चित्रा नक्षत्र सम्पूर्ण विवेचन एवं गृह स्थित फल

 

चित्रा नक्षत्र सम्पूर्ण विवेचन एवं गृह स्थित फल


राशि चक्र मे 17320 से 18640 अंश के विस्तार का क्षेत्र चित्रा नक्षत्र है। यह अरब मंजिल मे अल सीमाक, गीक मे स्पाईका SPICA, चीनी सियु मे कियो कहलाता है। चित्रा का अर्थ चमकीला होता है। यह नक्षत्र मोती के समान या लैंप के सामान प्रतीत होता है। चित्रा को स्रमृद्धि के रूप मे भी जाना जाता है।

चित्रा नक्षत्र-हस्त नक्षत्र से अगले 13-20’ में भचक्र पर यह चौदहवां नक्षत्र चित्रा अवस्थित है। इस नक्षत्र के प्रथम दो चरण कन्या राशि के क्षेत्र में तथा अन्तिम दो चरण तुला राशि के क्षेत्र में पड़ते हैं (यानी आधा कन्या और आधा तुला राशि में स्थित है)। इस नक्षत्र का एक ही तारा मोती जैसी आकृति का लगता है। इस नक्षत्र के देवता विश्वकर्मा/त्वष्टा हैं तथा स्वामी मंगल हैं।

            चित्रा नक्षत्र में उत्पन्न होने वाला पुरुष जातक प्रियभाषी, धर्मात्मा, प्रेमी व सुशील होता है। इसके प्रभाव से इसके शत्रु दबे रहते हैं। ऐसा जातक बुद्धिमान, स्त्री व पुत्र के सुख से युक्त एवं प्रभावशाली चेहरे/व्यक्तित्व का स्वामी होता है।

            चित्रा नक्षत्र में जन्मी स्त्री जातक सुंदर, रूपवती तथा आभूषणों से युक्त (सम्पन्न) होती है। परन्तु शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को जन्म हुआ हो तो जातक निर्धन, दुखी एवं विधवा होती है। यदि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को चित्रा नक्षत्र में जातक का जन्म हुआ हो तो जातक विषकन्या होती है। ऐसा शास्त्रवेत्ताओं का कथन है। अतः चित्रा नक्षत्र में जन्मी कन्या का फलादेश करते समय यह तथ्य स्मरण रखना चाहिए।

 

देवता विश्वकर्मा, स्वामी ग्रह मंगल, राशि कन्या 2320 से तुला 0640 अंश। भारतीय खगोल का यह 14 वा मृदु संज्ञक नक्षत्र है। इसका एक तारा है। यह नक्षत्रो मे सबसे चमकीला तारा है। यह वैभव, खुशहाली, सृमद्धि का नक्षत्र है। यह अशुभ सात्विक स्त्री नक्षत्र है। इसकी जाति कृषक, योनि व्याघ्र, योनि वैर गौ, राक्षस गण, अंत नाड़ी है। यह पश्चिम दिशा का स्वामी है।

विश्वकर्मा

प्रतीकवाद - इसके देवता विश्वकर्मा है, जो दिव्य वास्तुकार है। इन्हे आकाशीय शिल्पी कहा जाता है। प्रभु विश्वकर्मा कारीगरों के स्वामी, हिन्दू इंजीनियरिंग, वास्तु कला के रूप मे पूजे जाते है। ये स्वर्णकार, लोहार, बढ़ई, राजमिस्त्री, शिल्पियो के अधिकारी है। विश्वकर्मा सृष्टि रचयिता ब्रम्हा के पुत्र है। महाभारत महकाव्य मे इन्हे कला के स्वामी, हजार हस्त शिल्प के प्रबन्धक, देवताओ के बढ़ई, आभूषणो के निर्माता मानकर कारीगरो मे महान अमर भगवान की कल्पना की है। हिन्दू पौराणिकतानुसार इस दुनिया के निर्माण विश्वकर्मा के उत्पाद है। पौराणिक प्रसिद्ध नगरिया द्वारका, यमपुरी, लंका इन्ही के द्वारा निर्मित थी। दीपावली पर्व विश्वकर्मा की पूजा से प्रारम्भ होता है।

विशेषताए - यह अत्यधिक आद्यात्मिक नक्षत्र है। जातक लगन से कार्यकारी, रोम रहित, चमकीले आकर्षक नेत्र वाला, विपरीत लिंग पर प्रभावित होता है। "वरःमिहिर" (वराहमिहिर) इसे आनंददायक चमकीला नक्षत्र कहते है। इसमे हीरे-मोती के सभी गुणदोष पाए जाते है। स्त्री जातक को सुखद वैवाहिक जीवन के लिए जन्म पत्रिका मिलाकर ही विवाह करना चाहिए। यह राष्ट्र पिता महात्मा गांधी का जन्म नक्षत्र माना जाता है।

चित्रा नक्षत्र विभूतिया

महात्मा गांधी (राष्ट्रपिता, भारत )

चार्ली चेपलिन (20 वी सदी हास्य अभिनेता, ब्रिट्रिश)

बिल गेट्स (कारोबारी दिग्गज, संस्थापक माइक्रोसाफ्ट, अमेरिका)

हिलेरी क्लिंटन (सेनेटर, पॉलिटिसियन, अमेरिका)

नक्षत्र फलादेश

वैदिक ज्योतिष के अनुसार चित्रा वैभव का प्रतीक बड़ा उज्ज्वल चमकीला रत्न है। यह आध्यात्म का नक्षत्र है। चित्रा का मुख्य उध्येश मोह-माया पर विजय प्राप्त करना है। यदि चन्द्र गम्भीर रूप से पीड़ित हो, तो सत्य को मरोड़ा जा सकता है। सृजन का सार, परिवर्तित, शानदार, जादू कला, दृश्य प्रसन्न चित्रा के गुणदोष है।

जातक उपस्थिति सचेत, जटिल होने से माया मोह से सम्बंधित, पुत्र पत्नी से युक्त, धनवान, देव विद्वानो का भक्त, स्थिर, प्रशंसित, संदेह युक्त या अविश्वसनीय होता है। जातक विज्ञान, प्रौद्योगिकि, निर्माण क्षेत्र मे होता है। इसकी आँखो मे टिमटिमाहट और शारीरिक चकाचोंध के कारण विपरीत लिंग का जातक आसानी से आकर्षित हो जाता है। जरुरत अनुसार खेल भावना और बेईमानी दोनो इसमे होती है।

इसका आधा भाग कन्या और शेष आधा भाग तुला राशि में है।

प्रथम आधा भाग (कन्या राशि) मोह के कारण, विस्तार से सम्बंधित, जादुई प्यार, जादू, उच्च स्तरीय निर्माण यंत्र का कारक है।

द्वितीय आधा भाग (तुला राशि) वस्तुओ को विकसित कर उन्हे रूप देना, सम्बन्ध और प्रशंसा की मांग, सौन्दर्य अपील, वस्तुओ का रूप व चमक का कारक है।

अन्यच्च चित्रा फलादेश - चित्रा - चित्रकार, चित्रकारी, चित्र विशेषज्ञ, संगीतज्ञ, निपुण शल्य चिकित्सक, जड़ी-बूटी विशेषज्ञ, कल्पना शील लेखक, आदर्शो का स्वप्न द्रष्टा का कारक है। जातक डरपोक, विचलित मानसिकता वाला, भूखो मरने वाला, यौन उन्मुख या यौन विमुख, शत्रु से पीड़ित, विशेष प्रकार के वस्त्रधारी, खास प्रकार का बहसबाज, प्यार करने मे माहिर, उज्ज्वल, धनी, आनंद लेने वाला, प्रज्ञ, विरूपण व्यक्तित्व वाला, मजबूत, पत्नी और संतति युक्त, धर्मपरायण, ईश्वर का आदरी होता है।

जातक प्रकृति या ब्रम्हाण्ड के रहस्यमयी कार्यालापो को जानने मे लवलीन, ब्रम्हाण्ड के मोह के विभिन्न आवरणो से सत्य जानने वाला, तंत्र विद्याभ्यासी, भौतिक इच्छाओ की पूर्ति करने वाला, दुर्भाग्यवश या तो यौन भावनाओ का दमनकारी या अति कामुक होता है और यौन क्रियाओ मे रत होता है।

पुरुष जातक - जातक क्रश, बुद्धिमान, शांति प्रिय, भीड़ मे भी अपने व्यवहार और हावभाव से आसानी से पहचाने जाने वाला, अपने स्वार्थ और फायदे के लिए किसी भी सीमा तक बेहिचक जाने वाला होता है। इसकी सलाह, विचार, योजना प्रारम्भ मे गलत लगते है परन्तु वे ही बाद मे अपनाये जाते है। जातक अंतर्ज्ञानी होने से अच्छा ज्योतिषी हो सकता है। कुछ जातक स्वप्न दृष्टा होते है और इनके सपने सत्य होते है।

कभी-कभी गलतफहमी मे यह अभद्र, गंवार, कृपण, लोभी माना जाता है। बिना विचारे हर बात का उत्तर देता है और ऐनवक्त जब बहुत देर हो चुकी होती है तब जागता है। इसका शत्रुओ से आमना-सामना होता है परन्तु हर बार बच निकलता है। दलितो के प्रति दयालु, प्रारम्भ मे दलितो की सेवा निस्वार्थ करता है, लेकिन बाद मे स्वार्थ मे परिवर्तित हो जाती है। इसे अपरिचित क्षेत्र से सहायता, पुरस्कार, प्रतिफल प्राप्त होता है।

32 वर्ष तक कठिनाइया आती है। 33 से 53 वर्ष स्वर्णिम होते है। 22, 27, 30, 39 और 48 हर प्रकार अशुभ होते है। जातक परिवार प्रेमी किन्तु उनकी गतिविधियों पर सन्देह करने वाला होता है। पिता से लाभ व स्नेह नही मिलता है। पिता की पहचान और प्रसिद्धि के कारण जातक अलग रहता है। जातक अपने जन्म गृह मे नही रहता है। दाम्पत्य जीवन सुखी नही होता है। मनमुटाव, विरोधाभास होता रहता है।

स्त्री जातक - जातक के गुणदोष पुरुष जैसे ही होते है किन्तु स्त्री जातक को दुर्भाग्य की मार ज्यादा होती है। इसका सुन्दर बदन ईर्ष्या का कारक होता है। इसका शरीर गुदगुदा होता है। बाल लम्बे होते है लेकिन आधुनिक युग अनुसार बाल कटवा लेती है।

इसकी स्वतंत्रता के प्रति उत्कंठा और असम्मानीय व्यवहार समस्या को जटिल बनता है। यह गुण रहित होने पर भी घमण्डी, सत्यनिष्ठ, दुराचारी होती है। यह दुष्कर्म और दुराचार करती रहती है। यदि विवाह के समय जन्म पत्रिका का ठीक से मिलान नहीं किया गया हो, तो पति का मरण या तलाक या पति सुख का पूर्ण आभाव रहता है। किसी-किसी स्त्री जातक मे संतति विहिनता भी परिलक्षित होती है।

आचर्यों अनुसार चित्रा नक्षत्र फलादेश

चित्रा नक्षत्र वालो की आँखे गोल, भोंहे लम्बी व पतली होती है। इनका रंगो के चुनाव मे मसखरापन होता है। ये लोग प्रायः गहरे अटपटे बड़े छापे वाले वस्त्र अधिक पसंद करते है। यदि नक्षत्र का भाग कन्या राशि में हो, तो जातक मे कुछ जनानापन होता है। ये लोग स्त्रियोचित रंग और औरतो की तरह वस्त्राभूषण पहिनने के शौकीन होते है। अपनी पत्नियो के वत्राभूषणादि पहिनने से भी गुरेज नही करते है। - वराहमिहिर

लोग बुद्धिमान, शिल्प विद्या, मिस्त्री आदि कामो मे कुशल होते है। इनकी आस्था चलायमान होती है। वाहन के विषय मे रुचिवान, कई पुत्र होने के योग होते है। यदि तुला गत जातक का नक्षत्र हो, तो व्यापार में रुचिवान होता है लेकिन अपनी आदत, स्वाभाव, सुख सुविधा मे इन्हे कटौती करना स्वीकार्य नही होता है। - पराशर

इनकी बुद्धि विचित्र या अनोखे ढंग से सोचती है हलाकि अपने निर्णयो और निष्कर्षो पर खुद ही शर्मिन्दा होते रहते है।

चन्द्र - यदि चन्द्र चित्रा मे हो, तो सुन्दर शरीरी, आकर्षक आँखे वाला, मैथुन भुक्कड़, महान प्रेमी, भीड़ मे भी आसानी से पहचाने जाने वाला होता है। माता से लाभी, पिता से बाधा, भविष्य वक्ता होता है।

चन्द्रमा सुअवसर, करिश्मा, आकर्षण, आनंद का कारक है। जातक चटीले रंग, आभूषण, सुन्दर वस्तु, कला प्रेमी होता है। ये आध्यात्मिक, अंतर्ज्ञानी, कुशल वार्ताकार, आयोजक होते है। कुछ उच्च शिक्षा का पीछा करते है और जीवन भर प्यासे रहते है।

वराहमिहिर अनुसार चंद्र प्रभाव मोहक, उज्ज्वल चहेरा का कारक है।

सूर्य - जातक सैनिक स्वभावी, योद्धा, आतंकवादी, चालाक, निर्दयी, कला प्रेमी, छायाकार, संगीत प्रेमी, मान्यता चाहने वाला होता है।

लग्न - लग्न चित्रा मे हो, तो प्रबल महत्वाकांक्षी या आत्मवादी, अनेक प्रकार से लाभ प्राप्त करने वाला, धनी, जन्म स्थान से अन्यत्र रहने वाल, रगीन वस्त्रधारी द्योतक, सद्भभावना युक्त, ईमानदार होता है।

चित्रा चरण फल

प्रथम चरण- इसका स्वामी सूर्य है। इसमे बुध, मंगल, सूर्य ♂ का प्रभाव है। कन्या 17320 से 17640 अंश। नवमांश सिंह। यह आकर्षण, पराकाष्ठा, स्व खंडन, गोपनियता, गुप्त संस्कार या आध्यात्म का द्योतक है।

जातक सुकुमार, गौर वर्ण, सुनहरे बाल. लम्बी चौड़ी भुजा, चिड़चिड़ा, आक्रामक, स्वाभिमानी होता है। जातक नई वस्तु उत्पादक किन्तु उसके उत्पादन के तरीको को छिपाने वाला, आदर्शो मे सुन्दर, अमानवीय होता है।

द्वितीय चरण - इसका स्वामी बुध है। इसमे बुध, मंगल, बुध ♂ का प्रभाव है। कन्या 17640 से 18000 अंश। नवमांश कन्या। यह मां बनना, दोहराव, कट्टर धार्मिकता, आयोजन, निर्णय का कारक है। जातक प्रसिद्ध, कोमल नेत्र, झुके कंधे, भूख प्यास नही लगे ऐसा साहसी, मंत्र विद्या का ज्ञाता, विद्वान लेखक होता है।

जातक चतुर, अनुशासित, व्यावहारिक, प्रत्येक कार्य को गंभीरता से करने वाला, बहुत नाजुक, खुश मिजाज, वचन का पक्का, जल्दी-जल्दी चलने वाला होता है।

तृतीय चरण - इसका स्वामी शुक्र है। इसमे बुध, मंगल, शुक्र ♂♀का प्रभाव है। तुला 18000 से 18320 अंश। नवमांश तुला। यह सम्बन्ध, स्व तल्लीनता, स्थिर, समाज प्रबंध कुशलता, दिखावट, चकाचोंध का द्योतक है। जातक गौर वर्ण, लम्बा मुंख. धन रक्षक, रहस्यमयी बाते छिपाने मे प्रवीण, नये व्यापार मे कुशल , विख्यात होता है।

जातक विपरीत लिंग के लिए अत्यंत वासना युक्त, पत्नी प्रेमी, यात्रा शौकीन, यात्राओ से धनार्जनी, शल्य चिकित्सक, शिष्टाचारी, सुयोग्य साथियो वाला, सही नियमो के अनुसार रहने वाला होता है।

चतुर्थ चरण - इसका स्वामी मंगल है। इसमे बुध, मंगल, मंगल ♂♂का प्रभाव है। तुला 18320 से 18640 अंश। नवमांश वृश्चिक। यह जादू, रहस्य, गोपनीयता, लालसा, भौतिकवाद का द्योतक है। जातक गोल सजल नेत्र, बैठी कमर, विस्मृत हृदयी, कृश शरीरी, धनी भोंहे वाला, विचारो मे मग्न होता है।

जातक शोध करने वाला, शोध से अचानक लाभ प्राप्त करने वाला, सृजन करने वाला होता है। दाम्पत्य जीवन मे अड़चने आती है। 28 वर्ष के बाद धीरे-धीरे वैवाहिक जीवन सुखी होता है।

आचार्यो ने चरण फल सूत्र रूप में कहा है लेकिन अंतर बहुत है।

यवनाचार्य : पहले चरण मे चोर, दूसरे मे चित्रकार, कलाकार, तीसरे मे पर स्त्री गामी, चौथे में पीड़ित होता है।

मानसागराचार्य : चित्रा के पहले चरण मे सर्व कार्य कुशल, दूसरे चरण मे पराक्रमी तथा माता-पिता व गुरु भक्त, तीसरे चरण मे धन भोगने वाला, चौथे चरण मे धनेश्वर होता है।

चित्रा ग्रह चरण फल

भारतीय मत अनुसार सूर्य, बुध, शुक्र की आपस मे पूर्ण या पाद दृष्टि नही होती क्योकि सूर्य से बुध 28 अंश और शुक्र 48 अंश से अधिक दूर नही हो सकते है।

सूर्य :

चित्रा सूर्य पर चंद्र की दृष्टि हो, तो जातक के आश्रित अनेक स्त्रिया होगी, जलीय वस्तुओ का व्यापार करेगा।

चित्रा सूर्य पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक वीर और वीरता के लिए सम्मानित होगा।

चित्रा सूर्य पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक शाशक वर्ग के संपर्क मे रहेगा, व उनसे धन प्राप्त करेगा।

चित्रा सूर्य पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक नीच प्रवृत्ति, पर स्त्री रत होगा।

चित्रा सूर्य चरण फल

प्रथम चरण - जातक विशेष प्रकार के नेत्र वाला, आतंकवादी, भय पैदा करने वाला, चालाक, निर्दयी, हृदयहीन, मेकेनिक, पत्नी के नियंत्रण मे रहने वाला, कुटिल स्वभाव का होता है।

द्वितीय चरण - जातक रंगो के चुनाव मे मसखरापन वाला, कला में रुचिवान, छायाकार या चित्रकार, मान्यता की चाह वाला, विचित्र वाहन की चाह वाला होता है। औषधि या रसायन या नशीली दवा विक्रेता होता है।

तृतीय चरण - जातक अति कामुक या कामुकता रहित या सामान्य कामुक, संगीत प्रेमी, विचित्र तरीके से सोचने वाला, स्त्रियोचित स्वभाव वाला, पुजारी होता है।

चतुर्थ चरण - जातक सैनिक स्वभाव वाला, योद्धा, अनुशासन प्रिय या अनुशासित, कुटिल, चालाक होता है।

चन्द्र :

चित्रा चन्द्र पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक कृषि पर निर्भर, साहूकार होगा।

चित्रा चन्द्र पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक के अन्य स्त्री से सम्बन्ध होने के कारण पत्नी से सम्बन्ध विच्छेद होगा, माता को कष्ट दायक होगा।

चित्रा चन्द्र पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक अति शिक्षित, सर्वप्रिय होगा।

चित्रा चन्द्र पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक सभी प्रकार सुखी और प्रसिद्ध होगा।

चित्रा चन्द्र पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक को माता से सम्पत्ति मिलेगी और सुखी होगा।

चित्रा चन्द्र पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक धनहीन किन्तु संतान आज्ञाकारी होगी।

चित्रा चन्द्र चरण फल

प्रथम चरण - जातक सुन्दर शरीर व आकर्षक नेत्र (गोल या मंजरी पुतलिया) वाला, मैथुन भुक्कड़, गहरे चटिले रंग का प्रेमी कला कुशल होता है।

द्वितीय चरण - जातक मन मोहक, विचित्र और आकर्षक नेत्र वाला, कुशल वार्ताकार, उदघोषक, प्रवक्ता, समाचार वाचक, भाषण लेखक, स्क्रीप्ट रायटर, कथा वाचक, ज्ञान पिपासु, आयोजक, सौम्य वर्ण प्रिय होता है।

तृतीय चरण - जातक विचित्र वेशभूषा धारण करने वाला, नेत्रो मे सम्मोहन करने की शक्ति वाला, स्त्रियोचित व्यवहार और आचरण करने वाला, स्रियो के सामान श्रृंगार करने वाला, कलाकार होता है।

चतुर्थ चरण - जातक सुगठित देह वाला, भीड़ मे भी आसानी से पहचाने वाला, बहुत अधिक कामुक या काम से पराङ्मुख (परे) यौन के विषय मे विचित्र विचार रखने वाला, सुअवसर की प्रतीक्षा करने वाला, करिश्मा करने वाला होता है।

मंगल :

चित्रा मंगल पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक वानप्रस्थी होगा और स्त्रियो से घृणा करेगा।

चित्रा मंगल पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक वैश्यागामी और वैश्याओ द्वारा बर्बाद होगा।

चित्रा मंगल पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक धनवान, सम्पत्तिवान, सुखी होगा।

चित्रा मंगल पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक संगीत निपुण, वाद्य वादक होगा।

चित्रा मंगल पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक विशिष्ट राजनैतिक दर्जा प्राप्त करेगा।

चित्रा मंगल पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक गांव या शहर का प्रमुख होगा।

चित्रा मंगल चरण फल

प्रथम चरण - जातक लोभी, मानसिक परिपक्व, सोच-विचार कर कदम उठाने वाला, युवतियो का संग पाने का इच्छुक, कुसंगति रत, इंजीनियर, आस्था मे परिवर्तन शील भी होता है। कुछ लोग मानसिक विकृत और अविचारी भी होते है।

द्वितीय चरण - जातक आध्यत्मिक, मनन चिंतन करने वाला, उत्साह हीन भाषी, लेखक, स्त्रियोचित व्यवहार और जनानापन स्वभाव वाला, विचित्र प्रकार के रंग पसंद करने वाला होता है।

तृतीय चरण - जातक अति कामुक, यौन रत, अनेक प्रकार की स्त्रियो से अवैधानिक सम्बन्ध रखने वाला, विचित्र प्रकार से मैथुन करने वाला, प्रेम प्रसंग में असफल, स्त्रियो के वस्त्राभूषण धारण करने वाला, नीच स्त्रियो के संपर्क मे संपत्ति लुटा देने वाला होता है। कोई-कोई जातक यौन से सर्वथा परे होता है।

चतुर्थ चरण - जातक प्रबल वासना युक्त, यौन सम्बन्धो के लिए लालची और आक्रामक, यौन उत्पीड़क, आचरण भ्रष्ट, सम्भोग से पहले स्त्री को शारारिक प्रताड़ित करने वाला होता है। जातक एक कक्ष मे स्त्री को भोग कर शराब पीकर "राम-राम" करता निकल जाता है। किसी-किसी जातक मे इससे ठीक विपरीतता होती है।

बुध :

चित्रा बुध पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक धर्म निष्ठ और परिवार को प्यार करने वाला होता है।

चित्रा बुध पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक सम्पत्तिवान, धनवान, सन्ततिवान होगा।

चित्रा बुध पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक वचन का पक्का, परिवार मे शीर्ष होगा।

चित्रा बुध पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक परिजनो से समस्या पीड़ित, निर्धन होगा।

चित्रा बुध चरण फल

प्रथम चरण - जातक रंगो के चुनाव मे मसखरा, स्त्री सुख हीन, जनाना स्वभाव वाला, अस्थिर विश्वासी, दुष्चरित्र होता है। मतान्तर - अत्यंत नेक होगा। विपत्तियो से बचा रहेगा।

द्वितीय चरण - जातक सौम्य, सुन्दर, विविध रंग प्रिय, आंखो मे विचित्रता वाला, स्त्रियो के आभूषण पहिने वाला, ज्ञान और धन पाने के लिए प्रयत्न शील होता है। उसकी पत्नी उच्च पद पर होती है।

तृतीय चरण - जातक गहरे रंग को पसंद करने वाला, विचित्र प्रिंट के कपडे पहिनने वाला, इंजीनियर या शिल्पी, व्यापार करने का इच्छुक, यथेष्ठ धन संचय करने वाला होता है।

चतुर्थ चरण - यदि बुध की युति अन्य किसी ग्रह से नही हो, तो, जातक कुटिल, कामुक किन्तु वीर्य हीन, अड़ियल, अपनी आदतो और सुख सुविधा मे कमी नही करने वाला, परिजनो से त्रस्त होता है।

गुरु :

चित्रा गुरु पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक शासक के निकटवर्ती और सम्पत्तिवान होगा।

चित्रा गुरु पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक करोड़पति, पर स्त्री रत, यौन रोगी होगा।

चित्रा गुरु पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक धन के मामले में भाग्यशाली होगा।

चित्रा गुरु पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक सब प्रकार की सम्पत्ति से सम्पन्न, विद्वान होगा।

चित्रा गुरु पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक का गौरव पूर्ण भव्य वक्तित्व होगा।

चित्रा गुरु पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक विभिन्न विषयो में प्रवीण, प्रशंसित होगा।

चित्रा गुरु चरण फल

प्रथम चरण - जातक विशेष प्रकार के चटिले रंग को पसंद करने वाला, गोलाई लिए हुए आंखो वाला, महिला फैशन के आभूषण पसंद करने वाला, ममता पूर्ण, शिल्पज्ञ होता है। कोई-कोई जातक राजदूत, कूटनीतिज्ञ, देशो के बीच मध्यस्था कराने वाला होता है।

द्वितीय चरण - जातक आकर्षक नेत्रो वाला, सुन्दर शारीरिक गठन, कम छापे वाले वस्त्र पहिनने वाला, धनवान, गुणवान, सब धर्मो का मर्म समझने वाला, सुन्दर लेखन और कलाओ मे माहिर होता है।

तृतीय चरण - जातक स्त्रियोचित वस्त्राभूषण का शौकीन, नई-नई फैशन अपनाने वाला, पुरानी परम्परा और रीती-रिवाजो को बदलने वाला लेकिन धार्मिक, स्त्रियो मे प्रसिद्ध, ऐशो-आराम मे कटौती नही करने वाला, राज मित्र होता है।

चतुर्थ चरण - जातक रंगो के चुनाव में अपनी पसंद का प्रिय, व्यसन प्रिय, भोग विलासी, कामुक, रति रत, स्थिर वस्तुओ का व्यापार व्यवसाय करने वाला, खनिज पदार्थो का जानकार, कठोर स्वभाव वाला, शिल्पज्ञ, ओजश्वी या क्रियाशील होता है।

शुक्र :

चित्रा शुक्र पर चंद्र की दृष्टि हो, तो जातक की माता समाज मे विशिष्ट होती है जिससे जातक को प्रसिद्धि मिलती है।

चित्रा शुक्र पर मगल की दृष्टि हो, तो जातक का वैवाहिक जीवन नष्ट होगा और स्त्रियो के कारण सम्पत्ति तहस-नहस हो जायगी।

चित्रा शुक्र पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक अच्छी पत्नी, धन, संतान प्राप्त करेगा।

चित्रा शुक्र पर शनि की दृष्टि हो, तो सुख-शांति का आभाव होगा, जातक पत्नी पीड़ित होगा, सुसराल वालो की धमकिया सुनेगा।

चित्रा शुक्र चरण फल

प्रथम चरण - जातक व्याकुल, रंग और वस्त्र तथा आभूषण धारण करने मे असमंजस मे रहने वाला, स्त्री से प्रेमालाप मे शर्मिंदा और डरपोक, स्त्री परस्त, चंचल होता है। समाज मे निम्नतमो के लिए निर्धारित नियमो का अनुशरणी होता है।

द्वितीय चरण - जातक सुन्दर, विद्वान्, गहरे रंग और गहरी छापो के वस्त्र का शौकीन, स्त्रियो के समान रहने वाला, नियमित जीवन जीने वाला, धनिक होता है। बचपन मे अतिसार रोग होता है।

तृतीय चरण - जातक व्यपार-व्यवसाय करने का इच्छुक, सुख-सुविधा में खलल नही चाहने वाला, अपने धर्म मे आस्थावान, हल्के रंग के वस्त्र धारण करने वाला, पतिव्रता पत्नी वाला, समाज या समुदाय का मुखिया, अपने निर्णय पर शर्मिंदा होने वाला होता है।

चतुर्थ चरण - जातक विविध और गहरे रंगो को पसंद करने वाला, छोटी आँख वाला (मिच्चु) अति कामुक, स्त्रियो के चक्कर म रहने वाला, व्यसनी, स्व अर्जित संपत्ति का स्वामी, महत्वपूर्ण व्यक्तियो का कृपा पात्र होने से अपनी इच्छाओ की पूर्ति करने वाला होता है।

शनि :

चित्रा शनि पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक अति विद्वान, वेदज्ञ, दूसरो पर निर्भर होगा।

चित्रा शनि पर चंद्र की दृष्टि हो, तो जातक राजनीति मे उच्चतम स्तर पर होगा।

चित्रा शनि पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक पुलिस अथवा सेना मे नौकर होगा।

चित्रा शनि पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक स्त्रियो के मातहत होगा और आलोचना सहेगा।

चित्रा शनि पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक दूसरो के सुख-दुःख मे भागीदार होगा।

चित्रा शनि पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक शासक के निकट, सुरा व सुंदरी मे लिप्त रहेगा।

चित्रा शनि चरण फल

प्रथम चरण - जातक तुनक मिजाज, काले-पीले और गहरे रंग का प्रेमी, विचित्र स्वभाव वाला, वृहन्नाला या अल्प वीर्य, विध्वंसकारी, महाक्रोधी, क्रोध मे अपना ही नुकसान करने वाला, अविश्वनीय होता है। मंगल की युति या दृष्टि चर्म रोग देती है।

द्वितीय चरण - जातक में कुछ जनानापन होता है। जातक मसखरा, विवध प्रकार के वस्त्राभूषण धारण करने वाला, शास्त्रज्ञ, शिल्प विद्या का ज्ञाता होता है। कोई-कोई जातक निर्धन होता है।

तृतीय चरण - जातक संयमी, सामान्य रंग के वस्त्र धारण करने वाला, जितेन्द्रिय, प्रेम प्रसंगो से दूर रहने वाला, आँखों मे आकर्षण वाला, दूसरो का दुःख-दर्द समझकर निराकरण करने वाला होता है।

चतुर्थ चरण - जातक सुन्दर, मल्ल या बलशाली, बुद्धिमान, ऐश्वर्यशाली, पृथ्वी पर सब सुख भोगने वाला, सुख-सुविधा से तृप्त होता है। जातक को ईश्वर के आशीर्वाद की आवश्यकता नही पड़ती है।

चित्रा राहु चरण फल

प्रथम चरण - राहु यदि शुभ स्थानाे मे हो, तो राजमन, भाग्यवृद्धि, धन लाभ आदि शुभ फल होते है। मंगल की युति हो, तो सहानुभूति और नैतिक गुणो से रहित, कर्ण रोगी होता है।

द्वितीय चरण - व्यापार मे अल्प लाभ, शिल्पादि कलाओ का जानकर, दिलेर, धनी किन्तु वैवाहिक सुख को तरसेगा।

तृतीय चरण - कार्यसिद्धि, व्यापार करने की इच्छा, सुख होता है। मंगल या शनि की युति के कारण जटिल पेट के अल्सर और शल्य चिकित्सा की आवश्यकता हो सकती है।

चतुर्थ चरण - शुभ गृह से दृष्ट या युत हो, या शुभ स्थानो मे हो, तो परदेश गमन, सौम्य रंगो को चाहने वाला, स्थायी सम्पति का लाभी होता है। अन्य स्त्रियो के कारण वैवाहिक जीवन सुख हीन होता है।

चित्रा केतु चरण फल

प्रथम चरण - रंगो के चुनाव में विविधता, राज दंड, व्याकुलता, देहपीड़ा धन लोलुप होगा।

द्वितीय चरण - अल्प लाभ, शारीरिक सुख, विद्या और यश लाभ होगा। यदि यह चरण लग्न हो और केतु शुभ से युत हो, तो राजशी वैभव प्राप्त होगा।

तृतीय चरण - रंगो मे असमंजश, लैंगिक सुख मे व्यवधान, बदनामी, केमिकल या स्टील व्यवसायी, रोगो के कारण कुंठित होगा।

चतुर्थ चरण - शुभ ग्रहो से दृष्ट या युत या शुभ स्थानो पर हो, तो पुत्र, धन, भूमि से लाभ, आरक्षक, यशस्वी होता है। विवाह यदि 32 वर्ष के बाद हो, तो शुभ होता है।

जातक = वह प्राणी जिसका ज्योतिषीय विचार किया जा रहा हो।

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चित्रा नक्षत्र: चित्रा पौराणिक परिचय आकाश गंगा में 14वें तारे का विस्तार क्षेत्र 173 अंश, 20 कला से 186 अंश, 40 कला तक है, जिसे 'चित्रा' नक्षत्र कहा जाता है। अरबी साहित्य में इसे अस-सीभाक, ग्रीक साहित्य में 'वर्जीनिस' या 'स्पाइका' तथा चाइनीज स्यू में 'कियो' कहा जाता है। चित्रा का अर्थ है 'बुद्धिमान' जिसका स्वरूप मोती जैसा है। किसी मत के अनुसार एक दीपक के अनुसार भी है। यह नक्षत्र समृद्धि का सितारा माना जाता है इस नक्षत्र का अधिदेवता " विश्वकर्मा" है जो संसार-भर चित्रा नक्षत्र में पैदा हुए जातकों के प्रमुख लक्षण पुरुष जातक शारीरिक संरचना ऐसे व्यक्ति का शरीर कुछ दुबला-पतला होता है। अगर सूर्य तथा दारी बलवान हों तो चित्रा जातक लम्बे-तगड़े शरीर के होते हैं। ऐसे व्यक्ति सैकड़ों की । में भी आसानी से पहचाने जा सकते हैं। उनक हाव-भाव और अन्दाज दूसरों से मिले। ही होते हैं। चरित्र, गुण और सामान्य घटनाक्रम चित्रा जातक आमतौर पर बहुत ही बुद्धिमान और शांतिप्रिय स्वभाव के होते हैं, परन जब शनि, चन्द्र योग हो या शनि का प्रतियोग हो तो व्यक्ति बहुत ही मक्कार, चालाक तथा धूत होता है। अपने फायदे के लिए वह मक्कारी की हद तक जा सकता है। । इस नक्षत्र की यह भी एक विशेष बात है कि इनके विचार और बात को जब पहले बेवकूफी की बात समझकर टाल दिया जाता है तो बाद में ऐसा मौका भी आता है कि आपको पिछली बात या विचार समस्या का एकमात्र निदान नजर आता है। पूर्वानुमान । लगाने में कुशल चित्रा जातक नाप-तौलकर ही अपनी बात रखते हैं। ज्योतिष और । चिकित्सा जैसे विषयों में इनका अच्छा अधिकार होता है, यदि ये इस क्षेत्र में रुचि रखते हों। कई बार जातक लगातार कोई स्वप्न जैसा देखता है या फिर कोई अकल्पित बात के । दिमाग में उतार लेता है, जो कि बाद में वास्तविक सत्य साबित होता है। यह भी कहा जा । सकता है कि चित्रा जातक किसी दिव्य शक्ति से प्रेरित रहते हैं। ऐसे जातक चूंकि किसी । स्वार्थ भावना से रहित होते हैं, अतः दूसरों की भावना के प्रति भी अधिक सतर्क नहीं रहते। इस कठोर रवैये के बावजूद समाज के गरीब, बेबस, बेसहारा लोगों के प्रति सदैव दया प्रेम का भाव व्यक्त करते हैं। सामान्यतः स्तर पर लोग उसे गलत भी समझ लेते हैं। कि उसका व्यवहार शुष्क और कठोर है। वह किसी प्रश्न का उत्तर बिना सोचे-समझे भी ठीक दे सकता है। किसी भी काम को आखिरी घंटे में ऐसे कर सकते हैं जैसे कि कोई पहले से ही तैयारी करके बैठा हो। अपने शत्रुओं के षड्यंत्र दबाने में वे सदैव कामयाब रहते हैं। कदम-कदम पर उनके । विरोधी शत्रु टकराते रहते हैं, फिर भी उनकी सामान्य दिनचर्या पर कोई व्यवधान नहीं । आता । समाज के दलित और शोषित-वर्ग के वे चिन्तक तथा समर्थ होने पर मसीहा माने । जाते है। यह सब ये किसीय अगर शनि या मंगल की सब ये किसी यश ख्याति या स्वार्थ की प्रेरणा से रहित होकर करते हैं। हां दिया मंगल की दृष्टि चन्द्रमा पर हो तो समाज-सेवा की आड़ में वे अपना हित की साधने लगते हैं, परन्तु यह तब उनकी मजबूरी हो सकती है। शिक्षा, आर्थिक स्रोत और व्यवसाय सकावटें या अड़चनें उनके जीवन के लक्ष्य को नहीं डिगा सकतीं। चाहे कछ भी हो अपना फर्ज और उत्तरादायित्व, वे हर हालत में पूरा करते हैं। साहस और कठोर साधना के बलबते पर उनका कोई भी काम पिछड़ा नहीं रहता। 30-32 साल तक उन्हें आराम की जिन्दगी नही मिल पाती। उसके बाद 33 से 55 वर्ष तक उनके जीवन का सर्वश्रेष्ठ स्वर्णिम समय होता है। चित्रा जातकों के मामले में यह भी विशेष बात है कि उनके काम-काज के तरीके को देखकर उन्हें अप्रत्याशित उन्नति भी मिलती है। यह भी एक नकारात्मक तथ्य है कि 18 साल के बाद, 22, 27, 30, 36, 39, 43, 50वें साल में उन्हें घोर कष्ट एवं परेशानी, तनाव से जूझना पड़ता है, परन्तु यह संघर्ष ऐसा अद्भुत होता है कि आगे चलकर एक नसीहत बनकर, उनके काम आता है। सूर्य तथा चन्द्रमा योग करें तो व्यक्ति मूर्तिकला, चित्रकला, संगीत वाद्य यंत्रों का शौकीन फिर पुलिस सेना के लिए अनुकरणीय कार्य करने वाला होता है। अगर बुध, बृहस्पति, शुक्र का चन्द्रमा पर प्रभाव हो तो व्यक्ति सचिव, कार्यक्रम नियंत्रक, प्राइवेट संस्थानों में प्रबन्धक, तकनीकी विशेषज्ञ अथवा निरीक्षक, संचालक बनता है। कुछ जातक इंजीनियर, विद्युत विशेषज्ञ, आधुनिक कम्प्यूटर विज्ञान में स्नातक आदि भी बनते हैं। राजनैतिक अभिरुचि न होने के बावजूद उनको राजनेताओं से सम्मान मिलता है। पावजूद उनका राजनेताओं पारिवारिक जीवन एक तरफ चित्रा और स्नेह देते हैं, वहीं अधिकांश चित्रा पिता की मृत्युबाल्यावस्था में ही हो सार सूप आर शनि का योग साफ चित्रा जातक अपन भाई-बहनों और माता-पिता को अत्यधिक सम्मान देते हैं, वहीं दूसरी तरफ वे उन्हें कभी-कभी संशय की दृष्टि से भी देखते हैं। चित्रा जातकों को पिता का सुख नहीं मिलता है। अगर सूर्य और शनि का योग हा हा सकती है। यह भी विचारणीय है कि उसका र-परिवार से धीरे-धीरे पृथक हो जाता है। यह भी एक और विचारणीय बात अपने पिता या परिवार से बिछुड़ने के बाद ही जातक अपने विशेष अस्तित्व के साथ है और किसी महत्त्वपूर्ण क्षेत्र में उसका समावेश हो जाता है। माता से वह अधिक रहता है तथा मातृपक्ष से लाभ भी उठाता है। चित्रा नक्षत्र उस घर में नहीं रहते, पैदा होते हैं या तो वे घर से दूर चले जाते हैं या फिर वह मकान ही छूट जाता है। जीवन घर-परिवार से है कि अपने पिता या परिवार उभरता है और किसी जुड़ा रहता है तथा मा जहां वे पैदा होते हैं या आप ही अपनी मातृभूमि से दूर जाकर जीवन व्यतीत करते हैं। आमतौर पर चित्रा जातकों का दाम्पत्य जीवन भी अधिक समय तक सुखमय नहीं रहता। छोटे-छोटे मामले आए दिन तनाव का कारण बनते है। भोजन में कपड़ों की बेहतर सफाई, घर की साज-सज्जा अथवा अन्य भौतिक कारण प्रतिष्ठा का प्रश्न बन जाते है। अगर पत्नी, धर्मस्व, शतभिषा या पुष्य ना उसको मृत्युजल्दी हो सकती है अथवा पत्नी झगहों से तंग आकर आप है। अगर बृहस्पति का प्रभाव शनि तथा मंगल पर पूर्ण रूपेण शुभ हो तो वैवाहिक सामान्य होता है तथा दो-तीन संताने भी होती है। इसके बावजूद भी उसको अपने जीवन में कई प्रकार के उत्तरदायित्व तथा प्रतिवाद झेलने ही पड़ते है। कुल मिलाकर दिन जातक असंतुलित जीवन के पर्याय कहलाते है। इन जातको को किडनी, पेट तथा पाचन-क्रिया से सम्बन्धित विकार रहते है। पथरी अल्सरया पाव आदि भी आंतों में हो सकता है। आंखों की कमजोरी, रक्तचाप पारि अन्य गुप्त रोग चिन्ता का विषय बन सकते है। महिला जातक उपरोक्त पुरुष जातको के सभी प्रमुख गुण महिलाओं पर भी लागू होते है। इसके साथ ही यह भी है कि उन्हें दुर्भाग्यपूर्ण जीवन का शिकार अलग से होना पड़ता है। अर्थात जीवन में जहां भी वे पहुंचती है, जिसे भी अपनाती है, वही उन्हें धोखा दे सकता है या फिर उनश असली रूप कुछ और ही होता है। इन महिलाओं को सलाह दी जाती है कि स्वेच्छा से कोई काम न करें। विशेष रूप से विवाह तो वे कतई अपनी मर्जी से न करें अन्यथा बाद में उन्हें अपने ही अभिभावकों के ताने-कटाक्ष सुनने पड़ सकते हैं। इसके अलावा उनके विशिष्ट गुण-दोष निम्न प्रकार से हैं- शारीरिक संरचना चित्रा नक्षत्र में पैदा महिलाएं सुन्दर शरीर और संतुलित देहयष्टि की होती है। कद लम्बा और नाक-नक्श तीखे होते हैं। आमतौर पर बाल लम्बे तराशे हुए अथवा गुच्छेदार तथा समान रूप से गर्दन पर छाए रहते हैं। कटे बालों का, उन्हें विशेष शोक चरित्र गुण तथा सामान्य घटनाएं उनकी महत्त्वाकांक्षी स्वतंत्रता की प्रवृत्ति तथा दूसरों को अनादर से देखन कामगार उन्हें सदैव आलोचना का पात्र बनाए रखती हैं। बिना किसी विशेष गुण क अभिमान बना रहता है। विचारों से दुष्कर्मी, आलसी, कटुभाषी तथा कृतघ्न उनके मित्र भी बहुत कम होते है, हा पैसे की जरूरत होने पर विपरीत या बजरूरत होने पर विपरीत योनि से अनैतिक सम्बन्धो की आड़ में कई लम्पट और कामुक दोस्त अवश्य बन जाते हैं। ऐसी महिलाएं अवसरानुसार कोई भी अकर्म कर सकती हैं। शिक्षा, आर्थिक स्रोत और व्यवसाय इन महिलाओं को विज्ञान विषयों में अपनी शिक्षा प्राप्त करना अच्छा लगता है। कुछ महिलाएं मॉडलिंग, फिल्म, टी. वी. नाटक, स्टेज से आजीविका करती हैं। नृत्य, गायन यापलिस सेवा से भी उन्हें आजीविका मिल सकती है। अगर ग्रहों की स्थिति बहुत ज्यादा अनकल न हो तो उन्हें कृषि कार्य, सिलाई-बुनाई या इसी प्रकार के उद्योगमुखी कार्य करने चाहिए। पारिवारिक जीवन इस मामले में बहुत सतर्कता की जरूरत होगी। पति की कुण्डली के साथ अगर अच्छी तरह गुणों का मिलान नहीं हो तो इन महिलाओं को सन्तानहीनता, वैधव्य या फिर तलाक आदि जैसा दुःख झेलना पड़ सकता है। सुखी वैवाहिक जीवन के लिए यथोचित गृहीय उपाय तथा 'मंगल' यंत्र की पूजा करनी जरूरी है। पुखराज धारण करना भी हितकर होगा। स्वास्थ्य इन महिलाओं को मूत्राशय के रोग, दिमागी ज्वर, सिर में दर्द अथवा पेट का अल्सर हो सकता है। अगर प्रथम रजोदर्शन इसी नक्षत्र में हो तो महिला अत्यधिक कामुक, नम्र तथा जीवन का सख उठाने की तीव्र इच्छा वाली होती है। 14. चित्रा नक्षत्र और आपका स्वभाव आप पुरुष हैं तो आप साहसी, विद्वान, कलाप्रिय, शत्रु से परेशान, विषयासक्त, विद्याभ्यासी, तुनकमिजाज, प्रकृति प्रेमी, महत्त्वाकांक्षी, दूरदशी, संगीत में रुचि, ललित कला प्रेमी एवं लोकप्रिय होते हैं। आप वाकपटु एवं कुशल वार्ता करने वाले होते हैं। विपरीत योनि के प्रति सहज आकर्षण महसूस करते हैं एवं कम उम्प से ही आत्म रति की प्रवृत्ति अपना लेते हैं। आप स्त्री हैं तो आप सच्चरित्रा, फैशनपरस्त, आभूषण प्रिय, कला कुशल, सामाजिक कार्य करने वाली, लोकप्रिय एवं आत्मकेन्द्रित होती हैं। कला और साहित्य के क्षेत्र में अत्यधिक नाम और दाम प्रयास करने पर कमा सकती हैं। विपरीत योनि के प्रति सहज आकर्षण रखती हैं एवं कम उम्र से ही आत्म-रति की ओर प्रवृत्त हो उठती हैं। मंगल इस ग्रह पर विभिन्न ग्रहों के दृष्टि प्रभाव को जानने के लिए मृगशिरा नक्षत्र पर मंगल की स्थिति को देखते हुए फलादेश का भावार्थ समझें। अगर मंगल, चित्रा के प्रथम चरण में हो तथा सूर्य, चन्द्रमा तथा बृहस्पति भी इसी भाग में हो तो जातक को 5 वर्ष की आयु तक विशेष खतरा होता है। उसे गैस, अपच, टायफाइड अथवा हानिया आदि की शिकायत रहती है। दूसरे चरण का मंगल व्यक्ति को बड़वी जबान और तीखी भाषा बोलने वाला बना देता है। उसे दस्त था पेट रोग की शिकायत रहती है। हार्निया, कालरा, फोड़े भी शरीर में होते रहते हैं। अल्सर रोग भी कुछ जातकों को संभव है।चित्रा नक्षत्र के तीसरे चरण में मंगल हो तो जातक के पास मध्यम स्तर की संपत्ति जायदाद होती है। किसी गंदी महिला (दुश्चरित्र औरत) के चक्कर में वह अपना सब कुछ गंवा देता है। उसे किडनी रोग, हार्निया तथा लकवा आदि जैसे रोग होते रहते हैं। चौथे चरण में मंगल हो तो मध्यम स्तर की शिक्षा होती है। व्यक्ति क्लर्क, सेल्समैन या टाइपिस्ट की नौकरी से आजीविका आरंभ करता है। अपनी मेहनत तथा दोहरे व्यवसाय से वह धीरे-धीरे ख्याति अर्जित कर लेता है। उसे ज्वर, रक्तचाप तथा हार्निया या धातु रोग-मधुमेह आदि हो सकते हैं। जातक का आरार्थ संतोषप्रद होता है। राहुः राहु चित्रा नक्षत्र के प्रथम चरण में हो तो व्यक्ति को कान का रोग होता है। ऐसा व्यक्ति कठोर आचरण का, क्रूर तथा नैतिकता से दूर होता है।द्वितीय चरण में राह हो तो व्यक्ति कलाप्रिय तथा धनी होता है। उसके पास अत्यंत धन होता है, परन्तु दाम्पत्य सुख उससे काफी दूर होता है। यह सब उसकी प्रारंभिक अवस्था में दुराचरण और किसी अन्य महिला से अनैतिक संबंधों का कारण होता है। तृतीय चरण में राहु हो तो व्यक्ति को अल्सर, किडनी रोग, स्टोन अथवा अन्य प्रकार की चिकित्सा या शल्य क्रिया के दौर से गुजरना होता है, परन्तु उस व्यक्ति की पत्नी और संतान अच्छी होती है। चौथे चरण में राहु हो तो व्यक्ति सुखद वैवाहिक जीवन व्यतीत नहीं कर सकता है। परन्तु उस व्यक्ति का कई प्रकार की महिलाओं से सम्पर्क रहता है, जिनका आर्थिक और यौन शोषण वह समय-समय पर करता है। ऐसा व्यक्ति किसी महत्त्वपूर्ण पद पर भी हो सकता है। 14. चित्रा नक्षत्र सम्बन्धी कार्य एवं व्यवसाय चित्रा नक्षत्र का स्वामी ग्रह मंगल है और कन्या राशि स्वामी बुध और तुला राशि स्वामी शुक्र ग्रह से भी प्रभावित होता है। यदि आपका जन्म इस नक्षत्र के प्रथम या द्वितीय चरण में हआ है तो आप राजगीर, शिल्पकार, विचारक, दार्शनिक, प्रेस, खेल सामग्री, संगीत, आभूषण, खिलौने, नक्काशी, चित्रकारी, गणितज्ञ, डॉक्टर, वित्त मन्त्रालय, दलाल, इन्कम टैक्स या सेल्स टैक्स विभाग, लेखक, वैज्ञानिक, पंडित एवं वैज्ञानिक सम्बन्धी कार्यों को करके सफलता सहित अपना जीवनयापन कर सकते हैं। __यदि आपका जन्म चित्रा नक्षत्र के तृतीय या चतुर्थ चरण में हआ है तो आप बढ़ई, भवन निर्माता, श्रमिक, अस्त्र- शस्त्र निर्माता, ऑटोमोबाइल सम्बन्धी व्यवसाय, इत्र व्यवसाय, विद्युत विभाग, ट्रैफिक पुलिस, सेना, पुलिस, ठेकेदार, मुद्रणालय, वैवाहिक दलाल, सूक्ष्मदर्शी, रेडियो, टेलीविजन, टेपरिकार्ड, टेलिस्कोप, दूरबीन आदि का व्यापारी, दर्जी, लेडी डॉक्टर, सिगरेट, तेल-पैट्रोल, जूस, आईसक्रीम पार्लर, ब्यूटी पार्लर सम्बन्धी कार्यों को करके सफलता सहित अपना जीवनयापन कर सकते हैं।

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