गुरुदेव के टोटके

गुरुदेव के टोटके

1. प्रतिष्ठान में बिक्री ज्यादा हो

आप अपने व्यापार में अधिक पैसा प्राप्त करना चाहते हैं और चाहते हैं की आपके व्यापार की बिक्री बढ़ जाए तो आप वट वृक्ष की लता को शनिवार के दिन जाकर निमंत्रण दे आएं। (वृक्ष की जड़ के पास एक पान, सुपारी और एक पैसा रख आएं) रविवार के दिन प्रातः काल जाकर उसकी एक जटा तोड़ लाएं, पीछे मुड़कर न देखें।

उस जटा को घर लाकर गुग्गल की धूनी दें तथा 101 बार इस मंत्र का जप करें-

ॐ नमो चण्ड अलसुर स्वाहा।

2. छोटे बच्चों को नजर लगने पर

अगर आप चाहते हैं की छोटे बच्चों को नजर न लगे इसके लिए हाथ में चुटकी भर रक्षा लेकर ब्रहस्पतिवार के दिन 'ॐ चैतन्य गोरखनाथ नमः मंत्र का 108 बार जप करें। फिर इसे छोटी-सी पुडिया में डालकर काले रेशमी धागे से बच्चे के गले में बाँधने पर बुरी नजर नहीं लगती।

3. अपने व्यापार में करें मनोवांछित उन्नति

अगर आप अपने व्यापार में मनोवांछित उन्नति करना चाहते हैं तो सोमवार को प्रातः नवनिर्मित अंगूठी को गंगाजल में धोकर गाय के दूध में डुबो दें, उसमें थोड़ी-सी शक्कर, तुलसी के पत्ते और कोई भी सफ़ेद फूल डाल दें। इसके पश्चात स्नान ध्यान से निवृत्त होकर अंगूठी को पहन लें। ऐसा करने से व्यापार में मनोवांछित उन्नति प्राप्त होगी।

4. कन्या के विवाह में विलम्ब होने पर

अगर आपकी कन्या के विवाह में विलम्ब हो रहा हो या कन्या के लिए योग्य वर की तलाश पूरी नहीं हो रही हो तो किसी भी गुरूवार के दिन प्रातःकाल नहा धोकर बेसन के लड्डू स्वयं बनाएं। उनकी गिनती 109 होनी चाहिए। फिर पीले रंग की टोकरी में पीले रंग का कपड़ा बिछाकर उन लड्डूओं को उसमें रख दें तथा अपनी श्रद्धानुसार कुछ दक्षिणा रख दें। पास के किसी शिव मंदिर में जाकर विवाह हेतु प्रार्थना कर घर आ जाएं।

5. आपके ज्यादातर कार्य असफल हो रहे हैं तो यह करें

आप चाहते हैं की आपके द्वारा किये गए कार्य सफल हो लेकिन कार्य के प्रारम्भ होते ही उसमें विध्न आ जाते हैं और वह असफल हो जाते हैं इसके लिए आप यह करें: प्रातःकाल कच्चा सूत लेकर सूर्य के सामने मुंह करके खड़े हो जाएं। फिर सूर्य देव को नमस्कार करके 'ॐ हीं घ्रणि सूर्य आदित्य श्रीम' मंत्र बोलते हुए सूर्य देव को जल चढ़ाएं। जल में रोली, चावल, चीनी तथा लाल पुष्प दाल लें। इसके पश्चात कच्चे सूत को सूर्य देव की तरफ करते हुए गणेशजी का स्मरण करते हुए सात गाँठ लगाएं। इसके पश्चात इस सूत को किसी खोल में रखकर अपनी कमीज की जेब में रख लें, आपके बिगड़े कार्य बनाने लगेंगे।

6. अपने घर-गृहस्थी को बनाएं सुखी

अक्सर हम गृहस्थ जीवन में देखते हैं तो गृहस्थ का सामान टूट-फूट जाता है या सामान चोरी हो जाता है। जो भी आता है असमय ही ख़त्म हो जाता है। रसोई में बरकत नहीं रहती है तो ऐसी स्त्रियाँ भोजन बनाने के बाद शेष अग्नि को न बुझाएं और जब सब जलकर राख हो जाए तो राख को गोबर में मिलाकर रसोई को लीप दें। फर्श हो तो उस राख को पानी में घोलकर उसी पानी से फर्श डालें। यह क्रिया कई बार करें। घर-गृहस्थी का छोटा-मोटा सामान, गिलास, कटोरी, चम्मच आदि सदैव बने रहेंगे।

7. इच्छा के विरूद्ध कार्य करना पड़ रहा हो

अगर आपको किसी कारणवश कोइ कार्य अपनी इच्छा के विपरीत करना पड़ रहा हो तो आप कपूर और एक फूल वाली लौंग एक साथ जलाकर दो-तीन दिन में थोड़ी-थोड़ी खा लें। आपकी इच्छा के विपरीत कार्य होना बंद हो जाएगा।

8. दाम्पत्य जीवन से झगड़े दूर करें ऐसे

अगर आपका दाम्पत्य जीवन अशांत है तो आप रात्री में शय न करते समय पत्नी अपने पलंग पर देशी कपूर तथा पति के पलंग पर कामिया सिन्दूर रखें. प्रातः सूर्यदे के समय पति देशी कपूर को जला दें और पत्नी सिन्दूर को भवन में छिटका दें। इस टोटके से कुछ ही दिनों में कलह समाप्त हो जाती है।

9. बेरोजगारी दूर करने हेतु

अगर आपको नौकरी या काम नहीं मिल रहा है और आप मारे-मारे फिर रहे हैं तो एक दागरहित बड़ा नीबूं लें और चौराहे पर बारह बजे से पहले जाकर उसके चार हिस्से कर लें और चारों दिशाओं में दूर-दूर फेंक दें। फलस्वरूप बेरोजगारी की समस्या समाप्त हो जाएगी।

10. भाग्योदय करने के लिए करें यह उपाय

अपने सोए भाग्य को जगाने के लिए आप प्रात सुबह उठकर जो भी स्वर चल रहा हो, वही हाथ देखकर तीन बार चूमें, तत्पश्चात वही पांव धरती पर रखें और वही कदम आगे बाधाएं। ऐसा नित्य-प्रतिदिन करने से निश्चित रूप से भाग्योदय होगा।

11. मंदी से छुटकारा पाएं ऐसे

अगर आपके व्यापार में मंदी आ गयी है या नौकरी में मंदी आ गयी है तो यह करें। किसी साफ़ शीशी में सरसों का तेल भरकर उस शीशी को किसी तालाब या बहती नदी के जल में डाल दें। शीघ्र ही मंदी का असर जाता रहेगा और आपके व्यापार में जान आ जाएगी।

12. भय को दूर करें ऐसे

अगर आपको बिना कारण भय रहता हो या सांप-बिच्छू या वन्य पशुओं का भय रहता हो तो यह करें : बांस की जड़ जलाकर उसे कान पर धारण करने से भय मिट जाता है। निर्गुन्डी की जड़ अथवा मोर पंख घर में रख देने से सर्प कभी भी घर में प्रवेश नहीं करता। रवि-पुष्य योग में प्राप्त सफ़ेद चादर की जड़ लाकर दाईं भुजा पर बाँधने से वन्य पशुओं का भय नहीं रहता है साथ ही अग्नि भय से भी छुटकारा मिल जाता है। केवड़े की जड़ कान पर धारण करने से शत्रु भय मिट जाता है।

13. पारिवारिक सुख-शांति के लिए

अगर आपके परिवार में अशांति रहती है और सुख-चैन का अभाव है तो प्रतिदिन प्रथम रोगी के चार भाग करें, जिसका एक गाय को, दूसरा काले कुत्ते को, तीसरा कौवे को तथा चौथा टुकड़ा किसी चौराहे पर रखवा दें तो इसके प्रभाव से समस्त दोष समाप्त होकर परिवार की शांति तथा सम्रद्धि बढ़ जाती है।


14. अपनाएं सुखी रहने के कुछ नुस्खे

ब्रहस्पतिवार या मंगलवार को सात गाँठ हल्दी तथा थोड़ा-सा गुड इसके साथ पीतल का एक टुकड़ा इन सबको मिलाकर पोटली में बांधें तथा ससुराल की दिशा में फेंक दें तो वहां हर प्रकार से शांति व सुख रहता है। कन्या अपनी ससुराल में रहते हुए यह करें। मेहँदी तथा साबुत उरद जिस दिशा में वधु का घर हो, उसी दिशा में फेंकने से वर-वधु में प्रेम बढ़ता है।

किसी विशेष कार्य के लिए घर के निकलते समय एक साबुत नीबू लेकर गाय के गोबर में दबा दें तथा उसके ऊपर थोड़ा-सा कामिया सिन्दूर छिड़क दें तथा कार्य बोलकर चले जाएं तो कार्य निश्चित ही बन जाता है। सावन के महीने में जब पहली बरसात हो तो बहते पानी में विवाह करने से दुर्भाग्य दूर हो जाता है।

15. अपनाएं सुखी रहने के कुछ नुस्खे


ब्रहस्पतिवार या मंगलवार को सात गाँठ हल्दी तथा थोड़ा-सा गुड इसके साथ पीतल का एक टुकड़ा इन सबको मिलाकर पोटली में बांधें तथा ससुराल की दिशा में फेंक दें तो वहां हर प्रकार से शांति व सुख रहता है। कन्या अपनी ससुराल में रहते हुए यह करें। मेहँदी तथा साबुत उरद जिस दिशा में वधु का घर हो, उसी दिशा में फेंकने से वर-वधु में प्रेम बढ़ता है।

किसी विशेष कार्य के लिए घर के निकलते समय एक साबुत नीबू लेकर गाय के गोबर में दबा दें तथा उसके ऊपर थोड़ा-सा कामिया सिन्दूर छिड़क दें तथा कार्य बोलकर चले जाएं तो कार्य निश्चित ही बन जाता है। सावन के महीने में जब पहली बरसात हो तो बहते पानी में विवाह करने से दुर्भाग्य दूर हो जाता है।

16. अविवाहित व अधिक उम्र की कन्या के विवाह के लिए

अगर आपकी लडकी अविवाहित है या उसकी उम्र बहुत ज्यादा हो चुकी है इसके कारण विवाह होने में रूकावटें आ रही हो तो इसके लिए एक उपाय है: देवोत्थान एकादशी कच और देवयानी की मिट्टी की मूरतें बनाकर उन मूर्तियों में हल्दी, चावल, आते का घोल लगाकर उनकी पूजा करके उन्हें एक लकड़ी के फट्टे से ढक लेते हैं. फिर उस फट्टे पर कुमारी कन्या को बिठा दिया जाता है तो उसका विवाह हो जाता है।

17. स्वप्न में भविष्य जानें इस तरह भी

अगर आप स्वप्न में भविष्य की बात मालूम करना चाहते हैं तो जंगल में जाकर जिस वृक्ष पर अमर बेल हो, उसकी सात परिक्रमा कर अमर बेल्युक्त एक लकड़ी को तोड़ लाएं। फिर उस लकड़ी को धुप देकर जला दें तथा लता को सिरहाने रखकर विचार करते हुए सो जाएं तो स्वप्न में भविष्य की बात मालूम हो जाती है।

18. लक्ष्मी प्राप्ति के उपाय

श्रावण के महीने में 108 बिल्व पत्रों पर चन्दन से नमः शिवाय लिखकर इसी मंत्र का जप करते हुए शिवजी को अर्पित करें। 31 दिन तक यह प्रयोग करें, घर में सुख-शांति एवं सम्रद्धि आएगी, रोग, बाधा, मुकदमा आदि में लाभ एवं व्यापार में प्रगति होगी व नया रोजगार मिलेगा। यह एक अचूक प्रयोग है।
भगवान् को भोग लगाई हुई थाली अंतिम आदमी के भोजन करने तक ठाकुरजी के सामने रखी रहे तो रसोई बीच में ख़त्म नहीं होती है।

19. बालक की दीर्घायु के लिये
बालक को जन्म के नाम से मत पुकारें।
पांच वर्ष तक बालक को कपडे मांगकर ही पहनाएं।
3 या 5 वर्ष तक सिर के बाल न कटाएं।
उसके जन्मदिन पर बालकों को दूध पिलाएं।
बच्चे को किसी की गोद में दे दें और यह कहकर प्रचार करें कि यह अमुक व्यक्ति का लड़का है।

20. ग्रहों के देवता

सूर्य के देवता विष्णु, चन्द्र के देवता शिव, बुध की देवी दुर्गा, ब्रहस्पति के देवता ब्रह्मा, शुक्र की देवी लक्ष्मी, शनि के देवता शिव, राहु के देवता सर्प और केतु के देवता गणेश। जब भी इन ग्रहों का प्रकोप हो तो इन देवताओं की उपासना करनी चाहिए।

21. स्वास्थ्य लाभ हेतु

मृत्यु तुल्य कष्ट से ग्रस्त रोगी को छुटकारा दिलाने के लिये जौ के आटे में तिल एवं सरसों का तेल मिला कर मोटी रोटी बनाएं और उसे रोगी के ऊपर से सात बार उतारकर भैंस को खिला दें। यह क्रिया करते समय ईश्वर से रोगी को शीघ्र स्वस्थ करने की प्रार्थना करते रहें।

22. दुर्घटना से बचाव के लिये

होलिका दहन से पूर्व पांच काली गुंजा लेकर होली की पांच परिक्रमा लगाकर अंत में होलिका की ओर पीठ करके पाँचों गुन्जाओं को सिर के ऊपर से पांच बार उतारकर सिर के ऊपर से होली में फेंक दें।

होली के दिन प्रातः उठते ही किसी ऐसे व्यक्ति से कोई वास्तु न लें, जिससे आप द्वेष रखते हों। सिर ढक कर रखें। किसी को भी अपना पहना वस्त्र या रूमाल नहीं दें। इसके अतिरिक्त इस दिन शत्रु या विरोधी से पान, इलायची, लौंग आदि न लें। ये सारे उपाय सावधानी पूर्वक करें, दुर्घटना से बचाव होगा।

23. आत्मरक्षा हेतु

किसी को कष्ट न पहुंचाएं, किसी का बुरा न करें और न सोचें। आपकी रक्षा होगी।

घर के प्रत्येक सदस्य को होलिका दहन में घी में भिगोई हुई दो लौंग, एक बताशा और एक पान का पत्ता अवश्य चढ़ाना चाहिए। होली की ग्यारह परिक्रमा करते हुए होली में सूखे नारियल की आहुति देनी चाहिए।. इससे सुख-सम्रद्धि बढ़ती है, कष्ट दूर होते हैं।

24. मतभेद दूर करने के लिये

पुत्र की पिता से न बनती हो तो अमावस्या, चतुर्दर्शीय या ग्रहण के दिन पुत्र पिता के जूतों से पुराने मोज़े निकाल कर उनमें नए मोज़े रख दे, दोनों के बीच चल रहा वैमनस्य दूर हो जाएगा।

25. भूत-प्रेत और जादू-टोना से बचने के लिए

मोर पंख को अगर ताबीज में भर के बच्चे के गले में डाल दें, तो उसे भूत-प्रेत और जादू-टोने की पीड़ा नहीं रहती।


26. क्रोध पर नियंत्रण हेतु

यदि घर के किसी व्यक्ति को बात-बात पर गुस्सा आता हो, तो दक्षिणावर्ती शंख को साफ कर उसमें जल भरकर उसे पिला दें। यदि परिवार में पुरुष सदस्यों के कारण आपस में तनाव रहता हो, तो पूर्णिमा के दिन कदंब वृक्ष की सात अखंड पत्तों वाली डाली लाकर घर में रखें। अगली पूर्णिमा को पुरानी डाली कदंब वृक्ष के पास छोड़ आएं और नई डाली लाकर रखें। यह क्रिया इसी तरह करते रहें, तनाव कम होगा।

27. नया कारोबार करने से पहले

नया कारोबार, नई दुकान या कोई भी नया कार्य करने से पूर्व मिट्टी के पांच पात्र लें जिसमें सवाकिलो सामान आ जाएं। प्रत्येक पात्र में सवा किलो सफेद तिल, सवा किलो पीली सरसों, सवा किलो उड़द, सवा किलो जौ, सवा किलो साबुत मूंग भर दें। मिट्टी के ढक्कन से ढंक कर सभी पात्र को लाल कपड़े से मुंह बांध दें और अपने व्यवसायकि स्थल पर इन पांचों कलश को रख दें। वर्ष भर यह कलश अपनी दुकान में रखें ग्राहकों का आगमन बड़ी सरलता से बढ़ेगा और कारोबारी समस्या का निवारण भी होगा। एक वर्ष के बाद इन संपूर्ण पात्रों को अपने ऊपर से 11 बार उसार कर बहते पानी में प्रवाह कर दें। और नये पात्र भरकर रख दें।

28. ऋण मुक्ति और धन वापसी के उपाय

किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के मंगलवार के दिन प्रदोष काल में यह पूजा प्रारंभ करें। किसी भी प्राण प्रतिष्ठित शिव मंदिर में जाकर श्रद्धापूर्वक शिव की उपासना करें। शिव पूजन के उपरांत अपने सामने दो दोने रख दें। एक दोने में यानी बायें हाथ वाले दोनें में 108 बिल्वपत्र पीले चंदन से प्रत्येक बिल्व पत्र में ॐ नम:शिवाय लिखकर रख दें। तत्पश्चात शुद्ध आसन बिछाकर एक बिल्वपत्र अपने दाहिनी हाथ में लें और इस ॐ ऋणमुक्तेश्वर महादेवाय नम:। मंत्र का जाप करें। और दाहिने हाथ वाले दोने में बिल्व पत्र को रख दें। ऐसा 108 बार करें। जाप पूरा होने के उपरांत एक पाठ ऋणमोचन मंगल स्तोत्र का करें। साथ ही सर्वारिष्ट शान्त्यर्थ शनि स्तोत्र का पांच पाठ भी करें। ऐसा नियमित 40 दिन तक पूजा करने से ऋण से छुटकारा मिल जाएगा।

29. प्रेम विवाह में सफल होने के लिए

यदि आपको प्रेम विवाह में अडचने आ रही हैं तो : शुक्ल पक्ष के गुरूवार से शुरू करके विष्णु और लक्ष्मी मां की मूर्ती या फोटो के आगे “ऊं लक्ष्मी नारायणाय नमः” मंत्र का रोज़ तीन माला जाप स्फटिक माला पर करें ! इसे शुक्ल पक्ष के गुरूवार से ही शुरू करें ! तीन महीने तक हर गुरूवार को मंदिर में प्रशाद चढांए और विवाह की सफलता के लिए प्रार्थना करें !

30. नौकर न टिके या परेशान करे तो

हर मंगलवार को बदाना (मीठी बूंदी) का प्रशाद लेकर मंदिर में चढा कर लडकियों में बांट दें ! ऐसा आप चार मंगलवार करें !

31. वशीकरण टोटका

अगर आपका जीवनसाथी, प्रेमिका, प्रेमी , भाई ,बहन, बेटी, बेटा ,रिश्तेदार, पति आप से दूर चला गया हो और वो आपको संपर्क न करे तो आप यह सरल प्रभावकारी टोटका कर सकते है ! आपका बॉस आपसे खुश नहीं रहता या आप की तरफ ध्यान नहीं देता तो भी आप यह कर सकते है !

आप सबसे पहले किसी भी अमावस्या के दिन दो सूखे हुए पीपल के पत्ते तोड़ ले, नीचे ज़मीन से न उठाए, जो कुछ पीले/सूखे से हो पेड़ से ही तोड़ेँ, आप जिस से प्यार करते है, या जिस व्यक्ति को प्रभावित करना चाहते हो उस का नाम दोनों पीपल के पत्तो पर लिख देँ, एक पत्ते पर काजल से लिखेँ और उसको वहीँ पीपल के पेड़ के पास उल्टा कर के रख दे और उस पर भारी पत्थर रख दे, और दूसरे पत्ते पर लाल सिँदूर से लिखेँ और उसको लाकर अपने घर की छत पर उल्टा कर के रख देँ और उस पर भी पत्थर रख दे, ये आपको आगामी पूर्णिमा तक करना है यानि 16 दिन और प्रतिदिन पीपल के पेड़ में अपने साथी को वापस पाने की प्रार्थना करते हुए पानी भी चढायेँ ।

कुछ दिन बाद आपने जिसका नाम लिखा था वह व्यक्ति आपसे संपर्क करेगा और वो आपकी तरफ पुनः आकर्षित होने लगेगा । फिर सभी पत्ते एकत्र कर किसी शुद्ध स्थान पर गड्ढे मेँ दबा देँ।

अगर पति या प्रेमी का पत्नी या प्रेमिका के प्रति प्यार कम हो गया हो तो श्री कृष्ण का स्मरण कर तीन इलायची अपने बदन से स्पर्श करती हुई शुक्रवार के दिन छुपा कर रखें। जैसे अगर साड़ी पहनतीं हैं तो अपने पल्लू में बांध कर उसे रखा जा सकता है और अन्य लिबास पहनती हैं तो रूमाल में रखा जा सकता है।

शनिवार की सुबह वह इलायची पीस कर किसी भी व्यंजन में मिलाकर पति या प्रेमी को खिला दें। मात्र तीन शुक्रवार में स्पष्ट फर्क नजर आएगा।

शुक्ल पक्ष के रविवार को ५ लौंग शरीर में ऐसे स्थान पर रखें जहां पसीना आता हो व इसे सुखाकर चूर्ण बनाकर दूध, चाय में डालकर जिस किसी को पिला दी जाए तो वह वश में हो जाता है।
*नजर उतारने के उपाय*
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1. बच्चे ने दूध पीना या खाना छोड़ दिया हो, तो रोटी या दूध को बच्चे पर से 'आठ' बार उतार के कुत्ते या गाय को खिला दें. 

2. नमक, राई के दाने, पीली सरसों, मिर्च, पुरानी झाडू का एक टुकड़ा लेकर 'नजर' लगे व्यक्ति पर से 'आठ' बार उतार कर अग्नि में जला दें. 'नजर' लगी होगी, तो मिर्चों की धांस नहीँ आयेगी. 

3. जिस व्यक्ति पर शंका हो, उसे बुलाकर 'नजर' लगे व्यक्ति पर उससे हाथ फिरवाने से लाभ होता है. 

4. पश्चिमी देशों में नजर लगने की आशंका के चलते 'टच वुड' कहकर लकड़ी के फर्नीचर को छू लेता है. ऐसी मान्यता है कि उसे नजर नहीं लगेगी. 

5 गिरजाघर से पवित्र -. जल लाकर पिलाने का भी चलन है. 

6. इस्लाम धर्म के अनुसार 'नजर' वाले पर से 'अण्डा' या 'जानवर की कलेजी' उतार के 'बीच चौराहे' पर रख दें. दरगाह या कब्र से फूल और अगर - बत्ती की राख लाकर 'नजर' वाले के सिरहाने रख दें या खिला दें. 

7. एक लोटे में पानी लेकर उसमें नमक, खड़ी लाल मिर्च डालकर आठ बार उतारे. फिर थाली में दो आकृतियाँ - एक काजल से, दूसरी कुमकुम से बनाए. लोटे का पानी थाली में डाल दें. एक लम्बी काली या लाल रङ्ग की बिन्दी लेकर उसे तेल में भिगोकर 'नजर' वाले पर उतार कर उसका एक कोना चिमटे या सँडसी से पकड़ कर नीचे से जला दें. उसे थाली के बीचो - बीच ऊपर रखें. गरम - गरम काला तेल पानी वाली थाली में गिरेगा. यदि नजर लगी होगी तो, छन - छन आवाज आएगी, अन्यथा नहीं. 

8. एक नींबू लेकर आठ बार उतार कर काट कर फेंक दें. 

9. चाकू से जमीन पे एक आकृति बनाए. फिर चाकू से 'नजर' वाले व्यक्ति पर से एक - एक कर आठ बार उतारता जाए और आठों बार जमीन पर बनी आकृति को काटता जाए. 

10 गो -. मूत्र पानी में मिलाकर थोड़ा - थोड़ा पिलाए और उसके आस - पास पानी में मिलाकर छिड़क दें. यदि स्नान करना हो तो थोड़ा स्नान के पानी में भी डाल दें. 

11. थोड़ी सी राई, नमक, आटा या चोकर और 3, 5 या 7 लाल सूखी मिर्च लेकर, जिसे 'नजर' लगी हो, उसके सिर पर सात बार घुमाकर आग में डाल दें. 'नजर' - दोष होने पर मिर्च जलने की गन्ध नहीं आती. 

12. पुराने कपड़े की सात चिन्दियाँ लेकर, सिर पर सात बार घुमाकर आग में जलाने से 'नजर' उतर जाती है. 

13. झाडू को चूल्हे / गैस की आग में जला कर, चूल्हे / गैस की तरफ पीठ कर के, बच्चे की माता इस जलती झाडू को 7 बार इस तरह स्पर्श कराए कि आग की तपन बच्चे को न लगे. तत्पश्चात् झाडू को अपनी टागों के बीच से निकाल कर बगैर देखे ही, चूल्हे की तरफ फेंक दें. कुछ समय तक झाडू को वहीं पड़ी रहने दें. बच्चे को लगी नजर दूर हो जायेगी. 

14. नमक की डली, काला कोयला, डंडी वाली 7 लाल मिर्च, राई के दाने तथा फिटकरी की डली को बच्चे या बड़े पर से 7 बार उबार कर, आग में डालने से सबकी नजर दूर हो जाती है. 

15. फिटकरी की डली को, 7 बार बच्चे / बड़े / पशु पर से 7 बार उबार कर आग में डालने से नजर तो दूर होती ही है, नजर लगाने वाले की धुंधली - सी शक्ल भी फिटकरी की डली पर आ जाती है. 

16. तेल की बत्ती जला कर, बच्चे / बड़े / पशु पर से 7 बार उबार कर दोहाई बोलते हुए दीवार पर चिपका दें. यदि नजर लगी होगी तो तेल की बत्ती भभक - भभक कर जलेगी. नजर न लगी होने पर शांत हो कर जलेगी. 

17. "नमो सत्य आदेश. गुरु का ओम नमो नजर, जहाँ पर - पीर न जानी. बोले छल सो अमृत - बानी. कहे नजर कहाँ से आई? यहाँ की ठोर ताहि कौन बताई? कौन जाति तेरी? ठाम कहाँ? बेटी किसकी? कहा तेरा नाम? कहां से उड़ी, कहां को जाई? अब ही बस कर ले, तेरी माया तेरी जाए. सुना चित लाए, जैसी होय सुनाऊँ आय. तेलिन - तमोलिन, चूड़ी - चमारी, कायस्थनी, खत - रानी, कुम्हारी, महतरानी, राजा की रानी. जाको दोष, ताही के सिर पड़े. जाहर पीर नजर की रक्षा करे. मेरी भक्ति, गुरु की शक्ति. फुरो मन्त्र, ईश्वरी वाचा. "
विधि - मन्त्र पढ़ते हुए मोर - पंख से व्यक्ति को सिर से पैर तक झाड़ दें. 

18. "वन गुरु इद्यास करु. सात समुद्र सुखे जाती. चाक बाँधूँ, चाकोली बाँधूँ, दृष्ट बाँधूँ. नाम बाँधूँ तर बाल बिरामनाची आनिङ्गा. " 
विधि - पहले मन्त्र को सूर्य - ग्रहण या चन्द्र - ग्रहण में सिद्ध करें. फिर प्रयोग हेतु उक्त मन्त्र के यन्त्र को पीपल के पत्ते पर किसी कलम से लिखें. "देवदत्त" के स्थान पर नजर लगे हुए व्यक्ति का नाम लिखें. यन्त्र को हाथ में लेकर उक्त मन्त्र 11 बार जपे. अगर - बत्ती का धुवाँ करे. यन्त्र को काले डोरे से बाँधकर रोगी को दे. रोगी मंगलवार या शुक्रवार को पूर्वाभिमुख होकर ताबीज को गले में धारण करें. 

19. "नमो आदेश. तू ज्या नावे, भूत पले, प्रेत पले, खबीस पले, अरिष्ट पले - सब पले. न पले, तर गुरु की, गोरखनाथ की, बीद याहीं चले. गुरु संगत, मेरी भगत, चले मन्त्र, ईश्वरी वाचा. "
विधि - उक्त मन्त्र से सात बार 'राख' को अभिमन्त्रित कर उससे रोगी के कपाल पर टिका लगा दें. नजर उतर जायेगी. 

20. "नमो भगवते श्री पार्श्वनाथाय, ह्रीं धरणेन्द्र - पद्मावती सहिताय. आत्म - चक्षु, प्रेत - चक्षु, पिशाच - चक्षु - सर्व नाशाय, सर्व - ज्वर -. नाशाय, त्रायस त्रायस, ह्रीं नाथाय स्वाहा "
विधि - उक्त जैन मन्त्र को सात बार पढ़कर व्यक्ति को जल पिला दें. 

21 "टोना -. टोना कहाँ चले? चले बड़ जंगल. बड़े जंगल का करने? बड़े रुख का पेड़ काटे. बड़े रुख का पेड़ काट के का करबो? छप्पन छुरी बनाइब. छप्पन छुरी बना के का करबो? अगवार काटब, पिछवार काटब, नौहर काटब, सासूर काटब, काट -. कूट के पंग बहाइबै, तब राजा बली कहाईब "
विधि - 'दीपावली' या 'ग्रहण' - काल में एक दीपक के सम्मुख उक्त मन्त्र का 21 बार जप करे. फिर आवश्यकता पड़ने पर भभूत से झाड़े, तो नजर - टोना दूर होता है.

22. डाइन या नजर झाड़ने का मन्त्र
"उदना देवी, सुदना गेल. सुदना देवी कहाँ गेल? गेल केकरे? सवा सौ लाख विधिया गुन, सिखे गेल. से गुन सिख के का कैले? भूत के पेट पान कतल कर दैले. मारु लाती, फाटे छाती और फाटे डाइन के छाती. डाइन के गुन हमसे खुले. हमसे न खुले, तो हमरे गुरु से खुले. दुहाई ईश्वर - महादेव, गौरा - पार्वती, नैना - जोगिनी, कामरु -. कामाख्या की "
विधि - किसी को नजर लग गई हो या किसी डाइन ने कुछ कर दिया हो, उस समय वह किसी को पहचानता नहीं है. उस समय उसकी हालत पागल - जैसी हो जाती है. ऐसे समय उक्त मन्त्र को नौ बार हाथ में 'जल' लेकर पढ़े. फिर उस जल से छिंटा मारे तथा रोगी को पिलाए. रोगी ठीक हो जाएगा. यह स्वयं - सिद्ध मन्त्र है, केवल माँ पर विश्वास की आवश्यकता है. 

23. नजर झारने के मन्त्र
1 "हनुमान चलै, अवधेसरिका वृज -. वण्डल धूम मचाई. टोना - टमर, डीठि - मूठि सबको खैचि बलाय. दोहाई छत्तीस कोटि देवता की, दोहाई लोना चमारिन की. "
2 "वजर -. बन्द वजर - बन्द टोना - टमार, डीठि - नजर. दोहाई पीर करीम, दोहाई पीर असरफ की, दोहाई पीर अताफ की, दोहाई पीर पनारु की नीयक मैद. "
विधि - उक्त मन्त्र से 11 बार झारे, तो बालकों को लगी नजर या टोना का दोष दूर होता है. 

24 नजर -. टोना झारने का मन्त्र
"आकाश बाँधो, पाताल बाँधो, बाँधो आपन काया. तीन डेग की पृथ्वी बाँधो, गुरु जी की दाया. जितना गुनिया गुन भेजे, उतना गुनिया गुन बांधे. टोना टोनमत जादू. दोहाई कौरु कमच्छा के, नोनाऊ चमाइन की. दोहाई ईश्वर गौरा -. पार्वती की, ह्रीं फट् स्वाहा " विधि - नमक अभिमन्त्रित कर खिला दे. पशुओं के लिए विशेष फल - दायक है. 

25. नजर उतारने का मन्त्र 
"ओम नमो आदेश गुरु का. गिरह - बाज नटनी का जाया, चलती बेर कबूतर खाया, पीवे दारु, खाय जो मांस, रोग - दोष को लावे फाँस. कहाँ - कहाँ से लावेगा? गुदगुद में सुद्रावेगा, बोटी - बोटी में से लावेगा, चाम - चाम में से लावेगा, नौ नाड़ी बहत्तर कोठा में से लावेगा, मार - मार बन्दी कर लावेगा. न लावेगा, तो अपनी माता की सेज पर पग रखेगा. मेरी भक्ति, गुरु की शक्ति, फुरो मन्त्र ईश्वरी वाचा. "
विधिः - छोटे बच्चों और सुन्दर स्त्रियों को नजर लग जाती है. उक्त मन्त्र पढ़कर मोर - पंख से झाड़ दें, तो नजर दोष दूर हो जाता है. 

26 नजर -. टोना झारने का मन्त्र
"कालि देवि, कालि देवि, सेहो देवि, कहाँ गेलि, विजूवन खण्ड गेलि, कि करे गेलि, कोइल काठ काटे गेलि. कोइल काठ काटि कि करति. फलाना का धैल धराएल, कैल कराएल, भेजल भेजायल. डिठ मुठ गुण - वान काटि कटी पानि मस्त करै. दोहाई गौरा पार्वति क, ईश्वर महादेव क, कामरु कमख्या माई इति सीता - राम - लक्ष्मण -. नरसिंघनाथ क "
विधिः - किसी को नजर, टोना आदि संकट होने पर उक्त मन्त्र को पढ़कर कुश से झारे. 
नोट: - नजर उतारते समय, सभी प्रयोगों में ऐसा बोलना आवश्यक है कि "इसको बच्चे की, बूढ़े की, स्त्री की, पुरूष की, पशु - पक्षी की, हिन्दू या मुसलमान की, घर वाले की या बाहर वाले की, जिसकी नजर लगी हो, वह इस बत्ती, नमक, राई, कोयले आदि सामान में आ जाए तथा नजर का सताया बच्चा - बूढ़ा ठीक हो जाए. सामग्री आग या बत्ती जला दूंगी या जला दूंगा.''

हनुमानजी के सामने करें ये उपाय

अगर आपको कड़ी मेहनत के बाद भी किसी महत्वपूर्ण कार्य में सफलता नहीं मिल पा रही है तो किसी हनुमान मंदिर जाएं और अपने साथ एक नींबू और 4 लौंग लेकर जाएं। इसके बाद मंदिर में पहुंचकर नींबू के ऊपर चारों लौंग लगा दें। फिर हनुमान चालीसा का पाठ करें या हनुमानजी के मंत्रों का जप करें। इसके बाद हनुमानजी से सफलता दिलवाने की प्रार्थना करें। प्रार्थना के बाद इस नींबू को अपने पास रख लें और इसे साथ लेकर कार्य करें। मेहनत के साथ ही कार्य में सफलता मिलने की संभावनाएं बढ़ सकती है।

लक्ष्मी प्राप्ति का ज्योतिषीय उपाय



१. स्थायी संपत्ति, ऐश्वर्य और पारिवारिक शांति प्राप्त होती है.
२. गर्भवती स्त्री को कष्ट से मुक्ति मिलती है. साथ ही सरलता से प्रसव होता है.
३. जिस घर में एकाक्षी नारियल की प्रतिदिन पूजा होती है. उस घर में वास्तु दोष एवं किया कराया दुष्प्रभाव स्वतः समाप्त हो जाते हैं.
४. बंध्या स्त्री को ऋतु स्नान के बाद एकाक्षी नारियल का पानी पीने से संतान होती है.
५. अमावस्या-पूर्णिमा को पानी में डुबोकर ११ बार मंत्र का जाप कर हवन करके पानी को घर में छिडकने से भूत-प्रेतों का उपद्रव समाप्त होता है.
६. मुकदमे में लाभ नहीं मिल रहा हो तो मंगलवार के दिन विधि विधान से पूजन करें, लाल कनेर में नारियल को लपेटकर न्यायालय जाएं सफलता मिलेगी.
७. घर के आसपास या पडोस में कोई शत्रु परेशान कर रहा हो, तो पीपल के पेड के पास पूजन करने से शत्रु का नाश होता है.
८. विधि विधान से पूजन कर नारियल पर चंदन, केसर, रोली अर्पण कर वृहस्पतिवार के दिन स्वयं तिलक कर कहीं भी जाने से सफलता मिलती है.

घर को बुरी नजर से बचाए

सनातन धर्म के अनुसार गौ (गाय) में सब देवताओं का वास है। गौ मूत्र सर्व पापनाशक माना गया है। यह हमारे विचारों में सात्विकता लाता है। अगर आपके घर पर किसी की बुरी नजर लग गई है, तो नीचे दिए गए आसान उपाय से आप उन्हें दूर कर सकते हैं -

* अपने घर के चारों तरफ की नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव खत्म करने के लिए घर में नियमित रूप से गौ मूत्र का छिड़काव करें।

* गौ मूत्र को पवित्र पदार्थ माना गया है और इसमें वातावरण में मौजूद सभी नकारात्मक शक्तियों को समाप्त करने की शक्ति होती है। अगर आपको शक हो कि किसी ने आप पर कोई टोना-टोटका किया है तो भी गो मूत्र सर्वश्रेष्ठ उपचार है। अपने शरीर पर गौ-मूत्र का छिड़काव करें।

* प्रतिदिन थोड़ा-थोड़ा गौमूत्र पीने से भी लाभ प्राप्त होते हैं।

मात्र इन तीन आसान उपाय से सभी प्रकार के टोने-टोटकों और बुरी नजर के प्रभाव से बचा जा सकता है।

धन प्राप्ति के लिए कुछ खास उपाय

 नोट -- इन सिद्ध यंत्रों की स्थापना सभी प्राणियों के कल्याण हेतु की गयी है, यदि आपके मन में कोई संदेह है , या आप इन यंत्रों में विश्वास नहीं रखते है तो आप इस पेज को बंद कर दें , परन्तु इन यंत्रों का उपहास एवं अनादर न करें ।

1. सदैव याद रखें कभी भी किसी से कोई चीज मुफ्त में न लें , हमेशा उसका मूल्य अवश्य ही चुकाएं , कभी भी किसी व्यक्ति को धोखा देकर धन का संचय न करें , इस तरह से कमाया हुआ धन टिकता नहीं है , वह उस व्यक्ति और उसके परिवार के ऊपर कर्ज के रूप में चढ जाता है और ऐसा करने से व्यक्ति के स्वयं के भाग्य और उसके कर्म से आसानी से मिलने वाली सम्रद्धि और सफलता में भी हमेशा बाधाएँ ही आती है ।

2. हर एक व्यक्ति को चाहे वह अमीर हो या गरीब , उसका जो भी व्यवसाय / नौकरी हो अपनी आय का कुछ भाग प्रति माह धार्मिक कार्यों में अथवा दान पुण्य में अवश्य ही खर्च करें , ऐसा करने से उस व्यक्ति पर माँ लक्ष्मी की सदैव कृपा बनी रहती है , उसके परिवार में हर्ष - उल्लास और सहयोग का वातावरण बना रहता है तथा सामान्यता वह अपने दायित्वों के पूर्ति के लिए पर्याप्त धन अवश्य ही आसानी से कमा लेता है ।

3. स्त्रियों को स्वयं लक्ष्मी का स्वरुप माना गया है । प्रत्येक स्त्री को पूर्ण सम्मान दें । घर की व्यवस्था अपनी पत्नी को सौपें , वही घर को चलाये उसके काम में कभी भी मीन मेख न निकालें । अपने माता पिता को अपनी आय का एक निश्चित हिस्सा अवश्य ही दें । घर में कोई भी बड़ा काम हो तो उस घर के बड़े बुजुर्गों विशेषकर स्त्रियों को अवश्य ही आगे करें । अपने घर एवं रिश्तेदारी में अपनी पत्नी को अवश्य ही आगे रखें । अपनी माँ, पत्नी, बहन एवं बेटी को हर त्यौहार , जन्मदिवस , एवं शादी की सालगिरह आदि पर कोई न कोई उपहार अवश्य ही दे ।

4. घर के मुखिया जो अपने घर व्यापार में माँ लक्ष्मी की कृपा चाहते है वह रात के समय कभी भी चावल, सत्तू , दही , दूध ,मूली आदि खाने की सफेद चीजों का सेवन न करें इस नियम का जीवन भर यथासंभव पालन करने से आर्थिक पक्ष हमेशा ही मजबूत बना रहता है ।

5. शुक्रवार को सवा सौ ग्राम साबुत बासमती चावल और सवा सौ ग्राम ही मिश्री को एक सफेद रुमाल में बांध कर माँ लक्ष्मी से अपनी गलतियों की क्षमा मांगते हुए उनसे अपने घर में स्थायी रूप से रहने की प्रार्थना करते हुए उसे नदी की बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें , धीरे धीरे आर्थिक पक्ष मजबूत होता जायेगा ।

6. प्रथम नवरात्री से नवमी तिथि तक प्रतिदिन एक बार श्रीसूक्त का अवश्य ही पाठ करें इससे निश्चय ही आप पर माता लक्ष्मी की कृपा द्रष्टि बनी रहेगी ।

7. घर के पूजा स्थल और तिजोरी में सदैव लाल कपडा बिछा कर रखें और संध्या में आपकी पत्नी या घर की कोई भी स्त्री नियम पूर्वक वहां पर ३ अगरबत्ती जला कर अवश्य ही पूजा करें ।

8. प्रत्येक पूर्णिमा में नियमपूर्वक साबूदाने की खीर मिश्री और केसर डाल कर बनाये फिर उसे माँ लक्ष्मी को अर्पित करते हुए अपने जीवन में चिर स्थाई सुख , सौभाग्य और सम्रद्धि की प्रार्थना करें , तत्पश्चात घर के सभी सदस्य उस खीर के प्रशाद का सेवन करें ।

9. हर 6 माह में कम से कम एक बार अपने माता पिता को कोई उपहार अवश्य ही दें इससे आपकी आय में सदैव बरकत रहेगी ।

10. घर में तुलसी का पौधा लगाकर वहां पर संध्या के समय रोजाना घी का दीपक जलाने से माता लक्ष्मी उस घर से कभी भी नहीं जाती है ।

मुकदमें में विजय पाने के कुछ खास उपाय



नोट -- इन सिद्ध यंत्रों की स्थापना सभी प्राणियों के कल्याण हेतु की गयी है , यदि आपके मन में कोई संदेह है , या आप इन यंत्रों में विश्वास नहीं रखते है तो आप इस पेज को बंद कर दें , परन्तु इन यंत्रों का उपहास एवं अनादर न करें ।

1. जब भी आप अदालत में जाएँ तो किसी भी हनुमान मंदिर में धूप अगरबत्ती जलाकर, लड्डू या गुड चने का भोग लगाकर एक बार हनुमान चालीसा और बजरंग बान का पाठ करके संकटमोचन बजरंग बलि से अपने मुकदमे में सफलता की प्रार्थना करें .........आपको निसंदेह सफलता प्राप्त होगी ।

2. आप जब भी अदालत जाएँ तो गहरे रंग के कपड़े ही पहन कर जाएँ ।

3. अपने अधिवक्ता को उसके काम की कोई भी वास्तु जैसे कलम उपहार में अवश्य ही प्रदान करें ।

4. अपने कोर्ट के केस की फाइलें घर में बने मंदिर धार्मिक स्थान में रखकर ईश्वर से अपनी सफलता, अपनी रक्षा के लिए प्रार्थना करें ।

5. यदि ग्यारह हकीक पत्थर लेकर किसी मंदिर में चदा दें और कहें की मैं अमुक कार्य में विजय होना चाहता हूँ तो निश्चय ही उस कार्य में विजय प्राप्त होती है ।

6. यदि आप पर कोई मुसीबत आन पड़ी हो कोई रास्ता न सूझ रहा हो या आप कोर्ट कचहरी के मामलों में फँस गए हों, आपका धैर्य जबाब देने लगा हो, जीवन केवल संघर्ष ही रह गया हो, अक्सर हर जगह अपमानित ही महसूस करते हों, तो आपको सात मुखी, पंचमुखी अथवा ग्यारह मुखी रुद्राक्ष धारण करने चाहियें ।

7. मुकदमे में विजय हेतु कोर्ट कचहरी में जाने से पहले ५ गोमती चक्र को अपनी जेब में रखकर , जो स्वर चल रहा हो वह पाँव पहले कोर्ट में रखे अगर स्वर ना समझ आ रहा हो तो दाहिना पैर पहले रखे , मुकदमे में निर्णय आपके पक्ष में होने की संभावना प्रबल होगी ।

8. जब आप पहली बार मुकदमें से वापिस आ रहे तो रास्ते में किसी भी मजार में गुलाब का पुष्प अर्पित करते हुए ही अपने निवास पर आएँ ।

9. मुकदमें अथवा किसी भी प्रकार के वाद विवाद में सफलता हेतु लाल ध् सिंदूरी मूँगा त्रिकोण की आक्रति का सोने या तांबे मिश्रित अंगूठी में बनवाकर उसे दाहिने हाथ के अनामिका उंगली में धारण करें , इससे सफलता की संभावना और अधिक हो जाती है ।

10. मुकदमें में विजय प्राप्ति हेतु घर के पूजा स्थल में सिद्धि विनायक पिरामिड स्थापित करके प्रत्येक बुधवार को गन गणपतए नमो नमः मंत्र का जाप करें । जब भी अदालत जाएँ इस पिरामिड को लाल कपड़े में लपेटकर अपने साथ ले जाएँ ....आपको शीघ्र ही सफलता प्राप्त होगी ।
    
    अनेक बार ऐसा होता है कि परिवार के सदस्यों में छोटी-छोटी बातों परतर्क-वितर्क होते-होते कुतर्क भी हो जाता है और घर में आपस मेंझगड़े का-सा वातावरण बन जाता है। उस स्थिति में घर के पीने केपानी के मटके में से एक लोटा पानी लेकर अपने भवन के चारों कोनोंमें और मकान के बीचों-बीच थोड़ा-सा जल छिड़क लें, वातावरण मेंशांति हो जाएगी।

    भवन में वास्तु और सभी प्रकार की शांति के लिए आप अपने घर केमंदिर में जो अगरबत्तियां पूजा के समय लगाते हैं उन्हें आप प्रज्चलितकरके बाएं हाथ की ओर से (एंटी क्लाकवाइज) दीवार के सहारे-सहारेपूरे मकान में घूमते हुए लाकर मंदिर में लगा दें, घर में शांति बनीरहेगी और घर बुरी नजर से भी बचा रहेगा।
    कई बार ऐसा होता है कि व्यक्ति को नींद में निरंतर डरावने स्वप्न
    आते रहते हैं और वो डर के मारे चौंककर जाग जाता है। ऐसी स्थिति
    में जिस दिशा में पैर हैं उस दिशा में वो अपना सिर कर लें अर्थात वो अपना सिरहाना बदल लें तो डरावने स्वप्न आने तुरंत बंद हो जाएंगेऔर गहरी नींद आएगी।
    अगर किसी व्यक्ति को सोते समय आत्माएं परेशान करती हैं औरसोने नहीं देती हैं तो वह सोने से पहले निम्न शब्दों का उच्चारण करेतो उसको भय रहित नींद आ जाएगी और आत्माएं उसे परेशान नहींकरेंगी। ‘हनुमान की ओमकार मेरी तरफ कोई बुरी बला आए तोलगे खून से भरी तलवार।'
    व्यक्ति के जीवन में जाने-अनजाने उसके शत्रुओं की संख्या भी बढ़जाती है। बहुत-सी बार ऐसा देखा गया है कि उसके परिवार को एकप्रकार से ‘नजर’ लग जाती है। इससे बचने के लिए मंगलवार-शनिवारको सायंकाल के समय मंदिर में 6 अगरबत्तियां अपने इष्ट का ध्यानकर लगा दें। अब थोड़ा-सा पिसा हुआ सेंधा नमक चारों कोनों में छिड़कदें और अगले दिन झाडू से इस नमक को घर के बाहर निकाल दें।समस्त नजर दूर हो जाएगी।
    एक पान, एक लोटा जल, दो बताशे, दो साबुत इलायची अनटोक पीपलके वृक्ष पर शनि और मंगल को चुपचाप चढ़ा दें। इस प्रकार सारे कुप्रभाव स्वतः ही दूर हो जाएंगे।
        अगर आप किसी दुष्ट शब्रु से बुरी तरह परेशान हैं और किसी भीतरह उसका निवारण नहीं कर पा रहे हैं तो 38 दाने साबुत काले उडदऔर 40 दाने चावल मिलाकर किसी गड्ढे में दबा दें और ऊपर सेकागजी नीबू निचोड़ दैं। शत्रु का नाम भी लें।

    शनिवार के दिन कच्ची घानी का सरसों का तेल ले लें। उसमें अपनीछाया देखें। इसके पश्चात इस तेल में गुड़ के गुलगुले उतार लें। यहगुलगुले किसी गरीब को दे दें। सब बाधाएं शांत हो जाएंगी। शनि काकोप भी शांत होगा।

    एक रुपए का चमकीला सिक्का ले लें। रात को इसे सिरहाने रखकर सोजाएं। प्रातः इसे श्मशान की सीमा में चुपचाप फेंक आएं। शरीर स्वस्थ्थहोगा।

    7 साबुत हल्दी की गांठ, पीतल का एक टुकड़ा, थोड़ा-सा गुड़ अगरकन्या अपने हाथ से ससुराल की तरफ फेंक दे तो वह ससुराल मेंसदैव सुरक्षापूर्वक और सुखी रहती है।

    कन्या का जब विवाह हो चुका हो और वह विदा हो रही हो तब एकलोटे में गंगाजल लेकर उसमें थोड़ी हल्दी तथा एक पीला सिक्का डालकरलड़की के ऊपर से उतारकर उसके आगे फेंक दें। वैवाहिक जीवनसुखी रहेगा।

    चमकीले हरे धागे की रील, हरा कागज, साबुत हरिद्रा, पीतल का टुकड़ायह सब मिलाकर घर का मुखिया अगर कुएं में अनटोक डाल दै तोगया व्यक्ति वापस आ जाता है।

    घर से किसी भी कार्य के लिए निकलते समय पहले विपरीत दिशा मेंचार पग जाएं, इसके पश्चात कार्य पर चले जाएं। कार्य अवश्य हीबनेगा।

    आश्लेषा नक्षत्र में देवदारू की लकड़ी लाकर बकरे के मूत्र में भिगोकर,कूट-पीसकर सुखा लें। जिसका आकर्षण करना हो उसके मस्तक परइस चूर्ण को डालने से अभिलाषा पूर्ण हो जाती है।

    परिवार में सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रतिदिन प्रथम रोटी के चार     बराबर भाग करें एक गऊ को, दूसरा काले कुत्ते को, तीसरा कौए को और चौथा चौराहे पर रख दें। परिवर्तन आप स्पष्ट देखेंगे।

बच्चों को डरने, नींद में चौंकने की शिकायत हो जाती है। प्रेतात्माओंसे रक्षा के लिए, विपदाओं से रक्षा के लिए, आरोग्य लाभ के लिए तथाबने हुए ताबीजों को धारण करने के लिए गण्डों की आवश्यकता होतीहै। यह गण्डे काली पंचक के डोरों की आठ लड़ में करीब दो फुट लम्बेबटकर बना लिए जाते हैं। पंचक के डोरे की करीब पांच फुट लम्बीआठ लड़ें करो। उनको बट दो और उसको दुब्बर करके फिर बट दोतो तैयार डोरा छोटा रह जाएगा। नवदुर्गाओं के 15 अध्यायों की 15गांठें लगा लें, इसे गले में पहनने से बच्चों की बाधाओं की रक्षा होतीहै।

    भोजपत्र के ऊपर लाल चंदन से शत्रु का नाम लिखकर शुद्ध मधु मेंडुबा देने से शत्रु वशीभूत हो जाता है।

    चिता की भस्म, कूठ, वच, तगर और कुमकुम, इन सबको एक साथपीसकर स्त्री के मस्तक पर और पुरुष के पांव के नीचे डालने से वहवशीभूत हो जाते हैं।

    हल्दी, गोमूत्र, घी, सरसों और पान के रस को एकसाथ पीसकर, शरीरपर लगाने से स्त्रियां वशीभूत होती हैं।

    बिरोजे की जड़ और धतूरे के बीज को प्याज के साथ महीन पीसकरजिसे सुंघाया जाए वह वश में हो जाता है।

    काकजंघा, तगर, केसर और मेनसिल इनको समभाग में लेकर चूर्णबनाकर स्त्री के मस्तक पर डाल देने से वशीकरण होता है।

    मंगल के दिन दोपहर पहले श्मशान जाएं। अपने दोनों हाथ पीछे कीओर करके एक लकड़ी को उठा लाएं। उस लकड़ी को रखकर पूजनकरें। इस तरह ग्यारह दिन पूजन करते रहें। त्पश्चात उस लकड़ी केसात टुकड़े करें। इसमें से एक टुकड़े को शत्रु के घर गाड़ दें तथा शेषटुकड़ों को बहा दें। इस तरह करने से शत्रु पूरी तरह वश में आ जाताहै।
    आर्दा नक्षत्र में नदी में घुसकर एक डुबकी लगाकर, थोड़़ी-सी रेतनिकाल लाएं। उसको जिसके मस्तक पर डाला जाएगा वह वशीभूत होजाएगा।
    मेष के सूर्य में एक मसूर के दाने को दो नीम के पत्तों के साथ खाने सेएक वर्ष तक सर्प का भय नहीं रहता।
    आषाढ़ शुक्ल पंचमी के दिन जो अपनी कमर से सिरिस की जड़ बांधताहै तथा चावल का पानी पीता है, उसे सर्पदंश का भय नहीं होता।
    रविवार को काले धतूरे की अभिमंत्रित जड़ बांह में बांधे तो भूत बाधाजाए।
    लहसुन एकड़िया के रस में हींग पीसकर भूत-ग्रस्त को सुंधाएं तो भूतभाग जाए।
    रविवार को तुलसीपत्र, काली मिर्च प्रत्येक आठ-आठ तथा सहदेई कीज़ड़ लाकर तीनों को तांबे के यंत्र में भर, धूप देकर धारण करने सेभूतादिक दूर हो जाते हैं।
    मुंडी, गोखरू और बिनौला समभाग लेकर गौमूत्र में पीसकर ब्रह्मराक्षस-ग्रस्त को सुंघाएं तो ठीक हो।
    चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन चीते के पेड़ को न्यौत आएं।फिर नौमी के दिन उसे लाकर धूप-दीप देकर अपने पास रखें तो लोगमोहित हो जाते हैं।
    नीलकमल, गूगल और अगर सबको समभाग लेकर अपने सब अंगोंमें धूनी दें तो उसे देखते ही सभी लोग मोहित हो जाते हैं।
    रविवार के दिन तुलसी के बीजों को सहदेई के रस में पीसकर तिलककरने से स्त्री देखते ही मोहित हो जाती है।
    पांचों प्रकार के फल से तिलक करने से सब लोग मोहित हो जाते है।अंत में केवल इतना ही लिखना चाहता हू कि जिस प्रकार औषधिबतलाने का अधिकार डॉक्टर या कुशल वैद्य को ही होता है, उसी प्रकारटोने-टोटके, साधना, मंत्र जाप बतलाने का अधिकार केवल तांत्रिक को हीहोता है। आप इस बात को स्मरण रखें।

*🙏🏼🌹जय माता की🐚🌹*

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