उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र सम्पूर्ण विवेचन एवं गृह स्थित फलादेश
उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र सम्पूर्ण विवेचन एवं गृह स्थित फलादेश
स्थिर तारो के वास्तविक आकार अंको द्वारा निर्दिष्ट किये गये है जो उनके परिमाण के द्योतक है। प्रथम परिमाण वाले तारे आकाश मे सबसे ज्यादा चमकदार है अन्य परिमाण वाले तारे पंद्रह परिमाण तक है। नग्न आंखो से केवल छह परिमाण वाले तारे ही देखे जा सकते है।
रात्रि मे नग्न आंखो से लगभग 6000 - 6800 तारे ही दृश्य है। उत्तरी आकाश मे 35 अंश दक्षिण क्रांति तक प्रथम परिमाण के 14 तारे, द्वितीय परिमाण के 48 तारे, तृतीय परिमाण के 152 तारे, चतुर्थ परिमाण के 313 तारे और पंचम तथा षष्ट परिमाण के 2010 तारे दृश्य है। इसी प्रकार दक्षिणी आकाश मे दक्षिणी ध्रुव पर नग्न आंखो से लगभग 2000 तारे ही दृश्य है। बड़े शहरो मे प्रकाश और वायु प्रदुषण के कारण 300 से 500 तारे ही दृश्य होते है।
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उत्तरा फाल्गुनी
राशि चक्र मे 146।40 से 160।00 अंश विस्तार का क्षेत्र उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र है। अरब मंजिल मे इसे अल सरफाह अर्थात मोड़, ग्रीक मे डेनेबोला, चीनी सियु मे येन कहते है। पूर्वा फाल्गुनी की भांती इसके भी दो तारे पलंग के दो पायो की आकृति बनाते है। उत्तरा फाल्गुनी के अधिष्ठाता 12 आदित्यो मे से एक आर्यमान है। देवता अर्यमा, स्वामी ग्रह सूर्य, राशि सिंह 26।40 से कन्या 10।00 अंश। भारतीय खगोल मे यह 12 वा नक्षत्र ध्रुव संज्ञक है। यह शुभ, विद्यादाता, राजसिक स्त्री नक्षत्र है। इसकी जाति क्षत्रिय, योनि गौ, योनि वैर व्याघ्र, गण मनुष्य, नाड़ी मध्य है। यह पूर्व दिशा का स्वामी है।
अर्यमा
प्रतीकवाद : इसके देवता अर्यमा दूसरे आदित्य है। ये संरक्षण, सहायता, अनुग्रह, स्नेह के देवता है। ये वैदिक मास माधव, चन्द्र मास वैशाख है। इनके सिद्ध पुलह, यश अथौजा, गन्धर्व नारद, अप्सरा पूजिकास्थली, रक्षा प्रहेती नाग कच्चनिर है। इन्हे पितरो का मुखिया भी मानते है। श्रीकृष्ण ने भगवत गीता अध्याय 10 श्लोक 29 मे कहा है "मे पितरो मे अर्यमा हू" इन्हे आर्यो का संरक्षक मानने का भ्रम हो जाता है।
उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र-उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र बारहवां नक्षत्र है। यह पूर्वाफाल्गुनी से अगले 13-20’ पर स्थित है। इसका पहला चरण सिंह राशि के क्षेत्र में तथा अंतिम तीन चरण कन्या राशि के क्षेत्र में पड़ते हैं। इस नक्षत्र के तारों की संख्या भी दो है, जो मिल-जुलकर एक पलंग की आकृति बनाते हैं। इस नक्षत्र के देवता अर्यमा (सूर्य का एक रूप विशेष) तथा स्वामी सूर्य हैं।
उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में जन्म लेने वाला पुरुष जातक धनी, दानी, उच्च पद वाला, धर्मात्मा, निडर, वीर, प्रसिद्ध, सम्मानित व उदार होता है।
उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में जन्मी स्त्री जातक स्थिरचित्त, धन-पुत्र आदि से युक्त,व्यसनों व रोगों से रहित, ग्रह कार्यों में दक्ष तथा नीति प्रचारक होती है।
विशेषताएं : उत्तरा फाल्गुनी यानि पश्चात अर्थात उत्तराँचल की लालिमा है। इसमे महाभारत के महारथी अर्जुन का जन्म हुआ था। यह घनिष्ठ मित्र है और विवाह या विवाह प्रस्ताव का कारक है। जातक यौन रहस्यवाद, तंत्र, कानून और न्याय, दूसरो की पीड़ा निवारण, आध्यात्म और आध्यात्मिक दुनिया मे रुचिवान होता है।
उत्तरा फाल्गुनी हस्तिया CELEBRITIES
महारथी अर्जुन - महाभारत, भारत।
सुभाष चन्द्र बोष - संस्थापक आज़ाद हिन्द फौज।
सोफिया लॉरेन - मशहूर इटालियन सिने तरीका।
एफ डी रूजवेल्ट - 32 वे राष्टपति अमेरिका।
बी चर्चिल - ब्रिट्रिस प्रधान मंत्री।
जार्ज वाशिंगटन - अमेरिका खोज कर्ता।
नक्षत्र फलादेश
उत्तरा फाल्गुनी के गुणदोष पूर्वा फाल्गुनी जैसे ही है। अंतर केवल सूर्य के कारण है। प्रकाश दायक, तीक्ष्ण, क्रूर, भाग्य दायक सूर्य के प्रभाव इस नक्षत्र मे होते है। यह संरक्षण, सहायता का नक्षत्र है। प्रेम, विवाह, रिश्तेदारी, आनंद का प्रतीक है। इसलिए जातक यौन रहस्य या तन्त्र-मन्त्र मे रुचिवान होता है।
जातक चुम्कीय व्यक्तित्व वाला, प्रसिद्ध, कानून और न्याय का रखवाला, विघ्नहर्ता, आध्यात्म और तत्व मीमांसा मे रुचिवान, नियंत्रक, बहुत अधिक जिद्दी होता है।
जातक विवाह से खुश, पारिवारिक, मानवता प्रेमी, विवाह की उलझन सुलझाने हेतु दूसरो पर निर्भर, नम्र, साहसी, स्नेही, मददगार, शस्त्र विद्या मे निपुण, लोकप्रिय, धनाढ्य होता है।
पुरुष जातक - जातक मे सब सकारात्मक छाया होती है। जातक सुन्दर, गठीला, कुछ मोटा, लम्बी नाक वाला, कुलीन होता है। गर्दन के दाहिनी ओर मस्सा होता है। जातक सौभाग्यशाली, सुमार्गी, शुद्ध आत्मा, ईमानदार निष्कपट होता है। ये विपरीत मार्गी से अधीर, रोष पूर्ण हो जाते है फिर इन्हे समझाना मुश्किल होता है। अपने कठोर स्वभाव के लिये बाद मे पछताते है और क्षमा मांगते है। देवी सामीप्य मे विश्वास रखते है।
जातक स्वतंत्रता प्रिय, जहा जन सम्पर्क और संचार हो वहा से अच्छा धन अर्जित करने वाला, वायदे का पक्का, खुला वातावरण प्रिय होने से लेखक, अध्यापक, अन्वेषणकर्ता होता है। कुछ जातक गणितज्ञ, ज्योतिषी, खगोलवेत्ता, इन्जीनियर भी होते है। इन्हे अध्यापन से अच्छा धनोपार्जन होता है।
32 वर्ष तक जीवन अड़चनो से भरा होता है, बाद मे 38 वर्ष से धीरे-धीरे उन्नति होते 62 उम्र वर्ष तक स्थिर और स्थाई उन्नति होती है। सबसे प्रचुर उन्नति 50 वर्ष तक होती है। जातक का वैवाहिक जीवन परम सुखी और पारिवारिक जीवन शांति पूर्ण होता है।
स्त्री जातक - जातक भव्य दिखावट वाली, सुन्दर, मध्यम कद, गेंहुआ रंग, कोमलांगिणी, कुछ बड़ी नाक वाली होती है। इसे दिख सकने वाली जगह पर मस्सा होता है। पुरुष जातक की सब सकारात्मक छाया इसमे होती है। इनका जीवन आनन्दमय, संतोषपूर्ण, चमकदार होता है।
स्त्री जातक शान्त प्राणी, कोमल, दया की मूरत, निष्ठावान, ईमान और सत्य की कठोर अनुयायी होती है। छल कपट की स्थति मे उग्र और कठोर हो जाती है। पुरुष जातक के भाँति अपनी गलती स्वीकार नही करती है और बाद मे अपने दुर्व्यवहार के लिये पश्चाताप करती है। यह कुशल गृहणी होती है, दूसरे इससे ईर्ष्या करते है।
➧ स्त्री - पुरुष जातक पति-पत्नी हो, तो "सोने पर सुहागा" होता है।
नक्षत्र फल आचार्यो अनुसार
उत्तरा फाल्गुनी के देवता अर्यमा नामक सूर्य है। जातक सूर्य के समान तेजस्वी, सब पर छा जाने वाला, अपने बल-बुते पर खूब धन कमाने वाला, अर्थ का उपभोग करने वाला, सुखी होता है। - वरामिहिर
जातक कुशलता से शत्रुओ को परास्त करने वाला, कविता रचने की शक्ति वाला होता है। प्रायः स्त्रिया इसे देखकर मदनातुर होती है क्योकि यह आकर्षक, सुन्दर होता है। यह विषयो का ज्ञाता होता है। - नारद
जातक मधुर व्यवहार करने मे दक्ष, धैर्यवान, अच्छा नाम कमाने वाला, अधिकारियो या शासन से सम्पर्क बनाने में माहिर होता है। - जातकाभरण
गजरथ या बड़े वाहनो का उपयोग करना इन्हे खूब आता है। गीत-संगीत व कला मे इनकी अभिरुचि भी उत्तम होती है। भ्रमण के कारण इनका ज्ञान भी अच्छा होता है। - पराशर
चन्द्र : चन्द्रमा इस नक्षत्र मे हो, तो जातक पसंददीदा, सफल, स्थिर, विशेष सम्मानीय, सुविधा युक्त विलासी, बुद्धिमान, अविष्कारक, व्यवहार कुशल, स्वतंत्र होता है। उत्तरा फाल्गुनी मे चन्द्र मदद, दया, मैत्री, लगन, पारिवारिकता, साहस, जीवन निरंतरता का कारक है।
वराहमिहिर अनुसार उत्तरा फाल्गुनी मे चन्द्र प्रभाव ज्ञान, शक्ति, सुखद जीवन का कारक है।
सूर्य : सूर्य उत्तरा फाल्गुनी मे हो, तो जातक मानवतावादी, नायकत्व, पढ़ने-लिखने का शौकीन, आत्म विश्वाशी, महा घमंडी, अभिमानी, एकांत प्रिय, रचनात्मक कला प्रेमी होता है।
लग्न : लग्न इस नक्षत्र मे हो, तो आकर्षक, धनाढ्य, अधिक सहायता वाला, घमंडी, शरीफ, प्रज्ञ, व्यापार कुशल, रहस्य शक्ति वाला, सुन्दर, मानवीय आध्यात्मिक होता है। सूर्य पर चंद्र की दृष्टि हो तो जातक को रिश्तेदारों एवं शत्रुओं से कष्ट रहता है।
धन कमाने के लिए देश के बाहर जाना पड़ता है। इस सूर्य पर मंगल की दृष्टि हो तो
जातक मूर्छा, मस्तिष्क ज्वर जैसे रोगों से ग्रस्त रहता है। वह आलसी एवं शत्रुओं
से डरनेवाला होता है। बुध की दृष्टि हो तो जातक अधिकारसंपन्न एवं उच्च कोटि
का संतान सुख पाता है। बृहस्पति की दृष्टि हो तो मंत्रशास्त्र में पारंगत, स्वतंत्र
आजीविका कमानेवाला रहता है। शुक्र की दृष्टि हो तो विदेश में रहनेवाला, शस्त्र,
अग्नि या विष से कष्ट सहनेवाला रहता है। शनि की दृष्टि हो तो अनुचित कामों से
पैसा कमानेवाला, नौकर-चाकरों से युक्त,खर्चीले स्वभाव का होता है।
प्रथम चरण में सूर्य हो एवं उस पर शनि या मंगल की दृष्टि हो तो जातक को
मस्तिष्क ज्वर, मूर्छा जैसे रोग होते हैं। वह सरकारी कर्मचारी या डॉक्टर की
हैसियत से अपनी आजीविका चलाता है और अपने अधीन काम करनेवालों के
साथ सख्ती से पेश आता है।
द्वितीय चरण में सूर्य हो एवं शनि या मंगल की दृष्टि उस पर हो तो जातक
जोड़तोड़ कर उच्च अधिकारी बनता है। उसकी पहली पत्नी या ज्येष्ठ पुत्र की
दुर्घटना में मृत्यु होती है। पत्नी की मृत्यु के बाद वह विधुरावस्था में जीवन व्यतीत
करता है।
तृतीय चरण में सूर्य हो तो जातक सरकारी नौकरी या दवाइयों की बिक्री करके
अपना जीवनयापन करना है। वह हृदयरोग एवं मानसिक तनाव से ग्रस्त रहता है।
बचपन में आर्थिक स्थिति ठीक नहीं रहती। लेकिन मध्यायु में आर्थिक दृष्टि से
जीवन स्थिर बनता है।
चतुर्थ चरण में सूर्य हो तो जातक तरल पदार्थों की बिक्री या उत्पादन से धन
कमाता है। अस्पताल में सेवाकार्य से जुड़ा रहता है। राहु या केतु के साथ सूर्य हो तो
जातक मिस्त्री या ऑटोमोबाइल इंजीनियर की हैसियत से धन कमाता है। उसे
त्वचा या नेत्ररोग होता है।
नक्षत्र चरण फल
प्रथम चरण - इसका स्वामी गुरु है। इसमे सूर्य, सूर्य, गुरु ☉ ☉ ♃ का प्रभाव है। सिंह 146।40 से 150।00 अंश। नवमांश धनु। यह आचार, नियम, सलाह, भाग्य, भौतिक फैलाव का द्योतक है। जातक अश्व मुखी, मटमैले नेत्र, लम्बी भुजा, सुन्दर एड़ी और जांघ, पतली कमर, दमा रोग से पीड़ित होता है।
जातक धनी, प्रसिद्ध, बहादुर, सृमद्ध, पारिवारिक, सुकार्यकर्ता, साफ-स्वच्छ, वश मे करने वाला, क्ले या प्लास्टिक वस्तुए के मॉडल निर्माता होता है। जातक परिवार से 22 या 36 वे वर्ष से अलग रहता है।
द्वितीय चरण - इसका स्वामी शनि है। इसमे सूर्य, बुध, शनि ☉ ☿ ♄ का प्रभाव है। कन्या 150।00 से 153।20 अंश। नवमांश मकर। यह आयोजन तथा भौतिक सफलता का द्योतक है। जातक मृगनयनी, सुन्दर, लम्बा कद, वक्ता, दान का उपभोग करने वाला, धनवान, सहृदयी होता है।
जातक मिश्रित स्वभाव वाला, भारी नुकसान से पीड़ित, कन्या बहुल, नेक और धर्मत्मा, रहस्यवादी, वातावरण मे हमेशा परिवर्तन का इच्छुक, निर्धन, क्रूर, अनिर्णीत होता है।
कोई-कोई जातक छिद्रान्वेषी, अस्थिर, भिक्षुक, कृषि मे आंशिक सफल, दुश्चरित्र होते है। पुरुष जातक काश्य शिल्पकार, अहंकार रहित, गणितज्ञ, कोशिश और योग्यता से कमाने वाला, सामान्य धनी होता है।
तृतीय चरण - इसका स्वामी शनि है। इसमे सूर्य, बुध, शनि ☉ ☿ ♄ का प्रभाव है। कन्या 153।20 से156।40 अंश। नवमांश कुम्भ। यह बुद्धि, विश्व प्रेम या मानव प्रेम, गुलामी, सामाजिक जबाबदारियो का द्योतक है। जातक गोल मुख, सुन्दर नेत्र, लम्बोदर, मोटी जांघे, कोमल शरीर और वाणी, चंचल, जिंदादिल होता है।
जातक कृतघ्न, झगड़ालू, विनोदी, दिखावटी, वासना युक्त, स्वच्छ, महाज्ञानी होता है। यह कन्या सन्तति वाला, भाई बहनो से कटु सम्बन्ध वाला, कार्य करने मे चतुर, लालच रहित, धार्मिक साहित्य और धार्मिक लेखन मे रुचिवान तथा 40 वर्ष पश्चात इसी क्षेत्र मे प्रसिद्द होता है।
चतुर्थ चरण - इसका स्वामी गुरु है। इसमे सूर्य, बुध, गुरु ☉ ☿ ♃ का प्रभाव है। कन्या 156।40 से 160।00 अंश। नवमांश मीन। यह बुद्धि, विस्तृत क्षितिज, आध्यात्म, भौतिक सफलता का द्योतक है। जातक चौड़ी नाक, उभार युक्त रंध्र, खूबसूरत पैर, लम्बे हाथ व पैर, गौर वर्ण, उच्च स्वर, प्रत्यक्ष कांतिवान होता है।
जातक खुशहाली युक्त, ज्ञानी और पंडित, पुत्रवान सुस्वभावी, विनोदी, एहशान फरामोश, अपराधी, प्रभावी, धनाढ्य, लोभ-लालच रहित, अल्प लाभ पाने वाला होता है।
आचार्यो ने चरण फल सूत्र रूप में कहा है लेकिन अंतर बहुत है।
यवनाचार्य : उत्तरा फाल्गुनी के पहले चरण मे पण्डित, दूसरे मे राजा या जमींदार, तीसरे मे विजयी और सफल, चौथे में धार्मिक होता है।
मानसागराचार्य : उ. फा. प्रथम चरण मे निर्धन, दूसरे मे धन हीन, तीसरे मे पुत्र हीन, चौथे मे शत्रुहंता होता है।
उत्तरा फाल्गुनी ग्रह चरण फल
भारतीय मत से सूर्य, बुध,शुक्र की आपस में पूर्ण या पाद दृष्टि नहीं होती क्योकि बुध सूर्य से 20 अंश और शुक्र 48 अंश से अधिक दूर नही हो सकते है।
सूर्य :
✦ उत्तरा फाल्गुनी सूर्य पर चंद्र की दृष्टि हो, तो जातक रिश्तेदारो से परेशान, आजीविका के लिए विदेश मे रहेगा।✦ उत्तरा फाल्गुनी सूर्य पर मंगल की दृष्टि हो, तो शत्रु कठनाईया पैदा करेगे, जातक काहिल होगा।
✦ उत्तरा फाल्गुनी सूर्य पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक तन्त्र मन्त्र मे निपुण, धुमक्क़ड, परिवार से परेशान होगा।
✦ उत्तरा फाल्गुनी सूर्य पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक धूर्त, स्त्रियो से परेशान होगा।
उत्तरा फाल्गुनी सूर्य चरण फल
प्रथम व चतुर्थ चरण - जातक सुन्दर व्यक्तित्व वाला, महा घमंडी, आत्म विश्वाशी, आत्म अभिमानी, पढ़ने-लिखने का शौकीन, सूर्य के सामान तेजश्वी, सब पर अच्छादित होने वाला, भेद-भाव रहित, लौकिक सुखो मे अनाशक्त, सुखी, धनवान होता है।
द्वितीय व तृतीय चरण - जातक लेखक व दार्शनिक, कुशलता से शत्रुओ को परास्त करने वाला, एकांकिक और एकांत प्रिय, सही-गलत की पहचान करने वाला, सच्ची बात कहने सुनने वाला, रचनात्मक कार्य करने वाला होता है। कुछ विद्जनो ने इन पादो मे सूर्य के अशुभ फल बताये है।
✦ द्वितीय चरण मे यदि उत्तरा भाद्रपद लग्न हो, तो स्त्री जातक अच्छी विशेषताओ के बावजूद हटी, पति को प्यार नहीं करने वाली होगी। कुछ मामलो मे विछोह या तलाक होता है।
चन्द्र :
✦ उत्तरा फाल्गुनी चंद्र पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक गूढ़ अथवा सूक्ष्म विषयो का ज्ञाता होगा।
✦ उत्तरा फाल्गुनी चंद्र पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक विद्वान व उच्च व्यक्तित्व वाला होगा।
✦ उत्तरा फाल्गुनी चंद्र पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक सरकार से सहायता प्राप्त करेगा।
✦ उत्तरा फाल्गुनी चंद्र पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक अध्यापक या व्याख्याता होगा।
✦ उत्तरा फाल्गुनी चंद्र पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक जीवन के सब सुख भोगेगा।
✦ उत्तरा फाल्गुनी चंद्र पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक निर्धन व सामान्य धनी होगा।
उत्तरा फाल्गुनी चंद्र चरण फल
प्रथम व चतुर्थ चरण - जातक पसंद किया जाने वाला, घमण्डी, विशेष सम्मानीय, बुद्धिमान, व्यवहार कुशल, मित्र स्वभाव वाला, सबकी पहुंच वाला, समस्त सुविधा युक्त, न्याय व सत्य का पक्षधर होता है। चंद्र यदि शनि से युत हो, तो बचपन मे ही माता और बहन की मृत्यु होती है। वह खूब कमाता है और खूब गंवाता है।
द्वितीय व चतुर्थ चरण - जातक आकर्षक, धैर्यवान, अविष्कार से नाम कमाने वाला, न्यायविद, अनुशासित, धार्मिक, अत्यधिक भ्रमण शील होने से इनका सामान्य ज्ञान अच्छा होता है। कोई-कोई सट्टे मे रुचिवान और अधिक कन्या संतति वाला, आर्थिक हानि उठाने वाला होता है।
मंगल :
✦ उत्तरा फाल्गुनी मंगल पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक धन संपन्न, लकड़ी का व्यवसाय करेगा।
✦ उत्तरा फाल्गुनी मंगल पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक सेना अथवा पुलिस मे होगा, नीच स्त्रियो की संगति करेगा और यौन रोगो से ग्रसित होगा।
✦ उत्तरा फाल्गुनी मंगल पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक निपुण ज्योतिषी और सुखी होगा।
✦ उत्तरा फाल्गुनी मंगल पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक लेखक या प्रकाशक होगा।
✦ उत्तरा फाल्गुनी मंगल पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक की पत्नी उससे ज्यादा कमायेगी।
✦ उत्तरा फाल्गुनी मंगल पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक धूर्त, दास मगर पत्नी सुसंस्कृत होगी।
उत्तरा फाल्गुनी मंगल चरण फल
➤ उत्तरा फाल्गुनी की जाति सैनिक है। यदि मंगल वक्री हो, तो अशुभ फल देता है। जातक प्रतिकारी, क्रूर, कड़वा, पदच्युत, ईर्ष्या और घृणा से भरा हुआ, जन अपमानित, बदनाम होता है।
प्रथम और चतुर्थ चरण - जातक बलशाली, युद्ध प्रेमी, विरोधी दल का नेता, कुशलता से शत्रुओ को परास्त करने वाला, निर्धन परन्तु सहनशील, जंगलो मे भटकने वाला, जिद्दी, जल्दबाज होता है।
✦ यदि शतभिषा लग्न हो और मंगल, शनि से युत या दृष्ट हो, तो स्त्री जातक विधवा होगी और वैश्यावृत्ति से धन कमायेगी। पुरुष जातक मष्तिष्क रोगो से ग्रसित या कैंसर से पीड़ित होगा और घर की ख़ुशी नष्ट होगी।
द्वितीय और तृतीय चरण - जातक दूसरो की आलोचना करने वाला, दूसरो के दोष देखने वाला, तुच्छ गलती पर भी कठोर दंड देने वाला, राजवर्ग या अधिकारियो से संपर्क बनाने मे माहिर होता है। स्त्री या पुरुष जातक के डाक्टर, सर्जन, फार्मासिस्ट होने के संकेत है परन्तु सफलता के लिये संघर्ष करना पड़ेगा।
✦ यदि उत्तरा भाद्रपद लग्न हो, तो जातक के विधुर अथवा विधवा होने की सम्भावना होती है।
बुध :
✦ उत्तरा फाल्गुनी बुध पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक गांव या शहर के प्रशाशन मे कुशल, सम्मानित होगा।
✦ उत्तरा फाल्गुनी बुध पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक साहसी मगर कठोर होगा।
✦ उत्तरा फाल्गुनी बुध पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक धनी, मेघावी, लेखाकार या दलाल होगा।
✦ उत्तरा फाल्गुनी बुध पर शनि की दृष्टि हो, तो अच्छा व्यवहार करने वाला, अचानक सम्मान प्राप्त करेगा।
उत्तरा फाल्गुनी बुध चरण फल
प्रथम व चतुर्थ चरण - अपने बल-बुते पर बहुत धन कमाने वाला, अनेक प्रकार के लाभ कमाने वाला, अच्छी कविता करने की शक्ति वाला, अपने विषय का जानकर, सरकारी संस्थान मे वित्तीय या लेखा अधिकारी, खगोल व ज्योतिष का ज्ञाता होता है।
द्वितीय व तृतीय चरण - जातक धार्मिक रूढ़ियो का विरोध करने वाला, परम्पराओ को नही मानने वाला, तेल या स्पात का व्यापार व्यवसाय करने वाला, सच्ची बात कहने सुनने वाला, वित्त या लेखा अधिकारी, वाणिज्य व्याख्याता, प्रभावशाली विशेषता युक्त होता है।
गुरु :
✦ उत्तरा फाल्गुनी गुरु पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक धन-दौलत, मान-सम्मान से सम्पन्न होगा।
✦ उत्तरा फाल्गुनी गुरु पर चंद्र की दृष्टि हो, तो जातक ग्राम या नगर का मुखिया अथवा संस्था का अध्यक्ष होगा।
✦ उत्तरा फाल्गुनी गुरु पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक वाहन या वायुयान से सम्बंधित होगा।
✦ उत्तरा फाल्गुनी गुरु पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक निपुण ज्योतिषी होगा।
✦ उत्तरा फाल्गुनी गुरु पर शुक्र की दृष्टि हो, तो संपत्ति एकत्रित करेगा परन्तु उसका उपयोग नही कर पायगा।
✦ उत्तरा फाल्गुनी गुरु पर शनि की दृष्टि हो, तो वह लाखो में एक व्यक्ति होगा जिसे घर, संतान, संपत्ति, जमीन, जायदाद, वाहन आदि सभी प्राप्त होगे।
उत्तरा फाल्गुनी गुरु चरण फल
प्रथम और चतुर्थ चरण - जातक समस्त प्रकार के वैभव से सम्पन्न, अधिकारी, शस्त्रार्थ मे निपुण, भू स्वामी, क्षत्रप, प्रसिद्ध, राजनीतिज्ञ, धैर्यवान होता है।
✦ यदि मंगल या शनि से युति हो और पुष्य लग्न हो तथा राहु हस्त नक्षत्र में हो, तो जातक का भाई भारी सट्टेबाज और खतरनाक होता है।
द्वितीय और चतुर्थ चरण - जातक साहित्य व्यवसायी, सट्टेबाज, अल्प बुद्धि और अल्प धन वाला, आपदा ग्रस्त, दण्ड पाने वाला होगा।
✦ यदि तृतीय चरण लग्न हो तथा बुध की युति हो और श्रवण मे मंगल, पुष्य मे चन्द्र हो, तो स्त्री जातक निर्धन के यहा भी पैदा होकर सबसे अमीर व्यक्ति से ब्याही जायगी।
शुक्र :
✦ उत्तरा फाल्गुनी शुक्र पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक संकोची प्रवृत्ति होने के कारण अपने विचार प्रकट नहीं कर पायेगा और गलत समझा जायगा, प्रतिजाति वर्ग मे प्रिय होगा।
✦ उत्तरा फाल्गुनी शुक्र पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक हर प्रकार भाग्यवान होगा।
✦ उत्तरा फाल्गुनी शुक्र पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक बुद्धिमान, उच्च शिक्षा प्राप्त करेगा।
✦ उत्तरा फाल्गुनी शुक्र पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक यौन सम्बन्धो के कारण यौन रोगो से ग्रस्त होगा।
उत्तरा फाल्गुनी शुक्र चरण फल
प्रथम व चतुर्थ चरण - जातक सुन्दर स्त्रियो को आकर्षित करने वाला, मधुर व्यवहार करने मे दक्ष, बड़े वाहनो का उपभोग करने वाला, गीत-संगीत कला मे अभिरुचि वाला, प्रचुर सामान्य ज्ञान वाला, हमदर्द होता है।
द्वितीय व चतुर्थ चरण - परिवार से अल्प सुखी, जीवन मे नाम कमाने वाला, सामान्य सम्पत्ति वाला, नीच जनो से कष्ट पाने वाला होता है। यदि उत्तरा भाद्रपद मे लग्न हो, तो पत्नी की बेवकूफी से कष्ट पाता है। यदि मंगल से युति हो, तो विधुर होता है और पुनः विवाह नही करने वाला, किन्तु स्त्रियो से काम सम्बन्ध रखता है।
शनि :
✦ उत्तरा फाल्गुनी शनि पर सूर्य की दृष्टि हो, तो पिता से मधुर सम्बन्ध होगे परन्तु कोई सहयता नही मिलेगी।
✦ उत्तरा फाल्गुनी शनि पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो विधवा बहन जातक पर निर्भर होगी।
✦ उत्तरा फाल्गुनी शनि पर मंगल की दृष्टि हो, तो पैतृक सम्पत्ति को खतरा होगा।
✦ उत्तरा फाल्गुनी शनि पर बुध की दृष्टि हो, तो उच्च शिक्षा प्राप्तक, वैज्ञानिक संस्थान मे नियुक्त, वैवाहिक जीवन हार्दिक नहीं होगा।
✦ उत्तरा फाल्गुनी शनि पर गुरु की दृष्टि हो, तो सरकार से लाभान्वित व सम्मानित होगा।
✦ उत्तरा फाल्गुनी शनि पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक सुनार या धातुओ का दलाल होगा।
उत्तरा फाल्गुनी शनि चरण फल
प्रथम और चतुर्थ चरण - अपने बल पर धन कमाकर उसका उपभोग करने वाला, सदआचरण करने वाला, अध्ययन करने वाला, धैर्यवान, भ्रमणशील होने से सामान्य बातो का जानकर होता है।
✦ इस चरण में लग्न, राहु और चंद्र उत्तरा भाद्रपद, केतु और मंगल हस्त नक्षत्र मे हो, तो जातक के जन्म से सात वर्ष मे माता की मृत्यु होती है, शुक्र रोहिणी में हो, तो जातक का भाई विदेशो मे रहेगा और खूब धन कमायेगा।
✦ वराहमिहिर के वृहद्जातक अनुसार जातक चौथे चरण मे निर्धन, दुःखी, निःसंतान, बदमाशो का सरदार, चित्रकारी से अनभिज्ञ होगा।
द्वितीय और चतुर्थ चरण - पुरुष जातक तंत्र-मन्त्र मे रुचिवान व गुप्त विद्याओ की खोज में लिप्त रहेगा। स्त्री जातक का पति हमेशा रोग ग्रस्त रहेगा। यदि लग्न उत्तरा भाद्रपद में हो, तो जातक को अति सुन्दर कन्या होगी जिसके बल सफेद होकर रंग रूप बदल जायगा जिसके अविवाहित रहने की सम्भावना होती है।
उत्तरा फाल्गुनी राहु चरण फल
प्रथम चरण - जातक निर्धन, बईमान होगा। दूसरो के धन की चोरी करेगा। दुर्घटना मे मृत्यु होगी।
द्वितीय चरण - जातक अति महत्वाकांक्षी, नियमानुसार काम करने वाला, स्थिर होगा। सट्टे व अवैध कार्यो से धन कमायेगा।
तृतीय चरण - जातक का विवाह विलम्ब से होगा, धन हानि होगी, यौन रोगी होगा।
चतुर्थ चरण - जातक निर्धन, बईमान होगा। मामा को कष्ट दायक होगा, दुर्घटना मे अपंग होगा।
उत्तरा फाल्गुनी केतु चरण फल
प्रथम चरण - जातक स्वस्थ, धनवान, सुखी वैवाहिक जीवन होगा। कन्या संतति अधिक होगी।
द्वितीय चरण - जातक प्रतिशोधी होगा। पत्नी से प्रचुर धन मिलेगा लेकिन वह दीर्घायु नही होगी।
तृतीय चरण - जातक विद्वान, गुप्त विद्या, ज्योतिष, खगोल मे रुचिवान होगा। क्लर्क, स्टेनोग्राफर, टाइपिस्ट, कम्प्यूटर आपरेटर होगा।
चतुर्थ चरण - जातक शासकीय सेवक, वाहन दुर्घटना बीमा मे घाटा होगा।
जातक = वह प्राणी जिसका ज्योतिषीय विचार किया जा रहा हो।
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