घर परिवार में सुख-शांति के लिए
परिवार में सुख-शांति के लिए
अनेक बार ऐसा होता है कि परिवार के सदस्यों में छोटी-छोटी बातोंपर तर्क-वितर्क होते-होते कुतर्क भी हो जाता है और घर में आपसमें झगड़े का सा वातावरण बन जाता है। उस स्थिति में घर के पीनेके ? पानी के मटके में से एक लोटा पानी लेकर अपने मकान केचारों कोनों में और मकान के बीचोबीच थोड़ा-सा जल छिड़क लें,परिवार में शांति हो जाएगी।
सरल उपाय घर में खुशहाली लाए
हम सभी चाहते हैं कि हमारे घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे। बेहद छोटी-छोटी सावधानियों को आजमा कर हम सरलता से मनचाही खुशियां पा सकते हैं। प्रस्तुत है 13 सरलतम टिप्स जो घर में शांति का संचार करेंगे और शुभता को आमंत्रित करेंगे।
1. घर में सुबह-सुबह कुछ देर के लिए भजन अवश्य लगाएं।
2. घर में कभी भी झाड़ू को खड़ा करके नहीं रखें, उसे पैर नहीं लगाएं, न ही उसके ऊपर से गुजरे अन्यथा घर में बरकत की कमी हो जाती है। झाड़ू हमेशा छुपा कर रखें।
3. बिस्तर पर बैठ कर कभी खाना न खाएं, ऐसा करने से बुरे सपने आते हैं।
4. घर में जूते-चप्पल इधर-उधर बिखेर कर या उल्टे सीधे करके नहीं रखने चाहिए इससे घर में अशांति उत्पन्न होती है।
5. पूजा सुबह 6 से 8 बजे के बीच भूमि पर आसन बिछा कर पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके बैठ कर करनी चाहिए। पूजा का आसन जूट अथवा कुश का हो तो उत्तम होता है।
6. पहली रोटी गाय के लिए निकालें। इससे देवता भी खुश होते हैं और पितरों को भी शांति मिलती है।
7. पूजा घर के ईशान कोण में सदैव जल का एक कलश भरकर रखें।
8. आरती, दीप, पूजा अग्नि जैसे पवित्रता के प्रतीक साधनों को मुंह से फूंक मारकर नहीं बुझाएं।
9. मंदिर में धूप, अगरबत्ती व हवन कुंड की सामग्री दक्षिण पूर्व में रखें अर्थात आग्नेय कोण में।
10. घर के मुख्य द्वार पर दाएं तरफ स्वस्तिक बनाएं।
11. घर में कभी भी जाले न लगने दें, वरना भाग्य और कर्म पर जाले लगने लगते हैं और बाधा आती है।
12. सप्ताह में एक बार जरूर समुद्री नमक अथवा सेंधा नमक से घर में पोछा लगाएं, इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
13. पूजा घर में अगर कोई प्रतिष्ठित मूर्ति है तो उसकी पूजा हर रोज निश्चित रूप से हो ऐसी व्यवस्था करें।
मकान में वास्तु और सभी प्रकार की शांति के लिए आप अपने घरके मंदिर में जो अगरबत्तियां पूजा के समय लगाते हैं, उन्हें आपप्रज्वलित करके बाएं हाथ की ओर से दीवार के सहारे-सहारे पूरेमकान में घूमते हुए लाकर मंदिर में लगा दें, घर में सुख शांति बनीरहेगी और घर बुरी नजर से भी बचा रहेगा।
परिवार के सभी सदस्यों को एक साथ किसी पवित्र नदी अथवा सरोवरमें स्नान करना चाहिए। इससे परिवार में सभी व्यक्तियों का एक-दूसरेके प्रति स्नेह प्रगाढ़ होगा, सामंजस्य बढ़ेगा। फलतः पारिवारिक जीवनपहले की अपेक्षा सुखमय बनेगा। यदि पारिवारिक जीवन में क्लेश इतनाबढ़ गया हो कि सभी सदस्यों का एक साथ जाना संभव नहीं हो, तो जोव्यक्ति स्नान के लिए नहीं जाए, उसका पहना हुआ कोई वस्त्र ले जाकरपानी में डुबोना चाहिए।
यदि परिवार में किसी महिला सदस्य के कारण अशांति का वातावरण बनरहा हो तो ऐसी महिला के स्वभाव को शांत करने के लिए उसे चंद्रमणिधारण करनी चाहिए। चंद्रमणि को चांदी की अंगूठी में दाएं हाथ कीअनामिका उंगली में शुक्लपक्ष के सोमवार के दिन धारण करना चाहिए।इसके अतिरिक्त चंद्रमणि को चांदी का लॉकेट बनवाकर गले में भी चांदीकी चेन या सफेद डोरे में पिरोकर पहनाया जा सकता है।
यदि परिवार में स्त्री वर्ग में परस्पर तनाव, विवाद एवं सामंजस्य की कमीके कारण पारिवारिक जीवन क्लेशपूर्ण बन रहा हो, तो ऐसे परिवार कीसभी महिलाओं को एक साथ लाल वस्त्र नहीं पहनने चाहिए।
यदि परिवार में पुरुष सदस्यों के मध्य परस्पर तनाव, विवाद एवंसामंजस्य की कमी रहती हो, तो ऐसे घर में कदम्ब वृक्ष की डाली लाकररखनी चाहिए। प्रत्येक पूर्णिमा को पुरानी डाली को कदम्ब वृक्ष के पासछोड़कर नई डाली ले आनी चाहिए। डाली में कम-से-कम सात अखंडितपत्ते होने चाहिए। कटे-टूटे हुए पत्तों वाली डाली नहीं रखनी चाहिए।
यदि घर में अहाते के अंदर मुख्य द्वार के दोनों ओर अपराजिता की बेललगाकर मुख्य द्वार को उससे घेर लिया जाए, तो ऐसे घर में सुख-शांतिबनी रहती है।
सुख-शांति
आपके परिवार में सुख-शांति सदैव बनी रहे, कोई कलह, क्लेश, राग,ई्ष्यो उत्पन्न होकर परिवार में कटुता, वैमनस्य न बढ़े, इसके निवारणके लिए रविवार को एक मिट्टी के पात्र में अंगरे रखकर कबूतर कीसूखी बीट को डालकर उसका धुआं प्रत्येक कमरे में दे दें। ऐसा करनेसे परिवार में बराबर एकता और सौहार्द बना रहेगा।
मंगल कार्य हेतु
परिवार में होने वाला कोई भी मांगलिक कार्य, पूजा-पाठ, विवाह-शादी,जन्मोत्सव-पार्टी आदि बिना विधन-बाधा के कुशलतापूर्वक हो जाए तोइसके लिए उस दिन सर्वप्रथम गणेशजी की आकृति के सामने अगरबत्तीजरूर जलाएं। गणेशजी की सूंड का पूजन अवश्य कर ले। मांगलिक कार्यसानंद निबट जाएगा। 'गजानन-गजानन' निरंतर बोलते रहें।
परिवार में अनेक सदस्य होते हैं। यह आवश्यक नहीं कि सभी कीविचारधाराएं एक समान हो। ऐसी स्थिति में धीरे-धीरे परिजनों के मध्यपरस्पर एक-दूसरे के प्रति स्नेह एवं सहयोग का भाव समाप्त होकरउदासीनता एवं वैमनस्यता का भाव जाग्रत होने लगता है। ऐसी स्थिति सेबचने के लिए ऐसे घर में सफेद चंदन से बनी किसी मूर्ति अथवा वस्तुको ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जिससे कि परिवार के सभी सदस्यों कीदृष्टि उस पर पड़ती रहे।
यदि परिवार में युवा एवं वृद्ध व्यक्तियों के मध्य परस्पर विवाद, तनावएवं क्लेश का वातावरण बन रहा हो, तो ऐसे घर के दक्षिण भाग की ओरवृद्ध व्यक्तियों को तथा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर युवा व्यक्तियों कोअपने कक्ष के द्वार पर पूर्णिमा के दिन अशोक के ताजे पत्ते लगानेचाहिए।
यदि परिवार में सभी सदस्यों के बीच अकारण ही तनाव उत्पन्न हो रहाहो, तो ऐसे घर में गुरुवार के दिन बाल एवं दाढ़ी-मूंछ नहीं कटवानीचाहिए तथा घर में गंगाजल को पूजाघर में रखना चाहिए।
भवन के मुख्य द्वार के दोनों ओर के दरवाजे तथा खिड़कियां क्षतिग्रस्तनहीं होने चाहिए।
दरवाजे और खिड़कियों के ऊपर तथा खिड़कियों के चारों ओर का प्लास्टरटूटा नहीं होना चाहिए नहीं तो घर में महिलाओं को अधिक हानि कीआंशका रहती है।
घर के मुख्य आंगन का फर्श टूटा हुआ नहीं होना चाहिए तथा यहां परघर का कूड़ा-कबाड़ा नहीं रखें। ऐसा होने पर घर के मुखिया को मानसिकतनाव तथा घर के अन्य लोगों में तनाव की संभावना बढ़ जाती है।
यदि घर के अन्य दरवाजे भी काले रंग के हैं तो पति-पत्नी में झगड़े,गाली-गलौच, पत्नी से पति की हत्या का भय रहता है।
घर के दरवाजों पर अगर, तलवार, चाकू, तीर तथा अन्य हथियारों कोलगाया गया है तो इससे घर के निवासियों को अधिक गुस्सा आने का,अक्कखड़़ तथा मतलबी होने का भय बना रहता है।
घर में पुरानी खिड़कियां, दरवाजे, ग्रिल, इस्तेमाल नहीं करने चाहिए इससेघर के मुखिया की आय में कमी होनी आरंभ हो जाती है और अगरआय कहीं से होती है तो बेकार के कार्यों में व्यय हो जाती है तथा डरऔर भय निरन्तर बना रहता है।
रसोईघर तथा अतिथिगृह परस्पर जुड़े हुए नहीं होने चाहिए। यदिऐसा है तो संभव है पति-पत्नी में आपसी समझ-बूझ का अभाव रहताहै।
यदि घर के सामने पत्थर की पट्टियां बिछी हैं तो यह आपस के तालमेलमें कमी दर्शाता है। यदि दक्षिण-पश्चिम दिशा में अधिक खिड़कियां हों तोउन्हें बंद करके संख्या कम कर दें।
पूजा के कमरे में शिव, सूर्य, विष्णु, ब्रह्मा, इन्द्र की मूर्ति पूर्व अथवा पश्चिमदिशा में रखें। गणेश, कुबेर, दुर्गा का मुख दक्षिण में तथा हनुमानजी,कार्तिकेय आदि की मूर्ति का मुख दक्षिण-पश्चिम में रखें।
पूजा स्थल ईशान कोण में रखें अथवा ईशान एवं उत्तर के मध्य में अथवाईशान एवं पूर्व के मध्यम में रखें।
ज्ञान प्राप्ति के लिए पूजागृह में उत्तर दिशा में बैठकर उत्तर की ओर मुखकरके पूजा करें और धन प्राप्ति के लिए पूर्व में बैठकर पूर्व दिशा में मुखकरके बैटें।
कांटेदार वृक्ष एवं ऐसे वृक्ष जिनसे दूध निकलता हो, घर में नहीं लगाएं।इनकी अपेक्षा सुगंधित एवं खूबसूरत फूलों के पौधे लगाएं।
शयनकक्ष में वाश बेसिन नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा है तो पति पत्नीहमेशा शक की नजर से देखेंगे। हां, शयनकक्ष में अटैच बाथरूम हो औरउसमें वाश बेसिन हो तो कोई हर्ज नहीं। कभी भी मेहमान को अपनेशयनकक्ष में बातचीत तथा बैठक के लिए मत लेकर जाएं ऐसा करने सेपति-पत्नी में झगड़े और शक की शुरुआत हो सकती है।
यदि आपके पलंग/चारपाई का सिरहाना उत्तर-पश्चिम दिशा में है तो इसेपूर्व-दक्षिण दिशा में कर लें। इससे आपको बड़े सुख की नींद और भोगका आनन्द प्राप्त होगा।
यदि मकान मालिक का कार्य ऐसा है कि उसे अधिकतर घर से बाहर हीरहना पड़ता है तो शयन कक्ष वायव्य कोण में बनाना उचित है।
यदि शयन कक्ष में ही पूजा घर भी हो तो वह ईशान कोण की ओर होनाचाहिए।
बच्चों, अविवाहितों अथवा मेहमानों के लिए पूर्व दिशा में शयन कक्ष होनाचाहिए। शयनकक्ष में पलंग इस प्रकार से हो कि उस पर सोने से सिरदक्षिण अथवा पश्चिम की ओर रहे। इस तरह सोने से प्रातः उठने परमुंह पूर्व अथवा उत्तर की ओर होगा। पूर्व दिशा सूर्योदय की दिशा है, यहजीवनदाता और शुभ है। उत्तर दिशा धनपति कुबेर की मानी गई है, अतःप्रातः उठते ही उस तरफ मुंह होना भी शुभ है।जाता है।यदि भवन में एक से अधिक मंजिलें हैं तो मकान मालिक का कमराऊपरी मंजिल पर होना चाहिए।सोते समय पैर मुख्य द्वार की ओर नहीं होने चाहिए क्योंकि मृत्यु होनेपर श्मशान ले जाने से पूर्व शरीर को मुख्य द्वार की ओर पैर करके रखा
दक्षिण अथवा दक्षिण-पश्चिम में स्थित शयनकक्ष वयस्क विवाहित बच्चोंके लिए भी उपयुक्त है।कमरे के दरवाजे के पास पलंग को नहीं रखें। इससे चित्त में अशान्तिएवं व्याकुलता बनी रहेगी।
पलंग के सामने की दीवार पर प्रेरक एवं रमणीय चित्र लगाएं। आदर्शवादीविश्वस्त बना रहता है।
चित्र आत्मबल को बढ़ाते हैं। इससे दाम्पत्य जीवन भी आनन्दमय एवं
विद्यार्थियों के लिए पश्चिम में सिरहाना उचित है।
पलंग के ठीक ऊपर कोई गर्ईर या बीम उचित नहीं है। इसे फाल्ससीलिंग द्वारा ठीक करवाएं।
शयन कक्ष की अलमारियों का मुंह नैऋत्य कोण अथवा दक्षिण दिशा की
ओर नहीं खुलना चाहिए जिनमें आप धन, चैक बुक, बैंक आदि केकागजात रखते हैं। ऐसी अलमारियों में रखा धन धीरे-धीरे घटता जाता है। इन अलमारियों का मुंह दक्षिण दिशा को छोड़कर अन्य दिशाओ में रखाजाना चाहिए।
जहां तक सम्भव हो तिजोरी शयनकक्ष में न रखें। यदि रखनी ही पड़े तोयह शयनकक्ष के दक्षिणी भाग में इस प्रकार रखी जानी चाहिए कि इसेखोलने पर उत्तर दिशा से सीधी दृष्टि पड़े। ड्रैसिंग टेबल उत्तर दिशा मेंपूर्व की ओर रखी जानी चाहिए। कमरे में टेलीविजन, हीटर एवं विध्युतउपकरण आग्नेय कोण में होने चाहिए।
यदि आप भी शयनकक्ष में कुछ परिवर्तन कर उचित वातावरण बना सकेंतो आपके जीवन में दाम्पत्य सुख पूर्ण बना रहेगा और आप अधिकऊर्जावान एवं चैतन्य बने रहेंगे।
ईशान क्षेत्र में उत्तरी दिशा में लम्बाई घटकर उत्तरी हद पर मकान हो,तो मकान की गृहिणी रोग का शिकार बनेगी और मृत्यु को प्राप्तकरेगी।
वर्षा का जल मकान में पश्चिम से होकर निकलता है तो पुरुष लम्बीबीमारियों से पीड़ित रहेंगे। घर के जल का प्रवाह पूर्व दिशा में कर देनेमात्र से पुरुषों का स्वास्थ्य बेहतर हो जाएगा।
यदि मकान के दाई ओर की खिड़की किसी गोदाम में खुलती हो तो ऐसेघर में पिता-पुत्र में कलह होता है।
प्रत्येक महीने में घर के सदस्यों की संख्या तथा घर में आए सभी अतिथियों
की संख्या के बराबर मीठी रोटियां जानवरों को खिलाने से घर में बीमारी,झगड़े एवं व्यर्थ खर्च से बचाव होता है।
सामान्यतः व्यक्ति का स्वभाव ग्रह दशाओं से प्रभावित होता है, लेकिनअगर कोई शख्स जिद से उल्टा ही चलता हो तो वह नफे के बजायनुकसान ही पाएगा। उदाहरणस्वरूप शनि सातवें घर में होने पर जातकस्वभाव से चालाक, आंख ही के इशारे से सिर से पांव तक जांच लेने वालातथा मक्कार भी हो सकता है, लेकिन अगर ऐसा शख्स पूरा धर्मात्मा,द्यालुता से भरपूर और सत्यवादी हो तो वह हरदम दुखिया, बेचैन औरनुकसान-ही-नुकसान देखता होगा।
रात्रि में शयन के समय अपनी चारपाई के नीचे थोड़ा-सा पानी रख लें।सुबह वही पानी किसी बड़े पेड़ की जड़ों में डाल दे तो नाहकझंगड़े-फसाद, बेइज्जती, बीमारियों, तोहमत या किसी दूसरी बुराइयों सेहमेशा बचाव होता रहेगा।
अपने भोजन में से गाय, कौआ और कुते तीनों के लिए कुछ हिस्सा पहलेही अलग रख लेना चाहिए। इससे पारिवारिक सुख-शांति बनी रहती है।
रसोईघर में भोजन करने से राहु की शरारतों से बचे रहेंग और मंगल-राहुयुति का नेक फल होगा।
यदि जन्मकुंडली में राहु मंदा हो, तो उसके लिए यह अच्छा है कि बच्चेके जन्म से पहले जौ (राहु) को पानी की बोतल में बंद करके रख लें,ताकि बच्चे का जन्म सकुशल और सरलतापूर्वक संपन्न हो जाए।
औरत के गर्भवती हो जाने के दिन से ही उसके बाजू पर सुई-धागा बांथिऔर इसे बच्चे के जन्म पर खुद बच्चे के बाजू पर तब्दील कर दिया जाए,यह रक्षक बंधन कहलाता है और बच्चे की 18 माह की उम्र तक जारीरखना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति के बच्चे जन्म लेते ही मर जाते हों तोयह उपाय करने से संतान दीर्घजीवी भी होती है।
रेलगाड़ी, बस अथवा नाव आदि के द्वारा नदी आदि के ऊपर से जातेसमय जल में तांबे का सिक्का डालना चाहिए। इससे संतान की एवंपरिवार की सुरक्षा होती है। विशेष रूप से जब आप लंबे समय तकपरिवार से दूर रहने के लिए या स्थान परिवर्तन करके अन्य स्थान परजा रहे हों।
संतान के जन्म समय से पहले एक बर्तन में दूध और थोड़ी-सी कोईदूसरी चीज कागज या अलग बर्तन में खांड (मीठा) औरत का हाथलगवाकर रख लें। संतान सरलतापूर्वक एवं बिना कष्ट के उत्पन्न होजाए, उसके बाद दूध और खांड बर्तन के साथ धर्मस्थान में पहुंचा दे तथाबर्तन वापस न लाएं।
जिस व्यक्ति के बच्चे जन्म लेते ही मर जाते हों, बच्चे के जन्म के समयमिठाई के स्थान पर नमकीन बांटनी चाहिए।
जिन पति-पत्नी में क्लेश हो, वे इस मुद्रिका को शिव मंदिर में गुप्त रूपसे पुष्प एवं गुलाल, अबीर के मध्य रखकर अर्पित कर दें तो अवश्यक्लेश समाप्त होकर मधुरता बढ़ जाती है एवं प्रगाढ़ता बढ़ेगी।
होली के दिन 7 गोमती चक्र को सवा मीटर कपड़े में बांधकर अपने पूरेपरिवार के ऊपर से वार कर यानि घुमाकर किसी बहते जल में फैंक दै।यह एक तरह से आपके परिवार की तांत्रिक रक्षा कवच का कार्यकरेगा।
ग्रहां का प्रभाव सर्वविदित है। घर में अशांति, बीमारी आदि कुछ नकुछ अरिष्ट है तो यह प्रयोग सिद्ध करे। होली के दिन पाटे परसफेद वस्त्र बिछाकर उस पर प्राण प्रतिष्ठित ‘नवग्रह यंत्र' रखें एवंएक घी और एक तेल का दीपक जलाएं, अब किसी भी माला से इसमंत्र की एक माला 17 दिन तक जपें। इससे प्रों की अशुभता न्यूनतमहोगी।
जप समाप्ति पर भगवान शंकर एवं माता पार्वती से हाथ जोड़कर विनतीकरें कि वे आपके परिवार में खुशियां-ही-खुशियां भर दें। आपका दाम्पत्यजीवन मधुर कर दें। आपके घर से गृह क्लेश को हमेशा-हमेशा के लिएसमाप्त कर दें और आपको प्रत्येक पथ पर सफलता प्रदान करें।इसके बाद प्रसाद बांटें और स्वयं भी ग्रहण करें।
.. हैं।
समस्त पूजन सामग्री किसी नदी, तालाब, कुएं आदि में विसर्जित करदें। आप चाहें तो रुद्राक्ष को अपने पूजाघर में स्थापित कर सकते
इस साधना में शुद्धता तथा आचार-विचार, खान-पान का अवश्य ध्यानरखे। शुद्ध शाकाहारी भोजन लेना चाहिए तथा स्वस्थ चिंतन करना चाहिए ।