आर्द्रा नक्षत्र सम्पूर्ण विवेचन एवं गृह स्थित फलादेश

 आर्द्रा नक्षत्र सम्पूर्ण  विवेचन एवं गृह स्थित फलादेश


राशि चक्र मे 6640 से 8000 अंश तक विस्तार वाला क्षेत्र आर्द्रा नक्षत्र कहलाता है। अरब मे इसे अल हन 'ह ग्रीक मे इसे बेतेलग्युज़े तथा चीन सियु मे शेन कहते है। आर्द्रा हिन्दू तंत्र के अनुसार हीरे की तरह चमकता दो तारो का समूह, अरबी तंत्र मे दो तारो और चीनी तंत्र मे कई तारो का समूह है।   इसके देवता रूद्र आंधी और विनाश के स्वामी, स्नायु तंत्र के नियंत्रक, इन्द्र के अनुज है।

 यह शिव (जगत कल्याणकारी) का दूसरा रूप रूद्र (जगत विनाशकारी) भैरव  है।

देवता रूद्र, स्वामी राहु, राशि मिथुन 0640 से 2000 अंश।  राशि स्वामी बुध।

भारतीय खगोल मे यह 6 ठा तीक्ष्ण, दारुण संज्ञक नक्षत्र है।  इसका एक तारा है।  इसे अरुद्र भी कहते है।  आर्द्रा का अर्थ भाग्य देवी है। आर्द्रा यानि छठा होता है।  संस्कृत आर्द्र (अर्द+रक्) = गिला, नमीदार, सीला, हरा, रशिला, ताजा, मृदु, कोमल। सूर्य जब आर्द्रा नक्षत्र पर होता है तब पृथ्वी रजस्वला से होती है, जिसे आर्तव या अम्बोबची कहते है।  आर्द्रा का अर्थ गिला अथवा पानी से भीगा है, जिसे भाग्य कहते है। यह शुभ राजसिक स्त्री नक्षत्र है। इसकी जाति शूद्र है।  योनि श्वान, योनि वैर वानर, गण राक्षस, नाड़ी अन्त्य है। यह उत्तर दिशा का स्वामी है।

रूद्र

प्रतीकवाद - रूद्र ऋग्वेदिक देवता है जो वायु या तूफान और शिकार, संहार के द्योतक है। ऋग्वेद मे शक्तियो मे महा शक्तिशाली देवता के रूप मे रूद्र की स्तुति की गई है। रूद्र के बारे मे तीन ऋचा और लगभग 75 सन्दर्भ ऋग्वेद मे है। यजुर्वेद मे श्री रुद्रम स्त्रोत्र रूद्र को समर्पित है जो शैव्य सम्प्रदाय मे महत्वपूर्ण है।  हिन्दू शिव और रूद्र की कई विशेषताएं सामान मानते है। रूद्र के गुण सूचक विशेषण के रूप मे शिव (दयालु) उद्भूत हुए। वैदिक युग के बाद रूद्र और शिव एक दूसरे के पर्याय बन गए तथा दोनो नाम एक दूसरे के लिए उपयोग आने लगे।

भगवान शिव 11 रूद्र के रूप मे ऋषि कश्यप की पत्नी सुरभि के गर्भ से पृथ्वी पर अवतरित हुए। ये ग्यारह रूद्र 1 कपाली, 2 पिंगल, 3 भीम, 4 विरुपाक्ष, 5 विलोहित, 6 शास्त्र, 7 अजपाद, 8 अर्हिबुध्न्य, 9 शम्भू  10 चाँद 11 भव है।  शिव एक ओर दयालुता तो दूसरी ओर रूद्र भयानकता के प्रतीक है यही गुण आर्द्रा नक्षत्र मे विध्यमान है।

विशेषताए - रूद्र से क्लेश, दुःख और अत्याचार या उत्पीड़िन, क्रोध, शक्ल की भयंकरता या कोलाहल का डरावनापन सब आर्द्रा मे आते है।  आर्द्रा मे जन्मा जातक तेज, बलवान, बलिदान से लाभी, स्थिर, रोगी, भयभीत, क्रोधी होता है।

आर्द्रा नक्षत्र-आर्द्रा नक्षत्र छठा नक्षत्र है। यह मिथुन राशि के क्षेत्र में, मृगशिरा से अगले 13-20’ में स्थित है। इसका एक ही तारा है जो मणि के आकार का है। (सूर्य जब इस नक्षत्र में प्रवेश करता है तब वर्षा होने से भूमि गीली या आर्द्र हो जाती है। अतः इसे आर्द्रा कहा गया है)-इस नक्षत्र के देवता रुद्र (शिव) हैं और इसका स्वामी राहू है (सम्भवतः इसीलिए राहू संबंधी बहुत से दान लाल किताब में शिवलिंग पर समर्पित करने के निर्देश हैं)।

                आर्द्रा नक्षत्र में जन्म लेने वाला पुरुष जातक अभिमानी, मूर्ख और सुस्त होता है। प्रायः ऐसा जातक क्रोधी, निर्दयी, स्वार्थी और दुर्बल शरीर का होता है।

                आर्द्रा नक्षत्र में जन्म लेने वाली स्त्री जातक दुष्टा, क्रोधा, कफ-पित्त प्रकृति की, अधिक व्यय करने वाली किन्तु महाविद्वान होती है। उसे शत्रु पक्ष से दूषित होने का पूर्ण भय/सम्भावना रहती है।

आर्द्रा फलादेश

आर्द्रा यानि भाग्य देवी होता है।  इसके दो रूप एक रूद्र के कारण धनात्मक और दूसरा राहु के कारण ऋणात्मक  है, जातक मे दोनो गुण-दोष पाये जाते है।  जातक अंदर से नरमदिल और बाहर से कठोर होता है।

जातक आक्रामक, कठिन जीवन, त्यागी, निर्दयी या कठोर, निर्मोही, द्वेषीला, अहंकारी, विद्वान्, कृतध्न, शठ, पापी, धन-धान्य से हीन, कुबुद्धि, मलिन होता है।

पुरुष जातक -  यह विशिष्ट शारीरिक गठन वाला मोटा या पतला, लम्बा या ठिगना होता है जो भीड़ मे भी आसानी से पहचाना जा सकता है।  जातक प्रभावपूर्ण व्यक्तित्व वाला, स्थिर चित्त, प्रफुल्ल, फिक्रमंद, चाहत और मनोरंजन सही स्थान पर देने वाला, विद्वान, सूझबूझ वाला, सलाहकार, मनोविशेषज्ञ, जबाबदार होता है। ये गुण-दोष ग्रहाे की स्थति अनुसार कम या ज्यादा होते है।

जातक अपने स्नेही के करीब होता है और उनकी मदद भी करता है, यदि वे भी ऐसा करे तो अपने को धन्य मानता है।  व्यक्तित्व मे कठोर और नरमी के कारण व्यवहार मे उतर चढ़ाव होता है। ग्रहो की स्थति के कारण बाधा बहुत होती है परन्तु हिम्मत से गन्तव्य तक पहुंच जाते है। जातक मे प्रत्येक कार्य करने की क्षमता होती है, विडम्बना यह है कि इसके कार्य की प्रशंसा नही होती है। vknZzk u{k=&vknZzk u{k= NBk u{k= gSA ;g feFkqu jkf'k ds {ks= esa] e`xf'kjk ls vxys 13°&20* esa fLFkr gSA bldk ,d gh rkjk gS tks ef.k ds vkdkj dk gSA ¼lw;Z tc bl u{k= esa ços'k djrk gS rc o"kkZ gksus ls Hkwfe xhyh ;k vknZz gks tkrh gSA vr% bls vknZzk dgk x;k gS½&bl u{k= ds nsork #æ ¼f'ko½ gSa vkSj bldk Lokeh jkgw gS ¼lEHkor% blhfy, jkgw laca/kh cgqr ls nku yky fdrkc esa f'kofyax ij lefiZr djus ds funsZ'k gSa½A

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व्यवसाय के कारण परिवार से दूर रहता है।  32 से 42 वर्ष की उम्र मे उन्नति के शिखर पर होता है। दाम्पत्य जीवन मे बाधाऐ आती है जिससे घर में शान्ति और खुशहाली नही रहती है।  वैवाहिक जीवन की समस्या जीवन पर्यन्त रहती है परन्तु जातक शान्त रहता है और प्रकट नही करता है। विवाह देर से होता है और यदि जल्दी हो जाता है, तो वैमनस्यता के कारण पत्नी से दूर रहना पड़ता है। भौतिक परिवर्तन 36 के बाद होते है।

स्त्री जातक - इसका शारीरिक गठन अन्य स्त्रियो से भिन्न होता है जिससे यह अलग से पहचानी जा सकती है। यह सुन्दर मनमोहक उन्नत नाक वाली होती है।  स्त्री जातक स्नेह और प्रेम की वाहक, शरीफ, दयालु होती है। यह कठोर तथा शक्तिशाली व स्पष्टवादी होने से निर्दयता मे भी अपने को नाजुक और मुर्ख प्रतीत नही होने देती है। यह स्नेही से लगाव और उसकी मददगार, सजीव, प्रफुल्ल होती है, जहा जाती है वहा मनोरंजन और प्रसन्नता देती है। दूसरो की गलती और कमजोरियो पर मुंह पर निंदा करने वाली निडर होती है।

स्त्री जातक बुद्धिमान, समझदार, शिक्षित, अन्वेषण और विज्ञान मे अग्रणी, यदा-कदा कारणवश नीरस और रूखी, इलेक्ट्रॉनिक्स या औषधि विभाग मे कार्यरत होती है।  पारवारिक जीवन कष्टो से भरा होता है।  घर मे आनन्द व सामान विचारधारा नही होती है। पति से मधुरता नही रहती और न परिवार मे अच्छी पत्नी होती है। विवाह देर से होता है यदि विवाह जल्दी हो जाता है, तो वैवाहिक जीवन मुश्किलो से भरा होता है कभी-कभी तलाक भी  हो जाता है। माता-पिता से भी सहयोग नहीं मिलता है।

आचार्यो अनुसार फलादेश

आर्द्रा जातक मे आक्रामकता, प्रहार क्षमता, स्वयम को सही मानने का स्वभाव, अहंकार की सीमा मे प्रविष्ट स्वाभिमान होता है।  स्त्री को हीन समझना लेकिन स्वयं की प्रशंसा मिलती हो, तो आदर प्रकट करना इनका स्वाभाव होता है। दूसरो की अनुशासन हीनता से चिंताग्रस्त गांव और शहर की चिंता मे अपना खून जलाते है।

जातक की कठोरता और विद्रोही स्वर, तीव्र क्रोध इनकी मुख्य पहचान होते है। - वराहमिहिर   

जातक क्रय-विक्रय मे निपुण लेकिन व्यापार मे अनाड़ी, मन्त्रानुष्ठान मे कुशल, महा कामी होता है। - नारद

यदि नक्षत्र अशुभ प्रभाव मे हो और मंगल युक्त हो, तो इनमे परधन और परस्त्री की लोलुपता आ जाती है। ये व्यक्ति के सम्पूर्ण चरित्र पर ही मूल्याकन करने वाले, विक्षेप पर दुःखी और रास्ता बदल लेने वाले होते है।  

चन्द्र :

चन्द्र आर्द्रा नक्षत्र पर हो, तो जातक जानकारी का प्यासा, उत्सुक, लेखक, संचारकर्ता, भाषण व्यवसायी,  चतुर, कृतघ्न, धोखेबाज, विनाशक, विनाश से नया बनाने वाला, जीर्णोद्धार करने वाला या सुधारक होता है।

ये गणितज्ञ, ठन्डे, दुराग्रही, हठी, नियंत्रणकारी, उग्र स्वभावी परन्तु शक्तिशाली होते है। ये धार्मिक प्रवृत्ति वाले, कानून में फसने वाले, वासनायुक्त, आलसी, भावुक भी होते है।

इस नक्षत्र पर चन्द्र प्रभाव मिथ्या, कमजोरी या शीतलता, अकृत्यज्ञता, अकृतघ्नता, झूठा अभिमान का कारक है।  - वराहमिहिर

सूर्य :

सूर्य आर्द्रा मे हो, तो जातक सामाजिक, राजनीतिज्ञ, छिद्रान्वेषी, चालाक, अस्थिर, चंचल, बईमान, अशान्त होता है।  यह माना जाता है कि सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र पर होने पर पृथ्वी को रजोधर्म या आर्तव होता है।

लग्न :

 लग्न आर्द्रा नक्षत्र मे हो, तो जातक लेखक, संचारशील, विद्वान, तेज दिमाग. भाषण व्यवसायी, निपुण, कृतघ्न, दगाबाज होता है।

आर्द्रा चरण फल

प्रथम चरण - इसका स्वामी गुरु है।  इसमे बुध, राहु, गुरु का प्रभाव है। राशि मिथुन 6640 से 7000  अंश।  नवमांश धनु।  यह खोज-बीन, भौतिकवाद, प्रसन्नता का द्योतक है।

जातक रक्त वर्ण, समशरीर, सुन्दर नाक, लम्बा चेहरा, घनी तीखी भौहे वाला होता है।  वाणी प्रभावी व चातुर्यपूर्ण होती है। जातक के मन मे हमेशा संक्षोभ होता है जिससे दुविधा के कारण कुछ निश्चित नही कर पता है अतः इस तूफान के निवारण के लिए ध्यान करना चाहिए।

द्वितीय चरण - इसका स्वामी शनि है।  इसमे बुध, राहु, शनि का प्रभाव है। राशि मिथुन 7000 से 7320 अंश।  नवमांश मकर।  यह भौतिकवाद, निराशा, कष्ट का द्योतक है।

जातक की भौंहे सुन्दर, बदन इकहरा, हल्का कृष्ण वर्ण, छोटा चहेरा, दीर्घ वक्ष, यौन वासना युक्त होता है। यह चरण अत्यधिक भ्रष्टाचार का द्योतक है।  आर्द्रा नक्षत्र की ऋणात्मक विशेषता इस चरण मे सबसे ज्यादा होती है  परन्तु जातक व्यवहारिक और भौतिक होता है। बुध और शनि शुभ स्थान में हो, तो भौतिकता कड़ी मेहनत के 32 वर्ष की उम्र पश्चात प्राप्त होती है।

तृतीय चरण - इसका स्वामी शनि है।  इसमे बुध, राहु, शनि का प्रभाव है। राशि मिथुन 7320 से 7640 अंश।  नवमांश कुम्भ। यह विज्ञान, शोध, प्रोत्साहन, मानसिक गतिविधि का द्योतक है।

जातक बड़ा मुंह, बड़ा वक्ष, मोटी कमर, लम्बी भुजा वाला, स्थूल सर वाला, कपटी, दुष्ट, उभरी शिराएं वाला, आँखो से मन की बात जानना कठिन होता है। जातक सामाजिक कार्यकर्त्ता, व्यक्तियो का शरीरिक रूप से मददगार, कर्मठ, तेज दिमाग वाला होता है।

चतुर्थ चरण - इसका स्वामी गुरु है।  इसमे बुध, राहु, गुरु    का प्रभाव है।  राशि मिथुन 7640 से 8000 अंश।  नवमांश मीन।  यह संवेदना, अनुकम्पा, शांति का द्योतक है।

जातक मादक नयन, वाचाल, चौड़ा ललाट, बलिष्ठ शरीर, गुलाबी होंठ, पीले दांत, जुआरी, दुष्ट व निरर्थक प्रलापी होता है।  जातक भावुक, हास्यास्पद, दानी, बिना हिचकिचाहट के दूसरो धन से मददगार, स्थिर दिमाग, लाभदायक गतिविधियो मे सलग्न रहता है।

आचार्यो ने चरण फल सूत्र रूप मे कहा है परन्तु फलित मे अंतर बहुत है।

यवनाचार्य : आर्द्रा के प्रथम चरण मे खर्चीला, द्वितीय मे दरिद्री, तृतीय मे अल्पायु, चतुर्थ मे तस्कर होता है।

मानसागराचार्य : आर्द्रा के पहले पाद मे कटुभाषी, दूसरे मे धनवान, तीसरे मे भाग्यवान चौथे मे धन-धन्य भोगी होता है।

आर्द्रा ग्रह चरण फल

भारतीय मत से सूर्य, बुध, शुक्र की आपसी पूर्ण या पाद दृष्टि नही होती क्योकि सूर्य से बुध 28 अंश और शुक्र 48 अंश से अधिक दूर नही हो सकते है।

सूर्य :

आर्द्रा मे सूर्य चन्द्र से दृष्ट हो, तो जातक को रिश्तेदारो से कष्ट, आजीविका के लिए घर छोड़ना पड़ता है।

आर्द्रा मे सूर्य मंगल से दृष्ट हो, तो जातक आलसी, शत्रुओ से कष्ट होता है।

आर्द्रा मे सूर्य गुरु से दृष्ट हो, तो जातक मंत्र-तंत्र विशेषज्ञ, घुमक्कड़ (यायावर)  परिवार सुख अल्प होता है।

आर्द्रा मे सूर्य शनि से दृष्ट हो, तो जातक चालक, धूर्त, स्त्री द्वारा अपमानित होता है।

आर्द्रा सूर्य चरण फल

प्रथम चरण - जातक उच्च शिक्षावान, धनाढ्य, प्रसिद्ध ज्योतिषी, अंक गणितज्ञ, लेखापाल होता है।  यदि इस पाद मे सूर्य बुध गुरु की युति हो, तो जुड़वा संतति होती है।  यदि शुक्र से युत हो, तो जातक रक्षा या आरक्षी विभाग मे कार्यरत होता है, वृद्धावस्था मे दृष्टि दोष से पीड़ित होता है।

द्वितीय चरण - जातक ठिठोलिया, शिक्षित, परिहासजनक, स्नेही, मृदुभाषी, परिवार का स्नेह भाजक होता है। यदि गुरु से युत हो, तो मन्त्री या उच्च पद पर शासकीय अधिकारी होता है।  यदि शनि से युत हो, तो धातु शोधक,  पत्नी और संतान के लिए खतरनाक होता है।

तृतीय चरण - अनेक संकायो मे मेघावी, 40 वर्ष की उम्र पश्चात् पुरुष / स्त्री जातक प्रतिष्ठित ज्योतिषी, इसे नियमित आमदनी कोषालय या वित्त सलाहकार या मुनीम से होती है।

चतुर्थ चरण - जातक महान शास्त्रज्ञ, चरित्रवान, सफल ज्योतिषी, 39 वर्ष पश्चात् धनाढ्य, प्रसिद्ध होता है।  पुरुषजातक का 25 वे वर्ष और स्त्री जातक का 23 वे वर्ष मे विवाह होता है।

चन्द्र :

आर्द्रा मे चन्द्र सूर्य से दृष्ट हो, तो जातक  तत्व मीमांसा मे ज्ञानी, सम्पत्ति विहीन होता है।  

आर्द्रा मे चन्द्र मंगल से दृष्ट हो, तो जातक मेघावी और लम्बा होता है।

आर्द्रा मे चन्द्र बुध से दृष्ट हो, तो शासकीय सहायता प्राप्त होती है।

आर्द्रा मे चन्द्र गुरु से दृष्ट हो, तो जातक अध्यापक या व्याख्याता होता है।

आर्द्रा मे चन्द्र शुक्र से दृष्ट हो, तो जीवन मे सुख, सुविधा, भोग, विलास की प्राप्ति होती है।

आर्द्रा मे चन्द्र शनि से दृष्ट हो, तो जातक गरीब होता है।

आर्द्रा चंद्र चरण फल

पहला चरण - जातक चिड़चिड़ा, कठोर हृदयी होता है।  यदि मंगल से युति हो, तो तत्व मीमांसक, चमड़ा व्यापारी, कुम्हार होता है।  रेवती लग्न हो और चंद्र - गुरु की युति हो, तो महा धनी होगा।

द्वितीय चरण - जातक यांत्रिक शुक्र से युति हो, तो विशिष्ट संगीतकार, वाद्य वादक, दमा रोगी होता है।

तृतीय चरण - जातक विद्वान, प्रसन्नचित्त, वाकपटु, वक्ता होता है।  यदि लग्न रोहिणी मे हो तो विशाल बचत होती है।  यदि चन्द्र इस चरण मे हो और लग्न रोहिणी या कृतिका हो, तो सहोदर मस्तिष्क रोगी होते है।

चतुर्थ चरण - जातक फिजूल खर्ची, दूषित शिक्षा वाला, सन्मार्ग से धनाढ्य, ईश्वर भक्त, विचारो मे मतभेद होने के कारण पारिवारिक सुख विहीन होता है। प्रायः पुरुष नौकरी मे पत्नी से निम्न श्रेणी में होता है जिसका पश्चाताप पत्नी को बाद मे होता है।  इससे स्पस्ट है कि पति पत्नी दोनो एक ही विभाग में कार्यरत होते है।

मंगल :

आर्द्रा मे मंगल सूर्य से दृष्ट हो, तो जातक धन सम्पन्न, लकड़ी उद्योग या आरक्षी विभाग मे कार्यरत होता है। 

आर्द्रा मे मंगल चन्द्र से दृष्ट हो, तो जातक सेना या पुलिस मे होगा, नीच स्त्रियो की संगति मे रस लेगा और विभिन्न यौन रोगो से ग्रस्त रहेगा।

आर्द्रा मे मंगल बुध से दृष्ट हो, तो जातक निपुण ज्योतिषी, पत्नी संतान के साथ सुखी जीवन व्यापन करेगा।

आर्द्रा मे मंगल गुरु  से दृष्ट हो, तो जातक लेखक या प्रकाशक होगा, सुखी जीवन व्यतीत करेगा।

आर्द्रा मे मंगल शुक्र से दृष्ट हो, तो जातक की पत्नी उससे उच्च पद पर होगी और ज्यादा कमायेगी।

आर्द्रा मे मंगल शनि से दृष्ट हो, तो जातक धूर्त और दास होता है लेकिन पत्नी सुसंस्कृत होती है।

आर्द्रा मंगल चरण फल

प्रथम चरण - जातक को विशेष भोज और पेय पदार्थो का सुख प्राप्त होता है इस कारण कोई-कोई जातक नशे का आदी हो जाता है।  ऐसा व्यक्ति बहुत बलशाली, लड़ाई-झगडे का उत्सुक, सौभाग्यशाली, वाहन युक्त होता है।  स्वाभाव से धीर व एक राह पकड़ कर चलने वाला होता है।

मतान्तर - जातक विद्वान, विदेशो मे बसने का इच्छुक, कवि होता है।  यदि लग्न कृतिका या रोहिणी हो, तो जुड़वा संतान का खतरा और पत्नी रोगिणी होती है।

द्वितीय चरण - जातक आलोचक, परधन व परस्त्री लोलुप, पाप कर्म करने वाला, दुसरो के दोष देखने वाला, नुक्ता-चीनी करने वाला, गुप्त रोगो से पीड़ित, अपनी प्रियतमा से दूर रहने वाला या स्त्रियो से दोयम दर्जे का व्यवहार करने वाला, कृतध्न, बात-बात पर गुस्सा होने वाला होता है।

  मतान्तर - जातक विद्या, साहस, धन से संपन्न होता है। वनवासी, लकड़हारा, वनाधिकारी या लकड़ी का व्यापारी होता है।

तृतीय चरण - जातक महा क्रोधी, स्त्रियो को पुरुषो से हीन समझने वाला किन्तु स्वयं की प्रशंसा मिले तो स्त्रियो का आदर दिखाने वाला होता है। ये लोग व्यर्थ की बकवास करने वाले, वाचाल, प्रबल कामी होते है।

मतान्तर - जातक काव्य व गणित निपुण, सरकारी कार्य से विदेशो में नियुक्त लेकिन वृद्धावस्था अभिसप्त होती है।

चतुर्थ चरण - जातक अनुशासन प्रिय, अनुशाशन हीनता देख कर दुःखी होने वाला, बलशाली, साहसी, शांतिप्रिय लेकिन क्रोधी, किसी विषय का विशेषज्ञ होता है।

मतान्तर - जातक कानून या रसायन या ज्योतिष की उच्च शिक्षा प्राप्त करेगा।  आग्नेयास्त्र से खतरा होता है।  मोटापा के कारण रोगो की सम्भावना रहती है।

बुध :

आर्द्रा मे बुध चन्द्र से दृष्ट हो, तो जातक गांव या शहर मे कुशल प्रशासक, जनता द्वारा सम्मानित होता है।

आर्द्रा मे बुध मंगल से दृष्ट हो, तो जातक प्रशासक होगा।

आर्द्रा मे बुध गुरु से दृष्ट हो, तो जातक धनी, मेघावी, लेखाकार, वित्तीय दलाल होगा।

आर्द्रा मे बुध शनि से दृष्ट हो, तो जातक सदव्यवहारी और सम्मानी होगा।

आर्द्रा बुध चरण फल

प्रथम चरण - व्यक्ति सौम्य, धन-धान्य से सुखी, समाज और गांव मे सम्मानित, हरफनमौला, ज्योतिष मे निपुण, वेद-शास्त्रो मे विद्वान होता है।  ये लोग क्रय-विक्रय मे निपुण किन्तु व्यापार-व्यवसाय में माहिर नही होते है। जातक के दो से अधिक स्त्रियो से काम सम्बन्ध होते है।

द्वितीय चरण - व्यक्ति समाज और धर्म  विरोधी कार्यो मे मसगुल,  हरफनमौला, वाचाल, मृदुभाषी, उच्च कोटि का ज्योतिषी, पुत्र संतति बहुल होता है।

तृतीय चरण - जातक श्रेष्ट गुणो से युक्त होता है।  यदि लग्न भी इस चरण में हो, तो बहुत ही मांगलिक परिणाम होते है जैसे धन का भण्डार, अच्छा परिवार होता है।

चतुर्थ चरण - जातक सुखी सम्मानित होता है।  फिजूल खर्च नही करता है और जीवन मे प्रचुर संपत्ति इकट्ठी कर लेता है। इसे अनेक प्रकार के लाभ होते है।  सुमित्रो से युक्त, सदाचारी, शीलयुक्त होता है।  प्रथम चरण के फल भी मिलते है।

गुरु :

गुरु यदि सूर्य से दृष्ट हो, तो जातक संतान, पत्नी, धन-दौलत, मान-सम्मान से संपन्न होगा।

गुरु यदि चन्द्र से दृष्ट हो, तो जातक गांव या शहर का मुखिया, सहकारी संस्था का अध्यक्ष होगा।

गुरु यदि मंगल से दृष्ट हो, तो जातक वाहन या वायुयान सेवा मे होगा।

गुरु यदि बुध से दृष्ट हो, तो जातक गणितज्ञ व ज्योतिषी होगा।

गुरु यदि शुक्र से दृष्ट हो, तो प्रचुर धन संचय करेगा लेकिन उसका उपयोग और उपभोग नही कर सकेगा।

गुरु यदि शनि से दृष्ट हो, तो वह लाखो मे एक होगा जिसे अच्छी पत्नी अच्छी संतान, धन-दौलत, मान-सम्मान - मर्यादा प्राप्त होगे।

आर्द्रा गुरु चरण फल

प्रथम चरण - जातक पराक्रमी व भोग विलास से युक्त, स्त्री-पुत्र सुख से युक्त, शास्त्रार्थ में निपुण, सुरुचि संपन्न, सज्जन, नगर विकास के लिए चिंतित, स्वाभिमानी, अनुशासन प्रिय होता है।  वह अध्यापक या अभिभाषक या प्रवक्ता होता है।

द्वितीय चरण - जातक मंत्री या विभाग अध्यक्ष होगा।  उसकी संतान कर्त्तव्यनिष्ठ होगी।

तृतीय चरण - जातक स्वयम को सही मानने वाला, अहंकारी, शासन से असंरक्षित, गाँव या शहर की उन्नति के बारे में चिंतित, किंचित क्रोधी होता है।  यदि 15 वर्ष की आयु के पहले गुरु की दशा हो, तो हर क्षेत्र मे कष्ट होता है। विवाह बाद मानसिक और आर्थिक ठहराव आता है।

चतुर्थ चरण - जातक विकास के कार्यो मे सलग्न, राज्य पदाधिकारी, सृजन करने वाला, गुस्सैल किन्तु शीघ्र शांत होने वाला, सुखी, विषयो का ज्ञाता, प्रमुख होता है। लग्न इस चरण में हो, तो टिकाऊ और शांतिपूर्ण विवाह होगा।

शुक्र :

शुक्र यदि चन्द्र से दृष्ट हो, तो जातक संकोची होगा अपने विचार प्रकट नही कर पाने के कारण गलत समझा जायेगा।  प्रतिजाति मे प्रसिद्ध होगा।

शुक्र यदि मंगल से दृष्ट हो, तो जातक भाग्यवान होगा।

शुक्र यदि गुरु से दृष्ट हो, तो जातक बुद्धिमान, उच्च शिक्षा प्राप्त, सेवक युक्त होगा।

शुक्र यदि शनि से दृष्ट हो, तो जातक यौन सम्बन्धो के कारण यौन रोगो से ग्रस्त, परिवार से तक्त्य होगा।

आर्द्रा शुक्र चरण फल

प्रथम चरण- जातक विद्वानो और स्त्रियो का सम्मान करने वाला, धर्म ग्रंथो पर शोध करने वाला, विवेकशील, सरकारी अधिकारियो का कृपापात्र, देव और दानवी क्रत्यो मे अंतर समझने वाला होता है।

पुरुष जातक विज्ञान के क्षेत्र मे उच्च शिक्षा प्राप्त करेगा तथा संगीत व कला मे रूचि लेगा।  स्त्री जातक यदि शुभ ग्रहो की दृष्टि नही हो, तो वेश्यावृत्ति करेगी।

द्वितीय चरण - जातक मध्यम कद, बुद्धिमान, आकर्षक, दीर्घायु होगा।  संसर्गजनित रोगो से ग्रस्त होगा और परिवार सुख से वंचित रहेगा। नीच जनो से कष्ट पायेगा।  केमिकल इंजीनियर हो सकता है। यदि बुध से दृष्ट हो तो सफल वैवाहिक जीवन जियेगा।

तृतीय चरण - जातक विद्वान, धनी, धार्मिक, धर्मिक अनुष्ठान परम्परा ढंग से सम्पन्न करने वाला, सरकार से लाभ व स्त्रियो से हानि उठायेगा।

चतुर्थ चरण - जातक धार्मिक, मंत्रानुष्ठान मे कुशल, शास्त्रज्ञ, प्रबल काम वासना युक्त,  भोग-विलासी, बलवान, अभिनेता या संगीतकार होता है।  जातक ललित कला, अभिनय, संगीत मे प्रचुर धन अर्जित करता है। आयु के चौथे दशक से जीवन सुचारु होता है।

शनि :

शनि यदि सूर्य  से दृष्ट हो, तो जातक के पिता से मधुर सम्बन्ध नही होगे और न पिता से कोई लाभ मिलेगा।

शनि यदि चन्द्र से दृष्ट हो, तो  विधवा बहन जातक पर निर्भर होगी।

शनि यदि मंगल से दृष्ट हो, तो उसके सहोदर और पैतृक संपत्ति को खतरा होगा।

शनि यदि बुध से दृष्ट हो, तो  उच्च शिक्षा प्राप्त, वैज्ञानिक संस्थान मे नियुक्त, लेकिन जीवन सुखी नही होगा।

शनि यदि गुरु से दृष्ट हो, तो जातक सरकार से लाभान्वित और सबसे सम्मानित होगा।

शनि यदि शुक्र से दृष्ट हो, तो जातक सुनार अथवा धातुओ का दलाल, दो पत्नियो वाला होगा।

आर्द्रा शनि चरण फल

प्रथम चरण - जातक कर्ज मे डूबा रहेगा, नीच कर्म करेगा।  कोई-कोई जातक चोर, तस्कर, बेशर्म होगा और छिपता फिरेगा।

द्वितीय चरण - जातक धन संपत्ति हडपने वाला, पिता से बेसहारा, पुजारी होगा।  यदि चन्द्रमा की दृष्टि हो, तो समुदाय का नेता, धन तथा प्रसिद्धि प्राप्त करने वाला होगा।  केवल चन्द्र की दृष्टि होने पर ही शनि शुभ फल देगा।

तृतीय चरण - जातक ऐश्वर्यशाली, उदार, राजनीति या समाज मे प्रमुख, प्रतिव्रता पत्नी युक्त होता है।  यदि शनि हीन बलि हो, तो भी शुभ फल देता है।

मतान्तर - जातक बुरी सोबत मे पड़ेगा।  तंगहाल होगा और बदमाशो का सरदार होगा।  पत्नी से सम्बन्ध मधुर नही होगे।

चतुर्थ चरण -  जातक शास्त्रो में हेर-फेर करने वाला, कपटी, दुराचारी, पाखण्ड करने वाला, पत्नी की अनैतिक आय पर निर्भर, सुख- संपत्ति रहित होता है।  शराब और अदालती मामलों में उलझा रहेगा और सजा होगी।

आर्द्रा राहु चरण फल

प्रथम चरण - जातक कृष्णवर्णी, घमण्डी, धर्म को महत्व नही देने वाला, झांसेबाज होता है।  अनेक प्रेम सम्बन्ध रखने वाला, प्रचुर धन कमाकर जुवा और स्त्रियो में धन लुटाने वाला होता है।

द्वितीय चरण - कलहकारी, चित्तभंग, मन मे क्लेश, बातूनी, चरित्रहीन,  अहंकार से शत्रु बनाने वाला,  बचपन मे दुर्घटना ग्रस्त होगा।

तृतीय चरण - परदेशगमन, गांव या शहर का मुखिया, स्त्री से अप्रसन्न, अन्य स्त्रियो में रत, अस्थिर चित्त होगा।

चतुर्थ चरण - जातक आस्तिक, अच्छे कुल वाला, ललित कला प्रिय, शांत, सब कार्यो मे दक्ष, योगाभ्यासी, मंत्र-तंत्र का ज्ञाता होता है।  शिक्षा मे व्यवधान किन्तु बाद में पूरी होती है।

आर्द्रा केतु चरण फल

प्रथम चरण - राज्यकोप, कोर्ट-कचहरी से परेशानी, धन नाश, अनेक रोग, धूर्त, उपकार नही मानने वाला, सरकार से निन्दित, मध्यमायु होगा।  पत्नी या तो रोगिणी या उसकी 36 वर्ष आयु पहले मृत्यु होगी।

द्वितीय चरण - पदच्युत, परिवार मे कलह, धनहानि, स्त्री-पुत्र या परिवार से वियोग, लड़का स्वाभाव का होता है।

तृतीय चरण - कृषि सम्बंधित व्यवसाय या कृषि कर्मी, मुक़दमे मे भूमि गँवा देने वाला होगा।  वैवाहिक जीवन कलहपूर्ण और बच्चो की असामयिक मृत्यु होगी। 

चतुर्थ चरण - जातक कान के रोगो से पीड़ित, अधिकतर प्रवास पर, पिता से सहायता हीन, पैतृक संपत्ति गँवा देने वाला होगा।  शरीर से विकलांग और विष दिए जाने का खतरा होता है।

जातक = वह प्राणी जिसका ज्योतिषीय विचार किया जा रहा हो।

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आर्द्रा नक्षत्र: आर्द्रा नक्षत्र पौराणिक परिचय राशि आकाश मंडल मे छठे लारा समूह का नाम है आओ, जिसका विस्तार क्षेत्र 60.40 डिग्री से 80.00 डिग्री तक निर्धारित है। यह नमन मिथुन राशि का मध्यवती नसर। आद्रा नक्षत्र को 'अरब मन्जिल' में 'अल-हनाह' यानी खम्बा तथा श्रीक भाषा में बीदलेगेज, 'सान' चाइनीज भाषा में कहा जाता है। हिन्दू ज्योतिषानुसार आय नक्षत्र का एक ही तारा है, जो कि मणि रत्ल की भांति चमकता राता है, परंतु अरबी लोग इस पर वो तारों का निवास मानते हैं। चीनी प्रथा के अनुसार इसमें अनेक तारे है। आमा अर्थ होता है गीला' या आई हल्के जल कणों से युक्त। इस नक्षत्र का अधिदेवता रुद्र यानी महाकाल शिव है। रुद्र देवता विनाश यानी भासी भूत करने वाले कहे गए हैं। शरीर में स्नायु तंत्र का स्वामी आा, महाराजा इन्द्र का छोटा आर्द्रा नक्षत्र में जन्में जातकों का सामान्य परिचय पुरुष जातक शारीरिक संरचना यह देखा गया है कि देशकाल और वातावरण के अनुसार, आर्द्रा नक्षत्र के पुरुष विभिन्न ढांचे के पाए जाते हैं। कुछ लोग बहुत दुबले-पतले और छोटे कद के होते हैं, जबकि कुछ बहुत मोटे-तगड़े, विशालकाय होते हैं। कुछ का ढांचा मध्यम, चेहरा बुझा हुआ अथवा नसें उभरी हुई, दुबले-पतले हाथ-पैर, सांवला या गेहुंआ रंग होता है। चरित्र गुण तथा सामान्य घटनाक्रम बाल्यकाल में आ जातक आज्ञाकारी तथा हर कार्य को तत्परता से निभाने वाले होते । है। मित्र समुदाय में अथवा सार्वजनिक सभा में ऐसे लोग विनोदी स्वभाव के या सबका आकर्षित करने वाले हाते हैं। वे अच्छे मनोवैज्ञानिक आदि हो सकते हैं। इस नक्षत्र में जन्में जातक मित्र और संबंधियों से बहुत मधुर संबंध बना लेते है । कुछ मामलों में यह भी देखा गया है कि व्यक्ति अत्यधिक स्वार्थी व स्वजनों के प्रति रखने वाले, कृतघ्न, लालची तथा अस्थिर मन-मस्तिष्क वाले होते हैं। आर्थिक स्रोत और व्यवसाय में जन्मे जातक हर जगह अपनी टोग अड़ाने की चेष्टा करते हैं। इस कारण विषय का पूर्ण ज्ञान न होने से वे 'अन्यों में काणा राजा' कहलाते हैं। किसी प्रकार जिक कार्य से वे यश, धन नहीं बटोर सकते। अपने लक्ष्य से गिर जाने परदे कायों से धन कमाने की चेष्टा करते हैं। ऐसे जातक प्रत्येक कार्य में पहले उत्साह दिखाते हैं, बाद में छोटी-सी समस्या से घबराकर मैदान छोड़ने की सोच है। इन सब असफलताओं से उनके अन्दर हीन भावना पैदा हो जाती है। फलतः परिवार में अप्रिय, झगड़ालू अलग-अलग बैठे रहने वाले अथवा मौजूद स्थान से पलायन करके विदेश या दूसरे शहर में चले जाते हैं। यह भी देखा गया है कि संघर्षमय समय के दौरान या फिर किसी मानसिक तनाव एवं आर्थिक कष्ट से पीड़ित रहने पर भी इनका दिमाग अत्यधिक शीतल और व्यवहार संतुलित रहता है। इसी विशेषता के कारण कभी-कभी दूसरे लोग इनके धैर्य की दाद् देते हैं। सदा ही एक लीक पर चलना या एक-सा कार्य करना, इन्हें अच्छा नहीं लगता, कई बार एक साथ कई काम हाथ में ले लेते हैं। कभी-कभार इनको जब महसस होता है कि इनके नेक इरादे दूसरों के लिए परेशानी का कारण हैं तो ये संबंधित लोगों से बोलचाल बंद कर देते हैं। इनकी अवधारणा से दूसरा व्यक्ति इनका प्रबल आलोचक या शात्रु बना जाता है। किसी भी क्षेत्र में थोड़े समय बाद ही ऊब जाने से व्यवसाय या बापार घाटे का सौदा साबित होता है। समाज कार्यों में भी इनका दखल रहता है, परंतु धन बटोरने के मामले में इन्हें बदनाम होना पड़ता है। यही कारण है कि इनकी मध्यावस्था भयंकर उतार-चढ़ाव से गुजरती है। जहां तक संभव हो सके, अनुसंधान कार्य, लेखा, नियोजन या यातायात व्यवस्था, कमीशन एजेन्सी या रख-रखाव जैसे कार्यों में हाथ आजमान चाहिए। चलचित्र फोटोग्राफी, तस्करी, जादूगरी या निम्न-स्तर के साहित्यिक कार्य में इनके लिए चुनिंदा व्यवसाय हैं। आमतौर पर आर्द्रा जातक अपने जन्मस्थान से दूर या विदेश में आजीविका प्राप्त कर हैं। 32 से 42 वर्ष के मध्य बार-बार उतार-चढ़ाव आते हैं। 36 वर्ष के बाद स्थिरता आ लगती है। जीवन के अन्तिम भाग में ये घरेलू कार्यों में अथवा सामाजिक कार्यों में व्यस रहकर धन कमाते हैं।गृहस्थ जीवन इन जातकों का विवाह देरी से होता है। अगर समय पर हो भी जाए तो इन्हें अपने परिवार से अलग रहना पड़ता है या फिर जीवन-साथी से विचार-वैमनस्य बढ़ जाने से दांपत्य सुख नाम मात्र रह जाता है। परिस्थितिवश अथवा दूसरों की सलाह न मानने से ये सदैव संकटों से घिरे रहते हैं, परंतु इनके व्यवहार में कुछ भी ऐसा नजर नहीं आता, जिससे दूसरा व्यक्ति इन पर दया करे । इनकी पत्नी का, इन पर पूरा निय परतु अपन परिवार स विशुद्ध रहन का इनका आदत-सा बन जाती जाने से असाय स्वास्थ्य आर्द्रा जातको को ऐसे रोग हो सकते हैं, जो समय पर नहीं देखे जाने से जाते हैं। उदाहरणतः हाथ-पैर सुन्न पड़ जाने से लकवा, हृदय रोग तथा दंत विका अतिरिक्त अस्थमा, काली-खांसी, कान दर्द, मूर्छा, बुखार या मियादी बुखार लक्षण हैं। महिला जातक शारीरिक संरचना सुन्दर, आकर्षक, देहयष्टि वाली आर्दा महिलाएं, चमकदार आंखों व चेहरे से युक्त सुन्दर दंतावाली तथा सधी हुई नाक और कुछ-कुछ घंघराले केर्शों से युक्त सदा ही सज-सवरकर रहने वाली, कर्मठ आचरण की होती है। चरित्र गुण तथा सामान्य घटनाएं आर्दा महिलाएं शांतिप्रिय एवं सुसंस्कृत, खर्चीले स्वभाव की होती हैं। यद्यपि वह, बुद्धिमान एवं सहायता करने में निपुण, परंतु दोषदर्शी भी होती है। अगर अश्विनी नक्षत्र में लग्न हो तो सौतेला पिता अथवा माता होने की संभावना रहती है। शिक्षा, आर्थिक स्रोत और व्यवसाय आर्दा महिलाएं उच्च शिक्षा प्राप्त, विज्ञान अथवा गणित लेखा कार्य में निपुण होती हैं। बहुत-सी आर्दा महिलाएं, इलेक्ट्रोनिक्स, सिनेमा, टी.वी. आदि क्षेत्रों से संबंधित तकनीकी व्यवसाय में रुचि रखती हैं। नर्सिंग प्रशिक्षण, सर्वे कार्य अथवा कला रेखांकन से भी इन्हें आजीविका मिल सकती है। गृहस्थ जीवन इनका विवाह भी काफी उम बाद अचानक होता है, परंतु पति या पति के परिस इन्हें पूर्ण स्नेह नहीं मिलता। इनका दांपत्य जीवन काँटों से भरा होता है। संतान की वांछित सुख नहीं दे पाती या तो वे असमय में विधवा हो जाती हैं या तलाकशता । हो जाता है या तलाकशुदा भी हो सकती है। स्वास्थ्य अनेक प्रकार के शारीरिक कष्टों से भरी आर्दा महिलाएं गुप्त रोगों से पीड़ित रहती हैं। चेहरे पर सफेद दाग, खून की कमी, स्नायु विकार, कर्ण अथवा दंत रोग, फोड़े-फुन्सी एवं प्रसव काल में ऑपरेशन संभव है। कुछ महिलाएं कुलटा, चरित्रहीन, बहिष्कृत अथवा अनाथाश्रम या नारी निकेतन में रहने वाली होती हैं। 6. आर्द्रा नक्षत्र और आपका स्वभाव आप पुरुष हैं तो-आप शरीर से स्वस्थ एवं सुन्दर होते हैं। आप निष्कपट, मधुरभाषी, तेजस्वी एवं अच्छे आलोचक होते हैं। पर्यटन में आपकी रुचि रहती है। निन्दनीय कार्य या झूठ का सहारा लेकर धन कमाते हैं। कभी-कभी आपके कारण पारिवारिक कलह भी हो जाती है। आर्थिक स्थिति सामान्य ही रहती है। गुप्त विद्याओं के ज्ञाता एवं नशीले पदार्थों के सेवन में तत्पर रहते हैं। कभी व्याभिचारी तो कभी एहसान फरामोश बन जाते हैं। आप शारीरिक चोट या शीघ्र पतन के रोग से कष्ट उठाते हैं। आप स्त्री हैं तो-आप घमंडी, दूसरों में दोष ढूंढने वाली, कफ-पित्तादि रोगों से ग्रस्त, ढीठ, कलह करने बाली, एहसान न मानने वाली, कटु वचन बोलने वाली एवं नीच कार्यों में रुचि रखती हैं। घूमने-फिरने की शौकीन एवं साहित्य के क्षेत्र में असफल होती हैं। इस नक्षत्र में उत्पन्न स्त्री में सन्तान उत्पादक क्षमता कम होती है या होती ही नहीं है। कभी-कभी कुछ ऐसा कर बैठती हैं जिसके कारण घर में कलह हो जाती है। बहस्पति : आर्द्रा नक्षत्र के बृहस्पति को सूर्य देखे तो व्यक्ति धन, पुत्र एवं आदर्श से युक्त सबके मध्य सम्मानित होता है। चन्द्रमा देखे तो व्यक्ति नगर अथवा ग्राम मखिया या सरकारी संगठन में विशेष पद प्राप्त करता है। अगर मंगल की दृष्टि हो। व्यक्ति ऑटोमोबाइल्स अथवा यातायात सेवा में या फिर हवाई सेवा से धन कमाने वाल होता है। अगर बुध देखे तो व्यक्ति गणितज्ञ अथवा ज्योतिषी होता है। अगर शुक्र की टीम हो तो व्यक्ति कलात्मक कार्यों से धन कमाता है, परंतु उस धन का सुख नहीं भोग सकता अगर शनि की दृष्टि हो तो लाखों में एक होता है। वह आदर्श पत्नी और ख्याति कमाने वाले पुत्रों से युक्त होता है, परंतु उसके पास धन अधिक नहीं होता। बृहस्पति आर्द्रा नक्षत्र के प्रथम चरण में हो तो वह कई विषयों का जानकार, साहित्य कला में निपुण, अध्ययन-अध्यापन करने वाला, चिकित्सक, वकील आदि बन सकता है। इस व्यक्ति में दूसरों का काम करने की क्षमता होती है। उसे उदर रोग तथा हृदय रोग हो सकते हैं। द्वितीय चरण में बृहस्पति हो तो व्यक्ति उच्च पदाधिकारी, मंत्री अथवा किसी विभाग का अध्यक्ष तथा आज्ञाकारी संतान से युक्त होता है। तीसरे चरण में बृहस्पति हो तो 15 वर्ष तक अनेक कष्ट होते हैं। उसे विवाहोपरान्त ही मानसिक एवं व्यवसायिक स्थिरता मिलती है। वह वात रोग, कमर या जंघाओं के रोग से पीड़ित होता है। चतुर्थ चरण में अगर बृहस्पति हो तो व्यक्ति विवाहोपरांत भाग्योदय देखता है। मध्यावस्था में वह अपनी बुद्धि से उन्नति करने वाला, हजारों में एक कहा जाता है। इसे प्लूरेसी अथवा कंठ और हृदय रोग की संभावना रहती है। 6. आद्रा नक्षत्र सम्बन्धी कार्य एवं व्यवसाय आबा नक्षत्र का स्वामी ग्रह राहु है और यह नक्षत्र मिथुन राशि स्वामी बुध ग्रह से भी प्रभावित होता है। आप तान्त्रिक, मान्त्रिक, ओझा, पुस्तक-विक्रेता, डाक विभाग, कर्मचारी, लेखन-कार्य, मदिरा उद्योग, हस्तरेखा विशेषज्ञ, फोटोग्राफी, जादूगर, अपराध विज्ञान विशेषज्ञ, जासूस, पुलिस विभाग, सेना, आलोचक, भविष्यवक्ता, चारे-से का व्यापार, टेलीफोन विभाग, भूगर्भवेत्ता, स्टोर कीपर, आकाशवाणी कर्मचारी, विज्ञापन एजेन्सी, अनुसन्धान कर्ता, बुनाई कार्य, कारीगर, सूदखोर, टूरिस्ट गाईड, एकाउन्टेण्ट, सांख्यिकी विभाग, वैद्य, बीड़ी-सिगरेट विक्रेता, घुमक्कड़, जाली, बुनाई कार्य, यातायात, विज्ञापन, निन्दनीय कार्य सम्बन्धी कार्यों को करके सफलता सहित अपना जीवनयापन कर सकते हैं।

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