर इस मन्त्र के १०००० जपकें। इस प्रयोग को ११ दिन तक करना होता है।

    जब किसी के शत्रु अत्यधिक बढ़ जायें तो इसमन्त्र के प्रयोग से हनुमान जी शत्रुओं का मान मर्दनकर देते हैं।

 ७७. स्त्रियों को लाभ का मन्त्र

    || मन्त्र॥

    "चन्द्रहास हरु मम परितापं।रघुपति बिरह अनल संजातं॥शीतल निसित बहसि बर धारा।कह सीता हस मम दुख भारा॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    रविवार को पुष्य नक्षत्र पडे तो स्वर्ण की एक इन्दलम्बी तलवार बनवाकर सीता जी की षोडशोपचार विधिसे पूजा करें। इसके बाद यह मन्त्र पढ़ते हुए इस तलवारको फूँकें मारते रहें। नित्य १००० बार करते हुए ४१दिन पूर्ण करें। पूर्णशृंगार करें तथा नवीन वस्त्र धारणकरके इस मन्त्र को १०८ बार पढ़ते हुए आभूषण कीभाँति इस तलवार को कण्ठ में धारण कर लें।यह प्रयोग मुख्यतः स्त्रियों के लिए है और इसप्रयोग से स्त्रियो को समस्त लाभप्राप्त होते है।

 ७८. राम कृपा (विशेष मन्त्र)

    | मन्त्र॥ 

"ता कहुँ प्रभु कछु अगम 

नहीं जा पर तुम्ह अनुकूल।

तब प्रभावँ बड़वानलहि

जारि सकह खलु तूल॥"

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    रुद्राक्ष की माला पर १००० मन्त्र प्रतिदिन जपेंऔर ५१ दिन तक ऐसा ही करते रहें। इस मन्त्र केबड़े ही चमत्कारी प्रभाव हैं।

    १. राई को १०८ बार इस मन्त्र से शक्तिकृत करकेशत्रु गृह में फेंकने से वह शत्रुता त्याग देता है।

    २. मिट्टी की एक कंकड़ी लेकर इस मन्त्र से १०८बार शक्तिकृत करके शत्रु की पीठ पर मारने से

    शत्रु सदा-सदा के लिए वशीभूत हो जाता है।

    ३. काँसे की कटोरी में गंगा जल भरकर इस मन्त्रसे १०८ बार शक्तिकृत करके रोगी को सात दिनतक पिलाने से कठिन-से-कठिन रोग भी शान्तहो जाता है।

    ४. इलायची को ५१ बार इस मन्त्र से शक्तिकृतकरके किसी को भी खिलाने से मोहन होता है।

    ५. जब किसी को किसी तांत्रिक अभिचार से बाँधदिया गया हो तो रोगी के सिर से पाँव तक कालासूत नापकर इस मन्त्र से १०८ बार शक्तिकृतकरके रोगी के सिर पर रख दें। कुछ समयोपरान्तइस सूत को आक के वृक्ष पर बाँध आयेंल

७९. प्राण संकट टालने का मन्त्र

    ॥| मन्त्र

    "श्रवण सुजसु सुनि आयउँ

    प्रभु भंजन भवभीर।

    त्राहि त्राहि आरति हरन

    सरन सुखद रघुबीर ॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    रामनवमी वाले दिन इस मन्त्र को प्रातःकाल सेअगले सूर्योदय तक निरन्तर जपना होता है।

    इस मन्त्र के प्रयोग से प्राणों पर आये हुए संकटको नष्ट कर लिया जाता है।

८०. शत्रु को भयभीत करने का मन्त्र

    | मन्त्र॥    

    “जयति राम जय लछिमनl

     जय कपीस सुग्रीव॥"

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    रामायण की उपासना के मन्त्रों की विधि अत्यधिकसरल होती है। इस मन्त्र को नित्य यथाशक्ति जपतेरहें। इस मन्त्र को एक लाख बार जपने से शत्रु कोभय प्रदान किया जाता है।

    इस मन्त्र से राम, लखन तथा सुग्रीव की स्तुतिकरते हैं। रण में यह मन्त्र शत्रु को भयभीत भी करदेता है।

    ८१. समस्त विपत्तियाँदूर करने का मन्त्र|| मन्त्र|

    ‘‘सुन्दर काण्ड का पाठ

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ इस पाठ को ‘किष्किन्धा काण्ड' के २९।२ श्लोकअर्थात् ‘कहई रीछपति सुनु हनुमाना...' से प्रारम्भ करआगामी सभी श्लोकों का पाठ करते हुए सुन्दर काण्डका पाठ करें। यह पाठ १०८ बार करने मात्र से हीसिद्ध होकर कार्य करने लग जाता है। गाय के उपलोंकी राख को कपड़े में छानकर इस पाठ से अभिमन्त्रित करके प्रयोग करना चाहिए।

    इस पाठ के प्रयोग से हनुमान जी प्रसन्न होते हैंजिसके कारण सभी आपदाओं का अन्त हो जाता है।८

२. सुख-समृद्धि दायक मन्त्र

    | मन्त्र

    ‘‘रामचरित मानस का पाठ

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभरामचरित मानस को ११ बार पढ़ने मात्र से ही यहपाठ सिद्धि दायक हो जाता है।

    इस पाठ के प्रभाव से घर में सुख शान्ति औरसमृद्धि होकर विष्नों का अन्त हो जाता है।

    ८३. सर्वरूप श्रीराम मन्त्र

    || मन्त्र॥

 "जड़़ चेतन जग जीव

जग सकल राममय जानि।

बंदउँ सबके पदकमल

सदा जोरि जुग पानि॥"

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    किसी शून्य वन प्रान्त में इस मन्त्र के ११०० जपकरने चाहियें इसके बाद प्रत्येक जीव जन्तु को ‘जयश्रीराम' कहते रहें।

    इस मन्त्र के प्रयोग से सर्वरूप में प्रभु राम कीउपासना करते हैं।

    ८४. सृष्टि अनुकूल मन्त्र

    || मन्त्र॥

    ‘देव दनुज नर नागखग प्रेत पितर गंधर्व।बंदउँ किंन्तर रजनीचरकृपा करहु अब सर्व॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभप्रत्येक कार्य के प्रारम्भ में इस मन्त्र के ११ पाठकार्य को सफल बनाते हैं।

    इस मन्त्र के प्रयोग से देवता, दैत्य, मनुष्य, नाग,पक्षी, प्रेत, पितर, गन्धर्व, किन्नर और निशाचर कीवन्दना करके उन्हें अपने अनुकूल बनाते हैं जिसकारण किसी भी कार्य में विघ्न न आये।

    ८५. देव अनुकूल करने का मन्त्र


    | मन्त्र|


    "प्रनवउँ प्रथम भरत के चरना।जासु नेम ब्रत जाइ न बरना॥राम चरन पंकज मन जासू।लुबुध मधुप इव तजइ न पासू॥बंदउँ लछिमन पद जल जाता।सीतल सुभग भगत सुखदाता॥रघुपति कीरति बिमल पताका।दण्ड समान भयउ जस जाका॥सेषसहस्रसीस जग कारन।जो अवतरेउ भूमिभय टारन॥सदा सो सानूकूल रह मोपर।कृपासिंधु सोमित्र गुनाकर॥रिपु सूदन पद कमल नमामि।सूर सुसील भरत अनुगामी॥महाबीर बिनवउँ हनुमाना।राम जासु जस आप बखाना॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

 कभी भी राम उपासना करें तो प्रारम्भ में इस मन्त्रका जप अवश्य करें। इस पुस्तक में दिए गए मन्त्रोंको प्रयोग करने से पहले कम-से-कम २१ बार इसमन्त्र का पाठ करना आवश्यक है।

इस मन्त्र के प्रयोग से लक्ष्मण, भरत, शत्रुष्न तथाहनुमान जी को अपने अनुकूल किया जाता है।

 ८६. दुःख तथा पाप नाशक मन्त्र

    | मन्त्र॥

 सहित दोष दःख दास दुरासा।

दलइ नामु जिमि रबि निसिनासा॥

    भंजेड राम आपु भव चापू।

    भव भय भंजन नाम प्रतापू॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    मूँगे की माला पर इस मन्त्र के एक लाख पाठ५१ दिन में करें।

   इस मन्त्र के प्रयोग से दुःख, दारिद्रय, क्लेश, भयतथा सभी पापों का अन्त हो जाता है। 

८७. स्वप्न के भय दूर करने का मन्त्र

    || मन्त्र॥

    "राम सकुल रन रावनु मारा।सीय सहित निज पुर पगु धारा॥राजा रामु अवध रजधानी।गावत गुन सुर मुनि बरबानी॥सेवक सुमिरत नामु सुप्रीती।बिनु श्रम प्रबल मोहदलु जीति॥फिरत सनेहँ मगन सुख अपनें।नाम प्रसाद सोच नहिं सपनें॥"

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभसर्वप्रथम ५१ दिन नित्य १०८ बार इस मन्त्र के पातकरें। इसके बाद रात्रि को सोते समय इस मन्त्र के तोनऔर प्रातःकाल जागते समय पाँच पाठ नित्य किया करेंइस मन्त्र के द्वारा भगवान राम का गुणगान भीहोता है और स्वप्न के भय भी समाप्त हो जाते हैं।

    ८८. शरोतामध करने का मन्त्र

    || मन्त्र

    "राम अनंत अनंत गुन

    अमितकथा बिस्तार।

    सुनि आचरजु न मानिहहिं

    जिन्ह कें बिमल बिचार॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    सर्वप्रथम इस मन्त्र को १०००० बार जप करसिद्ध कर लें फिर जब भी कथा प्रवचन करने लगेंतोसर्वप्रथम इस मन्त्र की एक माला जप लें।

    इस मन्त्र के प्रयोग से श्रोताओं को मुग्ध कियाजाता है।

  ८९. विवाह तथा नौकरी धन्धा के लिए मन्त्र

    || मन्त्र

    ‘जिमि सरिता सागर महं जाहीं।यद्यपि ताहि कामना नाहीं॥तिमि सुख सम्पति बिनहिं बुलाये।धर्म शील पहंजाहिं सुभाये॥जिन कर नाम लेत जग माहीं।सकल अमंगल मूल नसाहीं॥करतल होहिं पदारथ चारी।तेहि सियराम कहेउ कामारी॥जाकर जेहिपर सत्य सनेहूँ।सो तेहि मिलहि न कछु संदेहू॥सो तुम जानहु अन्तरयामी।पुरबहु मोर मनोरथ स्वामी॥सकल मनोरथ होंहि तुम्हारे।राम लखन सुनि भये सुखारे॥जब ते राम ब्याहि घर आये।नित नव मंगल मोद मनाये॥मंगल भवन अमंगल हारी।उमा सहित जेहि जपत पुरारी॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    श्रीराम नवमी वाले दिन इस मन्त्र को १०८ बार जप कर अपने अनुकूल कर लें। इसके बाद स्नानकरते हुए लगातार इसके जप करते रहें। स्नान के पश्चात् अपने देह पर फूँक मारकर दिनचर्या का शुभारम्भकर दिया करें।

९०. सौभाग्य एवं सुख समृद्धि के लिए 

    | मन्त्र॥

    "भव भेषज रघुनाथ जसु,जे गावहिं नर नारि।तिन्हकर सकल मनोरथ,सिद्ध करहिं त्रिपुरारि॥क्षेमकरी करी कर क्षेमविशेखी।श्यामा वाम सुतरु पर देखी॥पुत्रवती युवती जग सोई।रघुपति भक्त जासु सुत होई॥अचल होय अहिबात तुम्हारा।जब लगि गंगजमुन जलधारा॥बारहि बार लाइ उर लीन्हीं।धरि धीरज सिख आशिश दीन्ही॥

जो रघुपति चरणन चितलावै।तेहिसम धन्य न आन कहावै॥यह भांति गौरि अशीश सुनि।सियसहित हिय हर्षित अली॥तुलसी भवानिहि पूजि पुनि-पुनि।मुदित मन मन्दिर चली॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    दीपावली की रात्रि को लक्ष्मी पूजन करके जानकीकी पूजा करें और फिर इस मन्त्र के तब तक लगातारके समय इसी मन्त्र को जपते हुए गूलर के वृक्ष केपास जायें। एक पान, सुपारी, दो लड्डू, धूप, कपूरतथा रोली चढ़ा करके इस मन्त्र के ११ पाठ करें औरफिर उस वृक्ष का एक गूलर तोड़ लायें और धन-स्थान में रख दें।  

९१. पुत्र सुख के लिए मन्त्र

  | मन्त्र

  ‘‘मंगल मूरति मारुति नंदन।सकल अमंगल मूलनिकंदन॥कौनसो काज कठिन जगमाहीं।जो नहिं होय तात तुम पाहीं॥कहा रीछपति सुन हनुमाना।का चुप साध रहा बलवाना॥

पवनतनय बल पवनसमाना।  बुद्धि विवेक विज्ञान निधाना॥कोमल चित कृपालु रघुराई।कपि केहिहेतु धरि निठुराई॥जो प्रसन्न मोपर मुनिराई।पुत्र देहु बल में अधिकाई॥

    जबहि पवनसुत यह सुधिपाई।चले हृदय सुमरि रघुराई॥राम कीन्ह चाहहि सोइ होई।करै अन्यथा अस नहिं कोई॥पुरबहु मैं अभिलाष तुम्हारा।सत्य-सत्य प्रण सत्य हमारा॥जेहि विधि प्रभुप्रसन्न मन होई।करुणा सागर कीजै सोई॥चरण कमल बन्दौ तिनकेरे।पुरबहु सकल मनोरथ मेरे॥देखिप्रीति सुनि बचन अमोले।एवमस्तु करुणानिधि बोले॥दशरथ पुत्रजन्म सुनि काना।मानहुँ ब्रह्मानन्द समाना॥।जाकर नाम सुनत शुभ होई।मोरे गृह आवो प्रभु सोई॥प्रभु की कृपा भयहु सब काजू।

    जन्म हमार सुफल भा आजू॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

   शारदीय नवरात्रि के दिनों में राम उपासना करतेहुए इस मन्त्र के १०८ पाठ करें। नित्य ही इस क्रियाको करते रहें और विजया दशमी वाले दिन गंगा स्नानकरें और इस मन्त्र के ११ पाठ करके कोढ़ियों कोगन्ने के रस से बनी हुई खीर खिलायें। भगवान विष्णुको सुपारी चढ़ा करके इसी मन्त्र के पुनः ११ पाठकरें। इसके बाद जीयापोता के वृक्ष के पास जाकरउसकी धूप दीप से पूजा करें। पान सुपारी की भेंट देंऔर कपूर जला करके नारियल तोड़ दें। इसके बादउसकी जड़़ खोद लाये और घर आकर उसे सिलबट्टेपर रखकर पीस लें और उसकी खीर बनाकर खा लें।इसके बाद पति सेवन करें तो पुत्र सुख प्राप्त होता है।

९२. कन्या की शादी के लिए मन्त्र

    || मन्त्र

    "श्री रघुबीर विवाह,जो सप्रेम गावहिं सुनहिं।तिन्हकर सदा उछाहु,मंगलाय तनु राम जसु॥कोमल चित अति दीन दयाला।कारण बिनु रघुनाथ कृपाला॥जानहु ब्रह्मचर्य हनुमन्ता।शिव स्वरूप री भगवन्ता॥जो रघुपति चरणन चितलावै।तेहिसम धन्य न आन कहावै॥राम कथा सुन्दर करतारी।संशय विहग उड़ावनहारी॥     उमा रमा ब्रह्माणि वन्दिता।जगदम्बा सन्तति अनन्दिता॥पूजा कीन्ह अधिक अनुरागा।निज अनुरूप सुभगवर माँगा॥सादर सियप्रसाद उर धरेऊ।बोली गौरि हर्ष उर भरेऊ॥जाको जा पर सत्य सनेहू।सो तेहि मिलहि न कछु संदेहू॥सुनि सिय सत्य असीस हमारी।पूजहि मन कामना तुम्हारी॥पति अनुकूल सदा रह सीता।शोभा खान सुशील विनीता॥रंगभूमि पर जब सिय पगधारी।देखि रूप मोहे नर नारी॥भुवन चारदश भरेहू उछाहू। जनक सुता रघुवीर विवाहू॥शकुन विचार धरि मनधीरा।अब मिलिहि कृपालु रघुवीरा॥तौ जानकिहि मिलहि वर एहू।नाहिन आलि यहाँ संदेहू॥सो तुम जानहु अन्तरयामी।पुरवहु मोर मनोरथ स्वामी॥मंत्रमहामणि विषय ब्याल के।मेटत कठिन कुअंक भाल के॥अशरण शरण विरद संभारी।मोहिजनि तजहुँ भक्तहितकारी॥मन जाहि राचौ मिलहि,सो वर सहज सुन्दर साँवरो।करुणा निधान सुजान,शील सनेह जानत रावरो॥"

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

    सर्वप्रथम नवरात्रि के दिनों में इस मन्त्र को ११ बारएक समय पढ़ते हुए, प्रातः व सायं को अनुष्ठान करेंऔर 'तन्त्र प्रयोग' में कही गई विधि का भी सहयोगप्राप्त करें। इस भाँति पूरे नवरात्रि में इस कार्य को करतीरहे। इस प्रकार से यह मन्त्र अनुकूलता को प्राप्त होजाता है।

    इसके बाद जब भी शादी के लिए कन्या दिखानेके लिए जायें तो कन्या अपनी साड़ी, पेटीकोट यासलवार के इजारबन्द (नाड़े) को इस मन्त्र के ११ पाठकरके बाँध ले और फिर अपना शृंगार करे। छुहारे कीएक गुठली को चन्दन की भाँति घिसकर उसमें सिन्दूरमिलाकर माथे पर टीका लगा ले। इसके बाद अपनेस्वर का ध्यान रखते हुए प्रस्थान करें।

    वर पक्ष वालों से साक्षात्कार करते हुए स्वर कोग्रहण करें और बन्द स्वर की तरफ वर को तथा वरपक्ष को रखें। स्वर के विषय में 'स्वरोदय विज्ञान' का अवलोकन

    तंत्र रामायण

   ९3भूतादि नाशक मन्त्र

    || मन्त्र

    "सूत्र बनावें बन बीच आनन्द कन्द रघुबीर।लखे सिय सन्मुख महं होय धीर मति धीर॥तेही समय लषण तहं आये।पूछहिं राम लषण बुलाये॥बोले हरि कथन कारण तुम भाई।इत आबत बहु विलम्ब लगाई॥लषण बोले गयऊँ दूरि पहारा।देखेउ तहाँ भूत दल झारा।तह एको मानुष न दिखाये।निज आश्रम को छोड़ पराये॥वचन सुन हरि बान चलायउ।भागे भूत आनन्द गिरि भयउ॥‘नाम’ के अगनहीं भूत नहीं भार।राम के नाम से भई समुद्र पार॥आदेश श्री राम सीता की दुहाई।मन्त्र साचा पिण्ड काचा।फुरे मन्त्र ईश्वरोचाचा॥

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभभूत बाधा से ग्रस्त रोगी को यह मन्त्र तीन बारपढ़ते हुए तीन फूँक मारे तो रोगी ठीक हो जाता है।

 विष नाशक मन्त्र

    || मन्त्र

    "जेहि समय गये राम बन माहीं।तिनका तहाँ कष्ट अति होहीं।सिय हरण अरु बाली नाशा।पुनि लागी लषण नाग फाँसा॥विकल हरि देखि नाग फाँसा।स्मरण करहिं गरुड़ निज दासा॥विनती नन्दन वसहिं पहारा।पहुँचे स्मरणते ही लंका पल पारा॥रहे लषण वाधि जितने सब नागा।सो गरुड़ देखि तुरत सब भागा॥‘नाम' अंगे विष निर्विष होये जाई।आदेश श्री रामचन्द्र का हनुमान की दुहाई॥आज्ञा विनतानन्द की। लक्ष्मण यति की आन।मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभ

   विष (सर्प) से मरणासन्न रोगी को इस मन्त्र के २१ पाठकरके २१ फूँके मारें तो रोगी ठीक हो जाता है।

  मासिक धर्म तथा पीड़ा स्तम्भन मन्त्र

    || मन्त्र 

  "आदेश श्री रामचन्द्र सिद्ध गुरु कोतोडूँ गाँठ औगांठालोतोड़़ दूँ लायतोड़ देऊँ सरित परित देकर पाययह देखकर हनुमंत दोड़कर आयअमुकी की देह शांत हो जायपीरा दे भगाय श्री गुरु नरसिंह की दुहाई 

आदेश आदेश आदेश॥"

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभएक पान लेकर इस मन्त्र से ११ बार शक्तिकृतकरके रोगिणी को खिलाने से स्त्री के मासिक धर्म तथाइसके कारण होने वाली पीड़ा की निवृत्ति हो जाती है।

 घाव एवं पीड़ा नाशक मन्त्र

    ॥ मन्त्र॥

    ‘युद्ध किए राम लषण दुइ भाई।बाल्मीकि के मन्त्र पढ़ि बाण जन्माई।बाण से बाण कटे।होय बाण वरिषनअर्द्ध चन्द्रहास से कपै राम लक्षिमन।आदेश मुनि बाल्मीकि का और दुहाई।‘नाम’ की पीर व्यथा कटि जाई।

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभदेह पर कहीं चोट लगने तथा पीड़ा होने पर इसपन्न्र को सात बार पढ़ते हुए चोट के ऊपर सात फूँकेंमारें तो पीड़ा शान्त हो जाती है।

    ५. मोच नाशक मन्त्र

    || मन्त्र॥

    "ॐ नमो आदेश श्री राम को।देऊँ मचक (मोच) उड़ाई।इसके तन से तुरन्त पीड़ा भागि जाई।ना रहे रोग। ना रहे पीड़ा।मेरी फूँक से हुई सब पानी।‘नाम’ की व्यथा छोड़।

    भाग तूँ मचकानी।पिता ईश्वर महादेव की दुहाई।आदेश सियाराम लषन गुसाई॥"

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभकडुवा तेल लेकर इस मन्त्र से २१ बार शक्तिकृतकरके मोच के ऊपर मालिश करें तो मोच तथा उसकीपीड़ा ठीक हो जाती है।
    ६. अण्ड वृद्धि नाशक मन्त्र

    | मन्त्र॥

    "ॐ नमो आदेश गुरु को।
जैसे के लेहु रामचन्द्र।कबूत ओसई करहु।राध बिनि कबूत।
पवनसुत हनुमंत धाड।हर हर रावन कूट मिरान।श्रवई अण्ड खेतहि।श्रवर अण्ड विहण्ड।खेतहि श्रवण वाजं गर्भहि।श्रवई स्त्री कीलहि। श्रवई श्राप।हर जम्बीर।हर जम्बीर।हर हर हर॥"

    मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभइस मन्त्र को पढ़ते हुए बढ़े हुए अण्डकोष को हल्केहाथ से सहलायें और जल को शक्ति कृत करके पिलायें।

श्री राम चालीसा

॥चौपाई ॥

श्री रघुवीर भक्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥

निशिदिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहिं होई॥

ध्यान धरे शिवजी मन माहीं। ब्रह्म इन्द्र पार नहिं पाहीं॥

दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहूं पुर जाना॥

तब भुज दण्ड प्रचण्ड कृपाला। रावण मारि सुरन प्रतिपाला॥

तुम अनाथ के नाथ गुंसाई। दीनन के हो सदा सहाई॥

ब्रह्मादिक तव पारन पावैं। सदा ईश तुम्हरो यश गावैं॥

चारिउ वेद भरत हैं साखी। तुम भक्तन की लज्जा राखीं॥

गुण गावत शारद मन माहीं। सुरपति ताको पार न पाहीं॥

नाम तुम्हार लेत जो कोई। ता सम धन्य और नहिं होई॥

राम नाम है अपरम्पारा। चारिहु वेदन जाहि पुकारा॥

गणपति नाम तुम्हारो लीन्हो। तिनको प्रथम पूज्य तुम कीन्हो॥

शेष रटत नित नाम तुम्हारा। महि को भार शीश पर धारा॥

फूल समान रहत सो भारा। पाव न कोऊ तुम्हरो पारा॥

भरत नाम तुम्हरो उर धारो। तासों कबहुं न रण में हारो॥

नाम शक्षुहन हृदय प्रकाशा। सुमिरत होत शत्रु कर नाशा॥

लखन तुम्हारे आज्ञाकारी। सदा करत सन्तन रखवारी॥

ताते रण जीते नहिं कोई। युद्घ जुरे यमहूं किन होई॥

महालक्ष्मी धर अवतारा। सब विधि करत पाप को छारा॥

सीता राम पुनीता गायो। भुवनेश्वरी प्रभाव दिखायो॥

घट सों प्रकट भई सो आई। जाको देखत चन्द्र लजाई॥

सो तुमरे नित पांव पलोटत। नवो निद्घि चरणन में लोटत॥

सिद्घि अठारह मंगलकारी। सो तुम पर जावै बलिहारी॥

औरहु जो अनेक प्रभुताई। सो सीतापति तुमहिं बनाई॥

इच्छा ते कोटिन संसारा। रचत न लागत पल की बारा॥

जो तुम्हे चरणन चित लावै। ताकी मुक्ति अवसि हो जावै॥

जय जय जय प्रभु ज्योति स्वरूपा। नर्गुण ब्रह्म अखण्ड अनूपा॥

सत्य सत्य जय सत्यव्रत स्वामी। सत्य सनातन अन्तर्यामी॥

सत्य भजन तुम्हरो जो गावै। सो निश्चय चारों फल पावै॥

सत्य शपथ गौरीपति कीन्हीं। तुमने भक्तिहिं सब विधि दीन्हीं॥

सुनहु राम तुम तात हमारे। तुमहिं भरत कुल पूज्य प्रचारे॥

तुमहिं देव कुल देव हमारे। तुम गुरु देव प्राण के प्यारे॥

जो कुछ हो सो तुम ही राजा। जय जय जय प्रभु राखो लाजा॥

राम आत्मा पोषण हारे। जय जय दशरथ राज दुलारे॥

ज्ञान हृदय दो ज्ञान स्वरूपा। नमो नमो जय जगपति भूपा॥

धन्य धन्य तुम धन्य प्रतापा। नाम तुम्हार हरत संतापा॥

सत्य शुद्घ देवन मुख गाया। बजी दुन्दुभी शंख बजाया॥

सत्य सत्य तुम सत्य सनातन। तुम ही हो हमरे तन मन धन॥

याको पाठ करे जो कोई। ज्ञान प्रकट ताके उर होई॥

आवागमन मिटै तिहि केरा। सत्य वचन माने शिर मेरा॥

और आस मन में जो होई। मनवांछित फल पावे सोई॥

तीनहुं काल ध्यान जो ल्यावै। तुलसी दल अरु फूल चढ़ावै॥

साग पत्र सो भोग लगावै। सो नर सकल सिद्घता पावै॥

अन्त समय रघुबरपुर जाई। जहां जन्म हरि भक्त कहाई॥

श्री हरिदास कहै अरु गावै। सो बैकुण्ठ धाम को पावै॥

॥ दोहा॥

सात दिवस जो नेम कर, पाठ करे चित लाय।

हरिदास हरि कृपा से, अवसि भक्ति को पाय॥

राम चालीसा जो पढ़े, राम चरण चित लाय।

जो इच्छा मन में करै, सकल सिद्घ हो जाय॥

।।इतिश्री प्रभु श्रीराम चालीसा समाप्त:।।


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