पुष्य नक्षत्र सम्पूर्ण विवेचन एवं स्थित गृह फलादेश
पुष्य नक्षत्र सम्पूर्ण विवेचन एवं स्थित गृह फलादेश
सन 150 मे टॉलेमी ने 48 तारा समूह प्रतिपादित किये थे। 16 वी और 17 वी शताब्दी मे 41 तारा समूह और जोड़े गये।
सन 1922 मे अंतर्राष्ट्रीय खगोल संध I U A ने 88 तारा समूह की सूची बनाई जो म्यूनिख ज्योतिष संग्रहालय मे अभिरक्षित है। इस सूची मे टॉलमी द्वारा प्रतिपादित 48 तारा मंडल भी है। इन्ही तारा समूह / तारा मंडल को कॉंस्टीलेशन CONSTELLATION कहते है। इनमे उत्तर गोल मे 31, दक्षिण गोल मे 52 और दोनो गोल मे 5 है। भारत मे तारा समूह / तारा मंडल या कॉंस्टीलेशन CONSTELLATION को नक्षत्र कहते है।
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पुष्य नक्षत्र
राशि चक्र मे 93।20 से 106।40 अंश विस्तार के क्षेत्र को पुष्य अथवा पुष्यमि नक्षत्र कहते है। अरब मंजिल मे इसे अल नत्राह अर्थात शेर का नथुना, गीक में इसे कनोपुस और चीनी सियु मे इसे कुई कहते है।
टॉलेमी अनुसार यह उन तारो मे से एक है जिनकी चमक पिछले दो-तीन हजारो साल मे कम हुई है। सूर्य सिद्धांत अनुसार पुष्य का अर्थ पोषित करना अथवा उन्नति देना है। पुष्य को तिष्य अर्थात मंगलकारी तथा सिध्य अर्थात फलता-फूलता या हितकारी के रूप मे भी जाना जाता है।
देवता बृहस्पति, स्वामी ग्रह शनि, राशि कर्क 03।20 से 16 ।40 अंश। भारतीय खगोल मे यह 8 वां लघु संज्ञक नक्षत्र है। इसके तीन तारे है। ये तारे एक सीध मे तीर का आकार प्रदिर्शित करते है। इसे तिष्य या देव नक्षत्र भी कहते है। पुष्य का अर्थ पौषक है। 27 नक्षत्रो मे सबसे प्यारा नक्षत्र माना जाता है। यह शुभ सात्विक पुरुष नक्षत्र है। इसकी जाति क्षत्रिय, योनि छाग, योनि वैर वानर, गण देव, आदि नाड़ी है। यह पूर्व दिशा का स्वामी है।
गुरु
प्रतीकवाद : बृहस्पति / गुरु इसके देवता माने जाते है। ये सुरो (देवो) के आचार्य है। शिव-शंकर की कृपा से इन्हे ग्रहो मे गुरु का स्थान मिला है। ये इन्द्र के उपदेशक अर्थात सलाहकार है। शिव पुराण अनुसार महर्षि अंगिरस और सरूपा के पुत्र है। इनकी तीन पत्निया तारा, ममता, शुभ है। इनका रंग पीला तथा वस्त्र पीले है। ये दीर्घायु, वंशज, न्याय प्रदाता है। ये ईश्वर दिशा यानि उत्तर-पूर्व कोण ईशान के स्वामी है।
⇴ पुष्य नक्षत्र विवाह मे सर्वदा वर्जित है। क्योकि ब्रह्मा जी ने अपनी पुत्री शारदा का विवाह गुरु पुष्य मे करने का निश्चय किया । किन्तु उसके रूप, सौन्दर्य पर स्वंयम मोहित हो गये, इस पशुता के कारण ब्रम्हा जी ने इस योग को शाप देकर विवाह से वर्जित कर दिया। इसलिये गुरु पुष्य मे विवाह नही होते।
पुष्य नक्षत्र-यह आठवां नक्षत्र कर्क राशि के क्षेत्र में पुनर्वसु से अगले 120-20’ में स्थित है। इस नक्षत्र के तारों की संख्या 3 है, जो मिल-जुलकर एक पुष्प/बाण जैसी आकृति बनाते हैं। इस नक्षत्र के देवता गुरु/बृहस्पति तथा स्वामी शनि हैं।
पुष्य नक्षत्र में उत्पन्न पुरुष जातक धर्मात्मा, न्यायप्रिय, विद्वान, शूरवीर तथा भाग्यशाली होता है। वह धनी, माता-पिता का सेवक, वाहन युक्त व स्वस्थ होता है
पुष्य नक्षत्र में जन्मी स्त्री जातक सुन्दर, सौभाग्यवती, अच्छे पुत्र वाली, प्रसिद्ध कर्मा, देव तथा ब्राह्मण का आदर करने वाली, अधिक मित्रों वाली, अच्छे मकान वाली व भाइयों को प्यारी होती है।
विशेषताएं :
इसमे दोनो ग्रह गुरु और शनि का प्रभाव है। इसमे सभी प्रकार की पूजा, प्रार्थना, साधना सफल होती है।
यह आध्यात्मिक परिपक्वता, माता का दूध, नकारात्मकता से सकारात्मकता का कारक है।
इसमे उत्पन्न जातक कभी-कभी हठी, स्वार्थी, दुराग्राही होता है।
इस नक्षत्र में सोना खरीदना शुभ माना जाता है।
यदि रविवार या गुरवार को पुष्य नक्षत्र हो, तो क्रय-विक्रय विशेष शुभ माना जाता है।
श्री राम के अनुज भरत का जन्म नक्षत्र पुष्य था।
पुष्य नक्षत्र फलादेश
जातक मेघावी, मृदुभाषी, आध्यात्मिक, सक्षम, आत्म निर्भर, बौद्धिक गतिविधियो मे प्रवृत्त, बिना शर्त मददगार, वंचितो का समर्थक, स्वार्थियो से सतर्क, सामाजिक कार्यकर्त्ता होता है।
पुष्य जातक देव धर्म को मानने वाला, धनवान, पुत्र युक्त, सुन्दर, शान्त, सुखी होता है। ख़ुशी फैलाने और ऊपर उठाने की भावना इनकी प्रतिभा होती है। अपने और परिवार को राजनीति या सामाजिक कार्य में लगाने के कारण इनका मनमुटाव होता है।
पुष्य का पोषण शिशु को माँ की गोद जैसा है। पुष्य का पोषण पुनर्वसु के विपरीत भौतिक स्तर पर सन्तुष्टि दायक है। पुष्य मे "ब्रम्हवर्चस शक्ति" है, जो दिव्य आशीर्वाद के योग्य बनता है।
पुरुष जातक - जातक सम्मानीय, प्रतिष्ठित, महान, आकर्षक, बुद्धिमान, शक्तिशाली, प्रबल व्यक्तित्व वाला होता है। इनके शरीरिक गठन मे कोई विशेषता नही होती। क्योकि हर व्यक्ति का शारीरिक गठन अलग-अलग होता है। किन्तु इनके शरीर पर तिल, मस्सा, धाव या दाग़ का निशान स्पष्ट दिखता है।
जातक अत्यंत नाजुक, आधात करने योग्य, अच्छे-बुरे प्रभाववश अस्थिर, कठोर निर्णय लेने मे असक्षम, आत्म केंद्रित, सद्व्यवहारी, देव धर्म को मानने वाला, धनवान, पुत्र युक्त, शांत होता है।
जातक चरित्रवान, वाह्य दुनिया के प्रभावो को रोकने मे असमर्थ होता है। सहायता आवश्यक होती है, अन्यथा खाई मे गिरेगा। जातक कर्मठ किन्तु व्यवहारिकता रहित होता है। अस्थिर चित्त होने से भटकने वाला, उपेक्षा करने वालो के साथ विपरीत व्यवहार करने वाला होता है।
पुष्यमी को 15-16 वर्ष की उम्र मे कठिनाइया और रोग होते है। 32 वर्ष तक उथल-पुथल, 33 वर्ष से जीवन स्थिर होता है। जातक का परिवारिक जीवन बचपन से ही कठिनाईओ से भरा होता है। परिवार की आर्थिक व सामाजिक स्थिति कमजोर होती है। दाम्पत्य जीवन मे कारणवश पत्नी और बच्चो से दूर रहना पड़ता है। यह अपनी पत्नी पर भरोषा कम करता है और उसे आत्म निर्भर होने की सलाह देता रहता है। ⋆ पुष्य जातक को विवाह ज्योतिषी की सलाह और सुझाव अनुसार करना चाहिये।
स्त्री जातक - इनके व्यक्तित्व मे उदारता, सम्मान, उत्तमता का पुट रहता है, जिससे इनका व्यक्तित्व प्रभावकारी हो जाता है। स्त्री जातक ठिगनी, गेंहुआ वर्ण, उन्नत मुखड़ा, विकसित देह, मानसिक स्थिरता वाली होती है इस कारण यह मोहक होती है।
स्त्री जातक हृदय से सच्चा प्यार करने वाली, सदाचार और निति मे विश्वास करने वाली, सदमार्गी, भेद्यता योग्य, अज्ञानता मे दूसरो द्वारा दुर्पयोग की जाने वाली, बेमिलनसार, शांतिप्रिय, मानवीय व्यवहारी, उदासीन, चीड़-चिडी होती है। इन्हे भी 15-16 की उम्र मे उतार-चढ़ाव आते है और 32 उम्र वर्ष तक अनिश्चितता रहती है। महत्वपूर्ण शासकीय विभाग मे कार्यरत होती है।
ये भी आज्ञाकारी होती है। बचपन मे कई बाधा आती है, दाम्पत्य जीवन भी बाधा युक्त होता है जिससे अन्य औरतो से विरोधाभास होता है। ये वफादार होती है किन्तु पति द्वारा गलत समझी जाती है।
पुष्य फलादेश आचार्यो अनुसार
पुष्य नक्षत्र के लोग सुभग, सुन्दर, शूरवीर, प्रसिद्ध होने वाले, धर्म के क्षेत्र मे अग्रणी, धनी, दयालु होते है। सच्ची बात कहना और सुनना इनका प्रमुख गुण होता है। ये काम वासना की अधिकता वाले किन्तु अवैध सम्बन्धो से दूर रहने वाले होते है। विविध कलाओ को जानना, प्रशंसा करना, उन्हे परखना, कला रसिक होना इनका अतिरिक्त गुण होता है। ये लोग रूखे न होकर हास-परिहास मे भी कुशल होते है। - पराशर
पुष्य जातक को नौकरो की कमी नही रहती। स्वस्थ शरीर होता है। हर दृष्टि से पुष्टता पुष्य नक्षत्र की मौलिकता है। ये लोग प्रायः शांत मन वाले होते है। - वराहमिहिर
चन्द्र :
चंद्र इस नक्षत्र मे हो, तो जातक धार्मिक, लौकिक, परम्परावादी, मददगार, स्वार्थी, देख-भाल करने वाला, मेघावी, आध्यात्मिक, आत्म निर्भर, धनाढ्य, सेवा प्रदाता होता है। यह घमंडी होता है और जो इसके आदर्शो को नही मानते उनसे अपने को वरिष्ट मानता है।
पुष्य जातक प्राज्ञ, शांति प्रिय, धर्म परायण, जनप्रिय, राजनीतिज्ञ होता है। मूल परिवार से समस्या होती है। 33वर्ष की आयु बाद भाग्योदय होता है। माता से कलह रहता है।
चन्द्र इस नक्षत्र मे शांति, गोपनीय अथवा संस्कारित स्वभाव, अनुग्रही स्वभाव देता है। - वराहमिहिर
सूर्य :
सूर्य इस नक्षत्र में हो, तो जातक मृदुभाषी, सफल अधिकारी, सम्पत्तिवान, मितव्ययी कलाकार होता है।
लग्न :
लग्न इस नक्षत्र मे हो, तो मानवता युक्त, विचारवान, शिष्ट भाषी, धार्मिक, स्वतन्त्र, उच्च स्तरीय संगीत मे उपहार प्राप्त करनेवाला, रचनात्मक होता है।
चरण फलादेश
प्रथम चरण - इसका स्वामी सूर्य है। इसमे चन्द्र, शनि, सूर्य ☾ ♄ ☉ का प्रभाव है। कर्क 93।20 से 96।40 अंश। नवमांश सिंह। यह तीव्र प्रकाश का आकर्षण, उपलब्धता, सम्पदा, सकारात्मकता, पैतृक गर्व का द्योतक है।
जातक लाल गुलाबी कान्ति वाला, बिलाव (बिल्ली) के सामान चेहरा वाला, लम्बे हाथ तथा पैर, विवाह के लिए प्रवासी, कला प्रिय होता है।
जातक जबाबदारी के लिए विश्वनीय, व्यवसायिक जीवन के लिए गंभीर, परिवार के प्रति चिन्तित, विवाह मे अड़चन, दाम्पत्य जीवन दुःखद होता है। कोई-कोई जातक मजदुर होता है।
द्वितीय चरण - इसका स्वामी बुध है। इसमे चन्द्र, शनि, बुध ☾ ♄ ☿ का प्रभाव है। कर्क 96।40 से 100।00 अंश। नवमांश कन्या। यह धैर्य, निरतन्तर उद्योग, शुक्र के आलावा सभी ग्रहो के लाभ का द्योतक है।
जातक सुन्दर नेत्र, सुकुमार कोमल देह, गौर वर्ण, युवती के सामान सुडोल व पुष्ट अंगो वाला, मधुर वाणी युक्त, बुद्धिमान, अालसी लेकिन प्रभावी वक्ता होता है।
नौकर समान कार्यकारी, स्त्री या पुरुष जातक निज सचिव या शासकीय नौकर होते है। स्वास्थ सम्बन्धी बाधा और शरीरिक गड़बड़ी होती है।
तृतीय चरण - इसका स्वामी शुक्र है। इसमे चन्द्र, शनि, शुक्र ☾ ♄
का प्रभाव है।
कर्क 100।00 से 103।20 अंश। नवमांश तुला। यह आराम, सुविधा, समाज प्रियता, अनुकूलता, अनुरूपता, सतही प्रगाढ़ता का द्योतक है।
जातक श्याम वर्णी, स्थूल देह, धनुषाकार भौंहे, सुंदर नाक व आंख, विलासी, क्षीणभाग्य, जाति बन्धु का हित करने वाला होता है।
जातक सामाजिक, यौन क्रिया का इच्छुक, पारिवारिक जीवन की अपेक्षा व्यावसायिक जीवन चाहने वाला, जीवन मे आराम और सुविधा भोगने वाला कार्य के प्रति लगनशील होता है।
चतुर्थ चरण - इसका स्वामी मंगल है। इसमे चन्द्र, शनि, मंगल ☾ ♄
का प्रभाव है।
कर्क 103।20 से 106।40 अंश। नवमांश वृश्चिक। यह स्वर्गीय ज्ञान, अत्याचार, जुल्म, निर्भरता का द्योतक है।
जातक घड़ियाल / घंटे के समान सिर वाला, बाकी तिरछी भौंहे, लंबी भुजाए, सेवारत, अल्पबुद्धि, दुष्कर्मी, असहनशील होता है।
यह चरण विशेष शुभ नही होता, इसमे नक्षत्र के सभी ऋणात्मक लक्षण होते है। जातक की प्रारम्भिक शिक्षा मे स्वास्थ के कारण व्यवधान, युवावस्था मे प्रेम प्रसंग के कारण शिक्षा मे परेशानी होती है। 36 वर्ष की उम्र तक व्यवसाय मे रूकावट अड़चने आती है।
आचार्यो ने चरण फल सूत्र रूप मे कहा है, लेकिन अंतर बहुत है।
यवनाचार्य : पुष्य के पहले चरण मे दीर्घायु, दूसरे मे तस्कर, तीसरे मे योगी, चौथे मे बुद्धिमान होता है।
मानसागराचार्य : पुष्य पहले चरण मे राजा, दूसरे में मुनियो मे श्रेष्ट, तीसरे मे विद्वान, चौथे मे धर्मात्मा होता है।
नक्षत्र चरण ग्रह फल
भारतीय मतानुसार सूर्य, बुध, शुक्र की आपस मे पूर्ण या पाद दृष्टि नही होती है क्योकि सूर्य से बुध 28 अंश, शुक्र 48 अंश से अधिक दूर नही हो सकते।
सूर्य :
✤ पुष्य सूर्य पर चंद्र की दृष्टि हो, तो जातक उद्योगपति, किसी उद्योग या सरकार मे उच्च पद पर होगा। वह जहाजरानी या जल से सम्बन्धित उद्योग भी कर सकता है।
✤ पुष्य सूर्य पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक धनवान, परिवार की समस्याओ से पीड़ित, नासूर या क्षय रोग से पीड़ित होता है।
✤ पुष्य सूर्य पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक सुरक्षा विभाग या राजनीति मे होगा।
✤ पुष्य सूर्य पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक धूर्त व्यक्तित्व वाला, दमा या गैस रोग से पीड़ित होता है। पत्नी की दीर्घायु संदिग्ध होती है।
पुष्य सूर्य चरण फल
पहला चरण - जातक उच्चाधिकारी, शूरवीर, सत्य शिष्ट भाषी, सम्पत्तिवान, कामवासना की प्रबलता वाला किन्तु अवैध सम्बन्धो से पराङमुख, मितव्ययी, कलाकार व कला रसिक होता है।
अन्यत्र - जातक नशे का आदी, पित्त व कफ के असंतुलन से प्रभावित होगा। यदि लग्न मघा नक्षत्र मे हो, तो जातक साधारण व गरीब परिवार मे जन्म लेगा किन्तु उसके पिता की माली हालत मे सुधार होने से आराम दायक जीवन व्यापन करेगा।
दूसरा चरण - जातक सत्य कहने और सुनने वाला, विविध कलाओ का ज्ञाता, धार्मिक होते हुये भी हास-परिहास करने वाला, सेवको और मित्रो युक्त, भूमि और मकानो का स्वामी होगा।
तीसरा चरण - जातक लम्बी देह वाला, परिवार या ग्राम का मुखिया, विवेकशील, धर्म क्षेत्र मे अग्रणी, शत्रुहंता, स्व गुणो से प्रसिद्ध होगा। यदि यह चरण लग्न हो, तो दृष्टिदोष, काना, रोगी हो सकता है।
चतुर्थ चरण - जातक सामान्य शरीर वाला, पत्नी उसके लिए समस्या और उन्नति मे बाधक होगी। पाप कर्म करेगा और बाहरी लोगो का नेता होगा। कामुक किन्तु अवैध सम्बन्धो से दूर रहेगा।
चन्द्र :
✤ पुष्य चन्द्र पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक साहसी, शासकीय सुरक्षा या कानून विभाग मे नौकर होगा।
✤ पुष्य चन्द्र पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक कार्य क्षेत्र का ज्ञानी, माता को संकट कारी, कोई-कोई जातक शरीर के ऊपरी भाग से अपंग होता है ।
✤ पुष्य चन्द्र पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक राजनीति मे प्रसिद्ध, धन, मान-सम्मान से सम्पन्न होगा।
✤ पुष्य चन्द्र पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक विद्वान, शिक्षा संस्थान का अध्यक्ष, माता के प्यार से वंचित होगा। ✤ पुष्य चन्द्र पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक भोग विलास मे लिप्त, धनी मगर धन को अनैतिक कार्यो में खर्च करने वाला, यौन रोगो से पीड़ित होता है।
✤ पुष्य चन्द्र पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक निर्धन, धूर्त, फेफड़ो के रोग से पीड़ित होता है
पुष्य चन्द्र चरण फल
प्रथम चरण - जातक आकर्षक, सुन्दर, योगी, सुन-सुन कर अनेक विषयो का ज्ञाता, सौम्यवृत्ति, सुखी, सोच-समझकर बोलने वाला, कुशल कार्यकर्त्ता, रुखा धार्मिक नही लेकिन हास-परिहास करने वाला, आस्तिक, स्रियो का अनुरागी होता है।
द्वितीय चरण - जातक लौकिक, परम्परावादी लेकिन दकियानुशी नही होता है। यह धनी, प्रसन्नचित्त, मददगार, तेजश्वी, वाकपटु, कार्यकुशल होता है। बरहाल यह घमण्डी और अपने आदर्शो को नही मानाने वालो को अपने से हीन मानता है।
तृतीय चरण - जातक सुखी, सदाचारी, प्रबल कामी परन्तु एक पत्नी वाला, ऐश्वर्यवान, जल या उद्यान के समीप निवास का इच्छुक, धर्मपरायण लेकिन अरूढिवादी, विदेशो मे परिश्रमी, मूल परिवार से समस्या ग्रस्त होता है। स्त्री जातक मे गर्भपात होते है।
चतुर्थ चरण - जातक चंचल मन, दुसरो का धन हडपने वाला, माता से कलह, परिजनो द्वारा बहिष्कृत, पापकर्मी लेकिन बाहरी लोगो का नेता होगा।
मंगल :
✤ पुष्य मंगल पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक वकील या कानून विभाग मे नियुक्त, पित्तविकारी होता है।
✤ पुष्य मंगल पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक की माता उसका देखभाल नही करेगी।
✤ पुष्य मंगल पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक पाप कर्म करने वाला, पारिवारिक सुख हीन, माता को दुखद होगा।
✤ पुष्य मंगल पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक अति विद्वान, राजनीति में प्रसिद्ध होगा।
✤ पुष्य मंगल पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक स्त्रियो से परेशानी लेगा और स्त्रियो पर धन उड़ायेगा।
✤ पुष्य मंगल पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक सरकार या अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठान मे उच्च पद पर होगा।
पुष्य मंगल चरण फल
प्रथम चरण - जातक यात्राओ या परिवहन से धन कमायेगा, तर्क द्वारा दूसरो को कायल करने की शक्ति वाला होगा। उसमे अच्छी जीवन शक्ति और अच्छी जीवन क्षमता होगी। राजवंश मे जन्मा हो सकता है। यदि लग्न इस चरण में हो तो कैंसर होने की सम्भावना रहती है।
द्वितीय चरण - जातक मेहनती होगा परन्तु आय कम होगी। पैतृक संपत्ति गवां देगा। सट्टे मे हानि, अपराधिक अभियोग, बहरा, विवाह देर से होगा। यदि मंगल लग्न मे हो, तो स्त्रियो के विधुरो से यौन सम्बन्ध होगे।
तृतीय चरण - जातक भूगर्भशास्त्र या तत्वमीमांसा मे रुचिवान होगा। शासकीय सेवक हो, तो शीघ्र उन्नति करेगा। तीर्थ यात्रा करेगा। विदेशो मे बसेगा।
चतुर्थ चरण - जातक की माता को छूत का रोग होने से धन खर्च होगा। शिक्षा अधूरी रहेगी। 25 वर्ष की अवस्था मे प्रेम मे निराशा लेकिन 27 वर्ष में प्रेम विवाह होगा।
बुध :
✤ पुष्य बुध पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक आय से अधिक खर्च करने से गरीब, रोग ग्रस्त होता है।
✤ पुष्य बुध पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक अच्छी शिक्षा के बावजूद गैर क़ानूनी कार्य से दण्डित होगा।
✤ पुष्य बुध पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक शास्त्रो और विद्याओ का विद्वान होगा। शासक का कल्याणकारी होगा और उससे धनी होगा।
✤ पुष्य बुध पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक अच्छाई से दूर, भाई-बहनो से कटुता और पत्नी से तक्त्य होगा।
पुष्य बुध चरण फल
प्रथम चरण - जातक पापी, हतोत्साहित, कलह करने वाला, पत्नी सुख से हीन या सुख मे व्यवधान, छोटी अवस्था मे सुन्दर लेकिन 36 वर्ष की अवस्था मे विकृत देही, चतुर, विद्वान, पेट रोगी होगा। यदि बुध अकेला हो, तो स्त्री जातक को ऋतुचक्र मे परेशानी और अनेक गर्भपात होते है। यदि लग्न स्वाति या चित्रा हो, तो महा धनवान, वाहन और भवनो का स्वामी होगा। अनेक मातहत होगे।
द्वितीय चरण - जातक सौम्य, विद्वानो का आदर करने वाला, अथिति प्रेमी, सभा पंडित या सभासद, व्याख्यान देने वाला, अनेक विषयो का ज्ञाता होता है।
अन्यत्र - जातक निजीसचिव, सीक्रेट एजेन्ट या विजिलेन्स या सुरक्षा विभाग (जहा पूर्ण विश्वास की आवश्यकता हो) कार्यस्थ होता है। यदि शनि से युत हो तो जल विभाग मे इंजिनियर होगा।
तृतीय चरण - जातक भाग्यशाली, धनी, उदार, मित्र और विद्वानो का आदर करने वाला, मुंशी, विलासी, नृत्य-संगीत प्रेमी, अत्यधिक रतिसुख मे लिप्त, शासक, काव्य स्रष्टा होता है। स्त्री जातक नृत्य, संगीत, अभिनय से कमायेगी लेकिन उसका चरित्र संदिग्ध होगा।
चतुर्थ चरण - जातक बुद्धिमान लेकिन माध्यमिक तक शिक्षित, स्त्री सुख से युक्त, परोपकारी, दूसरो की मदद करने वाला, जीवन मे रचनात्मक कार्य करने वाला होता है। कोई-कोई जातक व्यसनी, कार्यच्युत होता है।
गुरु :
✤ पुष्य गुरु पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक विद्वान, विभाग अध्यक्ष होगा। यदि गुरु निर्बल हो, तो पत्नी की मृत्यु बाद दूसरा विवाह करेगा।
✤ पुष्य गुरु पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक बहुत धनवान, पत्नी, संतान, भवन, भूमि आदि युक्त होगा और सुखद जीवन व्यतीत करेगा।
✤ पुष्य गुरु पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक विद्वान और धनवान होगा। विवाह शीघ्र होगा।
✤ पुष्य गुरु पर बुध की दृष्टि हो, तो परिजनो से सम्मान, परिवार की देखभाल करने वाला होगा। कुछ जातक राजनीति प्रसिद्ध होते है।
✤ पुष्य गुरु पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक अपेक्षित धन कमायेगा। उसकी अनेक पत्निया होगी या अनेक स्त्रियो से रति संबन्ध होगे। हृदय रोगी होगा।
✤ पुष्य गुरु पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक गांव या कस्बे का मुखिया होगा।
पुष्य गुरु चरण फल
प्रथम चरण - पुष्य के प्रथम चरण मे गुरु अशुभ फल देता है। जातक दुष्ट, गरम स्वभाव वाला, कुकर्मो मे सलग्न, अल्पबुद्धि, निर्बल, निर्धन, चरित्रहीन, उद्विग्न, नीच संगति प्रिय होता है। आचार्यो ने कुष्ठ रोग होना भी बताया है।
⇴ मतान्तर - जातक विभिन्न शास्त्र व विज्ञान मे विद्वान होगा। अवसर पाने पर मदिरा और धूम्रपान करेगा।
द्वितीय चरण - जातक सुन्दर, दयालु, सुन्दर वेशभूषा का शौकीन, गुणी, माता-पिता का भक्त, नौकरी मे उच्च पद पर या पेट्रोलियम पदार्थो का उत्पाक या आयातक-निर्यातक होगा।
तृतीय चरण - जातक तेजश्वी, हर दृष्टि से पुष्ट, सदाचारी, प्रतिष्ठित, विश्वासपात्र, लोकमान्य, यशस्वी, आदरपात्र होता है। कोई-कोई जातक के विवाह मे बाधा या विलम्ब होता है। वह पथरी, अल्सर, दमा, कैंसर से पीड़ित होगा। कृषि से आय होगी। वह बांध या भवन निर्माण मे इंजीनियर हो सकता है।
चतुर्थ चरण - जातक गणितज्ञ, शिल्पज्ञ, व्यसन प्रिय, विद्वान, वाद्य रसिक, वंश का नाम रोशन करने वाला होगा। वह कुशल इंजीनियर, पेट्रोलियम पदार्थो का व्यवसायी होगा।
शुक्र :
✤ पुष्य शुक्र पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक आकर्षक, द्वि माता वाला, अल्प संतानी, सुखी होगा।
✤ पुष्य शुक्र पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक ललित कलाओ मे रुचिवान होगा और इन्ही से आजीविका करेगा।
✤ पुष्य शुक्र पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक जीवन के सभी सुख पायेगा।
✤ पुष्य शुक्र पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक गरीब, बदसूरत, रक्त विकारी, लकवा ग्रस्त, हृदय रोगी होगा।
पुष्य शुक्र चरण फल
प्रथम चरण - जातक डरपोक, अकर्मण्य, आलसी, षड्यंत्रकारी, आडम्बर करने वाला, लोक तिरष्कृत, दुश्चरित्र, शत्रु से भयभीत रहता है। कोई-कोई जातक परोपकारी, नेत्र विकारी, लब्धप्रतिष्ठित, सज्जन, एवम सफल कार्य संचालक होता है।
* मतान्तर - जातक व्यवसाय मे होगा तो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार या पर्यटन अभिकर्ता या देश का प्रतिनिधि होगा। स्त्री जातक नर्स या एयर होस्टेस या कलाकार होगी।
द्वितीय चरण - जातक काम पीड़ित, घृणित रोग से पीड़ित, बुद्धिमान, अनेक विशेषताओ से युक्त होगा। नर और नारी दोनो मे विपरीत लिंग को आकर्षित करने की चुंबकीय शक्ति होगी।
तृतीय चरण - जातक कायर, प्रेम प्रसंग मे निराश, पशु पालन या मुर्गी पालन से हानि, जन्म स्थान मे अभागा होगा। शिक्षा अधूरी रहेगी।
चतुर्थ चरण - जातक परनिन्दा और चुगली करने वाला, दुराचारी, अश्लील भाषी, दुश्चरित्र, रक्त रोगी होता है।
* मतान्तर - जातक भिक्षुक, दार्शनिक, विज्ञानी, चिंतनशील, आध्यात्म ज्ञान का जानकर होता है। पारिवारिक जीवन खतरे मे होता है। विवाह विलम्ब से होता है। पत्नी रोगिणी रहती है।
शनि :
✤ पुष्य शनि पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक का बचपन दयनीय, पिता की देखभाल से वंचित, ननिहाल मे पालन पोषण होगा।
✤ पुष्य शनि पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो मध्यम शिक्षा, माता को कष्ट, भाईओ द्वारा घर से निष्काषित होगा।
✤ पुष्य शनि पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक सेहतमंद, दौलतमंद, जीवन के सभी एसो-आराम प्राप्त करेगा।
✤ पुष्य शनि पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक समाज के लिए अच्छे कार्य करेगा। क्रोधी, चीड़-चिड़ा होगा।
✤ पुष्य शनि पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक भवन, वाहन, संपत्ति, पत्नी, संतान से संपन्न, कर्तव्यनिष्ट होगा।
✤ पुष्य शनि पर शुक्र की दृष्टि हो, तो कुरूप लेकिन व्यवहारशील, माता के लिए कष्टकारी, स्वयं सुखी होगा।
पुष्य शनि चरण फल
प्रथम चरण - यहा शनि अशुभ फल दायक है। जातक तुनुक मिजाजी, महा क्रोधी, स्वार्थी, विध्वंसकारी, विद्वानो से दूर रहने वाला, शत्रुओ से पराजित होता है।
द्वितीय चरण - जातक सुख वैभव युक्त, उदार, बहार से शेर मगर अंदर से चूहा (कायर) होगा। बचपन मे दिमागी रोगी या विकलांग हो सकता है।
तृतीय चरण - जातक प्रियदर्शी, विद्वान वैज्ञानिक, उच्च शिक्षा प्राप्तक, आविष्कारक, सरकारी संस्थान मे उच्च पदाधिकारी, धूर्त, चालक, धृष्ट (बेशर्म) भवन सामग्री विक्रेता होता है।
चतुर्थ चरण - जातक पर निंदा करने वाला, ख़मिया निकालने वाला, ननिहाल मे पालित, अनाथ बचपन फिर भी आर्थिक या मानसिक परेशानी नही महसूस करने वाला, माता-पिता से विमुख, निकट सम्बन्धी से विरासत मिलेगी, लेकिन सामान्य धनी होगा।
पुष्य राहु चरण फल
प्रथम चरण - जातक मध्यम शिक्षित, काव्य रचना मे प्रवीण होता है। काव्य रचना बचपन के कष्टो से प्रेरित होती है। प्रेम सम्बन्धो मे निराशा के कारण स्त्रियो से घृणा करेगा परन्तु बाद में बदलाव होकर सुखी वैवाहिक जीवन व्यतीत करेगा।
द्वितीय चरण - जातक पशुओ या दूध उत्पादन से आजीविका करेगा। जमीन-जायदाद, दो पत्नी होगी। यदि मंगल की दृष्टि होगी तो उच्च शिक्षा प्राप्तक, ऊंचे पद पर होगा। इस चरण मे राहु के अनिष्टकारी प्रभाव नही होगे।
तृतीय चरण - जातक लेखन, प्रकाशन, शोध कार्य से प्रसिद्ध होगा। शरीर मे विशेषकर हाथ पैर मे अपंगता, जलीय रोग, रक्त विकार होगे । कुछ मामलो मे सफ़ेद दाग होते है।
चतुर्थ चरण - जातक असाधारण रूप से प्रसिद्ध लेकिन धन अर्जित करने से वंचित, वैवाहिक जीवन लयभंग होगा। माता-पिता की दीर्घायु संदिग्ध होती है। फेफड़ो के रोग, नेत्र रोग होते है।
पुष्य केतु चरण फल
प्रथम चरण - केतु इस चरण मे अशुभ फल दायक है। जातक अपने घर से भाग जायेगा और राह में बहुत कष्ट पायेगा। बहुत समय तक घरेलू नौकर रहेगा। धीरे-धीरे उसे सम्मानित काम मिलेगा।
द्वितीय चरण - जातक बुरे मित्रो की संगति मे पैतृक सम्पत्ति नष्ट करेगा। माता तथा गृह सम्पत्ति के लिए संकट उत्पन्न करेगा। परिवार की भलाई के लिये चिंतित होगा। दो विवाह होगे।
तृतीय चरण - जातक असाध्य रोगग्रस्त, ऋणी, धक्के खाने वाला होगा। 10 वर्ष तक दूर जाकर रहेगा और धन प्राप्त करेगा, जिससे वह शान-शौकत से रहेगा, पश्चात वह धन हड़प लिया जायगा, जिससे वह पूर्व स्थिति मे पहुंच जायगा। यदि गुरु मकर राशि में होगा तो सारा धन नही खोयेगा।
चतुर्थ चरण - जातक मशीनी कार्य में व्यस्त रहेगा। धन अर्जित करेगा लेकिन बुरी स्त्रियो की सोबत मे नष्ट कर देगा जिससे पत्नी कष्ट उठायेगी। लेकिन 40 वर्ष की उम्र के बाद वह सुखी वैवाहिक जीवन व्यतीत करेगा।
जातक = वह प्राणी जिसका ज्योतिषीय विचार किया जा रहा हो।
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