सिंह राशि

 सिंह राशि


जातक की जन्मराशि सिंह तब होगी जब जन्मकुण्डली में चन्द्रमा सिंह राशि में विद्यमान हो। यानी जातक के जन्म के समय चन्द्रमा भचक्र के पांचवें खण्ड में (120-150) विद्यमान हो। इस राशि का राशीश स्वयं ग्रहपति सूर्य है। पाश्चात्य ज्योतिष के अनुसार 23 जुलाई से 23 अगस्त के बीच जन्मे जातक सिंह राशि के होते हैं। कर्क एवं सिंह राशि अन्य राशियों की अपेक्षा इसलिए महत्त्वपूर्ण हैं कि इनके स्वामी क्रमशः चन्द्र व सूर्य (मन व आत्मा के कारक हैं और) एक-एक राशि के ही स्वामी होने से अपना सम्पूर्ण प्रभाव इन राशियों पर डालते हैं।

सिंह राशि के जातक आकर्षक व दबंग (रोबदार) व्यक्तित्व के स्वामी होते हैं। इनका आत्मविश्वास बढ़ा हुआ होता है। किन्तु ये दिखावे (आडम्बर/प्रदर्शन) के शौकीन होते हैं। अपने शरीर तथा वस्त्रों (सजधज) के प्रति विशेष जागरूक होते हैं। ये लोग शुद्ध भौतिकवादी तथा धन व दुनिया को महत्व देने वाले होते हैं। धर्म व अध्यात्म में इनकी रुचि नहीं होती, यदि ये ऐसा कुछ करते भी हैं (पूजा आदि) तो मात्र आडम्बर के लिए। हां, मगर सूर्य व गुरु दोनों कुंडली में अतिश्रेष्ठ स्थिति में हों तो बेशक अध्यात्म व धर्म के प्रति इनका झुकाव गम्भीर हो सकता है। सिंह राशि के जातकों के मन तथा हृदय में एक उद्वेलन-सा रहता है क्योंकि चन्द्रमा स्वयं शांत व जलतत्त्व प्रधान/शीतल है और सिंह राशि अग्नि तत्त्व प्रधान और क्षत्रिय वर्ण की है।

सिंह राशि के जातक उच्च महत्वाकांक्षी होते हैं। इनकी प्रबल इच्छा होती है संसार में इनकी मौजूदगी महत्वपूर्ण प्रकार से दर्ज हो। इसके लिए ये अक्सर दूसरों की नजरों में चढ़ने के लिए ऐसे कार्य भी कर जाते हैं जो अनुपयुक्त व इनके लिए हानिकारक होते हैं। ये लोग भीड़ में दूर से पहचाने जाते हैं। इनकी छाती व कंधे तथा जांघे व गर्दन पुष्ट होते हैं। इनकी चाल में एक विशेष प्रकार की शालीनता/अकड़ हो सकती है। इनकी आंखों में एक आशा व आत्मविश्वास से भरी चमक रहती है। प्रायः ये ऊंचे स्वर में बात करने वाले या चिल्लाकर बोलने वाले होते हैं और शीघ्र क्रोधित हो जाने वाले होते हैं। इनका वैवाहिक जीवन सुखद (सफल) नहीं होता। यदि ये पत्नी के अतिरिक्त कहीं और सम्बन्ध बनाएं तो इनके लिए किसी भी प्रकार से शुभ नहीं रहता और आजीवन इनके दुष्परिणाम इन्हें झेलने पड़ सकते हैं।

सिंह राशि के जातकों की अपने पुत्र के साथ प्रायः नहीं बनती। इनका स्वास्थ्य प्रायः ठीक रहता है। पर पित्त सम्बन्धी/गर्मी सम्बन्धी, उदर (गैस) तथा बवासीर या दृष्टिमंदता के रोग सम्भावित होते हैं । ये लोग अपना दुख व तकलीफ दूसरों को नहीं बताते, न ही दूसरों के सामने हाथ फैलाते हैं। क्योंकि अतिस्वाभिमानी होने से ये स्वयं को किसी की हमदर्दी प्राप्त कराना अच्छा नहीं समझते। इन्हें लोहा, तेल, ग्रीस, कोयले, चमड़े आदि का व्यापार या शनि से सम्बन्धित कार्य नहीं करने चाहिए अन्यथा हानि होती है।

5 सिंह- मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे

राशि स्वरूप- शेर जैसा, राशि स्वामी- सूर्य।

1. सिंह राशि पूर्व दिशा की द्योतक है। इसका चिह्न शेर है। राशि का स्वामी सूर्य है और इस राशि का तत्व अग्नि है।

2. इसके अन्तर्गत मघा नक्षत्र के चारों चरण, पूर्वा फाल्गुनी के चारों चरण और उत्तराफाल्गुनी का पहला चरण आता है।

3. केतु-मंगल जातक में दिमागी रूप से आवेश पैदा करता है। केतु-शुक्र, जो जातक में सजावट और सुन्दरता के प्रति आकर्षण को बढ़ाता है।

4. केतु-बुध, कल्पना करने और हवाई किले बनाने के लिए सोच पैदा करता है। चंद्र-केतु जातक में कल्पना शक्ति का विकास करता है। शुक्र-सूर्य जातक को स्वाभाविक प्रवृत्तियों की तरफ बढ़ाता है।

5. जातक का सुन्दरता के प्रति मोह होता है और वे कामुकता की ओर भागता है। जातक में अपने प्रति स्वतंत्रता की भावना रहती है और किसी की बात नहीं मानता।

6. जातक, पित्त और वायु विकार से परेशान रहने वाले लोग, रसीली वस्तुओं को पसंद करने वाले होते हैं। कम भोजन करना और खूब घूमना, इनकी आदत होती है।

7. छाती बड़ी होने के कारण इनमें हिम्मत बहुत अधिक होती है और मौका आने पर यह लोग जान पर खेलने से भी नहीं चूकते।

8. जातक जीवन के पहले दौर में सुखी, दूसरे में दुखी और अंतिम अवस्था में पूर्ण सुखी होता है।

9. सिंह राशि वाले जातक हर कार्य शाही ढंग से करते हैं, जैसे सोचना शाही, करना शाही, खाना शाही और रहना शाही।

10. इस राशि वाले लोग जुबान के पक्के होते हैं। जातक जो खाता है वही खाएगा, अन्यथा भूखा रहना पसंद करेगा, वह आदेश देना जानता है, किसी का आदेश उसे सहन नहीं होता है, जिससे प्रेम करेगा, उस मरते दम तक निभाएगा, जीवनसाथी के प्रति अपने को पूर्ण रूप से समर्पित रखेगा, अपने व्यक्तिगत जीवन में किसी का आना इस राशि वाले को कतई पसंद नहीं है।

11. जातक कठोर मेहनत करने वाले, धन के मामलों में बहुत ही भाग्यशाली होते हैं। स्वर्ण, पीतल और हीरे-जवाहरात का व्यवसाय इनको बहुत फायदा देने वाले होते हैं।

12. सरकार और नगर पालिका वाले पद इनको खूब भाते हैं। जातकों की वाणी और चाल में शालीनता पाई जाती है।

13. इस राशि वाले जातक सुगठित शरीर के मालिक होते हैं। नृत्य करना भी इनकी एक विशेषता होती है, अधिकतर इस राशि वाले या तो बिलकुल स्वस्थ रहते है या फिर आजीवन बीमार रहते हैं।

14. जिस वारावरण में इनको रहना चाहिए, अगर वह न मिले, इनके अभिमान को कोई ठेस पहुंचाए या इनके प्रेम में कोई बाधा आए, तो यह बीमार रहने लगते है।

15. रीढ़ की हड्डी की बीमारी या चोटों से अपने जीवन को खतरे में डाल लेते हैं। इस राशि के लोगों के लिये हृदय रोग, धड़कन का तेज होना, लू लगना और आदि बीमारी होने की संभावना होती है।

Er.AstroPankaj Bissa

+91-7073520724


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