श्रवण नक्षत्र सम्पूर्ण विवेचन एवं गृह स्थित फल
श्रवण नक्षत्र सम्पूर्ण विवेचन एवं गृह स्थित फल
श्रवण : तीन पग, वामन-बलि
- राक्षस राज बलि से देवताओ को पीड़ित होने पर विष्णु , ठिगने
ब्राह्मण के रूप में अवितरित हुऐ जो वामन अवतार कहलाया। वामन अवतार के रूप में
विष्णु राजा बलि के पास पहुंचे और उनसे तीन पैर जमीन दान मे मांगी। दान की
स्वीकृति मिलते ही विष्णु ने विराट रूप धारण कर लिया। पहले कदम मे ही विष्णु ने
उर्ध लोक, दूसरे कदम में मध्य लोक और तीसरा कदम बलि की पीठ
पर रख कर दानी बलि को पाताल लोक भेज दिया। यह घटना श्रवण नक्षत्र मे होने के कारण
श्रवण नक्षत्र का चिन्ह तीन पग हुआ।
श्रवण नक्षत्र-यह
बाईसवां नक्षत्र भचक्र पर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के आगे के 13-20’
क्षेत्र में मकर राशि क्षेत्र
के अन्तर्गत अवस्थित है। इस नक्षत्र के 3 तारे मिलकर तीन/बाण के समान आकार व्यक्त करते हैं। इस
नक्षत्र के देवता स्वयं विष्णु हैं। जबकि इस नक्षत्र के स्वामी चन्द्रमा हैं (बाद
में उत्तराषाढ़ा नक्षत्र तथा श्रवण नक्षत्र के मध्य विद्वानों ने 28वें नक्षत्र ’अभिजित्’ की भी कल्पना की है। दोनों नक्षत्रों
के देवता क्रमशः विश्वेदेवा एवं विष्णु हैं। अतरू इनके मध्य अभिजित् की कल्पना
तर्कपूर्ण है। क्योंकि ’अभिजित मुहूर्त’ स्वयंसिद्ध व श्रेष्ठतम माना गया है।
भगवान राम और कृष्ण दोनों का ही जन्म क्रमशः दिन व रात में ’अभिजित् मुहूर्त’ में
ही हुआ था। ये दोनों ही विष्णु के सर्वप्रमुख व सर्वाधिक प्रसिद्ध अवतार हैं, यह पाठकगण जानते ही हैं।)
श्रवण नक्षत्र में जन्मा पुरुष जातक सरल स्वभाव का, दानी, परोपकारी तथा
प्रसन्नचित्त होता है। गम्भीर, मननशील, अध्ययनशील, गूढ़ विषयों में
रुचि रखने वाला, सज्जनों का सहायक
तथा दुष्टों का विरोधी होता है।
श्रवण नक्षत्र में उत्पन्न होने वाली महिला जातक अत्यंत रूपवती, विदूषी/जानकारी रखने वाली, बड़े प्रभाव वाली, दानी, परोपकारी, सत्य तथा शास्त्रों के प्रति आस्था रखने वाली होती है। ऐसा
मर्मज्ञों का मत है।
राशि चक्र में 280।00 से 293।00 अंश के विस्तार का क्षेत्र श्रवण नक्षत्र कहलाता है। अरब मंजिल मे इसे अल
स'द अल धाबीह अर्थात भक्षण करने में आनन्दित, ग्रीक मे इसे अलटैर 20, और चीनी सियु मे नियु कहते
है। श्रवण का अर्थ सुनना है। तैतरीय उपनिषद मे श्रवण को श्राण यानि लंगड़ा कहा है।
श्रवण नक्षत्र के तीन तारे व्याह्य कर्ण या विष्णु के तीन पद चिन्ह के प्रतीक है।
देवता विष्णु, स्वामी
गृह चंद्र, राशि मकर, 10।00 से 23।20 अंश। भारतीय खगोल का
यह 22 वा चर संज्ञक नक्षत्र है। इसके तीन तारे है। यह तारा
समूह विष्णु के वामन अवतार मे तीन पग जमीन मांगने के लिए चले गए तीन कदम के रूप मे
पुराणो मे वर्णित है। वैदिक काल मे यह गरुड़ के रूप में पहचाना जाता था। वर्तमान
में तीन पग का द्योतक है। विश्व खगोल संघ की सूची एक्विला तारा समूह (श्रवण) के
तीन तारे अलसेन, अल्टेर, तरज़ेड विष्णु
के तीन पग के प्रतीक है। श्रवण का अर्थ सुनना है। यह ज्ञान का नक्षत्र है। यह शुभ,
सात्विक, बुद्धि कारक, पुरुष
नक्षत्र है। इसकी जाति शूद्र, योनि वानर, योनि वैर छाग, देव गण, नाड़ी
आदि है। यह उत्तर दिशा का स्वामी है। इसका चिन्ह विष्णु के तीन पैर के प्रतिनिधी
है।
विष्णु -लक्ष्मी-शेषनाग
प्रतीकवाद - इसके देवता विष्णु है। पौराणिकता अनुसार तीन
परमेश्वर मे से विष्णु ब्रम्हाण्ड के पालक है। इन्हे चतुर्भुज कहा जाता है। इनकी
एक भुजा मे शंख (ॐ का प्रतीक) दूसरी मे चक्र (समय और काल का प्रतीक) तीसरी मे कमल
(सुंदरता का प्रतीक) चौथी मे गदा (अधिकार और दंड का प्रतीक) है। इनका वाहन गरुड़
वेदो का प्रतीक है। पत्नी लक्ष्मी सम्पत्ति की देवी है। विष्णु शेषनाग पर
शयनावस्था मे विश्व निद्रा के द्योतक है। विष्णु की खड्गासन मुद्रा हरी अवस्था
यानि हरण या निवारण का द्योतक है। .
विशेषताऐं - वैदिक भावना अनुसार वस्तुओ का ज्ञान श्रवण से
होता है। इसलिए वेदो को श्रुति कहा गया है। उनका आदान प्रदान सुनने से ही होता है।
इसलिए यह श्रुति का प्रतीक नक्षत्र है। जातक का प्रारम्भिक जीवन निराशा और कष्टमय
होता है। इसे धर्मशास्रो को सुनने मे आनंद आता है। जातक ज्ञानी, विद्वान, शास्त्रज्ञ,
शिक्षाविद, संगीत नृत्य नाट्य का पंडित,
सुगन्धित पदार्थ, इत्र, फूलो
का शौकीन, पर स्त्री रत होता है। इसमे क़ानूनी वाद, युद्ध, शारीरिक श्रम, वायदा,
पुरानी वस्तुओ को नष्ट करना, शपथ, शिशु गोद लेना आदि हानि करक है।
श्रवण नक्षत्र विभूतियाँ (श्रवण
जन्म नक्षत्र)
देवी सरस्वती (विद्या, बुद्धि,
ज्ञान दात्री)
व्यंकटेश्वर (व्यंकटेश
बालाजी, विष्णु का एक रूप)
बलराम और वामन अवतार (भागवत पुराण अनुसार)
श्रवण नक्षत्र फलादेश
यह विद्या ज्ञान का नक्षत्र है। वैदिक विचारो में ज्ञान
ध्वनि द्वारा श्रवण करने से ही प्राप्त होता है। लेखन भी श्रवण का रूप ही है।
वैदिक मान्यता है की अच्छा श्रोता ही अच्छा वक्ता होता है। सर्वातिशाय ज्ञान के
प्रतीक चिन्ह तीन पग थली विष्णु के चरण है।
➢ इसका स्वामी
चंद्र मानवीय श्रवण से ज्ञानार्जन का प्रतीक है। विष्णु विश्व पालक, निर्वाहक इसके देवता है।
➢ इसका राशि
स्वामी शनि संचार सन्देश के प्रतीक है। ये गुण जातक मे होते है।
जातक ज्ञानवान, सूचना
सन्देश वाहक, भाषाविद, सनातन
विद्यार्थी, उपदेशक, सूक्ष्म श्रवण
शक्ति वाला, ज्ञान की खोज मे पर्यटनी, प्राचीन
ज्ञान का खोजी, परम्परावादी होता है। यह लंगड़ा कर चलने वाला
या असामान्य चलने होता है। जातक संगीत प्रेमी, धर्म ग्रन्थ
लुनने का शौकीन, धर्मात्माओं का आदर करने वाला होता है। ये
लोग सुगन्धित पदार्थ , इत्र, फूल प्रेमी,
पर स्री रत, सुवक्ता, रिश्तेदारों
का मददगार, गुणवान, गुप्तांगो पर मछली
के चिन्ह वाले होते है। उम्र वर्ष 25, 30, 32, 36, 42 वे शुभ
होते है।
पुरुष जातक - यह आकर्षक ठिगना होता है। इसके दृश्य भाग पर
मस्सा, तिल, या अन्य प्रकार का पहचान का निशान होता है। जातक सत्यवादी, मुक्कमल पहुँच वाला, सदाचारी, विश्वासधात
और धोखे का सामना करने वाला, राजनीतिज्ञ, दूसरो के प्रति दयावान, सहभोज मे अशांत, कड़वाहट प्रिय होता है।
जातक सभी प्रकार के ज्ञान जिज्ञासु से पंडित, अनेक प्रकार के व्यवसाय मे रत होता है। यह
सभी क्षेत्रो मे काम करने वाला लेकिन यंत्र, तकनिकी, इंजीनियर, तेल, पेट्रोलियम
पदार्थो मे विशेष सफल होता है। कुछ जातक को व्यवसायिक यात्रा करनी पड़ती है जिससे
वह अशांत और अस्वस्थ्य रहता है।
व्यवसाय मे उतार चढ़ाव 30 वर्ष की उम्र तक ज्यादा रहते है। 46 वे वर्ष मे
सुदृढ़ स्थति होती है। 65 वर्ष मे व्यावसायिक उन्नति चरम सीमा
पर होती है। बचपन अस्थिर लेकिन विवाह बाद स्थिरता आती है। दाम्पत्य जीवन सुखद,
शांत और हर्षित होता है। पत्नी आज्ञाकारणी, भक्त,
गुणो से भरपूर होती है।
स्त्री जातक
1 स्त्री
जातक लम्बी पतली दुबली, लम्बा मुखड़ा, ऊपर
के लम्बे छिदे दांत, आकर्षक व सुन्दर होती है।
2 यह
पवित्र स्थलो की पर्यटनी, मिथ्या अभिमानी, दिखावटी, कुछ चतुर होती है।
3 यह
परिवार मे प्रशंसित, सभी मामलो मे परिपक्व होती है। दाम्पत्य
जीवन मे कलह और विरोधाभाष रहता है इसकी पति से मांगे बहुत अधिक रहती है जिन्हे वह
परिस्थितिवश पूरी नही कर पता है।
आचार्यो अनुसार नक्षत्र फलादेश
श्रवण नक्षत्रोपन्न जातक श्रीमान, विद्वान, धनवान होता
है। इन लोगो की श्रवण शक्ति अच्छी होती है। ये अपने क्षेत्र मे प्रसिद्धि प्राप्त
कर प्रचुर धन कमाते है। - वराहमिहिर
ये स्वयं उदार, विनम्र,
दूसरो की मदद करने वाले होते है। इनकी पत्निया भी खुले दिल वाली और
उदार होती है। धर्मिक कार्यो मे तन-मन-धन (श्रम, समय,
अर्थ) देते है। काव्यात्मक बाते करना और पौराणिक आख्यान सुनना इनका
स्वभाव होता है। - नारद
श्रवण व्यक्तियो मे कविता शक्ति होती है। साधरणतया ये
व्यक्ति धनी और विद्वान होते है। पौराणिक गाथाए सुनने का शौक होता है। ये किसी से
प्रभावित नही होते है किन्तु गुणीजनों को परखकर ये गुणीजनों के भक्त हो जाते है। इसलिये
इन्हे कही श्रुतिवान तो कही पर शास्त्रानुरक्त कहा है।
अपनी जाति बिरादरी में अच्छी उन्नति करने वाले, दान देने मे रूचि रखने वाले, उदार मन वाले, चतुर, कार्यकुशल,
मध्यम स्वास्थ्य, शत्रुहंता होते है। इनमे
वृद्धावस्था के चिन्ह शीघ्र प्रकट होते है। - पराशर
चन्द्र : चंद्र इस नक्षत्र मे हो, तो जातक धनी, अच्छी
पत्नी वाला, अच्छा मेजबान, अच्छा आहार
करने वाला, अति उत्साही, तथा श्रवण और
सीखने वाला, ज्ञान और सूचना पिपासु, अच्छा
वार्तलापी लेकिन गपशप करने वाला, अधीर, पैतृक सम्पदा मे रूचिवान, बचपन मे मुसीबते आती है,
निराश होता है।
वराहमिहिर अनुसार स्त्री या पुरुष जातक का विद्वतापूर्ण
चेहरा, उदार विचार
होते है।
सूर्य : श्रवण में सूर्य हो, तो
सफल, वरिष्ठो से परेशान, राजनीतिज्ञ,
राजद्रोही या उपद्रवी, संचार कुशल, स्वस्थ्य, बल पूर्वक हड़पने वाला होता है।
लग्न : श्रवण लग्न हो, तो
धार्मिक स्वभावी, विद्यार्थी के सामान आज्ञाकारी और
कार्यकारी, चरित्रवान, प्रसिद्ध,
जन्म स्थान से दूर आजीविका करने वाला, दानी,
दयालु, अल्प संतान वाला होता है।
श्रवण चरण फल
प्रथम चरण - इसका स्वामी मंगल है। इसमे शनि, चन्द्र, मंगल ♄ ☾
का प्रभाव है। मकर 10।00 से 13।20 अंश। नवमांश मेष। यह आकांक्षा, जीवनवृत्ति, सूत्रपात का द्योतक है। जातक गोल नेत्र, चौड़ा ललाट,
लम्बी भुजा, दुर्बल अंग, छिदे दांत, तोतला होता है। जातक केन्द्रीभूत,
महत्वाकांक्षी, आत्मश्लाधी, बुरे मित्र वाला, विपरीत लिंग के मित्र को शीघ्र
बदलने वाला होता है।
जातक दयालु, सत्यधर्म
पर चलने वाला, प्रतिदिन मंदिर जाने वाला, सामाजिक उत्सव प्रिय, परिवार प्रेमी, विपरीत लिंग के साथ मौज-मस्ती करने वाला, बहु संतति ,
फूल प्रेमी, अच्छी वेश भूषा वाला होता है। इसके
गुप्तांग या प्रजनन अंग की शल्य चिकित्सा हो सकती है।
द्वितीय चरण - इसका स्वामी शुक्र है। इसमे शनि, चंद्र, शुक्र ♄ ☾
का प्रभाव है। मकर 13।20 से 16।4 0 अंश। नवमांश वृषभ। यह कूटनीति, नम्रता, युक्ति, अध्यव्यसाय, या दीर्घ
प्रयत्न का द्योतक है। जातक ऊँची नाक, बड़ा पेट, श्याम वर्ण, गोल भुजा व जाँघे वाला, सुन्दर, सुवंशी, काम पूरा कर
ही चेन लेने वाला, दृढ़ निश्चयी, विद्वान,
कूटनीतिज्ञ, मधुर भाषी, पैसो
की टकसाल मे कलाविद होता है।
तृतीय चरण - इसका स्वामी बुध है। इसमे शनि, चन्द्र, बुध ♄ ☾ ☿ का प्रभाव है।
मकर 16।40 से 20।0
0 अंश। नवमांश मिथुन। यह लचीलापन, संचार,
चालाकी का द्योतक है। जातक कोमल कांति, पतले
होंठ, बड़ी दाढ़ी, चौड़ा ललाट, कामी, सुवक्ता, सुन्दर वेशी
होता है।
जातक मे सभी गुण-दोष होते है। यह अच्छा श्रोता तथा संचार
वाहक, शास्त्र कथाओ का श्रोता, ज्ञान की उच्च शाखा का विशेषज्ञ, अधिक पुत्र वाला
होता है।
चतुर्थ चरण - इसका स्वामी चन्द्रमा है। इसमे शनि, चन्द्र, चन्द्र ♄ ☾ ☾ का प्रभाव है।
मकर 20।00 से 23।20
अंश। नवमांश कर्क। यह चित्त मे भावना की उत्पत्ति या ग्राह्यता,
भीड़, उन्मुखता, सहानुभूति
का द्योतक है।
जातक काला रंग, बड़ा
शरीर, कोमल हाथ व पैर, कठोर, सुभाषी, बुद्धिमान, सुशील,
सदाचारी, कुछ भावुक, समूह
प्रेमी, जन समूह मे संतुलन बनाये रखने वाला, वार्तालाप और गपशप करने वाला, पुरोहित और पूजारी का
सम्मान करने वाला, अहंकारी होता है। 20 वा वर्ष धातक होता है।
आचार्यो ने चरण फल सूत्र रूप में कहा है लेकिन अंतर बहुत
है।
यवनाचार्य : श्रवण के पहले पाद मे कल्याणकारी कार्यो के लिए
हठ करने वाला, दूसरे पाद मे
अच्छे गुणों से युक्त, तीसरे पाद मे धनवान, चौथे पाद मे उत्तम स्त्री वाला होता है।
मानसागराचार्य : पहले चरण मे पर स्त्री गामी, दूसरे चरण मे देवांश, तीसरे चरण मे पुत्रवान, चतुर्थ चरण मे उत्तम होता
है।
भारतीय मत से सूर्य, बुध,
शुक्र की आपस में पूर्ण या पाद दृष्टि नही होती, क्योकि सूर्य से बुध 28 अंश और शुक्र 48 अंश से अधिक दूर नहीं हो सकते है।
श्रवण ग्रह चरण फल
सूर्य :
✾ श्रवण सूर्य पर
चंद्र की दृष्टि होने पर जातक स्रियो के सानिध्य मे धन गवायेगा और अंत मे खुशियो
से वंचित होगा।
✾ श्रवण सूर्य पर
मंगल की दृष्टि होने पर जातक दूसरो के झगड़ो से धन कमायेगा, वही
कुछ मामलो मे पढ़कर धन गवांयेगा। शरीर से रोगी और पागलपन की अवस्था मे रहेगा।
✾ श्रवण सूर्य पर
गुरु की दृष्टि होने पर जातक दयालु, बुद्धिमान, परोपकारी, सामाजिक कार्यकर्त्ता होगा। हर तरफ से धन
कमायेगा।
✾ श्रवण सूर्य पर
शनि की दृष्टि होने पर जातक जिद्दी शत्रुओ को परास्त करने वाला, शासक व प्रशासक से लाभ प्राप्त करने वाला होता है।
श्रावण सूर्य चरण फल
प्रथम चरण - जातक स्वस्थ्य और मजबूत बनावट वाला, अपने वरिष्ठो से परेशान, उपेक्षित, अपमानित, कार्य
क्षेत्र मे बदनाम, दुःखी, राजद्रोही या
उपद्रवी,पौराणिकता के प्रति उदासीन होता है।
द्वितीय चरण - जातक माध्यम स्वाथ्य वाला, श्रीमान, धनवान,
विद्वान, बल पूर्वक हड़पने वाला, उदार होता है। जातक व उसकी पत्नी भी उदार और दूसरो के काम आने वाले होते
है।
तृतीय चरण - जातक राजनीतिज्ञ या कूटनीतिज्ञ, सफल, भाषाविद,
अध्यापक या व्याख्याता या प्राध्यापक, प्राचीन
ज्ञान का खोजी, परम्परावादी होता है।
चतुर्थ चरण - जातक बुद्धिमान, विद्वान,
धर्मिक कार्यो मे सभी अर्पण करने वाला, पौराणिक
आख्यान सुनने वाला होता है।
➢ मतान्तर जातक
लालची,चंचल, भटकने का शौकीन, वेश्या गमन करने वाला, माता-पिता व परिजनो से
मनमुटाव, कष्ट पाने वाला, छिपे दुश्मनो
से घिरा होता है। हितकारी ग्रहो की दृष्टि हो, तो कुछ परिणाम
सकरात्मक हो सकते है।
चन्द्र :
✾ श्रवण चन्द्र पर
सूर्य की दृष्टि होने पर जातक राजा के सामान अधिकार, शक्तियो
का उपयोग करेगा।
✾ श्रवण चन्द्र पर
मंगल की दृष्टि होने पर जातक विद्वान, साहसी होगा।
✾ श्रवण चन्द्र पर
बुध की दृष्टि होने पर जातक धनाढ्य, प्रसिद्ध व्यापारी होगा।
✾ श्रवण चन्द्र पर
गुरु की दृष्टि होने पर जातक मंत्री या मंत्रीतुल्य या निगम अध्यक्ष होगा।
✾ श्रवण चन्द्र पर
शुक्र की दृष्टि होने पर जातक गरीब, सामान्य होगा।
✾ श्रवण चन्द्र पर
शनि की दृष्टि होने पर जातक भूमिपति, संपत्तिवान होगा।
श्रवण चन्द्र चरण फल
प्रथम चरण - जातक का स्वास्थ्य सामान्यतया मध्यम रहता है।
इन लोगो पर बुढ़ापे के चिन्ह प्रौढ़ावस्था मे ही झलकने लगते है। जातक अच्छा
वार्तालाप लेकिन गपशप करने वाला, अधीर, प्रेम मे असफल होता है।
➧ यह चरण लग्न हो
और शनि व मंगल आश्लेषा मे हो, तो जातक शराबी, अविवाहित होगा। पेट की शल्य चिकित्सा हो सकती है।
द्वितीय चरण - जातक श्रीमान, मान
सम्मान युक्त, बुद्धिमान, धनवान,
श्रुतिवान या शास्त्रानुरक्त, उदारमना,
चतुर, आख्यान सुनने सुनाने वाला होता है।
➧ यह चरण लग्न हो
और शुक्र से युत हो तथा सूर्य की दृष्टि हो तो, स्त्री जातक
व उसकी माता वैश्यावृत्ति करेगी।
तृतीय चरण - जातक अच्छी वाकशक्ति वाला, बोलने मे चतुर व निपुण, काव्यात्मक शैली मे बातचीत करने वाला, पौराणिक
आख्यान व प्राचीन ग्रंथो के श्रवण से आनंदित होने वाला होता है।
चतुर्थ चरण - जातक प्रसिद्ध और उदार खुले मन वाली पत्नी
युक्त, अच्छा मेजबान,
सात्विक आहार करने वाला, अच्छा सुनने और सीखने
वाला, ज्ञान और सूचना पिपासु, मृत और
पैतृक सम्पदा मे रुचिवान, बचपन मे मुसीबत युक्त होता है।
मंगल :
✾ श्रवण मंगल पर
सूर्य की दृष्टि होने पर जातक कृष्ण वर्णी, रुखा, सुखी जीवन होगा।
✾ श्रवण मंगल पर
चन्द्र की दृष्टि होने पर जातक मातृ सुख से वंचित, घनिष्ट
मित्र रहित, यथेष्ट धनी होगा।
✾ श्रवण मंगल पर
बुध की दृष्टि होने पर जातक मृदुभाषी, यात्रा अभिकर्ता,
व्यापार व्यवसाय मे झूठ बोलने वाला, शक्तिवान
होता है।
✾ श्रवण मंगल पर
गुरु की दृष्टि होने पर जातक दीर्घायु, स्व परिजनो की देखभाल
करने वाला, अच्छे गुणो वाला, शासक के
निकट होता है।
✾ श्रवण मंगल पर
शुक्र की दृष्टि होने पर जातक भाग्यशाली होने से अनेक अवसरो पर अलग-अलग स्त्रियो
से यौन सुख प्राप्त करेगा लेकिन झगड़ालू होगा।
✾ श्रवण मंगल पर
शनि की दृष्टि होने पर जातक बुद्धिमान, प्रसिद्ध, स्त्रियो से घृणा करने वाला, सरकार से लाभ प्राप्त
करने वाला होगा।
श्रवण मंगल चरण फल
पथम चरण - जातक प्रबल वाकशक्ति वाला लेकिन कटुभाषी, लोभी व युवतियो का संग पाने का इच्छुक होता
है। यह सुनता सबकी है पर करता मन की है। यदि शनि पुनर्वसु प्रथम चरण मे हो,
तो जातक चोर और चोर द्वारा घायल होता है।
द्वितीय चरण - जातक जन प्रतिष्ठित, प्रबल वाकशक्ति वाला और मधुर भाषी, पति-पत्नी दोनो दरिया दिल और उदार, पौराणिक कथाऐ
सुनने वाला, धार्मिक नेत्र रोगी होता है।
तृतीय चरण - जातक विद्वान् तथा विद्वानो का आदर करने वाला, धार्मिक कार्यो मे श्रम करने वाला, दूसरो के काम आने वाला होता है।
➧ अन्यत्र ज्येष्ठा
नक्षत्र लग्न होने पर प्राचीन धारणाओ अनुसार पुरुष जातक वरिष्ठ और कनिष्ठ भाइओ को
तवाह करने वाला होता है। नवीन धारणाओ के अनुसार कनिष्ठ सहोदर भाई की पत्नी का
गर्भपात होगा। जातक वरिष्ठ होगा, इसलिये उससे वरिष्ठ का
प्रश्न नही उठता है।
चतुर्थ चरण - जातक, सुन्दर,
सुखी, धनाढ्य, पौराणिक
आख्यान, धार्मिक कथा, ऐतिहासिक वर्णन
श्रवण करने वाला, सफल डाक्टर या प्रशासक होता है।
बुध :
✾ श्रवण बुध पर
चन्द्र की दृष्टि होने पर जातक डरपोक, जलीय वस्तुओ से
आजीविका करने वाला, धनी होगा।
✾ श्रवण बुध पर
मंगल की दृष्टि होने पर जातक धनवान, धन के लिये नीच कर्म
करने वाला, क्रूर होगा।
✾ श्रवण बुध पर
गुरु की दृष्टि होने पर जातक गांव का मुखिया, सस्था या
निर्माणशाला का अध्यक्ष होगा।
✾ श्रवण बुध पर
शनि की दृष्टि होने पर जातक क्रूर कर्म करने वाला, निर्धन,
दुःखी होगा।
श्रवण बुध चरण फल
प्रथम चरण - जातक वाकपटु लेकिन व्यर्थ की बकभक करने वाला
अर्थात अनर्गल बाते करने वाला, अपनी
जाति-बिरादरी में अच्छी उन्नति करने वाला, धर्म-कर्म से
विमुख, दान दक्षिणा मे विश्वास नही करने वाला, कुटिल संचार वाहक, विद्वेष पूर्ण होता है।
➢ मूल मे लग्न हो,
तो जातक अपनी पैतृक सम्पत्ति गँवा देगा। बुध चन्द्रमा से दृष्ट होने
पर हानि अधिक होगी।
द्वितीय चरण - जातक धन वैभव संपन्न, अपने कार्य क्षेत्र मे प्रसिद्ध, अच्छी वाकशक्ति वाला, मधुर भाषी, शास्त्र वेदो का ज्ञाता, पठन पाठन करने कराने वाला,
कथा वाचक होता है।
तृतीय चरण - जातक प्रतिष्ठित, प्रसिद्ध,
समाज व कुल मे उन्नति करने वाला, वेदपाठी,
कुशल संचार वाहक, श्रुतिवान, अर्थशास्त्री, वाणिज्यविद, प्रस्तोता,
सफल उदघोषक, पार्श्वगायक, पौराणिक आख्यान श्रोता होता है।
चतुर्थ चरण - जातक सुन्दर, आकर्षक,
दूसरो के काम आने वाला, मनोकुल उदार पत्नी
वाला, पौराणिक कथाओ को सुनने सुनाने वाला, जरा सी आहट पर चौकन्ना, धर्म, कर्म
करने वाला, दान दक्षिणा देने वाला, होटल
उद्योगी सामंजस्य विहीन होगा।
गुरु :
✾ श्रवण गुरु पर
सूर्य की दृष्टि होने पर जातक आकर्षक, ओजस्वी वक्ता, सहायक होगा।
✾ श्रवण गुरु पर
चंद्र की दृष्टि होने पर जातक समाज नेता या राज नेता होगा।
✾ श्रवण गुरु पर
मंगल की दृष्टि होने पर जातक शासक का विश्वासपात्र और उससे धन कमाने वाला होता है।
✾ श्रवण गुरु पर
बुध की दृष्टि होने पर जातक शांतिप्रिय, स्रियो का पसंदीदा,
धार्मिक अनुष्ठानी होता है।
✾ श्रवण गुरु पर
शुक्र की दृष्टि होने पर जातक सर्वगुण सम्पन्न, नेताओ के
करीबी होता है।
✾ श्रवण गुरु पर
शनि की दृष्टि होने पर जातक की सभी आकांक्षाए पूर्ति होगी।
श्रावण गुरु चरण फल
प्रथम चरण - जातक व्यसनप्रिय, धर्माचरण
के विरुद्ध, दूसरो के काम नही आने वाला, संचार शक्ति का दुर्पयोग करने वाला होता है।
द्वितीय चरण - जातक प्रसिद्ध, प्रतिष्ठित,
कविता करने की शक्ति वाला, साधारणतया मध्यम
स्वास्थ्य वाला, विचारो से युवक लेकिन शरीर पर वृद्धावस्था
के लक्षण परिलक्षित होते है।
तृतीय चरण - जातक सुन्दर, काव्यात्मक
रूप मे बातचीत करने वाला, दूसरो के गुणों को परख कर ही उनसे
प्रभावित होने वाला, धनवान, धार्मिक
होता है।
चतुर्थ चरण - जातक मनमोहक सबकी सुन समझकर उन्नति करने वाला, प्रसिद्ध उदघोषक, रोचक
भाषण देने वाला, धर्म मे धन लगाने वाला होता है। इनकी पत्नी,
गुणवती, उदार, धर्माचरणी
होती है।
➤ अन्यत्र जातक का
व्यवहार लज्जाजनक लेकिन उदार प्रवृत्ति वाला, उत्तेजित और
असंगत स्वाभाव का होगा। 36 वर्ष पश्चात जीवन स्थिर होता है।
शुक्र :
✾ श्रवण शुक्र पर
चंद्र की दृष्टि होने पर जातक आकर्षक, चेहरे पर मुस्कराहट
होती है।
✾ श्रवण शुक्र पर
मंगल की दृष्टि होने पर जातक आर्थिक और मानसिक परेशानियो से ग्रस्त होगा।
✾ श्रवण शुक्र पर
गुरु की दृष्टि होने पर जातक कला-संगीत प्रेमी, धनवान होगा।
✾ श्रवण शुक्र पर
शनि की दृष्टि होने पर जातक सुन्दर, भाग्यशाली, कामक्रीड़ा मे रुचिवान होगा।
श्रवण शुक्र चरण फल
प्रथम चरण - जातक आकर्षक लेकिन ठिगना, पुष्ट शरीरी, विश्वासधात
या धोखे का सामना करने वाला, पर स्त्री रत, शत्रुहंता, महत्वाकांक्षी, परिस्थिति
अनुसार चलने वाला होता है।
द्वितीय चरण - जातक सुन्दर कामदेव के सामान, स्वस्थ्य, सूचना
संचार वाहक, पर्यटनी, धर्म ग्रंथो के
श्रवण का शौकीन, सुगंध व इत्र प्रेमी होता है। 44 वर्ष की आयु मे या जब गोचरीय शुक्र इसी अंश पर हो तब भारी हानि हो सकती
है।
तृतीय चरण - जातक उदार और विनीत, उत्कृष्ट विद्वान्, धनवान,
कुशल संचार वाहक, दूर संचार मे सुप्रतिष्ठित,
तीव्र सूक्ष्म श्रवण शक्ति वाला, सुवक्ता
परम्परावादी होता है।
चतुर्थ चरण - जातक सुन्दर, धन
वैभव युक्त, उदार, उपदेशक या उदघोषक,
ज्ञान की खोज मे देशाटन करने वाला, महत्वाकांक्षी
लेकिन असिद्धांतिक होता है। इसकी पत्नी मनोकुल, सुन्दर सुशील
होता है।
शनि :
✾ श्रवण शनि पर
सूर्य की दृष्टि होने पर जातक की पत्नी बदसूरत होगी। वह स्वयं निर्धन व निर्भर
होगा।
✾ श्रवण शनि पर
चन्द्र की दृष्टि होने पर अनेक नाम वाला, माता की देखभाल से
वंचित, चरित्रवान होगा।
✾ श्रवण शनि पर
मंगल की दृष्टि होने पर जातक लकवे से पीड़ित, दूसरो से विपरीत
कार्य करने वाला होता है।
✾ श्रवण शनि पर
बुध की दृष्टि होने पर जातक नेक, धनी, समाज
और सरकार से लाभान्वित होता है।
✾ श्रवण शनि पर
गुरु की दृष्टि होने पर जातक सुदृढ़, राज्य या क्रेंद्र सरकार
मे मंत्री होगा।
✾ श्रवण शनि पर
शुक्र की दृष्टि होने पर जातक सुन्दर, रतिप्रिय होता है।
श्रवण शनि चरण फल
प्रथम चरण - जातक कृशदेही, बुद्धिमान
मगर स्वार्थी, धनवान मगर कंजूश, लंगड़ाकर
या विशेष चाल से चलने वाला, अश्लील भाषी, गुप्तांग पर चिन्ह वाला होता है। सुसराल से काफी धन मिलेगा फिर भी मांग
वाला होगा।
द्वितीय चरण - जातक विद्वान्, अपनी
इन्द्रियों को वश में रखने वाला, न बुरा सुनने वाला और न
बुरा कहने वाला, संयमी, कृतज्ञ होता
है।
➤अन्यत्र जातक मध्यम शरीर वाला
लेकिन प्रतिशोधी, विदेश मे रहने
वाला, पत्नी रोगिणी लेकिन सुखी वैवाहिक जीवन होगा।
तृतीय चरण - जातक अपने कार्य से प्रसिद्ध, जीवन में उन्नति करने वाला, गीतकार, संगीतकार, मददगार,
शंकालु, माता-पिता और अन्य की बात पर विश्वास
नही करने के कारण दूसरो का विश्वास पात्र नही होता।
चतुर्थ चरण - जातक अत्यंत कृश (हड्डिया दिखाई देती है) गीत
संगीत मे अन्वेषक, श्रेष्ट कथा
वाचक, अच्छा कथन और वर्णन करने वाला, जीवन
वृतांत लिखने वाला, कम बोलने वाला होता है।
श्रवण राहु चरण फल
प्रथम चरण - जातक अल्पायु, दुबला-पतला,
लंगड़ा कर चलने वाला, स्वार्थी, शास्त्र श्रवण से विमुख होता है।
द्वितीय चरण - जातक शांत, आस्थावान,
उदार, नेक पत्नी रहित, मेहनत
के फल से वंचित होता है।
तृतीय चरण - जातक बुद्धिमान मगर प्रतिशोधी, शत्रुओ से घिरा फिर भी आराम दायक जीवन होता
है।
चतुर्थ चरण -. जातक हाजिर जबाब, व्यवहार कुशल, मगर
संकीर्ण दिमागी और बईमान, दुःखी होता है।
श्रवण केतु चरण फल
प्रथम चरण - यह पाद लग्न हो तो भी जातक धनवान, संतानवान होता है।
दूसरा चरण - जातक पुत्रियो के कारण परेशान व दुःखी होगा। संतान
के कारण जीवन दुःखी होगा।
तृतीय चरण - जातक की पत्नी समस्या मूलक होगी जिससे प्रगति
मे बाधा आएगी ।
चतुर्थ चरण - जातक दमा, क्षय
रोग, फेफड़ो के रोग से ग्रस्त होगा। पत्नी व संतान से खतरा
होगा।
जातक = वह प्राणी जिसका ज्योतिषीय विचार किया जा रहा हो।
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