फेंगशुई के उपाय

फेंगशुई के उपाय 

आप फेंगशुई के बारे में अवश्य बहुत कुछ ज्ञान रखते होंगे परन्तु इससे हमें क्या-क्या लाभ मिल सकते हैं तथा फेंगशुई के किस उपाय से हम कया व किस प्रकार का लाभ उठा सकते हैं, इसकी जानकारी कम ही होगी। इसलिये इस अध्याय में मैं फेंगशुई के कुछ ऐसे ही उपायों की चर्चा कर रहा हूँ जिसके माध्यम से आप अपने निवास को वास्तुशास्त्र के अनुकूल कर आर्थिक व मानसिक सुख का लाम ले सकते हैं:

के फेंगशुई में सबसे पहले इस बात पर ध्यान दिया जाता है कि आप जिस मकान में निवास कर रहे हैं उसमें किसी प्रकार की ऐसी बाधा तो नहीं है जिसके प्रमाव से आपके घर में प्रवेश करने वाली 'ची' पावर अर्थात्‌ सकारात्मक ऊर्जा बाधित होती है ? इसके लिये हम यह देखते हैं कि हमारे मकान के मुख्य प्रवेश द्वार पर कोई भी, किसी भी प्रकार की बाधा न हो अर्थात्‌ मुख्यद्वार के सामने कोई पेड़, खम्बा अथवा किसी अन्य मकान का कोना तो नहीं है अथवा कोई ऐसी बहुमंजली इमारत तो नहीं है जिसकी छाया आपके मकान के मुख्य द्वार पर पड़ती हो | मुख्य द्वार के सामने गन्दे पानी का जमाव अथवा गंदगी का ढेर अशुभ होता है। इसलिये आप यही प्रयास करें कि इस प्रकार की समस्या आपके मुख्यद्वार के सामने न हो। किसी कारण से यदि ऐसा है तो फेंगशुई के अनुसार यह बहुत बड़ा दोष है। फेंगशुई की भाषा में इसको “द्वारवेध” कहते हैं। इसके निवारण के लिये आप अपने मुख्यद्वार पर “पाक्वा ग्लास' लगायें जिसके प्रभाव से आपके घर में प्रवेश करने वाली “नकारात्मक ऊर्जा' इस ग्लास पर पड़ कर वापिस हो जायेगी। 

के फेंगशुई में काला व लाल रंग बहुत ही अधिक संवेदनशील माना गया है। काला दु:ख व लाल रंग क्रोध का होता है। इसलिये आप अपने मुख्यद्वार को इन दोनों रंग के अतिरिक्त किसी अन्य रंग में रंगवायें। यदि संभव हो तो आप पीले रंग में मुख्यद्वार को रंगवा सकते हैं क्योंकि पीला धनकारक रंग है। 

के किसी भी लम्बे गलियारे के अन्त में दरवाजा बहुत अशुभ होता है इसलिये इस नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिये गलियारे के अन्त में एक दर्पण स्थापित कर सकते हैं। 

के मुख्यद्वार के सामने किसी भी प्रकार की कोई सीढ़ी अथवा दीवार नहीं होनी चाहिये | 

के मुख्यद्वार के सामने कोई खम्बा नहीं होना चाहिये। यदि आपके 7 दोष हो तो आप उस खम्बे पर कोई दर्पण अथवा खम्बे पर जहां तक नजर पड़ता है। 
वहां तक कोई प्राकृतिक अथवा किसी भी प्रकार की कोई बेल अथवा कोई इसी प्रकार की वास्तु से खम्बे को लपेट देना चाहिये। 

4 मुख्यद्वार की चौखट पर यदि आप काले घोड़े की नाल लगा सकते हो तो अवश्य लगा लें परन्तु इसमें इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि आपका मुख्यद्वार वायव्य-पश्चिम दिशा में न हो अन्यथा यह हो सकता है कि आपका धातु क्षेत्र अधिक शक्तिशाली हो जाये और आपको किसी अन्य तत्व की अधिक आवश्यकता हो । यदि आपको धातु तत्व की अधिक आवश्यकता हो तो यह स्थिति आपके लिये अधिक शुभ होगी। इसमें आप माँ नवदुर्गायंत्र अथवा श्री गणेश की तस्वीर तो अवश्य लगा ही लें परन्तु इसमें भी आप एक बात का अवश्य ध्यान रखें कि जिस प्रकार की श्री गणेश की तस्वीर आपने बाहर की ओर लगाई हो, ठीक उसी प्रकार की एक तस्वीर अन्दर की ओर से भी लगानी चाहिये, क्‍योंकि श्री गणेश के नेत्रों में समृद्धि का वास है तथा पीठ में दरिद्रता का वास होता है। इसलिये हर स्थान में श्री गणेश की तस्वीर इस प्रकार से लगाई जाती है कि दोनों ओर से उनकी पीठ मिलती रहे। 

*$ मुख्यद्वार पर अथवा मुख्यद्वार से प्रवेश करते ही किसी भी प्रकार का दर्पण नहीं लगाना चाहिये क्योंकि इससे अन्दर प्रवेश करने वाली सकारात्मक ऊर्जा दर्पण के माध्यम से वापिस बाहर की ओर निकल सकती है। यदि आपके मुख्यद्वार पर कोई वेध है तो आप पाकवा दर्पण अवश्य लगा सकते हैं। 

# किसी भी निवास में लगातार व एक सीध में दरवाजे फेंगशुई में बहुत अशुभ होते हैं क्योंकि इसके प्रभाव से. आपकी पूजा-पाठ से निवास में बनने वाली सकारात्मक ऊर्जा एक झटके से बाहर निकल जाती है तथा नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश भी इसी प्रकार से हो ज़ाता है। इससे बचने के लिये आप मध्य के दरवाजे पर “क्रिस्टल बाल" अथवा “विन्ड चाईम” का प्रयोग कर सकते हैं। 

# आपका मुख्यद्वार पिछले द्वार से बड़ा होना चाहिये तथा दोनों ही एक सीध में नहीं होने चाहिये अन्यथा “ची” (सकारात्मक ऊर्जा) मुख्यद्वार से प्रवेश कर पिछले द्वार से बाहर निकल जायेगी। 

के किसी भी धार्मिक स्थल के पास निवास अशुभ माना जाता है। निवास पर धार्मिक स्थल के ध्वज की छाया पड़ने पर तो बहुत ही अशुभ प्रभाव आता है। इसलिये यदि आप कोई निवास क्रय करना चाहते हैं तो ऐसे स्थान को क्रय करने से बचना चाहिये। हाँ, किसी धार्मिक स्थल के पूर्व अथवा ईशान कोण पर आप अवश्य निवास कर सकते हैं परन्तु ध्वज छाया के असर से अवश्य बचना चाहिये। 

के आपके निवास में चाहे जितने भी दरवाजे हों, परन्तु सभी दरवाजे अन्दर की ओर खुलने वाले होने चाहिये। इसके साथ ही दरवाजे खोलते अथवा बन्द करते समय 
किसी भी प्रकार की कोई कर्कश आवाज नहीं आनी थचाहिये। यह आवाज “चीं--चीं" की होती है जिसे फेंगशुई में बहुत ही अशुभ माना जाता है। 

शी: आपके निवास में किसी भी कक्ष में बीम है तो यह आपके स्वास्थ्य के लिये हानिकारक है क्योंकि जब भी आप इस बीम के नीचे बैठेंगे तो सिरदर्द अथवा लेटेंगे तो आपके शरीर का जो भी हिस्सा बीम के नीचे आयेगा, यह पीड़ा देगा। इससे बयने के लिये आप बीम के दोनों ओर हरे रंग के श्री गणेशजी चिपका सकते हैं अथवा बीम के दोनों ओर 45 अंश के हिसाब से दो बॉसुरियां लाल मोटे धागे में अथवा लाल रिबन मेँ बांध सकते हैं । इससे आपकी समस्या का समाधान हो जायेगा। 

डक आप यदि आर्थ्यिक उन्‍नत्ति के साथ अपने निवास में खुशी चाहते हैं तो मुख्यद्धार पर त्रिशक्ति आर्टीकल्स का प्रयोग करें | इसके प्रमाव॑ से आपके घर में जकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं होगा। 

आर आपके निवास में उत्तर दिशा धन की दिशा होती है इसलिये आप आकस्मिक व अधिक घन लाभ के लिये इस दिशा में सजावटी जलीय फव्वारे का प्रयोग करें | यदि संभव छो तो इसी दिशा में आप मछलीघर भी रख सकते है। इसके प्रभाव से आप कभी आर्श्िक संकट में नहीं आयेंगे। 

वी सवन में दश्षिण--पश्चिम, आग्नेय, वायव्य और नैक्रद्मत्य कोण्ण में दर्पण अशुम छोता है इसलिये यदि आपके निवास में इनमें से किसी भी स्थान में दर्पण लगे हाँ तो आप उन्हें तुरन्त हटा दें | 

वी शयनकक्ष में भी दर्पण अशुभ माना जाता है। इसलिये आपके शयनकक्ष में यदि दर्पण है तो तुरन्त हटा दें । शयनकक्ष में जल भी नहीं रखा जाता है अन्यथा आपके संबंधों में दरार आ सकती है । इसके साथ ही एक महत्वपूर्ण बात और मैं आपको बताना चाहता हूँ। एक बार मसुझे एक ऐसे पति-पत्नी ने फेंगशुई विजिट पर बुलाद्ा जिनके विवाह को 12 वर्ज हो गये थे परन्तु उनमें प्रेम ऐसा था कि जैसे कल ही विवाह हुआ हो | उन्हें आर्थिक समस्या भी कोई नहीं थी | वह काफी समय से एक ही शयनकक्ष का प्रयोय कर रहे थे | उनके बच्चे जब बड़े होने लगे तो उन्‍होंने अपना बड़ा शयनकक्ष बच्चों को दे दिया और स्वयं अन्य शयनकक्ष में आ गये। नये शयनकक्ष में आते ही उनमें मतभेद होने लगे।॥ जो कार्य 12 वर्ष में नहीं हुआ वह 4 महीने में ही छो गया अर्थात्‌ बात तलाक तक आ गई | तलाक का कोई कारण समझ मेँ नहीं आला था । जो बाल पहले उन्‍हें एक दूसरे की अच्छी लगती थ्थी, अब पता नहीं क्या हुआ, वही बात उन्‍हें बुरी लगने लगी। जब मेँ विजिट के लिये गया और उनके श्यानकक्ष का निरीक्षण किया सथा अन्य ज्ञानकारी ली।॥ वास्तव में बात कुछ नहीं थ्थी, बस कुछ असलुंलन छो गया था। पछले वाले शयनकक्ष में सीने का जल नहीं रखते थे जो यहां रखने लगे। पहले जो यह पलंग का प्रयोग करते थे वह डबलबेड ही था तथा गद्दा भी उसमें डबलगबैड का ही था परन्तु नये शयनकक्ष में डबलबैड का प्रयोग तो किया परन्तु उस पर दो अलग-अलग गद्रों का प्रयोग करने लगे। यही उनकी दूसरी बड़ी गलती थी। फेंगशुर्ड के अनुसार यह बहुत बड़ा दोष है क्योंकि जब आप डबलबैड का प्रयोग कर रहे हैं लो फिर आपको डबलबैड का एक ही गझद्दा प्रयोग करना होगा । फेंगशुर्ड में डबलबैड पति-पत्नी के प्रेम का और अलग--अलग गद्दा विछोष् का मुख्य कारक है जो तुरन्त ही प्रभाव देता है। इसलिये आप कभी भी इस यात को चैक कर सकते हैं कि जो लोग एक ही बिस्तर पर सोते हैं परन्तु अलग-अलग गद्दा प्रयोग करते हैं, उनमें प्रेम कम व झगड़े अधिक होते हैं। इसलिये यदि आपके बैड में भी यह दोष है तो इस दोष को तुरन्त दूर करें, कहीं देर न हो जाये । 

अूह आप भले ही किसी कार्यालय में नौकरी करते हों अथवा स्वयं का आपका यदि कोर्ड व्यापार है तो आप सदैव ऐसे स्थान पर बेठें जहां पीछे की ओर ठोस दीवार हो। यदि आपके कार्यालय में कोई ऐसा स्थान न हो तो फिर आप अपने बैठने के स्थान पर एक ऐसी ततस्वीर अथवा पेंटिंग अवश्य लगायें जिसमें ऊँचे--ऊँचे पहाड़ हो | ध्यान रखें कि उस तस्वीर में पानी न हो और पहाड़ की चोटी नुकीली न हो। इस टोटके का प्रयोग वे लोग भी कर सकते हैं जिनके स्थानान्तरण जल्दी--जल्दी होते हैं | 

श!ः. जो लोग व्यवसाय करते हैं वह इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि अपना ' कार्यालय ऐसे स्थान पर बनायें जहां से उनकी नजर सारे कर्मचारियों पर पड़ सके तथा कार्यालय के मुख्य दरवाजे पर भी उनकी नजर पड़ती रहे | इसके प्रभाव से कोई भी उन्हें थोखा नहीं दे पायेगा | 

अ&ः किसी भी शयनकक्ष में जल तथा दर्पण की उपस्थिति बहुत ही अशुम मानी जाती है। . 

अ5ह यदि किसी में आत्मविश्वास की कमी है अथवा बाहरी लोग मददगार नहीं होते हैं तो इसके लिये वायव्य कोण अर्थात्‌ उत्तर-पश्चिम के कोने में विन्डचार्डम लटकानी चाहिये | 

4 व्यक्ति यदि किसी ऐसे व्यवसाय अथवा क्षेत्र में कार्यरत है जिसमें प्रसिद्धि की अधिक आवश्यकता होती है तो वह अपने निवास में तथा विशेषकर कार्यालय तथा शयनकक्ष में दक्षिण दिशा में लाल रंग का प्रयोग अधिक करे तथा फीनिक्स पक्षी की तस्वीर अथवा लाल रंग का बल्ब अथवा लाल रंग से लिखी नेम प्लेट का प्रयोग भी कर सकता है| 

4 यदि किन्हीं दम्पती में अधिक तनाव रहता है तो वे लोग अपने शयनकक्ष में मैरीडियन डकक्‍स का जोड़ा अथवा प्रेमी पक्षी के जोड़े की तस्वीर लगायें। प्रेम करते कबूतर, तोता अथवा चिड़िया के जोड़े की तस्वीर भी लगा सकते हैं। 

आप अपने मुख्यद्वार के अन्दर की ओर वाले हैन्डिल पर ऐक्टीवेटेड शुभ फेंगशुई के तीन सिक्के अवश्य लटकायें। इस प्रयोग से धन आगमन का मार्ग प्रशस्त होता है। इसके अतिरिक्त आप तीन-टाँग का मेंढक जिसके मुख में शुभ सिक्का होता है, को 

भी वायव्य कोण में रख सकते हैं। मेंढक किसी ऐसे रथान पर रखें कि हर आने-जाने वाले व्यक्ति की उस पर नजर न पडे। 

के आप यदि ईशान कोण (पूर्व-उत्तर का कोना) पर जल स्रोत रखते हैं अर्थात्‌ इस कोने पर बोरिंग करवाते हैं तो आपके पास कभी भी धन की कमी नहीं रहेगी। इसमें यदि आप बोरिग करवाने की स्थिति में नहीं हैं तो आप इस कोने पर जल से भरी मटकी भी रख कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। ध्यान रखें कि मटकी कभी भी खाली न रहे। 

$ निवास में यदि आप प्रत्येक वर्ष सफेदी आदि नहीं करवा सकते हैं तो मुख्यद्वार पर रंगरोगन अवश्य करायें। इससे आपकी उन्नति के मार्ग प्रशस्त होते हैं। 

श शयनकक्ष में अपने पलंग की ऐसी व्यवस्था रखें कि सोते समय आपके पैर द्वार की ओर न हों। 

#े घर में कभी ऐसी बेल न लगायें जिसे दीवार पर चढ़ने के लिये किसी सहारे की आवश्यकता हो। कॉटेदार तो बिलकल ही न लगायें। यदि आप मनीप्लान्ट भी लगाते हैं तो उसे गमले में ही लगायें । 

4 अपने भवन के मुख्यद्वार पर शीशे का प्रयोग न करें और न ही ईशान-ूर्व दिशा में कोई कालीन बिछायें। 

के यदि आपको नींद नहीं आती है तो अवश्य ही आपके शयनकक्ष में कोई वास्तुदोष है। किसी विशेषज्ञ से इसका निरीक्षण अवश्य करायें अन्यथा भविष्य में आपको कोई बड़ी हानि हो सकती है। ह ह 

4 भोजन बनाते समय गृहणी का मुख पूर्व की ओर होना अच्छा होता है। पीठ के पीछे कोई द्वार न हो अन्यथा भोजन बनाने वाली स्त्री के निचले हिस्से में सदैव दर्द 

रहेगा। यदि नौकर भोजन बनाता है तो आप उसका मुख उत्तर की ओर रखवा सकते हैं। 

$ यदि आपकी रसोई घर का द्वार अन्य द्वार की अपेक्षा बड़ा है तो उसंका साईज अन्य द्वारों से कम ही रखें अन्यथा आपके खान-पान में अधिक खर्च होगा। 

$ यदि आपके निवास का वायव्य ऊँचा है और दक्षिण नीचा है तो आपकी पत्नी के स्वास्थ्य पर बुरा असर आयेगा। 

के आप किसी भी बीमार व्यक्ति की दवायें सदैव ईशान कोण में ही रखें। दवा खाते समय रोगी का मुख ईशान कोण की ओर ही रहना चाहिये। 

के अपने निवास में कभी भी ईशान कोण में सेप्टिक टेंक अथवा शौचालय का. निर्माण आदि ना करवायें अन्यथा सदैव आपके घर में कोई न कोई बीमार ही रहेगा। 

यदि यह सब आपके वायव्य कोण में है लो आप अवश्य उन्‍नति करेंगे। आप ईशान कोण 

में अण्डरग्राउण्ड पानी का टेंक बनवा सकते हैं। । शी आप अपने निवास में साफ-सफाई के साथ कम प्रयोग में आने वाली वस्तुयें 

हटा दें । कई लोग ऐसी उठडस्तुयें रख लेते हैं कि यह कभी काम आयेगी परन्‍्लु वह कभी 

काम नहीं आती है। ऐसी सारी वस्तुयें हटा दें तो निश्चत: ही आर्थिक समृद्धि के मार्ग प्रशस्त होंगे। जो पिछले 5 बर्षों से काम में नहीं आई हैं, ऐसी वस्तुओं को हटा देना ही 

उचित होता है। 

शह. नवनिर्मित भवन में प्रवेश से पहले यदि वास्तु स्थान का ज्ञान कर उस स्थान पर दक्षिणावर्ती शंख की श्रीयंत्र के साथ स्थापना करने के साथ वास्तु शान्ति अवश्य करवायें । इस उपाय से आप कभी भी आर्थिक समस्या में नहीं आयेंगे और आप निश्चित 

ही उन्‍नति की ओर अग्रसर होंगे। वह यदि आप व्यवसाय की दृष्टि से किसी भूखण्ड को क्रय करना चाहते हैं तो ६ यान रखें कि भूखण्ड शेरमुखी हो | शेरमुखी भूखण्ड व्यवसाय की निरन्तर उन्‍नति के लिये 

लाभकारी होता है । ,.. हू यदि आप निवास के लिये भूखण्ड क्रय करना चाहते हैं तो गौमुखी मूखण्स्ड क्रय करने का प्रयास करें | गौमुखी भूखण्ड में निवास करने वाले लोग सदैव हर प्रकार 

से सम्पन्न होते हैं । वह घर में धन रखने वाली अलमारी का मुख उत्तर की ओर रखें | इससे लक्ष्मी 

आगमन का मार्ग प्रशस्त होता है । ह वी दुर्घटना रोकने के लिये-यदि आपके साथ अधिक दुर्घटना अधिक होती है 

डु तो आप मून स्टोन के साथ लाल मूँगा धारण कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। यह रत्न धारण करने से पहले आप अपनी पत्रिका किसी विद्धान ज्योतिषी को अवश्य दिखायें कि यह 

रत्न आपकी पत्रिका में आपके लिये शुभ है अथवा नहीं | वह शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार को आप किसी लाल रेशमी कपड़े में आठ सूखे 

छुआरे प्रभु का स्मरण कर प्लास्टिक की थैली में रखें । प्रभु कृपा से आप सदैव सुरक्षित 

शहैंगे 1 4 आप जब भी वाहन पर निकलें लो सदैव मन ही मन में “प्रवसि नगर कीजै सब गा, हछ्ूदय राखि कौशलपुर राजा” का स्मरण करके ही निकलें । आप सदैव दुर्घटनाओं ' बचे रहेंगे | 

 आप जब भी किसी आवश्यक कार्य से निकलें तो निम्न मंत्र का 11 बार जाप , इससे आप सुरक्षित भी रहेंगे और कार्य भी सिद्ध छोगा-
पंथान सुपथा रक्षे मार्ग क्षेमकरी तथा। 
राजद्वारे महालक्ष्मी विजया सर्वतः स्थिता।। 

के घर से निकलते ही जो प्रथम पूजास्थल आये, उसको प्रणाम अवश्य करें| इससे आप आने वाली दुर्घटना टाल सकते हैं। 

आप यदि किसी लम्बी यात्रा पर जा रहे हैं तो सर्वप्रथम प्रमु का स्मरण कर अपनी सुरक्षित वापसी का निवेदन करें | विनती करें कि प्रभु मार्ग में भी मेरी रक्षा करना। इस प्रार्थना के बाद श्री हनुमान जी पर पाँच अगरबत्ती व गुग्गुल की धूप अर्पित करें व थोड़ा सा गुड़ खाकर पानी पीकर ही निकलें। 




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