कुंभ राशि
कुंभ (11)
12 राशियों में यह ।।वीं राशि है। इसका निर्देशांक ।। है।
धनिष्ठा नक्षत्र के अंतिम दो चरण, शतभिषा नक्षत्र के चारों चरण एवं पूर्वाभाद्रपल
के प्रथम चरण मिलने पर कुंभ राशि बनती है।
नीचे दी गई सारिणी में चंद्र के अंश, नक्षत्र, चरण, राशि स्वामी, नक्षत्र स्वामी
योनि, नाड़ी,गण एवं नामाक्षर की जानकारी दी गई है।
के अंश नक्षत्र चरण नामाक्षर राशि
स्वामी शनि स्वामी नक्षत्र धनिष्ठा शतभिषा पूर्वाभाद्रपद । से रो ,सो,दा शनि बहस्पति सिंह
इस राशि की आकृति कंधों पर घड़ा लिए पुरुष के आकार की है। पृथ्वी के
कांति अंशों पर आधारित विषुवत रेखा से दक्षिण की ओर 20 से 12 अंशॉ तक का
राशि का प्रभाव माना गया है। कुम्भ राशि
जन्मकुण्डली में चन्द्रमा जब कुम्भ राशि में हो, यानी जातक के जन्म के समय चन्द्रमा भचक्र के ग्यारहवें खण्ड (300-330) में हो तो जातक की जन्म राशि कुम्भ होती है। इस राशि का राशीश भी शनि ही है। पाश्चात्य ज्योतिष के अनुसार वे सभी जातक जिनका जन्म 22 जनवरी से 19 फरवरी के बीच हुआ हो-कुम्भ राशि के कहे जाते हैं।
कुम्भ राशि के जातक अपने परिश्रम से दूसरों का सहारा बनते हैं । सच पूछिए तो इनका जन्म ही अपने परिवार व सम्बन्धियों के लिए होता है। ये स्वभाव से उपकारी होते हैं तथा सतत् ऊंचा उठने का इनका मनोभाव रहता है। यद्यपि इनका जीवन संघर्षपूर्ण होता है और समाज के द्वारा भी ये प्रायः गलत समझे जाते हैं। परन्तु ये विश्वसनीय होते हैं। प्रायः बहुत आहत होने पर ये अध्यात्म की ओर प्रवृत्त हो जाते हैं। ये लोग गुप्त रहस्य छिपाने में माहिर होते हैं। अपने भी और दूसरों के भी।
कुम्भ राशि के जातकों में अन्तर्रेरणा भी काफी हद तक होती है। इनकी बुद्धि तीक्ष्ण होती है, भले ही ये दिखने में बुद्ध लगते हैं। ये कल्पनाशील व उदार होते हैं। भावनात्मक रूप से असंतुष्ट होने पर ये एकांतप्रिय हो जाते हैं। एकांत में उदास रहते हुए भी जब ये लोगों के बीच रहते हैं तो प्रसन्नचित्त व हंसते रहते हैं। इनका वैवाहिक जीवन सफल नहीं होता। ये लोग विपरीत लिंगियों से मित्रता करना पसंद करते हैं तथा अध्ययनप्रिय भी होते हैं। ये प्रायः लेखक, गणितज्ञ, ज्योतिषी, दार्शनिक, प्रोफेसर या आविष्कारक होते हैं। इनको वायु सम्बन्धी रोग होने की पूर्ण सम्भावना होती है। मकर राशि की तुलना में कुम्भ राशि वालों में आध्यात्मिक प्रगति की सम्भावना अधिक होती है। क्योंकि इनका राशीश शनिजो आध्यात्मिकता का कारक भी होता है-कुम्भ राशि में अपनी मूल त्रिकोण स्थिति में होता है। अतः अपनी दूसरी राशि मकर की अपेक्षा यहां विशेष प्रभाव देता है। शनि कुंडली में अशुभ हो तो जातक को रक्तचाप, फेफड़े, रक्त संबंधी रोग तथा नेत्र रोग भी सम्भावित होते हैं। इन लोगों की ’हाय’ भी प्रायः फलित होती है।
विशेषताएं
इसे अंग्रेजी में एक्वारियस (Aquarius) कहते हैं। कुंभ राशि पश्चिम दिशा में
जलकुंभ स्थानों पर निवास करनेवाली, क्रूर परंतु वृद्ध, शांत एवं स्थिर, काले रंग
के या नेवले की रंग की तमोगुणी, वायु तत्त्व की, दिनबली, जलचारी, त्रिपात
प्रकृति की, पुरुष जाति की नई खोजों में विश्वास करनेवाली, धर्मप्रिय, वैश्यजाति
कीशीर्षोदयी विषम राशि है। लंपट, द्यूतक्रीडा विशारद, वेश्यागामी एवं मद्यपी है।
इस राशि का निवास स्थान यवन देश है। इसका स्वामी शनि एवं अंक 8 है।
शरीर के पैर, दोनों जांघे, घुटनों के निचले हिस्से, आंखें, श्वास एवं रक्तसंचार ।
क्रिया पर इस राशि का प्रभाव रहता है।
पानी में पैदा होनेवाले पुष्प, फल, शंख, सीप, कोयला, काले उड़द, लोहा,
तेल, रेशम, विद्युत सामान इत्यादि कुंभ राशि के आधिपत्य में आते हैं।
मेदिनीय ज्योतिषशास्त्र में अबिसिनिया, स्वीडन, सूडान, जापान का कुछ
हिस्सा एवं हैम्बर्ग, पश्चिमी पाकिस्तान, अरब इत्यादि देश-प्रांतों का प्रतिनिधित्व
कुंभ राशि करती है।
नोटः धनिष्ठा नक्षत्र में जन्मे जातकों के लक्षण, व्याधियां एवं उनसे मक्ति
पाने के उपाय की जानकारी मकर राशि के परिच्छेद में देखें।
जातकों का भविष्य
"कंभ राशि के व्यक्ति क्रांतिकारी लेखक, दार्शनिक, वैज्ञानिक, बड़े उद्योगों से
संबंधित एवं अध्यापक, प्राध्यापक, इंजीनियर होते हैं। ठिगने कद के तथा असमय
सिर के बाल सफेद होते हैं।
चरित्र संदेहास्पद, स्वार्थी, परस्त्रीगामी, एक से अधिक विवाहों के कारण
वैवाहिक जीवन अस्तव्यस्त,सुगंधित पुष्पों के शौकीन, जीवन में हमेशा चढाव-उतार
देखनेवाले, ज्योतिषशास्त्र में अच्छी सूझ रखनेवाले, इनके द्वारा की गई अनिष्ट
भविष्यवाणियां सच होती हैं।
कंभ राशि की महिलाएं सुंदर किंतु उग्र स्वभावी होती हैं। दूसरों पर शासन
करने की आदत इनमें रहती है। घर के लोगों की अपेक्षा दूसरों की बात माननेवाली
एवं खर्चीले स्वभाव की होती हैं।
जातकाभरण के अनुसार
कुंभ राशि के व्यक्ति दान-धर्म के कार्यों में अगुआ रहते हैं। इनकी भाषा मधुर
एवं कर्णप्रिय होती है। शारीरिक स्वस्थता मध्यम रहती है। जैसे-जैसे आयु बढ़ती है
वैसे इनका जीवनयोग भी बढ़ता जाता है। संतान सुख के विषय में उदासीन रहते
हैं। दो विवाह होते हैं। ऐसे जातक मध्यम धनवान नहीं होते। दाएं हाथ पर कोई
चिह्न अवश्य पाया जाता है।
जन्म से प्रथम वर्ष में शारीरिक कष्ट एवं 5वें वर्ष में दुर्घटना योग या अग्निभय
रहता है। 12वें वर्ष में सर्पभय या विषभय रहता है। 28वें वर्ष में चोरी से नुकसान
होता है। आयु नब्बे वर्ष की रहती है।
अनुभवसिद्ध फलित
कुंभ राशि के लोगों को जीवन में अनेक समस्याओं से जूझना पड़ता है।
समस्याओं का हल निकले बगैर वे और उलझ जाती हैं। ऐसे समय में कोई भी
मदद के लिए नहीं आता।
भोग-विलास में काफी खर्च होता है। परिवार से अनबन रहती है। संतान
विषयक चिंता से हमेशा ग्रस्त रहते हैं। नौकरी में वरिष्ठ अधिकारियों से कष्ट प्राप्त
होते हैं। कोर्ट-कचहरी के कामों में पराजित होना पड़ता है। सफेद एवं नीले रंग
भाते हैं। परस्त्री या परपुरुष के प्रति आकर्षण रहता है। लोहा, स्टील, अध्यात्म,
तत्त्वज्ञान, ज्योतिष, अध्यापन, वकालत, राजनीति, डॉक्टरी, पॉलिसी कार्य में तथा
न्याय विभाग, प्रिंटिंग प्रेस, फोटो स्टूडियो, मेडिकल स्टोर्स इत्यादि व्यवसायों में
सफलता प्राप्त होती है।
प्रतिकूलता
• हर वर्ष का अगस्त मास।
• हर मास की 5,10,15,30 तारीखें।
• मंगलवार।
• सफेद, पीला रंग, इन रंगों के वस्त्र एवं अन्य चीजें।
• वृषभ, कन्या, मकर राशि के स्त्री-पुरुष।।
जीवन की महत्त्वपूर्ण घटनाएं
___ कंभ राशि के व्यक्तियों को अपने जीवन में काफी संघर्ष करना पटना
उतार-चढ़ावों से गुजरना होता है। कुंभ राशि का रक्षक एवं स्वामी ग्रह पर
इसी शनि ने अपने पिता सूर्य को भी उनके सारथी एवं घोड़ों के साथ कला
लिए अधा बना दिया था। भगवान शकर का भा इसक भय से कुछ देर के लि
कैलाश पर्वत में छुपना पड़ा था। कुभ व्यक्तियों का सुख-दुख का दाता, रक्षक-भक्षक
शान हा है। शनि का पाड़ा स छुटकारा पाकर अपना जीवन सुखी बनाने के लिए
शनिवार को अंधों और अपाहिजों को भोजन खिलाएं। हनुमान कवच एवं बजरंगवाण।
का पाठ करें।
कुम्भ राशि का शास्त्रीय स्वरमय
अलसतासहितोऽन्यसुतप्रियः कुशलताकलितोऽतिविचक्षणः
कलशगामिनि शीतकरे नर प्रशमिता शमितोह रिपब्रज
कुम्भ राशि के जातकों में श्रम की कमी और आलस्य की अधिक
रहती है। दूसरों के बचों को पर्यास स्नेह देते है। अत्यन्त दर यस
के प्रभाव से अपने शत्रुओं को परास्त करते रहते हैं। (इनकी यो
सरकार और जनता के मध्य एक सशक्त मूत्र का कार्य कर सकती
प्रच्छन्नपापों घटतुल्यदेहो विधातदक्षोऽध्वसहोऽस्यवित्ता
लुब्धः परार्थी क्षयवृद्धियुक्तो घटोद्भव: स्यात्रियगन्धपुष्पा
इस प्रमाण के अनुसार कुम्भ राणि के व्यक्ति अपने जीवन में
गोपनीयता को अधिक महत्व देते हैं, इनके मन में क्या भावना होती
हैं? क्या सोचते हैं? और क्या करते हैं? इसका आभास जल्दी किसी की
नहीं लग पाता। अपनी योजनाओं को छिपाकर क्रियान्वित करना इनके
जीवन का अहम लक्ष्य होता है। आमदनी चाहे जितनी भी कर
किन्तु आर्थिक मामलों में स्थिरता संदिग्ध रहती है। (यहाँ यह काना
असंगत न होगा कि कुम्भ राशि के जातक द्वारा कभी-कभीमा
महत्त्वपूर्ण कार्य भी सम्पन्न हो जाता है कि देश-विदेश तक इनकी
ख्याति प्रसारित हो सकती है। व्यक्तित्व में प्रभाव, वाणी में और
लेखनी में क्रान्तिकारी दृढ़ता या दूसरों को अनुकूल बनाने का दाँव-पेंच
इन्हें प्राप्त रहता है। एकाधिक विवाह होने की स्थिति में दाम्पत्य-जीवन
किसी कारण से कलुषित बन जाने का दुर्भाग्य इन्हें देखना पड़ता है।)
लोभ-संवरण की शक्ति कमजोर रहती है, कुछ भी देखकर तुरन्त
लालायित हो जाना और पसन्द आयी वस्तु को हठात् हासिल करता
इनका स्वभाव होता है। दूसरों के धन को पाने का इरादा रखते हैं,
कामयाबी कम ही प्राप्त हो पाती है। ऐडजेस्टेबुल-नेचर होने के कारण
स्वभाव की नम्रता और चेहरे की सौम्यता क्रमशः कम होने लगती है।
घरेलू जीवन की अपेक्षा बाहरी जीवन में प्रभुत्व वर्चस्व-अधिकार पाने
की इच्छा प्रबल होते हुए भी सफलता कम ही मिलती है। ज्यादा से
ज्यादा दौड़-धूप और परिश्रम करने के अभ्यस्त होते हैं। अपनी मनोरथ-
सिद्धि के लिए प्रत्येक संभव उपाय और प्रयल करते हुए भी किसा का
हित अथवा अहित का जरा भी विचार नहीं करते। जाने-अनजानमा
इनके द्वारा दूसरों को चोट पहुँचती है। इनके शरीर की बनावट कुछ
विचित्र और अटपटी-सी होती है। सुगन्धित फूलों एवं अन्य सुगंधित
के शौकीन-मिजाज होते हैं। इनके जीवन में आर्थिक स्थिति
रस्तर उतार-चढ़ाव के परिवेश में कभी भयग्रस्त तो कभी वृद्धिगत
ती है। (ये लोग यदि किसी सर्विस में हों तो कुछ अधिकारी वर्ग इनसे
और इनके व्यवहार से कुछ अधिक ही प्रसन्न रहते हैं। आलस्य से
अचना, भरसक पूर्ण परिश्रम करते रहना, पराये धन के प्रति लोभ का
करण करना, स्वकीय श्रमोपार्जित द्रव्य-संचय में प्रयत्नशील रहना
ज्योतिषशास्त्र की दृष्टि से इनके लिए अनिवार्य शिक्षा है।॥२॥
कुम्भ राशि वाली महिलाएँ
कुम्भः कुम्भलग्ने वा जाता क्रूरा कुलाग्रजा।
वातपित्ताधिका सुष्ठु नासिका बहुकिंकरी ।।३।।
व्ययशीलाऽन्यसंसक्ता स्वकुटुम्बविरोधिनी ।
मियते वमनाद्वापि कफाद्वा जठरामयात् ॥४॥
कम्भ राशि (लग्न) की महिलाएँ सुन्दर एवं तेज मिजाज की होती
हैं। अपने वंश-परिवार में श्रेष्ठता प्राप्त करती हैं, हुकुम चलाने की आदत
अधिक होती है। किसी से शीघ्र मैत्री स्थापित करने का गुण होता है,
मगर दूसरों की अपेक्षा अपने लोगों की बातों को कम महत्त्व देती हैं और
कभी-कभी तो अपने ही लोगों का विरोध कर बैठती हैं। उन स्वभाव
होता है। खुले हाथ खर्च करने की आदत होती है। वात-पित्त-प्रकृति-
संज्ञक होती हैं। वमन-कफ अथवा उदर रोग से मृत्यु होती है॥३-४||
जातकाभरणोक्त चन्द्र-निर्याणाध्याय के अनुसार-
दाता मिष्ठान्नभोक्ता च धर्मकार्येषु सत्वरः।
प्रियवक्तृत्वसंयुक्तो नरः क्षीणकलेवरः ॥५॥
कुम्भ राशि के व्यक्ति अधिकांशतः दान के कार्यों में आगे रहनेवाले व
मिष्ठान्न के प्रेमी होती हैं। धार्मिक कार्यों के सम्पादन में सदैव बढ़-चढ़कर
भाग लेते हैं। इनकी भाषा मधर और कर्णप्रिय होती है। स्वास्थ्य साधारण
ही रहता है। उत्तरोत्तर स्वास्थ्य क्षीणग्रस्त भी होता है।।५।।
स्वल्पापत्यो द्विभार्यश्च कामी द्रव्यविवर्जितः।
वामहस्ते भवेल्लक्ष्म पीडा प्रथमवत्सरे ॥६॥
सन्तान-सुख के मामले में उदासीन होता है। स्वल्प सन्तान का सुख पाते
इन्ह २ विवाह का संयोग प्राप्त होता है। भोग-विलास में इनकी विशेष
रहता है। ज्यादा धनी नहीं होते। बायें हाथ में चिह्न संभव रहता है।
म वर्ष में इन्हें कुछ शरीर-कष्ट का सामना भी करना पड़ता है॥६॥
जीवन-भावप्प
पंचमेऽग्निभयं विद्यादथ द्वादशवत्सरे ।
व्यालाद्वा जलतो भीतिरष्टाविंशतिमे क्षतिः ॥७॥
५ वर्ष की आयु में किसी ज्वलनशील पदार्थ अथवा आग से दुर्घटनाग्रस्त
होने की संभावना बनती है। १२ वर्ष की आयु में विषाक्त जीव या सर्प
से सावधान रहना आवश्यक होता है। आयु क्रम के २८ वे वर्ष में-||७||
चौरेभ्यः भवेदायुर्वर्षाणां नवतिर्बुवम् ।
भाद्रे मास्यसिते पक्षे चतुर्थ्याम् शनिवासरे ॥८॥
भरणीनाम नक्षत्रे गृणन्ति मरणं नृणाम् ।
एवमुक्तं मुनिश्रेष्ठैश्चन्द्रे जन्मनि कुम्भगे ॥६॥
किसी चोरी की आशंका बनती है जिससे हानि का कुयोग होता है।
ऐसे जातकों की सम्पूर्ण आयु ६० वर्ष होने का उल्लेख है। भादों का महीना
कृष्णपक्ष ४ तिथि एवं शनिवार का दिन भरणी नक्षत्र का योग होने पर
इनके मरणकी संभावना बनती है, ऐसा शास्त्रकारों का वचन है।।-ll
___पाद-टिप्पणी के रूप में प्रसंगानुसार यह कहना अनुचित न होगा कि इन
कुम्भ राशि के जातकों को बनपन में शीतपित्त, जुलपित्ती, चेचक, निमोनिया
एवं युवावस्था में आमाशयिक विकार, अम्लातिसार, गले का विकार, नेत्रपीड़ा,
कर्णशूल, मलेरिया और वृद्धावस्था में उदरशोथ, अन्त्रावरोध, बद्धोदर स्तब्धता,
मूर्च्छता, त्वचा-रोगादि की सम्भावनाएँ रहती हैं, इनसे आयु-आरोग्य-रक्षार्थ ।
तत्परता अनिवार्य होती है। कालजयी श्रीमहामृत्युंजयादि-जपानुष्ठान करने
कराने पर आयु की पूर्णता निश्चित है, अन्यथा असमय में ही काल-कवलित
होने का दुर्भाग्य देखना पड़ता है। ये लोग अपने अभ्युदय-काल में भले ही इच्छित
कार्य की सफलता प्राप्त कर लें, अन्यथा अनुकूल समय की वांछनीय उपयोगिता
को ही ये लोग तिरस्कृत कर बैठते हैं। या तो समय को पहचानने की क्षमता
नहीं होती, या फिर समय का दुरुपयोग करने में अभ्यस्त होते हैं। और अब,
ग्रहपीड़ोपशमनार्थ रत्नाभरणोक्त उपचार का परामर्श दिया जाता है-
कुम्भलग्ने क्षये दोषो शतरुद्री शताक्षरा ।।
सम्पुटीकरणे नैव सोमो मुक्त क्षयामयात् ॥१०॥
कुम्भ (लग्न राशि के जातक ज्यादातर राजरोग (क्षय-रक्तचाप-
अन्त्रवृद्धि आदि) से पीड़ित हो सकते हैं। एतदर्थ इन्हें शताक्षरा गायत्री
और प्रयम्बक मन्त्र से सम्पुटित शुक्लयजुर्वेदीय महा रुद्राष्टाध्यायी का
१२१ पाठ कराना चाहिए, इसे 'शतरुदी' पाठ कहते हैं। कुछ विद्वान
'लघुरुद्र प्रयोग से भी सम्बोधित करते हैं। एकमात्र यही उपाय प्रत्यक
तीसरे वर्ष कराते रहने पर सम्पूर्ण व्याधियों से मुक्ति मिलती है। दैनिक
और मंगलमय वातावरण पाने की इच्छा रखनेवाले लोग आस्थापूर्वक
मानांकित मंत्र का १०८ बार (एक माला) जप प्रतिदिन करें-।।१०।।
ॐ श्रीं उपेन्द्राय अच्युताय नमः।
अपने जन्म-दिन या विवाह-तिथि पर किसी कृष्णवर्ण वृद्ध ब्राह्मण
हनी कम्बल का दान करते समय निम्नलिखित मन्त्र को १२ बार
पढने से वर्ष-पर्यन्त आरोग्यता प्राप्त होती है।
-ॐ ऊर्णकम्बलदानं च सर्वक्लेशनिवारणम् ।
ऊर्णदानेन सन्तुष्टः प्रीयताम्मे जनार्दनः ॥११॥
कुम्भ राशि का स्वानुभूत जीवन-फल
आकाशीय सभासदों के बीच कुम्भराशि का स्वरूप निम्नोक्त है-
कम्मोपदोना दिनमध्यसंग प्रसूः स्थिर: कर्बरवन्यवायः। स्निग्धोष्ण-
खण्डस्वरतुल्यधातुः शूद्रः प्रतीचीविषमोदयोग्रः।।
अनेक समस्याओं और उलझनों में परेशान रहने के कारण आपका जीवन
कोई ज्यादा सुखमय नहीं कहा जा सकता। बहुत दिनों से चले आ रहे संघर्षों
के समाप्ति की आशा जब भी आप करेंगे, तब वह संघर्ष और वह परेशानी
घटने के बजाय उगते हुए सूरज के किरणों की तरह अपने आप बढ़-चढ़कर
चारो ओर से घेर लेगी, उसमें आप छटपटायेंगे, रोयेंगे, और घुटन महसूस
करेंगे, मगर कोई मददगार या कोई साथी उस वक्त काम नहीं आयेगा। स्वामी
शनि, शूद्र वर्ण, वायु तत्व, मध्यम प्रकृति, स्थिर संज्ञा, गर्म स्वभाव, दान-
पुण्य-धर्म एवं पूजा-पाठ कृत्यों में रुचि, कृतज्ञ, पशु-पक्षी से प्रेम, कृपण, शुभ
एवं चंचल दृष्टि, कड़ा दिमाग, मन और बुद्धि में उत्तम व्यवहार व प्रेम से
हीन, पैसे-पैसे जोड़कर इकट्ठा करेंगे। दानी, भोग-विलास में तेज, शक्तिमान
और निर्भय व्यक्ति आप होंगे। आपको अपने जीवन में दो या तीन बार शल्य
चिकित्सा (Operation) करना-कराना होगा। परिवार से खटपट, लेखन-
कार्य तथा हस्त-कला के व्यवसाय में और सन्तान के मामले में सदैव चिन्तित
रहना होगा। सर्विस के क्षेत्र में अधिकारियों का भय एवं कानूनी विवाद से
सदैव कष्ट भोगना पड़ेगा। स्वार्थी और लालची दोस्तों की भरमार रहेगी।
रुपये-पैसे की कमाई ज्यादा होगी. फिर भी खर्च की अधिकता से कर्ज की
भरमार हमेशा बढ़ी-चढ़ी रहेगी। कमाई अच्छी-खासी होते हुए भी आप
कभी-कभी पैसे-पैसे के लिए मुहताज हो जायेंगे, मगर उस वक्त कोई मददगार
तयार नहीं होगा। धन-दौलत बहुत ज्यादा कमायेंगे, मान-प्रतिष्ठा भी कम
नहीं रहेगी, मगर कभी-कभी बना-बनाया काम भी बिगड़ जायेगा। कदाचित्
आपकी स्थिति ऐसी हो जाया करेगी कि व्यापारिक कार्यों के लिए आप परेशान
हो जायेंगे। स्वभाव शरारती, चंचल मन और चारो ओर दौड़ता हआ
कभी-कभी धन-प्राप्ति का मार्ग भी चौपट कर दिया करता है। विद्या
में कोशिश करें तो बहुत ज्यादा सफलता मिलेगी, मेहनत कम करने पर
के क्षेत्र में आप बिल्कुल असफल रहेंगे। १५ से २७ वर्ष तक शादी के
पाये जाते हैं। पति-पत्नी का पारिवारिक सुख-सम्बन्ध यों तो सुन्दर ही रहे।
मगर झगडे और कलह भी हो जाया करेगा। आप रुपये-पैसे और इज
कमाने के मामले में जी-तोड़ मेहनत करेंगे। सफेद और हल्के नीले रंग
पदार्थ आपको ज्यादा प्रिय होंगे। प्रायः आप अपने जीवन में रईसी अब
मनोरंजन के कार्यों में अधिक खर्च करना पसन्द नहीं करेंगे। सफाई और सादगी
में विशेष रुचि रहेगी। स्वाभिमान, बचत और इज्जत के लिए आप मर-मिटने
वाले व्यक्ति होंगे। अपनी जिन्दगी में सट्टा-जूआ के नतीजे पर आप गहरी
हानि भी उठा सकते हैं, जो कुछ लाभ होगा, उससे कुछ भी आप सन्तुष्ट नहीं
होंगे। प्रायः खर्च करते समय आप कुछ सोचते-विचारते नहीं, उतावले होकर
अनायास फूंक-ताप स्वाहा कर देते हैं, बाद में पश्चात्ताप ही करना पड़ता
है। आप अपनी जिन्दगी में एकाएक बहुत धनी भी बन सकते हैं, मगर
धनसंग्रह के मामले में आप ठंढ़े रहेंगे। छोटी-मोटी बातों पर क्रोधित हो
जाने का स्वभाव बना रहेगा। अगर आप जल्दी-जल्दी यात्रा करने और जगह
बदलने में दिलचस्पी रक्खें तो बहुत बड़ा धन-लाभ कर सकते हैं। सन्तान
के पक्ष में आपको प्रायः दुःख और चिन्ता ही हाथ लगेगी। शनिवार का दिन
ज्यादा लाभदायक है। अगस्त का महीना ५,१०,१५, ३० तारीखें और
मंगलवार का दिन आपके लिए हमेशा घातक है, अतः इन दिनों आप जो
भी कार्य करेंगे, उसमें नुकसान उठायेंगे। जन्म से २१ वर्ष की उम्र तक का
समय कुछ अच्छा और कुछ खराब बीतेगा। विद्यार्जन, जमीन, जायदाद, बुद्धि
का विकास, शरीर की विभिन्न बीमारियाँ, परिवार से कष्ट तथा चापलूसी और
चालाकी आदि नेष्ट घटनायें होती ही रहेंगी। अधिक संकट यदि आ भी जाय
तो टल जायेगा। फालतू खर्च की ताकत बढ़ी-चढ़ी रहेगी। २२ से ४० वर्ष
तक जायदाद, धन और परिवार बढ़ता ही रहेगा। अधूरे कार्य पूर्ण होंगे और
आपके नसीब का सितारा चमकेगा, कहीं से उत्तराधिकार में अधिक धन भी
प्राप्त हो सकता है। आपका स्वास्थ्य सुन्दर रहेगा, कदाचित् बीमारियों से ।
परेशान भी रह सकते हैं। आप अपने उत्साह के साथ आगे बढ़कर कारोबार-
नौकरी-मान-प्रतिष्ठा आदि हर क्षेत्र में काफी तरक्की प्राप्त करेंगे। ४१, ४२
और ४३ वर्ष की उम्र में लोहा-लकड़ी आदि कठिन अस्त्र-शस्त्रों से आपका
भयानक चोट पहुंचेगी। कमर और कन्धों पर अनायास चोट लग सकता है।
आकस्मिक दुर्घटना, पारिवारिक सदस्यों की मृत्यु, यथासम्भव आपको भा।
मृत्युतुल्य कष्ट भोगना पड़ेगा। ४४ से ६७ वर्ष तक का समय मनमुताबिक
जीवन-भविष्य-दर्पण
१४१
भाग्योदयकारक है। आपकी-धाक और प्रभाव गैर लोगों पर पड़ेगा, इस
वस्था में भी आप ज्यादा मेहनत करेंगे, अदालती और व्यापारिक कार्यों का
नया ज्यादा रहेगा। लोहा, कोयला, यातायात के व्यापार में आपकी यदि
दिलचस्पी हो तो करके आजमाइये-पूर्ण उन्नति करेंगे। ६८ से ७१ वर्ष तक
असाध्य रोगों से बहुत ज्यादा परेशान हो जायेगे। यथासम्भव Haemorrhage,
Blind, Leprosy or Sunstroke नामक बीमारी भी हो सकती है, इन
बीमारियों पर दवा-दारु कुछ भी काम नहीं करेगा, केवल अनुष्ठान और यज
करने से रक्षा हो सकती है। ७०-७१ की अवस्था में आपकी मृत्यु होनी
चाहिए। कुम्भ राशि वाली स्त्रियाँ प्रायः खूबसूरत, अच्छे कामों में रुचि रखने
वाली, दान-उपकार, घर-गृहस्थी के संचालन और सन्तान-पालन में निपुण
होती है। जिन दुश्मनों के पास वे चली जाये तो दुश्मनों पर विजय प्राप्त कर
लेती हैं, मगर कभी-कभी ज्यादा क्रोध में महाकाली का रूप भी धारण कर
लेने वाली होती हैं। सहनशक्ति का अभाव रहता है।
यदि आपकी कुम्भराशि है तो आपकी सेवा-भावना बलवती होगी। अपने
जीवन में अनेक प्रकार का उतार-चढ़ाव अनुभव करेंगे। सुन्दर चेहरा,
विद्याव्यासंगी, बड़े-बड़े अंगों से संयुक्त ऊँचा शरीर, कामकाज करने में चतुर,
बुद्धिमान्, पराई स्त्री के बन्धन से पीड़ित, कठोर कर्म में रुचि, सुगन्धित पदार्थ
से प्रेम, जूआ-सट्टा-लाटरी-शेयर्स और घुड़दौड़ वगैरह में रुचि, कठोर हृदय,
भाई-बहनों से प्रेम का अभाव, साम्पत्तिक हैसियत कमजोर, परन्तु उद्योग
द्वारा सम्पत्ति बढ़ाने की क्षमता, नशीले पदार्थों का सेवन, सन्तति-सुख में
बाधा, छोटी-छोटी बातों से नाराज होने तथा दिल तोड़ने की आदत और
कभी-कभी विचाररहित होकर कोई भी काम कर डालने की आदत कुम्भराशि
का लक्षण है। जीवनपर्यन्त आपके निरन्तर अथक परिश्रम से भूमि-भवन-
वाहन और व्यापार सम्बन्धी कुछ महत्त्वपूर्ण कार्य सफल होगा। आपके
कठिनतम समस्याओं का निर्णय के करने लिए आपकी पत्नी का परामर्श
कारगर होगा, क्योंकि पत्नी के स्वभाव में सर्वश्रेष्ठ और आधारभूत न्याय
का समन्वय है, भले ही आप उसे गलत समझें या पत्नी के परामर्श को न
मान, यह आपकी गलती है। वाद-विवाद, चिकित्सा-कर्म, बौद्धिक विकास
आदि में सहायक होते हुए भी प्रगति की दृष्टि से कुम्भराशि अच्छी नहीं है।
आपके शरीर में पैर के रोग, पाचन-संस्थान की गड़बड़ी, पेशाब के रोग, जल्दी
यकावट आदि से कभी-कभी पीड़ित रहना पड़ेगा। बच्चों को पसली चलने
आरोग हो सकता है। प्रतिवर्ष अगस्त मास, प्रातमास,१०, १५,३०
राख, मंगलवार का दिन, वृष, कन्या, मकर राशि वाल व्यक्ति, सफेद व
पाला रंग के वस्त्रादि पदार्थ आपके लिए ठीक नहीं ह। सेवावृत्ति की भावना
स अनुप्राणित व्यक्ति आप हैं- आपकी सेवा-भावना लोक-प्रसिद्ध होगी।
आपकी राशि का स्वामी वही शनि है, जिसने कुछ समय तक सारथी
व अश्वसहित अपने पिता सूर्य को अन्धा बनाया, भूतभावन श्रीभगवान
शंकर को भी क्षण भर के लिए कैलाश में छिपने को बाध्य किया। आपके
जीवन में शनि का भरपूर प्रभाव है, आपके सभी सुख-दुःख का दाता, रक्षक
और भक्षक शनि है। अतः शनिवार के दिन अन्ध-पंगु को कृष्णान्न-दान,
शूद्रवर्ण का नीलम अथवा एकमुखी श्रीहनुमतकवच निर्माण कराकर धारण
करना उत्तम होगा, बजरंग बाण का नित्य पाठ भी शुभफलदायी है।
कुंभ
यह विषम, पुरुष एवं स्थिर राशि है। तत्त्व वायु तथा स्वभाव क्रूर है। जाति शूद्र
एवं पश्चिम दिशा को सूचित करती है। रंग स्याह तथा प्रभाव उष्णतर है । यह दिन वली
तथा इसका विचरण स्थान वन है। इसका स्वामी ग्रह शनि है।।
कुंभ राशि वाले जातकों का रंग साफ, गोरा, कद लम्बा तथा बढ़िया एवं आकर्षक
होता है । इनके दांत कुछ खराब होते हैं परन्तु ये सुन्दर रूपवान होते हैं। काले बाल तथा
चेहरा गोल होता है। कई का कद औसत भी होता है।
ये एकांतप्रिय होते हैं। धैर्यवान एवं परिश्रमी, इच्छाशक्ति मजबूत व प्रबल होती
है। ये होते तो बड़े समझदार हैं परन्तु इन्हें बात को समझाने में कुछ विलम्ब होता है।
एक बार जब ये समझ लेते हैं तो उसको ये पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ाते हैं।
। कोई भी काम हो ये पूर्ण सोच-विचार के साथ ही निर्णय लेते हैं। इनका चरित्र बडा
ही अच्छा होता है तथा स्वभाव कुछ गम्भीर होता है। ये सोचते रहते हैं। कई बार एकांत
में ये अन्तर्ज्ञान में लीन हो जाते हैं इस प्रकार इनकी अन्तर्ज्ञान की बड़ी शक्ति होती है।
चूंकि ये गम्भीर स्वभाव के होते हैं अत: इनके मेलजोल का क्षेत्र कम होता है। ये
चापलूसी पसन्द नही करते और न ही इन पर इसका कोई प्रभाव होता है। ये अपने
सिद्वान्तों पर दृढ़ रहते हैं। सोसायटी, सभा में हर बात बड़ी नाप-तोल कर करते हैं तथा
लोग इनकी बात बड़े ध्यान से सुनते हैं। ये हर काम बड़ी मेहनत के साथ करते हैं तथा
गूढ़ ज्ञान समझने का प्रयास करते हैं । एकांत इनको बहुत प्रिय है। कई बार इनका लग्न
इन्हें साधु-स्वभाव बना देता है तथा ये महापुरुष कहलाते हैं। इनमें बलिदान की भावना
होती है। एक मतानुसार ये निम्न वृत्ति के तथा चुगली करने वाले होते हैं।
भाई-बहनें इन जातको की होती हैं। साधारणतया भाईयों में ये बड़े होते हैं। यदि
ये छोटे भाई हों तो भी इन्हें बड़े भाई का सा आदर-सम्मान देते हैं। साधारणतया यह
देखा गया है कि इनके भाई-बहन कम ही होते हैं तथा उनसे प्रेम कम ही होता है। यह
अपने गम्भीर स्वभाव के कारण होता है। यदि इस राशि अथवा ग्यारहवें घर जोकि इस
राशि का प्राकृतिक क्रमानुसार घर है, बुरे ग्रह शनि, राहू, मंगल आदि हों तो पिता को ।
कष्ट होता है तथा धन का नुक्सान होता है।
गूढ़ ज्ञान में ये बड़ी लग्न रखते हैं। पढ़ाई पूरी मेहनत से करते हैं तथा कई बार
पढ़ाई में रुकावटें आती हैं पर ये सफल हो जाते हैं। विज्ञान में इनकी पूरी लग्न हा
है। गुप्त विद्या, ज्योतिष, यन्त्र, मन्त्र आदि के माहिर होते हैं।
विवाह कुछ देर से होता है फिर भी विवाह 29 वर्ष 6 महीने का आयु तक हो
जाता है। जातक की पत्नी जातक पर कुछ हावी होती है तथा होशियार होती है। पहली
सन्जान लड़की एवं कभी जुड़वा सन्तान भी हो सकती है। पत्नी को कष्ट भी झेलना
पड़ता है। बच्चों का स्वास्थ्य भी उतना अच्छा नहीं होता तथा उनको पालने हेतु परेशानी
झेलनी पड़ती है एवं बड़ा परिश्रम करना पड़ता है।
इनके मित्र कम ही होते हैं। किसी के साथ स्थाई मैत्री कम ही होती है। बाहर से |
मित्र प्रतीत होने वाले भीतर से इनके साथ शत्रुता रखते हैं। ये अपने प्रेम के सच्चे व
पक्के होते हैं परन्तु ये दिखावा नहीं करते, अत: इनके मित्र कम ही होते है।
__यात्राएं बड़ी होती हैं। इन यात्राओं से इन्हें कष्ट ही महसूस होता है तथा लाभ कम
ही होता है। यदि कोई कुछ कह दे तो मन बड़ा दुखी होता हैं।
भाग्य में बड़े उतार-चढ़ाव आते हैं। बड़े लोगों की सहायता मिलती है एव लाभ
भी मिलता है। पिता की ओर से पूरी सहायता एवं धन प्राप्त होता है। ये जातक
कठिनाईयों में से गुजर कर समाज में अच्छा स्थान प्राप्त करते हैं तथा सम्मान पाने में
सफल होते हैं। ये बड़े परिश्रम के साथ काम करते हैं। ये किसी भी कारोबार में लगें,
सफल होते हैं। ये सरकारी, अर्द्व सरकारी अथवा किसी संस्थान में नौकरी करते हैं एवं
उच्च पद भी प्राप्त करते हैं। ये सफल ज्योतिष, फिलॉस्फर, कर्मकाण्डी, अध्यापक,
प्रोफैसर, वैज्ञानिक, डॉक्टर आदि सफल होते हैं। जीवन में 2, 4,8,9,10,15, 16,
19,21, 22, 23, 24, 26, 28, 31, 33,35, 38, 42, 44, 45,53, 62, 65 आदि
वर्षो, आयु में पढ़ाई, कारोबार, विवाह, सन्तान, तरक्की, उन्नति आदि सम्बन्धी महत्वपूर्ण
घटनाएं होती हैं।
__इस राशि का प्रभाव टांगो तथा टखनों आदि पर होता है। खून का बहाव, आंखों
की दृष्टि एवं श्वास आदि इसके अधिकार क्षेत्र में ही आते हैं। जीवन में इनके कष्टों
का भय रहता है। वाहन से चोट का डर, कंठ रोग, टौंसिल, दमा, खांसी, सिरदर्द, ब्लड
प्रैशर आदि की आशंका रहती है। दांतों की तकलीफ भी कई बार सताती है।
__ शनिवार का दिन, आठ की संख्या, चार की संख्या भी एवं काला रंग, हल्का।
पीला तथा बैंगनी रंग भी शुभ फलदायक है।
इनको नीलम धारण करना शुभ रहता है। धन एवं सम्मान के लिए पीला पुखराज
अथवा चन्द्रमणि भी धारण किए जा सकते हैं।
कुम्भ राशिका परिचय
के गुण व स्वभाव कलश के गुण व स्वभाव के अनुरूप ही होते हैं।
कुम्भ राशि वाले व्यक्ति का चेहरा गुम्बकीय आकर्षण से युक्त होता है।
उसके सम्पर्क में आने वाले लोग उसकै अनुयायी बन जाते हैं। ऐसे व्यक्ति अयन
नेतृत्व सम्बन्धी गुणी कै कारण भी प्रशंसकों की संख्या बढ़ाने में सफल हो जाते हैं।
पैसे व्यक्ति को अपने जीवन में बहुत से उतार-चढ़ाव देखने पड़ते हैं क्योंकि भाग्य
कभी उत्कर्ष पर होता है तो कभी अपकर्ष पर उतर आता है। ऐसा समय सटा
चिन्ता में व्यतीत होता है।
लेकिन जीवन में मित्रों का सहयोग मिलते रहने के कारण उनका उनति के
पथ पर बढ़ना भी सरल होता है। कभी-कभी लाभ के अवसर भी उनके जीवन में
आते रहते हैं। ऐसे व्यक्ति का स्वास्थ्य अक्सर खराब रहता है। उसे उटर विकार
की परेशानी रहती है। पैट में कब्ज बना रहता है । पेट में दर्द, अजीर्ण और मन्दाग्नि
आदि से पीडित रहने के कारण उसका स्वभाव भी चिड़चिड़ा हो जाता है।
राशिचक्र की ग्यारहवीं राशि का क्षेत्र 300 डिग्री से 330डिग्री
देशांतर पर्यंत नियत किया गया है। पृथ्वी पर विषुवत रेखा से दक्षिण
में 20 से 12 अंश तक इसका स्थान माना जाता है। अंग्रेजी में इसको
'एक्वाइरियस' कहते हैं। यह राशि धनिष्ठा, शतभिषा, और पूर्व
भाद्रपद नक्षत्रों को मिलाकर बनी है, जिसके स्वामी क्रमशः मंगल,
राहु और बृहस्पति है। इस राशि का स्वामी ग्रह शनैश्चर है। कुंभ राशि को प्रायः सभी
देशों में जलवाहक का रूप प्राप्त है, अतः कुंभ के सूर्य को वसंतागमन से पूर्व अपने मधु
रस घट से अल्पकालीन वृष्टि के लक्षणों को प्रकट करने का परिचायक माना जाता है।
यह राशि अंततः स्वामिभक्ति, धर्मप्रियता, विचारशीलता एवं राजभक्ति की भी परिचायिका
मानी जाती है।
यह लघुकाय पुरुष राशि कंधे पर कलश धारण किए हुए, पुरुष के आकार की मूल
क राशि है। इसके अनेक नामों में कुंभ, घट एवं तोयधर आदि प्रमुख हैं।
यह राशि पश्चिम दिशा में जलक्रीड़ा-स्थली, स्वीमिंग पूल, समुद्र तट एवं दर्शनीय स्थलों
भवास करने वाली, क्रूर किंतु शांत एवं स्थिर स्वभाव की, वृद्धावस्था को प्राप्त कृष्ण वर्ण
अथवा नेवले के-से रंग की, तमोगुणी, वायु तत्व प्रधान, दिवाबली, मध्यम अथवा स्वल्प
संतान वाली, सुदूर देशों का भ्रमण करने वाली तथा परदेश प्रिय, जलचारी अथवा स्वल्प
कुटुम्ब वाली, वैश्य जाति की शीर्षोदय विषम राशि है। यह लंपट, यूतक्रीड़ा-विशारद,
वेश्यागामी एवं मयप राशि भी है।
कुंभ राशि का निवास यवन अथवा म्लेच्छों का देश, स्वामी ग्रह शनि, स्ववार-शनि
एवं भाग्यांक-8 है।
शरीर विज्ञान में यह कालपुरुष की पिंडलियों पर निवास करती है। इसके अतिरिक्त
नेत्र तथा श्वास एवं रक्त संचालन प्रक्रियाओं से भी इसका संबंध माना गया है।
राष्ट्र विकास एवं सामाजिक कार्यक्रमों का तथा वायुयान यात्रा और विदेश यात्रा आदि ।
का इस राशि से विचार किया जाता है। कुंभ राशि के द्रव्य विशेष-जल में उत्पन्न होने वाले
पुष्प, फल, फूल, शंख, कोयला तरल ईंधन, काली उर्द, लोहा, तेल, सिल्क, नाइलोन.
बिजली का सामान एवं सभी प्रकार के आधुनिक घरेलू भौतिक उपकरण एवं संप्रदाय,
चमत्कारिक यंत्र और मशीनरी आदि हैं।
लौकिक ज्योतिष में अबीसीनियां, स्वीडन, जापान का कुछ भाग, हेम्बर्ग, पश्चिमी ।
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पाकिस्तान, अरब राष्ट्र एवं जल टापू के मध्य बसे देशों का प्रतिनिधित्व इस राशि को प्राप्त
पूर्वी क्षितिज पर इस राशि के उदयकाल में अगर कोई जातक पैदा हो तो मध्यम कद,
मांसल, आकर्षक व्यक्तित्व, लम्बे दांत वाला, तीव्र बुद्धि का, महान, दार्शनिक, दयाल, सदा
परोपकारी, कार्यव्यस्त, सूक्ष्म दृष्टि रखने वाला, मिलनसार, प्रभावशाली, विस्तृत मित्र
समुदाय वाला, मित्र बनाने में निपुण, प्रगतिशील, विस्फोटक एवं क्रांतिकारी विचारधारा
वाला, उदार, रोचक वक्ता, साहित्यिक एवं हर्षल ग्रह नीच या शत्रुराशिगत हो तो जातक
दंभी, कामुक अपयश तथा लांछन प्राप्त करने वाला, गृहस्थ जीवन से दुःखी, उदण्ड एवं
शेखीबाज या अपने गुणों को प्रकट करने की अभिलाषा रखने वाला तथा शरीर से अस्वस्थ
रहता है।
कुंभ लग्न में पैदा हुए अधिकांश जातकों के शनि यदि शुभ स्थान में स्थित हों तो अधिक
भाग्य वाले, अचल संपत्ति के स्वामी, क्रांतिकारी, लेखक, दार्शनिक, वैज्ञानिक कार्यों से
संबद्ध, उच्चकोटि के व्यवसायों से संबंधित सुधारक, अध्यापक, प्राध्यापक, अनुसंधानकर्ता,
इंजीनियर, विद्युत, वायुयान तथा रेडियो, तकनीकी अथवा अर्द्ध तकनीकी कार्य के ज्ञाता,
कठोर परिश्रमी व्यक्तिगत अथवा निजी व्यवसाय से लाभ प्राप्त करने वाले होते हैं। इस
राशि के सामूहिक भाग्योदय कारक वर्ष 25,28,36एवं 43 होते हैं। ऐसे जातकों को वायु,
सिर एवं पेट दर्द अथवा उदर से संबंधित अन्य रोगों (कोष्ठबद्धता) की प्रायः संभावना रहती
है। निरंतर बाधाओं और थपेड़ों से खेलने वाले ऐसे जातक वृद्धावस्था में दार्शनिकता की
ओर अपना रूख कर लेते हैं। इनकी उन्नति एवं अवनति अप्रत्याशित रूप से होती है।
दूसरों की सहायता करने में ऐसे जातक सदैव तैयार रहते हैं। दाम्पत्य जीवन इस राशि वालों
का साधारण अथवा स्वल्प ही होता है। अधिकांश कुम्भगत जातक लघु आकृति के हृष्ट-पुष्ट
और प्रभावपूर्ण चेहरे वाले दिखाई देते हैं तथा किसी प्रकार की शारीरिक अथवा बाह्य
विशेषता से युक्त रहने वाले ऐसे जातक विशाल मस्तिष्क अथवा चौड़े ललाट वाले होते
सूर्य की स्थिति इस राशि पर फाल्गुन मास पर्यन्त रहती है। यह मास बसन्त का प्रथम
मास माना जाता है। अंग्रेजी कैलेण्डर के अनुसार, यह समय 15 फरवरी से 14 मार्च के
मध्य रहता है। सूर्य अगर लग्न में हो तो जातक जीवन में धनाभाव के कारण त्रस्त रहता
है और वह हृदय रोगी भी होता है, किन्तु कुम्भ राशिगत सूर्यक्षेत्री होते हुए भी इतना
हानिकारक नहीं माना जाता है। यह जातक को किसी-न-किसी प्रकार के कार्य में कुशल
अर्थात एक हुनरमन्द व्यक्ति अवश्य बना देता है। हां, चारित्रिक दृष्टि से ऐसा जातक
स्वार्थी, मित्रों को थोखा देने वाला, संशयी स्वभाव का, गूढ विद्याओं का ज्ञाता, मन्त्र-तन्त्र
सीखने की प्रबल इच्छा रखने वाला, विद्रोही विचारों से ओत-प्रोत और ओछे मनुष्यों का।
साथी अथवा भाग्यहीनों का साथी बनता है।
चन्द्रमा की स्थिति इस राशि पर प्रत्येक दो पक्षों में स्थूल रूप से सवा-दो दिन के लिए
300
रहती है। ऐसे समय में पैदा हुए जातकों की कण्ठ नलिका दीर्घ होती है। आवाज भी विशेष
मोटी एवं धाराप्रवाह रूप से बोलने की क्षमता रखती है। शरीर मध्यम अथवा ठिगने
आकार का होता है और शरीर में नसें उभरी हुई दिखाई दती हैं। इनके शरीर में
अधिकांशतः रोमावली अधिक होती है। ऐसे जातक सौन्दर्य प्रसाधनों एवं नवीन प्रकार
की वस्तुओं एवं वस्त्रों के विशेष प्रेमी, पर-स्त्री अथवा पर-पुरुष के प्रति आकर्षण रखने
वाले, कठोर परिश्रमी, परन्तु अधिकांश रूप से निर्धन रहने वाले, कम व्यय करने वाले,
कभी-कभी बहुत अधिक भाग्योदय तो कभी-कभी एकदम निराशाजनक स्थिति से गुजरने
वाले।ऐसे जातक बन्धु-बांधवों के प्रेमी, आलसी, धीरे-धीरे कार्य करने वाले, शिल्प अथवा
मैकेनिकल कार्य के जानकार, मानवता की सेवा में तत्पर, मित्र के व्यवहार से दुःखी एवं
दूसरे के धन को भोगने वाले होते हैं।
कुम्भ राशि की स्त्री-जातक भी प्रायः पुरुष आकृति (लम्बे कद) की, विकृत दन्तावली
वाली, मन मस्तिष्क के व्यवहार में कुशल, वाणिज्य, व्यवसाय एवं हस्तकला में प्रवीण और
अत्यधिक भावुक एवं विलक्षण बुद्धिमता वाली मानी जाती है।
कुम्भ राशि
जन्मकुण्डली में चन्द्रमा जब कुम्भ राशि में हो, यानी जातक के जन्म के
समय चन्द्रमा भचक्र के ग्यारहवें खण्ड (300°-330°) में हो तो जातक की जन्म
राशि कुम्भ होती है। इस राशि का राशीश भी शनि ही है। पाश्चात्य ज्योतिष के
अनुसार वे सभी जातक जिनका जन्म 22 जनवरी से 19 फरवरी के बीच हुआ
हो-कुम्भ राशि के कहे जाते हैं।
कुम्भ राशि के जातक अपने परिश्रम से दसरों का सहारा बनते हैं। सच पूछिए तो
इनका जन्म ही अपने परिवार व सम्बन्धियों के लिए होता है। ये स्वभाव से उपकारा
हात है तथा सतत् ऊंचा उठने का इनका मनोभाव रहता है। यद्यपि इनका जावन
सघर्षपूर्ण होता है और समाज के द्वारा भी ये प्राय: गलत समझे जाते हैं। परन्तु ये
विश्वसनीय होते हैं। प्राय: बहत आहत होने पर ये अध्यात्म की ओर प्रवृत्त हो जाते
है। ये लोग गुप्त रहस्य छिपाने में माहिर होते हैं। अपने भी और दूसरों के भी।
कुम्भ राशि के जातकों में अन्तर्रेरणा भी काफी हद तक होती है। इनका
बुद्धि तीक्ष्ण होती है, भले ही ये दिखने में बद्ध लगते हैं। ये कल्पनाशील व उदार
होते हैं। भावनात्मक रूप से असंतुष्ट होने पर ये एकांतप्रिय हो जाते हैं। एकांत में
उदास रहते हुए भी जब ये लोगों के बीच रहते हैं तो प्रसन्नचित्त व हंसते रहते हैं।
इनका वैवाहिक जीवन सफल नहीं होता। ये लोग विपरीत लिंगियों से मित्रता
करना पसंद करते हैं तथा अध्ययनप्रिय भी होते हैं। ये प्रायः लेखक, गणितज्ञ,
ज्योतिषी, दार्शनिक, प्रोफेसर या आविष्कारक होते हैं। इनको वायु सम्बन्धी रोग
होने की पूर्ण सम्भावना होती है। मकर राशि की तुलना में कुम्भ राशि वालों में
आध्यात्मिक प्रगति की सम्भावना अधिक होती है। क्योंकि इनका राशीश शनि-
जो आध्यात्मिकता का कारक भी होता है-कुम्भ राशि में अपनी मूल त्रिकोण
स्थिति में होता है। अत: अपनी दूसरी राशि मकर की अपेक्षा यहां विशेष प्रभाव
देता है। शनि कुंडली में अशुभ हो तो जातक को रक्तचाप, फेफड़े, रक्त संबंधी रोग
तथा नेत्र रोग भी सम्भावित होते हैं। इन लोगों की 'हाय' भी प्राय: फलित होती है।