पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का सम्पूर्ण विवेचन एवं स्थित गृह फलादेश

पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का सम्पूर्ण विवेचन एवं स्थित गृह फलादेश


भू केन्द्र से तारो की दूरी का मापन मील या किलोमीटर मे सम्भव न होने के कारण यह प्रकाश वर्ष मे किया जाता है। प्रकाश लगभग 186330 मील प्रति सैकण्ड से जो दूरी एक वर्ष मे तय करता है उसे प्रकाश वर्ष कहते है। यह अनुपातन 60 खरब मील होता है। पृथ्वी से बंगुला 4.3 प्रकाश वर्ष, सिरियस 8.6 प्रकाश वर्ष, प्रोसियन 11.4 प्रकाश वर्ष दूर है।

फाल्गुनी - भारतीय ज्योतिष मे फाल्गुनी दो चन्द्र भवन पूर्वा फाल्गुनी और उत्तरा फाल्गुनी का नाम है। ये द्वय विवाह के नक्षत्र है। "शतपथ ब्राम्हण" मे फाल्गुनी दो तारे नक्षत्र का वर्णन है। इन्हे अर्जुनी भी कहते है। इसका उल्लेख ऋग्वेद 18. 20. 13 मे है।

संस्कृत - फाल्गु = कुछ-कुछ लाल, फाल्गुन = अर्जुन का विशेषण, फाल्गुनी = बृहस्पति का विशेषण।

पूर्वा फाल्गुनी

राशि चक्र मे 13320 से 14640 अंश के विस्तार का क्षेत्र पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र कहलाता है। अरब मंजिल मे इसे अल जुब्राह अर्थात शेर की अयाल कहते है ग्रीक में इसे ल्योनिस और चीन सियु मे चांग कहते है।

देवता भग, स्वामी ग्रह शुक्र, राशि सिंह 1320 से 2640 अंश। यह भारतीय खगोल का 11 वा उग्र संज्ञक नक्षत्र है। इसके केवल दो तारे है। इनकी अवस्थिति से प्रतीत होता है कि उद्यान मे बेंच या मंच है। इसे "भगदेवत" भी कहते है। पूर्वा फाल्गुनी के देवता भग है। संस्कृत मे भग के अर्थ इस प्रकार है। संस्कृत - भग: (भज + घ) = 1 सूर्य के बारह रूपो मे से एक सूर्य, 2 चन्द्रमा, 3 शिव का रूप, 4 सम्पन्नता, 5 मर्यादा, 6 भाग्य, (आस्ते भग आसीनस्य ऐ. ब्रा) 7 कीर्ति, 8 लावण्य, 9 प्रेम, 10 उत्कर्ष, 11आमोद, 12 स्त्री की यौनि (मनुस्मृति) 13 सदगुण। 14 प्रयत्न्न 15 विषयो से विरति, 16 मोक्ष, 17 साम्यर्थ, 18 सर्वशक्तिमत्ता।

यह अशुभ, नाशक, राजसिक स्त्री नक्षत्र है। इसकी जाति ब्राह्मण, योनि मूषक, योनि वैर मार्जार, मनुष्य गण मध्य नाड़ी है। यह उत्तर दिशा का स्वामी है।

भग 10 वे आदित्य

प्रतीकवाद : माता अदिति से 12 आदित्य हुए। इनमे भग दशवे आदित्य है। ये वैदिक मास सहश्य और चन्द्र मास पौष है। इनके सिद्ध आयु, यश उमा, गन्धर्व अरिष्टनेमि, अप्सरा पूर्वशी, रक्षा स्फुरजा, नाग करकोटक है। हिन्दुत्व मे इन्हे सम्पन्नता, विवाह का देवता, शिव नायक वीरभद्र माना जाता है। ऋग्वेद अनुसार ये भाग्य और अच्छाई के देवता है। "भग", भगवान, भाग्य है।

      पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र-यह ग्यारहवां नक्षत्र भी सिंह राशि के क्षेत्र में मघा नक्षत्र से अगले 13-20’ पर स्थित है। यह नक्षत्र अपने दो तारों से एक शय्या जैसी आकृति बनाता है। इस नक्षत्र का देवता ’भग’ (सूर्य का एक रूप विशेष) है तथा स्वामी शुक्र है।

      पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के अन्तर्गत जन्मा पुरुष जातक बुद्धिमान, उद्यमी, स्वावलम्बी, कमाऊ तथा अपनी पत्नी का प्रेमी (उससे संतुष्ट) होता है। स्त्री का सम्मान करने वाला, कारोबार में सफल, चतुर तथा साहसी होता है।

      पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में जन्मी स्त्री जातक प्रियभाषिणी, शास्त्रों में श्रद्धा रखने वाली, शोभनीय व्यवहार वाली, नीति के अनुकूल चलने वाली, पुत्रयुक्ता व सुभगा होती है।

विशेषताएं - पूर्वा फाल्गुनी विवाह का नक्षत्र है। इसमे भगवान शिव की बरात पार्वती से विहाने गई थी। इन्ही चंद्र भवनाे मे चन्द्रमा का विवाह रोहिणी से हुआ था। यह बृहस्पति का जन्म नक्षत्र है। रोहिणी मे प्यार और आकर्षण की शक्ति है उसी प्रकार पूर्वा फाल्गुनी मे विवाह की शक्ति है।

पूर्वा फाल्गुनी विभूतियां

मोड़ना प्रसिद्ध अमेरिकन सिने तरीका, गायक, पाप-रॉक डान्सर का चन्द्रमा और लग्न पूर्वा फाल्गुनी मे है।

राजीव गाँधी युवा भूतपूर्व प्रधान मंत्री भारत का जन्म पूर्वा फाल्गुनी प्रथम चरण मे हुआ था।

जान एफ कैनेडी अमेरिकन राष्टपति का चन्द्रमा पूर्वा फाल्गुनी चतुर्थ चरण मे था।

नक्षत्र फलादेश

इसके दो चिन्ह है 1 पलंग, 2 शिव लिंग। पलंग - विश्राम, तनावमुक्ति का प्रतीक है। जातक बेफ्रिका, चिंता रहित, भाग्यवादी, कामुक, स्नेही, प्रभावकारी, सामाजिक गतिविधि और पार्टी प्रिय, दयालु, अकेला नही रहने वाला होता है। ये विवाहित या लम्बे समय तक साथ रहने वाले होते है।

शिवलिंग - यह सृजन का साधन, यौन उत्कंठा, प्रेमासक्त आनंद का प्रतीक है। जातक बहादुर, तेज चतुर चालाक, ह्रष्ट-पुष्ट, अभद्र, स्वतन्ता प्रिय होता है। यह न तो स्वयं अवैधानिक कार्य करता है और न करने देता है। यह भोजन अधिक करता है। यह सतर्क, ईमानदार, स्त्रियो का प्रिय, विद्वान होता है।

पुरुष जातक - यह आकर्षक, ठिगना, गेंहुआ रंग, चपटी नाक वाला होता है। इसे पसीना अधिक आता रहता है। यह पूर्ण स्वंत्रता प्रिय, किसी एक विषय मे ख्यात, मानसिक उलझन युक्त, दूसरो की समस्याओ का अंतर्ज्ञानी, मृदुभाषी, पर्यटन प्रेमी होता है।

इसे गुलामी पसंद नही है इसलिए नौकर नही होता है यदि नौकर हो, तो "हाँ मे हाँ" नही मिलता है। कार्य के प्रति निष्ठावान, अवैधानिक कार्यो मे न तो स्वयं और न दूसरो को सलग्न होने देता है। यह शक्ति का व्यापारी पैसो के बजाय पद और अधिकारो को महत्व देता है। 45 वर्ष बाद भाग्योदय होता है। वैवाहिक जीवन सुखी होता है। कुछ जातक को मनचाही लड़की नही मिलती है और इसे अपने परिवार से दूर रहना पड़ता है।

स्त्री जातक - स्त्री जातक मध्यम कद, गोल चेहरा, लम्बी नाक, दो दाड़ी, आकर्षक, नम्र, धर्मपरायण, कलाविद, दानी, सुखी होती है। यह दिखावटी छवि के साथ इस जनून मे जीते रहती है कि इसके ऊपर कोई नहीं है, सफलता के लिए इस प्रवृत्ति पर अंकुश लगाना चाहिये। उच्च शिक्षा प्राप्तक व्याख्याता होती है।

पति इसे चाहने वाला, परिवार के लिए सब कुछ करने के लिए तैयार रहती है। यह परिवार मे खुद को बुद्धिमान और दूसरो को मूर्ख समझती है, इसलिये परिवार मे विवाद होता है। पति की संपत्ति और पद घमंड के कारण पड़ोसियो से सम्बन्ध ख़राब रहते है।

नक्षत्र फलादेश आचार्यो अनुसार

पूर्वा फाल्गुनी जातक का पानी से विशेष प्रेम होता है। ये लोग वाणी से मधुर, सबके काम आने वाले, भ्रमणशील, सुदर्शन व्यक्तित्व के मालिक होते है। ये राजकीय सेवा या राजकीय संपर्क से तरक्की करते है। - वराहमिहिर

ये प्रायः भौतिक सृमद्धि पाने मे भाग्य के धनी, साधारण बुध्दि होते हुऐ भी भाग्य के बल पर काफी उन्नति कर लेते है। दूसरो को पीछे धकेल कर इन्हे आगे आने का मौका मिलता है। जातक जीवन मे अल्प धनी, और अल्प सन्तति वाला होता है। - पराशर

ये लोग अपनी लाभ-हानि का त्वरित आकलन करते है। नृत्यादि मे इनकी प्रवृत्ति होती है। अहंकारी होने से निंदा के पात्र होते है। शरीर पर नसे उभरी होती है। - नारद

जातक शीघ्र काम पीड़ित होने वाला, लाभ के लिए अवसरवादी, शातिर दिमाग का धनी, अधीनस्थो पर हुक्म चलाने वाला, अनुशासन और दंड के विषय मे कठोर होता है।

चन्द्र : जातक बेफ्रिक्रा, सुखी, कामुक, दयालु, सामाजिक होता है। ये कुशल संचार वाहक, दूसरो के प्रभाव मे वृद्धि कारक, कलाकार, आसानी से पहुंच बनाने वाले परन्तु आलसी और दुबले होते है। इन्हे परिवार और रिश्तेदारो की आवश्यकता होती है। चन्द्र पूर्वा फाल्गुनी मे रचनात्मक बुद्धि, नाटक प्रेम, नेतृत्व शक्ति, यात्रा प्रेम, स्वरोजगार, घुमक्क्ड़पन, सौन्दर्य, अध्यापन, रहस्यवाद, मिष्ठ वाणी, वीरता का कारक है।

चन्द्र प्रभाव मोहक चेहरा, शिष्टाचार, तौर-तरीका, शासकीय सेवा, धुमक्क्ड़पन का कारक है। - वराहमिहिर

सूर्य : पूर्वा फाल्गुनी मे सूर्य हो तो कला प्रदर्शन मे उपहार, घमंड, हसोड़पन, शोखी, शाही आदत, महिलाओ से सम्बन्ध के कारण पह्चान, नाट्यशाला का मालिक, खेल दिखाने वाला, पुष्ट प्रकृति दायक है।

लग्न : जातक संगीत मे दक्ष, नृत्य तथा नाटक प्रेमी, आकर्षक, कामुक, बुद्धिजीवी, प्रज्ञ, स्वस्थ, नौकर होता है।

चरण फल

प्रथम चरण - इसका स्वामी सूर्य है। इसमे सूर्य, शुक्र, सूर्य का प्रभाव है। सिंह 13320 से 13640 अंश। नवमांश सिंह। यह स्व प्रतिष्ठा, वैभव, शान का द्योतक है। जातक घड़ियाल समान सिर, अल्प केश, श्वेत आंखे, लोमड़ी सामान शरीर, लम्बा पेट, साहसी, मोटे चौड़े तीखे दांत वाला होता है।

जातक साहसी, पत्नी युक्त, माता का भक्त होता है। विपरीत लिंग से अड़चन, रसायन या हॉस्पिटल से आजीविका होती है। पुरुष जातक कच्चे माल का व्यापारी, जीवन के उत्तरार्ध मे सुखी, धनार्जन और व्यापार के लिए यात्राएं करने वाला होता है।

द्वितीय चरण - इसका स्वामी बुध है। इसमे सूर्य, शुक्र, बुध का प्रभाव है। सिंह 13640 से 14000 अंश। नवमांश कन्या। यह धैर्य, संयम, व्यापार, उद्योग का द्योतक है। जातक अल्प रोम, कोमल मटमैले नेत्र, लम्बा, श्याम वर्णी, स्त्री सुलभ सौन्दर्य युक्त, चतुर, शेखी मारने वाला, कार्य साधने में निपुण होता है।

जातक महा क्रोधी, जीवन के मध्य मे वासना युक्त, जीवन के अंत मे शांत और चिंता मुक्त होता है। पुरुष जातक नम्र, स्त्रियो का शौकीन, शराबी, नृत्य संगीत में रुचिवान, शिल्पकार, परिवार से दूर रहने वाला होता है।

तृतीय चरण - इसका स्वामी शुक्र है। इसमे सूर्य, शुक्र, शुक्र का प्रभाव है। सिंह 14000 से 14320 अंश। नवमांश तुला। यह सृजन, तनाव मुक्ति, समान विचार, यात्रा, परिष्कृत, प्रशंसा, परामर्श का द्योतक है। जातक लम्बा मुंह, लम्बा मोटा सिर, हृष्ट-पुष्ट, मांसल देह, श्याम वर्ण, घने रोम, स्त्रियो से कपटी, कूटनीतिज्ञ, ठग, कठोर भाषी होता है।

जातक आक्रामक, संताप रहित, अनेक जबाबदारियो से परिपूर्ण होता है। घर मे चोरी होती है, परन्तु नुकसान कम होता है या चोरी गया मॉल मिल जाता है। पुरुष जातक प्रहार का शौकीन, बॉक्सर या पहलवान, वंश परम्परा का आदर करने वाला, परिवार और रिस्तेदारो का घनिष्ट, जीवन के अंत मे अकेला होता है।

चतुर्थ चरण - इसका स्वामी मंगल है। इसमे सूर्य, शुक्र, मंगल का प्रभाव है। सिंह 14320 से 14640 अंश। नवमांश वृश्चिक। यह लालसा, वीरता, रंग रूप का द्योतक है। जातक के जीवन मे कलह विशेष होता है। यदि जन्मांग मे सूर्य गुरु अच्छी स्थति मे हो, तो कलह कम होता है। जातक शिष्ट भाषी, स्थिर अंग, गंभीर स्वभाव, कपट दृष्टि, निषिद्ध कार्य करने वाला, गुप्तचर, कुशल होता है।

आचार्यो ने चरण फल सूत्र रूप में कहा है परन्तु अन्तर बहुत है।

यवनाचार्य : पहले पाद मे समर्थ व धार्मिक राजा, दूसरे मे रोगी, तीसरे मे क्रूर, चौथे मे अल्पायु होता है।

मानसागराचार्य : पूर्वा फाल्गुनी के पहले पाद मे स्वपक्ष जनहीन, दूसरे मे माता-पिता का भक्त, तीसरे मे राजमान्य चौथे मे धनी होता है।

नक्षत्र ग्रह चरण फल

सूर्य :

पू फा सूर्य पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो शत्रु और परिजन से व्याकुल होगा, परदेश मे भटकेगा, निर्धन होगा ।

पू फा सूर्य पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक शत्रु पीड़ित और दिमागी रोग ग्रस्त होगा।

पू फा सूर्य पर गुरु की दृष्टि हो, तो मन्त्रो मे प्रवीण, स्वतंत्र विचार वाला, पत्नी और संतान से नही निभेगी।

पू फा सूर्य पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक फिजूलखर्ची, अवैध कार्य करने वाला, सेवक युक्त होगा।

पूर्वा फाल्गुनी सूर्य चरण फल

प्रथम चरण - जातक सौन्दर्य युक्त, कला मे पुरस्कार पाने वाला, घमण्डी लेकिन हंसमुख, नाटक घर का मालिक, गुणवत्ता वाला, सरकारी नौकर या चिकित्सा मे पदस्थ होता है। यदि शनि या मंगल की दृष्टि हो, तो दिमागी रोग होता है।

द्वितीय चरण - जातक सबके काम आने वाला, नृत्यादि मे प्रवीण, नाटककार, सुख-सुविधा युक्त होता है। यदि शनि की युति हो और मंगल आश्लेषा मे हो, तो उच्च पदाधिकारी होता है।

तृतीय चरण - जातक सुन्दर, रूप का अहंकार करने से लोक में निन्दित, शासकीय सेवक या चिकित्सक, अभिनय मे मुखिया या चलचित्र निर्माता होता है। बचपन मे आर्थिक परेशानी होती है। आमदनी मे स्थिरता 33 वर्ष पश्चात आती है।

चतुर्थ चरण - जातक घमण्डी, सामान्य जीवन जीने वाला, परिश्रमी, कष्टो को सहने वाला, अल्प संतानी, जल उद्योग अथवा चिकित्सा क्षेत्र मे कार्यरत होगा। यदि यहा केतु स्थित हो, तो इंजीनियर या मेकेनिक होगा।

चन्द्र :

पू फा चन्द्र पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक विभिन्न प्रकार के व्यक्तियो से निपटने वाला, दूसरो की सहायता करने वाला, स्वयं सहायता से वंचित, संतुलित धन संचयी होगा।

पू फा चन्द्र पर मगल की दृष्टि हो, तो जातक बुद्धिमान परन्तु चालाक व धनी होगा।

पू फा चन्द्र पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक साहसी, सद्चरित्र, दूसरो का सहायक, शासक के निकट होगा।

पू फा चन्द्र पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक धर्म शास्त्रो मे विद्वान और इनके ज्ञान से धन अर्जित करेगा।

पू फा चन्द्र पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक सांसारिक वैभव युक्त लेकिन यदि चन्द्रमा पहले या दूसरे चरण मे हो, तो अचानक विपत्ति पड़ेगी।

पू फा चन्द्र पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक धन और स्त्री तथा स्वादु भोजन से वंचित रहेगा।

पूर्वा फाल्गुनी चंद्र चरण फल

प्रथम चरण - जातक साहसी, मातृभक्त, माता के आलावा दूसरी औरतो से नफरत करने वाला, आसानी से पहुंच बनाने वाला, आलसी, बेफिक्रा, कामुक, आचार और आचरण भ्रष्ट होता है। वह रसायन या हॉस्पिटल से कमायेगा। निर्धनता और भूख के कारण अनेक रोगो से ग्रस्त होगा।

द्वितीय चरण - जातक सुखी, प्रसन्नचित्त, भौतिक सृमद्धि पाने मे भाग्यशाली, व्यापार व्यवसाय मे दूसरो को पीछे धकेल कर आगे बढ़ने वाला, मध्यमावस्था तक क्रोधी पर वय क्रम पर शांत होता है।

तृतीय चरण - जातक आकर्षक, दूसरो के प्रभाव मे वृद्धि कारक, दयालु, अपनी छटा से पहचाना जाने वाला, स्वरोजगारी, अध्यापक, जिम्मेदरियो को वहन करने वाला होता है। घर मे चोरी होती है लेकिन नुकसान कम होता है या चोरी गया मॉल वापस मिल जाता है।

चतुर्थ चरण - जातक हानि-लाभ का त्वरित आकलन करने वाला, अपनी पीठ पीछे निंदा का पात्र, राजकीय सेवा या राज्य से लाभ, जलप्रिय, कार्य को अनेक तरीके से करने वाला होता है।

मंगल :

पू फा मंगल पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक चिकित्सक मगर पारिवारिक सुख-सुविधा से वंचित होगा।

पू फा मंगल पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक सराय या होटल का प्रबंधक, जलीय रोगो से ग्रस्त होगा।

पू फा मंगल पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक गणितज्ञ, कवि मगर असत्य भाषी होगा।

पू फा मंगल पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक परदेश मे बसेगा, प्रारम्भ मे कष्ट लेकिन बाद मे सुखी होगा।

पू फा मंगल पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक धन-संपत्ति-वैभव युक्त, कामुक होगा।

पू फा मंगल पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक साहसी लेकिन कई बुरी आदतो वाला होगा।

पूर्वा फाल्गुनी मंगल चरण फल

प्रथम चरण - जातक सफल चकित्सक या चिकित्सा उपकरणो का व्यवसायी, गलत दवाओ से स्नायुतन्त्र प्रभावित, स्त्रियो का संग पाने के लिए इच्छुक, शीघ्र काम पीड़ित, अभिमानी, निन्दा का पात्र, मुकदमेबाजी से पीड़ित होता है।

द्वितीय चरण - जातक अल्प संतान वाला या संतान हीन, सुरक्षा अथवा पुलिस मे नौकर, अवसर का लाभ लेने वाला, शातिर दिमागी होता है। वह काले जादू का शिकार होकर असाध्य रोग या अज्ञात रोग से ग्रसित होगा। तृतीय चरण - जातक त्वरित मदनातुर होने वाला, नृत्य-गान का शौकीन, रतिक्रीड़ा प्रेमी, सबके काम आने वाला, इंजीनियर, वैभवशाली होता है। यदि गुरु से युत हो, तो कुशल वक्ता, धनाढ्य, मंत्री या समकक्ष होगा। कोई-कोई जातक न्यायाधीश या सेना प्रमुख होता है।

चतुर्थ चरण - जातक शातिर दिमाग का धनी, स्व उन्नति के लिए दूसरो को पीछे धकलने वाला, दंड व अनुशासन विषय मे कठोर प्रशासक होता है। पत्नी उसे या वह पत्नी को त्याग देता है।

बुध :

पू फा बुध पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक वाचाल, क्रोधी, विवाद प्रिय होगा।

पू फा बुध पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक सुन्दर,धोखेबाज, सरकारी नौकर होगा।

पू फा बुध पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक धन, वैभव, संपत्ति युक्त होगा।

पू फा बुध पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक अच्छे पहनावे का शौकीन, बिना प्रयास के फल मिलेगा।

पूर्वा फाल्गुनी बुध चरण फल

प्रथम चरण - जातक पापाचार करने वाला, बुद्धि से साधारण परन्तु भाग्य से उन्नति करने वाला, स्त्री हीन होता है। विवाह नही होता है, यदि होता है तो तलाक होता है। यदि गुरु की दृष्टि या युति हो, तो शुभ फल मिलते है।

द्वितीय चरण - जातक वाणी से मधुर, सबके काम आने वाला, अपनी लाभ-हानि का त्वरित आकलन करने वाला, येन-प्रकारेण लाभ लेने वाला, राजकीय सेवा या संपर्क से तरक्की करने वाला, वकालत के उपयुक्त, औरतो का रशिया होता है।

तृतीय चरण - जातक भ्रमणशील, सुन्दर, भौतिक सृमद्धि पाने का इच्छुक, ग़लतफ़हमी के कारण समुदाय से बाहर, कमजोर याददास्त के कारण अप्रिय घटनाओ का शिकार होता है।

चतुर्थ चरण - जातक मधुर भाषी लेकिन व्यर्थ की बकवास करने वाला, धनवान मगर कन्जूस, कुकर्मो से अभिसप्त, कुटिल, अवैध कार्य और अवैध सम्बन्धो मे लिप्त, ईर्ष्यालु होता है।

गुरु :

पू फा गुरु पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक मुखिया, साधारण धनी होता है।

पू फा गुरु पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक भाग्यवान, माता का का प्रिय होता है।

पू फा गुरु पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक सफल, जमीन-जायदाद वाला होता है।

पू फा गुरु पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक ज्योतिषी, आकर्षक, मृदुभाषी होता है।

पू फा गुरु पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक निर्माण कार्यो मे कुशल इंजीनियर होगा।

पू फा गुरु पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक समुदाय का मुखिया और धनवान होगा।

पूर्वा फाल्गुनी गुरु चरण फल

प्रथम चरण - जातक दुष्ट स्वभाव वाला, किसी के काम नही आने वाला, दूसरो को पीछे धकेल कर आगे आने वाला, कुटिल, निर्धन, नसो के उभार वाला, बुरे कामो मे सलग्न होता है।

मतान्तर - वह धनी, विद्याओ का ज्ञाता, मजबूत, साहसी होता है।

द्वितीय चरण - जातक आकर्षक, सुन्दर वस्त्र धारण करने वाला, भाग्य से उन्नति करने वाला, व्यापार-व्यवसाय मे पहले से ही लाभ-हानि का आकलन करने वाला होता है। बुध से युत हो, तो वकील और गुरु से युत हो, तो प्रशासक, मृदुभाषी, जनप्रिय होता है।

तृतीय चरण - जातक तेजस्वी, सुन्दर, प्रिय वचन बोलकर दूसरो को अपने पक्ष मे करने वाला, प्रतिष्ठित, नाटक-चलचित्र का शौकीन, प्रसिद्धि के शिखर पर होगा।

चतुर्थ चरण - जातक पानी का विशेष प्रेमी, अनुशासन प्रिय, राज्य शासन मे उच्च पदाधिकारी या दण्डाधिकारी, अाध्यात्मवादी, विश्व प्रसिद्ध होता है। वह स्वयं का धर्म स्थापित करेगा और मान-सम्मान पायेगा।

शुक्र :

पू फा शुक्र पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक आकर्षक, सुविधा सम्पन्न होगा।

पू फा शुक्र पर मंगल की दृष्टि हो, तो स्त्रियो की संगति मे पैतृक सम्पत्ति नष्ट करेगा। कई गन्दी आदते होगी।

पू फा शुक्र पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक साहसी, हर प्रकार भाग्यशाली होगा।

पू फा शुक्र पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक दयनीय जीवन व्यतीत करेगा।

पूर्वा फाल्गुनी शुक्र चरण फल

प्रथम चरण - जातक धन-सम्पति युक्त, अभिमानी होने से पीठ पीछे निंदा का पात्र, जरुरतमंदो का सहायक, काम से पीड़ित, पर स्त्री से सम्बन्ध रखने वाला होता है।

द्वितीय चरण - जातक मीठी वाणी से दूसरो को अपने पक्ष मे करने वाला, साधारण बुद्धि होते हुए भी उन्नति करने वाला, सदाचारी होता है। बुध की युति हो, तो वकील होता है।

तृतीय चरण - जातक अत्यंत सुन्दर, प्रेमिका ही पत्नी होने वाली, अल्प सन्तानी या निःसंतान, भौतिक सृमद्धि पाने वाला, धन वैभव से सम्पन्न सौभग्यशाली होता है।

चतुर्थ चरण - जातक आकर्षक, फिजूलखर्ची, ईर्ष्यालु, कठोर, अनुशासन मे रहने वाला और दूसरो को अनुशासन मे रखने वाला अधिकारी होता है। 40 की आयु में आर्थिक कठिनाई होगी।

शनि :

पू फा शनि पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक सुख हीन, क्रोधी, कुकर्मी होगा।

पू फा शनि पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक हंसमुख, राजनीति से धनी होगा।

पू फा शनि पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक बुद्धिमान, विद्याओ का ज्ञाता होगा।

पू फा शनि पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक युद्ध कला कुशल, सम्पत्तिशाली होगा।

पू फा शनि पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक गुणवान, भद्र, सहायक होगा।

पू फा शनि पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक सुनार या धातु व्यापारी, धार्मिक होगा।

पूर्वा फाल्गुनी चरण फल

प्रथम चरण - जातक तुनक मिजाजी, बात-बात पर चिढ़ने वाला, विध्वंसकारी, दूसरो का अहितकर आगे बढ़ने वाला, कठोर, बाल्यकाल मे कष्ट, मंदबुद्धि या पागल या मष्तिष्क रोगी होता है।

द्वितीय चरण - जातक भावुक और दयालु, कटुभाषी, स्पष्ट और वास्तविक तथ्य रखने वाला, सुख और वैभव से तृप्त, बहुत उन्नति करने वाला, लेखक होता है। 50 वर्ष की उम्र के निकट मान्य होगा।

तृतीय चरण - जातक महा विद्वान. कानूनवेत्ता, हानि-लाभ का आकलन कर आगे कदम बढ़ाने वाला, संयम से इन्द्रियो को वश मे रखने वाला, बिना प्रतिफल की चिंता किये जिम्मेदारी वहन करने वाला, असमर्थ होते हुए भी जिम्मेदारी उठाने वाला, ईमानदार सत्यवादी होता है।

चतुर्थ चरण - जातक पीठ पीछे निंदा करने वाला, मीन-मेख निकालने वाला, श्रम के प्रति समर्पित, विलम्ब से सफल होने वाला होता है।

पूर्वा फाल्गुनी राहु चरण फल

प्रथम चरण - जातक संस्था प्रमुख, स्त्री-पुत्र से सुखी, राज्य से लाभ, उद्योगी, मातहतो से काम लेने वाला होता है।

द्वितीय चरण - जातक स्वनिर्मित, व्यापार मे अल्प लाभ, प्रयत्नो से उन्नत परिवार वाला होगा।

तृतीय चरण - भौतिक सुखो की प्राप्ति, वस्त्राभूषण की प्राप्ति, महिलाओ का आकर्षित होना होता है। स्वयं का वाहन, शुक्र से सम्बंधित वस्तुओ से लाभ होगा। विदेश यात्रा होगी। यदि शुक्र नीच का हो, तो अनेक कष्ट और स्त्री के कारण रूकावट तथा अड़चन होगी।

चतुर्थ चरण - राजा से सम्मान, घर-खेत का लाभ, रियल स्टेट से लाभ, विवाहेत्तर अन्य स्त्री से यौन सम्बन्धो के कारण ब्लैक मेल होता है।

पूर्वा फाल्गुनी केतु चरण फल

प्रथम चरण - सर्व मनोरथ की पूर्ति होगी, सुखी, धनी, स्वस्थ, आनंदमय वैवाहिक जीवन होगा।

द्वितीय चरण - फल प्रथम चरण जैसे ही होते है।

तृतीय चरण - जातक ईश्वर के प्रति समर्पित, तीर्थ यात्री, निष्कपट, सत्यवादी, स्त्री के स्वास्थ से परेशान होगा।

चतुर्थ चरण - धन, पुत्र, भूमि का लाभ, बिगड़े काम मे सुधार होगा। 35 वर्ष बाद उन्नति होती है। भोंहो के बीच तीसरी आँख जैसा निशान हो सकता है।

जातक = वह प्राणी जिसका ज्योतिषीय विचार किया जा रहा हो।

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