राशियां व नक्षत्र सिद्धांत

 राशियां व नक्षत्र सिद्धांत 

ऐतिहासिक तथ्य-खगोलशास्त्र का प्रारंभ सर्वप्रथम किस काल में हा

कहना बहुत कठिन है। परन्तु इतना तय है कि यह शास्त्र कम से कम 5000 वर्ष

पुराना तो अवश्य ही है। क्योंकि भारत में वैदिक काल से ही इस शास्त्र की जड़ें

फैली हुई हैं। यजुर्वेद में नक्षत्र दर्शन का उल्लेख मिलता है। ऋग्वेद में सांकेतिक

ढंग से खगोलविज्ञान के सूत्र मिलते हैं। छांदोग्य उपनिषद में नक्षत्र विद्या का वर्णन

मिलता है। बाद के ग्रन्थों में तो खगोल, ज्योतिष एवं मौसम विज्ञान आदि का

विस्तृत ज्ञान प्रचुरता से उपलब्ध होता है।

सूर्य और चन्द्र के कारण हमें काल मापन की दो स्वाभाविक इकाइयां प्राप्त

होती हैं-दिन व महीना। (दिन के रात-दिन दो विभाग मिलते हैं तो मास के कृष्ण

व शुक्लपक्ष दो विभाग मिलते हैं।) काल मापन की तीसरी महत्त्वपूर्ण इकाई सूर्य

एवं पृथ्वी के कारण प्राप्त होती है-वर्ष। एक ऋतु के शुरू होकर पुनः उसी ऋतु

में लौटने से वर्ष पूर्ण होता है।

बेबीलोनिया ने वारों को नाम दिए तो आर्यों ने रविमार्ग में विभाग कल्पित

कर नक्षत्रों की व्यवस्था को । इतिहासकारों के अनुसार राशि विभाग बेबीलोन की

खोज है और नक्षत्र विभाग भारत की। ज्योतिषीय गणना में सूर्य को आधार मानकर

रविमार्ग को 12 भागों में विभक्त करने से राशिचक्र का निर्माण हआ है और चन्द्र

को आधार मानकर रविमार्ग को 27 भागों में विभक्त को

क्षत्रचक्र स्थापित

तया। भारतीयों ने महीनों के नाम भी नक्षत्रों के आधार पर रखे। इससे सिद्ध होता

किमहीनों के नामकरण से पूर्व भारताय विद्वान नक्षत्रों की ईजाद कर चके

भारतीय विद्वानों ने राशि वनक्षत्र दाना का ज्योतिषीय गणना में महत्व

मानकर वर्षगणना के लिए उन्होंने ऋतुवर्ष का आधार बनाया

है। चंद्र को आधार मानकर वर्षगणना के लिए उन्होंने ऋतवर्ष-

तो माससंक्रान्ति के लिए उन्होंने सूर्य का आधार भी लिया। संक्रान्तियों को

करने के लिए भारतीयों ने रविमार्ग को 12 भागों में बांटा, परन्त उन

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संपूर्ण ज्योतिष विज्ञान-8

का नाम देने को बातस. 400 में हो पाई। लय भारतीयों में राशिवकर

का आरम्भ रविमार्ग के एक ही स्थान से किया-जो उस समय का

संपात था। आज भी भारतीय पंचांग वसंतसंपात से हो आरम्भ होता है।

परन्तु आरम्भ में वसन्तसंपात का प्रारम्भ जिस स्थान से होता था, आज उस

भार से नहीं होता। अतः भारतीय पंचांगों में मेष (राशि आरम्भ) तथा अश्विनी

निक्षत्र आरम्भ) से वर्तमान वसंतसंपात की दूरी अयनांश द्वारा दिखाते हैं।

वैदिक अचाओं में मार्गशीर्ष में वसंतसंपात होने के स्पष्ट उल्लेख पात होते

है। वैदिक काल में भी वरिंभ वसंत ऋतु से होता था। गीता में भी-मासानाम

मार्गशीर्षोऽहम् (मासों में मैं माघ ई) कहकर स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने माम मास

की महत्ता दर्शाकर इस ओर संकेत दिया है। अत: वसंत को 'वर्ष का मुख' कहा

गया है। भारतीयों को नक्षत्रों व मासों का ज्ञान ई. स. पू. 4000 वर्ष पहले हो चुका

था। उस समय के मास चन्द्रमास थे। इसी कारण तब तक भारतीय अधिमास/अधिक

मासालाध का महीना/पुरुषोत्तम मास से परिचित हो चके थे। इसका एक प्रमाण

यहां पाठकों के सम्मुख अवश्य रखेंगे-

यत् संवत्सरः तस्य त्रयोदशो मासो विष्टपम्।

यथा वा ऋषभस्य विष्टपम्।।

(ऋग्वेद)

अर्थात् संवत्सर का 13वां मास अधिमास है। बैल के कूबड़ की तरह यह

तेरहवां मास वर्ष का कूबड़ है।

वैदिक वाङ्मय में बृहस्पति व शुक्र का भी उल्लेख सर्य, चन्द्र, मंगल, शनि ।

आदि की भांति मिलता है। शक्र को तब 'वेन' कहा जाता था। (यूनान में सौंदर्य

की देवी का नाम 'वीनस' है जो शक्र के लिए प्रयक्त होता है। यनान को पंचांग ।

निर्माण का श्रेय भी जाता है। वैसे भारतीय वैज्ञानिक खगोलशास्त्र का आरम्भ ।

'आर्यभट्ट' (इ. स. की पांचवीं सदी) से माना जाता है। इससे पूर्व खगोल सम्बन्धी ।

तथ्य या तो अपूर्ण प्राप्त होते हैं या बहुत प्रतीकात्मक। (आर्यभट्ट 23 वर्ष की आयु ।

म हो खगोलविद् बन गया था।) आर्यभट्ट के अतिरिक्त भारत का दूसरा समर्थ

खगोलविद वराहमिहिर को माना गया है। खगोल के अलावा ज्योतिष में फलित।

सूत्रों के लिए भी वराह मिहिर का अत्यधिक महत्त्व है।

बाद में ब्रह्मगुप्त नामक प्रकाड खगोलविद भारत में हआ जिसने वर्षमान की

शुद्धि की। ब्रह्मगुप्त को 'गणकचक्र चूडामणि' कहा गया था। इसके बाद भारतीय

सिद्धांतकारों में प्रमुख भास्कराचार्य ( 12वीं सदी), गणेश दैवज्ञ (16वीं सदी) तथा

राजा जयसिंह (18वीं सदी) आदि हुए। उमर खैयाम जिसे लोग मात्र रूबाइयों के

शायर रूप में जानत है, बहुत बड़ा गणित तथा समर्थ खगोल शास्त्री भी था। ।

भाग (चरण) होते हैं। अत: नक्षत्र का एक भाग (139.20' +4-30.2003020'

होता है तथा एक राशि में सवा दो नक्षत्र (139.20' +13°.20'+39.20-290.80

वा 300) आते हैं। क्योंकि एक राशि 30° की होती है और एक नक्षत्र 13° 20

का(हर नक्षत्र चरण का एक वर्ण/अक्षर होता है। अत: एक नक्षत्र में 4 अक्षरावर्ण

होते हैं तथा एक राशि में सवा दो नक्षत्र होने से 9 अक्षर/वर्ण होते हैं। इस प्रकार

ये नक्षत्र न केवल जातक की जन्म राशि के आधार पर नामाक्षर निकालने में

सहयोगी होते हैं। बल्कि चन्द्र के आधार पर रविमार्ग में राशि विभाग की पहचान

भी मील के पत्थरों के रूप में करते हैं।

इन 27 नक्षत्रों के नाम क्रमश: इस प्रकार हैं-अश्विनी, भरणी, कृतिका,

रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, अश्लेषा, मघा, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी,

हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा श्रवण,

धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद तथा रेवती उत्तराषाढ़ा व श्रवण के

बीच 28वें नक्षत्र अभिजित की कल्पना भी की गई है। पौराणिक मान्यता के

अनुसार चन्द्रमा की 27 पलियां ही 27 नक्षत्र हैं। जिनमें रोहिणी चन्द्रमा को विशेष

प्रिय थी।

सूर्य एक महीने एक राशि में (सवा दो नक्षत्र) रहता है और चन्द्रमा एक दिन

एक नक्षत्र में रहता है। पाश्चात्य ज्योतिष की तुलना में भारतीय ज्योतिष फलादेश

की दृष्टि से अधिक सटीक बैठता है। क्योंकि पाश्चात्य ज्योतिष सूर्य को आधार

मानकर चलता है। अत: एक मास में उत्पन्न हुए सभी जातकों की राशि एक ही

मानता है। जबकि भारतीय ज्योतिष चन्द्रमा को आधार मानकर चलता है। इसलिए

हर सवा दो दिन में उत्पन्न जातकों की राशियां बदल जाती हैं। अत: स्थूल न होकर

यहां गणना अधिक सक्ष्म हो जाने से अधिक सटीक भी हो जाती है।

समस्या-फिर भी हमारी इस व्यवस्था में दो प्रमुख समस्याएं हैं। आप

सभी जानते हैं कि वृत्त की परिधि पर यदि गणना आरम्भ करनी हो तो किसी भी

बिन्दु को आरम्भ बिन्दु बनाया जा सकता। फिर भी आरम्भ बिन्दु पर कोई विशेषता

रहे तो सुविधा होती है। हमारे प्राचीन खगोलविदों ने रविपथ पर ऐसी विशेषता

वाले चार बिंदु खोजे-उत्तरायण, शरदसंपात, दक्षिणायन तथा वसंतसंपात । आखिर

अहान वसंतसंपात को विशेष महत्त्व देकर इसी बिन्दु को आरम्भ बिन्दु बना

लिया। इस बिन्द के निकटतम नक्षत्र को अश्विनी (प्रथम) तथा राशि को मेष

प्रथम) मानकर उन्होंने सम्पूर्ण गणित की व्यवस्था की। तब की इस व्यवस्था का

HTMAS IT IS लाग करने में दो प्रमुख समस्याएं खड़ी होती हैं।

पहली समस्या यह है कि हमारे पूर्वजों का वसंतसंपात और वर्तमान वसंतसंपात

नहा है। पृथ्वी की विषुवायन गति के कारण यह संपात बिन्दु बदलता रहता

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है। इस समस्या का वैज्ञानिक कारण यह है कि पृथ्वी पूर्ण गोल न होकर नारंगी की

भांति धुव्रों से चपटी है। दूसरे वह 237° पर झुकी हुई है (पृथ्वी की धुरी पृथ्वी

कक्षा के साथ समकोण न बनाकर 66/2° का कोण बनाती है)। पृथ्वी के इस

झुकाव का लाभ उठाकर सूर्य व चन्द्र के गुरुत्व एवं किरणीय दबाव पृथ्वी को और

अधिक झुकाने का प्रयास करते हैं। पृथ्वी अपनी धुरी पर सतत् घूर्णन करती है।

अत: इन दबावों को काफी हद तक परावर्तित व निष्क्रिय कर देती है, तो भी इतना

प्रभाव अवश्य पड़ जाता है कि पृथ्वी की घूर्णन गति कोल्हू के लाट की भांति हो

जाती है। यह गति विज्ञान की भाषा में विषुवायन के नाम से जानी जाती है।

विषुवायन गति का एक चक्र 26,000 वर्षों में पूर्ण होता है। इस गति के कारण

पृथ्वी का विषुवत् स्थिर नहीं रह पाता, वह रविमार्ग पर सरकता रहता है, जिससे

इन दोनों वृत्तों के छेदनबिन्दु (संपात) बदलते रहते हैं। परिणामत: आज का

वसंतसंपात बिन्दु आरम्भिक वसंतसंपात बिन्दु से भिन्न हो चुका है। यह एक

गम्भीर समस्या है।

दूसरी समस्या यह है कि हमारे पूर्वजों ने वसंतसंपात बिन्दु के सम्बन्ध में जो

कहा वह स्पष्ट नहीं है, सांकेतिक है। अत: जिस बिन्दु से गणना आरम्भ करनी है,

उसके विषय में आज के विद्वान एक मत नहीं हैं। कुछ उसे वसंतसंपात बिन्दु से

ही आरम्भ करने के पक्ष में हैं (जैसा कि पश्चिम के लोग करते हैं)। कुछ उसे

अश्विनी नक्षत्र के आरम्भ बिन्दु से आरम्भ करने के पक्ष में हैं। उपाय के लिए

आधुनिक वसंतसंपात तथा अश्विनी आरम्भ के बीच के अन्तर को अयनांश-

कहकर हम गणित कर रहे हैं। लेकिन यह अयनांश भी सर्वसम्मत नहीं होने से

कठिनाइयां आती हैं। इन समस्याओं से बचने के लिए 22 मार्च 1969 के अयनांश

__23°-25-27" को विद्वानों ने सर्वमान्य सम्मति प्रदान की है।

प्राय: नये ज्योतिष जिज्ञासुओं के लिए यह काफी भ्रमित करने वाला वर्गीकरण होता है। अत: उन ज्योतिष जिज्ञासुओं को बताना चाहता हूं कि जो जन्मतिथि के अनुसार राशियों का वर्गीकरण है वो मूलत: उनके जन्म के समय सूर्य जिस राशि में स्थित होता है उसको दर्शाता है। यह पद्धति पाश्चात् ज्योतिषियों द्वारा उपयोग में लायी जाती है। जहां तक दूसरे वर्गीकरण का सवाल है। जो कि जन्मकुण्डली के आधार पर होता है वह जन्म के समय चन्द्रमा जिस राशि में विचरण करता है उसको दर्शाता है। यह पद्धति हिन्दू अथवा वैदिक ज्योतिषियों द्वारा उपयोग में लायी जाती है। दोनों पद्धतियों में मूलत: फर्क ये है कि सूर्य एक राशि में तीस दिन विचरण करता है। अत: उन तीस दिनों के मध्य पैदा होने वाले सभी जातक सूर्य राशि जैसे मेष जो उपरोक्त उदाहरण में बताया गया था के अन्तर्गत आते हैं। वहीं वैदिक ज्योतिष में चन्द्रमा को आधार मानकर दिन का निर्णय किया जाता है। चन्द्रमा एक राशि में सवा दो दिन रहता है। अत: सवा दो दिन के मध्य पैदा होने वाले जातक का राशिफल वैदिक ज्योतिषियों द्वारा किया जाता है। वैदिक ज्योतिष ज्यादा सटीकता से राशिफल बताने में सक्षम होती है क्योंकि वह काल को सूक्ष्म स्तर पर विभाजित करने में सक्षम है। जो ज्योतिष को जानते हैं उन्हें पता है कि वैदिक ज्योतिष के माध्यम से अत्यन्त सूक्ष्म काल की गणना की जा सकती है।

हम अखबार अथवा टेलीविजन कार्यक्रम के माध्यम से आज का दिन कैसा जायेगाकी जिज्ञासा हेतु रोज सुबह पढ़ते अथवा देखते हैं। वहां पर भी दो तरह के वर्गीकरणों में चीजें दिखायी जाती हैं, पहला तो हमारी जन्मतिथि के अनुसार भाग्य बताया जाता है। जैसे अगर हम 20 मार्च से 18 अप्रैल के मध्य हमारा जन्मदिन पड़ता है तो हम मेष राशि के कहलाते हैं। वहीं दूसरी ओर देखने को मिलता है कि कुछ जगह राशियों का वर्गीकरण हमारी जन्मकुण्डली के अनुसार होता है।

 उदाहरण-कि सवा दो दिन एक राशि में विचरण करने वाला चन्द्रमा उस दौरान करीब तीन नक्षत्र भी बदल लेता है। बहरहाल ये काफी गहरा विषय है जिसपर पूर्णत: नया लेख लिखा जा सकता है। अभी हम जानने का प्रयास करते है कि ज्योतिष के अनुसार राशियों का और भी कई तरह का वर्गीकरण उपलब्ध है जो मुख्यत: निम्नलिखित तीन प्रमुख वर्गीकरणों में आता है:-

ध्रुवीकरण या लिंग के अनुसार वर्गीकरण

कार्यसिद्धान्तों के हिसाब से वर्गीकरण

तत्वों के हिसाब से वर्गीकरण

प्रथम वर्गीकरण जो कि ध्रुवों के आधार पर होता है अथवा स्त्री और पुरुष राशियों के रूप में विभक्त है जिसे चीनी ज्योतिषविद् यांग एवं यिंन के रूप में जानते हैं। मूलत: पुरूष राशियां अथवा धनात्मक राशियों का अर्थ होता है वाह्यमुखी, भौतिकवादी एवं चीजों को प्राप्त करने के लिए प्रयासरत रहने वाली राशियां होती हैं।

वहीं पर स्त्री अथवा ऋणात्मक राशियां अन्तर्मुखी आध्यात्मवादी एवं चीजों को ग्रहण करने वाली राशियां होती हैं।

ज्योतिष में पुरूष राशिया होती है :

 मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु एवं कुंभ।

इसी तरह स्त्री राशियां होती है: वृष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर एवं मीन राशियां।

दूसरा वर्गीकरण कार्य सिद्धान्तों के अनुसार होता है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि विश्वविख्यात वैज्ञानिक न्यूटन ने कार्य सिद्धान्त के तीन प्रमुख नियम दिये थे जिन्हे गति के नियमके नाम से जाना जाता है। प्रथम नियम था कि कोई वस्तु अपने स्थिरावस्था में तब तक रहती है जब तक कि उसे कोई बाहरी बल न दिया जाएइसी नियम को ज्योतिष स्थिर राशि के रूप में कहती है।

दूसरा नियम था कि कोई भी वस्तु तबतक गतिमान रहती है जबतक किसी बाह्य बल से रोका न जाएइसी नियम को ज्योतिष चर राशि के रूप में कहती है। इसी तरह तीसरा एवं अन्तिम नियम था कि हर क्रिया की समान प्रतिक्रिया भी होती हैइसी नियम को ज्योतिष द्विस्वभाव राशि कहती है।

चर राशियां क्रियाशील राशियां होती हैं एवं हमेशा कुछ करने को आतुर रहती है जैसे कि

मेष, कर्क, तुला एवं मकर राशियां।

 स्थिर राशियां दृढ़ता को दर्शाती हैं जैसे कि

वृष, सिंह, वृश्चिक एवं कुंभ राशियां।

 द्विस्वभावी राशियां लचीलापन और सुग्राह्य होती है जैसे कि मिथुन, कन्या, धनु एवं मीन राशिया।

राशियों का तीसरा वर्गीकरण तत्वों के आधार पर होता है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि यह शरीर पंचतत्वों (आकाश, अग्नि, वायु, पृथ्वी एवं जल) से बना है। उसी प्रकार राशियों को भी तत्वों के अनुसार विभक्त किया गया है।

अग्नि तत्व की राशियां उर्जा को दर्शाती हैं मेष, सिंह एवं धनु अग्नि तत्व की राशियां होती है।

 वायु तत्व की राशियां संचार को दर्शाती हैं मिथुन, तुला एवं कुंभ राशियां वायु तत्व की राशियां हैं।

पृथ्वी तत्व की राशियां स्थिरता एवं भौतिकता को दर्शाती हैं। वृष, कन्या एवं मकर राशियां पृथ्वी तत्व की राशियां हैं।

 जल तत्व की राशियां भाव प्रधान एवं अध्यात्मिक होती हैं कर्क, वृश्चिक एवं मीन जल तत्व की राशियां हैं।

आकाश तत्व समस्त राशियों में विद्यमान है अत: इसका अलग से वर्गीकरण सम्भव नहीं है। आकाश तत्व शून्यताको दर्शाता है। इस तत्व को हम यू समझ सकते हैं कि जैसे समस्त आत्माओं में परमात्मा व्याप्त है उसी तरह आकाश तत्व अन्य सभी तत्वों में विलीन है। हमारा अन्तिम उद्देश्य है कि हमारा जीवन आकाश तत्व की ओर बढ़े। जहां समस्त विकार (काम, क्रोध, मोह, लोभ, मद, मत्सर) शून्य हो जाते है।

राशियों के अन्य कई वर्गीकरण ज्योतिष शास्त्र में उपलब्ध है। ज्योतिष जिज्ञासुओं को इस ओर ध्यान दिलाना चाहता हूं कि एक राशि कई वर्गीकरणों में आती है। जैसे कि मनुष्य बहुविमीय (मल्टीडायमेन्शनल) होता है उसी प्रकार मनुष्य के बारे में बताने वाली राशियां भी बहुविमीय होती है।

उदाहरण मेष राशि पुरूष प्रधान राशि है, चर राशि है तथा अग्नि तत्व की राशि भी है। यह वर्गीकरण मेष राशि एवं मेष राशि जातकों को काफी बेहतर रूप से बताता है जैसा कि प्राय: होता भी है कि मेष राशि जातक में पुरूष प्रधान गुण होते होते हैं, वह उर्जा से भरपूर होता है एवं यही उर्जा की अधिकता उसे चलायमान बनाती है (चर राशि के गुण)। मेष जातक ज्यादातर पित्त (एसीडिटी) की शिकायत से जूझते रहते हैं कारण कि मेष राशि अग्नि तत्व की राशि है एवं उदर में अत्यधिक जठराग्नि अत्यधिक अम्लों को स्त्रावित करती है जिससे कि पित्त की शिकायत बनी रहती है। अत: मेष जातकों को हमेशा क्षारीय (एल्कलाईन) भोजन को ग्रहण करना चाहिए। इसी तरह अन्य राशियों के वर्गीकरण को अगर हम एकाकीकरण करेंगे तो हमें उन राशियों की सबलता एवं निर्बलता का पता चल जायेगा।

ज्योतिष में बारह राशियों का कुल मान 360 डिग्री होता है. प्रत्येक राशि 30 डिग्री की होती है. अब आप यह समझे कि कौन सी राशि कहाँ पर आती है.

राशियों के भी वर्ण होते हैं जैसे :-

वृषभ, वृश्चिक, मीन ----ये तीन राशियाँ ब्राह्मण वर्ग की हैं |

मेष, सिंह, धनु,----ये तीन राशियाँ क्षत्रिय वर्ण की हैं

मिथुन, तुला, कुम्भ----ये तीन राशियाँ वैश्य वर्ण की हैं

कर्क, कन्या, मकर ----ये तीन राशियाँ शूद्र वर्ण की हैं

विभिन्न राशियों में जन्मे जातकों के गुण भी वर्ण विशेष के अनुसार होते हैं जैसे :-

ब्राह्मण वर्ण में जन्मे जातक सात्विक

क्षत्रिय व वैश्य वर्ण में जन्मे जातक राजसी

एवं शूद्र वर्ण में जन्मे जातक तामसी होंगे

यह निर्विर्वाद सत्य है कि जाति या वर्ण हमारे ही बनाए हुए हैं | एक ब्राहमण के घर शूद्र जन्म ले सकता है और एक शूद्र के घर ब्राह्मण जन्म ले सकता है | किसी ब्राह्मण के घर में कर्क, कन्या, मकर राशि या लगन के जन्मे जातक शूद्र जाति के होते हैं | किसी शूद्र के घर में वृषभ,वृश्चक और मीन लगन राशि में जन्मे जातक ब्राह्मण होते हैं

यहाँ वर्ण कोई जाती वंश परंपरा से नहीं अपितु  स्वाभाव और कर्म गुण पर आधारित है

राशि  राशि का मान

मेष  0-30 अंश(Degree)

वृष  30-60 अंश

मिथुन  60-90 अंश

कर्क  90-120 अंश

सिंह  120-150 अंश

कन्या  150-180 अंश

तुला  180-210 अंश

वृश्चिक  210-240 अंश

धनु  240-270 अंश

मकर  270-300 अंश

कुम्भ  300-330 अंश

मीन  330-360 अंश

आशा है कि आपको राशियों का वर्गीकरण अंशों(Degrees) के आधार पर समझ आ गया होगा. अब आप राशियों का वर्गीकरण नक्षत्रों के आधार पर समझने की कोशिश करें. चन्द्रमा एक नक्षत्र को पार करने में 22 से 26 घण्टे तक का समय लेता है. कुल 27 नक्षत्र हैं. एक नक्षत्र का मान 13 डिग्री 20 मिनट का होता है. एक नक्षत्र के चार चरण होते हैं. 13 डिग्री 20 मिनट के चार बराबर भाग किए जाएँ तो एक चरण का मान 3 डिग्री 20 मिनट का होता है. 

राशियों का वर्गीकरण नक्षत्रों के आधार पर | Classification of the Signs based on Nakshatra

मेष राशि | Aries

0 से 13 डिग्री 20 मिनट तक अश्विनी नक्षत्र रहता है. इसमें अश्विनी के चारों चरण आते हैं.

13 डिग्री 20 मिनट से 26 डिग्री 40 मिनट तक भरणी नक्षत्र रहता है. भरणी के चारों चरण आते हैं.

26 डिग्री 40 मिनट से 30 डिग्री तक कृतिका नक्षत्र का प्रथम चरण रहता है. कृतिका के अन्य तीन चरण वृष राशि में आएंगें.

वृष राशि | Taurus

0 से 10 डिग्री तक कृतिका नक्षत्र के तीन चरण आते हैं.

10 से 23 डिग्री 20 मिनट तक रोहिणी नक्षत्र के चारों चरण आते हैं.

23 डिग्री 20 मिनट से 30 डिग्री तक मृगशिरा नक्षत्र के दो चरण आते हैं.

मिथुन राशि Gemini

0 से 6 डिग्री 40 मिनट तक मृ्गशिरा नक्षत्र के दो चरण आते हैं.

6 डिग्री 40 मिनट से 20 डिग्री तक आर्द्रा नक्षत्र के चारों चरण आते हैं.

20 डिग्री से 30 डिग्री तक पुनर्वसु नक्षत्र के तीन चरण आते हैं.

कर्क राशि | Cancer

0 से 3 डिग्री 20 मिनट तक पुनर्वसु नक्षत्र का चौथा चरण आता है.

3 डिग्री 20 मिनट से 16 डिग्री 40 मिनट तक पुष्य नक्षत्र के चारों चरण आते हैं.

16 डिग्री 40 मिनट से 30 डिग्री तक अश्लेषा नक्षत्र के चारों चरण आते हैं.

सिंह राशि | Leo

0 से 13 डिग्री 20 मिनट तक मघा नक्षत्र के चारों चरण आते हैं.

13 डिग्री 20 मिनट से 26 डिग्री 40 मिनट तक पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के चारों चरण आते हैं.

26 डिग्री 40 मिनट से 30 डिग्री तक उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का प्रथम चरण आता है.

कन्या राशि | Virgo

0 से 10 डिग्री तक उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के तीन चरण आते हैं.

10 डिग्री से 23 डिग्री 20 मिनट तक हस्त नक्षत्र के चारों चरण आते हैं.

23 डिग्री 20 से 30 डिग्री तक चित्रा नक्षत्र के प्रथम दो चरण अते हैं.

तुला राशि | Libra

0 से 6डिग्री 40 मिनट तक चित्रा नक्षत्र के बाकी दो चरंण आते है.

6 डिग्री 40 मिनट से 20 डिग्री तक स्वाति नक्षत्र के चारों चरण आते हैं.

20 डिग्री से 30 डिग्री तक विशाखा नक्षत्र के तीन चरण आते हैं.

वृश्चिक राशि | Scorpio

0 से 3 डिग्री 20 तक विशाखा नक्षत्र नक्षत्र का चौथा चरण आता है.

3 डिग्री 20 मिनट से 16 डिग्री 40 मिनट तक अनुराधा नक्षत्र के चार चरण आते हैं.

16 डिग्री 40 मिनट से 30 तक ज्येष्ठा नक्षत्र के चारों चरण आते हैं.

धनु राशि | Sagittarius

0 से 13 डिग्री 20 मिनट तक मूल नक्षत्र के चार चरण आते हैं.

13 डिग्री 20 मिनट से 26 डिग्री 40 मिनट तक पूर्वाषाढा़ नक्षत्र के चार चरण आते हैं.

26 डिग्री 40 मिनट से 30 डिग्री तक उत्तराषाढा़ नक्षत्र का प्रथम चरण आता है.

मकर राशि | Capricorn

0 से 10 डिग्री तक उत्तराषाढा़ नक्षत्र के तीन चरण आते हैं.

10 डिग्री से 23 डिग्री 20 मिनट तक श्रवण नक्षत्र के चार चरण आते हैं.

23 डिग्री 20 मिनट से 30 डिग्री तक धनिष्ठा नक्षत्र के दो चरण आते हैं.

कुम्भ राशि | Aquarius

0 से 6 डिग्री 40 मिनट तक धनिष्ठा नक्षत्र के दो चरण आते हैं.

6 डिग्री 40 मिनट से 20 डिग्री तक शतभिषा नक्षत्र के चारों चरण आते हैं.

20 डिग्री से 30 डिग्री तक पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के तीन चरण आते हैं.

मीन राशि | Pisces

0 से 3 डिग्री 20 मिनट तक पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का चीथा चरण रहता है.

3 डिग्री 20 मिनट से 16 डिग्री 40 मिनट तक उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के चारों चरण आते हैं.

16 डिग्री 40 मिनट से 30 डिग्री तक रेवती नक्षत्र के चारों चरण आते हैं.

तत्वों के अनुसार राशियों का वर्गीकरण

तत्वों के आधार पर सभी बारह राशियों को चार भागों में बाँटा गया है. यह चार तत्व अग्नि,पृथ्वी, वायु तथा जल है. जो राशि जिस तत्व में आती है उसका स्वभाव भी उस तत्व के गुण धर्म के अनुसार हो जाता है. उदाहरण के लिए किसी जातक की राशि जलतत्व है तब उसके स्वभाव में जल के गुण पाएं जाएंगे जैसे कि वह स्वभाव से लचीला हो सकता है और परिस्थिति अनुसार अपने को ढालने में सक्षम भी हो सकता है. जल की तरह नरम होगा तथा भावनाएँ भी कूट-कूटकर भरी होगी इसलिए शीघ्र भावनाओं में बहने वाला होगा.

 इसी तरह से अन्य राशियों के गुण भी उनके तत्वानुसार होगें. आइए जानने का प्रयास करते हैं।

अग्नि तत्व

मेष, सिंह व धनु राशियां इस वर्ग में आती हैं. अग्नि तत्व वाले जातक दृढ़ इच्छा शक्ति वाले, कर्मशील और गतिशील रहते हैं. अग्नि के समान ज्वाला भी इनमें देखी जा सकती है और हर कार्य में अत्यधिक जल्दबाज भी होते हैं.

पृथ्वी तत्व

वृष, कन्या व मकर राशियां इस वर्ग में आती हैं.व्यक्ति पृथ्वी के समान ही सहनशील होता है,मेहनती होता है, जमीन से जुड़ा होता है,धैर्य भी बहुत रहता है, संतोषी होता है तथा व्यवहारिक भी होता है. सांसारिक सुख चाहता है लेकिन समस्याओं के प्रति उदासीन रहता है.

वायु तत्व

मिथुन, तुला तथा कुंभ राशियाँ इस वर्ग में आती हैं. जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है इस राशि का व्यक्ति वायु की तरह हवा में बहुत बहता है अर्थात अत्यधिक विचारशील होता है, सोचना अधिक लेकिन करना कम. कल्पनाशील बहुत होता है लेकिन इन्हें बुद्धिमान भी कहा जाएगा. अनुशानप्रिय होने के साथ विचारों को हवा बहुत देते है. मन के घोड़े दौड़ाते ही रहते हैं.

जलतत्व

कर्क, वृश्चिक तथा मीन राशियाँ इस वर्ग में आती हैं. यह अत्यधिक भावुक तथा संवेदनाओं से भरे हुए रहते हैं. शीघ्र ही बातों में आने वाले होते हैं और खुद भी बातूनी होते हैं. स्वभाव से लचीले होते हैं और जिसने जो कहा वही ठीक है, अपने विचार इसी कारण ठोस आधार नहीं रखते हैं. मित्र प्रेमी होते हैं और स्वाभिमान भी इनमें देखा जा सकता है.

स्वभाव के अनुसार राशियों का वर्गीकरण

राशियों के स्वभावानुसार इन्हें तीन श्रेणियों में बाँटा गया है. चर, स्थिर तथा द्विस्वभाव राशि. हर श्रेणी में चार-चार राशियाँ आती है और इन श्रेणियों के अनुसार ही इनका स्वभाव भी होता है. आइए इसे भी समझने का प्रयास करते हैं.

चर राशि

मेष, कर्क, तुला व मकर राशियाँ इस श्रेणी में आती है. जैसा नाम है वैसा ही इन राशियों का काम भी है. चर मतलब चलायमान तो इस राशि के जातक कभी टिककर नहीं बैठ सकते हैं. हर समय कुछ ना कुछ करते रहना इनकी फितरत में देखा गया है. व्यक्ति में आलस नहीं होता है, क्रियाशील रहता है.गतिशील व क्रियाशील इनका मुख्य गुण होता है. ये परिवर्तन पसंद करते हैं और एक स्थान पर टिककर नहीं रह पाते हैं. ये तपाक से निर्णय लेने की क्षमता रखते हैं.

स्थिर राशि

वृष, सिंह, वृश्चिक व कुंभ राशियाँ इस श्रेणी में आती हैं. इनमें आलस का भाव देखा गया है इसलिए अपने स्थान से ये आसानी से हटते नहीं हैं. इन्हें बार-बार परिवर्तन पसंद नहीं होता है. धैर्यवान होते हैं और यथास्थिति में ही रहना चाहते हैं. इनमें जिद्दीपन भी देखा गया है. कोई भी काम जल्दबाजी में नहीं करते और बहुत ही विचारने के बाद महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैं.

द्विस्वभाव राशि

मिथुन, कन्या, धनु व मीन राशियाँ इस श्रेणी में आती है. इन राशियों में चर तथा स्थिर दोनों ही राशियों के गुण देखे जा सकते हैं. इनमें अस्थिरता रहती है और शीघ्र निर्णय लेने का अभाव रहता है. इनमें अकसर नकारात्मकता अधिक देखी जाती है.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आकाश मंडल में 360 अंश हैं, इन्हें 12 राशियों एवं 27 नक्षत्रों में बांटा गया है। एक राशि में 30 अंश हैं। प्रत्येक भाग अपने-आप में एक आकृति बनाता है। इसी आकृति के आधार पर प्रत्येक राशि का नाम रखा गया है। नाम के अनुरूप सभी राशियों का अपना अलग-अलग महत्व होता है।

मेष- इसका राशि स्वामी मंगल है तथा यह राशि पूर्व दिशा की स्वामिनी है। यह राशि पुरुष-जाति, लाल-पीले वर्गवर्ण कांतिहीन, क्षत्रिय वर्ण, अग्नि तत्व वाली, चर संज्ञक समान अंगों वाली, अल्प सन्ततिवान तथा पित्त प्रकृति कारक है। इसका स्वभाव अहंकारी, साहसी तथा मित्रों के प्रति दयालुता का है। इसके द्वारा मस्तक का विचार किया जाता है।

वृषभ- इसका राशि स्वामी शुक्र है तथा यह दक्षिण दिशा की स्वामिनी है। यह राशि स्त्री जाति, श्वेत वर्ण, कान्तिहीन, वैश्य वर्ण, भूमि तत्व वाली, स्थिर संज्ञक, शिथिल शरीर, शुभकारक तथा महाशब्दकारी है। इसका स्वभाव स्वार्थी, सांसारिक कार्यों में दक्षता तथा बुद्धिमत्ता से काम लेने का है। इसे अर्द्धजलराशि भी कहा जाता है। इसके द्वारा मुंह और कपोलों का विचार किया जाता है।

मिथुन- इसका राशि स्वामी बुध है। यह पश्चिम दिशा की स्वामिनी है। यह राशि पुरुष जाति, हरित वर्ण, चिकनी, शूद्र वर्ण, पश्चिम वायु तत्व वाली, ऊष्ण, महाशब्दकारी, मध्यम संतति वाली, शिथिल तथा विषमोदयी है। इसका स्वभाव शिल्पी तथा विद्याध्ययनी है। इसके द्वारा शरीर के कंधों तथा बाजुओं का विचार किया जाता है।

कर्क- इसका राशि स्वामी चंद्रमा है। यह उत्तर दिशा की स्वामिनी है। यह राशि स्त्री जाति, रक्त धवल मिश्रित वर्ण, जलचारी, सौम्य तथा कफ प्रकृति वाली, बहुसंतान एवं चरण रात्रिबली तथा समोदयी है। इसका स्वभाव लज्जा, सांसारिक उन्नति के लिए प्रयत्नशील रहना तथा समय के अनुसार चलना है। इसके द्वारा वक्षस्थल एवं गुर्दे पर विचार किया जाता है।

सिंह- इसका राशि स्वामी सूर्य है। यह पूर्व दिशा की स्वामिनी है। यह राशि पुरुष जाति, पीत वर्ण, क्षत्रिय वर्ण, पित्त प्रकृति, अग्नि तत्व वाली, ऊष्ण स्वभाव, पुष्ट शरीर, यात्राप्रिय, अल्प सन्तानविद् तथा निर्जल है। इसका स्वभाव मेष राशि के समान है, परंतु इसमें उदारता एवं स्वातन्त्र्यप्रियता अधिक पाई जाती है। इसके द्वारा हृदय का विचार किया जाता है।

कन्या- इसका राशि स्वामी बुध है। यह दक्षिण दिशा की स्वामिनी है। यह राशि स्त्री जाति, पिंगल वर्ण, द्विस्वभाव, वायु तथा शीत प्रकृति, पृथ्वी तत्व वाली, रात्रिबली तथा अल्प सन्तति वाली है। इसका स्वभाव मिथुन राशि जैसा है, परंतु यह अपनी उन्नति तथा सम्मान पर विशेष रूप से ध्यान देती है। इसके द्वारा पेट का विचार किया जाता है।

तुला- इसका राशि स्वामी शुक्र है। यह पश्चिम दिशा की स्वामिनी है। यह राशि पुरुष जाति, श्याम वर्ण, चर संज्ञक, शूद्र वर्ण, वायु तत्व वाली, दिनबलि, क्रूर स्वभाव, शीर्षोदयी, अल्प सन्ततिवान तथा पादजल राशि है। इसका स्वभाव ज्ञान-प्रिय, राजनीतिज्ञ, विचारशील एवं कार्य सम्पादक है। इसके द्वारा नाभि से नीचे के अंगों का विचार किया जाता है।

वृश्चिक- इसका राशि स्वामी मंगल है। यह उत्तर दिशा की स्वामिनी है। यह राशि स्त्री जाति, शुभ वर्ण, कफ प्रकृति, ब्राह्मण वर्ण, उत्तर दिशा की स्वामिनी, रात्रिबली, बहु सन्ततिवान तथा अर्द्धजल तत्व वाली है। इसका स्वभाव स्पष्टवादी, निर्मल, दृढ़ प्रतिज्ञ, हठी तथा दम्भी है। इसके द्वारा जननेन्द्रिय का विचार किया जाता है।

धनु- इसका राशि स्वामी गुरु है। यह पूर्व दिशा की स्वामिनी है। यह राशि पुरुष जाति, स्वर्ण वर्ण, द्विस्वभाव, क्षत्रिय वर्ण, दिनबली, पित्त प्रकृति, अग्नि तत्व वाली, अल्प सन्ततिवान, दृढ़ शरीर तथा अर्द्धजल तत्व वाली राशि है। इसका स्वभाव करुणामय, मर्यादाशील तथा अधिकारप्रिय है। इसके द्वारा पाँवों की संधि तथा जंघाओं पर विचार किया जाता है।

मकर- इसका राशि स्वामी शनि है। यह दक्षिण दिशा की स्वामिनी है। यह राशि स्त्री जाति, पिंगल वर्ण, रात्रिबली, वैश्य वर्ण, पृथ्वी तत्व वाली, शिथिल शरीर तथा वात प्रकृति वाली है। इसका स्वभाव उच्च स्थिति का अभिलाषी है। इसके द्वारा पाँव के घुटनों का विचार किया जाता है।

कुंभ- इसका राशि स्वामी शनि है। यह पश्चिम दिशा की स्वामिनी है। यह राशि पुरुष जाति, विचित्र वर्ण, वायु तत्व वाली, शूद्र वर्ण, त्रिदोष प्रकृति वाली, ऊष्ण स्वभाव, अर्द्धजल, मध्यम संतान वाली, शीर्षोदय, क्रूर तथा दिनबली है। इसका स्वभाव शांत, विचारशील, धार्मिक तथा नवीन वस्तुओं का आविष्कारकर्ता है। इसके द्वारा पेट के भीतरी भागों का विचार किया जाता है।

मीन- इसका राशि स्वामी गुरु है। यह उत्तर दिशा की स्वामिनी है। यह राशि स्त्री जाति, पिंगल वर्ण, जल तत्व वाली, ब्राह्मण वर्ण, कफ प्रकृति तथा रात्रिबली है। यह पूर्ण रूप से जल राशि है। इसका स्वभाव दयालु, दानी तथा श्रेष्ठ है। इसके द्वारा पैरों का विचार किया जाता है।

राशि अनुसार मनुष्य के अंदर क्या कमियां होती हैं सभी व्यक्तियों में कोई न कोई कमी अवश्य होती है और ये कमी कई बार तरक्की की राह में अड़चन भी बन जाती है। हम आपको यहां राशि अनुसार व्यक्ति के अंदर क्या कमियां होती हैं जो उसे तरक्की करने से रोकती हैं इसके बारे में बता रहे हैं। आइए आपको बताते हैं इन कमियों के बारे में   ........... मेष राशि :- मेष राशि के जातक अपने गुस्से पर नियंत्रण नहीं रख पाते हैं और ये जल्दी ही अपना आपा खो बैठते हैं। इनकी यही कमी इनकी तरक्की की राह कठिन कर देती है। वृष राशि :- वृष राशि के जातकों का स्वभाव जिद्दी होता है, अपने जिद्दी स्वभाव के कारण ये दूसरों की सुनते कम हैं और अपने मन की करने में लगे रहते हैं। इनके अंदर यही सबसे बड़ी कमी होती है जो इन्हें आगे नहीं बढ़ने देती है।  मिथुन राशि :- इस राशि के जातक दूसरों की बातों में जल्दी आ जाते हैं और इसी कारण ये अपने काम को सही तरीके से नहीं कर पाते हैं, इनकी यही कमी इन्हें आगे नहीं बढ़ने देती है। कर्क राशि :- कर्क राशि के जातक ज्यादा व्यवहारिक नहीं होते हैं जिसके कारण ये लोगों के दिलों में अपनी जगह नहीं बना पाते हैं।  सिंह राशि :- सिंह राशि के जातकों की ज्यादा खर्च करने की चाह इन्हें कहीं का नहीं छोड़ती है, कई बार आगे बढ़ने के लिए ये गलत तरीकों का भी इस्तेमाल करते हैं जिसके लिए इन्हें आगे चलकर पछताना पड़ता है।   कन्या राशि :- कन्या राशि के जातक स्वभाव से घमंडी होते हैं, ये अपने आगे दूसरों को कमतर समझते हैं, इनकी यही कमी इनकी उन्नति की राह में रोड़ा बनती है।  तुला राशि :- तुला राशि के जातक जरूरत से ज्यादा दूसरों की मदद करने के बारे में सोचते हैं, इनकी इसी कमी का फायदा उठाकर लोग इनसे आगे निकल जाते हैं। वृश्चिक राशि :- वृश्चिक राशि के जातकों की सबसे बड़ी कमी होती है जल्दी आपा खोना, ये छोटी-छोटी बात पर गुस्से में आ जाते हैं, जो इनकी तरक्की की राह में बाधा बनता है। धनु राशि :- धनु राशि के जातक किसी काम को करने के बजाय ज्यादा बोलने में विश्वास रखते हैं, इनका बडबोलापन ही इनकी तरक्की को रोकता रहता है।  

मकर राशि :- मकर राशि के जातकों को यह गलतफहमी होती है कि उनमें कोई कमी नहीं है और उनकी यही कमी इन्हें आगे बढ़ने से रोकती है।  कुंभ राशि :- कुंभ राशि के जातक अपनी बात को सही मानकर दूसरों से बहस करते रहते हैं, जो इनके लिए ही घातक होती है।   मीन राशि :- मीन राशि के जातकों में आत्मविश्वास की थोड़ी कमी होती है, इनकी यही कमी इन्हें आगे बढ़ने से रोकती है।   (आपकी कुंडली के ग्रहों के आधार पर राशिफल और आपके जीवन में घटित हो रही घटनाओं में भिन्नता हो सकती है। पूर्ण जानकारी के लिए कृपया किसी पंड़ित या ज्योतिषी से संपर्क करें।)

मेष- चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो,

राशि स्वरूप: मेंढा जैसा, राशि स्वामी- मंगल।

1. राशि चक्र की सबसे प्रथम राशि मेष है। जिसके स्वामी मंगल है। धातु संज्ञक यह राशि चर (चलित) स्वभाव की होती है। राशि का प्रतीक मेढ़ा संघर्ष का परिचायक है।

2. मेष राशि वाले आकर्षक होते हैं। इनका स्वभाव कुछ रुखा हो सकता है। दिखने में सुंदर होते है। यह लोग किसी के दबाव में कार्य करना पसंद नहीं करते। इनका चरित्र साफ -सुथरा एवं आदर्शवादी होता है।

3. बहुमुखी प्रतिभा के स्वामी होते हैं। समाज में इनका वर्चस्व होता है एवं मान सम्मान की प्राप्ति होती है।

4. निर्णय लेने में जल्दबाजी करते है तथा जिस कार्य को हाथ में लिया है उसको पूरा किए बिना पीछे नहीं हटते।

5. स्वभाव कभी-कभी विरक्ति का भी रहता है। लालच करना इस राशि के लोगों के स्वभाव मे नहीं होता। दूसरों की मदद करना अच्छा लगता है।

6. कल्पना शक्ति की प्रबलता रहती है। सोचते बहुत ज्यादा हैं।

7. जैसा खुद का स्वभाव है, वैसी ही अपेक्षा दूसरों से करते हैं। इस कारण कई बार धोखा भी खाते हैं।

8. अग्नितत्व होने के कारण क्रोध अतिशीघ्र आता है। किसी भी चुनौती को स्वीकार करने की प्रवृत्ति होती है।

9. अपमान जल्दी भूलते नहीं, मन में दबा के रखते हैं। मौका पडने पर प्रतिशोध लेने से नहीं चूकते।

10. अपनी जिद पर अड़े रहना, यह भी मेष राशि के स्वभाव में पाया जाता है। आपके भीतर एक कलाकार छिपा होता है।

11. आप हर कार्य को करने में सक्षम हो सकते हैं। स्वयं को सर्वोपरि समझते हैं।

12. अपनी मर्जी के अनुसार ही दूसरों को चलाना चाहते हैं। इससे आपके कई दुश्मन खड़े हो जाते हैं।

13. एक ही कार्य को बार-बार करना इस राशि के लोगों को पसंद नहीं होता।

14. एक ही जगह ज्यादा दिनों तक रहना भी अच्छा नहीं लगता। नेतृत्व छमता अधिक होती है।

15. कम बोलना, हठी, अभिमानी, क्रोधी, प्रेम संबंधों से दु:खी, बुरे कर्मों से बचने वाले, नौकरों एवं महिलाओं से त्रस्त, कर्मठ, प्रतिभाशाली, यांत्रिक कार्यों में सफल होते हैं।

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वृष- ई, , , , वा, वी, वू, वे, वो

राशि स्वरूप- बैल जैसा, राशि स्वामी- शुक्र।

राशि परिचय

1. इस राशि का चिह्न बैल है। बैल स्वभाव से ही अधिक पारिश्रमी और बहुत अधिक वीर्यवान होता है, साधारणत: वह शांत रहता है, किन्तु क्रोध आने पर वह उग्र रूप धारण कर लेता है।

2. बैल के समान स्वभाव वृष राशि के जातक में भी पाया जाता है। वृष राशि का स्वामी शुक्र ग्रह है।

3. इसके अन्तर्गत कृत्तिका नक्षत्र के तीन चरण, रोहिणी के चारों चरण और मृगशिरा के प्रथम दो चरण आते हैं।

4. इनके जीवन में पिता-पुत्र का कलह रहता है, जातक का मन सरकारी कार्यों की ओर रहता है। सरकारी ठेकेदारी का कार्य करवाने की योग्यता रहती है।

5. पिता के पास जमीनी काम या जमीन के द्वारा जीविकोपार्जन का साधन होता है। जातक अधिकतर तामसी भोजन में अपनी रुचि दिखाता है।

6. गुरु का प्रभाव जातक में ज्ञान के प्रति अहम भाव को पैदा करने वाला होता है, वह जब भी कोई बात करता है तो स्वाभिमान की बात करता है।

7. सरकारी क्षेत्रों की शिक्षा और उनके काम जातक को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

8. किसी प्रकार से केतु का बल मिल जाता है तो जातक सरकार का मुख्य सचेतक बनने की योग्यता रखता है। मंगल के प्रभाव से जातक के अंदर मानसिक गर्मी प्रदान करता है।

9. कल-कारखानों, स्वास्थ्य कार्यों और जनता के झगड़े सुलझाने का कार्य जातक कर सकता है, जातक की माता के जीवन में परेशानी ज्यादा होती है।

10. ये अधिक सौन्दर्य प्रेमी और कला प्रिय होते हैं। जातक कला के क्षेत्र में नाम करता है।

11. माता और पति का साथ या माता और पत्नी का साथ घरेलू वातावरण मे सामंजस्यता लाता है, जातक अपने जीवनसाथी के अधीन रहना पसंद करता है।

12. चन्द्र-बुध जातक को कन्या संतान अधिक देता है और माता के साथ वैचारिक मतभेद का वातावरण बनाता है।

13. आपके जीवन में व्यापारिक यात्राएं काफी होती हैं, अपने ही बनाए हुए उसूलों पर जीवन चलाता है।

14. हमेशा दिमाग में कोई योजना बनती रहती है। कई बार अपने किए गए षडयंत्रों में खुद ही फंस भी जाते हैं।

15. रोहिणी के चौथे चरण के मालिक चन्द्रमा हैं, जातक के अंदर हमेशा उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रहती है, वह अपने ही मन का राजा होता है।

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मिथुन- का, की, कू, , , , के, को,

राशि स्वरूप- स्त्री-पुरुष आलिंगनबद्ध, राशि स्वामी- बुध।

1. यह राशि चक्र की तीसरी राशि है। राशि का प्रतीक युवा दम्पति है, यह द्वि-स्वभाव वाली राशि है।

2. मृगसिरा नक्षत्र के तीसरे चरण के मालिक मंगल-शुक्र हैं। मंगल शक्ति और शुक्र माया है।

3. जातक के अन्दर माया के प्रति भावना पाई जाती है, जातक जीवनसाथी के प्रति हमेशा शक्ति बन कर प्रस्तुत होता है। साथ ही, घरेलू कारणों के चलते कई बार आपस में तनाव रहता है।

4. मंगल और शुक्र की युति के कारण जातक में स्त्री रोगों को परखने की अद्भुत क्षमता होती है।

5. जातक वाहनों की अच्छी जानकारी रखता है। नए-नए वाहनों और सुख के साधनों के प्रति अत्यधिक आकर्षण होता है। इनका घरेलू साज-सज्जा के प्रति अधिक झुकाव होता है।

6. मंगल के कारण जातक वचनों का पक्का बन जाता है।

7. गुरु आसमान का राजा है तो राहु गुरु का शिष्य, दोनों मिलकर जातक में ईश्वरीय ताकतों को बढ़ाते हैं।

8. इस राशि के लोगों में ब्रह्माण्ड के बारे में पता करने की योग्यता जन्मजात होती है। वह वायुयान और सेटेलाइट के बारे में ज्ञान बढ़ाता है।

9. राहु-शनि के साथ मिलने से जातक के अन्दर शिक्षा और शक्ति उत्पादित होती है। जातक का कार्य शिक्षा स्थानों में या बिजली, पेट्रोल या वाहन वाले कामों की ओर होता है।

10. जातक एक दायरे में रह कर ही कार्य कर पाता है और पूरा जीवन कार्योपरान्त फलदायक रहता है। जातक के अंदर एक मर्यादा होती है जो उसे धर्म में लीन करती है और जातक सामाजिक और धार्मिक कार्यों में अपने को रत रखता है।

11. गुरु जो ज्ञान का मालिक है, उसे मंगल का साथ मिलने पर उच्च पदासीन करने के लिए और रक्षा आदि विभागों की ओर ले जाता है।

12. जातक अपने ही विचारों, अपने ही कारणों से उलझता है। मिथुन राशि पश्चिम दिशा की द्योतक है, जो चन्द्रमा की निर्णय समय में जन्म लेते हैं, वे मिथुन राशि के कहे जाते हैं।

13. बुध की धातु पारा है और इसका स्वभाव जरा सी गर्मी-सर्दी में ऊपर नीचे होने वाला है। जातकों में दूसरे की मन की बातें पढऩे, दूरदृष्टि, बहुमुखी प्रतिभा, अधिक चतुराई से कार्य करने की क्षमता होती है।

14. जातक को बुद्धि वाले कामों में ही सफलता मिलती है। अपने आप पैदा होने वाली मति और वाणी की चतुरता से इस राशि के लोग कुशल कूटनीतिज्ञ और राजनीतिज्ञ भी बन जाते हैं।

15. हर कार्य में जिज्ञासा और खोजी दिमाग होने के कारण इस राशि के लोग अन्वेषण में भी सफलता लेते रहते हैं और पत्रकार, लेखक, मीडियाकर्मी, भाषाओं की जानकारी, योजनाकार भी बन सकते हैं।

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कर्क- ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो

राशि स्वरूप- केकड़ा, राशि स्वामी- चंद्रमा।

1. राशि चक्र की चौथी राशि कर्क है। इस राशि का चिह्न केकड़ा है। यह चर राशि है।

2. राशि स्वामी चन्द्रमा है। इसके अन्तर्गत पुनर्वसु नक्षत्र का अन्तिम चरण, पुष्य नक्षत्र के चारों चरण तथा अश्लेषा नक्षत्र के चारों चरण आते हैं।

3. कर्क राशि के लोग कल्पनाशील होते हैं। शनि-सूर्य जातक को मानसिक रूप से अस्थिर बनाते हैं और जातक में अहम की भावना बढ़ाते हैं।

4. जिस स्थान पर भी वह कार्य करने की इच्छा करता है, वहां परेशानी ही मिलती है।

5. शनि-बुध दोनों मिलकर जातक को होशियार बना देते हैं। शनि-शुक्र जातक को धन और जायदाद देते हैं।

6. शुक्र उसे सजाने संवारने की कला देता है और शनि अधिक आकर्षण देता है।

7. जातक उपदेशक बन सकता है। बुध गणित की समझ और शनि लिखने का प्रभाव देते हैं। कम्प्यूटर आदि का प्रोग्रामर बनने में जातक को सफलता मिलती है।

8. जातक श्रेष्ठ बुद्धि वाला, जल मार्ग से यात्रा पसंद करने वाला, कामुक, कृतज्ञ, ज्योतिषी, सुगंधित पदार्थों का सेवी और भोगी होता है। वह मातृभक्त होता है।

9. कर्क, केकड़ा जब किसी वस्तु या जीव को अपने पंजों को जकड़ लेता है तो उसे आसानी से नहीं छोड़ता है। उसी तरह जातकों में अपने लोगों तथा विचारों से चिपके रहने की प्रबल भावना होती है।

10. यह भावना उन्हें ग्रहणशील, एकाग्रता और धैर्य के गुण प्रदान करती है।

11. उनका मूड बदलते देर नहीं लगती है। कल्पनाशक्ति और स्मरण शक्ति बहुत तीव्र होती है।

12. उनके लिए अतीत का महत्व होता है। मैत्री को वे जीवन भर निभाना जानते हैं, अपनी इच्छा के स्वामी होते हैं।

13. ये सपना देखने वाले होते हैं, परिश्रमी और उद्यमी होते हैं।

14. जातक बचपन में प्राय: दुर्बल होते हैं, किन्तु आयु के साथ साथ उनके शरीर का विकास होता जाता है।

15. चूंकि कर्क कालपुरुष की वक्षस्थल और पेट का प्रतिधिनित्व करती है, अत: जातकों को अपने भोजन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

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सिंह- मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे

राशि स्वरूप- शेर जैसा, राशि स्वामी- सूर्य।

1. सिंह राशि पूर्व दिशा की द्योतक है। इसका चिह्न शेर है। राशि का स्वामी सूर्य है और इस राशि का तत्व अग्नि है।

2. इसके अन्तर्गत मघा नक्षत्र के चारों चरण, पूर्वा फाल्गुनी के चारों चरण और उत्तराफाल्गुनी का पहला चरण आता है।

3. केतु-मंगल जातक में दिमागी रूप से आवेश पैदा करता है। केतु-शुक्र, जो जातक में सजावट और सुन्दरता के प्रति आकर्षण को बढ़ाता है।

4. केतु-बुध, कल्पना करने और हवाई किले बनाने के लिए सोच पैदा करता है। चंद्र-केतु जातक में कल्पना शक्ति का विकास करता है। शुक्र-सूर्य जातक को स्वाभाविक प्रवृत्तियों की तरफ बढ़ाता है।

5. जातक का सुन्दरता के प्रति मोह होता है और वे कामुकता की ओर भागता है। जातक में अपने प्रति स्वतंत्रता की भावना रहती है और किसी की बात नहीं मानता।

6. जातक, पित्त और वायु विकार से परेशान रहने वाले लोग, रसीली वस्तुओं को पसंद करने वाले होते हैं। कम भोजन करना और खूब घूमना, इनकी आदत होती है।

7. छाती बड़ी होने के कारण इनमें हिम्मत बहुत अधिक होती है और मौका आने पर यह लोग जान पर खेलने से भी नहीं चूकते।

8. जातक जीवन के पहले दौर में सुखी, दूसरे में दुखी और अंतिम अवस्था में पूर्ण सुखी होता है।

9. सिंह राशि वाले जातक हर कार्य शाही ढंग से करते हैं, जैसे सोचना शाही, करना शाही, खाना शाही और रहना शाही।

10. इस राशि वाले लोग जुबान के पक्के होते हैं। जातक जो खाता है वही खाएगा, अन्यथा भूखा रहना पसंद करेगा, वह आदेश देना जानता है, किसी का आदेश उसे सहन नहीं होता है, जिससे प्रेम करेगा, उस मरते दम तक निभाएगा, जीवनसाथी के प्रति अपने को पूर्ण रूप से समर्पित रखेगा, अपने व्यक्तिगत जीवन में किसी का आना इस राशि वाले को कतई पसंद नहीं है।

11. जातक कठोर मेहनत करने वाले, धन के मामलों में बहुत ही भाग्यशाली होते हैं। स्वर्ण, पीतल और हीरे-जवाहरात का व्यवसाय इनको बहुत फायदा देने वाले होते हैं।

12. सरकार और नगर पालिका वाले पद इनको खूब भाते हैं। जातकों की वाणी और चाल में शालीनता पाई जाती है।

13. इस राशि वाले जातक सुगठित शरीर के मालिक होते हैं। नृत्य करना भी इनकी एक विशेषता होती है, अधिकतर इस राशि वाले या तो बिलकुल स्वस्थ रहते है या फिर आजीवन बीमार रहते हैं।

14. जिस वारावरण में इनको रहना चाहिए, अगर वह न मिले, इनके अभिमान को कोई ठेस पहुंचाए या इनके प्रेम में कोई बाधा आए, तो यह बीमार रहने लगते है।

15. रीढ़ की हड्डी की बीमारी या चोटों से अपने जीवन को खतरे में डाल लेते हैं। इस राशि के लोगों के लिये हृदय रोग, धड़कन का तेज होना, लू लगना और आदि बीमारी होने की संभावना होती है।

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कन्या- ढो, पा, पी, पू, , , , पे, पो

राशि स्वरूप- कन्या, राशि स्वामी- बुध।

1. राशि चक्र की छठी कन्या राशि दक्षिण दिशा की द्योतक है। इस राशि का चिह्न हाथ में फूल लिए कन्या है। राशि का स्वामी बुध है। इसके अन्तर्गत उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के दूसरे, तीसरे और चौथे चरण, चित्रा के पहले दो चरण और हस्त नक्षत्र के चारों चरण आते हैं।

2. कन्या राशि के लोग बहुत ज्यादा महत्वाकांक्षी होते हैं। भावुक भी होते हैं और वह दिमाग की अपेक्षा दिल से ज्यादा काम लेते हैं।

3. इस राशि के लोग संकोची, शर्मीले और झिझकने वाले होते हैं।

4. मकान, जमीन और सेवाओं वाले क्षेत्र में इस राशि के जातक कार्य करते हैं।

5. स्वास्थ्य की दृष्टि से फेफड़ों में शीत, पाचनतंत्र एवं आंतों से संबंधी बीमारियां जातकों मे मिलती हैं। इन्हें पेट की बीमारी से प्राय: कष्ट होता है। पैर के रोगों से भी सचेत रहें।

6. बचपन से युवावस्था की अपेक्षा जातकों की वृद्धावस्था अधिक सुखी और ज्यादा स्थिर होता है।

7. इस राशि वाल पुरुषों का शरीर भी स्त्रियों की भांति कोमल होता है। ये नाजुक और ललित कलाओं से प्रेम करने वाले लोग होते हैं।

8. ये अपनी योग्यता के बल पर ही उच्च पद पर पहुंचते हैं। विपरीत परिस्थितियां भी इन्हें डिगा नहीं सकतीं और ये अपनी सूझबूझ, धैर्य, चातुर्य के कारण आगे बढ़ते रहते है।

9. बुध का प्रभाव इनके जीवन मे स्पष्ट झलकता है। अच्छे गुण, विचारपूर्ण जीवन, बुद्धिमत्ता, इस राशि वाले में अवश्य देखने को मिलती है।

10. शिक्षा और जीवन में सफलता के कारण लज्जा और संकोच तो कम हो जाते हैं, परंतु नम्रता तो इनका स्वाभाविक गुण है।

11. इनको अकारण क्रोध नहीं आता, किंतु जब क्रोध आता है तो जल्दी समाप्त नहीं होता। जिसके कारण क्रोध आता है, उसके प्रति घृणा की भावना इनके मन में घर कर जाती है।

12. इनमें भाषण व बातचीत करने की अच्छी कला होती है। संबंधियों से इन्हें विशेष लाभ नहीं होता है, इनका वैवाहिक जीवन भी सुखी नहीं होता। यह जरूरी नहीं कि इनका किसी और के साथ संबंध होने के कारण ही ऐसा होगा।

13. इनके प्रेम सम्बन्ध प्राय: बहुत सफल नहीं होते हैं। इसी कारण निकटस्थ लोगों के साथ इनके झगड़े चलते रहते हैं।

14. ऐसे व्यक्ति धार्मिक विचारों में आस्था तो रखते हैं, परंतु किसी विशेष मत के नहीं होते हैं। इन्हें बहुत यात्राएं भी करनी पड़ती है तथा विदेश गमन की भी संभावना रहती है। जिस काम में हाथ डालते हैं लगन के साथ पूरा करके ही छोड़ते हैं।

15. इस राशि वाले लोग अपरिचित लोगों मे अधिक लोकप्रिय होते हैं, इसलिए इन्हें अपना संपर्क विदेश में बढ़ाना चाहिए। वैसे इन व्यक्ति की मैत्री किसी भी प्रकार के व्यक्ति के साथ हो सकती है।

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तुला- रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते

राशि स्वरूप- तराजू जैसा, राशि स्वामी- शुक्र।

1. तुला राशि का चिह्न तराजू है और यह राशि पश्चिम दिशा की द्योतक है, यह वायुतत्व की राशि है। शुक्र राशि का स्वामी है। इस राशि वालों को कफ की समस्या होती है।

2. इस राशि के पुरुष सुंदर, आकर्षक व्यक्तित्व वाले होते हैं। आंखों में चमक व चेहरे पर प्रसन्नता झलकती है। इनका स्वभाव सम होता है।

3. किसी भी परिस्थिति में विचलित नहीं होते, दूसरों को प्रोत्साहन देना, सहारा देना इनका स्वभाव होता है। ये व्यक्ति कलाकार, सौंदर्योपासक व स्नेहिल होते हैं।

4. ये लोग व्यावहारिक भी होते हैं व इनके मित्र इन्हें पसंद करते हैं।

5. तुला राशि की स्त्रियां मोहक व आकर्षक होती हैं। स्वभाव खुशमिजाज व हंसी खनखनाहट वाली होती हैं। बुद्धि वाले काम करने में अधिक रुचि होती है।

6. घर की साजसज्जा व स्वयं को सुंदर दिखाने का शौक रहता है। कला, गायन आदि गृह कार्य में दक्ष होती हैं। बच्चों से बेहद जुड़ाव रहता है।

7. तुला राशि के बच्चे सीधे, संस्कारी और आज्ञाकारी होते हैं। घर में रहना अधिक पसंद करते हैं। खेलकूद व कला के क्षेत्र में रुचि रखते हैं।

8. तुला राशि के जातक दुबले-पतले, लम्बे व आकर्षक व्यक्तिव वाले होते हैं। जीवन में आदर्शवाद व व्यवहारिकता में पर्याप्त संतुलन रखते हैं।

9. इनकी आवाज विशेष रूप से सौम्य होती हैं। चेहरे पर हमेशा एक मुस्कान छाई रहती है।

10. इन्हें ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा करना बहुत भाता है। ये एक अच्छे साथी हैं, चाहें वह वैवाहिक जीवन हो या व्यावसायिक जीवन।

11. आप अपने व्यवहार में बहुत न्यायवादी व उदार होते हैं। कला व साहित्य से जुड़े रहते हैं। गीत, संगीत, यात्रा आदि का शौक रखने वाले व्यक्ति अधिक अच्छे लगते हैं।

12. लड़कियां आत्म विश्वास से परिपूर्ण होती हैं। आपके मनपसंद रंग गहरा नीला व सफेद होते हैं। आपको वैवाहिक जीवन में स्थायित्व पसंद आता है।

13. आप अधिक वाद-विवाद में समय व्यर्थ नहीं करती हैं। आप सामाजिक पार्टियों, उत्सवों में रुचिपूर्वक भाग लेती हैं।

14. आपके बच्चे अपनी पढ़ाई या नौकरी आदि के कारण जल्दी ही आपसे दूर जा सकते हैं।

15. एक कुशल मां साबित होती हैं जो कि अपने बच्चों को उचित शिक्षा व आत्म विश्वास प्रदान करती है

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वृश्चिक- तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

राशि स्वरूप- बिच्छू जैसा, राशि स्वामी- मंगल।

1. वृश्चिक राशि का चिह्न बिच्छू है और यह राशि उत्तर दिशा की द्योतक है। वृश्चिक राशि जलतत्व की राशि है। इसका स्वामी मंगल है। यह स्थिर राशि है, यह स्त्री राशि है।

2. इस राशि के व्यक्ति उठावदार कद-काठी के होते हैं। यह राशि गुप्त अंगों, उत्सर्जन, तंत्र व स्नायु तंत्र का प्रतिनिधित्व करती है। अत: मंगल की कमजोर स्थिति में इन अंगों के रोग जल्दी होते हैं। ये लोग एलर्जी से भी अक्सर पीडि़त रहते हैं। विशेषकर जब चंद्रमा कमजोर हो।

3. वृश्चिक राशि वालों में दूसरों को आकर्षित करने की अच्छी क्षमता होती है। इस राशि के लोग बहादुर, भावुक होने के साथ-साथ कामुक होते हैं।

4. शरीरिक गठन भी अच्छा होता है। ऐसे व्यक्तियों की शारीरिक संरचना अच्छी तरह से विकसित होती है। इनके कंधे चौड़े होते हैं। इनमें शारीरिक व मानसिक शक्ति प्रचूर मात्रा में होती है।

5. इन्हें बेवकूफ बनाना आसान नहीं होता है, इसलिए कोई इन्हें धोखा नहीं दे सकता। ये हमेशा साफ-सुथरी और सही सलाह देने में विश्वास रखते हैं। कभी-कभी साफगोई विरोध का कारण भी बन सकती है।

6. ये जातक दूसरों के विचारों का विरोध ज्यादा करते हैं, अपने विचारों के पक्ष में कम बोलते हैं और आसानी से सबके साथ घुलते-मिलते नहीं हैं।

7. यह जातक अक्सर विविधता की तलाश में रहते हैं। वृश्चिक राशि से प्रभावित लड़के बहुत कम बोलते होते हैं। ये आसानी से किसी को भी आकर्षित कर सकते हैं। इन्हें दुबली-पतली लड़कियां आकर्षित करती हैं।

8. वृश्चिक वाले एक जिम्मेदार गृहस्थ की भूमिका निभाते हैं। अति महत्वाकांक्षी और जिद्दी होते हैं। अपने रास्ते चलते हैं मगर किसी का हस्तक्षेप पसंद नहीं करते।

9. लोगों की गलतियों और बुरी बातों को खूब याद रखते हैं और समय आने पर उनका उत्तर भी देते हैं। इनकी वाणी कटु और गुस्सा तेज होता है मगर मन साफ होता है। दूसरों में दोष ढूंढने की आदत होती है। जोड़-तोड़ की राजनीति में चतुर होते हैं।

10. इस राशि की लड़कियां तीखे नयन-नक्ष वाली होती हैं। यह ज्यादा सुन्दर न हों तो भी इनमें एक अलग आकर्षण रहता है। इनका बातचीत करने का अपना विशेष अंदाज होता है।

11. ये बुद्धिमान और भावुक होती हैं। इनकी इच्छा शक्ति बहुत दृढ़ होती है। स्त्रियां जिद्दी और अति महत्वाकांक्षी होती हैं। थोड़ी स्वार्थी प्रवृत्ति भी होती हैं।

12. स्वतंत्र निर्णय लेना इनकी आदत में होते है। मायके परिवार से अधिक स्नेह रहता है। नौकरीपेशा होने पर अपना वर्चस्व बनाए रखती हैं।

13. इन लोगों काम करने की क्षमता काफी अधिक होती है। वाणी की कटुता इनमें भी होती है, सुख-साधनों की लालसा सदैव बनी ही रहती है।

14. ये सभी जातक जिद्दी होते हैं, काम के प्रति लगन रखते हैं, महत्वाकांक्षी व दूसरों को प्रभावित करने की योग्यता रखते हैं। ये व्यक्ति उदार व आत्मविश्वासी भी होते है।

15. वृश्चिक राशि के बच्चे परिवार से अधिक स्नेह रखते हैं। कम्प्यूटर-टीवी का बेहद शौक होता है। दिमागी शक्ति तीव्र होती है, खेलों में इनकी रुचि होती है।

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धनु- ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे

राशि स्वरूप- धनुष उठाए हुए, राशि स्वामी- बृहस्पति।

1. धनु द्वि-स्वभाव वाली राशि है। इस राशि का चिह्न धनुषधारी है। यह राशि दक्षिण दिशा की द्योतक है।

2. धनु राशि वाले काफी खुले विचारों के होते हैं। जीवन के अर्थ को अच्छी तरह समझते हैं।

3. दूसरों के बारे में जानने की कोशिश में हमेशा करते रहते हैं।

4. धनु राशि वालों को रोमांच काफी पसंद होता है। ये निडर व आत्म विश्वासी होते हैं। ये अत्यधिक महत्वाकांक्षी और स्पष्टवादी होते हैं।

5. स्पष्टवादिता के कारण दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुंचा देते हैं।

6. इनके अनुसार जो इनके द्वारा परखा हुआ है, वही सत्य है। अत: इनके मित्र कम होते हैं। ये धार्मिक विचारधारा से दूर होते हैं।

7. धनु राशि के लड़के मध्यम कद काठी के होते हैं। इनके बाल भूरे व आंखें बड़ी-बड़ी होती हैं। इनमें धैर्य की कमी होती है।

8. इन्हें मेकअप करने वाली लड़कियां पसंद हैं। इन्हें भूरा और पीला रंग प्रिय होता है।

9. अपनी पढ़ाई और करियर के कारण अपने जीवन साथी और विवाहित जीवन की उपेक्षा कर देते हैं। पत्नी को शिकायत का मौका नहीं देते और घरेलू जीवन का महत्व समझते हैं।

10. धनु राशि की लड़कियां लंबे कदमों से चलने वाली होती हैं। ये आसानी से किसी के साथ दोस्ती नहीं करती हैं।

11. ये एक अच्छी श्रोता होती हैं और इन्हें खुले और ईमानदारी पूर्ण व्यवहार के व्यक्ति पसंद आते हैं। इस राशि की स्त्रियां गृहणी बनने की अपेक्षा सफल करियर बनाना चाहती है।

12. इनके जीवन में भौतिक सुखों की महत्ता रहती है। सामान्यत: सुखी और संपन्न जीवन व्यतीत करती हैं।

13. इस राशि के जातक ज्यादातर अपनी सोच का विस्तार नहीं करते एवं कई बार कन्फयूज रहते हैं। एक निर्णय पर पंहुचने पर इनको समय लगता है एवं यह देरी कई बार नुकसान दायक भी हो जाती है।

14. ज्यादातर यह लोग दूसरों के मामलों में दखल नहीं देते एवं अपने काम से काम रखते हैं।

15. इनका पूरा जीवन लगभग मेहनत करके कमाने में जाता है या यह अपने पुश्तैनी कार्य को ही आगे बढाते हैं।

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मकर- भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

राशि स्वरूप- मगर जैसा, राशि स्वामी- शनि।

1. मकर राशि का चिह्न मगरमच्छ है। मकर राशि के व्यक्ति अति महत्वाकांक्षी होते हैं। यह सम्मान और सफलता प्राप्त करने के लिए लगातार कार्य कर सकते हैं।

2. इनका शाही स्वभाव व गंभीर व्यक्तित्व होता है। आपको अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए बहुत कठिन परिश्रम करना पड़ता है।

3. इन्हें यात्रा करना पसंद है। गंभीर स्वभाव के कारण आसानी से किसी को मित्र नहीं बनाते हैं। इनके मित्र अधिकतर कार्यालय या व्यवसाय से ही संबंधित होते हैं।

4. सामान्यत: इनका मनपसंद रंग भूरा और नीला होता है। कम बोलने वाले, गंभीर और उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों को ज्यादा पसंद करते हैं।

5. ईश्वर व भाग्य में विश्वास करते हैं। दृढ़ पसंद-नापसंद के चलते इनका वैवाहिक जीवन लचीला नहीं होता और जीवनसाथी को आपसे परेशानी महसूस हो सकती है।

6. मकर राशि के लड़के कम बोलने वाले होते हैं। इनके हाथ की पकड़ काफी मजबूत होती है। देखने में सुस्त, लेकिन मानसिक रूप से बहुत चुस्त होते हैं।

7. प्रत्येक कार्य को बहुत योजनाबद्ध ढंग से करते हैं। गहरा नीला या श्वेत रंग प्रधान वस्त्र पहने हुए लड़कियां इन्हें बहुत पसंद आती हैं।

8. आपकी खामोशी आपके साथी को प्रिय होती है। अगर आपका जीवनसाथी आपके व्यवहार को अच्छी तरह समझ लेता है तो आपका जीवन सुखपूर्वक व्यतीत होता है।

9. आप जीवन साथी या मित्रों के सहयोग से उन्नति प्राप्त कर सकते हैं।

10. मकर राशि की लड़कियां लम्बी व दुबली-पतली होती हैं। यह व्यायाम आदि करना पसंद करती हैं। लम्बे कद के बाबजूद आप ऊंची हिल की सैंडिल पहनना पसंद करती हैं।

11. पारंपरिक मूल्यों पर विश्वास करने वाली होती हैं। छोटे-छोटे वाक्यों में अपने विचारों को व्यक्त करती हैं।

12. दूसरों के विचारों को अच्छी तरह से समझ सकती हैं। इनके मित्र बहुत होते हैं और नृत्य की शौकिन होती हैं।

13. इनको मजबूत कद कठी के व्यक्ति बहुत आकर्षित करते हैं। अविश्वसनीय संबंधों में विश्वास नहीं करती हैं।

14. अगर आप करियर वुमन हैं तो आप कार्य क्षेत्र में अपना अधिकतर समय व्यतीत करती हैं।

15. आप अपने घर या घरेलू कार्यों के विषय में अधिक चिंता नहीं करती हैं।

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कुंभ- गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा

राशि स्वरूप- घड़े जैसा, राशि स्वामी- शनि।

1. राशि चक्र की यह ग्यारहवीं राशि है। कुंभ राशि का चिह्न घड़ा लिए खड़ा हुआ व्यक्ति है। इस राशि का स्वामी भी शनि है। शनि मंद ग्रह है तथा इसका रंग नीला है। इसलिए इस राशि के लोग गंभीरता को पसंद करने वाले होते हैं एवं गंभीरता से ही कार्य करते हैं।

2. कुंभ राशि वाले लोग बुद्धिमान होने के साथ-साथ व्यवहारकुशल होते हैं। जीवन में स्वतंत्रता के पक्षधर होते हैं। प्रकृति से भी असीम प्रेम करते हैं।

3. शीघ्र ही किसी से भी मित्रता स्थपित कर सकते हैं। आप सामाजिक क्रियाकलापों में रुचि रखने वाले होते हैं। इसमें भी साहित्य, कला, संगीत व दान आपको बेहद पसंद होता हैं।

4. इस राशि के लोगों में साहित्य प्रेम भी उच्च कोटि का होता है।

5. आप केवल बुद्धिमान व्यक्तियों के साथ बातचीत पसंद करते हैं। कभी भी आप अपने मित्रों से असमानता का व्यवहार नहीं करते हैं।

6. आपका व्यवहार सभी को आपकी ओर आकर्षित कर लेता है।

7. कुंभ राशि के लड़के दुबले होते हैं। आपका व्यवहार स्नेहपूर्ण होता है। इनकी मुस्कान इन्हें आकर्षक व्यक्तित्व प्रदान करती है।

8. इनकी रुचि स्तरीय खान-पान व पहनावे की ओर रहती है। ये बोलने की अपेक्षा सुनना ज्यादा पसंद करते हैं। इन्हें लोगों से मिलना जुलना अच्छा लगता है।

9. अपने व्यवहार में बहुत ईमानदार रहते हैं, इसलिये अनेक लड़कियां आपकी प्रशंसक होती हैं। आपको कलात्मक अभिरुचि व सौम्य व्यक्तित्व वाली लड़कियां आकर्षित करती हैं।

10. अपनी इच्छाओं को दूसरों पर लादना पसंद नहीं करते हैं और अपने घर परिवार से स्नेह रखते हैं।

11. कुंभ राशि की लड़कियां बड़ी-बड़ी आंखों वाली व भूरे बालों वाली होती हैं। यह कम बोलती हैं, इनकी मुस्कान आकर्षक होती है।

12. इनका व्यक्तित्व बहुत आकर्षक होता है, किन्तु आसानी से किसी को अपना नहीं बनाती हैं। ये अति सुंदर और आकर्षक होती हैं।

13. आप किसी कलात्मक रुचि, पेंटिग, काव्य, संगीत, नृत्य या लेखन आदि में अपना समय व्यतीत करती हैं।

14. ये सामान्यत: गंभीर व कम बोलने वाले व्यक्तियों के प्रति आकर्षित होती हैं।

15. इनका जीवन सुखपूर्वक व्यतित होता है, क्योंकि ये ज्यादा इच्छाएं नहीं करती हैं। अपने घर को भी कलात्मक रूप से सजाती हैं।

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मीन- दी, दू, , , , दे, दो, चा, ची

राशि स्वरूप- मछली जैसा, राशि स्वामी- बृहस्पति।

1. मीन राशि का चिह्न मछली होता है। मीन राशि वाले मित्रपूर्ण व्यवहार के कारण अपने कार्यालय व आस पड़ोस में अच्छी तरह से जाने जाते हैं।

2. आप कभी अति मैत्रीपूर्ण व्यवहार नहीं करते हैं। बल्कि आपका व्यवहार बहुत नियंत्रित रहता है। ये आसानी से किसी के विचारों को पढ़ सकते हैं।

3. अपनी ओर से उदारतापूर्ण व संवेदनाशील होते हैं और व्यर्थ का दिखावा व चालाकी को बिल्कुल नापसंद करते हैं।

4. एक बार किसी पर भी भरोसा कर लें तो यह हमेशा के लिए होता है, इसीलिये आप आपने मित्रों से अच्छा भावानात्मक संबंध बना लेते हैं।

5. ये सौंदर्य और रोमांस की दुनिया में रहते हैं। कल्पनाशीलता बहुत प्रखर होती है। अधिकतर व्यक्ति लेखन और पाठन के शौकीन होते हैं। आपको नीला, सफेद और लाल रंग-रूप से आकर्षित करते हैं।

6. आपकी स्तरीय रुचि का प्रभाव आपके घर में देखने को मिलता है। आपका घर आपकी जिंदगी में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

7. अपने धन को बहुत देखभाल कर खर्च करते हैं। आपके अभिन्न मित्र मुश्किल से एक या दो ही होते हैं। जिनसे ये अपने दिल की सभी बातें कह सकते हैं। ये विश्वासघात के अलावा कुछ भी बर्दाश्त कर सकते हैं।

8. मीन राशि के लड़के भावुक हृदय व पनीली आंखों वाले होते हैं। अपनी बात कहने से पहले दो बार सोचते हैं। आप जिंदगी के प्रति काफी लचीला दृटिकोण रखते हैं।

9. अपने कार्य क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के लिये परिश्रम करते हैं। आपको बुद्धिमान और हंसमुख लोग पसंद हैं।

10. आप बहुत संकोचपूर्वक ही किसी से अपनी बात कह पाते हैं। एक कोमल व भावुक स्वभाव के व्यक्ति हैं। आप पत्नी के रूप में गृहणी को ही पसंद करते हैं।

11. ये खुद घरेलू कार्यों में दखलंदाजी नहीं करते हैं, न ही आप अपनी व्यावसायिक कार्य में उसका दखल पसंद करते हैं। आपका वैवाहिक जीवन अन्य राशियों की अपेक्षा सर्वाधिक सुखमय रहता है।

12. मीन राशि की लड़कियां भावुक व चमकदार आंखों वाली होती हैं। ये आसानी से किसी से मित्रता नहीं करती हैं, लेकिन एक बार उसकी बातों पर विश्वास हो जाए तो आप अपने दिल की बात भी उससे कह देती हैं।

13. ये स्वभाव से कला प्रेमी होती हैं। एक बुद्धिमान व सभ्य व्यक्ति आपको आकर्षित करता है। आप शांतिपूर्वक उसकी बात सुन सकती हैं और आसानी से अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं करती हैं।

14. अपनी मित्रता और वैवाहिक जीवन में सुरक्षा व दृढ़ता रखना पसंद करती हैं। ये अपने पति के प्रति विश्वसनीय होती है और वैसा ही व्यवहार अपने पति से चाहती हैं।

15. आपको ज्योतिष आदि में रुचि हो सकती है। आपको नई-नई चीजें सीखने का शौक होता है।

राशि अनुसार मनुष्य के अंदर क्या कमियां होती हैं

सभी व्यक्तियों में कोई न कोई कमी अवश्य होती है और ये कमी कई बार तरक्की की राह में अड़चन भी बन जाती है। हम आपको यहां राशि अनुसार व्यक्ति के अंदर क्या कमियां होती हैं जो उसे तरक्की करने से रोकती हैं इसके बारे में बता रहे हैं। आइए आपको बताते हैं इन कमियों के बारे में ...........

मेष राशि :-

मेष राशि के जातक अपने गुस्से पर नियंत्रण नहीं रख पाते हैं और ये जल्दी ही अपना आपा खो बैठते हैं। इनकी यही कमी इनकी तरक्की की राह कठिन कर देती है।

वृष राशि :-

वृष राशि के जातकों का स्वभाव जिद्दी होता है, अपने जिद्दी स्वभाव के कारण ये दूसरों की सुनते कम हैं और अपने मन की करने में लगे रहते हैं। इनके अंदर यही सबसे बड़ी कमी होती है जो इन्हें आगे नहीं बढ़ने देती है।

मिथुन राशि :-

इस राशि के जातक दूसरों की बातों में जल्दी आ जाते हैं और इसी कारण ये अपने काम को सही तरीके से नहीं कर पाते हैं, इनकी यही कमी इन्हें आगे नहीं बढ़ने देती है।

कर्क राशि :-

कर्क राशि के जातक ज्यादा व्यवहारिक नहीं होते हैं जिसके कारण ये लोगों के दिलों में अपनी जगह नहीं बना पाते हैं।

सिंह राशि :-

सिंह राशि के जातकों की ज्यादा खर्च करने की चाह इन्हें कहीं का नहीं छोड़ती है, कई बार आगे बढ़ने के लिए ये गलत तरीकों का भी इस्तेमाल करते हैं जिसके लिए इन्हें आगे चलकर पछताना पड़ता है।

कन्या राशि :-

कन्या राशि के जातक स्वभाव से घमंडी होते हैं, ये अपने आगे दूसरों को कमतर समझते हैं, इनकी यही कमी इनकी उन्नति की राह में रोड़ा बनती है।

तुला राशि :-

तुला राशि के जातक जरूरत से ज्यादा दूसरों की मदद करने के बारे में सोचते हैं, इनकी इसी कमी का फायदा उठाकर लोग इनसे आगे निकल जाते हैं।

वृश्चिक राशि :-

वृश्चिक राशि के जातकों की सबसे बड़ी कमी होती है जल्दी आपा खोना, ये छोटी-छोटी बात पर गुस्से में आ जाते हैं, जो इनकी तरक्की की राह में बाधा बनता है।

धनु राशि :-

धनु राशि के जातक किसी काम को करने के बजाय ज्यादा बोलने में विश्वास रखते हैं, इनका बडबोलापन ही इनकी तरक्की को रोकता रहता है।

मकर राशि :-

मकर राशि के जातकों को यह गलतफहमी होती है कि उनमें कोई कमी नहीं है और उनकी यही कमी इन्हें आगे बढ़ने से रोकती है।

कुंभ राशि :-

कुंभ राशि के जातक अपनी बात को सही मानकर दूसरों से बहस करते रहते हैं, जो इनके लिए ही घातक होती है।

मीन राशि :-

मीन राशि के जातकों में आत्मविश्वास की थोड़ी कमी होती है, इनकी यही कमी इन्हें आगे बढ़ने से रोकती है।

 

राशियां उनके गुण और लक्षण

 (According To Astrology, Their Attributes And Characteristics)

१.मेष राशि :-

राशि चक्र की यह पहली राशि है, इस राशि का चिन्ह मेढ़ा या भेड़ है, मेष राशि पूर्व दिशा की द्योतक है तथा इसका स्वामी मंगल है। मेष राशि के अन्तर्गत अश्विनी और भरणी नक्षत्र के चारों चरण और कृत्तिका का प्रथम चरण आते हैं। मंगल जातक को अधिक उग्र और निरंकुश बना देता है। वह किसी की जरा सी भी विपरीत बात में या कार्य में जातक को क्रोधात्मक स्वभाव देता है, जिससे जातक बात-बात में झगड़ा करने को उतारू हो जाता है। मेष राशि के जातक को किसी की आधीनता पसंद नहीं होती है। वह अपने अनुसार ही कार्य और बात करना पसंद करता है। जातक को ऐश-आराम की जिन्दगी जीने के लिये मेहनत वाले कार्यों से दूर रखता है और जातक विलासी होता है। जातक के दिमाग में विचारों की स्थिरता रहती है और जातक जो भी सोचता है उसे करने के लिये उद्धत हो जाता है। मंगल की वजह से जातक में भटकाव वाली स्थिति रहती है वह अपनी जिन्दगी में यात्रा को महत्व देता है। जातक में उग्रता के साथ विचारों को प्रकट न करने की हिम्मत देते हैं, वह हमेशा अपने मन में ही लगातार माया के प्रति सुलगता रहता है। जीवन साथी के प्रति बनाव बिगाड़ हमेशा चलता रहता है, मगर जीवन साथी से दूर भी नहीं रहा जाता है। जनता के लिये अपनी सहायता वाली सेवाएं देकर पूरी जिन्दगी निकाल देगा। सूर्य जातक को अभिमानी और चापलूस प्रिय बनाता है। बुध जातक को बुद्धि वाले कार्यों की तरफ और संचार व्यवस्था से धन कमाने की वृत्ति देता है। शुक्र विलासिता प्रिय और दोहरे दिमाग का बनाता है लेकिन अपने विचारों को उसमें सतुलित करने की अच्छी योग्यता होती है।

मेष अग्नि तत्व वाली राशि है, अग्नि त्रिकोण (मेष, सिंह, धनु) की यह पहली राशि है। इसका स्वामी मंगल अग्नि ग्रह है। राशि और स्वामी का यह संयोग इसकी अग्नि या ऊर्जा को कई गुना बढ़ा देता है, यही कारण है कि मेष जातक ओजस्वी, दबंग, साहसी और दृढ़ इच्छाशक्ति वाले होते हैं, यह जन्मजात योद्धा होते हैं। मेष राशि वाले व्यक्ति बाधाओं को चीरते हुए अपना मार्ग बनाने की कोशिश करते हैं।

२.वृष राशि :-

राशि का चिन्ह बैल है। बैल स्वभाव से ही अधिक पारिश्रमी और बहुत अधिक वीर्यवान होता है, साधारणत: वह शांत रहता है। किन्तु क्रोध आने पर वह उग्र रूप धारण कर लेता है। यह स्वभाव वृष राशि के जातक में भी पाया जाता है। वृष राशि का स्वामी शुक्र ग्रह है। इसके अन्तर्गत कृत्तिका नक्षत्र के तीन चरण, रोहिणी के चारों चरण और मृगशिरा के प्रथम दो चरण आते हैं।

जातक के जीवन में पिता-पुत्र का कलह रहता है, जातक का मन सरकारी कार्यों की ओर रहता है। सरकारी ठेकेदारी का कार्य करवाने की योग्यता रहती है। पिता के पास जमीनी काम या जमीन के द्वारा जीविकोपार्जन का साधन होता है। जातक अधिकतर शराब, काबाब के भोजन में अपनी रुचि को प्रदर्शित करता है।

गुरु का प्रभाव जातक में ज्ञान के प्रति अहम भाव को पैदा करने वाला होता है, वह जब भी कोई बात करता है तो गर्व की बात करता है, सरकारी क्षेत्रों की शिक्षाएं और उनके काम जातक को अपनी ओर आकर्षित करते हैं और किसी प्रकार से केतु का बल मिल जाता है तो जातक सरकार का मुख्य सचेतक बनने की योग्यता रखता है। मंगल के प्रभाव से जातक के अन्दर मानसिक गर्मी को प्रदान करता है, कल कारखानों, स्वास्थ्य कार्यों और जनता के झगड़े सुलझाने का कार्य जातक कर सकता है, जातक की माता आपत्तियों से घिरी होती है और पिता का लगाव अन्य स्त्रियों से बना रहता है। ये अधिक सौन्दर्य बोधी और कला प्रिय होते हैं। जातक कलाकारी के क्षेत्र में नाम करता है। माता और पति का साथ या माता और पत्नी का साथ घरेलू वातावरण मे सामजस्यता लाता है, जातक अपने जीवन साथी के अधीन रहना पसंद करता है।

चन्द्र-बुध जातक को कन्या संतान अधिक देता है और माता के साथ वैचारिक मतभेद का वातावरण बनाता है, जातक के जीवन में व्यापारिक यात्राएं काफी होती हैं, जातक अपने ही बनाए हुए उसूलों पर जीवन चलाता है, वह मकडी जैसा जाल बुनता रहता है और अपने ही बुने जाल में फंस जाता है।

रोहिणी के चौथे चरण के मालिक चन्द्र-चन्द्र है,जातक के अन्दर हमेशा उतार चढाव की स्थिति बनी रहती है,वह अपने ही मन का राजा होता है।

मंगल-सूर्य की युति में पैदा होने वाले जातक अपने शरीर से दुबले पतले होने के वावजूद गुस्सेवाले होते हैं, वे घमंडी होते हैं। जिससे आदेश देने की वृत्ति होने से सेना या पुलिस में अपने को निरंकुश बनाकर रखते है, इस तरह के जातक अगर राज्य में किसी भी विभाग में काम करते हैं तो सरकारी सम्पत्ति को किसी भी तरह से क्षति नहीं होने देते। मंगल-बुध जातक के अन्दर कभी कठोर और कभी नर्म वाली स्थिति पैदा कर देते हैं। जातक का मन कम्प्यूटर और इलेक्ट्रोनिक क्षेत्र की ओर होता है। वृष राशि वाले जातक शांति पूर्वक रहना पसंद करते हैं। जीवन में परिवर्तन से चिढ सी होती है, अलग माहौल में रहना अच्छा नही लगता है। इस प्रकार के लोग सामाजिक होते हैं और अपने से उच्च लोगों को आदर की नजर से देखते है।

३.मिथुन राशि :-

राशि का प्रतीक युवा दम्पति है, यह द्वि-स्वभाव वाली राशि है। मृगसिरा नक्षत्र के तीसरे चरण के मालिक मंगल-शुक्र हैं। मंगल शक्ति और शुक्र माया है। जातक के अन्दर माया के प्रति भावना पायी जाती है, जातक जीवन साथी के प्रति हमेशा शक्ति बन कर प्रस्तुत होता है। साथ ही घरेलू कारणों चलते कई बार आपस में तनाव रहता है। मंगल और शुक्र की युती के कारण जातक में स्त्री रोगों को परखने की अद्भुत क्षमता होती है। जातक वाहनों की अच्छी जानकारी रखता है। इनका घरेलू साज सज्जा के प्रति अधिक झुकाव होता है।

मंगल के कारण जातक जबान का पक्का बन जाता है। गुरु आसमान का राजा है तो राहु गुरु का चेला, दोनो मिलकर जातक में आसमानी ताकतों को बढ़ाते हैं। जातक का रुझान अंतरिक्ष और ब्रह्माण्ड के बारे मे पता करने की योग्यता जन्म जात पैदा होती है। वह वायुयान और सेटेलाइट के बारे में ज्ञान बढ़ाता है। राहु-शनि के साथ मिलने से जातक के अन्दर शिक्षा और शक्ति उत्पादित होती है। जातक का कार्य शिक्षा स्थानों में या बिजली, पेट्रोल या वाहन वाले कामों की ओर होता है। जातक एक दायरे मे रह कर ही कार्य कर पाता है और पूरा जीवन कार्योपरान्त फलदायक रहता है। जातक के अन्दर एक मर्यादा जो धर्म में लीन करती है और जातक सामाजिक और धार्मिक कार्यों में अपने को रत रखता है। गुरु जो ज्ञान का मालिक है, उसे मंगल का साथ मिलने पर उच्च पदासीन करने के लिये और रक्षा आदि विभागों में ले जाता है।

जातक के अन्दर अपने ही विचारों में अपने ही कारणों से उलझने का कारण पैदा होता है। मिथुन राशि पश्चिम दिशा की द्योतक है, जो चन्द्रमा की निरयण समय में जन्म लेते हैं, वे मिथुन राशि के कहे जाते हैं।

जातक मे चंचलता रहती है। शरीर बलबान नही रह पाता है, आंखों का रंग भूरा या नीला होता है, शरीर का रंग सांवला या गोरा कैसा भी हो सकता है।

मिथुन राशि वालों को दुर्बोध माना जाता है। इस राशि का निशान स्त्री और पुरुष का जोडा है। इसका स्वामी बुध है। बुध की धातु पारा है और इसका स्वभाव जरा सी गर्मी-सर्दी में ऊपर नीचे होने वाला है। जातकों में दूसरे की मन की बातें पढऩे, दूरदृष्टि, बहुमुखी प्रतिभा, अधिक चतुरायी से कार्य करने की क्षमता होती है। जातक को बुद्धि वाले कामों में ही सफलता मिलती है। अपने आप पैदा होने बाली मति और वाणी की चतुरता से इस राशि के लोग कुशल कूटनीतिज्ञ और राजनीतिज्ञ भी बन जाते हैं, हर कार्य में जिज्ञासा और खोजी दिमाग होने के कारण इस राशि के लोग अन्वेषण में भी सफलता लेते रहते हैं और पत्रकार, लेखक, मीडियाकर्मी, भाषाओं की जानकारी, योजनाकार भी बन सकते हैं।

४.कर्क राशि :-

इस राशि का चिन्ह केकड़ा है और यह उत्तर दिशा की द्योतक है। यह चर राशि है। राशि स्वामी चन्द्रमा है। इसके अन्तर्गत पुनर्वसु नक्षत्र का अन्तिम चरण, पुष्य नक्षत्र के चारों चरण तथा अश्लेशा नक्षत्र के चारों चरण आते हैं।

जातक कल्पनाशील होते हैं। शनि-सूर्य जातक को मानसिक रूप से अस्थिर बनाते हैं और जातक में अहम की भावना बढ़ाते हैं। जिस स्थान पर भी वह कार्य करने की इच्छा करता है, जातक को परेशानी ही मिलती है।

शनि-बुध दोनो मिलकर जातक को होशियार बना देते है। शनि-शुक्र जातक को धन और जायदाद देते है। शुक्र उसे सजाने संवारने की कला देता है और शनि अधिक वासना देता है।

जातक को उपदेशक बन सकता है। जातक को बुध आंकडे और शनि लिखने का प्रभाव देते हैं। कम्प्यूटर आदि का प्रोग्रामर बनाने में जातक को सफलती मिलत है।

जानक श्रेष्ठ बुद्धि वाला, जलविहारी, कामुक, कृतज्ञ, ज्योतिषी, सुगंधित पदार्थों का सेवी और भोगी होता है। वह मातृभक्त होता है।

कर्क केकडा जब किसी वस्तु या जीव को अपने पंजों के जकड़ लेता है, तो उसे आसानी से नहीं छोडता है। भले ही इसके लिये उसे अपने पंजे गंवाने पडें. उसी तरह जातकों में अपने प्रेम पात्रों तथा विचारों से चिपके रहने की प्रबल भावना होती है, यह भावना उन्हें ग्रहणशील, एकाग्रता और धैर्य के गुण प्रदान करती है। उनका मूड बदलते देर नहीं लगती है। कल्पनाशक्ति और स्मरण शक्ति बहुत तीव्र होती है। उनके लिए अतीत का महत्व होता है। मैत्री को वे जीवन भर निभाना जानते हैं, अपनी इच्छा के स्वामी होते हैं। ये सपना देखने वाले होते हैं, परिश्रमी और उद्यमी होते हैं। जातक बचपन में प्राय: दुर्बल होते हैं, किन्तु आयु के साथ साथ उनके शरीर का विकास होता जाता है। चूंकि कर्क कालपुरुष की वक्षस्थल और पेट का प्रतिधिनित्व करती है, अत: जातकों को अपने भोजन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

५.सिंह राशि :-

सिंह राशि पूर्व दिशा की द्योतक है। इसका चिन्ह शेर है। राशि का स्वामी सूर्य है और इस राशि का तत्व अग्नि है। इसके अन्तर्गत मघा नक्षत्र के चारों चरण, पूर्वा फाल्गुनी के चारों चरण और उत्तराफाल्गुनी का पहला चरण आता है।

केतु-मंगल जातक में दिमागी रूप से आवेश पैदा करता है। केतु-शुक्र, जो जातक में सजावटी और सुन्दरता के प्रति भावना को बढाता है। केतु-बुध, जो जातक में कल्पना करने और हवाई किले बनाने के लिये सोच पैदा करता है। चन्द्र-केतु जातक में कल्पना शक्ति का विकास करता है। शुक्र-सूर्य जातक को स्वाभाविक प्रवृत्तियों की तरफ बढाता है। जातक का सुन्दरता के प्रति मोह होता है और वे कामुकता की ओर भागते हैं। जातक में अपने प्रति स्वतन्त्रता की भावना भरता है और जातक किसी की बात नहीं मानता।

जातक, पित्त और वायु विकार से परेशान रहने वाले लोग, रसीली वस्तुओं को पसंद करने वाले होते हैं। कम भोजन करना और खूब घूमना, इनकी आदत होती है। छाती बड़ी होने के कारण इनमे हिम्मत बहुत अधिक होती है और मौका आने पर यह लोग जान पर खेलने से भी नहीं चूकते। जातक जीवन के पहले दौर में सुखी, दूसरे में दुखी और अन्तिम अवस्था में पूर्ण सुखी होता है। सिंह राशि वाले जातक हर कार्य शाही ढंग से करते हैं जैसे सोचना शाही, करना शाही, खाना शाही और रहना शाही। इस राशि वाले लोग जुबान के पक्के होते हैं। जातक जो खाता है वही खायेगा, अन्यथा भूखा रहना पसंद करेगा, वह आदेश देना जानता है, किसी का आदेश उसे सहन नही है, जिससे प्रेम करेगा, उसके मरते दम तक निभायेगा, जीवन साथी के प्रति अपने को पूर्ण रूप से समर्पित रखेगा, अपने व्यक्तिगत जीवन में किसी का आना इस राशि वाले को कतई पसंद नहीं है।

जातक कठोर मेहनत करने वाले धन के मामलों में बहुत ही भाग्यशाली होते हैं। स्वर्ण, पीतल और हीरा जवाहरात के व्यवसाय इनको बहुत फायदा देने वाले होते हैं। सरकार और नगर पालिका वाले पद इनको खूब भाते हैं। जातकों की वाणी और चाल में शालीनता पायी जाती है। इस राशि वाले जातक सुगठित शरीर के मालिक होते हैं। नृत्य करना इनकी आदत होती है, अधिकतर इस राशि वाले या तो बिलकुल स्वस्थ रहते है या फिर आजीवन बीमार रहते हैं, जिस वारावरण में इनको रहना चाहिये, अगर वह न मिले, इनके अभिमान को कोई ठेस पहुंचाये या इनके प्रेम में कोई बाधा आये, तो यह लोग अपने मानसिक कारणों से बीमार रहने लगते है। रीढ़ की हड्डी की बीमारी या चोटों से अपने जीवन को खतरे में डाल लेते हैं। इस राशि के लोगों के लिये ह्रदय रोग, धड़कन का तेज होना, लू लगना और आदि बीमारी होने की संभावना होती है।

६.कन्या राशि :-

राशि- राशि चक्र की छठी कन्या राशि दक्षिण दिशा की द्योतक है। इस राशि का चिह्न हाथ में फूल लिए कन्या है। राशि का स्वामी बुध है। इसके अन्तर्गत उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के दूसरे, तीसरे और चौथे चरण, चित्रा के पहले दो चरण और हस्त नक्षत्र के चारों चरण आते है। जातक को उसके द्वारा किये जाने वाले कार्यों के प्रति अधिक महत्वाकांक्षी बनाते हैं। जातक भावुक होता है एवं वह दिमाग की अपेक्षा ह्रदय से काम लेना चालू कर देता है। इस राशि के लोग संकोची और शर्मीले प्रभाव के साथ झिझकने वाले होते है। मकान, जमीन और सेवाओं वाले क्षेत्र में इस राशि के जातक कार्य करते हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से फेफड़ों में ठंड लगना और पाचन एवं आंतों से संबंधी बीमारियां जातकों मे मिलती है।

बाल्याकाल से युवावस्था के अलावा जातकों की वृद्धावस्था अधिक सुखी और ज्यादा स्थिर होता है। इस राशि वाल पुरुषों का भी शरीर स्त्रियों की भांति कोमल होता है। ये नाजुक और ललित कलाओं से प्रेम करने वाले लोग होते है। इनका बचपन संघर्षों में बीतता है, इन्हें सुविधायें आसानी से प्राप्त नहीं होती है। किंतु ये अपनी योग्यता के बल पर ही उच्च पद पर पहुंच जाते है। विपरीत कन्यापरिस्थितियां भी इन्हें डिगा नहीं सकती और ये अपनी सुझ-बुझ, धैर्य, चातुर्य के कारण आगे बढ़ते रहते है। ये कभी विचलित नही होते है। बुध का प्रभाव इनके जीवन मे स्पष्ट झलकता है. अच्छे गुण, विचारपुर्ण जीवन, बुद्धिमत्ता, इस राशि वाले में अवश्य देखने को मिलती है। इसके स्वभाव मे नम्रता और लज्जा का पुट होता है। शिक्षा और जीवन में सफलता के कारण लज्जा और झेंपुपन तो कम हो जाते हैं परंतु नम्रता तो इनका स्वाभाविक गुण है। इनको अकारण क्रोध नहीं आता किंतु जब क्रोध आता है तो जल्दी समाप्त नहीं होता। जिसके कारण क्रोध आता है, उसके प्रति घृणा की भावना इनके हृदय में घर कर जाती है। इन व्यक्तियों मे भाषण व बातचीत करने की अच्छी शक्ति होती है। सम्बन्धियों से इन्हे विशेष लाभ नहीं होता है इनका वैवाहिक जीवन भी सुखी नहीं होता। यह जरुरी नहीं की इनका किसी और औरत के साथ सम्बन्ध होने के कारण ही ऐसा होगा। बगैर पराई स्त्री से प्रेम के बावजूद भी क्लेशमय हो सकता है। अगर ये ये दुसरा विवाह कर भी लें जिसकी प्रबल सम्भावना रहती है, तो इनके जीवन मे काफी परिवर्तन आ जाता है। पर इनके प्रेम सम्बन्ध प्राय: बहुत सफल नहीं होते है। इसी कारण निकटस्थ लोगों के साथ इनके झगड़े चलते रहते है। ऐसे व्यक्ति धार्मिक विचारों में आस्था तो रखते है परंतु किसी विशेष मत के नहीं होते है। इन्हें यात्राएं भी करनी पड़ती है तथा विदेश गमन की भी सम्भावना रहती है। जिस काम मे हाथ डालते है लगन के साथ पुरा करके ही छोड़ते है। इस राशि वाले लोग अपरिचित लोगों मे अधिक लोकप्रिय होते है, इसलिये इन्हें अपना सम्पर्क विदेशों और विदेशियों मे बढ़ाना चाहिये। परिश्रम और सतत संघर्ष से किसी भी कार्य मे लगें रहे तो इनको सफलता के साथ यश भी मिलता है। इन्हें पेट की बीमारी से प्राय: कष्ट होता है। जिगर भी उसी का भाग है। पैर के रोगों से भी सचेत रहें। वैसे इन व्यक्ति की मैत्री किसी भी प्रकार के व्यक्ति के साथ हो सकती है।

७.तुला राशि :-

इस राशि का चिन्ह तराजू है और यह राशि पश्चिम दिशा की द्योतक है और यह वायुतत्व की राशि है। शुक्र राशि का स्वामी है। इस राशि वालों को कफ की प्रवृत्ति होती है। इस राशि के पुरुष सुंदर, आकर्षक व्यक्तित्व वाले होते हैं। आंखों में चमक व चेहरे पर प्रसन्नता झलकती है। इनका स्वभाव सम होता है। किसी भी परिस्थिति में विचलित नहीं होते, दूसरों को प्रोत्साहन देना, सहारा देना इनका स्वभाव होता है। ये व्यक्ति कलाकार, सौंदर्योपासक व स्नेहिल होते हैं। व्यावहारिक भी होते हैं व इनके मित्र इन्हें पसंद करते हैं। कई बार व्यसनाधीन होने की भी रहते है।

तुला राशि की स्त्रियां मोहक व आकर्षक होती हैं। स्वभाव खुशमिजाज व हंसी खनखनाहट वाली होती हैं। बुद्धि वाले काम करने में अधिक रुचि होती है। घर की साजसज्जा व स्वयं को सुंदर दिखाने का शौक रहता है। कला, गायन आदि गृह कार्य में दक्ष होती हैं। बच्चों से बेहद जुड़ाव रहता है।

८.वृश्चिक राशि :-

वृश्चिक राशि का चिन्ह बिच्छू है और यह राशि उत्तर दिशा की द्योतक है। वृश्चिक राशि जलतत्व की राशि है। इसका स्वामी मंगल है। यह स्थिर राशि है, स्त्री राशि है। इस राशि के व्यक्ति उठावदार कदकाठी के होते है। यह राशि गुप्त अंगों, उत्सर्जन, तंत्र व स्नायु तंत्र का प्रतिनिधित्व करती है। अत: मंगल की कमजोर स्थिति में इन अंगों के रोग जल्दी होते है। ये लोग एलर्जी से भी अक्सर पीडि़त रहते है विशेषकर जब चंद्रमा कमजोर हो।

वृश्चिक राशि वालों में दूसरों को आकर्षित करने की अच्छी क्षमता रखते हैं। इस राशि के लोग बहादुर, भावुक होने के साथ-साथ कामुक होते हैं। शरीरिक डील-डौल भी अच्छा होता है। ऐसे व्यक्तियों की शारीरिक संरचना अच्छी तरह से विकसित होती है। इनके कंधे चौड़े होते हैं। इनमें शारीरिक व मानसिक शक्ति प्रचुर मात्रा में होती है। इन्हें बेवकूफ बनाना आसान नहीं होता है। इसीलिये कोई इन्हें धोखा नहीं दे सकता। आप हमेशा साफ-सुथरी और सही सलाह देने में विश्वास रखते हैं। कभी साफगोई विरोध का कारण भी बन सकती है। ये जातक दूसरों के विचारों का विरोध ज्यादा करते हैं, अपने विचारों के पक्ष में कम बोलते हैं और आसानी से सबके साथ घुलते-मिलते नहीं हैं। यह जातक अक्सर विविधता की तलाश में रहते हैं। वृश्चिक राशि से प्रभावित लड़के बहुत कम बोलते होते हैं। ये आसानी से किसी को भी आकर्षित कर सकते हैं। इन्हें दुबली-पतली लड़कियां आकार्षित करती हैं। वृश्चिक वाले एक जिम्मेदार गृहस्त की भूमिका निभाते हैं। अति महत्वाकांक्षी और जिद्दी होते हैं। अपने रास्ते चलते है मगर किसी का हस्तक्षेप पसंद नहीं करते। लोगों की गलतियों और बुरी बातों को खूब याद रखते हैं और समय आने पर उनका उत्तर भी देते हैं। इनकी वाणी कटु और गुस्सा तेज होता है मगर मन साफ होता है। दूसरों में दोष ढूंढने की आदत होती है। जोड़-तोड़ की राजनीति में चतुर होते हैं।

इस राशि की लड़कियां तीखे नयन-नक्ष वाली होती हैं। यह ज्यादा सुन्दर न हों तो भी इनमें एक अलग आकर्षण रहता है। इनका बातचीत करने का अपना विशेष अंदाज होता है। ये बुद्धिमान और भावुक होती हैं। इनकी इच्छा शक्ति बहुत दृढ़ होती है। स्त्रियां जिद्दी और अति महत्वाकांक्षी होती है। थोड़ी स्वार्थी प्रवृत्ति भी होती है। स्वतंत्र निर्णय लेना इनकी आदत में होते है। मायके परिवार से अधिक स्नेह रहता है। नौकरीपेशा होने पर अपना वर्चस्व बनाए रखती है। काम करने की अपार क्षमता होती है। वाणी की कटुता इनमें भी होती है, सुख-साधनों की लालसा सदैव बनी ही रहती है।

ये सभी जातक जिद्दी होते है, काम के प्रति लगन रखते है, महत्वाकांक्षी व दूसरों को प्रभावित करने की योग्यता रखते हैं। ये व्यक्ति उदार व आत्मविश्वासी भी होते है।

वृश्चिक राशि के बच्चे परिवार से अधिक स्नेह रखते हैं। कम्प्यूटर-टीवी का बेहद शौक होता है। दिमागी शक्ति तीव्र होती है, खेलों में इनकी रुचि होती है।

९.धनु राशि :-

इस राशि का चिन्ह धनुषधारी व्यक्ति होता है। यह राशि दक्षिण दिशा की द्योतक है। धनु राशि वाले काफी खुले विचारों के होते हैं। जीवन के अर्थ को अच्छी तरह समझते हैं। दूसरों के बारे में जानने की कोशिश में हमेशा करते रहते हैं। धनु राशि वालों को रोमांच काफी पसंद होता है। धनु राशि के व्यक्ति निडर व आत्म विश्वासी होते हैं। ये अत्याधिक महत्वाकांक्षी और स्पष्टवादी होते हैं। लेकिन स्पष्टवादीता के कारण दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुंचा देते हैं। इनके अनुसार जो इनके द्वारा परखा हुआ है वही सत्य है अत: इनके मित्र कम होते है। ये धार्मिक विचारधारा से दूर होते हैं।

धनु राशि के लड़के मध्यम कद काठी के होते हैं। इनके बाल भूरे व आंखें बड़ी-बड़ी होती हैं। इनमें धैर्य की कमी होती है। इन्हें मेकअप करने वाली लड़कियां पसंद हैं। इन्हें भूरा और पीला रंग प्रिय होता है। अपनी पढ़ाई और कैरियर के कारण अपने जीवन साथी और विवाहित जीवन की उपेक्षा कर देते हैं। पत्नी को शिकायत का मौका नहीं देते और घरेलू जीवन का महत्व समझते हैं। धनु राशि की लड़कियां लम्बे कदमों से चलने वाली होती हैं। आप आसानी से किसी के साथ दोस्ती नहीं करती हैं। ये एक अच्छी श्रोता होती हैं और इन्हें खुले और ईमानदारी पूर्ण व्यवहार के व्यक्ति पसंद आते हैं। इस राशि की स्त्रियां गृहणी बनने की अपेक्षा सफल कैरियर बनाना चाहती है। इनके जीवन में भौतिक सुखों की महत्ता रहती है। सामान्यत: सुखी और सम्पन्न जीवन व्यतीत करती हैं।

१०.मकर राशि :-

मकर राशि के व्यक्ति अति महत्वाकांक्षी होते हैं। यह सम्मान और सफलता प्राप्त करने के लिये लगातार कार्य कर सकते हैं। इनका शाही स्वभाव व गंभीर व्यक्तित्व होता है। आपको अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये बहुत कठिन परिश्रम करना पड़ता है। इन्हें यात्रा करना पसंद है। गंभीर स्वभाव के कारण आसानी से किसी को मित्र नहीं बनाते हैं। इनके मित्र अधिकतर कार्यालय या व्यवसाय से ही सम्बन्धित होते हैं। मनपसंद रंग भूरा और नीला है। सामान्यत: कम बोलने वाले, गंभीर और उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों को ज्यादा पसंद करते हैं। ईश्वर व भाग्य में विश्वास करते हैं। दृढ़ पसंद-नापसंद के चलते इनका वैवाहिक जीवन लचीला नहीं होता और जीवन साथी को आपसे परेशानी महसूस हो सकती है। मकर राशि के लड़के कम बोलने वाले होते हैं। इनके हाथ की पकड़ काफी मजबूत होती है। देखने में सुस्त किन्तु मानसिक रूप से बहुत चुस्त होते हैं। प्रत्येक कार्य को बहुत योजनाबद्ध ढंग से करते हैं। गहरा नीला या श्वेत रंग प्रधान वस्त्र पहने हुए लड़कियां आपको बहुत पसंत आती है।

जब आप कार में दूर की यात्रा कर रहे होते हैं, आपकी खामोशी आपके साथी को प्रिय होती है। अगर आपकी पत्नी आपके व्यवहार को अच्छी तरह समझ लेती है तो आपका जीवन सुखपूर्वक व्यतीत होता है। आप पत्नी या साथी के सहयोग से उन्नति प्राप्त कर सकते हैं।

मकर राशि की लड़कियां लम्बी व दुबली-पतली होती हैं। यह व्यायाम आदि करना पसंद करती हैं। लम्बे कद के बाबजूद आप ऊंची एड़ी की सैंडिल पहनना पसंद करती हैं। पारंपरिक मूल्यों पर विश्वास करने वाली होती हैं। छोटे छोटे वाक्यों में अपने विचारों को व्यक्त करती हैं। दूसरों के विचारों को अच्छी तरह से समझ सकती हैं। इनके मित्र बहुत होते हैं और नृत्य की शौकिन होती है। इनको मजबूत कद कठी के व्यक्ति बहुत आकर्षित करते हैं। विवाहेत्तर सम्बन्धों में विश्वास नहीं करती हैं। अगर आप कैरियर वूमैन हैं तो आप अपने कार्य क्षेत्र में अपना अधिकतर समय व्यतीत करती हैं। आप अपने घर या घरेलू कार्यों के विषय में अधिक चिन्ता नहीं करती हैं।

११.कुंभ राशि :-

कुंभ राशि का चिन्ह घड़ा लिए खड़ा हुआ व्यक्ति है।

कुंभ राशि वाले बुद्धिमान होने के साथ-साथ व्यवहारकुशल होते हैं। जीवन में स्वतन्त्रता के पक्षधर होते हैं। प्रकृति से भी असीम प्रेम करते हैं। शीघ्र ही किसी से भी मित्रता स्थपित कर सकते हैं। आप सामाजिक क्रिया कलापों में रूचि रखने वाले होते हैं। इसमें भी साहित्य, कला, संगीत व दान आपको बेहद पसंद होता है।

इस राशि के लोगों में साहित्य प्रेम भी उच्च कोटि का होता है। आप केवल बुद्धिमान व्यक्तियों के साथ बोलना चालना पसंद करते हैं। कभी भी आप अपने मित्रों से असमानता का व्यवहार नहीं करते हैं। आपका व्यवहार सभी को आपकी ओर आकर्षित कर लेता है। कुंभ राशि के लड़के दुबले और लम्बे होते हैं। आपका व्यवहार स्नेहपूर्ण होता है। इनकी मुस्कान इन्हें आकर्षक व्यक्तित्व प्रदान करती है। इनकी रूचि स्तरीय खान पान व पहनावे की ओर रहती है। ये बोलने की अपेक्षा सुनना ज्यादा पसंद करते हैं। इन्हें लोगों से मिलना जुलना अच्छा लगता है। अपने व्यवहार में बहुत ईमानदार रहते हैं इसलिये अनेक लड़कियां आपकी प्रशंसक होती हैं। आपको कलात्मक अभिरूचि व सौम्य व्यक्तित्व वाली लड़कियां आकर्षित करती हैं। अपनी इच्छाओं को दूसरों पर लादना पसंद नहीं करते हैं और अपने घर परिवार से स्नेह रखते हैं।

कुंभ राशि की लड़कियां बड़ी बड़ी आंखों वाली व भूरे बालों वाली होती हैं। यह कम बोलती हैं इनकी मुस्कान आकर्षक होती है। इनका व्यक्तित्व बहुत आकर्षक होता है किन्तु आसानी से किसी को अपना नहीं बनाती हैं। ये अति सुंदर और आकर्षक होती हैं। आप किसी कलात्मक रूचि, पेंटिग, काव्य, संगीत, नृत्य या लेखन आदि में अपना समय व्यतीत करती हैं। ये सामान्यत: गंभीर व कम बोलने वाले व्यक्तियों के प्रति आकर्षित होती हैं। इनका जीवन सुखपूर्वक व्यतित होता है क्योंकि ये ज्यादा इच्छाएं नहीं करती हैं। अपने घर को भी कलात्मक रूप से सजाती हैं।

१२.मीन राशि :-

मीन राशि का चिन्ह मछली होता है।

मीन राशि वाले मित्रपूर्ण व्यवहार के कारण अपने कार्यालय व पास पड़ोस में अच्छी तरह से जाने जाते हैं। आप कभी अति मैत्रीपूर्ण व्यवहार नहीं करते हैं। बल्कि आपका व्यवहार बहुत नियंत्रित रहता है। ये आसानी से किसी के विचारों को पढ़ सकते हैं। अपनी ओर से उदारतापूर्ण व संवेदनाशील होते हैं और व्यर्थ का दिखावा व चालाकी को बिल्कुल नापसंद करते हैं। एक बार किसी पर भी भरोसा कर लें तो यह हमेशा के लिये होता है इसीलिये आप आपने मित्रों से अच्छा भावानात्मक सम्बन्ध बना लेते हैं। सौंदर्य और रोमांस की दुनियां में रहते हैं। कल्पनाशीलता बहुत प्रखर होती है। अधिकतर व्यक्ति लेखन और पाठन के शौकीन होते हैं। आपको नीला, सफेद और लाल रंग रूप से आकर्षित करते हैं। आपकी स्तरीय रूचि का प्रभाव आपके घर में देखने को मिलता है। आपका घर आपकी जिंदगी में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। अपने धन को बहुत देखभाल कर खर्च करते हैं। आपके अभिन्न मित्र मुश्किल से एक या दो ही होते हैं। जिनसे ये अपने दिल की सभी बातें कह सकते हैं। ये विश्वासघात के अलावा कुछ भी बर्दाश्त कर सकते हैं।

मीन राशि के लड़के भावुक हृदय व पनीली आंखों वाले होते हैं। अपनी बात कहने से पहले दो बार सोचते हैं। आप जिंदगी के प्रति काफी लचीला दृटिकोण रखते हैं। अपने कार्य क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के लिये परिश्रम करते हैं।

कार्यालय या विद्यालय में कोई लड़की आपको आकर्षित करती है तो केवल इसलिये कि इससे इनके कार्यों में कोई रूकावट नहीं आती हैं। आपको बुद्धिमान और हंसमुख लड़कियां पसंद हैं। आप बहुत संकोचपूर्वक ही किसी लड़की से अपनी बात कह पाते हैं। एक कोमल व भावुक स्वभाव के व्यक्ति हैं। आप पत्नी के रूप में गृहणी को ही पसंद करते हैं। किन्तु ये खुद घरेलू कार्यों में दखलंदाजी नहीं करते हैं न ही आप अपनी व्यावसायिक कार्य में उसका दखल पसंद करते हैं। आपका वैवाहिक जीवन अन्य राशियों की अपेक्षा सर्वाधिक सुखमय रहता है।

मीन राशि की लड़कियां भावुक व चमकदार आंखों वाली होती हैं। ये आसानी से किसी से मित्रता नहीं करती हैं। लेकिन एक बार उसकी बातों पर विश्वास हो जाये तो आप अपने दिल की बात भी उससे कह देती हैं। ये स्वभाव से कला प्रेमी होती हैं। एक बुद्धिमान व सभ्य व्यक्ति आपको आकर्षित करता है। आप शान्तिपूर्वक उसकी बात सुन सकती हैं और आसानी से अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं करती हैं। अपनी मित्रता और वैवाहिक जीवन में सुरक्षा व दृढ़ता रखना पसंद करती हैं। ये अपने पति के प्रति विश्वसनीय होती है और वैसा ही व्यवहार अपने पति से चाहती हैं। आपको ज्योताषि आदि में रूचि हो सकती है। आपको नई-नई चीजें सीखने का शौक होता है।

ज्योतिष राशियां उनके गुण और लक्षण

१.मेष राशि :-

राशि चक्र की यह पहली राशि है, इस राशि का चिन्ह मेढ़ा या भेड़ है, मेष राशि पूर्व दिशा की द्योतक है तथा इसका स्वामी मंगल है। मेष राशि के अन्तर्गत अश्विनी और भरणी नक्षत्र के चारों चरण और कृत्तिका का प्रथम चरण आते हैं। मंगल जातक को अधिक उग्र और निरंकुश बना देता है। वह किसी की जरा सी भी विपरीत बात में या कार्य में जातक को क्रोधात्मक स्वभाव देता है, जिससे जातक बात-बात में झगड़ा करने को उतारू हो जाता है। मेष राशि के जातक को किसी की आधीनता पसंद नहीं होती है। वह अपने अनुसार ही कार्य और बात करना पसंद करता है। जातक को ऐश-आराम की जिन्दगी जीने के लिये मेहनत वाले कार्यों से दूर रखता है और जातक विलासी होता है। जातक के दिमाग में विचारों की स्थिरता रहती है और जातक जो भी सोचता है उसे करने के लिये उद्धत हो जाता है। मंगल की वजह से जातक में भटकाव वाली स्थिति रहती है वह अपनी जिन्दगी में यात्रा को महत्व देता है। जातक में उग्रता के साथ विचारों को प्रकट न करने की हिम्मत देते हैं, वह हमेशा अपने मन में ही लगातार माया के प्रति सुलगता रहता है। जीवन साथी के प्रति बनाव बिगाड़ हमेशा चलता रहता है, मगर जीवन साथी से दूर भी नहीं रहा जाता है। जनता के लिये अपनी सहायता वाली सेवाएं देकर पूरी जिन्दगी निकाल देगा। सूर्य जातक को अभिमानी और चापलूस प्रिय बनाता है। बुध जातक को बुद्धि वाले कार्यों की तरफ और संचार व्यवस्था से धन कमाने की वृत्ति देता है। शुक्र विलासिता प्रिय और दोहरे दिमाग का बनाता है लेकिन अपने विचारों को उसमें सतुलित करने की अच्छी योग्यता होती है।

मेष अग्नि तत्व वाली राशि है, अग्नि त्रिकोण (मेष, सिंह, धनु) की यह पहली राशि है। इसका स्वामी मंगल अग्नि ग्रह है। राशि और स्वामी का यह संयोग इसकी अग्नि या ऊर्जा को कई गुना बढ़ा देता है, यही कारण है कि मेष जातक ओजस्वी, दबंग, साहसी और दृढ़ इच्छाशक्ति वाले होते हैं, यह जन्मजात योद्धा होते हैं। मेष राशि वाले व्यक्ति बाधाओं को चीरते हुए अपना मार्ग बनाने की कोशिश करते हैं।

२.वृष राशि :-

राशि का चिन्ह बैल है। बैल स्वभाव से ही अधिक पारिश्रमी और बहुत अधिक वीर्यवान होता है, साधारणत: वह शांत रहता है। किन्तु क्रोध आने पर वह उग्र रूप धारण कर लेता है। यह स्वभाव वृष राशि के जातक में भी पाया जाता है। वृष राशि का स्वामी शुक्र ग्रह है। इसके अन्तर्गत कृत्तिका नक्षत्र के तीन चरण, रोहिणी के चारों चरण और मृगशिरा के प्रथम दो चरण आते हैं।

जातक के जीवन में पिता-पुत्र का कलह रहता है, जातक का मन सरकारी कार्यों की ओर रहता है। सरकारी ठेकेदारी का कार्य करवाने की योग्यता रहती है। पिता के पास जमीनी काम या जमीन के द्वारा जीविकोपार्जन का साधन होता है। जातक अधिकतर शराब, काबाब के भोजन में अपनी रुचि को प्रदर्शित करता है।

गुरु का प्रभाव जातक में ज्ञान के प्रति अहम भाव को पैदा करने वाला होता है, वह जब भी कोई बात करता है तो गर्व की बात करता है, सरकारी क्षेत्रों की शिक्षाएं और उनके काम जातक को अपनी ओर आकर्षित करते हैं और किसी प्रकार से केतु का बल मिल जाता है तो जातक सरकार का मुख्य सचेतक बनने की योग्यता रखता है। मंगल के प्रभाव से जातक के अन्दर मानसिक गर्मी को प्रदान करता है, कल कारखानों, स्वास्थ्य कार्यों और जनता के झगड़े सुलझाने का कार्य जातक कर सकता है, जातक की माता आपत्तियों से घिरी होती है और पिता का लगाव अन्य स्त्रियों से बना रहता है। ये अधिक सौन्दर्य बोधी और कला प्रिय होते हैं। जातक कलाकारी के क्षेत्र में नाम करता है। माता और पति का साथ या माता और पत्नी का साथ घरेलू वातावरण मे सामजस्यता लाता है, जातक अपने जीवन साथी के अधीन रहना पसंद करता है।

चन्द्र-बुध जातक को कन्या संतान अधिक देता है और माता के साथ वैचारिक मतभेद का वातावरण बनाता है, जातक के जीवन में व्यापारिक यात्राएं काफी होती हैं, जातक अपने ही बनाए हुए उसूलों पर जीवन चलाता है, वह मकडी जैसा जाल बुनता रहता है और अपने ही बुने जाल में फंस जाता है।

रोहिणी के चौथे चरण के मालिक चन्द्र-चन्द्र है,जातक के अन्दर हमेशा उतार चढाव की स्थिति बनी रहती है,वह अपने ही मन का राजा होता है।

मंगल-सूर्य की युति में पैदा होने वाले जातक अपने शरीर से दुबले पतले होने के वावजूद गुस्सेवाले होते हैं, वे घमंडी होते हैं। जिससे आदेश देने की वृत्ति होने से सेना या पुलिस में अपने को निरंकुश बनाकर रखते है, इस तरह के जातक अगर राज्य में किसी भी विभाग में काम करते हैं तो सरकारी सम्पत्ति को किसी भी तरह से क्षति नहीं होने देते। मंगल-बुध जातक के अन्दर कभी कठोर और कभी नर्म वाली स्थिति पैदा कर देते हैं। जातक का मन कम्प्यूटर और इलेक्ट्रोनिक क्षेत्र की ओर होता है। वृष राशि वाले जातक शांति पूर्वक रहना पसंद करते हैं। जीवन में परिवर्तन से चिढ सी होती है, अलग माहौल में रहना अच्छा नही लगता है। इस प्रकार के लोग सामाजिक होते हैं और अपने से उच्च लोगों को आदर की नजर से देखते है।

३.मिथुन राशि :-

राशि का प्रतीक युवा दम्पति है, यह द्वि-स्वभाव वाली राशि है। मृगसिरा नक्षत्र के तीसरे चरण के मालिक मंगल-शुक्र हैं। मंगल शक्ति और शुक्र माया है। जातक के अन्दर माया के प्रति भावना पायी जाती है, जातक जीवन साथी के प्रति हमेशा शक्ति बन कर प्रस्तुत होता है। साथ ही घरेलू कारणों चलते कई बार आपस में तनाव रहता है। मंगल और शुक्र की युती के कारण जातक में स्त्री रोगों को परखने की अद्भुत क्षमता होती है। जातक वाहनों की अच्छी जानकारी रखता है। इनका घरेलू साज सज्जा के प्रति अधिक झुकाव होता है।

मंगल के कारण जातक जबान का पक्का बन जाता है। गुरु आसमान का राजा है तो राहु गुरु का चेला, दोनो मिलकर जातक में आसमानी ताकतों को बढ़ाते हैं। जातक का रुझान अंतरिक्ष और ब्रह्माण्ड के बारे मे पता करने की योग्यता जन्म जात पैदा होती है। वह वायुयान और सेटेलाइट के बारे में ज्ञान बढ़ाता है। राहु-शनि के साथ मिलने से जातक के अन्दर शिक्षा और शक्ति उत्पादित होती है। जातक का कार्य शिक्षा स्थानों में या बिजली, पेट्रोल या वाहन वाले कामों की ओर होता है। जातक एक दायरे मे रह कर ही कार्य कर पाता है और पूरा जीवन कार्योपरान्त फलदायक रहता है। जातक के अन्दर एक मर्यादा जो धर्म में लीन करती है और जातक सामाजिक और धार्मिक कार्यों में अपने को रत रखता है। गुरु जो ज्ञान का मालिक है, उसे मंगल का साथ मिलने पर उच्च पदासीन करने के लिये और रक्षा आदि विभागों में ले जाता है।

जातक के अन्दर अपने ही विचारों में अपने ही कारणों से उलझने का कारण पैदा होता है। मिथुन राशि पश्चिम दिशा की द्योतक है, जो चन्द्रमा की निरयण समय में जन्म लेते हैं, वे मिथुन राशि के कहे जाते हैं।

जातक मे चंचलता रहती है। शरीर बलबान नही रह पाता है, आंखों का रंग भूरा या नीला होता है, शरीर का रंग सांवला या गोरा कैसा भी हो सकता है।

मिथुन राशि वालों को दुर्बोध माना जाता है। इस राशि का निशान स्त्री और पुरुष का जोडा है। इसका स्वामी बुध है। बुध की धातु पारा है और इसका स्वभाव जरा सी गर्मी-सर्दी में ऊपर नीचे होने वाला है। जातकों में दूसरे की मन की बातें पढऩे, दूरदृष्टि, बहुमुखी प्रतिभा, अधिक चतुरायी से कार्य करने की क्षमता होती है। जातक को बुद्धि वाले कामों में ही सफलता मिलती है। अपने आप पैदा होने बाली मति और वाणी की चतुरता से इस राशि के लोग कुशल कूटनीतिज्ञ और राजनीतिज्ञ भी बन जाते हैं, हर कार्य में जिज्ञासा और खोजी दिमाग होने के कारण इस राशि के लोग अन्वेषण में भी सफलता लेते रहते हैं और पत्रकार, लेखक, मीडियाकर्मी, भाषाओं की जानकारी, योजनाकार भी बन सकते हैं।

४.कर्क राशि :-

इस राशि का चिन्ह केकड़ा है और यह उत्तर दिशा की द्योतक है। यह चर राशि है। राशि स्वामी चन्द्रमा है। इसके अन्तर्गत पुनर्वसु नक्षत्र का अन्तिम चरण, पुष्य नक्षत्र के चारों चरण तथा अश्लेशा नक्षत्र के चारों चरण आते हैं।

जातक कल्पनाशील होते हैं। शनि-सूर्य जातक को मानसिक रूप से अस्थिर बनाते हैं और जातक में अहम की भावना बढ़ाते हैं। जिस स्थान पर भी वह कार्य करने की इच्छा करता है, जातक को परेशानी ही मिलती है।

शनि-बुध दोनो मिलकर जातक को होशियार बना देते है। शनि-शुक्र जातक को धन और जायदाद देते है। शुक्र उसे सजाने संवारने की कला देता है और शनि अधिक वासना देता है।

जातक को उपदेशक बन सकता है। जातक को बुध आंकडे और शनि लिखने का प्रभाव देते हैं। कम्प्यूटर आदि का प्रोग्रामर बनाने में जातक को सफलती मिलत है।

जानक श्रेष्ठ बुद्धि वाला, जलविहारी, कामुक, कृतज्ञ, ज्योतिषी, सुगंधित पदार्थों का सेवी और भोगी होता है। वह मातृभक्त होता है।

कर्क केकडा जब किसी वस्तु या जीव को अपने पंजों के जकड़ लेता है, तो उसे आसानी से नहीं छोडता है। भले ही इसके लिये उसे अपने पंजे गंवाने पडें. उसी तरह जातकों में अपने प्रेम पात्रों तथा विचारों से चिपके रहने की प्रबल भावना होती है, यह भावना उन्हें ग्रहणशील, एकाग्रता और धैर्य के गुण प्रदान करती है। उनका मूड बदलते देर नहीं लगती है। कल्पनाशक्ति और स्मरण शक्ति बहुत तीव्र होती है। उनके लिए अतीत का महत्व होता है। मैत्री को वे जीवन भर निभाना जानते हैं, अपनी इच्छा के स्वामी होते हैं। ये सपना देखने वाले होते हैं, परिश्रमी और उद्यमी होते हैं। जातक बचपन में प्राय: दुर्बल होते हैं, किन्तु आयु के साथ साथ उनके शरीर का विकास होता जाता है। चूंकि कर्क कालपुरुष की वक्षस्थल और पेट का प्रतिधिनित्व करती है, अत: जातकों को अपने भोजन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

५.  सिंह राशि :-

सिंह राशि पूर्व दिशा की द्योतक है। इसका चिन्ह शेर है। राशि का स्वामी सूर्य है और इस राशि का तत्व अग्नि है। इसके अन्तर्गत मघा नक्षत्र के चारों चरण, पूर्वा फाल्गुनी के चारों चरण और उत्तराफाल्गुनी का पहला चरण आता है।

केतु-मंगल जातक में दिमागी रूप से आवेश पैदा करता है। केतु-शुक्र, जो जातक में सजावटी और सुन्दरता के प्रति भावना को बढाता है। केतु-बुध, जो जातक में कल्पना करने और हवाई किले बनाने के लिये सोच पैदा करता है। चन्द्र-केतु जातक में कल्पना शक्ति का विकास करता है। शुक्र-सूर्य जातक को स्वाभाविक प्रवृत्तियों की तरफ बढाता है। जातक का सुन्दरता के प्रति मोह होता है और वे कामुकता की ओर भागते हैं। जातक में अपने प्रति स्वतन्त्रता की भावना भरता है और जातक किसी की बात नहीं मानता।

जातक, पित्त और वायु विकार से परेशान रहने वाले लोग, रसीली वस्तुओं को पसंद करने वाले होते हैं। कम भोजन करना और खूब घूमना, इनकी आदत होती है। छाती बड़ी होने के कारण इनमे हिम्मत बहुत अधिक होती है और मौका आने पर यह लोग जान पर खेलने से भी नहीं चूकते। जातक जीवन के पहले दौर में सुखी, दूसरे में दुखी और अन्तिम अवस्था में पूर्ण सुखी होता है। सिंह राशि वाले जातक हर कार्य शाही ढंग से करते हैं जैसे सोचना शाही, करना शाही, खाना शाही और रहना शाही। इस राशि वाले लोग जुबान के पक्के होते हैं। जातक जो खाता है वही खायेगा, अन्यथा भूखा रहना पसंद करेगा, वह आदेश देना जानता है, किसी का आदेश उसे सहन नही है, जिससे प्रेम करेगा, उसके मरते दम तक निभायेगा, जीवन साथी के प्रति अपने को पूर्ण रूप से समर्पित रखेगा, अपने व्यक्तिगत जीवन में किसी का आना इस राशि वाले को कतई पसंद नहीं है।

जातक कठोर मेहनत करने वाले धन के मामलों में बहुत ही भाग्यशाली होते हैं। स्वर्ण, पीतल और हीरा जवाहरात के व्यवसाय इनको बहुत फायदा देने वाले होते हैं। सरकार और नगर पालिका वाले पद इनको खूब भाते हैं। जातकों की वाणी और चाल में शालीनता पायी जाती है। इस राशि वाले जातक सुगठित शरीर के मालिक होते हैं। नृत्य करना इनकी आदत होती है, अधिकतर इस राशि वाले या तो बिलकुल स्वस्थ रहते है या फिर आजीवन बीमार रहते हैं, जिस वारावरण में इनको रहना चाहिये, अगर वह न मिले, इनके अभिमान को कोई ठेस पहुंचाये या इनके प्रेम में कोई बाधा आये, तो यह लोग अपने मानसिक कारणों से बीमार रहने लगते है। रीढ़ की हड्डी की बीमारी या चोटों से अपने जीवन को खतरे में डाल लेते हैं। इस राशि के लोगों के लिये ह्रदय रोग, धड़कन का तेज होना, लू लगना और आदि बीमारी होने की संभावना होती है।

६.कन्या राशि :-

राशि- राशि चक्र की छठी कन्या राशि दक्षिण दिशा की द्योतक है। इस राशि का चिह्न हाथ में फूल लिए कन्या है। राशि का स्वामी बुध है। इसके अन्तर्गत उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के दूसरे, तीसरे और चौथे चरण, चित्रा के पहले दो चरण और हस्त नक्षत्र के चारों चरण आते है। जातक को उसके द्वारा किये जाने वाले कार्यों के प्रति अधिक महत्वाकांक्षी बनाते हैं। जातक भावुक होता है एवं वह दिमाग की अपेक्षा ह्रदय से काम लेना चालू कर देता है। इस राशि के लोग संकोची और शर्मीले प्रभाव के साथ झिझकने वाले होते है। मकान, जमीन और सेवाओं वाले क्षेत्र में इस राशि के जातक कार्य करते हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से फेफड़ों में ठंड लगना और पाचन एवं आंतों से संबंधी बीमारियां जातकों मे मिलती है।

बाल्याकाल से युवावस्था के अलावा जातकों की वृद्धावस्था अधिक सुखी और ज्यादा स्थिर होता है। इस राशि वाल पुरुषों का भी शरीर स्त्रियों की भांति कोमल होता है। ये नाजुक और ललित कलाओं से प्रेम करने वाले लोग होते है। इनका बचपन संघर्षों में बीतता है, इन्हें सुविधायें आसानी से प्राप्त नहीं होती है। किंतु ये अपनी योग्यता के बल पर ही उच्च पद पर पहुंच जाते है। विपरीत कन्यापरिस्थितियां भी इन्हें डिगा नहीं सकती और ये अपनी सुझ-बुझ, धैर्य, चातुर्य के कारण आगे बढ़ते रहते है। ये कभी विचलित नही होते है। बुध का प्रभाव इनके जीवन मे स्पष्ट झलकता है. अच्छे गुण, विचारपुर्ण जीवन, बुद्धिमत्ता, इस राशि वाले में अवश्य देखने को मिलती है। इसके स्वभाव मे नम्रता और लज्जा का पुट होता है। शिक्षा और जीवन में सफलता के कारण लज्जा और झेंपुपन तो कम हो जाते हैं परंतु नम्रता तो इनका स्वाभाविक गुण है। इनको अकारण क्रोध नहीं आता किंतु जब क्रोध आता है तो जल्दी समाप्त नहीं होता। जिसके कारण क्रोध आता है, उसके प्रति घृणा की भावना इनके हृदय में घर कर जाती है। इन व्यक्तियों मे भाषण व बातचीत करने की अच्छी शक्ति होती है। सम्बन्धियों से इन्हे विशेष लाभ नहीं होता है इनका वैवाहिक जीवन भी सुखी नहीं होता। यह जरुरी नहीं की इनका किसी और औरत के साथ सम्बन्ध होने के कारण ही ऐसा होगा। बगैर पराई स्त्री से प्रेम के बावजूद भी क्लेशमय हो सकता है। अगर ये ये दुसरा विवाह कर भी लें जिसकी प्रबल सम्भावना रहती है, तो इनके जीवन मे काफी परिवर्तन आ जाता है। पर इनके प्रेम सम्बन्ध प्राय: बहुत सफल नहीं होते है। इसी कारण निकटस्थ लोगों के साथ इनके झगड़े चलते रहते है। ऐसे व्यक्ति धार्मिक विचारों में आस्था तो रखते है परंतु किसी विशेष मत के नहीं होते है। इन्हें यात्राएं भी करनी पड़ती है तथा विदेश गमन की भी सम्भावना रहती है। जिस काम मे हाथ डालते है लगन के साथ पुरा करके ही छोड़ते है। इस राशि वाले लोग अपरिचित लोगों मे अधिक लोकप्रिय होते है, इसलिये इन्हें अपना सम्पर्क विदेशों और विदेशियों मे बढ़ाना चाहिये। परिश्रम और सतत संघर्ष से किसी भी कार्य मे लगें रहे तो इनको सफलता के साथ यश भी मिलता है। इन्हें पेट की बीमारी से प्राय: कष्ट होता है। जिगर भी उसी का भाग है। पैर के रोगों से भी सचेत रहें। वैसे इन व्यक्ति की मैत्री किसी भी प्रकार के व्यक्ति के साथ हो सकती है।

७.तुला राशि :-

इस राशि का चिन्ह तराजू है और यह राशि पश्चिम दिशा की द्योतक है और यह वायुतत्व की राशि है। शुक्र राशि का स्वामी है। इस राशि वालों को कफ की प्रवृत्ति होती है। इस राशि के पुरुष सुंदर, आकर्षक व्यक्तित्व वाले होते हैं। आंखों में चमक व चेहरे पर प्रसन्नता झलकती है। इनका स्वभाव सम होता है। किसी भी परिस्थिति में विचलित नहीं होते, दूसरों को प्रोत्साहन देना, सहारा देना इनका स्वभाव होता है। ये व्यक्ति कलाकार, सौंदर्योपासक व स्नेहिल होते हैं। व्यावहारिक भी होते हैं व इनके मित्र इन्हें पसंद करते हैं। कई बार व्यसनाधीन होने की भी रहते है।

तुला राशि की स्त्रियां मोहक व आकर्षक होती हैं। स्वभाव खुशमिजाज व हंसी खनखनाहट वाली होती हैं। बुद्धि वाले काम करने में अधिक रुचि होती है। घर की साजसज्जा व स्वयं को सुंदर दिखाने का शौक रहता है। कला, गायन आदि गृह कार्य में दक्ष होती हैं। बच्चों से बेहद जुड़ाव रहता है।

८.वृश्चिक राशि :-

वृश्चिक राशि का चिन्ह बिच्छू है और यह राशि उत्तर दिशा की द्योतक है। वृश्चिक राशि जलतत्व की राशि है। इसका स्वामी मंगल है। यह स्थिर राशि है, स्त्री राशि है। इस राशि के व्यक्ति उठावदार कदकाठी के होते है। यह राशि गुप्त अंगों, उत्सर्जन, तंत्र व स्नायु तंत्र का प्रतिनिधित्व करती है। अत: मंगल की कमजोर स्थिति में इन अंगों के रोग जल्दी होते है। ये लोग एलर्जी से भी अक्सर पीडि़त रहते है विशेषकर जब चंद्रमा कमजोर हो।

वृश्चिक राशि वालों में दूसरों को आकर्षित करने की अच्छी क्षमता रखते हैं। इस राशि के लोग बहादुर, भावुक होने के साथ-साथ कामुक होते हैं। शरीरिक डील-डौल भी अच्छा होता है। ऐसे व्यक्तियों की शारीरिक संरचना अच्छी तरह से विकसित होती है। इनके कंधे चौड़े होते हैं। इनमें शारीरिक व मानसिक शक्ति प्रचुर मात्रा में होती है। इन्हें बेवकूफ बनाना आसान नहीं होता है। इसीलिये कोई इन्हें धोखा नहीं दे सकता। आप हमेशा साफ-सुथरी और सही सलाह देने में विश्वास रखते हैं। कभी साफगोई विरोध का कारण भी बन सकती है। ये जातक दूसरों के विचारों का विरोध ज्यादा करते हैं, अपने विचारों के पक्ष में कम बोलते हैं और आसानी से सबके साथ घुलते-मिलते नहीं हैं। यह जातक अक्सर विविधता की तलाश में रहते हैं। वृश्चिक राशि से प्रभावित लड़के बहुत कम बोलते होते हैं। ये आसानी से किसी को भी आकर्षित कर सकते हैं। इन्हें दुबली-पतली लड़कियां आकार्षित करती हैं। वृश्चिक वाले एक जिम्मेदार गृहस्त की भूमिका निभाते हैं। अति महत्वाकांक्षी और जिद्दी होते हैं। अपने रास्ते चलते है मगर किसी का हस्तक्षेप पसंद नहीं करते। लोगों की गलतियों और बुरी बातों को खूब याद रखते हैं और समय आने पर उनका उत्तर भी देते हैं। इनकी वाणी कटु और गुस्सा तेज होता है मगर मन साफ होता है। दूसरों में दोष ढूंढने की आदत होती है। जोड़-तोड़ की राजनीति में चतुर होते हैं।

इस राशि की लड़कियां तीखे नयन-नक्ष वाली होती हैं। यह ज्यादा सुन्दर न हों तो भी इनमें एक अलग आकर्षण रहता है। इनका बातचीत करने का अपना विशेष अंदाज होता है। ये बुद्धिमान और भावुक होती हैं। इनकी इच्छा शक्ति बहुत दृढ़ होती है। स्त्रियां जिद्दी और अति महत्वाकांक्षी होती है। थोड़ी स्वार्थी प्रवृत्ति भी होती है। स्वतंत्र निर्णय लेना इनकी आदत में होते है। मायके परिवार से अधिक स्नेह रहता है। नौकरीपेशा होने पर अपना वर्चस्व बनाए रखती है। काम करने की अपार क्षमता होती है। वाणी की कटुता इनमें भी होती है, सुख-साधनों की लालसा सदैव बनी ही रहती है।

ये सभी जातक जिद्दी होते है, काम के प्रति लगन रखते है, महत्वाकांक्षी व दूसरों को प्रभावित करने की योग्यता रखते हैं। ये व्यक्ति उदार व आत्मविश्वासी भी होते है।

वृश्चिक राशि के बच्चे परिवार से अधिक स्नेह रखते हैं। कम्प्यूटर-टीवी का बेहद शौक होता है। दिमागी शक्ति तीव्र होती है, खेलों में इनकी रुचि होती है।

९.धनु राशि :-

इस राशि का चिन्ह धनुषधारी व्यक्ति होता है। यह राशि दक्षिण दिशा की द्योतक है। धनु राशि वाले काफी खुले विचारों के होते हैं। जीवन के अर्थ को अच्छी तरह समझते हैं। दूसरों के बारे में जानने की कोशिश में हमेशा करते रहते हैं। धनु राशि वालों को रोमांच काफी पसंद होता है। धनु राशि के व्यक्ति निडर व आत्म विश्वासी होते हैं। ये अत्याधिक महत्वाकांक्षी और स्पष्टवादी होते हैं। लेकिन स्पष्टवादीता के कारण दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुंचा देते हैं। इनके अनुसार जो इनके द्वारा परखा हुआ है वही सत्य है अत: इनके मित्र कम होते है। ये धार्मिक विचारधारा से दूर होते हैं।

धनु राशि के लड़के मध्यम कद काठी के होते हैं। इनके बाल भूरे व आंखें बड़ी-बड़ी होती हैं। इनमें धैर्य की कमी होती है। इन्हें मेकअप करने वाली लड़कियां पसंद हैं। इन्हें भूरा और पीला रंग प्रिय होता है। अपनी पढ़ाई और कैरियर के कारण अपने जीवन साथी और विवाहित जीवन की उपेक्षा कर देते हैं। पत्नी को शिकायत का मौका नहीं देते और घरेलू जीवन का महत्व समझते हैं। धनु राशि की लड़कियां लम्बे कदमों से चलने वाली होती हैं। आप आसानी से किसी के साथ दोस्ती नहीं करती हैं। ये एक अच्छी श्रोता होती हैं और इन्हें खुले और ईमानदारी पूर्ण व्यवहार के व्यक्ति पसंद आते हैं। इस राशि की स्त्रियां गृहणी बनने की अपेक्षा सफल कैरियर बनाना चाहती है। इनके जीवन में भौतिक सुखों की महत्ता रहती है। सामान्यत: सुखी और सम्पन्न जीवन व्यतीत करती हैं।

१०.मकर राशि :-

मकर राशि के व्यक्ति अति महत्वाकांक्षी होते हैं। यह सम्मान और सफलता प्राप्त करने के लिये लगातार कार्य कर सकते हैं। इनका शाही स्वभाव व गंभीर व्यक्तित्व होता है। आपको अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये बहुत कठिन परिश्रम करना पड़ता है। इन्हें यात्रा करना पसंद है। गंभीर स्वभाव के कारण आसानी से किसी को मित्र नहीं बनाते हैं। इनके मित्र अधिकतर कार्यालय या व्यवसाय से ही सम्बन्धित होते हैं। मनपसंद रंग भूरा और नीला है। सामान्यत: कम बोलने वाले, गंभीर और उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों को ज्यादा पसंद करते हैं। ईश्वर व भाग्य में विश्वास करते हैं। दृढ़ पसंद-नापसंद के चलते इनका वैवाहिक जीवन लचीला नहीं होता और जीवन साथी को आपसे परेशानी महसूस हो सकती है। मकर राशि के लड़के कम बोलने वाले होते हैं। इनके हाथ की पकड़ काफी मजबूत होती है। देखने में सुस्त किन्तु मानसिक रूप से बहुत चुस्त होते हैं। प्रत्येक कार्य को बहुत योजनाबद्ध ढंग से करते हैं। गहरा नीला या श्वेत रंग प्रधान वस्त्र पहने हुए लड़कियां आपको बहुत पसंत आती है।

जब आप कार में दूर की यात्रा कर रहे होते हैं, आपकी खामोशी आपके साथी को प्रिय होती है। अगर आपकी पत्नी आपके व्यवहार को अच्छी तरह समझ लेती है तो आपका जीवन सुखपूर्वक व्यतीत होता है। आप पत्नी या साथी के सहयोग से उन्नति प्राप्त कर सकते हैं।

मकर राशि की लड़कियां लम्बी व दुबली-पतली होती हैं। यह व्यायाम आदि करना पसंद करती हैं। लम्बे कद के बाबजूद आप ऊंची एड़ी की सैंडिल पहनना पसंद करती हैं। पारंपरिक मूल्यों पर विश्वास करने वाली होती हैं। छोटे छोटे वाक्यों में अपने विचारों को व्यक्त करती हैं। दूसरों के विचारों को अच्छी तरह से समझ सकती हैं। इनके मित्र बहुत होते हैं और नृत्य की शौकिन होती है। इनको मजबूत कद कठी के व्यक्ति बहुत आकर्षित करते हैं। विवाहेत्तर सम्बन्धों में विश्वास नहीं करती हैं। अगर आप कैरियर वूमैन हैं तो आप अपने कार्य क्षेत्र में अपना अधिकतर समय व्यतीत करती हैं। आप अपने घर या घरेलू कार्यों के विषय में अधिक चिन्ता नहीं करती हैं।

११.कुंभ राशि :-

कुंभ राशि का चिन्ह घड़ा लिए खड़ा हुआ व्यक्ति है।

कुंभ राशि वाले बुद्धिमान होने के साथ-साथ व्यवहारकुशल होते हैं। जीवन में स्वतन्त्रता के पक्षधर होते हैं। प्रकृति से भी असीम प्रेम करते हैं। शीघ्र ही किसी से भी मित्रता स्थपित कर सकते हैं। आप सामाजिक क्रिया कलापों में रूचि रखने वाले होते हैं। इसमें भी साहित्य, कला, संगीत व दान आपको बेहद पसंद होता है।

इस राशि के लोगों में साहित्य प्रेम भी उच्च कोटि का होता है। आप केवल बुद्धिमान व्यक्तियों के साथ बोलना चालना पसंद करते हैं। कभी भी आप अपने मित्रों से असमानता का व्यवहार नहीं करते हैं। आपका व्यवहार सभी को आपकी ओर आकर्षित कर लेता है। कुंभ राशि के लड़के दुबले और लम्बे होते हैं। आपका व्यवहार स्नेहपूर्ण होता है। इनकी मुस्कान इन्हें आकर्षक व्यक्तित्व प्रदान करती है। इनकी रूचि स्तरीय खान पान व पहनावे की ओर रहती है। ये बोलने की अपेक्षा सुनना ज्यादा पसंद करते हैं। इन्हें लोगों से मिलना जुलना अच्छा लगता है। अपने व्यवहार में बहुत ईमानदार रहते हैं इसलिये अनेक लड़कियां आपकी प्रशंसक होती हैं। आपको कलात्मक अभिरूचि व सौम्य व्यक्तित्व वाली लड़कियां आकर्षित करती हैं। अपनी इच्छाओं को दूसरों पर लादना पसंद नहीं करते हैं और अपने घर परिवार से स्नेह रखते हैं।

कुंभ राशि की लड़कियां बड़ी बड़ी आंखों वाली व भूरे बालों वाली होती हैं। यह कम बोलती हैं इनकी मुस्कान आकर्षक होती है। इनका व्यक्तित्व बहुत आकर्षक होता है किन्तु आसानी से किसी को अपना नहीं बनाती हैं। ये अति सुंदर और आकर्षक होती हैं। आप किसी कलात्मक रूचि, पेंटिग, काव्य, संगीत, नृत्य या लेखन आदि में अपना समय व्यतीत करती हैं। ये सामान्यत: गंभीर व कम बोलने वाले व्यक्तियों के प्रति आकर्षित होती हैं। इनका जीवन सुखपूर्वक व्यतित होता है क्योंकि ये ज्यादा इच्छाएं नहीं करती हैं। अपने घर को भी कलात्मक रूप से सजाती हैं।

१२.मीन राशि :-

मीन राशि का चिन्ह मछली होता है।

मीन राशि वाले मित्रपूर्ण व्यवहार के कारण अपने कार्यालय व पास पड़ोस में अच्छी तरह से जाने जाते हैं। आप कभी अति मैत्रीपूर्ण व्यवहार नहीं करते हैं। बल्कि आपका व्यवहार बहुत नियंत्रित रहता है। ये आसानी से किसी के विचारों को पढ़ सकते हैं। अपनी ओर से उदारतापूर्ण व संवेदनाशील होते हैं और व्यर्थ का दिखावा व चालाकी को बिल्कुल नापसंद करते हैं। एक बार किसी पर भी भरोसा कर लें तो यह हमेशा के लिये होता है इसीलिये आप आपने मित्रों से अच्छा भावानात्मक सम्बन्ध बना लेते हैं। सौंदर्य और रोमांस की दुनियां में रहते हैं। कल्पनाशीलता बहुत प्रखर होती है। अधिकतर व्यक्ति लेखन और पाठन के शौकीन होते हैं। आपको नीला, सफेद और लाल रंग रूप से आकर्षित करते हैं। आपकी स्तरीय रूचि का प्रभाव आपके घर में देखने को मिलता है। आपका घर आपकी जिंदगी में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। अपने धन को बहुत देखभाल कर खर्च करते हैं। आपके अभिन्न मित्र मुश्किल से एक या दो ही होते हैं। जिनसे ये अपने दिल की सभी बातें कह सकते हैं। ये विश्वासघात के अलावा कुछ भी बर्दाश्त कर सकते हैं।

मीन राशि के लड़के भावुक हृदय व पनीली आंखों वाले होते हैं। अपनी बात कहने से पहले दो बार सोचते हैं। आप जिंदगी के प्रति काफी लचीला दृटिकोण रखते हैं। अपने कार्य क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के लिये परिश्रम करते हैं।

कार्यालय या विद्यालय में कोई लड़की आपको आकर्षित करती है तो केवल इसलिये कि इससे इनके कार्यों में कोई रूकावट नहीं आती हैं। आपको बुद्धिमान और हंसमुख लड़कियां पसंद हैं। आप बहुत संकोचपूर्वक ही किसी लड़की से अपनी बात कह पाते हैं। एक कोमल व भावुक स्वभाव के व्यक्ति हैं। आप पत्नी के रूप में गृहणी को ही पसंद करते हैं। किन्तु ये खुद घरेलू कार्यों में दखलंदाजी नहीं करते हैं न ही आप अपनी व्यावसायिक कार्य में उसका दखल पसंद करते हैं। आपका वैवाहिक जीवन अन्य राशियों की अपेक्षा सर्वाधिक सुखमय रहता है।

मीन राशि की लड़कियां भावुक व चमकदार आंखों वाली होती हैं। ये आसानी से किसी से मित्रता नहीं करती हैं। लेकिन एक बार उसकी बातों पर विश्वास हो जाये तो आप अपने दिल की बात भी उससे कह देती हैं। ये स्वभाव से कला प्रेमी होती हैं। एक बुद्धिमान व सभ्य व्यक्ति आपको आकर्षित करता है। आप शान्तिपूर्वक उसकी बात सुन सकती हैं और आसानी से अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं करती हैं। अपनी मित्रता और वैवाहिक जीवन में सुरक्षा व दृढ़ता रखना पसंद करती हैं। ये अपने पति के प्रति विश्वसनीय होती है और वैसा ही व्यवहार अपने पति से चाहती हैं। आपको ज्योताषि आदि में रूचि हो सकती है। आपको नई-नई चीजें सीखने का शौक होता है।

______________समाप्त_____________

ज्योतिष में सम्पूर्ण 12 राशियों के स्वाभाव लक्षण का विवेचन

मेष- चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो,

राशि स्वरूप: मेंढा जैसा, राशि स्वामी- मंगल।

1. राशि चक्र की सबसे प्रथम राशि मेष है। जिसके स्वामी मंगल है। धातु संज्ञक यह राशि चर (चलित) स्वभाव की होती है। राशि का प्रतीक मेढ़ा संघर्ष का परिचायक है।

2. मेष राशि वाले आकर्षक होते हैं। इनका स्वभाव कुछ रुखा हो सकता है। दिखने में सुंदर होते है। यह लोग किसी के दबाव में कार्य करना पसंद नहीं करते। इनका चरित्र साफ -सुथरा एवं आदर्शवादी होता है।

3. बहुमुखी प्रतिभा के स्वामी होते हैं। समाज में इनका वर्चस्व होता है एवं मान सम्मान की प्राप्ति होती है।

4. निर्णय लेने में जल्दबाजी करते है तथा जिस कार्य को हाथ में लिया है उसको पूरा किए बिना पीछे नहीं हटते।

5. स्वभाव कभी-कभी विरक्ति का भी रहता है। लालच करना इस राशि के लोगों के स्वभाव मे नहीं होता। दूसरों की मदद करना अच्छा लगता है।

6. कल्पना शक्ति की प्रबलता रहती है। सोचते बहुत ज्यादा हैं।

7. जैसा खुद का स्वभाव है, वैसी ही अपेक्षा दूसरों से करते हैं। इस कारण कई बार धोखा भी खाते हैं।

8. अग्नितत्व होने के कारण क्रोध अतिशीघ्र आता है। किसी भी चुनौती को स्वीकार करने की प्रवृत्ति होती है।

9. अपमान जल्दी भूलते नहीं, मन में दबा के रखते हैं। मौका पडने पर प्रतिशोध लेने  से नहीं चूकते।

10. अपनी जिद पर अड़े रहना, यह भी मेष राशि के स्वभाव में पाया जाता है। आपके भीतर एक कलाकार छिपा होता है।

11. आप हर कार्य को करने में सक्षम हो सकते हैं। स्वयं को सर्वोपरि समझते हैं।

12. अपनी मर्जी के अनुसार ही दूसरों को चलाना चाहते हैं। इससे आपके कई दुश्मन खड़े हो जाते हैं।

13. एक ही कार्य को बार-बार करना इस राशि के लोगों को पसंद नहीं होता।

14. एक ही जगह ज्यादा दिनों तक रहना भी अच्छा नहीं लगता। नेतृत्व छमता अधिक होती है।

15. कम बोलना, हठी, अभिमानी, क्रोधी, प्रेम संबंधों से दु:खी, बुरे कर्मों से बचने वाले, नौकरों एवं महिलाओं से त्रस्त, कर्मठ, प्रतिभाशाली, यांत्रिक कार्यों में सफल होते हैं।

वृष- ई, , , , वा, वी, वू, वे, वो

राशि स्वरूप- बैल जैसा, राशि स्वामी- शुक्र।

राशि परिचय

1. इस राशि का चिह्न बैल है। बैल स्वभाव से ही अधिक पारिश्रमी और बहुत अधिक वीर्यवान होता है, साधारणत: वह शांत रहता है, किन्तु क्रोध आने पर वह उग्र रूप धारण कर लेता है।

2. बैल के समान स्वभाव वृष राशि के जातक में भी पाया जाता है। वृष राशि का स्वामी शुक्र ग्रह है।

3. इसके अन्तर्गत कृत्तिका नक्षत्र के तीन चरण, रोहिणी के चारों चरण और मृगशिरा के प्रथम दो चरण आते हैं।

4. इनके जीवन में पिता-पुत्र का कलह रहता है, जातक का मन सरकारी कार्यों की ओर रहता है। सरकारी ठेकेदारी का कार्य करवाने की योग्यता रहती है।

5. पिता के पास जमीनी काम या जमीन के द्वारा जीविकोपार्जन का साधन होता है। जातक अधिकतर तामसी भोजन में अपनी रुचि दिखाता है।

6. गुरु का प्रभाव जातक में ज्ञान के प्रति अहम भाव को पैदा करने वाला होता है, वह जब भी कोई बात करता है तो स्वाभिमान की बात करता है।

7. सरकारी क्षेत्रों की शिक्षा और उनके काम जातक को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

8. किसी प्रकार से केतु का बल मिल जाता है तो जातक सरकार का मुख्य सचेतक बनने की योग्यता रखता है। मंगल के प्रभाव से जातक के अंदर मानसिक गर्मी प्रदान करता है।

9. कल-कारखानों, स्वास्थ्य कार्यों और जनता के झगड़े सुलझाने का कार्य जातक कर सकता है, जातक की माता के जीवन में परेशानी ज्यादा होती है।

10. ये अधिक सौन्दर्य प्रेमी और कला प्रिय होते हैं। जातक कला के क्षेत्र में नाम करता है।

11. माता और पति का साथ या माता और पत्नी का साथ घरेलू वातावरण मे सामंजस्यता लाता है, जातक अपने जीवनसाथी के अधीन रहना पसंद करता है।

12. चन्द्र-बुध जातक को कन्या संतान अधिक देता है और माता के साथ वैचारिक मतभेद का वातावरण बनाता है।

13. आपके जीवन में व्यापारिक यात्राएं काफी होती हैं, अपने ही बनाए हुए उसूलों पर जीवन चलाता है।

14.  हमेशा दिमाग में कोई योजना बनती रहती है। कई बार अपने किए गए षडयंत्रों में खुद ही फंस भी जाते हैं।

15.  रोहिणी के चौथे चरण के मालिक चन्द्रमा हैं, जातक के अंदर हमेशा उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रहती है, वह अपने ही मन का राजा होता है।

मिथुन- का, की, कू, , , , के, को,

राशि स्वरूप- स्त्री-पुरुष आलिंगनबद्ध, राशि स्वामी- बुध।

1. यह राशि चक्र की तीसरी राशि है। राशि का प्रतीक युवा दम्पति है, यह द्वि-स्वभाव वाली राशि है।

2. मृगसिरा नक्षत्र के तीसरे चरण के मालिक मंगल-शुक्र हैं। मंगल शक्ति और शुक्र माया है।

3. जातक के अन्दर माया के प्रति भावना पाई जाती है, जातक जीवनसाथी के प्रति हमेशा शक्ति बन कर प्रस्तुत होता है। साथ ही, घरेलू कारणों के चलते कई बार आपस में तनाव रहता है।

4. मंगल और शुक्र की युति के कारण जातक में स्त्री रोगों को परखने की अद्भुत क्षमता होती है।

5. जातक वाहनों की अच्छी जानकारी रखता है। नए-नए वाहनों और सुख के साधनों के प्रति अत्यधिक आकर्षण होता है। इनका घरेलू साज-सज्जा के प्रति अधिक झुकाव होता है।

6. मंगल के कारण जातक वचनों का पक्का बन जाता है।

7. गुरु आसमान का राजा है तो राहु गुरु का शिष्य, दोनों मिलकर जातक में ईश्वरीय ताकतों को बढ़ाते हैं।

8. इस राशि के लोगों में ब्रह्माण्ड के बारे में पता करने की योग्यता जन्मजात होती है। वह वायुयान और सेटेलाइट के बारे में ज्ञान बढ़ाता है।

9. राहु-शनि के साथ मिलने से जातक के अन्दर शिक्षा और शक्ति उत्पादित होती है। जातक का कार्य शिक्षा स्थानों में या बिजली, पेट्रोल या वाहन वाले कामों की ओर होता है।

10. जातक एक दायरे में रह कर ही कार्य कर पाता है और पूरा जीवन कार्योपरान्त फलदायक रहता है। जातक के अंदर एक मर्यादा होती है जो उसे धर्म में लीन करती है और जातक सामाजिक और धार्मिक कार्यों में अपने को रत रखता है।

11.  गुरु जो ज्ञान का मालिक है, उसे मंगल का साथ मिलने पर उच्च पदासीन करने के लिए और रक्षा आदि विभागों की ओर ले जाता है।

12. जातक अपने ही विचारों, अपने ही कारणों से उलझता है। मिथुन राशि पश्चिम दिशा की द्योतक है, जो चन्द्रमा की निर्णय समय में जन्म लेते हैं, वे मिथुन राशि के कहे जाते हैं।

13. बुध की धातु पारा है और इसका स्वभाव जरा सी गर्मी-सर्दी में ऊपर नीचे होने वाला है। जातकों में दूसरे की मन की बातें पढऩे, दूरदृष्टि, बहुमुखी प्रतिभा, अधिक चतुराई से कार्य करने की क्षमता होती है।

14. जातक को बुद्धि वाले कामों में ही सफलता मिलती है। अपने आप पैदा होने वाली मति और वाणी की चतुरता से इस राशि के लोग कुशल कूटनीतिज्ञ और राजनीतिज्ञ भी बन जाते हैं।

15. हर कार्य में जिज्ञासा और खोजी दिमाग होने के कारण इस राशि के लोग अन्वेषण में भी सफलता लेते रहते हैं और पत्रकार, लेखक, मीडियाकर्मी, भाषाओं की जानकारी, योजनाकार भी बन सकते हैं।

कर्क- ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो

राशि स्वरूप- केकड़ा, राशि स्वामी- चंद्रमा।

1. राशि चक्र की चौथी राशि कर्क है। इस राशि का चिह्न केकड़ा है। यह चर राशि है।

2. राशि स्वामी चन्द्रमा है। इसके अन्तर्गत पुनर्वसु नक्षत्र का अन्तिम चरण, पुष्य नक्षत्र के चारों चरण तथा अश्लेषा नक्षत्र के चारों चरण आते हैं।

3. कर्क राशि के लोग कल्पनाशील होते हैं। शनि-सूर्य जातक को मानसिक रूप से अस्थिर बनाते हैं और जातक में अहम की भावना बढ़ाते हैं।

4. जिस स्थान पर भी वह कार्य करने की इच्छा करता है, वहां परेशानी ही मिलती है।

5. शनि-बुध दोनों मिलकर जातक को होशियार बना देते हैं। शनि-शुक्र जातक को धन और जायदाद देते हैं।

6. शुक्र उसे सजाने संवारने की कला देता है और शनि अधिक आकर्षण देता है।

7. जातक उपदेशक बन सकता है। बुध गणित की समझ और शनि लिखने का प्रभाव देते हैं। कम्प्यूटर आदि का प्रोग्रामर बनने में जातक को सफलता मिलती है।

8. जातक श्रेष्ठ बुद्धि वाला, जल मार्ग से यात्रा पसंद करने वाला, कामुक, कृतज्ञ, ज्योतिषी, सुगंधित पदार्थों का सेवी और भोगी होता है। वह मातृभक्त होता है।

9. कर्क, केकड़ा जब किसी वस्तु या जीव को अपने पंजों को जकड़ लेता है तो उसे आसानी से नहीं छोड़ता है। उसी तरह जातकों में अपने लोगों तथा विचारों से चिपके रहने की प्रबल भावना होती है।

10. यह भावना उन्हें ग्रहणशील, एकाग्रता और धैर्य के गुण प्रदान करती है।

11. उनका मूड बदलते देर नहीं लगती है। कल्पनाशक्ति और स्मरण शक्ति बहुत तीव्र होती है।

12. उनके लिए अतीत का महत्व होता है। मैत्री को वे जीवन भर निभाना जानते हैं, अपनी इच्छा के स्वामी होते हैं।

13. ये सपना देखने वाले होते हैं, परिश्रमी और उद्यमी होते हैं।

14. जातक बचपन में प्राय: दुर्बल होते हैं, किन्तु आयु के साथ साथ उनके शरीर का विकास होता जाता है।

15. चूंकि कर्क कालपुरुष की वक्षस्थल और पेट का प्रतिधिनित्व करती है, अत: जातकों को अपने भोजन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

सिंह- मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे

राशि स्वरूप- शेर जैसा, राशि स्वामी- सूर्य।

1. सिंह राशि पूर्व दिशा की द्योतक है। इसका चिह्न शेर है। राशि का स्वामी सूर्य है और इस राशि का तत्व अग्नि है।

2. इसके अन्तर्गत मघा नक्षत्र के चारों चरण, पूर्वा फाल्गुनी के चारों चरण और उत्तराफाल्गुनी का पहला चरण आता है।

3. केतु-मंगल जातक में दिमागी रूप से आवेश पैदा करता है। केतु-शुक्र, जो जातक में सजावट और सुन्दरता के प्रति आकर्षण को बढ़ाता है।

4. केतु-बुध, कल्पना करने और हवाई किले बनाने के लिए सोच पैदा करता है। चंद्र-केतु जातक में कल्पना शक्ति का विकास करता है। शुक्र-सूर्य जातक को स्वाभाविक प्रवृत्तियों की तरफ बढ़ाता है।

5. जातक का सुन्दरता के प्रति मोह होता है और वे कामुकता की ओर भागता है। जातक में अपने प्रति स्वतंत्रता की भावना रहती है और किसी की बात नहीं मानता।

6. जातक, पित्त और वायु विकार से परेशान रहने वाले लोग, रसीली वस्तुओं को पसंद करने वाले होते हैं। कम भोजन करना और खूब घूमना, इनकी आदत होती है।

7. छाती बड़ी होने के कारण इनमें हिम्मत बहुत अधिक होती है और मौका आने पर यह लोग जान पर खेलने से भी नहीं चूकते।

8. जातक जीवन के पहले दौर में सुखी, दूसरे में दुखी और अंतिम अवस्था में पूर्ण सुखी होता है।

9. सिंह राशि वाले जातक हर कार्य शाही ढंग से करते हैं, जैसे सोचना शाही, करना शाही, खाना शाही और रहना शाही।

10. इस राशि वाले लोग जुबान के पक्के होते हैं। जातक जो खाता है वही खाएगा, अन्यथा भूखा रहना पसंद करेगा, वह आदेश देना जानता है, किसी का आदेश उसे सहन नहीं होता है, जिससे प्रेम करेगा, उस मरते दम तक निभाएगा, जीवनसाथी के प्रति अपने को पूर्ण रूप से समर्पित रखेगा, अपने व्यक्तिगत जीवन में किसी का आना इस राशि वाले को कतई पसंद नहीं है।

11. जातक कठोर मेहनत करने वाले, धन के मामलों में बहुत ही भाग्यशाली होते हैं। स्वर्ण, पीतल और हीरे-जवाहरात का व्यवसाय इनको बहुत फायदा देने वाले होते हैं।

12. सरकार और नगर पालिका वाले पद इनको खूब भाते हैं। जातकों की वाणी और चाल में शालीनता पाई जाती है।

13. इस राशि वाले जातक सुगठित शरीर के मालिक होते हैं। नृत्य करना भी इनकी एक विशेषता होती है, अधिकतर इस राशि वाले या तो बिलकुल स्वस्थ रहते है या फिर आजीवन बीमार रहते हैं।

14. जिस वारावरण में इनको रहना चाहिए, अगर वह न मिले, इनके अभिमान को कोई ठेस पहुंचाए या इनके प्रेम में कोई बाधा आए, तो यह बीमार रहने लगते है।

15. रीढ़ की हड्डी की बीमारी या चोटों से अपने जीवन को खतरे में डाल लेते हैं। इस राशि के लोगों के लिये हृदय रोग, धड़कन का तेज होना, लू लगना और आदि बीमारी होने की संभावना होती है।

कन्या- ढो, पा, पी, पू, , , , पे, पो

राशि स्वरूप- कन्या, राशि स्वामी- बुध।

1. राशि चक्र की छठी कन्या राशि दक्षिण दिशा की द्योतक है। इस राशि का चिह्न हाथ में फूल लिए कन्या है। राशि का स्वामी बुध है। इसके अन्तर्गत उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के दूसरे, तीसरे और चौथे चरण, चित्रा के पहले दो चरण और हस्त नक्षत्र के चारों चरण आते हैं।

2. कन्या राशि के लोग बहुत ज्यादा महत्वाकांक्षी होते हैं। भावुक भी होते हैं और वह दिमाग की अपेक्षा दिल से ज्यादा काम लेते हैं।

3. इस राशि के लोग संकोची, शर्मीले और झिझकने वाले होते हैं।

4. मकान, जमीन और सेवाओं वाले क्षेत्र में इस राशि के जातक कार्य करते हैं।

5. स्वास्थ्य की दृष्टि से फेफड़ों में शीत, पाचनतंत्र एवं आंतों से संबंधी बीमारियां जातकों मे मिलती हैं। इन्हें पेट की बीमारी से प्राय: कष्ट होता है। पैर के रोगों से भी सचेत रहें।

6. बचपन से युवावस्था की अपेक्षा जातकों की वृद्धावस्था अधिक सुखी और ज्यादा स्थिर होता है।

7. इस राशि वाल पुरुषों का शरीर भी स्त्रियों की भांति कोमल होता है। ये नाजुक और ललित कलाओं से प्रेम करने वाले लोग होते हैं।

8. ये अपनी योग्यता के बल पर ही उच्च पद पर पहुंचते हैं। विपरीत परिस्थितियां भी इन्हें डिगा नहीं सकतीं और ये अपनी सूझबूझ, धैर्य, चातुर्य के कारण आगे बढ़ते रहते है।

9. बुध का प्रभाव इनके जीवन मे स्पष्ट झलकता है। अच्छे गुण, विचारपूर्ण जीवन, बुद्धिमत्ता, इस राशि वाले में अवश्य देखने को मिलती है।

10. शिक्षा और जीवन में सफलता के कारण लज्जा और संकोच तो कम हो जाते हैं, परंतु नम्रता तो इनका स्वाभाविक गुण है।

11. इनको अकारण क्रोध नहीं आता, किंतु जब क्रोध आता है तो जल्दी समाप्त नहीं होता। जिसके कारण क्रोध आता है, उसके प्रति घृणा की भावना इनके मन में घर कर जाती है।

12.  इनमें भाषण व बातचीत करने की अच्छी कला होती है। संबंधियों से इन्हें विशेष लाभ नहीं होता है, इनका वैवाहिक जीवन भी सुखी नहीं होता। यह जरूरी नहीं कि इनका किसी और के साथ संबंध होने के कारण ही ऐसा होगा।

13. इनके प्रेम सम्बन्ध प्राय: बहुत सफल नहीं होते हैं। इसी कारण निकटस्थ लोगों के साथ इनके झगड़े चलते रहते हैं।

14. ऐसे व्यक्ति धार्मिक विचारों में आस्था तो रखते हैं, परंतु किसी विशेष मत के नहीं होते हैं। इन्हें बहुत यात्राएं भी करनी पड़ती है तथा विदेश गमन की भी संभावना रहती है। जिस काम में हाथ डालते हैं लगन के साथ पूरा करके ही छोड़ते हैं।

15. इस राशि वाले लोग अपरिचित लोगों मे अधिक लोकप्रिय होते हैं, इसलिए इन्हें अपना संपर्क विदेश में बढ़ाना चाहिए। वैसे इन व्यक्ति की मैत्री किसी भी प्रकार के व्यक्ति के साथ हो सकती है।

तुला- रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते

राशि स्वरूप- तराजू जैसा, राशि स्वामी- शुक्र।

1. तुला राशि का चिह्न तराजू है और यह राशि पश्चिम दिशा की द्योतक है, यह वायुतत्व की राशि है। शुक्र राशि का स्वामी है। इस राशि वालों को कफ की समस्या होती है।

2. इस राशि के पुरुष सुंदर, आकर्षक व्यक्तित्व वाले होते हैं। आंखों में चमक व चेहरे पर प्रसन्नता झलकती है। इनका स्वभाव सम होता है।

3. किसी भी परिस्थिति में विचलित नहीं होते, दूसरों को प्रोत्साहन देना, सहारा देना इनका स्वभाव होता है। ये व्यक्ति कलाकार, सौंदर्योपासक व स्नेहिल होते हैं।

4. ये लोग व्यावहारिक भी होते हैं व इनके मित्र इन्हें पसंद करते हैं।

5. तुला राशि की स्त्रियां मोहक व आकर्षक होती हैं। स्वभाव खुशमिजाज व हंसी खनखनाहट वाली होती हैं। बुद्धि वाले काम करने में अधिक रुचि होती है।

6. घर की साजसज्जा व स्वयं को सुंदर दिखाने का शौक रहता है। कला, गायन आदि गृह कार्य में दक्ष होती हैं। बच्चों से बेहद जुड़ाव रहता है।

7. तुला राशि के बच्चे सीधे, संस्कारी और आज्ञाकारी होते हैं। घर में रहना अधिक पसंद करते हैं। खेलकूद व कला के क्षेत्र में रुचि रखते हैं।

8. तुला राशि के जातक दुबले-पतले, लम्बे व आकर्षक व्यक्तिव वाले होते हैं। जीवन में आदर्शवाद व व्यवहारिकता में पर्याप्त संतुलन रखते हैं।

9. इनकी आवाज विशेष रूप से सौम्य होती हैं। चेहरे पर हमेशा एक मुस्कान छाई रहती है।

10. इन्हें ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा करना बहुत भाता है। ये एक अच्छे साथी हैं, चाहें वह वैवाहिक जीवन हो या व्यावसायिक जीवन।

11. आप अपने व्यवहार में बहुत न्यायवादी व उदार होते हैं। कला व साहित्य से जुड़े रहते हैं। गीत, संगीत, यात्रा आदि का शौक रखने वाले व्यक्ति अधिक अच्छे लगते हैं।

12. लड़कियां आत्म विश्वास से परिपूर्ण होती हैं। आपके मनपसंद रंग गहरा नीला व सफेद होते हैं। आपको वैवाहिक जीवन में स्थायित्व पसंद आता है।

13. आप अधिक वाद-विवाद में समय व्यर्थ नहीं करती हैं। आप सामाजिक पार्टियों, उत्सवों में रुचिपूर्वक भाग लेती हैं।

14. आपके बच्चे अपनी पढ़ाई या नौकरी आदि के कारण जल्दी ही आपसे दूर जा सकते हैं।

15. एक कुशल मां साबित होती हैं जो कि अपने बच्चों को उचित शिक्षा व आत्म विश्वास प्रदान करती हैं।

वृश्चिक- तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

राशि स्वरूप- बिच्छू जैसा, राशि स्वामी- मंगल।

1. वृश्चिक राशि का चिह्न बिच्छू है और यह राशि उत्तर दिशा की द्योतक है। वृश्चिक राशि जलतत्व की राशि है। इसका स्वामी मंगल है। यह स्थिर राशि है, यह स्त्री राशि है।

2. इस राशि के व्यक्ति उठावदार कद-काठी के होते हैं। यह राशि गुप्त अंगों, उत्सर्जन, तंत्र व स्नायु तंत्र का प्रतिनिधित्व करती है। अत: मंगल की कमजोर स्थिति में इन अंगों के रोग जल्दी होते हैं। ये लोग एलर्जी से भी अक्सर पीडि़त रहते हैं। विशेषकर जब चंद्रमा कमजोर हो।

3. वृश्चिक राशि वालों में दूसरों को आकर्षित करने की अच्छी क्षमता होती है। इस राशि के लोग बहादुर, भावुक होने के साथ-साथ कामुक होते हैं।

4. शरीरिक गठन भी अच्छा होता है। ऐसे व्यक्तियों की शारीरिक संरचना अच्छी तरह से विकसित होती है। इनके कंधे चौड़े होते हैं। इनमें शारीरिक व मानसिक शक्ति प्रचूर मात्रा में होती है।

5. इन्हें बेवकूफ बनाना आसान नहीं होता है, इसलिए कोई इन्हें धोखा नहीं दे सकता। ये हमेशा साफ-सुथरी और सही सलाह देने में विश्वास रखते हैं। कभी-कभी साफगोई विरोध का कारण भी बन सकती है।

6. ये जातक दूसरों के विचारों का विरोध ज्यादा करते हैं, अपने विचारों के पक्ष में कम बोलते हैं और आसानी से सबके साथ घुलते-मिलते नहीं हैं।

7. यह जातक अक्सर विविधता की तलाश में रहते हैं। वृश्चिक राशि से प्रभावित लड़के बहुत कम बोलते होते हैं। ये आसानी से किसी को भी आकर्षित कर सकते हैं। इन्हें दुबली-पतली लड़कियां आकर्षित करती हैं।

8. वृश्चिक वाले एक जिम्मेदार गृहस्थ की भूमिका निभाते हैं। अति महत्वाकांक्षी और जिद्दी होते हैं। अपने रास्ते चलते हैं मगर किसी का हस्तक्षेप पसंद नहीं करते।

9. लोगों की गलतियों और बुरी बातों को खूब याद रखते हैं और समय आने पर उनका उत्तर भी देते हैं। इनकी वाणी कटु और गुस्सा तेज होता है मगर मन साफ होता है। दूसरों में दोष ढूंढने की आदत होती है। जोड़-तोड़ की राजनीति में चतुर होते हैं।

10. इस राशि की लड़कियां तीखे नयन-नक्ष वाली होती हैं। यह ज्यादा सुन्दर न हों तो भी इनमें एक अलग आकर्षण रहता है। इनका बातचीत करने का अपना विशेष अंदाज होता है।

11. ये बुद्धिमान और भावुक होती हैं। इनकी इच्छा शक्ति बहुत दृढ़ होती है। स्त्रियां जिद्दी और अति महत्वाकांक्षी होती हैं। थोड़ी स्वार्थी प्रवृत्ति भी होती हैं।

12. स्वतंत्र निर्णय लेना इनकी आदत में होते है। मायके परिवार से अधिक स्नेह रहता है। नौकरीपेशा होने पर अपना वर्चस्व बनाए रखती हैं।

13. इन लोगों काम करने की क्षमता काफी अधिक होती है। वाणी की कटुता इनमें भी होती है, सुख-साधनों की लालसा सदैव बनी ही रहती है।

14. ये सभी जातक जिद्दी होते हैं, काम के प्रति लगन रखते हैं, महत्वाकांक्षी व दूसरों को प्रभावित करने की योग्यता रखते हैं। ये व्यक्ति उदार व आत्मविश्वासी भी होते है।

15. वृश्चिक राशि के बच्चे परिवार से अधिक स्नेह रखते हैं। कम्प्यूटर-टीवी का बेहद शौक होता है। दिमागी शक्ति तीव्र होती है, खेलों में इनकी रुचि होती है।

धनु- ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे

राशि स्वरूप- धनुष उठाए हुए, राशि स्वामी- बृहस्पति।

1. धनु द्वि-स्वभाव वाली राशि है। इस राशि का चिह्न धनुषधारी है। यह राशि दक्षिण दिशा की द्योतक है।

2. धनु राशि वाले काफी खुले विचारों के होते हैं। जीवन के अर्थ को अच्छी तरह समझते हैं।

3. दूसरों के बारे में जानने की कोशिश में हमेशा करते रहते हैं।

4. धनु राशि वालों को रोमांच काफी पसंद होता है। ये निडर व आत्म विश्वासी होते हैं। ये अत्यधिक महत्वाकांक्षी और स्पष्टवादी होते हैं।

5. स्पष्टवादिता के कारण दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुंचा देते हैं।

6. इनके अनुसार जो इनके द्वारा परखा हुआ है, वही सत्य है। अत: इनके मित्र कम होते हैं। ये धार्मिक विचारधारा से दूर होते हैं।

7. धनु राशि के लड़के मध्यम कद काठी के होते हैं। इनके बाल भूरे व आंखें बड़ी-बड़ी होती हैं। इनमें धैर्य की कमी होती है।

8. इन्हें मेकअप करने वाली लड़कियां पसंद हैं। इन्हें भूरा और पीला रंग प्रिय होता है।

9. अपनी पढ़ाई और करियर के कारण अपने जीवन साथी और विवाहित जीवन की उपेक्षा कर देते हैं। पत्नी को शिकायत का मौका नहीं देते और घरेलू जीवन का महत्व समझते हैं।

10. धनु राशि की लड़कियां लंबे कदमों से चलने वाली होती हैं। ये आसानी से किसी के साथ दोस्ती नहीं करती हैं।

11.  ये एक अच्छी श्रोता होती हैं और इन्हें खुले और ईमानदारी पूर्ण व्यवहार के व्यक्ति पसंद आते हैं। इस राशि की स्त्रियां गृहणी बनने की अपेक्षा सफल करियर बनाना चाहती है।

12.  इनके जीवन में भौतिक सुखों की महत्ता रहती है। सामान्यत: सुखी और संपन्न जीवन व्यतीत करती हैं।

13. इस राशि के जातक ज्यादातर अपनी सोच का विस्तार नहीं करते एवं कई बार कन्फयूज रहते हैं। एक निर्णय पर पंहुचने पर इनको समय लगता है एवं यह देरी कई बार नुकसान दायक भी हो जाती है।

14. ज्यादातर यह लोग दूसरों के मामलों में दखल नहीं देते एवं अपने काम से काम रखते हैं।

15. इनका पूरा जीवन लगभग मेहनत करके कमाने में जाता है या यह अपने पुश्तैनी कार्य को ही आगे बढाते हैं।

मकर- भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

राशि स्वरूप- मगर जैसा, राशि स्वामी- शनि।

1. मकर राशि का चिह्न मगरमच्छ है। मकर राशि के व्यक्ति अति महत्वाकांक्षी होते हैं। यह सम्मान और सफलता प्राप्त करने के लिए लगातार कार्य कर सकते हैं।

2. इनका शाही स्वभाव व गंभीर व्यक्तित्व होता है। आपको अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए बहुत कठिन परिश्रम करना पड़ता है।

3. इन्हें यात्रा करना पसंद है। गंभीर स्वभाव के कारण आसानी से किसी को मित्र नहीं बनाते हैं। इनके मित्र अधिकतर कार्यालय या व्यवसाय से ही संबंधित होते हैं।

4. सामान्यत: इनका मनपसंद रंग भूरा और नीला होता है। कम बोलने वाले, गंभीर और उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों को ज्यादा पसंद करते हैं।

5. ईश्वर व भाग्य में विश्वास करते हैं। दृढ़ पसंद-नापसंद के चलते इनका वैवाहिक जीवन लचीला नहीं होता और जीवनसाथी को आपसे परेशानी महसूस हो सकती है।

6. मकर राशि के लड़के कम बोलने वाले होते हैं। इनके हाथ की पकड़ काफी मजबूत होती है। देखने में सुस्त, लेकिन मानसिक रूप से बहुत चुस्त होते हैं।

7. प्रत्येक कार्य को बहुत योजनाबद्ध ढंग से करते हैं। गहरा नीला या श्वेत रंग प्रधान वस्त्र पहने हुए लड़कियां इन्हें बहुत पसंद आती हैं।

8. आपकी खामोशी आपके साथी को प्रिय होती है। अगर आपका जीवनसाथी आपके व्यवहार को अच्छी तरह समझ लेता है तो आपका जीवन सुखपूर्वक व्यतीत होता है।

9. आप जीवन साथी या मित्रों के सहयोग से उन्नति प्राप्त कर सकते हैं।

10. मकर राशि की लड़कियां लम्बी व दुबली-पतली होती हैं। यह व्यायाम आदि करना पसंद करती हैं। लम्बे कद के बाबजूद आप ऊंची हिल की सैंडिल पहनना पसंद करती हैं।

11. पारंपरिक मूल्यों पर विश्वास करने वाली होती हैं। छोटे-छोटे वाक्यों में अपने विचारों को व्यक्त करती हैं।

12. दूसरों के विचारों को अच्छी तरह से समझ सकती हैं। इनके मित्र बहुत होते हैं और नृत्य की शौकिन होती हैं।

13. इनको मजबूत कद कठी के व्यक्ति बहुत आकर्षित करते हैं। अविश्वसनीय संबंधों में विश्वास नहीं करती हैं।

14. अगर आप करियर वुमन हैं तो आप कार्य क्षेत्र में अपना अधिकतर समय व्यतीत करती हैं।

15. आप अपने घर या घरेलू कार्यों के विषय में अधिक चिंता नहीं करती हैं।

कुंभ- गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा

राशि स्वरूप- घड़े जैसा, राशि स्वामी- शनि।

1. राशि चक्र की यह ग्यारहवीं राशि है। कुंभ राशि का चिह्न घड़ा लिए खड़ा हुआ व्यक्ति है। इस राशि का स्वामी भी शनि है। शनि मंद ग्रह है तथा इसका रंग नीला है। इसलिए इस राशि के लोग गंभीरता को पसंद करने वाले होते हैं एवं गंभीरता से ही कार्य करते हैं।

2. कुंभ राशि वाले लोग बुद्धिमान होने के साथ-साथ व्यवहारकुशल होते हैं। जीवन में स्वतंत्रता के पक्षधर होते हैं। प्रकृति से भी असीम प्रेम करते हैं।

3. शीघ्र ही किसी से भी मित्रता स्थपित कर सकते हैं। आप सामाजिक क्रियाकलापों में रुचि रखने वाले होते हैं। इसमें भी साहित्य, कला, संगीत व दान आपको बेहद पसंद होता हैं।

4. इस राशि के लोगों में साहित्य प्रेम भी उच्च कोटि का होता है।

5. आप केवल बुद्धिमान व्यक्तियों के साथ बातचीत पसंद करते हैं। कभी भी आप अपने मित्रों से असमानता का व्यवहार नहीं करते हैं।

6. आपका व्यवहार सभी को आपकी ओर आकर्षित कर लेता है।

7. कुंभ राशि के लड़के दुबले होते हैं। आपका व्यवहार स्नेहपूर्ण होता है। इनकी मुस्कान इन्हें आकर्षक व्यक्तित्व प्रदान करती है।

8. इनकी रुचि स्तरीय खान-पान व पहनावे की ओर रहती है। ये बोलने की अपेक्षा सुनना ज्यादा पसंद करते हैं। इन्हें लोगों से मिलना जुलना अच्छा लगता है।

9. अपने व्यवहार में बहुत ईमानदार रहते हैं, इसलिये अनेक लड़कियां आपकी प्रशंसक होती हैं। आपको कलात्मक अभिरुचि व सौम्य व्यक्तित्व वाली लड़कियां आकर्षित करती हैं।

10. अपनी इच्छाओं को दूसरों पर लादना पसंद नहीं करते हैं और अपने घर परिवार से स्नेह रखते हैं।

11. कुंभ राशि की लड़कियां बड़ी-बड़ी आंखों वाली व भूरे बालों वाली होती हैं। यह कम बोलती हैं, इनकी मुस्कान आकर्षक होती है।

12. इनका व्यक्तित्व बहुत आकर्षक होता है, किन्तु आसानी से किसी को अपना नहीं बनाती हैं। ये अति सुंदर और आकर्षक होती हैं।

13. आप किसी कलात्मक रुचि, पेंटिग, काव्य, संगीत, नृत्य या लेखन आदि में अपना समय व्यतीत करती हैं।

14. ये सामान्यत: गंभीर व कम बोलने वाले व्यक्तियों के प्रति आकर्षित होती हैं।

15. इनका जीवन सुखपूर्वक व्यतित होता है, क्योंकि ये ज्यादा इच्छाएं नहीं करती हैं। अपने घर को भी कलात्मक रूप से सजाती हैं।

मीन- दी, दू, , , , दे, दो, चा, ची

राशि स्वरूप- मछली जैसा, राशि स्वामी- बृहस्पति।

1. मीन राशि का चिह्न मछली होता है। मीन राशि वाले मित्रपूर्ण व्यवहार के कारण अपने कार्यालय व आस पड़ोस में अच्छी तरह से जाने जाते हैं।

2. आप कभी अति मैत्रीपूर्ण व्यवहार नहीं करते हैं। बल्कि आपका व्यवहार बहुत नियंत्रित रहता है। ये आसानी से किसी के विचारों को पढ़ सकते हैं।

3. अपनी ओर से उदारतापूर्ण व संवेदनाशील होते हैं और व्यर्थ का दिखावा व चालाकी को बिल्कुल नापसंद करते हैं।

4. एक बार किसी पर भी भरोसा कर लें तो यह हमेशा के लिए होता है, इसीलिये आप आपने मित्रों से अच्छा भावानात्मक संबंध बना लेते हैं।

5. ये सौंदर्य और रोमांस की दुनिया में रहते हैं। कल्पनाशीलता बहुत प्रखर होती है। अधिकतर व्यक्ति लेखन और पाठन के शौकीन होते हैं। आपको नीला, सफेद और लाल रंग-रूप से आकर्षित करते हैं।

6. आपकी स्तरीय रुचि का प्रभाव आपके घर में देखने को मिलता है। आपका घर आपकी जिंदगी में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

7. अपने धन को बहुत देखभाल कर खर्च करते हैं। आपके अभिन्न मित्र मुश्किल से एक या दो ही होते हैं। जिनसे ये अपने दिल की सभी बातें कह सकते हैं। ये विश्वासघात के अलावा कुछ भी बर्दाश्त कर सकते हैं।

8. मीन राशि के लड़के भावुक हृदय व पनीली आंखों वाले होते हैं। अपनी बात कहने से पहले दो बार सोचते हैं। आप जिंदगी के प्रति काफी लचीला दृटिकोण रखते हैं।

9. अपने कार्य क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के लिये परिश्रम करते हैं। आपको बुद्धिमान और हंसमुख लोग पसंद हैं।

10. आप बहुत संकोचपूर्वक ही किसी से अपनी बात कह पाते हैं। एक कोमल व भावुक स्वभाव के व्यक्ति हैं। आप पत्नी के रूप में गृहणी को ही पसंद करते हैं।

11. ये खुद घरेलू कार्यों में दखलंदाजी नहीं करते हैं, न ही आप अपनी व्यावसायिक कार्य में उसका दखल पसंद करते हैं। आपका वैवाहिक जीवन अन्य राशियों की अपेक्षा सर्वाधिक सुखमय रहता है।

12. मीन राशि की लड़कियां भावुक व चमकदार आंखों वाली होती हैं। ये आसानी से किसी से मित्रता नहीं करती हैं, लेकिन एक बार उसकी बातों पर विश्वास हो जाए तो आप अपने दिल की बात भी उससे कह देती हैं।

13. ये स्वभाव से कला प्रेमी होती हैं। एक बुद्धिमान व सभ्य व्यक्ति आपको आकर्षित करता है। आप शांतिपूर्वक उसकी बात सुन सकती हैं और आसानी से अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं करती हैं।

14. अपनी मित्रता और वैवाहिक जीवन में सुरक्षा व दृढ़ता रखना पसंद करती हैं। ये अपने पति के प्रति विश्वसनीय होती है और वैसा ही व्यवहार अपने पति से चाहती हैं।

15. आपको ज्योतिष आदि में रुचि हो सकती है। आपको नई-नई चीजें सीखने का शौक होता है।

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