तुला राशि

 तुला राशि


     जन्मकुण्डली में चन्द्रमा जब तुला राशि में हो, यानी जातक के जन्म के समय भचक्र के सातवें खण्ड (180-210) में हो तो जातक की जन्मराशि तुला होती है। पाश्चात्य ज्योतिष के अनुसार 24 सितम्बर से 23 अक्टूबर के उत्पन्न होने वाले जातक तुला राशि के होते हैं) तुला राशि का राशीश शुक्र ग्रह है।

     तुला राशि के जातक सूक्ष्म विश्लेषण करने वाले, न्यायप्रिय, निष्पक्ष, उदार तथा विनम्र एवं शांत स्वभाव के होते हैं, किन्तु अस्थिर प्रकृति के होते हैं। ये जीवन में सभी कार्य नियम-कायदे, कानून से करने में विश्वास रखते हैं तथा ईमानदार होते हैं। ये लोग सकारात्मक तथा सटीक परामर्श देने वाले होते हैं। ये पार्टी तथा महफिलों में रहना पसंद करते हैं। ये आकर्षक व्यक्तित्व के, गोरे तथा विपरीत लिंगियों को अपनी ओर सहज ही आकर्षित कर लेने वाले तथा उनकी संगति को पसंद करने वाले होते हैं। धैर्यवान होते हैं, जल्दबाजी में कुछ नहीं करते। इनकी आंखें इनके चेहरे पर विशेष स्थान रखती हैं।

     श्रेष्ठ लोगों से सम्बन्ध बनाए रखने के लिए तुला राशि के जातक धन की कभी परवाह नहीं करते। इन लोगों के सम्बन्ध अपने भाइयों व पिता से मधुर नहीं रहते या उनका सुख इन्हें कम मिलता है। सामान्यतः इनका वैवाहिक जीवन भी कुछ कलहपूर्ण हो सकता है तथा इनके अवैध सम्बन्ध भी सम्भव होते हैं। इस राशि की स्त्रियां सुन्दर, गुणवती, पति से प्रेम करने वाली तथा कामकला में निपुण होती हैं। शुक्र कुण्डली में अशुभ हो तो ये असफल हो सकते हैं। अन्यथा अपने कार्यक्षेत्र व बॉस की नजरों में विशेष स्थान रखते हैं। शुक्र अशुभ हो तो चर्म रोग, वीर्य रोग, मूत्र रोग, गुप्त रोग आदि भी सम्भव होते हैं। स्त्रियों में गर्भाशय का विकार भी सम्भव होता है।

     तुला राशि के जातकों की सोच में कलात्मकता के साथ वैज्ञानिकता भी शामिल रहती है। यदि गुरु कुंडली में बली हो तथा शुक्र कमजोर हो तो ये फक्कड़ स्वभाव के भी हो सकते हैं। अथवा वस्त्रों आदि के प्रति लापरवाह रहते हैं। तुला राशि वालों की लावण्यता प्रायः अधिक आयु तक बनी रहती है और ये अपनी आयु से कम के नजर आते हैं।

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