मीन राशि

 मीन राशि


     चन्द्रमा जब लग्नकुण्डली में मीन राशि में हो, यानी जातक के जन्म के समय चन्द्रमा भचक्र के बारहवें या अन्तिम खण्ड (330-360) में हो तो जातक की जन्मराशि मीन होती है। मीन राशि का राशीश गुरु है। पाश्चात्य ज्योतिष की दृष्टि से 20 फरवरी से 20 मार्च के मध्य जन्मे सभी जातक मीन राशि के होते हैं।

     मीन राशि के जातक अस्थिर स्वभाव के, चंचल प्रकृति के तथा अन्तर्द्वन्द्वात्मक सोच के होते हैं। इनके नेत्र प्रायः गोल व उभरे हुए होते हैं तथा शरीर का निचला भाग ऊपर की अपेक्षा कमजोर होता है। ये लोग स्वयं तथा स्वयं से जुड़ी वस्तुओं/मामलों/व्यक्तियों को अपने ही नजरिये से देखते हैं। अक्सर ये जीवन में अपने व्यवसायों में भी परिवर्तन करते हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो इनके जीवन का कोई लक्ष्य नहीं होता, बस ये जीवन जीते हैं। तथापि आध्यात्मिक विषयों के प्रति इनकी खासी उत्सुकता होती है तथा आध्यात्मिक प्रगति की सम्भावना भी पूर्ण रूप से होती है। इनका वैवाहिक जीवन सुखद नहीं होता और मात्र समझौते की सी स्थिति रहती है। कई बार तो अपेक्षित सफलता/उपलब्धि प्राप्त न कर पाने के पीछे कारण ही जीवनसाथी बन जाता है।

     प्रायः इस सबके बावजूद मीन राशि के जातक भीतर से शांत/संतुष्ट होते हैं। कई बार ये अपने आप में खोए रहने वाले भी हो सकते हैं। व्यावहारिक जीवन में ये कम ही सफल हो पाते हैं। गुरु शुभ प्रभाव में हो तो ये लोग ईमानदार, उदार, न्यायप्रिय तथा अध्यात्मवादी होते हैं। सामान्यतः मीन राशि के जातक स्वस्थ रहते हैं। तथापि लग्न पर अशुभ प्रभाव हो तो पानी की कमी, सांस, कान व हृदय रोग सम्भावित होते हैं। गुरु पाप प्रभाव में हो तो पीलिया आदि यकृत के रोग सम्भव होते हैं। ये लोग पीने-पिलाने के शौकीन हो सकते हैं। मीन राशि चन्द्रमा जब लग्नकुण्डली में मीन राशि में हो, यानी जातक के जन्म के समय चन्द्रमा भचक्र के बारहवें या अन्तिम खण्ड (330° 360°) में हो तो जातक की जन्मराशि मीन होती है। मीन राशि का राशीश गुरु है। पाश्चात्य ज्योतिष की दृष्टि से 20 फरवरी से 20 मार्च के मध्य जन्मे सभी जातक मीन राशि के होते हैं। मीन राशि के जातक अस्थिर स्वभाव के, चंचल प्रकृति के तथा अन्तर्द्वन्द्वात्मक सोच के होते हैं। इनके नेत्र प्रायः गोल व उभरे हुए होते हैं तथा शरीर का निचला भाग ऊपर की अपेक्षा कमजोर होता है। ये लोग स्वयं तथा स्वयं से जुड़ी वस्तुओं/मामलों/व्यक्तियों को अपने ही नज़रिये से देखते हैं। अक्सर ये जीवन में अपने व्यवसायों में भी परिवर्तन करते हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो इनके जीवन का कोई लक्ष्य नहीं होता, बस ये जीवन जीते हैं। तथापि आध्यात्मिक विषयों के प्रति इनकी खासी उत्सुकता होती है तथा आध्यात्मिक प्रगति की सम्भावना भी पूर्ण रूप से होती है। इनका वैवाहिक जीवन सुखद नहीं होता और मात्र समझौते की-सौ स्थिति रहती है। कई बार तो अपेक्षित सफलता/उपलब्धि प्राप्त न कर पाने के पीछे कारण ही जीवनसाथी बन जाता है। प्रायः इस सबके बावजूद मीन राशि के जातक भीतर से शांत संतुष्ट होते हैं। कई बार ये अपने आप में खोए रहने वाले भी हो सकते हैं। व्यावहारिक जीवन में ये कम हो सफल हो पाते हैं। गुरु शुभ प्रभाव में हो तो ये लोग ईमानदार, उदार, न्यायप्रिय तथा अध्यात्मवादी होते हैं। सामान्यत: मीन राशि के जातक स्वस्थ रहते हैं। तथापि लग्न पर अशुभ प्रभाव हो तो पानी की कमी, सांस, कान व हृदय रोग सम्भावित होते हैं। गुरु पाप प्रभाव में हो तो पीलिया आदि यकृत के रोग सम्भव होते हैं। ये लोग पीने-पिलाने के शौकीन हो सकते हैं।

मीन राशि का शास्त्रीय स्वरूप शशिनि मीनगते विजितेन्द्रियो बहुगुण: कुशलो जललालसः। विमलधो: किलशास्त्रकलादरस्त्वबलताबलताकलितो नरः।१। मीन राशि के जातक ज्ञानेन्द्रियों तथा कर्मेन्द्रियों को स्वचालित एवं स्वनियन्त्रित रखते हुए जितेन्द्रिय कहलाते हैं। अच्छे-अच्छे गुणों के अधिष्ठाता, चतुर स्वभाव, जलप्रेमी, अधिक स्नान के शौकीन, जलमार्गीय यात्रा के प्रेमी, स्वच्छ-स्पष्ट और निर्मल बुद्धि रखते हुए शास्त्रीय कला- संगीत-अभिनय-आराधना आदि में प्रवीण तो होते हैं, परन्तु इनका शरीर हृष्ट-पुष्ट न होकर निर्बल ही रहता है। (शत्रुओं के प्रति क्षमाभाव रखना, अपमान सहन न करके उसके प्रतिकारार्थ प्रयत्नशील रहना, बड़े लोगों के प्रति आस्थावान् बनना, किसी के साथ बेईमानी नहीं करना और कुछ हानि सहकर भी भविष्य के प्रति सचेष्ट हो जाना इनके लिए अनिवार्य शिक्षा है। स्वपत्नी के प्रति वफादारी का निर्वाह करके ही इनका दाम्पत्य जीवन सुखी -सम्पन्न और सफल बनना सम्भव होता है। पत्नी के प्रति शंकाभाव रखने वाले जातक स्वयमेव गार्हस्थ्य वैभव को विनष्ट होने का निमन्त्रण दे बैठते हैं)।।१।। अत्यम्बुपान: समचारुदेहः स्वदारगस्तोयजवित्तभोक्ता। विद्वान्कृतज्ञोऽपि भवत्यमित्रान्शुभेक्षणो भाग्ययुतोऽन्त्यराशौ।२। इस प्रमाण के अनुसार मीन राशि के व्यक्ति मन के अनुकूल रहन- सहन-खान-पान-वातावरण और व्यवहार को अधिक महत्त्व देते हैं। इनका शरीर सुन्दर व व्यक्तित्व आकर्षक होता है, सुन्दरता के स्वच्छता इन्हें अधिक पसन्द होती है। पैनी दृष्टि के ऐसे लोग दूसरों की अच्छी-बुरी दोनों नजर अच्छी तरह पहचान लेते हैं। नियमित शिक्षा- दीक्षा में सफलता भले ही कम मिले, किन्तु स्वाध्याय और साक्षरता को महत्त्व देते ये लोग उपलब्धियों एवं विशेषताओं की सम्पन्नता से आकृष्ट करते हैं। इस राशि के व्यक्ति शारीरिक स्वास्थ्य, धन-सन्तानादि सुख तथा अपने अन्यान्य कार्यों में स्वयं को प्रभावित अनुभव करते हैं। ३७ वर्ष के बाद अभ्युदयकाल प्रारम्भ होता है। इच्छित कार्यों को पूर्ण करने में सफल तो होते हैं, पर विलम्ब होता है। साथ ही ये विद्वत्ता की साथ ही कद्र करते हैं। बाहरी स्त्रियों के प्रति ऊँची आस्था का आकर्षण इनका आदर्श होता है और अपनी पत्नी का भरपूर सुख प्राप्त करते हैं। स्त्रियोचित गुण और आदर्शों के अनुयायी होकर अपने शारीरिक- होकर ये लोग लेखक, कवि और मानसिक और बौद्धिक श्रम द्वारा जिस भाग्यशीलता को ऐसे लोग पाते है, उसका उपभोग इनकी अगली पीढ़ी करती है। जलाशय, बाग- बगीचा, फल-फूल और काष्ठ-निर्मित वस्तु इन्हें अधिक पसन्द होती है। जलयान और वायुयान की यात्राओं में आनन्द मिलता है। इनके उतनी ही आन्तरिक आस्था बलवती होती है, जितनी की मछलियों को मीन राशि के व्यक्ति अधिकांशतः प्रभाव, प्रताप से प्रतिष्ठित होते हैं। अभिाव इनके जीवन में कम होता है। स्वभाव से १४६ जीवन में शत्रुओं की संख्या कम नहीं होती, लेकिन अपने बुद्धिबल द्वारा शत्रुता और मित्रता का सन्तुलन बनाये रखने में मीन राशि के व्यक्ति चतुर होते हैं। (रचनापटु एवं वाक्पटु साहित्यकार भी बन सकते हैं, क्योंकि इनकी वाणी और रचना में भावनात्मक प्रवाह अधिक होता है। इनमें प्रवाह की मन्दता नहीं आ पाती, क्रमशः ये लोग जीवनोत्तरकाल में यशस्वी भी बन जाते हैं।।२।। मीन राशि की महिलाओं का लक्षण मीनः मीनलग्ने वा मीनदृक्स्थूलनासिका । कफवाताधिका जाता चर्मरोगसमन्विता ॥३॥ धनधर्मसुखैर्युक्ता सुशीला च सुभत्रिका । म्रियते रक्तदोषाद्वा गमनाद्विदोषघात् ॥४॥

मीन राशि (लग्न) की महिलाएँ तीखे नाक-नक्शेवाली, लघु और सुन्दर नेत्र, मछलियों की तरह अत्यन्त चंचल, अपने विरोधियों से चारो तरफ घिरी हुयी होने के बावजूद भी अपने सम्मान एवं प्राण की रक्षा करती हैं। ये महिलाएँ आसानी से किसी के चंगुल में नहीं फँसती, लेकिन हित-मित्र-रिश्तेदार और पास-पड़ोसियों के व्यवहार से अक्सर दुःखी रहती हैं। कफ-दोष एवं वायु-रोग से उत्पन्न अनेक तरह के रोग-व्याधियों से पीड़ित कभी चर्म-रोग तो कभी क्षय-रोग अर्थात् छुआछूत की बीमारियों से प्रभावित होती हैं, आर्थिक स्थिति सामान्य कह सकते हैं। अधिक धन-सम्पन्नता तो नहीं हो सकती, लेकिन इन्हें दरिद्रता का भी सामना नहीं करना पड़ता। धार्मिक मामलों में इनकी जातकाभरणोक्त चन्द्र- पानी की आवश्यकता पड़ती है। इनके अन्तिम जीवन में कई तरह के विकार-दुर्घटना अथवा विषैले पदार्थों का भय रहता है।।३-४॥ इ-निर्याणाध्याय के अनुसार- धनी मानी विनीतच भोगी संहृष्टमानसः । पितृमातृसुराचार्य गुरुभक्ति युतो नरः॥५॥ और युक्त नम्र एवं कुछ विलासी प्रवृत्ति के होते हैं। सदैव हँसमुख और प्रसन्न रहना एवं माता-पिता-देवता और गुरु के परम भक्त होते हैं। इनकी श्रद्धाभक्ति अन्य लोगों के बीच प्रशंसनीय होती है।।५।। उदारो रूपवाँछ्रेष्ठो गन्धमाल्यविभूषणः । पंचमेऽब्दे जलादीतिरष्टमे ज्वरपीड़नम् ।।६।। ऐसे जातक उदार, सहज और सुन्दर होते हैं। समाज में अच्छी मान- प्रतिष्ठा का श्रेष्ठ लाभ इन्हें मिलता है। सुवासित पदार्थ और आभूषण इन्हें विशेष प्रिय होता है। जन्म से ५ वर्ष की आयु तक जल से भय और आठ वर्ष की आयु में ज्वर से पीड़ा की प्रबल संभावना होती है।।६।। द्वाविंशे महती पीड़ा चतुर्विंशन्मितेऽब्दके । पूर्वाशागमनं वायुरब्दानां भवति स्मृताः ॥७॥ २२ वर्ष की आयु में अनेक प्रकार के कष्टों की संभावना होती है। २४ वर्ष की आयु में पूरब दिशा में यात्रा का संयोग बनता है। शास्त्र- वचनानुसार इनकी आयु अधिकतम ६० वर्ष का होने का उल्लेख है।।७।। आश्विनस्यासिते पक्षे द्वितीयायां गुरोर्दिने । कृतिकानामनक्षत्रे सायं मृत्युर्न संशयः ॥८॥ आश्विन का महीना, कृष्ण पक्ष, द्वितीया तिथि और गुरुवार दिन, कृत्तिका नक्षत्र में इनकी अन्तिम जीवन-यात्रा का योग बनता है। तदनुकूल पूर्णायु प्राप्त करते हैं।।८।। इतीरितं तु निर्याणं यावनाचार्यसंमतम् । मीनस्थ यामिनीनाथे भवेदत्र न संशयः ॥६॥

ऐसा यावनाचार्य ने मेषादि द्वादश राशियों के साथ-साथ तीन राशिगत चन्द्रमा के संदर्भ में भी अपनी सम्मति प्रदान की है।।६।। पाद-टिप्पणी- के रूप में यह कहना अनुचित न होगा कि इन मीन राशि के जातकों को बचपन में तीव्रज्वर, अम्लपित्त, एलर्जी, सुखण्डी, वमन, कमजोरी, दन्तरोगादि से बार-बार पीड़ा का भय एवं युवावस्था में शरीरांगगत झिनझिनी पड़ना, रक्ताल्पता, जीवाणुमेह, कब्जियत, मलेरिया विकार तथा वृद्धावस्था में विषभय, जलोदर, खाँसी-श्वाँसावरोध, अनिद्रा, पक्षाघात- -सन्धिवात का भय, आयु-आरोग्य के विकास में बाधाकारी होता है। सद्यः आयु- आरोग्य की पूर्णता के लिए भगवान् शंकर के सहित उनके पुत्र स्वामी कार्तिकेय की आराधना श्रेयस्कर होती है अथवा भगवान् शंकर के नित्य पूजन कल्याणकारी फल पाने के लिए सोमवार या पक्ष-प्रदोष के दिन शिवलिंग पर का से पुष्प-चन्दन-बिल्वपत्र, धूप-दीप चढ़ाकर भक्तिभाव से विजया (भाँग या ठंडई) अर्पण करते हुए ॐ नमः शिवाय का अष्टोत्तरशत जप करें। सभी देवताओं के जीवन-भविष्य-दर्पण १५१ प्राण प्रभु भगवान् शंकर हैं, प्रश्नोपषिद् में कहा गया है कि- "इन्द्रस्त्वं प्राणतेजसा रुद्रोऽसि परिरक्षिता। त्वमन्तरिक्ष-चरसि सूर्यस्त्वं अघोरेश्वर ज्योतिषां पतिः॥ अर्थात् देवप्राण आशुतोष की उत्पत्ति अपने तेज से हुई है, इसलिए वे स्वयंभू (शम्भू) कहे जाते हैं। सभी ज्योतिषों के अधीश्वर सूर्यस्वरूप ज्योतिर्लिङ्ग यही हैं। अन्तरिक्ष में विचरण करते हुए रुद्रस्वरूप धारण कर सबकी रक्षा करते है। अतएव शिव-पूजनोपरान्त इस मन्त्र का अष्टोत्तर शत जप करें- ॐ नमः शम्भवाय च मयोद्भवाय च नम: शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।" इस प्रकार विधिवत् (आस्थापूर्वक) प्रार्थना करनी चाहिए। ऐसे सुकृत्य विधानों के करते रहने से मीन राशिगत जातकों के अरिष्टादि योग निवृत्त हो जाते हैं। जन्म से ५-८-२२-२४ वर्ष की आयु में पूर्वोक्त श्लोकों के अन्तर्गत जो भयावह स्थिति का वर्णन किया है, उसका निवारण होने के बाद ही दीर्घायु स्वरूप ६० वर्ष की पूर्णायु (बड़े भाग्यशाली लोगों को) प्राप्त होती है। ऐसा देखा गया है कि इनकी आयु का ४२-४३, ५१-५२, ६०-६१,६९-७० और ७८-७६ वर्ष खतरे से खाली नहीं होता। संकटो के जो बादल मँडराते हैं, वे कुछ-न- कुछ अपने प्रभाव अवश्य छोड़ जाते हैं, इसीलिए बारम्बार विविध उपायों का परामर्श हम सर्वत्र देते आये हैं, जिनके द्वारा आस्थावान् भक्त-महानुभावों का कल्याण होना निश्चित है। जो भी उपाय सुरुचिकर लगे उसे ग्रहण कर लें और जो उपाय कठिन प्रतीत हों, उन्हें तिरस्कृत करने के बजाय अनुष्ठान-विशेषज्ञों से बखूबी समझने का प्रयत्न करें। और अब, ग्रहपीडोपशमनार्थ रत्नाभरणोक्त उपनार का परामर्श दिया जाता है- मीनेऽष्यामयजा दोषा दीर्घकालाद्धि कष्टदा । शरभेश्वरवर्मजपात् नरः शान्तिं समश्नुते ॥१०॥ मीन (लग्न राशि) के जातक जब कभी बीमार पड़ते हैं, या किसी तरह परेशान होते हैं तो अधिक काल तक दुःखी-चिन्तित और रोगाक्रान्त रहते हैं। एतदर्थ शरभेश्वर-जप (शरभ-कवच का पाठ-हवन) करना- कराना इनके लिए शान्तिप्रद होता है। दैनिक सुखशान्ति एवं सन्तुष्टि के लिए निम्नलिखित मन्त्र का १०८ बार (एक माला) जप प्रतिदिन आस्थापूर्वक करना चाहिए- निजी सम्पत्ति भी नष्ट हो सकती है। अनेक असाध्य रोगों और बीमारियों में आप फँस जायेंगे। पारिवारिक उलझनों का इंटकर सामना करना । जीवन-भविष्य-दर्पण ॐ क्लीं उद्धृताय उद्धारिणे नमः॥ निम्नलिखित मन्त्र को १२ बार उत्तारण करके एक अंजलि काली उड़द पीपल वृक्ष के समीप प्रतिदिन रखने से दृष्टिदोष, त्रोटक एवं शारीरिक कष्ट का निवारण होता है- ॐ माषदानं क्लेशहरं शरीरारोग्यवर्धनम् । अन्तःशुद्धिंकरा: माषा प्रीयताम्मे जनार्दनः ॥११॥ मीन राशि का स्वानुभूत जीवन-फल मीन राशि के प्रति महर्षिवाक्य- मीनोपदःस्त्री कफवारिरात्रि नि:शब्दवभुतिनुर्जलस्थाः। स्निग्धोऽतिसंगप्रसवोऽपि विप्रः शुभोत्तराशेट्विपमोदयश्च ।१२। जन्म से २६ वर्ष तक आप बहुत दुःखी, चिन्तित, परेशान और रोगी रहेंगे। स्वामी बृहस्पति, ब्राह्मण वर्ण, द्विस्वभावसंज्ञा, शीतल स्वभाव, कफ प्रकृति, गम्भीर एवं क्षुद्र विचारों से युक्त, अत्यन्त चतुर, दुश्मनों पर अपना प्रभाव जमानेवाले, कड़ी बोली, रूखा व्यवहार, क्रोधी, कंजूस, ज्ञानी-विद्वान्, गुणी, पारिवारिक कलह से चिढ़नेवाले, देवाराधना में तत्पर, भोग-विलास वृत्ति में तेज, राजनीति-विद्या में निपुण, सुन्दर और लक्ष्मी से युक्त व्यक्ति आप होंगे। उत्तराधिकार में सम्पत्ति मिलने तथा सट्टा-लाटरी से अचानक धन-प्राप्ति के अवसर मिलेंगे। स्वार्थ और लालच की भावना तेज रहेगी। शारीरिक कष्ट, मनोव्यथा, व्यग्रता, सिर में चोट, रक्तचाप की वृद्धि, सन्तान की चिन्ता तथा स्त्री-कलह से आपको हमेशा चिन्तित रहना पड़ेगा। आपकी पड़ी हुई कुछ बुरी आदत कभी-कभी प्राणलेवा कष्ट भी दे सकती है। १८ से २६ वर्ष की उम्र में विवाह होगा, पति-पत्नी में प्रायः खटपट और कलह बना रहेगा। खर्च की ताकत बढ़ जायेगी। चिन्ताओं के कारण अनेक प्रकार के शारीरिक रोग उत्पन्न होंगे। रुपये-पैसों की कमी महसूस होगी, मगर २७ से ४३ वर्ष तक का समय चारो ओर से धन-दौलत प्राप्त कराने वाला है। हर जगह आपकी इज्जत होगी, लोग वाहवाही करेंगे। निजी मकान जायदाद भी होगा, हर प्रकार की परेशानियाँ दूर हो जायेंगी। सतत प्रयत्न करने पर मन में सोचा हुआ प्रत्येक काम पूरा होगा। ४४ से ६० वर्ष तक का समय कष्टकारक है। होशियारी से काम लें, वरना बहुत बड़ी मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा। इन अवस्थाओं में आपकी कभी-कभी दु:खी रहना पड़ेगा। प्रतिवर्ष सितम्बर मास, प्रतिमास ३- - पड़ेगा। कर्ज का बोझ सर चढ़ेगा। ६१ वर्ष से ६६ वर्ष तक वृद्धावस्था का समय पुनः कुछ भाग्य को बढ़ाने वाला और तकदीर को चमकाने सहायता मिलेगी। पत्रकार या आचोलक के रूप में आप प्रशंसित हो आन्दोलनों में भाग लेना समाज की सलाहकारिता तथा नेतृत्व करना, स्वतन्त्र उद्योग तथा धन्धा संचालित करना, चतुर लोगों की अनुकूलता मार्गदर्याक होना आपके लिए सम्भव है। आपको एड़ी-पंजा, कान में रोग, स्मरण शक्ति हीनता, उदर सम्बन्धी व्याधि और मानसिक रोगों से जीवन-भविष्य-दर्पण वाला सिद्ध होगा। आमदनी भरसक अच्छी होगी, प्रत्येक कामों में विजय प्राप्त होगा। किसी मददगार की ओर से आपके व्यापार में ज्यादा सकते हैं, क्योंकि आपके लेख, भाषण और आलोचनाओं की कद्र करनेवालों की संख्या बहुतायत होती है। यह भी सम्भव है कि सट्टा- लाटरी या जुआ से अपार धन की प्राप्ति हो जाय। ६८ वर्ष की उम्र में मृत्यु के साधारण योग हैं, इससे बचने पर ७५ वर्ष ६ मास २३ दिन की उमर में जलोदर रोग से मृत्यु निश्चित है। मीन राशिवाली स्त्रियाँ प्रायः पुत्रवती, धर्मपरायण, घर-गृहस्थी के कार्य-संचालन में दक्ष, सुन्दर स्वभाव, मान-प्रतिष्ठा, धन-दौलत प्राप्त करनेवाली, मीठी वचन बोलने वाली, बुद्धिमान् और पति के पहले ही मरनेवाली होती हैं। इनका सौभाग्य अखण्ड होता है।।१२।। यदि आपकी मीनराशि है तो अपने जीवन में अकेले प्रगति नहीं कर सकते, आपको हमेशा एक वफादार सहयोगी की आवश्यकता पड़ेगी। सच मानिये, तो तलाश करने पर भी आपको वफादार सहयोगी नहीं मिल सकता। साधारणतः उभरा हुआ गौररक्त गेहुँआ वर्ण, उन्नत ललाट, उन्नत नासिका, सुन्दर शरीर, परधन या आकस्मिक धनप्राप्ति की जिज्ञासा, पत्नी के वशीभूत, पशु-पक्षियों से प्रेम, सुन्दर स्त्री, सुन्दर वस्त्र और मधुर भोजन के प्रेमी, बुद्धि-योग और विद्यायोग साधारण, सन्ततिसुख की लालसा और दिमागी हरकतों से लाचार रहना मीनराशि के लक्षण हैं। आपकी सहायता द्वारा अनेक प्राणियों की परवरिश होगी। आपके जीवन में पड़नेवाले विशेष शुभाशुभ परिणामों की जबाबदेही आपकी पत्नी पर है, यद्यपि पत्नी की बुद्धि अनुभवी और उनका सिद्धान्त आपके जीवन को अनोखा प्रकाश प्रदान कर सकता है, बशर्ते कि आप उसे हृदय से चाहें, मान्यता दें और उनका परामर्श ग्रहण करें। सार्वजनिक र्मिक रचनाओं का निर्माण तथा पास-पड़ोसियों का प्राप्त करना, ७-१२-१८-२८ तारीखें, शुक्रवार का दिन, मिथुन-तुला-कुम्भराशि वाले व्यक्ति और नीला-काला रंग के वस्त्रादि पदार्थ आपके लिए ठीक नहीं हैं। आपके स्वभाव में ब्राह्मणों जैसे कर्म की प्रधानता है और सही माने में आपका जीवन संघर्षपूर्ण, अनियमित एवं चलते-फिरते मुसाफिरों की तरह उलझनों से भरा हुआ है। आपकी कल्पनाशक्ति बड़ी प्रबल है, आपके मन में यह सहज जिज्ञासा बनी रहेगी कि अपने स्वतन्त्र जीवन की अगोचर एवं दुर्लभ वस्तुओं को हठात् हस्तगत कर लें। आपका परिवार एवं आपके भाई-बन्धु हमेशा खिलाफ रहेंगे। आप अपनी कुछ खास आदतोंवश कभी-कभी स्वयं बदनामी, बेकारी और परवशता का सेहरा अपने सर पर बाँध लेते हैं। आप कभी किसी बात की तह तक नहीं पहुंच पाते, स्वयं जान न-बूझकर भी हर मामले में अनजान बने रह जाते हैं। कभी किसी खास मकसद में पूरी सफलता नहीं पा सकेंगे, किन्तु आवश्यकता की हर चीज सुलभ होती रहेगी। जीविकोपार्जन की दृष्टि से आपका भविष्य सुखमय रहेगा। हमेशा कुछ-न-कुछ ऐसी परेशानियाँ आपके सामने उपस्थित होती रहेंगी-जिनकी वजह से आप अपनी ताकत-व्यक्तित्व-सुख और आनन्द का सही अनुभव नहीं कर पायेंगे। काफी भाग्यवान्, उज्ज्वल भविष्य, ज्यादा प्रफुल्ल चित, रसीला मिजाज, भोग-विलास की शक्ति प्रबल, वाणी की शक्ति उत्तम, विश्वासी और साहसी होते हुए भी आप में सदैव लकीर के फकीर बने रहने का व्यापक दोष होगा। मीन राशि वाले व्यक्ति ज्यादातर धर्म-शिक्षा, राजनीति और लेखन-प्रकाशन से सम्बन्धित नौकरी या व्यवसाय में सफल हो सकते हैं। अनेक प्रकार से धन-लाभ करनेवाले आप बहुधन्धी भी हो सकते हैं। कुछ नशीले पदार्थ का सेवन करने की आदत भी होनी चाहिए। अपने कर्मक्षेत्र में आप पूर्ण सफल रहेंगे। लालच-क्रोध और जल्दीबाजी आपकी विशेषताएँ हैं। स्त्रियों, साधु-महात्माओं तथा बड़े- बड़े उद्योगपतियों के बीच आपका उठना-बैठना होगा। आप पराक्रमी ज्यादा हैं, मगर आलस्य और अतिनिद्रा के कारण प्रायः अपना बना- बनाया काम स्वयं बिगाड़ लेते हैं। अपने परिवारवालों से आपको बहुत ज्यादा शिकायत रहेगी। गम्भीरता के साथ क्षुद्र विचारों से भी युक्त रहेंगे। दुश्मनों पर आपका जबरदस्त प्रभाव होगा। आपके विचारों का सर्वत्र स्वागत होगा। हेली-मेली जनों की प्रशंसा आपको प्राप्त होती रहेगी। मीनराशि के चिकित्सक अपने चिकित्सा-व्यवसाय में कठिनाई से सफलता पाते हैं। अत्यन्त चतुर, कड़ी बोली, रूखा व्यवहार, क्रोध- ज्यादा, पारिवारिक कलह से चिढ़, उत्तराधिकार में सम्पत्ति मिलने तथा - उत्तर दिशा से सम्बन्धित काम आपके लिए ज्यादातर सफलताप्रद सम्भावित रही है। आप अपने जीवन-कल्याणार्थ एवं आर्थिक तंगी दूर करना भी शुभ फलदायी होगा। अस्तु। जीवन-भविष्य-दर्पण महालाटरी से अचानक धन-प्राप्ति के अवसर भी प्राप्त होंगे। पूर्व और होगा। जन्म के प्रथम व दूसरे वर्ष में विचित्र प्रकार की कष्टप्रद घटना करने के लिए निम्नलिखित 'धनदा कवच' का नित्य पाठ करें- श्री देव्युवाच ॥ धनदाया महाविद्या कथिता न प्रकाशिता ॥ इदानीं श्रोतुमिच्छामि कवचं पूर्वसूचितं ।। १॥ श्री शिव उवाच॥ श्रृणु देवि प्रवक्ष्यामि कवचं मंत्रविग्रहं ।। सारात्सारतरं देवि कवचम्मन्मुखोदितम् ॥२॥ धनदा कवचस्यास्य कुबेर ऋषिरीरितः॥ पंक्तिश्छन्दोदेवता च धनदा सिद्धिदा सदा ॥३॥ धर्मार्थकाममोक्षेषु विनियोगः प्रकीर्तितः॥ धं बीजं मे शिरः पातु ह्रीं बीजं मे ललाटकं॥४॥ श्रीं बीजं मे मुखं पातु रकारं हृदि मेऽवतु। तिकारं पातु जठरं प्रिकारं पृष्ठतोऽवतु॥५॥ येकारं जंघयोर्युग्मे स्वाकारं पादयोर्युगे॥ शीर्षादिपादपर्यन्तं हाकारं सर्वतोऽवतु॥६॥ इत्येतत्कथितं कान्ते कवचं सर्वसिद्धिदं। गुरुमभ्यर्च्य विधिवत्कवचं प्रपठेद्यदि॥७॥ शतवर्ष सहस्राणि पूजायाः फलमाप्नुयात्॥ गुरुपूजां विना देवि नहि सिद्धिः प्रजायते॥८॥ गुरुपूजापरो भूत्वा कवचं प्रपठेत्ततः॥ सर्वसिद्धि-युतो भूत्वा विचारैभैरवो यथा॥६॥ प्रात:काले पठेद्यस्तु मन्त्रजापपुरःसरः॥ सोभीष्ट- फलमाप्नोति सत्यं-सत्यं न संशयः॥१०॥ पूजाकाले पठेद्यस्तु देवीं ध्यात्वा हृदाम्बुजै॥ षण्मासाभ्यन्तरे सिद्धिर्नात्र कार्या विचारणा ॥११॥ सायंकाले पठेद्यस्तु सशिवो नात्र संशयः॥ भूर्ये विलिख्य गुटिकां स्वर्णस्यां धारयेद्यदि॥१२॥ पुरुषो दक्षिणे बाहौ योषिद्वामभुजे तथा॥ सर्वसिद्धियुतो भूत्वा धनवान्पुत्रवान्भवेत्॥१३॥ इदं कवचमज्ञात्वा योजयेद्धनदां शुभे॥ सशस्त्रघातमाप्नोति सोऽचिरान्मृत्यु- माप्नुयात्॥ कवचेनावृतो नित्यं यत्र यत्रैव गच्छति॥ अतएव महादेवि संपूज्यो नात्र संशयः॥१५॥ समाप्तं कवचं देवि किमन्यच्छ्रोतुमिच्छसि॥ देवगुरु-बृहस्पति ही आपकी राशि के स्वामी हैं। विद्यार्जन, सांसारिक सुख एवं कार्यों पर बृहस्पति का विशेष अधिकार है। बृहस्पति की ही प्रसन्नता से आपका मनुष्य जीवन सुखी व समृद्ध बन सकता है। अपनी राशि के अधिपति बृहस्पति को सदैव प्रसन्न रखने के लिए विप्र वर्ण का पुखराज अथवा बगलामुखी श्रीहरिद्रा कवच धारण करना आवश्यक है। गुरुवार का व्रत, नारायण कवच अथवा विष्णुसहस्रनाम का नित्य पाठ

प्रतिकूलता हर वर्ष का सितंबर महीना।

विशेषताएं इसे अंग्रेजी में पाइसीज (Pisces) कहते हैं। मीन राशि उत्तर दिशा की स्वामिनी, उदार, चंचल एवं शांत, कफ प्रकृति की, वृद्ध, उजले रंग की, सत्वगुणी, जल तत्त्व की, ब्राह्मण जाति की स्त्री, शुभ कार्यों का प्रतिनिधित्व करनेवाली, रात्रिबली, द्विस्वभावी, जलचर, उभयोदय, समराशि है। मछलियों का जोड़ा, एक-दूसरे के विरुद्ध दिशा में मुंह बनाए, एक का चेहरा तो दूसरे की पूंछ गोल आकृति में रहती है। यह राशि नाना एवं मोक्ष का प्रतिनिधित्व करनेवाली है। इस राशि का निवास कोहाल देश एवं स्वामी बृहस्पति तथा अंक 3 7 है। शरीर में दोनों पैर, तलवे, पैरों की उंगलियों पर इस राशि का प्रभाव रहता है। सिनेमा, मनोरंजन विषयक सभी व्यवसाय, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक कार्य, लेखन, संशोधन एवं आध्यात्मिक कार्य का प्रतिनिधित्व इस राशि के पास है।

जलयात्रा, औषधि विज्ञान, रसायन विषय भी इसी राशि के आधिपत्य में रहते हैं। मछलियां, समुद्र से निर्मित वस्तुएं, जवाहरात, मोती, हीरा, गोरोचन, शराब, शयन गृह में अंतर्भूत उपकरण एवं वस्त्र इत्यादि का आधिपत्य मीन राशि के पास है। मेदिनीय ज्योतिषशास्त्र में मिस्र, सहारा, गेलेशिया, लंकास्टर, जंबूद्वीप आदि प्रांत प्रदेशों का प्रतिनिधित्व भी मीन राशि ही करती है। मीन राशि के व्यक्ति जितेन्द्रिय, जलप्रेमी, चतुर स्वभावी, दिन में कई बार नहाने की आदतवाले, कला, संगीत एवं अभिनय क्षेत्र में नाम कमानेवाले, खानपान एवं वस्त्र आवरणों के शौकीन, स्वच्छ एवं सुंदर शरीरधारी होते हैं। शिक्षा कम होती है किंतु अभ्यास से इस कमी को पूरा कर लेते हैं। हवाई जहाज की यात्रा के शौकीन होते हैं। मित्रों के साथ शत्रुओं की भी बड़ी संख्या होती है। आर्थिक स्थिति साधारण रहती है। मीन राशि की महिलाएं सुंदर, चंचल, शत्रुओं से घिरी हुई, किसी के भी वश में न आनेवाली होती हैं। जातकाभरण के अनुसार अधिकांश मीन राशि व्यक्ति प्रभावी, प्रतापी एवं प्रतिष्ठित होते हैं। अर्थाभाव नहीं रहता। स्वभाव से मृदु, कुछ हद तक विलासी होते हैं। सदा हंसमुख एवं प्रसन्न रहनेवाले किंतु माता-पिता का अनादर करनेवाले, सुगंधित पदार्थ एवं सुंदर आभूषणों से लगाव रखनेवाले होते हैं। जन्म से 5वें वर्ष तक पानी से खतरा रहता है। आठवें वर्ष में कष्ट होता है। 22वें वर्ष में अनेक कष्ट सहने होते हैं। आयु 90 वर्ष तक की रहती है। अनुभवसिद्ध फलित मीन राशि के व्यक्ति चतुर, मृदुभाषी, गुणवान, भोगविलासी, राजनीति के मर्मज्ञ, पैतृक संपत्ति एवं सट्टा लाटरी से धन प्राप्ति करनेवाले, स्वार्थी, लोभी रहते हैं। स्त्री कलह से दुखी एवं संतान के लिए चिंताग्रस्त रहते हैं। इनके मित्र अधिक रहते हैं। स्कूल कॉलेज के अध्यापक, वकील, जज, लेखक, प्रकाशक, इनकमटैक्स सेल्सटैक्स सलाहकार में से किसी महकमे में नौकरी करनेवाले, ज्योतिष, तकनीकी क्षेत्र, सर्जन, फार्मेसी संचालन आदि क्षेत्रों में अग्रणी रहते हैं।

हर महीने की 3,7,13,18,28 तारीखें। शुक्रवार। नीला-काला रंग, इन रंगों के कपड़े तथा अन्य चीजें। मिथुन, तुला एवं कुंभ राशि के स्त्री-पुरुष। जीवन की महत्त्वपूर्ण घटनाएं जन्म से 26वें वर्ष तक दुखी, त्रस्त एवं रोगी रहते हैं। 18 से 26 वर्ष की समयावधि में विवाह होता है। 27 से 43 वर्ष की कालावधि में सर्वत्र प्रगति होती है। अर्थलाभ के साथ मकान भी बनता है। 44 से 60 वर्ष तक का समय अनेक दृष्टियों से बुरा सिद्ध होता है। 61 से 70 वर्षों सट्टा लॉटरी से धन लाभ, व्यावसायिक प्रगति, प्रसिद्धि मिलती है। विशेष उपासना बीमारियां, योगक्षेम में आनेवाली कठिनाइयों से उत्पन्न अनिष्ट स्थिति को बदलने के लिए निम्नलिखित मंत्र का 108 बार जाप करें: ॐ क्लीं उद्धृताय उद्धारिणे नमः। निम्नलिखित मंत्र भी बारह बार बोलें: ॐ माषदानं क्लेशहरं शरीरारोग्यवर्धनम्। अन्तः शुद्धिकरा: माया प्रियतारूपे जनार्दनः।।

मीन राशि चन्द्रमा जब लग्नकुण्डली में मीन राशि में हो, यानी जातक के जन्म के समय चन्द्रमा भचक्र के बारहवें या अन्तिम खण्ड (330° 360°) में हो तो जातक की जन्मराशि मीन होती है। मीन राशि का राशीश गुरु है। पाश्चात्य ज्योतिष की दृष्टि से 20 फरवरी से 20 मार्च के मध्य जन्मे सभी जातक मीन राशि के होते हैं। मीन राशि के जातक अस्थिर स्वभाव के, चंचल प्रकृति के तथा अन्तर्द्वन्द्वात्मक सोच के होते हैं। इनके नेत्र प्रायः गोल व उभरे हुए होते हैं तथा शरीर का निचला भाग ऊपर की अपेक्षा कमजोर होता है। ये लोग स्वयं तथा स्वयं से जुड़ी वस्तुओं/मामलों/व्यक्तियों को अपने ही नज़रिये से देखते हैं। अक्सर ये जीवन में अपने व्यवसायों में भी परिवर्तन करते हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो इनके जीवन का कोई लक्ष्य नहीं होता, बस ये जीवन जीते हैं। तथापि आध्यात्मिक विषयों के प्रति इनकी खासी उत्सुकता होती है तथा आध्यात्मिक प्रगति की सम्भावना भी पूर्ण रूप से होती है। इनका वैवाहिक जीवन सुखद नहीं होता और मात्र समझौते की-सौ स्थिति रहती है। कई बार तो अपेक्षित सफलता/उपलब्धि प्राप्त न कर पाने के पीछे कारण ही जीवनसाथी बन जाता है। प्रायः इस सबके बावजूद मीन राशि के जातक भीतर से शांत संतुष्ट होते हैं। कई बार ये अपने आप में खोए रहने वाले भी हो सकते हैं। व्यावहारिक जीवन में ये कम हो सफल हो पाते हैं। गुरु शुभ प्रभाव में हो तो ये लोग ईमानदार, उदार, न्यायप्रिय तथा अध्यात्मवादी होते हैं। सामान्यत: मीन राशि के जातक स्वस्थ रहते हैं। तथापि लग्न पर अशुभ प्रभाव हो तो पानी की कमी, सांस, कान व हृदय रोग सम्भावित होते हैं। गुरु पाप प्रभाव में हो तो पीलिया आदि यकृत के रोग सम्भव होते हैं। ये लोग पीने-पिलाने के शौकीन हो सकते हैं।

मीन राशि का शास्त्रीय स्वरूप शशिनि मीनगते विजितेन्द्रियो बहुगुण: कुशलो जललालसः। विमलधो: किलशास्त्रकलादरस्त्वबलताबलताकलितो नरः।१। मीन राशि के जातक ज्ञानेन्द्रियों तथा कर्मेन्द्रियों को स्वचालित एवं स्वनियन्त्रित रखते हुए जितेन्द्रिय कहलाते हैं। अच्छे-अच्छे गुणों के अधिष्ठाता, चतुर स्वभाव, जलप्रेमी, अधिक स्नान के शौकीन, जलमार्गीय यात्रा के प्रेमी, स्वच्छ-स्पष्ट और निर्मल बुद्धि रखते हुए शास्त्रीय कला- संगीत-अभिनय-आराधना आदि में प्रवीण तो होते हैं, परन्तु इनका शरीर हृष्ट-पुष्ट न होकर निर्बल ही रहता है। (शत्रुओं के प्रति क्षमाभाव रखना, अपमान सहन न करके उसके प्रतिकारार्थ प्रयत्नशील रहना, बड़े लोगों के प्रति आस्थावान् बनना, किसी के साथ बेईमानी नहीं करना और कुछ हानि सहकर भी भविष्य के प्रति सचेष्ट हो जाना इनके लिए अनिवार्य शिक्षा है। स्वपत्नी के प्रति वफादारी का निर्वाह करके ही इनका दाम्पत्य जीवन सुखी -सम्पन्न और सफल बनना सम्भव होता है। पत्नी के प्रति शंकाभाव रखने वाले जातक स्वयमेव गार्हस्थ्य वैभव को विनष्ट होने का निमन्त्रण दे बैठते हैं)।।१।। अत्यम्बुपान: समचारुदेहः स्वदारगस्तोयजवित्तभोक्ता। विद्वान्कृतज्ञोऽपि भवत्यमित्रान्शुभेक्षणो भाग्ययुतोऽन्त्यराशौ।२। इस प्रमाण के अनुसार मीन राशि के व्यक्ति मन के अनुकूल रहन- सहन-खान-पान-वातावरण और व्यवहार को अधिक महत्त्व देते हैं। इनका शरीर सुन्दर व व्यक्तित्व आकर्षक होता है, सुन्दरता के स्वच्छता इन्हें अधिक पसन्द होती है। पैनी दृष्टि के ऐसे लोग दूसरों की अच्छी-बुरी दोनों नजर अच्छी तरह पहचान लेते हैं। नियमित शिक्षा- दीक्षा में सफलता भले ही कम मिले, किन्तु स्वाध्याय और साक्षरता को महत्त्व देते ये लोग उपलब्धियों एवं विशेषताओं की सम्पन्नता से आकृष्ट करते हैं। इस राशि के व्यक्ति शारीरिक स्वास्थ्य, धन-सन्तानादि सुख तथा अपने अन्यान्य कार्यों में स्वयं को प्रभावित अनुभव करते हैं। ३७ वर्ष के बाद अभ्युदयकाल प्रारम्भ होता है। इच्छित कार्यों को पूर्ण करने में सफल तो होते हैं, पर विलम्ब होता है। साथ ही ये विद्वत्ता की साथ ही कद्र करते हैं। बाहरी स्त्रियों के प्रति ऊँची आस्था का आकर्षण इनका आदर्श होता है और अपनी पत्नी का भरपूर सुख प्राप्त करते हैं। स्त्रियोचित गुण और आदर्शों के अनुयायी होकर अपने शारीरिक- होकर ये लोग लेखक, कवि और मानसिक और बौद्धिक श्रम द्वारा जिस भाग्यशीलता को ऐसे लोग पाते है, उसका उपभोग इनकी अगली पीढ़ी करती है। जलाशय, बाग- बगीचा, फल-फूल और काष्ठ-निर्मित वस्तु इन्हें अधिक पसन्द होती है। जलयान और वायुयान की यात्राओं में आनन्द मिलता है। इनके उतनी ही आन्तरिक आस्था बलवती होती है, जितनी की मछलियों को मीन राशि के व्यक्ति अधिकांशतः प्रभाव, प्रताप से प्रतिष्ठित होते हैं। अभिाव इनके जीवन में कम होता है। स्वभाव से १४६ जीवन में शत्रुओं की संख्या कम नहीं होती, लेकिन अपने बुद्धिबल द्वारा शत्रुता और मित्रता का सन्तुलन बनाये रखने में मीन राशि के व्यक्ति चतुर होते हैं। (रचनापटु एवं वाक्पटु साहित्यकार भी बन सकते हैं, क्योंकि इनकी वाणी और रचना में भावनात्मक प्रवाह अधिक होता है। इनमें प्रवाह की मन्दता नहीं आ पाती, क्रमशः ये लोग जीवनोत्तरकाल में यशस्वी भी बन जाते हैं।।२।। मीन राशि की महिलाओं का लक्षण मीनः मीनलग्ने वा मीनदृक्स्थूलनासिका । कफवाताधिका जाता चर्मरोगसमन्विता ॥३॥ धनधर्मसुखैर्युक्ता सुशीला च सुभत्रिका । म्रियते रक्तदोषाद्वा गमनाद्विदोषघात् ॥४॥

मीन राशि (लग्न) की महिलाएँ तीखे नाक-नक्शेवाली, लघु और सुन्दर नेत्र, मछलियों की तरह अत्यन्त चंचल, अपने विरोधियों से चारो तरफ घिरी हुयी होने के बावजूद भी अपने सम्मान एवं प्राण की रक्षा करती हैं। ये महिलाएँ आसानी से किसी के चंगुल में नहीं फँसती, लेकिन हित-मित्र-रिश्तेदार और पास-पड़ोसियों के व्यवहार से अक्सर दुःखी रहती हैं। कफ-दोष एवं वायु-रोग से उत्पन्न अनेक तरह के रोग-व्याधियों से पीड़ित कभी चर्म-रोग तो कभी क्षय-रोग अर्थात् छुआछूत की बीमारियों से प्रभावित होती हैं, आर्थिक स्थिति सामान्य कह सकते हैं। अधिक धन-सम्पन्नता तो नहीं हो सकती, लेकिन इन्हें दरिद्रता का भी सामना नहीं करना पड़ता। धार्मिक मामलों में इनकी जातकाभरणोक्त चन्द्र- पानी की आवश्यकता पड़ती है। इनके अन्तिम जीवन में कई तरह के विकार-दुर्घटना अथवा विषैले पदार्थों का भय रहता है।।३-४॥ इ-निर्याणाध्याय के अनुसार- धनी मानी विनीतच भोगी संहृष्टमानसः । पितृमातृसुराचार्य गुरुभक्ति युतो नरः॥५॥ और युक्त नम्र एवं कुछ विलासी प्रवृत्ति के होते हैं। सदैव हँसमुख और प्रसन्न रहना एवं माता-पिता-देवता और गुरु के परम भक्त होते हैं। इनकी श्रद्धाभक्ति अन्य लोगों के बीच प्रशंसनीय होती है।।५।। उदारो रूपवाँछ्रेष्ठो गन्धमाल्यविभूषणः । पंचमेऽब्दे जलादीतिरष्टमे ज्वरपीड़नम् ।।६।। ऐसे जातक उदार, सहज और सुन्दर होते हैं। समाज में अच्छी मान- प्रतिष्ठा का श्रेष्ठ लाभ इन्हें मिलता है। सुवासित पदार्थ और आभूषण इन्हें विशेष प्रिय होता है। जन्म से ५ वर्ष की आयु तक जल से भय और आठ वर्ष की आयु में ज्वर से पीड़ा की प्रबल संभावना होती है।।६।। द्वाविंशे महती पीड़ा चतुर्विंशन्मितेऽब्दके । पूर्वाशागमनं वायुरब्दानां भवति स्मृताः ॥७॥ २२ वर्ष की आयु में अनेक प्रकार के कष्टों की संभावना होती है। २४ वर्ष की आयु में पूरब दिशा में यात्रा का संयोग बनता है। शास्त्र- वचनानुसार इनकी आयु अधिकतम ६० वर्ष का होने का उल्लेख है।।७।। आश्विनस्यासिते पक्षे द्वितीयायां गुरोर्दिने । कृतिकानामनक्षत्रे सायं मृत्युर्न संशयः ॥८॥ आश्विन का महीना, कृष्ण पक्ष, द्वितीया तिथि और गुरुवार दिन, कृत्तिका नक्षत्र में इनकी अन्तिम जीवन-यात्रा का योग बनता है। तदनुकूल पूर्णायु प्राप्त करते हैं।।८।। इतीरितं तु निर्याणं यावनाचार्यसंमतम् । मीनस्थ यामिनीनाथे भवेदत्र न संशयः ॥६॥

ऐसा यावनाचार्य ने मेषादि द्वादश राशियों के साथ-साथ तीन राशिगत चन्द्रमा के संदर्भ में भी अपनी सम्मति प्रदान की है।।६।। पाद-टिप्पणी- के रूप में यह कहना अनुचित न होगा कि इन मीन राशि के जातकों को बचपन में तीव्रज्वर, अम्लपित्त, एलर्जी, सुखण्डी, वमन, कमजोरी, दन्तरोगादि से बार-बार पीड़ा का भय एवं युवावस्था में शरीरांगगत झिनझिनी पड़ना, रक्ताल्पता, जीवाणुमेह, कब्जियत, मलेरिया विकार तथा वृद्धावस्था में विषभय, जलोदर, खाँसी-श्वाँसावरोध, अनिद्रा, पक्षाघात- -सन्धिवात का भय, आयु-आरोग्य के विकास में बाधाकारी होता है। सद्यः आयु- आरोग्य की पूर्णता के लिए भगवान् शंकर के सहित उनके पुत्र स्वामी कार्तिकेय की आराधना श्रेयस्कर होती है अथवा भगवान् शंकर के नित्य पूजन कल्याणकारी फल पाने के लिए सोमवार या पक्ष-प्रदोष के दिन शिवलिंग पर का से पुष्प-चन्दन-बिल्वपत्र, धूप-दीप चढ़ाकर भक्तिभाव से विजया (भाँग या ठंडई) अर्पण करते हुए ॐ नमः शिवाय का अष्टोत्तरशत जप करें। सभी देवताओं के जीवन-भविष्य-दर्पण १५१ प्राण प्रभु भगवान् शंकर हैं, प्रश्नोपषिद् में कहा गया है कि- "इन्द्रस्त्वं प्राणतेजसा रुद्रोऽसि परिरक्षिता। त्वमन्तरिक्ष-चरसि सूर्यस्त्वं अघोरेश्वर ज्योतिषां पतिः॥ अर्थात् देवप्राण आशुतोष की उत्पत्ति अपने तेज से हुई है, इसलिए वे स्वयंभू (शम्भू) कहे जाते हैं। सभी ज्योतिषों के अधीश्वर सूर्यस्वरूप ज्योतिर्लिङ्ग यही हैं। अन्तरिक्ष में विचरण करते हुए रुद्रस्वरूप धारण कर सबकी रक्षा करते है। अतएव शिव-पूजनोपरान्त इस मन्त्र का अष्टोत्तर शत जप करें- ॐ नमः शम्भवाय च मयोद्भवाय च नम: शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।" इस प्रकार विधिवत् (आस्थापूर्वक) प्रार्थना करनी चाहिए। ऐसे सुकृत्य विधानों के करते रहने से मीन राशिगत जातकों के अरिष्टादि योग निवृत्त हो जाते हैं। जन्म से ५-८-२२-२४ वर्ष की आयु में पूर्वोक्त श्लोकों के अन्तर्गत जो भयावह स्थिति का वर्णन किया है, उसका निवारण होने के बाद ही दीर्घायु स्वरूप ६० वर्ष की पूर्णायु (बड़े भाग्यशाली लोगों को) प्राप्त होती है। ऐसा देखा गया है कि इनकी आयु का ४२-४३, ५१-५२, ६०-६१,६९-७० और ७८-७६ वर्ष खतरे से खाली नहीं होता। संकटो के जो बादल मँडराते हैं, वे कुछ-न- कुछ अपने प्रभाव अवश्य छोड़ जाते हैं, इसीलिए बारम्बार विविध उपायों का परामर्श हम सर्वत्र देते आये हैं, जिनके द्वारा आस्थावान् भक्त-महानुभावों का कल्याण होना निश्चित है। जो भी उपाय सुरुचिकर लगे उसे ग्रहण कर लें और जो उपाय कठिन प्रतीत हों, उन्हें तिरस्कृत करने के बजाय अनुष्ठान-विशेषज्ञों से बखूबी समझने का प्रयत्न करें। और अब, ग्रहपीडोपशमनार्थ रत्नाभरणोक्त उपनार का परामर्श दिया जाता है- मीनेऽष्यामयजा दोषा दीर्घकालाद्धि कष्टदा । शरभेश्वरवर्मजपात् नरः शान्तिं समश्नुते ॥१०॥ मीन (लग्न राशि) के जातक जब कभी बीमार पड़ते हैं, या किसी तरह परेशान होते हैं तो अधिक काल तक दुःखी-चिन्तित और रोगाक्रान्त रहते हैं। एतदर्थ शरभेश्वर-जप (शरभ-कवच का पाठ-हवन) करना- कराना इनके लिए शान्तिप्रद होता है। दैनिक सुखशान्ति एवं सन्तुष्टि के लिए निम्नलिखित मन्त्र का १०८ बार (एक माला) जप प्रतिदिन आस्थापूर्वक करना चाहिए- निजी सम्पत्ति भी नष्ट हो सकती है। अनेक असाध्य रोगों और बीमारियों में आप फँस जायेंगे। पारिवारिक उलझनों का इंटकर सामना करना । जीवन-भविष्य-दर्पण ॐ क्लीं उद्धृताय उद्धारिणे नमः॥ निम्नलिखित मन्त्र को १२ बार उत्तारण करके एक अंजलि काली उड़द पीपल वृक्ष के समीप प्रतिदिन रखने से दृष्टिदोष, त्रोटक एवं शारीरिक कष्ट का निवारण होता है- ॐ माषदानं क्लेशहरं शरीरारोग्यवर्धनम् । अन्तःशुद्धिंकरा: माषा प्रीयताम्मे जनार्दनः ॥११॥ मीन राशि का स्वानुभूत जीवन-फल मीन राशि के प्रति महर्षिवाक्य- मीनोपदःस्त्री कफवारिरात्रि नि:शब्दवभुतिनुर्जलस्थाः। स्निग्धोऽतिसंगप्रसवोऽपि विप्रः शुभोत्तराशेट्विपमोदयश्च ।१२। जन्म से २६ वर्ष तक आप बहुत दुःखी, चिन्तित, परेशान और रोगी रहेंगे। स्वामी बृहस्पति, ब्राह्मण वर्ण, द्विस्वभावसंज्ञा, शीतल स्वभाव, कफ प्रकृति, गम्भीर एवं क्षुद्र विचारों से युक्त, अत्यन्त चतुर, दुश्मनों पर अपना प्रभाव जमानेवाले, कड़ी बोली, रूखा व्यवहार, क्रोधी, कंजूस, ज्ञानी-विद्वान्, गुणी, पारिवारिक कलह से चिढ़नेवाले, देवाराधना में तत्पर, भोग-विलास वृत्ति में तेज, राजनीति-विद्या में निपुण, सुन्दर और लक्ष्मी से युक्त व्यक्ति आप होंगे। उत्तराधिकार में सम्पत्ति मिलने तथा सट्टा-लाटरी से अचानक धन-प्राप्ति के अवसर मिलेंगे। स्वार्थ और लालच की भावना तेज रहेगी। शारीरिक कष्ट, मनोव्यथा, व्यग्रता, सिर में चोट, रक्तचाप की वृद्धि, सन्तान की चिन्ता तथा स्त्री-कलह से आपको हमेशा चिन्तित रहना पड़ेगा। आपकी पड़ी हुई कुछ बुरी आदत कभी-कभी प्राणलेवा कष्ट भी दे सकती है। १८ से २६ वर्ष की उम्र में विवाह होगा, पति-पत्नी में प्रायः खटपट और कलह बना रहेगा। खर्च की ताकत बढ़ जायेगी। चिन्ताओं के कारण अनेक प्रकार के शारीरिक रोग उत्पन्न होंगे। रुपये-पैसों की कमी महसूस होगी, मगर २७ से ४३ वर्ष तक का समय चारो ओर से धन-दौलत प्राप्त कराने वाला है। हर जगह आपकी इज्जत होगी, लोग वाहवाही करेंगे। निजी मकान जायदाद भी होगा, हर प्रकार की परेशानियाँ दूर हो जायेंगी। सतत प्रयत्न करने पर मन में सोचा हुआ प्रत्येक काम पूरा होगा। ४४ से ६० वर्ष तक का समय कष्टकारक है। होशियारी से काम लें, वरना बहुत बड़ी मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा। इन अवस्थाओं में आपकी कभी-कभी दु:खी रहना पड़ेगा। प्रतिवर्ष सितम्बर मास, प्रतिमास ३- - पड़ेगा। कर्ज का बोझ सर चढ़ेगा। ६१ वर्ष से ६६ वर्ष तक वृद्धावस्था का समय पुनः कुछ भाग्य को बढ़ाने वाला और तकदीर को चमकाने सहायता मिलेगी। पत्रकार या आचोलक के रूप में आप प्रशंसित हो आन्दोलनों में भाग लेना समाज की सलाहकारिता तथा नेतृत्व करना, स्वतन्त्र उद्योग तथा धन्धा संचालित करना, चतुर लोगों की अनुकूलता मार्गदर्याक होना आपके लिए सम्भव है। आपको एड़ी-पंजा, कान में रोग, स्मरण शक्ति हीनता, उदर सम्बन्धी व्याधि और मानसिक रोगों से जीवन-भविष्य-दर्पण वाला सिद्ध होगा। आमदनी भरसक अच्छी होगी, प्रत्येक कामों में विजय प्राप्त होगा। किसी मददगार की ओर से आपके व्यापार में ज्यादा सकते हैं, क्योंकि आपके लेख, भाषण और आलोचनाओं की कद्र करनेवालों की संख्या बहुतायत होती है। यह भी सम्भव है कि सट्टा- लाटरी या जुआ से अपार धन की प्राप्ति हो जाय। ६८ वर्ष की उम्र में मृत्यु के साधारण योग हैं, इससे बचने पर ७५ वर्ष ६ मास २३ दिन की उमर में जलोदर रोग से मृत्यु निश्चित है। मीन राशिवाली स्त्रियाँ प्रायः पुत्रवती, धर्मपरायण, घर-गृहस्थी के कार्य-संचालन में दक्ष, सुन्दर स्वभाव, मान-प्रतिष्ठा, धन-दौलत प्राप्त करनेवाली, मीठी वचन बोलने वाली, बुद्धिमान् और पति के पहले ही मरनेवाली होती हैं। इनका सौभाग्य अखण्ड होता है।।१२।। यदि आपकी मीनराशि है तो अपने जीवन में अकेले प्रगति नहीं कर सकते, आपको हमेशा एक वफादार सहयोगी की आवश्यकता पड़ेगी। सच मानिये, तो तलाश करने पर भी आपको वफादार सहयोगी नहीं मिल सकता। साधारणतः उभरा हुआ गौररक्त गेहुँआ वर्ण, उन्नत ललाट, उन्नत नासिका, सुन्दर शरीर, परधन या आकस्मिक धनप्राप्ति की जिज्ञासा, पत्नी के वशीभूत, पशु-पक्षियों से प्रेम, सुन्दर स्त्री, सुन्दर वस्त्र और मधुर भोजन के प्रेमी, बुद्धि-योग और विद्यायोग साधारण, सन्ततिसुख की लालसा और दिमागी हरकतों से लाचार रहना मीनराशि के लक्षण हैं। आपकी सहायता द्वारा अनेक प्राणियों की परवरिश होगी। आपके जीवन में पड़नेवाले विशेष शुभाशुभ परिणामों की जबाबदेही आपकी पत्नी पर है, यद्यपि पत्नी की बुद्धि अनुभवी और उनका सिद्धान्त आपके जीवन को अनोखा प्रकाश प्रदान कर सकता है, बशर्ते कि आप उसे हृदय से चाहें, मान्यता दें और उनका परामर्श ग्रहण करें। सार्वजनिक र्मिक रचनाओं का निर्माण तथा पास-पड़ोसियों का प्राप्त करना, ७-१२-१८-२८ तारीखें, शुक्रवार का दिन, मिथुन-तुला-कुम्भराशि वाले व्यक्ति और नीला-काला रंग के वस्त्रादि पदार्थ आपके लिए ठीक नहीं हैं। आपके स्वभाव में ब्राह्मणों जैसे कर्म की प्रधानता है और सही माने में आपका जीवन संघर्षपूर्ण, अनियमित एवं चलते-फिरते मुसाफिरों की तरह उलझनों से भरा हुआ है। आपकी कल्पनाशक्ति बड़ी प्रबल है, आपके मन में यह सहज जिज्ञासा बनी रहेगी कि अपने स्वतन्त्र जीवन की अगोचर एवं दुर्लभ वस्तुओं को हठात् हस्तगत कर लें। आपका परिवार एवं आपके भाई-बन्धु हमेशा खिलाफ रहेंगे। आप अपनी कुछ खास आदतोंवश कभी-कभी स्वयं बदनामी, बेकारी और परवशता का सेहरा अपने सर पर बाँध लेते हैं। आप कभी किसी बात की तह तक नहीं पहुंच पाते, स्वयं जान न-बूझकर भी हर मामले में अनजान बने रह जाते हैं। कभी किसी खास मकसद में पूरी सफलता नहीं पा सकेंगे, किन्तु आवश्यकता की हर चीज सुलभ होती रहेगी। जीविकोपार्जन की दृष्टि से आपका भविष्य सुखमय रहेगा। हमेशा कुछ-न-कुछ ऐसी परेशानियाँ आपके सामने उपस्थित होती रहेंगी-जिनकी वजह से आप अपनी ताकत-व्यक्तित्व-सुख और आनन्द का सही अनुभव नहीं कर पायेंगे। काफी भाग्यवान्, उज्ज्वल भविष्य, ज्यादा प्रफुल्ल चित, रसीला मिजाज, भोग-विलास की शक्ति प्रबल, वाणी की शक्ति उत्तम, विश्वासी और साहसी होते हुए भी आप में सदैव लकीर के फकीर बने रहने का व्यापक दोष होगा। मीन राशि वाले व्यक्ति ज्यादातर धर्म-शिक्षा, राजनीति और लेखन-प्रकाशन से सम्बन्धित नौकरी या व्यवसाय में सफल हो सकते हैं। अनेक प्रकार से धन-लाभ करनेवाले आप बहुधन्धी भी हो सकते हैं। कुछ नशीले पदार्थ का सेवन करने की आदत भी होनी चाहिए। अपने कर्मक्षेत्र में आप पूर्ण सफल रहेंगे। लालच-क्रोध और जल्दीबाजी आपकी विशेषताएँ हैं। स्त्रियों, साधु-महात्माओं तथा बड़े- बड़े उद्योगपतियों के बीच आपका उठना-बैठना होगा। आप पराक्रमी ज्यादा हैं, मगर आलस्य और अतिनिद्रा के कारण प्रायः अपना बना- बनाया काम स्वयं बिगाड़ लेते हैं। अपने परिवारवालों से आपको बहुत ज्यादा शिकायत रहेगी। गम्भीरता के साथ क्षुद्र विचारों से भी युक्त रहेंगे। दुश्मनों पर आपका जबरदस्त प्रभाव होगा। आपके विचारों का सर्वत्र स्वागत होगा। हेली-मेली जनों की प्रशंसा आपको प्राप्त होती रहेगी। मीनराशि के चिकित्सक अपने चिकित्सा-व्यवसाय में कठिनाई से सफलता पाते हैं। अत्यन्त चतुर, कड़ी बोली, रूखा व्यवहार, क्रोध- ज्यादा, पारिवारिक कलह से चिढ़, उत्तराधिकार में सम्पत्ति मिलने तथा - उत्तर दिशा से सम्बन्धित काम आपके लिए ज्यादातर सफलताप्रद सम्भावित रही है। आप अपने जीवन-कल्याणार्थ एवं आर्थिक तंगी दूर करना भी शुभ फलदायी होगा। अस्तु। जीवन-भविष्य-दर्पण महालाटरी से अचानक धन-प्राप्ति के अवसर भी प्राप्त होंगे। पूर्व और होगा। जन्म के प्रथम व दूसरे वर्ष में विचित्र प्रकार की कष्टप्रद घटना करने के लिए निम्नलिखित 'धनदा कवच' का नित्य पाठ करें- श्री देव्युवाच ॥ धनदाया महाविद्या कथिता न प्रकाशिता ॥ इदानीं श्रोतुमिच्छामि कवचं पूर्वसूचितं ।। १॥ श्री शिव उवाच॥ श्रृणु देवि प्रवक्ष्यामि कवचं मंत्रविग्रहं ।। सारात्सारतरं देवि कवचम्मन्मुखोदितम् ॥२॥ धनदा कवचस्यास्य कुबेर ऋषिरीरितः॥ पंक्तिश्छन्दोदेवता च धनदा सिद्धिदा सदा ॥३॥ धर्मार्थकाममोक्षेषु विनियोगः प्रकीर्तितः॥ धं बीजं मे शिरः पातु ह्रीं बीजं मे ललाटकं॥४॥ श्रीं बीजं मे मुखं पातु रकारं हृदि मेऽवतु। तिकारं पातु जठरं प्रिकारं पृष्ठतोऽवतु॥५॥ येकारं जंघयोर्युग्मे स्वाकारं पादयोर्युगे॥ शीर्षादिपादपर्यन्तं हाकारं सर्वतोऽवतु॥६॥ इत्येतत्कथितं कान्ते कवचं सर्वसिद्धिदं। गुरुमभ्यर्च्य विधिवत्कवचं प्रपठेद्यदि॥७॥ शतवर्ष सहस्राणि पूजायाः फलमाप्नुयात्॥ गुरुपूजां विना देवि नहि सिद्धिः प्रजायते॥८॥ गुरुपूजापरो भूत्वा कवचं प्रपठेत्ततः॥ सर्वसिद्धि-युतो भूत्वा विचारैभैरवो यथा॥६॥ प्रात:काले पठेद्यस्तु मन्त्रजापपुरःसरः॥ सोभीष्ट- फलमाप्नोति सत्यं-सत्यं न संशयः॥१०॥ पूजाकाले पठेद्यस्तु देवीं ध्यात्वा हृदाम्बुजै॥ षण्मासाभ्यन्तरे सिद्धिर्नात्र कार्या विचारणा ॥११॥ सायंकाले पठेद्यस्तु सशिवो नात्र संशयः॥ भूर्ये विलिख्य गुटिकां स्वर्णस्यां धारयेद्यदि॥१२॥ पुरुषो दक्षिणे बाहौ योषिद्वामभुजे तथा॥ सर्वसिद्धियुतो भूत्वा धनवान्पुत्रवान्भवेत्॥१३॥ इदं कवचमज्ञात्वा योजयेद्धनदां शुभे॥ सशस्त्रघातमाप्नोति सोऽचिरान्मृत्यु- माप्नुयात्॥ कवचेनावृतो नित्यं यत्र यत्रैव गच्छति॥ अतएव महादेवि संपूज्यो नात्र संशयः॥१५॥ समाप्तं कवचं देवि किमन्यच्छ्रोतुमिच्छसि॥ देवगुरु-बृहस्पति ही आपकी राशि के स्वामी हैं। विद्यार्जन, सांसारिक सुख एवं कार्यों पर बृहस्पति का विशेष अधिकार है। बृहस्पति की ही प्रसन्नता से आपका मनुष्य जीवन सुखी व समृद्ध बन सकता है। अपनी राशि के अधिपति बृहस्पति को सदैव प्रसन्न रखने के लिए विप्र वर्ण का पुखराज अथवा बगलामुखी श्रीहरिद्रा कवच धारण करना आवश्यक है। गुरुवार का व्रत, नारायण कवच अथवा विष्णुसहस्रनाम का नित्य पाठ

प्रतिकूलता हर वर्ष का सितंबर महीना।

विशेषताएं इसे अंग्रेजी में पाइसीज (Pisces) कहते हैं। मीन राशि उत्तर दिशा की स्वामिनी, उदार, चंचल एवं शांत, कफ प्रकृति की, वृद्ध, उजले रंग की, सत्वगुणी, जल तत्त्व की, ब्राह्मण जाति की स्त्री, शुभ कार्यों का प्रतिनिधित्व करनेवाली, रात्रिबली, द्विस्वभावी, जलचर, उभयोदय, समराशि है। मछलियों का जोड़ा, एक-दूसरे के विरुद्ध दिशा में मुंह बनाए, एक का चेहरा तो दूसरे की पूंछ गोल आकृति में रहती है। यह राशि नाना एवं मोक्ष का प्रतिनिधित्व करनेवाली है। इस राशि का निवास कोहाल देश एवं स्वामी बृहस्पति तथा अंक 3 7 है। शरीर में दोनों पैर, तलवे, पैरों की उंगलियों पर इस राशि का प्रभाव रहता है। सिनेमा, मनोरंजन विषयक सभी व्यवसाय, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक कार्य, लेखन, संशोधन एवं आध्यात्मिक कार्य का प्रतिनिधित्व इस राशि के पास है।

जलयात्रा, औषधि विज्ञान, रसायन विषय भी इसी राशि के आधिपत्य में रहते हैं। मछलियां, समुद्र से निर्मित वस्तुएं, जवाहरात, मोती, हीरा, गोरोचन, शराब, शयन गृह में अंतर्भूत उपकरण एवं वस्त्र इत्यादि का आधिपत्य मीन राशि के पास है। मेदिनीय ज्योतिषशास्त्र में मिस्र, सहारा, गेलेशिया, लंकास्टर, जंबूद्वीप आदि प्रांत प्रदेशों का प्रतिनिधित्व भी मीन राशि ही करती है। मीन राशि के व्यक्ति जितेन्द्रिय, जलप्रेमी, चतुर स्वभावी, दिन में कई बार नहाने की आदतवाले, कला, संगीत एवं अभिनय क्षेत्र में नाम कमानेवाले, खानपान एवं वस्त्र आवरणों के शौकीन, स्वच्छ एवं सुंदर शरीरधारी होते हैं। शिक्षा कम होती है किंतु अभ्यास से इस कमी को पूरा कर लेते हैं। हवाई जहाज की यात्रा के शौकीन होते हैं। मित्रों के साथ शत्रुओं की भी बड़ी संख्या होती है। आर्थिक स्थिति साधारण रहती है। मीन राशि की महिलाएं सुंदर, चंचल, शत्रुओं से घिरी हुई, किसी के भी वश में न आनेवाली होती हैं। जातकाभरण के अनुसार अधिकांश मीन राशि व्यक्ति प्रभावी, प्रतापी एवं प्रतिष्ठित होते हैं। अर्थाभाव नहीं रहता। स्वभाव से मृदु, कुछ हद तक विलासी होते हैं। सदा हंसमुख एवं प्रसन्न रहनेवाले किंतु माता-पिता का अनादर करनेवाले, सुगंधित पदार्थ एवं सुंदर आभूषणों से लगाव रखनेवाले होते हैं। जन्म से 5वें वर्ष तक पानी से खतरा रहता है। आठवें वर्ष में कष्ट होता है। 22वें वर्ष में अनेक कष्ट सहने होते हैं। आयु 90 वर्ष तक की रहती है। अनुभवसिद्ध फलित मीन राशि के व्यक्ति चतुर, मृदुभाषी, गुणवान, भोगविलासी, राजनीति के मर्मज्ञ, पैतृक संपत्ति एवं सट्टा लाटरी से धन प्राप्ति करनेवाले, स्वार्थी, लोभी रहते हैं। स्त्री कलह से दुखी एवं संतान के लिए चिंताग्रस्त रहते हैं। इनके मित्र अधिक रहते हैं। स्कूल कॉलेज के अध्यापक, वकील, जज, लेखक, प्रकाशक, इनकमटैक्स सेल्सटैक्स सलाहकार में से किसी महकमे में नौकरी करनेवाले, ज्योतिष, तकनीकी क्षेत्र, सर्जन, फार्मेसी संचालन आदि क्षेत्रों में अग्रणी रहते हैं।

हर महीने की 3,7,13,18,28 तारीखें। शुक्रवार। नीला-काला रंग, इन रंगों के कपड़े तथा अन्य चीजें। मिथुन, तुला एवं कुंभ राशि के स्त्री-पुरुष। जीवन की महत्त्वपूर्ण घटनाएं जन्म से 26वें वर्ष तक दुखी, त्रस्त एवं रोगी रहते हैं। 18 से 26 वर्ष की समयावधि में विवाह होता है। 27 से 43 वर्ष की कालावधि में सर्वत्र प्रगति होती है। अर्थलाभ के साथ मकान भी बनता है। 44 से 60 वर्ष तक का समय अनेक दृष्टियों से बुरा सिद्ध होता है। 61 से 70 वर्षों सट्टा लॉटरी से धन लाभ, व्यावसायिक प्रगति, प्रसिद्धि मिलती है। विशेष उपासना बीमारियां, योगक्षेम में आनेवाली कठिनाइयों से उत्पन्न अनिष्ट स्थिति को बदलने के लिए निम्नलिखित मंत्र का 108 बार जाप करें: ॐ क्लीं उद्धृताय उद्धारिणे नमः। निम्नलिखित मंत्र भी बारह बार बोलें: ॐ माषदानं क्लेशहरं शरीरारोग्यवर्धनम्। अन्तः शुद्धिकरा: माया प्रियतारूपे जनार्दनः।।

C मीन (12) राशियों में यह अतिम राशि है। इसका निर्देशांक 12है। पर्वाभाद्रपद नक्षत्र का चौथा चरण, उत्तरा भाद्रपदा नक्षत्र के चारों चरण एवं लिनी नक्षत्र के चार चरण मिलने पर यह राशि बनती है। नीचे सारिणी में चंद्र के अंश, नक्षत्र, चरण, राशि स्वामी, नक्षत्र स्वामी, योनि, नाड़ी एवं नामाक्षर की जानकारी दी गई है। चंद्र के अंश नक्षत्र चरण | नामाक्षर | राशि नक्षत्र योनि नाड़ी गण अशकला से | स्वामी स्वामी अशकला lo0.00 से 3.20 पूर्वा बृहस्पति बृहस्पति सिंह आद्य भाद्रपद 12.20 से 16.40 | उत्तरा | 1 से 4 | दू,,,| बृहस्पति | शनि गो मध्य मनुष्य भाद्रपद | 16.40 से 30.00 | रेवती 1 से 4 | दे, दो,चा,ची बृहस्पति | बुध गज अन्त्य देव इस राशि की आकृति मछलियों की जोड़े जैसी है। पृथ्वी के क्रांति अंशों पर आधारित विषुवत रेखा से दक्षिण की ओर 12 से 0 अंशों तक इस राशि का प्रभाव माना गया है। विशेषताएं इसे अंग्रेजी में पाइसीज (Pisces) कहते हैं। मीन राशि उत्तर दिशा की स्वामिनी, नदी, समुद्र अथवा जलाशय एवं पवित्र स्थानों में विचरण करनेवाली, सौम्य, उदार, चंचल एवं शांत, कफ प्रकृति की, वृद्ध, उजले रंग की, सत्वगुणी, जल तत्त्व की, ब्राह्मण जाति की स्त्री. शभ कार्यों का प्रतिनिधित्व करनेवाली, रात्रिबली, द्विस्वभावी, जलचर, उभयोदय, समराशि है। मछलियों का जोड़ा, एक-दूसरे के विरुद्ध दिशा में मुंह बनाए, एक का चेहरा तो दूसरे की पूंछ गोल आकृति में रहती है। यह राशि नाना एवं मोक्ष का प्रतिनिधित्व करनेवाली है। इस राशि का निवास कोहाल देश एवं स्वामी बहस्पति तथा अंक 3 7 है। शरीर में दोनों पैर, तलवे, पैरों की उंगलियों पर इस राशि का प्रभाव रहता है। सिनेमा, मनोरंजन विषयक सभी व्यवसाय, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक कार्य, लेखन, संशोधन एवं आध्यात्मिक कार्य का प्रतिनिधित्व इस राशि के पास है। जलयात्रा, औषधि विज्ञान, रसायन विषय भी इसी राशि को आधिपत्य में रहते है। मछलियां, समुह से निर्मित वस्तुएं, जवाहरात, मोती, हीरा, गोरोपन शयन गृह में अंतर्भूत उपकरण एवं वस हत्यादि का आधिपाय मीन राशियों मेदिनीय ज्योतिषशास्त्र में मिस, सहारा, गेलेशिया, लंकास्तर, अनदीप । प्रात प्रदेशों का प्रतिनिधित्व भी मीन राशि ही करती है। नोटः पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में जन्मे जातकों के लक्षण, व्याधियों एवं व्यापित मुक्ति पाने के उपाय को जानकारी कुभ परिच्छेद में देखें। जातकों का भविष्य मीन राशि के व्यक्ति जितेन्द्रिय, जलप्रेमी, चतुर स्वभावी, दिन में कांमा नहाने की आदतवाले, कला, संगीत एवं अभिनय क्षेत्र में नाम कमानेवाले, खानपान एवं वस्त्र आवरणों के शौकीन, स्वच्छ एवं सुंदर शरीरधारी होते हैं। शिक्षा का होती है किंतु अभ्यास से इस कमी को पूरा कर लेते हैं। हवाई जहाज की यात्रा शोकीन होते हैं। मित्रों के साथ शत्रुओं की भी बड़ी संख्या होती है। आर्थिक स्थिति साधारण रहती है। मीन राशि की महिलाएं सुंदर, चंचल, शत्रुओं से घिरी हुई, किसी के भी वश में न आनेवाली होती हैं। जातकाभरण के अनुसार अधिकांश मीन राशि व्यक्ति प्रभावी, प्रतापी एवं प्रतिष्ठित होते हैं। अर्थाभाव नहीं रहता। स्वभाव से मृदु, कुछ हद तक विलासी होते हैं। सदा हंसमुख एवं प्रसन्न रहनेवाले किंतु माता-पिता का अनादर करनेवाले, सुगंधित पदार्थ एवं सुंदर आभूषणों । से लगाव रखनेवाले होते हैं। जन्म से 5वें वर्ष तक पानी से खतरा रहता है। आठवें वर्ष में कष्ट होता है। 22वं वर्ष में अनेक कष्ट सहने होते हैं। आयु 90 वर्ष तक की रहती है। अनुभवसिद्ध फलित मीन राशि के व्यक्ति चतुर, मृदुभाषी, गुणवान, भोगविलासी, राजनीति के मर्मज्ञ, पैतृक संपत्ति एवं सट्टा लाटरी से धन प्राप्ति करनेवाले, स्वार्थी, लोभी रहते । हैं। स्त्री कलह से दुखी एवं संतान के लिए चिंताग्रस्त रहते हैं। इनके मित्र अधिक रहते हैं। स्कूल कॉलेज के अध्यापक, वकील, जज, लेखक, प्रकाशक, इनकमटेक्स सल्सटैक्स सलाहकार में से किसी महकमे में नौकरी करनेवाले, ज्योतिष, तकनाका क्षेत्र, सर्जन, फार्मेसी संचालन आदि क्षेत्रों में अग्रणी रहते हैं। प्रतिकूलताहर वर्ष का सितंबर महीना। हर महीने की 3,7,13,18,28 तारीखें।शुक्रवार।नीला-काला रंग, इन रंगों के कपड़े तथा अन्य चीजें।मिथुन, तुला एवं कुंभ राशि के स्त्री-पुरुष। जीवन की महत्त्वपूर्ण घटनाएं जन्म से 26वें वर्ष तक दुखी, त्रस्त एवं रोगी रहते हैं। 18 से 26 वर्ष की समयावधि में विवाह होता है। 27 से 43 वर्ष की कालावधि में सर्वत्र प्रगति होती है। अर्थलाभ के साथ मकान भी बनता है। 44 से 60 वर्ष तक का समय अनेक दृष्टियों से बुरा सिद्ध होता है। 61 से 70 वर्षों सट्टा लॉटरी से धन लाभ, व्यावसायिक प्रगति,प्रसिद्धि मिलती है। नम्र एवं कुछ विलासी प्रवृत्ति के होते हैं। सदैव हँसमुख और प्रसन्न रहना एवं माता-पिता-देवता और गुरु के परम भक्त होते हैं। इनकी श्रद्धाभक्ति अन्य लोगों के बीच प्रशंसनीय होती है।।५।। उदारो रूपवाँछ्रेष्ठो गन्धमाल्यविभूषणः । पंचमेऽब्दे जलादीतिरष्टमे ज्वरपीड़नम् ।।६।। ऐसे जातक उदार, सहज और सुन्दर होते हैं। समाज में अच्छी मान- प्रतिष्ठा का श्रेष्ठ लाभ इन्हें मिलता है। सुवासित पदार्थ और आभूषण इन्हें विशेष प्रिय होता है। जन्म से ५ वर्ष की आयु तक जल से भय और आठ वर्ष की आयु में ज्वर से पीड़ा की प्रबल संभावना होती है।।६।। द्वाविंशे महती पीड़ा चतुर्विंशन्मितेऽब्दके । पूर्वाशागमनं वायुरब्दानां भवति स्मृताः ॥७॥ २२ वर्ष की आयु में अनेक प्रकार के कष्टों की संभावना होती है। २४ वर्ष की आयु में पूरब दिशा में यात्रा का संयोग बनता है। शास्त्र- वचनानुसार इनकी आयु अधिकतम ६० वर्ष का होने का उल्लेख है।।७।। आश्विनस्यासिते पक्षे द्वितीयायां गुरोर्दिने । कृतिकानामनक्षत्रे सायं मृत्युर्न संशयः ॥८॥ आश्विन का महीना, कृष्ण पक्ष, द्वितीया तिथि और गुरुवार दिन, कृत्तिका नक्षत्र में इनकी अन्तिम जीवन-यात्रा का योग बनता है। तदनुकूल पूर्णायु प्राप्त करते हैं।।८।। इतीरितं तु निर्याणं यावनाचार्यसंमतम् । मीनस्थ यामिनीनाथे भवेदत्र न संशयः ॥६॥ ऐसा यावनाचार्य ने मेषादि द्वादश राशियों के साथ-साथ तीन राशिगत चन्द्रमा के संदर्भ में भी अपनी सम्मति प्रदान की है।।६।। पाद-टिप्पणी- के रूप में यह कहना अनुचित न होगा कि इन मीन राशि के जातकों को बचपन में तीव्रज्वर, अम्लपित्त, एलर्जी, सुखण्डी, वमन, कमजोरी, दन्तरोगादि से बार-बार पीड़ा का भय एवं युवावस्था में शरीरांगगत झिनझिनी पड़ना, रक्ताल्पता, जीवाणुमेह, कब्जियत, मलेरिया विकार तथा वृद्धावस्था में विषभय, जलोदर, खाँसी-श्वाँसावरोध, अनिद्रा, पक्षाघात- -सन्धिवात का भय, आयु-आरोग्य के विकास में बाधाकारी होता है। सद्यः आयु- आरोग्य की पूर्णता के लिए भगवान् शंकर के सहित उनके पुत्र स्वामी कार्तिकेय की आराधना श्रेयस्कर होती है अथवा भगवान् शंकर के नित्य पूजन कल्याणकारी फल पाने के लिए सोमवार या पक्ष-प्रदोष के दिन शिवलिंग पर का से पुष्प-चन्दन-बिल्वपत्र, धूप-दीप चढ़ाकर भक्तिभाव से विजया (भाँग या ठंडई) अर्पण करते हुए ॐ नमः शिवाय का अष्टोत्तरशत जप करें। सभी देवताओं के जीवन-भविष्य-दर्पण १५१ प्राण प्रभु भगवान् शंकर हैं, प्रश्नोपषिद् में कहा गया है कि- "इन्द्रस्त्वं प्राणतेजसा रुद्रोऽसि परिरक्षिता। त्वमन्तरिक्ष-चरसि सूर्यस्त्वं अघोरेश्वर ज्योतिषां पतिः॥ अर्थात् देवप्राण आशुतोष की उत्पत्ति अपने तेज से हुई है, इसलिए वे स्वयंभू (शम्भू) कहे जाते हैं। सभी ज्योतिषों के अधीश्वर सूर्यस्वरूप ज्योतिर्लिङ्ग यही हैं। अन्तरिक्ष में विचरण करते हुए रुद्रस्वरूप धारण कर सबकी रक्षा करते है। अतएव शिव-पूजनोपरान्त इस मन्त्र का अष्टोत्तर शत जप करें- ॐ नमः शम्भवाय च मयोद्भवाय च नम: शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।" इस प्रकार विधिवत् (आस्थापूर्वक) प्रार्थना करनी चाहिए। ऐसे सुकृत्य विधानों के करते रहने से मीन राशिगत जातकों के अरिष्टादि योग निवृत्त हो जाते हैं। जन्म से ५-८-२२-२४ वर्ष की आयु में पूर्वोक्त श्लोकों के अन्तर्गत जो भयावह स्थिति का वर्णन किया है, उसका निवारण होने के बाद ही दीर्घायु स्वरूप ६० वर्ष की पूर्णायु (बड़े भाग्यशाली लोगों को) प्राप्त होती है। ऐसा देखा गया है कि इनकी आयु का ४२-४३, ५१-५२, ६०-६१,६९-७० और ७८-७६ वर्ष खतरे से खाली नहीं होता। संकटो के जो बादल मँडराते हैं, वे कुछ-न- कुछ अपने प्रभाव अवश्य छोड़ जाते हैं, इसीलिए बारम्बार विविध उपायों का परामर्श हम सर्वत्र देते आये हैं, जिनके द्वारा आस्थावान् भक्त-महानुभावों का कल्याण होना निश्चित है। जो भी उपाय सुरुचिकर लगे उसे ग्रहण कर लें और जो उपाय कठिन प्रतीत हों, उन्हें तिरस्कृत करने के बजाय अनुष्ठान-विशेषज्ञों से बखूबी समझने का प्रयत्न करें। और अब, ग्रहपीडोपशमनार्थ रत्नाभरणोक्त उपनार का परामर्श दिया जाता है- मीनेऽष्यामयजा दोषा दीर्घकालाद्धि कष्टदा । शरभेश्वरवर्मजपात् नरः शान्तिं समश्नुते ॥१०॥ मीन (लग्न राशि) के जातक जब कभी बीमार पड़ते हैं, या किसी तरह परेशान होते हैं तो अधिक काल तक दुःखी-चिन्तित और रोगाक्रान्त रहते हैं। एतदर्थ शरभेश्वर-जप (शरभ-कवच का पाठ-हवन) करना- कराना इनके लिए शान्तिप्रद होता है। दैनिक सुखशान्ति एवं सन्तुष्टि के लिए निम्नलिखित मन्त्र का १०८ बार (एक माला) जप प्रतिदिन आस्थापूर्वक करना चाहिए-निजी सम्पत्ति भी नष्ट हो सकती है। अनेक असाध्य रोगों और बीमारियों में आप फँस जायेंगे। पारिवारिक उलझनों का इंटकर सामना करना । जीवन-भविष्य-दर्पण ॐ क्लीं उद्धृताय उद्धारिणे नमः॥ निम्नलिखित मन्त्र को १२ बार उत्तारण करके एक अंजलि काली उड़द पीपल वृक्ष के समीप प्रतिदिन रखने से दृष्टिदोष, त्रोटक एवं शारीरिक कष्ट का निवारण होता है- ॐ माषदानं क्लेशहरं शरीरारोग्यवर्धनम् । अन्तःशुद्धिंकरा: माषा प्रीयताम्मे जनार्दनः ॥११॥ मीन राशि का स्वानुभूत जीवन-फल मीन राशि के प्रति महर्षिवाक्य- मीनोपदःस्त्री कफवारिरात्रि नि:शब्दवभुतिनुर्जलस्थाः। स्निग्धोऽतिसंगप्रसवोऽपि विप्रः शुभोत्तराशेट्विपमोदयश्च ।१२। जन्म से २६ वर्ष तक आप बहुत दुःखी, चिन्तित, परेशान और रोगी रहेंगे। स्वामी बृहस्पति, ब्राह्मण वर्ण, द्विस्वभावसंज्ञा, शीतल स्वभाव, कफ प्रकृति, गम्भीर एवं क्षुद्र विचारों से युक्त, अत्यन्त चतुर, दुश्मनों पर अपना प्रभाव जमानेवाले, कड़ी बोली, रूखा व्यवहार, क्रोधी, कंजूस, ज्ञानी-विद्वान्, गुणी, पारिवारिक कलह से चिढ़नेवाले, देवाराधना में तत्पर, भोग-विलास वृत्ति में तेज, राजनीति-विद्या में निपुण, सुन्दर और लक्ष्मी से युक्त व्यक्ति आप होंगे। उत्तराधिकार में सम्पत्ति मिलने तथा सट्टा-लाटरी से अचानक धन-प्राप्ति के अवसर मिलेंगे। स्वार्थ और लालच की भावना तेज रहेगी। शारीरिक कष्ट, मनोव्यथा, व्यग्रता, सिर में चोट, रक्तचाप की वृद्धि, सन्तान की चिन्ता तथा स्त्री-कलह से आपको हमेशा चिन्तित रहना पड़ेगा। आपकी पड़ी हुई कुछ बुरी आदत कभी-कभी प्राणलेवा कष्ट भी दे सकती है। १८ से २६ वर्ष की उम्र में विवाह होगा, पति-पत्नी में प्रायः खटपट और कलह बना रहेगा। खर्च की ताकत बढ़ जायेगी। चिन्ताओं के कारण अनेक प्रकार के शारीरिक रोग उत्पन्न होंगे। रुपये-पैसों की कमी महसूस होगी, मगर २७ से ४३ वर्ष तक का समय चारो ओर से धन-दौलत प्राप्त कराने वाला है। हर जगह आपकी इज्जत होगी, लोग वाहवाही करेंगे। निजी मकान जायदाद भी होगा, हर प्रकार की परेशानियाँ दूर हो जायेंगी। सतत प्रयत्न करने पर मन में सोचा हुआ प्रत्येक काम पूरा होगा। ४४ से ६० वर्ष तक का समय कष्टकारक है। होशियारी से काम लें, वरना बहुत बड़ी मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा। इन अवस्थाओं में आपकी  कभी-कभी दु:खी रहना पड़ेगा। प्रतिवर्ष सितम्बर मास, प्रतिमास ३- - पड़ेगा। कर्ज का बोझ सर चढ़ेगा। ६१ वर्ष से ६६ वर्ष तक वृद्धावस्था का समय पुनः कुछ भाग्य को बढ़ाने वाला और तकदीर को चमकाने सहायता मिलेगी। पत्रकार या आचोलक के रूप में आप प्रशंसित हो आन्दोलनों में भाग लेना समाज की सलाहकारिता तथा नेतृत्व करना, स्वतन्त्र उद्योग तथा धन्धा संचालित करना, चतुर लोगों की अनुकूलता मार्गदर्याक होना आपके लिए सम्भव है। आपको एड़ी-पंजा, कान में रोग, स्मरण शक्ति हीनता, उदर सम्बन्धी व्याधि और मानसिक रोगों से जीवन-भविष्य-दर्पण वाला सिद्ध होगा। आमदनी भरसक अच्छी होगी, प्रत्येक कामों में विजय प्राप्त होगा। किसी मददगार की ओर से आपके व्यापार में ज्यादा सकते हैं, क्योंकि आपके लेख, भाषण और आलोचनाओं की कद्र करनेवालों की संख्या बहुतायत होती है। यह भी सम्भव है कि सट्टा- लाटरी या जुआ से अपार धन की प्राप्ति हो जाय। ६८ वर्ष की उम्र में मृत्यु के साधारण योग हैं, इससे बचने पर ७५ वर्ष ६ मास २३ दिन की उमर में जलोदर रोग से मृत्यु निश्चित है। मीन राशिवाली स्त्रियाँ प्रायः पुत्रवती, धर्मपरायण, घर-गृहस्थी के कार्य-संचालन में दक्ष, सुन्दर स्वभाव, मान-प्रतिष्ठा, धन-दौलत प्राप्त करनेवाली, मीठी वचन बोलने वाली, बुद्धिमान् और पति के पहले ही मरनेवाली होती हैं। इनका सौभाग्य अखण्ड होता है।।१२।। यदि आपकी मीनराशि है तो अपने जीवन में अकेले प्रगति नहीं कर सकते, आपको हमेशा एक वफादार सहयोगी की आवश्यकता पड़ेगी। सच मानिये, तो तलाश करने पर भी आपको वफादार सहयोगी नहीं मिल सकता। साधारणतः उभरा हुआ गौररक्त गेहुँआ वर्ण, उन्नत ललाट, उन्नत नासिका, सुन्दर शरीर, परधन या आकस्मिक धनप्राप्ति की जिज्ञासा, पत्नी के वशीभूत, पशु-पक्षियों से प्रेम, सुन्दर स्त्री, सुन्दर वस्त्र और मधुर भोजन के प्रेमी, बुद्धि-योग और विद्यायोग साधारण, सन्ततिसुख की लालसा और दिमागी हरकतों से लाचार रहना मीनराशि के लक्षण हैं। आपकी सहायता द्वारा अनेक प्राणियों की परवरिश होगी। आपके जीवन में पड़नेवाले विशेष शुभाशुभ परिणामों की जबाबदेही आपकी पत्नी पर है, यद्यपि पत्नी की बुद्धि अनुभवी और उनका सिद्धान्त आपके जीवन को अनोखा प्रकाश प्रदान कर सकता है, बशर्ते कि आप उसे हृदय से चाहें, मान्यता दें और उनका परामर्श ग्रहण करें। सार्वजनिक र्मिक रचनाओं का निर्माण तथा पास-पड़ोसियों का प्राप्त करना, ७-१२-१८-२८ तारीखें, शुक्रवार का दिन, मिथुन-तुला-कुम्भराशि वाले व्यक्ति और नीला-काला रंग के वस्त्रादि पदार्थ आपके लिए ठीक नहीं हैं। आपके स्वभाव में ब्राह्मणों जैसे कर्म की प्रधानता है और सही माने में आपका जीवन संघर्षपूर्ण, अनियमित एवं चलते-फिरते मुसाफिरों की तरह उलझनों से भरा हुआ है। आपकी कल्पनाशक्ति बड़ी प्रबल है, आपके मन में यह सहज जिज्ञासा बनी रहेगी कि अपने स्वतन्त्र जीवन की अगोचर एवं दुर्लभ वस्तुओं को हठात् हस्तगत कर लें। आपका परिवार एवं आपके भाई-बन्धु हमेशा खिलाफ रहेंगे। आप अपनी कुछ खास आदतोंवश कभी-कभी स्वयं बदनामी, बेकारी और परवशता का सेहरा अपने सर पर बाँध लेते हैं। आप कभी किसी बात की तह तक नहीं पहुंच पाते, स्वयं जान न-बूझकर भी हर मामले में अनजान बने रह जाते हैं। कभी किसी खास मकसद में पूरी सफलता नहीं पा सकेंगे, किन्तु आवश्यकता की हर चीज सुलभ होती रहेगी। जीविकोपार्जन की दृष्टि से आपका भविष्य सुखमय रहेगा। हमेशा कुछ-न-कुछ ऐसी परेशानियाँ आपके सामने उपस्थित होती रहेंगी-जिनकी वजह से आप अपनी ताकत-व्यक्तित्व-सुख और आनन्द का सही अनुभव नहीं कर पायेंगे। काफी भाग्यवान्, उज्ज्वल भविष्य, ज्यादा प्रफुल्ल चित, रसीला मिजाज, भोग-विलास की शक्ति प्रबल, वाणी की शक्ति उत्तम, विश्वासी और साहसी होते हुए भी आप में सदैव लकीर के फकीर बने रहने का व्यापक दोष होगा। मीन राशि वाले व्यक्ति ज्यादातर धर्म-शिक्षा, राजनीति और लेखन-प्रकाशन से सम्बन्धित नौकरी या व्यवसाय में सफल हो सकते हैं। अनेक प्रकार से धन-लाभ करनेवाले आप बहुधन्धी भी हो सकते हैं। कुछ नशीले पदार्थ का सेवन करने की आदत भी होनी चाहिए। अपने कर्मक्षेत्र में आप पूर्ण सफल रहेंगे। लालच-क्रोध और जल्दीबाजी आपकी विशेषताएँ हैं। स्त्रियों, साधु-महात्माओं तथा बड़े- बड़े उद्योगपतियों के बीच आपका उठना-बैठना होगा। आप पराक्रमी ज्यादा हैं, मगर आलस्य और अतिनिद्रा के कारण प्रायः अपना बना- बनाया काम स्वयं बिगाड़ लेते हैं। अपने परिवारवालों से आपको बहुत ज्यादा शिकायत रहेगी। गम्भीरता के साथ क्षुद्र विचारों से भी युक्त रहेंगे। दुश्मनों पर आपका जबरदस्त प्रभाव होगा। आपके विचारों का सर्वत्र स्वागत होगा। हेली-मेली जनों की प्रशंसा आपको प्राप्त होती रहेगी। मीनराशि के चिकित्सक अपने चिकित्सा-व्यवसाय में कठिनाई से सफलता पाते हैं। अत्यन्त चतुर, कड़ी बोली, रूखा व्यवहार, क्रोध- ज्यादा, पारिवारिक कलह से चिढ़, उत्तराधिकार में सम्पत्ति मिलने तथा - (अट्ठाइस नक्षत्र एवंद्वादशराशि का जीवनफल समाप्त) १५५ TV उत्तर दिशा से सम्बन्धित काम आपके लिए ज्यादातर सफलताप्रद सम्भावित रही है। आप अपने जीवन-कल्याणार्थ एवं आर्थिक तंगी दूर करना भी शुभ फलदायी होगा। अस्तु। जीवन-भविष्य-दर्पण महालाटरी से अचानक धन-प्राप्ति के अवसर भी प्राप्त होंगे। पूर्व और होगा। जन्म के प्रथम व दूसरे वर्ष में विचित्र प्रकार की कष्टप्रद घटना करने के लिए निम्नलिखित 'धनदा कवच' का नित्य पाठ करें- श्री देव्युवाच ॥ धनदाया महाविद्या कथिता न प्रकाशिता ॥ इदानीं श्रोतुमिच्छामि कवचं पूर्वसूचितं ।। १॥ श्री शिव उवाच॥ श्रृणु देवि प्रवक्ष्यामि कवचं मंत्रविग्रहं ।। सारात्सारतरं देवि कवचम्मन्मुखोदितम् ॥२॥ धनदा कवचस्यास्य कुबेर ऋषिरीरितः॥ पंक्तिश्छन्दोदेवता च धनदा सिद्धिदा सदा ॥३॥ धर्मार्थकाममोक्षेषु विनियोगः प्रकीर्तितः॥ धं बीजं मे शिरः पातु ह्रीं बीजं मे ललाटकं॥४॥ श्रीं बीजं मे मुखं पातु रकारं हृदि मेऽवतु। तिकारं पातु जठरं प्रिकारं पृष्ठतोऽवतु॥५॥ येकारं जंघयोर्युग्मे स्वाकारं पादयोर्युगे॥ शीर्षादिपादपर्यन्तं हाकारं सर्वतोऽवतु॥६॥ इत्येतत्कथितं कान्ते कवचं सर्वसिद्धिदं। गुरुमभ्यर्च्य विधिवत्कवचं प्रपठेद्यदि॥७॥ शतवर्ष सहस्राणि पूजायाः फलमाप्नुयात्॥ गुरुपूजां विना देवि नहि सिद्धिः प्रजायते॥८॥ गुरुपूजापरो भूत्वा कवचं प्रपठेत्ततः॥ सर्वसिद्धि-युतो भूत्वा विचारैभैरवो यथा॥६॥ प्रात:काले पठेद्यस्तु मन्त्रजापपुरःसरः॥ सोभीष्ट- फलमाप्नोति सत्यं-सत्यं न संशयः॥१०॥ पूजाकाले पठेद्यस्तु देवीं ध्यात्वा हृदाम्बुजै॥ षण्मासाभ्यन्तरे सिद्धिर्नात्र कार्या विचारणा ॥११॥ सायंकाले पठेद्यस्तु सशिवो नात्र संशयः॥ भूर्ये विलिख्य गुटिकां स्वर्णस्यां धारयेद्यदि॥१२॥ पुरुषो दक्षिणे बाहौ योषिद्वामभुजे तथा॥ सर्वसिद्धियुतो भूत्वा धनवान्पुत्रवान्भवेत्॥१३॥ इदं कवचमज्ञात्वा योजयेद्धनदां शुभे॥ सशस्त्रघातमाप्नोति सोऽचिरान्मृत्यु- माप्नुयात्॥ कवचेनावृतो नित्यं यत्र यत्रैव गच्छति॥ अतएव महादेवि संपूज्यो नात्र संशयः॥१५॥ समाप्तं कवचं देवि किमन्यच्छ्रोतुमिच्छसि॥ देवगुरु-बृहस्पति ही आपकी राशि के स्वामी हैं। विद्यार्जन, सांसारिक सुख एवं कार्यों पर बृहस्पति का विशेष अधिकार है। बृहस्पति की ही प्रसन्नता से आपका मनुष्य जीवन सुखी व समृद्ध बन सकता है। अपनी राशि के अधिपति बृहस्पति को सदैव प्रसन्न रखने के लिए विप्र वर्ण का पुखराज अथवा बगलामुखी श्रीहरिद्रा कवच धारण करना आवश्यक है। गुरुवार का व्रत, नारायण कवच अथवा विष्णुसहस्रनाम का नित्य पाठ सी + 7

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