घनिष्ठा नक्षत्र सम्पूर्ण विवेचन एवं गृह स्थित फल

 घनिष्ठा नक्षत्र सम्पूर्ण विवेचन एवं गृह स्थित फल

धुव्र : आकाश विराजे - पौराणिक कथाओ अनुसार बालक ध्रुव ने पांच वर्ष की अल्पावस्था मे विष्णु की घोर उपासना की, जिससे प्रसन्न होकर विष्णु ने ध्रुव को उत्तर आकाश मे स्थिर पद दिया। तथ्य यह है कि पृथ्वी की धुरी का उत्तरी सिरा आकाश के जिस भाग की ओर इशारा करे, उस भाग मे कोई चमकीला तारा हो, तो उसे ध्रुव पद प्राप्त होता है। उसी के आसपास के सभी तारे उसी की परिक्रमा करते है। यह ध्रुव तारा भूमि से जितने उत्तरी अक्षांश पर देखा जायगा आकाश में भी उतने ही अंश क्षितिज से ऊपर दिखेगा। इसी कारण 90 अंश पर ध्रुव तारा समकोण बनता हुआ हमे ठीक सिर के ऊपर दिखाई देता है। जबकि 30 अक्षांश पर देखे तो वहा पर क्षितिज से 30 अक्षांश ऊपर ही दिखाई देगा। धनिष्ठा नक्षत्र-धनिष्ठा नक्षत्र श्रवण नक्षत्र से अगले 13-20’ के क्षेत्र में स्थित, भचक्र पर मकर राशि तथा कुम्भ राशि के क्षेत्र में आधा-आधा स्थित है। (प्रथम दो चरण मकर तथा अन्तिम दो चरण कुम्भ राशि क्षेत्र में पड़ते हैं।) यह तेईसवां नक्षत्र है। इस नक्षत्र के 4 तारे मिल-जुलकर बावन जैसी आकृति बनाते हैं। धनिष्ठा नक्षत्र के देवता वसु (वसवः) हैं तथा इस नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं।

     धनिष्ठा नक्षत्र में जन्मा पुरुष जातक दानी, धनी, भाइयों के प्रति स्नेह रखने वाला तथा गाने का शौकीन होता है। औरों को खुश रखने वाला, स्वस्थ तथा उत्तम प्रकृति का होता है।

     धनिष्ठा नक्षत्र में जन्मी महिला जातक कथावार्ता, वेद-पुराणों में रुचि लेने वाली, दानी, दयालु, पुण्यकर्मा, गुणवंती तथा धन-वस्त्र व अन्न से युक्त होती है।

अक्षांश - जिस स्थान पर दृष्टि सीमा से ध्रुव तारा जिस अंशादि पर दिखाई दे,

वही उस स्थान का अक्षांश होता है।

वर्तमान में लघु सप्तऋषि के क्रतु (Alpha) तारे को ध्रुव पद प्राप्त है। आज से हजारो वर्ष पहले पुलह (Beta) को यह पद प्राप्त था और हजारो वर्षो की तपश्या के बाद यह पद किसी अन्य तारे को प्राप्त होगा।

अभिजित : ध्रुव पौराणिकता अनुसार महर्षि वेदव्यास (28 वे वेदव्यास-कृष्णद्वैपायन) द्वारा रचित महाभारत के वन पर्व (अध्याय 230 श्लोक 8-11) मे कथानक है कि अभिजित के प्रतिद्वंदी कृतिका ने उत्तरायण सूर्य "वन" से तीव्र गर्मी की प्रार्थना की, तब अभिजित नीचे सरक गये। महाभारत के इस पण्डितोचित उल्लेख की प्रमाणिकता यह है कि 12000 ई. पू. के बाद ध्रुव तारा निरंतर फिसल रहा है और कृतिका का निरन्तर उदगम हो रहा है। लगभग 12200 ई. पू. अभिजित WEGA ध्रुव तारा था और सन 13500 मे अभिजित पुनः ध्रुव तारा होगा।

घनिष्ठा

राशि चक्र मे 29320 से 30640 अंश विस्तार का क्षेत्र घनिष्ठा नक्षत्र कहलाता है। अरब मंजिल मे इसे अल सा'द अल बुला अर्थात अति प्रसिद्ध, गीक मे इसे डेलफिनी तथा चीनी सियु मे हय कहते है। इसे श्रविष्ठा भी कहते है। श्रविष्ठा का अर्थ अति प्रसिद्ध होता है। धनिष्ठा का अर्थ भी यही है। घनिष्ठा का संक्षिप्त रूप घनिन को अपनाये तो इसका अर्थ धनि (धनी} होगा।

देवता वसु, स्वामी ग्रह मंगल., राशि मकर 2320 से कुम्भ 0640 अंश। भारतीय खगोल का यह 23 वा चर संज्ञक नक्षत्र है। इसके चार तारे है। इनसे मुरज या मृदंग या ढोल का आकार बनता है। मतान्तर से इसे 114 तारो का समूह व सात पंक्तिया मानते है। प्रधान तया चार तारे ही माने जाते है। यह यात्रा का कारक है। इसे श्रविष्ठा भी कहते है। यह शुभ, तामसिक, नपुसंक नक्षत्र है। इसकी जाती कृषक, योनि सिंह, योनि वैर गज, गण राक्षस नाड़ी अन्त्य है। यह पूर्व दिशा का स्वामी है।

प्रतीकवाद - वसु का अर्थ निवास या आवास है। वसु इंद्र और विष्णु के परिचक या मुलाजिम देव है। वसु आठ है इनके वृहदरण्यक उपनिषद और महाभारत मे नाम इस प्रकार है।

वसु -विकिपीडिया

वृहदरण्यक उपनिषद : 1 अग्नि, 2 पृथ्वी, 3 वायु, 4 आदित्य, 5 अंतरिक्ष, 6 आकाश, 7 चन्द्रमा, 8 नक्षत्राणि।

महाभारत : 1 अनल (अग्नि) 2 धरा (पृथ्वी) 3 अनिल (हवा) 4 अह (सर्वव्यापि जल} 5 प्रत्युष (भोर} 6 सोम (चन्द्रमा) 7 ध्रुव (उत्तरी तारा} 8 अणिमा (हवा)

रामायण में इनको माता अदिति और महर्षि कश्यप के पुत्र तथा आदित्यो के भाई-बहन माना है। महाभारत मे इन्हे ब्रम्हा पुत्र मनु और मनु पुत्र प्रजापति तथा अलग-अलग माताओ की संतान माना है।

पौराणिक कथा अनुसार गंगा (पति शान्तनु) से आठ वसु हुऐ जिनमे से सात गंगा को वापिस कर दिए गये और आठवे वसु महाभारत के महानायक भीष्म हुए। अन्य कथानक अनुसार आठो वसु के अंश के रूप मे भीष्म हुऐ।

विशेषताऐ - जातक के व्यक्तित्व मे जीवन के उत्तरार्ध मे निखार आता है। जातक जमीन जायदाद वाला, प्रसिद्ध, प्रभावी नेता, लालची, स्वार्थी, संगीत प्रेमी, नृत्यक, यात्रा प्रेमी होता है।

पुरुष जातक क्रश, अंग प्रत्यंग सुन्दर, मनसा-वाचा-कर्मणा से किसी को भी कष्ट नहीं देने वाला, हाथी के समान बदला लेने वाला होता है।

स्त्री जातक सुन्दर होती है। उसका लावण्य 40 वर्ष की उम्र में भी 16 वर्ष की तरुणी जैसा रहता है।

घनिष्ठ नक्षत्र फलादेश

इसे श्रविष्ठा भी कहते है। यह स्वर की समता से जाना जाता है। इसके देवता वसु है। जातक जमीन जायदाद वाला जमींदार होता है। इसका चिन्ह संगीत वाद्य होने से जातक संगीत प्रिय, नृत्य प्रिय, वाद्य वादक होता है। जातक समय का पाबंद होने से हर कार्य समय पर करने वाला या बोलने वाला, अंदर से बांसुरी के समान खोखला पर सूनेपन को भरने वाला होता है।

जातक का विवाह या तो विलम्ब से होता है या होता नही है। जातक दूसरो पर निर्भर या दूसरो की आकांक्षा के अनुरूप रहने वाला, प्रसिद्ध, जाना-माना, महा लालची, स्वयं मे अहंकारी, यात्रा के विस्मय का आनंद लेने वाला, बंधुओ का प्रिय, सुवर्ण रत्नो से युक्त, सैकड़ो का पालक होता है।

पुरुष जातक - यह कृश शरीर, लम्बे मुखड़े वाला होता है। कोई-कोई जातक स्थूल शरीरी होता है। जातक कार्य का विशेषज्ञ, अत्यंत बुद्धिमान, सब प्रकार के ज्ञान से युक्त, मन-वचन-कर्म से किसी को भी कष्ट नही देने वाला, धर्मात्मा, अपनी सहमति अंत तक नही बताने वाला, वक्त आने पर बदला लेने वाला होता है।

घनिष्ठा नक्षत्र में जन्मे अधिकांश जातक वैज्ञानिक और इतिहासज्ञ होते है। ये स्वभाव से गोपनीय होते है। इनका बुद्धि कौशल अधिक महत्वपूर्ण होता है। ये कुशल बहसबाज होते है। 24 वर्ष बाद भाग्योदय होने के कारंण अच्छा धन कमाते है। इन्हे व्यापार व्वयसाय मे व्यस्त होने के कारण दूसरो पर विश्वास करना पड़ता है वह सतर्कता पूर्वक करना चाहिये। परिवार मे सबसे वरिष्ठ होने के कारण रिस्तेदार अवरोधक और कष्टदायक होते है। भाई बहन के प्रति विशेष लगाव रहता है। पैतृक संपदा विपुल रहती है। पत्नी लक्ष्मी स्वरूपा होती है और विवाह बाद ही जातक धनवान होता है।

स्त्री जातक - स्त्री जातक मे गुणदोष लगभग पुरुष के समान ही होते है। अंतर निम्न है :-

1 यह सुन्दर और हमेशा षोडशी रहती है, 40 साल की भी होकर हमेशा तरुणी दिखती है। इसका आमंत्रित करता मुखड़ा और मोटे अधर होते है। कुछ स्त्रियो के कुरूप होंठो के आगे दांत निकले होते है।

2 यह अभिलाषी, मितव्ययी, शिष्ट, पक्षपात हीन, आडम्बर हीन, लज्जालु, कमजोर से सहानुभूति रखने वाली होती है। यह भी श्रवण नक्षत्र की भांति परिवार मे हुक्म चलने वाली होती है। इससे इसे बचना चाहिये।

3 शिक्षा मे मिश्रित परिणाम होते है। कुछ विज्ञान और कुछ साहित्य मे रुचिवान होती है। ये गृह कार्य और गृह प्रशासन मे दक्ष होती है।

आचार्यो अनुसार नक्षत्र फलादेश

घनिष्ठा मे उत्पन्न जातक धार्मिक किन्तु लालची, देखभाल कर खर्च करने वाला, मित्रता व प्रेम से वश मे होने वाला होता है। इन्हे रॉब या बल या प्रभाव से वश में नही किया जा सकता है। ये निडर होते है। धन कमाने और इकट्ठा करने की प्रवृत्ति प्रचुर मात्रा मे होती है। ये लोग अपने बुद्धिबल से धन इकट्ठा कर लेते है। ये नृत्य, संगीत, गीत प्रेमी होते है। समाज मे प्रतिष्ठित होते है। - नारद

ये लोग देने वाले और दूसरो के काम आते है। घनिष्ठा शब्दार्थ अनुसार मितव्ययी होने से प्रचुर मात्रा मे धन इकठ्ठा कर लेते है। - ढुण्ढिराज

घनिष्ठा जातक राजा या राजकीय लोगो से सहायता व सम्मान प्राप्त करने वाला, सामान्यतया सुगम सफल जीवन जीने वाला, शत्रु रहित, तारो मे अभिरुचि रखने वाला होता है. इन्हे तारा विज्ञान, ज्योतिष, खगोल का सहज आकर्षण होता है। - पराशर

चन्द्र :

घनिष्ठा मे चंद्र का प्रभाव प्रायः जीवन के उत्तरार्ध मे आता है। जातक भौतिक सम्पदा का मालिक, प्रसिद्ध, जाना-पहचाना, अच्छा नेता, लालची, स्वार्थी, नृत्यक, यात्रा प्रेमी, कंजूश होता है। जातक के विवाह में बाधा होती है। भेट या तोहफा देने मे मुक्त हस्त, राजसी जीवन वाला, प्रतिकारी होता। है।

वरःमिहिर अनुसार चंद्र प्रभाव पक्षपात हीन, धनाड्य, धनी स्वाभाव होता है।

सूर्य :

सूर्य घनिष्ठा मे हो, तो मजबूत, गुस्से से दुःखी, जिज्ञासु, खोज उन्मुख, खिलाडी, दुरात्मा, चीड़-चिड़ा, तनाव मे रहने वाला, यदा कदा अन्यायी, अविवेकी होता है।

लग्न :

घनिष्ठा लग्न हो, तो जातक राजसी और नायक स्वभाव वाला, मानवतावादी, आदर्शवादी, कृपालु, सदाचारी, आकांक्षी, विवेकशील, जिज्ञासु, अहंकारी होता है।

घनिष्ठा चरण फल

प्राथम चरण - इसका स्वामी सूर्य है। इसमे शनि, मंगल, सूर्य ♂ का प्रभाव है। मकर 29320 से 29640 अंश। नवमांश सिंह। यह अभिलाषा, आक्रामकता, सिद्धि का द्योतक है। जातक गंभीर नेत्र, सुन्दर नाक, रूखे नख, व छिदे बाल, बड़ा शरीर, बड़ा गोल ललाट, निश्छल दृष्टि, शक्तिशाली होता है।

यह चरण सबसे आक्रामक पाद है। इस पाद में जातक महा विद्वान, प्रायोगिक, व्यापारी, धनाढ्य, अस्वस्थ्य होता है।

द्वितीय चरण - इसका स्वामी बुध है। इसमे शनि, मंगल, बुध ♂ का प्रभाव है। मकर 29640 से 30000 अंश। नवमांश कन्या। यह संचार, शक्ति, ग्रहण या प्रचलन या अनुकूलन, खेल युक्ति का द्योतक है। जातक बड़े नेत्र, गोल चहेरा, सुबुद्धि से ग्रहण करने वाला, गीत व वाद्य मे रत, सात्विक वृत्ति, साहसी, सज्जन होता है।

इस पाद मे जातक तेज बुद्धि, चालक, निर्भीक होकर हर प्रतियोगिता मे भाग लेने वाला, आत्म निर्भर, अपने कार्य में लवलीन, उच्चपद पर होता है।

तृतीय चरण - इसका स्वामी शुक्र है। इसमे शनि, मंगल, शुक्र ♂♀का प्रभाव है। कुम्भ 30000 से 30320 अंश। नवमांश तुला। यह अवगत या जानना, आशावाद, समजातिक्ता, वैवाहिक सुख का द्योतक है। जातक श्याम वर्ण, कोमल पतले अंग, शास्त्र एवं काव्य बुद्धि वाला, महिलाओ मे लोक प्रिय, भावुक, कोमल होता है।

इस पाद मे जातक कामुक, रोमांटिक, स्वयं का उद्योग, तेज बुद्धि, शत्रुहंता, संपत्ति के देन-लेन व किराये से धनी, सुखी दाम्पत्य जीवन, अनेक व्यवसायिक यात्राएं करता है तथा इनसे धनी होता है।

चतुर्थ चरण - इसका स्वामी मंगल है। इसमे शनि, मंगल, मंगल ♂♂का प्रभाव है। कुम्भ 30320 से 30640 अंश। नवमांश तुला। यह सृजन, पराक्रम, खिलाडी द्योतक है। जातक कांपती हुई दृष्टि (त्वंण दृष्टि} कठोर नख, निडर, साधु स्वभाव, आश्रयदाता, मुर्ख होता है।

इस पाद में जातक अत्यंत आक्रामक, अपने व्वयसाय की तारीफ करने वाला, व्यवसाय के प्रारम्भ मे बाधा किन्तु अंत मे सफल, कठिन परिस्थियों से लड़ने वाला, साधारण दाम्पत्य जीवन होता है।

आचार्यो ने चरण फल सूत्र रूप मे कहा है लेकिन अंतर बहुत है।

यवनाचार्य : घनिष्ठा प्रथम चरण मे दीर्घायु, द्वितीय चरण मे पीड़ित, तृतीय चरण मे डरपोक, चतुर्थ चरण मे अच्छी पत्नी वाला होता है।

मानसागराचार्य : पहले पाद मे पृथ्वीपति, दूसरे पाद मे उभयकुल तारक व धनी, तीसरे पाद मे मध्यम, चौथे पाद मे श्रीमान होता है।

घनिष्ठा नक्षत्र विभूतियां

ए आर रहमान (भारतीय संगीतज्ञ) का यह जन्म नक्षत्र है।

घनिष्ठा ग्रह चरण फल

सूर्य :

◾घनिष्ठा सूर्य पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक स्त्रियो के संपर्क मे धन गंवाकर अंत मे खुशियो से वंचित होगा।

◾घनिष्ठा सूर्य पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक समझौता करने वाला, रोगी, मानसिक असंतुलित होगा।

◾घनिष्ठा सूर्य पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक समाज के अच्छे कार्य करने वाला, दयालु, बुद्धिमान होगा।

◾घनिष्ठा सूर्य पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक जिद्दी स्वभाव वाला, शत्रुओ को परास्त करने वाला होता है।

घनिष्ठा सूर्य चरण फल

प्रथम चरण - जातक हिम्मतशाली, क्रोधी, चिड़चिड़ा, बड़बोला, तनाव ग्रस्त, कम खर्चीला होने से धन एकत्रित करने वाला दुरात्मा होता है। यदा-कदा अन्यायी, अविवेकी, निडर होता है।

द्वितीय चरण - जातक धार्मिक, लोभी, मजबूर, गुस्से मे दुःखी, जिज्ञासु, देखभाल कर खर्च करने वाला होता है।

तृतीय चरण - जातक दिप्तिमान देह वाला, लालची, धन इकट्ठा करने की प्रवृत्ति वाला, संगीत का शौकीन, रोब या बल से काबू नही आने वाला, प्रतिष्ठित होता है।

चतुर्थ चरण - जातक मजबूत, गुस्से से परेशांन, खिलाडी, प्रेम से वशीभूत, कम खर्च कर धन एकत्रित करने वाला, खुसियो से वंचित, संगीत व मनोरंजन मे रुचिवान होता है।

चन्द्र :

◾घनिष्ठा चंद्र पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक राजा के सामान शक्तिवान अधिकार युक्त, धन दौलत भोगी होगा।◾ घनिष्ठा चंद्र पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक विद्वान, विषयो का ज्ञाता होगा।

◾घनिष्ठा चंद्र पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक धनाढ्य, सफल व्यापारी होगा।

◾घनिष्ठा चंद्र पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक समाज या नगर पंचायत का प्रमुख होगा।

◾घनिष्ठा चंद्र पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक निर्धन, सामान्य जीवन जीने वाला होगा।

◾घनिष्ठा चंद्र पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक जमींदार और प्रभुत्व वाला होगा।

घनिष्ठा चंद्र चरण फल

प्रथम चरण - जातक, दुःखी, लोभी, राजसी जीवन जीने वाला, स्वार्थी, कंजूस होता है। जातक की उन्नति जीवन के उत्तरार्ध मे होती है। स्त्री जातक मे गर्भपात होते है।

द्वितीय चरण - जातक सुरीला, सम्पत्तिवान, भौतिक सम्पदा का अधिकारी, गीत-संगीत का शौकीन, जाना पहचाना, प्रसिद्ध, कान का कच्चा होता है।

तृतीय चरण - जातक परिश्रम व बुद्धिबल से अच्छा कमाने वाला, यात्रा प्रेमी, कंजूस, अति भक्षक होता है। परिणय मे बाधा आती है। कोई कोई जातक अविवाहित होता है।

चतुर्थ चरण - जातक मित्रता और प्रेम से वशीभूत होने वाला, नेता (राजनेता, धर्मनेता, अभिनेता) लालची, अपना मतलब निकलने वाला होता है। जातक के विवाह में बाधा आती है। या तो विवाह नही होता है या होता है तो तलाक या विछोह होता है।

मंगल :

◾घनिष्ठा मंगल पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक काले रंग का, रुखा, संतान व धन-दौलत से संपन्न होगा।

◾घनिष्ठा मंगल पर चंद्र की दृष्टि हो, तो जातक धनवान, दीर्घ मित्रता रहित होगा।

◾घनिष्ठा मंगल पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक मृदुभाषी, लेकिन व्यवसाय मे झूठ बोलने वाला होता है।

◾घनिष्ठा मंगल पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक दीर्धायु, परिवार पालक, गुणवान होता है।

◾घनिष्ठा मंगल पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक यौन सुख प्राप्त करने वाला होता है।

◾घनिष्ठा मंगल पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक बुद्धिमान, प्रसिद्ध, स्त्री वर्ग से घृणा करने वाला होता है।

धनिष्ठा मंगल चरण फल

प्रथमं चरण - जातक ऊर्जावान, कार्य मे सफल, क्रियाशील, निश्चयी, निडर, विवाद और कलह से दूर, किन्तु उलझनो पर उग्र और हिंसक, नौकरी को व्यव्यसाय समझने वाला होता है।

द्वितीय चरण - जातक मित्रता और प्रेम से वश मे होने वाला, उच्च बौद्धिक क्षमता की वजह से निर्णय लेने मे सक्षम, गीत-संगीत का शौकीन होता है। यदि सूर्य, चंद्र, गुरु की दृष्टि हो, तो नीच कुल मे पैदा होकर भी राष्ट्र प्रमुख होता है।

तृतीय चरण - जातक मक्कार लालची, रतिक्रीड़ा प्रेमी, कामुक, नाचने-गाने वाला, तारा विज्ञान के प्रति रुचिवान, धन एकत्रित करने वाला, भूमि-संपत्ति वाला होता है।

चतुर्थ चरण - जातक परिश्रम के बल पर धन इकठ्ठा करने वाला, परिस्थिया नही टलने पर उग्र और हिंसक, मान सम्मान को महत्व देने वाला होता है। यदि शनि की दृष्टि हो, तो गहन मानसिक विकृति होती है और यहा तक की पागल भी हो सकता है।

बुध :

◾घनिष्ठा बुध पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक भीरु, शास्त्रज्ञ, धनवान होता है।

◾घनिष्ठा बुध पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक क्रूर, धन के लिए अवैध कार्य करने वाला, अंदर से खोखला किन्तु सूनेपन को भरने वाला होता है।

◾घनिष्ठा बुध पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक नगर प्रमुख, विद्वान होता है।

◾घनिष्ठा बुध पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक क्रूर कर्म करने वाला, दयाहीन, निर्धन होता है।

घनिष्ठा बुध चरण फल

प्रथम चरण - जातक समय का पाबंद, ठीक समय पर बोलने वाला, ठीक जगह पर काम करने वाला, अंदर से खोखला, किन्तु सूनेपन को भरने वाला, ऋणी होता है।

द्वितीय चरण - जातक लोभी, देखभाल कर खर्च करने वाला, मितव्ययी होने से धनवान, धन कमाने की प्रवृत्ति वाला और बुद्धि तथा परिश्रम से धन एकत्रित करने वाला, सामाजिक प्रतिष्ठावान होता है।

तृतीय चरण - जातक सौम्य, सुन्दर, धार्मिक, विचार पूर्वक व्यय करने वाला, दानी, बड़े निर्माण मे बहुत धन दान करने वाला होता है। जातक सुगम संगीत का रशिया, उद्वेलित करने वाले गीतो का रचनाकार होता है।

चतुर्थ चरण - जातक रोब या बल से वशीभूत नही होने वाला, अति लालची, लालच मे दूसरो का अहित करने वाला, विवाद मे उग्र, पीछे नही हटने वाला, कंजूस होता है।

स्त्री जातक का विवाह स्वयम्बर प्रथा से होगा, विवाह बाद विछोह या तलाक हो सकता है।

गुरु :

◾घनिष्ठा गुरु पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक आकर्षक, ओजस्वी वक्ता, मददगार होता है।

◾घनिष्ठा गुरु पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक समाज नेता या राज नेता होगा।

◾घनिष्ठा गुरु पर मगल की दृष्टि हो, तो जातक विश्वास पात्र, शासन से अर्थ प्राप्त करेगा।

◾घनिष्ठा गुरु पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक शांति प्रिय, स्त्रियो का प्रिय, अनुष्ठान प्रिय होगा।

◾घनिष्ठा गुरु पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक सर्वगुण संपन्न, अति विद्वान होगा।

◾घनिष्ठा गुरु पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक सब प्रकार से सुखी होगा।

घनिष्ठा गुरु चरण फल

प्रथम चरण - जातक ख़राब स्वास्थ्य वाला, बिना विचारे खर्च करने वाला, अधिक खर्च के कारण आर्थिक रूप से विपन्न, अल्प बुद्धि होने से निर्धन व दयनीय होता है।

द्वितीय चरण - जातक धार्मिक, विचार पूर्वक व्यय करने वाला, धन का सदुपयोग करने वाला, भोग-विलाश और भौतिक सुखो के लिए अधिक धन खर्च करने वाला, संगीत मे रुचिवान होता है।

तृतीय चरण - जातक तेजस्वीं धर्म मे रुचिवान, बून्द-बून्द से धन एकत्रित करने वाला, मितव्ययी, राजा या राजकीय लोगो से सम्मान पाने वाला होता है। जातक 24 उम्र तक घुमक्कड़ और बाद मे स्थिर होता है।

चतुर्थ चरण - जातक स्वस्थ, व्यसन प्रिय, निडर, सिर पे बन आय तो पीछे नही हटने वाला, उग्र, गंभीर प्रकृति वाला, शत्रु रहित, राज्य से सम्मानित होता है।

शुक्र :

◾घनिष्ठा शुक्र पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक हंसमुख व आकर्षक होता है।

◾घनिष्ठा शुक्र पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक मेहनती, आर्थिक रूप से परेशान होगा।

◾घनिष्ठा शुक्र पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक संगीत और कला प्रेमी, धनवान होता है।

◾घनिष्ठा गुरु पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक सुन्दर, भाग्यशाली, धनवान होता है।

घनिष्ठा शुक्र चरण फल

प्रथम चरण - जातक समय का पाबंद, ठीक समय या ठीक वक्त पर बोलने या काम करने वाला, व्याकुल, अंदर से बांसुरी के माफिक खोखला किन्तु दूसरो के सूनेपन को दूर करने वाला होता है।

द्वितीय चरण - जातक धार्मिक, मुक्तहस्त, बिना विचारे खर्च करने वाला फिर भी धनवान, भोग-विलास मे खर्च करने वाला, संगीत मे रुचिवान, संगीतकार या वाद्य वादक होता है।

गुरु की युति हो, तो जातक व्यावसायिक क्षेत्र और समाज दोनो मे उन्नत होता है। धार्मिक अनुष्ठान मे रुचिवान, धन अर्जित करने वाला होता है।

तृतीय चरण - जातक सुन्दर, धार्मिक कार्यो मे रुचिवान, परिश्रम और बुद्धि बल से धन एकत्रित करने वाला, संगीत का शौकीन, राज्य से लाभ प्राप्त करने वाला, खुशहाल जीवन जीने वाला होता है।

चतुर्थ चरण - जातक महा लोभी, दुराचारी, कुमार्गो मे धन व्यय करने वाला, कुंवारी कन्याओ का व्यसनी, हम चौड़े और बाजार सकरा सिद्धांत वाला होता है। एक तरफ तो दयालु और उदार और दूसरी तरफ इनके पीछे निश्चित उद्येश्य रखने वाला होता है।

शनि :

◾घनिष्ठा शनि पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक की पत्नी बदसूरत होगी, वह निर्धन और निर्भर होगा।

◾घनिष्ठा शनि पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक माता की देखभाल से वंचित, चरित्रवान, धन संपत्ति से संपन्न, दो नामो वाला होता है।

◾घनिष्ठा शनि पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक लकवे से पीड़ित, दूसरो के विपरीत कार्य करने वाला होता है।

◾घनिष्ठा शनि पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक नेक, धनवान, समाज, राज्य, प्रतिष्ठानो से लाभ प्राप्त करने वाला होता है।

◾घनिष्ठा शनि पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक शासन मे मन्त्री या उच्च पद पर नियुक्त अथवा सेनाप्रमुख होगा। ◾घनिष्ठा शनि पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक मजबूत शरीर वाला, संवेदनशील होता है।

घनिष्ठा शनि चरण फल

प्रथम चरण - जातक बात-बात पर बिगड़ने वाला, तुनुक मिजाज, महा कंजूस, विचार पूर्वक खर्च करने वाला, उग्र, विध्वसंक कारक होता है।

अन्यत्र बुध की युति हो, तो अत्यंत सृमद्ध, चन्द्रमा आश्लेषा तृतीय चरण मे हो, तो सेना नायक या राज्य प्रसाशक, निकले दन्त, चंचलचित्त, माता के प्रति समर्पित होता है।

द्वितीय चरण - धार्मिक विचार वाला, अपनी इन्द्रियो को वश में रखने वाला, सांसारिक भोगो से विरक्त, पापो का नाश करने वाला, डरावना मगर मिलनसार, सज्जन होता है।

तृतीय चरण - जातक लम्बा, गोरा, सौजन्यपूर्ण, व्यक्तित्व, भोग-विलास मे खर्च करने वाला, राज्याश्रित, विचारो का पक्का, समाज मे उच्च पद वान, अधिकारी, वैज्ञानिक होता है।

चतुर्थ चरण - जातक आचार भ्रष्ट, लालची, मोह रहित, कंजूस, गीत संगीत मे अरुचि वाला, आलसी होता है।

घनिष्ठा राहु चरण फल

प्रथम चरण - जातक अति शिक्षित, धनवान, लेकिन धूर्त, क्रूर होगा, परिवार द्वारा त्याग दिया जावेगा।

द्वितीय चरण - जातक अति शिक्षित, घनवान होगा। शनि की दृष्टि हो, तो त्वचा या कुष्ठ रोगी होता है।

तृतीय चरण - जातक घमंडी, क्रूर, दूसरो को दुःख देने वाला होता है। यदि सूर्य-बुध की दृष्टि हो, तो अप्रत्याशित उन्नति और अप्रत्याशित पतन होता है। 24 , 31, 47 उम्र वर्ष नकारात्मक होते है।

चतुर्थ चरण - जातक के परिवार को खतरा होगा। हस्त नक्षत्र लग्न हो, और चन्द्रमा से युति हो, तो जातक की सात वर्ष की आयु में माता को खतरा होता है, सहोदर केवल एक ही विपरीत लिंग का होता है।

घनिष्ठा केतु चरण फल

प्रथम चरण - जातक धार्मिक, सहोदरो से मनमुटाव, जमीन जायदाद के पारिवारिक झगडे होगे, यदि शुभ ग्रहो का संयोग हो, तो पारिवारिक झगड़ो से लाभ होगा।

द्वितीय चरण - जातक बार-बार दुर्घटना का शिकार होता है या आपरेशन होता है। वाहन नही चलना चाहिए।

तृतीय चरण - जातक के घर में चोरी होगी। स्त्री जातक रजस्वला से परेशान व गर्भपात होते है।

चतुर्थ चरण - जातक की स्थति कुछ अच्छी होगी, शासकीय नौकर होगा।

जातक = वह प्राणी जिसका ज्योतिषीय विचार किया जा रहा हो।

✡✡✡

 

धनिष्ठा नक्षत्र: धनिष्ठा पौराणिक परिचय आकाश मंडल में 24वें नक्षत्र का नाम है, धनिष्ठा और उसका विस्तार-क्षेत्र 293 अंश, 20 कला से 306 अंश, 40 कला तक फैला हुआ है। इस नक्षत्र को अरबी भाषा में सादअज-सूद' (बहुत ही उम्दा) केपीकार्ती' या 'डेलफिनी' नाम ग्रीक साहित्य में दिया गया। जबकि स्यू चाइनीज शास्त्र में हाइयो' कहा गया। धनिष्ठा शब्द का अर्थ है, बहुत प्रख्यात, जिसको धननि यानी धनी भी माना गया है। इसके अन्दर चार सफेद चमकदार तारे हैं, जिनका आकार एक ड्रम के समान है। धनिष्ठा नक्षत्र के अधिदेवता अष्ट वसु हैं, जो कि सूर्य की भांति तेजोमय-उत्तप्त और कल्याणकारी देवता कहलाते हैं। इन अष्ट वसु के नाम हैं-धरा, ध्रुव, सोम, विष्णु, अनल, अनिल, प्रत्यण प्रवस। इन सब वस्तुओं को बंगाल की ब्राह्मण जाति में विशेष नाम गंगा-मया का पार एफ इन्हा से धनिष्ठा नक्षत्र के जातकों का सामान्य परिचय पुरुष जातक शारीरिक संरचना नीर पर धनिष्ठा जातक हृष्ट-पुष्ट और छोटे कद के होते हैं, परन्तु कुछ जातक पतले और लम्बे शरीर के भी होते हैं। कई जातक बहुत ही कठोर शरीर के लंडने-भिड़ने की कला में माहिर-उद्दण्ड स्वभाव के होते हैं। चरित्र, गुण और सामान्य घटनाएं धनिष्ठा जातक उन सभी कार्यों में विशेष योग्यता रखते हैं, जिनको करने में उनकी अभिरुचि रहती है। वैसे तो उन्हें अत्यधिक तीक्ष्ण बुद्धि और सर्वज्ञ माना जाता है, परन्त सारी दष्टि में मेहनत के कार्य में वे दक्ष होते हैं। मनसा, वाचा, कर्मणा वे किसी के लिए भी परेशानी पैदा नहीं करते। उनके अन्दर धार्मिक संस्कार रहते हैं। अपने ही शौर्य और साक्त के बल पर वे सब-कुछ कर सकने की क्षमता रखते हैं। दूसरों का विरोध वे आखिरी क्षण तक नहीं करते यानी वे तभी लड़ते हैं, जब लड़ाई आवश्यक हो जाती है। हाथी जैसा बदला लेना उनका स्वाभाविक गुण है। हाथी मौका देखकर ही अपने विरोधी पर हमला करता है। शिक्षा, आर्थिक स्रोत और व्यवसाय __ अधिकतर वैज्ञानिक, इंजीनियर, विद्युत मैकेनिक, टेक्नीशियन इतिहासकार, मिस्त्री, कारीगर, शिल्पी तथा लौहार-सुनार आदि धनिष्ठा नक्षत्र की देन हैं। गुप्तचर सेवा तथा रक्षा-पुलिस सेवा या फिर निजी सचिव-एग्जीक्यूटिव पदों पर इनकी उपस्थिति बनी रहती है। अच्छे कवि, लेखक तथा खोजी, पत्रकार, वकील, सर्जन भी धनिष्ठा की ही देन हैं। 24 वर्ष तक उन्हें बहुत ही संघर्षपूर्ण जीवन व्यतीत करना होता है। उसके उपरांत 40- 45 वर्ष तक वे खूब धन कमाते हैं। व्यापार क्षेत्र में अगर नक्काल और ठगी का धन्या न करें तो प्रख्यात उद्योगपति बन सकते हैं। पारिवारिक जीवन अपने परिवार के दायरे में भी धनिष्ठा जातक अच्छे व्यवस्थापक और जिम्मेदार सदस्य माने जाते हैं। उनके सगे-सम्बंधी उनके लिए समस्या खड़ी कर देते हैं। अपने भाई-बहनों के भी वे संरक्षक होते हैं। अपने ससराल-पक्ष से भी परेशान रहते हैं, परन्तु उनकी गुणी पत्नी इस कमी को पूरा कर देती है। उनकी पत्नी वास्तव में लक्ष्मी होती हैं, अतः विवाहोपरान्त धनिष्ठा जातक विशेष समृद्धि अर्जित करते हैं। अगर और बुध का योग सप्तम हो तो धनिष्ठा जातक अविवाहित रहना पसंद करते हैं। शुक्र व मंगल योग हो तो उन्हें प्रेम में असफलता मिलती है या फिर उनका प्रेमी में ही उन्हें छोड़कर चला जाता है। स्वास्थ्य आमतौर पर धनिष्ठा जातक बाहर से तंदुरुस्त, परन्तु अंदर से नाना प्रकार के मियादी। रोगों से ग्रस्त रहते हैं। जब कोई रोग अति कष्टदायक होने लगता है, तभी उसका उपचार करते हैं। अगर जरा-सा आराम मिलने लगे तो अपने कार्यक्षेत्र में उतर जाते हैं। फलतः। पुनः रोगग्रस्त हो जाते हैं। काली खांसी, रक्त विकार, चेचक, खसरा, क्षय, कैंसर आदि रोग उन्हें कष्ट दे सकते हैं। महिला जातक घनिष्ठा महिलाओं में भी कमोवेश वही गुण अवतरित होंगे, जो उपरोक्त में पुरुष जातकों के लिए कहे गए हैं। इसके अलावा कुछ अन्य तथ्य इस प्रकार से हैं- शारीरिक संरचना । इस नक्षत्र की महिलाएं सुन्दर तथा नवयौवना की तरह दिखती हैं। अर्थात बड़ी उम्र में भी उनका सौन्दर्य कायम रहता है। आकर्षक हाव-भाव तथा मोहक अदाओं वाली धनिष्ठा महिलाएं अधिक मोटे होंठ वाली होती हैं। कुछ महिलाओं के दांत बाहर निकले रहते हैं। चरित्र गुण एवं सामान्य घटनाएं ___ इस नक्षत्र की महिलाएं ऊंचे ख्यालों और अभिलाषाओं वाली, कंजूस प्रवृत्ति की होती हैं। वे आधुनिक व स्वतंत्र विचारों वाली होती हैं। वे कमजोर और दीन-दुःखियों के प्रति दया-भाव वाली होती हैं। वे दूसरों पर दबाव डालने में माहिर होती हैं, किन्तु इनको अपनी इस आदत को, घर की सुख-शांति के लिए त्याग देना चाहिए। शिक्षा, आर्थिक स्रोत और व्यवसाय शिक्षा के क्षेत्र में मिली-जुली प्रतिभा की प्रवृत्ति इन महिलाओं में पाई गई है। कुछ कला साहित्य आदि में रुचि रखती हैं तो कुछ विज्ञान, तकनीकी आदि में। आमतौर पर इस नक्षत्र की महिला जातक अध्यापन, लेक्चरार या रिसर्च अनुसंधान आदि के क्षेत्र को अपनाती हैं। पारिवारिक जीवन इस नक्षत्र की महिलाएं बहुत ही सफत गृहिणी मानी जाती है। महिलाओं का स्वास्थ्य आमतौर पर अच्छा नहीं होता। उन्हें एनीमिया, पेट की। रबडी, उदर विकार, खून की खराबी होना जैसी बीमारियां पेरे रहती हैं। धनिष्ठा नक्षत्र में अन्य ग्रहों के संचार का प्रभाव मर्यः सर्व अन्य ग्रहों के संचार का प्रभाव, श्रवण नक्षत्र के भांति ही देखें। सर्य यदि प्रथम चरण में हो तो व्यक्ति प्रतिभावान, किन्तु स्वार्थी और अपनी शेखी करने वाला होता है।वह नाटे कद का तथा गोरे रंग का होता है। वह महिलाओं से विशेष लगाव रखता है। दितीय चरण में सूर्य हो और चन्द्रमा, मंगल तथा शनि भी साथ हों तो बालक की मृत्यु 5 वर्ष के दौरान ही हो जाती है। वह स्वार्थी, किन्तु सच्चरित्र व्यक्ति होता है। वह कंजूस और ज्यादा मित्र नहीं बनाने में विश्वास रखता है। तृतीय चरण में सूर्य हो तो व्यक्ति विद्वान, चौड़े और मजबूत शरीर का, छोटे व बबसरत दांतों वाला और चौड़े चेहरे का होता है। उसकी आयु 76 वर्ष से ऊपर होती है। यदि सर्य शभ ग्रहों के साथ योग करे तो व्यक्ति आमतौर पर बीमार रहता है, किन्तु अल्पायु नहीं होता। चतुर्थ चरण में सूर्य हो तो वह सुख से कोसों दूर, गोरे रंग का, आकर्षक चेहरे वाला, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल रहने वाला होता है। वह संगीत कला और मनोरंजन में रुचि लेता है। 35 वर्ष की आयु तक अपने परिवार के प्रति उत्तरदायी नहीं रहता, किन्तु बाद में गलती स्वीकार कर, अपना घर खुशहाल बनाता है। हालांकि वह अपने पिता को अपना शत्रु समझता है। चन्द्रमाः चन्द्रमा पर विभिन्न ग्रहों के दृष्टिफल हेतु पीछे के पृष्ठों में श्रवण नक्षत्र पर चन्द्रमा के संचार के दौरान अन्य ग्रहों की दृष्टि का फलादेश देखें। चन्द्रमा अगर धनिष्ठा के प्रथम चरण में हो तो महिलाओं को गर्भपात की संभावना रहती है। पुरुष-जातकों की पत्नी प्रसवकाल के दौरान मृत्यु तुल्य कष्ट पाती है। 5 वर्ष की अवस्था अत्यन्त अरिष्टकर तथा 10 वर्ष की अवस्था में दुर्घटना आदि होने का भय रहता है। शस्त्राघात या हथियार आदि से भी उसकी मृत्यु संभव द्वितीय चरण में चन्द्रमा हो तो जातक धनी और कृतघ्न होगा। उसकी गर्दन अथवा माम बड़ा-सा मस्सा आदि होगा। वह अधिकतर प्रसन्नचित्त दिखाई देगा। मध्यावस्था धनिष्ठा नक्षत्र और आपका स्वभाव आप पुरुष हैं तो-आप आशावादी, अभिमानी, जल्दबाज, दानी, साहसी, संगीत प्रेमी, विद्वान एवं आर्थिक तंगी से ग्रस्त रहते हैं। लोभ एवं क्रोध के कारण हानि उठाते हैं। आप समाज में प्रतिष्ठित एवं लोकप्रिय होते हैं। ज्योतिषी या गणितज्ञ होते हैं। आप कला प्रेमी, लोहे से धन कमाने वाले एवं दूजों का उपकार करते हैं। आप स्त्री हैं तो-आप धैर्यशीला, अभिमानिनी, पति- प्रिया, श्रम-शीला, स्पष्ट-वादिनी, संगीत-प्रेमी, लोकप्रिय एवं विनोद-प्रिय होती हैं। स्वाध्याय एवं लेखन में रुचि रखने वाली आशावान महिला हैं। सुगृहणी होते हुए भी सामाजिक कार्यों में लिप्त रहती हैं। प्रायः लोभ एवं क्रोध के कारण सुअवसर गवां देती हैं। चन्द्रमाः चन्द्रमा पर विभिन्न ग्रहों के दृष्टिफल हेतु पीछे के पृष्ठों में श्रवण नक्षत्र पर चन्द्रमा के संचार के दौरान अन्य ग्रहों की दृष्टि का फलादेश देखें। चन्द्रमा अगर धनिष्ठा के प्रथम चरण में हो तो महिलाओं को गर्भपात की संभावना रहती है। पुरुष-जातकों की पत्नी प्रसवकाल के दौरान मृत्यु तुल्य कष्ट पाती है। 5 वर्ष की अवस्था अत्यन्त अरिष्टकर तथा 10 वर्ष की अवस्था में दुर्घटना आदि होने का भय रहता है। शस्त्राघात या हथियार आदि से भी उसकी मृत्यु संभव द्वितीय चरण में चन्द्रमा हो तो जातक धनी और कृतघ्न होगा। उसकी गर्दन अथवा जंघा में बड़ा-सा मस्सा आदि होगा। वह अधिकतर प्रसन्नचित्त दिखाई देगा। मध्यावस्था। में पीलिया, टायफाइड अथवा तीव्र ज्वर के कारण बीमार रहेगा। 25 वर्ष की अवस्था में पुनः रोग कष्ट या दुर्घटना की आशंका रहेगी। तीसरे चरण में चन्द्रमा हो तो व्यक्ति साहसी, सत्यनिष्ठ तथा सबके प्रति नम्रता पूर्ण व्यवहार वाला होगा। वह अच्छे खाने-पीने का शौकीन होता है, जिसके कारण वह उदर रोग से ग्रस्त रहेगा। उसे अपने भोजन पर नियंत्रण रखना चाहिए अन्यथा खाते-पीते रहने के कारण अनेक प्रकार के कष्ट उठाने पड़ते हैं। चतुर्द चरण में अगर चन्द्रमा हो तो व्यक्ति दो पत्नियों से युक्त होता है। जातक की दो संतानें होती हैं। ऐसा व्यक्ति अन्य महिलाओं के साथ अधिक यौनाचार करने में असाध्य कष्ट से ग्रस्त हो सकता है। उसके बाएं अंग में कोई चिन्ह तिल आदि होता है। ऐसे जातकों को पांचवें साल, 12वें साल अग्नि या विष, शस्त्र विस्फोट आदि से भय रहता है। 28 से 30 साल के मध्य चोरों तथा डाकुओं या अवांछित तत्वों के साथ संघर्ष में उलझना पड़ सकता है। उपरोक्त सभी चरणों में जातक आमतौर पर दीर्घायु भोगते हैं, परन्तु वे सारी उम्र कष्टकारक स्थितियों से गुजरते रहते हैं। शुक्रः शुक्र का फल प्रायः वही होगा, जो पिछले पृष्ठों में श्रवण नक्षत्र पर उल्लेख किया गया है। प्रथम चरण में शुक्र हो तो व्यक्ति की पत्नी विवाह के उपरांत दुर्घटना का शिकार हो जाती है। वह स्वयं भी पत्नी की मृत्यु का उत्तरदायी होता है। ऐसे जातक दो संतानों से युक्त होते हैं। द्वितीय चरण में अगर शुक्र हो तो व्यक्ति अपनी पद प्रतिष्ठा में विशेष वृद्धि करता है। वह धार्मिक अनुष्ठान, यज्ञ आदि करने वाला परोपकारी तथा दाम्पत्य सुख से रहित होता है।तीसरे चरण में यदि शुक्र हो तो व्यक्ति अनैतिक कार्यों में लिप्त रहता है। एक तरफ वह बहुत दयालु और उदार होता है तो दूसरी ओर उसका चरित्र निम्न स्तर का होता है। अपने आचरण का लाभ, वह अपनी स्वार्थपूर्ति के लिए उठाता है। धनिष्ठा नक्षत्र सम्बन्धी कार्य एवं व्यवसाय धनिष्ठा नक्षत्र के प्रथम व द्वितीय चरण में जन्म हो, राशि मकर, राशीश शनि एवं नक्षत्र स्वामी मंगल है। इस नक्षत्र में जन्म हुआ है तो आप आयुर्वेद, होम्योपैथी, अस्थि विशेषज्ञ, खान व भूमिगत कार्यों का इन्जीनियर, श्रम, पनर्वास विभाग, मृत्युकर संग्रह, जेल विभाग, उद्योग, उपकरण, स्पैयर पार्टर्स, जस्ता, सीमेन्ट, धातु, सीसा, शराब, जूट व्यवसाय, डिस्टलरी, लौहार, बर्तन निर्माता, अन्त्येष्टि क्रिया-क्रम की सामाग्री, साधु-सन्यासी, बीमा ऐजन्ट, मदिरा उद्योग, मौसम विभाग, गाड़ीवान, जासूस, पुलिस का मुखबिर, अग्निशमक विभाग, पशुपालक, डाक हत्यारा, ठग, कृषि सम्बन्धी कार्यों को करके सफलता सहित अपना जीवनयापन कर सकते हैं। । धनिष्ठा नक्षत्र के तीसरे व चौथे चरण में जन्म हो, राशि कुम्भ, राशीश शनि एवं नक्षत्र स्वामी मंगल है। इस नक्षत्र में जन्म हुआ है तो आप दूरदर्शन, दूरभाष, तार, विद्युत, अणुशक्ति, अनुसंधान केन्द्र, मुद्रणालय, वास्तुविद, टेलीफोन एक्सचेंज, टाईपिस्ट, कम्प्यूटर ऑपरेटर या प्रोग्रामर, टाइमकीपर, इन्सपेक्टर, सेना या पुलिस विभाग, भूगर्भवेत्ता, प्रेस, फॉउन्ड्री, ताला फैक्ट्री य विक्रेता, तकनीकी कार्य करने वाला, नशीली वस्तुओं का व्यवसाय एवं पुनर्वास विभाग, पोस्टमार्टम, जूट, खान, कृषि, चाय या चाय बागान, सूचना विभाग, दंगो व युद्ध पीड़ितों को सहयोग, सामाजिक कार्य, कोयला, लौह या स्टील, चमड़ा, खाल सम्बन्धी कार्यों को करके सफलता सहित अपना जीवनयापन कर सकते हैं।

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

नवरात्री में देवी के दिव्य पाठ एवं 7 शक्तिशाली रक्षक पाठ

समपूर्ण नरसिंह आराधना जयंती विशेष

सम्पूर्ण गणेश उपासना स्तोत्र मन्त्र सहित