मिथुन राशि का सम्पूर्ण विवेचन
मिथुन राशि का सम्पूर्ण विवेचन
★★★★मिथुन राशि★★★★
जन्मकुंडली में चन्द्रमा मिथुन राशि में हो, यानी जातक के जन्म के समय चन्द्रमा भचक्र के तीसरे खण्ड (60-90) में हो तो जातक मिथुन राशि का होता है। पाश्चात्य ज्योतिष के अनुसार जातकों का जन्म 21 मई से 21 जून हुआ हो तो उनकी राशि मिथुन राशि होती है)। इस राशि का राशीश बुध है।
एकमात्र मिथुन राशि ही है जिसे दोहरी आकृति के प्रतीक से दर्शाया गया है (दो बच्चे या एक स्त्री व पुरुष का युगल)। अतः कहा जा सकता है कि मिथुन राशि के जातक एक शरीर दो आत्माओं वाले होते हैं। यानी लम्बे समय तक एक ही विचारधारा को अपनाए नहीं रहते या ये प्रायः सूक्ष्म स्तर पर आत्म विरोधी/अन्तर्द्वन्द्व उत्पन्न करने वाली दो विचारधाराओं में एकसाथ जीते हैं। इनका जीवन निश्चितता से पूर्ण नहीं होता। इनके दिमाग में नई-नई योजनाएं जन्म लेती रहती हैं। ये लोग एक समय में एक से अधिक कार्य करने में निपुण, चतुर होते हैं और वाक्पटु भी होते हैं। ये आकर्षक व्यक्तित्व वाले होते हैं। विपरीत लिंगी को अपनी ओर सहज ही आकर्षित कर लेने वाले होते हैं।
मिथुन राशि के जातक अस्थिर स्वभाव के, चंचल व परिवर्तन पसंद होते हैं। ये लोग यदि नौकरी करें तो कुछ पार्ट टाइम बिजनिस या अन्य कार्य साथ में जरूर करते हैं। जीवनसाथी के अलावा अन्य विपरीत लिंगियों से इनके सम्बन्ध सृजनात्मक होते हैं। ये बुद्धिमान तथा ज्ञानवान होते हैं। बच्चों की चपलता और प्रौढ़ की गम्भीरता-दोनों इन जातकों में समान रूप से एकसाथ देखी जा सकती हैं। ये मिलनसार प्रकृति के, मनोरंजनप्रिय, यारबाज तथा खेलों के शौकीन होते हैं। ये लोग नौकरी या साझेदारी में प्रायः सफल होते हैं।
मिथुन राशि के जातक हिसाब-किताब (खर्चे का) रखने वाले, टाइम टेबल/योजना का कागजी एक्शन प्लान बनाने के शौकीन होते हैं। लड़ाई-झगड़े से दूर रहने वाले तथा लेखन में रुचि रखने वाले, कला/संगीतप्रिय होते हैं। एक ही समय में एक से अधिक काम करना इन्हें शुभ भी रहता है। इनको चाहिए कि जीवन को एक ढर्रे पर न चलने दें। इससे इनकी ऊर्जा बनी रहती है। इन्हें स्वयं को सदैव किसी न किसी कार्य में व्यस्त रखना चाहिए किन्तु स्त्रियों से सावधान रहना चाहिए। क्योंकि स्त्रियां इन जातकों को बहुत सरलता से मूर्ख बना सकतीध्ठग सकती हैं।
"मिथुनाय नमः।"
√●यह संसार जोड़े/ मिथुन से चल रहा है। प्रकृति और पुरुष का जोड़ा है। केवल पुरुष सृष्टि नहीं कर सकता। केवल प्रकृति सृजनकार्य में असमर्थ है। जब दोनों का सान्निध्य/ साथ / समागम / सहयोग / संगम होता है तो यह चराचर विश्व अस्तित्व में आता है। आत्मा और शरीर का जोड़ा है। आत्मा के बिना शरीर शवमात्र/ निष्क्रिय है। शरीर के अभाव में आत्मा व्यर्थ है। इन दोनों के योग से जीवन की ज्योति जलती है। दोनों के पार्थक्य से यह ज्योति बुझ जाती है। इसी प्रकार नये और पुराने के जोड़े से यह संसार चलता है। स्थूल शरीर नया मिलता है, किन्तु सूक्ष्म शरीर पुराना है। विचार सभी पुराने हैं, उनके अभिव्यक्ति की शैली नयी है। जीव पुराना है, उसका परिवेश नया है। जगत् नया है, इसका पिता पुराना है। पुराना आधार है, नया आधेय है। पुराने और नये की सन्धि के फलस्वरूप नाना भौतिक व्यापारचल रहे हैं। इसके अतिरिक्त, द्यावा पृथ्वी का जोड़ा, ईश्वर और जीव का जोड़ा, स्त्री और पुरुष का जोड़ा, क्षर और अक्षर का जोड़ा शाश्वत है। सर्वत्र दो है-युग्म है। यथा २ हाथ, २ पाद, २ जाँघ, २ स्कन्ध, २ कपोल, २ मस्तिष्क, २ हृदय, १२ आंत्र २ जिह्वा, २ फुफ्फुस, २ वृषण, २ दंतपंक्ति, २ वृक्क, २ नासाछिद्र, २ आँख, २ कान २ ओठ, २ पलक, २ भौंह, २ गति (उद्भव विनाश) और भी मिथुन हैं- रात्रि दिवस, कृष्ण शुक्लपक्ष, अन्धकार - प्रकाश, निद्रा- जागरण, सोम- अग्नि, वृद्धि-क्षय, कोमल-कृच्छ्र, मन्द-तीव्र, अजु-वक्र, वाम-दक्षिण, जड-चेतन, माया-बहा, बन्ध-मोक्ष, स्थूल सूक्ष्म, मिथ्या सत्य, प्रत्यक्ष-परोक्ष, चिर-नूतन, मित्र-शत्रु, पाप-पुण्य, सुख-दुःख, हर्ष-विषाद, मान-अपमान, अधो-ऊर्ध्व, बाह्य-अन्तर, प्रेम-घृणा, शांत-क्षुब्ध, शुभ-अशुभ, मृत-अनृत, अमृत- विष, जन्म-मृत्यु, निकट-दूर, लघु-गुरु, अल्प-अति, अणु-विभु, बिन्दु-सिन्धु, शुष्क- आर्द्र, आदि-अन्त, आकाश-पाताल, श्रृंग-गर्त, गति-यति, सृष्टि-लय, भोग-त्याग, आदान-प्रदान, मूक-मुखर, प्रवृत्ति निवृत्ति, अस्ति नास्ति, इति-नेति ।
√●●मिथुन राशि के स्वरूप के विषय में ज्योतिष कहता है...
"वीणागदाभृन्मिथुनं तृतीयः
प्रजापतेः स्कन्धभुजांसदेशः ।
प्रनर्तका गायनशिल्पकस्त्री क्रीडारतिद्यूतविहारभूमिः ॥"
√●[ तीसरी मिथुन राशि है। यह स्त्री पुरुष का जोड़ा है। स्त्री वीणा हाथ में लिये हुए है। पुरुष गदा को धारण किये हुए है। काल पुरुष प्रजापति के देह में इस राशि का विस्तार कन्धे से लेकर भुजा तक है। नृत्यस्थान, गायन स्थान, शिल्प, स्त्री, क्रीडास्थान, रति स्थान द्यूतस्थान, विहार स्थान में इस राशि का निवास रहता है।]
√●यहाँ इस राशि का स्वरूप ध्यान देने योग्य है। स्त्री के हाथ में वीणा का तात्पर्य है, स्त्री वीणा बजा रही है। अर्थात् वह वादन कुशल है। पुरुष गदा धारण किये है, का अर्थ है-पुरुष गायन कुशल है। गद् धातु भ्वादि पर गदति स्पष्ट कहना, बोलना, कथन करना, वर्णन करना। वीणा की ध्वनि के साथ कथन करने वा बोलने का अर्थ है, गायन-आरोह अवरोह के क्रम से बोलना/ गाना। यहाँ गदा का अर्थ है, गायनकला।। इससे स्पष्ट है मिथुन राशि वाले पुरुष तथा स्त्री क्रमशः गायन एवं वादन में विशेष दक्ष होते हैं। इस का यह भी तात्पर्य हुआ-मिथुन राशि वाला पुरुष वाक् कुशल, वाक् चातुर्ययुक्त, भाषण प्रवीण, वार्ताकरने में निपुण होता है। पुरुष के हाथ में गदा का यही अर्थ है।
√● इस राशि का विस्तार राशि चक्र में ६१° से लेकर ९०° तक है। इसका स्वामी बुध है। यह राहु की उच्च राशि है। केतु इसमें नीच का होता है। यह द्विस्वभाव नपुंसक राशि है। द्विपद, सम आकार, लग्न स्थान बली है। यह पुरुष प्रधान नपुंसक है, क्रूर है। यह शीर्षोदयी, हरित वर्ण, वायु तत्व, निर्जल राशि है। यह रात्रिबली, पश्चिम दिशा में बली, रुक्ष कांति, सकारात्मक सत्ता वाली राशि है। छाती बाहु अवयव, रति-गृह निवास, क्रीडाउद्यान, जुआ घर चलचित्र स्थान, शिल्पालय, अभिनयागार, सौन्दर्य स्थल से इसका सीधा संबंध है। मध्यम पुष्टता, प्राणिज पदार्थ, भ्रातृ संबंध, बान्धव उपसंबंध, दीर्घ शब्द, समप्रकृति, अल्प सन्तान, गर्भ राशि, समगुण राशि, विषम राशि, शूद्र वर्ण, उत्तरदिशा प्लवत्व इसकी विशेषताएँ हैं। इसका उदयमान २ घण्टा १४ मिनट है। इस में चन्द्रमा का मृत्यु अंश = २२° है।
√● प्रश्न लग्न में इस राशि के होने से गर्भ चिन्ता का ज्ञान होता है। यह पश्चिम दिशा की स्वामिनी बात प्रधान, तोते के समान हरे रंग वाली, उष्ण, महाशब्दकारी, चिकनी, दिन बली, रात्र्यन्ध, उभयोदयी, शिथिल शरीर है। इसका प्राकृतिक स्वभाव विद्याध्ययनी और शिल्पी है।
√●●मिथुन राशि की प्रतीक संख्या ३ है। कुण्डली के प्रत्येक भाव में इस ३ की संख्या का क्या फल है, इसका वर्णन आगे करता हूँ...
√●१. लग्न में ३ भोगी, दाता, बहुत पुत्र, बहुत मित्र, दूतकर्मा, प्रियवाणी, नम्र, उत्तम केश, बड़ा बुद्धिमान् ।
√● २. धन में ३ स्त्री के निमित्त धन सञ्चय, साधु प्रिय, वाक् पटु, मन्दहासयुक्त, कुटुम्बवान् ।
√●३. बल में ३ . कलात्मक अभिव्यक्ति, श्रेष्ठ लिखावट, चित्रकारिता, उदारचित, संगीत प्रिय, साहसवान् ।
√●सुख में ३. क्रीडा कुशल, सुन्दर वस्त्राभूषणों से युक्त, स्त्री के लिये सुख साधन की प्राप्ति में संलग्न ।
√●५. सुत में ३. मनभावन पुत्र, गुप्त मंत्रणाशक्ति, अभिनय कला में विशेष गति, बहुमुखी प्रतिभा ।
√●६. शत्रु में. अपनी स्त्री से वैर करने वाला, नीच कर्मा, पापरत, त्रिदोष जन्य रोग से व्याकुल ।
√●७. जाया में ३ रूपवान् सगुण सम्पन्न, बुद्धिमती प्रीतिकर पत्नी से युक्त, वार्ता कुशल पत्रकार।
√●८. रन्ध्र में ३ कार्य व्यापार हेतु लम्बी यात्राएँ, अर्श रोग, प्रमेह से मृत्यु ।
√● ९. धर्म में ३ धर्म मूर्ति, सरल स्वभाव, अभ्यागतों-ब्राह्मणों को भोजन, दान, सम्मान।
√●१०. कर्म में ३ कृषक, गुरुजनों के कथनानुसार व्यवहार करने वाला, प्रतापी, सत्पुरुषों के संग का इच्छुक ।
√● ११. आय में ३ स्त्रियों को अतिप्रिय, सदा लाभ युक्त, पाण्डित्य के कारण विख्यात, अच्छी वस्तुओं का प्रेमी।
√●१२. व्यय में ३ स्त्रीनिमित्त व्यसनादि में खर्च, भूतप्रेदादि की बाधा हटाने के पूजानुष्ठानादि में खर्च, पापी मनुष्यों के संग से खर्च ।
√★★मिथुन राशि गत प्रत्येक ग्रह का क्या फल होता है, अब इसकी चर्चा करता हूँ...
√●१. ३ में सूर्य- व्याकरण आदि विद्या व ज्योतिष शास्त्र में गति, धनी, विद्वान्, क्लेश बुद्धि, नीति निपुण, ज्यान, अद्भुतवाणी, विनयुक्त ,शक्तिवन्त।
√●२. ३ में चन्द्र सज्जनतायुक्त, स्त्रियों को अतिप्रिय, सत्कार्यकर्ता, काम कुशल, शास्त्रज्ञ, चतुर बुद्धि, विनोदी, मृदुभाषी नाट्यशास्त्री व्यवहार प्रवीण ।
√●३. ३ में मंगल अनेकों कलाओं का ज्ञाता, कलहप्रिय, विदेश में रहने का इच्छुक, (घर से दूर) तेजस्वी, कृतज्ञ, कृपण, निर्भय, मिक्षुकस्वभाव।
√● ४. ३ में बुध - सुन्दर वेश भूषा, प्रियवचन, प्रमोद प्रिय, वाचाल, स्पष्ट भाषी, शास्त्री, गीतवाद्य प्रिय, सुस्वादु भोजन का शैकीन, सुखापेक्षी ।
√●५. ३ में गुरु कवि, मधुर भाषी, पवित्र हृदय, निर्मल स्वभाव, बहुमित्र बृहत् कुटुम्ब, सुखमय जीवन, कार्यकुशल, सूक्ष्म मंत्रणा शक्ति, धर्मात्मा ।
√●६. ३ में शुक्र सभी शास्त्रों एवं ललित कलाओं का जानकार, सरल मनोहर वचन, मिष्ठान्न प्रिय, राजकार्य करने वाला, धनवान्, सभ्य ।
√●७. ३ में शनि निम्न कोटि के मनुष्यों के संग से दुःखी, सज्जन पुरुषों के संग से वञ्चित, निर्लज्ज, लेखन में त्रुटि करने वाला, रक्षास्थान का प्रधान ।
√● ८. ३ में राहु - तीक्ष्ण प्रतिभा, भौतिक उन्नति की ओर अमसर, मंत्रणा को गुप्त रखने वाला, लेखाकार, चलायमान चित्त, भ्रमण प्रिय ।
√●९. ३ में केतु प्रतिभा का दुरुपयोग, सतत दुःखी, ऊँचा ऊपर उठकर नीचे गिरने वाला, दूसरों को नीचा दिखाने में सुखी, शुद्र स्वभाव।
√● मिथुन राशि बौद्धिक राशि है। बली मिथुन राशि वाला बुद्धिजीवी होता है। बुध ग्रह के सभी गुण उसमें होते हैं।